हजारों साल से नर्गिस अपनी बेनूरी पर रोती है।
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा।।
सूरतगढ़। स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल को भूमि आवंटन के प्रस्ताव (ऐजेंडा नंबर-7) पर समर्थन देने वाले पार्षदों को कांग्रेस टिकट नहीं देगी ? करीब 2 वर्ष पूर्व एक प्रेस वार्ता मे विधायक डूंगरराम गेदर द्वारा दिए इस बयान को समय की कसौटी पर रखने का वक्त अब आ चुका है ! क्या विधायक डूंगरराम गेदर अपने इस बयान पर आज भी कायम है ? कांग्रेस मे पार्षदों के टिकट वितरण की प्रक्रिया शुरू होने के साथ सियासी हलकों में इस बात पर चर्चा शुरू हो गई हैं। खुद कांग्रेस के बड़े नेताओं की निगाह भी विधायक गेधर के स्टैंड पर है। अक्सर राजनेता अपने वादों को जुमला कहकर हवा में उड़ा देते हैं… क्या विधायक डूंगरराम गेदर भी उसी श्रेणी में शामिल है ! आने वाले दिनों में इस बात से पर्दा उठ जायेगा ! भूमि आवंटन प्रस्ताव मे कांग्रेसी पार्षदों की भूमिका से विधायक गैदर की साफ छवि मे जो दाग़ लगे है उन्हें धोने का प्रयास गैदर पिछले 2 साल से कर रहे हैं। प्रस्ताव का समर्थन करने वाले पार्षदों से दूरी बनाकर और प्रस्ताव के खिलाफ हाईकोर्ट में रीट याचिका दायर कर गैदर खुद पर लगे सौदेबाजी के आरोपों को कुछ हद तक धुंधला करने मे कामयाब भी हुए है। परन्तु शहर की जनता के ज़ेहन मे आज भी इस प्रस्ताव के पास होने की टीस है। नगरपालिका की बोर्ड बैठक मे पार्षदों ने बेशर्मी का जो भोंडा प्रदर्शन किया वह शहर के इतिहास मे दर्ज़ हो चुका है। इसलिये आने वाले दिनों मे ज़ब विधायक गैदर ज़ब टिकट बांटेंगे उन्हें एक बार फिर माता सीता की तरह अग्निपरीक्षा देनी पड़ेगी ! सीता की तरह अपनी पवित्रता साबित करने के लिए विधायक को कांग्रेस पार्टी और शहर से गद्दारी करने वाले पार्षदों के टिकट काटने होंगे ? नगरपालिका मे बोर्ड बनाने और टिकट के लिए राजनितिक दबाब के बीच यह टास्क विधायक गेदर के लिए आसान नहीं होगा !
हालांकि खेल का एक दूसरा पक्ष भी है ! कांग्रेस का पिछला बोर्ड क्यूंकि पूर्व विधायक स्व.गंगाजल मील द्वारा बनाया गया था और प्रस्ताव का समर्थन करने वाले पार्षद ज्यादातर कांग्रेस पार्टी की बजाय मील परिवार के ही वफादार थे। इसलिये उन्होंने पार्टी के नये हाईकमान विधायक गैदर द्वारा जारी व्हीप को ठेंगे पर रखकर सौदेबाज़ी करने मे गुरेज नहीं किया। इतना ही नहीं इन पार्षदों ने सौदेबाज़ी का ठीकरा भी विधायक पर फोडने का प्रयास किया। अब क्यूंकि पार्टी पर गैदर कब्ज़ा जमा चुके है तो उनके लिए जरूरी है कि वे दूसरों के प्रति निष्ठा रखने वाले पार्टी के इन गद्दारों को बाहर का रास्ता दिखाकर वफादार कार्यकर्ताओं को मौका दें ? और वैसे भी प्रस्ताव का समर्थन करने वाले कांग्रेस के ज्यादातर पूर्व पार्षद शहर की जनता के साथ ही अपने वार्ड मे भी जनाधार खो चुके है इसलिये विधायक गैदर के लिए इन पार्षदों की टिकट काटना इतना मुश्किल नहीं है। इसके अलावा शेष बचे वार्डों में भी हार जीत का गणित भुलाकर गैदर योग्य व वफादार उम्मीदारों का चयन कर एक ऐसी नज़ीर पेश कर सकते है कि भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि विधायक गैदर को ओवरटैक करने की नहीं सोचेगा !
बहरहाल लम्बे संघर्ष के बाद राजनीति की मुख्यधारा पकड़ने वाले गैदर समझदार पॉलीटिशियन है। उम्मीद की जानी चाहिये कि वे ऊपर लिखे शेर की पंक्तियों को सही साबित कर उस भरोसे को सही साबित करेंगे जो क्षेत्र की जनता ने लगभग 50 हज़ार वोट से जिताकर दिखाया है।
– राजेंद्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।
