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लोगों का प्रकृति प्रेम देश भर मे बन रहा मिसाल ?

सूरतगढ़ । दीपावली हो और पटाखे नहीं बजे, भारत मे इस बात की हम शायद कल्पना भी नहीं कर सकते है। क्यूंकि हमारे यहां दीपावली पटाखों के बगैर अधूरी है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोग दीपावली को पटाखे जलाकर अपनी खुशियों को सेलिब्रेट करते हैं। लेकिन देश में कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां दीपावली का उत्साह तो कम नहीं होता, मगर यहां पटाखों की आवाज सुनाई नहीं देती। विशेष बात ये है कि इसकी वजह कोई सरकारी आदेश या प्रशासनिक प्रतिबंध नहीं, बल्कि ग्रामीणों का बेजुबान जीवों के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता है।

दरअसल दक्षिण भारत के तमिलनाडु के कई गांवों में लोग चमगादड़ों की सुरक्षा के लिए दीपावली पर पटाखे नहीं जलाते। यही नहीं यह कोई एक-दो साल पुरानी पहल नहीं है, बल्कि कई गांवों में यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। तमिलनाडु के मयिलादुथुरई जिले के पेरम्बूर गांव में स्थित एक विशाल बरगद का पेड़ सैकड़ों चमगादड़ों का बसेरा है। स्थानीय लोग इस स्थान को ‘वव्वाल थोप्पू’ यानी चमगादड़ों का बाग कहते हैं। इस पेड़ पर रहने वाले चमगादड़ों को ग्रामीण अपने गांव का हिस्सा मानते हैं। इसी के चलते यहां एक सदी से भी अधिक समय से लोग दीपावली के दौरान पटाखे जलाने से परहेज करते आ रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि पटाखों की तेज आवाज और आतिशबाजी से पेड़ों पर रहने वाले चमगादड़ परेशान हो सकते हैं और अपना बसेरा छोड़कर दूसरी जगह जा सकते हैं। इसलिए गांव में दीपावली का त्योहार पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है। लोग घरों में दीपक जलाते हैं, मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार के साथ मिठाइयां बांटकर खुशियां साझा करते हैं, लेकिन आतिशबाजी से दूरी बनाए रखते हैं।

इसी तरह तमिलनाडु के काड्पाडी के नजदीक कलापट्टू गांव में भी तीन पीढ़ियों से पटाखे नहीं जलाने की परंपरा निभाई जा रही है। इस गांव के निवासी जी. संपत के मुताबिक वे ज़ब 12 वर्ष के थे, तब उनके पिता ने उन्हें पेड़ों पर रहने वाले चमगादड़ों की सुरक्षा के लिए पटाखे जलाने से मना कर दिया था। पिता की यही सीख धीरे-धीरे पूरे परिवार और गांव की परंपरा बन गई। आज कई दशक बीत जाने के बाद भी ग्रामीण इस सीख का पालन कर रहे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि चमगादड़ों को परेशान करना उन्हें मंजूर नहीं है और वे बाहरी लोगों को भी इन जीवों को पकड़ने या नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं देते।

इसके अलावा तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के थोपुपट्टी और सामपट्टी जैसे गांवों में भी चमगादड़ों के संरक्षण के लिए आतिशबाजी से दूरी बनाई जाती है। इन गांवों के बड़े पेड़ों पर बड़ी संख्या में फल खाने वाले चमगादड़ रहते हैं। स्थानीय लोग इन्हें अपने गांव का शुभचिंतक मानते हैं। शाम के समय जब चमगादड़ों के झुंड भोजन की तलाश में पेड़ों से निकलते हैं और आसमान में उड़ते दिखाई देते हैं, तो ग्रामीणों के लिए यह नजारा आकर्षण का केंद्र बन जाता है। इन गांवों में चमगादड़ों के प्रति सम्मान इतना गहरा है कि लोग उन्हें केवल एक जंगली जीव नहीं, बल्कि अपने प्राकृतिक परिवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।

कोयंबटूर के निकट किट्टमपालयम गांव में भी चमगादड़ों के संरक्षण को लेकर सामुदायिक जागरूकता की मिसाल देखने को मिलती है। यहां वर्ष 2012 में सरकारी मिडिल स्कूल के माध्यम से बच्चों को चमगादड़ों और पक्षियों के संरक्षण के बारे में जागरूक करने का अभियान चलाया गया था। इसके बाद गांव के सैकड़ों परिवारों ने दीपावली पर पटाखे नहीं जलाने का संकल्प लिया। बच्चों ने भी इस संदेश को अपने परिवारों और आसपास के लोगों तक पहुंचाया। नतीजा यह हुआ कि अब इस गांव के लोग दीपावली पर पटाखे नहीं जलाते हैं।

हालांकि आमतौर पर चमगादड़ों को लेकर लोगों में कई तरह की गलत धारणाएं भी देखने को मिलती हैं, लेकिन तमिलनाडु के इन गांवों के लोगों ने अपने व्यवहार से दिखाया है कि त्योहार मनाने के कई तरीके हो सकते हैं और अपनी खुशी के लिए किसी दूसरे जीव को परेशान करना जरूरी नहीं है। यहां न तो दीपावली की खुशियों में कमी आती है और न ही उत्सव का उत्साह कम होता है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां आसमान में पटाखों की जगह चमगादड़ों के उड़ते झुंड दिखाई देते हैं और घरों के बाहर जलते दीपक त्योहार की रोशनी फैलाते हैं।

तमिलनाडु के इन गांवों की कहानी पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि त्योहारों की असली खुशी केवल अपने घरों को रोशन करने में नहीं, बल्कि उन बेजुबानों के जीवन और आशियाने को सुरक्षित रखने में भी है, जिनका इस धरती पर उतना ही अधिकार है जितना हमारा। तमिलनाडु के गांव की इस कहानी से आप और हम भी प्रेरणा ले सकते हैं। अगर आपके आसपास के घरों में अगर कोई बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति हैं, कोई ऐसा व्यक्ति है जो सांस के गंभीर रोग से पीड़ित है तो हमें पटाखे नहीं बजाकर संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए। याद रखिए खुशियां हमेशा इंटरनल होती है, अपने मजे के लिए दूसरों को परेशान करना खुशी नहीं है।

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सूरतगढ़। शहर का नगरपालिका प्रशासन और विकास के वादे पर चुने गए पार्षद अगर अगले पांच साल तक 24×7 भी काम करें तो इस शहर में इतनी समस्याएं है कि वे कम नहीं होगी। मगर फिलहाल इस शहर में सबसे बड़ा सवाल ये है कि नगरपालिका के वाइस चेयरमैन को बैठने को कुर्सी और कमरा मिलना चाहिए या नहीं ? कुछ दिनों से यह सवाल शहर की राजनीतिक फिजाओं में तैर रहा है। नगरपालिका एक्ट के कुछ जानकर बताते हैं कि वाइस चेयरमैन को कुर्सी और अलग कमरा मिले यह एक्ट में कहीं नहीं लिखा है ? वहीं कुछ लोग इस ख्याल के है कि वाईस चेयरमैन एक तरह से पार्षद ही होता है। वाइस चेयरमैन के पास कोई ताक़त नहीं होती। इन लोगों का दावा अगर सही माना जाये तो कांग्रेस को यह मांग ही नहीं उठानी चाहिए थी।

                  राजनितिक नजरिये से देखें तो कुछ हद तक  इसे स्वीकारा जा सकता है। लेकिन प्रकरण मे एक दूसरा पक्ष भी है। सबसे पहली बात तो ये है कि वॉइस चेयरमैन का चुनाव पार्षदों के वोट से होता है। ऐसे मे उसके अस्तित्व को बिल्कुल नकारना एक तरह से उस लोकतांत्रिक व्यवस्था को नकरना है, जिसके तहत अध्यक्ष का भी चुनाव हुआ है। इसके साथ ही बिना अधिकार के पद की वैल्यू नहीं होने का तर्क भी बेमानी ही है। क्यूंकि देश मे ही ऐसे अनेक पद है जिनके पास अधिकार नहीं है, मगर संवैधानिक व्यवस्था के चलते उनकी पदीय गरिमा सर्वोच्च है। भारत के राष्ट्रपति का पद भी इसी का एक उदाहरण है।

दूसरा एक तथ्य यह भी है कि कांग्रेस के पिछले बोर्ड में राजनीतिक कारणों से ही सही बनाई गई वॉइस चेयरमैन और पार्षदों के बैठने की जो व्यवस्था बनाई गई थी, उसे एकाएक समाप्त करने की आखिर क्या जरूरत थी ? हालांकि सच ये भी है कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद इस कक्ष पर महिला पार्षद कक्ष की प्लेट भी लगाई गई थी। लेकिन चुनाव नतीजे आने से ठीक पहले महिला पार्षद कक्ष में राजस्व शाखा शुरू करना खुद सत्ता पक्ष को कटघरे में खड़ा करता है।

भले ही इस मामले में सत्ता पक्ष कमरे नहीं होने या फिर एक्ट में व्यवस्था नहीं होने का लाख दावा करे मगर यह विवाद खुद सत्ता द्वारा विपक्षी पार्षदों को प्रताड़ित करने का उपक्रम ही प्रतीत होता है ? यहाँ एक सवाल यह भी है कि जनता के चुने हुए नुमाइन्दे जिनमे महिलाओं की संख्या अच्छी खासी है अगर पालिका कार्यालय में बैठने के लिए एक स्थान की डिमांड अगर कर रहें है तो इसमें कुछ गलत नहीं है ? 

          इस मामले में चेयरमैन ज्योति कंवर के प्रतिनिधि  सुरेन्द्र राठौड़ कह रहें है कि कांग्रेसी पार्षद भी चेयरमैन कक्ष में बैठ सकते है। यह बात कहने में तो ठीक है लेकिन अगर कुछ ही कांग्रेसी पार्षदों ने ही चेम्बर में बैठना शुरू कर दिया तो खुद चेयरमैन के लिए काम कर पाना मुश्किल हो जायेगा ! जिसकी कल्पना अभी चेयरमैन या उनके नुमाईंदो को नहीं है।

          बहरहाल आज इस मामले कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। अब देखना होगा कि अपने कार्यकाल की इस पहली चुनौती का सामना अध्यक्ष ज्योति कंवर और उनके पति सुरेंद्र राठौड़ किस तरह से करते है। इस मामले में नियम नहीं होने का बहाना बनाकर गेंद ईओ के पाले में डालकर वे बच नहीं सकते। वैसे भी नगरापालिका में नियमों से कितने काम होते है ये कौन नहीं जानता ! बेहतर होगा कि ज्योति कंवर और सुरेन्द्र राठौड़ विपक्षी पार्षदों के साथ बैठकर इसका कोई सकारात्मक हल निकाले। राजनीति में आगे वहीं बढ़ता है जो सबको साथ लेकर चलता है यह बात सुरेन्द्र राठौड़ जितनी जल्दी समझ लेंगे उतना ही बेहतर है।

एक और बात, इस मामले में सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ नेता वाईस चेयरमैन और पार्षदों के लिए कक्ष का विरोध का दिखावा कर रहें है। मगर सच्चाई ये है कि वॉइस चेयरमैन कक्ष के विरोध के बहाने ये लोग खुद को चेयरमैन का वफादार साबित कर बस अपना उल्लू सीधा करना चाहते है। इसलिये नवनिर्वाचित चेयरमैन को अपने स्वविवेक से इस मामले में निर्णय करना चाहिए। एक बेहद घृणित और चर्चित बीमारी के बारे में कहा जाता था कि बचाव ही उपचार है। अपने आस पास पनप रही इन बीमारियों को चेयरमैन और उनके प्रतिनिधि जितनी जल्दी समझ लेंगे उतना ही उनका राजनितिक जीवन लम्बा होगा। 

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–राजेन्द्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। शहर में कांग्रेस और भाजपा द्वारा नगरपालिका बोर्ड बनाने को लेकर चल रहा मुकाबला अब रोचक हो गया है। भाजपा की तरफ से ज्योति कँवर को प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं अप्रत्याशित निर्णय लेते हुए कांग्रेस ने बागी हुए राजाराम गोदारा की पत्नी परमेश्वरी देवी गोदारा को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। विधायक डूंगरराम गैदर ने किन परिस्थितियों में परमेश्वरी देवी गोदारा को प्रत्याशी बनाने का निर्णय लिया है यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन परमेश्वरी देवी गोदारा के नामांकन के बाद कांग्रेस की और से 24 पार्षदों के समर्थन का दावा किया जा रहा है। कांग्रेस के 16 पार्षदों से इतर करीब आधा दर्जन पार्षद राजाराम गोदारा के पास बाड़ाबंदी में होने की चर्चा है। दोनों को मिला ले तो कुल 22 पार्षद कांग्रेस के साथ दिखाई दे रहे। दूसरी और भाजपा की बात करें तो पिछले दो दिनों से भाजपा के साथ 22 पार्षद होने की चर्चाओं पर यकीन करें तो मामला अभी बराबर दिखाई पड़ता है।

वैसे राजाराम गोदारा खेमे में मौजूद एक पार्षद का रुझान भाजपा की तरफ होने की भी चर्चा चल रही है। संघ पृष्ठभूमि के इस पार्षद ने भाजपा से टिकट मांगी थी, टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। बताया जा रहा है कि इस पार्षद के परिजन भाजपा नेताओं के संपर्क में है और उनका कहना है वे भाजपा के साथ है। अगर वास्तव में ऐसा है तो वोटिंग के समय उस निर्दलीय पार्षद का वोट भाजपा के पक्ष में गिरेगा और ज्योति कंवर बाजी मार सकती है।

इसके अलावा वार्ड-1 से जीती सीपीआई की प्रत्याशी मैना देवी का वोट भी इस चुनाव में अहम होता दिखाई दे रहा है। मैंना देवी का समर्थन अब तक कांग्रेस के साथ जोड़कर देखा जा रहा था। लेकिन परमेश्वरी देवी गोदारा के प्रत्याशी बनाने की घोषणा के बाद क्या सीपीआई प्रत्याशी का स्टैंड यही रहेगा, यह अभी संशय है। यहीं कांग्रेस में परमेश्वरी देवी गोदारा को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाए जाने पर कांग्रेस खेमे में बगावत के संभावना भी बन सकती है। ऐसे में क्रॉस वोटिंग होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। जिसका फायदा भी भाजपा प्रत्याशी ज्योति कँवर को मिल सकता है। 

       कुल मिलाकर परमेश्वरी देवी गोदारा को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाकर कांग्रेस ने भले ही यह दिखाने की कोशिश की है कि वह अध्यक्ष बनाने की दौड़ में अभी भी शामिल है। लेकिन सच तो यह है कि चुनाव परिणाम में बराबर रहने के बावजूद बोर्ड बनाने के प्रयासों में कांग्रेस के दिग्गज नेता पीछे गए। इसकी वजह भले ही आर्थिक रही हो। कांग्रेस के नेता अगर प्रयास करते तो निर्दलीय के रूप में जीते कांग्रेस माइंडसेट वाले एक दो पार्षद कांग्रेस के साथ आ सकते थे। लेकिन कांग्रेस नेता नाकामयाब रहे। दूसरी और भाजपा के सुरेंद्र राठौड़ गुट और गोदारा गुट द्वारा समय रहते निर्दलीय पार्षदों के बाद बाड़ाबंदी कर लेने के चलते कांग्रेस के पास अध्यक्ष पद की लड़ाई लड़ने के लिए ज्यादा कुछ बचा नहीं था। संभवत इसी वजह से हेगिंग सोल्डर लिए कांग्रेस नेताओं ने गोदारा गुट की शर्ते मानते हुए परमेश्वरी देवी गोदारा को कांग्रेस का प्रत्याशी घोषित कर दिया।

बहरहाल कांग्रेस और गोदारा परिवार के समर्थक भले ही उत्साहित होकर जीत का दावा कर रहे हैं, मगर अभी जिस तरह के राजनीतिक हालात है उससे तो लगता है कि ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है।

– राजेन्द्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। नगरपालिका चुनाव के प्रचार के अंतिम चरण मे पहुंचते पहुंचते शहर के कई वार्डों में समीकरण बदलने लगे हैं। जिन वार्डों में पहले किसी एक उम्मीदवार की  जीत लगभग निश्चित मानी जा रही थी उन वार्डों में भी अब समीकरण बदलते दिख रहे हैं। शहर के बीचो-बीच स्थित वार्ड नंबर-44 मे ऐसे ही हालात बनते जा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से एक तरफा माने जाने वाले इस मुकाबले को कांग्रेस प्रत्याशी जमील अहमद उर्फ गुड्डू ने टक्कर मे लाकर खड़ा कर दिया है। पहले यह माना जा रहा था कि गुड्डू का स्कोर मुस्लिम कम्युनिटी के वोटो तक सीमित रह जाएगा। मगर हालात बदलते दिख रहे हैं इसकी वजह है कि गुड्डू के समर्थन में वार्ड के कई प्रमुख चेहरे चुनाव प्रचार में उतर आए हैं। वार्ड की बनिया कम्युनिटी और कांग्रेस से जुड़े कई प्रमुख व्यक्ति वार्ड में गुड्डू के लिए वोट मांग रहे हैं। इसके अलावा गुड्डू के अच्छे संपर्कों का फायदा भी उन्हें मिल रहा है। शहर में राजनीति में दूसरे क्षेत्रों से जुड़े कई प्रमुख लोग भी गुड्डू के लिए वोटो का जुगाड़ करने में जुटे हैं। यही वजह है कि कई राजनीतिक विश्लेषक अब इस मुकाबले को नजदीकी मुकाबला मानने लगे है।

दो निर्दलीय प्रत्याशी लग रहे भाजपा के वोटो में सेंध 

 वार्ड-44 में मुकाबला कड़ा होने की एक वजह यह भी है कि वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशी महावीर प्रसाद भोजक और सूरज गोसाई भी चुनाव मैदान में है। सूरज गोसाई भाजपा कार्यकर्ता है और वह भी भाजपा की टिकट मांग रहे थे। टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय के रूप में ताल ठोक दी है। ऐसा माना जा रहा है कि सूरज गोसाई भाजपा के वोटो में सेंध लगाएंगे, जिसका फायदा कांग्रेस प्रत्याशी गुड्डू को होगा। ठीक है ऐसा ही मामला महावीर प्रसाद भोजक के मामले में है जिन्हे अच्छे खासे वोट मिलने की संभावना जताई जा रही है। भोजक को मिलने वाले अधिकांश वोट भी भाजपा के ही होंगे। स्पष्ट है कि दोनों प्रत्याशियों द्वारा भाजपा को नुकसान हो रहा है जिसकी वजह से गुड्डू लगातार मजबूत हो रहा है।

सांसद और विधायक ने की गुड्डू के पक्ष में सभा, लोगों से की समर्थन की अपील 

चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में श्रीगंगानगर सांसद कुलदीप इंदौरा और विधायक डूंगरराम गेदर ने रविवार शाम को वार्ड-44 में कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में रैली की। सभा में बड़ी संख्या में वार्ड के महिला पुरुष मौजूद रहे। कांग्रेस प्रत्याशी गुड्डू के समर्थन में लोगों ने नारेबाजी की ओर गुड्डू को जीत का भरोसा दिलाया। इस दौरान सांसद और विधायक ने कांग्रेस प्रत्याशी जमील अहमद उर्फ गुड्डू के पक्ष में वोट देने की अपील की। सभा मे बड़ी संख्या में वार्ड के लोगों की मौजूदगी इस बात का स्पष्ट इशारा है कि मामला कड़ा होने वाला है।

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सूरतगढ़। पिछले कुछ सालों में युवाओं में राजनीति के प्रति रुझान बढा है। नगरपालिका चुनाव-2026 की बात करें तो शहर के कई वार्डों में युवा चेहरे अपना भाग्य आजमा रहे हैं। ऐसे ही युवा चेहरों में से एक है प्रदीप चौहान उर्फ मोनू। 

          पेशे से कांट्रेक्टर प्रदीप चौहान वार्ड नंबर-35 से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। प्रदीप चौहान को अपने अक्सर रामनवमी शोभा यात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए देखा होगा। प्रदीप के नेतृत्व में हर वर्ष आरसीपी दुर्गा मंदिर से रामभक्तों की टोली भव्य  यात्रा के रूप में निकलती है जो महाराणा प्रताप चौक पर मुख्य यात्रा में शामिल होती हैं। यह यात्रा प्रदीप की नेतृत्व क्षमता को बताने के लिए काफी है। इसके अलावा प्रदीप गौरक्षा दल से भी जुड़े हैं। राष्ट्रवादी धारा से जुड़े प्रदीप सर्दियों में गोवंश के लिए गर्म दलिया खिलाने के अभियान सभी जुड़े हैं।

            भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाने के अलावा प्रदीप समाज सेवा से भी जुड़े हुए हैं। उनके प्रयासों के चलते गत वर्ष आरसीपी कॉलोनी एरिया में पानी के ओवरहेड टैंक का निर्माण हुआ जिससे इन वार्डों में पेयजल की समस्या का काफी हद तक समाधान हुआ है। चौहान पार्षद चुनाव के माध्यम से राजनीति की मुख्य धारा में आने की ख्वाहिश रखते हैं। प्रदीप क्योंकि पिछले कई वर्षों से वार्ड में सक्रिय है इसलिए उनको चुनाव प्रचार अभियान के दौरान युवाओं के साथ साथ वार्ड की महिलाओं, बुजुर्गों का भी भारी समर्थन मिल रहा है। वार्ड के युवाओं की एक बड़ा हिस्सा प्रदीप चौहान के साथ खड़ा है, जो उनके चुनाव प्रचार अभियान को मजबूत कर रहा है।

नशे की समस्या का समाधान करना चाहते हैं प्रदीप 

 जहां दूसरे वार्डो के पार्षद सफाई,सड़क, बिजली, पानी और दूसरे मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बताते हैं वही प्रदीप चौहान के मुताबिक युवाओं को नशे से दूर करना उनके प्राथमिकता है। प्रदीप के मुताबिक वार्ड नंबर-34 की सबसे बड़ी समस्या युवाओं में नशे की बढ़ती लत है। प्रदीप का कहना है कि वार्ड की जनता उन्हें यदि पार्षद  के रूप में काम करने का मौका देती है तो वे प्रशासन के सहयोग से नशा मुक्ति के लिए अभियान चलाएंगे। इसके अलावा प्रदीप चौहान वार्ड में एक सामुदायिक भवन का निर्माण करवाना चाहते हैं। उनके मुताबिक वार्ड के गरीब लोगों को सामुदायिक भवन के अभाव में बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है।

वार्ड के लोगों से मांगा समर्थन, कहा ‘उम्मीदों पर 100% खरा उतरूंगा’ 

चुनाव प्रचार अभियान में जुटे प्रदीप चौहान ने वार्ड के लोगों से उनके पक्ष में समर्थन की अपील करते हुए कहा है कि वह वार्ड के लोगों की उम्मीद पर शत प्रतिशत खरा उतरेंगे। उन्होंने कहना है कि यदि वार्ड की जनता ने उन्हें समर्थन दिया तो वार्ड के लोगों को किसी भी काम के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। वे वार्ड की जनता के लिए 24 * 7 उपलब्ध  रहेंगे।

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कांग्रेस प्रत्याशी रेखा दुआ को समर्थन देते हुए

सूरतगढ़। शहर के जिन वार्डों में कांग्रेस की जीत लगभग तय दिख  रही है उनमे से वार्ड नंबर-42 भी एक है। इस वार्ड में कांग्रेस ने रेखा दुआ को चुनाव मैदान में उतारा है। रेखा दुआ पूर्व में वर्ष 2009 से 2014 के बीच इसी वार्ड से पार्षद रह चुकी है। रेखा दुआ अपने पति स्वर्गीय संजय दुआ के अधूरे सपनों को पूरा करने के भावनात्मक मुद्दे को लेकर चुनाव मैदान में है। सोशल मीडिया पर रेखा दुआ का एक इंटरव्यू भी वायरल हो रहा है जिसमे वह भावुक होकर बता रही है कि उनके पति स्वर्गीय संजय दुआ की इच्छा थी कि वे दोबारा वार्ड पार्षद बने और वार्ड की सेवा करें। यही वजह है कि वार्ड के मतदाताओं की सहानुभूति रेखा दुआ के साथ है जिसके चलते रेखा दुआ को वार्ड में भरपूर समर्थन मिल रहा है। 

               रेखा दुआ के मुकाबले भाजपा ने वार्ड से बाहर के पूर्व पार्षद सुनील उर्फ़ बबलू सैनी को टिकट दी गई है। सैनी के बाहरी होने और अरोड़ा जाति बहुल इस वार्ड में भाजपा कहीं भी मुकाबले में टिकती नहीं दिख रही है। ऐसे में रेखा दुआ का मुकाबला निर्दलीय प्रत्याशी सुमित भटेजा के बीच में होता नजर आ रहा है।

वार्ड में रेखा दुआ के पक्ष में एक तरफा माहौल होने की एक और वजह भी है। दरअसल इस वार्ड में रेखा दुआ के अलावा मनीष कालड़ा भी कांग्रेस की टिकट की दावेदारी जता रहे थे। कालड़ा की वार्ड में चुनाव की बेहतरीन तैयारी थी, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने रेखा दुआ को समर्थन की घोषणा करते हुए अपना पर्चा उठा लिया। इसी के चलते वार्ड में मामला कांग्रेस प्रत्याशी रेखा दुआ के पक्ष में हो गया है। 

पूर्व पार्षद रहते हुए रेखा दुआ ने करवाए वार्ड में ऐतिहासिक कार्य 

 वर्ष 2009 से 2014 के कार्यकाल में अपने पति स्वर्गीय संजय दुआ की मदद से रेखा दुआ ने वार्ड में अनेक विकास कार्य करवाये। वार्ड में होने वाली सबसे प्राचीन रामलीला जगदम्बा रामलीला के स्टेज व भवन का निर्माण रेखा दुआ के कार्यकाल में ही हुआ। इसके अलावा वार्ड में एक मात्र पार्क का निर्माण भी उन्ही के कार्यकाल की देन है।

यह भी एक तथ्य है कि शहर में पहली इंटरलॉक सड़क पहली बार रेखा दुआ के पार्षद रहते हुए इसी वार्ड में बनाई गई। इसी कार्यकाल में आईएचएसपीडी योजना के तहत वार्ड के दर्जनों गरीब परिवारों को मकान बनाने के लिए राशि मिली, जिससे उनके मकान का सपना पूरा हुआ। इसके अलावा कच्ची बस्ती जैसे नजर आने वाले वार्ड में सभी सड़क पक्की बनाने का श्रेय रेखा दुआ को जाता है।

वार्ड में सीसीटीवी कैमरे लगाने की है इच्छा ?

कांग्रेस प्रत्याशी रेखा दुआ के मुताबिक अगर उन्हें वार्ड के जनता पार्षद के रूप में काम करने का मौका देती है तो उनकी इच्छा पूरे वार्ड में सीसीटीवी कैमरे लगवाने की है। रेखा दुआ के मुताबिक सीसीटीवी कैमरे लगने से वार्ड में सुरक्षा बढ़ेगी और खासकर महिलाओं में भय कम होगा। इसके अलावा वार्ड और नालियों की सफाई और स्ट्रीट लाइट की समस्या पर भी उनके पास फोकस रहेगा। 

चुनाव कार्यालय के उद्घाटन में उमड़ी वार्डवासियों के भीड़

वार्ड 42 में कार्यालय उद्घाटन के अवसर पर विधायक डूंगरराम गैदर का जन्मदिन मनाते हुए
कार्यालय उद्घाटन के अवसर पर मौजूद भीड़ को संबोधित करते विधायक

कांग्रेस प्रत्याशी रेखा दुआ के चुनाव कार्यालय का उद्घाटन शुक्रवार शाम को विधायक डूंगरराम गैदर ने रिबन काटकर किया। कार्यालय उद्घाटन के मौके पर बड़ी संख्या में वार्डवासी पहुंचे और कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर विधायक के जन्मदिन के उपलक्ष में केक कटवाया गया। वहीं कांग्रेस से टिकट के दावेदारी जता रहे मनीष कालड़ा की पत्नी ने रेखा दुआ को माला पहनाकर समर्थन दिया। इस अवसर पर पूर्व विधायक राजेंद्र भादू, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष परसराम भाटिया, खुदरा किराणा विक्रेता संघ के पूर्व अध्यक्ष किशोर गाबा, व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष दीपक भाटिया सहित शहर के प्रमुख व्यक्ति मौजूद थे।

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सूरतगढ़। शहर के वार्ड नंबर-19 में निर्दलीय प्रत्याशी साहिर सिद्दीकी उर्फ़ राजू ने वार्ड के भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशियों की नींद उड़ा दी है। शुक्रवार को साहिर सिद्दीकी के चुनाव कार्यालय का शुभारंभ हुआ। वार्ड के ही प्रतिष्ठित जगदीश सिंह गिल, रामाशीष ठेकेदार, अमरीक सिंह, जयंती बैन और पूर्व ईओ लालचंद सांखला, अशोक भट्ट आदि ने रिबन काटकर कार्यालय का उद्घाटन किया। कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर बड़ी संख्या में वार्डवासी मौजूद रहे। इस मौक़े पर साहिर सिद्दीकी ने वार्डवासियों से समर्थन मांगते हुए वोट देने की अपील की। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा आवंटित सिलाई मशीन के निशान पर बटन दबाने की बात कही।

साहिर सिद्दीकी के कार्यालय का उद्घाटन करते अतिथि
साहिर सिद्दीकी के कार्यालय का उद्घाटन करते अतिथि

साहिर ने मुकाबला बनाया रोचक, भारी समर्थन से दुश्मनों के उड़ी नींद 

वार्ड-19 में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधे मुकाबले के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन साहिर सिद्दीकी के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरने से चुनावी समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं। दरअसल इलेक्ट्रॉनिक व्यवसाय से जुड़े साहिर की पहचान क्षेत्र में मददगार व्यक्ति की है। बसंत विहार,आनंद विहार और संगम विहार कॉलोनी स्थित आसपास के एरिया में किसी भी तरह की समस्या हो साहिर तैयार मिलते हैं। खासकर विद्युत संबंधी कोई भी समस्या हो तो वार्ड वासी सबसे पहले साहिर को याद करते हैं।

समर्थकों के अनुसार, रात हो या दिन, जरूरत के समय राजू लोगों की सहायता के लिए तैयार रहते हैं। यही वजह है कि साहिर को इसी मददगार व्यक्ति की इमेज का फायदा मिल रहा है। सेंट्रल स्टेट फॉर्म कॉलोनी हो या फिर बसंत विहार, आनंद विहार और संगम विहार कॉलोनी हो या फिर ढाब क्षेत्र का एरिया साहिर के समर्थक हर जगह मौजूद है। फिलहाल राजू को मिल रहे भारी समर्थन ने दोनों ही प्रत्याशियों खासकर भाजपा प्रत्याशी की नींद उड़ा दी है।

यास्मीन सिद्दीकी के कार्यकाल में भी हुई कई महत्वपूर्ण कार्य

साहिर सिद्दीकी उर्फ राजू के बड़े भाई की पत्नी यानि उनकी भाभी भी 2019-24 के बीच पार्षद रह चुकी हैं। अपने 5 साल के कार्यकाल में यासमीन सिद्दीकी ने वार्ड में कई विकासकार्य करवाए जिनमे पुरानी गिन्नानी में मलबा और मिट्टी भर्ती कराकर गंदगी से छुटकारा दिलाना सबसे महत्वपूर्ण है। ढाब में भर्ती करवा कर दोनों तरफ रोड का निर्माण व रोड लाइट लगाने का कार्य भी इसी कार्यकाल में हुआ। इसके अलावा इस जगह पर विश्वकर्मा मंदिर का निर्माण भी जनसहयोग से साहिर के भाई रिंकू सिद्दीकी के प्रयासों से करवाया गया। यहीं नहीं बसंत विहार कॉलोनी में बने पुराने पार्क का जीर्णोद्धार कर धौलपुर पत्थर युक्त दीवार का निर्माण करवा कर भव्य रूप देने का कार्य यास्मीन सिद्दीकी के कार्यकाल में हुआ था।

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सूरतगढ़। शहर के वार्ड नंबर-28 में निर्दलीय प्रत्याशी भारत भूषण शर्मा के चुनाव कार्यालय का शनिवार शाम शुभारंभ हुआ। उद्घाटन अवसर पर वार्ड के प्रबुद्ध एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इस दौरान भारत भूषण शर्मा ने वार्डवासियों से सहयोग और समर्थन की अपील करते हुए कहा कि मतदाताओं का एक-एक वोट बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वार्डवासियों को ऐसे प्रतिनिधि का चुनाव करना चाहिए, जो जरूरत के समय स्वयं उनके घर तक पहुंचे, न कि लोगों को अपनी समस्या लेकर प्रतिनिधि को ढूंढना पड़े।

भारत भूषण शर्मा ने गिनाई पिछले कार्यकाल की उपलब्धियां

भारत भूषण शर्मा ने अपने पिछले कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने वार्ड में हरसंभव विकास कार्य करवाने के प्रयास किए। सफाई, नालियां, बिजली, पानी और सड़कों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए लगातार काम किया गया। उन्होंने कहा कि जब भी वार्डवासियों ने किसी कार्य के लिए उन्हें याद किया, वे हमेशा उनकी मदद के लिए उपलब्ध रहे। शर्मा के अनुसार, उनके प्रयासों से वार्ड की दर्जनों महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की पेंशन शुरू करवाने में मदद मिली, जिससे उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने में सहूलियत हुई।

शर्मा ने बताया कि उनके प्रयासों से वार्ड में पक्की सड़कों के निर्माण, नई पाइपलाइन बिछाने और उच्च क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगाने व बीएसएनएल ऑफिस के पास नये पार्क के निर्माण जैसे कई कार्य हुए। इससे लोगों को लो-वोल्टेज और बिजली कटौती की समस्या से काफी हद तक राहत मिली।

उन्होंने कहा कि पिछली सरकार द्वारा चलाए गए ‘प्रशासन शहरों के संग’ अभियान के तहत भी बड़ी संख्या में पट्टे जारी करवाकर लोगों को उनको मालिकाना हक दिलाने का काम किया गया। कार्यालय शुभारंभ के दौरान मौजूद वार्डवासियों ने चुनाव को लेकर अपने विचार भी साझा किए।

टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय के रूप में ठोकी ताल

नगरपालिका के पिछले आम चुनाव में भारत भूषण शर्मा ने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में भारत भूषण ने भाजपा के श्रीकांत शर्मा को सौ से भी अधिक वोटो से हराकर जीत हासिल की थी। इस बार की बात करें तो एक बार फिर भाजपा प्रत्याशी के रूप में श्रीकांत शर्मा उनके सामने है। लेकिन वर्तमान में कांग्रेस द्वारा टिकट काट देने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है। फिलहाल कांग्रेस से सीट पर पूर्व लोकपाल अनिल धानुका मैदान में है। जिससे मुकाबले काफी रोचक हो गया है।

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सूरतगढ़। नगरपालिका चुनाव की सरगर्मियों के बीच शहर के वार्ड नंबर-27 की सीट हॉट सीट बनी हुई है। इस सीट पर भाजपा की तरफ से सरोज देवी गोयल चुनाव मैदान में है। सरोज देवी व्यापार मंडल के वर्तमान अध्यक्ष और भाजपा के शहर के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक विजय गोयल की धर्मपत्नी है। इस सीट पर पूर्व पार्षद चरणजीत सिंह टंडन टिकट मांग रहे थे लेकिन भाजपा ने उनकी जगह सरोज देवी गोयल को प्राथमिकता देते हुए टिकट दी। 

        साधारण गृहणी से समाज सेवा के बाद राजनीति के क्षेत्र में कदम रखने को तैयार सरोज देवी पिछले करीब एक महीने से चुनाव प्रचार में जुटी हुई है। वे वार्ड के घर-घर में जाकर वोट के अपील कर रही है। शहर के प्रतिष्ठित परिवार से जुड़े होने की वजह से वार्ड में सरोज देवी को जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। वार्ड के प्रमुख लोग उनके समर्थन में चुनाव प्रचार में दिन-रात जुटे हुए हैं। खुद उनके पति विजय गोयल और पुत्र संदीप गोयल चुनाव प्रचार की कमान थामे हुए हैं। हाउसिंग बोर्ड की और जाने वाली सड़क पर उनके चुनाव कार्यालय मे इन दोनों जबरदस्त गहमा गहमी का माहौल देखा जा रहा है। जो सरोज देवी गोयल को मिल रहे अपार समर्थन की ओर इशारा करता है।

चेयरमैन पद की सबसे बड़ी उम्मीदवार है सरोज देवी गोयल.. 

सूरतगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष की सीट क्योंकि सामान्य महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में सरोज देवी गोयल को  इस पद की प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। क्योंकि सरोज देवी के पति विजय गोयल भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेता तो है ही, इसके अलावा यह भी माना जाता है कि वे शहर में भाजपा की शक्ति केंद्र पूर्व मंत्री रामप्रताप कासनिया के सबसे नजदीकी लोगों में है। वैसे भी शहर के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से होने की वजह से सरोज देवी गोयल ही इस पद की सबसे बड़ी दावेदार है।

            सरोज देवी गोयल अग्रवाल समाज सेवा समिति के सदस्य होने के नाते समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। समिति सदस्य के रूप में पिछले कई सालों से सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभा रही है।

वार्ड के विकास का वादा, छोटे-छोटे कामों के लिए नहीं पड़ेगा भटकना : सरोज देवी गोयल 

वार्ड-27 से भाजपा प्रत्याशी सरोज देवी गोयल का कहना है कि वार्ड के लोग अगर उन्हें चुनते हैं तो उन्हें छोटे-छोटे कामों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्होंने वार्ड के विकास का भरोसा देते हुए कहा कि वार्ड की सफाई, नालियां, सड़के, स्ट्रीट लाइट और पेयजल जैसी तमाम समस्याओं का समाधान कर वार्ड को आदर्श वार्ड के रूप में पहचान दिलाने का प्रयास करेंगी। उन्होंने वार्ड में स्थित पार्कों की दुर्दशा पर अफ़सोस व्यक्त करते हुए वार्ड के सभी पार्कों के जीर्णोद्धार को अपनी प्राथमिकता बताया। इसके साथ ही उन्होंने वार्ड की गरीब और कमजोर लोगों को सरकारी योजनाओं का जल्द से जल्द लाभ दिलाने के बाद कही।

व्यापार मंडल अध्यक्ष विजय गोयल ने की भाजपा का बोर्ड बनाने की अपील  

भाजपा प्रत्याशी सरोज देवी गोयल के पति विजय गोयल ने शहर के मतदाताओं से भाजपा के पक्ष में मतदान कर भाजपा का बोर्ड बनाने की अपील की है। तीन बार व्यापार मंडल अध्यक्ष, एक बार व्यापार मंडल के सचिव  और दो बार भाजपा नगरमंडल अध्यक्ष रह चुके विजय गोयल राजनीति के साथ-साथ समाज सेवा के क्षेत्र में भी पिछले कई दशकों से सक्रिय है। शहर के प्रमुख व्यवसायी होने के अलावा वे  माता जीतोजी कन्या महाविद्यालय समिति कार्यकारिणी से भी जुड़े हुए हैं।

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सूरतगढ़। वार्ड नंबर-28 से भाजपा प्रत्याशी श्रीकांत सारस्वत ने शुक्रवार को अपने चुनाव कार्यालय का शुभारंभ किया। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष शरणपाल सिंह मान, भाजपा नेता संदीप कासनिया ने रिबन काटकर कार्यालय का उद्घाटन किया। इस मौक़े पर वरिष्ठ भाजपा नेता जयप्रकाश सरावगी, पूर्व मंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, नवनीत मुंजाल,अंकुर लडोईया सहित भाजपा नेता और बड़ी संख्या में वार्ड के महिला पुरुष मौजूद रहे। कार्यालय उद्घाटन के अवसर पर वार्ड के लोगों की बड़ी संख्या में मौजूदगी से यह साफ नज़र आ रहा था कि श्रीकांत सारस्वत को वार्डवासियों का भरपूर समर्थन मिल रहा है।

कार्यालय के उद्घाटन के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष मान ने लोगों से भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा का बोर्ड बनता है तो शहर में विकास के नये आयाम बनेंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता और वार्ड के निवासी राजेंद्र तनेजा ने भी कार्यक्रम me अपनी बात रखी। उन्होंने श्रीकांत सारस्वत को बेहतर उम्मीदवार बताते हुए लोगों से वोट की अपील की।

श्रीकांत सारस्वत ने कहा “वार्ड का विकास उनकी प्राथमिकता”

कार्यालय उद्घाटन के अवसर पर मौजूद वार्डवासी

भाजपा प्रत्याशी श्रीकांत सारस्वत ने उद्घाटन के अवसर पर पधारे नेताओं का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि वे पिछले कई सालों से वार्ड में सक्रिय है। उन्होंने वार्ड के लोगों को भरोसा दिलाया कि अगर उन्हें वार्ड की सेवा का अवसर मिलता है तो सफाई,सड़क, बिजली, पानी सहित सभी समस्याओं का समाधान कर वार्ड को आदर्श वार्ड बनाने का प्रयास करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वार्ड के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना भी उनकी प्राथमिकता रहेंगी। उन्होंने वार्ड के लोगों से आने वाली 9 तारीख को कमल के फूल के निशान का बटन दबाने की अपील की।

राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं श्रीकांत सारस्वत…

वार्ड-28 से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे श्रीकांत सारस्वत पेशे से अधिवक्ता है। टेक्स कंसल्टेंट के रूप में वे पिछले करीब 15 वर्षों से ज्यादा समय से अपनी सेवाए दे रहे हैं। वर्ष 2019 के चुनाव में भी भाजपा की टिकट से उन्होंने इसी वार्ड (पुराना -23) में चुनाव लड़ा था। तब वह थोड़े मार्जन से चुनाव हार गए थे। लेकिन इस बार उनको जिस तरह से वार्ड के लोगों का समर्थन मिल रहा है। उससे उनकी स्थिति मजबूत नजर आ रही है। उन्हें उम्मीद है कि इस बार जीत का सेहरा उनके सर पर सजेगा और वार्ड की जनता की सेवा का अवसर मिलेगा।

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वार्ड नंबर-24 में कांग्रेस प्रत्याशी के कार्यालय के उद्घाटन पर भीड़ को संबोधित करते विधायक
कार्यालय उद्घाटन के अवसर पर भीड़ को संबोधित करते धर्मदास सिंधी

सूरतगढ़। सूरतगढ़ नगरपालिका इतिहास में आज तक की सबसे बड़ी जीत की बात करें तो वह कांग्रेस प्रत्याशी तुलसी आसवानी के नाम दर्ज है। जिन्होंने वर्ष 2019 के चुनाव में वार्ड नंबर-27 (पुराना) से 785 वोट से जीत दर्ज कर कीर्तिमान बनाया था। तुलसी असवानी की इस जीत का श्रेय उनके पति धर्मदास सिंधी को जाता है, जो इस बार वार्ड नंबर-24 से चुनाव मैदान में है। परिसीमन के बाद नए बने वार्ड नंबर-24 में पुराने वार्ड नंबर-27 का एक बहुत बड़ा हिस्सा शामिल है। ऐसे में पिछले चुनाव के परिणाम को ध्यान में रखा जाए तो वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी धर्मदास सिंधी की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। 

      गुरुवार को झूलेलाल मंदिर के पास धर्मदास सिंधी के चुनाव कार्यालय का उद्घाटन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में वार्ड के सभी वर्गो के मतदाताओं की भीड़ नजर आई। भीड़ में कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में उत्साह भी देखने लायक था। शाम 5:15 बजे के स्थान पर करीब 2 घंटे देरी से हुए उद्घाटन कार्यक्रम के बावजूद भीड़ कम नहीं हुई। जो वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी धर्मदास सिंधी की मजबूत स्थिति की और साफ इशारा करती है। 

भाजपा प्रत्याशी दीपा तरड़ के लिए बड़ी चुनौती, जातीय समीकरण सिंधी के पक्ष में ?

वार्ड -24 के जातीय समीकरणों की अगर बात करें तो वार्ड में बिश्नोई और अरोड़ा समुदाय का प्रभुत्व है, इसके अलावा सिंधी समाज के वोट भी वार्ड में अच्छी खासी संख्या में है। हालांकि भाजपा की तरफ से बिश्नोई समाज की प्रत्याशी दीपा तरड़ चुनाव लड़ रही हैं। लेकिन इसके बावजूद बिश्नोई समाज के कई चेहरे धर्मदास सिंधी के लिए ओपन कैंपेन में जुटे हुए हैं। जिससे बिश्नोई समाज के वोट में विभाजन नजर आ रहा है। वही अरोड़ा समुदाय का बहुतायत समर्थन भी धर्मदास सिंधी को मिलता दिख रहा है। जहां तक सिंधी वोटर्स की बात है वे धर्मदास सिंधी के पक्ष में पूरी तरह से एकजुट नजर आ रहे हैं। 

      इसके अलावा वार्ड में सोनी, कुम्हार, सरदार और अन्य जातियों के मतदाता भी बड़ी संख्या में है। इन समाजो के वार्ड में रहने वाले सभी प्रमुख चेहरे सिंधी के कार्यालय उद्घाटन में नज़र आये, जो सिंधी को सर्व समाज के समर्थन का सीधा इशारा है। फिलहाल वार्ड-24 में मतदाताओं का जो रुझान नजर आ रहा है उसको देखते हुए भाजपा की संभावित चेयरमैन प्रत्याशी दीपा तरड़ के लिए पहली बाधा पार होना मुश्किल नजर आता है।

पूर्व पार्षद रहने का भी सिंधी को मिल रहा फायदा

पिछले चुनाव में पत्नी तुलसी आसवानी के ऐतिहासिक जीत दर्ज कर पार्षद बनने का फायदा भी इस चुनाव में धर्मदास सिंधी को मिल रहा है। क्योंकि पिछले कार्यकाल में पार्षद प्रतिनिधि के रूप में सिंधी ने वार्ड में विकास कार्यों की झड़ी लगा दी। नगरपालिका के पिछले बोर्ड मे पक्का वार्ड होने के बावजूद करीब सवा करोड़ के विकास कार्य और सर्वाधिक 159 पट्टे वार्ड नंबर-27 में ही जारी हुए थे। इसके अलावा वार्ड की साफ सफाई, सड़क, पानी और लाइट की व्यवस्था में भी सिंधी ने कसर नहीं छोड़ी। अनेकों बार उन्होंने अपने खुद के पैसों से वार्ड में विद्युत पोलों पर लाइटें लगाकर वार्डवासियों को राहत प्रदान की। यही वजह है कि वार्डवासियों के साथ उनके गहरे संबंध बन चुके हैं। 

          इन सबके अलावा भाजपा प्रत्याशी के महिला होने का फायदा भी सिंधी को मिलता दिख रहा है। क्योंकि वार्ड के लोगों का यह भी मानना है कि महिला पार्षद से संपर्क साधना आमतौर पर मुश्किल होता है। जिससे जरूरत पड़ने पर काम अटक जाते हैं। जबकि धर्मदास सिंधी हर समय वार्ड के लोगों के लिए उपलब्ध रह सकते हैं।  

वार्ड के लोगों ने ही दिलाया टिकट, टिकट कटने की चल रही थी चर्चा…. 

विवेकानंद स्कूल मामले मे रिट वापसी को लेकर विधायक डूंगरराम गैधर पर कांग्रेस में ही धर्मदास सिंधी की टिकट काटने का दबाव था। तब वार्ड-24 के प्रमुख लोगों ने ही विधायक से संपर्क कर सिंधी को टिकट देने का दबाव बनाया और सिंधी को वार्ड से जीताने का भरोसा दिलाया। इसके अलावा पार्टी के सर्वे में सिंधी की विनिंग स्थिति को देखते हुए पार्टी के बड़े नेताओं की सलाह के बाद गैदर सिंधी को टिकट देने पर मजबूर हुए । फिलहाल धर्मदास सिंधी की वार्ड में मजबूती को देखते हुए विधायक गैदर का यह निर्णय सफल होता दिख रहा है।

  • राजेंद्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।
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सूरतगढ़।

हजारों साल से नर्गिस अपनी बेनूरी पर रोती है।
तब जाके होता है चमन में दीदावर कोई पैदा।।

उर्दू के मशहूर शायर अल्लामा इकबाल के इस शेर की तरह पिछले कई दशकों से शहर की राजनीति को एक दीदावर का इंतज़ार था। लेकिन अब लगता है डूंगरराम गेदर के रूप में उस दीदावर का आगमन हो चुका है। दरअसल 50000 वोटों से जीत हासिल करने वाले गैदर ने सूरतगढ़ के राजनितिक इतिहास मे ऐसा एक और कारनामा कर दिया है जिसकी कोई दूसरी मिशाल नहीं मिलती। उस दौर में ज़ब सुचिता की बात करने वाली पार्टीयां नगरपालिका चुनावों को लेकर समझौते करने में जुटी हैं। उसी समय विधायक गैदर ने एक दो नहीं बल्कि एक दर्जन से अधिक पूर्व पार्षदों के टिकट काट दिए हैं। जिनमे कुछ ऐसे भी है जिनके बिना नगरपालिका की राजनीति की कल्पना भी करना मुश्किल है। ये वही पार्षद थे जिन्होंने शहर की 100 करोड़ से भी अधिक की बेशकीमती भूमि थोड़े से लालच में लुटा दी।

इस प्रकरण में कई ऐसे मौके भी आए ज़ब गैदर के प्रतिद्वंदियों ने उन्हें घेरने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने हाईकोर्ट में रिट लगाकर विरोधियों का मुंह बंद कर दिया। इस बीच ज़ब उन्होंने प्रेस के सामने कहा कि वे एजेंडा नंबर-7 का समर्थन करने वाले पार्षदों को टिकट नहीं देगे”। तब विरोधियों ने इसे पॉलिटिकल स्टंट बताकर ख़ारिज कर दिया। इतना ही नहीं सूची की घोषणा होने तक शहर के ज्यादातर लोग यहीं मान रहे थे कि सूची में एक या दो पूर्व पार्षदों के नाम जरूर होंगे ? खासकर शहर की राजनीति में पिछले कई दशक से दबदबा रखने वाले राजाराम गोदारा व उनके परिवार की टिकट मिलेंगी। लेकिन जब गैधर का पिटारा खुला तो गोदारा परिवार के हाथ भी खाली रह गये।
कुल मिलाकर पूर्व पार्षदों की टिकट काटकर गैदर ने दिखा दिया है कि वे उन राजनेताओं में नहीं है जो किसी मुद्दे पर बयान देकर भूल जाते हैं। राजनीतिक नफा नुकसान को भुलकर लिया गेदर का यह स्टैंड इस समय शहर के राजनीतिक हल्कों में चर्चा का विषय बन चुका है। हक़ीक़त यह है कि शांत और गंभीर नजर आने वाले गैदर से इस तरह के बोल्ड फैसले की उम्मीद खुद उनकी पार्टी के बड़े नेताओं को भी नहीं थी।

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शायद यही वजह है कि राजनीति में रुचि रखने वालें कांग्रेस ही नहीं बल्कि भाजपा के कट्टर समर्थक भी इस निर्णय के लिए गेदर की सराहना कर रहे हैं। शहर की 100 करोड़ से अधिक की भूमि पार्षदों के लालच के चलते लुट जाने से आमजन मे भी पार्षदों के प्रति बेहद नाराजगी थी। ऐसे मे आमजन भी इस निर्णय से खुश नज़र आ रहा है और मन ही मन गैदर को धन्यवाद भी दे रहा है। विधायक गेदर का यह मास्टर स्ट्रोक सूरतगढ़ के राजनीतिक इतिहास में एक ऐसी नजीर के रूप में दर्ज हो गया है जिसकी गूँज बहुत लंबे समय तक सुनाई देगी।

  बहरहाल गैदर ने एक तरफ दागी पार्षदों की टिकट काटकर कांग्रेस में बदलाव के संकेत दे दिए हैं।वहीं पार्टी के प्रति वफादार, पढ़ें लिखें, सभ्य और पुराने परिवारों को टिकट थमाकर नई लीक खींचने का प्रयास किया है। टिकटो के बंटवारे पर गौर करें तो साफ नज़र आता है कि केवल सत्ता प्राप्त करना गैदर की प्रायोरिटी नहीं है। बल्कि वे सुचिता की राजनीति पसंद करने वाले नेता हैं। जिसकी भ्रष्टाचार और जातिवादी राजनीति से त्रस्त इस शहर को फिलहाल बहुत जरूरत है। 
– राजेंद्र पटावरी,पूर्व अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

       

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दोनों पार्टियों को उठाना पड़ेगा कार्यकर्ताओं की अनदेखी का नुकसान ?

सूरतगढ़। नगरपालिका चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा लगभग सभी वार्डों मे उम्मीदवार तय कर चुकी है जिनकी घोषणा अब कभी भी सम्भव है। परन्तु संभावित उम्मीदवारों के नाम की चर्चाओं के साथ ही दोनों ही पार्टियों में विरोध के स्वर पर उठने लगे हैं। भाजपा में जहां सामान्य वार्ड में आरक्षित उम्मीदवार की बजाय अन्य श्रेणी के उम्मीदवार को टिकट देने की चर्चाओं से बवाल खड़ा हो गया है वही कांग्रेस में भी दूसरी पार्टी के नेताओं को इंपोर्ट कर समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी का मुद्दा गर्म है।
हालांकि अभी दोनों ही पार्टियों ने अधिकृत रूप से टिकटों की घोषणा नहीं की है। लेकिन वार्ड में संभावित उम्मीदवारों की चर्चा से जिस तरह की खबरें आना शुरू हो गई है, वो इस बात का इशारा है कि पार्टियों ने अपना स्टैंड नहीं बदला तो संभावित प्रत्याशियों का खुलकर विरोध होना तय हैं। फिलहाल की बात करें तो भाजपा में वार्ड नंबर-30 और कांग्रेस में वार्ड नंबर-45 में पार्टी के संभावित उम्मीदवारों के नाम की चर्चा से बवाल मचा हुआ है।

सामान्य आरक्षित वार्ड-30 में ओबीसी उम्मीदवार को टिकट का विरोध ?

शहर के वार्ड नंबर-30 की बात करें तो इस वार्ड में सामान्य वर्ग के भाजपा प्रत्याशियों और समर्थकों द्वारा ओबीसी वर्ग के प्रत्याशी को टिकट देने जबरदस्त विरोध किया जा रहा है। इस वार्ड में सामान्य वर्ग की तरफ से रेवंत व्यास और सुशील तावनिया ने टिकट के लिए आवेदन किया है। जबकि ओबीसी वर्ग के कृष्ण छिम्पा और राजकुमार सेन भी भाजपा की टिकट की लाइन में है।

बुधवार से पार्टी के ओबीसी वर्ग के कृष्ण छिम्पा को टिकट कंफर्म करने की चर्चा शुरू हुई तो सामान्य वर्ग के दोनों प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने विरोध कर दिया। दोनों प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने गुरुवार को भाजपा नेता संदीप कासनिया से मिलकर भी अपना विरोध दर्ज कराया। वार्ड के लोगों ने कहा कि जब वार्ड सामान्य वर्ग के लिए खुला है तब भाजपा को सामान्य वर्ग के स्थानीय और सक्रिय कार्यकर्ता को ही प्रत्याशी बनाना चाहिए।

सूत्रों के मुताबिक वार्ड में सामान्य वर्ग के किसी भी प्रत्याशी को टिकट देने पर दोनों के समर्थकों ने एक दूसरे को सहयोग देने और 40 वर्षों से लगातार वार्ड में टिकट की दावेदारी कर रहे परिवार को टिकट मिलने पर विरोध की खुली चुनौती दी है।

वार्ड-45 में इम्पोर्ट किये उम्मीदवार को कांग्रेस की टिकट का विरोध ?

भाजपा की तरह कांग्रेस में भी टिकटो को लेकर विरोध की स्वर उठने लगे हैं। पिछले कई दिनों से यह चर्चा थी कि पार्टी वार्ड नंबर-45 से आप पार्टी से जुड़े राधेश्याम उपाध्याय को उम्मीदवार बनाने जा रही है। कांग्रेस ने गुरुवार को ज़ब राधेश्याम उपाध्याय को पार्टी की सदस्यता ग्रहण करवाई। तभी से वार्ड में कांग्रेस के टिकट की दावेदारी कर रहे प्रत्याशियों द्वारा विरोध की चर्चा भी शुरू हो गई थी। अब राधेश्याम उपाध्याय के पार्टी में शामिल होने से शुरू हुए विरोध के स्वर टिकट की घोषणा के साथ कुछ दिनों में और लाउड हो सकते है।

वार्ड-45 से पार्टी की टिकट मांग रहे जगदीश गुप्ता का परिवार को पुराना कांग्रेसी परिवार है। गुप्ता लंबे समय से कांग्रेस सेवा दल से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि अगर पार्टी पुराने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर आयातित उम्मीदवारों, जिनकी निष्ठा पार्टी के प्रति हमेशा से संदिग्ध रही है को टिकट देती है, तो वे इसका जमकर विरोध करेंगे और पार्टी को इसका फल भुगतना पड़ेगा।

जीत की संभावना के बावजूद भाजपा और हार की निश्चितता के बीच कांग्रेस के निर्णय से उठ रहे सवाल ?

वार्ड नंबर-30 की बात करें तो यह वार्ड पूरी तरह से भाजपा समर्थित है। इस वार्ड में भाजपा की जीत इसलिए भी कंफर्म मानी जा सकती है कि वार्ड में अब तक कांग्रेस कोई उम्मीदवार तय नहीं कर पाई है। कांग्रेस के किसी भी संभावित उम्मीदवार ने वार्ड में कैंपेन स्टार्ट नहीं किया है। ऐसे में भाजपा सामान्य वर्ग के किसी भी व्यक्ति को टिकट देती तब भी उसकी भी जीत तय थी। इसके बावजूद भाजपा द्वारा पार्टी के लिए समर्पित सामान्य वर्ग की अनदेखी कर पुरानी लीक पीटना हर किसी को अखर रहा है।

वैसे इस प्रकरण में टिकट वितरण कमेटी में शामिल पार्टी के सामान्य वर्ग के नेताओं का लिजलीजा रवैया भी अखरने वाला है। कमेटी में शामिल सामान्य वर्ग कोई भी नेता इतना जिगरा नहीं दिखा पाया कि सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित वार्डों में अपने वर्ग लोगों की टिकट के लिए आवाज उठा पाता। सच तो ये है कि सामान्य वर्ग की पैरवी का दम्भ भरने वाले नेताओं की रीढ़ में पानी भर चुका है। जिनसे उसूलों के लिए खड़े होने की उम्मीद करना बेमानी है !

दूसरी और वार्ड नंबर-45 में कांग्रेस के स्टैंड की बात करें तो पार्टी द्वारा राधेश्याम उपाध्याय को टिकट देने का संभावित निर्णय भी सवालों के घेरे में है। भाजपा डोमिनटेड इस वार्ड में कांग्रेस फिलहाल बैक फुट पर है। पार्टी अगर राधेश्याम उपाध्याय को टिकट भी देती है तो परिणाम बहुत ज्यादा बदलते नज़र नहीं आते। ऐसे में बेहतर होता कि पार्टी वार्ड के ही कांग्रेस का वर्षों तक झंडा उठाने वाले किसी आम कार्यकर्ता को टिकट देती। ऐसे व्यक्ति को टिकट देकर पार्टी कुछ हद तक उस अहसान को उतार सकती है जो उस कार्यकर्ता ने वर्षों तक पार्टी का झंडा उठाकर किया है। अभी भी कांग्रेस के जिम्मेदार नेताओं के पास वक्त है कि उन सीटों पर जहां पर जीत का गणित उनके पक्ष में नहीं है पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को मौका दें। जिससे की पार्टी भले ही हारे लेकिन कार्यकर्ताओं की उम्मीद अपने नेतृत्व के प्रति ज़िंदा रहे।

यूज एंड थ्रो के फॉर्मूले पर राजनीतिक पार्टियों !, कार्यकर्ताओं की भावनाओ से खिलवाड़ ?

सामान्य वर्ग के आरक्षित वार्ड में अन्य वर्ग के उम्मीदवारों को टिकट नहीं देगी ! चुनाव की घोषणा के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कांग्रेस व भाजपा के इस तरह के दावों पर चर्चाएं शुरू हुई तो आमतौर पर चुनाव से दूर रहने वाला सामान्य वर्ग भी टिकट की उम्मीद में सक्रिय हो गया। सामान्य वर्ग की इन्ही भावनाओं को देखते हुए आरक्षण समता आंदोलन मंच ने भी टिकट वितरण की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही दोनों पार्टियों के पर्यवेक्षकों और संबंधित मंडल अध्यक्षों को ज्ञापन सौंपकर यह मांग रखी। नेताओं ने समिति को आश्वासन भी दिए।

लेकिन जैसा कहा जाता है कि नेताओं की याददाश्त कम होती है। ज्योंही ही टिकटों की घोषणा का वक्त आया इन नेताओं ने सामान्य वर्ग के आरक्षण को दरकिनार कर कई वार्डों में दूसरे वर्ग के उम्मीदवारों को टिकट देने की तैयारी शुरू कर दी है। इन दोनों मामलों से यह तो साफ हो गया है कि राजनितिक पार्टियां यूज एंड थ्रो के फॉर्मूले पर काम करती है। जब तक कार्यकर्ताओं से काम लेना होता है तो वे उन्हें सर पर उठाए फिरती है और ज़ब कार्यकर्ता उनसे उम्मीद करता है तो वे उन्हें ठेंगा दिखा देती है।

चुनाव में जीत हासिल करना किसी भी पार्टी के लिए प्राथमिकता होती है और उसके लिए कुछ हद तक उसूलों से कंप्रोमाइज किया भी जा सकता है। लेकिन इन दोनों वार्डों की तरह जिन सीटों पर जीत हार का समीकरण टिकट से बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं होता है। वहां पार्टियों को ऐसे निर्णय लेने से पहले कार्यकर्ताओं की भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए।

दोनों पार्टियों के लिए विचार का वक्त ? समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी पड़ेगी भारी !

कुल मिलाकर वार्ड -30 में सामान्य वर्ग के अधिकारों की अनदेखी कर भाजपा दशकों से वार्ड की एकछत्र राजनीति करने वाले ओबीसी परिवार को टिकट देती है तो यह कहीं ना कहीं सामान्य वर्ग के प्रत्याशियों की आकांक्षा पर कुठाराघात है। इसके अलावा यह निर्णय भाजपा की जड़ो को सींचने वाले सामान्य वर्ग की उन भावनाओं के खिलाफ भी है। जो राजनीति में अपनी वाजिब हिस्सेदारी की उम्मीद भारतीय जनता पार्टी से कर रहा है। इस प्रकरण में पार्टी के निर्णय पर सामान्य वर्ग की प्रतिक्रिया नाराजगी के रूप में दिखना लाजिमी है। बेहतर होगा जिम्मेदार नेता अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे।
दूसरी और कांग्रेस नेताओं खासकर विधायक डूंगरराम गेदर को इस प्रकरण पर गंभीरता से विचार कर निर्णय लेना चाहिए। क्योंकि आयातित उम्मीदवारों को आमतौर पर जनता स्वीकार नहीं करती है और जब आयातित चेहरे अपनी कार्यशैली को लेकर पहले से विवादित रहे हो तो उनकी स्वीकार्यता की संभावना न के बराबर ही है।

– राजेंद्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। शहर के सभी 45 वार्डों में सैकड़ो की संख्या में उम्मीदवार टिकट की लाइन में खड़े हैं। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी की टिकट की आस में इन लोगों की सांसे अटकी हुई। ऐसे हालात के बीच शहर के कई वार्डों में कुछ ऐसे चेहरे भी है जिन्हे उनके वार्ड की जनता टिकट मिलने और चुनाव नतीजे आने से पहले विजयी घोषित कर चुकी है।

ऐसा ही एक चेहरा है कृष्ण कुमार बेनीवाल। प्यार से कीनिया के नाम से जाने जाने वाले कृष्ण बेनीवाल वार्ड नंबर-43 से चुनाव मैदान में है। कृष्ण बेनीवाल की मां कमला बेनीवाल भी 2019 से 2024 के बीच पार्षद रह चुकी है। 2019 के चुनाव में कमला बेनीवाल की बम्पर जीत का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि उन्हें कुल पोल हुए 1013 वोट में से 753 वोट मिले। इसी कार्यकाल के दौरान अपनी मां के प्रतिनिधि के रूप में कृष्ण बेनीवाल ने वार्ड की समस्याओं के समाधान के लिए दिन-रात एक कर दिए।

वार्ड की टूटी सड़कों की समस्या हो या फिर सफाई की, पेयजल की समस्या हो या फिर स्ट्रीट लाइट की, किसी गरीब का राशन कार्ड बनाना हो या फिर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना, कृष्ण बेनीवाल ने ऐसे सभी कार्य को खुद का काम समझकर किया। वार्ड में लाखों रूपये के विकास कार्य किनिया के प्रयासों से हुए जिनमे, सड़क, नाली, पुलिया आदी शामिल है पिछले कार्यकाल में हुए। वार्ड के पट्टे बनाने की बात करें तो जहां पिछले बोर्ड में अनेक पार्षद पट्टे नहीं बनने का रोना रोते रह गए। वहीं कृष्ण बेनीवाल ने बड़ी संख्या में पट्टे दिलाकर वार्ड के लोगों को राहत प्रदान की। यही वजह है कि वार्ड में सभी वर्गो के लोग कृष्ण बेनीवाल को एक बार फिर पार्षद के रूप में देखना चाहते हैं। 

                 हक़ीक़त तो ये है कि कांग्रेस से टिकट के दावेदारी जता रहे कृष्ण बेनीवाल उर्फ़ किनिया को वार्ड की बहुसंख्य जनता अपना पार्षद डिक्लेयर कर चुकी है। उनके समर्थक सोशल मीडिया और दूसरे मंचों पर भी किनिया की दावेदारी का समर्थन कर रहे हैं। किनिया को वार्ड के लोगों का जिस तरह का समर्थन मिल रहा है। उससे कांग्रेस के पास टिकट के लिए वार्ड -43 में फिलहाल किनिया से बेहतर कोई उम्मीदवार नज़र नहीं आ रहा है।

किनिया की टिकट की मजबूत दावेदारी का एक पहलू यह भी है कि विवादित विवेकानंद स्कूल को भूमि आवंटन प्रस्ताव मामले में ज़ब कांग्रेस के अधिकांश पार्षदो ने अपने जमीर का सौदा कर लिया तब भी किनिया का परिवार पार्टी व्हिप के साथ मजबूती से खड़ा रहा था।

        वार्ड-43 में कांग्रेस टिकट की दावेदारी की बात करें तो किनिया के अलावा धानुका परिवार भी कांग्रेस की टिकट पर दावेदारी जता रहा है। हालांकि कांग्रेस ने अभी तक टिकट को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं किया है। कांग्रेस इस टिकट को लेकर क्या निर्णय लेती है यह तो भविष्य के गर्भ में छुपा हुआ है। परन्तु वार्ड के जातीय समीकरण की तरफ गौर फरमाए तो वार्ड में मुस्लिम समुदाय का बाहुल्य है जिसका झुकाव सीधा सीधा किनिया की तरफ है। जो किनिया को टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव में भी समर्थन का दावा कर रहा है। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस किनिया को टिकट देती है तो नतीजा कांग्रेस के पक्ष में आना करीब करीब तय हैं। वरना कांग्रेस को इस एक सीट का खामियाजा उठाना पड़ सकता है।

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सूरतगढ़। निकाय चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा ने अब तक टिकटों की घोषणा नहीं की है। इसके बावजूद चुनाव मैदान में कुछ ऐसे चेहरे हैं जो चुनाव जितने पर भाजपा की तरफ से चेयरमैन पद के संभावित प्रत्याशी बन सकते हैं। 

             ऐसे चेहरों में एक नाम है दीपा तरड़ का ! वार्ड नंबर-24 से भाजपा से टिकट की प्रबल दावेदार दीपा तरड़ शहर में चुनाव लड़ रही कुछ एक हाईली एजुकेटेड महिला प्रत्याशियों में से है। इंग्लिश लिटरेचर में एम.ए. बी.एड. तक शिक्षित दीपा तरड़ पिछले कई दिनों से लगातार जनसंपर्क में जुटी हैं। हालांकि इस वार्ड में अरोड़ा समुदाय से वेद प्रकाश भूतना भी भाजपा के टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। लेकिन दीपा तरड़ का टिकट का दावा ज्यादा मजबूत नज़र आता है।

इसकी वजह है पारिवारिक पृष्ठभूमि और वार्ड का जातीय वोट समीकरण। दीपा तरड़ क्षेत्र के एक पुराने राजनीतिक परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पति विष्णु तरड़ वर्तमान में भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष है। वहीं वे खुद 2015 से 2020 के दौरान पंचायत समिति के 17 नंबर जोन (पदमपुरा) से डायरेक्टर भी रह चुकी है। इसके अलावा उनके ससुर हेतराम तरड़ सरपंच और जिला परिषद सदस्य रह चुके है। इतना ही नहीं उनकी सास श्रीमती कृष्णा देवी तरड़ भी 1994 में नगरपालिका पार्षद चुनाव जीतकर पार्षद रह चुकी है। 

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               इसी मज़बूत राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते जहाँ दीपा तरड़ को टिकट मिलना लगभग तय है वही भाजपा को बहुमत मिलने पर दीपा तरड़ का चुनाव जितने पर चेयरमैन बनने का दावा मज़बूत नज़र आता है। दीपा तरड़ की पारिवारिक के साथ-साथ मजबूत आर्थिक पृष्ठभूमि भी उन्हें अध्यक्ष पद का मजबूत दावेदार बनाती है। क्यूंकि अगर भाजपा को खंडित जनादेश भी मिलता है उस स्थिति में मज़बूत आर्थिक स्थिति के चलते तरड़ परिवार बड़ा खेल कर भाजपा का बोर्ड बनाकर स्वयं की दावेदारी रख सकता है।

कुल मिलाकर कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा की तरफ से लड़ पार्षद का चुनाव लड़ रही महिला प्रत्याशियों में दीपा तरड़ उन चुनिंदा प्रत्याशियों में है जो अध्यक्ष पद की मजबूत दावेदार है। यह और बात है कि उन्हें अध्यक्ष पद का पाने से वार्ड की अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा।

वार्ड के जातीय समीकरण बदल सकते है जीत का गणित !

वार्ड नंबर-24 में फिलहाल की स्थिति की बात करें तो दीपा तरड़ के मुकाबले में धर्मदास सिंधी चुनाव मैदान में है जो फिलहाल कांग्रेस से टिकट मांग रहे है। इस वार्ड में करीब 1300 मतदाता है। जातीय गणित की बात करें तो इन 1300 में से 200 से अधिक वोटर बिश्नोई समाज से है, निश्चित तौर पर इनका झुकाव दीपा तरड़ की तरफ रहने की संभावना है। इसके अलावा अरोड़ा, ब्राह्मण व सरदार कम्युनिटी के मतदाताओं की संख्या भी अच्छी खासी है।

वर्तमान में भाजपा की सरकार होने और राजनितिक परिवार से जुड़े होने का फायदा जहां दीपा तरड़ को मिलेगा। वहीं महिला होने के चलते उनके वार्ड की महिला वोटर से कनेक्ट करने में सफल होने की संभावना ज्यादा है। इसके अलावा वार्ड के पढ़े लिखे मतदाताओं के लिए उनका उच्च शिक्षित होना भी उन्हें एज़ दिला सकता है।

            बहरहाल चुनाव प्रचार के दौरान दीपा तरड़ वार्ड के लोगों से बेहतर विकास का वादा कर रही है। दीपा तरड़ के मुताबिक वार्ड में यूं तो समस्याओं की कमी नहीं है लेकिन सफाई और लाइट की समस्या प्रमुख समस्याएं हैं। उनका कहना है कि अगर उन्हें वार्ड की सेवा का अवसर मिला तो वे इन दोनों समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान करने का प्रयास करेगी।

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हजारों साल से नर्गिस अपनी बेनूरी पर रोती है।

बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा।।

सूरतगढ़। स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल को भूमि आवंटन के प्रस्ताव (ऐजेंडा नंबर-7) पर समर्थन देने वाले पार्षदों को कांग्रेस टिकट नहीं देगी ? करीब 2 वर्ष पूर्व एक प्रेस वार्ता मे विधायक डूंगरराम गेदर द्वारा दिए इस बयान को समय की कसौटी पर रखने का वक्त अब आ चुका है ! क्या विधायक डूंगरराम गेदर अपने इस बयान पर आज भी कायम है ? कांग्रेस मे पार्षदों के टिकट वितरण की प्रक्रिया शुरू होने के साथ सियासी हलकों में इस बात पर चर्चा शुरू हो गई हैं। खुद कांग्रेस के बड़े नेताओं की निगाह भी विधायक गेधर के स्टैंड पर है। अक्सर राजनेता अपने वादों को जुमला कहकर हवा में उड़ा देते हैं… क्या विधायक डूंगरराम गेदर भी उसी श्रेणी में शामिल है ! आने वाले दिनों में इस बात से पर्दा उठ जायेगा ! भूमि आवंटन प्रस्ताव मे कांग्रेसी पार्षदों की भूमिका से विधायक गैदर की साफ छवि मे जो दाग़ लगे है उन्हें धोने का प्रयास गैदर पिछले 2 साल से कर रहे हैं। प्रस्ताव का समर्थन करने वाले पार्षदों से दूरी बनाकर और प्रस्ताव के खिलाफ हाईकोर्ट में रीट याचिका दायर कर गैदर खुद पर लगे सौदेबाजी के आरोपों को कुछ हद तक धुंधला करने मे कामयाब भी हुए है। परन्तु शहर की जनता के ज़ेहन मे आज भी इस प्रस्ताव के पास होने की टीस है। नगरपालिका की बोर्ड बैठक मे पार्षदों ने बेशर्मी का जो भोंडा प्रदर्शन किया वह शहर के इतिहास मे दर्ज़ हो चुका है। इसलिये आने वाले दिनों मे ज़ब विधायक गैदर ज़ब टिकट बांटेंगे उन्हें एक बार फिर माता सीता की तरह अग्निपरीक्षा देनी पड़ेगी ! सीता की तरह अपनी पवित्रता साबित करने के लिए विधायक को कांग्रेस पार्टी और शहर से गद्दारी करने वाले पार्षदों के टिकट काटने होंगे ? नगरपालिका मे बोर्ड बनाने और टिकट के लिए राजनितिक दबाब के बीच यह टास्क विधायक गेदर के लिए आसान नहीं होगा ! 

         हालांकि खेल का एक दूसरा पक्ष भी है ! कांग्रेस का पिछला बोर्ड क्यूंकि पूर्व विधायक स्व.गंगाजल मील द्वारा बनाया गया था और प्रस्ताव का समर्थन करने वाले पार्षद ज्यादातर कांग्रेस पार्टी की बजाय मील परिवार के ही वफादार थे। इसलिये उन्होंने पार्टी के नये हाईकमान विधायक गैदर द्वारा जारी व्हीप को ठेंगे पर रखकर सौदेबाज़ी करने मे गुरेज नहीं किया। इतना ही नहीं इन पार्षदों ने सौदेबाज़ी का ठीकरा भी विधायक पर फोडने का प्रयास किया। अब क्यूंकि पार्टी पर गैदर कब्ज़ा जमा चुके है तो उनके लिए जरूरी है कि वे दूसरों के प्रति निष्ठा रखने वाले पार्टी के इन गद्दारों को बाहर का रास्ता दिखाकर वफादार कार्यकर्ताओं को मौका दें ? और वैसे भी प्रस्ताव का समर्थन करने वाले कांग्रेस के ज्यादातर पूर्व पार्षद शहर की जनता के साथ ही अपने वार्ड मे भी जनाधार खो चुके है इसलिये विधायक गैदर के लिए इन पार्षदों की टिकट काटना इतना मुश्किल नहीं है। इसके अलावा शेष बचे वार्डों में भी हार जीत का गणित भुलाकर गैदर योग्य व वफादार उम्मीदारों का चयन कर एक ऐसी नज़ीर पेश कर सकते है कि भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि विधायक गैदर को ओवरटैक करने की नहीं सोचेगा !

         बहरहाल लम्बे संघर्ष के बाद राजनीति की मुख्यधारा पकड़ने वाले गैदर समझदार पॉलीटिशियन है। उम्मीद की जानी चाहिये कि वे ऊपर लिखे शेर की पंक्तियों को सही साबित कर उस भरोसे को सही साबित करेंगे जो क्षेत्र की जनता ने लगभग 50 हज़ार वोट से जिताकर दिखाया है।

– राजेंद्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। राजनीति में भावनाओं का भले ही कोई महत्व नहीं है। लेकिन मानव स्वभाव है…..भावनाएं खुद ब खुद जुबान पर आ जाती है। नगरपालिका चुनावों की ही बात करें तो अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित होने की घोषणा के साथ ही शहर के लोगों की जुबान पर जो पहला नाम उभर कर आया है, वह नाम है पूर्व नपा चेयरमैन आरती शर्मा का।

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पिछले तीन दशक से सूरतगढ़ नगरपालिका में अध्यक्ष पद पर बहुत से लोगों ने राज किया है। काजल की कोठरी कहीं जाने वाली नगरपालिका में रहकर जब ज्यादातर चेहरे अपनी चमक खो चुके हैं। तब केवल आरती शर्मा ही है जिनका कार्यकाल लोग याद करते हैं। अपने कार्यकाल में आरती शर्मा ने विकास के कोई नये आयाम खड़े कर दिए हो ऐसा नहीं है, और यह कहना भी ठीक नहीं होगा कि उनके कार्यकाल में नगरपालिका में बिल्कुल भी भ्रष्टाचार नहीं था। लेकिन यह कहने में भी गुरेज नहीं होना चाहिए कि आरती शर्मा ने भ्रष्टाचार की गंगा में डूबने की बजाय उससे दूरी बनाए रखी।

एक पढ़ी लिखी महिला होने व एक सभ्य परिवार की बेटी और बहु होने का असर ये रहा कि वे सार्वजनिक जीवन में मर्यादाओं से बंधी रही और खुद को भ्रष्टाचार और दूसरी आरोपों से खुद को दूर रखा। जबकि आरती शर्मा के बाद जो भी चेहरे अध्यक्ष बने वे सब भ्रष्टाचार की गंगा में बह गए। इन चेहरों में अभी भी कई ऐसे हैं जिनकी अत्रप्त इच्छाएं भ्रष्टाचार की इस गंगा में फिर से डूबकी लगाने की है। लेकिन जैसा कि हमने कहा ये चेहरे अपनी चमक खो चुके है। इस शहर की जनता जहाँ अब इन लोगों का जिक्र भी नहीं करना चाहती। दूसरी और आरती शर्मा को अभी भी शहर का एक बहुत बड़ा वर्ग फिर से अध्यक्ष के रूप में देखना चाहता है।

हालांकि अध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा से जुड़े कई महिला उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया या दूसरे माध्यमों से अपनी उम्मीदवार पेश की है, मगर कहना गलत नहीं होगा कि ये नये उम्मीदवार भी पब्लिक चॉइस के साथ साथ योग्यता के पैमाने पर आरती शर्मा के सामने कहीं नहीं ठहरते है। आरती शर्मा के पक्ष में एक और बात जाती दिख रही है वो ये है कि पार्टी स्तर पर भाजपा के मौजूदा संभावित उम्मीदवारों में आरती शर्मा ही एक मात्र ऐसा चेहरा है जिस पर भाजपा के दोनों धड़े भी एक राय हो सकते है। 

              इन सबके बावजूद फिलहाल आरती शर्मा के राजनीतिक भविष्य के बारे में अभी कोई टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। क्यूंकि पार्षद की टिकटे बटने से लेकर भाजपा के लिए मेजॉरिटी प्राप्त करने की लम्बी लड़ाई बाकी है। फिर भी जनता के रुख से यह तो साफ है कि शहर की जनता नगरपालिका के भ्रष्टाचार से आजीज आ चुकी है, इसीलिए वह चाहती है आरती शर्मा या फिर उनकी की तरह साफ छवि वाली कोई पढ़ी लिखी महिला ही नगरपालिका की कमान संभाले।

-राजेन्द्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष -प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगाये गए अलग अलग रंग, डिज़ाइन के गंदे और पुराने परदे।

सूरतगढ़। शहीदों के बलिदान की याद करने के लिए प्रशासन द्वारा हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया जाता है। इस बेहद खास आयोजन की तैयारी प्रशासन 15 अगस्त से बहुत पहले शुरू कर देता है। हर बार की तरह प्रशासन ने इस बार भी शानदार आयोजन के लिए अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारियां तय की। जिसमें नगरपालिका को आयोजन स्थल पर टेंट (पंडाल), कुर्सियां व अन्य व्यवस्थाएं करने की जिम्मेदारी दी गई। मतलब ये है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह को भव्य बनाने की जिम्मेदारी नगरपालिका प्रशासन को दी गई।
होना ये था कि नगरपालिका अधिकारी समारोह स्थल पर सुंदर शामियाना व अन्य व्यवस्था करते। मगर अफसोस की बात है कि पालिका ठेकेदार ने कार्यक्रम की गरिमा की अनदेखी करते हुए आयोजन स्थल पर बेहद पुराना और घटिया टैंट लगा दिया। टेंट (पंडाल) की छत पर जो पर्दे लगाए गए थे वे पुराने और गंदे तो थे ही, साथ ही साथ सभी पर्दे अलग-अलग रंगों और डिजाइन के थे। आम तौर पर किसी भी कार्यक्रम के लिए जो टेंट लगाया जाता है उसमें 2 या 3 तरह के ही पर्दे कलर कांबिनेशन के हिसाब से लगाए जाते हैं।

लेकिन सरकारी कार्यक्रम है कौन पर्दे देखता है शायद यही सोचकर ठेकेदार ने 8 से 10 अलग-अलग रंगो और डिज़ाइन के बेहद खराब पर्दे पंडाल में लगा दिए मानो सड़क किनारे कोई लंगर चल रहा हो। वैसे इन पर्दों को देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि ठेकेदार के पास टेंट के नाम पर जो पुराने, गंदे, फ़टे हुए और रिजेक्ट पर्दे पड़े थे उन्ही से उसने टेंट खड़ा कर दिया। वास्तविकता ये है कि अगर ऐसा टेंट किसी गांव के साधारण व्यक्ति के यहां भी लगाया जाता तो वह भी इसे लगाने से मना कर देता।
मगर नगरपालिका की स्टोर शाखा के जिन कर्मचारियों को यह व्यवस्था देखनी थी, उन्होंने ठेकेदार द्वारा इस तरह का घटिया टेंट लगाने के बावजूद अपनी आंखें मूँदे रखी। इन कर्मचारियों को स्वतंत्रता दिवस समारोह की गरिमा का जरा भी ख्याल नहीं आया। इससे भी ज्यादा अफसोसजनक बात यह है कि समारोह में उपखंड स्तर के बड़े-बड़े अधिकारी और बड़े नेता भी कार्यक्रम में शामिल हुए, जाने क्यों उनकी नज़र भी इस घटिया शामियाने पर नहीं पड़ी ? वह भी तब ज़ब उनको पता है कि ठेकेदार ने टेंट फ्री में नहीं लगाया है, इसके लिए नगरपालिका ठेकेदार को हज़ारों रूपये का भुगतान करेगी।
दरअसल यह पूरा मामला भी कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है। भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे पालिका की स्टोर शाखा के कर्मचारी कमीशन के लालच में अपना ईमान ठेकेदारों के पास गिरवी रख चुके है। जिनकी मानसिक स्थिति इन दिनों कुछ कुछ नशे के आदी उन लोगों जैसी हो गई है। जो नशे की पूर्ति के लिए शर्म और नैतिकता को छोड़कर किसी भी सीमा तक गिर सकते हैं।
बहरहाल शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगाने वाले ईओ गणपत राम का राष्ट्रीय पर्व से जुड़े इस आयोजन में गरिमा के प्रतिकूल घटिया अरेंजमेंट पर ध्यान नहीं देना निराशाजनक है। उम्मीद की जानी चाहिये कि वे संबंधित ठेकेदार और कार्मिकों पर कोई कार्रवाई करे या ना करें, परन्तु भविष्य में राष्ट्रीय पर्व जैसे आयोजनों में इस तरह की घटिया व्यवस्था की पुनरावृति नहीं हो इसके लिए जरूरी कदम अवश्य उठाएंगे।

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सूरतगढ़। उपजिला चिकित्सालय के आर्थोपीडिक डॉक्टर भारत भूषण जांगिड़ इन दिनों विवादों में है। सोमवार को छुट्टी रखने का विरोध होने पर डॉक्टर जांगिड़ कथित तौर पर अपना इस्तीफा दे चुके है। इसके बाद से उनके कुछ समर्थक या अंधभक्त डॉ साहब को विक्टिम के रूप में पेश कर रहे है। ये लोग डॉ साहब की सोमवार की छुट्टी लेने विरोध करने वाले लोगों पर राजनीति करने का आरोप जड़ रहे हैं। लेकिन उन्हें शायद पता नहीं है कि हॉस्पिटल को राजनीति का अड्डा बनाने में सबसे बड़ा योगदान डॉक्टर साहब का ही है। डॉ साहब के शुभचिंतक चाहे तो इस बात की तस्दीक चिकित्सालय के कार्यरत अपने किसी परिचित साधारण कर्मचारी से कर सकते है।

पिछले कई सालों में यह पहला ही मौका है ज़ब डॉ साहब को उनकी ही राजनीति महंगी पड़ गई है। वरना अब तक डॉ साहब राजनितिक कलाबाजीयां कर हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले कई लोगों कानूनी मुकदमों में उलझा चुके है। ऐसे लोगों में आम आदमी ही नहीं पत्रकार भी शामिल है। कुछ लोगों को तो डॉ साहब की तिल को ताड़ बनाने की राजनीति के चलते जैल की हवा तक खानी पड़ी है। 

          इसके बावजूद डॉ जांगिड़ के कुछ नादान समर्थक उन्हें ऐसे शानदार व्यक्तित्व के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं जैसे कि इस शहर के लोग उनके बारे में जानते ही नहीं है। डॉक्टर साहब की ये खासियत सारा शहर जान ही चुका है कि डॉ साहब भले ही मानवता की सेवा के प्रोफेशन में हो, लेकिन मरीजों की सेवा से उनका दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है। मरीजों की सेवा के नाम पर लाखों रुपए का वेतन लेने वाले डॉक्टर साहब मरीजों को गवर्नमेंट हॉस्पिटल की बजाय अपने निजी अस्पताल में देखना ज्यादा पसंद करते है ?

यही वजह है कि सोमवार को ज़ब अस्पताल में सबसे ज्यादा मरीज ईलाज की उम्मीद में आते है, तब डॉक्टर साहब विभागीय नियमों को ठेंगा दिखाकर छुट्टी रख लेते है और अपने एक क़ारिंदे को अपने ड्यूटी कक्ष के बाहर बिठा देते हैं। जो छुट्टी की बात कहकर मरीजों को डॉक्टर साहब के प्राइवेट हॉस्पिटल में रैफर करता रहता है। डॉ साहब को सोमवार को इन गरीब मरीजों से होने वाली कमाई का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि ज़ब उनसे सोमवार को सरकारी नियमों के तहत चिकित्सालय में ड्यूटी के लिए कहा गया तो उन्होंने गरीब मरीजों की इलाज की जगह अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस को तरजीह दी और कथित इस्तीफा दे डाला।

यहां यह कहना भी गलत नहीं होगा कि डॉक्टर साहब का लालच ही वह वजह है जिसकी वजह से हॉस्पिटल में विधायक कोटे से मिली 15 लाख की C-ARM मशीन पिछले 3 सालों से कबाड़ बन रही और मरीजों की टूटी फूटी हड्डियों के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। जबकि डॉ साहब प्राइवेट हॉस्पिटल में धड़ाधड़ ऑपरेशन किये जा रहे है। वैसे मशीन से ऑपरेशन नहीं होने के लिए मशीन के नीचे रखने वाली मेज नहीं होने का कारण बताया जा रहा है जो हैरान करने वाला है। वहीं हॉस्पिटल के गरीब मरीजों के प्रति डॉक्टर साहब का रवैया कैसा रहता है इसका अंदाजा तो आप सोशल मीडिया पर इन दिनों तैर रहे वीडियो और कमेंट्स से लगा सकते है। 

         जहाँ तक डॉक्टर साहब के शानदार व्यक्तित्व की बात है तो उनका हॉस्पिटल भी उनके शानदार व्यक्तित्व का आईना है। राजकीय चिकित्सालय में पिछले पांच दशक में सैकड़ो डॉक्टर आए और गए। इनमें से ज्यादातर डॉक्टर्स को हमने सरकारी सेवा में रहते हुए निजी प्रैक्टिस करते देखा है। जो डॉक्टर नॉन प्रैक्टिस अलाउंस नहीं लेते उन्हें निजी प्रैक्टिस की छूट भी है। परन्तु अब तक हमने डॉक्टर्स को प्राइवेट प्रैक्टिस अपने निवास स्थान पर ही करते देखा हैं। लेकिन सूरतगढ़ के इतिहास में डॉक्टर भारत भूषण पहले ऐसे डॉक्टर हैं जो निवास स्थान की जगह खुल्लम-खुल्ला अपना प्राइवेट हॉस्पिटल चला रहे है। यही नहीं इस अस्पताल में धड़ल्ले से मरीजों की जांच और दवाईयों का कारोबार किया जा रहा है। यह डॉक्टर साहब का राजनीतिक रसूख ही है जिसकी वजह से चौड़े धाड़े यह गोरखधंधा चल रहा है। यह तो इस शहर की जनता भली है कि उन्होंने डॉ साहब की तमाम कारगुजारियों की अनदेखी कर डॉक्टर साहब को भगवान का दर्ज़ा दे रखा है वरना डॉ साहब के इस हॉस्पिटल पर कब का ताला जड़ चुका होता।

               कुल मिलाकर डॉ साहब को इस शहर और इसकी आम जनता का शुक्र मनाना चाहिये, जों उनकी तमाम खामियों की अनदेखी कर अभी भी उन्हें हॉस्पिटल में रखना चाह रही है। वैसे मरीजों को ही रही परेशानी के मद्देनज़र डॉ साहब हॉस्पिटल ज्वाइन करे तो उनका स्वागत है। पर हमारा मानना है कि डॉ साहब अगर अपनी भूल सुधारना चाहतें है तो इसके लिए सबसे पहले अपना अहंकार त्याग करें। इसी से उनका और इस शहर की जनता का भला होगा।  

  • राजेंद्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष -प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। “ये बेचारा काम के बोझ का मारा इसे चाहिये हमदर्द का टॉनिक सिंकारा”। पिछले दिनों उपजिला चिकित्सालय के अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ भारत भूषण जांगिड़ की काम की अधिकता की शिकायत सुनकर सहसा ही यह विज्ञापन याद आ गया। 90 के दशक के इस विज्ञापन में काम के बोझ से परेशान एक शख्स का चित्रण था, जिसे सिंकारा टॉनिक पीने की सलाह दी जाती है। बहरहाल काम की अधिकता से परेशान डॉ भारत भूषण विज्ञापन में दिख रहे व्यक्ति की तरह सिंकारा टॉनिक लेने की बजाय पिछले कई सालों से कामचोरी के नये नये पेंतरे आजमा रहे थे।
दरअसल प्रत्येक सोमवार को जब हॉस्पिटल में ओपीडी सबसे ज्यादा रहती हैं, डॉ साहब छुट्टी रख लेते थे। इसके अलावा नाइट ड्यूटी की जगह ऑन कॉल ड्यूटी कर डॉ साहब सप्ताह में एक और दिन छुट्टी ले लेते। रविवार और सरकारी छुट्टी के दिन वैसे भी 2 घंटे ही हॉस्पिटल खुलता है तो कुल मिलाकर सप्ताह 3 दिन डॉ साहब आराम से अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस रहे थे। बाकी बचे 4 दिन तो इन दिनों में भी डॉ साहब स्कूल की तरह बँक मार कर बीच बीच में अपना क्लिनिक संभाल आते थे।

वैसे भी डॉ साहब बखूबी समझते है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त में दिखाने के लिए आये गरीब मरीजों का क्या है, उन्हें तो वैसे भी इंतज़ार करने की आदत है ? अगर मरीज घंटा आध घंटा और इंतज़ार कर भी लेंगे तो उनको क्या फर्क पड़ता है। कुल मिलाकर सूरतगढ़ में काम के बोझ से थके डॉ साहब की 5 साल से अच्छी कट रही थी। डॉ साहब को यह शहर इसलिये भी भा रहा था क्यूंकि उन्हें मालूम है कि इस शहर में अब कोई नेता नहीं रहा, बस फोटोजीवी ही बचे है। सरकारी अस्पताल में आम आदमी को इलाज मिल रहा है या नहीं, इससे इन फोटोजीवियों का रत्ती भर लेना देना नहीं है ? इन फोटोजीवीयों के लिए राजनीति महज धार्मिक आयोजनों में फूल बरसाने, नारेबाज़ी या फिर चौक चौराहों पर पुतले फूँकना और हुडदंग मचाना मात्र है। तो डॉ साहब को ऐसे मरीज और फोटोजीवी नेता एक साथ इस शहर में मिल गए सो उन्हें क्या चाहिये था ?

कॉमरेड बुडानिया की एंट्री से डॉ साहब की लाइफ में पड़ा खलल, कथित इस्तीफा देकर विक्टिम कार्ड खेलने की कोशिश

जैसा कि कहते है “सब दिन होत न एक समाना”। डॉ साहब की आराम तलब लाइफ को ना जाने किसकी नज़र लग गई है। कॉमरेड पृथ्वीराज बुढ़ानिया ने डॉ साहब की आराम से चल रही लाइफ में खलल डाल दिया। कॉमरेड बुडानिया ने डॉ साहब सहित सभी डॉक्टर्स को सोमवार व मंगलवार को छुट्टी नहीं देने मांग कर दी। लेकिन डॉक्टर साहब को ये कैसे बर्दाश्त होता कि कोई व्यक्ति उन्हें अपने शेड्यूल मे बदलाव करने को कह दे। इसलिये मरीजों का ख्याल कर सोमवार को ड्यूटी पर आने की बजाय डॉ साहब ने विक्टिम कार्ड खेलते हुए प्रभारी को अपना कथित इस्तीफा भिजवा दिया है।

अपने कथित इस्तीफे में डॉ साहब कह रहे है कि पहले 3-3 हड्डी रोग विशेषज्ञ अस्पताल में थे और अब उन्हें अकेले तीनों का भार उठाना पड़ रहा है ? इस बात से इनकार नहीं है कि राजकीय चिकित्सालय में OPD ज्यादा है। लेकिन डॉक्टर साहब भूल जाते हैं कि इसी अस्पताल में डॉ शैलेंद्र सिंह, डॉ रमेश सोखल, मांगीलाल लेघा जैसे डॉ भी है जो सोमवार ही नहीं आम दिनों में भी आपसे ज्यादा मरीजों को देखते है और आपकी तरह ड्यूटी से बंक भी नहीं मारते। सच तो ये ही सोमवार को छुट्टी रखना नियम विरुद्ध होने के साथ साथ मरीजों के साथ सीधा अन्याय है। जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं किया जा सकता।

डॉ जांगिड़ का मरीज विरोधी रवैईया आया सामने, साख बचाने के मुद्दे को भटकाने की कर रहे कोशिश

इस पुरे प्रकरण ने डॉ भारत भूषण के अहंकार और मरीज विरोधी चरित्र की पोल खोल कर रख दी है। इसीलिए कुछ सोशल मीडिया इन्फलुऐंसर और पैड खबरों के जरिये कुछ फ़र्ज़ी तथ्यों को फैलाकर अपनी छवि में लग चुके डेंट को कम कर खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश कर रहे है। इसके साथ ही इस आंदोलन को गलत साबित करने की कोशिश भी डॉ साहब के समर्थकों द्वारा की जा रही है।

डॉ साहब के समर्थन में यह बात फैलाने की कोशिश की जा रही है कि डॉ साहब अगर सोमवार को छुट्टी रखकर बाकी दिन काम कर ही रहे है इससे क्या फर्क पड़ता है ? मरीजों को बाकी दिन तो डॉ साहब की सेवाओं का फायदा मिल रहा था। कुछ कम समझ वाले लोग यह भी कह रहे है कि डॉ साहब को यह अधिकार है कि वह जिस दिन चाहे उस दिन साप्ताहिक अवकाश ले सकते है। ऐसे सभी लोगों को यह जान लेना चाहिये कि ये डॉक्टर की सरकारी नौकरी कोई घर की खेती नहीं है। यह सरकार के नियमों से चलती है। ज़ब विभाग का नियम है कि सोमवार और मंगलवार को अस्पतालों में ओपीडी की संख्या अधिक होती है, इसलिये साप्ताहिक अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाये तो डॉ साहब कोई लाट साहब नहीं है कि उन्हें सोमवार को छुट्टी दी ही जाये।

इसके अलावा कुछ लोग डॉ साहब के छुट्टी पर जाने से आंदोलनकारी नेताओं को कठघरे में खड़े करने कि कोशिश कर रहे है। उनका कहना है कि पहले डॉ साहब सप्ताह में 5 दिन तो मरीजों को देख रहे थे अब आंदोलनकारीयों ने डॉक्टर को भगा दिया और मरीज ज्यादा परेशान हो रहे है। दरअसल ये वही लोग है जो खुद संघर्ष नहीं कर सकते, हां अगर दूसरा कोई प्रयास करता है तो उनके पेट में दर्द शुरू हो जाता है। ऐसे लोगों की हिम्मत नहीं हो रही कि हॉस्पिटल जाकर सच के साथ खड़े हो। इसलिये ये लोग सोशल मीडिया पर क्रांतिवीर बनकर टांग खिंचाई शुरू करने लग जाते है।

असलियत तो ये है राजकीय चिकित्सालय का सिस्टम जो पूरी तरह से सड़ चुका है उसकी वजह शहर के ऐसे हो लोग और इस शहर के फोटोजीवी नेता है जिनकी रीढ़ की हड्डी में अब सीधा खड़े रहने की ताक़त नहीं बची है। जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण है कि 15 दिन से चल रहे इस घटनाक्रम के बाद भी इन नेताओं में ये कहने की हिम्मत नहीं है कि डॉक्टर साहब आपकी जिद और रवैया गलत है।

सोमवार को चिकित्सालय में हुए घटनाक्रम के दौरान आंदोलनकारी नेताओं द्वारा प्रशासन से डॉक्टर की वैकल्पिक व्यवस्था की मांग का भी कुछ लोगों द्वारा यह कहकर मजाक उड़ाया जा रहा है कि जो लोग सोमवार सहित सप्ताह में 6 दिन डॉक्टर को देखना चाह रहे थे वे अब सप्ताह में दो-तीन दिन ही डॉक्टर लगाने के लिए गिड़गिड़ा रहे है। ऐसे लोग यह भूल जाते हैं कि ज़ब भी जनहित का कोई आंदोलन होता है तो उसकी कुछ कीमत भी जनता को भी चुकानी पड़ती है और जब सिस्टम संवेदनशील नहीं हो कई बार आंदोलन लंबा भी खींचता है। ऐसे में आंदोलन से जुड़े अग़वा लोग कोशिश करते है कि आंदोलन की वजह से आमजन को परेशानी कम से कम हो। यह आंदोलन भी दूसरे आंदोलनों से अलग नहीं है इसीलिए आंदोलन के अगुवा लोगों ने यह मांग की थी।

आंदोलन से सदाश्यता के बावजूद ऐसी बातों से सवाल उठाकर आंदोलन को कमजोर करने में सहयोग करने वाले इन लोगों को अभी थोड़ा और समझना होगा ? वैसे भी राजस्थानी में एक कहावत है कि “चिड़पिड़े सुहाग सुं रंडिपो भलो”। अगर डॉ साहब का ध्यान हॉस्पिटल के मरीजों की बजाय अपनी प्रैक्टिस चमकाने पर ज्यादा है तो फिर भले ही कुछ दिन की परेशानी हो शहर की जनता को नया डॉक्टर को लगाने की मांग बुलंद करनी चाहिये। वैसे भी डॉ साहब की बदौलत शहर का यह हॉस्पिटल महज रेफरल सेंटर बनकर रह गया है।
कुल मिलाकर जन आंदोलनो का विरोध कोई नई बात नहीं है। जो लोग लड़ नहीं सकते उनके लिए विरोध करना ही एकमात्र विकल्प है। लेकिन शहर का कोई भी जिम्मेदार नागरिक अगर चाहता है कि राजकीय चिकित्सालय की व्यवस्थाओं में सुधार हो तो यह जरूरी है कि वे आंदोलन के समर्थन में खड़े हो। आंदोलन का समर्थन आप सोशल मीडिया से लेकर फिजिकल प्रेजेंस से कर सकते है। आज से पहले आपने और हमने जनआंदोलनों से अपने आप को दूर रखकर तमाशा देखा है। यही वजह है कि सरकारी अस्पताल सहित शहर के सरकारी विभागों का सिस्टम इतना खराब हो चुका है कि आम आदमी उसको कोसने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहा है। कॉमरेड पृथ्वीराज बुडानिया को हम ज्यादा नहीं जानते लेकिन मुझे लगता है कि जिस संजीदगी से उन्होंने अस्पताल की अव्यवस्थाओं का मुद्दा उठाया है, शहर के जागरूक लोगों को उनके साथ खड़ा होना चाहिये।

–राजेंद्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष -प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। उपजिला चिकित्सालय में फैली अव्यवस्थाओं को लेकर आज शहर के लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। पिछले 10 दिनों से चल रहे विवाद के बावजूद चिकित्सालय प्रबंधन द्वारा अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की सेवाएं आज भी सुचारु नहीं की गई। जिसके चलते अपनी पूर्व घोषणा के तहत कॉमरेड पृथ्वीराज बुडानिया और जनता मोर्चा के ओम राजपुरोहित सहित कार्यकर्ता चिकित्सालय में पहुंचे और प्रभारी से अस्थिरोग विशेषज्ञ चिकित्सक लगाने की मांग रखी। लेकिन वार्ता के दौरान प्रभारी डॉक्टर नीरज सुखीजा गोलमोल जवाब देते हुए इस्तीफा दे चुके डॉक्टर भारत भूषण जांगिड़ का बचाव करते दिखे। डॉ सुखीजा ने अस्थिरोग चिकित्सक लगाने के सवाल पर सीएमएचओ को अवगत कराने की बात कह कर पल्ला झाड़ लिया।

जिसके बाद चिकित्सालय प्रभारी के रवैये से नाराज होकर कामरेड पृथ्वीराज बुडानिया, जनता मोर्चा अध्यक्ष ओम राजपुरोहित, छात्र नेता सुमित चौधरी, लक्ष्मण शर्मा सहित दूसरे लोगों ने प्रभारी के चेंबर में ही धरना लगा दिया और सीएमएचओ या किसी और जिम्मेदार अधिकारी से ही वार्ता करने की बात कहते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रभारी के चेंबर में धरने की सूचना मिलने पर डीएसपी प्रतीक मील और सिटी थाना सीआई दिनेश सहारण मौके पर पहुंचे और समझाईश का प्रयास किया। लेकिन आंदोलनकारी नेताओं ने पुलिस अधिकारियों से साफ कह दिया कि वे चाहे तो उन्हें गिरफ्तार कर ले ? आंदोलनकारी नेताओं ने चेंबर में जारी धरने को हटाने से साफ मना कर दिया। इस बीच संयुक्त व्यापार संघ, मारवाड़ी युवा मंच और खुदरा किरयाणा विक्रेता संघ से जुड़े व्यापारी और पदाधिकारी भी चिकित्सालय में पहुंच गए और प्रभारी नीरज सुखीजा से उच्च अधिकारियों से बात कर चिकित्सालय में विशेषज्ञ डॉक्टर लगाने की मांग रखी।

इस दौरान प्रभारी डॉ नीरज सुखीजा ने दबाब बनाने का आरोप लगाते हुए चेंबर छोड़ने का प्रयास किया तो लोगों ने उन्हें रोक दिया और खूब खरी खोटी सुनाई। करीब 2 घंटे तक चले इस घटनाक्रम के बाद एसडीएम भारत जयप्रकाश मीना मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारीयों से वार्ता कर दो दिन का समय मांगा। उन्होंने आंदोलनकारी नेताओं को शीघ्र ही सभी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया। इसके बाद आंदोलन कर रहे कामरेड बुडानियां और जनता मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने 2 दिन में उचित कार्रवाई नहीं होने पर गुरुवार को आंदोलन की घोषणा करते हुए धरना समाप्त कर दिया।

अव्यवस्थाओं पर किसान नेता राकेश बिश्नोई ने प्रभारी नीरज सुखीजा को दिखाया आईना !

उपजिला चिकित्सालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं पर धरने के दौरान किसान नेता राकेश बिश्नोई भड़क उठे और प्रभारी नीरज सुखीजा को साथ ले जाकर चिकित्सालय की सफाई व्यवस्था का हाल दिखाया। पूरे अस्पताल में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे थे, ऐसा लग रहा था जैसे महीनो से सफाई नहीं हुई हो ? राकेश बिश्नोई ने प्रभारी को लताड़ते हुए सवाल किया कि आखिर चिकित्सालय में सफाई की जिम्मेदारी किसकी है? सफाई के जब लाखों रुपए के टेंडर है तो फिर क्यों सफाई नहीं की जा रही है? इस दौरान पुलिस और प्रेस के अलावा हॉस्पिटल में आये मरीज भी बड़ी संख्या में जमा हो गए। राकेश बिश्नोई के सवालों पर प्रभारी डॉक्टर नीरज सुखीजा से जवाब नहीं देते बना। राकेश बिश्नोई ने हॉस्पिटल में जमकर भ्रष्टाचार होने के आरोप भी जड़े।

शहर के नेताओं का चरित्र उजागर ! पृथ्वीराज बुडानिया और राकेश बिश्नोई जैसे नेताओं की जरूरत ?

उपजिला चिकित्सालय में डॉक्टर भारत भूषण जांगिड़ को लेकर पिछले 10 दिनों से चल रहे इस आंदोलन और आज के घटनाक्रम ने शहर में राजनीति कर रहे नेताओं का चरित्र भी सामने लाकर रख दिया। आम आदमी की सबसे बड़ी जरूरत चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े इस आंदोलन को जिसकी आवाज़ यहां के नेताओं और जनप्रतिनिधियों को उठानी चाहिये थी, उस आवाज़ को 50 किलोमीटर दूर से आकर एक कॉमरेड नेता को उठानी पड़ी। उससे भी अफ़सोसजनक बात ये है कि 10 दिनों तक चले आंदोलन में शहर के किसी भी नेता या फिर जनप्रतिनिधि चाहे वे सत्ताधारी दल के हो या फिर विपक्षी कांग्रेस के, कुछ करना तो बहुत दूर की बात है, आंदोलन के समर्थन में 2 शब्द बोलने की भी जहमत नहीं उठाई। और तो और कॉमरेड बुडानिया कि इस मुहीम पर शहर के मार्क्सवाद का झंडा थामकर बड़ी बड़ी बातें करने वाले बड़बोले नेताओं को भी सांप सूंघ गया।

दरअसल इस शहर के कथित नेता आम जनता के बस वोट लेना चाहते है, उस जनता के लिए करना कुछ नहीं चाहते? और मामला ज़ब धरती के भगवान से जुड़ा हो तो उनसे पंगा कौन मोल ले ! वैसे भी इन नेताओं को तो डॉ साहब की सेवा 24 घंटे मिल ही रही है।

शायद यही वह वजह थी कि शहर के कुछेक नेता मुंह दिखाई के लिए धरने पर मौजूद तो थे। पर कड़वी हक़ीक़त ये है कि ये नेता अप्रत्यक्ष रूप से डॉक्टरों के विरोध को दबाने की कोशिश कर रहे थे। इन नेताओं की बॉडी लेंगवैज साफ बता रही थी कि इनका प्रयास किसी भी तरह इस आंदोलन को समाप्त करने का था, लेकिन बदकिस्मती से इनका ये प्रयास सिरे नहीं चढ़ सका।  

              खैर भला हो कॉमरेड बुडानिया का जिन्होंने उपजिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की मनमानी के खिलाफ आवाज़ उठाई। वह भी तब ज़ब उन्हें इस शहर ही नहीं इस क्षेत्र से कोई चुनाव नहीं लड़ना। पुरे आंदोलन के दौरान पूरी गंभीरता से उन्होंने पुरे तथ्यों और सबूतों के साथ अपनी बात रखी और बेहद शांति से आमजन की आवाज़ को बुलंद किया।

              इस पुरे आंदोलन के दौरान ज़ब शहर के नेता चिकित्सालय प्रभारी के सामने याचक की मुद्रा में खड़े थे। उस दौरान पृथ्वीराज बुडानिया के बाद अगर कोई नेता पूरी मजबूती के साथ खड़े दिखे तो वह किसान नेता राकेश बिश्नोई ही थे। बिश्नोई आंदोलन में देर से जरूर शामिल हुए लेकिन वही वो शख्स थे जिन्होंने चिकित्सालय प्रभारी को आईना दिखाने का काम किया। राकेश बिश्नोई ने ये दिखाया कि चिकित्सालय के प्रभारी भी जनता के नौकर है, जिन्हे हम लोगों ने भगवान मान लिया है। उन्होंने राजकीय चिकित्सालय की अव्यवस्थाओं के लिए प्रभारी को जमकर खरी खोटी सुनाई और अपना रवैया सुधारने की बात कही।

संयुक्त व्यापार संघ ने भी उठाया मामला, एसडीएम और प्रभारी को सौंपा ज्ञापन 

शहर के उपजिला चिकित्सालय में अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में मरीजों को हो रही परेशानी को देखते हुए सोमवार को संयुक्त व्यापार मंडल और अन्य व्यापारी व सामाजिक संगठन भी सक्रिय हुए। अध्यक्ष अवतार सिंह सरां और खुदरा किरयाणा विक्रेता संघ के अध्यक्ष राघव गुप्ता के नेतृत्व में व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल पहले एसडीएम भारत जयप्रकाश मीणा से मिला और ज्ञापन सौंपकर चिकित्सालय में अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉक्टर लगाने की मांग की। इसके बाद व्यापारियों ने चिकित्सालय प्रभारी नीरज सुखीजा से मिलकर मामले को जल्द से जल्द सुलझाकर मरीजों को राहत देने की मांग रखी। इस दौरान संयुक्त व्यापार संघ के सचिव नरेंद्र कालड़ा, कोषाध्यक्ष महेंद्र जैन, किशोर गाबा,घनश्याम आहुजा, पवन तावणीया, दिनेश मुंधड़ा, सतपाल भठेजा, गौरी शंकर सुथार, मनीष क्वातड़ा, गोपीराम शर्मा सहित बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे।

–राजेंद्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। शहर के वार्ड-3 व 26 के पट्टों की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन आखिर समाप्त हो गया। मांगे पूरी हो या नही आंदोलनो की नियति समाप्त होना है। लेकिन पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया के कोरे आश्वासन पर 40 दिनों से चल रहे इस ऐतिहासिक आंदोलन का समापन निराश करने वाला रहा।

दरअसल यह बात किसी से छुपी नही है कि ज़ब कांग्रेस, माकपा सहित भाजपा के भी तमाम नेता पट्टे देने के पक्ष में थे, उस समय अकेले कासनिया ही थे जिन्होंने मंत्री खर्रा से उपखंड अधिकारी जयप्रकाश मीणा को फोन कर पट्टे देने पर रोक लगवाई थी। ”वार्ड-3 और 26 में लोगों ने करोड़ों रुपए के प्लॉटों पर कब्जा कर रखा है इन्हे कैसे पट्टे दे सकते है” मंत्री खर्रा के मुंह में ये शब्द ठूंसने वाले भी कासनिया ही थे। कासनिया अगर मंत्री खर्रा को गुमराह नहीं करते तो ये आंदोलन करीब एक महीने पूर्व ही समाप्त हो जाता। क्यूंकि संघर्ष समिति और नगरपालिका ईओ के बीच हुई वार्ता में तो इन पट्टों के जारी करने पर आंदोलन समाप्त करने की सहमति बन चुकी थी।

इसके अलावा कौन नही जानता है आंदोलन को कमजोर करने के लिए इन वार्डों के लोगों को पट्टे नही मिलने और कब्ज़े के मकानों को तोड़ने का खौफ भी दिखाने वाले भी नेताजी के ही समर्थक थे ताकि धरनास्थल पर भीड़ नहीं जुट सके। इस खौफ का अंदाजा आप इस बात से आप लगा सकते है कि भाजपा से जुड़े एक नेताजी जो पट्टे के लिए पिछले कई सालों से भटक रहे थे उन्होंने तो आंदोलन की तरफ झांकना ही बंद कर दिया।    

इतना सब कुछ जानने समझने के बावजूद संघर्ष समिति का उन्ही नेताओं से महज आश्वासन लेकर आंदोलन समाप्त करना बेहद अफ़सोसजनक है। शर्मिंदगी की बात यह भी है कि पूरे आंदोलन के कासनिया को गरियाने वाले कुछ नेता भी उस वक़्त मंच पर दंडवत मुद्रा में थे। ये नेता 40 दिन बाद नेताजी के मंच पर आकर आश्वासन देने पर लहालौट थे। संघर्ष समिति के इस कदम ने आंदोलन से ईमानदारी से जुड़े नेताओ चाहे वह विधायक गेदर हो या फिर पूर्व विधायक भादू या फिर दूसरे नेता जो लगातार पट्टे जारी करवाने को लेकर प्रयास कर रहे थे, उनके सभी प्रयासों पर न केवल पानी फेर दिया है बल्कि आंदोलनों का ईमानदारी से साथ देने वाले लोगों को सोचने पर मजबूर भी कर दिया है। 

कासनिया के दबाब में व्यापारी नेताओं ने किया आंदोलन का सौदा

बताया जा रहा है कि कासनिया समर्थकों के दबाब और अपने निजी स्वार्थो के चलते शहर के कुछ चापलूस व्यापारी नेताओं ने आंदोलन के इस अंतिम दृश्य की पठकथा लिखी थी। इन नेताओं ने ही संघर्ष समिति पर दबाब बनाया और कासनिया के कोरे आश्वासन पर आंदोलन समाप्त करवा गत 40 दिनों से चल रहे इस पवित्र आंदोलन को अपवित्र कर दिया। इन नेताओं ने कासनिया से महज आश्वासन ही नही दिलाया, बल्कि उन्हें साफा पहनाकर कासनिया का इस तरह सम्मान किया मानो पीड़ित लोगों को पट्टे मिल ही गये हो। बेशर्मी की मोटी खाल ओढ़े एक नेताजी तो साफा पहनाकर यूँ फोटो खिंचवा रहे थे जैसे कि पट्टा उन्हें ही मिला हो। ये और बात है कि साफा नेताजी नही बल्कि कासनिया के समर्थक ही साथ लेकर आये थे।

यहां मजेदार बात ये है कि ज़ब संघर्ष समिति ने सेन धर्मशाला में 12 जनवरी को पब्लिक मीटिंग कॉल की थी उस समय इन्ही व्यापारी नेताओं ने धरने से लेकर बाजार बंद करने जैसी थोथी घोषणाए कर खूब गाल बजाये थे। इन व्यापारी नेताओं की वीर रस से भरी इन बातों के बहकावे में आकर समिति ने नगरपालिका पर अच्छे भले चल रहे धरने को महाराणा प्रताप चौक पर शिफ्ट कर दिया। आंदोलन के संयोजक प्रमोद ज्याणी यह भूल गए थे कि ये वही व्यापारी नेता है जो अपने व्यापारी साथी के साथ पुलिस दुर्व्यवहार पर पहले तो धरने का नाटक करते है, फिर उन्ही पुलिस अधिकारीयों को लड्डू खिलाकर बेशर्मी दिखाने में गुरेज नही करते। इस एक उदाहरण से कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि कितने बड़े सौदेबाज हैं ये लोग, फिर प्रमोद ज्याणी सहित संघर्ष समिति के नेताओं से इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई यह समझ से परे है।

वैसे यहां यह भी गौरतलब है कि कभी जन संघर्षों के लिए पहचाने जाने वाले इस शहर में पिछले दो दशकों में अगर कोई भी बड़ा आंदोलन खड़ा नहीं हो पाया है तो इसकी एक बड़ी वजह यही कथित नेता ही है जो व्यापारिक संगठनों के मठाधीश बने बैठे हैं। कुल मिलाकर एक बार फिर इस आंदोलन ने शहर के व्यापारिक संगठनों और उनके प्रतिनिधी नेताओं की स्वार्थी राजनीति की पोल खोल कर रख दी है। ऐसे में भविष्य में आंदोलन करने वाले लोग ऐसे नेताओं से दूरी बनाए रखें यही बेहतर होगा।

40 दिन चले जन आंदोलन का हासिल ?

