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50 करोड़ से अधिक की भूमि की लूट की तैयारी, जनप्रतिनिधियों नें किया ईमान का सौदा ?

बीएसएनएल टावर के पीछे 100 फुट रोड़ और धानमंडी विश्राम गृह के बीच स्थित इस जमीन की कीमत 50 करोड़ से भी ज्यादा है।

सूरतगढ़। कहते हैं कि राजनीति में ना तो कोई स्थाई दुश्मन होता है ना दोस्त। सूरतगढ़ की राजनीति में इन दिनों कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। शहर के नेता चाहे वे देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के हो या फिर राजनीति में सुचिता की बात करने वाली भाजपा के, हालात ये है कि ये नेता स्वार्थ पूर्ति के लिए कभी भी पाला बदलने को तैयार बैठे है। शहर में कम्युनिज्म के झंडा बरदारों और मोर्चो के जरिये भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने का पाखंड करने वालों के हालात और भी बुरे है। इन दिनों इन पार्टियों के छोटे-मोटे कार्यकर्ता, पार्षद और बड़े नेता ही नहीं, स्वंयभू मुखिया भी जरा से फायदे के लिए पूरी बेशर्मी से राजनीतिक प्रतिद्वंदियों का चरण चुंबन करते नज़र आ रहें है। 

                      ऐसा ही एक मामला इन दिनों चर्चा में  है जिसने ईमानदार नेताओं के चेहरों को बेनकाब करके रख दिया है। मामला भाजपा नेता संदीप कासनिया को स्कूल के नाम पर भूमि के आवंटन प्रस्ताव से जुड़ा है। बीएसएनएल टावर के पीछे 100 फुट रोड़ और धानमंडी विश्राम गृह के बीच स्थित इस जमीन की कीमत 50 करोड़ से भी ज्यादा है। इस जमीन को भाजपा नेता को सौंपने के लिए चेयरमैन ओम कालवा नें 28 अगस्त को बोर्ड की बैठक बुलाई है। हालांकि इस जमीन के आवंटन का प्रयास पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया पिछले 2 दशक कर रहे थे। लेकिन नगरपालिका बोर्ड से लेकर सुप्रीम कोर्ट नें आवंटन प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया है। 

                यही नहीं खुद वर्तमान चेयरमैन कालवा एम्पावर्ड कमेटी की बैठक कर इस जमीन को कोचिंग व अन्य शेक्षणिक संस्थानो के लिए ऑक्शन के जरिए आवंटन का प्रस्ताव सरकार को भेज चुके है। लेकिन कासनिया का मोह इस जमीन से नहीं छूट रहा है इसलिए कालवा को भाजपा में शामिल कर एक बार फिर इस जमीन को हड़पने के प्रयास किया जा रहे हैं। इसके लिए कालवा द्वारा 28 अगस्त को आनंद फानन में बोर्ड की बैठक बुलाकर आवंटन प्रस्ताव को पास करने तैयारी की जा रही है।

प्रस्ताव पास करवाने के लिए सौदेबाज़ी, नेताओं और पार्षदों नें बेचा ईमान

आगामी 28 अगस्त को होने वाली बोर्ड बैठक कासनिया के लिए इस जमीन को पाने का आखिरी मौका है। यही वजह है भाजपा नेता संदीप कासनिया नें प्रस्ताव को पास करवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। इसके लिए साम, दाम,दंड, अर्थ और भेद की नीति पर चलते हुए पार्षदों से हर तरह की सौदेबाजी की जा रही है। बताया जा रहा है कि कासनिया प्रस्ताव को पास करवाने के लिए 31 पार्षदों का समर्थन जुटा चुके हैं। साफ है इस सौदेबाजी में भाजपा ही नहीं व कांग्रेस के पार्षदों ने भी अपना ईमान गिरवी रख दिया है। बताया जा रहा कि कुछ निर्दलीयों, कम्युनिज्म के प्रहरी और मोर्चो के अगवा पार्षदों ने भी इस मामले में जर फेंक दी है। 

                      कहा जा रहा है कासनिया नें कांग्रेस के एक बड़बोले पार्षद को ठेकेदारी के बकाया बिल पास करने और वार्ड में तैयारी कर रहे एक युवा नेता की जगह भाजपा का टिकट देने का सौदा किया है। वहीं कांग्रेस के एक चर्चित अल्पसंख्यक पार्षद को भी टिकट का झुनझुना दिया गया है। इस मामले में कांग्रेस में मौका परस्त और किंग मेकर कहे जाने वाले पार्षदों के एक गुट की भी प्रस्ताव के समर्थन में बेटिंग की चर्चा है। हालांकि यह समर्थन अवैध कॉलोनीयों को बचाने सहित किन शर्तों पर हुआ है यह अभी सामने नहीं आया है। लेकिन यह बात सब जानते है भैडों को हाँकने में इस गुट को लम्बा तजुर्बा है।

