सूरतगढ़। शहर के सभी 45 वार्डों में सैकड़ो की संख्या में उम्मीदवार टिकट की लाइन में खड़े हैं। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी की टिकट की आस में इन लोगों की सांसे अटकी हुई। ऐसे हालात के बीच शहर के कई वार्डों में कुछ ऐसे चेहरे भी है जिन्हे उनके वार्ड की जनता टिकट मिलने और चुनाव नतीजे आने से पहले विजयी घोषित कर चुकी है।
ऐसा ही एक चेहरा है कृष्ण कुमार बेनीवाल। प्यार से कीनिया के नाम से जाने जाने वाले कृष्ण बेनीवाल वार्ड नंबर-43 से चुनाव मैदान में है। कृष्ण बेनीवाल की मां कमला बेनीवाल भी 2019 से 2024 के बीच पार्षद रह चुकी है। 2019 के चुनाव में कमला बेनीवाल की बम्पर जीत का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि उन्हें कुल पोल हुए 1013 वोट में से 753 वोट मिले। इसी कार्यकाल के दौरान अपनी मां के प्रतिनिधि के रूप में कृष्ण बेनीवाल ने वार्ड की समस्याओं के समाधान के लिए दिन-रात एक कर दिए।
वार्ड की टूटी सड़कों की समस्या हो या फिर सफाई की, पेयजल की समस्या हो या फिर स्ट्रीट लाइट की, किसी गरीब का राशन कार्ड बनाना हो या फिर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना, कृष्ण बेनीवाल ने ऐसे सभी कार्य को खुद का काम समझकर किया। वार्ड में लाखों रूपये के विकास कार्य किनिया के प्रयासों से हुए जिनमे, सड़क, नाली, पुलिया आदी शामिल है पिछले कार्यकाल में हुए। वार्ड के पट्टे बनाने की बात करें तो जहां पिछले बोर्ड में अनेक पार्षद पट्टे नहीं बनने का रोना रोते रह गए। वहीं कृष्ण बेनीवाल ने बड़ी संख्या में पट्टे दिलाकर वार्ड के लोगों को राहत प्रदान की। यही वजह है कि वार्ड में सभी वर्गो के लोग कृष्ण बेनीवाल को एक बार फिर पार्षद के रूप में देखना चाहते हैं।
हक़ीक़त तो ये है कि कांग्रेस से टिकट के दावेदारी जता रहे कृष्ण बेनीवाल उर्फ़ किनिया को वार्ड की बहुसंख्य जनता अपना पार्षद डिक्लेयर कर चुकी है। उनके समर्थक सोशल मीडिया और दूसरे मंचों पर भी किनिया की दावेदारी का समर्थन कर रहे हैं। किनिया को वार्ड के लोगों का जिस तरह का समर्थन मिल रहा है। उससे कांग्रेस के पास टिकट के लिए वार्ड -43 में फिलहाल किनिया से बेहतर कोई उम्मीदवार नज़र नहीं आ रहा है।
किनिया की टिकट की मजबूत दावेदारी का एक पहलू यह भी है कि विवादित विवेकानंद स्कूल को भूमि आवंटन प्रस्ताव मामले में ज़ब कांग्रेस के अधिकांश पार्षदो ने अपने जमीर का सौदा कर लिया तब भी किनिया का परिवार पार्टी व्हिप के साथ मजबूती से खड़ा रहा था।
वार्ड-43 में कांग्रेस टिकट की दावेदारी की बात करें तो किनिया के अलावा धानुका परिवार भी कांग्रेस की टिकट पर दावेदारी जता रहा है। हालांकि कांग्रेस ने अभी तक टिकट को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं किया है। कांग्रेस इस टिकट को लेकर क्या निर्णय लेती है यह तो भविष्य के गर्भ में छुपा हुआ है। परन्तु वार्ड के जातीय समीकरण की तरफ गौर फरमाए तो वार्ड में मुस्लिम समुदाय का बाहुल्य है जिसका झुकाव सीधा सीधा किनिया की तरफ है। जो किनिया को टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव में भी समर्थन का दावा कर रहा है। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस किनिया को टिकट देती है तो नतीजा कांग्रेस के पक्ष में आना करीब करीब तय हैं। वरना कांग्रेस को इस एक सीट का खामियाजा उठाना पड़ सकता है।