इस आंदोलन के समाप्त होने के साथ ही अब इस बात पर की चर्चा हो रही है कि आखिर 40 दिन चले इस आंदोलन का हासिल क्या रहा। हालांकि एकबारगी देखने पर लगता है कि 40 दिन का संघर्ष व्यर्थ रहा। लेकिन सच्चाई यह नहीं है, दरअसल यह आंदोलन का दबाब ही था कि जिस विवादित खसरा नंबर-323 की वजह से पिछले 3 साल से वार्ड के पट्टे अटके हुए थे, प्रशासन उसका सीमा ज्ञान करवाने पर मजबूर हुआ। जिसके चलते वार्ड के लोगों को पट्टा मिलने का रास्ता खुला। दूसरा इस आंदोलन और प्रमोद ज्याणी की वजह से ही वार्ड नंबर 3 के खसरा नंबर 325 में बसी कॉलोनी की सुओ मोटो की कार्रवाई हुई और इस कॉलोनी के पट्टे मिलने शुरू हुए। यह पट्टे भी करीब 3 साल से लटके हुए थे। आंदोलन की वजह से इस कॉलोनी के करीब एक दर्जन लोगों को पट्टे मिले है। यहां बता दें कि ये वही पट्टे हैं जिनको बनाने के लिए लाखों रूपये के सौदे पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा के कार्यकाल में हुए थे। लेकिन तब ईओ पूजा शर्मा के इंक़ार के चलते ये पट्टे नहीं बन सके। साफ है कि अब इस आंदोलन की वजह से दर्जनों लोगों के लाखों रुपए भी बच गए।

        इसके अलावा पिछले 40 दिनों से चल रहे इस आंदोलन का सबसे बड़ा हासिल प्रमोद ज्याणी के रूप में काफ़ी हद तक एक ईमानदार नेता मिलना है। जिस दौर में शहर के बड़े बड़े नेताओं के लिए कुछ घंटे का धरना लगाने में पसीना छूट जाता है, उस दौर में प्रमोद ज्याणी 40 दिन तक दिन और रात आंदोलन को खींच ले जाते हैं यह कोई छोटी बात नहीं है। यह भरोसा प्रमोद ज्याणी ने पिछले कुछ सालों में अपने व्यहवार और आचरण से पैदा किया है कि वार्ड के सैंकड़ो लोगों ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें आंदोलन की कमान सौंप दी।

संयोजक के रूप में ज्याणी ने पूरी ईमानदारी और शिद्दत से इस आंदोलन की अगुवाई की। इसी वजह से शहर के प्रत्येक जागरूक व्यक्ति का आंदोलन से जुड़ाव हुआ। हर आम व्यक्ति भी मन ही मन यह कामना कर रहा था कि इन लोगों को उनके जायज पट्टे मिले। आम लोगों की इसी जनभावना के चलते ही मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ही नहीं भाजपा के नेता भी आंदोलन के समर्थन में सक्रिय हुए। ज़ब मंत्री खर्रा के इंकार के बाद जब आंदोलन कमजोर होता दिखा तब जिलाध्यक्ष शरणपाल सिंह मान के नेतृत्व में भाजपा नेताओं ने कलेक्टर से मिलकर जांच कमेटी गठित करवाई। वहीं बाद में कमेटी की जांच आने के बावजूद प्रशासन सुस्त बना रहा तो विधायक डूंगर राम गेदर ने धरने पर बैठकर प्रशासन को वार्ता के टेबल पर आने के लिए मजबूर कर दिया। यह सबकुछ अगर हुआ तो प्रमोद ज्याणी की वजह से ही हुआ।

आंदोलन के अंतिम दिनों में कासनिया के दबाब में महाराणा प्रताप चौक पर धरने पर बैठने वालों में वार्ड के लोगों की संख्या भले ही कम हो गई, लेकिन तब भी पर्दे के पीछे इन लोगों का नैतिक समर्थन ज्याणी को मिल रहा था। ये और बात है कि व्यापारी नेताओं की धूर्तता और कमजोरी के चलते आंदोलन का जिस अंदाज में पटाक्षेप हुआ उसकी निराशा ज्याणी के चेहरे पर साफ नज़र आई।

             बहरहाल हर आंदोलन कोई न कोई सबक देकर जाता है। प्रमोद तो निश्चित तौर पर इस आंदोलन से सबक लेंगे। लेकिन शहर की जनता को भी इस पूरे आंदोलन के दौरान शहर के नेताओं की भूमिका पर नजर डालनी चाहिए ताकि भविष्य में इस शहर का नेतृत्व अच्छे नेताओं को सौंपा जा सके। 

-राजेंद्र पटावरी, सम्पादक-खबर पॉलिटिक्स।

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सूरतगढ़। पूर्व भाजपा विधायक रामप्रताप कासनिया के पुत्र के विवेकानंद स्कूल को शहर की बेशकीमती भूमि के आवंटन के विरोध में मंगलवार को कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसकी चर्चा शहर भर में है। कांग्रेस के इस प्रदर्शन को विरोध की बजाय बेशर्मी का प्रदर्शन कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्युकि इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के जिन नेताओं और पार्षदों पर भूमि आवंटन मामले में प्रस्ताव के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष समर्थन का आरोप था, वे भी भूमि आवंटन का विरोध करते नज़र आये। शहर की जनता से गद्दारी करने वाले इन जनप्रतिनिधियों की विरोध प्रदर्शन में मौजूदगी से हर कोई हैरान था ? कोई भी आम आदमी इस तरह की बेशर्मी की उम्मीद नहीं कर सकता था, जिस दर्ज़े की निर्लज्जता का प्रदर्शन इन नेताओं ने किया। इस विरोध प्रदर्शन ने एक और इन नेताओं और पार्षदों के दोहरे चरित्र को उजागर कर ही दिया। वहीं दूसरी और विधायक डूंगरराम गेदर की राजनितिक समझ और इस संवेदनशील मामले को लेकर उनके छिपे चरित्र को भी जनता के सामने रख दिया है।

दरअसल कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन विधायक डूंगरराम गेदर की फेस सेविंग के लिए किया गया स्वांग मात्र था। क्युकि सरकार द्वारा भूमि आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद करोड़ों का नियमन शुल्क भराकर भूखंड का कब्जा तक सौंपा जा चुका है, ऐसी स्थिति में एडीएम कार्यालय पर कांग्रेस का प्रदर्शन समझ से बाहर है। हालांकि प्रदर्शन के बाद विधायक गेदर ने हाईकोर्ट में रिट लगाने की बात मीडिया में कही। परन्तु विधायक डूंगरराम गेदर पहले भी जमीन को किसी भी कीमत पर आवंटन नहीं होने देने की थोथी बयानबाजी कर चुके हैं। लेकिन जमीन आवंटन को रोकने को लेकर विधायक ने क्या किया यह भी शहर की जनता जानती है।

सच्चाई तो यह है कि जिस समय भूमि आवंटन का प्रस्ताव नगरपालिका बोर्ड की बैठक में लाया गया था उस समय भी प्रस्ताव रोकने के विधायक गेदर गंभीर नहीं थे। कड़वा मगर सच यही है कि जब मामला मीडिया में उछला और कांग्रेस के ब्लॉक ही अध्यक्ष परसराम भाटिया और एक सहयोगी पर 60 लाख रूपये में पार्षदों को बेचने का आरोप लगे तो मजबूरी में विधायक गेदर ने प्रेसवार्ता की और बड़े बेमन से बोर्ड बैठक में प्रस्ताव का विरोध करने की बात कही। नतीजा ये रहा कि पार्टी विहिप के बावजूद कांग्रेस के पार्षदों ने सरेआम वोटिंग कर और वोटिंग से दूर रहकर प्रस्ताव को पास करा दिया।

कांग्रेसी पार्षदों की गद्दारी के चलते हुई किरकिरी से बचने के लिए विधायक ने मीडिया के समक्ष ऐसे पार्षदों को पार्टी से बाहर करने के बात कही। परन्तु अपने कहे से इतर विधायक ने पार्टी आलाकमान को पत्र लिखने का नाटक कर इतिश्री कर दी। इसके बाद एक अन्य प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी ज़ब विधायक से बागी पार्षदों को लेकर सवाल पूछा गया, तब भी विधायक ने आलाकमान के बहाने से पार्षदों के थोड़े बचे कार्यकाल के पूरा होते ही पार्टी द्वारा उनसे किनारा करने सगुफा छोड़ दिया। उस समय विधायक ने मीडिया के सवाल पर यह घोषणा भी की थी कि अगले नगरपालिका चुनाव मे पार्टी से गद्दारी करने वाले पार्षदों को टिकट नहीं दी जाएगी। लेकिन कुछ ही दिनों में पार्टी कार्यक्रमों में वहीं पार्षद नजर आने लगे। मतलब साफ है कि विधायक गेदर की कथनी और करने में फर्क है।

विधायक गेदर की मंशा का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि ज़ब पिछले कई महीनो से जब स्कूल की फ़ाइल मंत्री के टेबल पर पहुंचने की चर्चा थी तब भी विधायक गेदर मूकदर्शक बने रहे और अधिकारियों को पत्र लिखने का ढोंग करते रहे। वहीं उनके ब्लॉक अध्यक्ष ने तो हाई कोर्ट से रिट उठाकर कासनिया की जमीन का रास्ता साफ कर दिया।

अब जबकि विधायक गेदर उन्ही दागी चेहरों के साथ भूमि आवंटन की कार्रवाई का विरोध करते है और दागियों के सवाल पर उनके ब्लॉक अध्यक्ष यह कहते हैं कि विधायक क्या इनको गोली मार दे, विधायक ने तो प्रस्ताव भेज दिया, फैसला आलाकमान को करना था ? तो भाटिया कि इस बात का क्या अर्थ लगाया जाये ? कौन नहीं जानता कि पार्टियों में विधायक संगठन से ऊपर होता है संगठन उसी के इशारे पर चलता है ! क्या कांग्रेस नेता जनता को बेवकूफ समझते है ?

कुल मिलाकर इस पूरे प्रकरण में विधायक गेदर के रवैइये से उनकी ईमानदार छवि और कार्यशैली दागदार हो चुकी हैं। मामले में हो रही किरकिरी के बाद विधायक गेदर सार्वजनिक रूप से भूमि आवंटन के खिलाफ कोर्ट में जाने का दावा कर रहे है। ऐसे समय में ज़ब खुद विधायक पर पूर्व भाजपा विधायक रामप्रताप कासनिया के साथ सेटिंग की चर्चा गर्म है। देखना होगा कि विधायक गेदर अपनी बात पर खरे उतरते है या नहीं।

कांग्रेस के प्रमुख नेता प्रदर्शन से रहे दूर, बना चर्चा का विषय

कांग्रेस के मंगलवार के विरोध प्रदर्शन में पार्टी के कई बड़े नेताओं की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही। जिस प्रदर्शन में जिले के सांसद शामिल हो रहे हो उसमे प्रमुख नेताओं की गैर मौजूदगी सबको अखर रही थी। प्रदर्शन में पूर्व विधायक राजेंद्र भादू, बलराम वर्मा, अमित कड़वासरा, गगन वेडिंग सहित कई प्रमुख चेहरे नज़र नहीं आये।

पार्टी सूत्रों की माने तो इस पुरे प्रकरण में हो रही पार्टी की किरकिरी से सभी नेता लम्बे समय से नाराज थे। लेकिन विधायक डूंगरराम गेदर इस विरोध को हल्के में ले रहे थे। जिसकी वजह से इन नेताओं ने प्रदर्शन से दूरी बना ली। नतीजा यह रहा कि इतने बड़े मुद्दे पर भी विधायक तमाम प्रयास के बावजूद 30-40 लोगों को इकट्ठा नहीं कर पाए। जिसके चलते प्रदर्शन औपचारिता बनकर रह गया।

–राजेंद्र पटावरी, अध्यक्ष -प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। सूरतगढ़ में भाजपा की अंदरूनी कलह का असर अब पार्टी कार्यक्रमों में दिखने लगा है। सत्ताधारी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोपों से हो रही बदनामी के चलते पार्टी का एक बड़ा धड़ा दूरी बना चुका है। यही वजह है कि सत्ताधारी नेता पार्टी कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए तरह-तरह की हठकंडे अपना रहे हैं। शुक्रवार को भाजपा के महत्वपूर्ण आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान का कार्यक्रम ऐसे ही हथकंडो के चलते खानापूर्ति बनकर रह गया।

आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के तहत सूरतगढ़ कार्यक्रम का टाइम टेबल

दरअसल पार्टी द्वारा आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के तहत प्रत्याशीयों को विधानसभा सम्मेलन का आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसी क्रम में पार्टी द्वारा पहले अग्रसेन भवन में शुक्रवार को सुबह 10:30 बजे आत्मनिर्भर संकल्प अभियान का कार्यक्रम तय किया गया था। लेकिन पार्टी के स्थानीय नेताओं ने सम्भवतः भीड़ नहीं जुटने के डर से इस कार्यक्रम की गरिमा को ही ताक पर रख दिया और शुक्रवार को आरसीपी कॉलोनी में पानी की टंकी के उद्घाटन समारोह को ही आत्मनिर्भर संकल्प अभियान का कार्यक्रम बना दिया। टंकी उद्घाटन समारोह को आत्मनिर्भर संकल्प अभियान का कार्यक्रम दिखाने के लिए नेताजी ने स्टेज़ के अगल-बगल में अभियान के दो बैनर लगाकर रस्म अदायगी कर दी। इतना ही नहीं नेताजी को चूंकि यह उम्मीद थी कि कार्यक्रम में वार्ड के लोगों की पर्याप्त भीड़ हो ही जानी है तो उन्होंने पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेताओं को कार्यक्रम की सूचना तक नहीं दी। जिसकी वजह से पार्टी के कई नेता कार्यक्रम में नदारद दिखे।

टंकी के उद्घाटन समारोह में एक साइड में लगाया गया विधानसभा सम्मेलन का पोस्टर

टंकी के उद्घाटन समारोह को आत्मनिर्भर संकल्प अभियान का कार्यक्रम बताकर स्थानीय नेताजी भले ही अपनी पीठ थपथपा रहे हो। लेकिन यह भी सच है कि ज़ब नेताजी और अभियान के तहत बुलाये गए नेता आत्मनिर्भर भारत के नाम पर गला साफ कर रहे थे उसी वक़्त स्टेज पर लगा की टंकी के उद्घाटन समारोह का पोस्टर जिम्मेदारों की चुगली कर रहा था। बहरहाल यह कार्यक्रम अनुशासन और सुचिता की बात करने वाले नेताओं की पोल खोलने के साथ साथ इस बात का भी इशारा है कि पार्टी के सिंबल से सत्ता का सुख भोगने वाले नेताओं के पैरों के नीचे जमीन नहीं बची है।

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सूरतगढ़। सादुलशहर से भाजपा विधायक गुरवीर बराड़ शनिवार को सूरतगढ़ दौरे पर रहे। जहाँ उन्होंने खेजड़ी मंदिर में दर्शन कर कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया। विधायक बराड़ शाम करीब 5:45 बजे हनुमान खेजड़ी मंदिर पहुंचे जहाँ पूर्व विधायक अशोक नागपाल, नगरमंडल अध्यक्ष गौरव बलाना, सुरेश मिश्रा, भाजपा नेता सुरेंद्र सिंह राठौड़ आदि ने विधायक की आगवानी की। इस दौरान सैकड़ो की संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं ने गुरवीर बराड़ जिंदाबाद के नारे लगाए। इसके बाद विधायक गुरवीर बराड खेजड़ी मंदिर में पहुंचे जहाँ जिला प्रमुख कविता रैगर, पूर्व पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा सहित महिलाओं में विधायक का स्वागत किया। मंदिर में विधायक ने बालाजी के दर्शन किये। इस मौके पर मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष नरेंद्र राठी और समिति सदस्यों ने बालाजी का चित्र भेंट कर विधायक का सम्मान किया। 

              देवदर्शन कार्यक्रम के बाद मंदिर प्रांगण में विधायक के विधिवत स्वागत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें सर्वप्रथम पूर्व विधायक अशोक नागपाल, पूर्व नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, पूर्व पार्षद सुरेंद्र राठौड़ ने विधायक का बुके भैंट कर स्वागत किया। इसके बाद नगरमंडल की तरफ से अध्यक्ष गौरव बलाना, महामंत्री अजय सिसोदिया, अंकुर लड़ोईया, मंत्री रीना स्वामी, आकाशदीप बंसल सहित समस्त कार्यकारिणी ने विधायक का विशाल माला पहनाकर अभिनंदन किया। भाजपा की महिला नेताओं जिला प्रमुख कविता रेगर, जिला उपाध्यक्ष आरती शर्मा आदि ने भी विधायक को पुष्प भैंट कर स्वागत किया। बाद में स्वागत की कड़ी में भाजपा के सभी मंडलों, व्यापार मंडल, श्री हनुमान खेजड़ी मंदिर प्रबंध समिति सहित संस्थाओं की तरफ से विधायक का स्वागत सम्मान किया गया।

              इस अवसर पर विधायक विधायक गुरवीर सिंह बराड़ ने सभा को संबोधित करते हुए अपने दादा के समय से सूरतगढ़ के साथ संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने यहां के मुद्दों और समस्याओं को लेकर हर संभव प्रयास का भरोसा दिलाया। अपने संबोधन में बराड़ ने सूरतगढ़ की राजनीति से जुड़े सहयोगियों का भी जिक्र किया। विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल द्वारा क्षेत्र में किये गए कार्यों की जानकारी भी दी। विधायक बराड़ ने कार्यकर्ताओं को पार्टी हित में काम करने और सरकार की योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने का आह्वान किया। 

कार्यक्रम में जुटी अच्छी खासी भीड़, पार्टी के नए-पुराने कार्यकर्ता आये एक साथ

पार्टी कोई भी हो आमतौर पर चुनावों के समय राजनीतिक मंच सजते हैं। परन्तु विधायक गुरवीर बराड़ के स्वागत के बहाने आयोजित कार्यक्रम में जिस तरह से भाजपा नेता और कार्यकर्ता जुटे वह वाकई हैरान करने वाला था। भाजपा नगरमंडल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में संगठन से जुड़े नेता और कार्यकर्ताओं के अलावा अच्छी खासी संख्या में भीड़ भी उमड़ी। विधायक के स्वागत कार्यक्रम में सूरतगढ़ ही नहीं बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की बड़ी संख्या में पहुंचे। खेजड़ी मंदिर पर आयोजित इस कार्यक्रम को देखकर साफ लग रहा था कि अध्यक्ष गौरव बलाना, महामंत्री अजय सिसोदिया और संयोजक सुरेन्द्र राठौड़ की टीम ने कार्यक्रम के लिए कड़ी मेहनत की है। 

पूर्व विधायक कासनिया और उनके पुत्र की अनुपस्थिति बनी चर्चा का विषय

विधायक बराड़ के स्वागत कार्यक्रम में जहाँ भाजपा के सभी बड़े नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे वहीं पार्टी के दिग्गज नेता रामप्रताप कासनिया और उनके पुत्र की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बन गई। इससे पहले कार्यक्रम को लेकर शहर में लगाये गये सैकड़ो होर्डिंग/पोस्टर में से एक में भी पूर्व विधायक और उनके पुत्र की फोटो नहीं थी। जिसकी चर्चा कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही पूरे शहर भर में थी। लेकिन मुख्य कार्यक्रम में भी पूर्व विधायक और उनके पुत्र की अनुपस्थिति ने चर्चाओं का माहौल गर्म कर दिया है। कुछ लोगों का कहना है कि पूर्व विधायक जयपुर गए हुए थे इसलिये वे कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। लेकिन यह पूरा सच नहीं है क्यूंकि विधायक की अनुपस्थिति में उनके पुत्र संदीप कासनिया को कार्यक्रम में होना चाहिए था।

वैसे यहां देखने वाली बात यह भी है कि केवल कासनिया और उनके पुत्र ही नहीं बल्कि कासनिया खेमे के खास नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी पूरे कार्यक्रम से दूर रखा गया। जिससे यह साफ इशारा मिलता है कि कार्यक्रम में जानबूझकर कासनिया गुट की अनदेखी की गई।    

कासनिया के विरोधियों ने दिखाई ताकत ! भाजपा में गुटबाजी पर लगी मोहर

भाजपा में लंबे समय से कासनिया से वरिष्ठ भाजपा नेताओं की नाराजगी की खबरें आ रही थी। लेकिन यह पहला अवसर है ज़ब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कासनिया की छाया से निकल कर अपने स्तर पर ना केवल भीड़ जुटाई बल्कि पार्टी के लगभग सभी सक्रिय नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर ला खड़ा किया। कार्यक्रम के दौरान भाजपा के लगभग सभी मंडलों के पदाधिकारी और पार्टी से जुड़े लगभग सभी पुराने और नए नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे। इतनी बड़ी संख्या में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक मंच पर होना कहीं ना कहीं इस बात का इशारा है कि पार्टी का एक बड़ा धड़ा जो कासनिया के झंडे तले खड़ा रहने में खुद को असहज महसूस कर रहा था, उसने एक नई राह पर चलने का फैसला कर लिया है। एक तरह से कहा जाये तो विधायक गुरवीर बराड़ के स्वागत के बहाने विपक्षी धड़े ने कासनिया को अपनी ताकत दिखाने के लिए शक्ति प्रदर्शन किया है। इसी वजह से ही कासनिया और उनके समर्थकों को जानबूझकर कार्यक्रम से दूर रखा गया।

पार्टी में गुटबाजी के लिए कासनिया खुद जिम्मेदार !

द्वापर युग में जिस तरह से धृतराष्ट्र का पुत्र मोह महाभारत का कारण बना उसी तरह से स्थानीय भाजपा में चल रही महाभारत की बड़ी वजह कासनिया का पुत्र मोह ही है। क्योंकि आज कासनिया के विरोध में जो नेता खड़े दिखाई दे रहे उनमे से अधिकांश वरिष्ठ नेता पिछले डेढ़ दशक से कासनिया के साथ थे। कासनिया के 2008 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद और 2013 में कासनिया की टिकट कटने पर भी ये नेता कासनिया के खेमे में बने रहे। यही नहीं 2018 में इन्ही नेताओं के समर्थन से कासनिया ने जीत हासिल की और 2023 तक विपक्षी पार्टी के विधायक के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया। साफ है कि कासनिया के प्रति इन वरिष्ठ नेताओं की निष्ठा थी। लेकिन 2023 के चुनाव में हारने के बावजूद ज़ब पहली बार कासनिया सत्ता का केंद्र बने तो अचानक कासनिया अपनी कही से फिर गए। पिछले 15 सालों से अपने पुत्र को पानी पी-पीकर कोसने और अपना राजनितिक उत्तराधिकारी नहीं बनाने का वादा करने वाले कासनिया धृतराष्ट्र बन गए और उन्होंने अपने पुत्र को पार्टी और सत्ता की चाबी सौंप दी। जिससे पहली बार कासनिया को लेकर वरिष्ठ नेताओं असंतोष नज़र आया। 

              इसके बाद कासनिया ने ज़ब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए ओम कालवा का निलंबन रद्द करवा चेयरमैन बनाया तब भी पार्टी में कुछ लोग कासनिया के फैसले से नाखुश थे। कालवा के दूसरी बार निलंबन के बाद अधिकांश नेताओं ने पार्टी के पुराने कार्यकर्ता जगदीश मेघवाल को अध्यक्ष मनोनीत करवाने की इच्छा जाहिर की। लेकिन कासनिया ने वरिष्ठ नेताओं की सलाह को दरकिनार कर कालवा को अध्यक्षी सौंप दी। थोड़े ही समय के बाद ज़ब कालवा ने बोर्ड बैठक में कासनिया के स्कूल को नई धानमंडी और हाउसिंग बोर्ड के स्थित चार बीघा बेशकीमती जमीन देने का आदेश पारित करवा दिया। जिससे कासनिया और कालवा के बीच अध्यक्ष बनने को लेकर हुई डील भी खुलकर सामने आ गई। इस प्रकरण ने कासनिया की ईमानदार नेता की छवि का सच आम जनता और पार्टी नेताओं के बीच खुलकर आ गया। 

         उधर बाद में भी जमीन घोटालों और अतिक्रमणो में पूर्व विधायक के पुत्र का नाम आने से भी पार्टी की लगातार किरकिरी हो रही थी, लेकिन कासनिया पुत्र मोह में आँखें मुंदे रहे। वरिष्ठ नेताओं की यह नाराजगी उस समय चरम पर पहुंच गई जब पिछले साल ज़ब नगरपालिका के वार्डों के परिसीमन का मौका आया। कासनिया ने एक बार फिर वरिष्ठ नेताओं से सलाह किए बगैर वार्डों का मनमाफिक परिसीमन कर दिया। जिसके बाद जिलाध्यक्ष शरणपाल सिंह मान को हस्तक्षेप कर परिसीमन में बदलाव करवाना पड़ा। कासनिया के खिलाफ विपक्षी गुट की यह संभवत पहली जीत थी, जिसने विपक्षी धड़े को कासनिया के सामने खड़े होने का हौसला दिया। इसी हौसले का नतीजा है विधायक गुरवीर बराड़ के स्वागत के लिए शनिवार को किया गया विरोधी धड़े का शक्ति प्रदर्शन।

पार्टी में क्या होगी भविष्य की राह ? 

विधायक गुरवीर सिंह बराड़ के कार्यक्रम से यह तो साफ हो चुका है कि वर्तमान भाजपा में दो धाराएं बन चुकी है। जहाँ फिलहाल सत्ता की चाबी पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया और संगठन का समर्थन दूसरे खेमें के वरिष्ठ नेताओं के पास है। क्यूंकि रामप्रताप कासनिया विधायक नहीं है इस वजह से प्रशासन में संगठन के मुखिया जिलाध्यक्ष शरणपाल सिंह मान का भी बराबर का सा दखल है। ऐसे में विपक्षी वरिष्ठ नेताओं का संगठन कासनिया के लिए आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।

वैसे रामप्रताप कासनिया को राजनीति का लंबा अनुभव है। वे ये जान भी रहे होंगे कि पुत्र पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों से उनकी राजनीतिक जमीन लगातार कमजोर हो रही है तो पार्टी को भी नुकसान हो रहा है। जिसका खामियाजा आगामी चुनाव में कासनिया और पार्टी दोनों को भुगतना पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि खुद कासनिया और उनके पुत्र संदीप कासनिया आगे बढ़कर स्थिति को संभाले और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी भी दूर करें।

कासनिया अगर सबक लेना चाहे तो कांग्रेस के पिछले कार्यकाल से ले सकते है, जिसमे अतिक्रमणों और भ्रष्टाचार के आरोपों ने राजस्थान के सबसे शक्तिशाली जाट परिवारों में से एक मील परिवार की राजनीति को लील लिया।

– राजेंद्र कुमार पटावरी, अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। श्रीगंगानगर जिले की नई पुलिस कप्तान डॉ.अमृता दुहन बेहतर पुलिसिंग और अपराधों पर नियंत्रण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध नजर आ रही हैं। एसपी डॉ. अमृता दुहन के कार्यभार संभालने के बाद से पूरे जिले का पुलिस प्रशासन एक्टिव मोड में आ गया है। एसपी ने जिस तरह से अपना व्हाट्सएप नंबर सार्वजनिक कर आमजन को अपने आसपास के क्षेत्र में हो रहे क्राइम की सूचना देने की अपील की है, उससे उनकी संवेदनशीलता और गंभीरता भी नज़र आती है। इसके अलावा एसपी डॉ. अमृता दुहन नवाचार करते हुए आमजन के साथ संवाद भी कर रही है। इसी कड़ी में एसपी के निर्देश पर मंगलवार को सूरतगढ़ में जनसहभागिता मीटिंग का आयोजन हुआ। जिसमे एसपी आमलोगों के बीच पहुंची और उनकी पुलिस सिस्टम से जुड़ी समस्याएं सुनी। साथ ही एसपी ने सभी लोगों से बेहतर पुलिसिंग व्यवस्था बनाने के लिए सहयोग की भी अपील की। 

जिम्मेदारों ने किया निराश, सिस्टम की हकीकत बताने की बजाय बने पुलिस के पैरोकार

मंगलवार को आयोजित पुलिस जनसहभागिता मीटिंग ने क्षेत्र के लोगों के लिए एक बड़ा अवसर था। ख़ासकर उन लोगों के लिए जो पुलिसिया सिस्टम से परेशान है। ऐसे लोगों के लिए यह मीटिंग मौका था अपनी पीड़ा पुलिस कप्तान तक पहुंचाने का। मगर अफसोस की बात है कि लिजलिज़े नेताओं और चाटुकारों की वजह से यह अवसर जाया हो गया। दरअसल जिन लोगों कि जिम्मेदारी थी कि वे पुलिस की कार्यशैली, परिवादियों को मिल रही प्रताड़ना और क्षेत्र में बढ़ रहे अपराधों को लेकर पुलिस की नाकामी का कच्चा चिट्ठा एसपी के सामने रखते, वे लोग ही पूरी मीटिंग में पुलिस की ढाल बनते नज़र आये। 

          मीटिंग में जिम्मेदारों के हालात कैसे थे इसका अंदाजा आप इस बात से लगाइए कि पुलिस कप्तान ने जिस मीटिंग का आयोजन आमजन की समस्या सुनने के लिए किया था, उस मीटिंग में एक नेता को पुलिस पर इतना प्यार आया कि वे एसपी साहिबा को आमजन की बजाय पुलिस वालों की समस्याएं ही गिनाने लग गये। यह बताने में जाने क्यों युवा नेता को लाज नहीं आई कि पुलिस बहुत अच्छा काम कर रही है और नगरपालिका और रेवेन्यू प्रशासन की वजह पुलिस का समय शांति व्यवस्था बनाए रखने में जाया हो रहा है ? ठीक इसी तरह एक और युवा नेता ने भी खुद को पुलिस का वफादार साबित करने के लिए रात को 2:30 बजे भी पुलिस गश्त करने का सपना भरी सभा में सुना दिया। ये तो महज उदाहरण है। दरअसल पूरी मीटिंग में एसपी साहिबा को अपना परिचय देने और फोटो खिंचवाने की चाहत में अनेकों नेताओं और नेतियों ने गला साफ किया और एसपी साहिबा और स्थानीय पुलिस की चरणवंदना के बहाने इस महत्वपूर्ण मीटिंग का ज्यादातर समय बर्बाद कर दिया। 

         वहीं बची खुची कसर पुलिस कप्तान को सम्मानित करने के नाम पर बुलाये गये छपास रोगियों से भरे कथित सामाजिक संगठनों ने कर दी। आमजन से संवाद के लिए बुलाई गई मीटिंग में सामाजिक संस्थाओं की पुलिस कप्तान को सम्मानित करने की होड़ा होड़ी ने केवल कार्यक्रम को अव्यवस्थित कर दिया, बल्कि वास्तविक पीड़ित लोगों को पुलिस कप्तान तक पहुंचने से भी रोक दिया। 

नेताओं की जगह कुछ आम लोगों ने दिखाया एसपी को आईना

कभी क्रांतिकारियों का शहर कहे जाने वाले सूरतगढ़ में भले ही रीढ विहीन नेताओ और लोगों भरमार है। पर ऐसा भी नहीं है कि सबका जमीर मर चुका है। इसके कुछ उदाहरण एसपी की जनसहभागिता मीटिंग में भी देखने को मिले। ये लोग संख्या में जरूर कम थे लेकिन इन लोगों ने हौसला दिखाते हुए क्षेत्र की पुलिस व्यवस्था की कलई खोल कर रख दी। मीटिंग में कई बार ऐसे मौके आये ज़ब अपने आरोपों से इन लोगों ने एसपी साहिबा को ना चाहते हुए भी मातहत पुलिस ऑफीसरों के बचाव में उतरने के लिए मजबूर कर दिया। पुलिस थानों में केवल अमीर लोगों की सुनवाई होने से बड़ा आरोप और क्या होगा ?

इसी तरह से एक पूर्व पार्षद ने खुलेआम सिटी थाने के एक अधिकारी पर गाली गलौज कर बात करने का आरोप जड़ दिया। यही नहीं उस अधिकारी का नाम सार्वजनिक मंच पर बोलने का कह दिया। जिसके बाद एसपी को उसे रोकना पड़ा और उन्होंने अपने गनमैन को बुलाकर उस अधिकारी का नाम नोट करवाया। यही नहीं एसपी को थाना अधिकारियों को आमजन से अच्छा व्यवहार करने का भी निर्देश देना पड़ा।

इसी तरह से वार्ड नंबर-1 के युवा ने तो वार्ड में बिक रहे नशे को लेकर खुद एसपी साहिबा को कठघरे में ला खड़ा किया। इस युवा ने एसपी को उनके द्वारा सांझा किए गए व्हाट्सप्प नंबर पर 1 महीने में तीन बार शिकायत भेजनें के बावजूद कार्रवाई नहीं करने पर घेरा। युवा द्वारा मीटिंग में खुलेआम लगे आरोपों से संवेदनशील एसपी साहिबा भी एक बारगी असहज़ हो गयी। इस युवा ने ज़ब आगे बढ़ते हुए पुलिस की मौजूदगी में ही कह दिया कि ‘आपकी पुलिस मिली हुई है’ तो एसपी साहिबा ना चाहते हुए भी उखड़ गई और पुलिस अफसरों को टारगेट नहीं करने की बात कहते हुए युवक को पीछे होने के लिए बोल दिया। पर वास्तविकता ये थी कि युवक के आरोपों ने एसपी साहिबा को एक बारगी बैक फुट पर ला दिया। हालांकि इसके बाद उन्होंने स्थिति को संभालते हुए अपने इमोशंस पर कंट्रोल कर लोगों से संवाद जारी रखा और पूरी संज़ीदगी का परिचय देते हुए लोगों के सुझाव और उनके समस्याएं भी सुनी। 

                वैसे इस घटनाक्रम के बाद एसपी द्वारा  बोलने से रोकने पर शिकायत कर रहे युवा को भी झटका लगा क्यूंकि युवक काफ़ी उम्मीद से मीटिंग में पहुंचा था। ऊपरी तौर पर यह मामला भले ही कुछ लगे लेकिन  लगता यही है कि इस मामले में भी एसपी डॉ अमृता दुहन की मंशा गलत नहीं थी बल्कि निचले स्तर पर लापरवाही हुई। एसपी को ये गुमान नहीं था कि ये लापरवाही कुछ इस तरह से उनके सामने ऑकवर्ड सिचुएशन पैदा कर देंगी और उन्हें बचाव की मुद्रा में आना पड़ेगा।

शहर में कानून व्यवस्था को लेकर एसपी दे दिए निर्देश

मीटिंग में एसपी डॉक्टर अमृता दुहन ने नशे पर रोक लगाने, त्रिमूर्ति मंदिर क्षेत्र में पुलिस चौकी जल्द शुरू करने और चौकी शुरू नहीं होने तक हर दिन शाम को चौकी में पुरुष व महिला पुरुषकर्मियों के मौजूद रहने, मॉडिफाइड बाइक पर कड़ी कार्रवाई करने और पुलिस थानों में परिवर्दियों से बेहतर व्यवहार करने के निर्देश दिए।

            कुल मिलाकर पूरी मीटिंग के दौरान एसपी गंभीर नज़र आई और जिस संवेदनशीलता से उन्होंने समस्याओं को सुना और अधिकारियों को निर्देश दिए उससे उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले दिनों में जिले में पुलिस व्यवस्था में सुधार देखने को मिलेगा। वैसे यह भी देखना होगा कि जिला एसपी द्वारा दिए गए निर्देशों के पालना को लेकर पुलिस अधिकारी कितनी गंभीरता दिखाएंगे।

– राजेंद्र पटावरी, अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। शहर में मेडिकल व्यवसाईयों की संस्था केमिस्ट एसोसिएशन भी राजनीति का शिकार हो गई है। इस संस्था के एक धड़े ने पिछले दिनों नागपाल मेडिकल स्टोर के संचालक लवली सिडाना को सर्वसम्मति से अध्यक्ष निर्वाचित कर दिया। उस समय 50 से अधिक यूनियन सदस्यों द्वारा लवली नागपाल को समर्थन देने का दावा किया गया। वहीं श्रीगंगानगर जिला केमिस्ट अलायंज के गुट से जुड़े शहर के मेडिकल व्यवसाइयों के दूसरे गुट ने शनिवार को पुष्करणा धर्मशाला में चुनाव कर अनिल शर्मा को अध्यक्ष घोषित कर दिया। दूसरे गुट के इस चुनाव में संगठन के पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा के सामने मनोज सहारण चुनाव मैदान में थे। जैसा की इस चुनाव का नतीजा सभी को पहले से ही मालूम था, अनिल शर्मा चुनाव में विजयी रहे। अनिल शर्मा के 156 वोटो के मुकाबले प्रतिद्वंदी सहारन को महज 12 वोट मिले। इस प्रकार इस चुनाव में अनिल शर्मा 144 वोटो से जीत कर अध्यक्ष बन गए।

इन चुनाव के नतीजे और परिस्थितियों पर अगर गौर किया जाए तो साफ नजर आता है कि यह चुनाव अनिल शर्मा गुट द्वारा लवली गुट को कमजोर साबित करने के लिए किया गया महज़ एक शक्ति प्रदर्शन था। चुनाव के बाद अध्यक्ष द्वारा पहली बार पूरे बाजार में जुलूस निकालना भी इसी रणनीति का एक हिस्सा था। हालांकि विजय जुलूस में जीत के अनुरूप मेडिकल व्यवसायी शामिल रहे। इसके अलावा दूसरी फील्ड के लोगों ज्यादा संख्या में मौजूद होना सब कुछ प्लांड होने के संदेह को पुख्ता करता है।

वरिष्ठ सदस्य चाहते थे बदलाव ! अध्यक्ष अनिल शर्मा नहीं थे पद छोड़ने को तैयार ?

दरअसल अनिल शर्मा क्यूंकि पिछले 4 वर्षों से लगातार अध्यक्ष पद पर काबिज़ थे, इसलिये केमिस्ट एसोसिएशन के कुछ पुराने और वरिष्ठ सदस्य लवली सिडाना को सर्वसम्मती से अध्यक्ष बनाने के पक्ष में थे। इसलिये चुनाव संबंधी बैठक में लवली सिडाना ने अध्यक्ष अनिल शर्मा को पिछले चुनाव में अगली बार अध्यक्ष पद के लिए उनके नाम को समर्थन देने का वादा याद दिलाते हुए अध्यक्ष बनने की इच्छा जाहिर की। बताया जा रहा है कि मीटिंग में अध्यक्ष अनिल शर्मा ने ऐसे किसी वादे से इंकार कर दिया और हर हाल में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। जिससे सर्वसम्मति से लवली सिडाना को सर्वसम्मति से अध्यक्ष नियुक्त करने की कवायद सफल नहीं हो पाई। कहा जा रहा है कि इसके कुछ दिनों बाद भी अनिल शर्मा के मान मनोव्वल का दौर चलता रहा, लेकिन ज़ब सहमति नहीं बन पाई तो मेडिकल व्यवसाईयों के एक गुट ने जिसमें ज्यादातर शहर के मुख्य व पुराने मेडिकल व्यवसायी शामिल थे, ने बैठक कर लवली सिडाना को सर्वसम्मति से अध्यक्ष बनाने की घोषणा कर दी।

इसके बाद से गुटबाजी तेज हो गई हो और अनिल शर्मा ने मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े अन्य सदस्यों के अलग धड़े के अध्यक्ष का चुनाव करवाने की घोषणा कर दी। दरअसल दूसरे गुट से जुड़े सभी सदस्य पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा के अध्यक्ष बनने पर सहमत थे। लेकिन लवली गुट को अपनी ताकत दिखाने के लिए चुनाव करवाना जरूरी हो चुका था। इसीलिए चुनाव का स्वांग रचने के लिए डमी कैंडिडेट को मैदान में उतारकर चुनाव की घोषणा की गई। इस चुनाव में विपक्षी केंडिडेट को महज 12 बोट मिलना भी इसी सेटिंग का ही परिणाम मात्र है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में चुनाव में हारा हुआ प्रत्याशी खुद को ही माला पहना रहा है जो मिलीभगत को बताने के लिए काफ़ी है। साफ है कि यह चुनाव कुछ लोगों की कुंठा को शांत करने करने का टूल मात्र था। वैसे ज्यादा बेहतर होता कि अनिल शर्मा सर्वसम्मति से दूसरे गुट के किसी वरिष्ठ सदस्य को अध्यक्ष का दायित्व सौंपकर उदाहरण पेश करते। फिर भी अगर किसी ईगो के चलते उन्हें अध्यक्ष बनना ही था तो दूसरे गुट की बैठक कर वे सर्वसम्मति से अध्यक्ष घोषित हो जाते। दोनों ही परिस्थितियों में संस्था की गरिमा कुछ हद तक बनी रहती। परन्तु श्रेष्ठता के दम्भ ने अच्छी भली संस्था की राजनीति को सड़क पर ला दिया।

बहरहाल जिस तरह की राजनीति के चलते केमिस्ट एसोसिशन दो गुटों में बंट गई है। आने वाले दिनों में दोनों गुटों मे खींचतान और देखने को मिल सकती है। लवली गुट को जहां यह एज है कि इस गुट में शहर के अधिकांश पुराने और जाने माने मेडिकल व्यवसायी जुड़े है, वहीं दूसरे गुट के मुकाबले इनकी संख्या कम होना एक ड्रा बैक भी है। ऐसे में लवली सिडाना के लिए यह बड़ी चुनौती है कि जिन सदस्यों ने उन्हें अध्यक्ष बनाया है वह उनके विश्वास पर खरा उतर कर दिखाये। दूसरी और अनिल शर्मा गुट में सदस्यों की संख्या लवली गुट के मुकाबले तिगुनी से ज्यादा है। इसके अलावा अनिल शर्मा का लंबे समय से अध्यक्ष होना व मेडिकल प्रशासन में पैठ होना उनके लिए बड़ा प्लस पॉइंट है।

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सूरतगढ़ । सूरतगढ़ क्रय विक्रय सहकारी समिति के अध्यक्ष भानू गोदारा को यूथ कांग्रेस का प्रदेश महासचिव की नियुक्त किया गया है। कांग्रेस में संगठन विस्तार के तहत शुक्रवार को यूथ कांग्रेस में प्रदेश महासचिवों की सूची जारी की गई थी, जिसमे श्रीगंगानगर जिले से भानू गोदारा को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। कांग्रेस नेता राहुल गाँधी युवाओं की राजनीति में भागीदारी के लिए जिस तरह से प्रतिबद्ध दिखाई दे रहे हैं उसी का परिणाम है कि कांग्रेस में लगातार संगठन का विस्तार हो रहा है और छात्र संघ राजनीति से जुड़े युवाओं को महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सौंप कर संगठन में युवा ऊर्जा का संचार किया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि यूथ कांग्रेस प्रदेश महासचिवों की सूची में भानु गोदारा जैसे युवाओं को प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल किया गया है। भानु गोदारा जैसे युवा की नियुक्ति से क्षेत्र में कांग्रेस के संगठन को तो फायदा होगा ही, वहीं राजनीति के क्षेत्र में काम कर रहे युवाओं को भी आगे बढ़ने का हौसला मिलेगा।   

           भानू गोदारा की पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो भानू शहर के राजनीति में बड़ा दखल रखने वाले पूर्व पार्षद राजाराम गोदारा के छोटे पुत्र है। शहर की पिछले 40 सालों के राजनीति में खासकर नगरपालिका में राजाराम गोदारा के परिवार का दबदबा रहा है। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 1994 के बाद से नगरपालिका के प्रत्येक बोर्ड के गोदारा परिवार का कोई न कोई सदस्य पार्षद रहा है। पिछले बोर्ड में उनकी पत्नी परमेश्वरी देवी और उनके बड़े पुत्र महेंद्र गोदारा पार्षद चुने गये थे। वहीं खुद भानू गोदारा की बात करें तो चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज और पंजाब यूनिवर्सिटी से स्नातक भानू गोदारा ने राजनीति में थोड़े से ही समय में लम्बी दूरी तय की है। सूरतगढ़ क्रय विक्रय सहकारी समिति के अध्यक्ष के बाद यूथ कांग्रेस के प्रदेश महासचिव के रूप में उनकी नियुक्ति इसी बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है। वैसे भानु गोदारा की प्रदेश महासचिव के रूप में नियुक्ति जिस हालात में हुई है वह गोदारा परिवार के राजनितिक रसूख की और भी इशारा करता है। क्यों पिछले कुछ समय से गोदारा परिवार के कांग्रेस पार्टी में हासिये पर होने की चर्चाऐं चल रही थी। लेकिन यूथ कांग्रेस में प्रदेश महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर गोदारा की नियुक्ति इन चर्चाओं के महज कयास होने की और इशारा कर रही है। यह और बात है कि इन चर्चाओं से इतर गोदारा परिवार आगामी नगरपालिका चुनाव की तैयारी में जुटा हुआ है। आगामी नगरपालिका चुनावों में अध्यक्ष पद सामान्य या ओबीसी के लिए आरक्षित होता है तो गोदारा परिवार खुद अध्यक्ष पद का मज़बूत दावेदार है। हालांकि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही खेमों से दूरी के चलते फिलहाल अध्यक्ष की सीट मुश्किल टास्क प्रतीत नज़र आ रही है। लेकिन इस बात से इंक़ार भी नहीं किया जा सकता है कि आगामी चुनाव में अध्यक्ष के चुनाव में इस परिवार की भूमिका गेम चेंजर की हो सकती है। 

         

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सूरतगढ़। शहर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों कुप्रबंधन का शिकार होता जा रहा है। प्रभारी डॉ. नीरज सुखीजा की कमजोरी और सेवारत्त डॉक्टर्स की मनमानी के चलते अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम है। अस्पताल में कहने को तो करीब डेढ़ दर्जन डॉक्टर कार्यरत है। लेकिन आमतौर पर अस्पताल में आधे ही डॉक्टर अपनी ड्यूटी करते हैं। ऐसे में इलाज की उम्मीद में आने वाले ज्यादातर लोगों को धक्के खाकर और निराश होकर लौटना पड़ता है। 

सोमवार, 30 जून 2025 को अस्पताल में लगा सूचना पट्ट

            जिले के दूसरे सबसे बड़े अस्पताल में डॉक्टर्स द्वारा किस तरह से स्वास्थ्य सेवाओं का मजाक बनाया जा रहा है इसकी एक बानगी सोमवार को देखने को मिली। अस्पताल में लगे सूचना पट्ट के मुताबिक सोमवार यानी 30 जून को अस्पताल में 17 में से केवल 7 ही डाक्टर मौजूद थे। अस्पताल के 4 डॉक्टर ( प्रभारी डॉक्टर नीरज सुखीजा, डॉक्टर संजौली सोनी, डॉ भारत भूषण जांगिड़  और डॉक्टर मांगीलाल लेघा) की साप्ताहिक अवकाश की एवज में ड्यूटी ऑफ थी। वहीं डॉ हनुमान प्रसाद का नाइट ड्यूटी के चलते ऑफ था। इसके अलावा 4 और डॉक्टर ( डॉक्टर शैलेंद्र सिंह, डॉ प्रशांत रसेवट, डॉक्टर सपना बावेजा और डॉक्टर अमृतलाल) अवकाश पर थे। कहने का तात्पर्य यह है कि रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को सबसे ज्यादा संख्या में मरीज अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन सोमवार क़ो ज्यादातर डॉक्टरों के ड्यूटी पर नहीं होने के चलते बड़ी संख्या में मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। इनमें से ऐसे कई गंभीर रोगों के मरीज भी रहे होंगे जिन्हे इलाज व दवा नहीं मिलने से खासी परेशानी का सामना करना पड़ा होगा। लेकिन अस्पताल प्रबंधन को इससे क्या ! वैसे भी जब प्रभारी डॉक्टर खुद छुट्टी पर हो डॉक्टर की उपस्थिति कौन सुनिश्चित करता ? 

ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हो रहा है दरअसल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के हालात पिछले कुछ सालों से ऐसे ही हैं। अस्पताल में कुछ डॉक्टर और कर्मचारियों का एक सिंडिकेट बन चुका है जो अपनी मर्जी से अपने ड्यूटी ऑवर तय करता है। इस अस्पताल में डॉक्टर रमेश सोखल, डॉ शैलेंद्र सिंह, डॉ लोकेश अनुपानी, डॉ मांगीलाल लेघा जैसे कुछ ही डॉक्टर है जो काफ़ी हद तक सेवा से जुड़े इस प्रोफेशन से न्याय करते हैं। अस्पताल के कुछ डॉक्टर्स का ध्यान तो अस्पताल में मरीजों को देखने पर कम और अपनी निजी प्रैक्टिस पर ज्यादा है। ऐसे डॉक्टर अस्पताल का समय शुरू होने के करीब 1 घंटे बाद आते हैं और ड्यूटी के बीच में भी स्कूल की तरह बंक मार कर अपने निजी अस्पताल में मरीजों को देख आते है। ऐसा नहीं है कि चिकित्सा प्रभारी को इस बात का ज्ञान नहीं है लेकिन वे खुद भी कुछ चापलूस डॉक्टर्स से घिरे हुए है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर अस्पताल की व्यवस्था में सुधार कौन करेगा ?

नियमों को ताक में रखकर साप्ताहिक अवकाश का चल रहा खेल

डॉक्टर्स को साप्ताहिक अवकाश सोमवार का गुरुवार को नहीं दिए जाने संबंधी CMHO का आदेश

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर द्वारा साप्ताहिक अवकाश का खेल रचकर आम जनता और मरीजों के साथ धोखा किया जा रहा है। दरअसल डॉक्टर्स क़ो सप्ताह में एक अवकाश अलाऊ है। परन्तु यह साप्ताहिक अवकाश आमतौर पर वीकेंड यानी शनिवार रविवार क़ो लेने का नियम है। लेकिन सूरतगढ़ में अधिकांश डॉक्टर रविवार को अवकाश लेने की बजाय ड्यूटी करते है। क्योंकि रविवार के दिन मरीज को देखने का समय 2 घंटे ही निर्धारित है। इस तरह ये डॉक्टर रविवार क़ो छुट्टी नहीं रख कर सोमवार या मंगलवार को साप्ताहिक अवकाश लेते हैं। जबकि इन दिनों में अस्पताल में ओपीडी सबसे अधिक होती है। इस तरह से ज्यादा काम से बचने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में के डॉक्टर्स द्वारा यह खेल खेला जा रहा है।

                     मजेदार बात यह है कि विभाग के सीएमएचओ अजय सिंगला का भी स्पष्ट आदेश है कि डॉक्टर को साप्ताहिक अवकाश सोमवार और गुरुवार को नहीं दिया जाए। इसके बावजूद सूरतगढ़ चिकित्सालय में अगर डॉक्टर् सोमवार को साप्ताहिक अवकाश ले रहे है तो क्या यह संभव है कि प्रभारी डॉक्टर नीरज सुखीजा क़ो इस आदेश की जानकारी नहीं है ? साफ है कि उनकी मर्जी से ही यह सब चल रहा है।

सप्ताह में केवल 4 दिन ही ड्यूटी कर रहे है डॉक्टर

राजकीय चिकित्सालय में केवल सप्ताहिक छुट्टी ही नहीं बल्कि नाइट ड्यूटी के नाम पर भी मरीज के साथ धोखा किया जा रहा है। क्योंकि अस्पताल में 24×7 खुला रहता है और रात्रि में भी कोई मरीज आ सकता है। इसलिये अस्पताल में रात्रि में भी एक चिकित्सक की ड्यूटी लगाई जाती है। सामान्य नियम है कि रात्रि में विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी नहीं लगाई जाती ताकि स्पेशलिस्ट डॉक्टर दिन में मरीजों को अपनी सेवा दे सके। लेकिन इस नियम क़ो धता बताकर अस्पताल के कई स्पेशलिस्ट डॉक्टर प्रबंधन से मिलीभगत कर नाइट ड्यूटी करते है। जिससे कि अगले दिन अवकाश लेकर घर में दुकान खोलकर मरीजों को लूटा जा सके। बात यहीं खत्म नहीं होती रात्रि ड्यूटी में जहाँ डॉक्टर को अस्पताल में रहना होता है, लेकिन तलख़ सच्चाई यह है कि राजकीय चिकित्सालय में डॉक्टर्स की नाइट ड्यूटी केवल कागजो में दर्ज़ होती है। दरअसल ये डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं रहते बल्कि इमरजेंसी में ऑन कॉल ही नाइट ड्यूटी में आते है।

                 कुल मिलाकर राजकीय चिकित्सालय में अधिकांश डॉक्टर एक और रविवार को जहाँ साप्ताहिक अवकाश ना लेकर एकाध घंटे मुंह दिखाकर टाइम पास कर लेते है तो वहीं साप्ताहिक अवकाश और नाइट ड्यूटी के बहाने सप्ताह के 2 दिन घर में रहकर अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस को चमका रहे हैं। यह पूरा खेल बिना उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है ऐसा सम्भव नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर राजकीय चिकित्सालय में चल रही डॉक्टर की मनमानी पर रोक लगाकर व्यवस्था में सुधार कौन करेगा ? 

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गत वर्ष अगस्त माह में पालिका ने हटाया था अतिक्रमण

सूरतगढ़। शहर में सफेदपोश नेताओं की संरक्षण में भूमाफिया फल फूल रहे है। हालत यह हैं कि भूमाफियों को प्रशासन का कोई खौफ नहीं रहा है। यही वजह है कि प्रशासन जिस किसी जगह से अतिक्रमण हटाता है, अगले कुछ दिनों में ही भूमाफिया वहीं पर फिर से अतिक्रमण कर लेते है। क्यूंकि दोबारा अतिक्रमण की हिम्मत कोई भी भूमाफिया तभी दिखाता है ज़ब उसे पर किसी सत्ताधारी नेता का हाथ हो। ऐसे मामलों मे नगरपालिका प्रशासन भी एक बार अतिक्रमण हटाने के बावजूद दोबारा अतिक्रमण होने पर अपनी आंखें मूँद लेता है। 

              शहर के वार्ड नंबर-11 में अतिक्रमण का एक ऐसा ही मामला सामने आया है। जहाँ खाली पड़े एक सरकारी भूखंड पर एक बार फिर भूमाफियों ने अतिक्रमण कर लिया है। किशनपुरा अंडरपास के ठीक पहले बायीं दिशा में कार्नर पर स्थित इस भूखंड की कीमती लाखों में है। भूमाफियों ने इस भूखंड पर धड़ल्ले से अतिक्रमण कर एक बार फिर व्यावसायिक दुकानों का निर्माण कर लिया है। वैसे यह वहीं भूखंड है जिस पर पिछले साल अगस्त माह में भी अतिक्रमण का प्रयास हुआ था।

तब मीडिया में मामला उठने के बाद नगरपालिका प्रशासन ने कब्जा हटा दिया था। यहीं नहीं उस समय प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के बाद मलबा भी जप्त कर लिया था। प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई के बावजूद कुछ ही महीनो मे एक बार फिर इस बेशकीमती भूखंड पर कब्जे से कई सवाल खड़े होते हैं ?

पालिका प्रशासन की लापरवाही या फिर मिलीभगत ?

शहर में जब कोई आम आदमी अपने मकान/ दुकान या फिर प्लॉट पर एक ईंट भी लगाता है तो पालिका जमादार या सफाई कर्मचारी तुरंत मालिक के पास पहुंच जाते हैं और एनओसी दिखाने की मांग करते हैं। लेकिन इस मामले में पालिका जमादार या सफाई कर्मचारी जाने कहां चले गए ? ऐसा भी नहीं है कि यह निर्माण कुछ घंटे या एक आध दिन में हो गया ? साफ है कि पालिका कर्मचारियों को इस निर्माण की जानकारी थी और उन्होंने ईओ या फिर दूसरे अधिकारियों को इसकी जानकारी भी दी होगी। ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि अधिकारीयों ने आखिर इस अवैध निर्माण चुप्पी क्यों साध रखी है ?

अतिकर्मियों को एक सत्ताधारी नेताओं के संरक्षण की चर्चा

भाजपा का राज आने के बाद ये उम्मीद की जा रही थी कि कांग्रेस राज में पैदा हुए भूमाफिया के संगठित गिरोह पर लगाम लगेगी। लेकिन हक़ीक़त इससे इतर है। दरअसल शहर में अतिक्रमणों की रफ्तार कम होने की बजाय बढ़ गई है। सच तो ये है कि सत्ताधारी भाजपा से जुड़े नेता भी पूर्व कांग्रेसी नेताओं के नक्शे कदम पर चल पड़े हैं। ऐसे में शहर में खाली पड़े प्लॉट और जमीन सत्ता समर्थित भूमाफियाओं की नई गैंग की रडार पर है।

वार्ड नंबर-11 में हुए अवैध अतिक्रमण के मामले में भी कहीं ना कहीं सत्ताधारी पार्टी के किसी नेता का आशीर्वाद जरूर है। यह आशीर्वाद किन शर्तों पर मिला है यह तो कहा नहीं जा सकता है, लेकिन जिस तरह से इस मामले में नगरपालिका ईओ पूजा शर्मा चुप्पी साधे हुए है, उससे कहीं कोई शक की गुंजाईश नज़र नहीं आती। वैसे भी राजनितिक आकाओं की सरपरस्ती के बिना यह सम्भव नहीं है कि कोई यूँ धड़ल्ले से सरकारी सम्पति पर अतिक्रमण कर ले ! 

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पूरे मामले में एसडीएम संदीप काकड़ की भूमिका भी संदिग्ध !

सूरतगढ़। ‘जब रोम जल रहा था तब नीरो बांसुरी बजा रहा था’। शहर के वार्ड नंबर-26 में इन दिनों खसरा नंबर 315/2 की आड़ में जिस तरह से करोड़ों रुपए की सरकारी भूमि की लूट का खुला खेल चल रहा है। उस दौर में शहर के जिम्मेदार राजनेताओं की चुप्पी को देखकर यह कहावत पर बरबस याद आ रही है।

          इस मामले में फर्जी तथ्यों के आधार पर हासिल खातेदारी की आड़ में प्रभावशाली लोग खुलेआम पालिका की आवासीय योजना को हड़पने जा रहे हैं परन्तु शहर के राजनेताओं के मुंह पर ताला जड़ा हुआ है। किसान नेता राकेश बिश्नोई ने जरूर फेसबुक पोस्ट शेयर कर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दी है। लेकिन मामला चर्चित होने के बाद भी अब तक किसी भी नेता ने प्रशासन से मिलकर इस मामले की जांच की मांग नहीं की है। उस शहर में जिसकी हर एक ईंट और पत्थर के नीचे एक-एक नेता छुपा हो, अफ़सोस जनक है कि कोई ऐसा नेता नहीं है जो प्रभावशाली लोगों की इस खुली लूट के खिलाफ चूँ भी करने की हिम्मत रखता हूं।

सत्ताधारी भाजपा हो या फिर विपक्ष में बैठी कांग्रेस या फिर कोई और दल से जुड़ा नेता, सब शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सर दबाकर खतरे के कम होने का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल सच्चाई यह है कि दोनों ही दलों के नेताओं लिए राजनीति सत्ता पाने का औजार मात्र है। इस प्रकरण में नेताओं का जिस तरह का रवैइया रहा है उससे लगता है कहीं ना कहीं इन नेताओं का राजनीति का उद्देश्य भी सत्ता की ताकत हासिल कर भ्रष्टाचार करना ही है। वरना दूसरे शहरों से आकर जमीनों की लूट में शामिल किरदारों से क्यों शहर के राजनेता खौफ खाये हुए है यह समझ में नहीं आता। इतिहास में मोहम्मद गजनी को कोसने वाले यह नेता इन गजनवींयों को आखिर क्यों पहचान नहीं पा रहे है ?

            हालांकि सत्ताधारी नेताओं की चुप्पी को लेकर एक चर्चा यह भी आ रही है कि इस भ्रष्टाचार को भाजपा के एक बड़े नेता के रिश्तेदार का आशीर्वाद मिल गया है, वरना जिस जमीन पर चारदिवारी निर्माण को लेकर प्रशासन से हुए जबरदस्त विवाद के बाद किसी की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो यूँ धड़ल्ले से निर्माण कर ले। इसके अलावा सूत्रों की माने तो ज़ब पिछली बार नगरपालिका ने इस जमीन से अतिक्रमण हटाया था तब एक राजनितिक परिस्थियों के चलते शहर में सरदारी घोट रहे एक नेताजी ने भी पालिका अधिकारीयों पर पुन इस प्लॉट की चारदीवारी के पूनरनिर्माण करवाने का भी दबाब बनाया था। बताया जा रहा है संघ से जुड़े 1-2 नेताओं ने इस विवादित खसरा नंबर -315/2 की जमीन में प्लॉट खरीद रखे है, जिसकी वजह से नेताजी को पालिका अधिकारीयों की क्लास लगानी पड़ी थी।

         दूसरी और इस मामले में कांग्रेस विधायक डूंगरराम गेदर अपनी छवि के अनुरूप इस लड़ाई को राजनीतिक मंच से इतर खुले मैदान में आकर लड़ना नहीं चाहते है। विधानसभा में मामला उठाना सिंबॉलिक रूप से तो ठीक है। लेकिन सच्चाई यही है लॉन्ग टर्म राजनीति का रास्ता सड़क से निकलता है। कुल मिलाकर कौरवों की सभा में द्रोपदी के चीरहरण की तरह इस जमीन का बचना किसी राजनितिक गोविन्द के आगे आने पर ही टिका है।

क्या है ये पूरा मामला

दरअसल आज जो खसरा नंबर 315/2 जो निरंकारी भवन के पीछे बताया जा रहा है सन 2015 में सनसिटी रिसोर्ट के पीछे था। इस खसरे की बागअली के नाम से खातेदारी में पटवारी की मौका नक्शा रिपोर्ट में यह जमीन सनसिटी रिसोर्ट के दक्षिण दिशा में स्थित थी। इसी जमीन पर पहले खसरा नंबर 315/2 बताकर गोल्डन सिटी कालोनी काटी गई और सन 2021 में इस जमीन को खसरा नंबर-320 बताकर वृंदावन विहार कॉलोनी काटी गई।

राजस्व विभाग जो अब निरंकारी भवन के पीछे की जमीन को खसरा नंबर 315/2 बता रहा है उसी विभाग ने सन 2021 में निरंकारी भवन के पीछे इसी जगह खसरा नंबर 315/1 की तरमीम की थी। जिसके आधार पर पूर्व चेयरमैन ओम कालवा के कार्यकाल में नगरपालिका ने इस जगह पर टाउन प्लानर से आवासीय योजना भी स्वीकृत करवाई । सवाल ये है कि पूर्व में की गई तरमीम अब अचानक गलत कैसे हो गई है ? अगर उस तरमीम को गलत मान भी ले तो तरमीम करने वाले दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही ?

खसरा नंबर 312/2 की तरमीम पर भी उठ रहे सवाल

एसडीएम संदीप काकड़ का तरमीम नहीं करने का आदेश
315/2 की राजस्व जमाबंदी में खातेदार के रूप में दर्ज़ गिरदावर वरुण सहारण और उसकी पत्नि का नाम

राजस्व विभाग ने खसरा नंबर-315/2 की तरमीम भले ही निरंकारी भवन के पीछे खसरा नंबर 315/1 पर कर दी हो लेकिन राजस्व अधिकारियों द्वारा की गई तरमीम संदेह के घेरे में है। क्यूंकि सबसे पहली बात ये है कि सूरतगढ़ कस्बा का राजस्व नक्शा पूरी तरह से अपठनीय और कटा फटा हुआ है। ऐसे में इस नक्शे से किसी तरह की तरमीम की ही नहीं जा सकती। खुद एसडीएम संदीप 3 फरवरी 2023 को सूरतगढ़ कस्बा में बिना अनुमति तरमीम पर रोक लगा चुके हैं।

लेकिन खसरा नंबर 315/2 के मामले में खुद एसडीएम साहब एक नहीं बल्कि दो-दो पर तरमीम करवा चुके हैं। जबकि खुद नगरपालिका द्वारा खसरा नंबर 315/2 सहित शहर के एक दर्जन से अधिक खसरों के सीमा ज्ञान के पत्र एसडीएम साहब रद्दी की टोकरी में डालते रहे।खसरा नंबर-315/2 के मामले में एसडीएम साहब की इस विशेष मेहरबानी की वजह सम्भवतः कोई बड़ी डील है ?

          इसके अलावा खसरा नंबर 315/2 की सीमा ज्ञान कमेटी में दोनों बार गिरदावर वरुण सहारण को शामिल करना भी इस सीमा ज्ञान को संदिग्ध करता है। क्योंकि वरुण सहारन और उनकी पत्नी अमरजीत कौर का नाम इस खसरे की राजस्व जमाबंदी में खातेदार के रूप में दर्ज रहा है। साफ है कि जिस प्रकरण में किसी कर्मचारी का हित जुड़ा हो उसे उसे प्रकरण की जांच या उसमे किसी भी तरह की कार्यवाही मैं शामिल नहीं किया जा सकता। लेकिन इस मामले में उपखंड व तहसील प्रशासन के समक्ष आपत्ति आने के बावजूद कमेटी में गिरदावर वरुण सहारन को शामिल रखा गया। जो कि खसरा नंबर -315/2 के सीमा ज्ञान की पूरी रिपोर्ट को ही संदिग्ध बनाता है 

भूमि घोटाले में पर्दे के पीछे है कुछ बड़े चेहरे शामिल

दरअसल इस पूरे मामले में पर्दे के पीछे जो लोग हैं वे बेहद ताकतवर है। एक भूतपूर्व विधायक और न्याय व्यवस्था से जुड़े एक अधिकारी अप्रत्यक्ष रूप से इस मामले को लीड करते रहे हैं। ये लोग साम, दाम, दंड और भेद की नीति से इस जमीन को हड़पने का कोई भी प्रयास बाकि नहीं छोड़ रहे है। यही वजह है कि पूरा का पूरा सूरतगढ़ प्रशासन इन प्रभावशाली लोगों दबाब में काम कर रहा है। कहा जा रहा है कि उपखंड के बड़े अधिकारी इस मामले में गलत फीडबैक देकर जिला प्रशासन तक को गुमराह कर रहे हैं। जिसकी वजह से विवादित भूखंड पर पिछले चार दिनों से निर्माण जारी है।

– राजेंद्र पटावरी, अध्यक्ष -प्रेस क्लब,सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। शहर के वार्ड नंबर-26 में फर्जी खातेदारीयों की आड़ में जमीनों की बंदरबांट का खुला खेल चल रहा है। इस वार्ड की खाली पड़ी अधिकांश जमीनों को भूमाफिया हड़प चुके है और अब उनकी नज़र निरंकारी भवन के पीछे स्थित बेशकीमती जमीन पर है। खसरा नंबर 315/1 की इस जमीन पर नगरपालिका 2021 में आवासीय योजना काट चुकी है। इसके बावजूद प्रभावशाली लोगों ने पिछले विधानसभा चुनाव में इस जमीन पर कब्ज़ा कर लिया था। हालांकि कुछ माह पहले नगरपालिका ने हौसला दिखाते हुए इस अतिक्रमण हटा जमीन वापस खाली करवा ली थी। 

             लेकिन प्रभावशाली लोगों ने अब एक बार फिर बुधवार सुबह इस विशाल भूखंड पर चारदिवारी का निर्माण शुरू कर दिया है। सूत्रों की माने तो प्रभावशाली लोगों की नगरपालिका और राजस्व अधिकारीयों से सेटिंग हो चुकी है। बताया जा रहा है भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात राजस्व विभाग के अधिकारीयों को इस डील में मोटा माल मिला है। इन भ्रष्ट नौकरशाहों और राजनितिक दबाब में ईओ पूजा शर्मा भी घुटने टेक चुकी है। नतीजा यह है कि करीब 10 करोड रुपए की क़ीमत वाले इस बेशकीमती भूखंड पर दिनदहाड़े निर्माण कार्य जारी है।

खातेदारी रद्द करने की जगह करवाया जा रहा बेशकीमती जमीन पर कब्ज़ा ?

वर्ष 2015 में खसरा नंबर 315/2 की खातेदारी के समय पटवारी मौका कब्जा रिपोर्ट
खसरा नंबर 315/2 पर काटी गई गोल्डन सिटी कॉलोनी
सनसिटी रिसोर्ट के पीछे ही खसरा नंबर 315/2 के स्थान पर बाद में खसरा नंबर 320 बनाकर काटी गई वृंदावन विहार कॉलोनी

इस पुरे प्रकरण में हैरान करने वाली बात है वह ये है कि जिस खसरा नंबर-315/2 की खातेदारी की आड़ में इस जमीन पर चारदिवारी कर निर्माण किया जा रहा है। खातेदारी के समय (2015 में ) यह खसरा 315/2 सनसिटी रिसोर्ट के पीछे दिखाया गया था। 2015 में खातेदारी के बाद खाताधारकों ने इस जमीन पर गोल्डन सिटी के नाम से कॉलोनी काटकर कई प्लॉट भी बेच दिए थे। जिनकी कृषि भूमि की रजिस्ट्रियां तक हो चुकी है। लेकिन सन 2021 में राजस्व अधिकारियों ने मिलीभगत कर सनसिटी रिसोर्ट के पीछे इसी जमीन को खसरा नंबर-320 बताकर 50 वर्ष पूर्व ख़ारिज पुराने आवंटन को बहाल कर दिया। इसी खसरा नंबर-320 पर वर्तमान में वृंदावन विहार कालोनी काटी जा रही है। इसका सीधा सा अर्थ ये है कि खसरा नंबर 315/2 की बाघ अली के नाम से जारी खातेदारी फ़र्ज़ी थी। क्योंकि सनसिटी रिसोर्ट के पीछे जिस जमीन पर बाघ अली का कब्जा बताया गया था, वह खसरा नंबर 315/2 ना होकर खसरा नंबर-320 था। मतलब बाग़ अली के कब्जे की उक्त रिपोर्ट ही पूरी फर्जी थी। ऐसे में जमीन के बगैर कब्जे की फ़र्ज़ी रिपोर्ट से हासिल खातेदारी को तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए। लेकिन अफसोस की बात है कि राजस्व प्रशासन इस फ़र्ज़ी खातेदारी को निरस्त करने की बजाय शहर की बेशकीमती जमीन पर इस खातेदारी को फिट करने में लगा हुआ है।

भाजपा के सुशासन में भी जारी जमीनों की लूट, जिम्मेदारों के मुंह में जमा दही !

शहर में कहने को तो भाजपा का सुशासन है लेकिन सच ये है कि अतिक्रमणों को लेकर कांग्रेस राज को कोसने वाले भाजपा नेताओं के मुंह में अब दही जम चुका है। हैरानी की बात है कि कांग्रेस कार्यकाल में खसरा नंबर-320 और 315/2 की जमीनों की बंदरबाँट पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवाल उठाने वाले पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया भी अब खामोश है। दबंग नेता की छवि रखने वाले और ईमानदारी की कसमें खाने वाले कासनिया उस समय तो बेबस थे लेकिन अब तो सत्ता की ताक़त भी उनके पास है, ऐसे मे इस खुली लूट पर कासनिया की चुप्पी हैरान करने वाली है। 

                 दूसरी और जिले में भाजपा की कमान संभालने वाले संगठन से जुड़े एक बड़े नेता शरण पाल सिंह मान भी सूरतगढ़ से ही है। उनकी भी ये जिम्मेदारी बनती है कि उनकी सरदारी में शहर में सरकारी सम्पति महफूज रहे। वैसे जिस तरह की राजनीतिक परिस्थितियां शहर में है उनमे अगर जिलाध्यक्ष शरणपाल मान चाहें तो जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग कर सकते है। मान अगर जरा भी शहर हितेषी है तो उन्हें मामले की निष्पक्ष जाँच कर खसरा नंबर-315/2 की खातेदारी रद्द करने की मांग करनी चाहिए। उम्मीद की जानी चाहिए कि सत्ता की ताकत लिए ये नेता इन प्रभावशाली लोगों के सामने खड़े होने का नैतिक साहस दिखाएंगे।  

विधायक गेदर विधानसभा में उठा चुके है मामला ! लेकिन ठोस कार्यवाही नहीं होने तक मोर्चा संभालना जरूरी

इस मामले को सूरतगढ़ विधायक डूंगरराम गैदर विधानसभा में उठाकर कुछ हद तक अपनी भूमिका निभा चुके हैं। क्यूंकि वर्तमान में सत्ता की ताकत भाजपा नेताओं के पास है इसलिये गेंद भी भाजपा नेताओं के पाले में है। लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस के विधायक और मुख्य विपक्षी चेहरा होने के चलते गेदर की जिम्मेदारी है कि वे इस जमीन को बचाने के लिए आखिर तक प्रयास करें। गेदर भी चाहे तो कलेक्टर से मिलकर तुरंत खातेदारी रद्द करने की मांग कर इस बेशकीमती जमीन को बचा सकतें है। इस पुरे प्रकरण को समझने के लिए खबर पॉलिटिक्स के नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

– राजेंद्र पटावरी, अध्यक्ष -प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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विधायक गेदर की घोषणा के बाद कासनिया की बढ़ी मुश्किलें

सूरतगढ़। भाजपा के पूर्व मंत्री रामप्रताप कासनिया के पुत्र संदीप कासनिया के विवेकानंद स्कूल को करीब 50 करोड रुपए की भूमि आवंटन का प्रस्ताव फिलहाल खटाई में पड़ गया है। मामले में कांग्रेस के पूर्व पार्षद परसराम भाटिया, बसंत बोहरा और तुलसी असवानी की याचिका पर हाई कोर्ट की डबल बेंच ने स्टे के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने स्वायत शासन विभाग के सचिव, डीएलबी डायरेक्टर, नगरपालिका ईओ, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और विवेकानंद स्कूल के चेयरमैन को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जबाब माँगा है।

विधायक गेदर सहित 7 पार्षदों ने किया था विरोध, बाकियों ने किया था ज़मीर का सौदा !

गत वर्ष 28 अगस्त को जब नगरपालिका बोर्ड की बैठक में विवेकानंद स्कूल को नई धानमंडी और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के बीच स्थित बेशकीमती भूमि को आवंटन करने का प्रस्ताव पारित किया गया था तब खूब हल्ला मचा था। उस समय पूरे शहर के लोग इस प्रस्ताव के गिरने की उम्मीद कर रहे थे। बैठक में विधायक डूंगरराम गेदर और कांग्रेस के पार्षद परसराम भाटिया, बसंत बोहरा ने शहर के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए प्रस्ताव का जमकर विरोध किया। इसके अलावा कांग्रेस पार्षद संदीप सैनी, कमला बेनीवाल, तुलसी असवानी, निर्दलीय विमला मेघवाल और परमेश्वरी राजपुरोहित भी विरोध का झंडा थामे रहे।

लेकिन कासनिया के दबाब में जगदीश मेघवाल को छोड़कर राष्ट्रवादी पार्टी का कोई भी पार्षद अपनी रीढ़ सीधी नहीं रख पाया, वहीं प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के पार्षदों ने तो राजनीति की मंडी में अपने ज़मीर का सौदा कर लिया। एक दर्ज़न के करीब इन कांग्रेसी पार्षदों ने पार्टी व्हीप को धता बताते हुए शहर की जनभावनाओं का ही गला घोंट दिया। इन पार्षदों ने ये साबित कर दिया कि उनके लिए शहर और पार्टी से बड़ा अपना स्वार्थ है। नतीजा यह हुआ कि यह प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया।

प्रस्ताव का समर्थन पड़ रहा भारी, राजनीति की दुकान बंद होने का खतरा ?

विवेकानंद स्कूल को भूमि आवंटन के प्रस्ताव के समर्थन के बाद कासनिया सहित शहर के 45 में से 38 पार्षदों की राजनीति की दुकान के बंद होने का संकट खड़ा हो गया है। क्यूंकि जनभावनाओं से खिलवाड़ करने वाले इन लोगों को शहर की जनता सबक सिखाने को आतुर है।

प्रस्ताव का समर्थन करने वाले कांग्रेसी पार्षदों का संकट तो और भी बड़ा है क्यूंकि विधायक डूंगरराम गेदर ने यह साफ कर दिया है कि गद्दारी करने वाले पार्षदों को पार्टी टिकट नहीं देगी। दूसरी और प्रस्ताव का समर्थन करने के बावजूद कासनिया इन लोगों को टिकट देंगे इस बात की उम्मीद कम है। वैसे भी आयातित चेहरों को टिकट देने से खुद भाजपा के कार्यकर्ताओं के नाराज होने की भी पूरी संभावना है। कुल मिलाकर ‘बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय’ वाली कहावत इन पार्षदों के लिए चरितार्थ होती दिख रही है।

सौदेबाजी के आरोपों से घिरे भाटिया का विरोधियों को करारा जबाब

दूसरी और इस मामले में कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष परसराम भाटिया जिन पर प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले भाजपा नेता संदीप कासनिया से बड़ी डील करने का आरोप लगा था, ने मामले में स्टे लाकर खुद पर लगे आरोपों कों एक तरह से जबाब दे दिया है। शहर की 50 करोड़ से अधिक क़ीमत की बेशकीमती जमीन को बचाने की लड़ाई में स्टे लाकर भाटिया फिल्मों के उस नायक की तरह बन गए है जिसकी जीत की दुआ दर्शक भी मन ही मन करने लगता है।

पूरा होता नहीं दिख रहा कासनिया का सपना !

भाजपा नेता संदीप कासनिया के विवेकानंद स्कूल को भूमि आवंटन प्रस्ताव पर हाईकोर्ट का स्टे आने पर राजनेता ही नहीं आमजन भी खुश नज़र आ रहा है। क्यूंकि शहर के प्रत्येक जागरुक व्यक्ति की यह भावना रही है कि यह बेशकीमती जमीन शहर के विकास में काम आये, ना कि किसी व्यक्ति को निजी फायदे के लिए सौंप दी जाये। यही वजह है कि प्रस्ताव पर स्टे आने के बाद शहर में अब इस बात पर चर्चा होने लगी है कि क्या कासनिया यह बेशकीमती भूमि हासिल करने मे कामयाब होंगे ?

हालाँकि इस सवाल का जवाब भविष्य के गर्भ में छुपा हुआ है, लेकिन मामले के सभी पहलुओं पर गौर करें तो लगता है कि विवेकानंद स्कूल को भूमि आवंटन का प्रस्ताव भले ही पारित हो गया हो लेकिन इस बेशकीमती भूमि को हासिल करने का कासनिया का सपना लगता नहीं है कि पूरा होगा?
इसकी वजह की बात करें तो हाल फिलहाल तो हाईकोर्ट के स्टे के बाद यह मामला लंबा खींचता नजर आ रहा है। इसके अलावा पूर्व में सुप्रीम कोर्ट और खुद हाईकोर्ट भी कासनिया के स्कूल को इस भूमि के आवंटन का फैसले को खारिज कर चुके है, इसलिए कोर्ट में कासनिया को सफलता मिलने के चांस कम नज़र आ रहे है। दूसरे यह भी बड़ा सवाल है कि हाईकोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने में कितना समय लगता है ? क्योंकि अगर दोनों कोर्ट में यह मामला अगर ढाई से 3 साल भी अटकता है तो फिर कासनिया का इस जमीन को पाने का सपना, सपना ही रह सकता है। क्यूंकि उसके बाद अगली सरकार जो कि संभव है कि कांग्रेस की ही होगी, वह इस आवंटन प्रस्ताव को निश्चित ही रद्द कर देगी।

इसके अलावा विधायक डूंगरराम गैदर ने रविवार को प्रेस वार्ता में इस मामले में एक बयान देकर कासनिया की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। विधायक गेदर ने कहा है कि यदि आगामी नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस का बोर्ड बनता है तो विवेकानंद स्कूल को भूमि आवंटन के प्रस्ताव को रद्द किया जाएगा। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस बोर्ड द्वारा इस बेशकीमती जमीन पर शहर के विकास के लिए जरूरत के हिसाब से प्लान बनाकर नया प्रस्ताव लाया जाएगा।

विधायक गेदर की बात करें तो अपने सवा साल के कार्यकाल में उनकी छवि बेदाग तो रही ही है साथ ही साथ जनता के मुद्दों पर उन्होंने संज़ीदगी का परिचय भी दिया है। इसलिये उनके बयान को हल्के में नहीं लिया जा सकता है और वर्तमान में भाजपा की जो हालात है उसमें आगामी नगरपालिका चुनावों में कांग्रेस को ही ऐज़ मिलता दिख रहा है। क्यूंकि भूमि आवंटन प्रस्ताव आने के बाद से पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया की ईमानदार नेता की छवि धूमिल हुई है। भाजपा राज में शहर में लगातार अवैध अतिक्रमण, सरकारी संपत्ति की लूट, नगरपालिका, उपखंड व तहसील ऑफिस में भ्रष्टाचार का तांडव मचा हुआ है। निरंकुश हो चुके प्रशासन ने आम आदमी के हालात बद से बदतर कर दिये हैं। ऐसे में जनता बदलाव के मूड में नज़र आ रही है।

दूसरी और भाजपा के कुछ बड़े नेताओं की पूर्व विधायक के पुत्र की कार्यशैली से नाराजगी भी भाजपा का बोर्ड बनने की सम्भावनाओं पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में गेदर का यह बयान कासनिया के लिए खतरे का अलार्म है जिसके बजने की फिलहाल पूरी संभावना है। कुल मिलाकर जीवन भर ईमानदारी का तमगा लेकर चलने वाले रामप्रताप कासनिया जैसे खांटी नेता के राजनितिक जीवन के आखिरी पड़ाव में स्कूल की इस जमीन का सपना डरावना ख्वाब साबित हो जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

– राजेंद्र पटावरी, अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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विधायक डूंगरराम गेदर ने दोनों मामलों में जाँच की उठाई मांग

सूरतगढ़। खबर पॉलिटिक्स द्वारा उठाये गए ‘फ़र्ज़ी खातेदारी की आड़ में 5 करोड रुपए की सरकारी भूमि हड़पने के षड्यंत्र’ और ‘विवेकानंद स्कूल को 100 करोड़ रुपए की बेशकीमती भूमि आवंटन के मामलों की गूंज शुक्रवार को राजस्थान विधानसभा में भी सुनाई दी। सूरतगढ़ विधायक डूंगरराम गैदर ने इन दोनों मामलों को सदन के पटल पर रखते हुए जाँच की मांग की है।

                शुक्रवार दोपहर को खबर पॉलिटिक्स पर ‘5 करोड रुपए की भूमि हड़पने की तैयारी, फर्जी खातेदारी की आड़ में किया जा रहा घोटाला…. शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई थी। इस खबर के प्रकाशित होते ही सूरतगढ़ विधायक डूंगरराम गेदर ने मामले में संज्ञान लिया और देर शाम को ही विधानसभा सत्र के दौरान इस मामले को उठाया। गेदर ने विधानसभा में स्वायत शासन मंत्री को अवगत कराते हुए कहा कि शहर के वार्ड नंबर-3 और 26 में जहां दशकों से लोग निवास कर रहे है उनको पट्टे नहीं दिए जा रहे है। जबकि भूमाफिया किस्म के लोगों को जमीनों के टायर लगाकर खातेदारी दें दी जाती है। गेदर ने कहा कि खातेदारी से पहले कब्जे की रिपोर्ट ली जाती है लेकिन भूमाफिया विभाग से मिलकर कागजों में हेरा फेरी करते हैं।

गेदर ने खसरा नंबर-315/2 का जिक्र करते हुए कहा कि 2015 में खातेदारी जारी करते समय इस खसरे को सनसिटी रिसोर्ट के पीछे बताया गया था, लेकिन अब इस खसरे को निरंकारी भवन के पीछे खसरा नंबर 315/1 की खाली पड़ी भूमि पर फिट किया जा रहा है। गेदर ने इस खसरे पर नगरपालिका द्वारा आवासीय योजना काटने की जानकारी भी सदन को दी। उन्होंने इस मामले में जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की।

खबर पॉलिटिक्स द्वारा उठाये ‘विवेकानंद मॉडल स्कूल को भूमि का आवंटन’ मामले पर भी विधायक ने खड़े किए सवाल !

खबर पॉलिटिक्स पर हमने पिछले साल अगस्त माह में शहर की करीब 50 करोड़ रूपये की बेशकीमती भूमि पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया के पुत्र संदीप कासनिया के जाखड़ावाली के विवेकानंद मॉडल स्कूल को फ़र्ज़ी तरीके से आवंटन के मामले को भी जोर-जोर से उठाया था। इस मामले में हमने 25 अगस्त 2024 को ‘50 करोड़ से अधिक की भूमि की लूट की तैयारी, जनप्रतिनिधियों नें किया ईमान का सौदा? शीर्षक से खबर प्रकाशित कर मामले को उजागर किया था। इसी कड़ी में हमने 27 अगस्त को’50 करोड़ की लूट का फूटा भांडा,चोरी नहीं अब सीधे डकैती का प्रयास,नादान दलीलों से ध्यान भटकाने की कोशिश तो 28 अगस्त को जनता के नुमाइंदे चौकीदार या चोर ? बोर्ड बैठक में आज होगा फैसला ! और 29 अगस्त को ‘कांग्रेस के जयचंदों नें पास कराया प्रस्ताव, संस्कारी भी नहीं रहे पीछे, भाटिया सहित 7 पार्षदों नें निभाया धर्म‘ शीर्षक से लगातार समाचारों का प्रकाशन किया था।

खबर पॉलिटिक्स पर समाचारों के प्रकाशन के बाद शहर में यह मामला खूब चर्चा में भी रहा था। तब इस शहर का हर एक जिम्मेदार और ईमानदार नागरिक इस प्रस्ताव के गिरने की दुआ कर रहा था। ये और बात है कि जनता के चुने हुए नुमाईदों ने जनता का साथ नहीं दिया। कुछ ने चांदी के टुकड़ों के बदले जमीर गिरवी रख दिया तो कुछ ऐसे भी रहे जिनके शरीर में रीढ़ की हड्डी जन्म से ही नहीं थी । बहरहाल जनता की उम्मीदों के खिलाफ प्रस्ताव नगरपालिका बोर्ड की बैठक में पास हो भले ही हो गया लेकिन प्रस्ताव का समर्थन करने वाले जनप्रतिनिधि जनता की नज़रों में नंगे हो गए।

वैसे इस एपिसोड में सबसे ज्यादा नुकसान पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया का हुआ। जीवन भर ईमानदारी का दम्भ भरने वाले पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया की छवि उम्र के इस पड़ाव में न केवल दागदार हो गई, बल्कि इस प्रकरण ने यह भी साफ कर दिया कि कासनिया भी मोहमाया से दूर नहीं है। बहरहाल देर से ही सही विधायक डूंगरराम गेदर ने विधानसभा में उठाकर एक बार फिर इस मामले को चर्चा में ला दिया है।

          शुक्रवार को इस मामले को विधानसभा में उठाते हुए गेदर ने कहा कि विवेकानंद स्कूल को धानमंडी व हाउसिंग बोर्ड के बीच स्थित भूमि के आवंटन का प्रस्ताव सन 2005 में ही नगरपालिका बोर्ड की बैठक में ख़ारिज कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय भी इस प्रस्ताव को विधिविरुद्ध मानकर निरस्त कर चुका है । लेकिन फिर भी नगरपालिका ने पिछले साल अगस्त में इस प्रस्ताव को पास कर दिया। गेदर ने सवाल उठाते हुए कहा कि इस जमीन को पिछले साल जनवरी में लाइब्रेरी व सार्वजनिक कोचिंग संस्थान बनाने के लिए नीलामी का प्रस्ताव भी लिया जा चुका था। उन्होंने कहा कि आखिर ऐसा क्या लालच और दबाव है जो शहर के बीचों बीच स्थित 100 करोड रुपए की भूमि को निजी संस्था को फायदा पहुंचाने के लिए सौंपा जा रहा है ? 

विधायक गेदर का विधानसभा में सम्बोधन का वीडियो

कुल मिलाकर खबर पॉलिटिक्स प्लेटफार्म के माध्यम से हमारा हमेशा यह प्रयास रहा है कि हम जनता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दे। यह आप सब का विश्वास है जिसकी वजह से जनप्रतिनिधि भी हमारी आवाज़ के साथ विधानसभा में ताल मिला रहे हैं। आगे भी हमारा प्रयास जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने का रहेगा। आशा है कि आप सभी सुधी पाठक अपना साथ बनाए रखेंगे।

-राजेंद्र पटावरी, अध्यक्ष -प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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नगरपालिका ने 2021 में काटी थी आवासीय योजना

सूरतगढ़। क्या आपने सुना है कि राजस्व विभाग किसी को बिना जमीन अन्य खसरे में फ़र्ज़ी कब्जे की रिपोर्ट पर खातेदारी दे दे और बाद में इस फ़र्ज़ी खातेदारी की आड़ में तीसरे खसरे की खाली पड़ी जमीन पर कब्ज़ा करवा दे। शायद नहीं! परन्तु आप अगर रसूखदार है तो सूरतगढ़ में भ्रष्टाचार में डूबे अधिकारी आपके लिए कुछ भी कर सकते हैं।
कुछ ऐसा ही मामला शहर के सबसे विवादित खसरा नंबर 315/2 का है। 2015 में खातेदारी देते समय इस खसरे को सनसिटी रिसोर्ट के पीछे बताया गया था। लेकिन अब इस खसरे को वार्ड नंबर-26 में निरंकारी भवन के पीछे खाली पड़े बेशकीमती भूखंड पर फिट करने की तैयारी की जा रही है। जबकि खसरा नंबर-315/1 में स्थित इस भूखंड पर वर्ष 2021 में नगरपालिका आवासीय योजना काट चुकी है।
हालांकि पिछले विधानसभा चुनावों में भी इस भूखंड पर चारदिवारी कर कब्ज़ा करने का प्रयास किया गया था। लेकिन सत्ता के मद्द में चूर बदमाशों द्वारा पालिका कर्मचारियों पर जानलेवा हमला करने के बाद ईओ पूजा शर्मा ने हौसला दिखाते हुए इस भूखंड से अतिक्रमण को हटा दिया था ।

लेकिन अब एक बार फिर इस जमीन को हड़पने के लिए प्रभावशाली लोगों ने राजस्व अधिकारियों से मिलीभगत कर खसरों की पेमाईश के बहाने एक कमेटी का गठन करवाया है। इस कमेटी में विभाग के कुछ महाभ्रष्ट राजस्व कार्मिकों को शामिल किया गया है। जिनमे से कुछ एक तो खुद भी इस जमीन में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष हिस्सेदार रहे है। ऐसे मे आप अंदाजा लगा सकते है कमेटी की रिपोर्ट क्या रहेगी ! इस पुरे मामले का खुलासा खबर पॉलिटिक्स की इस रिपोर्ट में आज हम करेंगे।

क्या है पूरी साज़िश ?

दरअसल निरंकारी भवन के पीछे खसरा नंबर-315/1 के इस बेशकीमती भूखंड को हड़पने का षड्यंत्र वर्ष 2021 से चल रहा है, जब तात्कालिक कार्यवाहक एडीएम हरीतिमा ने सनसिटी रिसोर्ट के पीछे खसरा नंबर-315/2 की जगह खसरा नंबर-320 की बहाली का निर्णय दिया था। उसके बाद से खसरा नंबर-315/2 के प्रभावशाली खातेदारों की नज़र इस बेशकीमती खाली भूमि पर थी। इसी के चलते इन लोगों ने सत्ता पक्ष के एक प्रभावशाली नेता जिनकी भी इस भूमि में अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी थी, की मदद से इस जमीन पर नगरपालिका द्वारा काटी गई आवासीय योजना की नीलामी को रुकवा दिया। इसके साथ ही उन्होंने राजस्व विभाग से सेटिंग कर मार्च 2023 में खसरा नंबर 315/2 के सीमा ज्ञान के लिए एक कमेटी गठित करवा ली। भ्रष्ट राजस्व कर्मचारियों की इस कमेटी ने कुछ दिनों बाद ही अपने राजनितिक आकाओं के इशारों पर गूगल मैप में खसरा नंबर-315/1 की खाली पड़ी जगह को खसरा नंबर -315/2 का हिस्सा बता दिया। साथ दैनिक पटवारी डायरी में खसरा नंबर-315/2 का सीमा ज्ञान कराने की रिपोर्ट कर दी।

इस रिपोर्ट के आने के बाद कुछ महीनो तक इस रिपोर्ट को दबाए रखा ताकि मामला हाईलाइट ना हो। लेकिन जैसे ही विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगी इन लोगों ने प्रशासन की व्यस्तता का फायदा उठाते हुए इस रिपोर्ट के बहाने खसरा नंबर-315/1 की इस खाली जगह पर चारदिवारी कर कब्ज़ा कर लिया।

राजस्व कमेटी की रिपोर्ट और गूगल मैप में अंकन पर खडे हो रहे गंभीर सवाल

कमेटी द्वारा तैयार गूगल मैप को गौर से देखें तो साफ पता चलता है कि कमेटी ने गूगल मैप में खसरा नंबर-315/1 के 1 को काटकर 2 लिख दिया था। इसके अलावा दैनिक पटवारी डायरी में रिपोर्ट पर साइन करने वाले पालिका कर्मचारियों की माने तो कमेटी सदस्यों ने धोखे में रखकर खसरा नंबर-315/2 के सीमा ज्ञान की रिपोर्ट पर उनके साइन करवाए थे। असल में कर्मचारीयों को वार्ड-3 और 26 में पट्टे बनाने की सीमा चिन्हित करने के लिए बुलाया गया था।

इसके अलावा इस कमेटी में गिरदावर वरुण सहारण के शामिल होने से भी रिपोर्ट की सत्यता पर सवाल खड़ा होता है। क्यूंकि खुद वरुण सहारण और उनकी पत्नी अमनदीप कौर का नाम खसरा नंबर 315/2 की राजस्व जमाबंदी में खातेदार के रूप में दर्ज़ रहा है। साफ है कि हितबध पक्षकार होने के चलते उन्हें कमेटी में शामिल ही नहीं होना चाहिए था।

प्रभावशाली लोगों के दबाव में करीब एक साल तक नहीं हटा कब्ज़ा

इस बेशकीमती भूखंड पर दिनदहाड़े हुए कब्ज़े का मामला तब मीडिया में खूब चर्चा में रहा था बावजूद इसके करीब एक साल तक यह अतिक्रमण नहीं हटा। जबकि अतिक्रमण हटाने को लेकर वाइस चेयरमैन सलीम कुरैशी, पार्षद मदन ओझा, ओम राजपुरोहित, राजगिरी सहित कई पार्षद प्रतिनिधियों ने नगरपालिका में बार-बार धरना और ज्ञापन भी दिए, लेकिन तत्कालिक ईओ पवन चौधरी बहाने बनाते रहे।

ये तो अतिक्रमियों ने वक़्त खराब आ गया कि पिछले साल अक्टूबर में उन्होंने भूखंड पर निर्माण रोकने पहुंचे पालिका कर्मचारियों पर हमला कर दिया। जिसके बाद ईओ पूजा शर्मा की अंतरात्मा जागी और उन्होंने राजनितिक दबाब की अनदेखी कर अतिक्रमण ध्वस्त कर दिया। ये अलग बात है कि पूजा शर्मा के इस कदम से बोखलाये अतिक्रमियों ने ईओ सहित पालिका कर्मचारियों पर मुकदमा ठोक दिया। जिसकी जाँच अब भी जारी है।

प्रशासन ने नई कमेटी में भी गिरदावर वरुण सहारण को किया शामिल, उठ रहे सवाल ?

इस विवाद के बाद ईओ पूजा शर्मा ने राजस्व विभाग से खसरा नंबर -315/2 सहित करीब एक दर्जन खसरों के सीमा ज्ञान करवाने की मांग की है। हैरानी की बात ये है तहसीलदार द्वारा इस मामले में जो पांच सदस्य नई कमेटी गठित की है उसमे एक बार फिर गिरदावर वरुण सहारण को शामिल कर लिया है। जबकि सहारण का प्रत्यक्ष या फिर अप्रत्यक्ष हित इस भूमि से जुड़ा है। गिरदावर वरुण सहारण को बार बार कमेटी में शामिल करना ये बताता है राजस्व प्रशासन प्रभावशाली लोगों की जूठन खाकर अपने ईमान का सौदा कर चुका है।

बिना पैमाईश खसरा नंबर-315/2 की बेशकीमती भूमि सौंपने की तैयारी

इस पुरे मामले में उपखंड अधिकारी संदीप काकड़ और तहसीलदार कुलदीप कसवां की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे है। क्यूंकि प्रकरण में गिरदावर वरुण सहारण का प्रत्यक्ष हित होने की जानकारी के बावजूद उसे कमेटी से हटाया नहीं गया है। इसके अलावा दोनों अधिकारीयों द्वारा नगरपालिका की बार-बार मांग के बाद भी खसरों के पेमाईश नहीं करवाना भी इन अधिकारीयों की भूमिका पर सवाल खडे करता है।

सूत्रों की माने दोनों अधिकारी बिना पेमाईश करवाए ही यह जमीन प्रभावशाली लोगों को सौंपना चाहते है, और इसके लिए ईओ पूजा शर्मा पर भी सरेंडर होने का दबाब बनाया जा रहा है। क्यूंकि अगर नगरपालिका की मांग के अनुसार सभी खसरों का सीमा ज्ञान करवाया जाता है तो खसरा नंबर -315/2 को खसरा नंबर -315/1 की जगह फिट ही नहीं किया जा सकता। इसके अलावा इन सभी खसरों की पेमाईश से राजस्व अधिकारीयों के पुराने पाप भी सामने आ सकते है।

प्रशासन बिना कब्ज़े से हासिल खसरा नंबर 315/2 की फ़र्ज़ी खातेदारी करे रद्द !

इस मामले में होना तो यह चाहिए था कि राजस्व विभाग खसरा न.-315/2 की खातेदारी को रद्द करता। क्यूंकि सनसिटी रिसोर्ट के पीछे खसरा नंबर-320 की बहाली से यह साफ हो चुका है कि 2015 में खातेदारी देते समय सनसिटी रिसोर्ट के पीछे खसरा नंबर-315/2 होने और खातेदार बागअली का कब्जा होने की रिपोर्ट ही फ़र्ज़ी थी। ऐसे में राजस्व विभाग को फ़र्ज़ी तथ्यों और रिपोर्ट के आधार पर ली गई खातेदारी तुरंत प्रभाव से रद्द करना चाहिए। लेकिन शहर का दुर्भाग्य है कि यहाँ प्रशासन ही फ़र्ज़ी खातेदारों को सरकारी जमीनो पर कब्ज़ा कराने की तैयारी में लगा हुआ है।

जिम्मेदार बने है मूक दर्शक, भुगतना पड़ेगा खामियाजा !

खसरा नंबर-315/2 के नाम पर पिछले कई सालों से चल रही लूट के बावजूद जिम्मेदार मूकदर्शक बने हुए है। वर्ष 2021 में पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया के कार्यकाल में ही खसरा नंबर 315/2 को खसरा नंबर-320 बनाने का खेल रचा गया। तब कासनिया को इसकी पूरी जानकारी थी उन्होंने कई मौकों पर दबी जुबान में इस मामले को जिक्र भी किया। लेकिन जाने किस डर से उन्होंने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर आवाज़ नहीं उठाई ? नतीजा ये हुआ कि कासनिया की दबँग नेता की छवि पर डेंट पड़ गया और चुनावों मे जनता ने उन्हें ख़ारिज कर दिया। वर्तमान में कासनिया विधायक नहीं है पर सत्ता के केंद्र में है, वे चाहे तो शहर की इस बेशकीमती जमीन को माफियाओ से बचाकर पिछली भूल सुधार कर सकते है।

यहां विधायक डूंगरराम गेदर की जिम्मेदारी भी कम नहीं होती। क्यूंकि 2021 की कासनिया वाली भूमिका में अब वे खुद है। विपक्ष में होने के बहाने वे भी अगर कासनिया की गलती दोहराते है तो उन्हें याद रखना चाहिए कि जनता इतिहास दोहरा भी सकती है।

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गोल्डन सिटी में प्लाट खरीदने वाले अभी भी काट रहे चक्कर

सनसिटी रिसोर्ट के पीछे वार्ड नंबर-3 में काटी जा रही वृन्दावन विहार कॉलोनी

सूरतगढ़। पोश कॉलोनी में भूखंड खरीदना हर व्यक्ति का सपना होता है। लेकिन कई बार यह सपना डरावना ख्वाब भी बन जाता है। जैसे कि वसंत विहार और आनंद विहार कॉलोनीयां जिनमें बसे लोगों को आज भी बुलडोज़र चलने का डर सता रहा है। शहर के वार्ड नंबर-3 में काटी जा रही वृन्दावन कॉलोनी भी आने वाले दिनों में नया बसंत विहार-आनंद विहार बन सकती है। ये वही कॉलोनी है जिसकी 90A की कार्यवाही नहीं करने पर चेयरमैन ओम कालवा को कांग्रेस छोड़नी पड़ी थी। बसंत विहार और आनंद विहार की तरह यह कॉलोनी भी भारी भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी है। ऐसे में वृंदावन विहार नामक ख़्वाबों का ये कंगूरा कभी भी भरभरा कर ढह सकता है।

सनसिटी रिसोर्ट के पीछे खसरा नंबर-320 में काटी जा रही वृन्दावन विहार कॉलोनी का नक्शा

कभी था खसरा नंबर-315/2, अब खसरा नंबर-320 बताकर काटी जा रही वृन्दावन विहार 

खसरा नंबर-315/2 की पटवारी रिपोर्ट जिसमे यह खसरा सनसिटी रिसोर्ट के पीछे दिखाया गया

वृंदावन विहार को लेकर विवाद की सबसे बड़ी वजह है कि आज सनसिटी रिजॉर्ट के पीछे जिस जगह को खसरा नंबर-320 बताकर ये कालोनी काटी गई है। वह जगह 2021 से पहले खसरा नंबर-315/2 थी। सन 2015 में इस जगह को खसरा नंबर-315/2 बताते हुए बाग अली नामक व्यक्ति को खातेदारी दी गई थी। उस समय पटवारी रिपोर्ट में भी खसरा नंबर-315/2 को सनसिटी रिसोर्ट के पीछे ठीक इसी जगह दिखाया था। ऊपर दी गई पटवारी की उस समय की मौका नक्शा रिपोर्ट और वृंदावन विहार कॉलोनी के नक्शे का मिलान किया जाये तो साफ समझ में आता है कि यह मामला खसरों में हेर फेर से जुड़ा है। 

2016 में वृन्दावन विहार की जगह पर काटी जा चुकी है गोल्डन सिटी कॉलोनी  

सनसिटी रिसोर्ट के पीछे 2016 में खसरा नंबर-315/2 में काटी गई गोल्डन सिटी कॉलोनी का नक्शा

मामला खातेदारी तक का ही नहीं है जिस जगह वृन्दावन विहार कालोनी काटी जा रही है वहां  2016 में गोल्डन सिटी के नाम से कॉलोनी भी काटी गई थी। तब गोल्डन सिटी को खसरा नंबर 315/2 में बताया गया था। उस समय खरीददारों ने कॉलोनी में प्लॉट खरीद कर रजिस्ट्रीयां भी करवा ली थी। ये और बात है गोल्डन सिटी में प्लॉट खरीदने वाले आज भी अपने प्लॉट और पैसों के लिए चककर काट रहें है।   

      गोल्डन सिटी और वृन्दावन विहार के नक्शों को देखकर भी समझा जा सकता है कि ये दोनों कॉलोनीयां एक ही जगह पर है। इसका सीधा सा अर्थ है कि खसरों की हेर फेर कर खसरा नंबर-315/2 को खसरा नंबर-320 बनाया गया है। 

आखिर खसरा नंबर -315/2 को खसरा नंबर-320 बदलने का क्या है खेल ? 

आप सोच रहें होंगे कि आखिर खसरा नंबर-315/2 कैसे खसरा नंबर-320 बन गया ? असल बात ये कि सन 1972 में सरकार द्वारा खसरा संख्या-320 का रकबा भी अवाप्त किया था। जिसे एडीएम कोर्ट ने 11 नवंबर 2021 को अपील में दिए गए अपने एक फैसले में बहाल कर दिया था। जिसके बाद नए खातेदारों ने खसरा संख्या-315/2 की जमीन को खसरा संख्या-320 बताते हुए न केवल अपने कब्ज़े में लिया बल्कि गोल्डन सिटी में प्लाट खरीदने वाले लोगों के प्लॉट की चारदिवारीयां भी हटा दी। बाद में गोल्डन सिटी में प्लाट खरीदने वाले लोगों ने पुलिस में FIR भी दर्ज कराई लेकिन प्रभावशाली लोगों का कुछ नहीं बिगड़ा। अब भी ये लोग अपने प्लॉट और पैसों के लिए भटक रहे हैं। 

खसरा नंबर -320 का कड़वा इतिहास !

राजस्व दस्तावेजों के मुताबिक खसरा नंबर-320 की जमीन मल्लू राम पुत्र नानक राम (ब्राह्मण) के नाम से दर्ज़ थी। 1972 में सरकार ने दूसरी जमीनों के साथ इस जमीन को भी अवाप्त कर लिया था। बाद में यह जमीन 1986 में मंडी समिति, हनुमानगढ़ और 2005 में इंतक़ाल संख्या-257 के जरिये मंडी समिति से नगरपालिका को ट्रांसफर हो गई थी। लेकिन 2021 में अचानक मल्लूराम के वारिसों ने नोहर निवासी धर्मपाल गोदारा को मुख्तियार आम बनाकर एडीएम कोर्ट में एक अपील पेश कर इंतक़ाल संख्या-257 क़ो ख़ारिज करने की मांग की। ख़ास बात ये रही कि अपील के महज 5 माह और कुछ तारीखों में ही कार्यवाहक ADM डॉ. हरितिमा ने इंतक़ाल संख्या-257 को खारिज कर खातेदारी बहाल करने का फैसला सुना दिया। इसके बाद नगरपालिका की अपील संभागीय आयुक्त द्वारा भी ख़ारिज कर दी। 

90A की कार्रवाई के दबाब में कालवा ने छोड़ी कांग्रेस, भाटिया ने अंपावर्ड कमेटी में लिया नियम विरुद्ध नो अपील का निर्णय 

इस प्रकरण में संभागीय आयुक्त के निर्णय के बाद नगरपालिका राजस्व बोर्ड में अपील कर सकती थी। लेकिन ये आम चर्चा है कि उस समय एक पूर्व विधायक जिनकी इस जमीन में अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी थी, ने चेयरमैन ओम कालवा पर अपील नहीं कर जमीन की 90A की कार्रवाई करने का दबाव बनाया। कालवा जानते थे कि ऐसा निर्णय उन्हें जेल की सलाखें दिखा सकता है, इसलिए उन्होंने इंकार कर दिया और कांग्रेस छोड़कर बीजेपी ज्वाइन कर ली।

चर्चाओं के अनुसार बाद में कार्यवाहक चेयरमैन बने परसराम भाटिया ने पूर्व विधायक के दबाब में एंपावर्ड कमेटी बुलाकर अपील नहीं करने का निर्णय ले लिया साथ ही जमीन की 90A की कार्यवाही कर कॉलोनी बनाने की भी हरी झंडी दे दी, जिससे करोड़ों रूपये की ये जमीन नगरपालिका के हाथ से चली गईं।

बोर्ड बैठक की जगह अंपावर्ड कमेटी की बैठक में ‘नो अपील’ का निर्णय ही गलत ?

इस प्रकरण में ऐम्पावर्ड कमेटी की बैठक में लिया गया नो अपील का निर्णय भी संदिग्ध है। क्यूंकि कमेटी प्रशासन शहरों के संग अभियान के लिए बनाई गई थी, ना कि न्यायिक मामलों की अपील या नो अपील का निर्णय करने के लिए। सच तो ये है नो अपील का निर्णय नगरपालिका बोर्ड की सामान्य बैठक में ही लिया जा सकता था। लेकिन पैसों और राजनितिक दबाब के आगे नियमों की परवाह किसे थी।

ADM डॉ हरितिमा का खसरा नंबर-320 की बहाली का निर्णय सवालों के घेरे में 

खसरा नंबर-320 की बहाली प्रकरण की तारीखों का विवरण

इस मामले में कार्यवाहक एडीएम डॉ हरीतिमा का निर्णय भी सवालों के घेरे में है। प्रकरण की पत्रावली देखने से पता चलता है कि कोर्ट ने 8 नवंबर 2021 को सुनवाई की अगली तारीख 15 नवंबर 2021 तय की थी। लेकिन कोर्ट ने 11 नवंबर को ही पक्षकारों को बुला कर सुनवाई ही नही की बल्कि उसी दिन खातेदारी बहाल करने का फैसला भी सुना दिया। हैरानी की बात ये है कि फैसले के एक-2 दिन में ही डॉ हरितिमा से सूरतगढ़ ADM का अतिरिक्त चार्ज वापस ले लिया गया। 17 नवंबर को तो डॉ हरितिमा रिलीव भी हो गई। ऐसे में सवाल खड़ा होता कि आखिर ADM डॉ  हरीतिमा को फैसला सुनाने की ऐसी क्या जल्दी थी ?                       इसके साथ ही एडीएम के भूमि अवाप्ति के 49 साल बाद अपील स्वीकार करने पर भी सवाल खड़ा होता है। डॉ हरितिमा के फैसले पर इसलिए भी सवाल उठता है कि आखिर एडीएम ने खातेदारी बहाली से पहले राजस्व विभाग से कब्ज़ा काश्त की रिपोर्ट क्यों नही ली ? आखिर क्यों कोर्ट ने अपीलार्थी के इस जमीन पर कब्ज़े के मौखिक बयान को सच मान लिया। इसके अलावा इस जमीन पर 2015 में बागअली को जारी खातेदारी और कब्ज़ा काश्त की मौका नक्शा रिपोर्ट जिसका हमने ऊपर जिक्र किया है को कोर्ट द्वारा अनदेखा करने फैसले को संदिग्ध बनाता है।

क्यूंकि हक़ीक़त ये है कि 1972 में भूमि अवाप्ति बाद से राजस्व गिरदावरी के मल्लूराम और उसके वरिसों की भूमि पर कब्जे या फ़सल बिजान की कोई एंट्री दर्ज़ नहीं है। जिससे साबित होता है कि जमीन पर मल्लूराम के वारिसों का कब्ज़ा नहीं था। ज़ब खातेदारों के पास जमीन पर कब्जा ही नहीं था तो क्या खातेदारी बहाली सम्भव है ? शायद कभी भी नही !

राजस्व विभाग भी षड्यंत्र में शामिल, फैसले के बाद मंडी समिति की जगह खातेदारों के नाम कर दी जमीन   

इंतकाल संख्या-257 जिसके द्वारा मंडी समिति से जमीन नगरपालिका को मिली

इसके प्रकरण में राजस्व विभाग के अधिकारी भी षड्यंत्र में शामिल नजर आते है। क्यूंकि अधिकारीयों ने मामला नगरपालिका का बताते हुए शुरू में ही खुद को मामले से अलग कर लिया। अधिकारीयों ने जानबूझकर जमीन पर खसरा संख्या-315/2 की बाग अली की खातेदारी और कब्ज़ा काश्त का तथ्य जानते हुए भी कोर्ट में नहीं रखा। जिससे फैसला प्रभावित हुआ। यहीं नहीं राजस्व अधिकारीयों को कोर्ट के इंतक़ाल संख्या-257 को ख़ारिज करने के फैसले को भी गलत तरीके से लागू किया। क्यूंकि इंतकाल संख्या-257 के जरिये खसरा संख्या-320 मंडी समिति से नगरपालिका के दर्ज़ हुआ था। इसलिए इंतकाल संख्या-257 ख़ारिज होने से जमीन वापस मंडी समिति के नाम दर्ज़ होनी चाहिए थी। लेकिन अधिकारीयों ने फर्ज़ीवाड़ा कर जमीन मंडी समिति की बजाय खातेदारों के नाम चढ़ा दी। परन्तु 1972 का नोटिफिकेशन और उसके आधार पर मंडी समिति के नाम दर्ज़ इंतक़ाल क्यूंकि अभी भी वैध है। इसलिए खसरा नंबर-320 और उस पर बनी कॉलोनी के मालिकाना हक का विवाद कभी भी फिर खड़ा हो सकता है। 

कॉलोनी में प्लॉट खरीदने वालों की कभी भी बढ़ सकती हैं मुश्किले

बहरहाल जिम्मेदारों के आंखें मुंदने और सत्ता के दबाव में कुर्सी पर बैठे प्यादों की बेशर्मी से यह बेशकीमती जमीन फिलहाल भले ही नगरपालिका के हाथ से चली गई हो। लेकिन खसरा नंबर-320 की बहाली और इस खसरे में बन रही वृंदावन विहार कॉलोनी भी हमेशा विवादों में रहेगी। देर सवेर जमीन की खातेदारी बहाली,कन्वर्जन और पट्टे जारी करने वाले अधिकारीयों पर गाज गिरना तय है। जिस दिन ऐसा होगा तब इस कॉलोनी में अपने खून पसीने की कमाई से प्लॉट खरीदने वाले लोगों के पास पछताने के सिवाय कुछ नहीं होगा। इसलिए हमारी आपसे यही अपील है कि सतर्क रहें सावधान रहें।

-राजेन्द्र पटावरी, अध्यक्ष -प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। नगरपालिका ईओ पूजा शर्मा अपनी विवादित कार्यशैली को लेकर चर्चा में है। गुरुवार को एक बार फिर इसकी बानगी देखने को मिली, ज़ब मैडम ने सत्ता पक्ष के नेताओं के दबाव में नियमों को धता बताते हुए पूर्व अध्यक्ष ओम कालवा को कुर्सी पर बिठा दिया। इस मामले में मैडम ने खुद को डीएलबी डायरेक्टर मान लिया और उच्चाधिकारियों से निर्देश लेने की जरूरत ही नहीं समझी।

कालवा के मामले में डबल बैंच के आदेश पर डीएलबी डायरेक्टर स्तर पर अग्रिम कार्रवाई हेतु निर्णय लिया जाना था। विभाग इस मामले में विधि विशेषज्ञों की राय लेकर जगदीश मेघवाल क़ो हटाकर आदेश की पालना में कालवा क़ो चार्ज देने का निर्णय लेता, इससे पहले ही ईओ पूजा शर्मा ने नियमों और कानूनी प्रक्रिया को ताक में रख दिया। ईओ शर्मा ने कोर्ट के निर्णय की आड़ में आनन फानन में ही जगदीश मेघवाल की जगह कालवा को चार्ज अज्यूम करवा दिया। 

कार्यकाल कम होने से कालवा की चार्ज देने की नहीं थी संभावना !

