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जिला बनाने को लेकर नहीं जुटी भीड़, राहुल लेघा को छोड़ खाली हाथ सभा में पहुंचे नेता

जिला बनाओ अभियान समिति द्वारा सोमवार को बुलाई गई विशाल जनसभा एक बार फिर नुक्कड़ सभा बन कर रह गई।

सूरतगढ़। सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को लेकर अब यह साफ हो चुका है कि जिला बनाओ अभियान समिति के हाकिम बने शहर के नेता नहीं चाहते हैं कि सूरतगढ़ जिला बनें। यही वजह है कि जिला बनाओ अभियान समिति द्वारा सोमवार को बुलाई गई विशाल जनसभा एक बार फिर नुक्कड़ सभा बन कर रह गई। करीब दो दर्जन नेताओं से लैस 50 लोगों वाली स्टीयरिंग कमेटी के तमाम लोग मिलकर भी कोई चमत्कार नहीं कर पाए और भीड़ का आंकड़ा कुछ सौ लोगों में सिमट कर रह गया।

भीड़ जुटाने के लिये नुक्कड़ सभाएं और पीले चावल बाँटने सहित सभी प्रयास आंदोलन में दिल से जुड़े हरेक व्यक्ति द्वारा किये गए। लेकिन नेताओं के असहयोग के चलते एक बार फिर तमाम कोशिशों पर पानी फिर गया।आंदोलन और स्टीयरिंग कमेटी से जुड़ा एक भी बड़ा नेता भीड़ जुटाने या फिर लाने का प्रयास करता नहीं दिखा। भीड़ नहीं होने से आंदोलन से जुड़े लोग काफ़ी निराश दिखे।

इसी वजह से कुछ लोगों नें कमेटी और नेताओं को भीड़ नहीं आने और मनमानी के लिये घेरा। जिसका नतीजा ये हुआ कि महज 2 घंटे में ही सभा को विसर्जित कर दिया है। सभा खत्म होने से बहुत से लोगों को बोलने का मौका नहीं मिला इसके लिये भी समिति की आलोचना हो रही है।

300 आदमी लाएंगे पर तारीख नहीं बताएंगे

सोमवार को हुई जनसभा में 300 लोगों को बुलानें का दावा करने वाले नेताजी एक बार फिर खाली हाथ पहुंच गए। मीडिया के सवालों से परेशान नेताजी को शायद थोड़ी शर्म आ गई इसीलिये अबकी बार नेताजी नें 300 आदमी लाने की बात तो दोहराई पर साधन उपलब्ध कराने की बात नहीं बोले। वैसे नेताजी नें अपनी असली पीड़ा भी बातों बातों में जाहिर कर ही दी। नेताजी के कहने का लब्बो लुवाब ये था कि आदमी वे लाये और भाषणबाजी कर महफ़िल कोई और लूट ले उन्हें मंजूर नहीं है। इसका मतलब ये है कि नेताजी की बला से सूरतगढ़ जिला बने या ना बने उनकी बला से उन्हें राजनीति फायदा नहीं होता है तो वे एक भी आदमी लाने वाले नहीं है। लेकिन नेताजी ये भूल भी जाते हैं कि वे भी लोगों की जुटाई गई भीड़ में भाषण झाड़ने ही आए हैं।

वैसे नेताजी नें अब भी ये नहीं बताया कि कब वो 300 लोगों को बुलाएंगे। हां खुद को मासूम साबित करने की कोशिश करते हुए कमेटी से ही पुछा है कि वही बताये कब आदमी लाना है ? कुल मिलाकर मीडिया के आइने में अपने चेहरे को देखकर नेताजी को अपना भविष्य नजर आने लगा है। इसी वजह से नेताजी का सेल्फ कंट्रोल खत्म होने लगा है। 1 दिन पहले व्यापारियों के कार्यक्रम में भी नेताजी की आपा खोने की चर्चाएं चल रही है। खैर हमारे लिए अच्छी बात है कि भाजपा 70 प्लस आयु के नेताओं को टिकट नहीं देने की पॉलिसी पर काम कर रही है।  

राहुल लेघा के अलावा एक भी नेता नहीं पहुंचा भीड़ के साथ

सोमवार को हुई जनसभा को लेकर स्टीयरिंग कमेटी से जुड़े 2 दर्जन से अधिक नेता लगातार सभा में बड़ी संख्या में भीड़ जुटने के दावे कर रहे थे। लेकिन हकीकत यह है कि धरातल पर कोई भी नेता भीड़ जुटाने के लिए कोशिश नहीं कर रहा था। स्टीयरिंग कमिटी के अधिकांश नेता इस आंदोलन के विसर्जन का इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि उनको लगने लगा है कि आंदोलन की महफिल कोई और लूट चुका है। उनके लिए अब इस आंदोलन में कुछ नहीं बचा है।

ऐसे में तमाशबीन नेताओं के बीच युवा राहुल लेघा अच्छी खासी संख्या में युवाओं, समर्थकों और ग्रामीणों को लेकर सभा में पहुंचे। दोपहर करीब 11:45 बजे जब सभा शुरू होने को थी उसी समय राहुल लेघा और उनके समर्थक जिला बनाने की मांग को लेकर नारेबाजी करते हुए सभा स्थल पर पहुंचे। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से सभा स्थल पर मौजूद लोगों और नेताओं का भी जोश बढ़ा। युवा राहुल लेघा से आंदोलन से जुड़े नेताओं को सीख लेने की जरूरत है कि आंदोलन का नेतृत्व भले ही कोई करें लेकिन हमें अपने हिस्से की आहुति इस आंदोलन में डालनी है। देखना होगा कि आने वाले दिनों में आंदोलन से जुड़े नेता अपना रवईया बदलते हैं या फिर वही पुराना ढर्रा जारी रहेगा।

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