
सूरतगढ़। सूरतगढ़ नगरपालिका में भ्रष्ट और धूर्त अधिकारियों और कर्मचारियों का एक ऐसा कॉक्स बना हुआ है। जो इस व्यवस्था में बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। ज़ब कोई व्यक्ति इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उत्पन्न करता है तो यह पूरा तंत्र उसको निपटाने में लग जाता है। ऐसा ही एक उदाहरण नगरपालिका की सफाई कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष मनोज धौल है। जो नगरपालिका में चल रही ओछी राजनीति का शिकार हो गए।
धौल पिछले काफ़ी समय से सफाई कार्मिकों को दूसरे कार्यों से हटाने की मांग कर रहे थे। जिसके चलते धौल पालिका के भ्रष्ट और धूर्त अधिकारीयों व कर्मचारियों की आंखों की किरकिरी बने हुए थे। धौल को सबक सिखाने के लिए भ्रष्ट तंत्र के हाकीमो ने आखिरकार धौल को निलंबित करवा दिया। सोमवार को युवा पवन चौधरी ने रिलीव होने से पूर्व मनोज धौल को अवकाश स्वीकृति के बिना अनुपस्थित रहने का हवाला देते हुए निलंबित कर दिया। ईओ पवन चौधरी द्वारा जारी निलंबन आदेश में मनोज धौल पर कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की शिकायतें मिलने की बात भी कही गई है।

लेकिन अवकाश स्वीकृति के बिना अनुपस्थित रहने के आरोपों पर धौल का कहना है कि उन्होंने 12 से 20 फ़रवरी के बीच अवकाश लेने की सूचना संबंधित जमादार और नगरपालिका के सफाई निरीक्षक को दे दी थी। उनका कहना है कि उनके छुट्टी के फॉर्म पर जमादार और सहायक सफाई निरीक्षक के सिग्नेचर भी है। इसके अलावा नगरपालिका में सफाई कर्मियों के अवकाश के संबंध जो व्यवस्था है उसके मुताबिक सफाई कर्मचारी सामान्य तौर पर जमादार या सफाई निरीक्षक को ही अवकाश की सूचना देते हैं। जो कि इस मामले में मनोज धौल कर चुके थे। ऐसे में उनका निलंबन साफ तौर पर नगरपालिका के भृष्ठ तंत्र की गंदी राजनीति की ओर इशारा करता है। ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि ज़ब व्यवस्था सुधार की मांग करने वालों पर करवाई होगी तो कोई भी सही बात के लिए आवाज बुलंद क्यों करेगा ?
सफाईकार्मिकों को फिल्ड ड्यूटी में लगाने की जरूरत
भाजपा सरकार ने सफाई कर्मियों को दूसरे कामों से हटा कर सफाई व्यवस्था में लगाने का आदेश जारी कर रखा है तो ऐसे में इस आदेश को धरातल पर लागू करने की जिम्मेदारी भाजपा से जुड़े नेताओं की बनती है ? इस मामले में कार्मिकों की संख्या कम होने का बहाना अक्सर जिम्मेदार अधिकारी बनाते है। लेकिन यह सीधे सीधे उन सफाई कार्मिकों के साथ अन्याय है क्यूंकि एक तरफ जहाँ ये सफाईकर्मी ईमानदारी से अपना काम कर शहर को साफ बनाने में लगे हैं।
वहीं दूसरी ओर अधिकारियों और नेताओं की चापलूसी से या फिर उनका ईमान खरीदकर कुछ झाड़ू की जगह कलम पड़कर भ्रष्टाचार के नए अध्याय लिख रहे हैं।वैसे भी जब पिछले कुछ समय से शहर की सफाई व्यवस्था का भट्टा बैठ चुका है तो बेहद जरूरी है कि नगरपालिका के वातानुकूलित कक्षों में बैठकर भ्रष्टाचार के नये आइकॉन बन रहे सफाई कार्मिकों को फिर से झाडू पकड़ाया जाए जिससे शहर के गली मोहल्लों के साथ-साथ नगरपालिका की गंदगी भी दूर हो सके।
क्या कासनिया और कालवा लेंगे संज्ञान ?
विधानसभा चुनावों के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों में भाजपा प्रत्याशी राम प्रताप कासनिया सत्ता का केंद्र बन चुके हैं। विपक्ष में रहते हुए नगरपालिका के भ्रष्टाचार और कुशासन पर बरसने वाले कासनिया को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए ताकि व्यवस्था परिवर्तन की मांग करने वाले लोगों का हौसला कायम रहे। वैसे अध्यक्ष की कुर्सी पर फिर से काबिज़ होने वाले मास्टर ओमप्रकाश कालवा भी धौल की बहाली करके पुरानी व्यवस्था के खात्मे का इशारा देकर नई राजनीति की शुरुआत कर सकते हैं !























































































































































































































