डीएलबी से निर्देश लिए बिना कालवा को चार्ज दिलाती ईओ पूजा

क्योंकि नगरपालिका के वर्तमान बोर्ड का कार्यकाल दो-चार दिन का ही बचा है ऐसे में संभावना यही थी कि विभाग कालवा को चार्ज ही नहीं देता ! इसके अलावा क्यूंकि विभाग द्वारा जगदीश मेघवाल को 60 दिन के लिए मनोनीत किया जा चुका था ऐसे में यह भी संभावना थी कि विभाग निर्णय के रिवयू या अपील पर भी विचार करता। लेकिन ईओ ने कालवा क़ो चार्ज दिलाने के लिए कानूनों तक की परवाह नहीं की।

मेघवाल का नियुक्ति आदेश वापस लिए बिना कालवा क़ो चार्ज से उठ रहे सवाल ?

बहरहाल स्वायत शासन विभाग द्वारा वर्तमान में जगदीश मेंंघवाल को अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। ऐसे में जब तक विभाग द्वारा उक्त आदेश को प्रत्याहारित् नहीं किया जाता है और उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा दिए गए कालवा की बहाली के आदेश पर निर्णय नहीं लिया जाता है, तब तक पूर्व अध्यक्ष कालवा का पुन कार्य ग्रहणविधि सम्मत नहीं कहा जा सकता है। ऐसे में अगर ओम कालवा अध्यक्ष के रूप में अगले एक-दो दिनों में जो भी निर्णय लेते हैं उनका लीगल स्टेटस क्या होगा यह भी बड़ा सवाल है।

शहर में पोपाबाई का राज, जनप्रतिनिधियों क़ो भेड़ों की तरह हाँक रही ईओ पूजा शर्मा

अपने करीब 9 माह के कार्यकाल में ईओ पूजा शर्मा यह जान चुकी है कि इस शहर में पोपा बाई का राज है। उन्हें पता है कि यहां के राजनीतिज्ञ और जनप्रतिनिधियों क़ो ना तो अपने अधिकारों की जानकारी है और ना ही सामान्य नियमों की, इसलिये वे कुछ भी करें उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। यही वजह है उन्होंने गत दिनों प्रमोशन के हकदार दर्ज़नो सफाईकर्मियों की बजाय अपनी रिश्तेदार क़ो नियमों क़ो मजाक बनाते हुए जमादार पद पर प्रमोशन कर दिया।

मजे की बात है कि इस अत्याचार पर न तो पक्ष और विपक्ष के नेताओं और जनप्रतिनिधियों की जुबान खुली है और न ही जिन लोगों के साथ यह अन्याय हुआ है उन लोगों ने भी भेड़ों की तरह गर्दन झुका ली है। भेड़ों का ज़ब जिक्र आया है तो यह भी जान ले कि ईओ पूजा शर्मा को भेड़ों क़ो हाँकने में महारत हासिल है। इसका नज़ारा हम पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया के पुत्र को स्कूल की भूमि आवंटन के मामले में हुई बोर्ड बैठक में देख चुके है। उस बैठक में ईओ पूजा शर्मा के इशारों पर शहर के चुने हुए जनप्रतिनिधि कठपुतली की तरह बेशर्म नाच दिखा रहे थे। तब इस बैठक में मैडम की कारगुजारियों का एक वीडियो भी काफी वायरल हुआ था।   

भाजपा नेताओं ने की शिकायत, DLB डायरेक्टर और जिला कलेक्टर क़ो कराया अवगत 

इस मामले के चर्चा में आने के बाद शुक्रवार सुबह स्थानीय भाजपा से जुड़े कुछ बड़े नेताओं ने डीएलबी डायरेक्टर और श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर डॉ मंजू से ईओ पूजा शर्मा की शिकायत की है। भाजपा नेताओं ने इस संबंध में डीएलबी डायरेक्टर से मार्गदर्शन लेने की मांग की है। साथ ही साथ उन्होंने DLB से आदेश नहीं आने तक अध्यक्ष कालवा को किसी भी तरह का निर्णय नहीं लेने देने की मांग की है।  

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सूरतगढ़। अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर हाईकोर्ट ने श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर, सूरतगढ़ उपखंड अधिकारी व तहसीलदार को ₹20000 के जमानतीय वारंट के साथ तलब किया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने प्रार्थी महबूब खान उर्फ़ गाजा की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया है।

               मामला शहर के वार्ड नंबर-1 से सटे खसरा नंबर 355/6 से जुड़ा हुआ है। नगरपालिका की भूमि पर हो रहे अतिक्रमणों को हटाने की मांग को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट महबूब खान ने साल 2021 में हाई कोर्ट में याचिका ( 17847/2021) दायर की थी। एकल पीठ ने याचिका पर 3 जनवरी 2022 को निर्णय देते हुए याचिकाकर्ता क़ो जिला कलेक्टर के अधीन पब्लिक लैंड प्रोटेक्शन सेल यानि पीएलपीसी में मामला रखने और 6 महीने में अतिक्रमण हटाने की आदेश दिए। लेकिन सिस्टम किस तरह से काम करता है यह हम सबको पता है। सामाजिक कार्यकर्ता महबूब खान की बार-बार अतिक्रमण हटाने की मांग के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद महबूब खान ने एक बार फिर हाईकोर्ट का रुख करते हुए अवमानना याचिका (1238/2023) दायर की। इस पर कोर्ट ने पीएलपीसी कमेटी क़ो नोटिस जारी किये। इस नोटिस का असर ये हुआ कि जिला कलेक्टर के निर्देशों के बाद नगरपालिका ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। नगरपालिका ने विवादित भूमि पर करीब डेढ़ दर्जन से अधिक अस्थायी अतिक्रमण हटाए भी लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते करीब दो दर्जन से अधिक अतिक्रमणों को नोटिस देकर इतिश्री कर ली गई। इस बीच पीएलपीसी कमेटी द्वारा नोटिस तामिल होने के बावजूद हाईकोर्ट में ना तो कोई अधिवक्ता पेश किया गया और ना ही कोई जबाब।    

               इस पर खंडपीठ ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए पीएलपीसी कमेटी सदस्यों जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी और तहसीलदार को  ₹20000 के जमानतीय वारंट के साथ तलब किया है। खंडपीठ के इस आदेश के बाद प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। 

              इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता महबूब खान का कहना है कि उनके द्वारा की गई शिकायत पर पटवारी ने रिपोर्ट कर 50 से अधिक अतिक्रमण चिह्नित किए हैं और उन्हें हटाने की अनुशंसा की है। लेकिन प्रशासन जानबूझकर प्रभावशाली लोगों के अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई नहीं कर रहा हैं। उनका कहना है कि वो इस मामले में कार्रवाई नहीं होने तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

वार्ड नंबर-1 से स्टे खसरा नंबर 355/6 में पटवारी द्वारा चिन्हित अवैध अतिक्रमण

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कार्यभार ग्रहण करते समय पूर्व विक्ट्री साइन दिखाते जगदीश मेघवाल व भाजपा नेता

सूरतगढ़। स्वायत शासन विभाग द्वारा चेयरमैन मनोनीत होने के बाद पार्षद जगदीश मेघवाल ने सोमवार को कार्यभार ग्रहण किया। मेघवाल सुबह करीब 11:30 वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ नगरपालिका कार्यालय पहुंचे। जहां पर पहले से मौजूद भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं ने ढोल नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ मेघवाल का जोरदार स्वागत किया। इस दौरान भाजपा से जुड़े तमाम नए और पुराने नेता मेघवाल क़ो फूल माला पहनाकर बधाई देते नजर आए। जगदीश मेघवाल ने भी इस बीच तमाम छोटे बड़े कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों के साथ गले लगकर बधाई स्वीकार की। करीब आधे घंटे तक ढोल नगाड़ों के बीच मेघवाल के स्वागत और बधाई देने का यह सिलसिला चलता रहा।

इसके बाद करीब 12:00 बजे मेघवाल अध्यक्ष चैम्बर में पहुंचे जहाँ पर पंडितजी ने विधिवत मंत्रोचारण कर कार्यभार ग्रहण की कार्रवाई सम्पन्न करवाई। ठीक 12:05 बजे वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में जगदीश मेघवाल अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे। मेघवाल ने इस मौके पर पांव छूकर वरिष्ठ नेताओं का आशीर्वाद भी लिया।

इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष शरणपाल सिंह मान, पूर्व विधायक अशोक नागपाल, नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, पूर्व मंडल अध्यक्ष जयप्रकाश सरावगी,जिला उपाध्यक्ष आरती शर्मा, पूर्व नगरपालिका चेयरमैन काजल चोपड़ा, किसान मोर्चा अध्यक्ष विष्णु तरड़, महामंत्री लालचंद शर्मा,भाजपा नेता सुभाष गुप्ता, पूर्व पार्षद सुरेन्द्र राठौड़, श्रवण स्वामी, भाजयुमो नगरअध्यक्ष मयंक वशीष्ठ सहित बड़ी संख्या में भाजपा नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया की मौजूदगी बनी चर्चा 

जगदीश मेघवाल को कार्यभार ग्रहण के दौरान माला पहनाते पूर्व विधायक

मेघवाल के कार्यभार ग्रहण के दौरान पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया भी पहुंचे। हालांकि कासनिया जब पहुंचे तब तक जगदीश मेघवाल चेयरमैन सीट पर बैठ चुके थे। क्यूंकि मेघवाल को बधाई देने और उन्हें माला पहनाकर फोटो खिंचवाने वालों की भीड़ अब भी उमड़ रही थी, ऐसे में कासनिया क़ो जगदीश मेघवाल तक पहुंचने में खासी मस्कत करनी पड़ी। बाद में किसी तरह से कासनिया ने जगदीश मेघवाल को माला पहनकर अध्यक्ष बनने की बधाई दी। हालांकि इस मौके पर ली गई तस्वीरे ये साफ इशारा कर रही है थी कि कासनिया महज औपचारिकता के लिए शपथ ग्रहण कार्यक्रम में पहुंचे थे।

जगदीश मेघवाल ने इस पर भी कासनिया को माला पहनाकर संबंधों के  सामान्य होने का मैसेज भी देने का प्रयास भी किया, लेकिन नेताजी ने जगदीश मेघवाल क़ो लेकर लगाए जा रहे नारों पर आपत्ति जता कर मेघवाल के प्रयास क़ो असफल प्रयास कर दिया।

हालांकि इसके बाद तमाम नेताओं की मौजूदगी में ईओ पूजा शर्मा ने जगदीश मेघवाल को कार्यभार ग्रहण करवाया। कुल मिलाकर डिप्लोमेटिक भाषा में कहें तो कहा जा सकता है कि मेघवाल के कार्यभार ग्रहण में कासनिया आए नहीं बल्कि लाये गए थे।

सफल कार्यभार ग्रहण कार्यक्रम कर संगठन ने दिखाई ताक़त 

नपा कार्यालय पर पद ग्रहण कार्यक्रम से पूर्व खुशी मनाते भाजपा कार्यकर्ता

नगरपालिका चेयरमैन पद पर जगदीश मेघवाल की नियुक्ति भाजपा में सत्ता और संगठन में चल रहे शीतयुद्ध में संघठन की जीत के रूप में देखी जा रही है। इस जीत से उत्साहित भाजपा संघठन से जुड़े नेताओं ने कार्यभार ग्रहण कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने के लिए भी जमकर तैयारी की। जिसका नतीजा यह रहा कि आज कार्यभार ग्रहण कार्यक्रम में भाजपा के तमाम छोटे बड़े नेता मौजूद रहे। इन नेताओं में वे लोग भी शामिल थे जो पिछले कुछ सालों में भाजपा के कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं। 

शपथ ग्रहण कार्यक्रम के दौरान संगठन से जुड़े नेताओं के चेहरे पर विजय मुस्कान नजर आ रही थी। तो दूसरी तरफ भाजपा से जुड़े आम और खास तमाम कार्यकर्ता और नेता भी मेघवाल की अध्यक्ष पद पर नियुक्ति पर खुशी जाहिर कर रहे थे। कुल मिलाकर कार्यभार ग्रहण के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं में जिस प्रकार का जोश आज दिखाई दिया वह काफी समय बाद नजर आया।

मेघवाल ने शहर की सफाई क़ो बताया प्राथमिकता

कार्यभार ग्रहण करने के बाद चेयरमैन जगदीश मेघवाल ने शहर की सफाई व्यवस्था को अपनी प्राथमिकता बताया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन जैसे छोटे से कार्यकर्ता को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्या के समाधान के लिए वह किसी भी समय तैयार मिलेंगे। मेघवाल ने पैसे जमा हो जाने के बावजूद पट्टे नहीं जारी होने के सवाल पर कहा कि वे मामले में जल्द ही जानकारी लेकर पट्टे जारी करने का प्रयास करेंगे।

वहीं मेघवाल पार्टी में गुटबाजी के सवाल के साथ-साथ अध्यक्ष नियुक्ति का लेटर जारी होने की चार दिन बाद आदेश मिलने के सवाल को भी टाल गए। उन्होंने इसकी पीछे की वजह के बारे में जानकारी होने से इनकार कर दिया।

ये भी रहे मौजूद…

शपथ ग्रहण कार्यक्रम के दौरान सत्ता और संगठन से जुड़े वरिष्ठ भाजपा नेता नरेंद्र घिटाला, उजागर सिंह बराड़, विजय गोयल, सत्यनारायण छिम्पा, डॉ. टी. एल. अरोड़ा, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मास्टर ओमप्रकाश कालवा, पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष ललित सिडाना, व्यवसाय पूनम चंद सुराणा, किशन स्वामी, सत्यनारायण तावणीया, पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष एन डी सेतिया, पार्षद प्रतिनिधि गुरजंट सिंह,पार्षद संजय अग्रवाल,आसकरण सोनी, सुरेश सुथार,भारत विकास परिषद के अध्यक्ष अंकुर लड़ोईया, पवन छाबड़ा, विनोद सारस्वत्त,रवि खुराना, सिकंदर स्वामी सहित सैंकड़ो की संख्या में भाजपा नेता, कार्यकर्ता और आमजन व शुभचिंतक मौजूद रहे। 

जगदीश मेघवाल की नियुक्ति का फैसला सही या…….

जगदीश मेघवाल नपा अध्यक्ष के रूप में कितना सफल होंगे यह तो आने वाला वक्त तय करेगा। लेकिन इस बात में कोई संशय नहीं है अध्यक्ष पद के लिए भाजपा में सबसे पहली दावेदारी जगदीश मेघवाल की बनती है। पार्टी के 3 बार के पार्षद के रूप जगदीश मेघवाल अपनी कैटेगरी में सबसे अनुभवी पार्षद है। इसके अलावा 20 साल से भी अधिक समय से वे पार्टी से जुड़े हुए हैं। जगदीश मेघवाल की छवि शांत स्वभाव के मिलनसार व्यक्ति की है। उनका अब तक का राजनीतिक कार्यकाल विवादों से परे रहा है। ऐसे में निसंदेह कहा जा सकता है कि पार्टी ने जगदीश मेघवाल को मनोनीत कर आम कार्यकर्ताओं की उम्मीदों को भी जिंदा रखा है। यही वजह है कि जगदीश मेघवाल की नियुक्ति से पार्टी ही नहीं शहर का आम आदमी भी ख़ुश नज़र आ रहा है।

– राजेंद्र पटावरी,अध्यक्ष-प्रेस क्लब,सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। दीपावली के मौके पर प्रदेश भर से पटाखों की दुकानों में आगजनी की घटनाएं सामने आ रही है। लेकिन इसके बावजूद शहर के व्यस्ततम मुख्य बाजार में सरेआम पटाखे बिक रहे है। शहर की स्टेशन रोड़, फार्म काम्प्लेक्स के नजदीक, बीकानेर रोड़ पर सैन मंदिर और मिश्रा कटला के पास ऐसे कई ठिकाने है जहाँ पर कुछ व्यापारी पिछले कई सालों से थोक लाइसेंस की आड़ लेकर सरेआम पटाखे बेच रहे है। यह सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे होने के बाद भी इन अवैध वीडियो को कोई रोकने वाला नहीं है । नियमों की बात करें तो थोक विक्रेता व्यस्त बाजार में पटाखे बेच ही नहीं सकते। यही नहीं थोक विक्रेता का गोदाम आबादी क्षेत्र से बाहर होना चाहिए जहाँ से वह रिटेल दुकानदारों को पटाखे बेच सके।

लेकिन सूरतगढ़ में पटाखा व्यापार की सच्चाई यह है कि व्यापारियों ने गोदाम आबादी क्षेत्र से बाहर दिखाकर लाइसेंस लिए हैं। लेकिन पटाखे मुख्य बाजार में स्थित अपनी दुकानों पर ही बेच रहे हैं। इस पुरे खेल में ये व्यापारी आम आदमी की जान को जोखिम में डाल रहे हैं। इन व्यापारियों की वजह से आम आदमी ही नहीं आसपास के दुकानदारों को भी  बड़ा खतरा है। क्युकि जिन तंग गलियों और भीड़ भरे इलाकों में पटाखों की बिक्री चल रही है। वहां अगर बदकिस्मती से भी कोई आगजनी की घटना होती है तो आग बुझाने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में आगजनी की स्थिति में आसपास की दुकानों का चपेट में आना भी तय है।

पटाखा मार्केट के दुकानदारों के साथ धोखा, खुदरा बिक्री कर व्यापारी कूट रहे चांदी

नगरपालिका प्रशासन की ओर से मुख्य बाजार में पटाखों के चलते आगजनी की संभावित आशंका से बचने के लिए हर वर्ष की भांति शहर से दूर नगरपालिका ग्राउंड में पटाखों की दुकाने आवंटित की जाती है। लोग हजारों रुपए खर्च कर फार्म जमा करते हैं और लॉटरी में हिस्सा लेते हैं। इस हिसाब से पटाखा बाजार के अलावा शहर भर में कहीं भी पटाखे की खुदरा बिक्री नहीं की जा सकती। लेकिन वो कहते है कि ‘समरथ को नहीं दोष गोसाई’, मुख्य बाजार में पटाखे बेचने वाले ये व्यापारी थोक में ही नहीं खुदरा में भी पटाखे बेचते है। जिससे पटाखा बाजार में दुकान लेंने वाले लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है।

 पटाखा बाजार में लॉटरी से दुकाने आवंटित करवाने वाले लोगों ने इस बार भी मुख्य बाजार में पटाखे की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है। इस संबंध में दुकानदारों ने एसडीएम संदीप काकड़ को ज्ञापन भी सोपा है। लेकिन प्रशासन सफेद व्यापारियों के खिलाफ शख़्ती  दिखा पाएगा इस बात की उम्मीद कम नजर आती है। 

नगरपालिका, प्रशासन और पुलिस ने मूंदी आँखे !

आम आदमी की जान को खतरे में डालकर शहर के मुख्य बाजार में पटाखों की बिक्री की जानकारी प्रशासन को नहीं है। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो ये सच नहीं है। सच ये है कि थोक व्यापारियों ने अपने लाभ के लिए पुलिस प्रशासन से लेकर नगरपालिका तक क़ो मैनेज़ कर रखा है।

साफ है कि भरे बाजार में नियम विरुद्ध पटाखों की बिक्री से होने वाली काली कमाई का कुछ हिस्सा सिस्टम तक पहुंच रहा है। इस काली कमाई ने सिस्टम क़ो हैक कर लिया है। इसलिये पटाखा बाजार के दुकानदारों की गुहार के बावजूद भरे बाजार में पटाखे की बिक्री पर लगाम लगेगी इस बात की उम्मीद बेहद कम है ! प्रशासन को हरकत में आने के लिए शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार है ?

–राजेन्द्र पटावरी, अध्यक्ष -प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। श्रीकुंडिया सारस्वत समाज समिति के अध्यक्ष पद के चुनाव कराने की घोषणा क़ो लेकर गत दिनों हुई बैठक पर विवाद हो गया है। श्रीकुंडिया सारस्वत समाज समिति (रजिस्टर्ड) ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बैठक को अनाधिकृत बताते हुए चुनाव संबंधी चर्चाओं का खंडन किया है। इससे पहले समिति अध्यक्ष लक्ष्मण शर्मा की अध्यक्षता में 28 अक्टूबर को एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में समाचार पत्रों में समिति के चुनाव की घोषणा संबंधी प्रकाशित खबरों पर चर्चा की गई। समिति सदस्यों ने समाचार पत्रों में प्रकाशित बैठक संबंधी खबरों का सिरे से खंडन किया।

समिति सदस्यों ने कहा कि समाज की रजिस्टर्ड समिति के फिलहाल कोई चुनाव नहीं होंगे। समिति के वर्तमान अध्यक्ष लक्ष्मण शर्मा का कार्यकाल 3 वर्ष का है, जो दिसंबर 2025 को पूरा होगा। इसलिए समिति के चुनाव अपने तय समय पर दिसंबर 2025 में ही होंगे। बैठक के बाद समिति के लेटर हेड पर प्रेस नोट भी जारी किया गया।

समिति द्वारा जारी किया गया प्रेस नोट

समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण शर्मा और सचिव पवन तावनीयां की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कथित स्वयंभू कमेटी का अवैधानिक गठन कर कुछ व्यक्तियों द्वारा समाज में गुटबाजी और परस्पर झगड़ा और उन्माद फैलाने की कोशिश की जा रही है। इसी वजह से झूठी खबरें समाचार माध्यमों से फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि रजिस्टर्ड कमेटी का इन समाचारों से कोई लेना-देना नहीं है। भविष्य में रजिस्टर्ड कमेटी का जब भी विधिवत चुनाव होगा तब सदस्यों और समाज के लोगों को सूचनाओं दे दी जाएगी।

           गौरतलब है कि पिछले दिनों कुंडिया समाज से द्वारा बैठक कर श्रीकुंडिया सारस्वत समाज समिति के चुनाव कराने की घोषणा की गई थी। इस बैठक में पूर्व कार्यकारिणी को भंग करने की घोषणा करते हुए 29 दिसंबर को चुनाव करने की घोषणा की गई थी

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सूरतगढ़। अवैध अतिक्रमण हटाने को लेकर हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका वापस लेने से शहर में अतिक्रमणों का मामला एकबारगी ठंडा पड़ गया है। हाईकोर्ट की डबल बैंच ने याचिकाकर्ता की पूरी रिसर्च के साथ रीट लगाने की मांग पर रिट क़ो ख़ारिज कर दिया। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सक्षम अथॉरिटी से शिकायत दर्ज़ करवाने की छूट प्रदान की है।

हाईकोर्ट के निर्णय की जानकारी मिलने के बाद रिट से प्रभावित होने वाले लोगों ख़ासकर शहर की बसंत विहार व आनंद विहार कॉलोनी के लोगों ने राहत की सांस ली है। याचिकाकर्ता उमेश मुद्गल और नरेंद्र शर्मा द्वारा अपनी याचिका में बसंत विहार व आनंद विहार कॉलोनी के जोहड़ पायतन में बसे होने का आरोप लगाया था और जोहड़ पायतन से अतिक्रमण हटाने की मांग की थी। याचिका के चलते पिछले लंबे समय से दोनों कॉलोनियों के निवासियों की नींद उडी हुई थी। अब याचिका ख़ारिज होने से कॉलोनीवासियों में खुशी का माहौल है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को बिना तैयारी याचिका प्रस्तुत करने पर दी नसीहत 

मामले में कोर्ट ने अपने ऑर्डर में लिखा है कि याचिकाकर्ता द्वारा याचिका दायर करने से पूर्व किसी प्रकार का शोध नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा कथित अतिक्रमणों का ब्यौरा नहीं देकर पूरे शहर में अतिक्रमण होने की बात कही गई है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 1996 के एसपी आनंद बनाम एचडी देवे गौड़ा एंड अदर्स और सन 2022 में डबल बेंच के ही गजेंद्र पूर्बीया व अन्य बनाम भारत सरकार व अन्य के मामलों में दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता को नसीहत दी कि जिस मामले से अच्छी तरह वाकिफ नहीं हो उस मामले में न्यायालय में जाने से बचना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि वादी क़ो अस्थिर भावनाओं में फंसकर प्रचार प्रदान करने वाले मुद्दों की तलाश करने वाले शूरवीर की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधूरी जानकारी के साथ याचिका दायर करने से महत्वपूर्ण मामला भी नष्ट हो सकता है जिससे किसी तीसरे पक्ष के अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं।

अब क्या होगा आगे…….

हाई कोर्ट के फैसले के बाद सबके मन में बड़ा सवाल है कि अब आगे क्या होगा ? बसंत बिहार व आनंद विहार कॉलोनी सहित शहर के मुख्य मार्गो के अतिक्रमणों और मास्टर प्लान को लागू करने का मामले का क्या होगा ? इस सवाल का फिलहाल जवाब यह है कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद एक बारगी अतिक्रमणो का मामला ठंडा बस्ते में चला गया है। लेकिन यहां यह भी बताना जरूरी है कि क्यूंकि मामले में अतिक्रमणों (अवैध कॉलोनीयों व मार्गो के अतिक्रमणो) को लेकर कोई कोंक्रीट डिसीजन नहीं हुआ है। ऐसे में भविष्य में भी हाईकोर्ट तक मामला पहुंचने की संभावना अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है।

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सूरतगढ़। ‘बड़े बे आबरू होकर निकले तेरे कूचे से हम’। चेयरमैन के रूप में मास्टर ओम प्रकाश कालवा की 5 साल की कार्यशैली से उनकी यह नियति तो पहले ही तय थी। लेकिन शुक्रवार को माननीय उच्च न्यायालय के आदेश नें कालवा की रुखसत पर मोहर लगा दी है। न्यायालय नें राज्य सरकार के 2 अगस्त के आदेश को स्टे कर एक तरह से कालवा की राजनितिक पारी पर विराम लगा दिया है। हालांकि मास्टरजी सिंगल बेंच के फैसले को डबल बैच में चुनौती देंगे। परन्तु सिंगल बैंच दो बार और एक बार डबल बेंच सीवरेज मामले में कालवा निलंबन के आदेश क़ो सही ठहरा चुकी है। ऐसे में उम्मीद कम है कि सीवरेज में भ्रष्टाचार की गंदगी में लठपथ कालवा को न्यायपालिका से राहत मिलेगी।

        कालवा की उम्मीदें फिलहाल सिर्फ और सिर्फ चमत्कार पर टिकी है। वैसे चमत्कार के लिए जरूरी है कि कोई आपके हक में दुआ करें। क्यूंकि पिछले 4 सालों में कालवा ने ऐसा कोई तीर नहीं मारा है कि आम जनता उनके लिए दुआ करें। कालवा स्वीकार करें या फिर नहीं, सच ये है कि अपने करीब 4 साल के कार्यकाल में उन्होंने आम जनता क़ो निराश ही किया है। छोटे छोटे कामों के लिए उन्होंने लोगों की चप्पल घिसवाने का काम किया। पट्टे,सफाई व्यवस्था, सड़क, बिजली या नगरपालिका से जुड़ा कोई भी काम रहा हो उनके कार्यकाल में जनता बस परेशान ही रही।

कालवा के कार्यकाल में प्रशासन शहरों के संग अभियान में जमा फाइलों के पट्टे लेने के लिए लोग आज भी चक्कर काट रहे हैं। बड़ी संख्या में ऐसे लोग है जिन्होंने एक डेढ़ साल पहले नियमन राशि जमा कर रसीदें ले ली। लेकिन कालवा की हठधर्मिता से पट्टे का सपना अभी भी दूर की कौड़ी बना हुआ है। हक़ीक़त ये है कि दलालों ने कच्ची व पक्की बस्ती के पट्टों में जीएसटी के लालच ने कालवा क़ो पथभ्रष्ट कर दिया। जिसके चलते कालवा की अगुवाई में सरकार द्वारा दी गई छूटों का लाभ आमजन को नहीं मिला। हालात किस कदर खराब थे इसका अंदाजा इस बात से लगा लें कि पट्टों के लिए एक वरिष्ठ पार्षद क़ो शिविर में पीपा बजाकर अपनी पीड़ा का प्रदर्शन करना पड़ा। 

           अपने कार्यकाल में पार्षदों क़ो पार्षदों और कर्मचारियों से लड़ाने वाले कालवा ने सफाईकर्मियों का टूल के रूप में इस्तेमाल किया। सफाईकर्मियों द्वारा शहर के व्यापारियों से मारपीट की घटना कालवा की इसी शय की परिणति थी। ज़ब सफाईकर्मीयों का इस्तेमाल हथियार के रूप में होने लगे तो शहर की सफाई व्यवस्था भी कैसे बेहतर होती ? पिछले 5 साल से अपने आसपास जो नरक जैसे हालात आप देख रहे हैं उसके लिए बहुत हद तक कालवा ही जिम्मेदार हैं।                         

सरकारी स्कूल के नजदीक सड़क पर स्पीड ब्रेकर बनाने का मामला हो या फिर रेलवे स्टेशन रोड बनाने का, ढाब से पानी निकासी हो या फिर कोई और छोटा मोटा काम कालवा ने अपनी तुच्छ मानसिकता के चलते पार्षदों तक की नाक रगड़वा दी। राजनीति में किसी भी बड़े नेता की कामयाबी में प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है लेकिन यहां तो कालवा प्रेस वालों के पीछे भी लठ लेकर पड़ गए। अहंकार के चलते पहले उन्होंने एक यूट्यूबर क़ो मानहानि का मुकदमा देने की धमकी दे डाली तो बाद में नगरपालिका में छोटा-मोटा काम कर जीवन यापन करने वाला पत्रकारों और उनके परिवार से जुड़े लोगों क़ो टॉर्चर करना शुरू कर दिया।

                  पत्रकार ही नहीं नगरपालिका से बरसों से अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले ठेकेदारों और संविदा कार्मिको क़ो भी कालवा ने चरणवंदना करवाने में अपनी ताक़त लगा दी। खैर ईश्वरीय न्याय के चलते बहुत हद तक कालवा अपने मंसूबे तो पुरे नहीं कर पाए। लेकिन अपनी करतूतों और राजनीतिक द्वेषता के चलते कालवा ने 45 पार्षदों वाले वर्तमान बोर्ड क़ो नगरपालिका इतिहास के सबसे घटिया बोर्ड में जरूर शामिल करवा दिया है। वैसे कालवा सहित वर्तमान बोर्ड शहर की 100 करोड़ रूपये की बेशकीमती भूमि क़ो लुटाने के लिए भी याद रखा जायेंगा। ‘हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे‘ की तर्ज़ पर कालवा ने बेहद चालाकी से इस षड्यंत्र में 37 पार्षदों क़ो शामिल कर उन्हें भी दागदार कर दिया। वर्तमान में कालवा की चापलूसी के चलते इन पार्षदों की हालत हॉलीवुड फिल्मो के खतरनाक जोम्बी जैसी है जिन्हे सभ्य समाज हिकारत की नज़र से देखता है।     

            इस मामले में सबसे अफसोस की बात यह है कि ईश्वर ने कालवा को लगातार मौके दिए लेकिन कालवा ने अगर चाहते तो निलंबन से बहाली के बाद वे पूर्व चेयरमैन रहे परसराम भाटिया से सबक ले सकते थे। भाटिया पर तमाम तरह के भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद उनके 4 माह का कार्यकाल कालवा के 4 साल के कार्यकाल पर भारी नज़र आता है। इसकी वजह भी है उन्होंने छोटे से कार्यकाल में भी आमजन की न केवल समस्याएं सुनी बल्कि उन्हें दूर करने का प्रयास भी किया। सफाई व्यवस्था दुरुस्त की तो हजारों की संख्या में पट्टे दिए और महीनो से पेंडिंग पड़े और नए टेंडर जारी कर विकास के पहिये क़ो गति दी। लेकिन इससे इतर कालवा ने शहर के विकास और आमजन की तकलीफों को दूर करने बजाय अपनी पूरी एनर्जी पार्टी नेताओं, पार्षदों, पत्रकारों क़ो लड़ाने में खपा दी। जिसका हासिल ये है कि आज सत्ता में वापसी की आखिरी लड़ाई में कालवा बिल्कुल अकेले नज़र आ रहे है।

बहरहाल कालवा के 5 साल के कार्यकाल में शहर विकास की दृष्टि से तो पिछड़ा ही है। वहीं राजनीति में करियर बनाने का सपना देख रहे उच्च शिक्षित लोगों क़ो कालवा के निराशाजनक कार्यकाल ने बड़ा नुकसान पहुंचाया है। क्यूंकि कालवा के फैलीयर ने जनता में उच्च शिक्षित लोगों के बेहतर जनप्रतिनिधि होने का जो भरम था उसे खत्म कर दिया है।

भाटिया और सिंधी क़ो निपटाने में नपे कालवा

कहते है कि ‘समय बड़ा बलवान’ ! चेयरमैन बनने के बाद जो मास्टरजी विरोधियों क़ो अपनी राजनीतिक गुगली से छकाते रहे वे खुद भी विरोधियों की गुगली से क्लीन बोल्ड हो गए। सबसे बड़ी बात है कि मास्टर जी नें अध्यक्ष बनने के बाद सबसे पहले कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष परसराम भाटिया और मील परिवार के नजदीकी पार्षद पति व संगठन महामंत्री धर्मदास सिंधी क़ो टारगेट किया था। भाग्य का खेल देखिये कि कालवा के राजनीतिक जीवन की उठापटक और अंत की वजह यही दो चेहरे बन गए। कालवा नें तो इन दोनों क़ो कुछ समय के लिए कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखाया था लेकिन राजनीति के शतरंज में घोड़े की भांति ढाई चाल चलकर ये लोग न केवल कांग्रेस में शामिल रहे। बल्कि कालवा के लिए ऐसी परिस्थितियों पैदा कर दी कि कलवा को ना चाहते हुए भी कांग्रेस छोड़नी पड़ी। भाजपा में शामिल होकर कालवा इन्हे निपटाने का तरीका ढूंढ़ते रह गए परन्तु इससे पहले ही भाटिया और सिंधी ने कालवा की बिंदी हटाकर उन्हें विधवा विलाप के मजबूर कर दिया है। हालांकि सीवरेज की शिकायत पूर्व चेयरमैन बनवारी लाल मेघवाल ने की थी और हाईकोर्ट में दायर याचिका में पार्षद बसंत बोहरा और मोहम्मद फारूक का नाम भी शामिल है। लेकिन यह ठोस हकीकत है कि इस कोर्ट के माध्यम से लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने असली रोल भाटिया और सिंधी का रहा। क्यूंकि हाईकोर्ट में महीनो तक 3-3 बार इस मामले क़ो चलाने में पानी की तरह जो पैसा लगा है वह इन्ही दोनों की जेब से लगा है। बहरहाल कालवा इस राजनीतिक शिकस्त का जवाब किस तरह देंगे यह तो आने वाला वक़्त तय करेगा। फिलहाल विरोधी खेमे में जश्न का माहौल है। 

– राजेंद्र कुमार पटावरी, अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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 वो मुतमुईन है कि पत्थर पिघल नहीं सकता। 

 और में बेक़रार हूँ आवाज़ में असर के लिए।।

सूरतगढ़। नगरपालिका में चुने हुए पार्षदों के लिए आज उनके जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा की घड़ी है। आज इस बात का फैसला होने वाला है कि आपके द्वारा सदन में भेजे गए चौकीदार, चौकीदार ही है या फिर चोर है ? भाजपा नेता संदीप कासनिया को भूमि आवंटन के प्रस्ताव पर वोटिंग के साथ ही चौकीदारों/चोरों के चेहरे का नकाब उतर जायेंगे। पूरे शहर का आमजन और राजनीतिक सुचिता के पक्षधर लोग इस प्रस्ताव को गिराना चाहते हैं। इसलिये सबकी नज़र नगरपालिका बोर्ड के कांग्रेस,भाजपा, माकपा सहित पार्टियों व निर्दलीय पार्षदों पर है। देखना है कि चांदी के चंद टुकड़ों पर अपना ईमान बेचकर कितने पार्षद अपनी नंगई का भोंडा प्रदर्शन भी करते है। 

          इस मामले कांग्रेस विधायक डूंगरराम गेदर नें प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रस्ताव के विरोध की घोषणा कर दी है। अपैक्स कोर्ट के आदेशों के बावजूद भाजपा बोर्ड द्वारा प्रस्ताव लाने से भाजपा की भी इस मामले में लगातार किरकीरी हो रही थी। जिसके बाद भाजपा नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा नें शहर हित में प्रस्ताव की विरोध की घोषणा की है। हालांकि भाजपा नगरमंडल की यह घोषणा महज एक राजनीतिक स्टंट है या फिर पार्टी का रियल स्टेण्ड है। इसका पता आज होने वाली बैठक में लग जायेगा। भाजपा के कितने पार्षद बोर्ड बैठक में प्रस्ताव का विरोध करते हैं यह बात ही नगरमंडल की घोषणा की सच्चाई पर मोहर लगाएगी। भाजपा नगर अध्यक्ष ने जब प्रस्ताव के विरोध की घोषणा की थी उस समय पार्टी जिला अध्यक्ष शरणपाल सिंह मान के अलावा सभी प्रमुख नेता और कई पार्षद भी शामिल थे। इसका सीधा सा मतलब लगाया जा सकता है कि कहीं ना प्रस्ताव के विरोध की घोषणा को जिलाध्यक्ष का भी समर्थन था। ऐसे में अगर जिलाध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष राजनितिक स्टंट से इतर दिल से प्रस्ताव के विरोध में है तों भाजपा के कई पार्षद आज बोर्ड बैठक में प्रस्ताव के विरोध में उतर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो जन भावनाओं के खिलाफ लाया गया यह प्रस्ताव कभी भी सफल नहीं हो सकता। इसलिये आज फैसला पार्षदों के ही नहीं शहर के भाजपा मंडल के पदाधिकारीयों और नेताओं के ईमान का भी है।

                         आज की बोर्ड बैठक में माकपा,जनता मोर्चा और निर्दलीय पार्षदों को भी अग्नि परीक्षा से गुजरना है । क्यूंकि भाजपा और कांग्रेस से अलग किसी वार्ड में कोई भी निर्दलीय प्रत्याशी जीतता है तो उसमे सबसे ज्यादा योगदान उसके व्यक्तित्व का होता है। आम जनता इमानदारी व दूसरे गुणो से प्रभावित होकर ही मुख्य पार्टियों को छोड़कर उसको वोट करती है। पार्टियों से जीते हुए पार्षदों पर पार्टी का दबाब हो सकता है। लेकिन निर्दलीय पार्षद इन सभी दबाबों से मुक्त होते हैं। यहां यह भी कहना होगा कि सबसे ज्यादा बिकने का खतरा भी इन्ही पार्षदों का होता है। इसलिये आज इन पार्षदों के स्टैंड पर सबकी खास नजर रहने वाली है। आज यह तय हो जाएगा की शहर की जनता द्वारा चुने गए माकपा, मोर्चा और निर्दलीय पार्षदों में कितने बिकाऊ और कितने टिकाऊ है ?

                   इस पुरे मामले में सदन में प्रमुख विपक्षी कांग्रेस पार्टी की बात करें तों आज की बैठक में लाये जा रहे प्रस्ताव को गिराने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी कांग्रेस और सूरतगढ़ से कांग्रेस विधायक डूंगरराम गेदर की है। गेदर के मैनेजमेंट की परीक्षा भी इस बात से आज होने वाली है कि वह पार्टी के पार्षदों को कितना एकजुट रख पाते हैं। क्यूंकि सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रस्ताव का विरोध करने से वे शहर के प्रति अपने दायित्व से बच नहीं सकते। उन्हें अपनी ढुलमुल नेता की छवि को बचाने के लिए अंग्रेजी कहावत ‘नो स्टोन अनटर्न्ड’ जैसे प्रयास करने होंगे। अगर वह इस प्रस्ताव को गिराने में सफल रहते हैं तो वह पहली अग्नि परीक्षा में सफल माने जायेंगे। वरना उनकी छवि में डेंट लगने की शुरुआत भी आज होगी।

                  कुल मिलाकर इस प्रस्ताव का शहर की जनता तो विरोध कर चुकी है। अब सबकी नजर शहर के राजनेताओं और पार्षदों पर है। इस प्रस्ताव से दूरी बनाकर कोई अगर यह सोच रहा है कि वह अपने आप को पाक साफ साबित कर सकता है तो यह उनका भरम है। क्योंकि यह पब्लिक है सब जानती है। ऐसे लोगों के लिए ही महाकवि ‘रामधारी सिंह दिनकर‘ नें कहा है कि……

 समर शेष है पाप का भागी नहीं केवल ब्याध।

 जो तठस्थ है समय लिखेगा उनका भी अपराध।। 

– राजेंद्र कुमार पटावरी,अध्यक्ष,प्रेस क्लब, सूरतगढ़। 

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सूरतगढ़। जब कोई व्यक्ति बेईमानी के इरादे से आपकी अनुमति के बिना आपकी संपत्ति ले जाता है तो इसे चोरी कहते हैं। शहर में पिछले दो दशकों में हुई सरकारी जमीनों की बंदरबाँट चोरी की इसी परिभाषा की श्रेणी में आती है। भूमाफियों, राजनीतिज्ञों और अधिकारीयों नें गठजोड़ कर आपकी मर्जी के बिना ही कब शहर की हजारों बीघा भूमि निगल ली,पता ही नहीं चला।

लेकिन अब शहर में सत्ता का निजाम बदल चुका है और सरकार भी राष्ट्रवादियों की है। ऐसे में अब भूमि चोरों के जमाने लद चुके हैं। शहर में इन चोरों का स्थान डकैतों ने ले लिया है। जो ताकत के बल पर लूट करते है। चोर जहां पर छुप कर आपका धन अपनी अंटी में डाल रहें थे, वहीं अब ये डकैत सरेआम धड़ल्ले से सरकारी संपत्ति को लूट रहें है। 

               शहर की राजनीति में भूचाल लाने वाला 50 करोड़ की बेशकीमती जमीन आवंटन का प्रस्ताव ऐसी ही डकैती का उदाहरण है। पूर्व विधायक रामप्रताप, उनके पुत्र संदीप कासनिया, चेयरमैन ओम कालवा व ईओ पूजा शर्मा भी बेशकीमती भूमि को हड़पने का षड्यंत्र कर रहे सशस्त्र गिरोह में शामिल है। नैतिक पतन का शिकार हुए ये गिरोह अपना जमीर पैसों के लालच में बेच चुका हैं। लेकिन वे भूल रहें है शहर की जनता इस तमाशे को बड़े गौर से देख रही है। इस डकैती में शामिल लोगों के चेहरे पर बेनकाब हो चुके हैं इसलिये अब ये लोग चाटुकार समर्थकों के जरिये इस डकैती को जस्टिफाई करने में जुटे हैं। 

नादान समर्थकों की दलीलों का पोस्टमार्टम : 2 लाख जमा किये, इसलिये मिले जमीन !

कासनिया समर्थकों की दलील है कि 1997 में ही स्कूल की भूमि के बदले करीब 2 लाख रूपये कासनिया नें जमा करवा दिए थे, इसलिये इस जमीन पर कासनिया का राइट है। लेकिन ये लोग भूल जाते हैं कि यह पैसा धानमंडी और आवासन मंडल के बीच की बेशकीमती भूमि के आवंटन के बदले नहीं जमा किया था, जिससे की ये जमीन कासनिया को दे दी जाये। बल्कि ये राशि सेक्टर -11A की जमीन के बदले भरवाई गई थी। मंडी समिति जमीन कासनिया को देने को तैयार भी थी, लेकिन कासनिया नें खुद अतिक्रमण का बहाना कह जमीन नहीं ली। यहां यह बात भी है कि ज़ब समिति नें यह जमीन कासनिया को आवंटित की तो क्या उन्हें मोतियाबिंब हो गया है जो उन्हें अतिक्रमण नहीं दिखाई दिए और उन्होंने बिना सोचे समझे पैसे भी भरवा दिए।  

             सच ये है कि शुरू से ही कासनिया की नजर धानमंडी व आवासान मंडल के बीच की  बेशकीमती भूमि पर थी। इसलिये उन्होंने अतिक्रमणो का बहाना कर सेक्टर -11A में आवंटित भूमि नहीं ली। वरना वे चाहते तो अपने रसूख से प्रशासन पर दबाव बनाकर या फिर न्यायालय की मदद से भी अतिक्रमण हटवा सकते थे। लेकिन उन्होंने एक बार भी ऐसा करने की कोशिश नहीं की।

मंडी समिति के विवादित जमीन आवंटन का दावा भी झूठा

कासनिया समर्थक यह भी दावा हैं कि मंडी समिति ने वर्तमान विवादित जमीन का कासनिया को आवंटन कर दिया था। लेकिन समिति के नगरपालिका में मर्ज होने और राजनीति के चलते मामला अटक गया। हालांकि ऐसा कोई दस्तावेज अभी पब्लिक डोमेन में नहीं है।

फिर भी मासूम समर्थकों कि यह बात मान ले तो भी सामान्य बुद्धि का कोई भी व्यक्ति यह अंदाजा लगा सकता कि उस समय अवश्य ही कासनिया के आवेदन पर मंडी समिति ने या तो कोई निर्णय नहीं लिया था या फिर आवंटन की प्रक्रिया प्रक्रिया अधूरी रही थी। जिसके कारण जमीन में कासनिया के कोई अधिकार क्रिएट नहीं हुए। क्यूंकि अगर समिति के निर्णय से किसी भी तरह के अधिकार कासनिया के पास होते तो वे उसे सक्षम न्यायालय में जरूर चुनौती देते। लेकिन वे कोर्ट में नहीं गए। मतलब साफ है कि सुपारी समर्थक बकलोली कर मुद्दे से ध्यान हटाना चाह रहें है।  

जमीन अभी खाली तो कासनिया को आवंटन का बचकाना तर्क

प्रस्ताव को जस्टिफाई करने के लिए एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि यह जमीन अभी भी खाली पड़ी है। कासनिया के समर्थकों से में यह पूछना चाहता हूं कि जमीन तो उस समय भी खाली थी जब 2005 में बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाया गया। लेकिन उस समय के जनप्रतिनिधियों ने जिनमें भाजपा के रीड की हड्डी में दम रखने वाले कुछ पार्षद भी शामिल थे, नें शहर के भविष्य को देखते हुए तमाम दबाबों को दरकिनार कर स्कूल के नाम पर इस बेशकीमती जमीन के आवंटन के प्रस्ताव को दों तिहाई से ज्यादा बहुमत से गिरा दिया।

वर्तमान बोर्ड में भाजपा में ऐसे रीढ़ रखने वाले पार्षद कितने है यह 28 अगस्त को बोर्ड मीटिंग में साफ हो जाएगा। बहरहाल मुद्दा उस समय भी नगरपालिका और शहर के हित का था और आज भी बात शहर के हित की ही है। 

          और वैसे भी कोई बेशकीमती जमीन अगर खाली पड़ी है तो इसका मतलब नहीं है कि वह संदीप कासनिया सहित किसी भी राजनीतिज्ञ को स्कूल के नाम पर सौंप दी जाए। यह भी जैरे गौर है कि कासनिया के समर्थक ज्यादातर कम पढ़े-लिखे नजर आते हैं जो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को भी ठेंगे पर रखना चाहते हैं। कोर्ट नें रिट दायर करने वालों की इस दलील कि ‘यह जमीन शहर के विकास के लिए आवश्यक है, धानमंडी के संभावित विस्तार के लिए जरूरी है और यह जमीन सामुदायिक सुविधाओं के लिए आरक्षित है’ को स्वीकार करते हुए ही आवंटन को निरस्त किया था।

जमीन में गर्दन दबाये इन शुतुरमुर्गों को बताये कि अगर जमीन ऑक्शन से अगर पालिका करोड़ों की आय करती है तो क्या शहर का विकास नहीं होगा? रही बात लेंड यूज चेंज होने या नहीं होने की ये पालिका और सरकार का काम है। वे क्यों भूल जाते है कि ज़ब मास्टर प्लान में बदलाव संभव है तो क्या जमीन का लेंड यूज नहीं बदल सकता ?

मंडी का और विस्तार नहीं होने का कुतर्क

एक और बात नेताजी को जमीन आवंटन के पुरजोर समर्थन में चलाई जा रही है कि धानमंडी को अब विस्तार की जरूरत नहीं है। यह बात कुछ हद तक सही है लेकिन ये दलील तो 2005 में दी गई थी और उस समय ये दलील पूरी तरह से प्रासंगिक भी थी। उस समय तो इस जमीन के कीमती और उपयोगी होने केवल अंदेशा ही था मगर अब तो यह यूनिवर्सल ट्रुथ बन चुका है कि यह जमीन नगरपालिका और शहर के विकास के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। 

भाजपा नेता की सफाई में भी लोचा

 

सोशल मीडिया पर भाजपा नेता संदीप कासनिया का पक्ष भी वायरल हो रहा है। जिसमे उन्होंने हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देकर कहा है कि ‘हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट नें विवेकानन्द पब्लिक सेकंडरी स्कूल, जाखड़ांवाली को आवंटित भूमि के अधिकार सुरक्षित रखे है और पालिका को पुरानी आवंटित भूमि से कब्जे हटाने या पालिका क्षेत्र में आवंटित भूमि के समतुल्य व सममूल्य भूमि देने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि संस्था ने इन्ही आदेशों के तहत भूमि आवंटन संबंधी उक्त प्रकरण को बोर्ड की आगामी बैठक में शामिल कर संस्था हित में निस्तारण करने का आवेदन किया है।’

इस संबंध में यह तो निर्विवाद है कि कोर्ट नें पूर्व में आवंटित भूमि के संबंध में स्कूल के अधिकार सुरक्षित किए हैं। लेकिन पुरानी आवंटित भूमि के समतुल्य और सबमूल्य भूमि देने का हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कोई जिक्र नहीं है और आवासन मंडल और धानमंडी बीच स्थित जमीन का आवंटन तो कोर्ट नें खारिज ही कर दिया है।

              मामले का एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेश पर 29 अक्टूबर 2012 को हुई बोर्ड बैठक में खसरा संख्या 444 /04 और खसरा संख्या 463/2 में जमीन देने का प्रस्ताव भी नगरपालिका द्वारा संदीप कासनिया को दिया जा चुका है। अब सवाल यह पैदा होता है कि ज़ब कोर्ट फैसले के मुताबिक पुराने आवंटन सहित दो अन्य खसरों में जमीन के चयन का अवसर कासनिया के पास है, तो फिर वे क्यों इसी भूमि को लेने पर अड़े हुए हैं। साफ है कि यह भूमि बेशकीमती है।

सवाल जो पिछले 25 सालों से मांग रहे जवाब !

भाजपा नेता को जमीन आवंटन के विवादित प्रस्ताव के मामले में कुछ सवाल है जिनका जवाब आज तलक नहीं मिला है। प्रस्ताव पर अपना जमीर बेचने वाले जनप्रतिनिधियों और चाटुकार समर्थकों को इन सवालों के जबाब जरूर ढूंढने चाहिए। क्योंकि शहर की आम जनता भी इनका जवाब चाहती है।

1. एक सामान्य चर्चा है कि संदीप कासनिया नें जाखड़ावाली के स्कूल के सैम में आने का हवाला देकर भूमि आवंटन का आवेदन किया था। तो सवाल यह है कि जाखड़ावाली जो कि पीलीबंगा तहसील और हनुमानगढ़ जिले में है तो उसे सूरतगढ़ में ही भूमि का आवंटन क्यों किया जाये ? कासनिया नें पीलीबंगा या हनुमानगढ़ जिले में भूमि आवंटन की मांग क्यों नहीं की ?

2. दूसरा सवाल ये है कि जब आज तलक जाखड़ावाली में स्कूल संचालित हो रहा है तो फिर स्कूल के बदले नई जगह के आवंटन का सवाल ही कैसे पैदा हो सकता है ?

3.तीसरा महत्वपूर्ण सवाल है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कासनिया के पिछले आवंटन में अधिकार तो सुरक्षित किए थे। पालिका को उन्होंने रिज़नेबल टाइम में पालिका को रिप्रेजेंटेशन देने का आदेश जारी किये थे। क्योंकि कोर्ट का ऑर्डर आए हुए 9 साल की चुके हैं तो आखिर अब कासनिया को आवंटन की याद कैसे आई ?

4. मामले में 28 अगस्त 24 को आनन फानन में बुलाई की गई बैठक पर भी कई सवाल खड़े होते हैं। आमतौर पर बोर्ड बैठक ईओ द्वारा बुलाई जाती है और एजेंडा पर ईओ के ही सिग्नेचर होते है। लेकिन यह पहली बार है जब बैठक के एजेंडा पर चेयरमैन के सिग्नेचर है और ईओ नें दूसरी साइड में सिग्नेचर किये है। साथ ही प्रस्तावों की डिटेल जानकारी पार्षदों को नहीं दिया जाना भी संदेश पैदा कर करता।

कहीं न कहीं पालिका इस भूमि आवंटन की जानकारी बैठक से पहले सार्वजनिक नहीं करना चाहती थी। ताकि गुपचुप तरीके से प्रस्ताव पारित किया जा सके।

ईओ पूजा और चेयरमैन कालवा पर हो सकता है मुक़दमा ?

इस मामले में पालिका ईओ पूजा शर्मा और अध्यक्ष ओम कालवा पर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी चल रही है।  दोनों नें हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट द्वारा विवादित आवंटन आदेश खारिज करने के बावजूद विवादित भूमि के आवंटन का प्रस्ताव बोर्ड मीटिंग के एजेंडे में शामिल कर लिया है। साफ है कि ईओ नें तथ्यों को छुपाकर प्रस्ताव तैयार किया है। ऐसे में इस प्रस्ताव पर अगर बोर्ड बैठक में किसी भी प्रकार की चर्चा या फिर आवंटन का निर्णय होता है तो ईओ पूजा व चेयरमैन कालवा को मुक़दमा झेलना और जेल जाना पड़ सकता है।

वैसे सूरतगढ़ नगरपालिका में अनीति चकने वालों का जीवन मुक़दमे बाज़ी और जेल जानें का इतिहास रहा है। तभी तो शायद किसी कवि नें लिखा है 

इस जहाँ से कब कोई बच कर गया। 

जो भी आया खा के एक पत्थर गया।।

– राजेंद्र कुमार पटावरी,अध्यक्ष, प्रेस क्लब सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। कहते हैं कि राजनीति में ना तो कोई स्थाई दुश्मन होता है ना दोस्त। सूरतगढ़ की राजनीति में इन दिनों कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। शहर के नेता चाहे वे देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के हो या फिर राजनीति में सुचिता की बात करने वाली भाजपा के, हालात ये है कि ये नेता स्वार्थ पूर्ति के लिए कभी भी पाला बदलने को तैयार बैठे है। शहर में कम्युनिज्म के झंडा बरदारों और मोर्चो के जरिये भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने का पाखंड करने वालों के हालात और भी बुरे है। इन दिनों इन पार्टियों के छोटे-मोटे कार्यकर्ता, पार्षद और बड़े नेता ही नहीं, स्वंयभू मुखिया भी जरा से फायदे के लिए पूरी बेशर्मी से राजनीतिक प्रतिद्वंदियों का चरण चुंबन करते नज़र आ रहें है। 

                      ऐसा ही एक मामला इन दिनों चर्चा में है जिसने ईमानदार नेताओं के चेहरों को बेनकाब करके रख दिया है। मामला भाजपा नेता संदीप कासनिया को स्कूल के नाम पर भूमि के आवंटन प्रस्ताव से जुड़ा है। बीएसएनएल टावर के पीछे 100 फुट रोड़ और धानमंडी विश्राम गृह के बीच स्थित इस जमीन की कीमत 50 करोड़ से भी ज्यादा है। इस जमीन को भाजपा नेता को सौंपने के लिए चेयरमैन ओम कालवा नें 28 अगस्त को बोर्ड की बैठक बुलाई है। हालांकि इस जमीन के आवंटन का प्रयास पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया पिछले 2 दशक कर रहे थे। लेकिन नगरपालिका बोर्ड से लेकर सुप्रीम कोर्ट नें आवंटन प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया है। 

                यही नहीं खुद वर्तमान चेयरमैन कालवा एम्पावर्ड कमेटी की बैठक कर इस जमीन को कोचिंग व अन्य शेक्षणिक संस्थानो के लिए ऑक्शन के जरिए आवंटन का प्रस्ताव सरकार को भेज चुके है। लेकिन कासनिया का मोह इस जमीन से नहीं छूट रहा है इसलिए कालवा को भाजपा में शामिल कर एक बार फिर इस जमीन को हड़पने के प्रयास किया जा रहे हैं। इसके लिए कालवा द्वारा 28 अगस्त को आनंद फानन में बोर्ड की बैठक बुलाकर आवंटन प्रस्ताव को पास करने तैयारी की जा रही है।

प्रस्ताव पास करवाने के लिए सौदेबाज़ी, नेताओं और पार्षदों नें बेचा ईमान

आगामी 28 अगस्त को होने वाली बोर्ड बैठक कासनिया के लिए इस जमीन को पाने का आखिरी मौका है। यही वजह है भाजपा नेता संदीप कासनिया नें प्रस्ताव को पास करवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। इसके लिए साम, दाम,दंड, अर्थ और भेद की नीति पर चलते हुए पार्षदों से हर तरह की सौदेबाजी की जा रही है। बताया जा रहा है कि कासनिया प्रस्ताव को पास करवाने के लिए 31 पार्षदों का समर्थन जुटा चुके हैं। साफ है इस सौदेबाजी में भाजपा ही नहीं व कांग्रेस के पार्षदों ने भी अपना ईमान गिरवी रख दिया है। बताया जा रहा कि कुछ निर्दलीयों, कम्युनिज्म के प्रहरी और मोर्चो के अगवा पार्षदों ने भी इस मामले में जर फेंक दी है। 

                      कहा जा रहा है कासनिया नें कांग्रेस के एक बड़बोले पार्षद को ठेकेदारी के बकाया बिल पास करने और वार्ड में तैयारी कर रहे एक युवा नेता की जगह भाजपा का टिकट देने का सौदा किया है। वहीं कांग्रेस के एक चर्चित अल्पसंख्यक पार्षद को भी टिकट का झुनझुना दिया गया है। इस मामले में कांग्रेस में मौका परस्त और किंग मेकर कहे जाने वाले पार्षदों के एक गुट की भी प्रस्ताव के समर्थन में बेटिंग की चर्चा है। हालांकि यह समर्थन अवैध कॉलोनीयों को बचाने सहित किन शर्तों पर हुआ है यह अभी सामने नहीं आया है। लेकिन यह बात सब जानते है भैडों को हाँकने में इस गुट को लम्बा तजुर्बा है।

कालवा के भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार ताल ठोकने वाले कांग्रेस के एक पूर्व चेयरमैन भी इस भयंकर भ्रष्टाचार के समर्थक बताए जा रहे हैं। पूर्व चेयरमैन के अलावा कांग्रेस के एक दो अन्य पार्षद कम बड़े नेताओं को भी मुकदमे वापस लेने के आश्वासन की बात सामने आ रही है। ज़ब बोर्ड में बहुमत वाली राष्ट्रीय पार्टी के पार्षदों का यह हाल है तो ऐसे में कम्युनिज्म व मोर्चो की राजनीति के नाम पर भ्रष्टाचार का नंगा नाच व शहर का बड़ा गर्क होते देखने वाले पार्षदों के समर्थन की शर्तो पर तो बात करना ही बेमानी होगा। शहर की जनता की उम्मीदों का मजाक बनाते इन जनप्रतिनिधियों के लिए ही शायद किसी कवि नें यह पंक्तियां लिखी है

कोहनी पर टिके हुए लोग,टुकड़ों पर बिके हुए लोग।

करते हैं बरगद की बातें, ये गमलों में उगे हुए लोग।।

सुचिता की राजनीति के ध्वज वाहकों को मारा लकवा !

यहां पर सवाल केवल कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों से ही नहीं है। सवाल सुचिता की राजनीति बात करने वाले भाजपा के पार्षदों पर भी है। आपके द्वारा चुने गए कथित राष्ट्रीय पार्टी के ध्वजवाहकों और सोशल मीडिया पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध के लंबी लंबी हांकने वाले वीरों को शहर की शहर की इस बेकीमती भूमि की लूट पर लकवा मार गया है। और तो और कांग्रेस राज में कालवा के भ्रष्टाचार पर बात-बात में कथक करने वाले सूरमा भी सत्ता के आगे लमलेट हो चुके हैं।

क्या है पूरा मामला ?

भाजपा के दिग्गज नेता रामप्रताप कासनिया के पुत्र और पीलीबंगा के जाखड़ावाली स्थित विवेकानंद पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष संदीप कासनिया ने सैम में स्कूल के डूब जाने का हवाला देते हुए 1997 में हनुमानगढ़ मंडी समिति से सूरतगढ़ में भूमि आवंटन की मांग की थी। इस पर हनुमानगढ़ मंडी समिति ने सूरतगढ़ के सेक्टर-3 में स्कूल को भूमि आवंटन कर दी। लेकिन कासनिया के इस भूमि को अनुपयुक्त माननें पर समिति नें फिर से सेक्टर -11A में 88450 स्क्वायर फीट भूमि आवंटन की। लेकिन भूमि पर कब्जा होना बताते हुए कासनिया ने यह भूमि भी नहीं ली।

इसके बाद रामप्रताप कासनिया द्वारा विधायक बनने के बाद 7 जनवरी 2005 को नगरपालिका से नई धान मंडी और हाउसिंग बोर्ड के बीच स्थित बेशकीमती व्यावसायिक भूमि स्कूल के लिए आवंटन की मांग की गई। लेकिन 19 जून 2005 को हुई नगरपालिका की बैठक में बोर्ड के सदस्यों ने इस भूमि को धान मंडी के विस्तार व सामुदायिक सुविधाओं के लिए आरक्षित होने का हवाला देकर बहुमत से प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

बताया जाता है कि इसके बाद कासनिया ने तत्कालीक भाजपा सरकार में अपने रसूख का फायदा उठाकर बोर्ड के निर्णय के विरुद्ध तात्कालिक मंत्री प्रताप सिंह सिंघवी के समक्ष निगरानी याचिका लगाकर भूमि आवंटन का आदेश करवा लिया। इस आवंटन के खिलाफ किशन लाल व अन्य द्वारा याचिका लगाने पर पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 27 मार्च 2015 को निगरानी याचिका पर मंत्री के भूमि आवंटन के निर्णय को अंतिम रूप से निरस्त कर दिया। जिसके साथ ही कासनिया को इस भूमि के आवंटन का प्रकरण ही समाप्त हो गया।

मजे की बात यह है कि इसके बाद खुद कांग्रेस चेयरमैन रहते हुए मास्टर ओमप्रकाश कालवा की अध्यक्षता वाली एंपावर्ड कमेटी उक्त भूमि को लाइब्रेरी व कोचिंग संस्थानों के लिए ऑक्शन के जरिये आवंटन का निर्णय कर चुकी है । यही नहीं इसके बाद तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा इस भूमि का प्लान काटकर प्रस्ताव नगर नियोजन विभाग को भेजा जा चुका है। जिस पर अनुमोदन की कार्रवाई चल रही है।

इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण बात यह भी है कि जिस स्कूल की भूमि के सैम में डूबने की बात कहकर आवंटन की मांग अब तक की जा रही है उसी जगह पर आज भी स्कूल का संचालन हो रहा है।

पूर्व विधायक गंगाजल मील के आरोप हो रहे सच !

पूर्व विधायक गंगाजल मील और हनुमान मील नें एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि स्कूल की जमीन लेने के लिए ही भाजपा नेता रामप्रताप कासनिया ने भ्रष्टाचार के आरोपी ओम कालवा को भाजपा में शामिल किया है। पूर्व विधायक मील का यह आरोप अब साबित होता दिख रहा है। क्योंकि चेयरमैन बनते ही ओम कालवा नें तमाम नियमों और नैतिकताओं को धता बताकर जमीन आवंटन के लिए आनन फ़ानन में बोर्ड की बैठक बुलाई हैं।

साफ है भाजपा नेता और कालवा के बीच जो डील हुई थी, चेयरमैन ओम कालवा नें उस डील के पहलें पार्ट के एक्जीक्यूशन में जुटे हुए है।

अब विधायक डूंगरराम गेदर पर टिकी नजरें 

इस पूरे मामले में अब नजर विधायक डूंगरराम गेदर के स्टेण्ड पर है।  विधायक गेदर के पिछले आठ माह के कार्यकाल में अब तक भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे हैं। लेकिन नगरपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर उनकी चुप्पी सवालों के घेरे में है। विधानसभा में उन्होंने चेयरमैन कालवा की बहाली के खिलाफ आवाज तो उठाई लेकिन ये कौन नहीं जानता कि वो आवाज बुलंद आवाज नहीं थी। नगरपालिका में भ्रष्टाचार के मामलों पर गेदर लगातार खामोश रहे है।

विधायक गेदर की ये चुप्पी कहीं ना कहीं चेयरमैन कालवा के साथ उनके गठबंधन की चर्चाओं को बल दे रही है। अब कालवा की अगुवाई में शहर की 50 करोड रुपए की भूमि की बंदरबांट की कोशिशें को ही ले। मामला चर्चा में आने के बावजूद गेदर मूकदर्शक बने हुए हैं। उनकी पार्टी के पार्षद और जनप्रतिनिधि राजनीति की मंडी में बिकने को तैयार हैं। लेकिन विधायक गेदर की तरफ से अब तक कोई ऐसा इशारा नहीं मिल रहा है कि वे और उनकी पार्टी इस भ्रष्टाचार के खिलाफ है।

      50000 से अधिक वोटो से जीताकर गेदर को क्षेत्र की जनता ने इसलिए नहीं भेजा था कि वे गजनीयों को इस शहर को लूटने की खुली छूट दे दे। गेदर के लिए यह आखरी मौका है कि वे शहर की 50 करोड़ से अधिक की संपत्ति की लूट के प्रयास को विफल करें। वैसे ये गेदर के मैनेजमेंट की परीक्षा भी है कि वे किस तरह से पार्टी को एकजुट कर अपना रणनीतिक कौशल साबित करते हैं।

बहरहाल देखना यह भी है कि इस मामले में आपके द्वारा नगरपालिका बोर्ड भेजें गए चौकीदार शहर की सम्पति की लूट को रोकते है या फिर चोरों से मिलकर 50 करोड़ की इस लूट को अंजाम देते है। इन परिस्थितियों में प्रसिद्ध कवि दुष्यंत की ये प्रसिद्ध पंक्तियां याद आ रही है।

लोग हाथों में लिए बैठे हैं अपने पिंजरे।

आज सैयाद को महफिल में बुला लो यारों।।

रहनुमाओं की अदा पर फिदा है ये दुनिया।

इस बहकती हुई दुनिया को संभालो यारो।।

– राजेंद्र कुमार पटावरी, अध्यक्ष- प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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सुरतगढ़। राजस्थान वाल्मीकि महासभा, धाणका समाज व मजदूर यूनियन,अखिल भारतीय सफाई कर्मचारी संघर्ष समिति ने संयुक्त रूप से आरक्षण उपवर्गीकरण को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए बुधवार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा। 

       इससे पूर्व सुबह 10 बजे नई धानमंडी के मजदूर विश्राम स्थल पर वंचित समाज के नागरिक इकट्ठा हुए और सभा का आयोजन किया। सभा को संबोधित करते हुए राजस्थान वाल्मीकि महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अमित कल्याणा ने कहा कि आरक्षण में उपवर्गीकरण का सुप्रीम कोर्ट का फैसले का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि वे ‘भारत बंद’ का बहिष्कार करते हैं क्योंकि अनुसूचित जाति में ऐसी कई जातियां हैं जिन्हें आज भी आरक्षण का फायदा नहीं मिला है। ये लोग आज भी अंतिम पायदान पर बैठे हैं। 

       पार्षद रोहिताश होटल ने कहा कि वंचित समाज की इस समय बहुत ही दयनीय हालत है जो आरक्षण का फायदा उन लोगों को मिलना चाहिए था वह इन्हे नहीं मिला है। एक ही समाज आरक्षण का फायदा लेता रहा है। उन्होंने कहा कि वे  आरक्षण उपवर्गीकरण के फैसले के समर्थक है और यह कानून लागू होना चाहिए। 

  अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघर्ष समिति की अध्यक्ष रेखा घुसर ने कहा कि आरक्षण उपवर्गीकरण से आने वाले समय में हमारे परिवार के बच्चों का भविष्य अच्छा होगा।  अगर राजनीति में भी उप वर्गीकरण हुआ तो उसमें भी विधायक और लोकसभा में चुन कर हमारे समाज की किस्मत लिखने का काम करेंगे। 

              इस अवसर पर रामप्रवेश डाबला ने कहा कि में  आरक्षण वर्गीकरण की लड़ाई करीब 20 वर्षों से लड़ रहा हूं जिसका परिणाम अब आया है। उन्होंने कहा कि हमें आशा और विश्वास हैं कि राजस्थान के मुखिया भजनलाल शर्मा तुरंत प्रभाव से इस कानुन को लागू करेंगे जिससे वंचित समाज को फायदा मिले।

       धाणका मजदूर अध्यक्ष गोपी राम दंगल ने कहा संपूर्ण वंचित समाज की ओर से हम भारत बंद का बहिष्कार कर आरक्षण उपवर्गीकरण का समर्थन करते हैं। 

            इस मौके पर पार्षद विक्रम बाल्मीकि, अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघर्ष समिति की उपाध्यक्ष सुनीता वाल्मीकि, उपाध्यक्ष माया देवी वाल्मीकि, उपाध्यक्ष सोनू वाल्मीकि, विजय कुमार डाबला, विजय सिंलण, सुरेंद्र खुड़िया, सतपाल पंजाबी, राजू पंजाबी, रेलवे रिटायर्ड अधिकारी हरबंस खन्ना, सीताराम नागर, संजय मौर्य, विजय सोलंकी, सुरेंद्र सोलंकी, कुलदीप नागर, कुलदीप होटला, कोकी नागर, सिकंदर खटीक, विनोद खटीक, राजेश धाणका,जोनी नागर, अंग्रेज खन्ना, विनोद धाणका, सोनू खन्ना, विनोद खरोड,  रंणजीत खटीक, आसाराम डाबला,विक्की सीलण,महेश, टीकम होटला, पिंटू होटला,राजाराम,अजय,विशाल, युवराज कल्याणा, वीरेंद्र कांडा, आदित्य खोरवाल, निखिल सोनी, प्रेम कांडा,अंश घुसर,अरमान अली, विक्रम राजपूत,आकाश सेन, अंश वाल्मीकि आदि बड़ी संख्या में महिलाएं पुरुष और युवा मौजूद थे।

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सूरतगढ़। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की सूरतगढ़ शाखा ने कोलकाता में महिला चिकित्सक की बर्बर हत्या के विरोध में 17 अगस्त को चिकित्सा सेवाओं के बहिष्कार का निर्णय लिया है। शुक्रवार को संगठन से जुड़े चिकित्सकों ने घटना के दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा ।

            आइएमए अध्यक्ष डा. संजय बजाज ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मेडिकल कॉलेज में महिला छात्रा से बलात्कार एवं बर्बर हत्या से देश के चिकित्सक अक्रोशित एवं स्तब्ध है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद 14 अगस्त की रात्रि को उसी मेडिकल कॉलेज में स्थानीय भीड़ ने हमला कर हॉस्पिटल में तोड़फोड़ कर चिकित्सको से मारपीट की। डॉक्टर बजाज ने बताया कि इन घटनाओं के विरोध में जिसके विरोध में आईएमए राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने 17 अगस्त को सभी प्राइवेट हॉस्पिटल एवं सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं बंद का आह्वाहन किया है । महिला चिकित्सक के परिवार को न्याय दिलाने एवं सरकारों को ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने हेतु  शहर में सभी प्राइवेट हॉस्पिटल एवं नर्सिंग होम में मेडिकल सुविधाएं 24 घंटे के लिए बंद रहेंगे।

            अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के जिला सचिव एवं आइएमए सचिव डा. भारत भूषण जांगिड़ ने बताया कि इस घटना के विरोध में जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में आज एक घंटे का ओपीडी कार्य बहिष्कार किया गया साथ ही चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया।

                उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार से मांग की कि वे हॉस्पिटल में कार्य करने समस्त स्टाफ एवं चिकित्सको की सुरक्षा के लिए कठोर कानून बनाकर प्रभावी तरीके से लागू करे ताकि महिलाओं की कार्यस्थल पर सुरक्षा हो सके एवं भीड़ तंत्र की ऐसी घटनाओं की भविष्य में पुनरावृति न हो।

                  इस मोके पर आईएमए के पूर्व अध्यक्ष  डा. एस के सिहाग, खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. मनोज अग्रवाल, डा.जयंत व्यास, डॉ,अक्षय भंसाली, डा. उग्रसेन सारस्वत, डा. प्रमेंद्र स्वामी, डा. लोकेश अनुपानी, डा. सुरेश परिहार, डा. दीपक वर्मा, डा. रोहिणी इत्यादि साथ थे।

कोलकाता की घटना के विरोध में आईएमए द्वारा सोपा गया ज्ञापन

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इंदिरा सर्कल के पास बीकानेर रोड पर बरसात के बाद के हालात

सूरतगढ़। शहर में बुधवार को  मात्र आधा घंटे हुई बरसात के तीसरे दिन भी शहर के हालात बद से बदतर बने हुए हैं। सबसे बुरे हालात शहर की सबसे प्रमुख बीकानेर रोड पर है जहाँ इंदिरा सर्किल पर स्थित पार्क से लेकर नई सब्ज़ी मंडी तक की सड़क पर अभी भी पानी भरा हुआ है। क्यूंकि यह सड़क पहले ही खड्डों में तब्दील हो चुकी है ऐसे में पानी भरे होने के चलते दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। पानी और कीचड़ से लबालब सड़क से गुजरते वाहन चालक हर समय हादसों की आशंकाओं से घिरे रहते हैं। इस जगह के हालात इतने खराब है कि वाहन तो क्या पैदल चल रहा व्यक्ति भी आसानी से गुजर नहीं सकता। क्यूंकि सड़क पानी भरा रहने से कीचड़ के तालाब में तब्दील हो चुकी है।यही वजह है कि इस रोड से गुजरने वाला हर एक व्यक्ति प्रशासन और शहर के नुमाइंदो को कोसते हुए ही  निकलता है।

अगर नगरपालिका सड़क से पानी निकालने की व्यवस्था कर दे तो गंदगी कम होने से कम से कम सड़क पर पैदल चलने वालों को राहत मिल सकती है। लेकिन नगरपालिका नाम की संस्था पता नहीं क्या हो गया है कि ईओ सहित जिम्मेदार लोगों की आंख नहीं खुल रही हैं। ऐसा नहीं है कि सोशल मीडिया और दूसरे माध्यम से शहर की इस व्यस्ततम सड़क के हालात की तस्वीरे नगरपालिका प्रशासन तक नहीं पहुंच रही है। परन्तु शहर का दुर्भाग्य है कि ईओ पूजा शर्मा एसी कार्यालय में बैठकर नीरो की तरह चैन की बांसुरी बजा रही है। वहीं आपके द्वारा चुने हुए 45 जनप्रतिनिधियों में से ज्यादातर ईओ के हाज़रिये बने हुए हैं। ये लोग शहर के हालातो की चिंता छोड़कर अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं। ऐसे हालातो को देखकर यही कहा जा सकता है कि शहर की सत्ता भले ही बदल जाए शहर के सड़कों के हालात में बदलते नजर नहीं आ रहे हैं। 

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सूरतगढ़। बॉलीवुड की एक मेगा हिट फिल्म का एक बेहद प्रसिद्ध डायलॉग है ‘हारकर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं’। सूरतगढ़ नगरपालिका के चेयरमैन ओम कालवा लगातार दूसरी बार बहाल होकर ऐसे ही बाजीगर बनाकर उभरें हैं। ऐसे समय में जब विपक्ष ही नहीं खुद उनकी ही पार्टी का एक बड़ा धड़ा उनकी बहाली के पक्ष में नहीं था तब शायद ही किसी को उम्मीद थी कि कालवा की वापसी होगी। लेकिन जैसा कि राजनीति के बारे में कहा जाता है कि वह संभावनाओं की कला है। कालवा ने अपनी वापसी करने की जीजिविषा को जिंदा रखा और एक बार फिर बहाल होकर अपने विरोधियों की नींद उड़ा दी है। ये और बात है कि कल तक उनकी वापसी नहीं होने को लेकर आश्वस्त लोग अब धनबल की ताकत को स्वीकार कर रहें हैं। ताश के तीन पत्ती गेम की तरह कालवा की लगातार ब्लाइंड से हताश हो चुके उनके विपक्षीयों के लिए अब आखिरी डबल चाल चलकर पत्ते देखने का एकमात्र विकल्प बचा है। क्यूंकि इस बार कालवा की अपने विरोधियों से पूरी सख्ती से निपटने की चर्चा राजनीतिक हलकों में गर्म है। ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है कि उनके विरोधी आखिरी दाव खेलने से गुरेज नहीं करेंगे। हालांकि स्वायत शासन विभाग के आदेशों के बाद विरोधियों को सुप्रीम कोर्ट में राहत मिलती है या नहीं यह भविष्य के गर्भ में छुपा है। लेकिन दुश्मन की ब्लाइंड पर सब कुछ दाव पर लगा चुकने के बाद बिना पत्ते देखे सरेंडर करेंगे इस बात की गुंजाइश कम है।

                            वैसे यहां पर यह बात भी गौरतलब है कि चेयरमैन कालवा ने वापसी भले ही कर ली हो लेकिन उनके राजनीतिक विरोधियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कालवा को पार्टी में शामिल करने में पार्टी के जिन लोगों ने प्रमुख भूमिका निभाई थी वे  भी अब विरोधी खेमें में खड़े हो चुके हैं। पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया को छोड़ दे तो भाजपा से जुड़े अधिकांश नेता कालवा के पक्ष में नहीं है।

कालवा की पिछली पौने 5 साल की कार्यशैली से शहर में उनकी छवि कुछ कुछ नेगेटिव बन चुकी है। ऐसे में स्वयं कालवा ही नहीं पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया पर भी कालवा के चुनाव के सही साबित करने की चुनौती है। क्यूंकि कालवा की बहाली के लिए उन्होंने न केवल एड़ी चोटी का जोर लगाया बल्कि पार्टी नेताओं का विरोध झेला है। 

            कुल मिलाकर आने वाले 3 महीना का वक्त कालवा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस कार्यकाल में आमजन कों पट्टों सहित तमाम राहत देकर कालवा पूर्व विधायक के चयन को सही साबित कर सकते है। वैसे भी चेयरमैन का पद रिक्त रहते हुए शहर का भट्टा पूरी तरह से बैठ चुका है। शहर में सफाई, सड़क और लाइट की हालत बेहद खराब हो चुकी हैं। अब यह कालवा पर है कि आने वाले वक्त में वे किस तरह से इन चुनौतियों से निपटते हैं। देखना होगा कि कालवा खुद को किस तरह के चेयरमैन के रूप में याद किया जाना पसंद करेंगे। 

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कॉलोनाइजर पर मुकदमें की तैयारी,स्वायत शासन मंत्री से मिलेंगे कॉलोनीवासी

सूरतगढ़। शहर में एक सफ़ेदपॉश कॉलोनाइजर पिछले कई सालों से लोगों को छलने का काम कर रहा है। जोहड़ पायतन क्षेत्र में सपनों का घर बेचकर लोगों की नींद उड़ाने वाले इस कॉलोनाइजर का एक और काला कारनामा सामने आया है। मामला शहर की सबसे पॉश कहीं जाने वाली बसंत विहार कॉलोनी के यूटिलिटी के नाम पर आरक्षित प्लॉट से जुड़ा है।

              बसंत विहार कॉलोनी के लोगों को प्लॉट पर भव्य मंदिर के निर्माण का सपना दिखाकर इस कॉलोनाइजर ने भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से कॉलोनी की यूटिलिटी को न केवल इनफॉरमल सेक्टर में बदल दिया बल्कि भूखंड को आगे सुखवंत चावला, संदीप डांग, रमनदीप चुघ और विपुल गुप्ता नामक व्यक्तियों को भी बेच दिया। मामला यहीं खत्म नहीं होता नगरपालिका नें इनफॉर्ममल सेक्टर की अनदेखी कर उक्त चारों व्यक्तियों के नाम एकल पट्टा भी जारी कर दिया है।

शहर में जमीनों और भूखंडों के भ्रष्टाचार के मामले नये नही है, लेकिन शहर के बीचो-बीच पॉश कॉलोनी में भ्रष्टाचार का यह सम्भवतः पहला मामला है। जिसमे समाज के काम आने वाले करोड़ों रुपए के इस भूखंड को शहर के सफेदपॉश माफिया दीमक की भांति चट कर गये हैं ? ज़ब हमने पालिका से मिले दस्तावेजों को खंगाला तो पूरा मामला ही भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा दिखाई दिया। इस पूरे मामले में ऐसे कई सवाल है। पेश है मामले में अनसुलझे सवालों का जबाब ढूंढती खबर पॉलिटिक्स की यह खास रिपोर्ट….

कॉलोनी का ब्लू प्रिंट नक्शा कह रहा भ्रष्टाचार की कहानी ?

बसंत विहार कॉलोनी का कांट छांट कर यूटिलिटी को इन्फॉर्मल सेक्टर दिखाता ब्लू प्रिंट

यूटिलिटी को इनफॉरमल सेक्टर में बदलने और उसके बैंचान का यह फर्जीवाड़ा दोनों कॉलोनीयों के ब्लूप्रिंट नक्शे से बड़ी आसानी से समझा जा सकता है। मामले में पालिका की दलील है कि 2005 में बसंत विहार और 2007 में उससे चिपती आनंद विहार कॉलोनी का ब्लूप्रिंट अप्रूव्ड किया गया था। लेकिन 2007 में तात्कालिक STP (सीनियर टाउन प्लानर) ने मालिकों की सहमति से दोनों कॉलोनीयों को क्लब कर बसंत विहार के यूटिलिटी भूखंड को इनफॉरमल सेक्टर में परिवर्तित कर दिया। पालिका अधिकारीयों के मुताबिक इसके बदले में आनंद विहार कॉलोनी में पार्क और फेसिलिटी के लिए आरक्षित किये भूखंड को एकल कर बड़ा यूटिलिटी एरिया बना दिया था। 

                 नगरपालिका अधिकारियों की इस थ्योरी पर विश्वास कर भी लिया जाये तो भी दोनों कॉलोनीयों के ब्लू प्रिंट नक्शे खुद ही इस भ्रष्टाचार की पोल खोल रहे हैं। बसंत विहार के ब्लूप्रिंट में साफ देखा जा सकता है कि नक्शे में दिखाए गए यूटिलिटी प्लॉट को सीधे पैन से काटकर उसके स्थान पर इनफॉरमल सेक्टर लिखा गया है ? इसके अलावा नक्शे के राइट साइड में विवरण में भी यूटिलिटी को काटकर इनफॉरमल सेक्टर लिख दिया गया है ?

      सबसे पहली बात हे कि सरकारी दस्तावेजों में सामान्यत इस तरह की कांट छांट नहीं की जाती है ? दूसरी बात है कि इस कांट छांट पर संबंधित अधिकारी (STP- सीनियर टाउन प्लानर ) के इनिशियल भी नहीं है? बिना एसटीपी के इनिशियल के कटिंग वाले ब्लू प्रिंट नक्शे की वैधता स्वत ही सवालों के घेरे में आ जाती है! ब्लूप्रिंट नक्शे की कटिंग पर STP के इनिशियल का नहीं होना भ्रष्ट अधिकारीयों के अपने ही स्तर पर नक्शे में कटिंग की और संकेत करता है। 

यूटिलिटी के इनफॉरमल सेक्टर में बदलाव से जुड़े दस्तावेज है गायब ?

बसंत विहार की यूटिलिटी को इनफॉरमल सेक्टर में बदलने में फ़र्ज़ीवाड़े की तस्दीक इस तथ्य से भी होती है कि नगरपालिका में यूटिलिटी को इनफॉरमल सेक्टर में बदलने की कार्रवाई के लिए नगरपालिका और STP के बीच किसी भी तरह के पत्र व्यवहार का कोई दस्तावेज फ़ाइल में उपलब्ध नहीं है ? सवाल उठता है  2005 में कॉलोनी का नक्शा अप्रूव्ड करने के बाद 2007 में सीनियर टाउन प्लानर को क्या सपना आया था जो उसने खुद ही ब्लूप्रिंट में दिखाए गए यूटिलिटी प्लॉट को इनफॉरमल सेक्टर में बदल दिया ?

बिना इनिशियल और रिवाइज्ड नक्शा नहीं जारी होने से उठ रहा सवाल ?

इस पूरे मामले में एक सवाल यह भी है कि ज़ब 2007 में आनंद विहार के ब्लू प्रिंट को अनुमोदन के समय बसंत विहार के नक्शे में यूटिलिटी को इनफॉरमल सेक्टर में बदला गया तो आखिर टाउन प्लानर ने वसंत विहार के नक्शे में बदलाव का रिवाइज नया नक्शा क्यों नहीं जारी किया ? क्यों ब्लूप्रिंट में सीधे पेन से कटिंग कर दी और इनिशियल तक नहीं किये ? क्या सीनियर टाउन प्लानर का दायित्व नहीं था कि पहले से बिक चुकी कॉलोनी का एक रिवाइस नक्शा जारी करते जिससे कि कॉलोनीवासियों को भी यूटिलिटी का वास्तविक स्टेटस पता रहता ?  

दोनों कॉलोनी के नक्शे में कटिंग में अलग अलग मापदंड ?

आनंद विहार कॉलोनी का कांट छांट वाला ब्लू प्रिंट नक्शा

बसंत विहार में जहां नक्शे में कटिंग कर यूटिलिटी को इनफॉरमल सेक्टर बनाना दर्शित किया गया है। वहीं आनंद विहार कॉलोनी के नक्शे में फेसिलिटी के भूखंड को कटिंग कर फैसिलिटी और पार्क में बांट दिया गया है। लेकिन यहां पर बाद में की गई कटिंग की जगह पर पहले से तय फैसिलिटी (100×176.5 मीटर) को सही माना है।

ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि जब कॉलोनी में फैसिलिटी का भूखंड पहले से ही इसी साइज का था तो बसंत विहार के यूटिलिटी भूखंड के बदले कौनसा फैसिलिटी का एरिया बढ़ाया गया ? दूसरे अगर मान ले की बसंत बिहार के यूटिलिटी भूखंड के बदले आनंद विहार में शुरू में ही फैसिलिटी का एरिया बढ़ा दिया गया है तो फिर सवाल यह आता है कि टाउन प्लानर के द्वारा निर्धारित आनंद विहार के फैसिलिटी भूखंड में कांट छांट क्यों और किसके द्वारा की गई है ?

इनफॉरमल सेक्टर में बननें थे कियोस्क और दुकाने ? आखिर कैसे जारी हो गया एकल पट्टा ?

राजस्थान सरकार की टाउनशिप पॉलिसी के अनुसार इनफॉरमल सेक्टर से जुड़े नियम

नगरपालिका ईओ पवन चौधरी पर खड़े हो रहे सवाल      

इस मामले में नगरपालिका प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े होते हैं। क्यूं कि कॉलोनाइजर नें इनफॉरमल सेक्टर को अगर बेच भी दिया तो भी नगरपालिका नें आखिर भूखंड का एकल पट्टा कैसे जारी कर दिया ?

बताया जा रहा है पूर्व ईओ  पवन चौधरी के कार्यकाल में यह पट्टा जारी हुआ था। आपको बता दें कि यह वही पवन चौधरी है जो खसरा नंबर 320 में काटी जा रही विवादित कॉलोनी को अनुमति देने सहित कई प्रकरणो में भ्रष्टाचार को लेकर चर्चा में रहे थे। क्योंकि बसंत विहार कॉलोनी में स्थित इस प्लॉट की कीमत भी करोड़ों में है। ऐसे में ईओ पवन चौधरी द्वारा इनफॉरमल सेक्टर का एकल पट्टा जारी करना बहुत बड़े भ्रष्टाचार का इशारा कर रहा है।  

मंदिर निर्माण के नाम पर वर्षों छलता रहा कॉलोनाइजर, अब कानूनी लड़ाई की तैयारी 

इस पूरे मामले की एक पहलु यह भी है कि सफेदपोश कॉलोनाइजर के बहकावे में यूटिलिटी के प्लॉट पर पिछले कई वर्षों से कॉलोनीवासियों मंदिर बनवाने सपना देखते रहे। कॉलोनाइजर के अंदरखाने यूटिलिटी को इनफॉरमल सेक्टर में बदलकर बेच देने के बावजूद बेखबर कॉलोनीवासियों मंदिर निर्माण की योजना बनाते रहे। पिछले रविवार को ज़ब कॉलोनाइजर को मंदिर निर्माण के लिए कॉलोनीवासियों की चंदा उगाही की मुहिम की भनक लगी तो उसने गिरगिट की तरह अपना असली रंग दिखा दिया और प्लॉट में दबंगों को बैठाकर रातों रात भूखंड पर निर्माण शुरू कर दिया। यह और बात है कि दबंगों के भय से ज़ब कॉलोनी के सैकड़ो पुरुषों को सांप सूंघ गया तब कॉलोनी की ही एक जागरूक महिला ने दबंगों से लोहा लेते हुए पुलिस की मदद से काम रुकवा दिया। 

              बहरहाल शहर के कुछ जागरूक लोग और बसंत विहार कॉलोनीवासी कमेटी बनाकर फ़र्ज़ी नक्शा दिखाकर कॉलोनी में भूखंड बेचने और फर्जीवाड़ा कर यूटिलिटी के भूखंड को बेचने के मामले में FIR दर्ज करवाने की तैयारी कर रहे हैं। इस मामले में ईओ पूजा शर्मा नें बड़े स्तर का मामला बात कर कार्रवाई करने से पल्ला झाड़ लिया है। जिसके बाद एडवोकेट पूनम शर्मा के नेतृत्व में कॉलोनी के लोगों नें जल्द ही स्वायत शासन मंत्री से मिलकर मामले की जांच की मांग करने का निर्णय लिया है।

– राजेंद्र कुमार पटावरी अध्यक्ष- प्रेस क्लब सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। क्या भाजपा प्रत्याशी प्रियंका बैलान को अब केवल प्रधानमंत्री मोदी का ही सहारा है ? जिस तरह से बैलान के समर्थन में आयोजित सभाओं में भीड़ नहीं जुट रही है उससे तो यही लग रहा है। प्रमुख नेताओं की सभाओं में भीड़ नहीं जुटने से बैलान के साथ भीतरघात की गुंजाइश भी नजर आने लगी है। सूरतगढ़ में सीएम भजनलाल शर्मा की सभा में भीड़ का आंकड़ा ढाई हजार भी नहीं पहुंच पाया। आठ विधानसभा क्षेत्र वाली लोकसभा में प्रदेश के मुखिया की सभा में ढाई हजार से कम भीड़ का आंकड़ा यह बताने के लिए काफी है कि पार्टी में सब ठीक नहीं है।

विधानसभा चुनाव से पहले सूरतगढ़ भाजपा के कई नेता अपने खुद के दम पर इससे ज्यादा भीड़ जुटा रहे थे। लेकिन अब ज़ब बात प्रियंका के लिए भीड़ जुटाने की आई तो न जाने ये सुरमा कहां चले गए। यहां ये भी जान ले कि शहर में भाजपा के करीब 20 पार्षद और 5 मंडल भी है। सभी पार्षद 50-50 का टारगेट भी दिया होता तो भी करीब 1000 लोगों की भीड़ जुट जाती। पांच मंडल अगर 500 की भीड़ भी जुटाते तो आंकड़ा सम्मानजनक हो सकता था।

वैसे यहां बात अकेले सूरतगढ़ के नेताओं की भी नहीं है,आस पास के विधानसभा क्षेत्रों के नेता भी अगर 5-5 सौ लोगों की भीड़ लाते तो भी मुख्यमंत्री की सभा की शान बचने लायक लायक भीड़ तो हो जाती।

कुल मिलाकर मुख्यमंत्री की विजय शंखनाद रैली में उम्मीद से कम भीड़ आयी जो इस बात का साफ-साफ इशारा है कि भाजपा के स्थानीय बड़े नेता और भाजपा का संगठन कहीं ना कहीं इन चुनावों में पूरी ताकत नहीं लगा रहा है। जिसका सीधा सा मतलब है कि इन नेताओं की रुचि भाजपा प्रत्याशी को जिताने में नहीं है। शायद इन नेताओं को यह लगता है कि वोट तो मोदी के नाम पर मिलने हैं हमारे मेहनत करने से क्या होगा ?

एक संभावना यह भी है कि भाजपा की टिकट क्यूंकि अप्रत्याशित रूप से प्रियंका बैलान के रूप में बिल्कुल नए चेहरे को मिली है। जिसकी वजह से दशकों से लोकसभा की राजनीति में जमें हुए लोगों को प्रियंका के उदय में अपनी राजनीति का सूर्यास्त होता दिख रहा है। इसलिये इन लोगों ने अपने संबंधों का इस्तेमाल कर स्थानीय राजनेताओं को चुप रहने का इशारा कर दिया हो। जिसकी वजह से स्थानीय नेता प्रियंका के प्रचार में रूचि नहीं दिखा रहे हो।

भीड़ में नहीं दिखा अरोड़ा और मेघवाल समाज का प्रतिनिधित्व

भाजपा प्रत्याशी समर्थन में हुई सीएम की शुक्रवार की सभा ने बैलान की एक और चिंता को बढा दिया है। बैलान के समर्थन में सीएम की सभा में आम भाजपा कार्यकर्ता तो मौजूद था लेकिन सभा में अरोड़ा और मेघवाल कम्युनिटी के लोगों की संख्या कुछ खास नज़र नहीं आई। क्यूंकि बैलान को प्रत्याशी बनाने के पीछे भाजपा का यह मानना था कि बैलान क्यूंकि दोनों समुदायों से बिलोंग करती है तो बैलान को अरोड़ा समुदाय जिसकी संख्या लोकसभा क्षेत्र में अच्छी खासी है उसका झुकाव भी प्रियंका की तरफ होगा। लेकिन सूरतगढ़ में सीएम की सभा में दोनों वर्गों के लोगों का ठंडा रेस्पॉन्स रहा। जिसके चलते लगता यही है कि कहीं ना कहीं बैलान इन दोनों वर्गो को अब तक साध पाने में सफल नहीं हो पाई है।  

पीएम के करिश्मे पर टिका प्रियंका का भविष्य !

बहरहाल मुख्यमंत्री की सभा में भीड़ नहीं आने की वजह कुछ भी रही हो। यह बात लगभग तय हो चुकी है कि जिस तरह से डूबते को तिनके का सहारा होता है। भाजपा प्रत्याशी प्रियंका बैलान को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चमत्कार का सहारा है। वरना ज्यादातर नेताओं के असहयोगात्मक रवैये को देखते तो भाजपा प्रत्याशी की लुटिया डूब जाए तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा। हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी के मामले में भी सभाओं में भीड़ और स्थानीय नेताओं का समर्थन कोई बहुत ज्यादा मिल रहा हो ऐसा भी नहीं है।

परंतु इस चुनाव में एक और प्रधानमंत्री मोदी का जादू 2014 और 2019 के मुकाबले में कम हुआ है तो दूसरी और सिख और मुस्लिम समुदाय के वोटर का पूरी तरह से मोदी के विरोध में लामबध हो चुका है। इसके अलावा बहुसंख्यक दलित वर्ग का कांग्रेस की ओर झुकाव नज़र आ रहा है जो यह बताने के लिए काफी है कि प्रियंका की चुनौती आसान नहीं है। उस पर भाजपा के दिग्गज नेताओं का असहयोगात्मक रवैया बैलान के लिए कोढ़ में खाज का काम कर रहा है। कुल मिलाकर डूबते को तिनके का सहारा होता है उसी तरह इस मुकाबले में प्रियंका को सिर्फ प्रधानमंत्री के करिश्मे का ही सहारा दिख रहा है।

– राजेंद्र पटावरी,अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़ |

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मामला चाहे शहर की सफाई व्यवस्था का हो या फिर शहर के विकास से जुड़े निर्माण कार्यों का, कालवा ने अपने दूसरे कार्यकाल में अब तक निराश ही किया हैं। प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत पट्टा वितरण की बात करें तो कहना गलत नहीं होगा कि इस मामले में तो चेयरमैन कालवा बुरी तरह फिस्सडी साबित हुए हैं। आचार संहिता लगने से ठीक पहले चेयरमैन कालवा ने भले ही 300 पट्टे बांटने का दावा किया। लेकिन हकीकत यह है कि अभी भी लोग पट्टों के लिए  चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें पट्टे नहीं मिले हैं। चेयरमैन कालवा का यह दावा कितना खोखला है इस बात का अंदाजा आप इस बात से लगाए कि इन कथित 300 पट्टों में से 150 से अधिक पट्टे कृषि भूमि पर बनी कॉलोनीयों के थे। शेष पट्टों में भी अधिकांश पट्टे स्टेट ग्रांट और 69A श्रेणी के फ्री होल्ड पट्टे शामिल है जिन्हे सही मायनों में पट्टे नहीं कहा जा सकता।

सही मायनों में कच्ची बस्ती और पक्की बस्ती में कब्ज़े के पट्टों को ही वास्तविक पट्टा कहा जा सकता है। चेयरमैन कालवा के दावों के मुताबिक ऐसे पट्टों की संख्या महज 50 थी। एक माह के कार्यकाल में महज 50 पट्टे यह बताने के लिए काफी है कि अध्यक्ष कालवा ने शहर के गरीब लोगों को पट्टे देने के लिए किस कदर गंभीरता दिखाई है।

पट्टों के लिए अब भी चक्कर काट रहा है आम आदमी

नगरपालिका कार्यालय में पट्टा वितरित करते अध्यक्ष कालवा

चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा के नेतृत्व में पट्टा वितरण अभियान की एक तल्ख हकीकत यह भी है कि आचार संहिता के चक्कर में भले ही 300 पट्टे बनाने की घोषणा कर गाल बजाने की कोशिश की गई हो लेकिन अभी भी ये पट्टे लोगों को मिल नहीं पाए हैं।

पट्टा वितरण कार्यक्रम में फोटो खिंचवाने के लिए एक बार की 20-30 लोगों को पट्टे बांटे गए थे। लेकिन बाद में पट्टों पर अधिशासी अधिकारी के साइन नहीं होने की बात कहते हुए यह पट्टे भी वापस ले लिए गए। अब पिछले तीन-चार दिनों से लोग पट्टों के लिए नगरपालिका के चक्कर काट रहे हैं लेकिन अधिशासी अधिकारी और अध्यक्ष के साइन नहीं होने के चलते इन पट्टों का भी वितरण भी अटका हुआ है। समझ में नहीं आता कि आखिर जब पट्टों की सारी प्रक्रिया हो चुकी है तो ईओ और चेयरमैन आखिर पट्टों पर साइन क्यों नहीं कर रहे? क्यों आम आदमी से पट्टों के लिए नगरपालिका के चक्कर लगवाए जा रहे हैं ?

चेयरमैन कालवा यदि वास्तव में आम आदमी को राहत देना चाहते हैं तो उन्हें चाहिए कि जिन 300 पट्टों को देने की घोषणा उन्होंने की है उन पट्टों पर स्वयं व संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर व अन्य खानापूर्ति करवाकर  जल्द से जल्द वितरित करवाए जिससे कि उन लोगों को तो कम से कम राहत मिले जिनके पट्टे बन चुके हैं।

पट्टा बनाने के लिए लाखों की जीएसटी लेने की रही चर्चा

नगरपालिका चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा के दोबारा पदभार ग्रहण करते समय भाजपा नेता रामप्रताप कासनिया और खुद कालवा ने पट्टा बनाने में किसी को पैसे नहीं देने की अपील की थी। लेकिन मजेदार बात ये है कि अभियान के दौरान ही अध्यक्ष कालवा के खुद के वार्ड नंबर-26 और वार्ड नंबर-3 में लाखों रुपए लेकर खाली प्लॉट के पट्टे बनाने की चर्चा शहर भर में हो गई थी। नगरपालिका का प्रशासनिक अमला जिस तरह से दूसरे सभी वार्ड छोड़कर वार्ड नंबर-3 और 26 में जिस तरह से लगाया गया उससे पट्टों में भ्रष्टाचार की चर्चाओं को बल मिला। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि कालवा से जुड़े पार्षदों को भी अपने-अपने वार्डों के पट्टे बनाकर भ्रष्टाचार की गंगा में डुबकी लगवाने का झांसा भी दिया गया था। लेकिन जहाँ वार्ड -3 और 26 में कोर्ट के स्टे के चलते पट्टे नहीं बनने से चेयरमैन कालवा को झटका लगा वहीं दूसरी और कच्ची-पक्की बस्ती के वार्डों में भी पट्टे नहीं बनने से पार्षदों को भी निराशा हाथ लगी।

कुल मिलाकर चेयरमैन कालवा के पहले कार्यकाल की तरह दूसरे कार्यकाल में पट्टा वितरण अभियान भ्रष्टाचार की चर्चाओं के बीच आम आदमी को वो राहत नहीं दे सका जिसकी उम्मीद कालवा जैसे उच्च शिक्षित नेता से की जा रही थी।

पट्टे नहीं बनने से पार्षदों में भी निराशा

क्योंकि प्रशासन शहरों के संग अभियान 31 मार्च 2024 को समाप्त होने को है और उसे पर आचार संहिता लगने का डर भी था ऐसे में सभी पार्षदों  खासकर भाजपा के पार्षदों को कालवा के अध्यक्ष बनने के बाद यह उम्मीद जगी थी कि अब उनके वार्ड के ज्यादा से ज्यादा लंबित पट्टे बन पाएंगे। कालवा के अध्यक्ष बनने के बाद जिस तरह से भाजपा के भाजपा के कुछ पार्षदों की ड्यूटी पट्टा बनाने में लगाई गई थी उससे एक बारगी लग रहा था कि भाजपा पार्षदों के साथ हुई पिछली नाइंसाफी की भरपाई अब ज्यादा से ज्यादा पट्टे बनाकर की जाएगी। लेकिन अब जब आचार संहिता लग चुकी है भाजपा पार्षद पट्टे नहीं बनने से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। हालत यह है कि अब पार्षदों के लिए लोगों को जवाब देना मुश्किल हो गया है।

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सूरतगढ़। कोरोना काल में जब संपूर्ण अर्थव्यवस्था ठप्प हो चुकी थी उस समय मेडिकल कंपनियों द्वारा मास्क, सेनिटाइज़र, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर सहित दूसरे उत्पादों की जमकर बिक्री की थी और मोटा मुनाफा कमाया था। उस समय ‘आपदा में अवसर’ का नारा खूब लोकप्रिय हुआ था।

            सूरतगढ़ नगरपालिका की बात करें तो यहां के भ्रष्ट अधिकारी भी आपदा में अवसर का लाभ उठाने में माहिर हैं। सूचना के अधिकार कानून के तहत मिले दस्तावेजों से ऐसे ही एक मामले का खुलासा हुआ है। जिसमें पिछले वर्ष जुलाई माह के अंत और अगस्त माह के प्रारंभ में घग्गर नदी में आई बाढ़ के दौरान नगरपालिका अधिकारियों द्वारा मिट्टी के थैले और मिट्टी भर्ती के नाम पर ठेकेदारों से मिलीभगत कर लाखों रुपए का फर्जीवाड़ा कर दिया। तात्कालिक ईओ शैलेंद्र गोदारा ने उस समय आपदा प्रबंधन के तहत 5-5 लाख रूपये के तीन टेंडर मेसर्स तिरुपति कंस्ट्रक्शन कंपनी को जारी किए थे।

इस मामले में नगरपालिका के भ्रष्ट तकनीकी कर्मचारियों ने मेजरमेंट बुक में फर्जी एंट्री कर करीब 12 लाख 75000 हज़ार रूपये का भुगतान कर दिया। इसके अलावा नगरपालिका द्वारा हर वर्ष आपदा प्रबंधन के लिए किए गए नियमित टेंडर की राशि का बड़ा हिस्से की भी बंदरबांट कर ली।

तकनीकी अधिकारियों ने एमबी में की फ़र्ज़ी एंट्रीयां, ठेकेदार को भुगतान कर लगाया चूना  

इस पूरे मामले में सूचना के अधिकार से मिली टेंडर की मेजरमेंट बुक यानि की एमबी के अवलोकन से साफ होता है कि तकनीकी अधिकारियों ने कार्यालय में बैठकर फ़र्ज़ी एंट्रीयां कर एमबी भर दी और तुरंत फुरन्त ही भुगतान भी कर दिया गया।

उदाहरण के तौर पर वर्क आर्डर संख्या-1272 के तहत शिव विहार कॉलोनी के उत्तर दिशा में तटबंधों की मजबूती का कार्य करवाया गया। इस कार्य की मेजरमेंट बुक में पालिका के तात्कालिक जेईएन ने  दो किलोमीटर तक मिट्टी भर्ती करने की एंट्री की है  जबकि मौके पर 2 किलोमीटर लम्बाई का तटबंध ही नहीं है। साफ है कि एंट्री फ़र्ज़ी है। इसके अलावा तटबंधो की मजबूती के लिए जो मिट्टी के थैले की सप्लाई में भी फर्जीवाड़ा किया गया है। मौका स्थल पर बहुत कम मात्रा में मिट्टी के ठेले तटबंधों पर लगाए गए। इसके अलावा भ्रष्ट अधिकारियों ने दिन रात एक्सकैवेटर मशीन चलना दिखाकर भी फ़र्ज़ी एंट्री की गई। कुल मिलाकर वर्क आर्डर संख्या -1272 के तहत  418485/-रूपये का भुगतान कर दिया गया।

            ठीक इसी तरह से पालिका के वर्क आर्डर संख्या-1277 के तहत आरसीपी कॉलोनी के पूर्वी दिशा में और वर्क आर्डर संख्या-1282 द्वारा गणेश कॉलोनी के उत्तर दिशा के तटबंधों को मजबूत करने का कार्यदेश जारी किया गया था। तात्कालिक जेईएन  द्वारा भरी गई दोनों साइट्स की मेजरमेंट बुक में भी  दो-दो किलोमीटर लम्बाई में मिट्टी भरती की एंट्री की गई है। जबकि यहां भी मामला ठीक पहले जैसा ही है मतलब कि इन स्थानों पर भी तटबंधों की लंबाई 2 किलोमीटर है ही नहीं। ऐसे में साफ है कि यहां भी ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर फर्जी एंट्रीयों के जरिए भुगतान उठाया गया। वर्क आर्डर-1277 के तहत 454815/-रूपये और 1282 के तहत 401995/- रूपये का भुगतान ठेकेदार फर्म मेसर्स  तिरुपति कंस्ट्रक्शन को किया गया।

             वैसे उक्त तीनों टेंडर की मेजरमेंट बुक में पानी टैंकर की सप्लाई के नाम पर भी कुछ एंट्री की गई है जो हैरान करती है। क्योंकि जब पानी की वजह से तटबंधों के टूटने का खतरा पैदा हो रहा था। कुछ समय तटबंधो की मजबूती के लिए ठेकेदार द्वारा  टैंकरों से पानी मंगाना कुछ अखरता है। साफ है कि पाइपों के जरिए नदी का पानी तटबंधों की मजबूती के लिए उपयोग में लाया जा सकता था। ऐसे मैं टैंकरों से पानी मांगना भी भुगतान पर सवाल खड़े करता है।

एक ही दिन में एक ही फर्म को तीनों टेंडर देने से भी उठ रहे सवाल

हालांकि आपदा के समय जो भी निर्णय लिए जाते हैं वह उस समय की परिस्थितियों के अनुरूप लिए जाते हैं। लेकिन इस मामले में कई ऐसे बिंदु है जो अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करते हैं। जैसे की तटबंधों की मजबूती के लिए जो तीन टेंडर किए गए वह एक ही दिन जारी किए गए साथ ही तीनों ही टेंडर एक ही फर्म मैसेज तिरुपति कंस्ट्रक्शन, रायसिंहनगर को ही क्यों दिए गए ?

वैसे सूत्रों के मुताबिक उक्त ठेकेदार फर्म में नगरपालिका में भूमिशाखा में कार्यरत एक अग्निशमन शाखा के कर्मचारी के रिश्तेदार की अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी है। साफ है कि कर्मचारी के रिश्तेदार को फायदा पहुंचाने के लिए उक्त तीनों टेंडर एक ही फर्म को दिए गए। यहां यह भी गौरतलब है कि जिस तारीख को यानि कि 8/8/ 2023 को तीनों टेंडर के वर्क आर्डर जारी किए गए तब तक शहर से बाढ़ का खतरा टल चुका था। जिसका सीधा सा मतलब है कि आपदा प्रबंधन के तहत करवाए गए कार्यों के टेंडर बाद में किए गए।

तत्कालिक ईओ,जेईएन और ठेकेदार पर आरोप, मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत  

इस पूरे मामले में तात्कालिक अधिशासी अधिकारी शैलेंद्र गोदारा, जेईएन सुशील सियाग, चरणजीत मीणा और ठेकेदार फर्म सहित नगरपालिका के कई अन्य कार्मिकों की भूमिका संदिग्ध है। वैसे आपको बता दें कि चेयरमैन ओम कालवा के भाजपा ज्वाइन करने के बाद नगरपालिका में एक सिंडिकेट प्रभावी हो गया था। इस सिंडिकेट में ईओ गोदारा, जेईएन सुशील सियाग,चरणजीत मीणा सहित कुछ और लोग शामिल थे। सिंडिकेट के प्रभावित रहते हुए नगरपालिका का पूरा प्रशासनिक अमला कुछ विशेष लोगों को फायदा पहुंचाने का काम कर रहा था। इस दौरान पट्टे बनाने और टेंडरों में जमकर फर्जी वाड़ा कर चहेतों को फायदा पहुंचाया गया। सिंडिकेट के प्रभावी रहने के दौरान किये कामों की जांच की जाए तो कई घोटाले सामने आ सकते हैं।

बहरहाल घग्गर में बाढ़ के दौरान आपदा प्रबंधन के नाम पर हुए इस घोटाले की शिकायत अब मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी है। जल्द ही इस मामले में जांच की आंच दोषी अधिकारियों तक पहुंचने की संभावना है।

चेयरमैन ओम कालवा करवाएं जाँच !

