चैयरमेन ओम कालवा का सहायक अभियंता को गरियाने का वीडियो वायरल
सूरतगढ़। सूरतगढ़ में अघोषित विद्युत कटौती के बीच शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। विद्युत विभाग के सहायक अभियंता कार्यालय में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के कई नेताओं ओर कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया । इस मौके पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अगुवाई कर रहे नगरपालिका चेयरमैन ओम कालवा ने विद्युत विभाग के सहायक अभियंता को खूब खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने सहायक अभियंता को लापरवाही बरतने और कामो को लटकाने का आरोप लगाया। चेयरमैन ओम कालवा के
सहायक अभियंता की क्लास लेने का वीडियो मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों और अन्य लोगों ने अपने कैमरे में कैद कर लिया। यह वीडियो दिनभर सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा। जिसके चलते चेयरमैन ओम कालवा और सहायक अभियंता की हॉट टॉक चर्चा का विषय बनी हुई है। कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष परसराम भाटिया के अलावा, वाइस चेयरमैन सलीम कुरेशी, पार्षद पति धर्मदास सिंधी,पार्षद महेन्द्र गोदारा,शंकर नायक ओर रोहिताश सहित कई कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।इसके अलावा विरोध प्रदर्शन में अंतिम समय में पूर्व विधायक गंगाजल मील भी पहुंचे और उन्होंने विद्युत विभाग के अधिकारियों को शहर में विद्युत व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी का विरोध प्रदर्शन खड़े कर रहा कई सवाल ?

आमतौर पर जन समस्याओं को लेकर विपक्षी पार्टियां ही विरोध प्रदर्शन करती हैं। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि विरोध प्रदर्शन सरकार के विरुद्ध होते है। ऐसे में जब कांग्रेस की सरकार सूबे की सत्ता में है तो फिर ब्लॉक् कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन को क्या कहा जाए ? क्या यह मान लिया जाए कि सूरतगढ़ में कांग्रेस पार्टी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है ? क्या इस प्रदर्शन का जनता में यह मैसेज नही जा रहा कि सरकारी विभागों में बैठे अधिकारी सत्ताधारी पार्टी और उनके नेताओं को कुछ नही समझते है ? शायद इसीलिए ब्लॉक कांग्रेस नेताओं को प्रदर्शन में पूर्व विधायक गंगाजल मील को बुलाना पड़ा। पूर्व विधायक को प्रदर्शन में बुलाकर ब्लॉक् कांग्रेस नेताओं ने अपनी P तो बना ली पर क्या उन्होंने पूर्व विधायक को अपनी ही सरकार के विरुद्ध कठघरे में नही खड़ा कर दिया है ? ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष परसराम भाटिया काफी सुलझे हुए व्यक्ति माने जाते हैं। फिर ऐसी क्या वजह रही कि उन्होंने अपनी ही सरकार के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया ? क्या ब्लॉक कांग्रेस के नेताओं को इस बात का ज्ञान नहीं है कि पूर्व विधायक अभी भी सूरतगढ़ में सत्ता के शीर्ष पर विराजमान है ? वे जब चाहे इन नाकारा अधिकारियों को सत्ता के चाबुक से लाइन पर ला सकते हैं। ऐसे में जो अधिकारी लापरवाही से कार्य कर रहे हैं उन्हें पूर्व विधायक के माध्यम से बुलाकर आवश्यक आदेश दिलाये जा सकते थे। पूर्व विधायक को इसके लिए अधिकारियों के पास ले जाने की कतई आवश्यकता नहीं थी। लेकिन ब्लॉक कांग्रेस नेताओं ने अति उत्साह या कहें कि बेेेवकूफ़ी केे चलते प्रदर्शन में पूर्व विधायक को आमंत्रित कर लिया। वैसे राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि पूर्व विधायक सहित कांग्रेस के बड़े नेताओं को कुछ चापलूस किस्म के व्यक्ति घेरे रहते हैं। जो अपने नंबर बनाने के चक्कर में इसी तरह की ऊलजुलूल योजना बनाकर कांग्रेस के बड़े नेताओं को बेवजह शर्मिंदा होने का अवसर देते रहते हैं। बहरहाल पूर्व विधायक सहित कांग्रेस के बड़े नेताओं को इस घटना से सबक लेकर चापलूसों से सावधान रहने की जरूरत है।
अन्ततः….
कांग्रेस पार्टी के इस विरोध प्रदर्शन के राजनीतिक मायने भले ही कुछ भी हो । यह अच्छी बात है कि कांग्रेस के नेताओं को जनता की याद आई। कांग्रेस के नेता यदि जनता के लिए वास्तव में फिक्रमंद है तो उन्हें सरकारी विभागों में बैठे अडियल टट्टुओं को विरोध प्रदर्शन की बजाय सत्ता के चाबुक से हाँकना होगा। जिससे कि वे जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें। रही बात विरोध प्रदर्शनों की तो यह काम विपक्ष के लिए छोड़ देना चाहिए। -राजेन्द्र जैन
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