बैठक में भाजपा सहित वरिष्ठ पार्षद बने रहे मूकदर्शक

नगरपालिका बोर्ड की बैठक में वाइस चेयरमैन के बाद बैठे विधायक कासनिया ।

सूरतगढ़। आम तौर पर नगरीय निकायों की बैठक में संबंधित विधानसभा क्षेत्र का विधायक विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में भाग लेता है क्योंकि विधायक विधानसभा क्षेत्र की जनता का सबसे बड़ा जनप्रतिनिधि होता है। इसलिए बोर्ड की बैठक में विधायक की उपस्थिति से संबंधित विशेष प्रोटोकॉल होता है। सामान्य परंपरा भी रही है कि विधायक को सभापति/चेयरमैन के ठीक बराबर की कुर्सी पर बैठाया जाता है लेकिन सोमवार को चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा की अध्यक्षता में हुई बैठक में बेशर्मी से प्रोटोकॉल को धता बताते हुए इस परंपरा का मखौल उड़ाया गया। बैठक में विधायक रामप्रताप कासनिया को वॉइसचेयरमैन के बाद कुर्सी दी गई। ऐसा नहीं है कि वॉइस चेयरमैन का पद की गरिमा नहीं है परंतु विधायक का पद वॉइस चेयरमैन से बहुत बड़ा होता है। मास्टर कालवा अगर इस बात का ध्यान रखते तो वे विधायक कासनिया की बांयी तथा वाइस चेयरमैन की दायीं तरफ बैठने की व्यवस्था कर दोनो को सम्मान दे सकते थे परंतु ऐसा किया नहीं गया। पूरी मीटिंग के दौरान विधायक कासनिया की उपेक्षा करते हुए उन्हें एक तरह से अपमानित सा किया गया। आश्चर्य की बात यह है कि न तो बोर्ड की बैठक में उपस्थित भाजपा पार्षदों ने इस पर आपत्ति जताई और ना ही किसी निर्दलीय या कांग्रेसी पार्षद ने विधायक पद की गरिमा बचाने की कोशिश की जबकि मीटिंग में सभी राजनितिक पार्टियों के कई वरिष्ठ नेता सदन मे उपस्थित थे।

नगरपालिका की बोर्ड की बैठक में वर्तमान विधायक के साथ हुए इस तरह के व्यवहार से कई सवाल खड़े होते हैं। मास्टर ओमप्रकाश कालवा अपने 1 वर्ष के कार्यकाल में बोर्ड की कई बैठकों की अध्यक्षता कर चुके हैं साथ ही शिक्षक पृष्ठभूमि से भी हैं, ऐसे मे नहीं लगता है कि उन्हें बोर्ड बैठक में विधायक के प्रति प्रोटोकॉल और सामान्य परंपराओं का ज्ञान नहीं रहा होगा। तो क्या यह मान नहीं लिया जाये कि चेयरमैन ओम कालवा ने जानबूझकर अपमानित करने के लिए वाइस चेयरमैन के बाद विधायक के बैठने की व्यवस्था की।आखिर चेयरमैन ने ऐसा क्यों किया ? तो इसका जवाब भी आप जान लेें। दरअसल मास्टर जी को नजदीक से जाननेे वाले लोगोंं का मानना है कि चेयरमैन बनने के बाद से मास्टर जी पर्सनैलिटी डिसऑर्डर का शिकार है, जिसकी वजह है मास्टर जी का अहंकार ! यही वजह है कि मास्टरजी अब अपने प्रतिद्वंद्वियों को नीचा दिखाने का कोई भी अवसर नहीं चूकते हैं। इसका उदाहरण नगरपालिका बोर्ड की इसी बैठक में भी देखा गया। जब उन्होंने कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष को ही असामाजिक तत्व बता डाला। हालांकि इस बात को लेकर खूब हंगामा भी हुआ था। वैसे आपको हम ये भी बता दें, चेयरमैन बननेेे के बाद से मास्टर जी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएंं भी खूूूब हिलोरे मार रही है और वे सूरतगढ़़ का भावी विधायक बनने का सपना देखने लगे हैं । इसके लिए मास्टर जी पार्षदों के एक गुट के साथ मिलकर उन्हें चेयरमैन बनाने वाले मील परिवार की राजनीतिक जड़ों में मट्ठा डालने में लगे हुए हैं । वॉइस चेयरमैन और नगरपालिका की महिला कर्मचारी के बीच हुए विवाद को तिल का ताड़़ बना कर वाइस चेयरमैन को नीचा दिखाना ऐसेे ही एक षड्यंत्र का नतीजा था।

खैैैर इस बात पर हम फिर कभी विस्तार से चर्चा करेंगे। बहरहाल मास्टर जी को यह मालूम होना चाहिए कि अहंकारी व्यक्ति राजनीति में लंबा सफर तय नहीं करता और ना ही बाड़ में मूतने से बैर नहीं निकलता है। फिर भी हम ये उम्मीद करते हैं कि मास्टर जी संकीर्ण सोच को त्याग कर भविष्य् में जनप्रतिनिधियों को उचित सम्मान देंगे। वैसे राजनीति में लंबी पारी खेलने का सपना देखने वाले मास्टर कालवा के लिए किसी शायर की ये पंक्तियां याद आती है

बरसात में अक्सर तालाब हो जाते हैं कमज़र्फ।
मगर आपे से बाहर कभी समंदर नहीं होता

  • राजेंद्र पटावरी (9928298484)
  • उपाध्यक्ष,प्रेस क्लब सूरतगढ़

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