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विधायक कासनिया के विवादित वीडियो हो रहे वायरल : संयोग या प्रयोग

एक वीडियो चुनाव प्रचार के दौरान एक व्यक्ति से वाद-विवाद का है जिसमें विधायक रामप्रताप कासनिया काफी उग्र नजर आ रहे हैं वही एक दूसरा वीडियो संभवतः प्रशासन गांवों के संग अभियान का है इस वीडियो में भी विधायक रामप्रताप कासनिया कुछ लोगों से उलझते दिख रहे हैं। वही एक तीसरा वीडियो भी सोशल मीडिया…

पुराने वीडियो वायरल कर चुनावी लाभ लेने की कोशिश में भाजपा भी नही पीछे

विवादित वीडियो वायरल करने की टेक्टिस क्या हो पाएगी कारगर ?

सूरतगढ़। पंचायत चुनाव को लेकर अब चुनाव प्रचार अंतिम दौर में है । भाजपा व कांग्रेस सहित सभी पार्टियों के प्रत्याशी और नेता फील्ड में जनता को तमाम तरह-2 के वादों से बहलाने की कोशिश कर रहें हैं। उसी समय सोशल मीडिया पर इन दिनों बड़े नेताओं के विवादित वीडियो धड़ाधड़ शेयर किए जा रहे हैं। हालांकि इन वीडियो में ज्यादातर वीडियो पुराने हैं। लेकिन मौका चुनाव का है तो अंग्रेजी कहावत ‘नो स्टोन अनटर्न्ड’की तर्ज पर इन वीडियो के माध्यम से दोनों पार्टियों के समर्थक विपक्षी पार्टी की कार्यशैली और उसके नेताओं के आचरण पर सवाल खड़े रहे हैं।

क्या है इन विवादित वीडियो में..

जहां तक इन वीडियो की बात है तो इनमें से दो वीडियो भाजपा विधायक रामप्रताप कासनिया से जुड़े हुए हैं। जिनमे से एक वीडियो चुनाव प्रचार के दौरान एक व्यक्ति से वाद-विवाद का है जिसमें विधायक रामप्रताप कासनिया काफी उग्र नजर आ रहे हैं । वही एक दूसरा वीडियो संभवतः प्रशासन गांवों के संग अभियान का है इस वीडियो में भी विधायक रामप्रताप कासनिया कुछ लोगों से उलझते दिख रहे हैं। वही एक तीसरा वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है जोकि नगरपालिका क्षेत्र में एक अतिक्रमण हटाने के दौरान का है जिसमें एक युवती अतिक्रमण हटाने में लगभग रोते हुए भेदभाव का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगा रही हैं। हालांकि इन वीडियो और इनसे जुड़े घटनाक्रम से ज्यादातर जागरुक व्यक्ति परिचित है। फिर भी ये समझना जरूरी है कि विधायक रामप्रताप कासनिया को नजदीक से जानने वाले लोग ये जानते हैं कि अपनी साफगोई के चलते अपने समर्थकों से भी कड़वी बात वो कह देते हैं ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर विपक्षियों द्वारा सामान्य या फिर साजिशन किये गए सवालों से उनका टेम्पर हाई होना स्वाभविक है, जिसका नतीजा ये दोनों वीडियो हैं। वैसे विधायक जी को भी शायद यह उम्मीद नहीं रही होगी कि इन परिस्थितियों में एक तीसरी आंख घटनाक्रम को कैद कर रही है और कैद किए गए ये दृश्य चुनावी समर में उनके खिलाफ हथियार की तरह प्रयोग में लाए जाएंगे।

भाजपा समर्थक भी वायरल कर रहे पुराने वीडियो

दूसरी ओर नगरपालिका प्रशासन के अतिक्रमण हटाने के दौरान का एक युवती का वीडियो शेयर किए जाने का मामला भी कुछ ऐसा ही है। विधायक कासनिया के वायरल किये जा रहे  वीडियो के काउंटर में भाजपा समर्थक इस वीडियो को वायरल कर रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या नगरपालिका क्षेत्र का यह वीडियो पंचायत चुनाव के मतदाताओं पर कोई प्रभाव डालेगा ?

क्या इन वीडियो से मतदाताओं का मन बदलेगा !

दोनों पार्टियों के समर्थक इन वायरल वीडियो के माध्यम से पंचायत चुनावों में फायदा उठाने का ख्वाब पाले हुए हैं। परंतु हमें नहीं लगता है कि पंचायत का मतदाता इतना भोला है कि वह अब इन वीडियो को देखकर अपनी राय बनाएगा। गांवों की राजनीति में जातीय समीकरण से लेकर स्थानीय मुद्दे हावी रहते हैं इसके अलावा प्रत्याशी के मतदाताओं से व्यक्तिगत सम्बन्ध भी अहम रोल अदा करते हैं। ऐसे में चुनावी मौसम में सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे हैं यह वीडियो केवल और केवल विरोध का निकृष्ट तरीका है जोकि दोनों पार्टियों के समर्थक अपना रहे हैं। एक दूसरे के मानमर्दन से राजनीतिक फायदा उठाने की यह कोशिश राजनीति के निम्नतम स्तर पर जाने का इशारा मात्र है। 

     

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