जैन संत गणिवर्य श्री जयकीर्ति महाराज का पारणोत्सव,115 दिन के चातुर्मास में की 83 दिन निराहार तपस्या

चातुर्मास के दौरान जैन सन्त श्रावक समाज को तप के लिये प्रेरित कर रहे है वहीं शहर में चातुर्मास कर रहे गणि श्री जयकीर्ति विजय जी महाराज कठोर तप आराधना कर उदाहरण पेश कर रहे है। चातुर्मास के 115 दिनों के प्रवास में गणि वर्य अब तक 83 दिन निराहार तपस्या कर चुके है।

सूरतगढ़। चातुर्मास के दौरान जैन सन्त श्रावक समाज को तप के लिये प्रेरित कर रहे है वहीं शहर में चातुर्मास कर रहे गणि श्री जयकीर्ति विजय जी महाराज कठोर तप आराधना कर उदाहरण पेश कर रहे है। चातुर्मास के 115 दिनों के प्रवास में गणि वर्य अब तक 83 दिन निराहार तपस्या कर चुके है। इसी के साथ आज गणिवर्य श्री जयकीर्ति महाराज ने अठाई तपस्या पूरी की। इसी के उपलक्ष्य में गणिवर्य का पारणोत्सव श्री आत्म वल्लभ आराधना भवन में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पूज्य आचार्य श्री जयानंद सुरीश्वर जी महाराज के मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम आरंभ हुआ। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुनि दिव्यांश विजय जी महाराज ने कहा की हम रंग और राग का मेला देखने जाते हैं लेकिन आज जो मेला लगा है वह तप और त्याग का मेला है और जब त्याग आता है तो वैराग आता है और वैराग के आने से वैराग्य उत्पन्न होता है और वैराग्य से वीतराग की साधना के अवसर मिलते हैं।

गणिवर्य श्री जयकीर्ति महाराज ने गुरु को समर्पित की तपस्या

जय कीर्ति विजय जी महाराज साहब ने अपनी तपस्या को गुरु देव को समर्पित करते हुए कहा की गुरु आशीष और परमात्मा कृपा से ही सब कार्य संपन्न होते हैं और इसी सूत्र को लेकर इस चातुर्मास में प्रत्येक शुभ कार्य निर्विघ्न रूप से पूर्ण हुआ है। गुरु ही तप है गुरु ही शक्ति है।

भजनों के माध्यम से की गई तप की अनुमोदना

पारणोंत्सव के दौरान प्रस्तुति देती कन्या मंडल की बालिकाएं
कार्यक्रम में उपस्थित जैन समुदाय के लोग

तप अभिनंदन कार्यक्रम में श्रीमती तारा देवी बांठिया, ज्योति डागा, सुरेन्द्र चोपड़ा, मंजू चोपड़ा, टीना रांका, भूमिका सेठिया,अभय चोपड़ा आदि ने अपने भावों और भजनों के माध्यम से तप की अनुमोदना की। श्री आत्म वल्लभ महिला मंडल और श्री आत्म वल्लभ कन्या मंडल की सदस्यों ने भी भजन प्रस्तुत किए। प्रवक्ता संजय बैद ने अपने संबोधन में कहा की जय कीर्ति जी ने 115 दिन के प्रवास में 83 दिन निराहार रहकर जो कठोर तप किया है उसकी अनुमोदना करके हमें गौरव का अनुभव हो रहा है। उन्होंने दूसरों को तपस्या के लिए ख़ुद तप करके प्रेरणा दी है ऐसा उदाहरण बहुत कम देखने को मिलता है। बाहर से आए हुए गुरु भक्तों का श्री संघ के टेकचंद हेमंत कुमार डागा परिवार की ओर से बहुमान किया गया।

आचार्य श्री की केसर युक्त अक्षत से सभी संतों और जैन समाज की ओर से बधावना की गई जिसकी बोली का लाभ अशोक कुमार, अरिहंत कुमार, ज्योति डागा ने प्राप्त किया।

सेठिया परिवार ने लिया गणिवर्य के पारणा का लाभ

गणिवर्य श्रीजयकीर्ति महाराज के पारने का लाभ श्रीमती इंदिरा देवी, मनोज कुमार, सुशील और माणक सेठिया परिवार ने प्राप्त किया। सभी मुनि आचार्य श्री की अगुवाई में श्री संघ को साथ लेकर गाजे बाजे के साथ सेठिया निवास पर पहुंचे जहां गोचरी बोहरा कर जय कीर्ति विजय जी का पारणा करवाया गया। उसके पश्चात श्री विजय वल्लभ जैन धर्मशाला में श्री संघ की ओर से साधार्मिक वात्सल्य रखा गया जिसमें जिसमें उपाध्यक्ष पवन गोलछा,ओम चोपड़ा सहित सभी सदस्यों ने अपनी सेवाएं प्रदान की। दोपहर में श्री मंदिर जी में पंच कल्याण पूजा भी आयोजित की गई।

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