सूरतगढ़। शहर में इस बार नगरपालिका चुनाव में जो मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चित रहा है वो है एजेंडा संख्या-7। नगरपालिका में एजेंडा संख्या-7 जनता के चुने हुए नुमाईंदों की गद्दारी के लिए सूरतगढ़ के इतिहास में दर्ज हो चुका है। ज़ब थोड़े से लालच में एक दो नहीं बल्कि शहर के 45 मे से 38 पार्षदों ने अपने ईमान का सौदा कर लिया। शहर के बीचोबीच स्थित अरबों रूपये की जिस जमीन को बचाने की लड़ाई पिछले 20 साल से चल रही थी, उसे थोड़े से लालच मे बेज़मीर पार्षदों ने कोड़ियों के दाम मे लुटा दिया।
वर्ष 2006 में ज़ब पहली बार इस जमीन के आवंटन का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में लाया गया था, तब कांग्रेस के पार्षदों ने विपक्षी धर्म निभाते हुए प्रस्ताव का विरोध किया ही था। साथ ही भाजपा मे ही स्व. इंद्र सरावगी और सुशील अग्रवाल जैसे रीढ़ वाले कुछ पार्षद थे, जिन्होंने बोर्ड बैठक मे इस प्रस्ताव का विरोध कर शहर की जनता के प्रति अपना कर्तव्य का निर्वहन किया।
लेकिन आज से 2 वर्ष पहले ज़ब नगरपालिका की बोर्ड बैठक में ऐजेंडा नंबर-7 लाया गया तो इस बार सत्ता पक्ष के भाजपाई पार्षदों मे कोई रीढ़ वाला नहीं था, तो इन पार्षदों को अपने जमीर का आवाज़ कैसे सुनाई देती ? वहीं विपक्षी कांग्रेसी पार्षदों ने प्रस्ताव को पास करने के लिए जिस बेहयाई का प्रदर्शन किया, वैसा भोंडा प्रदर्शन शायद नगरपालिका इतिहास कभी नहीं हुआ होगा ।
इससे भी शर्म की बात ये है कि भ्रष्टाचार की अफीम के आदी पिछले बोर्ड के वहीं चेहरे भोला भाली शक्ल बनाकर एक बार फिर चुनाव मैदान में उतर आये हैं। शहर की बेशकीमती जमीन को थोड़े से लालच में लूटाने वाले ये पूर्व पार्षद अब आपकी चौखट पर फिर वोटो की भीख मांग रहे हैं ? इनमें से कई पार्षद तो अपना चोला बदलकर नई पार्टी में शामिल हो चुके हैं। इन सबका एक ही उद्देश्य है कि किसी तरह से एक बार फिर जनता को गुमराह कर अगले पांच साल तक होने वाली लूट में अपनी हिस्सेदारी सेट कर ले।
गद्दार पार्षदों की टिकट काटकर विधायक गैदर ने निभाया जनसेवक का धर्म ?
आज से करीब 2साल पहले ज़ब पालिका की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव नंबर-7 लाया गया था, तब कांग्रेसी पार्षदों की गद्दारी के चलते बोर्ड बैठक में विधायक डूंगरराम गैदर को बेहद शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था। जिसके बाद उन्होंने नगरपालिका चुनाव में पार्टी के व्हीप की अनदेखी कर गद्दारी करने वाले पार्षदों को देने की घोषणा की थी।
आम तौर पर राजनेता राजनीतिक नफा नुकसान के लिए अपने वादे भूल जाते हैं। लेकिन विधायक डूंगरराम गैदर ऐसे राजनेताओं में शामिल नहीं है यह बात उन्होंने पार्टी से गद्दारी करने वाले सभी पार्षदों के टिकट काट कर साबित कर दी। वह भी तब जबकि इनमें कई ऐसे है जिनके धनबल और वार्ड के समीकरणों से फिर से जीतने की पूरी संभावना है। लेकिन राजनीति सुचिता के अनुरागी गैदर ने कांग्रेस का बोर्ड बनाने के उद्देश्य से इतर शुद्धिकरण की राह पकड़ी और इन सभी बागियों को टिकट काट कर बाहर का रास्ता दिखा दिया।
विधायक गैदर ने यह बोल्ड स्टेप उठाकर जनसेवक होने के अपने धर्म को निभा दिया है। इसलिए अब गैंद सूरतगढ़ की जनता के पाले में है ! शहर की जनता को चाहिये कि वह शहर के इन गद्दारों को पहचान ले ? अपने वोट की चोट से अब जनता चाहे तो इन बिके हुए जमीर वाले कथित जनसेवकों को उनके कुकर्मों की सजा दे सकती है ?
