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पुराने हाउसिंग बोर्ड में विवादित भूखंड पर फिर अतिक्रमण, अतिक्रमी ने दिनदहाड़े चारदिवारी कर जड़ा ताला, पालिका प्रशासन की चुप्पी पर सवाल ?

मामला शहर के पुराने हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र के वार्ड नंबर-26 का है। जहां पर नगरपालिका प्रशासन ने इसी वर्ष जनवरी माह में मुकेश फ़ौजी नामक व्यक्ति के अतिक्रमण को हटाया था

वार्ड-26 के पुराने हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में विवादित भूखंड पर ताज़ा हुआ अतिक्रमण

सूरतगढ़। शहर में नगरपालिका प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने और भूमाफियाओ द्वारा फिर अतिक्रमण करने का खेल बदस्तूर जारी है। पिछले कुछ सालों से एक के बाद एक ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे है। ताज़ा मामला शहर के पुराने हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र के वार्ड नंबर-26 का है। जहां पर नगरपालिका प्रशासन ने इसी वर्ष जनवरी माह में मुकेश फ़ौजी नामक व्यक्ति के अतिक्रमण को हटाया था। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुए आरोपी द्वारा पालिकाकर्मियों पर हमले के चलते यह मामला काफी चर्चा में रहा था।

लेकिन अब पिछले दिनों इस भूखंड पर फिर से अतिक्रमियों ने चारदिवारी बनाकर भूखंड पर गेट लगाकर ताला जड़ दिया है। अतिक्रमी ने भूखंड पर लगे सरकारी संपत्ति के बोर्ड को भी उखाड़ कर फ़ेंका है। हाउसिंग बोर्ड में क्षेत्र में स्थित इस भूखंड की कीमत लाखों रुपए है।

अतिक्रमियों ने पालिका अमले पर किया था हमला

जनवरी माह में हटाए गए मुकेश स्वामी के अतिक्रमण की फ़ाइल फोटो-1

जनवरी माह में जब शिकायत के बाद नगरपालिका का अतिक्रमणरोधी दस्ता अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंचा था तब अतिक्रमण हटाने के दौरान आरोपी मुकेश फ़ौजी और उसके साथियों ने पालिका दस्ते पर हमला भी कर दिया था। इस हमले में पालिका दस्ते के प्रभारी कालूराम सेन को चोटें आई थी। इसके साथ ही अतिक्रमियों द्वारा फ़ेंकी गई ईंटो से जैसीबी का शीशा भी टूट गया था। जिसके बाद कालूराम सैन की तरफ से आरोपी मुकेश स्वामी व अन्य के विरुद्ध राज कार्य में बाधा सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा भी दर्ज़ करवाया गया था।  

नगरपालिका प्रशासन की भूमिका संदिग्ध ?

बताया जा रहा है कि पिछले दिनों जब शहर में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगी हुई थी इस दौरान भूमाफियों ने फिर से भूखंड पर निर्माण कर अतिक्रमण कर लिया। लेकिन शहर के बीचो-बीच स्थित इस बेहद चर्चित विवादित भूखंड पर अतिक्रमण से पालिका की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं ? क्योंकि ऐसा संभव नहीं है कि विवादित भूखंड पर निर्माण का काम चलता रहे और पालिका प्रशासन को इसकी जानकारी ही ना हो ? दूसरा सवाल ये भी है कि अगर भूमाफियों ने किसी तरह से निर्माण कर भी लिया है तो जानकारी मिलने के बावजूद अब तक अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया गया ?

क्या भूमाफियों को है सत्ताधारी नेताओं का है सरंक्षण ? 

जनवरी माह में जब इस भूखंड को अतिक्रमण मुक्त करवाया गया था उस समय ये प्रचारित किया गया था कि पूर्व पालिकाध्यक्ष ओम कालवा ने पैसे लेकर यह अतिक्रमण करवाया है ! उस समय कांग्रेस नेता हनुमान मील के निर्देशों पर अतिक्रमणो के खिलाफ की गई प्रभावी कार्रवाई के दौरान ही इस अतिक्रमण पर पीला पंजा चलाया गया था। अब क्यूंकि ओमप्रकाश कालवा अध्यक्ष नहीं है तो ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर किसकी शह पर यह अतिक्रमण करवाया गया है ? वैसे जिस तरह से इस अतिक्रमण पर नगरपालिका प्रशासन मौन होकर बैठा है उससे तो यह लगता है कि अतिक्रमी को किसी प्रभावशाली नेता का सरंक्षण प्राप्त है वरना किसी भी अतिक्रमी में इतना हौसला नहीं है कि एक बार ध्वस्त होने के बाद दोबारा अतिक्रमण कर ले।

वर्तमान में विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया और उनके पुत्र संदीप कासनिया क्षेत्र में सत्ता का केंद्र है इसलिये सरकारी सम्पति की लूट को रोकने की जिम्मेदारी भी उनकी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि पूर्व सत्ताधारियों से इतर कासनिया भूमाफियों से हमदर्दी नहीं रखेंगे।   

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