कालवा के भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार ताल ठोकने वाले कांग्रेस के एक पूर्व चेयरमैन भी इस भयंकर भ्रष्टाचार के समर्थक बताए जा रहे हैं। पूर्व चेयरमैन के अलावा कांग्रेस के एक दो अन्य पार्षद कम बड़े नेताओं को भी मुकदमे वापस लेने के आश्वासन की बात सामने आ रही है। ज़ब बोर्ड में बहुमत वाली राष्ट्रीय पार्टी के पार्षदों का यह हाल है तो ऐसे में कम्युनिज्म व मोर्चो की राजनीति के नाम पर भ्रष्टाचार का नंगा नाच व शहर का बड़ा गर्क होते देखने वाले पार्षदों के समर्थन की शर्तो पर तो बात करना ही बेमानी होगा। शहर की जनता की उम्मीदों का मजाक बनाते इन जनप्रतिनिधियों के लिए ही शायद किसी कवि नें यह पंक्तियां लिखी है

कोहनी पर टिके हुए लोग,टुकड़ों पर बिके हुए लोग।

करते हैं बरगद की बातें, ये गमलों में उगे हुए लोग।।

सुचिता की राजनीति के ध्वज वाहकों को मारा लकवा !

यहां पर सवाल केवल कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों से ही नहीं है। सवाल सुचिता की राजनीति बात करने वाले भाजपा के पार्षदों पर भी है। आपके द्वारा चुने गए कथित राष्ट्रीय पार्टी के ध्वजवाहकों और सोशल मीडिया पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध के लंबी लंबी हांकने वाले वीरों को शहर की शहर की इस बेकीमती भूमि की लूट पर लकवा मार गया है। और तो और कांग्रेस राज में कालवा के भ्रष्टाचार पर बात-बात में कथक करने वाले सूरमा भी सत्ता के आगे लमलेट हो चुके हैं।

क्या है पूरा मामला ?

भाजपा के दिग्गज नेता रामप्रताप कासनिया के पुत्र और पीलीबंगा के जाखड़ावाली स्थित विवेकानंद पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष संदीप कासनिया ने सैम में स्कूल के डूब जाने का हवाला देते हुए 1997 में हनुमानगढ़ मंडी समिति से सूरतगढ़ में भूमि आवंटन की मांग की थी। इस पर हनुमानगढ़ मंडी समिति ने सूरतगढ़ के सेक्टर-3 में स्कूल को भूमि आवंटन कर दी। लेकिन कासनिया के इस भूमि को अनुपयुक्त माननें पर समिति नें फिर से सेक्टर -11A में 88450 स्क्वायर फीट भूमि आवंटन की। लेकिन भूमि पर कब्जा होना बताते हुए कासनिया ने यह भूमि भी नहीं ली।

इसके बाद रामप्रताप कासनिया द्वारा विधायक बनने के बाद 7 जनवरी 2005 को नगरपालिका से नई धान मंडी और हाउसिंग बोर्ड के बीच स्थित बेशकीमती व्यावसायिक भूमि स्कूल के लिए आवंटन की मांग की गई। लेकिन 19 जून 2005 को हुई नगरपालिका की बैठक में बोर्ड के सदस्यों ने इस भूमि को धान मंडी के विस्तार व सामुदायिक सुविधाओं के लिए आरक्षित होने का हवाला देकर बहुमत से प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

बताया जाता है कि इसके बाद कासनिया ने तत्कालीक भाजपा सरकार में अपने रसूख का फायदा उठाकर बोर्ड के निर्णय के विरुद्ध तात्कालिक मंत्री प्रताप सिंह सिंघवी के समक्ष निगरानी याचिका लगाकर भूमि आवंटन का आदेश करवा लिया। इस आवंटन के खिलाफ किशन लाल व अन्य द्वारा याचिका लगाने पर पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 27 मार्च 2015 को निगरानी याचिका पर मंत्री के भूमि आवंटन के निर्णय को अंतिम रूप से निरस्त कर दिया। जिसके साथ ही कासनिया को इस भूमि के आवंटन का प्रकरण ही समाप्त हो गया।

