
सूरतगढ़। शहीदों के बलिदान की याद करने के लिए प्रशासन द्वारा हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया जाता है। इस बेहद खास आयोजन की तैयारी प्रशासन 15 अगस्त से बहुत पहले शुरू कर देता है। हर बार की तरह प्रशासन ने इस बार भी शानदार आयोजन के लिए अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारियां तय की। जिसमें नगरपालिका को आयोजन स्थल पर टेंट (पंडाल), कुर्सियां व अन्य व्यवस्थाएं करने की जिम्मेदारी दी गई। मतलब ये है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह को भव्य बनाने की जिम्मेदारी नगरपालिका प्रशासन को दी गई।
होना ये था कि नगरपालिका अधिकारी समारोह स्थल पर सुंदर शामियाना व अन्य व्यवस्था करते। मगर अफसोस की बात है कि पालिका ठेकेदार ने कार्यक्रम की गरिमा की अनदेखी करते हुए आयोजन स्थल पर बेहद पुराना और घटिया टैंट लगा दिया। टेंट (पंडाल) की छत पर जो पर्दे लगाए गए थे वे पुराने और गंदे तो थे ही, साथ ही साथ सभी पर्दे अलग-अलग रंगों और डिजाइन के थे। आम तौर पर किसी भी कार्यक्रम के लिए जो टेंट लगाया जाता है उसमें 2 या 3 तरह के ही पर्दे कलर कांबिनेशन के हिसाब से लगाए जाते हैं।
लेकिन सरकारी कार्यक्रम है कौन पर्दे देखता है शायद यही सोचकर ठेकेदार ने 8 से 10 अलग-अलग रंगो और डिज़ाइन के बेहद खराब पर्दे पंडाल में लगा दिए मानो सड़क किनारे कोई लंगर चल रहा हो। वैसे इन पर्दों को देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि ठेकेदार के पास टेंट के नाम पर जो पुराने, गंदे, फ़टे हुए और रिजेक्ट पर्दे पड़े थे उन्ही से उसने टेंट खड़ा कर दिया। वास्तविकता ये है कि अगर ऐसा टेंट किसी गांव के साधारण व्यक्ति के यहां भी लगाया जाता तो वह भी इसे लगाने से मना कर देता।
मगर नगरपालिका की स्टोर शाखा के जिन कर्मचारियों को यह व्यवस्था देखनी थी, उन्होंने ठेकेदार द्वारा इस तरह का घटिया टेंट लगाने के बावजूद अपनी आंखें मूँदे रखी। इन कर्मचारियों को स्वतंत्रता दिवस समारोह की गरिमा का जरा भी ख्याल नहीं आया। इससे भी ज्यादा अफसोसजनक बात यह है कि समारोह में उपखंड स्तर के बड़े-बड़े अधिकारी और बड़े नेता भी कार्यक्रम में शामिल हुए, जाने क्यों उनकी नज़र भी इस घटिया शामियाने पर नहीं पड़ी ? वह भी तब ज़ब उनको पता है कि ठेकेदार ने टेंट फ्री में नहीं लगाया है, इसके लिए नगरपालिका ठेकेदार को हज़ारों रूपये का भुगतान करेगी।
दरअसल यह पूरा मामला भी कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है। भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे पालिका की स्टोर शाखा के कर्मचारी कमीशन के लालच में अपना ईमान ठेकेदारों के पास गिरवी रख चुके है। जिनकी मानसिक स्थिति इन दिनों कुछ कुछ नशे के आदी उन लोगों जैसी हो गई है। जो नशे की पूर्ति के लिए शर्म और नैतिकता को छोड़कर किसी भी सीमा तक गिर सकते हैं।
बहरहाल शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगाने वाले ईओ गणपत राम का राष्ट्रीय पर्व से जुड़े इस आयोजन में गरिमा के प्रतिकूल घटिया अरेंजमेंट पर ध्यान नहीं देना निराशाजनक है। उम्मीद की जानी चाहिये कि वे संबंधित ठेकेदार और कार्मिकों पर कोई कार्रवाई करे या ना करें, परन्तु भविष्य में राष्ट्रीय पर्व जैसे आयोजनों में इस तरह की घटिया व्यवस्था की पुनरावृति नहीं हो इसके लिए जरूरी कदम अवश्य उठाएंगे।
