

सूरतगढ़। सूरतगढ़ नगरपालिका इतिहास में आज तक की सबसे बड़ी जीत की बात करें तो वह कांग्रेस प्रत्याशी तुलसी आसवानी के नाम दर्ज है। जिन्होंने वर्ष 2019 के चुनाव में वार्ड नंबर-27 (पुराना) से 785 वोट से जीत दर्ज कर कीर्तिमान बनाया था। तुलसी असवानी की इस जीत का श्रेय उनके पति धर्मदास सिंधी को जाता है, जो इस बार वार्ड नंबर-24 से चुनाव मैदान में है। परिसीमन के बाद नए बने वार्ड नंबर-24 में पुराने वार्ड नंबर-27 का एक बहुत बड़ा हिस्सा शामिल है। ऐसे में पिछले चुनाव के परिणाम को ध्यान में रखा जाए तो वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी धर्मदास सिंधी की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
गुरुवार को झूलेलाल मंदिर के पास धर्मदास सिंधी के चुनाव कार्यालय का उद्घाटन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में वार्ड के सभी वर्गो के मतदाताओं की भीड़ नजर आई। भीड़ में कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में उत्साह भी देखने लायक था। शाम 5:15 बजे के स्थान पर करीब 2 घंटे देरी से हुए उद्घाटन कार्यक्रम के बावजूद भीड़ कम नहीं हुई। जो वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी धर्मदास सिंधी की मजबूत स्थिति की और साफ इशारा करती है।
भाजपा प्रत्याशी दीपा तरड़ के लिए बड़ी चुनौती, जातीय समीकरण सिंधी के पक्ष में ?
वार्ड -24 के जातीय समीकरणों की अगर बात करें तो वार्ड में बिश्नोई और अरोड़ा समुदाय का प्रभुत्व है, इसके अलावा सिंधी समाज के वोट भी वार्ड में अच्छी खासी संख्या में है। हालांकि भाजपा की तरफ से बिश्नोई समाज की प्रत्याशी दीपा तरड़ चुनाव लड़ रही हैं। लेकिन इसके बावजूद बिश्नोई समाज के कई चेहरे धर्मदास सिंधी के लिए ओपन कैंपेन में जुटे हुए हैं। जिससे बिश्नोई समाज के वोट में विभाजन नजर आ रहा है। वही अरोड़ा समुदाय का बहुतायत समर्थन भी धर्मदास सिंधी को मिलता दिख रहा है। जहां तक सिंधी वोटर्स की बात है वे धर्मदास सिंधी के पक्ष में पूरी तरह से एकजुट नजर आ रहे हैं।
इसके अलावा वार्ड में सोनी, कुम्हार, सरदार और अन्य जातियों के मतदाता भी बड़ी संख्या में है। इन समाजो के वार्ड में रहने वाले सभी प्रमुख चेहरे सिंधी के कार्यालय उद्घाटन में नज़र आये, जो सिंधी को सर्व समाज के समर्थन का सीधा इशारा है। फिलहाल वार्ड-24 में मतदाताओं का जो रुझान नजर आ रहा है उसको देखते हुए भाजपा की संभावित चेयरमैन प्रत्याशी दीपा तरड़ के लिए पहली बाधा पार होना मुश्किल नजर आता है।
पूर्व पार्षद रहने का भी सिंधी को मिल रहा फायदा
पिछले चुनाव में पत्नी तुलसी आसवानी के ऐतिहासिक जीत दर्ज कर पार्षद बनने का फायदा भी इस चुनाव में धर्मदास सिंधी को मिल रहा है। क्योंकि पिछले कार्यकाल में पार्षद प्रतिनिधि के रूप में सिंधी ने वार्ड में विकास कार्यों की झड़ी लगा दी। नगरपालिका के पिछले बोर्ड मे पक्का वार्ड होने के बावजूद करीब सवा करोड़ के विकास कार्य और सर्वाधिक 159 पट्टे वार्ड नंबर-27 में ही जारी हुए थे। इसके अलावा वार्ड की साफ सफाई, सड़क, पानी और लाइट की व्यवस्था में भी सिंधी ने कसर नहीं छोड़ी। अनेकों बार उन्होंने अपने खुद के पैसों से वार्ड में विद्युत पोलों पर लाइटें लगाकर वार्डवासियों को राहत प्रदान की। यही वजह है कि वार्डवासियों के साथ उनके गहरे संबंध बन चुके हैं।
इन सबके अलावा भाजपा प्रत्याशी के महिला होने का फायदा भी सिंधी को मिलता दिख रहा है। क्योंकि वार्ड के लोगों का यह भी मानना है कि महिला पार्षद से संपर्क साधना आमतौर पर मुश्किल होता है। जिससे जरूरत पड़ने पर काम अटक जाते हैं। जबकि धर्मदास सिंधी हर समय वार्ड के लोगों के लिए उपलब्ध रह सकते हैं।
वार्ड के लोगों ने ही दिलाया टिकट, टिकट कटने की चल रही थी चर्चा….
विवेकानंद स्कूल मामले मे रिट वापसी को लेकर विधायक डूंगरराम गैधर पर कांग्रेस में ही धर्मदास सिंधी की टिकट काटने का दबाव था। तब वार्ड-24 के प्रमुख लोगों ने ही विधायक से संपर्क कर सिंधी को टिकट देने का दबाव बनाया और सिंधी को वार्ड से जीताने का भरोसा दिलाया। इसके अलावा पार्टी के सर्वे में सिंधी की विनिंग स्थिति को देखते हुए पार्टी के बड़े नेताओं की सलाह के बाद गैदर सिंधी को टिकट देने पर मजबूर हुए । फिलहाल धर्मदास सिंधी की वार्ड में मजबूती को देखते हुए विधायक गैदर का यह निर्णय सफल होता दिख रहा है।
- राजेंद्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।