नगरपालिका में अपनी दूसरी पारी शुरु करते हुए चेयरमेन ओमप्रकाश कालवा ने भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस के संकेत दिए हैं। इसलिये उन्हें इस मामले की जांच का इनीशिएटिव लेकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। इसके साथ ही इस घोटाले की राशि संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार से वसूल करनी चाहिए। जिससे कि भविष्य में कोई भी इस तरह के घोटाले की हिम्मत ना जुटा सके।

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सूरतगढ़। दीमक के बारे में कहा जाता है कि वह ज़ब किसी लकड़ी में लग जाती है तो उसे खोखला बना देती है। सूरतगढ़ नगरपालिका कार्यालय में ऐसी कई दीमके हैं जो पूरी व्यवस्था को खोखला बनानें में जुटी है। वैसे तो ये दीमकें पालिका की प्रत्येक शाखा में मौजूद है लेकिन आज हम बात करेंगे नगरपालिका की निर्माण शाखा की।

शहर में निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के जो कीर्तिमान पिछले कुछ समय से बने है उसमें निर्माण शाखा के दो जेईएन का बड़ा योगदान रहा है। निर्माण शाखा में पिछले लम्बे समय से कब्ज़ा जमाये बैठे इन जेईएन में से एक को चेयरमैन ओम कालवा को प्रताड़ित करने की सुपारी देकर खास तौर पर अपॉइंट करवाया गया था। अपने पूरे कार्यकाल में जेईएन साहब नें बखूबी इस काम को अंजाम दिया। वहीं दूसरे श्रीमान भी कोई कम नहीं है। वह कहावत तो आपने सुनी ही होगी ‘बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां भी सुभानल्लाह’। कांग्रेस सरकार के दौरान सिंडिकेट के सदस्य के रूप में इन दूसरे श्रीमानजी ने भी कम गदर नहीं मचाया। कमीशन के लालच में दोनों अधिकारीयों नें ठेकेदारों के घटिया निर्माण पर आंखें मुंदे ली। जिसकी वजह से निर्माण कार्यों पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी शहर के हालात बद से बदत्तर हो गये। हालात यह है कि शहर में पिछले एक-डेढ़ साल में हुआ एक भी निर्माण कार्य ऐसा नहीं है जिसको लेकर कहा जा सके कि उसमे निर्धारित मापदंडों का पालन हुआ है।

वैसे निर्धारित मापदंडो का पालन हो भी तो कैसे ज़ब भूमि शाखा में बैठे इन अभियंताओं का मन तय कमीशन से नहीं भर रहा हो। नगरपालिका के ठेकेदारों की माने तो ज्यादा काली कमाई की चाहत में इनमें से एक अधिकारी नें तो पिछले कुछ समय से ठेकेदारों से ‘बिल बनाने के बदले अवैध वसूली’ की नई परंपरा शुरू कर दी है। सूरतगढ़ नगरपालिका के इतिहास में यह संभवत पहली बार है जब ठेकेदारों को बिल बनाने के लिए भी लगान चुकाना पड़ रहा है। बेचारे ठेकेदार भी करे तो क्या करें मजबूरी में उन्हें जेईएन साहब को नजराना चुकाना पड़ रहा हैं।

वैसे इसमें साहब का भी कोई दोष नहीं है। सूत्रों के मुताबिक साहब काफी शौकीन मिजाज वाले है। क्यूंकि शौक कैसा भी हो उसकी कीमत चुकानी पड़ती हैं। इसलिये जेईएन साहब भी क्या करें ? साहब का जोर तो बस ठेकेदारों पर चल सकता है सो उन्होंने बिल बनाने के बदले अवैध वसूली की नई परंपरा शुरू कर दी। वैसे अपने शौक के चलते साहब की पहले भी कई बार काफ़ी छिछालेदार हो चुकी है। कुछ समय पहले साहब की किसी कॉलोनाइजर के कारिंदे के साथ बातचीत की एक ऑडियो भी काफ़ी वायरल हुई थी। जिसमे सामने वाला साहब को बासी भोजन से काम चलाने का कह रहा था। बताया जा रहा है कि साहब के शौक का ख्याल रखने वाले इस कारिंदे नें ही लेनदेन के चलते ऑडियो वायरल करवा दिया था। बाद में इस मामले में एक बड़े नेताजी नें पंचायत भी की थी।

वहीं दूसरे साहब की बात करें तो उनका शौक कुछ अलग है और शौक पूरा करने का उनका तरीका भी कुछ अलग है। शौक का खर्च निकालनें के लिए ये साहब अपने रौब का इस्तेमाल कर स्टोर और दूसरी शाखाओं के बड़े टेंडरों की मेजरमेंट बुक भरकर दूसरे अभियंताओं का कमीशन डकार जाते हैं।

वैसे अगर आप सोच रहे हो कि पैसों के लालच में इन दोनों जेईएन नें नगरपालिका में केवल निर्माण कार्यों की लंका जलाई है तो आपको यह जान लेना चाहिए कि राज्य सरकार द्वारा आम आदमी को और खासकर कमजोर वर्ग को पट्टा देने के लिए जो अभियान चलाया गया उसको फेल करने में सबसे बड़ा योगदान इन्हीं दोनों अधिकारीयों का है। सूरतगढ़ नगरपालिका द्वारा कई बार सबसे ज्यादा पट्टे बांटने का जो ढोल बजाया गया उसकी हकीकत यह है कि शहर में सबसे ज्यादा पट्टे बड़े धन्नासेठों की कॉलोनीयों के बनाए गए। क्यूंकि धन्नासेठों नें प्रत्येक पट्टे के लिए कमीशन तय कर रखा था। इसी कमीशन के लालच में ये दोनों जेईएन अपने पूरे कार्यकाल में धन्नासेठों के हरकारे बनकर रिपोर्ट करते रहे है। जबकि आम आदमी जेईइन रिपोर्ट के लिए नगरपालिका में चक्कर काटते रहा है ।

पूर्व में परसराम भाटिया के चेयरमैन रहने के दौरान उन्होंने पट्टों पर रिपोर्ट करने के लिए दोनों अभियंताओं को बार बार कहा लेकिन गंदगी खाने के शौक के चलते दोनों अभियंताओं नें भाटिया की तमाम कोशिशों पर पानी फेर दिया। नगरपालिका में कच्ची या पक्की बस्ती में जो थोड़े बहुत पट्टे बने है वह भी दोनों जेईएन की दलालों के साथ सेटिंग से बने है। इन अभियंताओं की पट्टा अभियान में कारगुजारी का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि कच्ची बस्ती के 16 वार्डों में अभियान के दौरान महज 310 के करीब ही पट्टे बने हैं। यानि की इन वार्डों में प्रत्येक वार्ड में पट्टे बनने की औसत 20 से भी कम है। पट्टा  बनाने के किसी भी अभियान की सफलता कच्ची बस्ती के पट्टों की संख्या से ही मापी जाती है। शहर के 16 वार्डों में 310 पट्टों से आप इस अभियान की हकीकत को समझ सकते है। सही मायनो में नगरपालिका में प्रशासन शहरों के संग अभियान के असफल होने को कोई वास्तविक दोषी है तो निर्माण शाखा में लगी यही दीमके है।

                      हालांकि नगरपालिका में सत्ता परिवर्तन के बाद एक दीमक नें सूरतगढ़ नगरपालिका से नोहर की और रुखसत कर ली है। लेकिन अभी भी दूसरी दीमक निर्माण शाखा को चट करने में लगी हुई है। नगरपालिका चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा और पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया यदि वास्तव में सूरतगढ़ नगरपालिका में सत्ता परिवर्तन के साथ व्यवस्था परिवर्तन भी चाहते हैं तो सबसे पहले उन्हें पालिका की निर्माण शाखा में लगी इन दीमकों को हटाना चाहिए। अच्छी बात यह है कि अभी भी तबादलों का समय बाकी है। देखना होगा कि नये हुकूमरान कांग्रेस सरकार के सरंक्षण में पली दीमकों को साफ करेंगे या फिर इनको लूट की छूट जारी रहेगी ।

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सूरतगढ़। सूरतगढ़ नगरपालिका में भ्रष्ट और धूर्त  अधिकारियों और कर्मचारियों का एक ऐसा कॉक्स बना हुआ है। जो इस व्यवस्था में बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। ज़ब कोई व्यक्ति इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उत्पन्न करता है तो यह पूरा तंत्र उसको निपटाने में लग जाता है। ऐसा ही एक उदाहरण नगरपालिका की सफाई कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष मनोज धौल है। जो नगरपालिका में चल रही ओछी राजनीति का शिकार हो गए।

                     धौल पिछले काफ़ी समय से सफाई कार्मिकों को दूसरे कार्यों से हटाने की मांग कर रहे थे। जिसके चलते धौल पालिका के भ्रष्ट और धूर्त अधिकारीयों व कर्मचारियों की आंखों की किरकिरी बने हुए थे। धौल को सबक सिखाने के लिए भ्रष्ट तंत्र के हाकीमो ने आखिरकार धौल को निलंबित करवा दिया। सोमवार को युवा पवन चौधरी ने रिलीव होने से पूर्व मनोज धौल को अवकाश स्वीकृति के बिना  अनुपस्थित रहने का हवाला देते हुए निलंबित कर दिया। ईओ पवन चौधरी द्वारा जारी निलंबन आदेश में मनोज धौल पर कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की शिकायतें मिलने की बात भी कही गई है।

मनोज धौल द्वारा छुट्टी के लिए दिया गया आवेदन

            लेकिन अवकाश स्वीकृति के बिना अनुपस्थित रहने के आरोपों पर धौल का कहना है कि उन्होंने 12 से 20 फ़रवरी के बीच अवकाश लेने की सूचना संबंधित जमादार और नगरपालिका के सफाई निरीक्षक को दे दी थी। उनका कहना है कि उनके छुट्टी के फॉर्म पर जमादार और सहायक सफाई निरीक्षक के सिग्नेचर भी है। इसके अलावा नगरपालिका में सफाई कर्मियों के अवकाश के संबंध जो व्यवस्था है उसके मुताबिक सफाई कर्मचारी सामान्य तौर पर जमादार या सफाई निरीक्षक को ही अवकाश की सूचना देते हैं। जो कि इस मामले में मनोज धौल कर चुके थे। ऐसे में उनका निलंबन साफ तौर पर नगरपालिका के भृष्ठ  तंत्र की गंदी राजनीति की ओर इशारा करता है। ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि ज़ब व्यवस्था सुधार की मांग करने वालों पर करवाई होगी तो कोई भी सही बात के लिए आवाज बुलंद क्यों करेगा ?

सफाईकार्मिकों को फिल्ड ड्यूटी में लगाने की जरूरत

भाजपा सरकार ने सफाई कर्मियों को दूसरे कामों से हटा कर सफाई व्यवस्था में लगाने का आदेश जारी कर रखा है तो ऐसे में इस आदेश को धरातल पर लागू करने की जिम्मेदारी भाजपा से जुड़े नेताओं की बनती है ? इस मामले में कार्मिकों की संख्या कम होने का बहाना अक्सर जिम्मेदार अधिकारी बनाते है। लेकिन यह सीधे सीधे उन सफाई कार्मिकों के साथ अन्याय है क्यूंकि एक तरफ जहाँ ये सफाईकर्मी ईमानदारी से अपना काम कर शहर को साफ बनाने में लगे हैं।

वहीं दूसरी ओर अधिकारियों और नेताओं की चापलूसी से या फिर उनका ईमान खरीदकर कुछ झाड़ू की जगह कलम पड़कर भ्रष्टाचार के नए अध्याय लिख रहे हैं।वैसे भी जब पिछले कुछ समय से शहर की सफाई व्यवस्था का भट्टा बैठ चुका है तो बेहद जरूरी है कि नगरपालिका के वातानुकूलित कक्षों में बैठकर भ्रष्टाचार के नये आइकॉन बन रहे सफाई कार्मिकों को फिर से झाडू पकड़ाया जाए जिससे शहर के गली मोहल्लों के साथ-साथ नगरपालिका की गंदगी भी दूर हो सके।

क्या कासनिया और कालवा लेंगे संज्ञान ?

विधानसभा चुनावों के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों में भाजपा प्रत्याशी राम प्रताप कासनिया सत्ता का केंद्र बन चुके हैं। विपक्ष में रहते हुए नगरपालिका के भ्रष्टाचार और कुशासन पर बरसने वाले कासनिया को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए ताकि व्यवस्था परिवर्तन की मांग करने वाले लोगों का हौसला कायम रहे। वैसे अध्यक्ष की कुर्सी पर फिर से काबिज़ होने वाले मास्टर ओमप्रकाश कालवा भी धौल की बहाली करके पुरानी व्यवस्था के खात्मे का इशारा देकर नई राजनीति की शुरुआत कर सकते हैं !

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2021 में भूखंड से नगरपालिका ने हटाया था अतिक्रमण

वार्ड 26 में निरंकारी भवन के पीछे गत दिनो हुआ अतिक्रमण
वार्ड 26 में निरंकारी भवन के पीछे अतिक्रमण का पिछला हिस्सा

सूरतगढ़। यूँ तो शहर के प्रत्येक वार्ड में सरकारी संपत्ति की लूट का नंगा नाच जारी है। लेकिन शहर के वार्ड नंबर-26 में चल रहा माफियाराज भूमाफियाओं और सरकारी तंत्र के गठबंधन का ऐसा उदाहरण बनता जा रहा है जिसकी दूसरी मिसाल मिलना मुश्किल है। शहर की नगरीय सीमा में स्थित पॉश एरिया माने जाने वाले इस वार्ड की बेसकीमती भूमि भ्रष्ट अधिकारियों ने सफेदपोश माफियाओ के हवाले कर दी है। वार्ड में सनसिटी रिजॉर्ट के पीछे स्थित खसरा नंबर 320 में स्थित करीब 20 करोड रुपए की कीमत की भूमि पर 50 साल बाद में खातेदारी बहाल कर करने का मामला किसी से छुपा हुआ नहीं है। बताया जा रहा है कि इस बहुचर्चित मामले में अपील करने की बजाय अब रिश्वत की हैवी डोज खाकर आवासीय कॉलोनी की स्वीकृति नगरपालिका के अधिकारियों ने दे दी है।

दूसरी और इसी वार्ड में गत दिनो खसरा नंबर 315/1 में स्थित नगरपालिका की प्रस्तावित आवासीय कॉलोनी की भूमि पर पिछले दिनों खातेदारी के नाम पर दिनदहाड़े हुई चारदिवारी का मामला अभी ठंडा नही पड़ा ही नहीं है। लेकिन भूमाफियाओं का पेट कहां भरने वाला है तो अब इसी प्लांड एरिया के दूसरे हिस्से में खाली पड़े भूखंड पर भूमाफियाओं ने निर्माण कर कब्जा कर लिया है। 

निरंकारी भवन के पीछे स्थित इस भूखंड पर पिछले कई दिनों से रात के अंधेरे में निर्माण जारी था। लेकिन प्रशासन की चुप्पी का फायदा उठाते हुए कुछ दिन पूर्व भूमाफियाओं ने दिनदहाड़े चारदिवारी और कमरे का निर्माण कर लिया है। इतना ही नहीं भूमाफिया ने मकान का निर्माण कर उसमे रिहाईस भी शुरू दी है। यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि रिहाईश की बात कह कर अतिक्रमण को बचाया जा सके। दिन दहाड़े हुआ यह अतिक्रमण शहर भर में चर्चा का विषय बना हुआ है ।

कुछ वर्ष पूर्व ही भूखण्ड से पालिका ने हटाया था अतिक्रमण

वर्ष 2021 में पालिका द्वारा काटी गई आवासीय कॉलोनी का नक्शा, गोल घेरे में कब्जा किया गया भूखंड

इस मामले मे एक तथ्य यह भी है कि नगरपालिका प्रशासन ने जब खसरा नंबर 315/1 पर आवासीय कॉलोनी की योजना तैयार की थी उससे पूर्व इस भूमि से कई अतिक्रमण हटाए गए थे जिनमें एक इस भूखण्ड पर हुआ अतिक्रमण भी था। वर्ष 2021 में पालिका अमले ने इस भूखंड और के साथ लगते एक अन्य अतिक्रमण को भी जेसीबी मशीन से ध्वस्त किया था। उस समय भी अतिक्रमणों को हटाने को लेकर काफी हंगामा हुआ था। लेकिन अचानक से भूमाफिया द्वारा सक्रिय होकर इस भूखंड पर फिर से अतिक्रमण होने से इस बात की चर्चा गरम है कि यह सब राजनीतिक आकाओं के आशीर्वाद से किया जा रहा है।

लाखों रुपए की कीमत का है भूखंड !

शहर के हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में जब एक-एक प्लांट की कीमत एक-एक करोड़ तक पहुंच गई है तो आप इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि कब्जा किए गए भूखंड की कीमत कितनी होगी। वैसे आपको यह भी बता दें कि कभी मंडी समिति का हिस्सा रही  बेशकीमती भूमि पर भू माफिया की नजर बरसों से रही है। जिस भूखंड पर कब्जा किया गया है उसके आसपास के दो भूखंडों पर पिछले कांग्रेस कार्यकाल में ही अवैध किया गया है। मजेदार बात यह है कि में से एक भूखंड का तो कोरोना काल में फर्जी पट्टा भी जारी किया जा चुका है। 

पालिका के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध, साधी चुप्पी

इस पूरे मामले में नगरपालिका के अधिकारियों की भूमिका कटघरे में नजर आती है क्योंकि यह संभव नहीं है कि दिन दहाड़े हुई इस अतिक्रमण की जानकारी पालिका के अधिकारियों को नहीं हो। वैसे भी यह अतिक्रमण कोई रातो रात नहीं हुआ है। कई दिनों तक निर्माण कार्य चलने के बावजूद संबंधित वार्ड के जमादार को इस बात की जानकारी नहीं ऐसा संभव नहीं लगता है। गरीबों के झोंपड़ों पर बेशर्मी से जेसीबी चढ़ाने वाले अधिकारियो को बड़े भूमाफिया के ये अतिक्रमण क्यों नहीं दिखाई देते ? क्यूं बड़े माफिया के कब्जे हटाने के नाम पर पालिका के शूरवीरों को सांप सूंघ जाता है।

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सूरतगढ़। शहर के वार्ड नंबर 26 में पुराने हाउसिंग बोर्ड में आचार संहिता के दौरान फिर से हुए चर्चित अतिक्रमण को आख़िरकार पालिका अमले ने सोमवार को ध्वस्त कर दिया। सरकारी संपत्ति के बोर्ड को उखाड़ कर मुकेश फौजी नामक व्यक्ति द्वारा किए गए इस अतिक्रमण पर चुप्पी को लेकर पालिका प्रशासन की लगातार आलोचना हो रही थी।

गौरतलब है कि पूर्व में जब नगरपालिका द्वारा भूखंड पर अतिक्रमण हटाया गया था उस समय मुकेश फौजी और उसके साथियों ने पालिका हमले पर हमला कर दिया था। दौरान हुई पत्थरबाजी में पालिका के अतिक्रमण प्रभारी कालूराम सैन और जेसीबी चालक को चोट भी लगी थी। इसके बाद आरोपी मुकेश फौजी और उसके साथियों के विरुद्ध मामला भी दर्ज करवाया गया था।

आचार संहिता के दौरान भूखंड पर किया गया अतिक्रमण

यही वजह है कि जब आरोपी मुकेश फ़ौजी द्वारा आचार संहिता का फायदा उठाकर ज़ब फिर से भूखंड पर निर्माण कर कब्जा किया गया तो यह मामला चर्चा का विषय बन गया। खबर पॉलिटिक्स सहित विभिन्न मीडिया संस्थानों ने इस मामले को फिर पुरजोर तरीके से उठाया। परन्तु लगातार दो माह तक मामला सुर्खियों में होने के बावजूद पालिका प्रशासन मुंह में दही जमाए बैठा रहा।

वैसे इस मामले में एक पूर्व विधायक के पुत्र का अतिकर्मी को वर्धहस्त होने की चर्चा भी लगातार चल रही थी। लेकिन अतिक्रमणो को लेकर लगातार हो रही किरकरी के चलते आखिरकार पालिका प्रशासन ने अतिक्रमण को हटाने के आदेश जारी कर दिए।

                  जिसके बाद सोमवार को पालिका के अतिक्रमण रोधी दस्ते के प्रभारी कालूराम सैन के नेतृत्व में पालिका मला हाउसिंग बोर्ड पहुंचा और जेसीबी मशीन की मदद से भूखंड पर किए गए निर्माण को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान  पालिका टीम ने भूखंड  पर एक बार फिर सरकारी संपत्ति का बोर्ड लगा दिया साथ ही मलबे को जप्त कर नंदी शाला भिजवा दिया।

वार्ड नंबर-3 से भी हटाया अवैध अतिक्रमण

वार्ड नंबर 3 में सामुदायिक भवन से ठीक पहले एक भूखंड पर हटाया गया अतिक्रमण
वार्ड नंबर 3 में सामुदायिक भवन से ठीक पहले एक भूखंड पर हटाया गया अतिक्रमण

 पालिका हमले में सोमवार को हाउसिंग बोर्ड के अलावा वार्ड नंबर 3 में भी एक प्लॉट पर किए गए अतिक्रमण को हटा दिया। त्रिमूर्ति मंदिर से रिलायंस पेट्रोल पंप की ओर जाने वाली सड़क पर सामुदायिक भवन से ठीक पहले खाली पड़ी जमीन पर हुआ यह अतिक्रमण भी पिछले 5 वर्षों से चर्चा का विषय बना हुआ था। प्रशासन द्वारा इस अतिक्रमण को भी कई बार हटाया गया था लेकिन हर बार राजनीतिक दबाव के चलते फिर से अतिक्रमण हो गया।

इस बेशकीमती भूखंड पर हुए शुरू में ज़ब पहली बार अतिक्रमण हुआ उस समय एक पूर्व विधायक के नजदीकी व्यक्ति का नाम उछला था। पूर्व में जब ईओ मिल्खराज चुघ के समय में इस अतिक्रमण को हटाया गया तो बताया जा रहा है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पूर्व विधायक काफी नाराज हो गए और उन्होंने इसके लिए ईओ चुघ को खूब खरी खोटी सुनाई। चर्चा यह भी है कि बाद में पूर्व विधायक के खास ने यह भूखंड कांग्रेस के एक युवा नेता को बेच दिया जिसने भूखंड को एक बार फिर आगे बेच दिया।

                                     वैसे यहां पर यह गौरतलब है कि यह भूखंड नगरपालिका द्वारा काटी गई 100 फीट रोड पर स्थित है जिस पर कोई कैसे कब्जा कर सकता है। पर क्योंकि यह सूरतगढ़ नगरपालिका है तो यहां पर सब कुछ संभव है। बहरहाल न जाने किस वजह से नगरपालिका प्रशासन ने सोमवार को भूखंड से अतिक्रमण को हटा दिया। लेकिन यहां पर यह भी देखना होगा कि आखिर यह बेशकीमती भूखंड शहर के भूमाफियाओं की गिद्ध दृष्टि से कब तक बचे रहते हैं

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मुंबई। फ़िल्में और वेबसीरीज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा है। बात फिर घर बैठकर नये साल का जश्न मनाने की हो तो फिल्म और वेब सीरीज देखने से बेहतर क्या हो सकता है। ऐसे में हम आपके लिए लेकर आए हैं  जनवरी माह में रिलीज होने वाली कुछ खास वेब सीरीज की। जिनको देखकर आप नए साल का आनंद उठा सकते हैं। इन फिल्मों में इंडियन पुलिस फोर्स, दो पत्ती और रोल प्ले जैसी फिल्में शामिल है।

इंडियन पुलिस फोर्स

अगर आपको रोहित शेट्टी की फिल्में आपको पसंद है तो यह पेशकश आपके लिए है। पुलिस ऑफीसर्स के डेडीकेशन को दर्शाती यह फिल्म आपके लिए एक एक्साइटिंग अनुभव साबित होगी फिल्म में शिल्पा शेट्टी, विवेक ओबेरॉय, श्वेता तिवारी,मुकेश ऋषि जैसे एक्टर है। फिल्म के 19 जनवरी को रिलीज होने की बात कही जा रही है

किलर सूप

 अभिषेक चौबे की यह क्राईम थ्रिलर सीरीज मनोज बाजपेई और कोंकणी सेन शर्मा जैसे सितारों से सजी है। दक्षिण भारत की एक प्रसिद्ध कहानी पर आधारित यह फिल्म एक घरेलू महिला शेफ और उसके बॉयफ्रेंड की साजिश पर आधारित है। इस क्राईम थ्रिलर सीरीज का प्रीमियर 11 जनवरी 2024 को  ओटीटी पर होगा।

कर्मा कॉलिंग

 अमेरिका की प्रसिद्ध ड्रामा सीरीज रिवेंज का हिंदी वर्जन कही जाने वाले इस ड्रामा थ्रिलर की काफी चर्चा हो रही है। रईस कोठारी परिवार की दिलचस्प कहानी पर आधारित फिल्म में लीड रोल में रवीना टंडन है। Disney+ हॉटस्टार पर यह ड्रामा 26 जनवरी को रिलीज होने वाला है।

दो पत्ती

 उत्तर भारत की पहाड़ियों की सैर कराती यह फिल्म शशांक चतुर्वेदी के डायरेक्शन में बनी यह फ़िल्म रहस्य और साजिश की कई परतें अपने में समेटे हुए हैं ।फ़िल्म में मुख्य भूमिका में काजोल और कृति सेनन है।

 

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सूरतगढ़। सूरतगढ़ शहर में बाइक चोरी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लगातार एक के बाद एक सामने आ रही चोरी की घटनाओं से आम आदमी जहां सहमा हुआ है वहीं पुलिस के सामने भी बाइक चोरों की चुनौती खड़ी हो गई है। बाइक चोरों के हौसले इस कदर बुलंद होते जा रहे हैं कि वे दिनदहाड़े चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

अभी दो दिन पूर्व ही वार्ड नंबर-31 में पुरानी आबादी स्कूल के पास घर के बाहर खड़ी बाईक को स्टार्ट कर अज्ञात चोर कुछ सेकंड में ले उड़ा। हालांकि इस सड़क पर दिनभर वाहनों की आवाजाही होती रहती है। इसके बावजूद मुंह को कपड़े से ढके करीब 20 से 25 वर्षीय एक युवक मौका पाकर बाइक को ले उड़ा। बाइक चोरी की इस घटना को लोग अभी भूल ही नहीं थे कि बीती रात हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में भी बाइक चोरी की एक घटना सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा के घर के नजदीक खाली पड़े प्लॉट में कुछ बाइक्स खड़ी थी जिनमें से एक बाइक को अज्ञात कर लेकर चंपत हो गया। होंडा क़े ड्रीम युगा मॉडल की इस बाइक्स के नंबर आरजे 13 एस आर 2025 है।

आमजन को सावधानी बरतने की जरूरत

शहर में बढ़ रही लगातार चोरी की वारदातों के बाद पुलिस को गश्त बढ़ाने की जरूरत है। वही वाहन चालकों को भी बाइक को खड़े करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। जहां तक संभव हो सके बाइक को सुनसान स्थान पर खड़ा नहीं करें साथ ही बाइक में अगर साइड लॉक हो तो उसे अवश्य लगाए जिस की चोरी की घटनाओं से बचा जा सके।

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Mango Coolar
मैंगो कलर के नए मॉडल की लांचिंग करते कम्पनी के अधिकारी

सूरतगढ़ (23 दिसंबर 23)। गुजरात की ऋषिका इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मैंगो एयर कूलर लॉन्चिंग पर एंबिएंस रिसोर्स में डीलर मीट का आयोजन किया गया।
गुजरात की ब्रदर एंड ब्रदर ग्रुप की ऋषिका इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष पवन कुमार बैद, डायरेक्टर अरुण महाजन, राजस्थान के रीजनल हैड ओमेंद्र सिंह, श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ बीकानेर के डॉलर संदीप अग्रवाल ने ऋषिका इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मांगो एयर कूलर लॉन्चिंग करके सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया।
इस अवसर पर राजस्थान के रीजनल हेड ओमेंद्र सिंह ने बताया 2019 से भारत में लगभग 23 मॉडल मैंगो एयर कूलर के लॉन्च किया जा चुके हैं, अवसर पर बिजली की कम खपत वाली बीएलडीसी मोटर के कमर्शियल एयर एलईडी लाइट कूलर की लांचिंग के अलावा कई मॉडल लॉन्च किए गए हैं, भविष्य में इलेक्ट्रिक गीजर और वाशिंग मशीन भी लॉन्च की जाएगी।
श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ बीकानेर के स्थानीय डीलर संदीप कुमार अग्रवाल ने अतिथियों को सम्मान प्रतीक देकर आभार प्रकट किया।

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वार्ड-26 के पुराने हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में विवादित भूखंड पर ताज़ा हुआ अतिक्रमण

सूरतगढ़। शहर में नगरपालिका प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने और भूमाफियाओ द्वारा फिर अतिक्रमण करने का खेल बदस्तूर जारी है। पिछले कुछ सालों से एक के बाद एक ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे है। ताज़ा मामला शहर के पुराने हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र के वार्ड नंबर-26 का है। जहां पर नगरपालिका प्रशासन ने इसी वर्ष जनवरी माह में मुकेश फ़ौजी नामक व्यक्ति के अतिक्रमण को हटाया था। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुए आरोपी द्वारा पालिकाकर्मियों पर हमले के चलते यह मामला काफी चर्चा में रहा था।

लेकिन अब पिछले दिनों इस भूखंड पर फिर से अतिक्रमियों ने चारदिवारी बनाकर भूखंड पर गेट लगाकर ताला जड़ दिया है। अतिक्रमी ने भूखंड पर लगे सरकारी संपत्ति के बोर्ड को भी उखाड़ कर फ़ेंका है। हाउसिंग बोर्ड में क्षेत्र में स्थित इस भूखंड की कीमत लाखों रुपए है।

अतिक्रमियों ने पालिका अमले पर किया था हमला

जनवरी माह में हटाए गए मुकेश स्वामी के अतिक्रमण की फ़ाइल फोटो-1

जनवरी माह में जब शिकायत के बाद नगरपालिका का अतिक्रमणरोधी दस्ता अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंचा था तब अतिक्रमण हटाने के दौरान आरोपी मुकेश फ़ौजी और उसके साथियों ने पालिका दस्ते पर हमला भी कर दिया था। इस हमले में पालिका दस्ते के प्रभारी कालूराम सेन को चोटें आई थी। इसके साथ ही अतिक्रमियों द्वारा फ़ेंकी गई ईंटो से जैसीबी का शीशा भी टूट गया था। जिसके बाद कालूराम सैन की तरफ से आरोपी मुकेश स्वामी व अन्य के विरुद्ध राज कार्य में बाधा सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा भी दर्ज़ करवाया गया था।  

नगरपालिका प्रशासन की भूमिका संदिग्ध ?

बताया जा रहा है कि पिछले दिनों जब शहर में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगी हुई थी इस दौरान भूमाफियों ने फिर से भूखंड पर निर्माण कर अतिक्रमण कर लिया। लेकिन शहर के बीचो-बीच स्थित इस बेहद चर्चित विवादित भूखंड पर अतिक्रमण से पालिका की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं ? क्योंकि ऐसा संभव नहीं है कि विवादित भूखंड पर निर्माण का काम चलता रहे और पालिका प्रशासन को इसकी जानकारी ही ना हो ? दूसरा सवाल ये भी है कि अगर भूमाफियों ने किसी तरह से निर्माण कर भी लिया है तो जानकारी मिलने के बावजूद अब तक अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया गया ?

क्या भूमाफियों को है सत्ताधारी नेताओं का है सरंक्षण ? 

जनवरी माह में जब इस भूखंड को अतिक्रमण मुक्त करवाया गया था उस समय ये प्रचारित किया गया था कि पूर्व पालिकाध्यक्ष ओम कालवा ने पैसे लेकर यह अतिक्रमण करवाया है ! उस समय कांग्रेस नेता हनुमान मील के निर्देशों पर अतिक्रमणो के खिलाफ की गई प्रभावी कार्रवाई के दौरान ही इस अतिक्रमण पर पीला पंजा चलाया गया था। अब क्यूंकि ओमप्रकाश कालवा अध्यक्ष नहीं है तो ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर किसकी शह पर यह अतिक्रमण करवाया गया है ? वैसे जिस तरह से इस अतिक्रमण पर नगरपालिका प्रशासन मौन होकर बैठा है उससे तो यह लगता है कि अतिक्रमी को किसी प्रभावशाली नेता का सरंक्षण प्राप्त है वरना किसी भी अतिक्रमी में इतना हौसला नहीं है कि एक बार ध्वस्त होने के बाद दोबारा अतिक्रमण कर ले।

वर्तमान में विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया और उनके पुत्र संदीप कासनिया क्षेत्र में सत्ता का केंद्र है इसलिये सरकारी सम्पति की लूट को रोकने की जिम्मेदारी भी उनकी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि पूर्व सत्ताधारियों से इतर कासनिया भूमाफियों से हमदर्दी नहीं रखेंगे।   

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सूरतगढ़। शहर के नये हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित प्राइवेट स्पोर्ट्स अकैडमी का मामला एक बार फिर से चर्चा में है। वार्ड नंबर 39 से भाजपा पार्षद हरीश दाधीच और राजीव चौहान ने इस मामले में नगरपालिका प्रशासन को ज्ञापन सौंप कर कार्रवाई की मांग की है।

ईओ पवन चौधरी को दिए गए ज्ञापन में दोनों पार्षद ने शहर के वार्ड नंबर-2 में हाउसिंग बोर्ड स्थित करोड़ों रुपए के बेशकीमती भूखंड पर अज्ञात लोगों पर अवैध स्पोर्ट्स अकादमी के संचालन का आरोप लगाया है। पार्षदों का आरोप है कि कलाम पार्क से स्टे खाली भूखंड पर हरियाणा स्पोर्ट्स अकैडमी नामक संस्था द्वारा अवैध रूप से अकादमी का संचालन किया जा रहा है। पार्षद दाधीच के अनुसार अकादमी संचालक अज्ञात व्यक्तियों ने भूखंड पर निर्मित चारदीवारी पर तारबंदी कर कब्जा जमा लिया है।

                           दोनों पार्षदों ने ईओ से तुरंत कार्रवाई कर भूखंड को अतिक्रमण से करवाने की मांग की है साथ मामले में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

अवैध अकेडमी संचालकों के आगे बेबस प्रशासन

शहर के नये हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में अवैध अकादमी का संचालन कर रहे ये लोग कितने प्रभावशाली हैं इस बात का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि पिछले दो सालों से अवैध अकादमी के संचालन का मामला मीडिया में उठाया जा रहा है। लेकिन आज तलक प्रशासन की हिम्मत नहीं हुई है कि वह सरकारी भूखंड पर संचालित हो रही इस निजी अकेडमी की तरफ आंख उठा कर भी देख सके।

             सरकारी भूखंड पर अवैध अकेडमी का संचालन कर रहे लोग इस कदर बेखौफ़ है कि  इन्होने इस विशाल भूखंड पर स्वंय का ताला जड़ दिया है। जिसके साथ चलते आसपास रहने वाले लोग भी इस भूखंड में प्रवेश नहीं कर सकते है। इस विशालकाय भूखंड का उपयोग लोग सुबह शाम घूमने के अलावा बच्चों के खेल मैदान के रूप में भी कर सकते हैं। इसके अलावा शादी समारोह के लिए भी यह भूखंड लोगों के उपयोग में आ सकता है लेकिन अकेडमी संचालकों के दबाब में पालिका प्रशासन मुंह में दही जमाये बैठा है।

RI कालूराम की दी जाँच, पर क्या निकलेगा नतीजा !

पार्षदों की शिकायत के बाद ईओ पवन चौधरी ने पालिका के आरआई कालूराम सेन को मौका निरीक्षण कर जांच रिपोर्ट के निर्देश दिए हैं। परन्तु ज्ञापन देने के बाद भी 2 दिन का समय बीत चुका है और अब तक आरआई द्वारा कोई मौका रिपोर्ट नहीं की गई है। ऐसे में इस मामले में पालिका प्रशासन के रवैये का अंदाजा लगाया जा सकता है। वैसे आरआई की रिपोर्ट आने के बाद भी  मामले का कोई हल निकलेगा इस बात की उम्मीद कम है। क्योंकि इससे पहले भी पूर्व ईओ शैलेंद्र गोदारा और विजयप्रताप सिंह के समय में भी मामले के तूल पकड़ने पर जांच का नाटक किया गया था। लेकिन दोनों दफा रिपोर्ट पर कार्रवाई फाइलों में दब कर रह गई।  

सत्ता पक्ष के नेताओं के संरक्षण के लगे थे आरोप 

गौरतलब है कि हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र का यह भूखंड पूर्व में खाली पड़ा था। लेकिन जब राज्य सरकार द्वारा शहरी ओलंपिक के आयोजन करवाए गए उस समय इस मैदान पर ही शहरी ओलंपिक के उद्घाटन का कार्यक्रम रखा गया था। इसी दौरान बड़ी चालाकी से हरियाणा स्पोर्ट्स अकादमी के संचालकों ने स्पॉन्सरशिप के बहाने भूखंड पर अकादमी का बोर्ड लगा दिया। इसके साथ ही भूखंड की चारदिवारी पर तारबंदी करवरकर लोगों का प्रवेश बंद कर दिया।

                                 इसके बाद से लगातार विरोध के बावजूद भूखंड पर एकेडमी संचालकों का कब्जा बना हुआ है। अकादमी संचालक भूखंड पर ताला जड़कर रखते हैं ताकि दूसरा कोई व्यक्ति इसमें प्रवेश नहीं कर पाए।भूखंड पर अवैध रूप से स्पोर्ट्स अकादमी के संचालक को लेकर यह चर्चा तब से अब तक बनी हुई है  कि तात्कालिक सत्ताधारी नेताओं का अकादमी संचालकों को संरक्षण का था। इसी वजह से लगातार विरोध शुरू उठने के बावजूद प्रशासन जमीन में गर्दन डालकर शुतुरमुर्ग बना रहा।

सत्ता परिवर्तन के बाद भूखंड के खाली होने की उम्मीद ?

 विधानसभा चुनाव के बाद शहर में सत्ता परिवर्तन के केंद्र बदल चुके हैं। पूर्व में सत्ता पर काबिज लोगों को जनता ने बुरी तरह से नकार दिया है। इसकी एक वजह इन नेताओं द्वारा भ्रष्टाचार और भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ लगातार उठती आवाजों की अनदेखी करना भी रहा। अवैध एकेडमी संचालन के खिलाफ उठती आवाजों को दबाना भी इसमें शामिल रहा था। बहरहाल अब क्योंकि सत्ता का केंद्र बदल चुका है और विपक्ष की भूमिका में भी नए चेहरे आ चुके हैं। ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि अब हालात बदलेंगे और दोनों पक्षों के नेता अवैध एकेडमी संचालक को संरक्षण न  देकर भूखंड को खाली कराकर नये निजाम का उदाहरण पेश करेंगे।

                          यहां दोनों पक्षों के नेताओं को बता यह समझ लेना चाहिए कि उनकी स्थिति टेलीविजन पर आने वाले प्रसिद्ध कार्यक्रम ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में हॉट सीट पर बैठे प्रतियोगी जैसी है। कार्यक्रम में किसी सवाल का उत्तर देने के लिए अक्सर अमिताभ बच्चन प्रतियोगी से कहते हैं कि आपका वक्त शुरू हो चुका है अब ! सूरतगढ़ विधानसभा की बात करें तो फिलहाल अमिताभ बच्चन की भूमिका में सूरतगढ़ की जनता है। इसलिए इस मामले में जनता के नजरिये से दोनों पक्षों के जिम्मेदार शीर्ष नेताओं का भी वक्त शुरू हो चुका है।

कासनिया क्योंकि सत्ता पक्ष के प्रतिनिधि है इसलिये उनकी जिम्मेदारी कुछ अधिक है वहीं डूंगरराम गेदर जो की विपक्ष की भूमिका में है वे भी अपनी जिम्मेदारी से बच नही सकते ! देखना होगा कि ये दोनों नेता इस मामले में जनता की उम्मीदों का उत्तर क्या देते है साथ ही देखना ये भी होगा कि सही जवाब का इनाम किसकी झोली में जायेगा ? 

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सूरतगढ़। कहते हैं कि ‘कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’। कांग्रेस प्रत्याशी डूंगरराम गेदर नें इस बात को फिर साबित कर दिया है। छठी बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे गेदर ने खुद भी कभी ऐसी बम्पर जीत का अंदाजा नहीं लगाया होगा।

मतगणना शुरू होने के बाद गेदर ने पहले राऊंड में जो बढ़त बनाई वो लगातार बढ़ती ही गई। 19 राउंड की काउंटिंग में एक बार भी ऐसा मौका नहीं आया जब कासनिया की वापसी के संकेत मिलते। दोपहर 2 बजे  के करीब जब नतीजा आया तो गेदर 116000 से ज्यादा वोट हासिल कर उसे चोटी पर खड़े थे जहाँ कासनिया सहित दूसरे प्रतिद्वंदी बौने दिखाई देने लगे थे। 50459 वोट की करारी हार से भाजपा प्रत्याशी राम प्रताप कासनिया और उनके समर्थकों के अलावा मील खेमे में भी निराशा छाई हुई है। वहीं सूरतगढ़ विधानसभा की सबसे बड़ी जीत दर्ज कर डूंगरराम गेदर और उनके समर्थक जश्न मनाने में व्यस्त है।

गेदर नहीं जनता लड़ रही थी चुनाव !

सूरतगढ़ विधानसभा का मुकाबला प्रारम्भ से कासनिया बनाम गेदर का था। लेकिन टिकट कटने के बाद मील परिवार के नेताओं का कासनिया के समर्थन में आना चुनाव का टर्निंग पॉइंट बन गया। कासनिया के समर्थन स्वीकार करने के निर्णय से क्षेत्र की जनता को बहुत बड़ा झटका लगा। क्यूंकि गत 5 सालों में शहर में अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और भय के माहौल से जनता आजिज आ चुकी थी। जनता इसके लिए कहीं ना कहीं मील परिवार के नेताओं को जिम्मेदार मान रही थी। इसी वजह से जब कांग्रेस ने मील परिवार की टिकट काटकर गेदर को थमाई तो जनता बेहद खुश नज़र आई। गेदर जो कल तक इलाके की राजनीति में जीरो थे वे अब जनता के लिए हीरो बन चुके थे।

दूसरी और मील परिवार का समर्थन लेने के बाद कासनिया आम जनता की नजर में खलनायक बन गए। इसके बाद कासनिया और मील ने इस गठबंधन को जाट अस्मिता से जोड़ कर प्रचारित करना शुरू कर दिया। ऐसे में क्षेत्र की जनता जो पिछले कुछ सालों से जाट प्रत्याशी के विरोध में गैर जाट को टिकट देने की मांग कर रही थी को जाट अस्मिता के नाम पर मील-कासनिया गठबंधन अखरने लगा।

इस बीच इन नेताओं के समर्थकों ने विभिन्न मंचो पर गेदर के विरोध के नाम पर धमाचौकड़ी मचाना शुरू कर दिया। जनता जो दूर से इस तमाशे को देख रही थी उसे लगने लगा कि जिन लोगों को वह सत्ता से दूर करना चाहती है वे लोग तो बैक डोर से वापसी करने जा रहे हैं। बस फिर क्या था ऐसे लोगों की सत्ता में संभावित वापसी के डर नें आमजन को गेदर के पक्ष में लामबध करना शुरू कर दिया। नतीजा ये रहा कि कासनिया-मील गठबंधन के मुकाबले के लिए गेदर की जगह क्षेत्र की जनता ने खुद मोर्चा संभाल लिया। इसके बाद जो कुछ हुआ है वह इतिहास है। जनता जो लोकतंत्र में निर्णायक की भूमिका में होती हैं उसने अपना फैसला गेदर के पक्ष में सुना दिया।

मील और कासनिया समर्थकों के नेगेटिव कैंपेन ने डुबोई लुटिया

सूरतगढ़ विधानसभा का इस बार का चुनाव अपने नेगेटिव कैंपेन के लिए भी याद रखा जाएगा। मील परिवार के समर्थन की घोषणा के बाद उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर गेदर के खिलाफ अभियान छैड़ दिया। सत्ता के संरक्षण में अतीत में अनीति का पर्याय बन चुके हाज़रीयों ने गेदर को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया से लेकर विभिन्न फ़्रंटों पर मोर्चे खोल दिये। देखते ही देखते खुद को वफादार साबित करने की कवायद में कासनिया के सिपाहसालार कहे जाने वाले लोग भी बिना सोचे समझे इस नेगेटिव कैंपेन कूद पड़े।

गेदर पर जातिवाद फैलाने, जिला परिषद में वोट का 25 लाख रूपये में सौदा करने, बसपा विधायकों को बेचने, जिला नही बनाने का अकेला जिम्मेदार साबित करने और राजियासर की जगह बीरमाना में कॉलेज और एक्सईएन कार्यालय ले जाने के आरोप जड़े गये। बसपा में रहते हुए उनके द्वारा दिए गए भाषणों और रिश्तेदारों के गेदर के विरोध के वीडियो भी चुनाव के मौके पर प्रसारित किए गए।

विरोधी यही नहीं रुके उन्होंने गेदर के जाति-समुदाय के लोगों के ब्राह्मण-बनिया-राजपूत समाज को कौसने के वीडियो भी जमकर वायरल किए गए ताकि किसी ने किसी तरह से वोटों का ध्रुवीकरण किया जा सके। लेकिन गेदर सधे हुए राजनीतिज्ञ की तरह न केवल खुद चुप्पी साधे रहे बल्कि समर्थकों को किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से रोके रखा। गेदर और उनके समर्थकों के चुप रहने का नतीजा यह हुआ कि जनता ने गेदर के पक्ष में जमकर मतदान कर तमाम आरोपों को खारिज कर दिया।

मील गठबंधन से कासनिया को नफा या नुकसान ?

चुनाव से पहले कासनिया द्वारा मील परिवार के समर्थन को मास्टर स्ट्रोक के रूप में प्रचारित किया गया था। हालांकि तब भी कई लोगों ने इस गठबंधन का विरोध किया था लेकिन कासनिया और मिल के समर्थक इसे जस्टिफाई करने में लग रहे। लेकिन चुनाव परिणाम कासनिया के मील परिवार के समर्थन के निर्णय को सेल्फ गोल बता रहे है। मील परिवार की कोशिशें से कासनिया के कितने वोट बढ़े इसका तो कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। लेकिन मील कासनिया गठबंधन के रिएक्शन में कितने वोट गेदर के बढ़े यह अंदाजा लगाया जा सकता है।

चुनाव की शुरुवात में गेदर को करीब 85 से 90 हज़ार वोट मिलने की उम्मीद हर कोई कर रहा था। ऐसे में कासनिया जो पिछले चुनाव में करीब 70000 वोट लेकर जीते थे उनके लिए यह मुकाबला मुश्किल दिख रहा था। लेकिन चापलूसों की सलाह पर मील परिवार के समर्थन लेने के कासनिया के निर्णय ने मुकाबले को एक तरफ कर दिया। कासनिया मील गठबंधन की नाराजगी ने गेदर के वोटों का आंकड़ा जो 90 हज़ार के करीब था को बढ़ाकर एक लाख 16 हज़ार के पार पहुंचा दिया। वहीं कासनिया 69 हज़ार के पिछले आंकड़े से घटकर 66 हज़ार पर सिमट गये। 

                      कुल मिलाकर जनता के आक्रोश की अनदेखी मील परिवार के साथ साथ कासनिया को भारी भारी पड़ गई। वहीं सलाहकारो ने अपने निजी स्वार्थ सिद्ध करने के लिए मील नेताओं का समर्थन दिलाकर कासनिया के जीवन की सबसे बड़ी हार की पटकथा लिख दी।

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सूरतगढ़। भाजपा प्रत्याशी राम प्रताप कासनिया ने गुरुवार को जन आशीर्वाद रैली कर अपनी ताकत दिखाई। पुरानी धान मंडी में आयोजित इस रैली में हजारों की संख्या में कासनिया के समर्थक और पार्टी के कार्यकर्ता मौजूद रहे। रैली में कुर्सियों की संख्या कम होने के चलते बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को दरी पर बैठना पड़ा। वहीं सैकड़ो की संख्या में कार्यकर्ता कार्यक्रम के दौरान कई घंटे तक खड़े रहे। रैली के दौरान भाजपा के पूर्व विधायक अशोक नागपाल, किसान नेता राकेश बिश्नोई, मोहन पूनिया  सहित बड़ी संख्या में भाजपा नेता व संगठन के पदाधिकारी मंच पर मौजूद दिखे। इस दौरान वक्ताओं ने लोगों से भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट और समर्थन की अपील की।

कासनिया नें सभा मे किये कई वादे

 जन आशीर्वाद रैली को संबोधित करते हुए भाजपा प्रत्याशी रामप्रताप कासनिया ने कहा कि 5 साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने अनेक विकास कार्य करवाए। उन्होंने कहा कि उनके विरोधी यह प्रचार कर रहे हैं कि उनकी चलती नहीं लेकिन यह सच नहीं है। उन्होंने इस चुनाव को अपना आखिरी चुनाव बताते हुए कमल के फूल के निशान पर वोट देने का आह्वान किया।

विधायक पुत्र संदीप कासनिया की लॉन्चिंग

जन आशीर्वाद सभा में भाजपा प्रत्याशी और विधायक राम प्रताप कासनिया के पुत्र संदीप कासनिया भी पहली बार भाषण देते नजर आए। अपने भाषण में संदीप कासनिया ने पिता राम प्रताप कासनिया का अंतिम चुनाव बताते हुए जनता से उन्हें जीत का तोहफा देने की अपील की। इस अवसर पर एक मंझे हुए राजनीतिज्ञ की तरह उन्होंने सिख समुदाय की भाजपा से नाराजगी पर बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री भी किसान आंदोलन को लेकर सिख समुदाय से माफी मांग चुके हैं। वहीं पिछले दिनों हुई तिजारा की घटना के लेकर भी उन्होंने सिख समुदाय से प्रकरण को भूलकर भाजपा को समर्थन देने के अपील की।

               सभा में विधायक पुत्र के भाषण को  राजनीतिक हलकों मे विधायक राम प्रताप कासिनिया द्वारा अपने पुत्र की लांचिंग के रूप में देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि क्योंकि विधायक राम प्रताप कासनिया का यह अंतिम चुनाव है ऐसे मे भविष्य में परिवार की राजनीतिक विरासत संभालने के लिए संदीप कासनीया को राजनीति में उतारने की यह शुरुआत है। हालांकि पूर्व में विधायक रामप्रताप कासनिया अपने पुत्र को राजनीति में उतारने के सवालों को टालते रहे हैं।

कासनिया नें रोड शो कर किया शक्ति प्रदर्शन

जन आशीर्वाद रैली के बाद भाजपा प्रत्याशी रामप्रताप कासनिया ने शहर के विभिन्न मार्गो से होते हुए रोड शो निकालकर शक्ति प्रदर्शन किया। रोड शो में बड़ी संख्या में कासनिया के समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता पार्टी के झंडे डंडे और बैनर लिए सड़कों पर नजर आए। रोड शो में हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के चलते एक बारगी शहर की यातायात व्यवस्था लड़खड़ा गई। रोड शो के दौरान गाड़ी में सवार कासनिया ने लोगों का अभिवादन करते हुए वोट और समर्थन की अपील की। इस मौके पर अनेक स्थानों पर रोड शो का पुष्प वर्षा कर स्वागत भी किया गया।

रैली में भीड़ के आंकड़ों को लेकर चर्चाऐं गर्म

 भाजपा प्रत्याशी राम प्रताप कासनिया की रैली में भीड़ को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। भाजपा के समर्थक और कार्यकर्ता रैली में 5 से 7 हज़ार की भीड़ का दावा कर रहे हैं। लेकिन एजेंसी और विश्लेषकों की माने तो सभा में करीब साढ़े तीन हज़ार लोग मौजूद थे।

           जैसा कि सभी राजनितिक रैलियों में होता है बाहर से भीड़ बुलाने के आरोप लगते हैं। इस रैली में भी जाखड़ावाली, पीलीबंगा और दूसरे क्षेत्रों से भीड़ आने की बात सामने आई। सोशल मीडिया पर बाहर से आए हुए वाहनों के वीडियो भी वायरल किए गए। लेकिन इसके बावजूद रैली मे साढ़े 3 हज़ार की भीड़ के आंकड़े को भी कम नहीं आँका जा सकता क्यूंकि इन दिनों की जहां अपने खेतों में व्यस्त है वही गुरुवार को अबूझ सावे के चलते भी संभव है कि अनेक लोग रैली  में शामिल नहीं हो पाए। लेकिन फिर भी भाजपा प्रत्याशी की गत चुनाव की रैली और निर्दलीय प्रत्याशी राजेंद्र भादू की 2 दिन पूर्व हुई रैली से तुलना की जाए तो रैली मे जुटी भीड़ को कम ही माना जायेगा।

              वैसे चुनाव प्रचार खत्म होने से पहले हुई यह रैली कितना असर विधानसभा के मतदाताओं पर डालती है यह आने वाला वक्त ही तय करेगा।

रैली मे नज़र नहीं आई भाजपा के बड़े नेताओं की सक्रियता

भाजपा प्रत्याशी रामप्रताप कासनिया की रैली में मंच पर हालांकि टिकट की दावेदारी जाता रहे कई नेता विराज मान दिखे। लेकिन रैली मे भीड़ जुटानें को लेकर उनके प्रयास नज़र नहीं आये। जिस तरह से प्रचार अभियान के दौरान इन नेताओं ने मुंह दिखाई की रसम निभाई है उसको देखकर लगता नहीं है कि इन नेताओं नें अपने स्तर पर कार्यकर्ताओं को रेली को सफल बनाने के लिए बुलाया होगा। रोड़ शो के दौरान भी अधिकांश नेता बस फ़ौरी तौर पर नज़र आये उस पर रैली में संदीप कासनिया की लॉन्चिंग नें भी कुछ नेताओं का मूड अपसेट कर दिया। कुल मिलाकर भाजपा के बड़े नेताओं की चुनाव प्रचार मे भूमिका यह बताने के लिए काफी है कि भाजपा मे टिकट वितरण को लेकर अभी कड़वाहट कम नहीं हुई है

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सूरतगढ़। बचपन में एक लकड़हारे की कहानी सुनी थी। जिसमें एक लकड़हारा एक पेड़ की जिस डाल पर बैठा था उसी को काट रहा था। पास से गुजर रहे लोगों नें लकड़हारे को समझाते हुए कहा कि तुम यह क्या कर रहा है। लेकिन लकड़हारा नहीं माना और उसी डाल को काटता रहता है। नतीजा ये होता है कि पेड़ की डाल के साथ लकड़हारा भी जमीन पर आ गिरता है। शहर की राजनीति में बड़ा दखल रखने वाले मील परिवार के नेताओं की हालत पिछले कुछ समय से कहानी के लकड़हारे जैसी ही हैं। कांग्रेस पार्टी से मिली ताकत के बल पर शहर में राज करने वाले मील परिवार के नेताओं नें जब टिकट कटने के बाद कांग्रेस में रहकर ही बगावत शुरू की तभी कहानी के लकड़हारे की तरह उनका जमीन पर गिरना तय हो गया था।

                  गुरुवार को कांग्रेस पार्टी ने पूर्व विधायक गंगाजल मील, पंचायत समिति प्रधान हजारी राम मील, पंचायत समिति सदस्य हेतराम मील और गत विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रत्याशी रहे हनुमान मील को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इन नेताओं को पार्टी नें प्राथमिक सदस्यता से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। कांग्रेस पार्टी के इस आदेश से राजस्थान की राजनीति में बड़ा दखल रखने वाले मील परिवार को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस में रहते हुए भाजपा के समर्थन का बेवकूफी भरा निर्णय एक तरह से मील परिवार की किरकिरी की वजह बन गया। मील परिवार के नेताओं के बारे में आमधारणा है कि इस परिवार के नेता चाटुकारों और मतलब परस्त लोगों की सलाह पर काम करते है। टिकट कटने के बाद हुए घटनाक्रम नें एक बार फिर ये साबित कर दिया है।

भाजपा में शामिल होकर करना चाहिए था समर्थन !

कांग्रेस नेता हनुमान मील की टिकट कटने के बाद मील परिवार के नेताओं ने आनन फ़ानन में बैठक बुला ली। महाराजा रिसोर्ट में बुलाई गई इस बैठक में पंचायत समिति सदस्य हेतराम मील नें भाजपा प्रत्याशी रामप्रताप कासनिया को समर्थन देने की घोषणा कर दी। एकाएक हुए इस घटनाक्रम से बैठक में आए मील परिवार के समर्थकों को भी झटका लग गया। यही वजह रही कि इस घोषणा के साथ ही अनेक लोग बैठक छोड़कर चले गए। जिसका मतलब है कि मील परिवार ने अपने समर्थकों को विश्वास में लिए बिना ही अपने स्तर पर यह निर्णय ले लिया था। बहरहाल मील परिवार जो राजस्थान की राजनीति में भी बड़ा दखल रखता है उसके नेताओं का इतने हल्के तरीके से भाजपा के समर्थन में जा खड़ा होने से हर कोई हैरान था।

बेहतर होता कि मील परिवार के नेता दिल्ली या जयपुर में भाजपा के बड़े नेताओं की मौजूदगी में पहले भाजपा में विधिवत तरीके से शामिल होते और इसके बाद भाजपा प्रत्याशी कासनिया को समर्थन की घोषणा करते। अगर मील परिवार के नेता ऐसा करते तो प्रदेश भर में उनके बड़े राजनीतिक रसूख का मैसेज जाता और कांग्रेस से निष्कासन के आदेश से हुई किरकीरी भी नहीं होती। लेकिन चाटुकारों नें अपने नंबर बनाने के चक्कर में मील परिवार के नेताओं को उल्लू बनाकर कासनिया को समर्थन की घोषणा करवाकर जग हँसाई का पात्र बना दिया।

चुनाव लड़ना या फिर पार्टी में रहना था बेहतर विकल्प ?

वैसे इस पूरे प्रकरण में विधानसभा चुनाव की टिकट कटने के बाद मील परिवार के पास कई बेहतर विकल्प थे। सबसे बेहतर होता कि पिछले 5 साल से चुनाव की तैयारी कर रहे हनुमान मील चुनाव का सामना करते। हालांकि इस फैसले में उनकी हार तय थी लेकिन यहां पर अगर वे 25-30 हज़ार वोट लेने में सफल रहते तो वे डूंगरराम गेदर को रोकने में कामयाब जरूर हो जाते। इसके अलावा इस विकल्प का एक फायदा यह भी होता कि पिछले 5 साल की मेहनत से जो समर्थकों और कार्यकर्ताओं की फौज उन्होंने तैयार की थी वह भविष्य में भी उनके साथ खड़ी रहती। जिसका फायदा आने वाले समय में उनको निश्चित तौर पर होता।

लेकिन गेदर को हराने की हनक में परिवार के दूसरे नेताओं के साथ हनुमान मील भी शामिल हो गये और 5 साल में कड़ी मेहनत से कमाई गई कार्यकर्ताओं और समर्थकों की पूंजी भाजपा प्रत्याशी की झोली में डाल दी। कहने का तात्पर्य यह है कि हनुमान मील नें राजनीति की अपनी दुकान खाली कर दूसरों की दुकान जचा दी है। अब हनुमान मील भविष्य में भाजपा ज्वाइन भी कर लेते हैं तो भी इन समर्थकों और कार्यकर्ताओं के लिए कासनिया को छोड़कर हनुमान मील की वफादारी में खड़ा रहना संभव नहीं होगा। क्यूंकि अगले पांच साल तक शहर में राजनीतिक ताकत कासनिया के ही पास होंगी। 

                    वैसे हनुमान मील के पास एक विकल्प यह भी था कि वे कांग्रेस में ही रहते और गेदर को जिताने में सहयोग करते। अगर वे ऐसा करते तो उनकी कांग्रेस में भविष्य की राजनीति के द्वार खुले रहते। अपने राजनीतिक दबदबे के चलते गेदर के विधायक बनने के बावजूद भी मील परिवार का राजनीतिक रसूख भी क़ायम रहता। 

हनुमान मील का हुआ सबसे ज्यादा राजनितिक नुकसान !

मील परिवार के आनन फानन में भाजपा को समर्थन के निर्णय से सबसे ज्यादा अगर किसी को नुकसान हुआ है तो वे हनुमान मील है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि आने वाले दिनों में हनुमान मील अगर भाजपा में शामिल भी होते हैं तो भी भाजपा में रहकर राजनीति करना उनके लिए आसान नहीं होगा। वैसे भी भाजपा प्रत्याशी रामप्रताप कासनिया को जो जानते हैं उन्हें पता है कि पार्टी में उनके रहते कोई दूसरा चौधरी नहीं हो सकता। पार्टी में उनकी मर्जी के बगैर पत्ता भी नहीं हिल सकता। वैसे भी चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए अपने भाषणों में भी कासनिया नें मीलों के समर्थन को लेकर अपना स्टैंड साफ कर दिया है।

साफ है कि कासनिया की भविष्य की राजनीति में मील और उनके समर्थकों की कोई जगह नहीं है। कहने का मतलब है कि कासनिया के समर्थन से जीत कासनिया या गेदर की ही होगी लेकिन हार निश्चित तौर पर हनुमान मील की हो चुकी है।

                   इसके अलावा भाजपा के बारे में एक बात साफ है कि भाजपा ऐसा समुद्र है जिसमें उतरने के बाद बड़े बड़े जहाजों को भी रास्ता नहीं मिलता और वे इस समुद्र में दफन हो जाते हैं। क़हने का मतलब है कि भाजपा में सरवाइव करना हनुमान मील के लिए बेहद मुश्किल रहने वाला है। 5 साल बाद कांग्रेस में तो फिर भी डूंगरराम गेदर के बाद हनुमान मील ही टिकट के प्रबल दावेदार होते। लेकिन भाजपा में रामप्रताप कासनिया के बाद संदीप कासनिया, राजेंद्र भादू, पूर्व विधायक अशोक नागपाल, राकेश बिश्नोई, राहुल लेघा जैसे कई चेहरे मुकाबले में होंगे जिनकी चुनौती पर पार पाना राजनितिक तौर पर हासिये पर चल रहे मील परिवार और हनुमान मील के लिए आसान नहीं होगा।

क्या हनुमान मील की इच्छा के बगैर लिया गया भाजपा के समर्थन का निर्णय ?

इस पूरे प्रकरण में जिस तरह से हनुमान मील पर्दे के पीछे रहे हैं उससे यह लगता है कि मील परिवार के निर्णय में हनुमान मील की रजामंदी नहीं थी। क्योंकि महाराजा रिसोर्ट में हेतराम मील नें जब भाजपा प्रत्याशी को समर्थन की घोषणा की थी उस समय हनुमान मील मौजूद रहे थे। इसके बाद जब हनुमान मील से भाजपा में शामिल होने के बारे में पूछा तो उन्होंने कांग्रेस में रहने की बात कही थी। इसके बाद भी जब मील परिवार के सभी नेता खासकर हेतराम मील भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में खुलकर जनसभा  कर रहे थे तब भी हनुमान मील लगातार चुप्पी धारे हुए थे। इसका यह भी मतलब है कि हनुमान मील तो अपना राजनीतिक भविष्य कांग्रेस में देख रहे थे लेकिन परिवार के दूसरे नेताओं ने बिना उनकी राय मशवरे के भाजपा में शामिल होने का निर्णय कर लिया।

    बहरहाल इस पूरे घटनाक्रम से राजनीतिक तौर पर नुकसान हनुमान मील का काफ़ी हुआ है। मील परिवार के राजनीतिक भविष्य के रूप में देखे जाने वाले हनुमान मील के लिए अब आत्मचिंतन का समय है। हनुमान मील अभी युवा है और उन्हें भविष्य में और भी मौके मिल सकते हैं। इसलिये उन्हें किसी को जिताने और हराने की हनक में शामिल होने की बजाय खुद के भविष्य के लिए चिंतित होने की जरूरत है।

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सूरतगढ़। सूरतगढ़ विधानसभा से वर्तमान विधायक रामप्रताप कासनिया को टिकट देने के पीछे की सबसे बड़ी भाजपा की गैर जाट के मुकाबले जाट प्रत्याशी को उतारने की रणनीति थी। लेकिन भाजपा आलाकमान का यह फैसला अब फेल होता दिख रहा है। क्यूंकि तमाम प्रयासों के बावजूद सूरतगढ़ विधानसभा का मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी गेदर के पक्ष में जाता दिख रहा है। सट्टा बाजार में गेधर की जीत के भाव गिरकर 15 पैसे तक जा पहुंचे हैं जिसका मतलब है कि सटोरिये इस मुकाबले को एक तरफा मान रहे है।

भाजपा और कासनिया अब तक अपने तमाम प्रयासों के बावजूद इस मुकाबले को अगर गैर जाट वर्सेस जाट बनाने में कामयाब नहीं हो पाए हैं तो इसके पीछे 2 प्रमुख वजह भी है। इसमें पहली वजह है चुनाव मैदान में कई जाट प्रत्याशियों का उतरना। सूरतगढ़ विधानसभा के मुकाबले को भाजपा गैर जाट वर्सेस जाट नहीं बना पा रही है तो इसकी एक वजह चुनाव में तीन अन्य जाट प्रत्याशियों का उतरना भी है।

पूर्व विधायक राजेंद्र भादू जो इलाके की राजनित्ति के प्रमुख परिवार से आते है निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे हैं तो दूसरी और उनके भाई महेंद्र भादू भी बसपा की टिकट पर चुनाव मैदान में है। इन दोनों नेताओं के अलावा मिल परिवार के प्रमुख नेता और पूर्व जिला प्रमुख पृथ्वीराज मिल भी जननायक जनता पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ रहे हैं। क्योंकि यह तीनों जाट नेता इलाके की राजनीति में गहरा प्रभाव रखते हैं और साथ ही साथ जाट परिवारों के साथ उनके राजनीतिक और पारिवारिक संबंध भी है। ऐसे में इलाके के जाट वोटर के लिए किसी भी एक प्रत्याशी के साथ लामबंद होना संभव नहीं रहा है। अपने-अपने व्यक्तिगत संबंधों के चलते यह सभी जाट नेता जाटों के वोट बैंक में बटवारा करने में कामयाब हो रहे हैं। जिसका नुकसान कासनिया को होना तय है।

इसके अलावा क्योंकि राजेंद्र भादू तो खुद बीजेपी से जुड़े हैं और भाजपा की टिकट पर विधायक भी रह चुके हैं। ऐसे में भादू को जितना वोट मिलेगा उसमे एक बड़ा हिस्सा भाजपा के कोर वोटर का ही होगा। ऐसे में भाजपा और कासनिया को प्रत्यक्ष तौर पर बड़ा नुकसान हो रहा है जिसका खामियाजा कासनिया को भुगतना ही पड़ेगा।

कासनिया के 5 साल के कार्यकाल से खुश नहीं जाट वर्ग

कासनिया गेदर के मुक़ाबले का गैर जाट वर्सेस जाट मुक़ाबले में तब्दील नहीं होने की दूसरी प्रमुख वजह है कासनिया का विधायक के रूप में पिछले 5 साल का कार्यकाल। पिछले कार्यकाल में विधायक कासनिया के रवइये के चलते बड़ी संख्या में जाट नेता और परिवार फिलहाल नाराज चल रहे हैं। अपने कार्यकाल में कासनिया नें मदद की उम्मीद में पहुंचे अनेक परिवारों के काम नहीं करवाए। वहीं राजनीति के चलते कई मामलों में कासनिया नें विपक्षी जाटों को घेरने का भी काम भी किया। इसी वजह से अब बड़ी संख्या में जाट परिवार कासनिया के खिलाफ खड़े दिख रहे है। इन परिवारों का मानना है कि जब कासनिया को जरूरत नहीं थी तब कासनिया जाटों के कोई काम नहीं आये और अब जब जरूरत आन पड़ी है तो जाटों से वोट की मांग कर रहे है। इस वजह से कई जाट नेता तो कासनिया का खुलकर विरोध कर रहे हैं और कांग्रेस प्रत्याशी डूंगरराम गेदर के खेमे में खड़े दिख रहे है।

गैर जाट वर्सेस जाट फॉर्मूले से टिकट वितरण का हो रहा साइड इफेक्ट

यहां यह भी गौरतलब है कि गैर जाट वर्सेस जाट के फॉर्मूले से टिकट वितरण का भाजपा को साइड इफेक्ट भी हो रहा है। क्योंकि लम्बे समय से भाजपा में गैर जाट प्रत्याशी को टिकट देने की मांग उठ रही थी। लेकिन कांग्रेस द्वारा गेदर को टिकट देने की घोषणा के बाद भाजपा नें गैर जाट के मुकाबले में जाट प्रत्याशी को मैदान में उतरने की रणनीति के तहत कासनिया को टिकट दे दी। जिसके चलते आम जनता में और अंदरखाने भाजपा में भी टिकट का विरोध हो रहा है। भाजपा के अगली पीढ़ी के टिकट के दावेदार गैरजाट नेताओं को कासनीया की विदाई में ही अपना भविष्य नज़र आ रहा है इसलिये वे औपचारिकता मात्र के लिए चुनाव प्रचार में दिख रहे है।

मूल ओबीसी वर्ग मतदाता हो रहा गेदर के पक्ष में लामबंद

टिकट कटने के बाद मील परिवार के रूप में जाट नेताओं के कासनिया को समर्थन से उल्टा रिएक्शन हो रहा है। इस बेमेल कॉम्बिनेशन का एक असर ये हुआ है कि एक तरफ जाट विरोध का वोट गेदर के पक्ष में जा खड़ा हुआ है वही मूल ओबीसी समाज भी गेदर के पक्ष में लामबंद हो गया है। मूल ओबीसी जातियां जिनमे कुम्हार प्रजापति समाज के अलावा नाई, सुथार, लुहार, सोनी जैसे कई समाजों का गेदर के पक्ष में झुकाव कासनिया के लिए खतरे की घंटी बन गया है।  

                  कुल मिलाकर भाजपा का गैर जाट के मुकाबले में जाट प्रत्याशी को मैदान में उतारने का फैसला अभी कामयाब होता नहीं दिख रहा है। वैसे अगर सूरतगढ़ विधानसभा के वोटर के जातीय समीकरण को देखें तो यह साफ नजर आता है कि भाजपा के पक्ष में अगर जाट वोट बैंक का शत प्रतिशत ध्रुवीकरण हो जाए तो भी फिलहाल गेदर की चुनौती पर पाना कासनिया के लिए आसान नहीं है।  

                 

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सूरतगढ़। विधानसभा चुनावों के नतीजे 3 दिसंबर को घोषित होंगे। लेकिन सट्टा बाजार नें सूरतगढ़ विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी डूंगरराम गेदर की जीत पर मोहर लगा दी है। सट्टा बाजार में गेदर की जीत के भाव लगातार काम हो रहे हैं। जिसका मतलब है कि सट्टा बाजार गेदर की जीत तय मान रहा है। अभी सट्टा बाजार में गेदर की जीत के भाव करीब 20 पैसे हैं। भाजपा प्रत्याशी रामप्रताप कासनिया को जब टिकट की घोषणा की गई थी उस समय दोनों प्रत्याशियों के भाव 90 पैसे थे जिसका सीधा सा अर्थ है कि टिकट की घोषणा के बाद से भाजपा प्रत्याशी रामप्रताप कासनिया लगातार कमजोर हो रहे हैं।

विधानसभा क्षेत्र से कासनिया जिस तरह के समर्थन की उम्मीद कर रहे थे वो समर्थन टिकट घोषणा के बाद उन्हें आम जनता से नहीं मिल रहा है। शुरू में कासनिया के समर्थकों को लग रहा था कि लोग दीपावली के त्योहार के चलते व्यस्त है। लेकिन दीपावली के बाद भी भाजपा प्रत्याशी के लिए लोगों का जिस तरह का ठंडा रिस्पांस शहर के विभिन्न वर्गों में देखने को मिला उसने भाजपा खेमे को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

कासनिया से खुश नहीं है भाजपा समर्थक और आम जनता !

सच्चाई यह है कि भाजपा प्रत्याशी के रूप में कासनिया की उम्मीदवारी को लोग पचा नहीं पा रहे हैं। कासनिया के 5 साल के कार्यकाल से आम जनता ही नहीं पार्टी कार्यकर्ता भी खुश नहीं है। ‘मेरी चाले कोनी’, ‘मेरी सरकार कोनी’ जैसे बहाने बनाकर कासनिया नें अपना टाइम तो पास कर लिया लेकिन जनता 5 साल परेशान होती रही। मामला सीवरेज से शहर की बदहाली या भ्रष्टाचार का हो या फिर अतिक्रमणो का हो विधायक कासनिया अपनी जिम्मेदारी को भूलकर 5 साल तक चादर तानकर सोये रहे।

मामला नगरपालिका में पट्टे नहीं बनने का हो या फिर दूसरी समस्याओं का 4 बार के विधायक और जमीनी नेता का तमगा लिए कासनिया की बेशर्म चुप्पी क़ायम रही। किसान खाद से लेकर क़ृषि कनेक्शनो और फ़सल बीमा के लिए भटकते रहे, मगर कासनिया और भाजपा के मंडल कभी भी खुलकर किसानों के लिए लड़ते नहीं दिखे ? इन सबके अलावा पिछले 5 सालों में हुई जमीनों की बंदरबाँट, बेलगाम होते भूमाफियों के खौफ और नगरपालिका व पंचायत समिति में भ्रष्टाचार और तानाशाही से आम जनता का दम घुट रहा था।

गठबंधन कर मारी पैरों पर कुल्हाड़ी

इन चुनावों में जनता भाजपा के भावी विधायक से इस कुशासन को उखाड़ कर मील परिवार के शासन के अंत की घोषणा की उम्मीद कर रही थी। लेकिन राजनीतिक स्वार्थवश और चाटुकारों के सलाह पर कासनिया ने वोट के लालच में मील परिवार के नेताओं से गठबंधन कर लिया। इलाके की जनता जो मील परिवार की टिकट कटने से हुई राजनीति पराजय का जश्न मनानें में व्यस्त थी, अचानक कासनिया मील की जुगलबंदी नें इस जश्न में खलल पैदा कर दिया है। इस कदम ने एक और जहां कासनिया के ईमानदार नेता का रहा सहा भरम भी तोड़ दिया है तो दूसरी और जनता की इस आशंका को सही साबित कर दिया की 5 साल से जो चल रहा था उसमे कासनिया की रजामंदी थी।

यही वजह है कि अब कासनिया में जनता को उन्ही लोगों का अक्स दिखने लगा है जिन्हे वह देखना नहीं चाहती है। जनता को ये लग रहा है कि भाजपा और कासनिया को दिया गया एक-एक वोट भ्रष्टाचार और तानाशाही के भस्मासूर फिर से जिंदा कर देगा। वैसे भी कासनिया भी कई ऐसे लोगों से घिरे है जिनकी छवि भी अतिक्रमियों और भूमाफियों की है। जिसके चलते भी आमजन कासनिया से दूरी बनाये हुए है।

            कुल मिलाकर संघर्ष और ईमानदारी की उम्मीद कर रही इलाके की जनता को कासनिया से अब तक निराशा ही मिली है। जिसके चलते अब चुनावों में मील परिवार का समर्थन और ‘मेरी तो चाले कोनी‘ और ‘मेरी सरकार कोनी‘ जैसे जुमले और कासनिया के गले की हड्डी बन गए हैं। कासनिया को अब इन जुमलों और गठबंधन पर बार-बार सफाई देनी पड़ रही है लेकिन जनता पर माफ करने के मूड में दिखाई नहीं दे रही। चुनाव प्रचार के दौरान फरीदसर, जैतसर, सरदारगढ़ सहित गाँवो में कासनिया का भारी  विरोध इस बात को साबित कर रहा है। फरीदसर गांव के एक वायरल वीडियो में ग्रामीणों नें कासनिया को गांव में घुसने नहीं देने की चेतावनी तक दे डाली है।

वहीं चुनाव प्रचार शुरू होने के साथ ही कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में स्वतस्फूर्त तरीके से जनता का खड़ा होना ये बताता है कि कासनिया की जमीन खिसक चुकी है। भाजपा का गढ़ माने जाने वाले शहरी क्षेत्र की आम जनता का दूसरे विकल्प पर विचार करना भाजपा और कासनिया के लिए खतरे की घंटी है। हमें लगता है कि जनता वर्षों से चल रहे इस निज़ाम को उखाड़ने के लिए बेताब है जिसे रोकना अब किसी भी गठबंधन के लिए आसान नहीं होगा !

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कांग्रेस भाजपा से नाराज लोगों को मील से उम्मीद,वार्डो की नुक्कड़ सभाओं में जुट रही भारी भीड़

सूरतगढ़। ग्रामीण इलाके के साथ-साथ शहरी क्षेत्र में भी मतदाता पृथ्वीराज मील के पक्ष में खुला समर्थन करने लगे हैं। कांग्रेस और भाजपा की ओछी राजनीति से उकताए शहर वासियों ने ‘चाबी’ के पक्ष में खुला समर्थन देना शुरू किया है।

भगतसिंह चौक पर आयोजित जनसभा का दृश्य

सोमवार देर शाम मील के समर्थन में भगत सिंह चौक पर विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर वार्डवासियों और व्यापारियों ने मील का फूल मालाएं पहनकर जोरदार स्वागत किया। इस अवसर पर पृथ्वी मील ने कहा कि भले ही पैतृक परिवार ने मुझे भुला दिया है लेकिन शहर ने जो दुलार मुझे दिया है उसका कर्ज में जीवन भर नहीं उतर सकता। सूरतगढ़ को भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था से मुक्ति दिलाने के लिए मैं अंतिम सांस तक संघर्षरत रहूंगा। सरकारों ने संभावनाओं से भरे हमारे शहर की हमेशा अनदेखी की है, अब हम अपनी ‘चाबी’ के साथ राजस्थान की सत्ता का ताला खोलेंगे।

पृथ्वीराज मील नें सभा को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छ राजनीति इस समय वक्त की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सूरतगढ़ में जिस तरह से एक दूसरे को गिराने के लिए जिस तरह के गठबंधन किया जा रहे हैं उनकी सच्चाई जनता जानती है। ये गठबंधन केवल और केवल स्वार्थ के गठबंधन है जिसे जनता का भला नहीं होने वाला। पृथ्वीराज मील नें लोगों को विधानसभा चुनाव में स्वच्छ राजनीति के लिए वोट करने की अपील की।

केलों से तौलकर मील को दिया समर्थन

कार्यक्रम में भगत सिंह चौक के गणमान्य नागरिकों ने मंच से पृथ्वी मील को खुला समर्थन देकर विजय बनाने की अपील की। इसके बाद वार्डवासियों ने मील को केलों से तौला। इस अवसर पर कामरेड मदन ओझा, शक्ति सिंह भाटी, शिव ओझा, राजू मूंधड़ा, आनंद ओझा, हीरालाल चौहान, महावीर भोजक, सत्यनारायण ओझा, किशन लाल ओझा, सिंह भाटी, सवाई सिंह, ओम जी हलवाई, सुरेंद्र पेड़ीवाल, जगदीश भोजक, जगदीश खेमका, शिव सारड़ा, नवल भोजक, दुर्गा शंकर सैनी, लक्ष्मीकांत शर्मा, दिनेश मुंधड़ा, कपिल मूंधड़ा, विक्की सरावगी, इमरान खान व माहेश्वरी समाज महिला मोर्चा की मधु मूंधड़ा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में उपस्थित मातृशक्ति ने पृथ्वी मील के पक्ष में खुला समर्थन दिया।

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सूरतगढ़। विधानसभा चुनावों के नतीजे यूं तो 3 दिसंबर को आयेंगे। लेकिन पूर्व विधायक राजेंद्र भादू के बागी तेवर फिलहाल भाजपा प्रत्याशी को दौड़ से बाहर करते नजर आ रहे हैं। गुरुवार को नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन भाजपा खेमे द्वारा भादू को मनाने के तमाम प्रयास किए गए लेकिन पूर्व विधायक टस से मस नहीं हुए। जिलाध्यक्ष शरणपाल सिंह सहित भाजपा के तमाम नेता दोपहर 3:00 तक भादू निवास पर डेरा डाले रहे लेकिन भादू ने इन नेताओं को घास तक नहीं डाली।

प्रेस वार्ता में कासनिया पर सवाल, कहा : व्यवस्था परिवर्तन के लिए लड़ रहा चुनाव

शुक्रवार शाम 4:00 बजे भादू ने अपने निवास पर प्रेस वार्ता कर चुनाव प्रचार अभियान आगाज कर दिया। भादू ने कहा कि वे शहर में पिछले 5 साल से चल रही बेलगाम व्यवस्था में परिवर्तन चाहते हैं। पूर्व विधायक मील पर भूमाफियाओं को शय देने और भ्रष्टाचार को बढ़ाने का आरोप लगाया। भादू ने कहा कि पिछले 5 साल से जब शहर जल रहा था तब विधायक और उनका नगरमंडल हाथ पैर हाथ धरे बैठा रहा। किसान और आम जनता पिस्ती रही लेकिन मेरी तो चलती नहीं, मेरी तो सरकार नहीं है जैसे बहाने बनाकर विधायक कासनिया अपनी जिम्मेदारियां से बचते रहे। भादू ने पहले भ्रष्टाचार के आरोपी पालिकाध्यक्ष ओम कालवा और अब शहर में सरकारी भूमि की लूट और अव्यवस्था के जिम्मेदार मील परिवार के नेताओं को पार्टी में शामिल करने के निर्णय पर कासनिया को आड़े हाथ लिया। भादू ने कहा कि इस तरह के लोगों की पार्टी में मौजूदगी से भाजपा में बरसों से विश्वास करने वाले लोगों की भावनाओं को गहरा धक्का लगा है ?

पूर्व विधायक ने कासनिया की भाषा शैली पर सवाल खड़ा किया ? भादू ने कहा कि जब भी कोई पीड़ित मदद की उम्मीद लिए कासनिया के पास पहुंचा तो उन्होंने लोगों से किस तरह का व्यवहार किया यह बात किसी से छुपी नहीं है। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान भादू खुद भी कासनिया के व्यवहार से आहत दिखे।

इस अवसर पर भादू नें कहा कि उन्होंने और उनके परिवार के लोगों ने कभी भी जाति के नाम पर वोट नहीं माँगा। उन्हें समाज के हर वर्ग का वोट और समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि सूरतगढ़ की जनता को जाति पांति का भेद भुलाकर वोट करना चाहिये। भादू ने कहा कि उनका परिवार पिछले 70 सालों से राजनीति में है। उन्हें उम्मीद है कि लोग व्यवस्था परिवर्तन की इस मुहीम में उनके साथ देंगे।

भादू के लड़ने से कासनिया हुए दौड़ से बाहर ?

राजेंद्र भादू का नाम सूरतगढ़ के सबसे कददावर  नेताओं में शामिल है। भादू की हर हाल में चुनाव लड़ने की घोषणा मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है। भादू भले ही निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन आज भी वे एटा सिंगरासर नहर आंदोलन और विधायक कार्यकाल में दिलाए गए हजारों कृषि कनेक्शन की बदलते भादू आज भी टिब्बा क्षेत्र में अच्छा खासा वोट बैंक रखते है।

विधायक रामप्रताप कासनिया इस समय गेदर के मुकाबले में सबसे मजबूत कहीं दिखाई देते हैं तो वह यही टिब्बा क्षेत्र है। ऐसे में भादू की मौजूदगी के चलते कासनिया को सबसे बड़ा झटका यहीं से लगेगा। इसके अलावा जैतसर और शहरी क्षेत्र में भी पूर्व भादू अपने लंबे समय के व्यक्तिगत रिलेशनों के चलते बड़ी संख्या में वोट जुटाएंगे। शहरी क्षेत्र के लोग वैसे भी कासनिया की भाषा शैली और व्यहवार से पहले ही नाराज है। कासनिया के रवैये और 5 साल के ऐसे निर्णयों के चलते आम जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं में पहले ही साख खो चुके थे। अब राजेंद्र भादू के चुनाव लड़ने के चलते शहरी जनता को विकल्प मिलने से कासनिया को नुकसान होना तय हो चुका है।

भादू को चुनाव लड़ने पर बिश्नोई समुदाय का भी अच्छा खासा वोट भी भादू को मिलता दिख रहा है। क्योंकि बिश्नोई समाज के कई बड़े नेताओं ने पिछले दिनों की सभा में मंच से समर्थन देने की घोषणा की है। बिश्नोई समाज को दिए गए पट्टे का कर्ज बिश्नोई समाज भादू को बड़ी संख्या में वोट देकर उतरने की कोशिश करेगा इसमें कोई संशय  नहीं है। ऐसे में कासनिया को बिश्नोई वोट बैंक के रूप में भी बड़ा नुकसान होगा। इसके अलावा राजपूत और जाट समाज के वोट बैंक में भी भादू घुसपैठ करेंगे जिसका सीधा खामियाजा कासनिया को भुगतना होगा।
भादू मुस्लिम वोट बैंक के रूप में गेदर को भी नुकसान पहुंचाएंगे लेकिन यह नुकसान कासनिया को होने वाले नुकसान से तो कम ही होगा।
कुल मिलाकर राजेंद्र भादू का चुनाव लड़ना कासनिया के लिए खतरे की घंटी है। भादू द्वारा लगाए गए वोटो की सेंध के बाद कासनिया के मुकाबले में पिछड़ने के हालात बन गए हैं। हमें लगता है कि पूर्व विधायक को नहीं मना पानें की क़ीमत कासनिया के विधायक बनने के सपने पर भारी पड़ेगी।

पूर्व विधायक भादू के नहीं मानने की इनसाइड स्टोरी !

पूर्व विधायक राजेंद्र भादू के नामांकन दाखिल करने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि भाजपा उन्हें मना लेगी और वे अपना नामांकन वापस ले लेंगे। लेकिन गुरुवार को नामांकन वापस लेने के अंतिम समय तक भाजपा के नेता और कार्यकर्ता भादू को मनाने की कोशिश करते रहे। लेकिन भादू अपने फैसले पर अडिग रहे। इस बीच भादू के पर्चा वापस नहीं लेने के कर्म को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

कहा जा रहा है कि वसुंधरा खेमे के माने जाने वाले भादू को ऊपर से चुनाव लड़ने का इशारा है। ऐसे में क्या वसुंधरा खेमा भादू को चुनाव लड़वाकर टिकट काटने का हिसाब टिकट को बैरंग भेजकर करना चाहता है ! हमें लगता है कि बात इससे कुछ बड़ी है। क्यूंकि भादू लाखों रुपए खर्च करने के बाद हार को गले लगाने का आत्मघाती कदम उठाने वाले नेताओं में नहीं है।

इसलिये भादू के चुनाव लड़ने के पीछे एक संभावना यह बनती है कि फिलहाल सुबे में भाजपा की सरकार बनती दिख रही हैं और वसुंधरा राजे अभी भी मुख्यमंत्री की दौड़ में दूसरे सभी नेताओं से बहुत आगे हैं। इसलिये भादू चुनाव लड़कर भले ही जीत न पाये परन्तु कासनिया हार जाते हैं तो सूरतगढ़ में भादू को वसुंधरा खेमे का होनें का प्रसाद मिलेगा। भविष्य में डिज़ायर से लेकर तमाम प्रशासन की डोर भादू के हाथ में होगी। ऐसे हालातो में हार कर भी सत्ता का मजा चखने की उम्मीद कर रहे कासनिया और उनके समर्थकों के सपनों पर तुषारापात होगा, वहीं भादू और उनके समर्थकों की बल्ले बल्ले होगी । इसके अलावा भादू परिवार की राजनीतिक विरासत को बचाए रखने में सफल होंगे। शायद यही वो वजह है जिसके चलते भादू तमाम संभावित नकारात्मक परिणामों की अनदेखी कर चुनाव लड़ने पर अड़े हुए हैं।

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सूरतगढ़ 8 नवंबर 23। कांग्रेस प्रत्याशी डूंगरराम गेदर ने बुधवार को किशनपुरा आबादी क्षेत्र में जनसंवाद कर कांग्रेस के पक्ष में मत व समर्थन देने की अपील की। इस मौके पर गांव के शंकर लाल भादू,विनोद भादू, उदाराम मेघवाल, राजेंद्र गोस्वामी, भीखाराम मेघवाल, चानण राम सेवटा, सोहनालाल मेघवाल, भिया नाथ के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कांग्रेस पार्टी को वोट का देने का समर्थन किया।
इस अवसर पर नगरपालिका अध्यक्ष परसराम भाटिया, जेठनाथ (व्यापार मंडल पूर्व अध्यक्ष ), समाजसेवी राजाराम गोदारा सहित कई लोग मौजूद रहे।

जैतसर में गेदर के कार्यालय का उद्घाटन

जैतसर में आज कांग्रेस प्रत्याशी डूंगरराम गेदर के चुनाव कार्यालय का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता और श्री गुरु नानक सिख कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष परमजीत सिंह रंधावा, युवा नेता गगन विडिंग, अमित कड़वासरा, पूर्व उपप्रधान कृष्ण लाल गोदारा, हरिराम मेघवाल (पूर्व प्रधान), कांग्रेस के जैतसर ब्लॉक अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह रंधावा, राजियासर ब्लॉक अध्यक्ष गिरधारी लाल स्वामी, कृष्णपाल गोदारा (पूर्व प्रधान),नरेंद्र शर्मा, कुलजीत (सरपंच 2जीबी), रूपाराम, सेंटी बंसल, सत वेडिंग, अनिल बिश्नोई, गंगा सिंह कुलचानिया ,रवि गोयल, भंवरसहारण, गुरप्रीत विडिंग, अनिल मंगवाना, बंशीधर छाबड़ा, गौरव तिवारी, सत्यपाल ,पवन बारूपाल, रामसिंह मोटा, चुन्नीराम, देवीलाल अग्रवाल, अनिल शर्मा सहित सैकड़ो कार्यकर्ता उपस्थित थे।

इस अवसर पर कांग्रेस प्रत्याशी डूंगरराम गेदर ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वे सूरतगढ़ की जनता के लिए अंतिम क्षण तक लड़ता रहेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व व प्रदेश के नेताओं ने मुझ जैसे अदने से कार्यकर्ता को कांग्रेस पार्टी का सिंबल देकर आम कार्यकर्ता का सम्मान किया है। गेदर ने कहा कि सर्व समाज के हित के लिए आज विधानसभा के समस्त कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट है।

राज्य मंत्री परमजीत सिंह रंधावा ने कार्यकर्ताओं को एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार रिपीट हो रही है।

युवा नेता गगन वीडिंग ने युवाओं के हितों के लिए कांग्रेस पार्टी की विचारधारा प्रेरणा का स्रोत रही है, देश निर्माण में कांग्रेस के नेताओं ने बलिदान दिए हैं।

युवा नेता अमित कड़वासरा सूरतगढ़ विधानसभा में कांग्रेस सरकार ने शिक्षा चिकित्सा स्वास्थ्य सामाजिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण काम किए हैं। उन्होंने कहा कि डूंगरराम गेदर स्वच्छ, ईमानदार, कर्मठ कार्यकर्ता है जिन्हे हम सब को मिलजुल कर विजयी बनाना है। चुनाव कार्यालय के उद्घाटन उपरांत कांग्रेस प्रत्याशी डूंगरराम गेदर ने जैतसर शहर में डोर टू डोर व्यापारियों और शहरवासियों से कांग्रेस के पक्ष में मत व जन समर्थन करने की अपील की।

बीरमाना में भी कार्यालय हुआ शुरू

बीरमाना में भी आज कांग्रेस कार्यालय का उद्घाटन किया गया। कार्यालय का उद्घाटन किसान नेता साहबराम पूनिया, अमित कड़वासरा, कांग्रेस नेत्री जुलेखा बेगम (जिला परिषद सदस्य) बीरमाना सरपंच सरजीत टाक, इब्राहिम खान और केसराराम टाक ने किया। इस अवसर पर किसान नेता साहबराम पूनिया ने किसान हित के लिए सर्व समाज के सम्मान के लिए डूंगरराम गेदर को विजयी बनाने का आह्वान किया।

कांग्रेस नेत्री जुलेखा बेगम ने गंगा जमुनी तहजीब को कांग्रेस पार्टी की प्रतिबद्धता बतलाते हुए किसानों, युवाओं को कांग्रेस के पक्ष में मतदान की अपील की।

इस अवसर पर महावीर मेघवाल (सरपंच प्रतिनिधि 13 एसडी) राधेश्याम घोड़ेला (सरपंच प्रतिनिधि हररदासवाली), गोपीराम राईका,श्रवण खीचड़, जेपी गोस्वामी विक्रम टाक, पंचायत समिति सदस्य गुरदीप बावरी, मेघसिंह रायका, जगदीश जोशी, लीलाधर स्वामी नेमीचंद नायक, बलराम कुकड़वाल, पृथ्वी स्वामी, जगदीश सारस्वत जगदीश शर्मा, राजाराम नाई, ओमप्रकाश गेदर, जगदीश बिश्नोई, खिराज गवारिया, धनराज भारी, हंसराज भाट, भागीरथ मेघवाल पवन स्वामी, श्रवण लोहार, दीपराम सुथार मनीराम सोनी, विनोद स्वामी सहित बीरमाना के प्रमुख लोग मौजूद रहे।

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सूरतगढ़। जननायक जनता पार्टी के प्रत्याशी उम्मीदवार पृथ्वीराज मील व पार्टी के हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष सरदार निशान सिंह व प्रदेश प्रवक्ता राजेश काजला ने पार्टी के चुनाव घोषणापत्र का विमोचन किया। इस मौके पर पृथ्वीराज मील ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि सूरतगढ़ में आज बड़ी पार्टियों की स्थिति ये हो गई है कि जो एक-दूसरे को कोसते नहीं थकते थे वे आज निजी स्वार्थों के वशीभूत होकर पार्टी विचारधारा और कार्यकर्ताओं की वफादारी को ठोकर मार कर एक हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि ये सूरतगढ़ क्षेत्र की जनता की भावनाओं से खिलवाड़ है।

पृथ्वी मील ने कहा कि एक तरफ जहां स्वार्थों का संगठन हो रहा है तो दूसरी और जाति विशेष की राजनीति कर समाज में जहर घोलने का काम किया जा रहा है। जेजेपी प्रत्याशी पृथ्वीराज मील ने राजस्थानी भाषा में सूरतगढ़ विधानसभा में आज के राजनैतिक परिदृश्य को एक राजस्थानी दोहे में समेटते हुए कहा कि

“छट-चऔदस भेळी हूगी जोर करै अमावस..!
जनता आंगै च्यानणो करसी कर’ल्यो थोड़ी थ्यावस..!!”

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सूरतगढ़। संत आगस्टीन का एक प्रसिद्ध उद्धरण है। वे कहते हैं कि उम्मीद की दो बेटियां होती है। एक क्रोध और दूसरा साहस। क्रोध इसलिये कि चीजें ऐसी क्यों है दूसरी है साहस इसलिये की चीजों को बदला जाना चाहिये ! सूरतगढ़ से टिकट की उम्मीद के लिए कांग्रेस नेता हनुमान मील और मील परिवार टिकट कटने के बाद क्रोध में है। वहीं भाजपा नेता राजेन्द्र भादू नें टिकट कटने के बाद चीजों को बदलने के लिए चुनाव लड़ने का साहस किया है। सोमवार को भादू नें नामांकन दाखिल करने के बाद सभा कर भादू ने एक एक कार्यकर्ता से राजेन्द्र भादू बनकर जुट जाने का आह्वान किया। भाषण के अंत में भादू नें मंच पर नतमस्तक होकर समर्थकों से इस चुनाव में सहयोग की अपील की।

सभा में जुटे हज़ारों की संख्या में समर्थक, हर वर्ग के लोग थे मौजूद

पूर्व विधायक राजेंद्र भादू द्वारा नामांकन से पहले बुलाई गई सभा पर सभी प्रमुख पार्टियों की नजरे थी। ज्यादातर लोग सभा के है असफल होने और भादू द्वारा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लेने की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन सभा में भादू के समर्थन में अच्छी खासी संख्या में पहुंचे समर्थकों नें विरोधियों के अरमानों पर पानी फेर दिया। भीड़ के आंकड़े की बात करें तो करीब 2000 लोग इस सभा में मौजूद थे। उस वक्त जब भादू पिछले 5 साल से सत्ता से बाहर है और किसान नरमे की फसल की कटाई में व्यस्त है ऐसे समय में भीड़ का ये आंकड़ा बुरा नहीं है।

इसके अलावा हमें लगता है कि अभी भी विरोधियों द्वारा भादू के चुनाव नहीं लड़ने की अफवाहों के बीच बड़ी संख्या में लोग विरोधी नेताओं के डर और निगाहों में आने के ख्याल से भी सभा मे नहीं पहुंचे। वरना भीड़ का आंकड़ा कुछ अधिक का भी हो सकता था। फिर भी भीड़ में समाज के सभी वर्गों के और समुदायों के लोग मौजूद थे।

                 जहां तक मंच की बात है मंच पर बिश्नोई समाज के भागीरथ कड़वासरा, रामस्वरूप बिश्नोई, पूर्व प्रधान सुभाष भूकर, हंसराज पूनिया सहित बड़ी संख्या में विधानसभा क्षेत्र से आये पूर्व सरपंच और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

हर हाल में लड़ेंगे चुनाव : भादू, जुलुस निकालकर पहुंचे नामांकन भरने

पुरानी धानमंडी में आयोजित सभा में पूर्व विधायक भादू ने हर हालत में चुनाव लड़ने की घोषणा की। इस मौके पर उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां  गिनाई। साथ ही उन्होंने पूर्व विधायक मील और भाजपा विधायक कासनिया के ताजा गठबंधन पर भी सवाल खड़े किए ? उन्होंने कहा कि पिछले 5 सालों में शहर के जो हालात हुए हैं ऐसे हालात कभी नहीं थे। अवैध अतिक्रमणो और नगरपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर दोनों नेताओं की खिंचाई की। उन्होंने कहा कि गरीबों के अतिक्रमण तोड़ने के नाम पर भय दिखाकर भूमाफिया और अधिकारी हिस्सेदारी लेते रहे। लेकिन दोनों पार्टियों के जिम्मेदार लोग आंख मुंदे रहे।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र के ऐसे ही हालातों को देखकर उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव का परिणाम भले ही कुछ रहे वे शहर के लिए लड़ेंगे। भादू ने कहा कि उनकी जीत राजेंद्र भादू की नहीं सूरतगढ़ की जीत होगी। सभा के अंत में भादू नें मंच पर नतमस्तक होकर सभा में पहुंचे लोगों से समर्थन मांगा।

                   बाद में पूर्व विधायक सैकड़ो की संख्या में समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन के रूप में मुख्य बाजार से होते हुए नामांकन के लिए उपखंड कार्यालय पर पहुंचे और नामांकन की औपचारिकता पूरी की।

कड़वासरा नें गिनाई उपलब्धियां, पूर्व प्रधान नें विरोधियों को बताया गुलाबी सुंडी

पूर्व विधायक के समर्थन में बुलाई की सभा में बिश्नोई समाज के भागीरथ कड़वासरा नें राजेंद्र भादू के कार्यकाल की उपलब्धियां के बारे में बताया। बिश्नोई महासभा को विशाल भूखंड का पट्टा देने, लाइन पर क्षेत्र को जोड़ने वाले करीब आधा दर्जन अंडरपास के निर्माण, सूरतगढ़ से भोजेवाला तक सीधी सड़क, थर्मल क्षेत्र में आधी राशि पर क़ृषि कनेक्शनो, गाँवो व शहरों में गौरव पथ बनाने सहित विभिन्न उपलब्धियों का उन्होंने उल्लेख किया।

                        2 दिन पूर्व भादू के निवास पर चर्चित भाषण देने वाले पूर्व प्रधान सुभाष भूकर ने एक बार फिर भादू के विरोधियों को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जब इलाके के लोग पूर्व विधायक के पास गए तो उन्होंने कहा कि मेरी चलती नहीं। लोग जब मील परिवार के पास गए तो उन्होंने कहा कि हमारे पास क्यों आए हैं आपने तो हमें वोट नहीं दिए ! भूकर ने कहा कि अब तो दोनों साथ हैं अब किस मुंह से जनता के पास जाएंगे और क्या जवाब देंगे कि आपने हमारा काम नहीं किया ?

भूकर ने दोनों नेताओं के गठबंधन की तुलना नरमे की फ़सल में खराबे के लिए जिम्मेदार गुलाबी सुंडी से की। उन्होंने कहा कि नरमे में आई गुलाबी सुंडी नें इन 6 महीनो में  फ़सल को नष्ट किया है, लेकिन ये सुंडी पूरे 5 साल रहने वाली है इसलिए सतर्क हो जाए। उन्होंने सभा में पहुंचे समर्थकों से हालात को समझकर भादू के साथ चुनाव में जुटने और नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की अपील की।

भादू बिगाड़ सकते हैं विरोधियों के समीकरण !

राजेंद्र भादू के विरोधी अभी भी यह प्रचार कर रहे हैं कि भादू 9 तारीख से पहले नामांकन वापस ले लेंगे। हालांकि भादू के सभा में दिए गए भाषण से साफ जाहिर है कि भादू चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं। पूर्व विधायक के लिए वैसे भी अपनी राजनीतिक जमीन बचाने का यह आखरी मौका है। इसलिए हमें नहीं लगता है कि पूर्व विधायक इस तरह का निर्णय लेंगे।

      बहरहाल अगर पूर्व विधायक अपने स्टैंड पर कायम रहते हैं तो इस बात में कोई संदेश नहीं है कि वे कांग्रेस और भाजपा दोनों प्रत्याशियों के समीकरणों को बिगाड़ देंगे। पूर्व विधायक राजेंद्र भादू एटा सिंगरासर आंदोलन और आधी कीमत पर दिए गए कृषि कनेक्शन की बदौलत आज भी टिब्बा क्षेत्र में दूसरे नेताओं के मुकाबले अच्छी पकड़ रखते हैं। इसके अलावा जेतसर क्षेत्र में भी भादू की पकड़ दूसरे नेताओं से ज्यादा है।

मुश्लिम वोटर में भादू की स्वीकार्यता भी किसी से छुपी हुई नहीं है। शहरी क्षेत्र में जरूर भादू से लोगों में नाराजगी है। लेकिन भाजपा प्रत्याशी रामप्रताप कासनिया और कांग्रेस डूंगरराम गेदर के साथ भी शहरी वर्ग का मतदाता अब तक जुड़ाव नहीं कर पाया है। ऐसे में अगर शहर के लोगों के पास भादू अपनी पुरानी गलतियों को स्वीकार कर समर्थन मांगते है तो सम्भव है कि शहरी क्षेत्र में भादू दोनों नेताओं के मुकाबले ज्यादा समर्थन जुटा ले । क्यूंकि शहर के लोग यह बात जानते है कि तमाम खामियों के बावजूद भादू ने अतिक्रमणो पर प्रभावी अंकुश लगाया साथ ही किसी भी तरह के माफियाओं को भादू ने शरण नहीं दी। इन सब के अलावा भादू का इसी शहर का ही निवासी होना और भादू परिवार के एक-एक रहवासी से नजदीकी संबंध भी एक बार फिर काम आ सकते है।

                         कुल मिलाकर निर्दलीय होने के चलते भले ही पूर्व विरोधी भादू को कमजोर आंकने की भूल कर रहे हैं। परंतु ये गलतफहमी उनके लिए महंगी बढ़ सकती है। भादू अभी भी 2008 का इतिहास दोहरानें का मादा रखते हैं यह बात उनके विरोधियों को समझ लेनी चाहिए।

– राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रैस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। भाजपा विधायक रामप्रताप कासनिया को टिकट मिलने से पूर्व विधायक राजेंद्र भादू नाराज है। भादू का टिकट कटने के बाद शुक्रवार को सुबह 10:00 बजे उनके निवास पर बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचे और भादू से चुनाव लड़ने की मांग की। इनमें कई वर्तमान और पूर्व सरपंच, डायरेक्टर सहित राजनीति से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। समर्थकों ने भादू के 5 साल के कार्यकाल में इलाके में हुए जबरदस्त विकास कार्यों की प्रशंसा की। इसके साथ ही वर्तमान विधायक रामप्रताप कासनिया की कार्यशाली की आलोचना करते हुए गंभीर आरोप भी लगाए।

            भादू समर्थकों का कहना था कि जब भी उन्हें वर्तमान विधायक से काम पड़ा तो उन्हें निराशा ही हाथ लगी। बैठक में मौजूद समर्थकों ने एक सुर में भादू से चुनाव में लड़ने का निर्णय लेने पर तन मन धन से सहयोग करने की घोषणा की। बैठक के दौरान कई मौकों पर समर्थकों ने राजेंद्र भादू जिंदाबाद के नारे लगाए।

पूर्व प्रधान सुभाष भूकर का भावुक संबोधन रहा चर्चा का विषय 

पूर्व विधायक के निवास पर हुई बैठक में भादू के कई समर्थक भावुक नज़र आये। भादू समर्थकों के संबोधन में यह साफ नजर आ रहा था कि भादू की टिकट कटने से उन्होंने निराशा हुई है। इस बैठक में पूर्व प्रधान सुभाष भूकर का भावुक संबोधन भी चर्चा का विषय रहा।

पूर्व प्रधान ने अपने संबोधन में प्रधान रहने के दौरान पूर्व विधायक के कार्यकाल में करवाए गये विकास कार्य गिनवाये। उन्होंने सूरतगढ़ से भाजेवाला सड़क  निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि यह ऐसा काम था कि जो किया असंभव सा दिख रहा था लेकिन विधायक भादू नें लोगों की परेशानी को देखते हुए इस असंभव कार्य को संभव बनाया। पूर्व प्रधान नें कहा कि अपने कार्यकाल में भादू नें गलत कामों का समर्थन नहीं किया। उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए यह भी कहा कि खुद उनके कई कामों को भादू नें इनकार कर दिया। लेकिन वह जब-जब जनता के किसी काम के लिए भादू से मिले तो उन्होंने किसी भी काम को नहीं रोका। 

                          पूर्व प्रधान नें उपस्थित लोगों से कहा कि योग्य व्यक्ति की जगह अयोग्य व्यक्ति को टिकट का निर्णय बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। भूकर ने पूर्व विधायक से चुनाव में उतरने की मांग करते हुए सभी लोगों से समर्थन की अपील की।

भादू नें 6 नवंबर को सभा बुलाकर निर्णय लेने का किया आह्वान

इस अवसर पर राजेंद्र भादू ने समर्थकों को दिए गए संबोधन में कहा कि पिछली बार की तरह पार्टी ने इस बार भी वसुंधरा गुट का होने के चलते उनका टिकट काट दिया। अपने संबोधन में भादू ने पिछले चुनाव में विधायक कासनिया के आखिरी चुनाव होने के वादे पर मांगे गए समर्थन का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जैसी चर्चा थी अगर पार्टी किसी  युवा चेहरे को टिकट देती तो उन्हें अफसोस नहीं होता। लेकिन पार्टी ने उनके दावे और सर्वे के अनदेखी कर फिर से वर्तमान विधायक को टिकट दे दी।

समर्थकों की चुनाव लड़ने की अपील पर भादू नें कहा कि अगले दो दिन तक सभी लोग अपने-अपने क्षेत्र के गांव गांव ढाणी ढाणी में संपर्क करें और 6 नवंबर को पुरानी धानमंडी में होने वाली सभा में पहुंचे। उन्होंने कहा कि सभा में समर्थकों की सलाह पर वे पर्चा भरने का निर्णय करेंगे। 

राजेंद्र भादू मुकाबला बना सकते हैं त्रिकोणीय ?

6 नवंबर को होने वाली सभा में राजेंद्र भादू क्या निर्णय करते हैं यह तो आने वाला समय बताएगा। लेकिन अगर भादू की दावेदारी की बात करें तो उस समय में जब वर्तमान विधायक की छवि उनकी भाषा शैली के चलते लोगों में नेगेटिव बन चुकी है और कांग्रेस के प्रत्याशी का खुद पार्टी का ही एक धड़ा विरोध कर रहा है, राजेंद्र भादू की दावेदारी को कमजोर नहीं आंका जा सकता। दोनों प्रत्याशियों से नाराज लोगों का समर्थन उन्हें मिलना तय दिख रहा है।

ग्रामीण क्षेत्र की बात करें तो टिब्बा क्षेत्र के साथ जैतसर इलाके में भी भादू की अच्छी खासी पकड़ है। परंपरागत रूप से कांग्रेस का माने जाने वाला मुस्लिम समुदाय भी राजेंद्र भादू का मुरीद है। वहीं गेदर को  टिकट मिलने से नाराज मील परिवार भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भादू के मदद करेगा जिसका लाभ भी भादू को मिल सकता है।

इसके अलावा शहरी क्षेत्र की बात करें तो विधायक रामप्रताप कासनिया से शहर की अधिसंख्य जनता का मोहभंग होता दिख रहा है। विधायक की टिकट की घोषणा के बाद भी कासनिया को बधाई देने में जिस तरह का  ठंडा रिस्पांस शहर की जनता नें दिया है वह कासनीया की कमजोर होती पकड़ को दिखाता है। दूसरी और गेदर कासनिया से लोगों की नाराजगी के चलते भले ही चुनाव की दौड़ में आगे चल रहे हो लेकिन कांग्रेस के ही दूसरे नेताओं के खौफ के चलते अभी भी कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक उनके साथ खुलकर नहीं आए हैं।

ऐसे हालातों में भादू को तीसरे विकल्प के रूप में देखा जा सकता है। पुराने कार्यकाल में भादू द्वारा समर्थकों की अनदेखी और जनता की नाराजगी हालांकि अभी भी बरकरार है। लेकिन फिर भी अगर भादू एक बार फिर जनता के बीच पहुंचते हैं तो मौजूदा विकल्पों में अभी भी पिछली बातों को भुलाकर जनता के एक बड़े वर्ग के उनके साथ खड़ा होने की संभावना है। क्यूंकि तमाम नेगेटिव एस्पेक्ट के साथ जनता भादू को इस बात के लिए याद भी करती है कि उन्होंने शहर की सबसे बड़ी समस्या अतिक्रमणों को लेकर पूरे कार्यकाल में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई। इसके साथ ही उन्होंने अपराधिक तत्वों को कभी भी व्यवस्था पर हावी नहीं होने दिया।

क्या भादू परिवार की राजनीति का होगा अंत…?

6 नवंबर को होने वाली सभा में पूर्व विधायक भादू चुनाव लड़ने या नहीं लड़ने की घोषणा शहर की राजनीति में भादू परिवार के भविष्य को तय करेगी।  क्योंकि राजेंद्र भादू के परिवार का कोई भी पुत्र अभी तक सक्रिय राजनीति में नहीं है। ऐसे में भादू के चुनाव नए लड़के की घोषणा भादू परिवार की राजनीति का अंतिम अध्याय साबित होगी। राजनीति में दखल रखने वाला कोई भी परिवार हर सम्भव तरीके से राजनीति में बना रहना चाहता है। इसलिये यह संभव है कि राजेंद्र भादू चुनाव लड़े। एक मामूली संभावना यह भी है कि वह अपने पुत्र अमित भादू को सक्रिय राजनीति में उतारने होते हुए चुनाव लड़ाये।

                                        भादू परिवार के राजनीतिक भविष्य पर अंतिम टिप्पणी से पहले हमें लगता है कि 6 नवंबर का इंतजार करना चाहिए।

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सूरतगढ़। विधायक रामप्रताप कासनिया को भाजपा की टिकट मील चुकी है। अब हर किसी की नजर कांग्रेस नेता हनुमान मील के अगले कदम पर है। बसपा से कांग्रेस में आए गेदर को टिकट मिलने से नाराज मील परिवार सार्वजनिक रूप से गेदर को हराने की घोषणा कर चुका है। खुद चुनाव लड़ने की बजाय मील परिवार किसी विपक्षी मजबूत नेता की मदद कर गेदर को सबक सिखाने की सोच रहा था।

मील परिवार और उनके सलाहकारों का मानना था कि कासनिया के बजाय राजेंद्र भादू ही गेदर को पटखनी दे सकते हैं। इसीलिए मील परिवार के बड़े नेता भादू को टिकट दिलाने के लिए जयपुर व दिल्ली में लॉबिंग कर रहे थे। उन्हें उम्मीद थी कि भाजपा की टिकट भादू को मिलेगी। लेकिन मील परिवार का यह सपना भी कासनिया को टिकट की घोषणा के साथ धराशाई हो चुका है। यही वजह है कि अब हर कोई इस बात का कयास लगाने में लगा है कि आखिर मिल परिवार का अगला स्टेण्ड क्या होगा ?

हनुमान मील क्या लड़ेंगे चुनाव….क्या है विकल्प !

कासनीय को टिकट मिलने के बाद भी मील परिवार के पास अभी भी कई विकल्प है। हनुमान मील इनमें किस विकल्प का चुनाव करता है यह तो भविष्य तय करेगा। लेकिन हम इन विकल्पों के संभावित फायदों और नुकसान के के बारे में बात कर लेते हैं।

चुनावी में उतरकर गेदर का रथ रोकनें का विकल्प

हनुमान मील के सामने सबसे पहला विकल्प है कि वह खुद चुनाव में उतरकर गेदर के जीत की ओर बढ़ रहे रथ का पहिया थामें। टिकट कटने से निराश किसी भी नेता के लिए बगैर टिकट चुनाव लड़ना कोई आसान काम नहीं है। फिर भी इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि हनुमान मील नें पिछले 3 सालों में विधानसभा के गांव-गांव और गलियों की खाक छानी है। उनकी छवि को लेकर भले ही लोगों के विचार अलग-अलग हो लेकिन वे एक अच्छी खासी फैन फॉलोइंग रखते हैं।

इसके अलावा नगरपालिका के अधिकांश पार्षद,सरपंच और डायरेक्टर और कांग्रेस संगठन के पदाधिकारी अभी हनुमान मील के साथ खड़े हैं। गेदर को टिकट मिलने के बाद से वे हनुमान मील के इशारे का इंतजार कर रहे हैं। जो इस बात को साबित करता है कि यदि हनुमान मील चुनाव लड़ते हैं तो गेदर को जबरदस्त नुकसान पहुंचा सकते हैं और उनके विजयी रथ पर ब्रेक लगा सकते हैं। इस प्रयास में हनुमान मील को अगर सफलता मिलती है तो इससे बेहतर उनके लिए कुछ हो नहीं सकता है ।

पर इससे इतर यदि हनुमान मील सफल नहीं भी हो पाते हैं तो भी इस चुनाव का अनुभव और चुनाव में मिलने वाले वोट उनके भविष्य की राजनीति की आधारशिला तो बनेंगे। जिससे 5 साल बाद आने वाले चुनाव में उनकी दावेदारी को मजबूत होंगी। इसके साथ ही चुनाव लड़कर वह भविष्य में भी समर्थकों को साथ बनाए रखने में सफल होंगे वरना देर सवेर उनके समर्थक गेदर के साथ जुड़ जायेंगे। इन हालातों के लिए ही शायद किसी शायर ने ये पंक्तिया लिखी है।

होने लगी है जिस्म में जुम्बिश सी देखिये। इस पर कटे परिंदे की कोशिश तो देखिये।।

कासनिया की मदद का विकल्प, पर कासनिया मानेंगे इसमें संशय

गेदर को निपटाने की क़वायद में विधायक रामप्रताप कासनिया की मदद हनुमान मील और मील परिवार कर सकता है। परन्तु मील परिवार की मदद के ऑफर को कासनिया स्वीकार करेंगे इस बात की उम्मीद कम है। क्योंकि कासनिया घाघ राजनीतिज्ञ है। मील परिवार की राजनीति में गिर चुकी साख का उन्हें अंदाजा है। उन्हें लगता है कि यदि वे मील परिवार का प्रत्यक्ष सहयोग लेते हैं तो उनके समर्थकों और वोटरों पर इसका नेगेटिव प्रभाव पड़ेगा और उन्हें फायदे की वजह नुकसान ज्यादा हो सकता है।

भ्रष्टाचार के आरोपों से गिरे नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष ओम कालवा को पार्टी में शामिल करने को लेकर भी विधायक को  खासी आलोचना सहन करनी पड़ी हैं। कासनीय दूसरी बार ऐसी गलती करेंगे लगता नहीं है। इसलिये हनुमान मील मैदान में उतरने का फैसला करेंगे इस बात की ज्यादा संभावना है। सामान्यतौर पर यह कदम भले ही आत्महत्या जैसा लगे। लेकिन राजनीति में वही जिंदा है जो चुनाव लड़ता है। हार और जीत से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।

भाई पृथ्वीराज मील को मदद करने का विकल्प

हनुमान मील के पास एक तीसरा विकल्प यह भी है कि वह अपने ही परिवार के जेजेपी से लड़ रहे भाई पृथ्वीराज मील को समर्थन दे। ऐसा कर मील परिवार गेदर को भारी नुकसान पहुंचा सकता हैं और इससे पृथ्वीराज मील निश्चित रूप से मजबूत होंगे। परन्तु यहां दिक्कत यह है कि भविष्य में पृथ्वीराज मील के राजनीतिक रूप से मजबूत होने पर हनुमान मील के लिए क्षेत्र की राजनीति में सरवाइव करना मुश्किल होगा। ऐसे में हमें नहीं लगता है कि हनुमान मील किसी भी हालत में पृथ्वीराज मील समर्थन देने पर विचार करेंगे।

निर्दलीय राजेंद्र भादू की मदद से भी खतरा

हनुमान मील के लिए एक परिस्थिति ये भी है कि अगर राजेंद्र भादू निर्दलीय रूप से चुनाव लड़े तो वे उसकी मदद करें। लेकिन टिकट के बगैर लड़ने की योजना बना रहे राजेंद्र भादू के साथ मिलकर चुनाव लड़ना भी मील परिवार के लिए घाटे का सौदा ही साबित होता दिख रहा है। क्योंकि मिल परिवार भले ही कांग्रेस का वोट बैंक तोड़कर भादू को दिला दे। पर क्या इस बात की भी संभावना नहीं है कि निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़कर राजेंद्र भादू भाजपा को भी बड़ा नुकसान पहुंचाएंगे। जिसका फायदा फिलहाल मील परिवार के सबसे बड़े दुश्मन गेदर को मिलेगा जो हनुमान मील कभी नहीं चाहेंगे।

चुनाव से दूर रहकर घर बैठे हनुमान मील… समर्थकों के लिए मुसीबत

मिल परिवार के लिए एक संभावना यह भी निकलती है कि वह इस रण से खुद को अलग कर ले और चुपचाप घर बैठ जाए। ऐसा करने से कांग्रेस पार्टी में मील परिवार की साख तो बच जाएगी। लेकिन उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं के लिए चुनाव में निष्क्रिय रहना गले की हड्डी बन जाएगा। कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़कर पार्षद, सरपंच और डायरेक्टर बनने वाले और संगठन में विभिन्न पदों पर मनोनीत नेताओं को देर सवेर गेदर की मदद के लिए चुनाव मैदान में उतरना पड़ेगा। वरना पार्टी का डंडा उन पर चलने की संभावना बनी रहेगी।

इसके अलावा इस विकल्प का खतरा यह भी है कि चुनाव जीतने पर गेदर इसका हिसाब करेगा। इसलिए यह विकल्प भी हनुमान मील और मिल परिवार के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद नहीं होगा।

गेदर की मदद कर अच्छे दिनों का करें इंतजार…

हनुमान मील के लिए आख़री विकल्प यह है कि वे अपनी नाराजगी को भुलाकर गेदर की खुलकर मदद करें और चुनाव में विजयश्री दिलाए। इस मदद के बदले पंचायत समिति की सरकार को बचाने, जिला प्रमुख या फिर किसी बड़े पद की डील भी हनुमान मील कर सकते हैं। यह डील यूं तो हनुमान मील और मिल परिवार के लिए फायदे का सौदा है। परंतु भविष्य में विधायक बनने का सपना देख रहे हनुमान मील को इस डील के बाद अच्छे दिनों का लंबा इंतजार करना पड़ेगा। हनुमान मील यह पसंद करेंगे थोड़ा मुश्किल ही दिख रहा है। 

हनुमान मील के अगले स्टैंड का इंतजार

हनुमान मील उपरोक्त विकल्पों में से किस विकल्प को अपनाते हैं यह अगले एक-दो दिन में पता चल जाएगा। परंतु चुनावी रंग में रंगे विधानसभा के राजनीतिक विश्लेषकों को और चुनावी रण में कूदने के लिए बेताब उनके समर्थकों को उनके अगले कदम का बेसब्री से इंतजार है।

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कासनिया, नागपाल,भादू से इतर चौंका सकते हैं ये चेहरे !

