वो मुतमुईन है कि पत्थर पिघल नहीं सकता।
और में बेक़रार हूँ आवाज़ में असर के लिए।।
सूरतगढ़। नगरपालिका में चुने हुए पार्षदों के लिए आज उनके जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा की घड़ी है। आज इस बात का फैसला होने वाला है कि आपके द्वारा सदन में भेजे गए चौकीदार, चौकीदार ही है या फिर चोर है ? भाजपा नेता संदीप कासनिया को भूमि आवंटन के प्रस्ताव पर वोटिंग के साथ ही चौकीदारों/चोरों के चेहरे का नकाब उतर जायेंगे। पूरे शहर का आमजन और राजनीतिक सुचिता के पक्षधर लोग इस प्रस्ताव को गिराना चाहते हैं। इसलिये सबकी नज़र नगरपालिका बोर्ड के कांग्रेस,भाजपा, माकपा सहित पार्टियों व निर्दलीय पार्षदों पर है। देखना है कि चांदी के चंद टुकड़ों पर अपना ईमान बेचकर कितने पार्षद अपनी नंगई का भोंडा प्रदर्शन भी करते है।
इस मामले कांग्रेस विधायक डूंगरराम गेदर नें प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रस्ताव के विरोध की घोषणा कर दी है। अपैक्स कोर्ट के आदेशों के बावजूद भाजपा बोर्ड द्वारा प्रस्ताव लाने से भाजपा की भी इस मामले में लगातार किरकीरी हो रही थी। जिसके बाद भाजपा नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा नें शहर हित में प्रस्ताव की विरोध की घोषणा की है। हालांकि भाजपा नगरमंडल की यह घोषणा महज एक राजनीतिक स्टंट है या फिर पार्टी का रियल स्टेण्ड है। इसका पता आज होने वाली बैठक में लग जायेगा। भाजपा के कितने पार्षद बोर्ड बैठक में प्रस्ताव का विरोध करते हैं यह बात ही नगरमंडल की घोषणा की सच्चाई पर मोहर लगाएगी। भाजपा नगर अध्यक्ष ने जब प्रस्ताव के विरोध की घोषणा की थी उस समय पार्टी जिला अध्यक्ष शरणपाल सिंह मान के अलावा सभी प्रमुख नेता और कई पार्षद भी शामिल थे। इसका सीधा सा मतलब लगाया जा सकता है कि कहीं ना प्रस्ताव के विरोध की घोषणा को जिलाध्यक्ष का भी समर्थन था। ऐसे में अगर जिलाध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष राजनितिक स्टंट से इतर दिल से प्रस्ताव के विरोध में है तों भाजपा के कई पार्षद आज बोर्ड बैठक में प्रस्ताव के विरोध में उतर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो जन भावनाओं के खिलाफ लाया गया यह प्रस्ताव कभी भी सफल नहीं हो सकता। इसलिये आज फैसला पार्षदों के ही नहीं शहर के भाजपा मंडल के पदाधिकारीयों और नेताओं के ईमान का भी है।
आज की बोर्ड बैठक में माकपा,जनता मोर्चा और निर्दलीय पार्षदों को भी अग्नि परीक्षा से गुजरना है । क्यूंकि भाजपा और कांग्रेस से अलग किसी वार्ड में कोई भी निर्दलीय प्रत्याशी जीतता है तो उसमे सबसे ज्यादा योगदान उसके व्यक्तित्व का होता है। आम जनता इमानदारी व दूसरे गुणो से प्रभावित होकर ही मुख्य पार्टियों को छोड़कर उसको वोट करती है। पार्टियों से जीते हुए पार्षदों पर पार्टी का दबाब हो सकता है। लेकिन निर्दलीय पार्षद इन सभी दबाबों से मुक्त होते हैं। यहां यह भी कहना होगा कि सबसे ज्यादा बिकने का खतरा भी इन्ही पार्षदों का होता है। इसलिये आज इन पार्षदों के स्टैंड पर सबकी खास नजर रहने वाली है। आज यह तय हो जाएगा की शहर की जनता द्वारा चुने गए माकपा, मोर्चा और निर्दलीय पार्षदों में कितने बिकाऊ और कितने टिकाऊ है ?
इस पुरे मामले में सदन में प्रमुख विपक्षी कांग्रेस पार्टी की बात करें तों आज की बैठक में लाये जा रहे प्रस्ताव को गिराने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी कांग्रेस और सूरतगढ़ से कांग्रेस विधायक डूंगरराम गेदर की है। गेदर के मैनेजमेंट की परीक्षा भी इस बात से आज होने वाली है कि वह पार्टी के पार्षदों को कितना एकजुट रख पाते हैं। क्यूंकि सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रस्ताव का विरोध करने से वे शहर के प्रति अपने दायित्व से बच नहीं सकते। उन्हें अपनी ढुलमुल नेता की छवि को बचाने के लिए अंग्रेजी कहावत ‘नो स्टोन अनटर्न्ड’ जैसे प्रयास करने होंगे। अगर वह इस प्रस्ताव को गिराने में सफल रहते हैं तो वह पहली अग्नि परीक्षा में सफल माने जायेंगे। वरना उनकी छवि में डेंट लगने की शुरुआत भी आज होगी।
कुल मिलाकर इस प्रस्ताव का शहर की जनता तो विरोध कर चुकी है। अब सबकी नजर शहर के राजनेताओं और पार्षदों पर है। इस प्रस्ताव से दूरी बनाकर कोई अगर यह सोच रहा है कि वह अपने आप को पाक साफ साबित कर सकता है तो यह उनका भरम है। क्योंकि यह पब्लिक है सब जानती है। ऐसे लोगों के लिए ही महाकवि ‘रामधारी सिंह दिनकर‘ नें कहा है कि……
समर शेष है पाप का भागी नहीं केवल ब्याध।
जो तठस्थ है समय लिखेगा उनका भी अपराध।।
– राजेंद्र कुमार पटावरी,अध्यक्ष,प्रेस क्लब, सूरतगढ़।





















































































































































































































































