सूरतगढ़। राजनीति में भावनाओं का भले ही कोई महत्व नहीं है। लेकिन मानव स्वभाव है…..भावनाएं खुद ब खुद जुबान पर आ जाती है। नगरपालिका चुनावों की ही बात करें तो अध्यक्ष पद सामान्य महिला के आरक्षित होने की घोषणा के साथ ही शहर के लोगों की जुबान पर जो पहला नाम उभर कर आया है, वह नाम है पूर्व नपा चेयरमैन आरती शर्मा का।
पिछले तीन दशक से सूरतगढ़ नगरपालिका में अध्यक्ष पद पर बहुत से लोगों ने राज किया है। काजल की कोठरी कहीं जाने वाली नगरपालिका में रहकर जब ज्यादातर चेहरे अपने चमक को चुके हैं। तब केवल आरती शर्मा ही है जिनका कार्यकाल लोग याद करते हैं। अपने कार्यकाल में आरती शर्मा ने विकास के कोई नये आयाम खड़े कर दिए हो ऐसा नहीं है, और यह कहना भी ठीक नहीं होगा कि उनके कार्यकाल में नगरपालिका में बिल्कुल भी भ्रष्टाचार नहीं था। लेकिन यह कहने में भी गुरेज नहीं होना चाहिए कि आरती शर्मा ने भ्रष्टाचार की गंगा में डूबने की बजाय उससे दूरी बनाए रखी।
एक पढ़ी लिखी महिला होने व एक सभ्य परिवार की बेटी और बहु होने का असर ये रहा कि वे सार्वजनिक जीवन में मर्यादाओं से बंधी रही और खुद को भ्रष्टाचार और दूसरी आरोपों से खुद को दूर रखा। जबकि आरती शर्मा के बाद जो भी चेहरे अध्यक्ष बने वे सब भ्रष्टाचार की गंगा में बह गए। इन चेहरों में अभी भी कई ऐसे हैं जिनकी अत्रप्त इच्छाएं भ्रष्टाचार की इस गंगा में फिर से डूबकी लगाने की है। लेकिन जैसा कि हमने कहा ये चेहरे अपनी चमक खो चुके है। इस शहर की जनता जहाँ अब इन लोगों का जिक्र भी नहीं करना चाहती। दूसरी और आरती शर्मा को अभी भी शहर का एक बहुत बड़ा वर्ग फिर से अध्यक्ष के रूप में देखना चाहता है।
हालांकि अध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा से जुड़े कई महिला उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया या दूसरे माध्यमों से अपनी उम्मीदवार पेश की है, मगर कहना गलत नहीं होगा कि ये नये उम्मीदवार भी पब्लिक चॉइस के साथ साथ योग्यता के पैमाने पर आरती शर्मा के सामने कहीं नहीं ठहरते है। आरती शर्मा के पक्ष में एक और बात जाती दिख रही है वो ये है कि पार्टी स्तर पर भाजपा के मौजूदा संभावित उम्मीदवारों में आरती शर्मा ही एक मात्र ऐसा चेहरा है जिस पर भाजपा के दोनों धड़े भी एक राय हो सकते है।
इन सबके बावजूद फिलहाल आरती शर्मा के राजनीतिक भविष्य के बारे में अभी कोई टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। क्यूंकि पार्षद की टिकटे बटने से लेकर भाजपा के लिए मेजॉरिटी प्राप्त करने की लम्बी लड़ाई बाकी है। फिर भी जनता के रुख से यह तो साफ है कि शहर की जनता नगरपालिका के भ्रष्टाचार से आजीज आ चुकी है, इसीलिए वह चाहती है आरती शर्मा या फिर उनकी की तरह साफ छवि वाली कोई पढ़ी लिखी महिला ही नगरपालिका की कमान संभाले।
-राजेन्द्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष -प्रेस क्लब, सूरतगढ़।