विधायक गुरवीर बराड़ का जबरदस्त स्वागत! संगठन से जुड़े नेताओं ने भीड़ जुटाकर दिखाई ताकत ? पूर्व विधायक कासनिया की अनुपस्थिति बनी चर्चा का विषय ?

सूरतगढ़। सादुलशहर से भाजपा विधायक गुरवीर बराड़ शनिवार को सूरतगढ़ दौरे पर रहे। जहाँ उन्होंने खेजड़ी मंदिर में दर्शन कर कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया।..

सूरतगढ़। सादुलशहर से भाजपा विधायक गुरवीर बराड़ शनिवार को सूरतगढ़ दौरे पर रहे। जहाँ उन्होंने खेजड़ी मंदिर में दर्शन कर कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया। विधायक बराड़ शाम करीब 5:45 बजे हनुमान खेजड़ी मंदिर पहुंचे जहाँ पूर्व विधायक अशोक नागपाल, नगरमंडल अध्यक्ष गौरव बलाना, सुरेश मिश्रा, भाजपा नेता सुरेंद्र सिंह राठौड़ आदि ने विधायक की आगवानी की। इस दौरान सैकड़ो की संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं ने गुरवीर बराड़ जिंदाबाद के नारे लगाए। इसके बाद विधायक गुरवीर बराड खेजड़ी मंदिर में पहुंचे जहाँ जिला प्रमुख कविता रैगर, पूर्व पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा सहित महिलाओं में विधायक का स्वागत किया। मंदिर में विधायक ने बालाजी के दर्शन किये। इस मौके पर मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष नरेंद्र राठी और समिति सदस्यों ने बालाजी का चित्र भेंट कर विधायक का सम्मान किया। 

              देवदर्शन कार्यक्रम के बाद मंदिर प्रांगण में विधायक के विधिवत स्वागत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें सर्वप्रथम पूर्व विधायक अशोक नागपाल, पूर्व नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, पूर्व पार्षद सुरेंद्र राठौड़ ने विधायक का बुके भैंट कर स्वागत किया। इसके बाद नगरमंडल की तरफ से अध्यक्ष गौरव बलाना, महामंत्री अजय सिसोदिया, अंकुर लड़ोईया, मंत्री रीना स्वामी, आकाशदीप बंसल सहित समस्त कार्यकारिणी ने विधायक का विशाल माला पहनाकर अभिनंदन किया। भाजपा की महिला नेताओं जिला प्रमुख कविता रेगर, जिला उपाध्यक्ष आरती शर्मा आदि ने भी विधायक को पुष्प भैंट कर स्वागत किया। बाद में स्वागत की कड़ी में भाजपा के सभी मंडलों, व्यापार मंडल, श्री हनुमान खेजड़ी मंदिर प्रबंध समिति सहित संस्थाओं की तरफ से विधायक का स्वागत सम्मान किया गया।

              इस अवसर पर विधायक विधायक गुरवीर सिंह बराड़ ने सभा को संबोधित करते हुए अपने दादा के समय से सूरतगढ़ के साथ संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने यहां के मुद्दों और समस्याओं को लेकर हर संभव प्रयास का भरोसा दिलाया। अपने संबोधन में बराड़ ने सूरतगढ़ की राजनीति से जुड़े सहयोगियों का भी जिक्र किया। विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल द्वारा क्षेत्र में किये गए कार्यों की जानकारी भी दी। विधायक बराड़ ने कार्यकर्ताओं को पार्टी हित में काम करने और सरकार की योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने का आह्वान किया। 

कार्यक्रम में जुटी अच्छी खासी भीड़, पार्टी के नए-पुराने कार्यकर्ता आये एक साथ

पार्टी कोई भी हो आमतौर पर चुनावों के समय राजनीतिक मंच सजते हैं। परन्तु विधायक गुरवीर बराड़ के स्वागत के बहाने आयोजित कार्यक्रम में जिस तरह से भाजपा नेता और कार्यकर्ता जुटे वह वाकई हैरान करने वाला था। भाजपा नगरमंडल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में संगठन से जुड़े नेता और कार्यकर्ताओं के अलावा अच्छी खासी संख्या में भीड़ भी उमड़ी। विधायक के स्वागत कार्यक्रम में सूरतगढ़ ही नहीं बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की बड़ी संख्या में पहुंचे। खेजड़ी मंदिर पर आयोजित इस कार्यक्रम को देखकर साफ लग रहा था कि अध्यक्ष गौरव बलाना, महामंत्री अजय सिसोदिया और संयोजक सुरेन्द्र राठौड़ की टीम ने कार्यक्रम के लिए कड़ी मेहनत की है। 

