सूरतगढ़। शहर में कांग्रेस और भाजपा द्वारा नगरपालिका बोर्ड बनाने को लेकर चल रहा मुकाबला अब रोचक हो गया है। भाजपा की तरफ से ज्योति कँवर को प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं अप्रत्याशित निर्णय लेते हुए कांग्रेस ने बागी हुए राजाराम गोदारा की पत्नी परमेश्वरी देवी गोदारा को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। विधायक डूंगरराम गैदर ने किन परिस्थितियों में परमेश्वरी देवी गोदारा को प्रत्याशी बनाने का निर्णय लिया है यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन परमेश्वरी देवी गोदारा के नामांकन के बाद कांग्रेस की और से 24 पार्षदों के समर्थन का दावा किया जा रहा है। कांग्रेस के 16 पार्षदों से इतर करीब आधा दर्जन पार्षद राजाराम गोदारा के पास बाड़ाबंदी में होने की चर्चा है। दोनों को मिला ले तो कुल 22 पार्षद कांग्रेस के साथ दिखाई दे रहे। दूसरी और भाजपा की बात करें तो पिछले दो दिनों से भाजपा के साथ 22 पार्षद होने की चर्चाओं पर यकीन करें तो मामला अभी बराबर दिखाई पड़ता है।
वैसे राजाराम गोदारा खेमे में मौजूद एक पार्षद का रुझान भाजपा की तरफ होने की भी चर्चा चल रही है। संघ पृष्ठभूमि के इस पार्षद ने भाजपा से टिकट मांगी थी, टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। बताया जा रहा है कि इस पार्षद के परिजन भाजपा नेताओं के संपर्क में है और उनका कहना है वे भाजपा के साथ है। अगर वास्तव में ऐसा है तो वोटिंग के समय उस निर्दलीय पार्षद का वोट भाजपा के पक्ष में गिरेगा और ज्योति कंवर बाजी मार सकती है।
इसके अलावा वार्ड-1 से जीती सीपीआई की प्रत्याशी मैना देवी का वोट भी इस चुनाव में अहम होता दिखाई दे रहा है। मैंना देवी का समर्थन अब तक कांग्रेस के साथ जोड़कर देखा जा रहा था। लेकिन परमेश्वरी देवी गोदारा के प्रत्याशी बनाने की घोषणा के बाद क्या सीपीआई प्रत्याशी का स्टैंड यही रहेगा, यह अभी संशय है। यहीं कांग्रेस में परमेश्वरी देवी गोदारा को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाए जाने पर कांग्रेस खेमे में बगावत के संभावना भी बन सकती है। ऐसे में क्रॉस वोटिंग होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। जिसका फायदा भी भाजपा प्रत्याशी ज्योति कँवर को मिल सकता है।
कुल मिलाकर परमेश्वरी देवी गोदारा को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाकर कांग्रेस ने भले ही यह दिखाने की कोशिश की है कि वह अध्यक्ष बनाने की दौड़ में अभी भी शामिल है। लेकिन सच तो यह है कि चुनाव परिणाम में बराबर रहने के बावजूद बोर्ड बनाने के प्रयासों में कांग्रेस के दिग्गज नेता पीछे गए। इसकी वजह भले ही आर्थिक रही हो। कांग्रेस के नेता अगर प्रयास करते तो निर्दलीय के रूप में जीते कांग्रेस माइंडसेट वाले एक दो पार्षद कांग्रेस के साथ आ सकते थे। लेकिन कांग्रेस नेता नाकामयाब रहे। दूसरी और भाजपा के सुरेंद्र राठौड़ गुट और गोदारा गुट द्वारा समय रहते निर्दलीय पार्षदों के बाद बाड़ाबंदी कर लेने के चलते कांग्रेस के पास अध्यक्ष पद की लड़ाई लड़ने के लिए ज्यादा कुछ बचा नहीं था। संभवत इसी वजह से हेगिंग सोल्डर लिए कांग्रेस नेताओं ने गोदारा गुट की शर्ते मानते हुए परमेश्वरी देवी गोदारा को कांग्रेस का प्रत्याशी घोषित कर दिया।
बहरहाल कांग्रेस और गोदारा परिवार के समर्थक भले ही उत्साहित होकर जीत का दावा कर रहे हैं, मगर अभी जिस तरह के राजनीतिक हालात है उससे तो लगता है कि ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है।
– राजेन्द्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।
