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व्यापारियों ने चिकित्सालय में कुप्रबंधन के खिलाफ सौंपा ज्ञापन, पुरे प्रकरण में नेताओं का चरित्र हुआ उजागर ! शहर को अब पृथ्वीराज बुडानिया और राकेश बिश्नोई जैसे नेताओं की जरूरत ?

सूरतगढ़। उपजिला चिकित्सालय में फैली अव्यवस्थाओं को लेकर आज शहर के लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। पिछले 10 दिनों से चल रहे विवाद के बावजूद..

सूरतगढ़। उपजिला चिकित्सालय में फैली अव्यवस्थाओं को लेकर आज शहर के लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। पिछले 10 दिनों से चल रहे विवाद के बावजूद चिकित्सालय प्रबंधन द्वारा अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की सेवाएं आज भी सुचारु नहीं की गई। जिसके चलते अपनी पूर्व घोषणा के तहत कॉमरेड पृथ्वीराज बुडानिया और जनता मोर्चा के ओम राजपुरोहित सहित कार्यकर्ता चिकित्सालय में पहुंचे और प्रभारी से अस्थिरोग विशेषज्ञ चिकित्सक लगाने की मांग रखी। लेकिन वार्ता के दौरान प्रभारी डॉक्टर नीरज सुखीजा गोलमोल जवाब देते हुए इस्तीफा दे चुके डॉक्टर भारत भूषण जांगिड़ का बचाव करते दिखे। डॉ सुखीजा ने अस्थिरोग चिकित्सक लगाने के सवाल पर सीएमएचओ को अवगत कराने की बात कह कर पल्ला झाड़ लिया।

जिसके बाद चिकित्सालय प्रभारी के रवैये से नाराज होकर कामरेड पृथ्वीराज बुडानिया, जनता मोर्चा अध्यक्ष ओम राजपुरोहित, छात्र नेता सुमित चौधरी, लक्ष्मण शर्मा सहित दूसरे लोगों ने प्रभारी के चेंबर में ही धरना लगा दिया और सीएमएचओ या किसी और जिम्मेदार अधिकारी से ही वार्ता करने की बात कहते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रभारी के चेंबर में धरने की सूचना मिलने पर डीएसपी प्रतीक मील और सिटी थाना सीआई दिनेश सहारण मौके पर पहुंचे और समझाईश का प्रयास किया। लेकिन आंदोलनकारी नेताओं ने पुलिस अधिकारियों से साफ कह दिया कि वे चाहे तो उन्हें गिरफ्तार कर ले ? आंदोलनकारी नेताओं ने चेंबर में जारी धरने को हटाने से साफ मना कर दिया। इस बीच संयुक्त व्यापार संघ, मारवाड़ी युवा मंच और खुदरा किरयाणा विक्रेता संघ से जुड़े व्यापारी और पदाधिकारी भी चिकित्सालय में पहुंच गए और प्रभारी नीरज सुखीजा से उच्च अधिकारियों से बात कर चिकित्सालय में विशेषज्ञ डॉक्टर लगाने की मांग रखी।

इस दौरान प्रभारी डॉ नीरज सुखीजा ने दबाब बनाने का आरोप लगाते हुए चेंबर छोड़ने का प्रयास किया तो लोगों ने उन्हें रोक दिया और खूब खरी खोटी सुनाई। करीब 2 घंटे तक चले इस घटनाक्रम के बाद एसडीएम भारत जयप्रकाश मीना मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारीयों से वार्ता कर दो दिन का समय मांगा। उन्होंने आंदोलनकारी नेताओं को शीघ्र ही सभी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया। इसके बाद आंदोलन कर रहे कामरेड बुडानियां और जनता मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने 2 दिन में उचित कार्रवाई नहीं होने पर गुरुवार को आंदोलन की घोषणा करते हुए धरना समाप्त कर दिया।

अव्यवस्थाओं पर किसान नेता राकेश बिश्नोई ने प्रभारी नीरज सुखीजा को दिखाया आईना !

उपजिला चिकित्सालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं पर धरने के दौरान किसान नेता राकेश बिश्नोई भड़क उठे और प्रभारी नीरज सुखीजा को साथ ले जाकर चिकित्सालय की सफाई व्यवस्था का हाल दिखाया। पूरे अस्पताल में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे थे, ऐसा लग रहा था जैसे महीनो से सफाई नहीं हुई हो ? राकेश बिश्नोई ने प्रभारी को लताड़ते हुए सवाल किया कि आखिर चिकित्सालय में सफाई की जिम्मेदारी किसकी है? सफाई के जब लाखों रुपए के टेंडर है तो फिर क्यों सफाई नहीं की जा रही है? इस दौरान पुलिस और प्रेस के अलावा हॉस्पिटल में आये मरीज भी बड़ी संख्या में जमा हो गए। राकेश बिश्नोई के सवालों पर प्रभारी डॉक्टर नीरज सुखीजा से जवाब नहीं देते बना। राकेश बिश्नोई ने हॉस्पिटल में जमकर भ्रष्टाचार होने के आरोप भी जड़े।

शहर के नेताओं का चरित्र उजागर ! पृथ्वीराज बुडानिया और राकेश बिश्नोई जैसे नेताओं की जरूरत ?

