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ओवरब्रिज का विस्तार- जोर का झटका धीरे से !

डेढ़ सौ करोड़ के बजट का ढोल पीटने वाली सूरतगढ़ नगरपालिका के आर्थिक हालात इन दिनों बेहद खराब है। क्योंकि नगरपालिका की आय का एक बड़ा स्रोत है- भूखंडों की नीलामी से होने वाली आय, लेकिन प्रॉपर्टी बाजार में मंदी के चलते पालिका द्वारा की गई बोलियां लगातार फेल होती जा रही हैं। हालत ये…

सुरतगढ़। सूरतगढ़ में नेशनल हाईवे-62 पर बनने वाले ओवरब्रिज के विस्तार की घोषणा से स्थानीय कांग्रेस को जोर का झटका धीरे से लगा है। ओवरब्रिज के विस्तार की अनुमति जारी होने से जहां विधायक रामप्रताप कासनिया की जननेता की छवि मजबूत हुई है। वहीं स्थानीय कांग्रेस के नेता जो ओवरब्रिज के मामले को केंद्र सरकार का बता कर इस मुद्दे को भुनाने की सोच रहे थे उनकी उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है। इसके अलावा ओवरब्रिज विस्तार ने नपा चेयरमैन ओम कालवा के लिए भी एक नई मुसीबत खड़ी कर दी।

कमल होटल के पास से शुरू होकर इंदिरा सर्किल होते हुए डिग्री कॉलेज तक बनने वाले ओवरब्रिज का नक्शा

आप जानना चाहेंगे कि क्या ? तो वह भी हम आपको बता देते हैं। असल मे बात ये है की डेढ़ सौ करोड़ के बजट का ढोल पीटने वाली सूरतगढ़ नगरपालिका के आर्थिक हालात इन दिनों बेहद खराब है। क्योंकि नगरपालिका की आय का एक बड़ा स्रोत है- भूखंडों की नीलामी से होने वाली आय, लेकिन प्रॉपर्टी बाजार में मंदी के चलते पालिका द्वारा की गई बोलियां लगातार फेल होती जा रही हैं। हालत ये है कि पालिका के लिए अपने रोजमर्रा के खर्चे निकालना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में चेयरमैन कालवा और नगरपालिका के भ्रष्ट अधिकारीयों ने शहर के कुछ सफेदपोश कॉलोनाइजर से मिलकर एक षड्यंत्र रचा। इस षड्यंत्र के तहत शहर में पालिका की बेशकीमती व्यावसायिक भूमि पर बड़े बड़े पलॉट काटकर आवासीय के रूप में औने पौने दामो में बेचने की योजना बनाई गयी। योजना के तहत इंदिरा सर्किल के दक्षिणी दिशा में बीकानेर रोड पर कॉर्नर के खाली पड़े भूखण्ड ओर बीकानेर रोड पर ही पूर्व विधायक हरचंद सिंह सिद्धू के निवास के सामने श्रमिक विश्राम गृह की भूमि को नीलामी के लिए चुना गया। पालिका ने इन बेशकीमती भूखण्डों पर नक्शा बनाकर आवासीय प्लाट बेचने की पूरी तैयारी भी कर ली थी पर दोनों ही मामलों में ऐन मौके पर कुछ जागरूक लोगों के विरोध के चलते नीलामी प्रक्रिया पर रोक लग गयी।  इंदिरा सर्किल के दक्षिणी दिशा में कॉर्नर वाले प्लॉट पर लगी रोक को हटाने के लिए चैयरमेन ओम कालवा काफी समय से प्रयास कर रहे थे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले दिनों जिला कलेक्टर ने इस भूमि की नीलामी के लिए पालिका प्रशासन को हरी झंडी भी दे दी थी। जिसके बाद नगरपालिका प्रशासन नए सिरे से नीलामी सूचना जारी करने की योजना बना ही रहा था । लेकिन विधायक रामप्रताप कासनिया ने सांसद निहालचंद मेघवाल और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से वार्ता कर ओवरब्रिज के विस्तार को हरी झंडी दिला दी। जिससे नगरपालिका प्रशासन को बोली की योजना को एक बार फिर बड़ा झटका लग गया है। क्योंकि ओवरब्रिज का विस्तार होने से नया बनने वाला ओवरब्रिज कमल होटल के पास से शुरू होगा और इंदिरा सर्किल से होते हुए सूरतगढ़ डिग्री कॉलेज की ओर जाएगा। ओवरब्रिज बनने के चलते सर्किल के दक्षिण दिशा में स्थित इन प्लॉट को व्यवसायिक के रूप में कौन खरीदना चाहेगा ? इन प्लाटों के सामने ओवरब्रिज केेेे ब्लॉक या पिल्लर होने के चलते कोई भी व्यक्ति बड़ी बोली लगाने से हिचकिचायेगा। कुल मिलाकर कह सकते हैं कि ओवरब्रिज के विस्तार की घोषणा ने एक ओर चेयरमैन ओम कालवा के सभी अरमानों पर पानी फेर दिया है वहीं इस मामले में अपनी मौजूदगी में कांग्रेस के एक बड़े नेता की भी किरकिरी करवाना चेयरमैन कालवा के लिए एक बड़ा सदमा हैं। नेेताजी की नाराजगी का खामियाजा भी चेयरमैन साहब को आने वाले दिनों में भुगतना पड़ सकता है।      

डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुटे हैं कालवा

ओवरब्रिज के विस्तार की घोषणा के बावजूद एक बार फिर ओवरब्रिज को ब्लॉक के बजाय पिल्लर पर बनाने की मांग को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। जिसके बाद कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल का प्रयास शुरू कर दिया। पिल्लर के बहाने ओम कालवा और उनके ग्रुप के लोगों ने अब मोर्चा संभाल लिया है। लेकिन इस बार हनुमान मील की जगह पूर्व विधायक गंगाजल मील को आगे लाया गया है। ओवरब्रिज को पिल्लर पर बनाने की मांग के बहाने नए नए तर्क भी गढ़े जा रहे हैं । जिनमे से एक है कि कमल होटल से शुरू हुआ ओवरब्रिज इंदिरा सर्किल पर 90 डिग्री के कोण में मुड़ेगा, जिससे ओवरब्रिज पर बहुत ज्यादा दुर्घटनाएं होगी। लेकिन ऐसे तर्क देने वाले यह भूल जाते हैं कि हाईवे अथॉरिटी के बड़े-बड़े इंजीनियर ने इन सारी संभावनाओं पर विचार के बाद ही ओवर ब्रिज का नक्शा अप्रूव किया होगा। वैसे भी जिस नक्शे के अनुसार ओवरब्रिज बनाया जाएगा, उसको देखने से साफ पता चलता है कि ओवर ब्रिज का घुमाव 45 डिग्री से भी कम है। ओवरब्रिज को पिलर पर बनाने की मांग के बहाने एक और बात भी उठाई जा रही है कि अगर ओवरब्रिज को पिल्लर पर नहीं बनाया जाता है तो यह ओवरब्रिज ही नहीं बनाया जाए। बल्कि इंदिरा सर्किल से डिग्री कॉलेज तक फोरलेन सड़क बना दी जाए। पर क्या इससे हाईवे पर होने वाले एक्सीडेंट कम होंगे ? कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि ओवरब्रिज के पिल्लर के बहाने कांग्रेस के नेता और खासकर चैयरमेन कालवा डैमेज कंट्रोल की कोशिश में है। यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि चेयरमैन कालवा अपने ध्येय मैं कितना कामयाब हो पाते हैं ? वैसे चेयरमैन कालवा धरना स्थल पर लोगों को यह कहते सुने गये की इस मामले में पार्टी छोड़कर दिल साफ कर लो । 70 के दशक में सुपर स्टार राजेश खन्ना की एक बेहद लोकप्रिय फिल्म आई थी ‘रोटी’ । इस फिल्म का एक गाना काफी लोकप्रिय हुआ था। सुना होगा आपने ‘ ये जो पब्लिक है सब जानती हैं…..’। नही सुना तो जरूर सुनियेगा !

_ राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष- प्रेस क्लब,सुरतगढ़

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