सूरतगढ़। भाजपा की टिकट की घोषणा अब कभी भी होने को है। टिकट को लेकर भले ही विधायक रामप्रताप कासनिया का नाम सबसे आगे चल रहा हो। लेकिन जैसा की कहते है ‘उम्मीद पर दुनिया कायम’। उसी तर्ज पर अभी भी उम्मीदवारों के समर्थन में सोशल मीडिया पर जंग जारी है। हालांकि टिकट की दावेदारी कर रहे भाजपा के करीब डेढ़ दर्जन नेताओं में से ज्यादातर नेता सरेंडर कर चुके है। फिर भी करीब आधा दर्जन नेताओं के नाम उनके समर्थक अब भी सोशल मीडिया पर ठेले जा रहे हैं। जबकि इनमें से कुछ नेताओं की जनता में स्वीकार्यता भी संदेह के घेरे में है। फिर भी कुछ नाम ऐसे है जिनकी दावेदारी टिकट घोषणा से पहले खारिज नहीं की जा सकती।

सोशल मीडिया पर चल रहे ऐसे नामों में विधायक कासनिया, पूर्व विधायक अशोक नागपाल और राजेंद्र भादू के नाम शामिल है। इनमें से टिकट किसे नेता को मिलेगा यह तो भविष्य के गर्भ में है। लेकिन इन नेताओं की टिकट की चर्चाओं के जोर पकड़ने की जो वजह निकलकर सामने आ रही है वो कुछ इस प्रकार है।

विधायक रामप्रताप कासनिया टिकट की दौड़ में सबसे आगे

कासनिया चूँकि वर्तमान विधायक है और कांग्रेस लहर में पिछला चुनाव 10 हज़ार से ज्यादा वोट से जीत चूके है, इसलिये उनका नाम चलना स्वाभाविक है। सूत्रों के मुताबिक कासनिया नें चुनाव लड़ने के लिए नया बैंक खाता खुलवा लिया है और नॉमिनेशन के लिए स्टांप सहित दूसरे दस्तावेजों भी तैयार करवा चूके है। कहा जा रहा है कि कार्यालय की जगह तय कर कासनिया चुनाव मैदान में कूदने को तैयार है। वहीं सट्टा बाजार में कासनिया की टिकट के कम हो रहे भावों नें कासनिया की टिकट की चर्चाएँ तेज़ कर दी हैं। 

नागपाल की टिकट की चर्चा ने पकड़ा जोर, 

पूर्व विधायक अशोक नागपाल के नाम की चर्चाओं की प्रमुख वजह श्रीगंगानगर में कांग्रेस द्वारा अरोड़ा बिरादरी के अंकुर मिगलानी को टिकट की घोषणा है। माना जा रहा है कि अरोड़ा बिरादरी की नाराजगी को देखते हुए कांग्रेस की तरह भाजपा भी जिले में अरोड़ा बिरादरी के प्रत्याशी को टिकट दे सकती है।

साथ ही वर्तमान विधायक के प्रति नाराजगी और जाट विरोध का समीकरण भी अशोक नागपाल को टिकट की चर्चाओं की एक वजह है। इसके अतिरिक्त संघ विचारधारा के व्यक्ति को टिकट देने की चर्चाएं भी नागपाल की नाम को आगे बढा रही है। ये अलग बात है कि संघ विचारधारा से जुड़े विजेंद्र पूनिया और सुभाष गुप्ता भी मैदान में है। लेकिन कांग्रेस के गैर जाट प्रत्याशी के मुकाबले में भाजपा जाट की बजाय गैर जाट नागपाल पर दाव लगायेगी, यह कहना फिलहाल ठीक नहीं होगा है।

कांग्रेस नेताओं द्वारा टिकट दिलाने की कोशिशों से चर्चा में भादू  

दूसरी और राजेन्द्र भादू की बात करें तो एकाएक पूर्व विधायक भादू भी सोशल मीडिया पर टिकट के दावेदार के रूप में उभरे हैं। भादू के पक्ष में चल रहे दावों में कितना दम है कह नहीं सकते। लेकिन ऐसी चर्चा है कि कांग्रेस से जुड़ा एक बड़ा राजनितिक परिवार भादू की टिकट के लिए लॉबिंग कर रहा है। अपनी टिकट कटने से नाराज इस परिवार के नेता अब हर कीमत पर कांग्रेस प्रत्याशी की बली लेना चाहते हैं। इन नेताओं की पटरी वर्तमान विधायक से नहीं बैठती है तो दूसरी और उनकी नज़र में केवल भादू ही गेदर का मुकाबला करने में सक्षम है। इसलिये सोशल मीडिया पर भादू के नाम की चर्चाओं को हवा दी जा रही हैं।

सोशल मीडिया पर टिकट चर्चाओं के बीच भादू परिवार के एक सदस्य द्वारा बुधवार को नॉमिनेशन स्टाम्प लेने की भी चर्चा है। नामांकन की तैयारी कहीं ना कहीं इस बात का संकेत है कि पूर्व विधायक की उम्मीदें अभी टूटी नहीं है। पर क्या वर्तमान विधायक की दावेदारी की अनदेखी कर भादू को टिकट मिलना आसान होगा । शायद नहीं !

खबर पॉलिटिक्स ओपिनियन

कुल मिलाकर सोशल मीडिया पर फिलहाल भाजपा की टिकट इन्हीं तीन में से एक नेता को मिलती दिख रही है। लेकिन जैसा की कहतें है कि राजनीति संभावनाओं की कला है। ऐसे में हमें लगता है इस सीट पर भाजपा जिताऊ के परम्परागत फॉर्मूले के अलावा 2 और संभावित एंगलों पर विचार कर सकती है। इसलिये इन्हीं तीन एंगलों में फिट रहने वाले किसी नेता को टिकट मिलनें की उम्मीद है ।

सबसे पहले एंगल की बात करें तो पार्टियां हमेशा जिताऊ उम्मीदवार पर ही दाव लगाती है। जहां तक सूरतगढ़ विधानसभा की बात है भाजपा आलाकमान जानता है कि गेदर की चुनौती बहुत बड़ी है। जिसका सामना केवल गैर जाट के मुकाबले जाट प्रत्याशी को खड़ा कर ही किया जा सकता है। इसका अर्थ है कि अगर भाजपा इस सीट पर मुकाबला करने के लक्ष्य को लेकर टिकट देगी तो किसी जाट नेता को ही टिकट मिलेगी। टिकट मांग रहे जाट नेताओं में फिलहाल कासनिया ही सबसे भारी है। ऐसे में विधायक कासनिया टिकट की दौड़ में सबसे आगे दिख रहें है।

टिकट वितरण को लेकर एक दूसरी संभावना ये भी है कि भाजपा इस सीट पर जातीय समीकरणों की अनदेखी का प्रयोग करते हुए कांग्रेस के गैर जाट प्रत्याशी के मुकाबले में अरोड़ा बिरादरी के नागपाल को टिकट थमा दे। जिले की दूसरी विधानसभाओं में अरोड़ा बिरादरी के वोट को साधने के लिए पार्टी ऐसा प्रयोग कर सकती है। परन्तु यह संभावना मात्र कयास ही है।

ऊपर लिखी संभावनाओं से इतर इस सीट पर भाजपा एक और एंगल से भी मंथन कर सकती है। इस एंगल की बात करें तो राजनितिक पार्टियों के सामने कई बार ऐसे मौके आते हैं जब किसी पर्टिकुलर सीट पर विपक्षी प्रत्याशी के सामने पार्टी को कोई भी दावेदार जिताऊ नजर नहीं आता है। ऐसी हालत में पार्टी उस पर्टिकुलर सीट पर प्रयोग करती है। यह प्रयोग ज्यादातर मामलों में पार्टी फण्ड में सहयोग के बदले टिकट के रूप में सामने आता है तो कुछ मामलों में ऐसी सीट पर पार्टी के वफादार नेता को टिकट देती है। सूरतगढ़ सीट पर गेदर की घोषणा के बाद के वोटों के जातीय समीकरणो के चलते भाजपा के सामने कुछ ऐसे ही हालात है। भाजपा का कोई भी नेता गेदर की चुनौती का मुकाबला फिलहाल करता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में किसी संघनिष्ठ नये चेहरे या फिर पार्टी फण्ड में बड़ा योगदान करने वाले नेता को टिकट मिलने की भी संभावना है। भाजपा में इस एंगल में टिकट के दावेदारों की बात करें तो एक पूर्व अध्यक्ष या फिर टिकट को लेकर सबसे आश्वस्त एक व्यापारी नेता को टिकट मिल जाये तो आश्चर्य नहीं होगा है।

कुल मिलाकर हमारी ओपिनियन के अनुसार भाजपा इस सीट पर मुकाबले के एंगल से ही टिकट देगी। जिसके चलते वर्तमान विधायक रामप्रताप कासनिया को टिकट मिलना करीब करीब तय है। फिर भी भाजपा अरोड़ा बिरादरी के वोट को साधने की मजबूरी अशोक नागपाल और पार्टी फण्ड में योगदान या कार्यकर्ता को ओब्लाईज़ करने का एंगल एक पूर्व अध्यक्ष या फिर व्यापारी नेता के भाग्योदय की वजह बन सकता है !

– राजेंद्र पटावरी,उपाध्यक्ष,प्रेस क्लब सूरतगढ़।

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विधायक कासनिया और पूर्व विधायक भादू की कम हो रही लोकप्रियता

सूरतगढ़।  बुझ चुका है तेरे हुस्न का हुक्का।

              एक हम है के गुड़गुड़ाये जा रहे हैं।।

किसी कवि का ये शेर सूरतगढ़ विधानसभा के दिग्गज नेताओं और उनके समर्थकों पर पूरी तरह से लागू होता है। भाजपा में टिकट के दावेदार सभी भाजपा नेता खुद को सबसे बड़ा सूरमा बताते है। वहीं सोशल मीडिया पर टिकट की मांग कर रहे इन नेताओं के समर्थक भी भौकाल मचानें में पीछे नहीं हैं। हर कोई एक दूसरे को नीचा दिखा कर अपने-अपने नेता को जिताऊ साबित करना चाहता है। ये और बात है जनता के बीच लोकप्रियता के पैमाने पर ये कथित दिग्गज नेता बुरी तरह से असफल हो चूके है। यह बात नेताओं और उनके समर्थकों को कड़वी भले ही लगे लेकिन सच है।

खबर पॉलिटिक्स द्वारा व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से करवाए गए सर्वे में जो नतीजे निकल कर आए है वे कुछ ऐसी ही कहानी बयां करते हैं। इस सर्वे में हमने लोगों से सवाल किया था कि सूरतगढ़ विधानसभा में वे किस नेता को प्रत्याशी के रूप में देखना चाहते हैं। सवाल के जवाब में हमने लोगों को वर्तमान विधायक रामप्रताप कासनिया, पूर्व विधायक राजेंद्र भादू, अशोक नागपाल, राकेश बिश्नोई, राहुल लेघा, मोहन पूनिया, विजेंद्र पूनिया,पूर्व चेयरमैन आरती शर्मा, काजल छाबड़ा, जयप्रकाश सरावगी, सुभाष गुप्ता जैसे 11 नेताओं में से एक के चुनाव का विकल्प दिया था।

यहां हम आपको यह भी बता दें कि यह सर्वे 30 अक्टूबर सुबह 11:00 से शुरू होकर 31 अक्टूबर सुबह 11:00 यानि 24 घंटे की अवधि में किया गया। इस सर्वे में करीब 600 लोगों वाले ग्रुप में महज 177 लोगों ने अपनी पसंद पर वोट किया। हालांकि ढाई लाख की आबादी वाले विधानसभा क्षेत्र में किसी नेता की लोकप्रियता का आंकलन करने के लिए यह सैंपल काफ़ी छोटा है। फिर भी जिस तरह के नतीजे इस सर्वे से मिले हैं वो हकीकत की काफी नजदीक दिख रहे हैं।

सर्वे के आंकड़े कई दिग्गज नेताओं के जनता की नज़रों में गिरते जवाल की और इशारा कर रहे हैं। वहीं सर्वे यह भी बताता है कि पुरानी पीढ़ी के कुछ नेताओं की साख अब भी क़ायम है। दूसरी और नई पीढ़ी के कई नेताओं के उभार के संकेत भी इस सर्वे से मिल रहे हैं।

टिकट को लेकर राहुल लेघा है बहुमत की पसंद

खबर पॉलिटिक्स के इस सर्वे में लोकप्रियता के मामले में भाजपा के युवा नेता राहुल लेघा सबसे आगे रहे हैं। कुल वोटो के प्रतिशत की बात करें तो करीब 32% लोगों ने राहुल लेघा को भाजपा प्रत्याशी घोषित करने को लेकर वोट किया। कुल पोल हुए 177 वोट में से लेघा ने 57 वोट हासिल किये है। सर्वे के नतीजे के मुताबिक भाजपा की टिकट के लिए राहुल लेघा इलाके के लोगों की पहली पसंद साबित हो रहे है। हालांकि सैंपल सर्वे बहुत छोटा है लेकिन कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता है कि कुछ ही महीनो के वक्फे में इस युवा नेता ने राजनीति के दिग्गज नेताओं के बीच अपनी पहचान बनाई है। ऐसे वक्त में जब इलाके के बुजुर्ग नेताओं का चार्म हवा हो रहा है, राहुल लेघा जैसे युवा नेता उनकी जगह लेने को बेताब दिख रहे हैं।

हालांकि इस सर्वे में एक और युवा नेता राकेश बिश्नोई के पक्ष में भी लोगों ने अच्छे खासे वोट किए हैं। बिश्नोई को कुल 19 वोट मिले हैं जो प्रतिशत के रूप में कुल वोट का लगभग 11 प्रतिशत होता है। लेकिन राहुल लेघा के मुकाबले में राकेश बिश्नोई हमारे सर्वे में पिछड़ते दिख रहे है । वैसे आपको यह बता दें कि यह सर्वे कोई यूनिवर्सल ट्रुथ नहीं है लेकिन फिर भी आम आदमी की पसंद की झलक इस सर्वे में दिखाई देती है।

अग़वा नेताओं में अशोक नागपाल का जलवा बरकरार, कासनिया,भादू को छोड़ा पीछे

खबर पॉलिटिक्स के इस सर्वे के मुताबिक पूर्व विधायक अशोक नागपाल अब भी विधानसभा के लोगों की पसंद है। विधायक रामप्रताप कासनिया और पूर्व विधायक राजेंद्र भादू के मुकाबले में लोग अशोक नागपाल को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। जो कहीं ना कहीं यह साबित करता है कि विधायक रामप्रताप कासनिया और पूर्व विधायक राजेंद्र भादू का जनाधार कम हुआ है। सर्वे में नागपाल को करीब 17% ( कुल 177 वोट में से 31) वोट मिले हैं। जो विधायक कासनिया को मिले 14.68 प्रतिशत और पूर्व विधायक भादू को मिले 12.42 प्रतिशत वोट से कुछ ज्यादा है। यह आंकड़ा यह भी बताता है कि पूर्व विधायक नागपाल और विधायक कासनिया के मुकाबले में पूर्व विधायक राजेंद्र भादू का जनाधार घटा है। यह इस बात का इशारा भी है कि भादू के विधायक कार्यकाल के दौरान हुई लोगों की नाराजगी का असर कम नहीं हुआ है।

    हालांकि लोकप्रियता के मामले में पूर्व विधायक अशोक नागपाल अभी भी राहुल लेघा से काफी पीछे दिखाई देते हैं। लेकिन वर्तमान विधायक सहित पार्टी के पुराने नेताओं में भाजपा की टिकट के लिए अशोक नागपाल लोगों की पहली पसंद है यह बात सर्वे से साफ है ।

पार्टी टिकट की मांग कर रहे कई नेताओं को सर्वे दिखा रहा आईना

खबर पॉलिटिक्स का यह सर्वे टिकट की मांग कर रहे कई भाजपा नेताओं को आइना दिखाता नज़र आ रहा है। सर्वे में जिस तरह से लोगों ने इन नेताओं के पक्ष में वोट करने में रुचि नहीं दिखाई है, वह यह बताने के लिए काफ़ी है कि विधायक की टिकट की मांग कर रहे इन नेताओं को अभी बहुत मेहनत करने की जरूरत है। जनता के मुद्दों पर कभी सड़क पर नहीं दिखाई देने वाले यह नेता केवल पार्टी कार्यक्रमों में फोटो बाजी कर विधायक बनने का सपना देख रहे हैं। हालांकि सपने देखना बुरा नहीं है पर हमें लगता है कि सपनों को पूरा करने के लिए इन नेताओं को नींद से जागने की जरूरत है।

सर्वे को टिकट मिलने से जोड़कर नहीं देखा जाये

पाठकों से निवेदन है कि खबर पॉलिटिक्स के इस सर्वे के परिणाम को राहुल लेघा या अशोक नागपाल को टिकट मिलने की हमारी घोषणा या दावे के रूप में नहीं देखें। सर्वे सिर्फ भाजपा टिकट के लिए जनता की पसंद का इंडिकेशन मात्र है। टिकट को लेकर पार्टी जमीनी सर्वे, प्रत्याशी की आर्थिक क्षमता, पार्टी के बड़े नेताओं से सम्पर्क सहित कई बिंदुओं पर गौर किया जाता है।

खबर पॉलिटिक्स सर्वे को लेकर दें अपनी राय

 खबर पॉलिटिक्स के इस सर्वे को लेकर आपकी राय हमसे अलग हो सकती है। लेकिन इस ऑनलाइन सर्वे में हमने हमारी कांटेक्ट लिस्ट में शामिल व्यक्तियों को शामिल नहीं किया। सर्वे में भाग लेने वाले हमारे वे पाठक है जो खबर पॉलिटिक्स की निष्पक्ष और बेबाक खबरों को पसंद कर स्वप्रेरित होकर हमसे जुड़े हैं। जैसा कि हम पहले कह चूके है कि सर्वे का सैंपल बहुत छोटा है इसलिए इसे अंतिम मानना भी सही नहीं होगा। फिर भी खबर पॉलिटिक्स के सर्वे से निकले आंकड़ों पर आपकी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें। जिससे की हमें भी आत्मावलोकन का अवसर मिले। 

– राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। मोहब्बत और राजनीति दोनों की राहें फिसलन से भरी होती है। दोनों में ही असफलता आदमी को निराशा के गहरे समंदर में धकेल देती है। इश्क की नाकामयाबी अगर दिमाग में घर कर ले तो आशिक खुद को बर्बाद कर लेता है। ऐसी हालत में आशिक को अच्छे दोस्तों और शुभचिंतकों की जरूरत होती है जो बेहतर मशवरा देकर उसकी मदद करे। राजनीति का मामला भी कुछ ऐसा ही है अहंकार के घोड़े पर सवार राजनीतिज्ञ कई बार असफलता को बर्दाश्त नहीं कर पाते। वे ऐसा कदम उठा बैठते हैं कि उनकी राजनीति की रेल पटरी से ऐसा उतरती है कि फिर वापस पटरी पर लौट कर नहीं आती।

सूरतगढ़ में कांग्रेस से टिकट कटने के बाद मील परिवार भी राजनीति के ऐसे ही भंवर में फंसा है। इस परिवार का अगला कदम यह तय करेगा कि राजनीति के जंगल में मील परिवार फिर से शेर की मानिंद गर्जना करेंगा या फिर विशाल डायनासोर की तरह विलुप्त होकर इतिहास बन जायेगा। यही वजह है कि राजनीति में रुचि रखने वाले हर एक व्यक्ति की नजर मील परिवार के अगले कदम पर है !

मील परिवार के लिए क्या है आगे का रास्ता ?

कांग्रेस से टिकट कटने के बाद मील परिवार राजनीति के ऐसे ही अँधेरे चौराहे पर खड़ा है जहाँ से रास्ते तो 4 निकलते है लेकिन कौनसा रास्ता बेहतर रहेगा यह बात मील परिवार तय नहीं कर पा रहा है। चौराहे पर खड़े कांग्रेस नेता प्रत्येक विकल्प पर गहराई से चिंतन में लगे हुए है।

गेदर की राह में कांटे बिछानें का लक्ष्य ?

राजनीतिक रूप से अगर बात करें तो मील परिवार के लिए एक रास्ता ये है कि वे गेदर की राह में इतने कांटे बिछा दें कि गेदर मंजिल तक नहीं पहुंच पाए ! फिलहाल मील परिवार इसी राह पर चलता दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर मील समर्थकों द्वारा वायरल तरह तरह के वीडियो और आरोपों को ऐसे ही प्रयासों से जोड़कर देखा जा सकता है।

इसके साथ ही पिछले दिनों हुई बैठक में पूर्व विधायक सहित मील परिवार का जोइनिंग के 3 साल बाद गेदर को कांग्रेसी नहीं मानना, कांग्रेस पार्टी को हराने की धमकी के अलावा एक कांग्रेसी नेता पर बसपा से चुनाव लड़ने का दबाब बनाना और गेदर के सजातीय नेता से मुलाक़ात की खबरें ये सब यह बताने के लिए काफ़ी है कि फिलहाल मील परिवार इस पहले रास्ते पर बढ रहा है।

              वैसे इस राह के कई खतरे भी है। सबसे पहले खतरा तो यह है कि जनता अब इतनी बेवकूफ नहीं रही कि वो ये नहीं समझ सकें कि आखिर चुनाव के वक्त ही ऐसे वीडियो और आरोप क्यों लगाए जाते हैं ? सच तो ये है कि मील परिवार के ऐसे प्रयास विरोधियों को गेदर के पक्ष में सहानुभूति का पात्र बनाकर लामबंद कर रहे हैं।

इसके अलावा आने वाले दिनों में पार्टी अनुशासन के चलते मील परिवार के समर्थक कहे जाने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए इस विरोध को सार्वजनिक रूप से लम्बा चलाना मुश्किल हो जाएगा। वहीं ज्यादा अति होने पर देर सवेर पार्टी अनुशासन के नाम पर होने वाली कारवाई मील परिवार के नेताओं और समर्थक पदाधिकारीयों के लिए बड़ी शर्मिंदगी का कारण बन सकती है।

दूसरी और अगर यह प्लान कामयाब नहीं होता है तो भविष्य में मील परिवार की पंचायत समिति की सरकार पर ऐसे ही षड्यंत्रों के चलते गिरने का खतरा भी पैदा हो जायेगा । इन सब के अलावा इस रास्ते का एक खतरा यह है कि मंजिल पर पहुंचने के लिए जब भविष्य में आप इस रास्ते से गुजरते हैं तो आपके बिछाये हुए कांटे आप ही के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में अजीम ओ शान शायर बशीर बद्र का एक शेर याद आ रहा है।

दुश्मनी करो तो जमकर करो, पर गुंजाइश रहे। जब कभी हम मिले शर्मिंदगी ना हो।।

हनुमान मील चुनाव लड़कर रोकेंगे गेदर का रथ !

मील परिवार के लिए दूसरा रास्ता यह है कि वे गेदर के विजय रथ को रोकने के लिए हनुमान मील को मैदान में उतारे। राजनीति के देवताओं के आशीर्वाद (टिकट) के बिना यह लड़ाई मील परिवार के लिए आसान नहीं है। लेकिन चार्ल्स डार्विन का ‘योग्यतम की उत्तरजीविता‘ का सिद्धांत यहां भी लागू होता है। बिना देवताओं के आशीर्वाद के दिखाया गया दमख़म इतिहास में दर्ज़ होकर भविष्य की राह दिखाता है।

सूरतगढ़ से ही 2008 में निर्दलीय चुनाव लड़कर 2013 में भाजपा का टिकट पाने वाले राजेन्द्र भादू, 2013 और 2018 में बसपा (निर्दलीय समान) से लड़कर 2023 में कांग्रेस से टिकट पाने वाले डूंगरराम गेदर, श्रीगंगानगर में 2018 में निर्दलीय लड़कर 2023 में भाजपा का टिकट लाने वाले जयदीप बिहानी और करणपुर विधानसभा में 2018 में निर्दलीय लड़कर 2023 में भाजपा से टिकट के प्रबल दावेदार बने पृथ्वीपाल संधू इतिहास के ऐसे ही कुछ उदाहरण है जिनसे युवा नेता संघर्ष की राह चुनने का सबक ले सकता है।

जैसा कि हमने पहले ही कहा टिकट के बिना ऐसे युद्ध जितना मुश्किल है। लेकिन आप अगर अपने दुश्मन को रोकने में कामयाब हो जाते हैं तो आप अपने वजूद को बचा लेते है। वैसे युवा नेता के पक्ष में एक समीकरण यह भी है कि फिलहाल सत्ता और संघठन पर मील परिवार की पकड़ है। इस बात का फायदा एक और जहाँ युवा नेता को मिलेगा वहीं कांग्रेस पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का समर्थन नहीं मिलने से भी गेदर की मुश्किलें बढ़ेगी।

 पिछले 3 सालों से फील्ड में सक्रिय मील परिवार के युवा नेता इस चुनौती को स्वीकार कर अपनी लोकप्रियता और तैयारी को हक़ीक़त की कसौटी पर परख कर भविष्य के लिए खुद को तैयार कर सकते है। लेकिन निराशा के समंदर से उबरकर हौसले की यह उड़ान भरने से पहले युवा नेता के लिए यह जरूरी है कि वे लश्कर में छुपे मौका परस्त दरबारियों और वफादार सिपहसलारों में पहचान कर अपनी ताकत का अंदाजा लगा ले।

भाजपा में शामिल होकर देंगे समर्थन !

मील परिवार के लिए तीसरी राह दुश्मन के खेमे में शामिल होने की भी है। वे भाजपा में शामिल होकर या बाहर से खुलकर समर्थन कर एक तरह से दुश्मन की मदद करनें का विकल्प भी चुन सकते हैं। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर मील परिवार के नेताओं की भाजपा के दिग्गजों के साथ मुलाकात के बाद ऐसी चर्चाएं चल भी रही थी। मगर कांग्रेस नेता सचिन पायलट के साथ राजाराम मील की मुलाकात के बाद इस बात की उम्मीद भी कम ही है ।

हालांकि मील परिवार के लिए मुश्किलें यहां भी है। कड़वा मगर सच ये है कि भाजपा में शामिल होने के बाद मील परिवार के लिए टिकट की राह ज्यादा कठिन होगी । वजह है सूरतगढ़ भाजपा में टिकट के दावेदारी कर रहे योद्धाओं की संख्या। जो कांग्रेस से न केवल ज्यादा है बल्कि जमीनी स्तर पर भी भाजपा के कई नेता मील परिवार से ज्यादा मजबूत है। इसलिये कांग्रेस में अकेले गेदर की बादशाहत को चुनौती देना मील परिवार के लिए ज्यादा श्रेयसकर रहने वाला है।

चुप रहकर करेंगे अच्छे दिनों का इंतजार !

मील परिवार के लिए जो चौथा और आखिरी रास्ता है वह है अँधेरे के खत्म होने या फिर सुबह होने तक का इंतजार करना। क्योंकि जब आपका बुरा वक्त चल रहा हो उसमें अच्छे समय का इंतजार करना ही लड़ाई का सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।

सत्ता में रहते हुए मील परिवार के नेताओं की गलतियों नें इस दिग्गज परिवार को एक बारगी विधायकी की दौड़ से बाहर जरूर कर दिया है। लेकिन अभी भी पंचायत समिति के माध्यम से वे विकासोन्मुख और न्यायप्रिय शासन कर अपनी छवि पर लगे दागों को हल्का कर सकते हैं और इन कार्यों के बल पर 5 साल बाद आने वाले चुनावों में परिवार के युवा नेता फिर टिकट की दावेदारी कर सकेंगे। भगवान की तरह जनता भी देर सवेर माफ कर देती है, यह बात मील परिवार और युवा नेता ध्यान में रखनी चाहिए।

                  कुल मिलाकर चापलूसों और नकारात्मक छवि के लोगों नें राजनीति के दिग्गज इस परिवार की टिकट कटाकर अपना काम कर दिया है। बार-बार आगाह करने के बावजूद गलतियों से सबक नहीं लेने वाले मील परिवार के नेता अब कौनसी राह चुनते है इसको लेकर जल्द ही पर्दा उठने वाला है ! परन्तु हमें लगता है कि इस बुरे वक़्त में युवा नेता को अच्छे समय का इंतजार करना चाहिए या फिर गेदर की चुनौती को स्वीकार कर अपने भविष्य की इबारत को लिखने के लिए चुनावी रण में उतरना चाहिए ? इस निर्णय को लेते समय वे किसी शायर की इन पंक्तियों को भी याद कर सकते है।

गिरते हैं शह सवार ही मैदान ए जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चले।।

–राजेन्द्र पटावरी, उपाध्यक्ष, प्रैस क्लब, सूरतगढ़।

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पिछली गलतियों से सबक लेंगे मील परिवार के नेता !

सूरतगढ़। सूरतगढ़ विधानसभा से कांग्रेस ने डूंगरराम गेदर को प्रत्याशी बनाकर मील परिवार की राजनीति का पता काट दिया है । रविवार को जब डूंगरराम गेदर को कांग्रेस की टिकट की घोषणा हुई तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और गेदर के समर्थक रामदेव बाबा रोड पर स्थित गेदर के कार्यालय पहुंचे और गेदर को बधाई दी। इस अवसर पर समर्थकों ने मिठाइयां बांटकर खुशियां मनाई और आतिशबाजी की। नगरपालिका अध्यक्ष परसराम भाटिया और वाइस चेयरमैन सलीम कुरैशी सहित शहर के गणमान्य लोगों में गेदर को बधाई दी।

अब भाजपा की टिकट घोषणा का इंतजार

कांग्रेस द्वारा डूंगरराम गेंदर को टिकट की घोषणा के बाद अब सबकी नजर भाजपा की ओर से हैं। उम्मीद की जा रही है कि दशहरे के बाद भाजपा अपने प्रत्याशी की घोषणा करेंगी। क्योंकि कांग्रेस द्वारा गैर जाट प्रत्याशी की घोषणा की गई है ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि भाजपा में टिकट किसी जाट उम्मीदवार को दी जाएगी। जाट उम्मीदवारों की बात करें तो फिलहाल रामप्रताप कासनिया का नाम आगे चल रहा है। कासनिया के अलावा पूर्व विधायक राजेंद्र भादू, राहुल लेघा, नरेंद्र घिन्टाला, मोहन पूनियां भी टिकट के दावेदार है।

वहीं अगर भाजपा गैर जाट के मुकाबले गैर जाट को टिकट देती है तो अशोक नागपाल और काजल छाबड़ा का नाम सबसे आगे चल रहा है। इसके अलावा सुभाष गुप्ता, जयप्रकाश सरावगी, आरती शर्मा का नाम भी उनके समर्थक आगे बढ़ा रहे हैं। क्योंकि डूंगरराम गेदर मूल ओबीसी बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं ऐसे में मूल ओबीसी राकेश बिश्नोई, श्रीभगवान सेवटा की उम्मीदवारी पर भी भाजपा विचार कर सकती है। 

भाजपा के लिए उम्मीदवार का चयन बड़ी चुनौती

कांग्रेस द्वारा डूंगरराम गेदर की घोषणा के बाद भाजपा के लिए उम्मीदवार का चयन एक बड़ी चुनौती बन गयी है। चुनौती इसलिए है कि 2013 और 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत की एकमात्र वजह बसपा उम्मीदवार के रूप में डूंगरराम गेदर का ताल ठोकना था। बसपा प्रत्याशी गेदर की वजह से कांग्रेस का अनुसूचित जाति का बड़ा वोट बैंक बिखर गया। जिसका फायदा दोनों बार भाजपा को मिला। लेकिन इस बार सिनारियो अलग है क्योंकि अब बसपा मैदान में भले ही हो लेकिन बसपा में गेदर के मुकाबले का कोई चेहरा नहीं है। ऐसे में बसपा प्रत्याशी को वोट का आंकड़ा चार अंको में सिमट जायेगा और शेष वोट कांग्रेस प्रत्याशी को मिलते नज़र आ रहे है ।

गेदर के पक्ष में फिलहाल एक और बात भी है कि कुम्हार प्रजापति समाज का इलाके में एक बड़ा वोट बैंक है जो बहुसंख्यक भाजपा से जुड़ा हुआ है। लेकिन गेदर के मैदान में होने के चलते अब गेदर को मिलना तय है। ऐसे में भाजपा के लिए सूरतगढ़ से जिताऊ उम्मीदवार का चयन एक बड़ी चुनौती बन चुका है। भाजपा के सामने फिलहाल इसका एक ही विकल्प नजर आ रहा है वह जाट प्रत्याशी को मैदान में उतरना। जिससे कि विधानसभा क्षेत्र का संपूर्ण जाट वोट का धूर्वीकरण भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में किया जा सके। जिससे की भाजपा इस मुकाबले को बराबरी में ला सके।

मील परिवार को इंट्रोस्पेक्शन की जरूरत

राजस्थान की राजनीति में बड़ा नाम रखने वाले मील  परिवार को टिकट नहीं मिलना भूकंप के झटके से कम नहीं है। सूरतगढ़ में कांग्रेस राजनीति का वटवृक्ष माने वाले मील परिवार के नेताओं के लिए यह आत्मचिंतन का वक्त है। इन नेताओं को सोचना चाहिए कि आखिर किस वजह से उनकी सर्वे निगेटिव रहा ? जिसकी वजह से पार्टी ने उनकी टिकट काट कर गेदर को थमा दी। मील परिवार को इस बात पर भी मंथन करना चाहिए कि जब इलाके के लोगों में मील परिवार के प्रति नकारात्मक विचार बन रहे थे तो उन्हें इस बात की जानकारी क्यों नहीं मिली ? क्या चापलूसों और हजारियों ने मील नेताओं को जनता के मूड से बाखबर नहीं होने दिया ?

शहर के समाचार पत्रों और सोशल मीडिया पर लगातार लोग अतिक्रमणों, भाई भतीजावाद के आरोप लग रहे थे तो मील परिवार के नेता आखिर क्यों सोए रहे ? नगरपालिका में भ्रष्ट अधिकारियों की नियुक्ति और इन भ्रष्टाचारियों के नंगे नाच ने मील परिवार के प्रति लोगों के विश्वास को खत्म करने में सबसे अहम रोल निभाया ? परन्तु बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ेगा कि शहर में 15 साल की राजनीति के बावजूद मील परिवार ने अधिकारियों की पोस्टिंग में सबक नहीं लिया जिसका खामियाजा मील परिवार को भुगतना पड़ा। मजेदार बात यह है कि यह सब तब हुआ जब लगातार मीडिया इन भ्रष्टाचारियों के कारनामों का खुलासा कर रहा था।

हनुमान मील को निराशा, भविष्य के लिए गलतियों को सुधारने की जरूरत

मिल परिवार की टिकट कटने से सबसे ज्यादा निराशा हनुमान मील को हुई है इस बात में कोई संदेह नहीं है। वे पिछले 3 सालों से चुनावों को लेकर लगातार मेहनत कर रहे थे। लेकिन कहीं ना कहीं मील परिवार के दूसरे नेताओं की तरह उन्होंने भी गलतियां की जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा है। हालांकि परिवार पर लग रहे अतिक्रमनों के आरोपों पर उन्होंने अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई भी की। लेकिन कांग्रेस नेता के इस अभियान को विरोध की कार्रवाई के रूप में ही देखा गया। क्यूंकि इस अभियान के बाद में अतिक्रमणों को लेकर उनका रवैया भी ढूलमूल रहा।

इसके अलावा कांग्रेस नेता पर बदले की राजनीति के आरोपों ने भी उनकी छवि को खासा नुकसान पहुंचाया। यही नहीं पूर्व विधायक पर जहां चापलूसों की सलाह पर काम करने के आरोप लगते रहे वहीं हनुमान मील भी इसी गलती को दोहराते रहे। सच बात यह भी है कि शहर की जनता में मील परिवार और उनके नेताओं से अधिक नाराजगी दोनों नेताओं को घेरे रहने वाले चाटुकारों से थी। खुद को मिल परिवार का खासमखास साबित कर इन लोगों ने मील राजनीति की लंका लगा दी और पता तक नहीं लगने दिया।

कुल मिलाकर हनुमान मील ही मील परिवार की राजनीति का भविष्य है और क्योंकि राजनीति में इमेज बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसलिये हनुमान मील को चाहिए कि चापलूसों और चाटुकारों को तुरंत प्रभाव से दूर कर साफ सुथरा लोगों को अपनी टीम में शामिल करें। इसके अलावा उन्हें बदले की राजनीति करने वाले नेता की छवि से भी बाहर आने की भी जरूरत है। उम्मीद की जानी चाहिए कि युवा नेता पिछली गलतियों से सबक लेंगे।

– राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब।

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सरकारी बंगले में बिना अनुमति करवाए निर्माण

सूरतगढ़। आमतौर पर सरकारी विभाग अपने कर्मचारियों को रहने के लिए आवास का आवंटन करते है। लेकिन सूरतगढ़ में पीडब्ल्यूडी विभाग में आवास आवंटन के मामले में ‘गैरों पे करम अपनों पर सितम’ जैसे हालात है। जहां एक और विभाग के कर्मचारी किराए के मकानो में निवास कर रहे हैं वहीं दूसरी और विभाग के एक सरकारी बंगले पर अधिकारियों की मिलीभगत के चलते नगरपालिका का एक जेईएन पिछले दो वर्षों से अवैध रूप से रह रहा है।

हम बात कर रहे हैं तहसील रोड पर पीडब्ल्यूडी कार्यालय के सामने स्थित सरकारी बंगले की। सूत्रों के मुताबिक सरकारी कागजों में यह बंगला विभाग के ही एक यूडीसी स्तर के कर्मचारी के नाम पर आवंटित है। परन्तु अधिकारियों की मेहरबानी से जेईएन साहब बंगले को आरामगाह बनाकर फर्स्ट ग्रेड ऑफिसर की सरकारी सुविधाओं का लाभ लूट रहे है। इतना ही नहीं साहब ने अपने रुतबे के चलते पीडब्ल्यूडी विभाग की अनुमति के बिना ही शैड सहित कई निर्माण भी इस सरकारी बंगले में करवा लिए हैं। क्योंकि साहब सिंडिकेट के प्रमुख सदस्यों में शामिल है तो ऐसे में साहब को आखिर कौन रोकता ? सो पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने भी इस मामले में अपनी आंखें मुंद रखी है।

पहले पिता के नाम था आवंटन, अब कर्मचारी को आवंटन करवा जमाया कब्जा

तहसील रोड पर पीडब्ल्यूडी कार्यालय के सामने बना सरकारी बंगला

विभागीय सूत्रों के अनुसार यह आवास कुछ वर्ष पूर्व पीडब्ल्यूडी के एईएन ब्रिजलाल सिहाग को आवंटित किया गया था। उसके बाद से एईएन साब के पुत्र सुशील सिहाग जो की नगरपालिका में जेईएन है इसी बंगले में अपने पिता के साथ रह रहे थे। पुत्र का पिता के साथ रहना एक सामान्य बात है। लेकिन करीब 2 वर्ष पूर्व एईएन सियाग सेवानिवृत हो गए। नियमानुसार कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद एक माह में सरकारी आवास को खाली कर देना चाहिए। लेकिन बड़े साहब और सिंडिकेट के सदस्य छोटे साहब ने अपने राजनीतिक रसूखों का फायदा उठाते हुए विभाग के ही एक कर्मचारी के नाम से उक्त बंगले का आवंटन करवा  लिया। इसके बाद से करीब 2 वर्ष होने को है, साहब दूसरे विभाग का कर्मचारी होते हुए भी गजेटेड अधिकारी को आवंटित होने वाले इस बंगले में मजे से जीवन काट रहे है।वह भी नाम मात्र के किराए पर !

विभाग को हो रहा राजस्व का नुकसान

इस पूरे प्रकरण में पीडब्ल्यूडी विभाग को भी किराए के रूप में हजारों रुपए महीने के हिसाब से नुकसान हो रहा है। क्योंकि विभाग द्वारा कर्मचारी के पद के अनुरूप ही एचआरए की कटौती की जाती है ? ऐसे में सरकार को नुकसान हो रहा है क्योंकि यही बांग्ला अगर गैजेटेड ऑफीसर को आवंटित किया जाता तो उसका HRA ज्यादा कटता । दूसरी और जेईएन साहब के मजे हो रहे हैं क्यूंकि उन्हें नाम मात्र के किराए में गैजेटेड ऑफीसर का बंगला मिला हुआ है।

              वैसे इस संभावना से भीं इनकार नहीं किया जा सकता है कि विभाग का कर्मचारी जिसको बंगले का आवंटन किया गया है वह लालच के चलते इस गोरखधंधे में शामिल हो। संभव है कि कर्मचारी द्वारा जेईएन साहब से किराये के रूप में वसूली जाने वाली राशि विभाग द्वारा काटे जाने वाले एचआरए से अधिक हो ? ऐसे में विभाग को इस मामले में सघन जांच करवाई जाने की आवश्यकता है ?

सरकारी बंगले में नियम विरुद्ध करवाए निर्माण

तहसील की और जाने वाली मुख्य सड़क पर बने इस बंगले में जेईएन साहब जहां नियम विरुद्ध 2 साल से जमे हुए हैं वहीं इस बंगले में साहब ने अपनी सुविधा के लिए बिना विभाग की स्वीकृति के कई अवैध निर्माण भी करवा लिए है जोकि पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। साहब ने बंगले के पिछले भाग में जहाँ एक पशुओं को रखने का क्वार्टरनुमा कमरा बना रखा है। इसके अलावा बंगले के फ्रंट में छाया के लिए एक शैड भी बना लिया है। सूत्रों की माने तो यह सभी निर्माण साहब ने अपने स्तर पर करवाए हैं। इन निर्माण कार्यों में साहब,पीडब्ल्यूडी या नगरपालिका के ठेकेदारों या फिर किस एजेंसी का पैसा लगा है यह भी एक अलग जांच का विषय है।

कार्यवाहक एक्सईएन बोले : नहीं जानकारी, उठ रहे गंभीर सवाल

जब हमने इस मामले में विभाग के कार्यवाहक एक्सईएन गुरतेज सिंह से बात की तो उन्होंने मामले की जानकारी नहीं होने और मामले को देखने की बात कहीं। लेकिन सवाल यह पैदा होता है कि आखिर पीडब्ल्यूडी विभाग के बंगले में दूसरे विभाग का कर्मचारी कैसे रह रहा है, वह भी तब जब विभाग के खुद के कर्मचारी किराए के मकान में रहने को मजबूर है ? सवाल यह भी पैदा होता है कि क्या 2 साल से चल रहे इस गोरखधंधे की जानकारी पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को नहीं है ? आखिर किसके दबाव में पीडब्ल्यूडी के अधिकारी आंखें मूंदे हुए हैं यह भी एक बड़ा सवाल है ?

सरकारी बंगला खाली करवाकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करें विभाग

इस मामले में अब विभाग को चाहिए कि तुरंत प्रभाव से सरकारी बंगले को खाली करवाए और साथ ही इस मामले की जांच कर विभाग के सरकारी बंगले को सबलेट करने के दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करे। इस पूरे मामले में किसी शायर की ये पंक्तिया याद आ रही है

मैं बचाता रहा दीमकों से घर अपना, चंद कुर्सी के कीड़े पूरा मुल्क खा गये।।

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सूरतगढ़। खबर पॉलिटिक्स द्वारा शहर के वार्ड नंबर-38 में सरकारी भूखंड पर अतिक्रमण की खबर प्रकाशित करने के बाद नगरपालिका प्रशासन हरकत में आया है। इस मामले में खबर पॉलिटिक्स के समाचार पर संज्ञान लेते हुए ईओ पवन चौधरी ने भी मौके का निरीक्षण किया। इससे पहले वार्ड जमादार बलदेव, सहायक अभियंता सुशील सियाग सहित सफाई कर्मचारियों का अमला मौके पर पहुंचा और भूखंड पर चल रहे निर्माण को रुकवा दिया। पालिका अधिकारियों में मौके पर मौजूद निर्माण मिस्त्रीयों को बिना परमिशन निर्माण शुरू नहीं करने की हिदायत दी।

   वही इस मामले को पालिकाध्यक्ष परसराम भाटिया नें भी गंभीरता से लिया है। उन्होंने इस मामले में अधिशासी अधिकारी से चर्चा कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए है। इस मामले को लेकर पालिका प्रशासन के साथ साथ अध्यक्ष भाटिया की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे थे।

                 गौरतलब है कि खबर पॉलिटिक्स द्वारा आज सुबह ही वार्ड नंबर-38 में बर्फ फैक्ट्री के पीछे सरकारी भूकंप पर किए जा रहे हैं अवैध निर्माण का मामला उठाया था। भूखंड पर कब्जा करने की नीयत से किया जा रहे अवैध निर्माण की खबर प्रकाशित होने के बाद निर्माण कार्य रुकने पर वार्डवासी भी काफ़ी खुश है।

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सूरतगढ़। अगर आप अपने पट्टेसुदा भूखंड पर निर्माण करना चाहते हैं तो आपको नगरपालिका से परमिशन लेनी होगी। आप ऐसा नहीं करते हैं तो पालिका के कारिंदे तुरंत आपका निर्माण रुकवा देते है। परंतु यदि आप शहर में खाली पड़े किसी सरकारी भूखंड पर निर्माण कर कब्जा करना चाहते हैं तो आपको रोकने वाला कोई नहीं है। बशर्ते सत्ता में बैठे नुमाइंदों का आशीर्वाद आपको मिल जाये। वैसे यह कोई मुश्किल काम नहीं है इसके लिए बस आपको सत्ता में बैठे नेताओं की हाज़िरी बज़ाना होगा । इसके अलावा पालिका में बैठे अधिकारीयों से चांदी के चंद सिक्के के बदले इनके ज़मीर का सौदा भी कर सकते है। कहने का मतलब है की यदि आप चापलूसी और सौदेबाज़ी में माहिर है तो इस शहर में लूट का लाइसेंस आप भी ले सकते है। वैसे यह बताने की जरूरत नहीं है कि पिछले कुछ सालों में शहर में लूट के लाइसेंसधारीयों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। ऐसे ही एक सरकारी भूखंड पर किया जा रहा अवैध निर्माण इन दिनों शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

                        हम बात कर रहे हैं वार्ड नंबर-38 में बर्फ फैक्ट्री के पीछे सरकारी भूखंड पर किए जा रहे अवैध निर्माण की। नगरपालिका से महज डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर लाखों की कीमत वाले इस सरकारी भूखंड पर धड़ल्ले से निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। लेकिन पालिका प्रशासन में निर्माण को रोकने की हिम्मत नहीं है। महज एक फोन कॉल पर गरीबों का आशियाना तोड़ने के लिए जेसीबी लेकर पहुंचने वाले पालिका के शूरवीरों को मानो सांप सूंघ गया है। यह सब भी तब हो रहा है जबकि पार्षद यासमीन सिद्दीकी और विधायक रामप्रताप कासनिया ने गत 6 अक्टूबर को हुई बोर्ड की बैठक में इस मामले को उठा चूके है। बोर्ड बैठक में विधायक के आरोपों पर अध्यक्ष परसराम भाटिया खासा नाराज भी हुए थे और उन्होंने पूर्व विधायक को नाम बताने का चैलेंज करते हुए अतिक्रमणों को नहीं बख्शनें का दावा भी किया था। लेकिन अब 10 दिन बीतने के बावजूद भी भूखंड पर चल रहा निर्माण अध्यक्ष भाटिया के गुस्से के खिल्ली उड़ा रहा है !

मजेदार बात यह भी है कि इसी भूखंड पर भाजपा पार्षद रिंकू सिद्दीकी द्वारा कब्जा करने के आरोपों के चलते कुछ माह पूर्व नगरपालिका प्रशासन नें अतिक्रमण हटाकर नगरपालिका संपत्ति का बोर्ड भी लगाया था। लेकिन अब जब इस भूखंड पर निर्माण कर फिर से कब्जा किया जा रहा है तब नगरपालिका प्रशासन नें मौन धारण कर लिया है।

बताया जा रहा है कि नगरपालिका के ही एक पूर्व अधिकारी द्वारा यह निर्माण करवाया जा रहा है। यहां यह भी गौरतलब है कि पूर्व विधायक राजेंद्र भादू के कार्यकाल में तड़ीपार किए गए इस अधिकारी की घर वापसी में स्थानीय कांग्रेसी नेताओं नें अहम भूमिका निभाई थी। पालिका में अधिकारी रहते हुए कोरोना पट्टों सहित भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात रहे ये साहब ना जाने क्यों सत्ताधारी नेताओं की मूंछ का बाल बने रहे ?

अपनी सेवाओं से इस अधिकारी ने कांग्रेस नेताओं को इतना खुश कर दिया था कि उन्होंने रिटायरमेंट के बाद बोर्ड अध्यक्ष बनाने के लिए साहब को टिकट भी दे डाली। यह तो इस शहर की किस्मत अच्छी थी कि लोगों की बद्दुओं नें चुनावों में साहब की वाट लगा दी। वैसे लगे हाथ आपको हम यह भी बता दें कि चापलूसों से घिरे सत्ताधारी कांग्रेस नेता अधिकारीयों के चयन के मामले में हमेशा अनलकी रहे हैं। परन्तु अफसोस की बात है कि इन नेताओं ने पुरानी गलतियों से सबक नहीं लिया।

चापलूसों की बातों में आकर गत वर्ष भी कांग्रेसी नेताओं नें पालिका के ही पूर्व में ईओ रह चूके साहब कि पुन ईओ के रूप में वापसी करा दी थी। जिसने एक सिंडिकेट बनाकर न केवल एक साल तक कांग्रेस नेताओं की आंखों में धूल झोंकी, बल्कि नगरपालिका के सारे संसाधन कुछ एक लोगों पर लुटाकर बंदरबांट कर ली। अब कांग्रेस के बड़े नेता सार्वजनिक रूप से कई मौकों पर इस गलती को स्वीकार भी कर चुके हैं। लेकिन वह कहावत है ना कि ‘अब पछताए होत क्या,जब चिड़िया चुग गई खेत’।                                    

                   बहरहाल पिछले 5 साल के कार्यकाल में सत्ताधारी कांग्रेस नेता की सबसे ज्यादा किरकिरी अतिक्रमणों को लेकर हुई है। हालांकि कांग्रेस नेता हनुमान मील नें अतिक्रमणों के खिलाफ अभियान चलाकर एक कड़ा संदेश देने की कोशिश भी की थी। लेकिन शहर में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामले अब भी लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि कांग्रेस नेता इस बहुचर्चित अतिक्रमण को तुरंत हटाने का निर्देश दें और पूर्व ईओ की की सेवाओं के बदले अतिक्रमण को अभयदान की चर्चाओं को समाप्त करें। वरना अतिक्रमणों को संरक्षण देने के पब्लिक में बन चूके परसेप्शन के पुख्ता होने के चलते होने वाले राजनीतिक नुकसान के लिए भी उन्हें तैयार रहना चाहिए।

                         वैसे इस मामले नें नगरपालिका अध्यक्ष परसराम भाटिया की साख पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। पिछले दो महीनो में दिन रात मेहनत कर उन्होंने नगरपालिका अध्यक्ष के रूप में जो उपलब्धियां हासिल की है उन पर अतिक्रमण का यह मामला पानी फेर सकता है। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेता, पालिका अध्यक्ष भाटिया और पालिका प्रशासन इस मामले में बेशर्मी की चादर ओढ़े रहेगा या फिर इस बहुचर्चित अतिक्रमण को हटाकर भेदभाव के आरोपों का जवाब देगा ?

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निरीक्षण के अभाव में धड़ल्ले से चल रहा घटिया निर्माण

सूरतगढ़। दीमक के बारे में कहा जाता है कि जिस लकड़ी पर यह लग जाती है उसे अंदर ही अंदर खोखला कर देती है। आम तौर पर ऊपर से देखने पर दीमक दिखाई नहीं देती लेकिन वह अपना काम यानि की लकड़ी को खोखला करना जारी रखती है। सूरतगढ़ नगरपालिका की विभिन्न शाखाओं में ऐसी कई दीमकें लगी हुई है जिन्होंने पालिका की व्यवस्था को पूरी तरह से खोखला कर दिया है। पालिका में भारी भ्रष्टाचार की वजह ऐसी ही कुछ दीमकें है।

                            नगरपालिका की निर्माण शाखा को ही लें। परसराम भाटिया के कार्यवाहक चेयरमैन बनने के बाद से शहर में करोड़ों रुपए के निर्माण कार्य चल रहे हैं। लेकिन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जाँचने वाला कोई नहीं है। इसकी वजह है पालिका के एक प्रभावशाली तकनीकी अधिकारी का लालच।

हम बात कर रहे हैं पालिका के जेईएन सुशील सिहाग की। नगरपालिका के एईएन का अतिरिक्त चार्ज संभाल रहे जेईएन साब की टेढ़ी नज़र शहर में चल रहे करोड़ों रुपयों के निर्माण कार्यों से मिलनें वाले कमीशन पर है तो इसके लिए साहब नें अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर कमीशन की राह में रोड़ा बन रहे जेईएन चरणजीत मीणा को पट्टों की रिपोर्ट करने के काम में लगवा दिया।

इन आदेशों के चलते साहब अब शहर में हो रहे अधिकांश निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचने के अकेले इंचार्ज बन बैठे है। परन्तु तल्ख़ हकीकत यह है कि साहेब का ध्यान कमीशन पर ज्यादा और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर कम है। यहीं वजह है कि शहर में दर्जनों स्थानों पर धड़ल्ले से घटिया निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन कोई रोकने वाला नहीं है।

साइट इंस्पेक्शन की बजाय ऑफिस में बैठकर एमबी भर रहे है साहब

खास बात यह है कि ठेकेदारों से मिलने वाले कमीशन के बौझ से दबे साहब मौके पर जाने की बजाय कार्यालय में बैठकर ठेकेदारों की एमबी भर रहे है। वह भी तब जबकि नगरपालिका प्रशासन नें जनता के धन से चलने वाली एक AC कार भी साहब को दे रखी है। परन्तु सच्चाई ये है कि यह गाड़ी साइट इंस्पेक्शन की बजाय साहब की तफरी में ज्यादा काम आ रही है।

वैसे जब ऑफिस में बैठकर ही साहब का काम चल रहा हो तो कोई फील्ड में आखिर क्यों जाये ? दूसरी और जब अधिकारी को गुणवत्ता की फ़िक्र नहीं हो तो फिर ठेकेदार से गुणवत्ता की उम्मीद करना वैसे भी बेमानी हो जाता है !

सिण्डिकेट के मेंबर रहे है साहब

नगरपालिका में पूर्व ईओ शैलेन्द्र गोदारा के कार्यकाल में एक सिंडीकेट चर्चा का विषय बना रहा था। बताया जा रहा है जेईएन साहब भी सिंडिकेट के खासमखास सदस्य रहे है। सत्ताधारी कांग्रेस नेताओं की आंखों में धूल झोंककर सिंडिकेट के सदस्यों नें महिनों घरों में बैठकर ऑफिस चलाया। इस दौर में एक और जहाँ जहाँ फ़र्ज़ी नियमों का हवाला देकर आम लोगों को पट्टे नहीं दिए, वहीं दूसरी और मोटी रकम लेकर खास लोगों को नगरपालिका सीमा से बाहर और खाली प्लॉटों के नियम विरुद्ध पट्टे बनाकर खूब लूट मचाई गई। यह वह दौर था जब नगरपालिका का पूरा तंत्र दिन रात कुछ एक निजी लोगों के लिए काम करता रहा।

               मजे की बात यह है कि सत्ताधारी नेताओं नें सिंडीकेट के खतरे को जानकर ही जेईएन सिहाग को सूरतगढ़ बाहर का रास्ता दिखाया था। लेकिन चेयरमैन कालवा को सबक सिखाने के चापलूसों के बहकावे में आकर इन्ही नेताओं नें पालिका में जेईएन सियाग की फिर से एंट्री करवा दी। नतीजा सिंडिकेट और मजबूत होता गया और जनता हलकान होती रही। कांग्रेस के युवा नेता सिंडिकेट के इरादों को भाँप नहीं पाए बहुत देर बाद पूर्व विधायक गंगाजल मील नें सिंडिकेट के बिछाये तिलिस्म को तोड़ा जरूर लेकिन तब तक सिंडिकेट इस शहर, नगरपालिका और खुद कांग्रेस नेताओं की राजनीति को भारी नुकसान पहुंचा चुका था। जिसकी भरपाई शायद अब सम्भव नहीं।

हालांकि ईओ शैलेंद्र गोदारा के स्थानांतरण के बाद यह सिंडिकेट कमजोर पड़ चुका है। लेकिन जेईएन सियाग की मौजूदगी यह बताने के लिए काफ़ी है कि अभी सिंडीकेट की जड़े खत्म नहीं हुई है। चेयरमैन परसराम भाटिया नें सिंडिकेट के प्रभाव वाले कार्यकाल में हुए घोटालों की जांच की बात कही है। अगर ऐसा होता है तो जाँच की आंच जेईएन साहब तक भी पहुंचेगी।

सिंडिकेट तोड़ने के लिए दिवाली से पहले सफाई की जरूरत

बहरहाल जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते जेईएन साहब और ठेकेदारों की तो मौज बनी हुई है। लेकिन करोड़ों रुपए विकास कार्यों पर खर्च करने के बावजूद घटिया निर्माण के चलते जनता को इसका फायदा नहीं मिलने वाला है। इसलिये चेयरमैन परसराम भाटिया को चाहिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर ध्यान देते हुए दोहरे कमीशन के लालच में फंसे जेईएन साहब की लगाम कसे।

वैसे सिंडिकेट से धोखा खाने वाले कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक भी आचार संहिता लगने या फिर दिवाली से पहले सफाई अभियान चलाकर सिंडिकेट की कमर तोड़ सकते है। वरना नगरपालिका में गंदगी से लगातार बढ रहे संक्रमण का असर कांग्रेस नेताओं की राजनीति पर पड़ना तय है।

  • – राजेन्द्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रैस क्लब, सूरतगढ़।

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आरोपी से पूछताछ में जुटी अनूपगढ़ पुलिस

अनूपगढ़। अनूपगढ़ पुलिस थाना सीआई ईश्वर जांगिड़ के नेतृत्व में एसआई भोलू राम ने भोले भाले किसानों को सस्ती दरों पर जमीन बेचने का लालच देकर फर्जी कागजात तैयार कर ठगी करने के मुख्य आरोपी बलजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक गिरोह का मुख्य आरोपी 16 जीबी निवासी बलजीत सिंह दलाल बनकर अपने गिरोह के सदस्य को जमीन मालिक बताकर कूटरचित और जाली दस्तावेज तैयार करवाकर रुपए ठगने का कार्य करता है।
पुलिस फिलहाल गिरोह के मुख्य आरोपी बलजीत सिंह को गिरफ्तार कर गहनता से पूछताछ कर रही है।

किसान ने करवाया था मामला दर्ज

सीआई ईश्वर जांगिड़ ने बताया कि 8 मई 2023 को शिवराज सिंह(52) पुत्र गुरदेव सिंह निवासी 8 KSD ने मामला दर्ज करवाया था कि सुखदेव सिंह पुत्र सरवन सिंह निवासी 33 GB, अजीतगोपाल सिंह उर्फ राजू पुत्र लाभ सिंह निवासी 29 GB, गुरनाम सिंह निवासी 17 MD,साहब सिंह पुत्र निढ़ा सिंह निवासी 6 SKM, सरवन सिंह पुत्र करनैल सिंह निवासी 33 GB और भगवानाराम डाल ने आपस में मिलकर षड्यंत्र रचते हुए फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उसके साथ जमीन का सौदा करने के बहाने 25.38 लाख रु हड़प लिए। इस पर पुलिस ने उक्त सभी आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर मामले में अनुसंधान शुरू किया था।

गिरोह के सदस्यों को जमीन का मालिक बताकर करते थे ठगी

आरोपी बलजीत सिंह

सीआई जांगिड़ ने बताया कि S.I भोलू राम, कांस्टेबल श्योपत राम और सूरजभान द्वारा अनुसंधान के दौरान पता चला कि बलजीत सिंह ने एक गिरोह बना रखा है। जो किसानों को सस्ती दरों पर जमीन बेचने का लालच देकर अपने गिरोह के सदस्य को जमीन मालिक के तौर पर खड़ा करके कूटरचित और जाली दस्तावेज तैयार करवा कर रुपए ठगी करने का काम करता है।बलजीत सिंह पुत्र काबुल सिंह निवासी 16 GB के द्वारा ही दलाल बनकर जमीन का सौदा करवाया जाता है और भोले भाले किसानों से रुपए हड़प लिए जाते हैं। पुलिस टीम ने मुख्य आरोपी बलजीत सिंह को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है।

आरोपी बलजीत के खिलाफ ठगी के कई मामले दर्ज

पुलिस के अनुसार ने बलजीत सिंह के खिलाफ जैतसर और श्रीविजयनगर में भी ठगी के मामले दर्ज है।

— भविश गर्ग

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सूरतगढ़ (16 सितंबर 23)। ग्राम पंचायत 13 एसडी में अतिक्रमण हटाने को लेकर चल रहे विवाद को लेकर राजनीति गर्म है। मामले में कांग्रेस नेता हनुमान मील ने गत दिनों प्रेस वार्ता कर सरपंच पपली देवी और उनके पुत्र महावीर मेघवाल के आरोपों का जवाब दिया था। अब एक बार फिर सरपंच पपली देवी व उनके पुत्र महावीर मेघवाल ने मील द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रेस वार्ता की है।

गांव 13 एसडी में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के मौजूदगी में सरपंच पुत्र ने विवादित भूमि के मामले में प्रधान हजारीराम मील और कांग्रेस नेता हनुमान मील पर भूमाफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए पंचायत की भूमि को बचाने के लिए मरते दम तक लड़ने की बात कही है ।

दस्तावेजों के साथ दी प्रकरण की जानकारी

प्रेस वार्ता सरपंच पपली देवी के पुत्र महावीर ने कहा 13 एसडी पंचायत को आवंटित 5 बीघा पर 2014 में भूमाफियों द्वारा किये गए अतिक्रमणो को तात्कालिक एसडीएम रामचंद्र पोटलिया द्वारा हटाने की कार्रवाई की गई थी। इसके बाद प्रशासन द्वारा सीमा ज्ञान करवाकर यह भूमि पंचायत को सौंप दी गई थी। सरपंच पुत्र ने बताया कि पिछले सरपंच के कार्यकाल में इस भूमि पर उन्ही में से कुछ भूमाफियाओं को फिर कब्ज़ा करवा दिया गया।

महावीर मेघवाल ने कहा कि 2021 में उनकी माँ पपली देवी ने सरपंच बनने के बाद अतिक्रमण हटाने के लिए पंचायत की साधारण सभा में 3 बार प्रस्ताव लाकर अतिकर्मियों को नोटिस जारी किए। लेकिन भूमाफियों ने न्यायालय से स्टे लें लिया। परन्तु बाद में पंचायत द्वारा प्रस्तुत किए गए तथ्यों के आधार पर पंचायत के अतिक्रमण हटाने के आदेश को सही बताते हुए न्यायालय ने स्टे वापस लें लिया। सरपंच पुत्र ने कहा कि इसके बाद भूमाफियाओ ने सिविल कोर्ट के आदेश को छुपाते हुए सूरतगढ़ एडीएम से स्टे लिया। लेकिन सिविल न्यायालय के आदेश प्रस्तुत करने पर एडीएम ने भी स्टे को ख़ारिज कर दिया ।

स्टेडिंग कमेटी ने नियम विरुद्ध दिया स्टे, सीईओ ने किया निरस्त : सरपंच पुत्र

महावीर मेघवाल के अनुसार जब ADM का स्टे हटने के बाद उन्होंने फिर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की तो कब्ज़ाधारियों को बचाने के लिए प्रधान हजारीराम मील ने नियम विरुद्ध तरीके से पंचायत समिति की स्टैंडिंग कमेटी में आनन फानन में अतिक्रमण हटाने पर स्टे का प्रस्ताव पारित करवा दिया।

सरपंच पुत्र के मुताबिक इसके बाद उन्होंने जिला कलेक्टर और जिला परिषद CEO से पंचायत समिति के प्रस्ताव की शिकायत की तो सीईओ मोहम्मद जुनैद ने प्रस्ताव को नियम विरोध करते हुए खारिज कर दिया। लेकिन इसके बाद फिर सत्ताधारी नेताओं के संरक्षण के चलते ये माफिया डबल आरएए कोर्ट से स्टे ले आये है।

पंचायत के विकास में अड़ंगा लगाने का लगाया आरोप

सरपंच पुत्र महावीर ने आगे कहा कि पंचायत इस बेशकीमती भूमि से अतिक्रमणों को हटाकर भूमि पर विभिन्न योजनाओं के तहत भवन आदि निर्माण करना चाहती हैं। लेकिन प्रधान हजारी राम मील और उनके पुत्र रंजीशवस पंचायत की कार्रवाई में अड़ंगा लगा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इस भूमि पर बाबा साहब अंबेडकर के नाम से भवन व अन्य निर्माण प्रस्तावित है। जो कब्जा हटाने पर ही संभव है। उन्होंने कहा कि विवादित 5 बीघा भूमि पर केवल सात लोगों द्वारा दुकाने बनाकर कब्जा किया गया है। जिनका नियमन संभव नहीं है।

विवादित भूमि के पास ही सड़क पर स्थित सात बीघा भूमि से अतिक्रमण नहीं हटाने और पट्टे जारी करने के आरोपों का जवाब देते हुए सरपंच पुत्र ने कहा कि उक्त सात बीघा भूमि का आवंटन अलग से हुआ है। उक्त भूमि पर केवल मकान बने हुए हैं जिनके कुछ पट्टे पंचायत द्वारा जारी किए गए हैं।

पट्टों के बदले पैसा मांगने के आरोपों से किया इनकार

प्रैस वार्ता के दौरान सरपंच पुत्र ने पट्टे के बदले पैसे मांगने के आरोपों पर कहा कि जब उन्होंने कांग्रेस नेता द्वारा जमीन के बदले 7 करोड रुपए का प्रस्ताव ठुकरा दिया तों फिर में ऐसा क्यों करूंगा ? आरोपों को लेकर उनका तर्क था कि जीभ में कोई हड्डी तो है नहीं इसलिये कोई कैसा भी आरोप लगा सकता है ! महावीर मेघवाल ने यह भी बताया कि उन्हें दुकानदारों की तरफ से पट्टे बनाने के लिए 1 लाख रूपये का लालच भी दिया गया। लेकिन उन्होंने लालच में नहीं आकर जमीन को बचाने का संघर्ष जारी रखा। उन्होंने कहा कि इस जमीन को बचाने के लिए वह कोई भी कुर्बानी करने को तैयार है।

जातिवाद और लोगों के काम नहीं कराने के सवाल पर दिखाये दस्तावेज

इसके अलावा मेघवाल ने अन्य जातियों के लोगों के काम नहीं करने के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि हमने कभी किसी समाज के लोगों के काम में अड़चन नहीं डाली और हर वर्ग का काम प्राथमिकता से किया है। सरपंच पुत्र ने हनुमान मील की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरपंच पर उनके काम नहीं करने आरोप लगाने वाले लोगों के वे वारिसनामें और तस्दीक संबंधी दस्तावेज दिखाए जो पंचायत द्वारा जारी किए गए थे।

पंचायत में करवाये कामों का भुगतान नहीं करने का जड़ा आरोप

सरपंच पुत्र महावीर मेघवाल ने बताया कि उनके द्वारा पंचायत में करवाये गए 41 लाख के कामों के भुगतान प्रधान हजारी मील द्वारा रंजिशवश नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि उनके काम अटकने के लिए पंचायत में पांच वीडीयो बदल दिए गए। उनके कामों की AS, TS नहीं करवाई गई। सरपंच पुत्र का कहना था कि वे लगातार पंचायत समिति और अधिकारियों के चक्कर काटते रहे लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।

सरपंच पुत्र मेघवाल ने कहा कि इसके उनके परिवार की भूखे मरने की नौबत आ गई है। उन्होंने पंचायत में करवाए गए कामों के पूर्व और बाद के चित्र भी प्रेस के सामने रखें। उन्होंने कहा कि मुझ पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया जा रहा है लेकिन हमने अभी तक कोई भुगतान नहीं उठाया है। अधिकारी मेरे द्वारा काम की TS करवाए अगर मेरा काम कम है या सही नहीं है तो में बकाया काम करवाने को तैयार हूं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अधिकारी जितना कार्य हुआ है कम से कम उसका बिल तो बनाये ?

परेशान हो कर दिया इस्तीफा

सरपंच पपली देवी और उनके पुत्र महावीर मेघवाल ने इस्तीफा के सवाल पर कहा कि उनकी ग्राम पंचायत 13 एसडी के साथ प्रधान हजारी राम मील द्वारा हमेशा सौतेला व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पंचायत में विकास कार्य करवाने चाहे तब तब उन्हें परेशान किया गया। उन्होंने कहा उनकी मां के लगातार सात दिन भूख हड़ताल के बाद भी राजनितिक दबाव के चलते कोई अधिकारी मौके पर नहीं आया। इसी वजह से दुखी होकर उनकी माँ सरपंच पपली देवी ने उपसरपंच, ग्राम सहकारी समिति के उपाध्यक्ष, सदस्यों और वार्ड पंचों ने पद से इस्तीफा दे दिया।

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सूरतगढ़। सूरतगढ़ की 13 एसडी पंचायत में अतिक्रमण का मामला सोशल मीडिया में छाया हुआ है। गुरुवार को पंचायत समिति प्रधान हजारीराम मिल के पुत्र और कांग्रेस नेता हनुमान मील आरोपों का जवाब देने के लिए सामने आए। पंचायत समिति में आयोजित प्रेस वार्ता में हनुमान मील एक-एक कर सरपंच पपली देवी और उनके पुत्र द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दिया। इस दौरान उनके साथ सरपंच यूनियन के अध्यक्ष रामकुमार, जिला परिषद सदस्य कमल अटवाल, जिला परिषद सदस्य  प्रतिनिधि राजेश भादू  सहित सरपंच, डायरेक्टर व तेरा 13 एसडी के ग्रामीण मौजूद थे।

अतिक्रमण हटाने में बाधा डालने के आरोपों का दिया जवाब

प्रेस वार्ता में हनुमान मील द्वारा दिए गए जवाबों का वीडियो

सरपंच पपली देवी में द्वारा पंचायत भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में बाधा डालने के आरोपों को हनुमान मील ने सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि सरपंच पपली देवी रंजिशवश 40 साल से बसे लोगों को उजाड़ना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरपंच द्वारा विवादित भूमि के उत्तरी हिस्से में पट्टे जारी किए जा रहे हैं जबकि वे दक्षिणी हिस्से पर बसे लोगों को उजाड़ना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वे इस दोहरे रवैया का विरोध करते हैं।

उन्होंने मांग की कि यदि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है तो दोनों और समान रूप से की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार भी प्रशासन गांवों के संग अभियान लगाकर सरकारी भूमि पर बसे पर लोगों को पट्टा देना चाहती है तो फिर इन लोगों को उजाड़ना कहां उचित है ?

पट्टे देने के बदले रिश्वत का लगाया आरोप

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान हनुमान मील ने विवादित भूमि पर पट्टा देने के बदले सरपंच पपली देवी पर ₹500000 मांगने का भी आरोप जड़ा। अपने आप के समर्थन में उन्होंने 13 एसडी के कई ग्रामीणो को मौके पर बुलाया जिन्होंने सरपंच द्वारा पट्टा देने के बदले पैसे मांगने के आरोपों को दोहराया। 

बिना काम हुए व प्रशासनिक, वित्तीय स्वीकृति के भुगतान का दबाब बनाने का आरोप

कांग्रेस नेता हनुमान मील ने सरपंच पपली देवी के निर्माण कार्यों के 41 लाख रुपए के भुगतान रोकने के आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरपंच द्वारा जिन 9 कामों के लिए भुगतान नहीं करने आरोप लगाया जा रहा है उन कामों की प्रशासनिक, वित्तीय स्वीकृति ही जारी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि पंचायत अपने स्तर पर ₹50000 से अधिक राशि के काम बिना स्वीकृत करवाने में सक्षम नहीं है। उन्होंने यह भी कहा अधिकांश काम धरातल पर हुए ही नहीं है। उनका आरोप था कि सरपंच दबाव बनाकर फर्जी बिलो का भुगतान उठाना चाहती है जो कि संभव नहीं है।

             सरपंच द्वारा बिलों का भुगतान नहीं करने के आरोप के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रधान हजारीराम मील ने इसी पंचायत में कई विकास कार्य करवाए गए हैं। यदि उनका कोई दुराग्रह सरपंच के विरुद्ध होता तो वे यह कार्य क्यों करवाते ?

जाति की राजनीति के आरोप बेबुनियाद : मील

सरपंच पपली मेघवाल और उनके पुत्र महावीर द्वारा मील परिवार पर जातिवादी राजनीति करने के आरोप पर हनुमान मील ने कहा कि यह आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि पंचायत समिति में सभी जातियों के सरपंच, डायरेक्टर है और सभी पंचायतों में समान रूप से विकास कार्य करवाए जाते हैं। मील ने कहा कि उनके परिवार ने आज तक जातिवाद की बात नहीं की है।

    इन आरोपों पर जवाब देते हुए सरपंच यूनियन के अध्यक्ष रहे रामकुमार मेघवाल ने कहा कि वे पिछले 15 साल से अधिक समय से मील परिवार से जुड़े हैं और खुद भी मेघवाल जाति से है। उन्होंने कहा कि आज तक मील परिवार की ओर से जातिवाद की राजनीति जैसी बात उनके साथ नहीं हुई है। जिला परिषद सदस्य कमल अटवाल ने भी जातिवाद की राजनीति के आरोपों का नकारा।

सरपंच से की इस्तीफा वापस लेने की अपील, कहा ‘विकास कार्य करवाए’

प्रेस वार्ता के दौरान हनुमान मील सरपंच पपली देवी से इस्तीफा वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि पंचायत समिति के बचे हुए दो ढाई साल के कार्यकाल में विकास कार्य करवाए। उन्होंने सरपंच से विकास कार्य में  बिना भेदभाव के सहयोग करने की भी बात कही। 

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प्रतिद्वंदी नेता दिनभर पूछते रहे भीड़ का आंकड़ा

सूरतगढ़। भाजपा नेता राहुल लेघा द्वारा आयोजित सैनिक सम्मान समारोह राजनितिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्यक्रम में हजारों की भीड़ इकट्ठा कर अपना दम दिखाकर साबित कर दिया है कि भीड़ जुटाने के मामले में वे स्थानीय दिग्गज नेताओं से कम नहीं है। टिकट की मांग कर रहे भाजपा के दिग्गज जहाँ अपनी पूरी ताकत लगा कर दो ढाई हजार में सिमट कर रह गए। वही राजनीति का ककहरा सीख रहे लेघा ने दिग्गजों से कई गुना भीड़ जुटा कर दिग्गजो की नींद उड़ा दी है। कार्यक्रम में भीड़ इकट्ठा कर लेघा ने टिकट के दावेदारों को यह इशारा कर दिया वे उन्हें हल्के में न लें।

दोनों पार्टीयों के नेता फोन कर पूछते रहे भीड़ का आंकड़ा

कार्यक्रम में मौजूद हज़ारों की भीड़

लेघा द्वारा सैनिक सम्मान समारोह को लेकर किये गए जमकर प्रचार और दावों ने कार्यक्रम को लेकर ऐसा भौकाल खड़ा कर दिया कि कुछ दिनों से दोनों पार्टियों के नेताओं की नींद उड़ी हुई थी। हालात यह रहे कि कार्यक्रम के दौरान भीड़ का आंकड़ा जानने को लेकर खुफिया एजेंसियों के कार्मिकों और मीडिया कर्मियों के पास फोन आते रहे। भीड़ को लेकर नेताओं की उत्सुकता यह बताने के लिए काफी है कि चुनाव लड़ने के इच्छुक इन नेताओं में सैनिक सम्मान समारोह की दहशत किस तरह हावी थी।

कार्यक्रम में भीड़ के अलग अलग दावे

हालाकि सैनिक समारोह में भीड़ को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन भीड़ का जो सर्वमान्य आंकड़ा निकल कर आ रहा है वह 8 से 12 हजार लोगों का है। इस आंकड़े के न्यूनतम फिगर को भी अगर सही माना जाए तो भी यह आंकड़ा भाजपा के दिग्गजों द्वारा परिवर्तन यात्रा में जुटाई गई भीड़ का लगभग 3 गुना है। जो किसी भी दृष्टि से कम नहीं कहा जा सकता। हालांकि यह आंकड़ा लेघा के दावे (25000) का लगभग आधा या उससे कम ही है। फिर भी राजनीति में सिर गिनाना जरूरी होता है जिसमें राहुल लेघा काफी हद तक कामयाब हो चुके हैं।

राहुल के डर से नेताओं ने बनाई कार्यक्रम से दूरी ?

राहुल लेकर द्वारा आयोजित सैनिक सम्मान समारोह में भाजपा नेताओं की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष, विधायक रामप्रताप कासनिया, राजेंद्र भादू, अशोक नागपाल सहित स्थानीय राजनीति के तमाम बड़े चेहरे गायब दिखे। हालांकि बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम के दौरान ही आगामी चुनाव को लेकर पार्टी की बैठक थी और तमाम नेता बैठक में उपस्थित रहने के चलते सैनिक सम्मान कार्यक्रम में नहीं आ पाए।

दिखने में तो यह तर्क ठीक प्रतीत होता है। लेकिन शायद हकीकत में ऐसा नहीं था। क्योंकि राहुल लेघा का कार्यक्रम पूर्व निर्धारित था ऐसे में पार्टी के स्थानीय नेता चाहते तो बैठक का समय एडजस्ट किया जा सकता था। लेकिन कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के जाने से भीड़ बढ़ने के खतरे का देखकर शायद जानबूझकर ही बैठक कार्यक्रम के समय में ही रखी गई।

टिकट की रेस में शामिल हुए लेघा ?

सैनिक समारोह के बहाने शक्ति प्रदर्शन कर राहुल लेघा भाजपा में टिकट की दौड़ में अब विधिवत रूप से शामिल हो गए हैं। विधायक रामप्रताप कासनिया और पूर्व विधायक राजेंद्र भादू, अशोक नागपाल और नरेंद्र घिन्टाला जैसे टिकट के दावेदारों के बीच लेघा की उम्मीदवारी को काफी कमजोर आंका जा रहा था। लेकिन सैनिक सम्मान समारोह में जुटी भीड़ ने लेघा को टिकट दौड़ की पंक्ति में काफी आगे लाकर खड़ा कर दिया है। कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राजस्थान के चुनाव सहप्रभारी कुलदीप बिश्नोई का शामिल होना इस बात का संकेत है कि टिकट की शतरंज में लेघा अपनी बिसात बिछा चूके है।

       लेघा की दावेदारी मजबूत होने की एक वजह यह भी है कि वर्तमान भाजपा का दूरदर्शी नेतृत्व यह भाँप चुका है कि अगर भविष्य में पार्टी को मज़बूत रखना है तो बुजुर्ग नेताओं का विकल्प अभी से तैयार करना होगा। इसी वजह से भाजपा में 70 वर्ष से अधिक आयु के टिकट के दावेदारों को टिकट नहीं देने की जाने की चर्चा जोरों पर है। सूरतगढ़ की अगर बात करें तो 70 वर्ष की दहलीज को पार कर चुके विधायक रामप्रताप कासनिया और पूर्व विधायक राजेंद्र भादू की अगली पीढ़ी राजनीति के मैदान में आने के लिए परिपक्व नहीं है। ऐसे में यह लगभग तय माना जा रहा है कि पार्टी की टिकट परिवारवाद से इतर किसी नए चेहरे को टिकट मिलेगी।

क्यूंकि भाजपा से टिकट की दावेदारी जता रहे शेष नेताओं में भीड़ जुटाने के मामले में राहुल फिलहाल सबसे आगे है इसलिये यह कहना गलत नहीं होगा कि वे सैनिक समारोह के बाद लेघा भाजपा टिकट के मजबूत दावेदार बन चुके हैं।

           

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समाजसेवी रिछपाल धारणीया, राजाराम धारणिया और सीएम कोऑर्डिनेटर विकास ज़्याणी

सूरतगढ़। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सांसद व भाजपा के राजस्थान चुनाव सह प्रभारी कुलदीप बिश्नोई सोमवार को सूरतगढ़ दौरे पर रहेंगे। इस दौरान गांव मानकसर में धारणिया परिवार द्वारा दोनों नेताओं का स्वागत और सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा।

                     सीएम के दौरे के मिनट 2 मिनट कार्यक्रम के अनुसार दोनों नेता सुबह करीब 12:00 बजे नई धान मंडी में आयोजित होने वाले सैनिक सम्मान समारोह कार्यक्रम में शामिल होंगे। सैनिक सम्मान समारोह समाप्त होने के बाद करीब 1:30 बजे दोनों नेता मानकसर के लिए रवाना होंगे। जहाँ पर समाजसेवी रिछपाल धारणिया और राजाराम धारणिया सहित सीएम कोऑर्डिनेटर विकास ज़्याणी द्वारा सीएम और भाजपा सांसद का सम्मान किया । इस कार्यक्रम में विधायक रामप्रताप कासनिया, भाजपा नेता राहुल लेघा,पूर्व नगरपालिका चेयरमैन मास्टर ओमप्रकाश कालवा सहित राजनीति और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहेंगे।

         मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सांसद बिश्नोई मानकसर में ही लंच करेंगे। दोनों नेता शाम करीब 4:00 बजे तक मानकसर में रहेंगे इसके बाद सीएम धामी उत्तराखंड के लिए रवाना होंगे।

                 सीएम धामी के कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीम ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए धारणिया परिवार द्वारा बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही है।

                   गौरतलब है कि क्षेत्र के ही रहने वाले विकास ज़्याणी पिछले लंबे समय से सीएम पुष्कर सिंह धामी से जुड़े हुए हैं। सीएम धामी के सूरतगढ़ दौरे में कोऑर्डिनेटर के रूप में उनकी भूमिका भी रही है।

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी होंगे शामिल

सूरतगढ़। सूरतगढ़ विधानसभा से टिकट को लेकर चल रहे चुनावी घमासान में शक्ति प्रदर्शनों का दौर जारी है। परिवर्तन संकल्प यात्रा के दौरान भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने शक्ति प्रदर्शन कर टिकट की दावेदारी जताई। भाजपा के दिग्गज नेताओं ने अपनी पूरी ताकत लगा दी फिर भी भीड़ का आंकड़ा ढाई हजार की संख्या में सिमट कर रह गया। ऐसे में भाजपा के युवा नेता इंजीनियर राहुल लेघा ने 11 सितंबर यानी कि कल होने वाले सैनिक सम्मान समारोह में 25 हज़ार की भीड़ जुटाने का दावा किया है। लेघा के इस दावे के बाद से उनके प्रतिद्वंदी भाजपा नेताओं की नींद उड़ी हुई है ।

सूरतगढ़ के इतिहास की सबसे ज्यादा भीड़ जुटाने का दावा

निजी होटल में प्रेस वार्ता करते इंजीनियर राहुल लेघा

कार्यक्रम में 25000 लोगों की भीड़ जुटाने का दावा इस मायने में भी बेहद बड़ा है कि शहर के इतिहास में आज तक इतनी भीड़ वाला आयोजन अभी तक नहीं हुआ है। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और  कांग्रेस अध्यक्षा रही सोनिया गांधी की सूरतगढ़ में हुई जनसभाऐं भी 25000 की भीड़ का आंकड़ा छू नहीं पाई है। इसके अलावा पूर्व में चुनावों में विधायक रामप्रताप कासनिया, राजेंद्र भादू और डूंगरराम गेदर जैसे दिग्गज नेताओं की रैलिया भी 10000 का आंकड़ा भी नहीं छू पाई है। ऐसे में 25000 से ज्यादा की भीड़ का लेघा का दावा विरोधियों के आराम में खलल का सबब बन गया है। यही वजह है कि उनके प्रतिद्वंन्दी भी सोमवार को आयोजित होने वाले सैनिक सम्मान समारोह का इंतज़ार कर रहे है।

प्रचार को लेकर झोंकी ताकत, पानी की तरह बहाया जा रहा पैसा  

भाजपा नेता इंजीनियर राहुल लेघा इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जिस तरह से मेहनत कर रहे हैं और जिस तरह से कार्यक्रम के प्रचार के लिए पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है उसकों देखते हुए विरोधियों की धड़कनें तेज हो चुकी है। इस कार्यक्रम के प्रचार के लिए लेघा अंग्रेजी कहावत ‘नो स्टोन अनटर्न्ड’ की तर्ज़ पर काम कर रहे हैं। समारोह के प्रचार की अनूठी शुरुआत शहर की पुरानी धानमंडी में एयर बैलून लगाकर की। इसके बाद खुद राहुल लेघा और सैनिक सम्मान समारोह चर्चा में आ गया। कहा जा रहा है कि शहर के हाउसिंग बोर्ड, मानकसर गांव के अलावा और भी कई स्थानों पर इस तरह के बैलून प्रचार के लिए लगाए गए।

हजारों रुपए की कीमत वाले इस बैलून को लगाने के बाद कुछ लोगों नें बैलून से ध्यान भटकने का आरोप भी लगाया। लेकिन तब तक बैलून अपना काम कर चुका था। बैलून के अलावा लेघा द्वारा पिछले कई दिनों से शहर में सैकड़ों ऑटो रिक्शा/ टेम्पो पर बैनर लगाकर प्रचार किया जा रहा है। इन सबके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी कार्यक्रम के प्रचार के लिए वॉल पेंटिंग और होर्डिंग पोस्टर का सहारा लिया जा रहा है। लेघा द्वारा किए जा रहे धुआंधार प्रचार का नतीजा यह है कि पूरे विधानसभा क्षेत्र की जनता की निगाह सैनिक सम्मान समारोह पर है।

कार्यक्रम की सफलता तय करेगी राहुल का भविष्य

वैसे तो भाजपा के टिकट के दावेदारों में राहुल लेघा सबसे युवा दावेदार हैं। ऐसे में राजनीति में पांव जमाने के लिए उनके पास लंबा वक्त है। फिर भी अपने परिवार की राजनीतिक विरासत और दिग्गज कांग्रेसी नेता साहब राम पूनिया को पंचायत चुनावों में धूल चटा कर लेघा ने अपने राजनीतिक भविष्य की झलक दिखला दी हैं। जिस तरह से राहुल लेघा अपने लिए नये-नये टास्क तय कर रहे हैं उससे साफ है कि वे बेहद जल्दी में है। यहीं वजह है कि युवा नेता ने राजनीति में प्रवेश के साथ ही विधानसभा चुनाव में भाजपा की टिकट का दावा ठोक दिया है और अब सम्मान समारोह में 25,000 से अधिक की भीड़ जुटाने का दावा कर विरोधियों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

                                 बहरहाल इंजीनियर राहुल लेघा का दावा भले ही कुछ भी हो अगर लेघा इस कार्यक्रम में 10000 की भीड़ जुटाने में भी कामयाब रहते हैं तो यकीन मानिये यह समारोह लेघा के रूप में राजनीति के नये सितारे के उदय और कई सितारों की राजनीति अस्त करने वाला साबित होगा। कार्यक्रम में जुटने वाली भीड़ उनके भाजपा की टिकट के दावे को पुख्ता कर देगी जिसकी अनदेखी करना भाजपा आलाकमान के लिए आसान नहीं होगा। बहरहाल देखना होगा कि लेघा अपने दावों को हकीकत का अमलीजामा पहनाकर खुद को साबित करेंगे या उनके दावे फुस्स साबित होते है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी कार्यक्रम की जानकारी

शनिवार को शहर के हॉट एंड फास्ट में आयोजित प्रेस वार्ता में राहुल लेघा ने कार्यक्रम को लेकर जानकारी मीडियाकर्मियों के साथ सांझा की। लेघा ने बताया कि कार्यक्रम में 170 पूर्व सैनिकों और सेवा में शहीद हुए जवानों की वीरांगनाओं या परिवार के सदस्यों को सम्मानित किया जाएगा। लेघा के मुताबिक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राजस्थान भाजपा के प्रदेश चुनाव सह प्रभारी कुलदीप बिश्नोई इस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।

उन्होंने कहा कि सैनिक सम्मान समारोह के बाद पंजाबी गायक गुरनाम भुल्लर का कार्यक्रम रहेगा। सैनिक सम्मान समारोह को शक्ति प्रदर्शन बताने के मीडिया के सवाल पर लेघा ने सम्मान समारोह को शक्ति प्रदर्शन बताने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि देश इस समय आज आजादी का 75 वां अमृत महोत्सव मना रहा है। इसी के चलते यह सम्मान समारोह किया जा रहा है  

              प्रेस वार्ता के दौरान राहुल लेघा के चाचा और नगरपालिका के अध्यक्ष राजेंद्र लेगा और व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुरेंद्र छाबड़ा भी मौजूद रहे।

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सूरतगढ़। भारतीय जनता पार्टी की परिवर्तन संकल्प यात्रा के दूसरे दिन पूर्व विधायक किसान नेता नरेंद्र घिन्टाला के शक्ति प्रदर्शन के नाम रहा। परिवर्तन संकल्प यात्रा रथ के अमरपुरा पहुंचने पर दोनों नेताओं ने अपने हज़ारों समर्थकों की मौजूदगी में वरिष्ठ पार्टी नेताओं का जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर समर्थकों ने ढोल नगाड़ों के साथ नाचते हुए नरेंद्र मोदी जिंदाबाद और भारतीय जनता पार्टी जिंदाबाद के नारे लगाये। बाद में पूर्व विधायक नागपाल व घिंटाला ने राष्ट्रीय प्रवक्ता राज्यवर्धन सिंह राठौड़, सांसद निहालचंद,यात्रा प्रभारी सीआर चौधरी, जिला अध्यक्ष शरणपाल सिंह मान का विशाल फूल माला पहनाकर स्वागत किया ।

इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राज्यवर्धन सिंह ने कहा राजस्थान की कांग्रेस सरकार के निरंकुश शासन में जनता का शोषण हो रहा है। अपराधियों और भू माफिया को पूरा संरक्षण मिलने की वजह से सड़क से लेकर घर तक कोई भी सुरक्षित नहीं है और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक, भ्रष्टाचार,अत्याचार को समाप्त करने के लिए राजस्थान में भाजपा को जीताकर डबल इंजन सरकार बनाने का संकल्प दिलाने के लिए यह यात्रा निकाली जा रही है। राठौड़ ने कहा कि लोगों का भारी उत्साह देखकर कांग्रेस की सरकार की विदाई तय हो गई है। सांसद निहालचंद ने इलाके में पानी बिजली की समस्याओं पर विचार रखें।

समाज के सभी वर्गों के गणमान्य लोग रहे कार्यक्रम में मौजूद

पूर्व विधायक नागपाल किसान नेता घिन्टाला द्वारा आयोजित स्वागत कार्यक्रम में राजनीति, समाजसेवा और व्यापारी वर्ग से जुड़े व्यक्तियों के अलावा सभी समाजों के प्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। परिवर्तन यात्रा के दौरान दूसरे नेताओं द्वारा आयोजित स्वागत कार्यक्रमों से इतर इस कार्यक्रम में सूरतगढ़ शहर के लोगों की बड़ी संख्या में मौजूद रही।
कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रभारी कृष्ण कुमार जानू, विधायक रामप्रताप कासनिया,पूर्व पालिकाध्यक्ष मास्टर ओमप्रकाश कालवा, व्यापार मंडल अध्यक्ष सुरेंद्र छाबड़ा, माहेश्वरी समाज के पूर्व जिलाध्यक्ष भंवरलाल चांडक, अरोड़वंश कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक भाटिया, विश्व हिंदू परिषद के एडवोकेट संजय सोढा, बार संघ न्यायिक अध्यक्ष अनिल भार्गव, पूर्व प्रधान बिरमा देवी नायक, कृष्ण कुमार छिंपा, राजियासर मंडल अध्यक्ष पैपसिह राठौड़, अशोक गोयल, बदरू राम जोशी, कालूराम कड़ेला, यात्रा कार्यक्रम के संयोजक पवन ओझा, किसान नेता विनोद घिंटाला, पूर्व पार्षद सत्यनारायण छिपा, पार्षद राजीव चौहान, हरिप्रसाद शर्मा, संतोष गिरी, विविध संस्था के अध्यक्ष योगेश स्वामी, युवा मोर्चा के जिला महामंत्री विनोद सारस्वत, नगरमंडल उपाध्यक्ष प्रेम प्रकाश सिंह राठौड़, एडवोकेट पूनम शर्मा, कई सरपंच और पूर्व सरपंचों सहित काफी संख्या में विधानसभा के प्रतिष्ठित लोग व समर्थक मौजूद रहे।


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भाजपा नेता मोहन पूनिया

सूरतगढ़। भाजपा की परिवर्तन संकल्प यात्रा गुरुवार को सूरतगढ़ पहुंची। यात्रा के पहले दिन पार्टी के आधा दर्जन से अधिक नेताओं ने शक्ति प्रदर्शन कर ताकत दिखाई। शक्ति प्रदर्शन करने वाले नेताओं में विधायक रामप्रताप कासनिया और पूर्व विधायक राजेंद्र भादू जैसे दिग्गज नेता शामिल थे वहीं पूर्व चेयरमैन आरती शर्मा, काजल छाबड़ा, जयप्रकाश सरावगी और सुभाष गुप्ता सरीखे टिकट के दूसरे दावेदार शामिल रहे। लेकिन अगर तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो सूरतगढ़ में परिवर्तन यात्रा का पहला दिन भाजपा नेता मोहन पूनिया के नाम रहा।

मोहन पूनिया द्वारा परिवर्तन संकल्प यात्रा के स्वागत कार्यक्रम में उमड़ी भीड़

कासनिया और भादू जैसे नेताओं के मुकाबले कमतर आंके जाने वाले पूनिया ने यात्रा में भारी भीड़ जुटाकर मजमा लूट लिया । ऐसा नहीं है कि विधायक रामप्रताप और भादू के स्वागत कार्यक्रमों में भीड़ कम थी। दोनों नेताओं के कार्यक्रमों में भी अच्छी खासी भीड़ थी। परंतु मोहन पूनिया की अगुवाई में हुआ यात्रा का स्वागत कार्यक्रम दोनों नेताओं के कार्यक्रमों के मुकाबले ज्यादा व्यवस्थित रहा। कार्यक्रम में भीड़ को देखकर नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ को भी पूनिया की तारीफ करनी पड़ गई। एजेंसीयों से मिली जानकारी के अनुसार करीब 125 से अधिक वाहनों और 15 से अधिक बसों से पूनिया के समर्थक स्वागत कार्यक्रम में पहुंचे।

मोहन पूनिया की पीठ इसलिए भी थपथपाई जा सकते हैं कि जहाँ विधायक कासनिया और भादू ने एक तरह से अपने गढ़ में भीड़ जुटाई वहीं पूनिया जो दईदासपुरा क्षेत्र से आते है ने सरदारपुराबिका जो की विधानसभा का दूसरा कोना है में सफल कार्यक्रम का आयोजन कर दिया। इसके अलावा पूर्व विधायक के कार्यक्रम में जहाँ पीलीबंगा क्षेत्र से भीड़ लाने के आरोप लग रहे है। वहीं दूसरी और कासनिया के मामले में भीड़ लाने में विभिन्न मंडलों-कमण्डलों और भाजपा से जुड़े संगठनों, सरपंचो, डायरेक्टरों और पार्षदों का भी कुछ ना कुछ योगदान रहा है। फिलहाल संघटन पर विधायक कासनिया का ही कब्ज़ा है इसलिये कहना होगा कि भादू और पूनिया द्वारा जो भीड़ जुटाई गई वह खुद के दम पर थी उसमे किसी और का योगदान नहीं था।

वैसे आपको यह भी बता दें कि खुद विधायक रामप्रताप कासनिया भी पूनिया और भादू के स्वागत कार्यक्रमों में उमड़ी भीड़ को देखकर हैरान थे। इसी वजह से शिप्रा कॉलोनी के कार्यक्रम खुद द्वारा बुलाई गई भीड़ से विधायक खुश नज़र नहीं आ रहे थे। विधायक कासनिया की यह निराशा उनके भाषण के दौरान भी दिखी जब उन्होंने कहा कि ‘भीड़ तो मैं और कर दयूं जे टिकट मिले तो’। वैसे कासनिया के इन शब्दों के अर्थ उनके समर्थक अपने हिसाब से लगाने को स्वतंत्र हैं।

      गत वर्षो तक मोहन पूनिया की राजनीति का क्षेत्र बीकानेर रहा है जहाँ वें नगर निगम के पार्षद रहते हुए नेता प्रतिपक्ष भी रह चूके है। सूरतगढ़ में वे पिछले 2 सालों से ही सक्रिय हुए हैं। ऐसे में पुनिया को सूरतगढ़ विधानसभा से भाजपा की टिकट की दावेदारी के मामले में काफी कमजोर माना जा रहा था। लेकिन परिवर्तन संकल्प यात्रा में अच्छी खासी भीड़ जुटाकर उन्होंने अपनी ताकत का परिचय दे दिया है। पूनिया के राजनीतिक संबंधों की बात करें अर्जुन राम मेघवाल और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के अलावा पार्टी के कई बड़े नेताओं से है।

          बहरहाल परिवर्तन यात्रा का पहला दिन मोहन पूनिया ने अपने नाम कर लिया। अब देखना होगा कि यात्रा का दूसरा दिन किस नेता के नाम पर दर्ज होगा। 

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सूरतगढ़। नगरपालिका का सबसे मुख्य काम शहर की सफाई व्यवस्था कहा जा सकता है। परंतु सूरतगढ़ नगरपालिका की बात करें तो पिछले कुछ सालों में शहर की सफाई व्यवस्था का भट्टा बैठ चुका है। नगरपालिका की राजनीति और जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी ने शहर को कचरे के ढेर में बदल दिया। शहर में गंदगी के आलम को देखते हुए शायद ही किसी को इस बात पर यकीन करेगा कि शहर की नगरपालिका में करीब 400 सफाई कर्मचारी कार्यरत है।

पिछले दिनों ओमप्रकाश कालवा के निलंबन के बाद कार्यवाहक चेयरमैन बने परसराम भाटिया ने सफाई व्यवस्था के सुधार के प्रयास तो शुरू किए। लेकिन ईओ शैलेंद्र गोदारा की प्राथमिकता सफाई व्यवस्था नहीं होने से हालातों में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया। पालिका के नये ईओ जगमोहन हर्ष के पदभार संभालने के बाद एक बार फिर सफाई व्यवस्था के बहाल होने की उम्मीद जगी है। इसकी वजह है ईओ हर्ष ने शहर की सफाई, सीवरेज और लाइट व्यवस्था को सुधारने के लिए नगरपालिका मे कण्ट्रोल रूम स्थापित करने के आदेश जारी किये है।

                  ईओ हर्ष के अनुसार शहर में सफाई, सीवरेज और लाइट संबंधी शिकायतों के त्वरित  निस्तारण के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। कंट्रोल रूम में दर्द शिकायतों का 24 घंटे में निस्तारण किया जायेगा। कंट्रोल रूम की शिकायतों की मॉनिटरिंग के लिए अकाउंटेंट मनप्रीत कौर को कण्ट्रोल रूम का प्रभारी नियुक्त किया है। ईओ हर्ष के मुताबिक पहले दिन दर्ज़ शिकायतों की सूची अगले दिन सुबह संबंधित विभाग के कर्मचारियों को दी जाएगी। जिसे वे कर्मचारी दिनभर में प्राथमिकता के अनुसार दूर कर शिकायतों का निवारण करेंगे। ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी शिकायतों को दर्ज़ करवा सके इसके लिए कण्ट्रोल रूम से संबंधित अधिकारीयों के मोबाइल नंबर जल्द ही सोशल मीडिया व दूसरे माध्यमों से जारी करने की बात भी ईओ हर्ष ने कही है।

           वहीं ईओ जगमोहन हर्ष ने सफाई व्यवस्था पर खास फोकस करते हुए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए शहर को दो भागों में बांटते हुए दोनों प्रभारियों को अलग अलग जिम्मेदारी सौंपी है। वार्ड या क्षेत्र वाइज जिम्मेदारी तय होने से सफाई व्यवस्था को लेकर कर्मचारी लापरवाही नहीं बरत सकेंगे जिससे की निश्चय ही सफाई व्यवस्था में सुधार होगा।
                          बहरहाल ईओ जगमोहन हर्ष के यह कवायद कितनी असरकारक होगी यह तो आने वाला वक्त तय करेगा। लेकिन ईओ हर्ष का कार्यभार संभालते ही सफाई, सीवरेज और लाइट जैसे कामों पर फोकस करना इस बात की उम्मीद जगाता है कि शहर को जल्द ही गंदगी और अंधेरों से मुक्ति मिलेगी।

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सूरतगढ़ । भारतीय जनता पार्टी की ‘परिवर्तन संकल्प यात्रा‘ को लेकर व्यापार मंडल भवन में एक बैठक आयोजित की गई‌। बैठक के मुख्य वक्त भाजपा जिलाध्यक्ष सरदार शरनपाल सिंह ने बताया कि सूरतगढ़ में परिवर्तन संकल्प यात्रा के प्रवेश और यात्रा के दौरान स्वागत कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिलाध्यक्ष मान ने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ लोगों,वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और नेताओं द्वारा विभिन्न जगहों पर स्वागत कार्यक्रम रखे गए हैं। उन्होंने भाजपा नेताओं पर कार्यकर्ताओं से परिवर्तन यात्रा के कार्यक्रमों में शामिल होकर सफल बनाने का आह्वान किया।

विधायक श्री रामप्रताप कासनियां ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी के केन्द्र सरकार के कार्यों को यात्रा के माध्यम से बताया जाएगा और प्रदेश कांग्रेस सरकार की नाकामियों को उजागर किया जाएगा।

पूर्व विधायक राजेंद्र भादू ने सभी सम्मानित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक जुट होकर परिवर्तन संकल्प यात्रा का स्वागत किया जाये।

इस अवसर पर भाजपा वरिष्ठ कार्यकर्ता और पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा ने कहा कि यात्रा का प्रचार प्रसार जोरदार किया जाएगा। बैठक में उपस्थित वरिष्ठ कार्यकर्ताओं यात्रा को लेकर अपने सुझाव रखे।

इस बैठक की अध्यक्षता नगर मंडल उपाध्यक्ष दर्शनभगत परनामी ने की वहीं बैठक की प्रस्तावना भाजपा किसान मोर्चा जिला महामंत्री पवन ओझा ने रखी।

स्वागत कार्यक्रमों और यात्रा का ये रहेगा रुट

यात्रा के विधानसभा संयोजक और महामंत्री लालचंद शर्मा ने बताया कि दिनांक 7-9-2023 को दोपहर बाद 3.30 बजे यात्रा सरदारपुरा बीका से क्षेत्र में प्रवेश करेगी। जहाँ पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा यात्रा का भव्य स्वागत किया जायेगा। इसके बाद संघर मोड, श्योपुरा 2KSR बस स्टेशन पर स्वागत कार्यक्रम होगा। वहीं मानकसर चोक से भाजपा युवा मोर्चा द्वारा मोटरसाइकिल रैली सके साथ यात्रा शहर में प्रवेश करेगी। इस दौरान शिप्रा कॉलोनी के पास विधायक राम प्रताप कासनिया की ओर से स्वागत कार्यक्रम रखा गया है। वहाँ से त्रिमूर्ति रोड होते हुए विभिन्न स्थानों पर स्वागत कार्यक्रम के साथ यात्रा मुख्य बाजार होते हुए अग्रसेन भवन पहुंचेगी।

7 सितंबर को रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन 8 सितंबर को सुबह 10:00 बजे पार्टी नेता मीडिया से रूबरू होंगे। इसके बाद यात्रा का अरोड़वंश धर्मशाला के पास यात्रा का स्वागत किया जाएगा और यात्रा मानकसर चौक होते हुए अनूपगढ़ रोड पर डीपीएस स्कूल पहुंचेगी। जहाँ पूर्व विधायक अशोक नागपाल और किसान नेता नरेंद्र घिन्टाला की अगुवाई में यात्रा का भव्य स्वागत किया जाएगा। वहाँ से पांच की पुली के पास स्वागत कार्यक्रम के बाद परिवर्तन संकल्प यात्रा रायसिंहनगर विधानसभा क्षेत्र में प्रवेश करेगी।

बैठक में वरिष्ठ नेता भी रहे मौजूद

इस अवसर पर पंचायत समिति सदस्य राहुल लेघा,भारतीय जनता पार्टी जैतसर मंडल के अध्यक्ष अशोक गोयल,ढाबां मंडल अध्यक्ष कालुराम कड़ेला, पूर्व मंडल अध्यक्ष विजय गोयल, जयप्रकाश सरावगी, जिला मंत्री काजल छाबड़ा, एडवोकेट आनंद शर्मा, एडवोकेट बलदेव खिचड़, व्यापार प्रकोष्ठ जिला संयोजक सुभाष गुप्ता, वरिष्ठ कार्यकर्ता मोहन पुनिया, ओबीसी मोर्चा जिला महामंत्री सुरेश सुथार युवा मोर्चा जिला महामंत्री विनोद सारस्वत, नगर मंडल उपाध्यक्ष प्रेमसिंह राठौड़, विस्तारक सुभाष बाल्मीकि, सहसंयोजक गोपाल लेघा,पार्षद राजीव चौहान, पार्षद ओमप्रकाश, पूर्व पार्षद राजेंद्र ताखर,ढाबां महामंत्री प्रेमप्रकाश पंवार, राजियासर मंडल महामंत्री कृष्ण गिला, युवा मोर्चा महामंत्री युधिष्ठिर, गुरजंट सिंह, रेंवतराम व्यास, इंजिनियर रमेशचंद्र माथुर,गौरव बंसल,पार्षद संतोष गिरी, दुलीचंद सारण, अशोक कौशिक, योगेश स्वामी सरफुद्दीन तेली, किशन स्वामी, महिला मोर्चा की जोगेन्दर कौर, बूथ अध्यक्ष लेखराम मंजोका, सरदार प्रेम सिंह, नंदकिशोर विश्वकर्मा, हिमांशु कोठारी, राधेश्याम नाई, कालुराम स्वामी आदि सैकड़ों कार्यकर्ता ने भाग लिया।

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पूर्व विधायक मील और चेयरमैन भाटिया ने की कमरे के निर्माण की घोषणा

सूरतगढ़। सैनी गार्डन के पास कामलिया तेली समाज की धर्मशाला के लिए भूमि आरक्षित करके राज्य सरकार को प्रस्ताव भिजवाने पर पूर्व विधायक गंगाजल मील,पीसीसी सदस्य हनुमान मील, नगर पालिका अध्यक्ष परसराम भाटिया सहित पार्षदों का सम्मान किया गया।

          इस अवसर पर जिला इमाम मौलाना आफताब आलम अशरफी, शहरकाजी मौलाना गुलाम कादिर कादरी, कारी वसीम अकरम, इमामशाह पीर, संस्था के अध्यक्ष पार्षद मुमताज अली, सचिन पार्षद मोहम्मद फारूक,कोषाध्यक्ष मोहम्मद हकीम,जमालद्दीन, मुराद खान, बाबू जमालुद्दीन, हाजी सत्तार, अली शेर, छोटू खान, अल्लाह नूर, भवरु खान,यासीन खान, हाजी शौकीन खान, बरकत अली, भूरे खान, मुमताज अली सहित समाज के प्रबुद्ध लोगों ने पूर्व विधायक गंगाजल मील, पीसीसी सदस्य हनुमान मील, पालिका अध्यक्ष परसराम भाटिया को साफा पहनाकर सम्मान किया।

      पालिकाध्यक्ष परसराम भाटिया ने कहा कामलिया तेली समाज की धर्मशाला के लिए भूमि देने का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भिजवाया गया है राज्य सरकार के निर्देशानुसार रियायती दर पर समाज को भूमि दी जाएगी।

    पूर्व विधायक गंगाजल मील ने कहा कांग्रेस पार्टी सभी धर्म और सभी वर्गों का सम्मान करते हुए योजनाओं का लाभ दे रही है लेकिन कुछ लोग समाज के काम में  अड़चन डालने का प्रयास कर रहे हैं ऐसे लोगों का मुकाबला करके समाज हित के काम लगातार जारी रहेंगे।

      पीसीसी सदस्य हनुमान मील ने कहा सबको जोड़कर प्यार मोहब्बत से रहने का संदेश देते हुए सांप्रदायिकता के खिलाफ आवाज बुलंद करके लोकतंत्र और संविधान संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है, ऐसे लोगों के खिलाफ हमें मुकाबला करने के लिए तैयार रहना होगा। साथ ही उन्होंने समाज के लोगों को बच्चों को शिक्षित करने करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की उन्नति इस बात पर निर्भर करती है कि वह समाज बच्चों की शिक्षा पर कितना ध्यान देता है।

इस अवसर पर कार्यक्रम के आयोजक और नूरी इंतजामियां समिति के सचिव व पार्षद मोहम्मद फारुख में ने कहा कि पार्षद बनने के बाद से वे समाज की धर्मशाला के लिए पार्षद मुमताज अली के साथ मिलकर लगातार कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस काम के लिए पूर्व विधायक और पीसीसी सदस्य हनुमान मील का साथ मिला इसी का नतीजा है कि आज समाज अपनी धर्मशाला में यह कार्यक्रम कर रहा है। इस मौके पर उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस टिकट के उम्मीदवार हनुमान मील को समर्थन देकर जिताने का आह्वान किया।

वहीं समिति के अध्यक्ष और पार्षद मुमताज अली ने भी पूर्व विधायक और पीसीसी सदस्य का आभार जताते हुए कहा कि जल्द ही सभी के सहयोग से कामलिया समाज की धर्मशाला का निर्माण होगा।

2 कमरों के निर्माण की घोषणा

कार्यक्रम के दौरान पूर्व विधायक गंगाजल मील और नगरपालिका चेयरमैन परसराम भाटिया ने धर्मशाला के निर्माण में सहयोग की घोषणा करते हुए एक-एक कमरे के निर्माण की घोषणा की। इस घोषणा के लिए पार्षद फारूक मोहम्मद ने समिति की ओर से दोनों नेताओं का आभार जताया।

पार्षदों व पार्षद प्रतिनिधियों और पत्रकारों को दिए सम्मान प्रतीक

 इस अवसर पर संगठन महामंत्री धर्मदास ‌ सिंधी, नगर पालिका उपाध्यक्ष सलीम कुरैशी, पार्षद मदनलाल बेनीवाल, सुनील उर्फ बबलू सैनी, रोहिताश होटला, मदन ओझा, लखविंदर सिंह, शंकर लाल नायक, भारत भूषण उपाध्याय, जसराम टाक, दिलीप स्वामी, सुरेश बिश्नोई, नितिन मोटियार, पुष्पेंद्र शर्मा, अमित कल्याण, रामचंद्र हिम्मतिया सहित पार्षदों और पार्षद प्रतिनिधियों का सम्मान प्रतीक देकर सम्मानित किया। इसके अलावा पत्रकार नवल भोजक, गोविंद भार्गव, विजय स्वामी सहित पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया।

      कार्यक्रम संचालन करते हुए सलमान बगड़वा, मीणा मौर्य ने किया।

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सूरतगढ। आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा की टिकट के लिए करीब 2 दर्जन उम्मीदवार मैदान में ताल ठोक रहे है। इन उम्मीदवारों में से आज हम बात कर रहे है पूर्व पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा की। पंजाब के अबोहर में जन्मी काजल छाबड़ा हिंदी में एम ए तक शिक्षित हैं। छाबड़ा की राजनीति में एंट्री वर्ष 2014 में हुई जब उन्होंने पार्षद का चुनाव जीता। संयोगवश उन्हें नगरपालिका चेयरमैन बनने का अवसर मिला जिसके बाद वे 2014 से 2019 के बीच चेयरमैन रही। उनके पति सुनील छाबड़ा भी मनोनीत पार्षद रहे है । वर्तमान में काजल छाबड़ा भाजपा की जिला मंत्री के पद पर हैं। गत वर्षो से काजल छाबड़ा पार्टी के सभी कार्यक्रमों में सक्रिय रही हैं।

चैयरमेन के रूप में छाबड़ा ने हासिल की कई उपलब्धियां

नगरपालिका चेयरमैन के रूप में छाबड़ा ने अपने कार्यकाल के दौरान शहर में अनेकों विकास कार्य करवाए। शहर को कैटल फ्री बनाने के लिऐं किसनपुरा आबादी में नंदीशाला का निर्माण, एसडीएम कोर्ट के पीछे अण्डर पास, विमेन हैल्थ एण्ड फिटनेस सेंटर का निर्माण काजल छाबड़ा के कार्यकाल में ही हुआ ।

इसके अलावा उन्होंने बिश्रोई समाज के मन्दिर व धर्मशाला का पट्टा दिलवाया तो सूर्योदय नगरी में प्राथमिक चिकित्सालय का निर्माण भी छाबड़ा ने पालिका अध्यक्ष रहते हुए करवाया। छाबड़ा के कार्यकाल मे कच्ची बस्तीयों में पेयजल पहुंचाने के लिये पाईप लाईने और सडक़ो का जाल बिछाया गया। शहर के अनेक वार्डो में आंगनबाड़ी केन्द्र के भवनो का निर्माण व विभिन्न समाजो को धर्मशाला के लिये भूमि आवंटन, पुरानी धान मण्डी में इन्टरलोकिंग टाईल्स और हाईमाक्स लाईटे भी उनके ही कार्यकाल में लगवाई गई।