उपजिला चिकित्सालय में डॉक्टर भारत भूषण जांगिड़ को लेकर पिछले 10 दिनों से चल रहे इस आंदोलन और आज के घटनाक्रम ने शहर में राजनीति कर रहे नेताओं का चरित्र भी सामने लाकर रख दिया। आम आदमी की सबसे बड़ी जरूरत चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े इस आंदोलन को जिसकी आवाज़ यहां के नेताओं और जनप्रतिनिधियों को उठानी चाहिये थी, उस आवाज़ को 50 किलोमीटर दूर से आकर एक कॉमरेड नेता को उठानी पड़ी। उससे भी अफ़सोसजनक बात ये है कि 10 दिनों तक चले आंदोलन में शहर के किसी भी नेता या फिर जनप्रतिनिधि चाहे वे सत्ताधारी दल के हो या फिर विपक्षी कांग्रेस के, कुछ करना तो बहुत दूर की बात है, आंदोलन के समर्थन में 2 शब्द बोलने की भी जहमत नहीं उठाई। और तो और कॉमरेड बुडानिया कि इस मुहीम पर शहर के मार्क्सवाद का झंडा थामकर बड़ी बड़ी बातें करने वाले बड़बोले नेताओं को भी सांप सूंघ गया।

दरअसल इस शहर के कथित नेता आम जनता के बस वोट लेना चाहते है, उस जनता के लिए करना कुछ नहीं चाहते? और मामला ज़ब धरती के भगवान से जुड़ा हो तो उनसे पंगा कौन मोल ले ! वैसे भी इन नेताओं को तो डॉ साहब की सेवा 24 घंटे मिल ही रही है।

शायद यही वह वजह थी कि शहर के कुछेक नेता मुंह दिखाई के लिए धरने पर मौजूद तो थे। पर कड़वी हक़ीक़त ये है कि ये नेता अप्रत्यक्ष रूप से डॉक्टरों के विरोध को दबाने की कोशिश कर रहे थे। इन नेताओं की बॉडी लेंगवैज साफ बता रही थी कि इनका प्रयास किसी भी तरह इस आंदोलन को समाप्त करने का था, लेकिन बदकिस्मती से इनका ये प्रयास सिरे नहीं चढ़ सका।  

              खैर भला हो कॉमरेड बुडानिया का जिन्होंने उपजिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की मनमानी के खिलाफ आवाज़ उठाई। वह भी तब ज़ब उन्हें इस शहर ही नहीं इस क्षेत्र से कोई चुनाव नहीं लड़ना। पुरे आंदोलन के दौरान पूरी गंभीरता से उन्होंने पुरे तथ्यों और सबूतों के साथ अपनी बात रखी और बेहद शांति से आमजन की आवाज़ को बुलंद किया।

              इस पुरे आंदोलन के दौरान ज़ब शहर के नेता चिकित्सालय प्रभारी के सामने याचक की मुद्रा में खड़े थे। उस दौरान पृथ्वीराज बुडानिया के बाद अगर कोई नेता पूरी मजबूती के साथ खड़े दिखे तो वह किसान नेता राकेश बिश्नोई ही थे। बिश्नोई आंदोलन में देर से जरूर शामिल हुए लेकिन वही वो शख्स थे जिन्होंने चिकित्सालय प्रभारी को आईना दिखाने का काम किया। राकेश बिश्नोई ने ये दिखाया कि चिकित्सालय के प्रभारी भी जनता के नौकर है, जिन्हे हम लोगों ने भगवान मान लिया है। उन्होंने राजकीय चिकित्सालय की अव्यवस्थाओं के लिए प्रभारी को जमकर खरी खोटी सुनाई और अपना रवैया सुधारने की बात कही।

संयुक्त व्यापार संघ ने भी उठाया मामला, एसडीएम और प्रभारी को सौंपा ज्ञापन 

शहर के उपजिला चिकित्सालय में अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में मरीजों को हो रही परेशानी को देखते हुए सोमवार को संयुक्त व्यापार मंडल और अन्य व्यापारी व सामाजिक संगठन भी सक्रिय हुए। अध्यक्ष अवतार सिंह सरां और खुदरा किरयाणा विक्रेता संघ के अध्यक्ष राघव गुप्ता के नेतृत्व में व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल पहले एसडीएम भारत जयप्रकाश मीणा से मिला और ज्ञापन सौंपकर चिकित्सालय में अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉक्टर लगाने की मांग की। इसके बाद व्यापारियों ने चिकित्सालय प्रभारी नीरज सुखीजा से मिलकर मामले को जल्द से जल्द सुलझाकर मरीजों को राहत देने की मांग रखी। इस दौरान संयुक्त व्यापार संघ के सचिव नरेंद्र कालड़ा, कोषाध्यक्ष महेंद्र जैन, किशोर गाबा,घनश्याम आहुजा, पवन तावणीया, दिनेश मुंधड़ा, सतपाल भठेजा, गौरी शंकर सुथार, मनीष क्वातड़ा, गोपीराम शर्मा सहित बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे।

राजेंद्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़

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