पूर्व विधायक कासनिया और उनके पुत्र की अनुपस्थिति बनी चर्चा का विषय

विधायक बराड़ के स्वागत कार्यक्रम में जहाँ भाजपा के सभी बड़े नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे वहीं पार्टी के दिग्गज नेता रामप्रताप कासनिया और उनके पुत्र की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बन गई। इससे पहले कार्यक्रम को लेकर शहर में लगाये गये सैकड़ो होर्डिंग/पोस्टर में से एक में भी पूर्व विधायक और उनके पुत्र की फोटो नहीं थी। जिसकी चर्चा कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही पूरे शहर भर में थी। लेकिन मुख्य कार्यक्रम में भी पूर्व विधायक और उनके पुत्र की अनुपस्थिति ने चर्चाओं का माहौल गर्म कर दिया है। कुछ लोगों का कहना है कि पूर्व विधायक जयपुर गए हुए थे इसलिये वे कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। लेकिन यह पूरा सच नहीं है क्यूंकि विधायक की अनुपस्थिति में उनके पुत्र संदीप कासनिया को कार्यक्रम में होना चाहिए था।

वैसे यहां देखने वाली बात यह भी है कि केवल कासनिया और उनके पुत्र ही नहीं बल्कि कासनिया खेमे के खास नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी पूरे कार्यक्रम से दूर रखा गया। जिससे यह साफ इशारा मिलता है कि कार्यक्रम में जानबूझकर कासनिया गुट की अनदेखी की गई।    

कासनिया के विरोधियों ने दिखाई ताकत ! भाजपा में गुटबाजी पर लगी मोहर

भाजपा में लंबे समय से कासनिया से वरिष्ठ भाजपा नेताओं की नाराजगी की खबरें आ रही थी। लेकिन यह पहला अवसर है ज़ब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कासनिया की छाया से निकल कर अपने स्तर पर ना केवल भीड़ जुटाई बल्कि पार्टी के लगभग सभी सक्रिय नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर ला खड़ा किया। कार्यक्रम के दौरान भाजपा के लगभग सभी मंडलों के पदाधिकारी और पार्टी से जुड़े लगभग सभी पुराने और नए नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे। इतनी बड़ी संख्या में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक मंच पर होना कहीं ना कहीं इस बात का इशारा है कि पार्टी का एक बड़ा धड़ा जो कासनिया के झंडे तले खड़ा रहने में खुद को असहज महसूस कर रहा था, उसने एक नई राह पर चलने का फैसला कर लिया है। एक तरह से कहा जाये तो विधायक गुरवीर बराड़ के स्वागत के बहाने विपक्षी धड़े ने कासनिया को अपनी ताकत दिखाने के लिए शक्ति प्रदर्शन किया है। इसी वजह से ही कासनिया और उनके समर्थकों को जानबूझकर कार्यक्रम से दूर रखा गया।

पार्टी में गुटबाजी के लिए कासनिया खुद जिम्मेदार !

द्वापर युग में जिस तरह से धृतराष्ट्र का पुत्र मोह महाभारत का कारण बना उसी तरह से स्थानीय भाजपा में चल रही महाभारत की बड़ी वजह कासनिया का पुत्र मोह ही है। क्योंकि आज कासनिया के विरोध में जो नेता खड़े दिखाई दे रहे उनमे से अधिकांश वरिष्ठ नेता पिछले डेढ़ दशक से कासनिया के साथ थे। कासनिया के 2008 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद और 2013 में कासनिया की टिकट कटने पर भी ये नेता कासनिया के खेमे में बने रहे। यही नहीं 2018 में इन्ही नेताओं के समर्थन से कासनिया ने जीत हासिल की और 2023 तक विपक्षी पार्टी के विधायक के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया। साफ है कि कासनिया के प्रति इन वरिष्ठ नेताओं की निष्ठा थी। लेकिन 2023 के चुनाव में हारने के बावजूद ज़ब पहली बार कासनिया सत्ता का केंद्र बने तो अचानक कासनिया अपनी कही से फिर गए। पिछले 15 सालों से अपने पुत्र को पानी पी-पीकर कोसने और अपना राजनितिक उत्तराधिकारी नहीं बनाने का वादा करने वाले कासनिया धृतराष्ट्र बन गए और उन्होंने अपने पुत्र को पार्टी और सत्ता की चाबी सौंप दी। जिससे पहली बार कासनिया को लेकर वरिष्ठ नेताओं असंतोष नज़र आया। 