भाजपा टिकट की मज़बूत दावेदार है छाबड़ा

जहाँ तक काजल छाबड़ा की दावेदारी की बात है भाजपा में इस बार 70 वर्ष से अधिक आयु के उम्मीदवारों कों टिकट नहीं मिलने की चर्चा है। जिसके चलते सूरतगढ़ विधानसभा में भी टिकट परिवर्तन होना तय है। ऐसे में काजल छाबड़ा का पूर्व चेयरमैन होना दूसरे प्रत्याशीयों के मुकाबले उनकी दावेदारी कों मज़बूत करता है।

इसके अलावा सूरतगढ़ विधानसभा में पिछले कई सालों से जाट प्रत्याशी के विरोध के स्वर गाहे-बगाहे उठते रहते हैं। इस बात से भाजपा आलाकमान भी परिचित है। इसलिये जाट उम्मीदवारों के विकल्प पर पार्टी स्तर पर चर्चा होती है तो भी छाबड़ा दूसरे दावेदारों से इस मायने में भी मज़बूत है कि चुनाव लड़ने के लिए जिन आर्थिक संसाधनों की जरूरत रहती है उनमे भी छाबड़ा दूसरे सभी प्रत्याशियों से आगे है। साथ ही विधानसभा में अरोड़ा-पंजाबी वोटों का करीब 28000 का आंकड़ा भी जातीय समीकरणो की दृष्टि से छाबड़ा के दावे को मज़बूत करता है।

इसके साथ ही पिछले कई विधानसभा चुनावों के परिणामों से यह बात साफ है कि शहरी मतदाता चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते है। शहर के बाजार पर क्यूंकि अरोड़ा बिरादरी का वर्चस्व है और काजल छाबड़ा के पति सुनील छाबड़ा प्रमुख व्यापारी नेताओं में शुमार किये जाते है। इसलिये छाबड़ा कों टिकट मिलने पर शहर का एकतरफा समर्थन छाबड़ा को मिलने की संभावना है। इस वजह से भी आंकड़ों में छाबड़ा की दावेदारी मज़बूत नज़र आती है।

छाबड़ा को टिकट मिलने की उम्मीद की एक वजह श्रीगंगानगर जिले का जातीय समीकरण भी है। आमतौर पर भाजपा श्रीगंगानगर जिले में एक टिकट अरोड़ा पंजाबी बिरादरी कों देती है। लेकिन गत चुनावों में भाजपा प्रत्याशी विनीता आहुज़ा की करारी हार से भाजपा अपनी स्टेटर्ज़ी बदलती दिख रही है। अरोड़ा बिरादरी की बहुसंख्यक आबादी के बाद भी कई निर्दलीय पार्टी प्रत्याशी पर भारी पड़े। ऐसे में श्रीगंगानगर सीट पर भाजपा के अरोड़ा कों छोड़कर दूसरे समाज के उम्मीदवार कों टिकट दिए जाने की प्रबल संभावना है। ऐसा होने पर सूरतगढ़ सीट पर अरोड़ा बिरादरी के खाते में जाना तय है। जिसका फायदा काजल छाबड़ा उठा ले जाये तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।

महिला प्रत्याशी होने का भी मिल सकता है फायदा

छाबड़ा का महिला होना भी उनका प्लस पॉइंट है। क्यूंकि सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की विजय लक्ष्मी बिश्नोई एकमात्र महिला विधायक रही है। उसके बाद न तो कभी कांग्रेस ने किसी महिला नेत्री को चुनाव मैदान में उतारा और न ही भाजपा ने। दूसरी और विधानसभा में महिलाओं कों 33 प्रतिशत आरक्षण की बात भी दोनों पार्टियों में उठ रही है। इस लिहाज से माना यह जा रहा है की इस बार किसी मजबूत महिला उम्मीदवार को टिकट देकर मैदान में उतार सकती है।

पति सुनील छाबड़ा के अच्छे संबंधों का मिलेगा लाभ


काजल छाबड़ा के पति सुनील छाबड़ा जों कि पूर्व पार्षद भी है पार्टी के कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय रहे है। गत वर्ष अमरपुरा के एमबीयन्स रिसोर्ट में सम्भाग स्तरीय बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन के सफल आयोजन में सुनील छाबड़ा की महत्वपूर्ण भूमिका रही जिसके लिए तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने सुनील छाबड़ा की पीठ भी थपथपाई थी । इसके अलावा सुनील भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा,छाबड़ा पिछले लम्बे समय से केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह और प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ से भी लगातार सम्पर्क में हैं।

कुल मिलाकर पूर्व चेयरमैन काजल छाबड़ा भाजपा टिकट पर दावेदारी के मामले में अन्य प्रत्याशीयों के मुकाबले किसी भी तरह से कमतर नहीं है।

चलते चलते……

सूरतगढ़ विधानसभा में वर्षो से कुछ गिने चुने चेहरे इलाके की जनता का प्रतिनिधित्व करते रहे। लेकिन इन नेताओं से इलाके की जनता को निराशा ही मिली है। जनता की नजरों में अब ये चेहरे अपना आकर्षण खो चुके हैं। यही वजह है कि क्षेत्र की जनता को उम्मीद है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में सभी प्रमुख पार्टियां नए चेहरों को आगे रखेंगी। जो भी पार्टी ऐसा करेगी उसके फैसले का स्वागत सूरतगढ़ विधानसभा की जनता अपने वोट की मोहर लगाकर करने को बेक़रार है।

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एयर बैलून से प्रचार बना चर्चा का विषय


सूरतगढ़। भाजपा के युवा नेता और पंचायत समिति डायरेक्टर इंजीनियर राहुल लेघा 11 सितंबर को सैनिक सम्मान समारोह का आयोजन करेंगे। इस सम्मान समारोह में बीकानेर संभाग के पूर्व सैनिकों और शहीद सैनिकों के परिवारों और उनकी वीरांगनाओं को सम्मानित किया जाएगा।

इस कार्यक्रम के लिए युवा नेता पिछले दो माह से ग्रामीण क्षेत्र में जनसंपर्क कर लोगों से इस सम्मेलन में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। लेघा ने हाल ही में सूरतगढ़ शहर में अपना प्रचार शुरू किया है। लेघा की और से समारोह के प्रचार के लिए एक अनूठा तरीका अपनाया गया है जों चर्चा का विषय बना हुआ है। राहुल लेघा द्वारा कार्यक्रम के प्रचार के लिए शहर के ह्रदय स्थल महाराणा प्रताप चौक के नजदीक एक विशाल गुब्बारा हवा में छोड़ा गया है। इस गुब्बारे पर लेघा की तस्वीर नाम और भाजपा का चुनाव निशान कमल अंकित है। यह गुब्बारा पिछले दो दिन से लगातार शहर में लोगों के लिए कौैतुहल का विषय बना हुआ हैं।

कार्यक्रम में हजारों की भीड़ जुटने का किया जा रहा दावा

नई धान मंडी परिसर में आयोजित होने वाले समारोह के कई महीनों में अभूतपूर्व होने का दावा किया जा रहा है। सम्मेलन में सूरतगढ़ में अब तक के किसी भी राजनितिक आयोजन से ज्यादा भीड़ जुटने की बात कही जा रही है। कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए जहां एयर बैलून जैसे अनुठे तरीकों से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। वहीं कार्यक्रम से आमजन ख़ासकर युवाओं को जोड़ने के लिए पंजाबी गायक भुल्लर को बुलाया गया है। इसके कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री डॉ पुष्कर सिंह धामी सहित कई बड़े नेताओं के पहुंचने का दावा किया जा रहा है।


समारोह के राजनीतिक मायने


अब जब विधानसभा चुनाव बेहद नजदीक है ऐसे में इस सम्मेलन के कई राजनीतिक मायने भी हैं। कहीं ना कहीं सैनिक सम्मान समारोह को युवा राहुल लेघा के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक इंजीनियर राहुल लेघा पार्टी के बड़े नेताओं के समक्ष ताकत का प्रदर्शन कर अपनी टिकट की मज़बूत दावेदारी पेश करना चाहते है। यदि दावे के अनुसार केंद्रीय रक्षा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित भाजपा के बड़े नेता सैनिक सम्मान सम्मेलन में पहुंचते हैं और कार्यक्रम में अच्छी भीड़ जुटती है तो टिकट को लेकर राहुल लेघा की दावेदारी स्वत मजबूत हो जाएगी।

परिवार की राजनितिक विरासत संभालने को तैयार राहुल

राहुल लेघा वर्तमान में पंचायत समिति के डायरेक्टर हैं उनके दादा चंदराम लेघा पंचायत समिति सूरतगढ़ के प्रधान रह चुके इंजीनियर राहुल लेघा के चाचा राजेंद्र लेघा श्रीविजयनगर नगर पालिका के अध्यक्ष है। इसलिए राहुल लेघा को राजनीति अपने परिवार से विरासत में मिली है। वहीं चुनाव लेघा प्रचार के लिहाज से भाजपा के अन्य सभी टिकट के दावेदारों से आगे नजर आ रहे हैं और उनका आत्मविश्वास उनके प्रचार से झलकता है और वह टिकट के प्रति पूरी तरह आश्वस्त दिखाई देते हैं। फिर भी सैनिक सम्मान समारोह के जरिए यह युवा नेता अपनी मजबूत दावेदारी का संदेश देना चाहता है।

प्रचार के अनुठे तरीकों से चर्चा में राहुल लेघा


राहुल लेघा पिछले कई महिनों से रोड़ मैप बनाकर सुनियोजित तरीके से चुनाव प्रचार में जुटे हुए है। लेघा ने सबसे पहले सूरतगढ़ विधानसभा के ग्रामिण क्षेत्र को कवर करने बाद अब शहरी क्षेत्र में भी प्रचार अभियान तेज़ कर दिया है। सैनिक सम्मान समारोह के प्रचार के लिए एयर बैलून के अनुठा तरीके से लेघा ने अपनी मजबूत दावेदारी का इशारा कर दिया है।

वैसे पार्टी के टिकट दूसरे दावेदार जहां अभी भी आलाकमान के इशारे का इंतजार कर रहे हैं। वहीं राहुल लेघा जिस प्रकार से धुआंधार प्रचार प्रसार कर रहे हैं वह कहीं न कहीं इस बात का इशारा भी कर रहा है कि लेघा टिकट को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। बहरहाल भाजपा की टिकट का सेहरा किसके सर बंधता है यह तो आने वाला वक्त तय करेगा। फिलहाल तो प्रचार के मामले राहुल लेघा टिकट के दूसरे दावेदारों से आगे निकलते दिख रहै है।

–राजेन्द्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रैस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़ । राजस्थान सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा – 2023 में भाटिया आश्रम के 35 विद्यार्थीयों का चयन हुआ है। इस सफलता के उपलक्ष में शनिवार को सनसिटी रिसोर्ट में प्रेरणा उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपखण्ड अधिकारी संदीप काकड़, तहसीलदार कुलदीप कस्वां, अनूपगढ़ जिला कोषाधिकारी श्रीमती ज्योति सेतिया, समाज कल्याण अधिकारी सिकंदर खोखर, सीआई कृष्ण कुमार, जामसर (बीकानेर) सीआई इंद्रकुमार मारवाल, आश्रम विद्यार्थी सब इंस्पेक्टर सुजाता, सुशील गौड़, विक्रम जाखड़ व रायसिंह उपस्थित रहे ।

कार्यक्रम में उपखण्ड अधिकारी संदीप काकड़ ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा में अच्छे गुरु के मार्गदर्शन व विद्यार्थी की मेहनत से ही सफलता के आखिरी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। आश्रम विद्यार्थी रहे तहसीलदार कुलदीप कस्वां ने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान आश्रम में बिताए दिनों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि योजनाबद्ध तैयारी व अध्यात्म सफलता की कुंजी है।

सीआई कृष्ण कुमार ने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों अपराध व नशे से दूर रहने का आह़वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर उसी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

जामसर (बीकानेर) सीआई इंदर मारवाल ने कहा कि एक पुलिस अधिकारी के लिए जरूरी है कि दिनचर्या का नियमित पालन करें। प्रात:काल जल्दी उठना, फिटनेस, अध्यात्म व खेल गतिविधियों का विधिसम्मत रूप से जीवन में प्रयोग करना चाहिए इसके बाद अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।

मंच संचालन करते हुए शिक्षाविद् प्रवीण भाटिया ने कहा आश्रम के ध्येय वाक्य संस्कार, रोजगार, राष्ट्रवाद, लोकहितवाद, ईमानदार पुलिस, संवेदनशील पुलिस, सकारात्मक दबंग पुलिस जातिवाद रहित पुलिस को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।

नव चयनित सब इंस्पेक्टर को दिए स्मृति चिन्ह

आश्रम आचार्य नगेंद्रसिंह भाटी ने नव चयनितों को समृति चिन्ह दिए। कार्यक्रम में नव चयनित सब इंस्पेक्टरर्स ने अतिथियों का सम्मान किया व अपने प्रेरणास्त्रोत गुरुजनों को स्मृति चिन्ह दिए।

नव चयनित सब इंस्पेक्टर व गणमान्य नागरिक रहे मौजूद

इस अवसर पर नव चयनित सब इंस्पेक्टरर्स अजय बिश्नोई, सुरेंद्र चौधरी, सुरेश डोरा, सुभाष, श्रीराम, ललित किशोर, सतपाल जाखड़, दिनेश कुमार, वीरेंद्र शर्मा, नवीन वर्मा, रामजीवन बिश्नोई, रविदास गढ़वाल, संदीप कुमार, दिनेश कुमार, प्रवीण पटेल, गोविंद कुमार, सुधीर कुमार, जसकरण सिंह, अनिल बिश्नोई, जितेंद्र कुमार, राजेश कुमार, कोमल सिपानी, संतोष चौहान, अनीशा, तुलसी चौधरी, नैनशा, पूजा बिश्नोई, सुषमा, कांता मूंढ, संजीव, पूजा भूकर, पायल शर्मा, सुशीला बालवां, रेनू यादव, बिंदिया, आरजू ज्याणी सहित विद्यार्थी व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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धरने में मौजूद रहे पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता

सूरतगढ़ । भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश में बिजली की कटौती , बिजली के बढ़े हुए रेट, सिंचाई और पेयजल की मांगों को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सीआर चौधरी जी के नेतृत्व में उपखण्ड कार्यालय पर धरना लगाया।

इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सीआर चौधरी ने कहा कि राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने पिछले पांच वर्षों में कुछ किया नहीं और अब चुनाव नजदीक आते देखकर महिलाओं को मोबाइल फोन का लालच देने काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की महिलाओं के साथ पांच वर्ष तक अपमान करने वाली गहलोत सरकार के राज में देश में महिला उत्पीडन और दलित उत्पीडन के सबसे ज्यादा मामले सामने आये। किसानों को ऋण माफी के झूठे वादे करने वाले गहलोत किसानों को बिजली और पानी तो समय पर नहीं दे पा रहे हैं । इस अवसर संभाग प्रभारी पूर्व केंद्रीय मंत्री सीआर चौधरी ने कहा कि देश यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व देश विकास की ओर अग्रसर है, रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, चंद्रयान 3 की बधाई देते हुए कहा कि भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है।

वहीं जिला अध्यक्ष सरदार शरनपालसिंह मान ने कहा कि राजस्थान कांग्रेस सरकार की हठधर्मिता और विफलताओं से किसान बेहाल है पिछले काफी समय से गंगनहर और आईजीएनपी नहर में पानी वितरण सही नहीं हो रहा है ।
उधर विधायक रामप्रताप कासनिया ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि उन्होंने विधानसभा में गहलोत सरकार को चेतावनी दी थी कि समय पर शहरी क्षेत्रों में,ग्रामीण क्षेत्रों में और किसान को सिंचाई पानी नहीं दिया तो इस सरकार का अंत निश्चित है। विधायक ने कहा कि इस सरकार के 60 दिन बाकी है जनता जल्दी ही इसे विदा करेगी।

इस अवसर पर पूर्व विधायक अशोक नागपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत अपनी सरकार को बचाने के लिए 4 साल तक विधायकों को लेकर होटलों में घूमते रहे और केंद्र सरकार की नीतियों को सही ढंग से लागू नहीं किया। उन्होंने बिजली और पानी के प्रबंधन में सरकार को पूरी तरह से फेल बताया।

सभा में ये नेता भी रहे मौजूद

इस अवसर पूर्व विधायक अशोक नागपाल, भाजपा प्रदेश मंत्री और अनुपगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष प्रियंका बेलांण, नगर मंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, महामंत्री लालचंद शर्मा , विधानसभा संयोजक पवन ओझा, पूर्व नगर मंडल अध्यक्ष विजय गोयल, जयप्रकाश सरावगी,पूर्व पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा ओझा,राजियासर मंडल अध्यक्ष पेपसिंह राठौड़, ढांबा मंडल अध्यक्ष कालुराम कड़ेला, सुभाष गुप्ता, एडवोकेट बलदेव विश्नोई,एडवोकेट आनंद शर्मा, पंचायत समिति सदस्य रामकुमार कस्वां, सरपंच रामकुमार गौदारा, पूर्व सरपंच फतेहसिंह, विकास शेखावत, हनुमान प्रसाद विश्नोई, सरपंच रूपाराम,बीरमाना मंडल महामंत्री बजरंग स्वामी किसान , पूर्व उप प्रधान संतराम भांभू,अशोक आसेरी, रजनी मोदी, विनोद सारस्वत,युवा मोर्चा अध्यक्ष मंयक वशिष्ठ, युवा मोर्चा महामंत्री युधिष्ठिर, गोपाल लेघा,पार्षद राजीव चौहान ,पार्षद हरीश दाधीच, पार्षद ओमप्रकाश अठवाल, पार्षद बिरमा तावनियां , पार्षद संतोष गिरी , पार्षद भागीरथ नायक,पूर्व पार्षद राजेंद्र ताखर, सत्यनारायण छिम्पा,जगजीत सिंह बराड़, हंसराज स्वामी, गुरजंट सिंह, गोविंद नायक, ओबीसी मोर्चा महामंत्री सुरेश सुथार, प्रेम प्रकाश वर्मा, नंदकिशोर विश्वकर्मा, विक्रम सिंह खीची विष्णु तरड़, रवि डाबी दुलीचंद सारण, पन्नाराम नायक, श्रीमती प्रमिला भाटी, श्रीमती जोगेन्दर देवी, आदि सैकड़ों कार्यकर्ता पहुंचकर धरना प्रदर्शन किया।

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निजी प्रैक्टिस के चलते देरी से पहुंचते है डॉक्टर

सूरतगढ़। शहर में अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार के लिए हमेशा नगरपालिका की चर्चा होती हैं। लेकिन दूसरे अन्य डिपार्टमेंट भी अव्यवस्थाओं के मामले में नगरपालिका से पीछे नहीं है। इन्हीं में से एक है हमारे जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण कहा जाने वाला चिकित्सा विभाग और इसके अंतर्गत आने वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।

जिले के इस प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब डेढ़ दर्जन डॉक्टर होने के बावजूद ओपीडी की व्यवस्था चरमराई हुई है। सेंटर में स्वयं या अपने बीमार परिजनों को दिखाने के लिए लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ता है। मरीज की परेशानी यहीं पर खत्म नहीं होती क्यूंकि डॉक्टर को दिखाने के बाद उन्हें जांच करवाने के लिए लैब या एक्सरे के लिए फिर लाइन में लगना पड़ता है। इसके बाद दोबारा डॉक्टर से दवा लिखाने के बाद दवा काउंटर पर फिर लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार मरीजों और उनके परिजनों को करना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया में कई बार मरीज और उनके परिजनों का पूरा का पूरा दिन बर्बाद हो जाता है।

इसके पीछे जो सबसे बड़ी वजह है वह धरती के भगवान कहे जाने वाले CHC के कुछ डॉक्टरों की मनमानी। कहने को तो चिकित्सालय का समय सुबह 8:00 बजे से दोपहर 2 :00 बजे का है। परंतु हकीकत यह है कि दो-तीन डॉक्टर को छोड़कर सेंटर के सभी डॉक्टर 10-10.30 बजे से पहले नहीं आते। नियमों से बेपरवाह कुछ डॉक्टर्स तो ड्यूटी के प्रति इतने लापरवाह है कि वें 12 बजे तक अपने कक्ष में नहीं पहुंचते हैं।

दूसरी और कुछ डॉक्टर तो इतने संवेदनहीन है कि केंद्र में पहुंचने के बावजूद भी वें आपसी बातचीत में मशगूल रहते हैं। उन्हें इस बात का जरा भी फर्क नहीं पड़ता है कि दर्जनों लोग जिनके लिए बीमारी की वजह से लाइन में खड़ा रहना किसी सजा से कम नहीं है वें लोग उनकी बाट जोह रहे है। लेकिन डॉक्टर साहब के लिए ड्यूटी की बजाय गप्पे लड़ाना और टाइम पास करना जरूरी होता है।

बिना काम किए ही हजारों रुपए वेतन उठा रहे डॉक्टर

           कहने को तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब डेढ़ दर्जन डॉक्टर हैं। लेकिन हकीकत यह है कि सेंटर के उपस्थिति बोर्ड पर जितने डॉक्टर्स की प्रेजेंट अंकित होती है उतने डॉक्टर कभी भी सीएससी में नहीं मिलते। शुक्रवार यानि 18 अगस्त को जब हमने सेंटर का दौरा कर चिकित्सकों की उपस्थिति की जानकारी ली तो कई हैरान करने वाली बातें सामने आई। सेंटर के उपस्थिति पट पर डॉ पंकज सोनी की उपस्थिति कमरा नंबर -10 में दर्ज थी। जब हम कमरा नंबर-10 में पहुंचे तो वहां पर डॉक्टर साहब नदारद थे। इतना ही नहीं कमरा नंबर -10 में डॉक्टर साब की कोई टेबल ही नहीं है जहाँ पर वे डॉक्टर को देख सके। कमरे में 2 टेबल लगी है जहाँ पर डॉ रमेश सोखल और एक अन्य डॉक्टर मरीजों को देखते है।

इसके अलावा हमें यह भी जानकारी मिली कि कमरा नंबर-25 में शुक्रवार को ही ड्यूटी संभालने वाले डॉक्टर दीपेश सोनी के अलावा डॉ अमृत लाल, डॉ राजकुमार और डॉ अनिमेष छाबड़ा की ड्यूटी है। लेकिन मौके पर डॉक्टर दीपेश सोनी के अलावा कोई भी दूसरा चिकित्सक मौजूद नहीं था। इस बारे में जब हमने और पूछताछ की तो बताया गया कि डॉ. राजकुमार ऑन कॉल ड्यूटी पर हैं। लेकिन डॉ अमृत लाल और संविदा पर तैनात डॉ. अनिमेष छाबड़ा की उपस्थिति को लेकर कोई भी संतोषजनक जवाब हमें नहीं मिला।

18 अगस्त के हाल आज यानी 19 अगस्त को भी हमें ठीक वैसे ही नज़र आये। आज भी कमरा नंबर-10 में डॉ पंकज सोनी नदारद मिले तो वहीं कमरा नंबर 25 में भी डॉक्टर दीपेश सोनी के अलावा सभी डॉक्टर गायब मिले। इस खोजबीन के दौरान यह भी सामने आया कि कमरा नंबर-25 में पिछले कुछ महीनों से कभी भी एक से ज्यादा चिकित्सक उपस्थित नहीं रहा है। कुछ लोग का कहना था कि इस कमरे में उपस्थिति देने वाले चिकित्सकों ने आपसी सेटिंग कर रखी है, जिसके चलते कमरे में कोई एक ही डॉक्टर मौजूद रहता है। कुल मिलाकर चिकित्सालय में एक डॉक्टर की जगह 3 डॉक्टर की सैलरी उठ रही है। लेकिन इन डॉक्टर्स की सेवाओं का लाभ आम जनता को नहीं मिल रहा।

इस मामले में हैरान करने वाली बात यह भी है कि डॉ अनिमेष छाबड़ा जिनकी ड्यूटी कमरा नंबर-25 में बताई जा रही है उनका नाम तक उपस्थिति पट्ट पर अंकित नहीं है। वैसे कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि डॉक्टर साब को चिकित्सालय में आने वाले आम मरीज तो क्या खास लोग भी नहीं जानते। जिसका मतलब है कि डॉ. साहब का नाम सिर्फ कागजों में चल रहा है। डॉ साब का यह रुतबा हैरान करने वाला है।

इस मामले में जब हमने चिकित्सा प्रभारी विजय भादू से बात की तो उनका कहना था कि चिकित्सालय में तीन परमानेंट डॉ. के ज्वाइन करने  के बाद उनका ट्रांसफर हो गया है और ऑर्डर आने वाले हैं। वैसे लगे हाथ आपको हम यह भी बता दें कि संविदा पर लगे डॉ. पंकज सोनी शहर की ही एक बड़े अधिकारी के पति देव है। अब आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि बेचारे CHC प्रभारी इस व्यवस्था के आगे कितने लाचार है।

निजी प्रेक्टिस कर रहे डॉक्टर, उठा रहे नॉन प्रेक्टिस अलाउन्स

सेंटर के चिकित्सकों की लेटलतीफी की वजह की बात करें तो इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि CHC के डॉक्टर अपने घरों में क्लीनिक चला रहे हैं जहाँ पर ये मोटी फीस लेकर मरीजों को देखते है। फीस के लालच में इन डॉक्टर्स को यह याद भी नहीं रहता कि CHC में बीमार से परेशान और गरीब लोग जों उनकी फीस देने में सक्षम नहीं है, उनका लाइन में लग कर इंतजार कर रहे हैं। हालांकि नियमानुसार सरकारी सेवा में तैनात डॉक्टर्स घर पर प्रैक्टिस नहीं कर सकते। सरकारी सेवा में तैनात डॉक्टर घर पर प्रैक्टिस नहीं करें इसके लिए सरकार चिकित्सकों को नॉन प्रैक्टिस अलाउंस के रूप करीब ₹25000 से अधिक की राशि हर माह देती है। लेकिन ज्यादातर मामलों में चिकित्सक घर पर प्रैक्टिस करने के बावजूद नॉन प्रैक्टिस अलाउंस भी उठाते हैं।

गौरतलब यह भी है कि CHC के कुछ चिकित्सकों ने प्रैक्टिस तो बंद नहीं की लेकिन शिकायत होने के बाद एनपीए यानी नॉन प्रैक्टिस अलाउंस लेना जरूर बंद कर दिया है। लेकिन अभी भी कई डॉक्टर घर में प्रैक्टिस करने के बावजूद नॉन प्रैक्टिस अलाउंस के हजारों रुपए डकारे जा रहे हैं।

ईमानदारी से डॉ. ड्यूटी करें तो बदल सकती है सीएचसी की सूरत

शहर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहले से ही करीब डेढ़ दर्जन चिकित्सक मौजूद है वहीं 2 दिन पूर्व ही फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ दीपेश सोनी, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉक्टर प्रशांत रस्सेवट और सर्जन डॉ संदीप कुमार की जॉइनिंग हुई है। ऐसे में क़ह सकते है कि केंद्र में डॉक्टरों की संख्या पर्याप्त है। अगर यह सभी चिकित्सक ईमानदारी से काम करें तो केंद्र में लगने वाली मरीजों की लाइन खत्म हो सकती है। लेकिन डॉक्टरों की ड्यूटी के प्रति लापरवाही और मनमानी की वजह से ही जिले का दूसरा सबसे बड़ा सीएचसी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।यहां सवाल यह पैदा होता है कि धरती के भगवान के लिए जाने वाले सीएससी के इन डॉक्टर में काम से जी चुराने की जो बीमारी लग चुकी है उसे कौन ठीक करेगा ?

अपनी सुविधा के लिए नेताओं नें मूंदी आँखे

ऐसा नहीं है कि सीएससी के यह हालात अब हुए हैं। बरसों बरस से चिकित्सकों की मनमानी के चलते यह ढर्रा चल रहा है। लेकिन नेताओं की फौज वाले इस शहर में एक भी ऐसा जागरूक नेता और जनप्रतिनिधि नहीं है जो इस बेलगाम हो चुकी व्यवस्था पर लगाम लगा सके।

वैसे इस व्यवस्था के फलने फूलने की एक वजह यह भी है कि बीमारी से नेताओं को भी डर लगता है और वे ये भी समझते है कि डॉक्टर से उन्हें भी कभी भी वास्ता पड़ सकता है। ऐसे में जनता के अगुवा कहें जाने वाले शहर के सभी नेता डॉक्टरों से लाइजनिंग निभाते हैं ताकि खुद के परिवार या नजदीकी लोगों को CHC में या फिर इन डॉक्टर्स के घर पर चल रहे क्लीनिक में vip ट्रीटमेंट मिल सके।

दूसरी और व्हाट्सएप ग्रुपों में पार्टी बाजी के नाम पर और नेताओं के पैरोकार बनकर सर फुटव्वल कर रहे कथित जागरूक लोगों में इतना मादा नहीं है कि खुद या अपने नेताओ से इस बेपटरी हो चुकी व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आवाज बुलंद करनें को क़ह सके । कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि शहर का सीएचसी बीमार हो चुका है, इसे तुरंत सघन चिकित्सा की जरूरत है।

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20 अगस्त को पटियाला में होगा आयोजन

पटियाला। खबर रेडियों लवर्स के लिए है। 20 अगस्त यानि की रविवार को को अखिल भारतीय रेडियो श्रोता सम्मेलन का आयोजन पटियाला में होने जा रहा है। हरपाल टिवाणा कला केन्द्र मॉडल टाउन, नाभा रोड, पटियाला में होने जा रहे इस आयोजन की तैयारियां जोर शोर से जारी है। बहलोलनगर (हनुमानगढ़) के रेडियो प्रेमी श्रोता हरीश हैरी के अनुसार श्रीगंगानगर, सूरतगढ़, हनुमानगढ़ सहित पूरे राजस्थान से सैंकड़ों रेडियो श्रोता और आकाशवाणी सूरतगढ़ के कई उद्घोषकगण पटियाला सम्मेलन में शामिल होंगे।

अखिल भारतीय रेडियो श्रोता सम्मेलन पटियाला समिति के अध्यक्ष मुकेश बत्ता और सचिव सुनील पाठक ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आकाशवाणी पटियाला के केन्द्र अध्यक्ष श्री अमरनाथ होंगे। अध्यक्ष आशुतोष मिश्रा, डीन स्कूल ऑफ चितकारा यूनिवर्सिटी पंजाब, विशिष्ट अतिथि पवन कुमार, कार्यक्रम प्रमुख आकाशवाणी हिसार (हरियाणा), विशेष अतिथि डॉ.जसविंद्र सिंह, डायरेक्टर सीडस नाभा, मुख्य वक्ता सम्पूर्णसिंह बागड़ी, वरिष्ठ उद्घोषक आकाशवाणी, रोहतक (हरियाणा), वरिष्ठ अतिथि अशोक बजाज पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर (छत्तीसगढ़) होंगे।

सम्मेलन में शामिल होने के लिए हरियाणा, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, बिहार,उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और उत्तराखंड राज्य के सैंकड़ों रेडियो श्रोता पधार रहे हैं। राष्ट्रपति पदक से सम्मानित छत्तीसगढ़ (रायपुर) के श्री परशराम साहू और बिहार (पटना) के श्री राजकुमार कर्ण, रेडियो श्रोता कल्याण समिति के प्रदेशा ध्यक्ष श्रवण सिंह गिंनारे, प्रदेश संयोजक योगेश गुजराती, नागपुर से वरिष्ठ श्रोता प्रकाश इंगोले,दिल्ली से श्रोता सुखविंद्र सिंह जौड़ा,पिंटू दीवाना, परली बैजनाथ से श्रीकांत आर जी फड़, खण्डवा से आनन्द जोशी आदि उपस्थित रहेंगे।

सन्निहित रेडियो लिस्नर्स क्लब के प्रचार मन्त्री रविकुमार राहुल ने बताया कि रेडियो में अपनी सेवाएं दे चुकी कई हस्तियाँ, अधिकारीगण सम्मेलन में शामिल होने आ रहे हैं। आकाशवाणी कुरुक्षेत्र, रोहतक, पटियाला, खण्डवा, नजीबाबाद, अहमदनगर, हिसार, सूरतगढ़, जालंधर और करनाल के उद्घोषकगण भी सम्मेलन में उपस्थित होंगे।

सम्मेलन के मुख्य सूत्रधार बिजेंद्र जयजान ने बताया कि सन्निहित रेडियो लिस्नर्स क्लब के ज्ञानभूषण शर्मा जी की अध्यक्षता में ये दूसरा राष्ट्रीय स्तर का श्रोता सम्मेलन होने जा रहा है। जिसमें पूरी टीम गत तीन माह से तैयारी में लगी है और देशभर के सैंकड़ों रेडियो श्रोताओं,आकाशवाणी अधिकारीगण और उद्घोषकगण के ठहरने,खाने की सम्पूर्ण व्यवस्था पूरी कर ली गई है। अखिल भारतीय रेडियो श्रोता सम्मेलन पटियाला पँजाब के सम्मेलन प्रभारी अशोक ग्रोवर, संयोजक सतीश मिगलानी और पूरी कार्यकारिणी सम्मेलन में पधारने के लिए देशभर के समस्त रेडियो श्रोताओं अपील की है।

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सूरतगढ़। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भाजपा में टिकट बंटवारे को लेकर मंथन जारी है। पार्टी में गुजरात चुनाव के फार्मूले को राजस्थान विधानसभा चुनाव में लागू किए जाने की चर्चा जोरों पर है। गुजरात चुनाव में भाजपा ने 70 साल आयु से अधिक के दावेदारों के बड़ी संख्या में टिकट काटे थे । भाजपा के इस प्रयोग का नतीजा की सकारात्मक रहा और पार्टी गुजरात में सरकार बनाने में कामयाब रही। अब एक बार फिर जब राजस्थान में विधानसभा चुनाव की आहट सुनाई देनें लगी है। ठीक उसी वक़्त गुजरात चुनाव का फार्मूला लागू होने की चर्चा पार्टी टिकट के दावेदारों की नींद उड़ा रही है।

               सूरतगढ़ विधानसभा की अगर बात करें तो  यहां 70 प्लस आयु के नेताओं को टिकट नहीं देने के फार्मूले के लागू होने की चर्चा से कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल है। जहां तक इस चर्चा से गम या परेशान होने का सवाल है ऐसे नेताओं में वर्तमान विधायक रामप्रताप कासनिया और पूर्व विधायक राजेंद्र भादू का नाम शामिल है। विधायक कासनिया का दस्तावेजों के मुताबिक जन्म 16 अगस्त 1952 का है। वहीं पूर्व विधायक राजेंद्र भादू का जन्म 7 अगस्त 1953 का है। दोनों नेताओं की जन्मतिथि के अनुसार आयु क्रमशः 71 और 70 साल है। इसका सीधा सा मतलब है कि इस फॉर्मूले के मुताबिक दोनों ही दिग्गज नेताओं का टिकट कटना लगभग तय है।

वैसे 70 प्लस आयु का जो फार्मूला चर्चा में है वह कठोर रूप से आयु के रूप में लागू न होकर जन्म वर्ष के अनुसार लागू होने की संभावना है। इसका मतलब है कि मध्यप्रदेश में चल रही चर्चाओं के अनुसार जिन नेताओं का जन्म 1955 से पूर्व हुआ है पार्टी उन नेताओं को टिकट नहीं देगी। यही वजह है कि पार्टी टिकट के अन्य दावेदार इस चर्चा से बेहद उत्साहित नज़र आ रहे है। इन नेताओं में अशोक नागपाल, नरेंद्र घिन्टाला,राकेश बिश्नोई, राहुल लेघा सहित कई नेता बेहद खुश नज़र आ रहे हैं। वैसे इन नेताओं की खुशी जायज भी है क्यूंकि अगर कासनिया और भादू की टिकट कटती है तो टिकट अगली पंक्ति के इन्ही नेताओं में से किसी को मिलना लगभग तय है। ये अलग बात है कि 70 प्लस आयु के नेताओं के टिकट कटने की चर्चा के बाद विधायक रामप्रताप कासनिया अपने पुत्र संदीप कासनिया का नाम आगे कर सकते है। वैसे राजनीति में वंश परंपरा को कायम रखना एक सामान्य प्रैक्टिस रही है।

                     वहीं पूर्व विधायक राजेंद्र भादू की बात करें तो 70 प्लस के फॉर्मूले के लागू होने पर उनके अपने पुत्र को आगे करने की संभावनाएं बहुत कम है। हालांकि यह संभावना जताई जा रही है कि विधायक राजेंद्र भादू क्यूंकि वसुंधरा गुट से जुड़े बताए जाते हैं। ऐसे में अगर वसुंधरा राजे को जिस तरह के अभी हालात है, अगर पार्टी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं करती तो वसुंधरा द्वारा अपने समर्थकों को निर्दलीय चुनाव लड़ाने की स्थिति में पूर्व विधायक निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जोर आजमाइश कर सकते हैं। वैसे पूर्व विधायक के अन्य पार्टियों के नेताओं से सम्पर्क में होने की अफवाहे भी बाजार में चल रही है जिनकी सत्यता को लेकर कुछ भी कहना मुश्किल है।

बहरहाल यह जरूर कहा जा सकता है कि पूर्व विधायक इस चुनाव को अपने अंतिम चुनाव के रूप में देख रहे हैं, ऐसे में भादू टिकट नहीं मिलने पर दोनों पार्टीयों के उम्मीदवारों की जमीनी स्थिति को देखकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का जुआ खेल ले तो कोई अचरज वाली बात नहीं होगी। वैसे भी भादू वर्ष 2008 के चुनावों में आज़ाद उम्मीदवार के रूप में 33 हज़ार से अधिक वोट लेकर और दूसरा स्थान हासिल कर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित कर चुके हैं।

                             कुल मिलाकर भाजपा में 70 प्लस आयु के नेताओं के टिकट काटने की चर्चा आने वाले दिनों में जोर पकड़ेगी। लेकिन इस फार्मूले को भारतीय जनता पार्टी कितना सख्ती से लागू करती है यह आने वाला समय तय करेगा।

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सूरतगढ़। करीब 23 साल पहले वर्ष 2001 में डायरेक्टर एस शंकर की एक फिल्म आई थी ‘नायक’। उस समय बेहद चर्चित रही इस फ़िल्म मे संयोगवश फिल्म का नायक अनिल कपूर एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बन जाता है। सीएम बनने के बाद एक दिन में ‘नायक’ अनिल कपूर एक के बाद एक शानदार फैसले लेता है। हालात यह बनते हैं कि करप्शन से त्रस्त जनता नायक के कामों से प्रभावित होकर उसे पूर्णकालिक सीएम बनाने की मांग करनें लग जाती है।         

रुपहले पर्दे की ऐसी ही कुछ कहानी इन दिनों सूरतगढ़ नगरपालिका में दोहराई जा रही है। असल जिंदगी में चल रही इस फ़िल्म में अनिल कपूर की जगह ‘नायक’ की भूमिका में पालिका के मनोनीत चेयरमैन परसराम भाटिया है। परसराम भाटिया नें 29 जुलाई को चेयरमैन का कार्यभार ग्रहण किया था। उसके बाद से वे लगातार एक के बाद एक फैसले लेते हुए नगरपालिका की बदहाल हो चुकी व्यवस्था की सूरत बदलने में जुटे हुए हैं। पहले जहाँ लोगों को महीनों चक्कर काटने के बावजूद पट्टे नहीं मिल रहे थे, वहीं भाटिया नें अपने महज 15 दिन के कार्यकाल में 570 पट्टे बना कर गुरूवार को बांट भी दिए। चेयरमैन भाटिया के मुताबिक अगले कुछ दिनों में एम्पावर्ड कमेटी की बैठक कर करीब 300 पट्टे और जारी किये जाने है। यही नहीं पांच साल से चल रहा किशनपुरा आबादी स्थित आवासीय कॉलोनी का मामला भी उन्होंने चेयरमैन बनते ही कुछ ही दिनों में सुलझा दिया और बोलीदाताओं को प्लॉट का आवंटन भी कर दिया। इसी तरह से वार्ड नंबर-26 के पट्टों का मामला भी भाटिया के प्रयासों से लगभग सुलझ चुका है। निजी खातेदारी की सीमाओं से बाहर आने वाले वार्ड-26 के लोगों को जल्दी पट्टे जारी होने की बात भाटिया द्वारा कही जा रही है। इसके साथ ही शहर के विकास के दृष्टिगत भाटिया नें अपने छोटे से कार्यकाल में विकास कार्यों के 10 से 12 करोड़ के टेंडर जों पूर्व में अटके हुए थे, का वर्क आर्डर जारी कर दिया है। गुरुवार को पट्टा वितरण कार्यक्रम और पालिका बोर्ड की बैठक में ईओ शैलेंद्र गोदारा ने साफ किया कि चेयरमैन परसराम भाटिया के मंशा अनुसार जहां भी जरूरत होगी तुरंत टेंडर कर वर्क आर्डर जारी किये जायेंगे। पूर्व में जहां पर पालिका की साधारण सभा की बैठक महीनो नहीं होने से पार्षदों में नाराजगी रहती थी वहीं भाटिया ने चेयरमैन बनते ही कुछ ही दिनों में बोर्ड की बैठक बुला ली। यह अलग बात है कि राजनीति के चलते भाजपा पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। इसके अलावा भी भाटिया लगातार अधिशासी अधिकारी शैलेंद्र गोदारा के साथ मिलकर शहर की सफाई व्यवस्था को बहाल करने में जुटे हैं। इसके लिए शहर की सफाई व्यवस्था को चौपट करने के जिम्मेदार कुछ कार्मिकों को नोटिस भी दिए गए हैं। भाटिया की सख्ती का नतीजा है कि पालिका में कार्यभार ग्रहण करने के बाद से नगरपालिका के कर्मचारी, जों अपनी कार्यशैली को लेकर कुख्यात रहे है अलर्ट मोड पर आ चुके है। इसके साथ ही खुद परसराम भाटिया दिनभर पालिका कार्यालय में बैठकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं। पूर्व चेयरमैनों के विपरीत भाटिया संबंधित अधिकारियों और कार्मिकों को बुलाकर समस्याओं के तुरंत निस्तारण का निर्देश दे रहे हैं। भाटिया की इसी कार्यशैली के वजह से सूरतगढ़ नगरपालिका जो वीरान हो चूकी थी इन दिनों पूरी तरह से आबाद नज़र आ रही है। पालिका में दिन भर फरियादियों का रैलम पैला लगा रहता है।                 

बहरहाल जिस तरह से फिल्म में नायक अनिल कपूर को अचानक ही परिस्थितिवश 1 दिन का सीएम बनने का मौका मिलता है। उसी प्रकार से परसराम भाटिया को भी पूर्व चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा के निलंबन के चलते अकस्मात ही अस्थाई तौर पर चेयरमैन बनने का अवसर मिला है। भाटिया का भविष्य चेयरमैन कालवा के मामले में हाईकोर्ट के निर्णय पर टिका हुआ है। शायद यही वजह है कि ‘नायक’ के हीरो की तरह ही भाटिया भी बहुत जल्दी में है। वे इस अवसर को यादगार बना देना चाहते हैं और इसके लिए दिन रात एक किए हुए हैं।

उनकी कोशिशों का नतीजा है कि फिल्म के ‘नायक’ की तरह ही भाटिया फिलहाल शहर में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। ‘नायक’ फ़िल्म के अंत में जनता जिस तरह से हीरो अनिल कपूर के कामों से प्रभावित होकर उसे पूर्णकालिक सीएम बनाना चाहती है। ठीक ऐसी ही भावना चेयरमैन भाटिया के मामले में शहर की जनता की बनती जा रही है।

बहरहाल परसराम भाटिया और कितने दिनों तक नगरपालिका के चेयरमैन बने रहते हैं यह तो भविष्य के गर्भ में छुपा हुआ है। फिलहाल शहर का आमजन भाटिया के चेयरमैन बनने से काफी खुश नजर आ रहा है।

           

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सूरतगढ़ (9 अगस्त)। सूरतगढ़ नगरपालिका के चेयरमैन परसराम भाटिया नें शहर में ठप्प पड़ चुके विकास कार्यों को फिर से पटरी पर लाने की कवायद शुरू कर दी है। इसी के तहत सैनी धर्मशाला के पीछे पुरानी गिनाणी में महात्मा ज्योतिबा फुले एवं सावित्रीबाई फुले पार्क और अरोड़वंश कल्याण भूमि के पिछले गेट के सामने गंगानगर बाईपास सड़क पर अरुट जी महाराज पार्क के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया। इस अवसर पर पूर्व विधायक गंगाजल मील, पालिका चेयरमैन परसराम भाटिया, उपाध्यक्ष सलीम कुरेशी, वार्ड पार्षद सुनील उर्फ बबलू सैनी, वरिष्ठ पार्षद कामरेड मदन ओझा, पूर्व पार्षद राजाराम गोदारा ने पट्टीका का अनावरण निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया।

पालिकाध्यक्ष भाटिया के अनुसार दोनों पार्कोँ के निर्माण पर करीब एक करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन पार्कोँ के साथ ही उनकी चिल्ड्रन पार्क के निर्माण की भी योजना है।

मील नें पूर्व चेयरमैन पर साधा निशाना, भाटिया की प्रशंसा की

इस अवसर पर पूर्व विधायक गंगाजल मील ने पालिका चेयरमैन परसराम पाठक की कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा कि भाटिया के चेयरमैन बनने के साथ शहर में फिर से विकास कार्यों की शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग के लोगों को साथ लेकर चलने वाले व्यक्ति है यही वजह है कि भाटिया के चेयरमैन बनने पर हमें भी लोगों ने बधाइयां दी। इस अवसर पर पूर्व विधायक ने पूर्व चेयरमैन कालवा पर विकास कार्यों को ठप करने का आरोप भी जड़ा। उन्होंने कहा कि इस पार्क निर्माण शुरू करने के लिए बार-बार कहा लेकिन वो (कालवा) केवल वहीं काम करते थे जिससे उनको कुछ मिलता। पूर्व विधायक का कहना था कि पार्क के निर्माण पर करीब ₹1 करोड़ खर्च किए जाएंगे। फिर भी अगर पैसों की कमी रही तो समाज के सहयोग लेकर पार्क का विकास करवाया जाएगा।

भाटिया ने शहर के विकास की दोहराई प्रतिबद्धता

इस अवसर पर पालिकाध्यक्ष परसराम भाटिया ने पूर्व विधायक गंगाजल मील का उन पर विश्वास जताने के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें पालिका बोर्ड के बचे हुए कार्यकाल तक काम करने का अवसर मिलता है तो वे शहर को चमन बनाने मैं कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने शहर के लोगों से सहयोग मांगा और कहा कि शीघ्र ही प्रशासन शहरों के अभियान के तहत फोटो का वितरण भी किया जाएगा।

पार्क निर्माण से मिलेगी गंदगी से मुक्ति, अवैध कब्जों पर लगेगी लगाम

वार्ड नंबर 42 में इन दोनों पार्कोँ के निर्माण से एक और वार्ड वासियों को गिनानी की गंदगी से छुटकारा मिलेगा। वहीं दूसरी और वार्ड में अवैध कब्जों पर भी लगाम लगेगी। गिनानी क्षेत्र में पिछले कुछ सालों में बड़ी संख्या में कब्जे हुए हैं। यही वजह है कि सूरतगढ़ हनुमानगढ़ फोरलेन मार्ग से जो सड़क 80 से 100 फुट के बीच चौड़ी है वह पार्क के पास आकर महज 20 से 25 फूट ही रह जाते हैं। जिसके चलते बढ़िया सड़क के निर्माण के बावजूद रोड़ पार्ट पर हुए कब्ज़े मलमल का टाट के पैबंद की तरह नज़र आ रहे है। बेहतर होता कि पालिका मजबूत इच्छाशक्ति दिखाते हुए सड़क को चौड़ा करवाती।

ये प्रमुख लोग भी रहे मौजूद

इस अवसर पर व्यापार मंडल अध्यक्ष सुरेंद्र छाबड़ा, पूर्व उपप्रधान रामकुमार भांभू , सैनी समाज के अध्यक्ष एडवोकेट भंवरलाल सैनी, बिश्नोई समाज के अध्यक्ष एडवोकेट भागीरथ कड़वासरा, अरोड़वंश समाज समिति पूर्व अध्यक्ष नागरमल बाघला,चंद्र प्रकाश जनवेजा,पूरन चंद कवातड़ा, मुस्लिम समाज के निजामुद्दीन, पार्षद मुमताज अली,पार्षद संदीप सैनी, कांग्रेस के संगठन महामंत्री धर्मदास सिंधी सहित शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे। कांग्रेस प्रवक्ता सहदेव जोशी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए सभी का आभार प्रकट किया।

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सूरतगढ़। नगरपालिका चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा को आखिरकार स्वायत शासन विभाग ने निलंबित कर दिया है। कालवा पिछले सवा साल से एक करोड़ 60 लाख रुपए के सीवरेज घोटाले में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हुए थे। कालवा को जांच में दोषी मानते हुए स्वायत शासन विभाग ने चेयरमैन कालवा को न केवल अध्यक्ष पद से बल्कि उनकी सदस्यता को भी निलंबित कर दिया है। स्वायत शासन विभाग ने 24 जुलाई को जारी आदेश में कालवा के विरुद्ध न्यायिक जांच करवाने की बात कही है।

वहीं दूसरी और मास्टर कालवा नें जिला कलेक्टर की जांच पर सवाल उठाते हुए उच्च न्यायालय में रिट दायर की है, जिस पर सुनवाई चल रही है। मंगलवार को नंबर नहीं आने के चलते सुनवाई नहीं हो सकी। ऐसे में आज प्रकरण पर सुनवाई होने की उम्मीद है। हालांकि इस मामले में पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल के प्रयासों से स्वायत शासन विभाग द्वारा केवियट दायर की गई है। जिसके चलते रिट पर फैसला देने से पूर्व विभाग का पक्ष भी सुना जाएगा। बहरहाल इस बेहद चर्चित प्रकरण में निर्णय क्या आएगा इसको लेकर उत्सुकता बनी हुई है। पालिका चेयरमैन की गद्दी पर कौन बैठेगा यह इस निर्णय से तय होगा।

चेयरमैन कालवा के निलंबन के बाद अभी तक विभाग द्वारा कार्यवाहक चेयरमैन की नियुक्ति नहीं की गई है जिसका सीधा सा अर्थ है कि विभाग भी न्यायालय के निर्णय का इंतजार कर रहा है। इसलिये आज का दिन सूरतगढ़ नगरपालिका और शहर के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वैसे अगर चेयरमैन कालवा की याचिका पर आने वाले फैसले की बात की जाए तो कालवा के समर्थक यह मानकर चल रहे हैं कि न्यायालय कालवा को राहत देते हुए निलंबन के आदेश पर पर स्टे देगा।

वैसे अगर तकनीकी रूप से देखा जाए तो इस बात की संभावना ज्यादा नजर भी आ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि इस मामले में विभाग द्वारा अभी तक केवल चेयरमैन कालवा पर कार्रवाई की गई है। जबकि मामले में तात्कालिक JEN, AEN, अकॉउंटेंट और अधिशासी अधिकारी जो मामले में उतने ही दोषी है जितने की चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा। ऐसे में अन्य दोषियों पर कार्रवाई नहीं होना न्यायालय में कालवा के बचाव के लिए एक बड़ा तर्क साबित हो सकता है। खैर चेयरमैन कालवा की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले तर्क न्यायालय को प्रभावित कर पाते हैं या नहीं इसका खुलासा जल्द हो जाएगा।

                       वैसे अगर न्यायालय चेयरमैन कालवा की रिट खारिज करता है तो देर शाम या कल तक विभाग कार्यवाहक अध्यक्ष के नियुक्ति के आदेश जारी कर देगा। फिलहाल अध्यक्ष पद के दावेदारों में परसराम भाटिया और बनवारीलाल मेघवाल की पत्नि पार्षद विमला मेघवाल का नाम आगे चल रहा है। इसके अलावा पार्षद शंकर नायक को कार्यवाहक चेयरमैन बनाने की चर्चा चल रही है।

बहरहाल देखना यह होगा कि नगरपालिका के चेयरमैन की कुर्सी का सेहरा किसी नए व्यक्ति के सर पर सजेगा या फिर कालवा एक बार फिर पालिका के चेयरमैन कार्यालय में अपने नाम की नेम प्लेट लगाने में सफल होंगे।

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नहीं सहेगा राजस्थान अभियान के तहत बूथ स्तर पर चौपाल का होगा आयोजन

सूरतगढ़।भारतीय जनता पार्टी सूरतगढ़ इकाई की महत्वपूर्ण बैठक अग्रसेन भवन जिलाध्यक्ष आत्माराम तरड़़ की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष सरदार अजयपाल सिंह ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार की विफलताओं और अकर्मण्यता के कारण प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि आए दिन महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं आम हो गई है, माफियाओं का राज पनप रहा है। सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है, सरकारी भर्तियों में पेपर लीक हो रहें हैं, बिजली पानी और सड़कों को स्थिति ख़राब हो गई है, युवा बेरोजगार हो रहें हैं, किसानों को ऋण माफी के झूठे वादों का सच सामने आ चूका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब कांग्रेस से तंग आ चुकी है, राजस्थान की जनता अब इस सरकार को नहीं सहेगी इसलिये प्रदेश भाजपा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ सभी विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्येक बूथ स्तर तक चौपाल लगाकर कांग्रेस सरकार की विफलताओं की पोल खोल खोलेगी।

बैठक में यह नेता रहे मौजूद

बैठक में सांसद निहालचंद, भाजपा प्रदेश मंत्री व अनुपगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष प्रियंका बेलान, जिला उपाध्यक्ष सरदार शरनपालसिंह ,पूर्व विधायक अशोक नागपाल, जिला उपाध्यक्ष आरती शर्मा, नगरपालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा, जिला मंत्री काजल छाबड़ा, नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा , महामंत्री लालचंद शर्मा, जैतसर मंडल अध्यक्ष अशोक गोयल,ढाबां मंडल अध्यक्ष कालुराम कड़ेला, पूर्व प्रधान चंदुराम लेघा, पूर्व प्रधान बीरमा नायक, जयप्रकाश सरावगी, विजय कुमार गोयल, सुभाष गुप्ता, नगरमंडल उपाध्यक्ष दर्शन भगत परनामी, पृथ्वीराज स्वामी,पवन ओझा, नरेंद्र घिंटाला, युवा मोर्चा अध्यक्ष मंयक वशिष्ठ,श्रीकांत सारस्वत ,महिला मोर्चा अध्यक्ष प्रमिला भाटी ,पार्षद संतोष गिरी , श्रीमती शर्मिला शेखावत, श्रीमती रजनी मोदी ,वीरेंद्र सिंह महामंत्री गोविंदसर, ओमप्रकाश कारगवाल, गोपाल लेघा, पूर्व पार्षद राजेंद्र ताखर, गोपीराम दगल ,दुलीचंद सारण ,बजरंग सिंह, अमरचंद नायक, पार्षद हरिप्रसाद शर्मा, राजीव चौहान, हंसराज स्वामी, गुरजंट सिंह, सुरेश सुथार ,अंकुल लडोईया, गोविंद नायक, एडवोकेट आनंद शर्मा, रेवंतराम व्यास नंदकिशोर विश्वकर्मा, विक्रम खींची, एससी मोर्चा अध्यक्ष रवि डाबी, योगेश स्वामी सरफुद्दीन तेली ,कृष्ण छिंपा जगजीत सिंह बराड़ ,सरदार मोहन सिंह ,सुनील छाबड़ा, लेखराम मजोका , विजय शंकर रघुनाथपुरा ,चंदन अग्रवाल , युधिष्ठिर कुमार, ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश वर्मा, नंदकिशोर विश्वकर्मा ,राकेश कुमार, सीमा कंवर ,मनोज कुमार,श्रीमती चंद्रावती आदि सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित हुए ।

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सूरतगढ़। नगरपालिका चेयरमैन मास्टर ओमप्रकाश कालवा के बारे में खबर पॉलिटिक्स में हमने पहले भी बताया है कि वे राजनीति की पिच के माहिर खिलाड़ी हैं। सूरतगढ़ नगरपालिका बोर्ड की बैठक में एक बार फिर चेयरमैन कालवा नें यह साबित कर दिया। कांग्रेसी नेताओं के सलाहकार खुद को कितना भी धुरंधर मान रहे हो लेकिन उनके पास फिलहाल चेयरमैन कालवा का तोड़ नहीं है। कांग्रेस बोर्ड के बहुमत के चलते बैठक में कांग्रेस द्वारा तैयार किए गए एजेंडों का पास होना तय ही था। बैठक की शुरुआत में ही पार्षद बसंत बोहरा ने सभी 22 प्रस्तावों को बहुमत से पारित करने की घोषणा कर एक तरह से कांग्रेस की जीत फाइनल कर दी थी। लेकिन तभी चेयरमैन कालवा ने प्रस्तावों पर चर्चा करवाने की गुगली कांग्रेस टीम की और से कप्तानी कर रहे नेताओं की और उछाल दी। बस फिर क्या था कांग्रेसी टीम चेयरमैन कालवा के ट्रेप में फंस गई और गूगली को खेलने की फिराक में कांग्रेसी पार्षद हिट विकेट हो गए। चेयरमैन कालवा चाहते थे कि प्रस्ताव संख्या-19 बिना चर्चा के पास नहीं हो और आखिरकार वही हुआ जो चेयरमैन कालवा चाहते थे। 

प्रस्ताव संख्या -19 जो प्रिंटिंग स्टेशनरी सप्लाई एजेंसी के कार्यादेश की राशि 50% बढ़ाने से जुड़ा था पर जब चर्चा शुरू हुई तो चेयरमैन कालवा ने यह कहकर विरोध किया कि यह प्रस्ताव व्यक्तिगत ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए लाया गया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्षदों के प्रस्ताव का पक्ष लेने को मुद्दा बनाते हुए चेयरमैन कालवा ने कांग्रेसी पार्षदों को भ्रष्टाचार की पैरवी नहीं करने की अपील कर डाली। चेयरमैन कालवा का सहयोग देते हुए पार्षद राजीव चौहान, हरीश दाधीच और हंसराज स्वामी ने भी इस प्रस्ताव का जमकर विरोध किया। वही विधायक रामप्रताप कासनिया ने भी प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया। हालांकि प्रस्ताव के समर्थन में कांग्रेस के पार्षदों ने भी पूरी ताकत लगाई। लेकिन इसका उल्टा असर ये पड़ा कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा को यह कहने का मौका मिल गया कि कांग्रेस के लोग उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं लेकिन वे खुद भ्रष्टाचारियों की पैरवी कर रहे है। इस मामले में चेयरमैन कालवा ने करीब 10 मिनट तक लगातार बयानबाजी की। क्योंकि का चेयरमैन कालवा को मालूम था कि उनके पास बहुमत नहीं है सो उन्होंने आखरी दम तक प्रस्ताव का विरोध करने की मंशा को व्यक्त करते हुए प्रस्ताव पर वोटिंग कराने का मांग कर डाली। जिसके बाद प्रस्ताव पर वोटिंग हुई। हालांकि वोटिंग में प्रस्ताव 16 के मुकाबले 27 वोटों से पास हो गया। लेकिन पूरे मामले को भ्रष्टाचार से जोड़कर चेयरमैन कालवा ने कांग्रेसी पार्षदों को कठघरे में खड़ा कर दिया। चेयरमैन कालवा पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर हमलावर कांग्रेस इस स्थिति से बच सकती थी। अगर कांग्रेस के पार्षद सभी एजेंडों को बहुमत के पास होने की घोषणा पर अडिग रहते जिसे चेयरमैन कालवा स्वीकार भी कर चुके थे। कांग्रेस पार्षदों के पास एक विकल्प यह भी था कि प्रस्ताव पास कराने के बाद वार्ड वाइज प्रत्येक पार्षद अपनी समस्याएं सदन में व्यक्त करता। लेकिन सदन में कांग्रेस के अगवा नेताओं का प्रस्तावों पर चर्चा करवाने का निर्णय कांग्रेस पर भारी पड़ गया।

                        इस पूरे प्रकरण की एक और खास बात यह रही कि प्रस्तावों पर बहस के दौरान पार्षदों को लगातार बैठक छोड़ने के मैसेज आ रहे थे। कांग्रेस के वाइस चेयरमैन सलीम कुरेशी ने कांग्रेस नेताओं का मैसेज बार बार पार्षद नेताओं तक पहुंचाया और मीटिंग छोड़ने की बात कही। उधर कहा यह भी जा रहा है कि कांग्रेस के एक नेता सभागार से जुड़े स्टोर में खड़े होकर कांग्रेसी पार्षदों से मीटिंग छोड़ने के लगातार इशारे कर रहे थे। लेकिन पार्षद नेताओं ने उनके इशारों को भी अनदेखा कर दिया। कुल मिलाकर पार्षद नेताओं का प्रस्तावों पर चर्चा में शामिल होने का निर्णय कांग्रेस के लिए किरकिरी का सबब बन गया।

                   कहा जा सकता है कि शनिवार की बोर्ड बैठक में कांग्रेस पार्टी भले ही सभी 22 प्रस्तावों को पास करवाने में सफल हो गई। लेकिन चेयरमैन कालवा नें भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस पार्षदों को कटघरे में खड़ा कर एक बार फिर अपनी राजनीतिक कुशलता का परिचय दे दिया।

बैठक में फ्रेंडली मैच खेलते नजर आए कांग्रेसी पार्षद

शनिवार को हुई नगरपालिका बोर्ड की बैठक में चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा बहुमत नहीं होने के बावजूद मजबूत नजर आए। क्यूंकि शुक्रवार की बैठक में जो पार्षद विरोध दर्ज कर रहे थे वे शनिवार को खामोश थे। रात रात में ऐसा क्या हो गया कि इन पार्षदों का स्टैंड बदल गया। पूरी मीटिंग पर अगर गौर किया जाए तो साफ नजर आएगा कि कांग्रेस के चुनिंदा पार्षद ही बयानबाजी या विरोध दर्ज करवा रहे थे। वहीं विरोध कर रहे पार्षदों की गतिविधियों को भी नोट किया जाए तो कुछ पार्षद चेयरमैन कालवा के साथ फ्रेंडली मैच खेलते दिख रहे थे। हर एक मुद्दे पर मुखर रहने वाले पार्षद भी चेयरमैन कालवा के इशारों पर अपने स्टैंड को बदलते दिख रहे थे। जो इस बात पर मोहर लगाती है कांग्रेस के कई पार्षद अंदरूनी तौर पर चेयरमैन कालवा के साथ खड़े हैं।

               यही वजह है जिससे कांग्रेस पार्षदों द्वारा चेयरमैन कालवा के एजेंडों पर चर्चा के प्रस्ताव को स्वीकार करने के निर्णय पर सवाल खड़े होते हैं। क्योंकि जिस तरह का फ्रेंडली मैच चेयरमैन कालवा और कुछ कांग्रेसी पार्षदों के बीच खेला जा रहा था। उससे इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि संभवत प्रस्ताव संख्या-19 के बहाने कांग्रेस को घेरने का मौका देने के गेम प्लान के मुताबिक ही कांग्रेसी पार्षदों ने प्रस्ताव पर चर्चा करना स्वीकार किया हो। वरना बहस में शामिल होने से पहले तो कांग्रेस बाज़ी जीत ही चुकी थी। कुल मिलाकर कांग्रेस नेताओं को चेयरमैन कालवा से लड़ाई लड़ने से पहले जरूरी है कि वह ऐसे लोगों की पहचान कर ले।  

– राजेंद्र पटावरी,उपाध्यक्ष- प्रेस क्लब,सूरतगढ़।

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दिखावे से दूर शांत रहकर काम करने में विश्वास रखते है लेघा

महाराणा प्रताप विश्वविद्यालय,उदयपुर के लेघा रह चुके है छात्र संघ अध्यक्ष

सूरतगढ़। सूरतगढ़ विधानसभा से आगामी चुनावों में भाजपा की टिकट की दावेदारी जता रहे उम्मीदवारों की संख्या यूं तो बहुत ज्यादा है। परन्तु राजनीतिक धरातल पर ज्यादातर उम्मीदवारों के लिए टिकट दूर की कौड़ी है। भाजपा में टिकट के गंभीर उम्मीदवारों की बात करें तो उनकी संख्या उंगलियों पर गिनने लायक हैं।भाजपा में टिकट के चंद गंभीर और मज़बूत उम्मीदवारों में एक नाम है भाजपा के युवा नेता और पंचायत समिति सदस्य राहुल लेघा का। टिकट का सपना देख रहे ज्यादातर नेता जहाँ सोशल मीडिया पर महापुरुषों की जयंति और विभिन्न दिवसों की बधाइयां के पोस्टर शेयर कर खुद को विधायक मान बैठे हैं। वहीं राहुल लेघा गंभीरता से टिकट के प्रयास में जुटे हुए हैं।

राहुल लेघा के दावे को मजबूत मानने की एक वजह सार्वजनिक जीवन में उनकी धमाकेदार एंट्री भी है तो दूसरी वजह है उनकी परिवार की मजबूत राजनितिक पृष्ठभूमि। सार्वजनिक जीवन के अपने पहले ही चुनाव में युवा राहुल लेघा ने पंचायत समिति के पूर्व प्रधान और कांग्रेस के दिग्गज नेता कहे जाने वाले साहब राम पूनियां को पटखनी दे डाली। छात्र राजनीति के बाद सार्वजनिक जीवन में धमाकेदार एंट्री राहुल के चमकदार राजनीतिक भविष्य की और इशारा करती है। पूर्व प्रधान साहबराम पूनियां के खिलाफ जब राहुल लेघा ने उम्मीदवारी का ऐलान किया तब शायद ही किसी को यह उम्मीद रहेगी कि राजनीतिक का ककहरा सीख रहा यह नौजवान राजनीति के दिग्गज को कभी ना भूल पाने वाला सबक सिखा देगा। खैर राजनीति के बारे में कहा जाता है कि यह संभावनाओं की कला है। ऐसे में राहुल लेघा भी नई संभावनाओं के साथ राजनीति के मैदान में है। लेघा परिवार की राजनीतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करने को बेचैन ये युवा फिलहाल गंभीरता से मिशन-2023 में जुटा है।

70 की दहलीज पर खड़े नेताओं से निराश जनता को नए चेहरे का इंतज़ार

सूरतगढ़ विधानसभा की बात करें तो पिछले डेढ़ दशक से दो-तीन चेहरों के इर्द-गिर्द ही भाजपा की राजनीति ठहरी हुई है। लेकिन 70 की दहलीज पर पहुंच चुके यह नेता आम जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए। यहां तक की पार्टी का भी एक बड़ा तबका भी इन नेताओं की कार्यप्रणाली से खुश नहीं है। जीत के बावजूद भाजपा के ये नेता पार्टी कार्यकर्ता और जनता दोनो में से किसी को भी साध नहीं पाए। ऐसे में पुराने नेताओं की उम्मीदवारी का पार्टी और आम जनता में भी अंदरखाने विरोध है।

इसके अलावा कर्नाटका में जिस तरह से भाजपा को पुराने चेहरों पर दांव लगाना महंगा पड़ गया है, उससे लगता नहीं है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी कर्नाटका की गलती को दोहराएगी। ऐसे में यह करीब-करीब तय माना जा रहा है कि पार्टी किसी नए चेहरे को उम्मीदवार बनाएगी। अगर ऐसा होता है तो राहुल लेघा अपनी राजनीतिक विरासत और चुनाव लड़ने के लिए आवश्यक संसाधनों की दृष्टि से दूसरे सभी उम्मीदवारों पर भारी नज़र आते है।

राहुल लेघा के दादा चंदू राम लेघा पिछले 50 वर्षों से राजनीति के क्षेत्र में सक्रिय हैं। सन 1995 से 2000 के बीच वे पंचायत समिति के पूर्व प्रधान रह चुके हैं। वहीं राहुल के चाचा राजेंद्र प्रसाद लेघा वर्तमान में विजयनगर नगरपालिका के चेयरमैन है तो खुद राहुल लेघा पंचायत समिति के डायरेक्टर हैं। ऐसे में कहा जा सकता है राहुल लेघा की दावेदारी काफ़ी मजबूत है।

लेघा की दावेदारी को मजबूत करती जाट सीट की धारणा

भाजपा में टिकट बदलाव की सूरत में राहुल लेघा की मजबूत दावेदारी का एक पक्ष यह भी है कि वे भी जाट बिरादरी से संबंध रखते हैं और सूरतगढ़ सीट को राजनीतिक समीकरणों की दृष्टि से जाट सीट के रूप में दर्ज़ है। ऐसे में बुजुर्ग नेताओं को छोड़ दिया जाए तो अगली पंक्ति में राहुल लेघा की उम्मीदवारी दूसरे सभी जाट उम्मीदवारों पर भारी दिखती हैं। साथ ही परिवार की राजनीतिक विरासत और रिश्तेदारियां भी जाट उम्मीदवार के रूप में उनके दावे को मजबूत करती है।

राहुल लेघा का संक्षिप्त जीवन परिचय

राहुल लेघा के जीवन परिचय की बात करें तो 2 अक्टूबर 1995 को रघुनाथपुरा में जन्मे राहुल लेघा महाराणा प्रताप विश्वविद्यालय उदयपुर से इंजीनियरिंग स्नातक है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य के रूप में राजनीतिक करते हुए सन 2014-15 में विश्वविद्यालय के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की। 2018 से 20 के बीच वे भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रहे। पूर्व पंचायत समिति प्रधान चंदू राम लेघा के पौत्र और महावीर लेघा के पुत्र राहुल लेघा वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव में दिग्गज नेता साहब राम पूनिया को हराकर पंचायत समिति डायरेक्टर चुने गए। वर्तमान में वे पूरे जोर-शोर से आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे है।

अच्छे प्रशासन की उम्मीद जगाते है राहुल लेघा

नेताओं से ना उम्मीद हो चुकी सूरतगढ़ शहर की जनता को अब नये चेहरों से उम्मीद है। ऐसे में अपने सरल स्वभाव और इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री रखने वाले युवा राहुल लेघा एक बेहतर विकल्प की उम्मीद जगाते हैं। पिछले करीब 2 साल से शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में राजनीति के साथ-साथ सामाजिक व अन्य गतिविधियों में भी राहुल लेघा लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी राहुल के समर्थकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

पिछले दिनों अपने जन्मदिन के उपलक्ष में विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन कर राहुल अपनी राजनीतिक हैसियत का परिचय भी दे चुके हैं। विशाल रक्तदान शिविर में उमड़ी हजारों की संख्या में भीड़ को राहुल की शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया। कुल मिलाकर राहुल लेघा कम समय में युवा पीढ़ी के उन नेताओं में से एक बनकर उभरे हैं जो बेहतर राजनीतिक भविष्य की उम्मीद जगाते हैं।

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सूरतगढ़। यूं तो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल उन बड़े हॉस्पिटल्स को कहा जाता है जिनमे विभिन्न मेडिकल कंडीशन यानि की रोगों का विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा इलाज किया जाता है। लेकिन मल्टीस्पेशलिटी नाम देने से कोई हॉस्पिटल बेहतर हो ऐसा भी नहीं होता। सूरतगढ़ के एपेक्स मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की ही बात करें तो कहने को यह मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल है, लेकिन जब बात इलाज की आती है तो यह हॉस्पिटल चिकित्सकीय लापरवाही के लिए कुख्यात होता जा रहा है।

बुधवार को हॉस्पिटल में एक गर्भवती महिला के मिसकैरेज होने के मामले में परिजनों ने इस मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। किसान नेता राकेश बिश्नोई और कॉमरेड मदन औझा सहित कई नेताओं के साथ जब परिजनों ने चिकित्सालय प्रबंधन से जवाब तलब किया तो चिकित्सकों ने ना नुकर के बाद अपनी गलती को स्वीकार कर लिया। हालांकि यह पहली घटना नहीं है जब हॉस्पिटल के चिकित्सकों की लापरवाही सामने आई है। इससे पहले अनेक मौकों पर हॉस्पिटल के चिकित्सकों की लापरवाही मरीजों की जान पर भारी पड़ चुकी है। हॉस्पिटल प्रबंधन पर ज्यादा बिल वसूली के लिए मरीज की मौत के बावजूद वेंटिलेटर पर रखकर लाखों रुपए वसूलने के आरोप लग चुके हैं तो ऐसे भी मामले सामने आए हैं जब भामाशाह/चिरंजीवी योजना के तहत ज्यादा बिल बनाकर सरकार को चूना लगाने की कोशिश में भी हॉस्पिटल प्रबंधन ने मरीजों की जान से खेलने में गुरेज नहीं किया।

ऐसे ही एक मामले में तो हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने 55 वर्षीय महिला मरीज का चिकित्सक नहीं होने का बहाना बनाकर 3 दिन तक ऑपरेशन नहीं किया। देरी से ऑपरेशन होने के चलते जब महिला मरीज की तबीयत बिगड़ गई तो हॉस्पिटल प्रबंधन में हाथ खड़े कर दिए। जिसके चलते रेफर करने के दौरान महिला की मौत हो गई। ये मामले हॉस्पिटल प्रबंधन की पैसों की उस भूख की ओर इशारा करते हैं जहां आम आदमी की जान की कीमत धरती के भगवान माने जाने वाले डिग्री धारकों के लिए कुछ नहीं है।

बहरहाल ताजा मामले के बाद यह मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल और उसके विशेषज्ञ चिकित्सक एक बार फिर से विवादों में हैं। हर बार की तरह इस बार भी हॉस्पिटल प्रबंधन अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले को रफा-दफा करने में कामयाब हो जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि हॉस्पिटल प्रबंधन के लालच और लापरवाही से कब तक मरीजों की जान से खिलवाड़ होता रहेगा ?    

इलाज के लिए आते रहे परिजन, टालते रहे डॉक्टर

बुधवार को हॉस्पिटल के चिकित्सकों की लापरवाही के चलते प्रसूता महिला के मिसकैरेज के मामले में जो जानकारी निकल कर सामने आई है उसके अनुसार फुलेजी निवासी सुमन पत्नी राजेंद्र शर्मा का गर्भवती होने के बाद से पिछले 4-5 महीनो से एपेक्स मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। डिलीवरी का समय बीतने पर 22 मई को परिजन सुमन को लेकर हॉस्पिटल पहुंचे। परिजनों के अनुसार हॉस्पिटल की डॉ स्वर्णलता बंसल ने सुमन का चिकित्सकीय परीक्षा करने के बाद शुक्रवार यानी की 26 मई को आने को कहा। लेकिन घर पहुंचने पर रात्रि के समय सुमन की फिर तबीयत बिगड़ने लगी। जिसके बाद परिजन अगले दिन यानी 23 मई को सुबह सुमन को लेकर हॉस्पिटल पहुंचे। बकौल सुमन के परिजनो के हॉस्पिटल प्रबंधन नें चिकित्सक छुट्टी पर  होने का हवाला देते हुए सुमन को भर्ती नहीं किया।

इसके बाद परिजन सुमन को लेकर एक दूसरे निजी हॉस्पिटल पहुंचे। जहाँ पर डॉक्टरों ने जब सुमन का अल्ट्रासाउंड करवाया तो अल्ट्रासाउंड को देखकर निजी हॉस्पिटल के डॉक्टर नें सुमन के परिजनों को बताया कि सुमन का बच्चे में कोई हरकत नहीं हो रही यानि की बच्चा मर चूका है। डॉक्टर ने जब परिजनों को बताया कि बच्चे को मरे हुए 18 -20 घंटे हो गए हैं तो एपैक्स हॉस्पिटल के चिकित्सकों की लापरवाही सामने आ गई। बच्चे को खोने के बाद परिजनों का गुस्सा बढ़ गया और उन्होंने अपेक्स हॉस्पिटल में जाकर चिकित्सकों को उलाहना दिया। लेकिन चोरी और सीनाजोरी की तर्ज पर हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने उलटे परिजनों पर ही भर्ती होने नहीं होने का आरोप मढ़ दिया।

सोचने वाली बात यह है कि गर्भवती महिला और उसके परिजन जो पिछले कई महीनो से अपना इलाज चिकित्सकों से करवा रहे हो क्या वे एकाएक इलाज नहीं करवानें का कह सकतें है ! वह भी तब जबकि महिला और उसके बच्चे की जान पर बनी हो। मतलब साफ है कि हॉस्पिटल प्रबंधन बहाना बनाकर अपनी लापरवाही से बचना चाह रहा था।

लेकिन हॉस्पिटल का यह सफेद झूठ भी बुधवार को बाहर आ गया जब परिजन राकेश बिश्नोई, कॉमरेड मदन ओझा सहित जागरूक लोगों को लेकर प्रबंधन से मिले। मामले को बढ़ते देख हॉस्पिटल चिकित्सकों ने आखिर अपनी गलती स्वीकार कर ली। 

मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की साख पर खड़े हो रहे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद इस कथित मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि जब हॉस्पिटल के पास आपातकालीन सेवा के रूप में गायनी विशेषज्ञ और सर्जन की सुविधा उपलब्ध नहीं हो तो फिर काहे का मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल। इस मामले में भी गायनी विशेषज्ञ और सर्जन की सुविधा समय पर उपलब्ध होती तो सम्भवतः सुमन के पेट में पल रहे मासूम को बिना जन्म लिए दुनिया ए फ़ानी से रुखसत नहीं होना पड़ता।

-राजेन्द्र पटावरी, उपाध्यक्ष -प्रैस क्लब, सूरतगढ़।

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सीवरेज मामलें मे जाँच अब सीआईडी सीबी नही पुलिस करेगी :सूत्र

सूरतगढ़। प्रदेश की दूसरी नगरपालिकाओं के अध्यक्षों के निलंबन के बाद सूरतगढ़ नगरपालिका के चेयरमैन मास्टर ओमप्रकाश कालवा पर निलंबन की तलवार लटक रही है। स्वायत शासन विभाग ने चेयरमैन कलवा के खिलाफ लंबित मामलों को लेकर अब जांच का शिकंजा कस दिया है। ऐसे में यह लगने लगा है कि चेयरमैन कालवा के खिलाफ जल्द ही विभाग कोई बड़ा फैसला ले सकता है। हालांकि सीवरेज घोटाले की कार्यवाही को चेयरमैन कालवा न्यायालय में ले जाकर कुछ दिनों के लिए लटकाने में सफल हो गए हैं। इस मामले में न्यायालय ने विभाग को कोई भी कार्रवाई करने से पूर्व अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। लेकिन पूर्व नगरपालिका चेयरमैन बनवारी लाल मेघवाल की गत दिनों की गई शिकायत पर जिला प्रभारी सचिव भवानी सिंह देता ने जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रभारी सचिव ने स्वायत शासन विभाग के शासन सचिव को पत्र लिखकर पूर्व चेयरमैन द्वारा की गई शिकायतों की जांच कर कार्रवाई के लिए लिखा है।

             उच्च तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव व जिला प्रभारी सचिव भवानी सिंह देथा के आदेश को देखते हुए यह लग रहा है कि अगले कुछ दिन नगरपालिका चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा के लिए भारी रहने वाले हैं। क्योंकि पूर्व चेयरमैन द्वारा जिन मामलों की शिकायत की गई है उनमें से एलईडी लाइट के मामले में जिला कलेक्टर ने जांच करवाकर चेयरमैन कालवा को दोषी मानते हुए पहले ही कार्रवाई की अनुशंसा कर दी है।

चेयरमैन ओम कालवा की हो सकती है गिरफ्तारी ?

वही सीवरेज घोटाले की प्रशासनिक जांचों का मामला भले ही उच्च न्यायालय में लंबित चल रहा है। लेकिन इस मामले में  चल रही पुलिस जांच में भी चेयरमैन कालवा के लिए बुरी खबर है। सूत्रों के मुताबिक सीवरेज मामले में दर्ज एफआईआर की जाँच चेयरमैन कालवा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सीआईडी सीबी से करवाने के आदेश करवा लिए थे। लेकिन अब एडीजी ने उक्त मामले की जांच सीआईडी सीबी से वापस लेकर बीकानेर आईजी को भेज दी है। ऐसे में माना जा रहा है कि चेयरमैन ओम कालवा पुलिस जांच मे एक बार फिर घिर सकते हैं। अगर पुलिस दूसरी जांच एजेंसियों की तरह चेयरमैन कालवा को सीवरेज मामले में दोषी मानती है तो उनकी गिरफ्तारी लगभग तय है।  

पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल ने इन मामलों में की थी शिकायत

गत दिनों जब जिला प्रभारी सचिव भवानी सिंह देथा सूरतगढ़ पहुंचे थे तब पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल के नेतृत्व में पार्षदों ने चेयरमैन ओम कालवा के खिलाफ शिकायत कर निलंबन की मांग की थी। इस शिकायत में पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल ने सीवरेज निर्माण मे रोक के बावजूद  बिना सेप्टिक टैंक तोड़े 160 करोड रुपए के भुगतान, एलइडी लाइट खरीद के मामले में करीब 18 लाख रुपए के घोटाले, पालिका क्षेत्र में फोल्डिंग टेंडर में गड़बड़ी कर नगरपालिका को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचाने और चहेती कंपनी से सांठगांठ कर नगरीय विकास कर के सर्वे के टेंडर में फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया था।

इसके अलावा पूर्व चेयरमैन ओम कालवा पर प्रशासन शहरों के संग अभियान में पट्टे जारी नहीं करने, एंपावर्ड कमेटी की बैठक नहीं बुलाने  और पालिका के ठेकेदारों को भुगतान के चेकों पर साइन नहीं कर शहर का विकास अवरुद्ध करने का आरोप लगाया था।

भाजपा की भी बढ़ेगी मुश्किलें

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा पर अगर स्वायत शासन विभाग द्वारा निलंबन या कोई अन्य कार्रवाई की जाती है तो निश्चित तौर पर भाजपा की मुश्किलें भी बढ़ेगी। क्यूंकि विधायक रामप्रताप कासनिया की भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद चेयरमैन कालवा को पार्टी में शामिल करने में सहमति रही है ऐसे मे भाजपा नेताओं खासकर विधायक रामप्रताप कासनिया के लिए फेस सेविंग करना मुश्किल होगा। वैसे भी चेयरमैन कालवा को पार्टी में शामिल करने का अंदर खाने विरोध हो रहा था ।

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पीएसी चेयरमैन के साथ कमेटी के चार सदस्यों ने स्टेशन का किया निरीक्षण

सूरतगढ़। भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और रेलवे बोर्ड की पैसेंजर एमेनिटीज कमेटी (PAC) के चेयरमैन पी.के. कृष्णदास के सूरतगढ़ पहुंचने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। पूर्व विधायक अशोक नागपाल और मंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओ ने पीएससी चेयरमैन पीके कृष्णदास व उनके साथ पहुंचे पीएसी के 4 सदस्यों का रेलवे स्टेशन पर फूल मालाएँ पहनाकर अभिनंदन किया।

इसके बाद चेयरमैन पी के कृष्णा दास सहित कमेटी सदस्यों ने रेलवे स्टेशन का अमृत भारत योजना के तहत आधुनिकीकरण संबंधी कार्यों का निरीक्षण किया। कमेटी ने रेलवे स्टेशन के महिला व पुरुष प्रतिक्षालयों, टिकट विंडो, जीआरपी चौकी और फुटओवर ब्रिज का निरीक्षण किया। इस दौरान रेलवे के बीकानेर मंडल के एडीआरएम व सीनियर डीसीएम सहित आला अधिकारी मौजूद रहे।

कासनिया के नेतृत्व में पीएसी चेयरमैन को सौंपा ज्ञापन

सुबह करीब 9:30 बजे विधायक रामप्रताप कासनिया के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने पीएसी चेयरमैन से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। भाजपा नेताओं ने ज्ञापन में सूरतगढ़ से वाया पल्लू रावतसर सरदारशहर , रतनगढ़ होते हुए नई रेल लाइन बिछाकर जयपुर से जोड़ने की मांग की गई । एक अन्य ज्ञापन में रेलवे के पूर्वी द्वार पर सुविधाएं विकसित करने,रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म का विकास कर लंबाई बढ़ाने, स्वयंचालित सीढ़ियां (लिफ्ट) लगाने,हनुमानगढ़-अनूपगढ़ रेलवे मार्ग पर ओवरब्रिज बनाया जाए और रेलवे प्लेटफार्म पर पानी और शौचालय की सुविधा शुरू करने की मांग रखी।

भाजपा के यह नेता रहे मौजूद

इस दौरान विधायक रामप्रताप कासनियां के अलावा, नगर मंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा ,पूर्व विधायक अशोक नागपाल, राजेंद्र भादू , जिला उपाध्यक्ष आरती शर्मा, महामंत्री लालचंद शर्मा, सुभाष जी गुप्ता,पार्षद जगदीश मेघवाल, किसान मोर्चा जिला उपाध्यक्ष पवन ओझा, ओबीसी मोर्चा जिला महामंत्री सुरेश सुथार, विनय सिंह चंदेल, युवा मोर्चा जिला महामंत्री विनोद सारस्वत, नगर मंडल युवा मोर्चा अध्यक्ष मंयक वशिष्ठ, अशोक आसेरी, युवा मोर्चा महामंत्री युधिष्ठिर कुमार, इंजिनियर रमेश चन्द्र माथुर, आनन्द शर्मा, किशन स्वामी, योगेश स्वामी, ओमप्रकाश जाखड़, आदि मौजूद रहे।

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दो खेमों में बंटता दिख रहा जिला बनाओ अभियान

सूरतगढ़। सूरतगढ़ को जिला बनाने को लेकर उपखंड कार्यालय पर हुई सभा में पूजा छाबड़ा द्वारा अन्न त्यागने की घोषणा के बाद राजनीति गर्मा गई है। सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को जनसभा में समिति द्वारा पूजा छाबड़ा को अनशनकारी के रूप में ही आमंत्रित किया गया था। समिति द्वारा निर्धारित वक्ताओं की सूची में भी पूजा छाबड़ा का नाम शामिल नहीं था। लेकिन ऐन वक्त पर कांग्रेस के एक व्यापारी  नेता नें समिति सदस्यों को पूजा छाबड़ा को बोलने देने के लिए कहा। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के इस नेता ने पूजा छाबड़ा को नहीं बोलने देने पर कमेटी से इस्तीफा देने की धमकी दे डाली।

नतीजा यह रहा कि सभा खत्म होने से कुछ समय पहले समिति सदस्यों ने पूजा छाबड़ा को बोलने का अवसर दे दिया। जिसके बाद छाबड़ा ने अन्न त्याग करने का कार्ड खेलकर समिति से जुड़े धुरंधर नेताओं को स्तब्ध कर दिया। समिति से जुड़े नेताओं को यह उम्मीद नहीं थी कि छाबड़ा इस तरह की घोषणा कर उनके करे कराए पर पानी फेर देगी। सूत्रों के मुताबिक समिति के कुछ नेताओं नें छाबड़ा के इस कदम को लेकर खासी नाराजगी दर्ज़ कराई है।

सूत्रों के मुताबिक समिति से जुड़े नेताओं द्वारा आपत्ति जताने के बाद समिति के अध्यक्ष और कुछ सदस्यों ने पूजा छाबड़ा से मिलकर उनसे अपनी घोषणा वापस लेने की मांग रखी थी। हालांकि  छाबड़ा नें अन्न त्यागने के निर्णय को स्वयं से जुड़ा हुआ बताते हुए समिति को साफ इंकार कर दिया। 

                 वैसे आपको बता दें समिति से जुड़े नेता पहले भी पूजा छाबड़ा पर आमरण अनशन की घोषणा सहित विभिन्न निर्णय बिना समिति की राय से करने का इल्जाम लगाते रहे हैं। गत दिनों हुई सेन मंदिर में हुई बैठक में भी समिति से जुड़े कई नेताओं ने पूजा छाबड़ा और उनके एक समर्थक को आंदोलन से अलग करने के बात रखी थी। हालांकि उस समय इस बात पर समिति के कुछ सदस्यों द्वारा यह कहकर विरोध जताया गया कि ऐसा करने से गलत मैसेज जाने के साथ ही आंदोलन खेमों में बट जाएगा। जिस पर सदस्यों की राय को देखते हुए एकबारगी छाबड़ा और उनके समर्थकों को समिति से हटाने का निर्णय पेंडिंग रख दिया गया।

                लेकिन कुछ दिनों बाद ही छाबड़ा के समर्थक बताए जाने वाले और जिला बनाओ आंदोलन के लम्बे समय से सचिव आकाशदीप बंसल ने आख़िरकार इस्तीफा दे दिया। बंसल ने सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट में समिति सदस्यों पर अनदेखी करने और राजनीति करने का आरोप लगाया।

              बहरहाल पूजा छाबड़ा की समिति के मंच से अन्न त्याग की घोषणा नेताओं को रास नहीं आ रही है। जिसके चलते आंदोलन दो खेमों में बटता दिख रहा है। वहीं छाबड़ा के फेवर करने वाले कांग्रेसी नेता से कांग्रेस के बड़े नेता खुश नही हैं। क्यूंकि खुद कांग्रेस के बड़े नेता समिति की बैठकों में छाबड़ा के बिना समिति से चर्चा किए निर्णय लेने के प्रति नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस के व्यापारी नेता का छाबड़ा को तवज्जो देना कांग्रेस के बड़े नेताओं को अखरना लाजमी ही है। फिलहाल देखने वाली बात यह है कि जिला बनाओ समिति में चल रही राजनीति इस आंदोलन को कौन सी दिशा देती है ?

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सूरतगढ़। सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग को लेकर मंगलवार को उपखंड कार्यालय पर आमसभा का आयोजन किया गया। आम सभा में तमाम दिग्गज नेताओं की कोशिशों के बावजूद भीड़ मुश्किल से 4 अंकों तक पहुंच पाई। सबसे बड़ी बात यह रही कि आम सभा में शहरी क्षेत्र के लोगों की भागीदारी बहुत कम रही। आंदोलन की शुरुआत में बड़ी संख्या में शहर के लोग भावनात्मक रूप से इस आंदोलन से जुड़े थे। लेकिन समय बीतने के साथ शहर के ऐसे लोगों की संख्या बढ़ने के बजाय लगातार घटती गई। सवाल यह पैदा होता है कि जिला बनने से सबसे ज्यादा लाभ इसी शहर और इसके लोगों को होना है फिर क्यों शहर का आम आदमी इस संघर्ष से लगातार दूर होता जा रहा है ? क्यों लगातार क्रमिक अनशन से लेकर आमसभा से आम आदमी दूरी बना रहा है ? हालात यह है कि संघर्ष समिति को क्रमिक अनशन जारी रखने के लिए लोगों से गुहार लगानी पड़ रही है ? जबकि आंदोलन की शुरुआत में एक दौर ऐसा भी था जब आमरण अनशन के लिए खुद-ब-खुद लोग अपना नाम लिखा रहे थे ? वहीं एक दौर यह भी है जब पैंफलेट वितरण से लेकर नुक्कड़ सभाओं और जनसंपर्क के बावजूद लोग आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों में नहीं पहुंच रहे हैं।

         यह ठीक है कि आपाधापी के जीवन में किसी के पास भी वक्त नहीं है। लेकिन यह भी सच है कि आंदोलन की शुरुआत से लेकर अब तक के सफर में आंदोलन से जुड़े नेता अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं जिसकी वजह से शहर के आम आदमी का आंदोलनो से मोहभंग हो रहा है।समिति द्वारा जिस तरह से टाइमपास के रूप में इस आंदोलन को चलाया जा रहा है उसे शहर की जनता देख रही हैं। अनशन स्थल पर माइक बंद होने के बाद से जिला नहीं बनने की टीस लोगों के गले में फंस कर रह गई हैं। मंच की चुप्पी ने अब लोगों को आकर्षित करना बंद कर दिया है। इसके अलावा जिला बनाओ आंदोलन के लिए दिल से जुड़े लोगों की भी अभियान समिति में अपेक्षा की जा रही है जिसकी वजह से भी आम आदमी आंदोलन से दूर होता जा रहा है।

                      बहरहाल समिति को आम आदमी की भागीदारी से जुड़े इन सवालों का जवाब ढूंढने की जरूरत है। क्योंकि यह आंदोलन केवल ग्रामीण जनता के भरोसे नहीं चलाया जा सकता। इस आंदोलन की सफलता के लिए शहर की आहुति की जरूरत है।

क्या राजनीति के चलते नहीं जुटी पर्याप्त भीड़ ! 

उपखंड कार्यालय पर आयोजित आम सभा की तैयारियों को लेकर कार्यसमिति की बैठक में शामिल तमाम नेताओं ने भीड़ लाने के अपने-अपने दावे किए थे। उन दावों के मुताबिक उपखंड कार्यालय पर कम से कम ढाई से तीन हजार लोगों की भीड़ होनी चाहिए थी। लेकिन टेंट में बैठे और आसपास खड़े हुए लोगों का आंकड़ा इन नेताओं के दावों की हंसी उड़ा रहा था। कार्यसमिति के 1-2 नेताओं को छोड़ दे तो कोई भी अपने वादों पर खरा नहीं उतरा। इस पूरे घटनाक्रम के अनुसार में हम यह कह सकते हैं कि या तो हमने जिन लोगों को अपना नेता माना है वो केवल हवा हवाई नेता है जो किसी जुगाड़ से पार्टी की टिकट लाकर आप पर राज करना चाहते हैं या फिर जिला बनाने के आंदोलन के प्रति इन नेताओं की नियत साफ नहीं है और इसीलिये उन्होंने आमसभा में भीड़ लाने की कोशिश ही नहीं की। 

                   हालांकि शहर में यह चर्चा लगातार बनी हुई है कि जिला बनाओ अभियान समिति राजनीति का शिकार हो गई है। समिति से जुड़े नेताओं में इस बात की होड़ लगी हुई है कि कोई दूसरा नेता आंदोलन का श्रेय ना ले ले इसलिए समिति के कार्यक्रमों में भीड़ नहीं हो रही है। हालांकि राजनीति का एक हिस्सा मानकर इस बात को स्वीकार भी कर ले तो भी यह पूरा सच नहीं है। वास्तव में जिला बनाओ अभियान समिति की दिक्कत शायद इससे बड़ी है। क्यूंकि संघर्ष समिति के जो अगवा नेता दूसरों को आंदोलन का श्रेय नहीं लेने की चिंता में घुले जा रहे हैं वे खुद भी आगे बढ़कर आंदोलन की कमान संभालना ही नहीं चाहते हैं। इसकी वजह यह है कि यह आंदोलन इन नेताओं को एक मरे हुए सांप के मानिंद लगने लगा है जिसे कोई भी अपने गले में डालना नही चाहता ! एक वजह यह भी है कि चुनाव के कुछ ही महीने बाकी है ऐसे में ये नेता एक तो अपना कीमती समय इस आंदोलन में बर्बाद नहीं करना चाहते। दूसरे जिला नहीं बनने के मुद्दे को ये नेता कांग्रेस नेताओं के खिलाफ भुनाना चाहते हैं। इसीलिये अधिकांश नेता रस्म अदायगी के लिए इस आंदोलन से जुड़े हुए हैं। अगर सभी नेता ईमानदारी से प्रयास करते हैं तो उपखंड कार्यालय पर आम सभा में हुई भीड़ का आंकड़ा निश्चय ही कुछ अलग होता।

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सूरतगढ़। शहर के व्यस्ततम महाराणा प्रताप चौक पर आज एक ग्रामीण महिला से छीना झपटी कर एक अज्ञात महिला सोने की बाली और लॉकेट लेकर फरार हो गई। घटना दोपहर लगभग 11 बजे उस समय हुई जब भोजेवाला गांव की महिला कृष्णा देवी पत्नी हरिराम रणवा बैंक से रुपए निकालकर जा रही थी। इसी दौरान गोद में बच्चा लिए हुए एक महिला उसके पास आई और छीना झपटी करने लगी। कृष्णा देवी के मुताबिक पैसे छीनने के डर से उन्होंने जब गर्दन को झुकाया तो महिला कान से सोने की बाली और गले में पहना हुआ सोने का ओम निकाल कर भाग गई । पीड़ित कृष्णा देवी के मुताबिक अज्ञात महिला के साथ दो लड़के भी थे।

घटना की सूचना मिलने पर सिटी थाना के हेड कांस्टेबल राम कुमार चौधरी मौके पर पहुंचे और पुलिस जाब्ता के साथ रेलवे स्टेशन पर खड़ी गाड़ियों में सवारियों की जांच की। इसके अलावा पुलिस ने बस स्टैंड सहित आसपास की झुगियों में तलाशी अभियान चलाया। लेकिन महिला का सुराग नहीं मिल सका। फिलहाल पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाल रही है।

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पार्षद पति-ईओ विवाद को लेकर एडीएम जाखड़ ने की समझाइश

सूरतगढ़। पार्षद पति रिंकू सिद्दीकी द्वारा नगरपालिका ईओ शैलेंद्र गोदारा के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर शहर की राजनीति गरमाई हुई है। शनिवार को विधायक रामप्रताप कासनिया के नेतृत्व में भाजपा नेताओं के प्रतिनिधिमंडल में एडीएम अरविन्द जाखड़ से मुलाकात कर 11 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा। विधायक सहित तमाम नेताओं ने शहर की सफाई, लाइट व्यवस्था, निर्माण कार्यों के टेंडर जारी करने व पट्टे बनाने और अतिक्रमण हटाने के संबंध में पालिका अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए।

इस दौरानपूर्व विधायक अशोक नागपाल, राजेंद्र भादू, नगरपालिका चेयरमैन मास्टर ओमप्रकाश कालवा, नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष शरणपाल सिंह मान, आरती शर्मा, पूर्व नगरपालिका चेयरमैन काजल छाबड़ा, जिला महामंत्री लालचंद शर्मा, पार्षद हरीश दाधीच, राजीव चौहान, कृष्ण छिम्पा सहित बड़ी संख्या में भाजपा नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

पार्षद पति और ईओ विवाद को लेकर हुई वार्ता

भाजपा नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान पार्षद पति रिंकू सिद्दीकी के मामले से एडीएम को अवगत कराते हुए ईओ को मौके पर बुलाने की मांग रखी। जिसके बाद ईओ शलेंद्र गोदारा के पहुंचने पर एडीएम कक्ष में दोनों पक्षों के बीच वार्ता हुई।

वार्ता में एडीएम जाखड़ ने पार्षद पति रिंकू सिद्दीकी और अधिशासी अधिकारी शैलेंद्र गोदारा से घटना क्रम की जानकारी ली। मामले में अधिशासी अधिकारी शैलेंद्र गोदारा ने राजनीति के आरोपों को नकारते हुए कहा कि उन्होंने इस संबंध में कोई शिकायत नहीं की है और पालिका कर्मचारियों द्वारा घटना के विरोध में ज्ञापन की कार्रवाई अपने स्तर पर की गई है। बाद में एडीएम जाखड़ ने दोनों पक्षों को आपसी सामंजस्य के साथ कार्य करने की नसीहत देते हुए मामले को तूल नहीं देने की बात कही।

विधायक कासनिया ने कांग्रेस नेताओं पर जड़े गंभीर आरोप

एडीएम कार्यालय में हुई वार्ता के दौरान विधायक रामप्रताप कासनिया और चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा ने एक बार फिर कांग्रेस नेताओं पर कई  गंभीर आरोप जड़े। वार्ड नंबर 3 और 26 और 45 में विधायक कासनिया ने पट्टे नहीं बनाने के आरोप लगाए। ईओ गोदारा द्वारा राजस्व विभाग द्वारा निजी खातेदार की तरमीम होने का तर्क दिया तो विधायक कासनिया ने खसरा नंबर 320 में खसरा नंबर 315/2 की फर्जी खातेदारी फिट करने का आरोप लगाया। उन्होंने पूर्व विधायक के पुत्र के नाम पर जमीन को अन्य व्यक्ति के नाम रजिस्ट्री कराने का भी आरोप जड़ दिया। विधायक कासनिया ने फर्जी खातेदारी निरस्त कर लोगों को पट्टा देने की मांग की

वार्ता के दौरान विधायक कासनिया में नगरपालिका के ARI कालूराम सैन को भी अतिक्रमण को लेकर भेदभाव बरतने का आरोप जड़ा, साथ ही उन्होंने कालूराम सैन पर कार्यवाहक ईओ के रूप में काम करते हुए सत्ता पक्ष के नेताओं के फर्जी नामांतरण दर्ज करने का भी आरोप लगाया।

                   वहीं विधायक कासनिया ने कांग्रेस के एक नेता पर पालिका अधिकारियों की बैठक लेने का भी आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया कि किस अधिकार से बाहर का व्यक्ति पालिकाकर्मियों की बैठक ले रहा है ?

          इस दौरान ईओ शैलेंद्र गोदारा ने चेयरमैन ओमकालवा पर नंदीशाला में तूड़ी के टेंडर और भुगतान लटकाने, शहर के 45 वार्डों के विकास कार्यों के टेंडर लटकाने का आरोप लगाया। जिसके बाद ईओ और चेयरमैन कालवा ने एक दूसरे पर आरोप लगाए। इस पर कार्यालय से संबंधित सवालों का ईओ शैलेंद्र गोदारा ने जवाब देने से इंकार कर दिया।

                वार्ता के दौरान पूर्व विधायक राजेंद्र भादू, अशोक नागपाल, पूर्व नगरपालिका चेयरमैन आरती  शर्मा, काजल छाबड़ा, नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष शरण पाल सिंह मान सहित सभी नेताओं ने बिना भेदभाव के शहर का विकास करने की मांग की।

11 सूत्री मांगों को लेकर दिया 5 दिन का अल्टीमेटम

भारतीय जनता पार्टी की ओर से एडीएम अरविंद जाखड़ को दिए गए ज्ञापन में अतिक्रमण को लेकर भेदभाव पूर्ण नीति अपनाने, शहर की सफाई और लाइट व्यवस्था खराब होने, वार्डों में भेदभाव पूर्ण विकास कार्य होने, वार्ड नंबर 3,26 और 45 में पट्टे नहीं बनाए जाने और पूरे शहर में पात्र व्यक्तियों को पट्टे नहीं देने, वार्डों में टूटी हुई सड़कों व नालियों का निर्माण नहीं करवाने, चहेते ठेकेदारों से कोटेशन पर काम करवाने, पार्षदों को डराने और झूठे मुकदमे करवाने का दबाव बनाने, पालिका अध्यक्ष को ईओ कार्यालय द्वारा सहयोग नहीं करने, सफाई कर्मचारियों से नियम विरुद्ध विभिन्न शाखाओं में काम करवाने और भूखंडों के नामांतरण, पानी बिजली व निर्माण के साथ कृषि भूमि की एनओसी देने में नियम विरुद्ध कार्य करने का आरोप लगाया। 5 दिन में कार्रवाई नहीं होने पर भाजपा की ओर से आंदोलन करने की चेतावनी दी गई है।

खबर पॉलिटिक्स रिमार्क

कुल मिलाकर शहर में नगरपालिका को लेकर कांग्रेस और भाजपा नेताओं की आपसी खींचतान से शहर और शहर की आम जनता का भारी नुकसान हो रहा है। पिछले कुछ सालों से नगरपालिका में चल रही राजनीति के चलते आम आदमी के साथ-साथ पालिका के कर्मचारी भी चक्की के दो पाटों के बीच पिस रहे हैं और पालिका के ईमानदार कर्मचारी चाहते हुए भी शहर के विकास में योगदान नहीं दे पा रहे हैं। इसलिये शहर के विकास के लिए दोनों पार्टियों के नेताओं को अब बड़े मन से काम करना चाहिए जिससे कि आने वाले समय में शहर की सूरत बदल सके। दोनो पक्षों के नेता ये ध्यान रखे कि शहर की दुर्गति के बीच लिखे जा रहे इतिहास में कहीं आपको भी खलनायक के रूप में याद न किया जाए।   

– राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब,सूरतगढ़।

 

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सूरतगढ़। सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को लेकर अब यह साफ हो चुका है कि जिला बनाओ अभियान समिति के हाकिम बने शहर के नेता नहीं चाहते हैं कि सूरतगढ़ जिला बनें। यही वजह है कि जिला बनाओ अभियान समिति द्वारा सोमवार को बुलाई गई विशाल जनसभा एक बार फिर नुक्कड़ सभा बन कर रह गई। करीब दो दर्जन नेताओं से लैस 50 लोगों वाली स्टीयरिंग कमेटी के तमाम लोग मिलकर भी कोई चमत्कार नहीं कर पाए और भीड़ का आंकड़ा कुछ सौ लोगों में सिमट कर रह गया।

भीड़ जुटाने के लिये नुक्कड़ सभाएं और पीले चावल बाँटने सहित सभी प्रयास आंदोलन में दिल से जुड़े हरेक व्यक्ति द्वारा किये गए। लेकिन नेताओं के असहयोग के चलते एक बार फिर तमाम कोशिशों पर पानी फिर गया।आंदोलन और स्टीयरिंग कमेटी से जुड़ा एक भी बड़ा नेता भीड़ जुटाने या फिर लाने का प्रयास करता नहीं दिखा। भीड़ नहीं होने से आंदोलन से जुड़े लोग काफ़ी निराश दिखे।

इसी वजह से कुछ लोगों नें कमेटी और नेताओं को भीड़ नहीं आने और मनमानी के लिये घेरा। जिसका नतीजा ये हुआ कि महज 2 घंटे में ही सभा को विसर्जित कर दिया है। सभा खत्म होने से बहुत से लोगों को बोलने का मौका नहीं मिला इसके लिये भी समिति की आलोचना हो रही है।

300 आदमी लाएंगे पर तारीख नहीं बताएंगे

सोमवार को हुई जनसभा में 300 लोगों को बुलानें का दावा करने वाले नेताजी एक बार फिर खाली हाथ पहुंच गए। मीडिया के सवालों से परेशान नेताजी को शायद थोड़ी शर्म आ गई इसीलिये अबकी बार नेताजी नें 300 आदमी लाने की बात तो दोहराई पर साधन उपलब्ध कराने की बात नहीं बोले। वैसे नेताजी नें अपनी असली पीड़ा भी बातों बातों में जाहिर कर ही दी। नेताजी के कहने का लब्बो लुवाब ये था कि आदमी वे लाये और भाषणबाजी कर महफ़िल कोई और लूट ले उन्हें मंजूर नहीं है। इसका मतलब ये है कि नेताजी की बला से सूरतगढ़ जिला बने या ना बने उनकी बला से उन्हें राजनीति फायदा नहीं होता है तो वे एक भी आदमी लाने वाले नहीं है। लेकिन नेताजी ये भूल भी जाते हैं कि वे भी लोगों की जुटाई गई भीड़ में भाषण झाड़ने ही आए हैं।

वैसे नेताजी नें अब भी ये नहीं बताया कि कब वो 300 लोगों को बुलाएंगे। हां खुद को मासूम साबित करने की कोशिश करते हुए कमेटी से ही पुछा है कि वही बताये कब आदमी लाना है ? कुल मिलाकर मीडिया के आइने में अपने चेहरे को देखकर नेताजी को अपना भविष्य नजर आने लगा है। इसी वजह से नेताजी का सेल्फ कंट्रोल खत्म होने लगा है। 1 दिन पहले व्यापारियों के कार्यक्रम में भी नेताजी की आपा खोने की चर्चाएं चल रही है। खैर हमारे लिए अच्छी बात है कि भाजपा 70 प्लस आयु के नेताओं को टिकट नहीं देने की पॉलिसी पर काम कर रही है।  

राहुल लेघा के अलावा एक भी नेता नहीं पहुंचा भीड़ के साथ

सोमवार को हुई जनसभा को लेकर स्टीयरिंग कमेटी से जुड़े 2 दर्जन से अधिक नेता लगातार सभा में बड़ी संख्या में भीड़ जुटने के दावे कर रहे थे। लेकिन हकीकत यह है कि धरातल पर कोई भी नेता भीड़ जुटाने के लिए कोशिश नहीं कर रहा था। स्टीयरिंग कमिटी के अधिकांश नेता इस आंदोलन के विसर्जन का इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि उनको लगने लगा है कि आंदोलन की महफिल कोई और लूट चुका है। उनके लिए अब इस आंदोलन में कुछ नहीं बचा है।

ऐसे में तमाशबीन नेताओं के बीच युवा राहुल लेघा अच्छी खासी संख्या में युवाओं, समर्थकों और ग्रामीणों को लेकर सभा में पहुंचे। दोपहर करीब 11:45 बजे जब सभा शुरू होने को थी उसी समय राहुल लेघा और उनके समर्थक जिला बनाने की मांग को लेकर नारेबाजी करते हुए सभा स्थल पर पहुंचे। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से सभा स्थल पर मौजूद लोगों और नेताओं का भी जोश बढ़ा। युवा राहुल लेघा से आंदोलन से जुड़े नेताओं को सीख लेने की जरूरत है कि आंदोलन का नेतृत्व भले ही कोई करें लेकिन हमें अपने हिस्से की आहुति इस आंदोलन में डालनी है। देखना होगा कि आने वाले दिनों में आंदोलन से जुड़े नेता अपना रवईया बदलते हैं या फिर वही पुराना ढर्रा जारी रहेगा।

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सूरतगढ़। लोकतंत्र में किसी आंदोलन की सफलता के लिए सबसे जरूरी है उसके अगवा नेताओं की ईमानदारी। जिला बनाने के आंदोलन की बात करें तो दुख के साथ कहना पड़ेगा कि आंदोलन की अगुवाई कर रहा एक भी नेता इस आंदोलन के प्रति ईमानदार नहीं है। खुद को किसान, मजदूर,व्यापारी और जनता का अग़वा बताने वाला कोई भी नेता आगे बढ़कर इस आंदोलन का नेतृत्व नहीं करना चाहता है। भाजपा चूँकि इस समय मुख्य विपक्ष की भूमिका में है तो इस आंदोलन को सड़क पर लड़ने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भाजपा नेताओं की है। परन्तु कड़वा सच ये है दूसरी पार्टियों के साथ भाजपा के भी ज्यादातर नेता ये मान रहे हैं कि अब सूरतगढ़ जिला नहीं बन सकता। लेकिन जिले का मुद्दा चूँकि सीधे जनता की भावनाओं से जुड़ा हुआ है इसलिये अधिकांश नेता बस दिखावे के लिये आंदोलन के साथ खड़े है।

यही वजह है कि आंदोलन में भीड़ नहीं आने का सवाल आज भी जस का तस खड़ा है। आंदोलन से जुड़ा कोई भी नेता इस सवाल का जवाब ढूंढना नहीं चाहता है। स्टीयरिंग कमेटी की प्रत्येक बैठक में भाजपा के एक बड़े नेता बार-बार 300 आदमी रोज लाने की बात दोहराते हैं लेकिन वो 300 आदमी कब आएंगे मालूम नहीं ! नेताजी कहते है आदमियों को बुलाने के लिए साधन चाहिए। लेकिन नेताजी को ये साधन कौन उपलब्ध कराएगा इसका फैसला भी अब तक हो नहीं पाया है ! इसी तरह एक और नेता 200 आदमियों को रोज बुलाने का खम ठोकतें हैं। लेकिन नेताजी के इन 200 लोगों के आने का इंतज़ार भी अभी खत्म नहीं हुआ है। इन दो नेताओं के अलावा भी स्टीयरिंग कमेटी में भाजपा सहित कुछ और पार्टियों से चुनाव लड़ने की दावेदारी ठोक रहे डेढ़ दर्जन नेता शामिल है। परन्तु अफ़सोस है कि कमेटी की बैठकों में अगली पंक्तियों के इन नेताओं को भीड़ लाने के सवाल पर सांप सूंघ जाता है। अब सवाल यह पैदा होता है कि 68 हज़ार लोगों के वोट से विधानसभा में पहुंचने और हर महीने लाखों का वेतन भत्ता पाने वाले नेताजी कुछ दिन के लिये रोजाना 300 लोगों को बुलाने की व्यवस्था अपने स्तर पर नहीं कर सकते हैं तो इस शहर के जनता को नेताजी की लाचारी के बारे में सोचना चाहिए ? वैसे सवाल 200 लोगों को रोज बुलाने का खम ठोकने वाले नेताजी से भी है कि उन्हें भी बताना चाहिए कि उनके 200 आदमी आंदोलन में आये इसके लिए क्या व्यवस्था करनी होगी ? ऐसे ही सवाल अगली पंक्ति के उन नेताओं से भी है जो 10-20 लोगों की भीड़ इस आंदोलन में नहीं ला सकते तो फिर वे किस हैसियत से विधानसभा के 2 लाख लोगों का नेता बनने का दम भर रहे हैं ! इन सवालों के अलावा सभी नेताओं से एक सवाल यह भी है कि ज़ब बिना साधनों (धन) की व्यवस्था के भीड़ बुलाई नहीं जा सकती है तो फिर ये नेता लोग आगे बढ़कर धन की व्यवस्था क्यों नहीं करते ? लेकिन इन नेताओं की पोल यहां भी खुल जाती है ज़ब पता चलता है कि कमेटी से जुड़े अधिकांश नेताओं ने अभी तक दुवन्नी का भी योगदान इस आंदोलन में नहीं किया है। इन नेताओं की बला से ये आंदोलन अब तक व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा दिए गए सहयोग से ही संचालित हो रहा है।

स्टीयरिंग कमेटी की बैठक को लेकर एक सवाल यह भी उठता रहा है कि कमेटी बैठकों पर बैठकें करने के बावजूद आंदोलन की दशा और दिशा को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई है। इसके लिए भी आपके नेताओं का आंदोलन के प्रति उदासीन रवैया है। समिति के अधिकांश बैठकों में बड़े नेताजी से लेकर तमाम नेताओं का यह रटा रटाया वक्तव्य रहा है कि समिति जो भी निर्णय करेगी हम उसके साथ हैं। इस वक्तव्य से आप इन नेताओं की मानसिकता और लाचारगी का अंदाजा लगा सकते हैं। वैसे इन नेताओं से क्या ये पूछा नहीं जाना चाहिए कि आखिर आप लोगों को इस समिति में किसलिए लिया गया है ? जब आप इस आंदोलन के लिए कोई ठोस निर्णय कर ही नहीं सकते तो फिर क्यों इस समिति का हिस्सा बने हुए हैं ! खैर आंदोलनों का दम भरने वाले नेताओं का यह वक्तव्य इन नेताओं की आंदोलन के प्रति निष्ठा बताने के लिए काफी हैं।   

            वैसे इस खुलासे का मकसद कांग्रेसी नेताओं को कहीं भी क्लीन चिट देने का नहीं है। जिला बनाने के आंदोलन की असफलता में कांग्रेस नेताओं की भूमिका भी महती रही है। ये सच है नगरपालिका और स्थानीय मुद्दों में उलझे कांग्रेसी नेताओं ने समय पर जिला बनाने की मांग पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन यह भी सच है कि ज़ब अपराध बोध से ग्रसित कांग्रेसी नेताओं ने जनभावनाओं को देखते हुए इस आंदोलन से जुड़ना चाहा तो षड्यंत्र पूर्वक उन्हें तिरस्कृत करने की कोशिश की गई। षडयंत्र पूर्वक इसलिए कि कांग्रेस नेताओं से इस्तीफा मांगने वाले नेताओं ने अपनी पार्टी के विधायकों और जनप्रतिनिधियों से क्यों इस्तीफा नहीं माँगा ? क्या विधानसभा के लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक की कोई जिम्मेदारी नहीं थी ? फिर भी सत्ता से जुड़े होने के चलते जिला बनाने की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन को अब भी कांग्रेस के बड़े नेताओं की आहुति का इंतज़ार है।

चलते चलते आपको यह भी बता दें कि 2 दर्जन से अधिक नेता इस फ़िक्र में ही इस आंदोलन से जुड़े है कि कोई दूसरा नेता इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा ना उठा ले। इसीलिए जब पूजा छाबड़ा ने ज़ब आगे बढ़कर आमरण अनशन की घोषणा की तो आंदोलन से जुड़े नेताओं की नींद उड़ गई। अनशन स्थल पर छाबड़ा के अनशन के चलते ज़ब जनता का इस आंदोलन से जुड़ाव बढ़ने लगा तो फोटो बाजी में मशगूल नेताओं को यह गवारा नहीं हुआ। तीसरे दिन तो षड्यंत्रकारी नेताओं ने आमरण अनशन कर रही महिला के बैनर-पोस्टर उखाड़ फ़ेंके। इतना ही नहीं छाबड़ा को मिल रही लोकप्रियता हमारे नेताओं से देखी न गई तो इन्होंने मंच और आंदोलन से ही दूरी बना ली।

         बहरहाल इस आंदोलन ने अपने आपकों राजनीति के दिग्गज,जमीन से जुड़े और आंदोलनकारी की उपाधियों से नवाजे जाना पसंद करने वाले नेताओं की पोल खोल कर रख दी है। करीब 20 दिनों से चल रहे आंदोलन में दो दर्ज़न से अधिक नेता मिलकर भी अब तक भी विरोध दिखाने लायक भीड़ नहीं जुटा पाए हैं। पिछले सोमवार को अनशन स्थल पर हुई जनपंचायत भीड़ नहीं जुटने की वजह से एक नुक्कड़ सभा बन कर रह गई। वहीं इससे पहले मानकसर और इंदिरा सर्किल पर हाईवे जाम का मामला भी इन नेताओं की अनिच्छा के चलते पूरी तरह से फ्लॉप शो बन गया था पर कुछ युवाओं की वजह से आंदोलन की पोल खुलते खुलते रह गई।

कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो पूजा छाबड़ा और उसके बाद उमेश मुदगल, विष्णु तरड़, बलराम वर्मा और अब दो महिलाओं जुलेखा बेगम और हरबख्स कौर बराड और विनोद घिन्टाला के आमरण अनशन की बदौलत ही यह आंदोलन अभी तक सांसे ले रहा है। वरना जिला बनाओ अभियान समिति और इसके नेता अब तक गाल बजाने और फोटो खिंचवाने के सिवा कुछ भी नहीं कर पाए हैं ? शायद इसीलिए किसी शायर ने नेताओं के लिए ये पंक्तियां लिखी है…..