मजे की बात यह है कि इसके बाद खुद कांग्रेस चेयरमैन रहते हुए मास्टर ओमप्रकाश कालवा की अध्यक्षता वाली एंपावर्ड कमेटी उक्त भूमि को लाइब्रेरी व कोचिंग संस्थानों के लिए ऑक्शन के जरिये आवंटन का निर्णय कर चुकी है । यही नहीं इसके बाद तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा इस भूमि का प्लान काटकर प्रस्ताव नगर नियोजन विभाग को भेजा जा चुका है। जिस पर अनुमोदन की कार्रवाई चल रही है।

इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण बात यह भी है कि जिस स्कूल की भूमि के सैम में डूबने की बात कहकर आवंटन की मांग अब तक की जा रही है उसी जगह पर आज भी स्कूल का संचालन हो रहा है।

पूर्व विधायक गंगाजल मील के आरोप हो रहे सच !

पूर्व विधायक गंगाजल मील और हनुमान मील नें एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि स्कूल की जमीन लेने के लिए ही भाजपा नेता रामप्रताप कासनिया ने भ्रष्टाचार के आरोपी ओम कालवा को भाजपा में शामिल किया है। पूर्व विधायक मील का यह आरोप अब साबित होता दिख रहा है। क्योंकि चेयरमैन बनते ही ओम कालवा नें तमाम नियमों और नैतिकताओं को धता बताकर जमीन आवंटन के लिए आनन फ़ानन में बोर्ड की बैठक बुलाई हैं।

साफ है भाजपा नेता और कालवा के बीच जो डील हुई थी, चेयरमैन ओम कालवा नें उस डील के पहलें पार्ट के एक्जीक्यूशन में जुटे हुए है।

अब विधायक डूंगरराम गेदर पर टिकी नजरें 

इस पूरे मामले में अब नजर विधायक डूंगरराम गेदर के स्टेण्ड पर है।  विधायक गेदर के पिछले आठ माह के कार्यकाल में अब तक भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे हैं। लेकिन नगरपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर उनकी चुप्पी सवालों के घेरे में है। विधानसभा में उन्होंने चेयरमैन कालवा की बहाली के खिलाफ आवाज तो उठाई लेकिन ये कौन नहीं जानता कि वो आवाज बुलंद आवाज नहीं थी। नगरपालिका में भ्रष्टाचार के मामलों पर गेदर लगातार खामोश रहे है।

विधायक गेदर की ये चुप्पी कहीं ना कहीं चेयरमैन कालवा के साथ उनके गठबंधन की चर्चाओं को बल दे रही है। अब कालवा की अगुवाई में शहर की 50 करोड रुपए की भूमि की बंदरबांट की कोशिशें को ही ले। मामला चर्चा में आने के बावजूद गेदर मूकदर्शक बने हुए हैं। उनकी पार्टी के पार्षद और जनप्रतिनिधि राजनीति की मंडी में बिकने को तैयार हैं। लेकिन विधायक गेदर की तरफ से अब तक कोई ऐसा इशारा नहीं मिल रहा है कि वे और उनकी पार्टी इस भ्रष्टाचार के खिलाफ है।

      50000 से अधिक वोटो से जीताकर गेदर को क्षेत्र की जनता ने इसलिए नहीं भेजा था कि वे गजनीयों को इस शहर को लूटने की खुली छूट दे दे। गेदर के लिए यह आखरी मौका है कि वे शहर की 50 करोड़ से अधिक की संपत्ति की लूट के प्रयास को विफल करें। वैसे ये गेदर के मैनेजमेंट की परीक्षा भी है कि वे किस तरह से पार्टी को एकजुट कर अपना रणनीतिक कौशल साबित करते हैं।

बहरहाल देखना यह भी है कि इस मामले में आपके द्वारा नगरपालिका बोर्ड भेजें गए चौकीदार शहर की सम्पति की लूट को रोकते है या फिर चोरों से मिलकर 50 करोड़ की इस लूट को अंजाम देते है। इन परिस्थितियों में प्रसिद्ध कवि दुष्यंत की ये प्रसिद्ध पंक्तियां याद आ रही है।

लोग हाथों में लिए बैठे हैं अपने पिंजरे।

आज सैयाद को महफिल में बुला लो यारों।।

रहनुमाओं की अदा पर फिदा है ये दुनिया।

इस बहकती हुई दुनिया को संभालो यारो।।

– राजेंद्र कुमार पटावरी, अध्यक्ष- प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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