              इसके बाद कासनिया ने ज़ब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए ओम कालवा का निलंबन रद्द करवा चेयरमैन बनाया तब भी पार्टी में कुछ लोग कासनिया के फैसले से नाखुश थे। कालवा के दूसरी बार निलंबन के बाद अधिकांश नेताओं ने पार्टी के पुराने कार्यकर्ता जगदीश मेघवाल को अध्यक्ष मनोनीत करवाने की इच्छा जाहिर की। लेकिन कासनिया ने वरिष्ठ नेताओं की सलाह को दरकिनार कर कालवा को अध्यक्षी सौंप दी। थोड़े ही समय के बाद ज़ब कालवा ने बोर्ड बैठक में कासनिया के स्कूल को नई धानमंडी और हाउसिंग बोर्ड के स्थित चार बीघा बेशकीमती जमीन देने का आदेश पारित करवा दिया। जिससे कासनिया और कालवा के बीच अध्यक्ष बनने को लेकर हुई डील भी खुलकर सामने आ गई। इस प्रकरण ने कासनिया की ईमानदार नेता की छवि का सच आम जनता और पार्टी नेताओं के बीच खुलकर आ गया। 

         उधर बाद में भी जमीन घोटालों और अतिक्रमणो में पूर्व विधायक के पुत्र का नाम आने से भी पार्टी की लगातार किरकिरी हो रही थी, लेकिन कासनिया पुत्र मोह में आँखें मुंदे रहे। वरिष्ठ नेताओं की यह नाराजगी उस समय चरम पर पहुंच गई जब पिछले साल ज़ब नगरपालिका के वार्डों के परिसीमन का मौका आया। कासनिया ने एक बार फिर वरिष्ठ नेताओं से सलाह किए बगैर वार्डों का मनमाफिक परिसीमन कर दिया। जिसके बाद जिलाध्यक्ष शरणपाल सिंह मान को हस्तक्षेप कर परिसीमन में बदलाव करवाना पड़ा। कासनिया के खिलाफ विपक्षी गुट की यह संभवत पहली जीत थी, जिसने विपक्षी धड़े को कासनिया के सामने खड़े होने का हौसला दिया। इसी हौसले का नतीजा है विधायक गुरवीर बराड़ के स्वागत के लिए शनिवार को किया गया विरोधी धड़े का शक्ति प्रदर्शन।

पार्टी में क्या होगी भविष्य की राह ? 

विधायक गुरवीर सिंह बराड़ के कार्यक्रम से यह तो साफ हो चुका है कि वर्तमान भाजपा में दो धाराएं बन चुकी है। जहाँ फिलहाल सत्ता की चाबी पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया और संगठन का समर्थन दूसरे खेमें के वरिष्ठ नेताओं के पास है। क्यूंकि रामप्रताप कासनिया विधायक नहीं है इस वजह से प्रशासन में संगठन के मुखिया जिलाध्यक्ष शरणपाल सिंह मान का भी बराबर का सा दखल है। ऐसे में विपक्षी वरिष्ठ नेताओं का संगठन कासनिया के लिए आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।

वैसे रामप्रताप कासनिया को राजनीति का लंबा अनुभव है। वे ये जान भी रहे होंगे कि पुत्र पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों से उनकी राजनीतिक जमीन लगातार कमजोर हो रही है तो पार्टी को भी नुकसान हो रहा है। जिसका खामियाजा आगामी चुनाव में कासनिया और पार्टी दोनों को भुगतना पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि खुद कासनिया और उनके पुत्र संदीप कासनिया आगे बढ़कर स्थिति को संभाले और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी भी दूर करें।

कासनिया अगर सबक लेना चाहे तो कांग्रेस के पिछले कार्यकाल से ले सकते है, जिसमे अतिक्रमणों और भ्रष्टाचार के आरोपों ने राजस्थान के सबसे शक्तिशाली जाट परिवारों में से एक मील परिवार की राजनीति को लील लिया।

राजेंद्र कुमार पटावरी, अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़

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