शहर की जागरूक जनता को इन चेहरों को याद रखना होगा ?
भाजपा के ओम प्रकाश अठवाल, संजय अग्रवाल, हंसराज स्वामी, सरला नायक, मोहन कंवर, यासमीन सिद्दीकी, बिरमा देवी तावनिया, संतोष गिरी, राजीव चौहान, तारा देवी ताखर और हरिप्रसाद दाधीच ने बोर्ड बैठक में एजेंडा नंबर-7 के पक्ष में वोट किया था। इनमें से संजय अग्रवाल, बिरमा देवी तावनीया को छोड़ दे तो बाकी सभी स्वंय या फिर अपने नजदीकी रिश्तेदार को खड़ा कर इस बार भी चुनाव लड़ रहे हैं। जिनमे से हरीश दाधीच उर्फ छोटू पंडित अब पलटी मारकर कांग्रेस की टिकट पर वार्ड नंबर-19 से चुनाव लड़ रहे हैं।
इसके अलावा राजनीतिक लाभ के लिए बंदर की तरह गुलाटी मारकर भाजपा मे शामिल होने वाली कलावती छिम्पा, प्रकाश कौर, सुरेश गवारिया, भागीरथ नायक और ओमप्रकाश कालवा ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया था। जिनमें से वार्ड -30 में कलावती छिम्पा के पुत्र कृष्ण छिम्पा और वार्ड-13 से सुरेश गवारिया चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा प्रस्ताव के विरोध में होने के बावजूद बोर्ड बैठक में खड़े होने का करेजा नहीं रखने वाले जगदीश मेघवाल भी (वार्ड-11से) चुनाव की चाह नहीं छोड़ पाए है।
दूसरी और कांग्रेस की बात करें टिकट कटने पर मोहम्मद फारूक (वार्ड-23), महेंद्र गोदारा (वार्ड-16), परमेश्वरी देवी गोदारा (ward-15), पूर्व वाइस चेयरमैन सलीम कुरैशी (ward-23) और दिलीप स्वामी निर्दलीय के रूप में ताल ठोक रहे हैं। इसके अलावा प्रस्ताव का विरोध करने वाले कांग्रेस के रोहिताश होटला अब भाजपा की टिकट पर वार्ड नंबर 21 से, निर्दलीय सुनील उर्फ़ बबलू सैनी वार्ड नंबर-42 से अबकी बार भाजपा की टिकट से चुनाव लड़ रहे हैं। वही जनता से संघर्षों के नाम पर वोट लेकर एजेंडा नंबर-7 पास करवाकर अपना एजेंडा सेट करने वाले मदन ओझा वार्ड-45 से चुनाव मैदान में है।
ईश्वरीय न्याय के बाद विधायक गेदर ने निभाई भूमिका ! क्या जनता की अदालत भी दोषियों को देगी दंड ?
ईश्वरीय न्याय में जिन लोगों का विश्वास है वह समझ सकते है कि एजेंडा नंबर-7 को पास करने में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष सहयोग करने वाले ज्यादातर पार्षदों को उनके कर्मों की सजा मिल चुके हैं। इन 38 में से कुछ तो वार्ड परिसीमन के चलते बदले आरक्षण के चलते खेल से बाहर हो चुके हैं। वहीं कांग्रेस के बागी पार्षदों की टिकट काटकर कुछ काम विधायक डूंगरराम गैदर ने कर दिया है।
इसलिये अब उन 38 में से जो स्वार्थी लोग चुनाव मैदान में है उन्हें रोकना इस शहर की जनता की जिम्मेदारी है। शहर के वार्डों की उन जनता वार्डों की जागरूक जनता को यह जिम्मेदारी लेनी होगी कि वे आम वोटर को जागरूक कर ऐसे लोगों को फिर से पार्षद बनने से रोकने में अपनी भूमिका अदा करें ? ताकि ऐसे लोग फिर से इस शहर की जनता को छल ना सके।
– राजेंद्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।
