बहुचर्चित यूटिलिटी भूखंड घोटाले का पर्दाफाश, जाँच के बाद क्लेक्टर ने पट्टा रद्द करने के दिए आदेश

सूरतगढ़। बसंत विहार कॉलोनी में बहुचर्चित यूटिलिटी भूखंड घोटाले का आखिर पर्दाफाश हो गया है। इस मामले में हमने सबसे पहले संपूर्ण दस्तावेजों के साथ..

यूटिलिटी क़ो इन्फॉर्मल सेक्टर बनाकर जारी हुआ पट्टा

सूरतगढ़। बसंत विहार कॉलोनी में बहुचर्चित यूटिलिटी भूखंड घोटाले का आखिर पर्दाफाश हो गया है। इस मामले में हमने सबसे पहले संपूर्ण दस्तावेजों के साथ विस्तृत रिपोर्ट ‘खबर पॉलिटिक्स’ पर ही प्रकाशित की थी। जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया था। इस मामले अब करीब 5 माह बाद जिला कलेक्टर मंजू ने पट्टा संख्या -572 क़ो रद्द करने के आदेश दिए हैं। कलेक्टर ने अपने आदेश में नगरपालिका ईओ क़ो पट्टे क़ो रद्द करने की कार्यवाही के लिए लिखा है।

जाँच रिपोर्ट ने नगरपालिका में भ्रष्टाचार के नंगे नाच की खोली पोल

मामले में जांच के बाद कलेक्टर द्वारा जारी आदेश

कलेक्टर ने अपने आदेश में पट्टे को रद्द करने के लिए जिन कारणों का हवाला दिया है वे नगरपालिका में फैले भारी भ्रष्टाचार की पोल खोलने के लिए काफी है। जांच कमेटी के मुताबिक नगरपालिका के भ्रष्ट कर्मचारियों-अधिकारियों ने कॉलोनी के लेआउट प्लान (ब्लू प्रिंट नक्शे में) में अंकित यूटिलिटी भूखंड को पेन से काट दिया और उसकी जगह इनफॉरमल सेक्टर लिख दिया। बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के लेआउट प्लान में बदलाव करना कोई छोटी बात नहीं है। यही नहीं इनफॉरमल सेक्टर में भी नियमानुसार तो छोटे-छोटे कियोस्क काटे जा सकते हैं। लेकिन भ्रष्टाचार की अफीम खाकर बेसुध हुए अधिकारियों ने छोटे छोटे कियोस्क के पट्टे देने की बजाय एकल पट्टा जारी कर दिया।

यह पूरा मामला यह बताने क़ो काफ़ी है कि पालिका के अधिकारियों- कर्मचारियों को जेल जाने का बिल्कुल भी डर नहीं है। साथ ही यह इस बात का संकेत भी है कि कोई भी काम गलत से गलत काम सूरतगढ़ नगरपालिका में संभव है। बशर्ते कि काम करवाने वाला उसकी मुंह मांगी कीमत दे।

क्या था पूरा मामला ?

बसंत विहार कॉलोनी में स्थित पब्लिक यूटिलिटी के लिए आरक्षित विवादित भूखंड
कॉलोनी के ब्लू प्रिंट में यूटिलिटी क़ो पैन से काटकर बनाया इन्फॉर्मल सेक्टर

बसंत विहार कॉलोनी वर्ष 2005 में काटी गई थी। उस समय कॉलोनी के लेआउट प्लान मे कॉलोनी के दक्षिणी पूर्वी कोने पर पब्लिक यूटिलिटी के लिए एक भूखंड आरक्षित रखा गया था। इसी लेआउट प्लान (ब्लूप्रिंट नक्शे) के आधार पर कॉलोनी में भूखंडों के भूखंड बेचे गए थे। तब से कॉलोनी के अप्रत्यक्ष प्रमोटर सुखवंत चावला व अन्य इस खाली भूखंड पर कॉलोनीवासियों क़ो मंदिर निर्माण का झांसा देते आ रहे थे।

इस बीच 8 फ़रवरी क़ो सुखवंत चावला,संदीप डांग, रमनदीप चुघ और विपुल गुप्ता ने इन्फॉर्मल सेक्टर क़ो कागजी प्रमोटरो से खरीदना बताकर अपने नाम रजिस्ट्री करवा ली। साथ ही साथ इन चारों लोगों ने नगरपालिका में उक्त भूखंड के पट्टा बनाने का आवेदन भी कर दिया और पालिका ने भी 22 फ़रवरी क़ो पट्टा जारी कर दिया।

भूखंड का पट्टा बनने से बेखबर जून माह में कॉलोनीवासियों ने ज़ब मंदिर बनाने के लिए बैठक बुलाई तों मामला बिगड गया। क्यूंकि कॉलोनीवासियों के इरादों की भनक लगते ही अगले ही दिन कॉलोनाइजरों ने गुपचुप तरीके से भूखंड क़ो लोहे की चददरों से कवर करना शुरू कर दिया। ज़ब इसकी भनक कॉलोनीवासियों को मिली तो उन्होंने हंगामा खड़ा कर दिया। बाद में इस मामले में कॉलोनी के लोगों ने स्थानीय नगर पालिका से लेकर स्वायत शासन विभाग तक शिकायत की। जिसका नतीजा ये रहा कि जिला कलेक्टर ने एडीएम के निर्देशन में संयुक्त कमेटी द्वारा मामले की जांच करवाई गई और कमेटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए पट्टे क़ो रद्द करने का आदेश जारी किया।

-राजेंद्र कुमार पटावरी, अध्यक्ष -प्रेस क्लब सूरतगढ़

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