क़ौम के ग़म में डिनर खाते हैं हुक्काम के साथ।

रंज लीडर को बहुत है मगर आराम के साथ।।

– राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब,सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा पार्टी के स्थापना दिवस को कमल संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया। मंडल प्रभारी व सादुलशहर नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप खीचड़ और मंडल अध्यक्ष सुरेश की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में विधायक रामप्रताप कासनियां मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं नें कहा । विधायक रामप्रताप कासनिया ने कहा कि 6अप्रेल 1980 को भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री आदरणीय अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की गई जो आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है। उन्होंने बताया कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र पूर्ण बहुमत से सरकार लगातार नौ वर्ष से सफलतापूर्वक चल रही है।

जिला उपाध्यक्ष शरनपाल सिंह मान ने भारतीय जनता पार्टी के इतिहास व रीति नीति पर प्रकाश डाला। इसी प्रकार पूर्व चेयरमैन व जिला उपाध्यक्ष आरती शर्मा ने भी केन्द्र सरकार की उपलब्धियों और केंद्र सरकार की योजनाओं पर प्रकाश डाला।नगर पालिका अध्यक्ष मास्टर ओमप्रकाश कालवा ने अपने उद्बोधन में कहा कि भाजपा राष्ट्रीय सोच विचार वाली पार्टी है, भाजपा सबको साथ लेकर चलने वाली पार्टी है । इस कार्यक्रम में पूर्व प्रधान बिरमा नायक व जिला मंत्री काजल छाबड़ा ने भी संबोधित किया ।

भाजपा के नगर महामंत्री लालचंद शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में भाजपा के बूथ अध्यक्ष व शक्ति केंद्र संयोजक को भारतीय जनता पार्टी का परिचय पत्र वितरित किए गए। भारतीय जनता पार्टी का पटका पहनाकर उनका सम्मान किया गया।

ये भी रहे कार्यक्रम में मौजूद

इसी दौरान भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक अशोक नागपाल,पूर्व मंडल अध्यक्ष विजय गोयल, वरिष्ठ कार्यकर्ता एडवोकेट एनडी सेतिया, सुभाष गुप्ता, राहुल लेघा, पार्षद जगदीश मेघवाल, विनय सिंह चंदेल, युवा मोर्चा अध्यक्ष मंयक वशिष्ठ ,गोपाल लेघा, युवा मोर्चा महामंत्री युधिष्ठिर कुमार, बूथ अध्यक्ष जगदीश आचार्य, नंदकिशोर विश्वकर्मा, सत्यनारायण तावनिया, युवा मोर्चा जिला महामंत्री विनोद सारस्वत, नगर मंडल उपाध्यक्ष पृथ्वी स्वामी, सत्यनारायण छिम्पा,प्रेमसिंह, कुलदीप सांखला, संदीप जोशी,रिंकू सिद्दीकी, ओमप्रकाश कारगवाल, जगजीत सिंह बराड़,गोविंद नायक ,सुरेश सुथार ,प्रभुराम भांभू, संतराम भांभू, सुरेंद्र सिंह राठौड़ ,हिमांशु कोठारी, विजय गोस्वामी हिमांशु नागपाल, चाननराम अग्रवाल, बजरंग सिंह पवार, विक्रम सिंह खींची ,रवि डाबी अमर सिंह खामरा, पार्षद राजीव चौहान,जलालुद्दीन, राजेंद्र प्रसाद, प्रेम प्रकाश वर्मा दुलीचंद सारण,ओमप्रकाश जाखड़ आदि उपस्थित रहे।

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सूरतगढ़। सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग को लेकर रेंग रहा आंदोलन अब इच्छा मृत्यु की ओर अग्रसर है। इच्छा मृत्यु कहना इसलिए वाजिब होगा कि जिन लोगों के हाथ में इस आंदोलन की बागडोर है वे लोग इस आंदोलन को चलाना नहीं चाहते हैं। यह बात कड़वी जरूर है लेकिन सच यही है। जिला बनाओ अभियान समिति के पदाधिकारी हो या फिर राजनेता या फिर व्यापारी, इनमें से कोई भी वर्ग ऐसा नहीं है जो इस आंदोलन को चला कर खुश है। बेमन से किया गया कोई भी काम कब सफल हुआ है ऐसा ही कुछ अब इस आंदोलन के साथ होने को है।

सबसे पहले बात करे जिला बनाओ अभियान समिति की। हक़ीक़त यह है कि जिला बनाओ अभियान समिति जो सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग को पुरजोर तरीके से रखने में असफल रही अब वही समिति अपने पर लगे दाग आंदोलन करने की नौटंकी कर धोना चाहती है। पूरे राजस्थान के बच्चे बच्चे को ज़ब पता था कि गहलोत सरकार बजट में नए जिलों की घोषणा करने वाली है। तब इस समिति और इसके झंडाबरदार चादर तानकर सोए रहे। समिति के सदस्य अब आरोप लगा रहे हैं उन्हें आमजन का सहयोग नहीं मिला। मैं समिति से ही पूछना चाहता हूं कि ज़ब उन्हें पहले आमजन का सहयोग नहीं मिला तो फिर अब क्यों उम्मीद कर रहे हैं ?

सच्चाई यह है कि समिति के पदाधिकारी छपास रोग से पीड़ित रहे और जिला बनाने के आंदोलन की नौटंकी करते रहे। समिति पदाधिकारियों की कुंभकरणी नींद का आलम यह रहा कि जब अनूपगढ़ से कुलदीप इंदौरा के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों को बुलाकर मुख्यमंत्री गहलोत ने जिला बनाने को लेकर आश्वस्त कर दिया तब भी इस समिति की तंद्रा नहीं टूटी। लेकिन अब जब सांप निकल गया तो लाठी पीटने की नौटंकी समिति कर रही है। नौटंकी इसलिए कहना पड़ रहा है कि अभियान समिति की अब तक आधा दर्जन से अधिक बैठके हो चुकी है। समिति में स्टीयरिंग कमेटी के नाम करीब 5 दर्जन लोगों के नाम भी जोड़ लिए गए हैं। लेकिन समिति अब तक आंदोलन को लेकर कोई रूपरेखा तय नहीं कर पाई है। हालांकि इसकी वजह समिति में शामिल व्यापारी नेताओं और शुद्ध राजनेताओं का असहयोग भी है। लेकिन घंटो-घंटो की बैठकें कर सुझाव लेने वाली यह समिति और इसके पदाधिकारी बातों को ही मठोरते रहते हैं। बैठकों में आये एक भी सुझाव पर अमल करने की जहमत समिति और उसके पैरोकारों ने नहीं की है। बस जबानी लफ़्फ़ाजी से काम चलाया जा रहा है।

हालत यह है कि जो लोग अपने जीवन को दांव पर लगाकर इस आंदोलन में आमरण अनशन की आहुति दे रहे हैं,उन लोगों के पास रात के समय कुछ लोगों की ड्यूटी भी समिति अब तक नहीं लगा पाई है। समिति की बला से आंदोलन में आहुति देने वाले लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है ! कहने का मतलब ये है कि इस समिति में कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति नहीं है जो कोई निर्णय ले सके और उस निर्णय को लागू करने के लिए समिति सदस्यों को कह सकें ?

बहरहाल बात यहीं तक खत्म नहीं होती हालात यह है कि समिति पदाधिकारियों और इसमें शामिल नेताओं को यह भी गवारा नहीं है कि कोई व्यक्ति इस मंच से जिला बनाने की मांग को मजबूती से रखने के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अपनी भावनाएं व्यक्त कर दे। इसलिए समिति ने मंच से माइक के जरिए भाषण बाजी को प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह किस तरह का आंदोलन है जहां पर लोगों को अपनी बात रखने की भी आजादी नहीं है। जब लोग अपने विचार नहीं रखेंगे, अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाएंगे तो कौन इस आंदोलन से जुड़ेगा ? पिछले कुछ दिनों से आंदोलन स्थल पर छायी मरघट सी ख़ामोशी ये बताने के लिये काफ़ी है कि समिति और उसके नेता सच्चाई सुनना नहीं चाहते है। लेकिन समिति कैसे यह भूल जाती है कि लोकतंत्र में विचारों के प्रवाह को रोककर कोई आंदोलन खड़ा नहीं हो सकता !

कुल मिलाकर जिला बनाओ अभियान समिति इस शहर के लोगों की भावनाओं से खेलने का एक टूल बन चुकी  है। यह समिति इस आंदोलन को किस तरह से खत्म करना चाहती है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि समिति द्वारा आंदोलन के कार्यक्रमों में जानबूझकर कुछ दिनों का गेप रखा जा रहा है। कहना गलत नहीं होगा कि इसी वजह से शहर के बहुसंख्यक लोग इस आंदोलन से अपेक्षित रूप में नहीं जुड़ पा रहे हैं ? साफ शब्दों में समिति पदाधिकारियों द्वारा रस्म अदायगी की जा रही है। समिति से जुड़े ज्यादातर पदाधिकारी अपना अमूल्य समय इस फालतू आंदोलन में लगाना नहीं चाहता है ?

हालांकि समिति में कुछ एक लोग साफ मन से भी जुड़े हैं उन लोगों को पीड़ा भी है कि सूरतगढ़ जिला नहीं बना और वे लोग चाहते हैं कि आंदोलन चले। लेकिन नक्कारखाने में तूती की तरह उनकी आवाज कोई सुनने को तैयार नहीं है।

इसलिए अगर इस आंदोलन को शहर की जनता, व्यापारी या फिर और राजनेता अगर चलाना चाहते हैं तो जिला बनाओ अभियान समिति को डिसोल्व कर बहुत थोड़े मगर जिम्मेदार लोगों की एक एक्शन कमेटी बनाई जाने की जरूरत है। जो सुझावों पर ठोस निर्णय लेकर इस आंदोलन को कोई दिशा दे सके ? वरना समिति की बैठकों की नौटंकी का तमाशा देखते रहिए। इस समिति के भरोसे सूरतगढ़ को जिला बनाने का ख्वाब मुंगेरीलाल के हसीन सपने जैसा ही बना रहने वाला है। जिला बनाओ अभियान समिति की भूमिका को लेकर अंत में दुष्यंत की इन पंक्तियों के साथ बात को खत्म करता हूं।

पक गई हैं आदतें बातों से सर होगी नहीं।
कोई हंगामा करो ऐसे गुज़र होगी नहीं।।

इन ठिठुरती उँगलियों को इस लपट पर सेंक लो।
धूप अब घर की किसी दीवार पर होगी नहीं।।

बूँद टपकी थी मगर वो बूंदों बारिश और है।
ऐसी बारिश की कभी उन को ख़बर होगी नहीं।।

आज मेरा साथ दो वैसे मुझे मा’लूम है।
पत्थरों में चीख़ हरगिज़ कारगर होगी नहीं।।

आप के टुकड़ों के टुकड़े कर दिए जाएँगे पर।
आप की ताज़ीम में कोई कसर होगी नहीं।।

सिर्फ़ शाइ’र देखता है क़हक़हों की असलियत।
हर किसी के पास तो ऐसी नज़र होगी नहीं।।

– राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष- प्रेस क्लब,सूरतगढ़।

    

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सूरतगढ़ 25 मार्च (नवल)। थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे शनिवार को सूरतगढ़ दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने मिलिट्री स्टेशन मैं आयोजित यूनिट कलर स्टैंडर्ड सेरेमनी में भाग लिया। उन्होंने समारोह में दक्षिणी पश्चिमी कमान और पश्चिमी कमान की 49 आर्मर्ड रेजीमेंट, 51 आर्मर्ड रेजीमेंट, 53 आर्मर्ड रेजीमेंट और 54 आर्मर्ड रेजीमेंट को राष्ट्रपति के निशान प्रदान किया।

यूनिट कलर स्टैंडर्ड सेरेमनी के दौरान परेड
यूनिट कलर स्टैंडर्ड प्रेजेंटेशन का प्रेजेंटेशन देते अधिकारी


इस अवसर पर आयोजित समारोह में सेना प्रमुख ने परेड का निरीक्षण किया। इस कार्यक्रम में टैंकों के साथ चार बख्तरबंद रेजीमेंटों द्वारा एक बेदाग घुड़सवार परेड का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में सेना के बख्तरबंद टैंकों ने परेड करके सेना प्रमुख को सलामी दी। इससे पहले चारों रेजिमेंट के निशान की हिंदू ,मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म गुरुओं ने मंत्रोच्चारण के साथ पूजा की । कार्यक्रम में सेना बैंड की आकर्षक प्रस्तुतियां दी गई।

इस मौके पर मिलिट्री स्टेशन के कमांडेंट ब्रिगेडियर प्रशांत अहलावत,बीएसएफ डीआईजी महेंद्र सहारण व जिला पुलिस अधीक्षक परिस देशमुख सहित आला सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।

थलसेनाध्यक्ष ने यूनिट के साहस की सराहना की

थल सेनाध्यक्ष मनोज पांडे ने मानक प्रस्तुति परेड की समीक्षा की और युद्ध और शांति में बख्तरबंद कोर द्वारा प्रदर्शित वीरता, बलिदान और परंपराओं की समृद्ध विरासत की सराहना की।सेना प्रमुख ने अपने संबोधन में प्रतिष्ठित राष्ट्रपति के मानक निशान प्राप्त करने वाली रेजिमेंटों की उनकी अनुकरणीय सेवा के लिए सराहना की और रैंकों और परिवारों को अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया आधुनिक और पेशेवर भारतीय मशीनीकृत बल भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए हमेशा तैयार हैं और सभी खतरों के खिलाफ देश की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।


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सूरतगढ़ (नवल भोजक)। कांग्रेस नेता हनुमान मील के नेतृत्व में कांग्रेस के पार्षदों, पंचायत समिति डायरेक्टर, सरपंच व जिला परिषद सदस्यों सहित कांग्रेस जनप्रतिनिधियों व कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग की। इससे पहले हनुमान मील की अध्यक्षता में महेश्वरी धर्मशाला में ब्लॉक कांग्रेस के सूरतगढ़ ओर राजियासर ब्लॉक के कांग्रेस कार्यकर्ताओं, सरपंचों,जिला परिषद सदस्यों, पंचायत समिति सदस्यों,पार्षदों व पूर्व जनप्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग को चर्चा हुई।

एसडीएम संदीप कुमार को ज्ञापन सौंपते हनुमान मील व जनप्रतिनिधि

बैठक के बाद सैकड़ों की संख्या में उपस्थित जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग को लेकर मुख्य बाजार से जुलूस निकालते निकालकर उपखंड कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन करके उपखंड अधिकारी संदीप काकड़ को ज्ञापन दिया।

हनुमान मील ने राजनीति करने वालों पर साधा निशाना

बैठक में मील ने कहा कांग्रेस पार्टी राजस्थान के विकास को लेकर कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से हर वर्ग का भला करने के लिए काम कर रही है। सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग को लेकर कांग्रेस पार्टी ने सबसे ज्यादा प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि जिला बनाने की मांग की आड़ में राजनीतिक रोटियां सेकने वाले आंदोलन में सच्चे मन सक्रिय होते तो जिला बनाने की मांग मजबूती मिलती।

बैठक में इन्होंने भी रखे विचार

ब्लॉक अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह रंधावा, राजियासर ब्लॉक अध्यक्ष गिरधारी लाल स्वामी , नगरपालिका उपाध्यक्ष सलीम कुरेशी, पूर्व पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल, पूर्व ब्लाक अध्यक्ष पार्षद परसराम भाटिया, सीताराम बिश्नोई, ब्लॉक महामंत्री धर्मदास सिंधी, प्रवक्ता सहदेव जोशी,विधानसभा कोऑर्डिनेटर बरकत शाह बोदला, पार्षद भारत भूषण उपाध्याय, पूर्व सरपंच मुखराम खिलेरी,इंटक के जिलाध्यक्ष श्याम सुंदर शर्मा, गगन विडिंग सहित वक्ताओं ने विचार रखें।

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सूरतगढ़ (अशोक)। बीकानेर रोड़ पर टिड्डी मण्डल कार्यालय के पास राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाइड को ट्रेनिंग सेंटर हेतु आवंटित भूमि पर शहर के भूमाफियों की नजर पड़ गई है। बुधवार रात्रि को निर्माण स्थल पर अज्ञात व्यक्तियों ने उक्त भूमि पर कब्जा करने की नियत से तोड़फोड़ की। बदमाश कमरे का गेट उखाड़ कर चले गए। उक्त घटनाक्रम का स्थानीय संघ के पदाधिकारियो को सुबह पता चला। इस पर स्थानीय संघ के अध्यक्ष श्रीगोपाल शर्मा,सचिव स्वर्ण सिंह ,आत्माराम शर्मा उपखण्ड अधिकारी से मिलकर सम्पूर्ण घटनाक्रम से अवगत करवाया।

एसडीएम संदीप कुमार ने किया घटनास्थल का निरीक्षण

उपखण्ड अधिकारी संदीप कुमार ने दोपहर बाद निर्माण स्थल का मौका मुआयना किया। उपखंड अधिकारी ने कहा की जिस व्यक्ति द्वारा इस घटना को अंजाम दिया उसका शीघ्र पता लगाकर उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी।

स्थानीय संघ ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ दिया थाने में परिवाद

स्थानीय संघ के सचिव स्वर्ण सिंह ने इस सम्बन्ध में सिटी पुलिस थाने में दिया परिवाद देकर बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

स्वर्ण सिंह की ओर से दिए परिवाद में बताया गया है कि जिला कलेक्टर द्वारा राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाइड सूरतगढ़ को ट्रेनिंग सेंटर हेतु बीकानेर रोड़ पर टिड्डी मण्डल कार्यालय के साथ दो बीघा भूमि आवंटित की गई है। स्थानीय संघ द्वारा जन सहयोग से इस भूमि पर कमरें और चारदीवारी का निर्माण कार्य गत रविवार को शुरू किया गया था। परिवाद में बताया गया है कि बुधवार रात्रि को निर्माण स्थल पर अज्ञात भूमाफियों ने कब्जा करने की नियत से तोड़फोड़ कर कमरें को लगाया गया लोहे का गेट उखाड़ दिया।

पुलिस द्वारा फिलहाल परिवाद लेकर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर करने की कार्यवाही की जा रही है।

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सूरतगढ़ (नवल भोजक)। नगरपालिका के राजीव गांधी सभागार में कर्मचारियों द्वारा अधिशासी अधिकारी विजय प्रताप सिंह का विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कर्मचारियों ने अधिशासी अधिकारी शैलेंद्र गोदारा व सहायक अभियंता सुशील कुमार सिहाग का जॉइनिंग के उपलक्ष में स्वागत भी किया ।
कार्यक्रम में पालिका कर्मचारियों द्वारा अधिशासी अधिकारी विजय प्रताप सिंह को कैशियर केवल कृष्ण आहूजा, सोहन कुमार झा, लेखाधिकारी मनप्रीत कौर,राजस्व अधिकारी अंजू सहारण, सहायक राजस्व अधिकारी कालूराम सैन सहित कर्मचारियों द्वारा फूल माला पहनाकर और पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में कर्मचारियों ने अधिशासी अधिकारी विजय प्रताप सिंह को साफा भी पहनाया साथ ही कर्मचारी यूनियन की तरफ से ईओ विजय प्रताप को उपहार देकर भव्य विदाई दी गई।

कर्मचारियों की ओर से अधिशासी अधिकारी शैलेंद्र गोदारा व सहायक अभियंता सुशील कुमार सिहाग को माला पहनाकर सम्मान प्रतीक देकर स्वागत किया।

वाईस चेयरमैन सहित पार्षद प्रतिनिधी भी रहे मौजूद

कार्यक्रम में पालिका उपाध्यक्ष सलीम कुरैशी, पार्षद प्रतिनिधि धर्मदास सिंधी भी मौजूद रहे। वाइस चेयरमैन सलीम कुरैशी ने ईओ विजय प्रताप के कार्यकाल की सराहना करते हुए उनका आभार जताया।

ईओ विजय प्रताप ने कर्मचारियों का सहयोग के लिए जताया आभार

इस अवसर पर अधिशासी अधिकारी विजय प्रताप सिंह ने कहा कि 14 महीने के कार्यकाल में उनको पालिका कर्मचारियों-अधिकारियों का अच्छा सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के सहयोग के बदौलत ही उन्हें जनहित के कार्य करने का अवसर मिला। ईओ विजय प्रताप ने कहा कि सूरतगढ़ नगरपालिका में उन्हें बहुत कूछ नया सीखने का भी मौका मिला।


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सूरतगढ़ (नवल भोजक)। सूरतगढ़ को जिला बनाने की घोषणा नहीं किए जाने के विरोध में सूरतगढ जिला बनाओ अभियान समिति के आव्हान पर संपूर्ण बाजार बंद रखा गया। इस दौरान समिति के सदस्यों और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने महाराणा प्रताप चौक पर धरना लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। चौक पर आयोजित आम सभा में बोलते हुए सभी वक्ताओं ने सूरतगढ़ को जिला में नहीं बनाए जाने की घोषणा पर राज्य सरकार के प्रति नाराजगी व्यक्त की।

टायर जलाकर जताया विरोध, अर्धनग्न होकर की नारेबाज़ी

सूरतगढ़ को जिला नहीं घोषित करने के विरोध में भाजयुमो कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रेम सिंह राठौड़, विनोद सारस्वत, अशोक आसेरी,दीपक छाबड़ा, आकाशदीप बंसल, धन्नाराम स्वामी, मयंक वशिष्ठ सहित कई लोगों ने अर्धनग्न होकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

सभा में इन नेताओं ने रखें विचार

महाराणा प्रताप चौक पर आयोजित सभा को जिला बनाओ अभियान समिति के संयोजक धन्नाराम स्वामी, आकाशदीप बंसल, कांग्रेस नेता बलराम वर्मा, व्यापार मंडल अध्यक्ष दर्शनभगत परनामी, थोक व्यापार संघ के अध्यक्ष वेद प्रकाश भूतना, किरयाना विक्रेता संघ के अध्यक्ष किशोर गाबा, पूर्व विधायक राजेंद्र भादू , पूर्व विधायक अशोक नागपाल, कांग्रेस नेता गगन विडिंग, कांग्रेस नेता अमित कड़वासरा, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, गुरदर्शन सिंह सोढ़ी, जयप्रकाश सरावगी, पूर्व पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा, आरती शर्मा, पूजा भारती छाबड़ा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संपर्क प्रमुख ताराचंद रतन सहित कई नेताओं ने अपनी बात रखी।

एक दूसरे पर दोषारोपण के चलते बने टकराव की स्थिति

सभा के दौरान पार्टी विशेष से जुड़े वक्ताओं के अन्य पार्टियों के जनप्रतिनिधि पर दोषारोपण की वजह से आपस में टकराव की स्थिति बन गई। वक्ताओं ने जिला बनाओ अभियान समिति की कार्यशैली पर सवाल उठाया और जिला बनाओ अभियान समिति को नकारा घोषित करके नई कार्यकारणी बनाने की बात कही।इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बलराम वर्मा ने एतराज करते हुए कहा एक दूसरे को भला बुरा कह कर आंदोलन को सफल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इससे आंदोलन कमजोर होगा।

पीसीसी सदस्य हनुमान मील ने इस्तीफे के सवाल पर दिया जवाब

प्रदर्शन के दौरान कॉन्ग्रेस के पीसीसी सदस्य हनुमान मील धरना स्थल पर पहुंचकर सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग का समर्थन किया। इस मौके पर जनप्रतिनिधियों से इस्तीफे की मांग पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के पार्षदों के इस्तीफे देने से जिला बनता है तो हमारे 20 पार्षद इस्तीफा देने को तैयार है।

माटी कला बोर्ड अध्यक्ष गेदर का हुआ विरोध, लगे नारे

राज्यमंत्री डूंगरराम गेदर से इस्तीफे की मांग करती भाजपा नेत्री

धरना स्थल पर शिल्प एवं माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष राज्य मंत्री डूंगरराम गेदर के खिलाफ व्यापारियों ने रोष प्रकट किया। बाद में कुछ लोगों ने गेदर से इस्तीफा देने की मांग करते हुए नारेबाजी की। गेदर के समर्थकों द्वारा इसका विरोध करने पर विवाद की स्थिति बन गई। जिसके बाद डूंगरराम गेदर नाराज हो कर चले गए।

प्रशासन ठप करने और हाइवे जाम की घोषणा

आंदोलन की आगामी रणनीति की घोषणा करते हुए व्यापारी नेताओं ने कहा मंगलवार को बाजार खुला रखकर प्रशासन ठप्प किया जाएगा, बुधवार को मानकसर चौराहे पर धरना लगाकर प्रदर्शन किया जाएगा।

धरना और विरोध प्रदर्शन में यह भी रहे शामिल

प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के विधानसभा कोऑर्डिनेटर राधेश्याम उपाध्याय, पूर्व पार्षद परमजीत सिंह बेदी, कामरेड लक्ष्मण शर्मा, कामरेड सखी मोहम्मद, कामरेड मदन ओझा, सरपंच विजय सिंह ताखर, पूर्व पार्षद ज्योति माई, प्रमोद ज्याणी, राजेश भाटी, बलराम को कुकड़वाल, नगर पालिका उपाध्यक्ष सलीम कुरेशी, पार्षद जगदीश मेघवाल, पार्षद शंकर नायक, पार्षद सुनील उर्फ बबलू सैनी, पुजारी भवरलाल दाधीच, आम आदमी पार्टी के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर पृथ्वीराज जाखड़, महिंद्र बैद, गौरव बलाना, किशनलाल स्वामी, योगेश स्वामी, रजनी मोदी, हरिप्रसाद शर्मा सहित ने विचार रखें।

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सूरतगढ़ (नवल भोजक)। सूरतगढ़ को जिला घोषित नहीं किए जाने के विरोध में सोमवार को बाजार बंद की तैयारियों को लेकर चोपड़ा धर्मशाला में बैठक का आयोजन करके रणनीति बनाई गई । बैठक में वक्ताओं ने वक्ताओं ने सोमवार को ऐतिहासिक सूरतगढ़ बंद करने के लिए दिखा तैयार करके सूरतगढ़ को जिला बनाने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाया जाने पर कड़े कदम उठाने पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा सूरतगढ़ को जिला बनाने के लिए सरकार पर दबाव बनाकर सोमवार से ऐतिहासिक आंदोलन शुरू किया जाएगा। बैठक में सभी लोगों से सुबह 8:00 बजे महाराणा प्रताप चौक पर पहुंचकर बंद को सफल बनाने का आह्वान किया है। इस अवसर पर पूर्व विधायक अशोक नागपाल और भाजपा नेता सुनील छाबड़ा ने चाय और पकौड़े की लंगर की व्यवस्था अपनी तरफ से करवाने की घोषणा की।

बैठक में ये रहे मौजूद

जिला बनाओ अभियान संघर्ष समिति के संयोजक धन्नाराम स्वामी, आकाशदीप बंसल, पूर्व विधायक अशोक नागपाल, थोक विक्रेता संघ अध्यक्ष वेद प्रकाश भूतना, किरयाना विक्रेता संघ के अध्यक्ष किशोर कुमार गाबा, नगरपालिका उपाध्यक्ष सलीम कुरेशी, भारतीय जनता पार्टी के पार्षद जगदीश मेघवाल, पूर्व पार्षद सुनील छाबड़ा, पार्षद कामरेड मदन ओझा, कामरेड लक्ष्मण शर्मा, भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा पूर्व जिला अध्यक्ष रजनी मोदी, युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष गौरव बलाना, भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के अध्यक्ष कृष्ण छिंपा, फल सब्जी थोक विक्रेता संघ के भूषण भटेजा , कांग्रेस के युवा नेता अमित कड़वासरा, होस्टल यूनियन के अध्यक्ष विनोद गोदारा, त्रिमूर्ति मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद ज्याणी, पार्षद मोहम्मद फारुख, मुमताज अली, आम आदमी पार्टी के विधानसभा कोऑर्डिनेटर राधेश्याम उपाध्याय, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर पृथ्वीराज जाखड़, विधानसभा कोऑर्डिनेटर पूर्व पार्षद परमजीत सिंह बेदी, महेंद्र बैद,कांग्रेस सेवा दल के सतनाम वर्मा,महाराणा प्रताप चौक मार्केट एसोसिएशन के अवतार सिंह सरां सहित गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

पार्षद पुष्पेंद्र शर्मा और कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष सोढ़ी ने दिए इस्तीफे

इस बीच कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष गुरदर्शन सिंह सोढ़ी ने सूरतगढ़ को जिला नहीं बनाने पर रोष प्रकट करते हुए पद और पार्टी की सदस्यता से त्यागपत्र देकर सूरतगढ़ को जिला बनाओ अभियान में समर्थन दिया। वहीं कांग्रेस के पार्षद पुष्पेंद्र सिंह ने भी जिला नहीं बनाने पर नाराज होकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को पार्षद पद से त्यागपत्र देकर रोष प्रकट किया।

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सूरतगढ़। आगामी विधानसभा चुनाव में सूरतगढ़ से भाजपा की टिकट के प्रमुख दावेदारों में जो नाम पिछले लंबे समय से चर्चा में बना हुआ है वो है भाजपा नेता नरेंद्र घिंटाला। 3 दशक से अधिक समय से भाजपा से जुड़े नरेंद्र घिंटाला संघ से लेकर संगठन तक अपनी क्षमताओं का लोहा मनवा चुके हैं। विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक बूथ तक अपनी पकड़ रखने वाले घिंटाला की टिकट की दावेदारी बेहद मज़बूत मानी जा रही है। क्यूंकि भाजपा में 70 प्लस आयु के दावेदारों को टिकट नहीं मिलना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में वर्तमान विधायक रामप्रताप कासनिया और पूर्व विधायक राजेंद्र भादू के अलावा नरेंद्र घिंटाला ही एक मात्र ऐसे उम्मीदवार है जो विधानसभा के बूथ स्तर के समीकरणों को नजदीक से जानते और समझते हैं। विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने की वजह से शायद ही ऐसा कोई बूथ होगा जहां पर घिन्टाला किसी परिचय के मोहताज हो। दूसरी वजह ये भी है कि सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र को जाट सीट के रूप में देखा जाता है। इस वजह से भी नरेंद्र घिंटाला की भाजपा से टिकट की दावेदारी मजबूत मानी जा रही हैं। 70 प्लस की तलवार के साये में टिकट की दावेदारी जता रहे विधायक रामप्रताप कासनिया और पूर्व विधायक राजेंद्र भादू के बाद टिकट मांग रहे जाट नेताओं में नरेंद्र घिंटाला दूसरे नेताओं से दौड़ में काफी आगे नज़र आते हैं ! इसकी वजह लंबे समय से पार्टी में सक्रियता के साथ साथ घिंटाला की सांगठनिक क्षमता भी है।

तीन दशक से लगातार सहकारी समितियों और नहर प्रणाली के चुनाव से लेकर विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में लगातार सक्रियता से घिंटाला ने जो अनुभव अर्जित किया है वह दूसरे पीढ़ी के भाजपा की टिकट मांग रहे किसी भी और उम्मीदवार के पास नहीं है। इसके अलावा पार्टी में लगातार सक्रियता का यह फायदा भी नरेंद्र घिंटाला  को मिला है कि जिन लोगों के साथ उन्होंने बरसों पहले राजनीतिक संपर्क बनाए थे वहीं लोग अब पार्टी की कमान संभाल रहे प्रमुख नेताओं में है। इन नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे,भाजपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, वरिष्ठ नेता ओम माथुर जैसे लोग शामिल है। जिनका आगामी विधानसभा चुनाव में  टिकट वितरण में काफी अहम रोल तय है। ऐसे में घिंटाला के पुराने सम्पर्क टिकट दिलाने में काफी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

इसके साथ साथ घिंटाला की अधिकांश रिश्तेदारीयां सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में है। भाजपा की टिकट मिलने की स्थिति में इन संबंधों का भी घिंटाला को बहुत अधिक फायदा मिलेगा। 

 नरेंद्र घिंटाला : छात्र राजनीति से अब तक का सफर

केंद्रीय चुनाव समिति सदस्य व पूर्व सांसद सुधा यादव के साथ नरेंद्र घिन्टाला

 2 अक्टूबर 1969 को जन्मे नरेंद्र घिंटाला ने 1991 में ग्रेजुएशन पूरी की । बचपन से ही संघ व भाजपा से जुड़े रहने वाले घिंटाला ने 1989 में राजनीति में सक्रियता दिखाने शुरू की। उस समय उन्होंने भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी ओम आचार्य के समर्थन में चुनाव प्रचार में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसके बाद 1994 से 97 के बीच में भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला महामंत्री रहे। उस समय ओम बिरला जो वर्तमान में लोकसभा अध्यक्ष है, युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष थे। इसके बाद 1997 से 2000 तक  घिंटाला ने युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष के रूप में काम किया। इस दौरान वें सतीश पूनिया ( वर्तमान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष) से संपर्क में आए जो उस समय युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष थे। सन 2000 से 2004 के बीच घिंटाला युवा मोर्चा में प्रदेश मंत्री रहे। वहीं 2005 से 2009 के बीच वे भाजपा के जिला महामंत्री रहे। इसी दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता और तात्कालिक प्रदेश अध्यक्ष ओम माथुर से भी घिंटाला के संपर्क बने, जो अब तक निरंतर प्रगाढ़ हुए हैं। सन 2005 में  घिंटाला ने जिला परिषद सदस्य के रूप में जीत हासिल की। 2010 से 2016 के बीच घिंटाला भाजपा के देहात मंडल के अध्यक्ष के रूप में सक्रिय रहे। इस दौरान उन्होंने पार्टी निर्देशों पर स्थानीय व देशव्यापी मुद्दों को लेकर धरना प्रदर्शन व आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई। इसी बीच 2013 में विधानसभा चुनावों में राजेंद्र भादू को चुनाव जिताने में घिन्टाला ने अहम योगदान दिया। वहीं 2018 के विधानसभा चुनाव में घिंटाला ने रामप्रताप कासनिया को टिकट दिलाने में भमिका निभाई। बाद में कासनिया को चुनाव जिताने में भी घिंटाला ने दिन रात एक कर दिए।

        वर्तमान में नरेंद्र घिंटाला एटा सिंगरासर नहर आंदोलन सहित मजदूरों, किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर चल रहे आंदोलनों में सक्रिय है। वहीं रेल विकास संघर्ष समिति के साथ मिलकर इलाके की रेल समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रयासरत है।

              नरेंद्र घिंटाला गत दिनों अपने पुत्र के विवाह के उपलक्ष हेलीकॉप्टर पर बारात ले जाने और बिना शगुन का लिफाफा लेकर विशाल प्रतिभोज का आयोजन कर भी चर्चा में रहे थे।

– राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष, प्रेस क्लब सूरतगढ़।

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सूरतगढ़। नगरपालिका में मचे घमासान के बीच आम आदमी की परेशानी को देखते हुए भाजपा पार्षदों नें आज विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। कार्यालय में अधिशासी अधिकारी के नहीं मिलने पर पार्षदों ने जमकर नारेबाजी की और अधिशासी अधिकारी पर मौके पर बुलाने की मांग की। बाद में पार्षदों के प्रतिनिधिमंडल नें सहायक राजस्व अधिकारी कालूराम सेन को 7 सूत्री मांगो का ज्ञापन सौंपा।

अपने ज्ञापन में भाजपा पार्षदों ने 6 माह से तैयार पड़े टेंडर लगाने, पट्टो की लंबित पत्रावलीयों का शीघ्र निस्तारण करने, स्ट्रीट लाइटें लगाकर वार्डों का अंधेरा दूर करने, सीवरेज प्लांट के बंद पड़े एxcसटीपी वन व टू को चालू कर ओवरफ्लो हो रहे सीवरेज चेंबर से फैल रही गंदगी  की समस्याओं से निजात दिलाने, शहर में मच्छर और मक्खियों के प्रकोप से निजात दिलाने के लिए फॉगिंग  व काला तेल छिड़कने, पुराने बस स्टैंड में बंद पड़े सार्वजनिक शौचालय को शुरू करवाने और सफाई कर्मियों के बकाया एरियर व डीए का भुगतान करने की मांग रखी।

प्रतिनिधिमंडल में ये पार्षद रहे मौजूद

भाजपा पार्षदों के प्रतिनिधिमंडल में पार्षद गोविंद नायक, पार्षद हरीश दाधीच, पार्षद हंसराज स्वामी, पार्षद सुरेश गावरिया, पार्षद राजीव चौहान,पार्षद जगदीश मेघवाल,पार्षद प्रतिनिधि सत्यनारायण तावनिया,पार्षद प्रतिनिधि कृष्ण छिंपा,पार्षद प्रतिनिधि रिंकू सिद्दीकी, पार्षद प्रतिनिधि राजेंद्र ताखर आदि मौजूद रहे। 

भाजपा पार्षदों द्वारा दिया ज्ञापन

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सूरतगढ़ (नवल भोजक)। शहर में अलसुबह छत पर कमरे में आग लगने की घटना में लाखों का सामान जलकर राख हो गया। वार्ड नंबर-27 के तेली मोहल्ला में सब्जी बेचने वाले बुदेखां पुत्र मुनीर खान के मकान में ऊपर बने कमरे में सुबह लगभग 4:00 अचानक आग लग गई। आग लगने की घटना में कमरे में रखा सामान, फर्नीचर, रजाइए, खाने के लिए रखा गेहूं सहित घरेलू सामान जल गया। आगजनी की इस घटना से करीब दो लाख रुपए के नुकसान की बात कही जा रही है।

वार्ड नंबर-27 में लगी आग का वीडियो


मकान मालिक बुदेखां ने बताया परिवार के लोग रात को लगभग 12:30 बजे सो गए। अलसुबह मकान के पीछे वाले पड़ोसी हनीफ टेलर ने छत के कमरे में आग लगने की सूचना दी। जिसके बाद परिवार के लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया। करीब 1 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका । सूचना मिलने पर पार्षद मोहम्मद फारुख सहित लोग मौके पर पहुंचकर सहयोग किया।

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सूरतगढ़। शहीद वीरांगनाओं के समर्थन और भाजपा सांसद किरोडी लाल मीणा के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले में आज भाजपा कार्यकर्ताओं का आक्रोश भड़क उठा। भाजपा पार्षद हरीश दाधीच व राजीव प्रताप चौहान के आह्वान पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने सुभाष चौक पर मुख्यमंत्री का पुतला फूंका। कार्यकर्ताओं ने सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की और शहीद वीरांगनाओं की मांगों को जल्द पूरा करने की मांग रखी। इस अवसर पर पूर्व विधायक अशोक नागपाल, पूर्व नगरपालिका चेयरमैन काजल छाबड़ा, पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष महेश सेकसरिया,किसान नेता राकेश बिश्नोई,सुनील छाबड़ा,युवा नेता गौरव बलाना, बाबू सिंह खींची सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। जनता पार्टी युवा मोर्चा महामंत्री मनोज शर्मा नें सरकार पर लाठियों का डर दिखाकर वीरांगनाओं की आवाज को कुचलने का आरोप लगाया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान अजय सिंह सिसोदिया,मनोज जांगू, सुरेंद्र वर्मा, बयात मान, सुनील बिश्नोई, विपिन शर्मा, प्रमोद शेखावत, राहुल गोस्वामी, राहुल गोस्वामी निखिल, गोस्वामी सुरेश जांगिड़, उमेश नायक, हेतराम वर्मा,राजू वर्मा इत्यादि मौजूद रहे

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सूरतगढ़। श्रीगंगानगर रामदेवरा जैसलमेर स्पेशल ट्रेन को बंद करने के रेल प्रशासन के निर्णय के विरोध में नागरिक संघर्ष समिति (रेल) नें रेलवे स्टेशन पर धरना लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। बाद में समिति के संयोजक कामरेड लक्ष्मण शर्मा के नेतृत्व में नागरिकों नें रेल महाप्रबंधक के नाम स्टेशन अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा ।
धरना स्थल पर संयोजक कामरेड लक्ष्मण शर्मा, सचिव कामरेड मदन ओझा, ओम प्रकाश राजपुरोहित,एडवोकेट रामप्रताप तिवाड़ी, जवाहर लाल छिंपा, गोपी राम शर्मा, महावीर भोजक, एडवोकेट मनीष अग्रवाल सहित वक्ताओं ने संबोधित करते हुए कहा रेल प्रशासन यात्री भारत कम होने का बहाना बनाकर रामदेवरा जैसलमेर ट्रेन को बंद कर दिया। वक्ताओं ने कहा कि मजबूरी में यात्रियों को प्राइवेट वीडियो कोच बसों में सफर करने की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नागरिकों ने आरोप लगाया कि बाड़मेर ऋषिकेश गाड़ी में कोच की संख्या कम होने के कारण यात्रियों को भेड़ बकरियों की तरह यात्रा करनी पड़ती है। लंबे समय से कोच बढ़ाने की मांग किए जाने के बावजूद भी रेल प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा।

धरना स्थल पर समिति संयोजक लक्ष्मण शर्मा के अतिरिक्त माहेश्वरी समाज के जिलाध्यक्ष भंवरलाल चांडक, दीपक कुमार, पृथ्वीराज स्वामी, नरेंद्र, परमजीत, भगवंत सिंह,घनश्याम आहुजा, जगदीश यादव गजसिंहपुर, ललित बंसल केसरीसिंहपुर, बलदेव सेन संयोजक करणपुर, विक्रेता संघ अध्यक्ष राजकुमार छाबड़ा, रायसिंहनगर के दुष्यंत जोशी, श्यामसुंदर शर्मा, जवाहर लाल छिंपा, हुसैन मोहम्मद, शहाबुद्दीन गोरी रमेश, सहारण सहित संघर्ष ही लोग मौजूद रहे।

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सूरतगढ़। कांग्रेस नेता हनुमान मील नें शहर के आम नागरिकों से प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत ज्यादा से ज्यादा पट्टों के आवेदन करने की अपील की है। उनकी तरफ से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि पट्टों के मामले में अब एक रुपए की चोर बाजारी नहीं होने दी जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा है कि शहर की जनता का जायज काम बिना किसी लेन देन के करवाया जाएगा । कांग्रेस नेता ने शहरवासियों से आवासीय पट्टो के लिए ज्यादा से ज्यादा फाइलें नगरपालिका में जमा करवानें को कहा है ताकि कैंप लगाकर आवेदनों का निस्तारण किया जा सके।

वार्ड -3 व 26 के पट्टे नहीं बनाने के आरोपों पर साधा निशाना

विधायक रामप्रताप कासनिया व नगरपालिका अध्यक्ष ओम कालवा द्वारा वार्ड नंबर 3 और 26 में पट्टे नहीं बनाए जाने के आरोपों को हनुमान मील नें हास्यास्पद बताया है। उन्होंने कहा है कि पट्टे जारी करने वाला व्यक्ति द्वारा पट्टे नहीं बनाने की बात कहना ही अपने आप में हास्यास्पद है । उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं की यह कार्रवाई केवल “नोट और वोट” हासिल करने का एक नया तरीका था, इसके अलावा और कुछ नहीं। मील नें कहा कि शहर की जनता नकाब उतरने के बाद इनके चेहरे पहचान चुकी है।

कालवा पर एंपावर्ड कमेटी के निर्णय पर हस्ताक्षर नहीं कर राजनीति का जड़ा आरोप

कांग्रेस नेता हनुमान मील नें चेयरमैन ओम कालवा पर 2 फरवरी को हुई एंपावर्ड कमेटी की बैठक में हुए निर्णय पर हस्ताक्षर नहीं कर राजनीति करने का आरोप जड़ा है। एंपावर्ड कमेटी की बैठक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2 फरवरी की कमेटी की बैठक में वार्ड 3 और 26 में विवादास्पद जगहों को छोड़ते हुए अन्य सभी जगह पट्टे बनाए जाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो चुका था। उन्होंने चेयरमैन कालवा पर आरोप लगाते हुए कहा कि सवा माह गुजरने के बाद भी एक और तो कालवा ने आज तक एंपावर्ड कमेटी के उस निर्णय पर अपने हस्ताक्षर नहीं किए है दूसरी तरफ बेशर्मी से प्रशासन को पट्टे नहीं बनाने की शिकायत की जा रही है।

विधायक रामप्रताप कासनिया और चेयरमैन कालवा पर खड़े हो रहे सवाल

कांग्रेस नेता हनुमान मील द्वारा 2 फरवरी की एंपावर्ड कमेटी की बैठक की फोटो प्रति सार्वजनिक किए जाने के बाद विधायक रामप्रताप कासनिया और चेयरमैन ओम कालवा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि एंपावर्ड कमेटी की बैठक में दोनों वार्डों में विवादित जगहों को छोड़कर पट्टे जारी करने का फैसला किया जा चुका था,तो ऐसे में दोनों नेताओं का पालिका ईओ पर पट्टे नहीं बनाने का आरोप ही बेमानी हो जाता है। इसके अलावा क्योंकि खातेदारी का मामला राजस्व विभाग से जुड़ा है और खातेदारी को निरस्त करना राजस्व प्रशासन के हाथ में है तो फिर पालिका प्रशासन पर आरोप क्या महज राजनीति नहीं है ?

सवाल यह भी है कि विधायक रामप्रताप कासनिया जमीनी मामलों के जानकार हैं उन्हें तो यह ज्ञान भी है। फिर क्यों वे राजस्व विभाग से प्रभावशाली लोगों को दी गई खातेदारी को रद्द करने की मांग करने की बजाय चेयरमैन कालवा के बनाये ट्रेप में फँसकर ईओ पर पट्टा नहीं बनाने के आरोपों की राजनीति में शामिल हो गए ?

वैसे अगर देखा जाये तो पट्टे नहीं बनने को लेकर विरोध का अधिकार स्थानीय भाजपा और उनके नेताओं को नहीं है। क्यूंकि पिछले डेढ़ साल से इन्ही मास्टर ओमप्रकाश कालवा के राज में ज़ब शहर की जनता पट्टे नहीं बनाने को लेकर आंसू बहा रही थी तब विधायक कासनिया सहित भाजपा और उसके नेता शुतुरमुर्ग की तरह रेत में मुंह दबाये बैठे रहे थे। खैर देखना होगा की इस मामले में कांग्रेस नेता के आरोपों पर भाजपा नेताओं की सफाई आती है या फिर 4 साल से शहर की बर्बादी पर खामोश रहे भाजपा के झंडाबरदारों की चुप्पी जारी रहती है।

–राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़ (नवल भोजक)। पंचायत समिति कार्यालय पर शौचालय निर्माण के भुगतान को लेकर आंदोलनरत ठेकेदार जसकरण सिंह ने 194 दिन चल रहा धरना शुक्रवार को समाप्त कर दिया। जिला प्रमुख कुलदीप इंदौरा और जिला परिषद सीईओ मोहम्मद जुनेद के आश्वासन के बाद ठेकेदार जसकरण में सहयोगियों की मौजूदगी में धरना उठा दिया। जिला परिषद सदस्य जुलेखा बेगम,आम आदमी पार्टी के नेता परमजीत सिंह बेदी, कामरेड एडवोकेट सखी मोहम्मद, सूरतगढ़ संघर्ष समिति संयोजक रामप्रवेश डाबला, फौजी लीलाधर सहित सहयोगियों ने माला पहनाकर धरना समाप्त करवाया।

इस अवसर पर सरदार हरनेक सिंह गिल,बद्री प्रसाद बिनानी, गुरजंट सिंह, एडवोकेट सखी मोहम्मद, रोशनलाल लीला, जगदेव सिंह, भूपेंद्र सिंह, भागीरथ, दुलीचंद, जयप्रकाश बलाणी, पिंटू सिंह,लखीराम, जोधा सिंह, रानी देवी मेघवाल,चेतराम,रमेश डूडी सहित उपस्थित लोगों ने सभा को संबोधित किया और इसे सच्चाई और संघर्ष के जीत बताया।

भुगतान की मांग को लेकर पत्नी सहित किया था जयपुर पैदल मार्च

पंचायत समिति कार्यालय पर 1:30 100 दिन से अधिक धरना देने के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई तो ठेकेदार जसकरण सिंह ने पत्नी सहित पैदल जयपुर कूच किया। जिसके बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। किसी के नतीजे में जिला प्रमुख कुलदीप इंदौरा और सीईओ मोहम्मद जुनेद सहित अधिकारियों ने ठेकेदार जसकरण सिंह को भुगतान करने और जिले की पंचायतों में काम देने भरोसा दिलाया।

ठेकेदार जसकरण सिंह ने बताया 31 जुलाई 2021 को निरवाणा व मनेवाला पंचायत के शौचालय निर्माण की भुगतान स्वीकृति जारी होने की जानकारी देने पर विकास अधिकारी ने तुरंत भुगतान करने के निर्देश दिए थे इसके बावजूद भी भूटान में देरी की गई। इसके अलावा मानकसर, 13 एसडी, 07 एसजीएम , 8 एसएचपीडी, फरीदसर, रामसरा जाखड़ान, 17 एसपीबी पालीवाला में निर्मित शौचालय के भुगतान संबंधी कार्यवाही शीघ्र की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है,

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सूरतगढ़। सूरतगढ़ नगरपालिका के चेयरमैन मास्टर ओमप्रकाश कालवा सीवरेज घोटाले को लेकर लगातार विवादों में है। चेयरमैन की कुर्सी को बचाने के लिए मास्टरजी नें भले ही भाजपा में शामिल होने से गुरेज नहीं किया। लेकिन बावजूद इसके मास्टरजी की मुश्किलें कम होती नहीं दिखाई दे रही। मास्टरजी के पिछले कारनामों की एक के बाद एक बाहर आने वाली फाइलें आने वाले दिनों में मास्टरजी की नींद उड़ा सकती है।

सीवरेज मामले में जांच एजेंसियों ने जहां मास्टरजी के गले को नापना शुरू कर दिया है तो वहीं पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल neएलइडी स्ट्रीट लाइट खरीद के मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए एक नया मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने चेयरमैन कालवा पर 18.80 लाख रुपए के गबन का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। उपखंड अधिकारी को दी शिकायत में पूर्व चेयरमैन नें तीन से चार हज़ार कीमत वाली स्ट्रीट लाइट 13999 रुपए प्रति लाइट खरीदने का आरोप लगाया है।

चेयरमैन ओम कालवा पर मामला दर्ज करने की मांग

पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल ने एसडीएम संदीप कुमार को लिखे पत्र में आरोप लगाते हुए कहा है कि नगरपालिका द्वारा जुलाई माह में कुल 175 इनवर्टर बेस्ड (30 वॉट) स्ट्रीट लाइट खरीदी गई। पूर्व चेयरमैन का कहना है कि खरीदी गई स्ट्रीट लाइट अनब्रांडेड जाने की देशी स्ट्रीट लाइट थी जिनकी बाजार में कीमत 3 से चार हजार रुपए ही है। लेकिन चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा द्वारा उक्त स्ट्रीट लाइट 13999 प्रति स्ट्रीट लाइट के दर से खरीदी गई। पूर्व चेयरमैन के अनुसार इस प्रकार नगरपालिका ने ठेकेदार फर्म को 2449825 रुपए का भुगतान कर पालिका को करीब 18.8 लाख रूपये की चपत लगा दी।

नगरपालिका द्वारा खरीदी गई स्ट्रीट लाइट का बिल

भ्रष्टाचार उजागर होने के डर से स्ट्रीट लाइट को कबाड़ में बदलने का आरोप

पूर्व चेयरमैन ने स्ट्रीट लाइट खरीदने भ्रष्टाचार के साथ ही यह भी आरोप लगाया है कि चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा भ्रष्टाचार उजागर होने के डर से इन लाइटों को शहर में लगाने से बच रहे है। पूर्व चेयरमैन के अनुसार यह सभी स्ट्रीट लाइट नगरपालिका के फायर ब्रिगेड कार्यालय में स्थित स्टोर में डंप कर रखी है। इसके अलावा पूर्व चेयरमैन ने आरोप लगाया कि इस मामले को दबाए रखने के लिये सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत पत्रावली भी नगर पालिका प्रशासन द्वारा नहीं दी जा रही है।

भ्रष्टाचार की जांच कर मामला दर्ज करने की उठाई मांग 

पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल ने एसडीएम से नगरपालिका कार्यालय से प्रकरण की पत्रावली और एलईडी लाइट को ज़ब्त करते हुए जांच की मांग की है। साथ ही पूर्व चेयरमैन नें जाँच कर चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है।

चेयरमैन कालवा और भाजपा की बढ़ती मुसीबतें

सीवरेज घोटाले से गिरे चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा आने वाले दिनों में बढ़ती दिख रही हैं। जिस प्रकार से मास्टरजी के विरुद्ध शिकायतें बाहर आ रही है उससे लगता तो यही है कि आने वाले दिन मास्टरजी के साथ-साथ भाजपा के लिए भी मुश्किलों से भरे हो सकते हैं। क्योंकि भ्रष्टाचार के आरोपों की आंच भाजपा तक भी पहुंचेगी इसमें शायद ही किसी को संदेह हो।

पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल द्वारा की गई शिकायत

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सब इंस्पेक्टर ताराचंद गोदारा के नेतृत्व में कारवाई

सूरतगढ़। सूरतगढ़ सिटी थाना पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान लूट की योजना बनाते हुए गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस नें गिरोह के एक बदमाश को गिरफ्तार किया है। जबकि चार अन्य बदमाश अंधेरा का फायदा उठाकर भागने में कामयाब हो गए।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार पकड़ा गया बदमाश अलावड़ा निवासी असलम खां पुत्र ईदू खां थाना रामगढ़ जिला अलवर का रहने वाला है। पुलिस नें आरोपी से एक अवैध देशी पिस्टल मय कारतूस व डकैती करने के औजार पाँच लोहे की सब्बल, एक लोहे का घन (हथोङा), एक लोहे की चौकुंटी सब्बल, एक स्प्रे पेन्ट का केन, चार लोहे के पाने, दो लोहे के पेचकस, दो लोहे की कैंचियाँ, दो बाजू टेटू कवर, दो जोङी दस्ताने जब्त किये हैं। इसके अलावा पुलिस नें एक चोरी की इक्को वैन (नम्बर HR 55AB 2996) भी जब्त की है।

कार्रवाई के दौरान चार बदमाश भागने में हुए कामयाब 

सिटी थाना प्रभारी कृष्ण कुमार के अनुसार जिला पुलिस अधीक्षक परिस देशमुख पुलिस अधीक्षक के  आदेशानुसार चोरी व लूट करने वाले मुलजिमों की धरपकड अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत बुधवार रात्रि को एसआई ताराचन्द, हैड कांस्टेबल जयपालसिंह, दुर्गादत्त और कांस्टेबल  पालाराम के साथ बङोपल रोड पर सूर्यनगर के पास नकाबन्दी कर रहे थे। इस दौरान मुखबिर से एक ECCO VAN नम्बर HR 55AB 2996 के सूर्यनगर कॉलोनी से थोङा आगे बङोपल रोङ से किशनपुरा रोही की तरफ जाने वाले कच्चे रास्ते पर खडे होने की सूचना मिली। मुखबिर के अनुसार ECCO VAN में 5-6 बदमाशो कोई वारदात करने की फिराक में हैं।

जिसके बाद पुलिस टीम नें घेराबंदी कर ECCO VAN में बैठे बदमाशों को रोकना चाहा तो इको वेन गाडी में बैठे बदमाश गाङी से निकलकर सरसों के खेतों की तरफ भागे गये। पुलिस टीम नें पीछा कर एक बदमाश असलम खां पुत्र इदु खां गिरफ्तार कर लिया जबकि बाकी चार बदमाश अन्धेरे का फायदा उठाकर भाग गये। पुलिस नें आरोपी से 315 बोर पिस्तौल सहित डकैती करने के औजार व वैन जब्त कर ली।

पूछताछ में डकैती की योजना का किया खुलासा

 पुलिस पूछताछ में असलम ने बताया कि वह और  इकबाल पुत्र श्री नूरद्दीन जाति मेव मुसलमान उम्र 28 वर्ष निवासी अलावङा, पुलिस थाना रामगढ जिला अलवर, बिरजु मेव, सोनू रायसिख पुत्र चरणजीतसिंह उर्फ़ चन्नी जाति रायसिख, उम्र 30 वर्ष निवासी सूरतगढ हाल तिजारा अलवर, जावीर पुत्र श्री नाजूखां जाति मेव उम्र 30 वर्ष, निवासी गांव भादस पुलिस थाना नगीना जिला नूंह (हरियाणा) गैंग बनाकर अलवर से गंगानगर में लूटपाट व एटीएम तोङने के लिये आये थे।

असलम के अनुसार उन्होंने गंगानगर में रात्रि के समय में एक इको वेन चोरी की और सूरतगढ आ गये थे। असलम के मुताबिक पकड़े जाने के समय वे लूटपाट व एटीएम तोड़ने की योजना बना रहे थे। असलम ने दौराने पूछताछ पर बताया कि सोनू रायसिख (जो पहले सूरतगढ में रहता था) उनको अलवर से गंगानगर चोरी व लूटपाट करने के लिये लेकर आया था। पुलिस के अनुसार असलम व इकबाल खां के खिलाफ चोरी, डकैती व अवैध हथियार रखने के मुकदमा दर्ज है। 

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पकड़ी गई हेरोइन


बीकानेर। बीकानेर सेक्टर में सीमा सुरक्षा बल नें अपनी सतर्कता से एक बार फिर से पाक की नापाक कोशिश को नाकाम कर दिया है। सीमा सुरक्षा बल ने पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हेरोइन की खैप गिराने की सूचना पर जवाबी कार्रवाई करते हुए पाक ड्रोन पर जमकर फायरिंग की और दो तस्करों को दबोच लिया है। सुरक्षा बलों के जवानों ने तस्करों के कब्जे से 2 किलो 600 ग्राम हेरोइन बरामद की है जिसकी कीमत ₹12 करोड़ आंकी गई है। वहीं इसके साथ ही पुलिस ने भी कार्रवाई करते हुए मामले में लिप्त अन्य दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया। ऐसे में बीएसएफ व पुलिस के द्वारा अब तक चार तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।

बीएसएफ के डीआईजी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने मामले में जानकारी देते हुए बताया की बीएसएफ के जवानों की सतर्कता की वजह से पाक की ये हरकत नाकाम हुई हैं। डीआईजी ने बताया कि बीएसएफ इंटेलिजेंस का इनपुट था कि इस तरह का प्रयास हो सकता है जिसके बाद बीएसएफ की टीम अलर्ट थी जिसके चलते हेरोइन और तस्कर पकड़े गए । उन्होंने बताया कि आसपास अभी और सर्च किया जा रहा है, बीएसएफ पुलिस और NCB के साथ मिलकर आगे की कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा।

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जयपुर। होली पर पुलिस के जवान का छुट्टी लेने का अनोखा अंदाज कोटा में सामने आया है। छुट्टी के लिये कोटा शहर में पुलिस लाइन में तैनात कॉन्स्टेबल सतपाल चौधरी का उच्च अधिकारियों को लिखा हुआ अनूठा पत्र चर्चा में बना हुआ है। पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस पत्र में कॉन्स्टेबल सतपाल चौधरी ने छुट्टी के लिए जो कारण लिखा है उसकी बेहद चर्चा हो रही है।

पत्र में कॉन्स्टेबल ने लिखा है कि उसकी 3 महीने पहले ही नई शादी हुई है और उसके यहां पहले शादी ससुराल में मनाने का रिवाज है। इसलिए उसे पत्नी के साथ होली मनाने के लिए ससुराल जाना पड़ेगा। सतपाल ने आगे लिखा है कि उसके ससुराल नहीं जाने पर पारिवारिक समस्या उत्पन्न होने की पूरी संभावना है और इससे पति पत्नी के रिश्ते में भविष्य में दरार आने की भी पुरी संभावना है इसलिये उसे चाहा गया ओ काश प्रदान करें।

गौरतलब है कि पुलिस विभाग में होली के मौके पर आमतौर पर अवकाश मुश्किल से मिलता है।

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सूरतगढ़। रंग उमंग और खुशियों का त्योहार होली पूरे भारतवर्ष में धूमधाम से मनाया जा रहा है। हर वर्ष की भांति शहर में भी होली के रंगों की धूम है। क्योंकि वर्ष विधानसभा चुनाव का है तो इस होली के साथ ही चुनावों के रंग भी बिखरने शुरू हो जाएंगे। कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवारों के साथ ही दूसरी पार्टियों के प्रत्याशी भी चुनावी रैस में एक दूसरे से आगे निकलने को बेताब है। चुनावी होली के इस दंगल में पहलवान या कहें कि भाजपा उम्मीदवारों की संख्या इतनी ज्यादा है कि इन्हें उंगलियों पर नहीं गिना जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा में उम्मीदवारों की बाढ़ सी आई हुई है। जहां एक और विधायक रामप्रताप कासनिया, पूर्व विधायक राजेंद्र भादू व अशोक नागपाल चुनावी समर में आखरी दाव लगाने की लगा रहे है। दूसरी और कई नए चेहरे जो इन दिग्गजों की चुनावी होली को फीका करने की फिराक में है। इनमें भाजपा के पूर्व देहात मंडल अध्यक्ष नरेंद्र घिँटाला, पंचायत समिति डायरेक्टर व युवा नेता राहुल लेघा,पूर्व नगरपालिका चेयरमैन आरती शर्मा, जयप्रकाश सरावगी, सुभाष गुप्ता, प्रदेश मंत्री विजेंद्र पूनिया, राकेश बिश्नोई, मोहन पुनिया जैसे चेहरे शामिल है। हालांकि भाजपा में एक और चेहरे का नाम इन दिनों अचानक से चर्चा में है। वह है पूर्व जिला प्रमुख पृथ्वीराज मील। बताया जा रहा है कि वह भी भाजपा से टिकट की दौड़ में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। मील के नजदीकी लोगों के मुताबिक मार्च माह के मध्य या अंत तक पूर्व जिला प्रमुख सूरतगढ़ में डेरा डाल सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो भाजपा में टिकट के प्रबल दावेदारों की सूची में यह एक और नाम जुड़ जायेगा। खैर इसके अलावा भी भाजपा में कुछ और नेता भी है जिनका न तो कोई जनाधार है और ना ही कोई तैयारी। लेकिन सोशल मीडिया पर वे भी चुनाव लड़ने की थोथी घोषणा करने से नहीं चूक रहे हैं। पर साहिब लोकतंत्र है जब चुनाव लड़ने से किसी को नहीं रोक सकते तो चुनाव लड़ने की घोषणा करके ध्यान बटोरने वाले बरसाती मेंढकों को आखिर कौन रोक सकता है। लेकिन कहा जा सकता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में जीत से बड़ी लड़ाई भाजपा की टिकट के लिये हो सकती है। क्योंकि कांग्रेस के विरुद्ध एंटी इनकंबेंसी का माहौल होगा ऐसे में भाजपा की टिकट लेना आधी जीत हासिल करना माना जा रहा है। खैर देखना होगा कि भाजपा में टिकट की जीत का गुलाल किसके गालों पर सजता है।

                  भाजपा के विपरीत कांग्रेस में टिकट के दावेदारों की संख्या सीमित है। प्रमुख दावेदारों में मील परिवार से हनुमान मील और शिल्प माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष डूंगरराम गेदर शामिल है। जहां मील परिवार अपने राजनैतिक हैसियत के चलते टिकट का सबसे प्रमुख दावेदार है। वहीं वर्ष 2023 के बजट में जिस तरह से डूंगरराम गेदर की अनुशंसा को गहलोत सरकार ने अहमियत दी है उसको देखते हुए टिकट की लड़ाई कड़ी दिखाई दे रही है। हनुमान मील और डूंगरराम गेदर के अलावा कांग्रेस नेता बलराम वर्मा,पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गगन वीडिंग और अमित कड़वासरा भी टिकट की दौड़ के लिए रेस लगा रहे हैं। अगर कांग्रेस युवा सचिन पायलट को तरजीह देती है तो टिकट के मामले में तगड़ा उलटफेर भी हो सकता है। कांग्रेस और भाजपा के अलावा आम आदमी पार्टी भी चुनावी समर में कूदने की तैयारी कर रही है। हालांकि आम आदमी पार्टी के दावेदारों की स्थिति को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है  फिर भी आप दावेदारों में परमजीत सिंह बेदी ने चुनाव लड़ने की खुली घोषणा कर रखी है। 

     कुल मिलाकर इस होली के बाद चुनावी होली का हुड़दंग शुरू होगा। जो नवंबर तक बेरोकटोक चलेगा। पहले टिकट और बाद में जीत का गुलाल खेलने को बेताब चुनावी रसिया अब घर घर रामा श्यामा के लिए आएंगे। आप और हम से चुनावी समर में साथ देने की गुजारिश करेंगे। लेकिन लोकतंत्र में वोट की ताकत से लैस आप लोग अपने सुरक्षित भविष्य के लिए सतर्क हो जाएं। बगैर किसी प्रलोभन के योग्य उम्मीदवार जो चाहे किसी भी पार्टी का हो ही जीत की ग़ुलाल  लगाएंगे तभी जीवन में उमंग और खुशियां आएगी। 

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सूरतगढ़। खबर पॉलिटिक्स के माध्यम से शहर की राजनीति और राजनीतिज्ञों के अच्छे और बुरे इरादों को हमने जनता की अदालत रखने की कोशिश की है। अच्छी बात यह रही है कि खबर पॉलिटिक्स द्वारा जनहित को देखते हुए प्रकाशित रिपोर्ट और राजनीतिक हालात को लेकर बताए गए अंदेशे पूरी तरह से सच साबित हुए है। ऐसी ही कुछ रिपोर्ट निजी व्यस्तताओं के चलते आपके सामने नहीं आ सकी । ऐसी ही एक अप्रकाशित रिपोर्ट आज आपके सामने प्रस्तुत हैं जो कि हमने चेयरमैन ओमप्रकाश  कालवा के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने की चर्चाओं के बीच लिखी थी। अविश्वास प्रस्ताव लाने की चर्चाओं के उस दौर की यादों को ताजा रखते हुए रिपोर्ट को पढ़ें तों आपको बेहतर अनुभव होगा।

खबर पॉलिटिक्स की अप्रकाशित रिपोर्ट : शास्त्रीजी की भविष्यवाणी के भरोसे चेयरमैन कालवा

‘नगरपालिका के चेयरमैन मास्टर ओमप्रकाश कालवा के बारे में चर्चाएं गर्म है कि मास्टरजी अब कुछ ही दिनों के मेहमान है। कांग्रेस के बड़े नेता और बड़ी संख्या में पार्षद भी अब मास्टरजी को पालिकाध्यक्ष के सीट पर बैठे देखना नहीं चाहते। यह धड़ा येन केन और प्रकरेण मास्टरजी की घर वापसी के लिए तैयारीयां कर रहा है। वहीं मास्टरजी के शुभचिंतक जिनमे पार्षद और पत्रकार भी शामिल है इन दिनों खासे परेशान नज़र आ रहे है। लेकिन मास्टरजी के चेहरे पर इस संकट का कोई असर नहीं दिख रहा है।

खैर मास्टरजी राजनीति की पिच के शातिर खिलाड़ी है इस बात में संशय नहीं है। लेकिन ज़ब आप के जीवन भर की पूंजी (पद और प्रतिष्ठा) दांव पर लगी हो तो अच्छे-अच्छे धुरंधरों के चेहरे पर शिकन आ ही जाती है। हालांकि मास्टरजी भी भीतरखाने इस आपदा से जूझने की तैयारी कर रहे है और गोटियां फिट करने में जुटे हुए हैं। लेकिन मास्टरजी का कॉन्फिडेंस हर किसी को हैरान कर रहा है। उनके सहयोगी और विरोधी दोनो ही मास्टरजी के कॉन्फिडेंस की वजह नहीं समझ पा रहे है।

इस मामले में जब हमने तहकीकात की तो पता चला कि मास्टरजी को कॉन्फिडेंस की बूस्टर डोज एक शास्त्री जी ने लगाई है। शास्त्री जी खगोल विज्ञान के मर्मग्य तो है ही साथ ही राजनीति से जुड़े कई बड़े नेता शास्त्रीजी का मार्गदर्शन लेते है। बताया जा रहा है कि पिछले दिनों ज़ब मास्टरजी सीवरेज घोटाले की जाँच और आला नेताओं की नाराजगी से घिरे तो मीडिया से जुड़े एक मित्र के जरिये शास्त्रीजी के पास पहुंच गए। शास्त्रीजी के कुछ नजदीकियों के अनुसार मास्टरजी की कुंडली का देखकर शास्त्रीजी ने मास्टरजी के अपराजित रहने की भविष्यवाणी कर दी है।

कहा जा रहा है कि शास्त्रीजी की इस भविष्यवाणी के बाद ही मास्टरजी का कॉन्फिडेंस चरम पर पहुंचा हुआ है और उनके चेहरे का आत्मविश्वास विरोधियों की नींद उड़ा रहा है। मास्टरजी के आत्मविश्वास को देखकर विरोधी इस चिंता में घुले जा रहे हैं कि कहीं उनका दाव उल्टा ना पड़ जाए। इसी वजह से वे भी अपना कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं।

बहरहाल हम आपको बता दें कि दुनिया भर के लोगों का भविष्य बताने वाले शास्त्री जी भी खुद के मामले में सितारों की गति नहीं भाँप सके थे। लेकिन फिर भी ज्योतिष का अगर कोई विज्ञान है तो उसमे शास्त्री जी की विद्व्ता से इंकार नहीं किया जा सकता। शायद शास्त्री का आशीर्वाद ही वह वजह है जिसके बूते मास्टरजी ताश से खेले जाने वाले तीन पत्ती गेम के शातिर खिलाड़ी की तरह व्यहवार कर रहे है जो कि कमजोर पत्ते मिलने के बाद भी अपनी चिंता को चेहरे पर आने नहीं देता है।

वैसे आपको बता दें कि तीन पत्ती गेम में अक्सर शातिर खिलाड़ी विरोधी की चाल पर कई गुना दाव लगाकर बाज़ी को पलट देते है। बहरहाल नगरपालिका की यह जंग दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुकी है जहाँ मील परिवार के राजनीतिक वृचस्व को शास्त्री जी के आशीर्वाद की बदौलत चेयरमैन कालवा सीधे चुनौती दे रहे हैं। अब देखना यह है कि शास्त्रीजी की जीत होगी या उनके विरोधियों की राजनीतिक हार।’

               यह रिपोर्ट हम खबर पॉलिटिक्स में प्रकाशित नहीं कर पाए। लेकिन अब ज़ब राजनीति की जंग की धुंध छंट चुकी हैं। रिपोर्ट पढ़कर आपको यह तो समझ में आ ही गया होगा कि फिलहाल शास्त्रीजी की भविष्यवाणी सच हो गई है। खैर देखना यह है कि उनके विरोधी इस राजनीतिक हार का बदला कैसे चुकातें है। रिपोर्ट को पढ़कर अपनी राय अवश्य दें।

– राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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सूरतगढ़ में विरोध करते रेल विकास संघर्ष समिति सदस्य

सूरतगढ़। श्रीगंगानगर रामदेवरा जैसलमेर ट्रेन रेल प्रशासन द्वारा बंद करने के विरोध में जिला संयुक्त रेल संघर्ष समिति द्वारा पूर्व घोषणा के तहत काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। रेल प्रशासन, क्षेत्रीय सांसद की इस मामले में चुप्पी को लेकर स्टेशन पर संघर्ष समिति के पदाधिकारीयों और शहर के प्रबुद्ध लोगों द्वारा नारेबाजी करते हुए विरोध जताया।
समिति की और से उत्तर पश्चिम रेलवे महाप्रबंधक, प्रिंसिपल चीफ कमर्शियल मैनेजर, प्रिंसिपल चीफ ऑपरेटिंग मैनेजर और मंडल रेल प्रबंधक के नाम स्टेशन अधीक्षक राज सिंह शेखावत को ज्ञापन सौंपा। समिति ने अपने ज्ञापन में रेल प्रशासन को 12 तारीख तक गाड़ी की समय सारणी को बदलकर पुनः नहीं चलाये जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
इससे पहले जिलाव्यापी आह्वान के तहत विरोध प्रदर्शन करते हुए समिति पदाधिकारियों ने केंद्रीय रेल बजट को इलाके के लिए विनाश काल का बजट बताया। समिति सदस्यों ने आरोप लगाया कि 6 महीने मांग करने पर केंद्रीय बजट 2023 में इस ट्रैन को स्थाई करने के आदेश की उम्मीद थी। परंतु दुर्भाग्य से इसे स्थाई ना करके इसे 28 फरवरी को बंद कर दिया गया।

12 मार्च को जिले की समितियों के पदाधिकारियों की बैठक में बनेगी रणनीति

जिला अध्यक्ष ललित शर्मा ने बताया कि यदि 12 मार्च तक इस गाड़ी की समय सारणी बदल कर दोबारा शुरू नहीं की गई तो 12 मार्च को सूरतगढ़ में बड़ी बैठक का आयोजन किया जाएगा।जिसमें जिले की समस्त संघ जयर्ष समितियों के पदाधिकारी भाग लेंगे वे आगे की रणनीति की घोषणा करेंगे।

प्रदर्शन के दौरान ये रहे मौजूद

इस अवसर पर जिला संयुक्त रेल संघर्ष समिति जिलाध्यक्ष ललित किशोर शर्मा, भाजपा नेता मुरलीधर पारीक, समिति संयोजक रामप्रताप खोरवाल, पूर्व बार संघ अध्यक्ष एडवोकेट साहब राम स्वामी,समाजसेवी परमजीत सिंह बेदी, रमेश चंद्र माथुर,अशोक मखीजा, जितेंद्र शर्मा,भंवर बारिया, राजेश मेघवाल, कमल सचदेवा, रतन पारीक, उमेश मुद्गल, जीतू शर्मा, ओम चाहर, भवानी शंकर भोजक,श्याम समानी , किशन स्वामी, विमल सिंह राजपूत,योगेश स्वामी सहित शहर के प्रमुख नागरिक उपस्थित थे।

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सिलेंडर में आग बुझाने पहुंची टीम का वीडियो

सूरतगढ़ (नवल भोजक)। शहर के वार्ड नंबर-45 में खाना बनाते समय आग लगने की से शनिवार को हड़कंप मच गया। आग लगने से रसोई में रखा फ्रिज सहित सामान जलकर राख हो गया। सूचना के अनुसार वार्ड के अंकुश सोनी पुत्र राजू सोनी के घर पर सुबह 10:00 बजे रसोई में खाना बनाने के दौरान पाइप निकलने से अचानक आग लग गई। जल्दी ही आग फैलने की वजह से विकराल हो गई ।
घटना की सूचना पर पार्षद सुनील सैनी उर्फ बबलू ने मौके पर पहुंचकर मोहल्ले वालों के सहयोग से आग बुझाने का प्रयास किया और नगरपालिका की अग्निशमन गाड़ी को सूचना दी। सूचना मिलने पर फायरमैन पंकज चौहान जयप्रकाश वर्मा, नगरपालिका जमादार भंवरलाल सहित पूरी टीम छोटी दमकल गाड़ी लेकर मौके पर पहुंची और आग बुझाने का प्रयास किया।
आग के विकराल रूप कर देखते हुए पार्षद सुनील दूसरी बड़ी दमकल गाड़ी को मौके बुलाई। दोनों दमकल गाड़ियों के कर्मचारियों ने 1 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

इस दौरान पार्षद रोहिताश धाणका, आदराम दगल, रोशन सोनी, अशोक कवातड़ा सहित लोगों ने आग बुझाने में सहयोग किया।

फायर टीम के प्रयासों से दूसरे कमरों तक नहीं पहुँची आग

फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों के प्रयास से दूसरे कमरों में आग नहीं लगने से घर के बाकी कमरों का सामान सुरक्षित रहा। अग्निशमन कर्मचारियों ने रसोई में रखे सिलेंडरों को सुरक्षित बाहर निकालकर रखवाये । सूचना मिलने पर गैस एजेंसी के कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे।

पुलिस भी पहुंची मौके पर

घटना की जानकारी मिलने पर सिटी थाना की सब इंस्पेक्टर रचना पुलिस टीम के साथ मोके पर पहुँची। पुलिस जवानों नें सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घटनास्थल से लोगों की भीड़ को दूर किया।

पिता के देहांत के चलते शौक में था परिवार

पीड़ित अंकुश सोनी के पिता राजू सोनी का देहांत 1 मार्च को हो गया था। घर में शोक प्रकट करने के लिए रिश्तेदार आए हुए थे। इसी दौरान रिश्तेदारों के लिए खाना बनाने समय भट्टी की पाइप निकलने से आग लग गई।

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जिला उपाध्यक्ष आरती शर्मा के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपते भाजपा पदाधिकारी व पार्षद

सूरतगढ़। नगरपालिका में पार्षद यासमीन सिद्दीकी के पति रिंकू सिद्दीकी के RO वाटर फिल्टर प्लांट को सीज करने का भाजपा ने विरोध जताया है। भाजपा पदाधिकारियों और पार्षदों के शिष्टमंडल ने उपखण्ड कार्यालय पर प्रदर्शन कर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। जिला उपाध्यक्ष आरती शर्मा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में भाजपा ने उपखंड प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

ज्ञापन में आरोप लगाया कि सूरतगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा और चार पार्षदों ने पिछले दिनों भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां के श्रीगंगानगर प्रवास के दौरान कांग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी जिससे नगरपालिका में भाजपा बोर्ड बन गया है। ज्ञापन में भाजपा की ओर से कहा गया कि इस वजह से कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने भाजपा के पार्षदों राजनितिक द्वेषता के रखनी शुरू कर दी है। भाजपा का कहना है कांग्रेस के दबाव से स्थानीय नगरपालिका प्रशासन द्वारा भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों और उनके परिवार जनों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

ज्ञापन में एक दिन पहले वार्ड-38 की भाजपा पार्षद यासमिन सिद्धिकी के रिश्तेदार के फ़िल्टर वाटर प्लांट को सीज करवानें का हवाला देते हुए कहा गया कि अन्य पार्षदों पर भी दबाव डाला जा रहा है।

शिष्टमंडल में ये रहे मौजूद

शिष्टमंडल जिला उपाध्यक्ष आरती शर्मा के अलावा नगरपालिका अध्यक्ष मास्टर ओमप्रकाश कालवा, नगरमंडल महामंत्री लालचंद शर्मा, किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष पवन ओझा, नगरमंडल उपाध्यक्ष बसंती देवी, इंजिनियर रमेशचन्द्र माथुर, एडवोकेट श्रीकांत सारस्वत, पार्षद जगदीश मेघवाल,ओमप्रकाश अठवाल, हंसराज स्वामी, भागीरथ नायक, सुरेश गवारिया, पार्षद प्रतिनिधि गोविन्द नायक, गुरजंट सिंह, रिंकू सिद्दीकी, सत्यनारायण तावणियां, कृष्ण छिम्पा,पूर्व पार्षद राजेन्द्र ताखर, पूर्व पार्षद सुरेन्द्र सिंह राठौड़, महिला मोर्चा अध्यक्ष प्रमिला भाटी, ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश वर्मा, लक्ष्मी नारायण तरड़, गिरधारी नाथ, अमरचंद नायक, कालुराम आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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सूरतगढ़। सूरतगढ़ नगरपालिका के चेयरमैन मास्टर ओमप्रकाश कालवा ने सीवरेज घोटाले को लेकर लगे आरोपों पर जांच में दूध का दूध और पानी का पानी होने का दावा किया है। शनिवार को भाजपा पार्षदों द्वारा लगाए गए धरने को हटाने के लिए पहुंचे कालवा ने कहा कि मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग जायज है। कालवा ने कहा कि “मैं हर तरह की जांच के लिए प्रयासरत रहूंगा और उन्हें किसी भी प्रकार का डर नहीं है।” कालवा का कहना था कि “अगर मैंने गलत किया होता या डर होता तो में आज सत्ता पक्ष को छोड़कर विपक्षी पार्टी में नहीं आता”। कालवा बोले कि “यह मेरी विल पावर है,मैंने गलत नहीं किया है और मुझे पूर्ण विश्वास है और इसीलिए मैं यहां आया हूं।”।

इससे पहले शुक्रवार को भाजपा में शामिल होने के बाद मीडिया को दिए गए बयानों में चेयरमैन कालवा ने मील परिवार पर गलत कामों को करने के लिए दबाव बनाने का सनसनीखेज आरोप लगाया था साथ ही उन्होंने काम नहीं करने देने के भी आरोप मील परिवार पर लगाए थे। हालांकि चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा ने उन गलत कामों,जिन्हें करने के लिए दवाब बनाने का आरोप वे लगा रहे थे, के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि मामला किसी जमीन संबंधित विवाद से जुड़ा है। हालांकि चेयरमैन कालवा के आरोपों को लेकर मील परिवार द्वारा अभी तक कोई सफाई नहीं दी गई है।

                     बहरहाल मील परिवार पर चेयरमैन कालवा द्वारा लगाए गए आरोप काफी सनसनीखेज है। चेयरमैन कालवा द्वारा भाजपा में शामिल होने और इन आरोपों से मील परिवार को राजनीतिक रूप से काफी बड़ा नुकसान पहुंचा है। चुनावी साल में चेयरमैन कालवा का कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लेना व्यक्तिगत रूप से मील परिवार के लिए बड़ी शिकस्त है। क्योंकि राजनीति में किसी भी राजनेता की छवि के बड़े मायने होते हैं। इसलिये चेयरमैन कालवा के आरोपों को लेकर चल रही अफवाहों को विराम देने के लिए मील परिवार को सामने आना चाहिए। 

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कालवा के भाजपा ज्वाइन करने से सदमे में कांग्रेस

सूरतगढ़। राजनीती के बारे कहा जाता है यह सम्भावनाओं की कला है। नगरपालिका चेयरमैन मास्टर ओमप्रकाश कालवा ने शुक्रवार को अचानक भाजपा ज्वाइन कर एक बार फिर इस बात पर मोहर लगा दी है। सीवरेज घोटाले में आरोपों से घिरे चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा को कुछ ही दिनों का मेहमान माना जा रहा है लेकिन मास्टरजी ने धोबी पछाड़ का वह दाव चला की राजनितिक धुरंधरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। अपनी तमाम खामियों के बावजूद इस अप्रत्याशित कदम से चेयरमैन कालवा ने यह साबित कर दिया है कि वह राजनीति के भी गुरु है। ऐसे में उनसे निपटने के लिए उनके विरोधियों को किसी अच्छे गुरुकुल में क्लास लेने की जरूरत है। राजनीति की पिच पर चेयरमैन कालवा की इस गुगली का जवाब उनके विरोधियों के पास फिलहाल नहीं दिख रहा है। ऐसे में चेयरमैन कालवा के इस थप्पड़ की गूंज उनके राजनीतिक विरोधियों को बहुत देर तक सुनाई देगी।

किंग मेकर बनकर उभरे विधायक रामप्रताप कासनिया

 इस पूरे घटनाक्रम में विधायक रामप्रताप कासनिया किंग मेकर बनकर उभरे है। विधायक कासनिया के लिए कालवा को शामिल करने का निर्णय आसान नहीं था वह भी तब जबकि उनकी ही पार्टी के 2 पार्षद चैयरमेन कालवा को हटाने की मुहिम छेड़े हुए थे। खुद कासनिया की स्कुल की जमीन और भाजपा पदाधिकारीयों की कॉलोनी की आड़ में कब्ज़े के आरोपों की चर्चाओं के बीच कालवा को पार्टी में शामिल करने से विधायक कासनिया पर गुप्त समझौते के आरोप लगेंगे, यह बात भी कासनिया जानते थे। फिर भी उन्होंने आरोपों और चर्चाओं को दरकिनार करते हुए कालवा को भाजपा ज्वाइन कराने का फैसला लिया।

हालांकि पर्दे के पीछे कसनिया की कूटनीतिक जीत और मील परिवार को राजनितिक पटखनी देने में सबसे बड़ी भूमिका नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा की रही है। चेयरमैन कालवा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों और भाजपा के ही पार्षदों के विरोध के चलते जब कासनिया असमंजस की स्थिति में थे तब मंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा ने ही चेयरमैन कालवा को पार्टी में लेने के लिए कासनिया को तैयार किया। कुल मिलाकर सुरेश मिश्रा इस प्रकरण में चाणक्य की भूमिका में रहे। मील परिवार को राजनीतिक शिकस्त देकर विधायक कासनिया किंग मेकर बने हैं वहीं पार्टी में सुरेश मिश्रा का भी कद बढ़ा है।

चुनावी साल में मील परिवार और कांग्रेस को बड़ा झटका

कांग्रेस के बात करें तो इस पुरे घटनाक्रम ने मील परिवार की राजनीति को बहुत बड़ा झटका दिया है। राजनीति में लंबा वक्त बिताने के बावजूद इस पूरे मामले को मील परिवार और उनके राजनितिक सलाहकारों ने नौसिखियों की तरह डील किया है। उसी का नतीजा रहा कि उन्होंने नगरपालिका में कांग्रेस के बहुमत वाले बोर्ड को थाली में परोस कर को भाजपा को दे दिया। भाजपा में जहाँ मंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा ने विधायक कासनिया को एज दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वहीं मील परिवार के सलाहकारों ने अपनी राजनितिक अज्ञानता से कांग्रेस और मील परिवार की लुटिया डुबो दी।

मील परिवार के सामने अब सबसे बड़ी समस्या है कि चुनावी साल में अगर वे नगरपालिका की राजनीति में उलझे रहे तो 2023 का सपना चकनाचूर हो सकता है। हालांकि हर गलती से व्यक्ति सबक ले सकता है उम्मीद की जानी चाहिए कि मील और उनके सलाहकार इस भूल से सबक लेंगे।

मील और कालवा का पॉलिटिकल झगड़ा शहर पर ना पड़े भारी

चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा के कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी का हाथ थामने से शहर की राजनीति में तूफान आ गया है। आने वाले दिनों में मील परिवार और चेयरमैन कालवा के बीच वर्चस्व की लड़ाई बढ़ती दिख रही है। ऐसे में इस लड़ाई का नुकसान शहर की जनता को भुगतना पड़ेगा। नगरपालिका में अव्यवस्था और  भ्रष्टाचार से पहले से ही शहर का आमजन परेशान हैं। अब इस लड़ाई से हालात और बिगड़ते दिख रहे है। दोनों पक्षों को चाहिए कि आपसी लड़ाई में शहर का विकास प्रभावित न होने दें।

वैसे अब गेंद मील परिवार के पाले में है कि वह नगरपालिका में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था दूर कर शहर के विकास में किस तरह की भूमिका अदा करते हैं। क्योंकि चेयरमैन कालवा अब एक तरह से विपक्ष में है और विक्टिम कार्ड खेल सकते हैं। कांग्रेस की सरकार और अधिकारियों से सहयोग नहीं मिलने की बात कह कर वे विकास की अपनी जिम्मेदारी से बच सकते है लेकिन मील परिवार नहीं। उम्मीद की जानी चाहिए कि दोनों पक्ष राजनीतिक परिपक्वता का परिचय देंगे ! 

– राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष- प्रेस क्लब, सूरतगढ़

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पिछले ढाई साल से पंजीयन शुल्क के रूप में वसूले जा रहे थे एक हज़ार रूपये

सूरतगढ़। सूरतगढ़ नगरपालिका में कहने को तो 45 पार्षद है जिनमे से भाजपा, माकपा और निर्दलीय सहित 22 पार्षद विपक्ष में है। लेकिन जब बात जनता के मुद्दों और भ्रष्टाचार पर बोलने की होती है तो दो तीन पार्षदों को छोड़कर आपके चुने हुए पक्ष और विपक्ष के सभी पार्षदों को सांप सूंघ जाता है। मामला विवाह पंजीयन शुल्क का ही लें। ज़ब नगरपालिका में चेयरमैन कालवा द्वारा विवाह पंजीयन शुल्क को ₹100 से बढ़ाकर 1000 रुपए करने का प्रस्ताव लाया गया तो आपके चुने हुए पार्षदों ने भेड़ों की तरह प्रस्ताव पर चर्चा किए बिना सीटें थपथपा दी और प्रस्ताव को पास कर दिया । ठीक वैसे ही जिस तरह से कोई गडरिया अपने डंडे से भेड़ों को किसी भी दिशा में इशारे मात्र से हाँक देता हैं और अगर उस दिशा में गड्ढा भी हो तो सारी की सारी भेड़ें गड्ढे में कूद पड़ती हैं। इस मामले में आप के चुने हुए पार्षदों का व्यवहार कुछ ऐसा ही था ।

इस प्रकरण में ज़ब हमने चेयरमैन कालवा से बात की तो उनका तर्क था कि लोग हजारों रुपए शादी में खर्च करते हैं क्या  ₹1000 फीस नहीं दे सकते ? शहर की जनता की जेब काटकर की गई इस लूट के खिलाफ जब हमने ‘खबर पॉलिटिक्स’ में आवाज उठाई तो अगली बैठक में माकपा के एकमात्र पार्षद मदन ओझा ने इस मुद्दे को उठाया। लेकिन नक्कारखाने में तूती की तरह उनकी आवाज भी दब कर रह गई। हां इतना जरूर हुआ कि उनके विरोध पर अनुसूचित जाति/ जनजाति के लिए विवाह पंजीयन की फीस को घटाकर 1000 से 500 कर दिया गया।

लेकिन इसके बाद से पिछले करीब ढाई  साल से यह लूट बदस्तूर जारी थी। लेकिन आपके लुटे हुए, डरे हुए और लालच के चलते सत्ताधारियों की चरण वंदना करने वाले पार्षदों को आपका बिल्कुल भी ख्याल नहीं आया। पर जैसा कि कहते हैं कि अन्याय का अंत होता है। देर से ही सही शहर में सीवरेज घोटाले को लेकर आवाज बुलंद कर रहे भाजपा के पार्षद हरीश दाधीच को मीडिया से इस मुद्दे की जानकारी मिली तो उन्होंने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर विवाह पंजीयन शुल्क को कम करने की मांग की। यहीं नहीं इसके बाद पार्षद हरीश दाधीच ने विवाह पंजीयन फीस को कम करने सहित 5 सूत्री मांगों को लेकर पालिका कार्यालय के सामने धरना शुरू कर दिया।

भाजपा के ही पार्षद राजीव चौहान भी इस मुहिम में शामिल हुए। इन दोनों पार्षदों के संघर्ष का नतीजा ये है कि पालिका प्रशासन ने आज इस नादिरशाही फरमान को बदलते हुए विवाह पंजीयन शुल्क हजार रूपये से  घटाकर 10 रूपये कर दी है। पालिका के नए आदेश के बाद से विवाह के 21 दिन तक महज ₹10 ही विवाह पंजीयन शुल्क के रूप में वसूले जाएंगे। वही 21 दिन बाद ₹100 शुल्क ही ली जाएगी।

यह आदेश हरीश दाधीच और राजीव चौहान के अलावा भाजपा और दूसरी पार्टियों के पार्षदों के लिए एक तमाचा है जो जनता से वोट लेकर सत्ताधारियों के हाज़रिये बन चुके है। शहर की जनता को भी सोचना चाहिए कि आपने किन कायरों को अपने वोट की ताकत सौंप दी है जो आपके हक और हुकूक की आवाज को नगरपालिका में बुलंद ही नहीं कर सकते। उम्मीद की जानी चाहिए जनता के वोट से मिली ताकत को अपने स्वार्थों के चलते गिरवी रख देने इन जनप्रतिनिधियों के चाल,चरित्र और चेहरे को जनता याद रखेगी। 

  • राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़  

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अजमेर दक्षिण विधायक अनिता भदेल के सूरतगढ़ पहुंचने पर स्वागत करते भाजयुमो कार्यकर्ता

सूरतगढ़। भारतीय जनता पार्टी की पूर्व मंत्री व अजमेर दक्षिण से विधायक अनिता भदेल का सूरतगढ़ पहुंचने पर भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। भाजयुमो के जिला महामंत्री विनोद सारस्वत के नेतृत्व में युवा मोर्चा व अन्य मोर्चा के कार्यकर्ताओं के साथ पुष्पगुच्छ भेंट कर विधायक का अभिनंदन किया। वहीं अमरनाथ लंगर सेवा समिति अध्यक्ष किशनस्वामी ने भगवान शिव की प्रतिमा भेंट की। विनोद सारस्वत ने कोंग्रेस की सरकार में निरंतर हो रहे पेपर लीक पर परीक्षार्थियों के भविष्य ओर उन पर पड़ रही आर्थिक मार को लेकर पूर्व मंत्री को अवगत कराया। तो मंडल उपाध्यक्ष प्रेम राठौड़ ने गाँवो में बिजली ओर पानी की समस्याओं के समाधान की मांग रखी। धानक़ा समाज अध्यक्ष गोपीराम दगल ने धानक समाज के द्वारा एस टी वर्ग में शामिल करने को लेकर चलाए जा रहे धरने प्रदर्शन की माँग को जायज़ बताते हुए समस्या हल करवाने की बात कही। इसके बाद विधायक भदेल भाई जी बाबा ही कार्यक्रम में शामिल होने के लिए घड़साना रवाना हो गई।

ये रहे मौजूद

स्वागत के दौरान योगेश स्वामी,बूथ अध्यक्ष दीपक अरोड़ा, पूर्व युवा मोर्चा उपाध्यक्ष संजीव गुप्ता, जगजीत सिंह, देवीसिंह यादव, महेंद्र सिंह निर्वाण, पूर्व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य माँगी छिम्पा, ओबीसी मोर्चा महामंत्री राजाराम सेन आदि उपस्थित रहे।

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आंखों पर पट्टी बांधकर हरियाणा में छोड़ा, ट्रक लेकर हुए फरार

पिस्तौल की नोक पर लूटा गया ट्रक

सादुलपुर। सादुलपुर के गांव थान मठुई के नजदीक बोलेरो में सवार लोगों ने एक ट्रक चालक और परिचालक को पिस्तौल की नोक पर बंधक बना लिया। आरोप है कि बदमाशों ने दोनों की आखो पर पट्टी बांधकर मोबाइल और 15 हजार रुपए लूट लिए व ट्रक छीन कर हरियाणा में छोड़कर फरार हो गए। सादुलपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर तत्परता दिखाते हुए महज दो-तीन घंटों के अंदर ही ट्रक को बरामद करने में कामयाबी हासिल कर ली है पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुट गई है ।

ये है मामला

सादुलपुर थानाधिकारी सुभाष चंद्र

पुलिस थानाधिकारी सुभाष चंद्र के अनुसार इस संबंध में ट्रक चालक सुनील कुमार जाति गडरिया उत्तर प्रदेश ने मामला दर्ज करवा कर बताया कि वह 21 फरवरी को दिल्ली से ट्रक में प्लास्टिक के खाली ड्रम लेकर नागौर से दिल्ली जाते समय बहल रोड पर स्थित गांव थान मठुई से निकल रहा था। इस दौरान सड़क पर ख़डी दो बोलेरो जीप जिसमें कुल तीन चार लोग बैठे थे ने ट्रक को रुकवाया तथा ड्राइवर कनेक्टर को ट्रक से नीचे उतारकर पिस्तौल दिखाकर बोलेरो गाड़ी में बैठा लिया। सुनील के मुताबिक बदमाशो ने दोनों को सड़क से दूर कच्चे रास्ते पर लेकर आंखों पर पट्टी बांध दी। उसके बाद जीप में सवार लोगो ने दो-तीन घंटे तक इधर-उधर घुमाते रहे फिर हमें बहल के पास हरियाणा में कच्चे रास्ते पर छोड़ दिया। बदमाशों ने उनकी जेब से जेब से मोबाइल व पैसे ले गए। सुनील के अनुसार वे जैसे तैसे थाने पहुंचे और घटना का मामला दर्ज करवाया।

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शिविर में रिकॉर्ड 1331 यूनिट रक्तदान

शिविर में रक्तदान करते समर्थक

सूरतगढ़। सुरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा टिकट के दावेदारों में एक नाम की चर्चा पिछले पंचायत समिति चुनाव के बाद लगातार चल रही थी। वो है पंचायत समिति सदस्य और युवा भाजपा नेता राहुल लेघा। 23 फ़रवरी यानि कि गुरुवार को अपने जन्मदिन पर विशाल रक्तदान शिविर के बहाने भीड़ जुटाकर इस युवा नेता ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर मोहर लगा दी है। बिश्नोई मंदिर धर्मशाला में आयोजित इस रक्तदान शिविर में भारी संख्या में युवाओं और नागरिकों की भीड़ उमड़ी। शिविर में रिकॉर्ड 1331 युनिट रक्त संग्रह शिविर की सफलता को बयान करता है। शिविर में जयपुर से आई संतोकबा दुलर्भ जी अस्पताल से टीम ने रक्त संग्रह किया।

शिविर में रक्तदान के लिए उमड़ी भीड़

रक्तदाताओं को हेलमेट देकर किया सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक

रक्तदान शिविर में नागरिकों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए प्रत्येक रक्तदाता को हेलमेट उपहार स्वरूप प्रदान किया गया। रक्तदान के साथ सड़क सुरक्षा की मुहीम के रूप में हेलमेट पाकर रक्तदाता भी खुश दिखे। शिविर में रक्तदाताओं के लिए विशेष अल्पाहार और दुध की व्यवस्था आयोजनकर्त्ताओं की ओर से की गई थी‌। शिविर मे अतिथियों और आमजन के मंनोरंजन के लिए आए राजस्थानी कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से लोगों का मनोरंजन किया।

भाजपा जिलाध्यक्ष सहित गणमान्य नागरिक रहे मौजूद

रक्तदान शिविर में श्रीगंगानगर भाजपा जिलाध्यक्ष आत्माराम तरड़ , पंचायत समिति के पूर्व प्रधान चंदुराम लेघा ,श्रीविजयनगर नगरपालिका अध्यक्ष राजेंद्र लेघा सहित बड़ी संख्या में भाजपा नेता व कार्यकर्त्ता मौजुद थे।

रक्तदान में उमड़ी भीड़ की चर्चा

युवा नेता राहुल‌ लेघा के जन्मदिवस पर हुए इस आयोजन में उमड़ी भीड़ की राजनितिक गलियारों में चर्चा रही। शिविर में बड़े स्तर पर रक्तदान और रक्तदान के लिए बड़ी संख्या में उमड़े लोगों से चुनावी वर्ष में सुरतगढ़ की राजनिती को गरमा दिया है। वहीं राहुल लेघा की मज़बूत दावेदारी को लेकर संशय को समाप्त कर दिया है।

राहुल लेघा ने रक्तदाताओं का जताया आभार

युवा‌ नेता राहुल लेघा ने भव्य आयोजन के लिए समर्थकों और बड़ी संख्या में रक्तदान के लिए रक्तदाताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया‌। लेघा ने समर्थकों के इस प्यार और मोहब्बत को अपनी ताकत बताया और सेवा के लिए हर संभव और हर समय उपस्थित रहने का वादा किया।

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मध्यप्रदेश से हथियार लाकर बेचने की फिराक में थे आरोपी

सिटी पुलिस द्वारा अवैध हथियारों के साथ पकड़े गए आरोपी युवक

सूरतगढ़। शहर के टैगोर कॉलेज के नजदीक पिछले दिनों हुई फायरिंग के मामले में जुटी सिटी थाना पुलिस की टीम को तीन युवकों को अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार करने में सफलता मिली है। पुलिस ने तीनों आरोपियों के कब्जे से मध्यप्रदेश में निर्मित 3 अवैध पिस्तौल की बरामद किए हैं।

सिटी थाना के एसआई मोटाराम के नेतृत्व में गठित एक टीम ने मुलजिमान की तलाश के दौरान मंगलवार रात्रि में बीकानेर रोड स्थित टिड्डी दल ऑफिस के पास दबिश देकर दो संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार किया। पुलिस नें पकड़े गए युवक पंकज शर्मा पुत्र चन्द्रभान उम्र 28 वर्ष निवासी अर्जुनसर व रामचन्द्र स्वामी पुत्र इंद्राज़ स्वामी जाति स्वामी उम्र 19 वर्ष निवासी गांव कपुरीसर, पुलिस थाना कालू, जिला बीकानेर के कब्जे से दो अवैध देशी पिस्तौल जब्त किये ।

वहीं दूसरी ओर एएसआई ताराचंद के नेतृत्व में गठित टीम ने स्टेडियम ग्राउंड के पास नवरतन गोदारा पुत्र महेंद्र कुमार जाति जाट उम्र 20 वर्ष निवासी कपुरीसर पुलिस थाना कालू कों गिरफ्तार कर युवक के कब्जे से एक अवैध देशी पिस्तौल जब्त किया। पुलिस ने फिलहाल दोनों मामलों में पकड़े गए युवकों के विरुद्ध आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

हथियारों कों बेचने की फिराक में थे तीनों युवक

सीआई कृष्ण कुमार के अनुसार तीनों आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि आरोपी अवैध हथियार मध्यप्रदेश के खरगोन से लाए थे और इन हथियारों को बेचने की फिराक में थे। पुलिस फिलहाल तीनों आरोपियों का रिमांड लेकर पूछताछ का प्रयास करेगी जिससे की हथियारों के पूरे गिरोह का खुलासा हो सके।

हैड कांस्टेबल दुर्गादत्त की रही विशेष भूमिका

सिटी थाना पुलिस की उक्त कार्यवाही में हैड कांस्टेबल दुर्गादत्त (नम्बर 2100) की विशेष भूमिका रही । पुलिस अधिकारीयों के अनुसार दुर्गादत्त की सूचना के आधार पर ही अवैध हथियार सहित युवकों की धरपकङ की कार्यवाही की गई ।

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मजमा देखना पड़ गया भारी,थर्मल से चोरी स्क्रैप से भरी बोलेरो पकड़ी

थर्मल प्रबंधन और सीआईएसएफ अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है स्क्रैप चोरी का गिरोह ?

सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट

सूरतगढ़। सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट से स्क्रैप चोरी का गोरखधंधा लंबे समय से चल रहा है। परन्तु थर्मल प्रशासन और सीआईएसएफ की मिलीभगत के चलते अधिकांश मामले बाहर ही नहीं आ पाते। लेकिन प्लांट प्रबंधन और सीआईएसएफ की बदकिस्मती कहें या फिर चोरों की, 2 दिन पूर्व सुपर क्रिटिकल थर्मल प्लांट से स्क्रैप चोरी का मामला फिर सामने आ गया। प्लांट से स्क्रैप भरकर निकली बोलेरो में सवार चोरों को मजमा देखना भारी पड़ गया और वे पुलिस के हत्थे चढ़ गए। जिसके बाद प्लांट से स्क्रैप चोरी का मामला उजागर हो गया।

                सूत्रों के अनुसार हुआ यूं कि 31 दिसम्बर को सुपर क्रिटिकल थर्मल प्लांट से 0208 नंबर की बोलेरो गाड़ी में स्क्रैप भरकर चोर प्रबंधन और सीआईएसएफ की मेहरबानी से चोरी किए गए स्क्रैप को ठिकाने लगाने के लिए सूरतगढ़ की ओर रवाना हुए। देर शाम को जब चोर शहर के इंदिरा सर्किल के पास पहुंचे तो अपेक्स हॉस्पिटल के पास दो पक्षों में झगड़ा हो रहा था। क्योंकि हम भारत के लोग मजमे के बड़े शौकीन हैं तो कहीं भी भीड़ लगी हो तमाशा देखने लग जाते हैं। तो बोलेरो में सवार चोरों ने भी अपनी गाड़ी रोक दी और झगड़ा देखने लग गये। इस बीच झगड़े में मार खाने वाले एक पक्ष को बोलेरो में दूसरे पक्ष के बदमाश होने का शक हो गया। जिसके बाद किसी ने सूरतगढ़ सिटी पुलिस को सूचना दे दी। सूचना पर सिटी थाना पुलिस ने मौके पर पहुंच बदमाशों से पूछताछ की तो बदमाश बोलेरो में भरे स्क्रैप को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। थर्मल प्लांट का स्क्रैप होने के संदेह के चलते सिटी पुलिस ने थर्मल पुलिस चौकी और राजियासर थाना पुलिस को सूचना दे दी।

हालांकि सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने मौके से दो व्यक्तियों को पकड़ा था लेकिन एक व्यक्ति पर ही कार्रवाई की गयी और वह भी शांति भंग के आरोप में। इस मामले में पुलिस ने थर्मल से चोरी का स्क्रैप होने की बात जानते हुए हुए भी मामले की तह में न जाकर शांति भंग के आरोप में ही कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे है ?

क्रिटिकल थर्मल प्लांट प्रबंधन और सीआईएसएफ की भूमिका संदिग्ध

इस मामले में सीआईएसएफ और प्लांट प्रबंधन की भूमिका भी संदिग्ध है। क्योंकि जब इस मामले में प्लांट के मुख्य अभियंता एके बोहरा से अगले दिन बात की गई तो उनका कहना था कि सीआईएसएफ मामले की जांच कर रही है उन्हें अभी पता नहीं है कि स्क्रैप किस प्लांट का है ? प्लांट के मुख्य अभियंता की यह बयांन अपने आप में ही संदेह पैदा करता है। क्योंकि यह बात तो बच्चे बच्चे को मालूम है कि स्क्रैप सुपर क्रिटिकल थर्मल प्लांट का है। इसके अलावा सवाल यह भी है कि क्या सीआईएसफ को घटना के 24 घंटे बाद भी पता नहीं चला कि 0208 नंबर की बोलेरो किस प्लांट में घुसी और निकली है। जबकि प्लांट में आने जाने वाले प्रत्येक वाहन की गेट पर खुद सीआईएसफ द्वारा एंट्री की जाती है ? इसके अलावा सीआईएसफ अधिकारियों की मिलीभगत का सवाल इसलिए भी उठता है कि आखिर 0208 नंबर की जिस बोलेरो से स्क्रैप चोरी हुआ है वह गाड़ी अनुबंधित ही नहीं थी तो फिर बिना अनुबंध के गाड़ी को सीआईएसएफ ने थर्मल में एंट्री क्यों और किसके दबाव में दी ? 

साफ है कि प्लांट प्रबंधन और सीआईएसफ के कुछ अधिकारी भी कहीं ना कहीं चोरी के इस नेक्सस के साथ इंवॉल्व है। प्लांट प्रबंधन की चोरी के इस गंभीर मामले में चुप्पी को देखते हुए लगता यही है कि प्रबंधन और सीआईएसफ इस मामले को दबाना चाहता है।

गंभीर जांच से हो सकता है बड़ा खुलासा, कई चेहरे हो सकते हैं बेनकाब ?

थर्मल प्लांट से बोलेरो गाड़ी में स्क्रैप चोरी के इस मामले में प्लांट प्रबंधन, सीआईएसएफ और राजियासर पुलिस का जिस तरह का रवैया रहा है, उससे लगता नहीं है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो पाएगी। सूत्रों की माने तो प्लांट से चोरी किये गये इस स्क्रैप को किसी कबाडिये का बताकर मामले को सेटल करने की तैयारी चल रही है। जिसका सीधा सा अर्थ है कि स्क्रैप चोरी के इस मामले को भी दबा दिया जाएगा। हालांकि मीडिया में आने के चलते इस मामले को दबाना प्लांट प्रबंधन पर भारी भी पड़ सकता है।

थर्मल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक थर्मल के नजदीक लगते गाँवो में स्क्रैप चोरी करने वाले गिरोह के तार जुड़े हुए हैं। इन लोगों ने प्लांट में गाड़ियां अनुबंधित कर रखी है या फिर इन गाड़ियों के चालकों से सेटिंग कर रखी है और इन्ही अनुबंधित गाड़ियों से थर्मल से स्क्रैप चोरी कर सीआईएसफ अधिकारियों से मिलीभगत कर बड़ी आसानी से बाहर लाया जाता है। वैसे जिस 0208 नंबर की बोलेरो गाड़ी का स्क्रैप चोरी के ताजा मामले में इंवॉल्वमेंट सामने आ रहा है वह गाड़ी थर्मल के नजदीक करड़ू गांव के किसी व्यक्ति की है जो गत वर्ष प्लांट में अनुबंधित बताई जा रही है ।

बहरहाल तमाम सवालों के बीच अगर इस मामले की गंभीरता से जांच की जाए तो थर्मल से स्क्रैप चोरी के चोरी के बहुत बड़े गिरोह का खुलासा हो सकता है। इसके साथ ही प्लांट प्रबंधन और सीआईएसएफ के कई अधिकारी जो कि चोरी के माल को डकारे जा रहे हैं उनका काला चेहरा भी सामने आ सकता है।

– राजेंद्र पटावरी (जैन), उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब,सूरतगढ़।

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शहर में अतिक्रमियों की पैरवी की नई राजनीति, पूर्व विधायक से लें सबक

अवैध अतिक्रमण हटाने के विरोध में तहसीलदार को ज्ञापन देते राजनेता

सूरतगढ़। शहर में अतिक्रमणो के आरोपों से घिरे नगरपालिका प्रशासन द्वारा अवैध अतिक्रमणो के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। पालिका प्रशासन द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की प्रशंसा की जानी चाहिए थी । लेकिन इस मामले में शहर के कुछ राजनेताओं का दोहरा रवैया सामने आ रहा है। पालिका प्रशासन पर अवैध अतिक्रमणो में मिलीभगत का आरोप लगाने वाले ये  नेता अब अतिकर्मियों के पैरोकार बनकर खड़े हो रहे हैं। इन नेताओं का ये रवैया हैरान करने वाला है। माना की चुनावी साल है और कोई भी नेता राजनीति करने का कोई भी अवसर नहीं चूकना चाहता। लेकिन क्या इसका मतलब ये है राजनीति चमकाने के लिए राजनेता गलत लोगों के साथ भी खड़े हो जाए ?

वार्ड -4 के मामले से भी राजनेताओं ने नहीं लिया सबक 

पिछले दिनों भी वार्ड नंबर-4 के मामले में क्षेत्र के जिम्मेदार नेताओं ने गरीबों के घर उजाड़ने के नाम पर लगातार बवाल काटा। जिम्मेदार नेताओं के इस बवाल के बाद उपखंड कार्यालय में हुई वार्ता में नगरपालिका अध्यक्ष ने गैरजिम्मेदार रवैया अपनाते हुए पार्टी के ही एक नेता को नीचा दिखाने की कवायद में बड़बोले बयान दे डालें और तोड़े गए मकानों के पुनर्निर्माण और वार्ड में 25 लाख  रुपए विकास कार्यों पर खर्च करने की घोषणा कर डाली। इस घोषणा से मामले के अग़वा नेताओं ने सोशल मीडिया पर अपनी जीत का जश्न भी मनाना शुरू कर दिया। परन्तु भला हो जिला प्रशासन का जिसकी तत्परता के चलते अतिक्रमियों के द्वारा किये जा रहे पुनर्निर्माण पर रोक लगा दी।

वैसे अगर जिला कलेक्टर के उस आदेश का संदेश सही तौर पर समझा जाए तो यह एक तरह से पालिकाध्यक्ष के साथ-साथ उन नेताओं के लिये एक तरह का तमाचा ही था जो अतिकर्मियों का पैरोकार बन कर खड़े हुए थे। जिला कलेक्टर के इस निर्णय ने एक तरह से यह भी साफ कर दिया कि सरकारी भूमि का कब्ज़ा खरीद लेने से भी कोई व्यक्ति उसका मालिक नहीं बन जाता ? दूसरी बात यह भी है कि प्रशासन का कोई नुमाइंदा या कोई भी नेता सरकारी भूमि से हटाए गए अतिक्रमण का पुनर्निर्माण नहीं करवा सकता, यह बात भी एक तरह से जिला प्रशासन ने साफ कर दी।

              लेकिन लगता है कि वार्ड नंबर-4 के मामले से भी राजनीति के अखाड़े में दंगल जीतने की ख्वाहिश रखने वाले नेताओं ने सबक नहीं लिया है । शायद यही वजह है कि हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में 2 दिन पूर्व पालिका प्रशासन द्वारा हटाए गए एक अवैध अतिक्रमण के मामले में फिर से शहर के कुछ नेता अतिक्रमी की पैरवी में जुटे हैं।

अतिक्रमण हटाने के विरोध में पूर्व फौजी का कांग्रेस को कोसना क्या है जायज ?

प्रशासन को फौजी मुकेश स्वामी द्वारा दिया गया ज्ञापन

इस प्रकरण में खुद को पूर्व फौजी (मुकेश स्वामी) बताने वाले व्यक्ति ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में स्वयं  स्वीकार किया गया है कि उसने कब्जा खरीदा है। खुद को पूर्व फौजी बताने वाला व्यक्ति सोशल मीडिया पर कांग्रेस सरकार को कोस रहा है। पर क्या कोई बता सकता है कि अपने सेवाकाल में अनुशासन का पाठ पढ़ने और उसका पालन करने वाले पूर्व फ़ौजी द्वारा सरकारी भूमि का कब्जा खरीदना क्या कानून का अनुशासन तोड़ना नहीं है।

क्या एक फौजी को इतनी भी जानकारी नहीं है कि किसी व्यक्ति के करोड़ों रुपए किसी व्यक्ति कों देकर ताजमहल खरीदने से भी वह ताजमहल का मालिक नहीं बन जाता ? हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र के जिस भूखंड से अतिक्रमण हटाया गया है उस भूखंड की कीमत लाखों रुपए है ऐसे में यह क्रिस्टल क्लियर है कि फ़ौजी को भी एक रुपए की चार अठन्नी चाहिए थी।

अतिक्रमण हटाने पर फौजी द्वारा सोशल मीडिया पर कांग्रेस कों कोसने का वायरल स्क्रीनशॉट

भूमाफियों की पैरवी बंद कर दें या फिर प्रशासन कों कोसना बंद कर दे राजनीतिज्ञ

कुल मिलाकर इस मामले में मुकेश स्वामी (फ़ौजी) नामक व्यक्ति की पैरवी करने वाले नेता क्या ठीक वही गलती ही नहीं कर रहे, जैसी कि उन्होंने वार्ड नंबर-4 के मामले में की थी। साफ है कि राजनेताओं ने अपनी पिछली गलतियों से सबक नहीं लिया है।

          बहरहाल  जिस व्यक्ति का आर्थिक नुकसान होता है उसका रोना तो सही है। लेकिन जो राजनेता ऐसे मामलों में वोट की राजनीति के नाम पर बिना सोचे समझे कूद पड़ते हैं उन लोगों कों अवैध अतिक्रमणो के मामले में गरीबी का नकाब ओढ़े भूमाफियाओं की पैरवी बंद कर देनी चाहिए या फिर आज के बाद नगरपालिका प्रशासन और सत्ताधारी नेताओं पर अवैध कब्जे कराने का आरोप लगाना बंद कर देना चाहिए ! वैसे राजनेताओं कों एक सलाह यह भी है कि उन्हें किसी भी अतिकर्मी की पैरवी से पहले अतिकर्मियों का पिछला इतिहास भी खंगाल लेना चाहिए। कहीं हिरण की खाल में छुपे भेड़िए की तरह यहां भी कोई अतिक्रमी गरीब के वेश में ना हो।

पूर्व विधायक राजेंद्र भादू से लें सकतें है सबक !

अतिक्रमणो के मामले में अतिकर्मियों की पैरवी कर अपनी राजनीति चमकाने की कवायद में जुटे राजनेताओं को पूर्व विधायक राजेंद्र भादू से सबक लेना चाहिए। पूर्व विधायक राजेंद्र भादू ने अपने कार्यकाल में सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमणो के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई। अब जब वह विधायक नहीं है तब भी वे अतिक्रमणो के खिलाफ ही नजर आए हैं। अतिक्रमण हटाने के मामलों में उन्होंने कभी भी भूमाफियाओं का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष सहयोग नहीं किया है। राजनीति में एक लंबा अनुभव रखने वाले पूर्व विधायक सम्भवतः ये जानते है कि अतिकर्मियों का साथ देना कहीं ना कहीं समाजकंटकों का साथ देना है। इसलिए आंदोलनों से राजनीति साधने का सपना देखने वाले नेताओं को अतिक्रमणो के मामले में पूर्व विधायक राजेंद्र भादू कों रोल मॉडल मान लेना चाहिए।

अतिक्रमणो के खिलाफ अभियान जारी रहने की जरूरत

सत्ता पक्ष के कांग्रेस नेताओं और मील परिवार ने पूर्व विधायक की तरह देर से ही सही मगर अवैध अतिक्रमणो के खिलाफ जो जीरो टॉलरेंस की नीति को अडॉप्ट की है। उसका नतीजा आने वाले समय में और कई बड़ी कार्रवाईयों के रूप में देखने कों मिलेगा। निश्चय ही इससे मील परिवार को राजनीतिक लाभ मिलने के साथ ही सूरतगढ़ शहर का भला होगा ! इसलिए जरूरी है अतिकर्मियों के खिलाफ यह अभियान जारी रहे।

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पुरानी धान मंडी में विभिन्न प्रतिभागियों को पुरस्कृत करते अतिथि

सूरतगढ़। कन्याकुमारी में विवेकानंद केंद्र की स्थापना की 50 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा विवेकानंद संदेश यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। सांस्कृतिक संस्था भारत विकास परिषद को इस यात्रा के सफल आयोजन का दायित्व सौंपा गया है। कन्याकुमारी से शुरू हुआ विवेकानंद संदेश यात्रा रथ मंगलवार को सूरतगढ़ पहुंचा। भारत विकास परिषद सूरतगढ़ की और से आयोजन समिति के संयोजक घनश्याम शर्मा एवं रमेश आसवानी ने बताया कि विवेकानंद रथयात्रा अग्रसेन भवन से चलकर शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई पुरानी धान मंडी में पहुंची।

अग्रसेन भवन से रवाना होती विवेकानंद संदेश यात्रा

यात्रा का जगह-जगह स्वागत, भगवा पोशाक पहने बच्चे बने आकर्षण का केंद्र

रथयात्रा का शहर में जगह जगह पर समाज के सभी वर्ग के लोगों द्वारा पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। विवेकानंद यात्रा में लगभग 100 यूथ स्वामी विवेकानंद की वेशभूषा में और इतनी ही मातृशक्ति भगवा साफा पहन कर विवेकानंद संदेश यात्रा यात्रा मैं साथ साथ चले । यात्रा में सबसे आगे बुलेट गाड़ी पर एडवोकेट पूनम शर्मा एवं निशा दुआ तिरंगा झंडा लेकर स्वामी विवेकानंद जी की 15 फुट लंबी प्रतिमा के साथ साथ चल रही थी।

मुख्य बाजार से होते हुए दोपहर करीब 3:00 बजे संदेश यात्रा पुराने धान मंडी पहुंची। जहाँ एक गोष्ठी का आयोजन किया गया,जिसमें संदेश यात्रा के साथ आई हुई टीम ने एक लघु नाटिका प्रस्तुत की। लघु नाटिका के माध्यम से यह समझाया गया कि स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शो पर चलकर किस तरह से आतंकवाद भ्रष्टाचार और आलस्य को ईमानदारी और आध्यात्मिकता से संगठित होकर खत्म किया जा सकता है।

स्वामीजी की जीवनी पर डाला प्रकाश, बच्चों को दिए पुरस्कार

राजस्थान में संदेश यात्रा के संयोजक अशोक खंडेलवाल एवम शिक्षाविद प्रवीण भाटिया द्वारा कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर प्रकाश डाला गया। सूरतगढ़ शहर के लगभग 15 विद्यालयों में स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर निबंध,चित्रकला, भाषण प्रतियोगिता में प्रथम,द्वितीय व तृतीय आने वाले सभी विद्यार्थियों को कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।परिषद अध्यक्ष अंकुर लड़ोईया द्वारा आए हुए सभी प्रबुद्ध जनों का आभार व्यक्त किया गया।इस दौरान विधायक रामप्रताप कासनिया,पूर्व विधायक अशोक नागपाल, जिला परिषद लोकपाल अनिल धानुका, पूर्व पालिका चेयरमैन आरती शर्मा,काजल छाबड़ा और किसान नेता नरेन्द्र घिंटाला,राकेश बिश्नोई, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, पार्षद हरीश दाधीच, पार्षद राजीव प्रताप चौहान,अशोक आसेरी, विनोद सारस्वत व प्रेम सिंह राठौड़ मौजूद रहे।

यात्रा के दौरान यह भी रहे मौजूद

कार्यक्रम में भारत विकास परिषद प्रांतीय अध्यक्ष मोटाराम चाचाण संरक्षक डॉक्टर के एल बंसल प्रवीण भाटिया, घनश्याम शर्मा, रमेश असवानी,सुरजा राम कारगवाल,अशोक मखीजा, सचिन जेटली, शिव शंकर सोमानी,मुकेश सोनी, पवन खुराना,सौरव आहूजा देवेंद्र शर्मा,सुनील सिंघल, प्रिंस वासुदेव, विपुल गुप्ता, नवीन खेमका, नवीन गुप्ता, राजेंद्र सारस्वत,सुरेश कोठारी सहित शहर के अनेको संगठनों के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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युवा मोर्चा ने फूंका पाकिस्तान के विदेश मंत्री का पुतला, किया विरोध प्रदर्शन

महाराणा प्रताप चौक पर पाक विदेश मंत्री का पुतला फूंकते भाजयुमो कार्यकर्ता

सूरतगढ़। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल जरदारी के बयान को लेकर भारतीय जनता युवा मोर्चा ने आज भारत माता चौक पर आक्रोश जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया। मोर्चा के जिला महामंत्री विनोद सारस्वत के नेतृत्व में भाजयुमो कार्यकर्त्ताओं ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल ज़रदारी का पुतला व पाकिस्तान का झंडा जलाकर विरोध जताया। इस मौके पर युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान मुर्दाबाद, विदेश मंत्री मुर्दाबाद के नारे लगाए। इस मौके पर विधायक राम प्रताप कासनिया,पूर्व विधायक अशोक नागपाल,नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा,सुभाष गुप्ता, इंजीनियर अशोक आसेरी, पूर्व पार्षद रामकुमार स्वामी,भाजयुमो नगर उपाध्यक्ष प्रेम सिंह राठौड़, महेन्द्र निर्वाण, रेवंतराम शर्मा, दीपक छाबड़ा, सुभाष सोनगरा, मुकेश स्वामी, प्रदीप चौहान, ललित मोहता, योगेश स्वामी,मांगीलाल छिंपा, गोपीराम दग्गल आदि उपस्थित रहे।

बिलावल की टिप्पणी को बताया कायरतापूर्ण

भाजपा जिला उपाध्यक्ष शरणपाल सिंह मान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व में भारत की पहचान एक सशक्त राष्ट्र के रूप में हैं। पाकिस्तान विदेश मंत्री ने जिस तरह से पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर बयान दिया है, उससे संपूर्ण भारत में काफ़ी रोष है। वहीं मोर्चा के जिला महामंत्री विनोद सारस्वत ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने आपत्तिजनक व कायरतापूर्ण टिप्पणी की है। भारत देश के प्रधानमंत्री का अपमान नहीं सहेगा।पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था और अराजकता को छिपाने के लिए वह वैश्विक स्तर से ध्यान हटाने के लिए ऐसी टिप्पणी का सहारा ले रहा है।

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निज़ाम की खिसकती दीवारें और अतिक्रमण टूटने से निकलती चीखों की चर्चा

एनएच-62 पर टिड्डी दल कार्यालय से पहले हटाया गया चर्चित अतिक्रमण

सूरतगढ़। एक पुरानी और काफी चर्चित कहावत है ‘जब निज़ाम की दीवारें खिसकती है तो पहली आफत रंडीयों पर आती है’। अब नेशनल हाईवे पर टिड्डी दल से पहले चर्चित अतिक्रमण हटाने के मामले को ही लें। नगरपालिका चेयरमैन मास्टर ओमप्रकाश कालवा की अप्रत्यक्ष भागीदारी की चर्चाओं के चलते हाईवे पर अतिक्रमणो को लेकर मील परिवार की लगातार आलोचना हो रही थी। जिसके बाद गत दिनों कांग्रेस के एक युवा नेता के निर्देश पर राजस्व प्रशासन ने हाइवे पर कमरे व चारदीवारी सहित अतिक्रमण को हटाकर कई बीघा राजस्व रकबा खाली करवाया।

क्यूंकि इस मामले में चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा का इंट्रेस्ट अतिक्रमण को बचाने का था तो ऐसे में यह अतिक्रमण हटना चेयरमैन कालवा के लिये काफ़ी बड़ा झटका माना जा रहा हैं। लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से केवल चेयरमैन कालवा को ही झटका नहीं लगा है बल्कि एक आरपीएस अधिकारी और एक आरएएस अधिकारी को भी जोर का झटका धीरे से लगा है। इनमें से आरपीएस अधिकारी को थोड़े समय पहले ही जिले से बाहर भेजा गया है तो वही आरएएस अधिकारी अभी भी जिले में ही अपनी सेवाएं दें रहे है।

               बताया जा रहा है कि कुछ महीनो पहले जब करोड़ों रुपए की इस भूमि को हड़पने की कोशिश की जा रही थी उस समय विवाद के चलते मामला पुलिस और प्रशासन तक पहुंच गया था। क्योंकि मामला बेशकीमती सरकारी भूमि पर अतिक्रमण से जुड़ा था तो मास्टरमाइंड ने अधिकारियों का फेवर हासिल करने के लिए ‘माधिये’ के जरिये अधिकारीयों को लूट की जमीन का एक टुकड़ा ऑफर कर दिया। अब आप भी समझते हैं कि हाईवे पर जमीन के छोटे से छोटे टुकड़े की भी कीमत करोड़ों में है तो दोनों अधिकारियों ने जमीन के टुकड़े की एवज में अपना ईमान गिरवी रख दिया। जिसके बाद पुलिस और प्रशासन द्वारा ‘माधिये’ का फेवर किए जाने से मामला एकबारगी ठंडे बस्ते में चला गया।

परन्तु जैसे कि कहा जाता है पाप का घड़ा जरूर भरता है तो अब सत्ता के नशे में डूबे साहब के निज़ाम की दीवारें खिसकना शुरू हो गई है ऐसे में रंडीयों पर आफत आना तय है ?

मास्टरमाइंड के खाकी को ठेंगा दिखाने की भी चर्चा, 

हालांकि खबर यह भी है कि आरपीएस का ज्यों ही तबादला हुआ तभी अतिक्रमण के असली मास्टरमाइंड ने माधिये को कहकर खाकी वाले साहब को ठेंगा दिखा दिया था। वैसे खाकी के इन बड़े साहब की इमेज अपने महकमे में काफी समझदार ऑफिसर की रही है लेकिन इस मामले में वह भी ‘माधिये’ के पीछे मौजूद मास्टरमाइंड का काला दिमाग पढ़ने में मात खा गये। ऐसे में अतिक्रमण हटने से संभव है कि खाकी वाले साहब का दुख जरूर कुछ कम हुआ हो। परंतु आरएएस अधिकारी के लिये तो यह बड़ा झटका है। लेकिन पिक्चर अभी बाकी है दोस्तों, बताया जा रहा है कि मास्टरमाइंड की मुंडी इन्हीं बड़े साहब के हाथ में है। क्यूंकि मास्टरमाइंड द्वारा फैलाई गई गंदगी की जांच साहब को ही करनी है तो सम्भव है कि बड़े साहब इस नुकसान की भरपाई गंदगी वाले प्रोजेक्ट पर पर्दा डालकर कर ले।

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चेयरमैन कालवा से मील परिवार ने किया किनारा, कांग्रेस नेता से उलझना पड़ा भारी

सूरतगढ़। अपनी गुगली से दुश्मनों को परेशान रखने वाले नगरपालिका चेयरमैन ओम कालवा इन दिनों विरोधियों के बाउंसरों से परेशान हैं। बुधवार को कालवा का दायां हाथ माने जाने वाले सहायक लेखाकर सुनील मेघवाल को एपीओ कर दिया गया। चेयरमैन कालवा के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि कालवा कहां तो पिछले लंबे समय से लेखाकार सुनील को ईओ का चार्ज दिलवाने की कोशिश में थे और कहां उसे एपीओ कर दिया गया है। इतना ही नहीं पीलीबंगा से वरिष्ठ लिपिक केवल कृष्ण को भी सूरतगढ़ नगरपालिका में लगा दिया गया है। केवल कृष्ण की नियुक्ति भी एक तरह से चेयरमैन कालवा के लिए खून का घूंट पीने समान ही है। क्यूंकि चेयरमैन कालवा ने ही केवल कृष्ण को नगरपालिका से बाहर का रास्ता दिखाया था।

दूसरी और पिछले कुछ दिनों से शहर में अतिक्रमणो के विरुद्ध लगातार जो कार्रवाईयां की जा रही है उन्होंने भी चेयरमैन कालवा की नींद हराम कर दी है। क्यूंकि इन बेशकीमती अतिक्रमणो के पीछे मास्टरजी की अप्रत्यक्ष भूमिका की बात निकल कर सामने आ रही है। वार्ड नंबर 4 में अतिक्रमण हटाने के मामले में चेयरमैन कालवा की भूमिका कुछ-कुछ इस संदेह को मज़बूत कर रही है ।

इस मामले ने वार्ता के दौरान चेयरमैन कालवा ने न केवल अतिक्रमियों को पुनर्निर्माण की छूट दे दी बल्कि नगरपालिका द्वारा वार्ड में 25 लाख रुपए के विकास कार्यों की घोषणा भी कर दी। इतना ही नहीं अतिक्रमण टूटने का चेयरमैन साहब को इस कदर गुस्सा था कि उन्होंने कांग्रेस नेता जिनके निर्देश पर अतिक्रमण हटाए गए उनको ही खुली चेतावनी देते हुए कार्रवाई की बात कह दी। चेयरमैन कालवा यह भी भूल गए कि इन्ही कांग्रेस नेता और उनके परिवार की बदौलत ही वे चेयरमैन की कुर्सी पर विराजमान है।

इस घटना को मील परिवार ने गंभीरता से लिया है। शायद यही वजह है कि मील परिवार द्वारा बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेयरमैन कालवा को बुलाया ही नहीं गया। वरना पिछले दो-तीन सालों से पूर्व विधायक गंगाजल मील के साथ साए की तरह नजर आते थे।

सबसे बड़ी बात यह भी है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में सार्वजनिक रूप से पूर्व विधायक चेयरमैन कालवा से किनारा करते दिखे। उन्होंने नगरपालिका में हो रहे गलत कार्यों के लिए सीधे चेयरमैन को उत्तरदायी ठहराते हुए कहा कि ‘हमारा गलत कामों से कोई लेना देना नहीं है, हम चेयरमैन के किसी भी गलत काम के साथ नहीं है’। पूर्व विधायक का यह बयान चेयरमैन कालवा के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है। क्योंकि इस बयान के जरिए मील परिवार ने साफ कर दिया है कि अब नगरपालिका में चल रहे भ्रष्टाचार और चेयरमैन के निरंकुश रवैये को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसके अलावा पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीवरेज घोटाले में चेयरमैन ओम कालवा पर आरोपों को दोहरा कर मामला गर्मा दिया है। उन्होंने चेयरमैन कालवा को हटाने की मांग भी कर डाली है।

क्या चेयरमैन कालवा को ले डूबा उनका अहंकार ?

एक पुरानी कहावत है कि अगर बंदर के हाथ हल्दी की गांठ लग जाए तो वह खुद को पंसारी समझने लगता है। सूरतगढ़ नगरपालिका के चेयरमैन मास्टर ओमप्रकाश कालवा के मामलें में भी कुछ ऐसा ही है। नगरपालिका का चेयरमैन बनने के बाद से मास्टरजी अहंकार का शिकार हो गए। मास्टरजी पर गुरुर इस कदर हावी हो गया कि वे खुद को सुप्रीमो समझने लगे। इसी मुगालते में मास्टरजी ने कभी कर्मचारियों -कर्मचारियों में विवाद करवाए तो कभी पार्षदों-कर्मचारियों और पार्षदों के आपसी विवादों को हवा दी। अपने गुरुर के वशीभूत मास्टर जी ने व्यापारियों और सफाईकर्मियों के विवाद में नकारात्मक रवैया अपनाते हुए कांग्रेस नेता हनुमान मील के प्रयासों पर पानी फेरते विवाद को जानबूझकर सुलटने नहीं दिया।

‘जब नाश मनुज पर छाता है पहले विवेक मर जाता है’ की तर्ज़ पर मास्टरजी प्रेस को भी सबक सिखाने का वहम पाल बैठे और एक यूट्यूबर को मानहानि की धमकी तक दे डाली। मास्टरजी भूल गये कि राजनीति में वही नेता कामयाब हुआ है जिसके  मीडिया के साथ मधुर संबंध रहे हैं। ये अलग बात है कि उन्होंने मीडिया कर्मियों को भी लड़ाने का खूब प्रयास किया,परंतु कामयाबी नहीं मिल पाई।

फिर भी राजनीति की चौसर पर लगातार विपक्षियों के मोहरो को पीटने में आनंद की अनुभूति कर रहे मास्टरजी का हौसला लगातार बढ़ता गया। जिसका नतीजा ये रहा कि वार्ड-4 में अवैध अतिक्रमण हटाने के मामले में मास्टरजी ने एक बार फिर कांग्रेस नेता हनुमान मील को ही निशाने पर ले लिया। पूर्व विधायक गंगाजल मील के सरल स्वभाव का फायदा उठाकर मास्टरजी अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीति अपनाते हुए चाचा-भतीजे में फूट डालने का प्रयास भी किया। कई मौकों पर मास्टरजी अपने षड्यंत्र में कामयाब होते भी दिखे। लेकिन देर सवेर मील परिवार को मास्टरजी की चालबाजी समझ में आ गई। शायद इसी का नतीजा यह ताजा घटनाक्रम है।

मास्टरजी के लिए आत्ममंथन का वक्त

कुल मिलाकर खुद को राजनीति की पिच का शातिर खिलाड़ी समझने वाले मास्टरजी खुद ही हिट विकेट का शिकार हो गए हैं। अगले कुछ दिनों में उनकी टीम के कुछ और भी विकट गिरे तो आश्चर्य की बात नहीं होगी। कुर्सी के अहंकार में डूबे चेयरमैन कालवा के वर्तमान हालातों को देखते हुए एक शेर की ये 2 पंक्तियां याद आ रही है।

चमन की फिक्र कर नादां मुसीबत आने वाली है।

तेरी बर्बादियों के चर्चे हैं आसमानों में।।

बहरहाल यह वक़्त चेयरमैन कालवा के लिये मंथन का है । चेयरमैन के रूप में 3 साल के उनके कार्यकाल की उपलब्धियां शून्य है। ऐसे में बाकी बचे कार्यकाल में अगर वे तुच्छ राजनीति की बजाय शहर के विकास की तरफ ध्यान दें तो शहर के साथ-साथ उनका और कांग्रेस पार्टी का भी भला होगा। 

-राजेंद्र पटावरी उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।              

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मील परिवार ने अफवाहों को दिया विराम, हनुमान मील ही लड़ेंगे चुनाव

पूर्व विधायक गंगाजल मील ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया साफ

सूरतगढ़। सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र से आगामी विधानसभा चुनाव में मील परिवार से दावेदारी की पिक्चर साफ़ हो गई है। अब हनुमान मील ही मील परिवार की तरफ से कांग्रेस की टिकट के उम्मीदवार होंगे।

मील परिवार से टिकट की दावेदारी को लेकर पिछले लंबे समय से चर्चाओं का दौर गर्म था। आमजन में मील परिवार के सदस्यों में टिकट की दावेदारी को लेकर अलग-अलग कयास भी लगाए जा रहे थे। पूर्व विधायक गंगाजल मील की सक्रियता को देखते हुए कुछ लोगों का मानना था कि शायद इस बार गंगाजल मील खुद या फिर उनके पुत्र महेंद्र मील को आगे करेंगे या कुछ इससे भी आगे बढ़कर महिंद्र मील के पुत्र की उम्मीदवारी का अंदाजा लगा रहे थे। इसके अलावा ओबीसी आरक्षण को लेकर इलाके में पूर्व विधायक के भाई और राजस्थान जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील द्वारा रैली करने के बाद उनकी भी उम्मीदवारी की अफवाहे चल पड़ी थी।

बुधवार को निवास स्थान पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते पूर्व विधायक गंगाजल मील

लेकिन बुधवार को पूर्व विधायक गंगाजल मील के अपने निवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मामले का पटाक्षेप हो गया। मीडिया द्वारा मील परिवार में टिकट की दावेदारी के सवाल पर पूर्व विधायक गंगाजल मील ने साफ कर दिया कि आगामी विधानसभा चुनाव में भतीजे हनुमान मील ही परिवार की तरफ से टिकट के उम्मीदवार होंगे।

हालांकि हनुमान मील लगातार इलाके में सक्रिय रहे हैं लेकिन इसके बावजूद चाचा भतीजे के बीच संबंध अच्छे नहीं होने की अफवाहें चल रही थी, जिसके चलते टिकट की उनकी दावेदारी को लेकर संशय बना हुआ था। पूर्व विधायक गंगाजल मील द्वारा भतीजे हनुमान मील की दावेदारी की घोषणा कर यह साफ कर दिया है कि मील परिवार के सदस्यों में दावेदारी को लेकर चल रही अफवाहों में कोई दम नहीं है। साथ ही यह भी साफ हो गया कि मील परिवार एक है और परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद की खबरें कपोल कल्पना से ज्यादा कुछ नहीं थी। 

                     गौरतलब है कि पिछले चुनावों में पूर्व विधायक गंगाजल मील के स्थान पर हनुमान मील को पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ाया गया था। त्रिकोणीय संघर्ष के चलते हनुमान मील को हार का सामना करना पड़ा था। फिर भी उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 58000 से ज्यादा वोट हासिल किये और दूसरे स्थान पर रहे। परन्तु आगामी चुनावों में आमने सामने का मुकाबला होना तय है ऐसे में कांग्रेस के टिकट पर हनुमान मील कड़ी चुनौती पेश करेंगे इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता।          

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जन आक्रोश यात्रा का रथ रवाना, सरकार के विरुद्ध ली जाएगी शिकायतें

जनाक्रोश रथ को केसरिया पताका दिखाकर रवाना करते भाजपा नेता

सूरतगढ़। भारतीय जनता पार्टी द्वारा राज्य सरकार के खिलाफ पूरे राजस्थान में जनाक्रोश यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के निर्देशानुसार सूरतगढ़ में भी जन आक्रोश यात्रा का शुभारंभ किया गया। लोक देवता बाबा रामदेव मंदिर के प्रांगण से शुरू हुई यात्रा को पूर्व मंत्री व सूरतगढ़ विधायक राम प्रताप कासनिया, प्रदेश मंत्री विजेंद्र पुनियां, जिला उपाध्यक्ष एवं जन आक्रोश यात्रा के जिला संयोजक शरनपालसिंह मान और कार्यक्रम की प्रभारी प्रदेश महिला मोर्चा उपाध्यक्ष श्रीमती डॉक्टर विनिता अहुजा ने संयुक्त रूप केसरिया ध्वस्त पताका फहरा कर रवाना किया। इससे पहले मन्दिर के पुजारी द्वारा विधि-विधान से रथ की पूजा अर्चना की गई। जन आक्रोश यात्रा के आगे आगे भाजपा युवा मोर्चा द्वारा बाइक रैली निकाली। जिसमें युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और प्रदेश कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

जनाक्रोश यात्रा के आगे वाहन रैली निकालते भाजयुमो कार्यकर्ता

इस अवसर पर यात्रा के विधानसभा प्रभारी अशोक प्रजापत, नगर मंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, पूर्व विधायक अशोक नागपाल, यात्रा के विधानसभा संयोजक पवन ओझा , सहसंयोजक गोपाल लेघा,नगर मंडल महामंत्री एवं जन आक्रोश यात्रा के मीडिया प्रभारी लालचंद शर्मा, किसान नेता नरेंद्र घिंटाला,जिला मंत्री श्रीमती काजल छाबड़ा, पूर्व मंडल अध्यक्ष विजय गोयल, जयप्रकाश सरावगी, व्यापार प्रकोष्ठ जिला संयोजक सुभाष गुप्ता सहित पार्टी नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

विधायक ने राज्य सरकार पर लगाए आरोप

विधायक रामप्रताप कासनियां ने कहा कि राजस्थान में जनता कांग्रेस के कुशासन से त्रस्त है। कांग्रेस सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है। कांग्रेस सरकार को लेकर जन जन में आक्रोश भरा हुआ है और इसी आक्रोश को देखते हुए प्रदेश भाजपा ने जन आक्रोश यात्रा निकालने का निर्णय लिया है। यह यात्रा 4 दिसंबर से 14 दिसंबर के मध्य समूचे राजस्थान की 200 विधानसभाओं से निकाली जाएगी। इस यात्रा में पार्टी के सभी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता एकजुट होकर जनता के आक्रोश को शिकायत पेटिका के माध्यम से सरकार तक पहुंचाने का कार्य करेंगे। विधायक ने राज्य सरकार की कमियां गिनाते हुए कांग्रेस सरकार की विफलताओं का एक पत्रक जारी किया। जिसमें निम्न बातों को लिखा गया है।

प्रदेश मंत्री विजेंद्र पूनिया ने राज्य सरकार की नाकामियों के गिनाते हुए इसे हर मोर्चे पर विफल बताया। प्रदेश महिला उपाध्यक्ष विनीता आहूजा ने कहा कि कांग्रेस सरकार महिला सुरक्षा के मामले में पूरी तरह विफल रही है। प्रदेश रैप के आंकड़ों में 1 नंबर पर है। उन्होंने लालगढ़ की घटना का जिक्र करते हुए राज्य सरकार पर हमला बोला।

जिला उपाध्यक्ष व जन आक्रोश यात्रा के जिला संयोजक सरदार शरनपालसिंह ने बताया कि समूचा राजस्थान कांग्रेस के कुशासन से त्रस्त है और सरकार में बदलाव चाहता है।

पूर्व विधायक अशोक नागपाल ने कहा कि यह जनाक्रोश यात्रा कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने में मील का पत्थर साबित होगी।

पार्टी के ये कार्यकर्ता भी रहे मौजूद

जन आक्रोश यात्रा में उपस्थित स्थानीय भाजपा नेता

यात्रा में पूर्व प्रधान बिमला नायक, महिला संयोजक एडवोकेट पूनम शर्मा,मंडल उपाध्यक्ष प्रेमसिंह ,विनय सिंह चंदेल, श्रीमती शर्मिला कंवर, अशोक आसेरी, पंचायत समिति सदस्य रामकुमार कस्वां, राहुल लेघा,ओबीसी मोर्चा जिला महामंत्री सुरेश सुथार, युवा जिला मोर्चा महामंत्री विनोद सारस्वत, युवा मोर्चा अध्यक्ष मंयक वशिष्ठ,ओबीसी अध्यक्ष प्रेम प्रकाश वर्मा, मंत्री राजेन्द्र जांगिड़,महिला मोर्चा अध्यक्ष प्रमिला भाटी, पार्षद जगदीश मेघवाल पार्षद, संतोष गिरि, पार्षद ओमप्रकाश अठवाल, पार्षद हंसराज स्वामी, आत्माराम तेरहपुरिया, गिरधारी नाथ,ओमप्रकाश कारगवाल, पूर्व पार्षद राजेन्द्र ताखर, जगजीत सिंह बराड़, एडवोकेट आनन्द शर्मा, इंजीनियर रमेश चंद्र माथुर, यात्रा के सोसल मीडिया प्रभारी युधिष्ठिर,सहसंयोजक नरेन्द्र शर्मा के साथ भाजपा के सैकड़ों कार्यकर्ताओ ने भाग लिया ।

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“द वॉइस ऑफ सूरतगढ़ सीजन – 2” के प्रतिभागियों के हुए ऑडिशन, 1जनवरी को होगी प्रतियोगिता

द वॉयस ऑफ सूरतगढ़ सीजन-2 के लिए ऑडिशन देती एक प्रतिभागी

सूरतगढ़। मनन संगीत कला केंद्र द्वारा एक जनवरी को द वॉइस ऑफ सूरतगढ़ सीज़न -2 का आयोजन किया जाएगा। इस एकल गायन प्रतियोगिता में भाग लेने के इच्छुक प्रतिभागियों का दूसरा ऑडिशन टेस्ट रविवार को टैगोर सेंट्रल अकैडमी सीनियर सेकंडरी स्कूल मे लिया गया। जिसमे सूरतगढ़ शहर व आसपास के गांवों के अलावा आर्मी, एयरफाॅर्स सहित पीलीबंगा, हनुमानगढ़, रायसिंहनगर, गंगानगर, बीकानेर, नागौर एवं जोधपुर से आये हुए प्रतिभागियों ने ऑडिशन में हिस्सा लिया। ऑडिशन के दौरान प्रतिभागियों ने HP म्यूजिकल ग्रुप के साज़िन्दों की धुनो पर अपने गायन प्रतिभा का परिचय दिया और स्वर लहरियों से समा बांध दिया। वहीं संगीतज्ञ माधव सुलेरा एवं पीलीबंगा से कमलेश कल्याणा प्रतिभागियों की आवाज और अंदाज़ को परखने के लिये निर्णायक के रूप में उपस्थित रहे।
ऑडिशन में संस्था के मो. अली, देव आर्य, रजनीश शर्मा, सीताराम, पंकज शर्मा, ओम बजाज, सुनील छाबड़ा, मनोज कुमार, मनन अली व पुनीत आर्य इत्यादि मौजूद रहे।

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100 दिव्यांगों को निशुल्क उपकरण वितरित, महावीर इंटरनेशनल द्वारा लगाया गया मेगा कैंप

महावीर इंटरनेशनल द्वारा आयोजित शिविर में दिव्यांगों को उपकरण वितरित करते हुए अतिथि


सूरतगढ़। महावीर इन्टरनेशनल, सूरतगढ़ एवं महावीर इन्टरनेशनल, श्रीगंगानगर के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को निःशुल्क दिव्यांग उपकरण वितरण शिविर लगाया गया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंच, भारत सरकार तथा पं. दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय शारीरिक दिव्यांगजन संस्थान, नई दिल्ली के सौजन्य से आयोजित इस शिविर में 165 दिव्यांग जनों का पंजीयन किया गया। दिव्यांगों की जांच के उपरांत शिविर में 40 दिव्यांगों को ट्राईसाइकिल, 24 व्हील चेयर, 30 बैसाखी, 3 स्मार्ट कैन, 3 वाकिंग स्टिक आदि उपकरण निःशुल्क वितरित किये गये। शिविर में अतिथि के रूप में उपस्थित नगर पालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा और थाना अधिकारी श्री राम कुमार लेघा ने उपकरण वितरित किए। ।

    परियोजना निदेशक वीर नत्थू राम कलवासिया और तुषार कमरा के अनुसार शिविर में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, सूरतगढ़ के अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ भारत भूषण द्वारा दिव्यांगजनों की जांच की गयी और 25 विकलांग प्रमाण-पत्र भी बनाये गये। शिविर में दिल्ली से आए हुए प्रोस्थेटिस्ट एवं ओर्थोटिस्ट विवेक, तपस बेहरा, व अभिमन्यु मल्होत्रा ने आवेदन पत्र भरवाने में मदद करते हुए पात्र व्यक्तियों का चयन किया। वहीं होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ हरप्रीत सिंह द्वारा विभिन्न रोगों की निःशुल्क जांच की गयी तो श्रीगंगानगर केंद्र से पधारे वीर देवेंद्र शर्मा ने दस्तावेजों की ऑनलाइन फीडिंग में सहयोग किया।

    महावीर इंटरनेशनल के श्रीगंगानगर केंद्र अध्यक्ष वीर वीरेंद्र बैद, जिला विकलांग संघ सूरतगढ़ शाखा के अध्यक्ष बाबूलाल माली,निशा, आत्माराम तावनिया, राजकुमार कामरा ने भी शिविर में उपस्थित रह कर सहयोग किया।

    गुरुद्वारा श्री गुरुसिंह सभा द्वारा की गई, दवा,चाय व लंगर की व्यवस्था

    गवर्निंग काउंसिल सदस्य संजय बैद के अनुसार रोगियों के लिए होम्योपैथिक दवा एवं समस्त आगंतुकों के लिए चाय, लंगर की व्यवस्था गुरुद्वारा श्री गुरुसिंह सभा, सूरतगढ़ द्वारा निःशुल्क की गयी। राजकीय महाविद्यालय सूरतगढ़ की 24 वीं रोवर क्रू रेंजर टीम ने शिविर की व्यवस्था में सहयोग दिया।

    इनका भी रहा सहयोग

    ग्राम पंचायत 90 जीबी के सरपंच जरनैल सिंह जम्मू, क्रांति तनेजा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के युवराज सिंह, गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष सरदार काला सिंह, सचिव एस एस रैना, परियोजना निदेशक वीर छगन लाल शर्मा, पवन गोयल,सहित संस्था सदस्यों ने विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग किया। संस्था के अध्यक्ष वीर दिलीप मिश्रा ने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

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    जन आक्रोश यात्रा को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस, विधायक कासनिया ने सरकार को बताया फेल

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित भाजपा नेता व संगठन पदाधिकारी
    जनाक्रोश यात्रा का स्टीकर जारी करते भाजपा पदाधिकारी

    सूरतगढ़। भारतीय जनता पार्टी की ओर से जन आक्रोश यात्रा को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में यात्रा के जिला संयोजक शरणपाल सिंह मान ने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए वादे पूरे नहीं करने के कारण लोगों में जनाक्रोश है। इसको लेकर प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर विधानसभा क्षेत्र में भी जन आक्रोश यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा बाबा रामदेव मंदिर प्रांगण से 4 दिसम्बर से शुरू होगी। इस मौके पर विधानसभा से सभी नेतागण, पार्टी पदाधिकारी एवं सभी मंडलों के अध्यक्ष और कार्यकर्ता उपस्थित रहेंगे।

    जिला संयोजक के अनुसार रथ यात्रा विधानसभा के प्रत्येक पंचायत मुख्यालय और वार्ड में पहुंचेगी। इस दौरान गांव-ढाणी से लोगों की समस्याएं संवाद करते हुए और उनकी शिकायतें एकत्र करते हुए 14 दिसंबर को वापस सूरतगढ़ पहुंचेगी। यात्रा के दौरान मिली शिकायतों के आधार पर प्रदेश स्तर पर राज्य सरकार को घेरने का कार्यक्रम तैयार किया जाएगा।

    राज्य सरकार पर बरसे विधायक रामप्रताप कासनिया

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक रामप्रताप कासनिया ने भी सूबे की कांग्रेसी सरकार को लेकर निशाना साधा। कासनिया ने बताया कि समूचा राजस्थान कांग्रेस के कुशासन से त्रस्त है और सरकार में बदलाव चाहता है। यह जनाक्रोश यात्रा कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने में मील का पत्थर साबित होगी। विधायक कासनिया ने किसानों की कर्ज माफी और बेरोजगारी भत्ते की घोषणा को लेकर राज्य सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहां के बलात्कार के मामले में राजस्थान नंबर बंद हो चुका है। इसके अलावा उन्होंने सिंचाई पानी, यूरिया संकट और महंगी बिजली को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने सरकार को पूरी तरह से फेल बताया।

    चर्चित अतिक्रमण हटाने के मामले को कासनिया ने बताया बंटवारे का झगड़ा

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विधायक रामप्रताप कासनिया ने स्थानीय नेताओं, नगरपालिका और स्थानीय प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए। वार्ड -4 के बहुचर्चित अतिक्रमण हटाने के मामले को कासनिया ने सत्ता पक्ष के लोगों में धन के बंटवारे का झगड़ा बताया। उन्होंने कहा की इस मामले में पार्षदों ने मलाई खा ली लेकिन बड़े लोगों को कुछ नहीं मिला। इस मामले में उन्होंने स्थानीय प्रशासन और नगरपालिका द्वारा अतिकर्मियों के पुनर्वास के मामले में भी सवाल उठाते हुए कहा कि हमने प्रशासन से पूछा कि आखिर पुनर्वास का आधार क्या है तो कोई जवाब नहीं मिला। कासनिया ने कहा कि पुनर्वास के नाम पर बड़े लोगों को बसा दिया जाएगा लेकिन गरीब मारे जाएंगे।

    पुत्र के संबंधों के सवाल पर पर दिया जवाब

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक रामप्रताप कासनिया से उनके पुत्र संदीप कासनिया के कॉलोनियों व अन्य धंधों में पार्टनरशिप के बारे में भी सवाल पूछा गया। कासनिया का कहना था कि यदि उसके गलत कामों के लिए सजा होती है तो मैं साइन करने के लिए भी तैयार हूं। कासनिया ने अपने पुत्र और पूर्व विधायक गंगाजल मील की मुलाकात होने की बात भी कही।

    इंदिरा सर्किल व NH-62 की हालत को लेकर अधिकारियों को किया फोन

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया द्वारा नेशनल हाईवे और इंदिरा सर्किल की हालत को लेकर उठाए गए सवाल पर कासनिया ने कहा कि उन्होंने हाईवे के अधिकारियों से इस संबंध में कई बार बात की है लेकिन उनके जू नहीं रेंग रही। उन्होंने प्रेस के सामने ही विभाग के अधीक्षण अभियंता को फोन किया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। बाद में विधायक ने एक्सईएन को फोन करलापरवाही के लिए लताड़ा और सड़क निर्माण के दौरान पानी का छिड़काव करने को कहा। उन्होंने हाईवे पर बने गड्ढे भी भरने के निर्देश दिए।

    भाजपा के ये पदाधिकारी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में रहे मौजूद

    कॉन्फ्रेंस में विधायक कासनिया और जिला संयोजक शरण पाल सिंह के अलावा यात्रा के विधानसभा संयोजक पवन ओझा, विधानसभा सहसंयोजक गोपाल लेघा,नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, नगर मंडल महामंत्री एवं जन आक्रोश यात्रा के मीडिया प्रभारी लालचंद शर्मा, ढाबा मंडल अध्यक्ष कालू कालू राम कड़ेला, भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष मयंक वशिष्ठ अध्यक्ष भाजपा युवा मोर्चा,जन आक्रोश यात्रा के सोशल मीडिया संयोजक युधिष्ठर मेहरडा व सहसंयोजक नरेंद्र कुमार शर्मा उपस्थित रहे।

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    – राजेंद्र पटावरी,उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब,सूरतगढ़

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    श्री सारस्वत कुंडिया समाज समिति की नई कार्यकारिणी घोषित

    पवन तावानिया महामंत्री व डॉ. हरिमोहन सारस्वत बनाये गये प्रेस प्रवक्ता

    सूरतगढ़। श्री सारस्वत कुण्डिया समाज समिति के नव नियुक्त अध्यक्ष लक्ष्मण शर्मा ने बुधवार को समिति की नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी। समिति की जम्बो कार्यकारिणी में 2 दर्जन से अधिक सदस्यों को विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया है। नई कार्यकारिणी में पवन तावानिया को महामंत्री और डॉ हरिमोहन सारस्वत को प्रवेश प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। इसके अलावा श्याम सुंदर शर्मा को उपाध्यक्ष, शिव भगवान मोट, श्रीकांत सारस्वा, रामप्रताप सारस्वा को मंत्री,
    लालचंद ठाकरानी को कोषाध्यक्ष,नंदकिशोर ठाकरानी
    को प्रचार मंत्री, लीलाधर सारस्वा को संगठन मंत्री शीशपाल सारस्वा को विधिक सलाहकार बनाया गया है।

    इसके अलावा मदन ओझा, पूनम तावनिया, डॉ सत्यनारायण, शिव शंकर ओझा, रतन सारस्वा,रामेश्वर खांतड़िया, मनीराम उपाध्याय, रामकुमार तावनिया, नरेंद्र ओझा,हरिप्रसाद खांतड़िया को संरक्षक पद हेतु मनोनीत किया गया है ।

    वहीं समाज की धर्मशाला के निर्माण हेतु भवन निर्माण कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी का अध्यक्ष पूर्व पार्षद डॉ महावीर सारस्वत व सत्यनारायण सारस्वा, देवेंद्र गुरावा,लालचंद कायल, पवन ओझा, सुरेंद्र ओझा, करणीदान ठाकरानी को सदस्य व हरिमोहन सारस्वा को प्रेस प्रवक्ता बनाया गया।

    समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण शर्मा के अनुसार 08 दिसंबर को विधिवत रूप से धर्मशाला के भवन निर्माण की नींव रखी जाएगी।

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    मील,कालवा और कांग्रेस : महिला व अज़गर की कहानी

    सूरतगढ़। सूरतगढ़ नगरपालिका में मास्टर ओमप्रकाश कालवा के चैयरमेन बनने के बाद से कांग्रेस के लिये  कुछ भी ठीक नही चल रहा। नगरपालिका प्रशासन पार्षदों की आपसी खींचतान, पार्षदों-कर्मचारियों के बीच विवाद और भ्रष्टाचार व सरकारी भूमि पर कब्जों को लेकर लगातार चर्चा में बना हुआ है। शहर में पालिका भूमि पर अवैध अतिक्रमणो के चलते हालत यह हो गई कि सत्ता पक्ष के नेता और पूर्व विधायक गंगाजल मील को आगे आकर सफाई देनी पड़ी कि उनका और उनके परिवार का एक इंच जमीन पर भी कब्ज़ा नही है।

    शहर में अवैध अतिक्रमणो से हो रहे राजनीतिक नुकसान का अंदाजा शायद मील परिवार को बहुत देर से मगर हो चुका है और इसी का नतीजा है गत दिनों वार्ड-45 और अब वार्ड- 4 में अतिक्रमणो पर पालिका प्रशासन की सख्त कार्रवाई। इस कार्रवाई से मील परिवार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण बर्दाश्त नही किया जायेगा। हालांकि ऐसी कार्रवाईयां बहुत पहले होनी चाहिए थी। राजनीतिक तौर पर इस देरी से उनकी छवि का काफ़ी नुकसान हो चुका है। खैर जब जागो तभी सवेरा।

    मास्टर ओमप्रकाश कालवा की भूमिका भी सवालों के घेरे में

    राजस्थानी में एक कहावत है ‘ढका मतीरा’। जब भी आप बाजार में मतीरा खरीदने के लिए जाते हैं  तो उसकी बाहरी सूरत (हरा रंग-रूप) देखकर उसके लाल और मीठे होने का अंदाजा लगाते हैं। लेकिन जब आप उसे काटते हैं तो उसकी सच्चाई सामने आती है। तब आपको पता लगता है कि आपने जिस मतीरे को बाहरी सुनहरा रंग देखकर लाल और मीठा मान लिया था वह तो बदरंग और बेस्वाद है। मास्टर ओमप्रकाश कालवा का मामला भी कुछ कुछ ऐसा ही है।

    मील परिवार ने पढ़ा-लिखा और शिक्षक पृष्ठभूमि का समझकर जिस मास्टर कालवा को शहर और खुद मील परिवार के मुकुट में चार चांद लगाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्हीं मास्टरजी ने चेयरमैन बनते ही अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। दूसरों को नीचा दिखाने की हवस में मास्टरजी ने नगरपालिका में गुटबाजी, बेलगाम प्रशासन और पार्षदों को अवैध अतिक्रमणो की छूट देकर नगरपालिका का भट्टा बिठा दिया। रही सही कसर प्रेस से पंगा लेकर पूरी कर दी।

    लगभग 3 साल के अपने कार्यकाल में मास्टरजी अपनी हरकतों से खुद तो जनता की नजरों में नंगे हो ही चुके हैं। लेकिन हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे की तर्ज पर मास्टरजी मील परिवार की राजनीति की कब्र खोदने में भी दिन रात एक किए हुए हैं।

    हालत यह है कि मास्टरजी की कारगुजारीयों से कांग्रेस के ही अधिकांश पार्षद मील परिवार से दूर हो चुके हैं। इसके अलावा सफाईकर्मी-व्यापारियों के विवाद में मास्टरजी ने मील परिवार के नुमाइन्दे हनुमान मील से खुन्नस के चलते जानबूझकर मामले को सुलटने नहीं दिया और व्यापारियों को मील परिवार और कांग्रेस के खिलाफ खड़ा कर दिया। इसके अलावा व्यापारियों की नाक रगड़वाने की चाहत में मास्टरजी ने रेलवे स्टेशन से भगतसिंह चौक तक सड़क को डेढ़ साल तक लटकाये रखा। जिसकी वजह से व्यापारी और आमजन सड़क की हालत को लेकर कांग्रेस बोर्ड और मील परिवार को कोसते रहे। मास्टरजी के बिछाये मायाजाल में पूर्व विधायक सहित मील परिवार ये बात भी भूल गया कि विधानसभा चुनावों में जीत की चाबी शहर के इन्ही व्यापारियों के हाथों में है। पिछले विधानसभा चुनावों के आंकड़ों से इस बात की तस्दीक की जा सकती है।

    वार्ड नंबर-4 में अतिक्रमण हटाने के ताज़ा मामले में भी पर्दे के पीछे सूत्रधार की भूमिका में मास्टर कालवा ही है। मामला व्यापारियों, पार्षदों या फिर अतिक्रमण हटाने का ही नहीं है। चैयरमैन बनने के बाद से मास्टरजी कि अब तक की गतिविधियों को नोट किया जाए तो साफ पता लगता है कि वे किसी सुपारी किलर की तरह मील परिवार की राजनीतिक हत्या में जुटे हुए हैं। इस काम में काफी हद तक मास्टरजी को कामयाबी भी मिल चुकी है। मास्टरजी किस ग्रंथि से ग्रसित होकर इस काम को कर रहे हैं, ये तो वहीं जाने! लेकिन मास्टर जी की हरकतों को देखकर यूरोप की एक प्रसिद्ध कहानी याद आ रही है।

    महिला और उसके पालतू अजगर की कहानी…

    एक महिला को एक दिन रास्ते में एक अजगर का बच्चा मिला। महिला उसे अपने घर लें आई और उसकी देखभाल करने लगी। धीरे-धीरे महिला का अजगर के प्रति प्रेम बढ़ता गया और वह उसे रात में अपने साथ ही सुलाने लगी। लेकिन ज्यों ज्यों अज़गर बड़ा हुआ उसके व्यवहार में परिवर्तन होने लगा। वह महिला से सटकर सोने लगा और अपने शरीर को स्ट्रेच कर लम्बा करने की कोशिश करता। शुरू में तो महिला को अच्छा लगा। परन्तु कुछ दिनों के बाद अजगर ने एकाएक खाना-पीना छोड़ दिया। अजगर को कुछ भी खाते पीते ना देख महिला परेशान हो गई और वह उसे एक जानवरों के डॉक्टर के पास ले गई।

    डॉक्टर ने महिला से अजगर की समस्या पूछी तो महिला ने उसके कुछ भी नही खाने पीने की बात कही। इस पर डॉक्टर ने महिला से पुछा, ‘क्या आपका अजगर हर रात आपके साथ सोता है ?’ महिला ने जवाब दिया ‘हां’,। स्पेशलिस्ट डॉक्टर ने फिर पूछा, ‘क्या ये आपसे लिपटता या फिर अपना पूरा शरीर स्ट्रेच करता है?’ महिला ने फिर जवाब दिया ‘हां’।

    डॉक्टर ने महिला को बताया कि उसे अजगर को तुरंत घर से बाहर निकाल देना चाहिए। स्पेशलिस्ट का जवाब सुनकर महिला हैरान थी उसने पूछा ‘क्यों’। स्पेशलिस्ट डॉक्टर ने जवाब दिया ‘क्यूंकि उसका अजगर उसे खाने की तैयारी कर रहा है ! उसने भूख बढ़ाने के लिए खाना पीना छोड़ दिया है’। स्पेशलिस्ट ने कहा कि उसका पालतू जानवर उससे इसलिए नहीं लिपटता क्योंकि वह उसे प्यार करता है। बल्कि उसका पालतू अजगर उससे इसलिए लिपटता और स्ट्रेच करता है ताकि वह यह जान सके कि उसकी खुद की लंबाई इतनी हुई है कि नहीं, कि वह महिला को पूरा निगल सके। स्पेशलिस्ट की बात सुनकर अब महिला की हालत काटो तो खून नहीं जैसी हो गई । महिला ने इसके बाद क्या किया होगा यह बताने की शायद जरूरत नहीं है।

    बहरहाल कहानी के अजगर के समान ही चेयरमैन बनने के बाद से मास्टर कालवा का व्यवहार भी बदला हुआ सा है। मास्टरजी भी लगातार कहानी के अजगर की तरह खुद को स्ट्रेच कर रहे है यानि की खुद को बड़ा मानते हुए कांग्रेस के पार्षदों को ही नीचा दिखाने की राजनीति कर रहे है। कहानी के अज़गर की तरह ही अब वे अपनी राजनीतिक भूख को लगातार बढ़ा रहे हैं ताकि कभी भी मील परिवार की राजनीतिक विरासत को निगल सके। इसके लिए वे लगातार जोधपुर,जयपुर और दिल्ली के चक्कर भी लगा रहे हैं। मील परिवार की हालत भी फिलहाल उस महिला की तरह ही है जो अपने पालतू अजगर के इरादों को भांप नहीं पा रही है। वैसे कहानी की महिला की तरह ही मील परिवार को भी किसी स्पेशलिस्ट से सलाह लेकर अजगर को घर से बाहर फेंकने की जरूरत है।

    खैर कहानी की महिला तो बच गई लेकिन देखना होगा कि क्या मील परिवार इस अजगर से छुटकारा पा सकेगा या फिर यह अजगर मील परिवार की राजनीतिक विरासत को निगल लेगा।

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    अतिकर्मियों पर चला पालिका का डंडा, 60 अवैध कब्जे ध्वस्त

    मील परिवार ने दिए अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती के संकेत

    वार्ड नंबर-4 में अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त करती जेसीबी मशीन

    सूरतगढ़। ‘देर आए दुरुस्त आए‘ सूरतगढ़ नगरपालिका प्रशासन द्वारा सोमवार को अवैध अतिक्रमणो के खिलाफ चलाए गए अभियान को लेकर यही कहा जा सकता है। पालिका अमले ने दिनभर चले अभियान के दौरान वार्ड नंबर-4 में 60 से अधिक अवैध अतिक्रमणो को ध्वस्त कर दिया। भूमाफियाओं ने कच्ची-पक्की चारदीवारी और मकान बनाकर लंबे चौड़े भूखंडों पर कब्जा कर रखा था। जिन्हें पालिका अमले ने जेसीबी की मदद से ध्वस्त कर दिया। पालिका के अभियान चलाकर अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि की कीमत करोड़ों रुपए बताई जा रही है।

    पालिका अध्यक्ष मास्टर ओमप्रकाश कालवा व ईओ विजय प्रताप सिंह के आदेश पर चलाए गए इस अभियान के दौरान पालिका के अतिक्रमण प्रभारी कालूराम सेन (ए आर आई), सोहन कुमार झा (सहायक अभियंता),चरण सिंह मीणा (कनिष्ठ अभियंता, मनिंदर कुमार, पूर्ण राम, हरिराम, श्री कृष्ण), जगदीश प्रसाद, धनपत राम जमादार व सफाई कर्मचारी एवं पुलिस जाब्ता प्रभारी एसआई ओमप्रकाश मान व अन्य पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।

    अतिक्रमणो को लेकर पालिका और मील परिवार पर उठ रहे थे सवाल 

    नगरपालिका प्रशासन पर पिछले लंबे समय से भूमाफियाओं को बढ़ावा देने के आरोप लग रहे थे। अवैध अतिक्रमण का मुद्दा लगातार मीडिया में छाया हुआ था। जिसकी वजह से सत्ताधारी कांग्रेस नेताओं की भी लगातार आलोचना हो रही थी। ख़ासकर मील परिवार पर भू माफियाओं को शह देने के आरोप लग रहे थे। शहर में खासकर कच्ची बस्तियों में खाली पड़ी भूमि पर भूमाफियाओं द्वारा कब्जे बेचने के खेल से आम जनता में नगरपालिका प्रशासन की जबरदस्त आलोचना हो रही थी। इसके बाद भी अवैध अतिक्रमणो की लगातार शिकायतों के बावजूद चेयरमैन कालवा के ढुलमुल रवैये से मील परिवार खुश नहीं था।

    ऐसे में कांग्रेस नेता हनुमान मील ने ईओ विजय प्रताप को अतिक्रमण के प्रति सख्त रवैया अपनाने के निर्देश दिए। जिसका नतीजा पालिका अमले की कार्रवाई के रूप में देखने को मिला। 5 दर्जन से अधिक अतिक्रमणो को ध्वस्त कर पालिका प्रशासन के माध्यम से मील परिवार ने एक तरह से यह संदेश देने की कोशिश की है कि शहर में हो रहे अवैध अतिक्रमणो के पीछे उनके परिवार की कोई भूमिका नहीं है।

    रिहाइश के बावजूद मकान तोड़ने के लगे आरोप, हुआ हंगामा

    पालिका के आज चलाये गये अभियान के दौरान हटाए गए अधिकांश कब्जे बगैर रिहाइश के थे।भूमाफियों ने ज्यादातर प्लॉट सिर्फ चारदिवारी कर कब्ज़े किये हुए थे जिन्हे जेसीबी से हटा दिया गया। हालांकि अभियान के दौरान एक मकान में परिवार के रहने के बावजूद मकान को तोड़ने को लेकर विवाद भी सामने आया है। वार्ड-3 की पार्षद के पुत्र गुरजंट सिंह ने इस मामले में एक कांग्रेस के नेता के इशारे पर मकान तोड़ने का आरोप लगाया। देर शाम तक मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया और प्रभावित लोगों ने अमित कड़वासरा और राकेश बिश्नोई के नेतृत्व में पालिका कार्यालय में धरना लगा दिया। हालांकि देर शाम हुई वार्ता में ईओ विजय प्रताप सिंह ने बुधवार सुबह मौका देखने की बात कही है।

    अतिक्रमणो के खिलाफ हो जीरो टॉलरेंस की नीति

    नगरपालिका द्वारा अवैध अतिक्रमणो के खिलाफ चलाए गये अभियान में मील परिवार की बड़ी भूमिका सामने आ रही है। क्योंकि शहर में अतिक्रमण एक बड़ी समस्या है  ऐसे में जरूरी है कि इस समस्या का समाधान के लिए मील परिवार जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाये। हालांकि मील परिवार का यह कदम बहुत देरी से उठाया गया कदम है। लेकिन जैसे कि कहा जाता है जब जागो तभी सवेरा। सरकारी भूमि की बंदरबांट कर करोड़ों के वारे न्यारे करने वाले भू माफियाओं के नेक्सस को तोड़ने के लिए जरूरी है कि अवैध अतिक्रमण के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाए और साथ ही सरकारी भूमि पर कब्ज़ा कर गरीब लोगों को प्लॉट बेचने का धंधा करने वालों के मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई हो। जिससे भूमाफियों में भय व्याप्त हो। उम्मीद की जानी चाहिए कि अवैध अतिक्रमण के खिलाफ मील परिवार और पालिका का अभियान जारी रहेगा।  

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    छात्रा की मौत के मामले में धरना, हालात नहीं सुधरने पर दी आंदोलन की चेतावनी

    उपखंड कार्यालय में एसडीएम से वार्ता करते नागरिक

    सूरतगढ़। दो दिन पूर्व NH-62 पर तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से अकाल मौत का शिकार हुई छात्रा को लेकर आज राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के लोगों ने उपखंड कार्यालय पर धरना देते हुए प्रदर्शन किया। भाजपा नेता नरेंद्र घिंटाला के आह्वान पर पहुंचे जागरूक वक्ताओं ने पिछले 5 साल से कछुआ चाल से चल रहे हाईवे के निर्माण कार्य को लेकर नाराजगी जताई । सालों से जर्जर हाईवे और अधूरे निर्माण के कारण दर्जनों लोगों की हुई मौत का जिक्र करते हुए निर्माण कंपनी और हाईवे अधिकारियों को दोषी ठहराया गया। इसके बाद आक्रोशित नागरिको ने उपखंड अधिकारी की इजलास में धरना लगाते हुए नारेबाजी की ।

    बाद में कार्यालय पहुंचे एसडीएम संदीप कुमार को लोगों ने हाईवे की वस्तु स्थिति से अवगत करवाते हुए इसका निर्माण जल्द करवाए जाने की मांग की। नागरिकों ने 10 दिसंबर तक हाइवे अधिकारीयों को बुलाकर वार्ता करवाने और समाधान नहीं होने पर हाईवे पर धरना लगाने और जाम की चेतावनी दी ।

    हाईवे निर्माण कंपनी के खिलाफ मुकदमे की उठी मांग


    इससे पूर्व एसडीएम कार्यालय पर आयोजित सभा में किसान नेता नरेंद्र घिंटाला ने कहा कि हाईवे निर्माण कंपनी एमबीएल की लापरवाही से एक बच्ची की जान गई है। घिंटाला ने कहा आबादी क्षेत्र के बीच से निकल रहे हाईवे के निर्माण कार्य के दौरान आए दिन बड़ी दुर्घटनाएं होती रहती है, इस संबंध में बार-बार जताए जाने के बावजूद भी निर्माण कंपनी पर कोई असर नहीं हो रहा है। छात्रा की इस मौत के लिए हाईवे अधिकारियों व निर्माण कंपनी को जिम्मेदार ठहराया जाकर हत्या का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

    इन नेताओं ने रखे अपने विचार

    धरना स्थल पर पार्षद महेंद्र गोदारा, पार्षद लखविंदर सिंह लक्खा, पार्षद जसराम टाक, पार्षद सुरेंद्र टाक, क्रांतिकारी महावीर भोजक, बद्री प्रसाद बिनाणी, संघर्षशील नेता महावीर प्रसाद तिवाड़ी, रेल विकास संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष एडवोकेट ललित शर्मा,नायक समाज के युवा नेता पूर्व पार्षद गोपी राम नायक,कांग्रेस सेवा दल के पूर्व अध्यक्ष सतनाम वर्मा, पूर्व पार्षद जगजीत सिंह बराड़, विश्व हिंदू परिषद के श्यामसुंदर अरोड़ा, कच्ची बस्ती संघर्ष समिति के लीलाधर फौजी, कामरेड रतन पारीक, इंजीनियर रमेश चंद्र माथुर, भारतीय जनता पार्टी के संघर्षशील बाबू सिंह खींची, एडवोकेट संजय सोढा, एडवोकेट पूनम शर्मा सहित वक्ताओं ने विचार रखें।

    10 दिसंबर तक समाधान नहीं होने पर धरने की चेतावनी


    किसान नेता नरेंद्र घिंटाला ने कहा 10 दिसंबर तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो रणनीति बनाकर सब के सहयोग से नेशनल हाईवे पर धरना लगाया जाएगा।

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    कांग्रेस बोर्ड में शहर के प्रवेश द्वार इंदिरा सर्कल की दुर्दशा

    आखिर नगरपालिका प्रशासन कब देगा सर्कल की ओर ध्यान ?

    इंदिरा सर्किल के पास हाइवे की खस्ता हालत का बयान करती तस्वीर

    सूरतगढ़। किसी भी शहर का प्रवेश द्वार उसके विकास की दशा और दुर्दशा का आईना होता है। इस आईने से ही शहर में प्रवेश करने वाला कोई भी व्यक्ति शहर के विकास को लेकर अपनी राय कायम करता है। बात सूरतगढ़ की अगर करें तो शहर का मुख्य प्रवेश द्वार इंदिरा सर्किल पिछले कुछ सालों से अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है लेकिन जनप्रतिनिधियों को शहर के इस प्रवेश द्वार की  सूध लेने की फुर्सत नहीं है। पिछले तीन-चार सालों में हाईवे के निर्माण के बहाने स्थानीय नगरपालिका प्रशासन ने सर्कल की और देखना भी बंद कर दिया है। जबकि सर्कल भले ही हाईवे सीमा में बना हुआ है पर नगरपालिका प्रशासन इसके सौंदर्यीकरण की पहल कर सकता है।

    दुर्दशा पर आंसू बहा रहा शहर का प्रवेश द्वार  

    इंदिरा सर्किल के अंदर का हाल बताती तस्वीर

    कांग्रेस की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर बनाया गया इंदिरा सर्किल कांग्रेस के ही बोर्ड में अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। सर्कल की हालात इन दिनों बेहद खस्ता है। जिसके चलते आसपास रहने वाले लोगों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सर्कल के चारों तरफ हाईवे पर बड़े बड़े गड्डे बने है वहीं नालो के ओवरफ्लो से निकला गंदा पानी भी हाइवे पर फैला रहता है। ऐसे हालात में हाईवे के दूसरी तरफ के वार्डों में रहने वाले लोगों को पैदल आना जाना भी मुश्किल हो रहा है। जब पैदल चलने वालों की हालत ऐसी है तो आप खुद अनुमान लगा सकते हैं कि इस सर्कल से वाहन कैसे गुजरते होंगे। भारी वाहन जब चौराहे पर पहुंचते हैं तो गड्डों की वजह से उनकी चाल कछुए को भी शर्मा देती हैं।

    इंदिरा सर्किल से श्रीगंगानगर की ओर जाने वाली सड़क की हालात

    सर्कल के चारों ओर हाईवे पर बने गड्ढों से एक और निरंतर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। वहीं दूसरी और  क्षतिग्रस्त सड़क से वाहनों के गुजरने की वजह से दिन भर धूल का गुब्बार हवा में उड़ता रहता है। जिससे सर्कल के आसपास के इलाके में काम करने वालों और निवास करने वालों को सांस सहित गंभीर बीमारियां होने का खतरा बन गया है। 

             वहीं सर्कल की बात करें तो सर्कल का घेरा जगह जगह से क्षतिग्रस्त हो चुका है। इसके अलावा सर्कल की रेलिंग भी कई जगह से टूटी हुई है। इसके साथ ही सर्कल के अंदर की हालात किसी उजड़े हुए बियावान जैसे हो चुकी है। लेकिन पालिका में आपके द्वारा चुने गये जनप्रतिनिधियों ने शुतुरमुर्ग की तरह जमीन में अपनी गर्दन दबा रखी है। कोई अगर मर भी जाये तो उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है !

    पूर्व चैयरमेन बनवारी लाल ने की थी सर्कल की कायाकल्प की कोशिश

     नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल के समय में इस सर्कल की कायाकल्प की गई थी। उस समय इंदिरा सर्किल का घेरा काफ़ी बड़ा था इसलिए तत्कालीन चेयरमैन बनवारी द्वारा सर्किल के घेरे को चारों और से पांच-पांच फ़ीट कम करते हुए सर्कल का पक्का निर्माण करवाया गया। सर्कल के चारों ओर की रेलिंग लगाकर रेलिंग को तिरंगे के कलर में रंगा गया था। सर्कल को बड़े शहरों की तर्ज़ पर विकसित करने के उद्देश्य से श्री सीमेंट प्लांट के सहयोग से हाई मास्ट लाइट भी लगाई गई थी। उस समय सर्कल के भीतर सौंदर्यकरण के लिये कयारियां लगाकर उसे हरा भरा करने की कवायद शुरू की गई थी। इतना ही नहीं सर्कल पर अपराधों की निगरानी के लिये CCTV कैमरे (इन्वर्टर सहित) भी उसी समय लगाये गये थे।

                     लेकिन सर्कल के सौंदर्यकरण की जो मुहिम पूर्व चैयरमेन ने शुरू की थी। उस मुहिम पर बाद में आने वाले बोर्डों ने प्लीता लगा दिया है जिसका नतीजा है इंदिरा सर्किल का वर्तमान हालत। 

    कांग्रेस बोर्ड में उपेक्षा का शिकार इंदिरा सर्कल

    पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के नाम पर बनाये गये इस सर्किल की हालत को देखकर शहर के नेताओं और वर्तमान पालिका बोर्ड को भले ही शर्म नहीं आ रही हो। लेकिन जो लोग सूरतगढ़ के बारे में यह पढ़कर, कि यहां पर एशिया का सबसे बड़ा कृषि फार्म, राज्य का सबसे बड़ा थर्मल पावर प्लांट, आकाशवाणी केंद्र और शिक्षा का नया उभरता हुआ हब है जब किसी कारण से इस शहर में सड़क मार्ग से शहर में प्रवेश करते है तो इंदिरा सर्कल की हालात उनके मन में बनी शहर की छवि को झटका लगता है।

    पिछले महीने जब सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष और भाजपा के दिग्गज नेता जसवंत सिंह के पुत्र मानवेन्द्र सिंह जसोल राजपूत समाज के कार्यक्रम में सूरतगढ़ पहुंचे थे तो इंदिरा सर्कल की खस्ता हालात को देखकर भरी सभा में अफ़सोस जताया था और कार्यक्रम में मौजूद पालिका चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा को सर्कल की सुध लेने को कहा था। तब पालिका अध्यक्ष ने जल्द ही सर्कल की हालात सुधारने की बात कही थी। लेकिन ग़ालिब के इस शेर की पंक्तियों की तरह ‘कि शर्म उनको मगर नहीं आती’ चैयरमेन कालवा और पालिका प्रशासन ने बेशर्मी का लबादा ओढ़ रखा है।

                   बहरहाल जिस तरह का गैरजिम्मेदाराना रवाईया शहर के विकास को लेकर अब तक चैयरमेन कालवा का रहा है उनसे इंदिरा सर्किल को लेकर उम्मीद रखना बेमानी ही है। कुल मिलाकर छल प्रपंचों में उलझें मास्टरजी शहर की दुर्गति कर कांग्रेस की वोटों की फसल को खरपतवार में बदल चुके हैं। जिसे आने वाले चुनावों में कांग्रेस नेताओं को ही काटना पड़ेगा। जिसके लिये उन्हें तैयार रहना चाहिए !

    छात्रा की मौत के बाद हाईवे के साथ इंदिरा सर्किल की भी सुध लेने की जरूरत !

    NH-62 पर स्टेडियम ग्राउंड के पास 2 दिन पूर्व हुई दुर्घटना में छात्रा की मौत के बाद सोशल मीडिया पर लोग हाईवे निर्माण कंपनी पर लापरवाही का मुकदमा दर्ज करने की मांग उठा रहे हैं। इस बीच कुछ नेताओं जिनमें पूर्व विधायक राजेंद्र भादू, भाजपा नेता नरेंद्र घिंटाला, किसान नेता राकेश बिश्नोई ने घटना पर खेद जताया है और इस मामले में आज उपखंड कार्यालय पर दोपहर 12:00 बजे प्रदर्शन कर एसडीएम को ज्ञापन सौंपने का आह्वान किया गया है। इस मामले में हाईवे निर्माण कंपनी के विरुद्ध मामला दर्ज किया जाए अच्छी बात है लेकिन इसके साथ इस बात की जरूरत है कि हाईवे पर कछुआ चाल से किए जा रहे निर्माण के लिये निर्माण कंपनी को पाबंद कर कार्य पूर्ण होने की समय सीमा तय की जाए। इसके अलावा निर्माण के दौरान हाईवे पर आवश्यक संकेतक व डायवर्सन लगाकर वाहनों के आवागमन के रास्ते निर्धारित किए जाने की भी मांग की जाए। जिससे कि निर्माण के दौरान कोई अन्य हादसा न हो।

    इन सबके अलावा इंदिरा सर्किल की खस्ता हालत के सुधार की मांग भी की जानी चाहिए। क्यूंकि सर्कल पर हाईवे की खस्ता हालत के चलते भी हादसों का अंदेशा बना रहता है। शहर के प्रवेश द्वार के रूप में इंदिरा सर्किल के सौंदर्यकरण की मांग भी संघर्ष समिति को करनी चाहिए ताकि शहर का गौरव बना रहे।

                     

         

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    साहित्यिक संस्था ‘सबद’ की मासिक गोष्ठी का आयोजन

    वरिष्ठ रचनाकार महेंद्र मोदी रहे मौजूद

    सूरतगढ़ (27 नवंबर)। ‘संस्मरण लेखन केवल भोगा हुआ यथार्थ नहीं होता, बल्कि यह सामयिक तथ्यों और घटनाओं का ऐतिहासिक दस्तावेज भी होता है। इस विधा में लेखक को स्वीकारोक्ति में ईमानदारी बरतनी चाहिए तभी उसकी पठनीयता बनी रह सकेगी।’ कोरोनाकाल के बाद आयोजित ‘सबद’ की पहली मासिक गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए राजस्थानी और हिंदी के वरिष्ठ रचनाकार महेंद्र मोदी ने ये उद्गार व्यक्त किए।

    इक्कीस संस्थान में आयोजित इस साहित्यिक गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मंगत बादल ने की। कार्यक्रम में अतिथियों का माल्यार्पण के साथ शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया गया।

    विविध भारती में पूर्व चैनल हैड रहे महेंद्र मोदी ने बीकानेर के पूर्व महाराजा और सांसद रहे करणी सिंह से जुड़े अपने संस्मरण सुनाए। उन्होंने संस्मरण विधा की भाषा और शैली पर बात करते हुए कहा कि हर लेखक हमेशा अपनी मातृभाषा में ही सहजता महसूस करता है। डॉ. मंगत बादल ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि रचनाकारों को सृजन एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में लेना चाहिए। उन्होंने ‘सबद’ के आयोजन की प्रशंसा करते हुए नव लेखकों को प्रोत्साहित किया।

    इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकार रमेश चंद्र छाबड़ा, डॉ. मदनगोपाल लढा, परमानंद दर्द, रामकुमार भांभू, हर्ष नागपाल, राजेश चड्डा, डॉ हरिमोहन सारस्वत ‘रूंख’ ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम संचालन राजेश चड्ढा ने किया।

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    भाजपा टिकट के प्रबल दावेदार (1) : अशोक नागपाल

    अशोक नागपाल के नेतृत्व में क्या जीत सकती है भाजपा ?

    सूरतगढ़। आगामी विधानसभा चुनाव में सूरतगढ़ क्षेत्र से कई नेता ताल ठोक रहे हैं। कांग्रेस के बनिस्बत भाजपा में टिकट के दावेदारों की संख्या बहुत ज्यादा है। हालांकि इनमें भी सीरियस और मजबूत दावेदार गिने चुने ही है। क्योंकि विधानसभा चुनाव में अब करीब 1 साल का समय ही बचा है। ऐसे में हमने खबर पॉलिटिक्स के जरिये सभी पार्टियों के टिकट के वास्तविक दावेदारों के दावों की पड़ताल करने की कोशिश की है। इसी कोशिश की पहली कड़ी में पूर्व विधायक और भाजपा नेता अशोक नागपाल के टिकट के दावों और जीत के सियासी समीकरणों की पड़ताल करने की कोशिश हम कर रहे हैं।

    अशोक नागपाल : भाजपा टिकट के प्रबल दावेदार

    सूरतगढ़ में भाजपा की टिकट के सशक्त दावेदारों की बात की जाए तो उनमे एक नाम है पूर्व विधायक अशोक नागपाल का। वर्तमान में अशोक नागपाल भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य है। बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े नागपाल पिछले 40 सालों से संघ और भाजपा में सक्रिय हैं। संघ और पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले नागपाल सूरतगढ़,अनूपगढ़ सहित जिले के विभिन्न सामाजिक व व्यापारिक संस्थाओं के सक्रिय सदस्य हैं। समाज सेवा में बढ़-चढ़कर भाग लेने वाले नागपाल के समाज के हर वर्ग के लोगों के साथ दोस्ताना संबंध रहे। नागपाल का सरल और मिलनसार स्वभाव उन्हें बीच बीजेपी के दूसरे नेताओं से अलग भी करता है।

    अहंकार से दूर रहने वाले नागपाल विवादों से भी दूर रहते हैं। पूर्व विधायक होने के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों और उनके प्रमुख लोगों से नागपाल के अच्छे संबंध उनकी दावेदारी को मजबूत करते हैं। इसके अलावा भाजपा के अन्य प्रमुख दावेदारों का भाजपा में ही अंदरखाने जमकर विरोध है जबकि नागपाल को लेकर ऐसा नहीं है। भाजपा में संभवत वे एकमात्र उम्मीदवार है जिनको अगर टिकट दी जाती है तो सबसे कम विरोध होने की गुंजाइश होगी। इन सबके अलावा कुछ और भी कारण है जिनकी वजह से पार्टी के कुछ अन्य प्रमुख नेताओं की दावेदारी खतरे में है। जिनकी वजह से नागपाल की दावेदारी स्वत ही मजबूत हो गई हैं। इन कारणों में कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं।

    1.प्रबल दावेदारों का 70 वर्ष से अधिक आयु का होना

            भाजपा में हिमाचल और गुजरात में जिस तरह से 70 प्लस उम्र के नेताओं के टिकटे काटी गई हैं ऐसे में अगर यही फार्मूला राजस्थान में अपनाया जाता है तो वर्तमान और पूर्व विधायक की टिकट कटना तय है। क्योंकि भाजपा परिवारवाद के विरोध का दावा करती हैं ऐसे में इन नेताओं के परिवार के अन्य सदस्य को भी टिकट मिलने की उम्मीद दिखाई नहीं देती। ऐसी स्थिति में भी निश्चित तौर पर अशोक नागपाल पार्टी की पहली पसंद होने में शायद ही किसी को शंका होगी। क्योंकि अशोक नागपाल पूर्व विधायक भी है ऐसे में नागपाल का पूर्व विधायक होना दूसरे अन्य दावेदारों के मुकाबले उनकी दावेदारी को मजबूत करता हूं।

    2. टिकट में बदलाव की भाजपा की रणनीति

    भाजपा का वर्तमान नेतृत्व बदलाव के लिए जाना जाता है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने पिछले 8 सालों में नवीन प्रयोग करते किये है और सभी चुनावों में बड़ी संख्या में नए चेहरों पर दांव खेला है। इसके अलावा सूरतगढ़ विधानसभा सीट पर भाजपा का पिछले लगातार चुनावों में प्रत्याशी बदलने का इतिहास रहा है। जैसे कि 2004 में अशोक नागपाल तो 2009 में रामप्रताप कासनिया, 2014 में राजेंद्र भादू को और 2018 में फिर कासनिया को टिकट मिला। ऐसे में भाजपा के टिकट का बदलाव निश्चित ही है। यदि ऐसा होता है तो टिकट बदलाव की परिस्थिति में अशोक नागपाल ही टिकट के सबसे प्रबल दावेदार होंगे ।

    3.जाट प्रत्याशी के विरोध की हवा

    पिछले कुछ सालों से विधानसभा क्षेत्र में दोनों पार्टियों में जाट विरोध का नारा चल रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में एक बटन दबाओ दो जाट मारो जैसे नारे चर्चा में रहे थे। कुछ महीने पूर्व खुफिया एजेंसियों द्वारा भेजी गई चुनाव संबंधी रिपोर्ट में भी जाट उम्मीदवार के विरोध की बात कही गई है। ऐसे में अगर भाजपा द्वारा जाट के स्थान पर किसी अन्य जाति के नेता को उम्मीदवार बनाया जाता है तो उन परिस्थितियों मे भाजपा में अशोक नागपाल से बेहतर स्थिति में कोई दूसरा नेता नहीं है। 

    4.सेकंड लाइन लीडरशिप की बड़े नेताओं से नाराजगी

    भाजपा में अशोक नागपाल की प्रबल दावेदारी की एक प्रमुख वजह यह भी है कि भाजपा के टिकट के दोनों प्रमुख दावेदारों वर्तमान और पूर्व विधायक का विरोध। दोनों नेताओं की नीतियों से पार्टी की सेकंड लाइन और प्रमुख नेता नाराज है। इस वजह से अगर पार्टी द्वारा कोई अंदरूनी सर्वे उम्मीदवार को लेकर करवाया जाएगा तो यह तय है कि अधिकांश नेता वर्तमान और पूर्व विधायक का विरोध करेंगे। ऐसे में अगर किसी तीसरे के नाम पर पार्टी विचार करती है तो अशोक नागपाल ही एकमात्र ऐसे नेता है जिनकी उम्मीदवारी पर पार्टी के सभी नेता एकमत हो सकते हैं। इसकी वजह भी है नागपाल का सभी नेताओं के साथ दोस्ताना संबंध ।

    5.संघ पृष्ठभूमि, भाजपा के बड़े नेताओं से सम्पर्क और पूर्व विधायक होना नागपाल की यूएसपी

    अशोक नागपाल के पक्ष में एक अच्छी बात यह है कि पिछले 40 सालों से संघ और भाजपा नेता  के रूप में नागपाल के संबंध संघ और भाजपा के बड़े नेताओं के साथ हैं। क्यूंकि भाजपा में टिकट वितरण में संघ का दखल किसी से छुपा नहीं है ऐसे में संघ के पुराने कार्यकर्ता होने के नाते संघ लॉबी का साथ अशोक नागपाल को मिलेगा इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है। पिछले कुछ समय से अशोक नागपाल की बॉडी लैंग्वेज और टिकट को लेकर सार्वजनिक मंचों पर जो आत्मविश्वास दिख रहा है उसकी बड़ी वजह संघ लॉबी है। कहीं ना कहीं इस लॉबी के बड़े नेताओं का टिकट को लेकर नागपाल को आश्वासन है। इसके अलावा नागपाल का पूर्व विधायक होना भी उनकी दावेदारी को अपने आप में ही मजबूत करता है।

    क्या अशोक नागपाल भाजपा के टिकट पर जीत सकते हैं चुनावी समर ?

    वैसे तो जिस तरह से भाजपा का फिलहाल देश की राजनीति में दबदबा है उस हिसाब से तो भाजपा की टिकट ही जीत का सर्टिफिकेट है। फिर उम्मीदवार चाहे कोई भी हो ? ऐसे में नागपाल भी अगर भाजपा के टिकट पर लड़ते हैं तो उनकी जीत तय है।

    नागपाल के खिलाफ ग्रामीण क्षेत्रों में जनाधार नहीं होने जैसी  दलील दी जाती है। लेकिन सूरतगढ़ सीट पर जीत का गणित उसी व्यक्ति के पक्ष में रहा है जिसके पक्ष में शहरी मतदाता रहा है। पिछले किसी भी चुनाव के आंकड़ों को देखकर आप इसकी तस्सली कर सकते है। जिसका सीधा सा मतलब शहर में किसी प्रत्याशी के पक्ष में बनने वाली हवा ग्रामीण वोटरों की राय पर असर डालती है। क्योंकि अशोक नागपाल पिछले 15 सालों से सूरतगढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाये हुए है और शहर के सभी समुदायों और व्यापारी वर्ग से उनके मधुर संबंध है। ऐसे में शहरी क्षेत्र का एक बड़ा वर्ग ख़ासकर व्यापारी चाहे वे किसी भी समुदाय के हैं नागपाल के साथ जाना पसंद करेंगे। वैसे भी शहरी मतदाताओं में भाजपा का जनाधार अधिक है ऐसे में सामने प्रत्याशी कोई भी हो उसके लिये भाजपा के टिकट पर नागपाल भी अपराजय बने रहेंगे इसमें शायद ही किसी को संदेह होगा।

    अशोक नागपाल का राजनीतिक जीवन परिचय

    अशोक नागपाल का जन्म 06 जुलाई 1957 को हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले नागपाल  जनसंघ के समय से राजनीति में सक्रिय हैं। वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य नागपाल ने वर्ष 1976 में बीकानेर के जैन स्कूल से 10+1 ( हायर सेकेंडरी ) की पढ़ाई पूरी की ओर 1976 में ही BJS रामपुरिया महाविद्यालय बीकानेर में स्नातक के लिये प्रवेश लिया । कुछ पारिवारिक परिस्थितियों के चलते नागपाल अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके और अपने पुश्तैनी कारोबार ( पेट्रोल पम्प व्यवसाय )1 को संभालने के लिये रामसिंहपुर लौट आये ।

    1973 से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े नागपाल ने 1980 में भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर सक्रिय राजनीति मे प्रवेश किया। वर्ष 1985 से 1988 तक उन्होंने  जनता ट्रक यूनियन,अनूपगढ़ के प्रधान के रूप में कार्य किया। वर्ष 1993 से 1994 तक अनूपगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष चुने गए। अगस्त 1995 में भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर अनूपगढ़ नगरपालिका के अध्यक्ष बने । अगस्त 1995 से अगस्त 2000 तक वे इस पद पर रहे।  वर्ष 2003 में 12वीं विधानसभा के लिये भाजपा के प्रत्याशी के रूप में सूरतगढ़ से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने 104549 मत प्राप्त करते हुऐ निकटतम कांग्रेस की विजयलक्ष्मी विश्नोई को प्रतिद्वंद्वी को 36319 मतों  से हराया। दिसंबर 2003 से दिसंबर 2008 तक सूरतगढ़ विधायक के रूप में उन्होंने विधानसभा क्षेत्र में विकास ने अपना योगदान दिया। इन सबके अलावा वर्ष 2000 से 2001 के बीच वे अनूपगढ़ में भाजपा नगर मंडल के अध्यक्ष रहे। वर्ष 2001 से 2004 और 2014 से 2015 में श्रीगंगानगर भाजपा के जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। 26 दिसंबर 2019 से भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य के रूप में नागपाल राजनीति में सक्रिय हैं।

    – राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़

                     

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    जयपुर (22 nov)। जयपुर के एक निजी कॉलेज में स्थित कैंटीन में जूनियर और सीनियर छात्रों के बीच झड़प हो गई। झड़प के बीच हुई चाकू बाजी में चार जूनियर छात्र घायल हो गए। घटना गांधीनगर थाना इलाके के सुबोध कॉलेज स्थित कैंटीन की है। घटना के बाद घायल छात्र अतुल चौधरी ने गांधी नगर थाने में आधा दर्जन छात्रों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज कराया है।

    जांच पड़ताल के दौरान सामने आया है कि बीए सेकंड ईयर के छात्र कॉलेज कैंटीन में बर्थडे पार्टी सेलिब्रेट कर रहे थे। इसी दौरान एमएससी प्रथम वर्ष और द्वितीय वर्ष के छात्र मौके पर आ गए। बर्थडे पार्टी के दौरान शराब पार्टी करने के लिए सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्रों से रुपयों की डिमांड की। जब रुपए नहीं दिए तो सीनियर छात्रों ने लाठी-डंडे सरिए से मारपीट करना शुरू कर दिया। इस मारपीट के दौरान चाकू भी चला दिया… जिसमें 4 छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। सेकंड ईयर के छात्र अतुल चौधरी के शिकायत पर आर्यन विजय, तनवेंद्र पाठक, बादल चौधरी समेत अन्य के खिलाफ गांधीनगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुट गई है।

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    पुजारी को जिंदा जलाने की कोशिश,पेट्रोल बम फेंका

    चिकित्सालय में उपचाराधीन पुजारी


    राजसमंद जिले के देवगढ़ थाना क्षेत्र में रविवार देर रात बुजुर्ग दंपती को जिंदा जलाने के लिए पेट्रोल बम से हमलें का मामला सामने आया है। मामला हीरा की बस्ती क्षेत्र का है। वहीं हमलावरों की संख्या 10 के लगभग बताई जा रही है। हमले में पुजारी और उसकी पत्नी 80 फीसदी तक झुलस गए। दोनों को पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। जानकारी के मुताबिक पुलिस ने इस मामले में 8 संदिग्धों को हिरासत में लिया है।

    जमीन विवाद को लेकर हुआ हमला

    जानकारी के अनुसार राजसमंद के देवगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-8 कामली घाट स्थित एस्सार पेट्रोल पंप के सामने मंदिर की जमीन के विवाद में रविवार रात करीब 8.30 बजे 10-12 लोगों ने नवरतन लाल की दुकान में घुसकर पुजारी और उसकी पत्नी पर पेट्रोल बम फेंक दिया।

    पुजारी के पुत्र मुकेश प्रजापत के अनुसार उनका परिवार खाना खा रहा था। करीब 10 बदमाशों ने दुकान में घुसकर हमला कर दिया। पेट्रोल बम फेंकने से पुजारी नवरत्न लाल ( 75) पुत्र रंग लाल प्रजापत एवं उनकी पत्नी जमना देवी (60) निवासी हीरा की बस्सी के कपड़ों ने आग पकड़ ली। दोनों बुरी तरह झुलस गए।

    घटना के बाद दुकान से आग की लपटें व धुएं को देखकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, तब तक आरोपी भाग चुके थे। ग्रामीणों ने पानी और मिट्टी डालकर आग बुझाई और देवगढ़ पुलिस तथा 108 एम्बुलेंस को सूचना दी। ग्रामीणों ने एम्बुलेंस की मदद से दोनों घायलों को देवगढ़ हॉस्पिटल भेजा।

    पुलिस पर लापरवाही का आरोप

    पुजारी के पुत्र मुकेश प्रजापत ने बताया कि विवाद को लेकर उन्होंने पहले ही कामली घाट चौकी पर रिपोर्ट भी दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

    पुलिस ने 8 संदिग्धों को लिया हिरासत में

    घटना की सूचना पर देवगढ़ थानाधिकारी शैतान सिंह नाथावत जाप्ता लेकर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। तहसीलदार मुकन्द सिंह, एसआई प्रताप सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे। इस दौरान हॉस्पिटल में भीड़ जुट गई। इधर, पुलिस ने देर रात दो टीमें दबिश देने के लिए भेजी। पुलिस ने मामले में करीब 8 संदिग्ध लोगों को हिरासत में ले लिया है।


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    ‘मन की बात’ कार्यक्रम आयोजित, शहर के हालातों को लेकर दिखा आक्रोश, आंदोलन पर हुआ विचार

    मन की बात कार्यक्रम को सम्बोधित करते भाजपा नेता नरेन्द्र घिंटाला

    सूरतगढ़ (20 नवंबर) | राष्ट्रवादी विचारधारा के कार्यकर्ताओं को एकजुट करके जनसमस्याओं को लेकर संघर्ष का बिगुल बजाने के लिए आज “मन की बात (घर बीती हताई)” कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

    व्यापार मंडल भवन में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विभिन्न पार्टियों व संगठनों से जुड़े नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम के संयोजक नरेन्द्र घिंटाला ने बताया कि बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संबंधी समस्याओं का समाधान कराने, यूरिया डीएपी खाद का सुचारू वितरण करने, कृषि कनेक्शन पर 6 घंटे सुचारू बिजली आपूर्ति करने और बकाया कनेक्शन जारी करने, राजियासर स्टेशन पर राजकीय महाविद्यालय खोलने, पानी-बिजली की समस्याओं के जल्द निस्तारण हेतु, नशाखोरी पर अंकुश लगाने, नगरपालिका के भ्रष्टाचार और गरीबों को उजाड़ने की कार्रवाई के विरोध सहित इलाके की समस्याओं के लिए सभी को एकजुट होकर आर-पार की लंबी लड़ाई लड़ने पर चर्चा हुई।

    बैठक में वक्ताओं ने वर्तमान में सत्ताधारी और विपक्ष में बैठे नेताओं की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। शहर में अराजकता जैसा माहौल होने के बावजूद प्रमुख नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किये गये।

    इस अवसर पर भाजपा नेता व कार्यक्रम संयोजक नरेन्द्र घिंटाला,वरिष्ठ पत्रकार करणीदान सिंह राजपूत और मनोज स्वामी, मोहन पूनिया, लीलाधर फ़ौजी सहित अनेक लोगों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में सूरतगढ़ विधानसभा के वरिष्ठ नागरिकगण एवं राष्ट्रवादी विचारधारा के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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    नेताजी को महिलाओ ने दौड़ा दौड़ा कर पीटा, फाड़े कपड़े, देखें वीडियो

    भरतपुर। जिले की भुसावर पंचायत समिति के सदस्य की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है । महिलाओ के द्वारा इस पंचायत समिति के सदस्य को दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया है। महिलाओ ने भुसावर पंचायत समिति के सदस्य पर दुर्व्यवहार और मारपीट करने के साथ ही लाठी डंडों के बल पर जमीन को हड़पने के प्रयास का आरोप लगाया है ।
    दरअसल मामला यह है कि भुसावर के दीबली निवासी भुसावर पंचायत समिति के सदस्य और पूर्व सरपंच रोहिताश मीना 19 नवंबर 22 को गांव मालपुर में अपनी रिश्तेदारी में विवादित जमीन पर कब्जा दिलाने की नियत से अपने गुट के व्यक्तियों को लेकर हथियारों से लेस होकर पहुंचे थे। जहां पर मीना गुट ने जब विवादित जमीन पर पक्का निर्माण शुरू किया तो दूसरे पक्ष ने न्यायालय द्वारा विवादित जमीन पर भुसावर एसडीएम कार्यालय की ओर स्टे की बात कहते हुए निर्माण कार्य का विरोध किया।

    https://youtu.be/mvmm7iVlaY4
    पंस सदस्य की पिटाई का वायरल वीडियो

    लेकिन सत्ता की ताकत के नशे में मीना और उनके साथ गए व्यक्तियों ने महिलाओ के साथ गाली गलोच करना शुरू कर दिया । मना करने के बाद पूर्व सरपंच और पंचायत समिति सदस्य मीना महिलाओ से उलझ गए ।
    जिसके बाद महिलाओ और अन्य लोगों ने मीना की जमकर पिटाई कर दी। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वीडियो जमकर वायरल हो रहा है।
    इधर पीड़ित महिलाओ ने भुसावर पंचायत समिति के सदस्य रोहितास मीना की जिला पुलिस अधीक्षक और मानवाधिकार आयोग से शिकायत की है ।

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    शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) के चुनाव सम्पन्न, चांदौरा अध्यक्ष व प्रेम कुमार बने मंत्री

    शिक्षकों की BLO ड्यूटी के विरोध में देंगे ज्ञापन

    सूरतगढ़। राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) की सूरतगढ़ उपशाखा की नवीन कार्यकारिणी के चुनाव रविवार को नवीन आदर्श विद्या मंदिर में सम्पन्न हुए। चुनाव अधिकारी नेत्रपाल सिंह व संभाग संगठन मंत्री अविनाश शर्मा के निर्देशन में नवीन कार्यकारिणी का गठन किया गया जिसमें शंकरलाल चांदोरा को अध्यक्ष , प्रेम कुमार को मंत्री , बृजरतन स्वामी को कोषाध्यक्ष, रमेश कुमार स्वामी को सभाअध्यक्ष, गुरमुख सिंह व श्यामलाल को उप सभाअध्यक्ष , श्रीमती सूरज को महिला मंत्री, सुमन धांधल को महिला उपाध्यक्ष ,लक्ष्मण सिंह चोटिया को वरिष्ठ उपाध्यक्ष ,श्रवण कुमार तिवारी को उपाध्यक्ष( पुरुष) चुना गया l
    नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को सभी सदस्यों ने बधाई दी तथा अपने पद व दायित्व की शपथ दिलाई गई। नई कार्यकारिणी के गठन होते ही अध्यक्ष शंकरलाल चांदोरा के निर्देशन में प्रथम बैठक रखी गई और जिस में यह निर्णय लिया गया की प्रदेश शैक्षिक सम्मेलन के दिन , 25और 26नवम्बर को बीएलओ को चुनाव ड्यूटी से मुक्त किया जावे जिससे कि वे शिक्षक सम्मेलन में शामिल हो सके l इस हेतु एसडीएम को 21 नवंबर 2022 को ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया।

    इससे पूर्व गत कार्यकारिणी के कोषाध्यक्ष द्वारा आय व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया l निर्वाचन के दौरान पूर्ण चंद ,राजाराम सिहाग, इंद्राज जी चांदोरा, रामकुमार जी टाक जसराम जी सुथार, प्रभु दयाल गौरी शंकर जी खुड़िया,गौरीशंकर सरसवा सहित अनेक शिक्षक उपस्थित हुए।

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    दूध डेयरी पर युवती के साथ गैंगरेप, 3 जवानों सहित 5 पर आरोप

    रायसिंहनगर। इलाके में एक युवती से गैंगरेप करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। युवती ने 5 जनों पर गैंग रैप का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज़ करवाया है । शुक्रवार रात हुई यह घटना कुम्हार बस्ती में स्थित दूध डेयरी की है। पुलिस थाने में पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया है कि शुक्रवार देर शाम वह दूध डेयरी पर घी लेने के लिए गई थी। जहां बंद कमरे में उसके साथ 5 जनों ने दुष्कर्म किया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनवारी लाल मीणा ने बताया है कि पूरे घटनाक्रम में पुलिस द्वारा तीन बीएसएफ जवानो सहित पांचो लोगों को हिरासत में लिया है।

    पुलिस के मुताबिक पिता द्वारा मामला दर्ज करवाने के बाद दो जनों को पुलिस ने सुबह ही हिरासत में ले लिया था। वहीं बीएसएफ 3 जवानों की अपराध में संलिप्तता की बात सामने आने पर पुलिस द्वारा बीएसएफ अधिकारियों से पत्राचार किया गया। जिसके बाद अधिकारियों द्वारा जांच के लिए तीनों जवानों को पुलिस को सौंप दिया गया। पुलिस द्वारा पीड़िता का श्रीगंगानगर में मेडिकल मुआयना करवाया गया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनवारी लाल मीणा के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपाधीक्षक अनु बिश्नोई थाना प्रभारी गणेश कुमार विश्नोई के नेतृत्व में गठित टीमों द्वारा मामले की जांच की जा रही। पुलिस द्वारा श्री गंगानगर से फॉरेंसिक टीम बुलाकर मौके से सबसे इकट्ठे किए गए हैं। इसके अलावा पीड़िता के धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान भी करवाए गए हैं। दूसरी ओर गैंगरेप के मामले में 3 बड़े नाम सामने आने के बाद पुलिस अधिकारी मामले में मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं।

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    लोकपाल अनिल धानुका ने पीएम आवास योजना का किया निरीक्षण

    लोकपाल को आवास योजना में लाभान्वितों की बकाया राशि की स्वीकृति की मांग का ज्ञापन सौंपते सरपंच व अन्य

    जैतसर। श्रीगंगानगर के लोकपाल अनिल धानुका लगातार ग्राम पंचायतों का दौरा कर सरकारी योजनाओं की धरातल पर हो रही क्रियान्वित का निरीक्षण कर रहे हैं। इसी कड़ी में शनिवार को जिला लोकपाल ने जैतसर, बुगिया, मसानीवाला सहित आसपास की ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना में स्वीकृत आवास योजना के तहत बने मकानों का निरीक्षण कर भौतिक सत्यापन किया । लोकपाल धानुका ने शनिवार को श्रीगंगानगर लोकपाल अनिल धानुका ने निरीक्षण के दौरान लाभार्थियों से बातचीत कर निर्माण कार्य प्रगति की जानकारी प्राप्त की। लोकपाल धानुका ने अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्माण कार्य की गुणवत्ता व समय पर कार्य पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया ।

    लोकपाल धानुका ने अधिकारियों व कर्मचारियों की बैठक लेते हुए उन्हें ग्राम पंचायतों में चल रहे कार्यो व मनरेगा के सफल किर्यान्वयन के लिए निर्देशित किया।निरीक्षण के दौरान ग्राम पंचायत जैतसर के सरपंच रविन्द्र बाघला, ग्राम विकास अधिकारी मनोज कुमार ने जिला लोकपाल को लाभार्थियों की लंबित राशि की स्वीकृति जारी करवाने की मांग की।

    ग्राम पंचायत बुगिया में भी जिला लोकपाल धानुका ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने आवासों का निरीक्षण किया । निरीक्षण के दौरान ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी सुनील कुमार,लिपिक तुलसीराम व अन्य कर्मचारी व फॉर्टी के अध्यक्ष रामकिशन खेमका, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष गौरव तिवाड़ी सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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    कुऐं में मिट्टी धंसने से दबे 2 लोगों की मौत, करीब 10 घंटे चले बाद निकाला बाहर

    हनुमानगढ़ (कुलदीप शर्मा )। जिले की ग्राम पंचायत रामगढ़ के चक-16 डीपीएन में एक खेत में ट्यूबवैल के कुएं में काम करने उतरे दो व्यक्ति कुआं धंसने से फंस गए थे। शुक्रवार शाम घटना के तुरंत बाद ही ग्रामीणों ने अपने स्तर पर बचाव कार्य शुरू कर दिया। बाद में प्रशासन व पुलिस के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। जेसीबी मशीनों से कुएं के बराबर खुदाई का काम शुरू कर दिया गया जो अल सुबह तीन बजकर 30 मिनट तक चला। सारी रात चले निरंतर रेस्क्यू ऑपरेशन में कुएं में धंसे दोनो जनों को निकालने के बाद गोगामेड़ी हॉस्पिटल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दोनो मृतकों की पहचान कृष्ण कुमार निवासी रामगढ़ व छोटूराम निवासी सरदारगढिया के रूप में हुआ। गोगामेड़ी पुलिस फिलहाल दोनो के शवों के पोस्टमार्टम करवाने की कार्रवाई में लगी हुई थी।


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    मन की बात (घर बीती हताई) कार्यक्रम कल,शहर से जुड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

    सूरतगढ़। विधानसभा के राष्ट्रवादी विचारधारा के कार्यकर्ताओं के कार्यक्रम में रविवार को नई धान मंडी स्थित व्यापार मंडल भवन में होगा। भाजपा नेता और कार्यक्रम संयोजक नरेन्द्र घिंटाला ने बताया कि इस कार्यक्रम में विधानसभा क्षेत्र की समस्याओ के समाधान पर विचार किया जाएगा व आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।

    इनमें प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना की समस्या व समाधान, यूरिया डीएपी खाद की सुचारू आपूर्ति, कृषि कनेक्शनों पर 6 घंटे सुचारू बिजली आपूर्ति व बकाया कनेक्शनों को जारी करने बाबत, नगरपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार अव्यवस्था के खिलाफ आंदोलन,शहर में सफाई व्यवस्था मैं सुधार, राजियासर स्टेशन पर राजकीय महाविद्यालय की स्थापना के आंदोलन को समर्थन सहित अन्य मुद्दों पर सभी कार्यकर्ताओं से विचार विमर्श कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

    इसके साथ ही सभी कार्यकर्ताओं के मन की बात के माध्यम से राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूत करने व कार्यकर्ताओं के सुख-दुख को समझ कर कार्यकर्ताओं के हित सुरक्षित करने के लिए सभी को एक साथ संघर्ष करने की नीति पर मंथन होगा। वहीं उनके सुझाव जिला एवं प्रदेश स्तर पर पहुंचाने का काम किया जाएगा।

    घिंटाला ने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रवादी विचारधारा के सभी पुराने व नए कार्यकर्ताओं का पूरी विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं का आपसी परिचय व तालमेल को बढ़ावा मिलेगा। इस कार्यक्रम से सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सभी कार्यकर्ताओं के सुझाव पर अमल करते हुए विधानसभा में राष्ट्रवादी विचार को और अधिक मजबूत बनाने का काम किया जाएगा।

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    कर्ज से परेशान व्यापारी ने खुद को मारी गोली, मौत

    मृतक मनमोहन सोनी

    जयपुर। राजधानी जयपुर में क़र्ज़ से परेशान एक व्यापारी द्वारा लाइसेंसी पिस्टल से गोली मारकर जीवन लीला समाप्त करने का मामला सामने आया है । घटना शास्त्री नगर थाना इलाके के स्वर्णकार कॉलोनी की है। जहां डिपार्टमेंटल स्टोर चलाने वाले मनमोहन सोनी ने खुद की लाइसेंसी पिस्टल से कनपटी पर गोली मार ली।….….गोली की आवाज सुनकर परिजन कमरे में दौड़े…परिजन लहूलुहान हालत में व्यापारी को लेकर कांवटिया अस्पताल ले गए। जहां पर डॉक्टर ने उसे मृत कर दिया। सूचना मिलने के बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और घटना की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से एक सर्विस पिस्टल भी बरामद की है।

    प्रथमदृष्टया कर्ज के चलते आत्महत्या की बात आ रही सामने

    जांच पड़ताल के दौरान सामने आया है कि मनमोहन सोनी पर करीब 6 करोड रुपए का कर्जा था। दूसरी तरफ मनमोहन सोनी ने अपने एक परिचित को बाजार में ₹60000000 उधार दिए थे जो लंबे समय से रुपए नहीं चुका रहा था। इसके चलते मनमोहन सोनी ने बाजार से और कर्जा लिया। ऐसे मे सुसाइड के पीछे कर्जा होने का बड़ा कारण बताया जा रहा है …हालांकि पुलिस को मौके से किसी भी प्रकार का कोई भी सुसाइड नोट नहीं मिला है। फिलहाल परिजनों की शिकायत के आधार पर शास्त्री नगर थाना पुलिस ने अब इस पूरे प्रकरण को लेकर के मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस इस पूरे प्रकरण में मामला दर्ज कर जांच पड़ताल कर रही है।

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    जैनाचार्य श्री जयानंद विजय महाराज के सानिध्य में मनाया गया सक्रांति महोत्सव

    सक्रांति महोत्सव में उपस्थित जैन समाज के लोग

    सूरतगढ़ (16 नवंबर)। जैन आचार्य श्रीमद जयानंद सुरीश्वर जी महाराज की पावन निश्रा में बुधवार को सक्रांति महोत्सव का आयोजन किया गया। श्री विजय वल्लभ जैन धर्मशाला में आचार्यश्री के मंगलाचरण के साथ सक्रांति कार्यक्रम आरंभ हुआ। उसके बाद गणी श्री जय कीर्ति विजय जी महाराज साहब ने भक्ताम्बर पाठ का वाचन किया। कार्यक्रम में श्री आत्म वल्लभ जैन कन्या मंडल की बालिकाओं द्वारा नाटिका प्रस्तुत की गई जिसमें इस चातुर्मास में किए गए कार्यों को दर्शाया गया। श्री आत्म वल्लभ जैन पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल श्रीगंगानगर की बालिकाओं ने भी सांप्रदायिक सौहार्द पर एक नाटिका प्रस्तुत की।

    श्री आत्म वल्लभ तरूणी महिला मंडल की श्रीमती अंजना पटावरी, रिद्धि नौलखा, गुलाब देवी छाजेड़, तारा देवी बांठिया, ज्योति डागा, प्रवीण डी जैन, श्रीमती आशू जैन लुधियाना, अमरचंद बोरड श्रीगंगानगर, नीतू बैद, नेहा बैद, ज्योति, सुमन, भाग्य श्री बैद आदि ने गीत, भजन और भावों के माध्यम से अपनी प्रस्तुति दी। सक्रांति भजन का गायन लुधियाना से पधारे अनिल जैन ने किया।

    इंसान-इंसान के साथ रहना सीख लें तो जीवन हो जायेगा आसान : श्री जयानन्द विजय

    धर्म सभा को संबोधित करते हुए जैन आचार्य श्री जयानंद सुरीश्वर जी महाराज ने अपने भजन के माध्यम से भाव व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि एक इंसान को दूसरे इंसान के साथ कैसे रहना है यह कला यदि हम सीख ले हमारा जीवन आसान हो जाएगा। कहां बोले और कहां मुंह बंद रखें यह बात यदि इंसान समझ लेगा तो सारे झगड़े फसाद दूर हो जाएंगे। बाल मुनि श्री चैत्य वल्लभ जी महाराज ने सक्रांति स्त्रोत्र का वाचन किया। पूज्य गुरुदेव भोले बाबा ने सक्रांति नाम पढ़कर सुनाया।

    हनुमानगढ़ से पधारे श्यामलाल गीदड़ ने द्वारा हाथों से निर्मित आचार्य श्री का चित्र श्री संघ को भेंट किया गया। इस सक्रांति का लाभ लेने वाले विजय कुमार, सुशीला देवी बैद परिवार का श्री संघ अध्यक्ष सुरेंद्र चोपड़ा, उपाध्यक्ष पवन गोलछा, सचिव सुशील सेठिया और कोषाध्यक्ष हेमंत डागा ने बहुमान किया। साथ ही शालीभद्र धन्ना सेठ के नाटक में भाग भाग लेने वाले सभी कलाकारों को भी श्री पार्श्वनाथ जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बैद परिवार द्वारा सधार्मिक वात्सल्य का भी आयोजन किया गया।

    कार्यक्रम का मंच संचालन संजय बैद ने किया। इस अवसर पर सूरतगढ़ के श्रावक समाज के साथ-साथ लुधियाना, श्री गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, ऐलनाबाद और पीलीबंगा से भी श्रद्धालु सम्मिलित हुए।

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    टीलावली के बहाव क्षेत्र के खसरा न.-14 पर विकसित हो रही है कॉलोनी

    सूरतगढ़। अगर आप नेशनल हाईवे पर पिपेरण रेलवे स्टेशन के सामने काटी जा रही बालाजी सिटी में अपने सपनों का आशियाना खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए हैं। जंगल में मंगल जैसे जुमलों के साथ बालाजी सिटी कॉलोनी को लेकर बड़ी-बड़ी बातें कर हाइप क्रिएट करने का प्रयास किया जा रहा हैं। इसके लिए पंजाबी गायक कंवर ग्रेवाल की नाइट के बहाने कॉलोनी में मजमा लगाया जा रहा है ताकि आने वाली भीड़ को बालाजी सिटी का सुनहरा मुखौटा दिखाया जा सके। ये और बात है कि इस मुखौटे के पीछे का मंजर बेहद खौफनाक भी हो सकता है। वैसे इस कॉलोनी के प्रमोटरों में से ही कुछ लोगों का इतिहास दागदार रहा है। ये वहीं लोग है जिन्होंने जोहड़ पायतन की भूमि पर आनंद विहार और बसंत विहार कॉलोनीया बसाई थी। इन कॉलोनियों में प्लॉट लेकर मकान बनाने में अपनी मेहनत की कमाई के लाखों रुपए खर्च करने वाले लोगों को पिछले एक दशक से अपने सपनो के आशियाने के उजड़ने का डर सोने नहीं दे रहा है। इसलिए अगर आपको भी बुरे सपनों से डर लगता है तो यह खबर आपको पूरी पढ़ लेनी चाहिए। 

    घग्घर बहाव क्षेत्र की भूमि पर बसाई गई है बालाजी सिटी ?

    नेशनल हाईवे-62 पर पिपेरण रेलवे स्टेशन के सामने विकसित की जा रही बालाजी सिटी का रंगारंग उद्घाटन प्रसिद्ध पंजाबी गायक कंवर ग्रेवाल की नाइट के साथ रविवार यानी कल होने जा रहा है। लेकिन राजस्व रिकॉर्ड के सामने आ रहे दस्तावेजों से कॉलोनी विवादों में घिर गई है। राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक कॉलोनी के प्रथम और द्वितीय फेज को, दूसरे खसरो के साथ ही टिलावाली गांव के खसरा नंबर 14/4 व 14/5 की करीब 5 हेक्टर यानि 20 बीघा जमीन को शामिल करते हुए विकसित किया जा रहा है। घग्घर विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक कॉलोनी की भूमि के खसरों में से खसरा नंबर -14 का सम्पूर्ण 134 बीघा रकबा घग्घर बहाव क्षेत्र के 12 नंबर डिप्रेशन का हिस्सा है। जिसे राज्य सरकार ने 5 अप्रैल 1967 के राजकीय गजट नोटिफिकेशन द्वारा अवाप्त किया था । नोटिफिकेशन के अनुसार घग्घर के 12 नंबर डिप्रेशन की खसरा नंबर -14 की सम्पूर्ण 134 बीघा भूमि अवाप्त की कर ली गई थी।

    ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि खसरा नंबर-14/5 की जिस भूमि पर बालाजी सिटी का फर्स्ट फेज विकसित किया जा रहा है वह जगह कहां से आई ? दूसरा सवाल यह है कि जब सम्पूर्ण रकबा  बहाव क्षेत्र के लिए आरक्षित हो गया था तो उस पर खातेदारी कैसे जारी कर दी गई ? साफ है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से इस खेल को अंजाम दिया गया है। अगर ऐसा है तो खातेदारी से लेकर कृषि भूमि के कन्वर्जन और कॉलोनी के काटने की संपूर्ण प्रक्रिया ही विवादित है। ऐसे में भविष्य में अगर मामले की जांच होती है तो कॉलोनी में प्लाट खरीदने वालों को आनंद और बसंत बिहार कॉलोनी में प्लाट खरीदने वालों की तरह मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

    राज्य सरकार द्वारा जारी 5 अप्रैल 1967 का नोटिफिकेशन-पेज -2
    राजस्व विभाग के खसरे में लाल रेखाओं से दिखाया गया खसरा नंबर-14 का क्षेत्र

    राजस्व विभाग और जीएफसी की भूमिका में मामले में संदिग्ध

    सूरतगढ़ में पैराफेरी क्षेत्र में पिछले कुछ सालों से चल रही बंदरबांट किसी से छुपी हुई नहीं है। राजस्व दस्तावेजों के मुताबिक बालाजीसिटी कॉलोनी का मामला भी कुछ ऐसा ही प्रतीत हो रहा है। इस पूरे मामले में राजस्व विभाग की तरह ही जीएफसी अधिकारीयों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। क्योंकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब घग्घर बहाव क्षेत्र के लिए भूमि अवाप्त हो गई थी और अवाप्त भूमि के बदले काश्तकारों को तबादला दे दिया गया तो विभाग के अधिकारियों ने जमीन को अपने कब्जे में क्यों नहीं लिया ? दूसरा सवाल यह है कि जब राजस्व विभाग की मिलीभगत से खसरा नंबर-14 की भूमि की खातेदारी दी जा रही थी तो विभाग के अधिकारी क्यों मौन साधे रहे ? जमीन की खातेदारी देने से लेकर कॉलोनी काटने की प्रक्रिया के बीच विभाग के अधिकारी आखिर क्यों मूकदर्शक बने रहे और  डिप्रेशनो की जमीन को बचाने के लिए एक बार भी आपत्ति क्यों नहीं दर्ज करवाई। कॉलोनी विकसित करने के नाम पर प्रभावशाली लोग शहर को बर्बाद होने से रोकने के लिए बहाव क्षेत्र में बनाए गए बंधों को खत्म कर पारिस्थितिकी को बिगड़ने में लगे हुए थे तब भी अपने कर्तव्य को भूल जीएफसी के अधिकारी क्यों गहरी तंद्रा में थे ? क्या यह मान लिया जाना चाहिए कि राजस्व विभाग की तरह जीएफसी के अधिकारी भी चांदी के सिक्कों की चमक से चोंधिया कर अपना कर्तव्य भूल गए थे या फिर प्रभावशाली लोगों के आगे रीढ विहीन अधिकारियों ने चुप रहना ही बेहतर समझा ?

    अलग-अलग खसरों की जमीन के एक साथ आने पर  सवाल ?

    पिपेरण पंचायत द्वारा बालाजी सिटी के प्रथम फेस के लिए जारी NOC

    कॉलोनी के प्रमोटरों के अनुसार बालाजी सिटी के प्रथम फेज की कन्वर्जन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। करीब 19 बीघा भूमि पर विकसित किए गए प्रथम फेस में खसरा नंबर 9/1,10/3,14/5,163/10,164/10 और 361/161 की भूमि शामिल है। साफ है कि एक साथ छह अलग-अलग खसरों की भूमि पर कॉलोनी का प्रथम फेज विकसित किया गया है। लेकिन इसी के साथ सवाल पैदा होता है कि  ये सभी खसरे एक साथ समीप कैसे आ गए ? एक साथ 6 खसरों की सीमाएं मिले संभव नहीं है लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से यह कारनामा कैसे किया गया है यह भी एक बड़ा सवाल है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि क्योंकि विकसित की जा रही कॉलोनी के आस की सैकड़ों बीघा भूमि उक्त कॉलोनाइजरों द्वारा खरीद ली गई है इसलिए कन्वर्जन सहित विभिन्न कारवाइयों के कॉलोनाइजर अपनी सुविधा अनुरूप दस्तावेजों का प्रयोग कर रहे हैं और कॉलोनी अपनी सुविधा के हिसाब से काट रहे हैं ?

    आरटीआई अधिनियम के तहत नहीं मिल रही दस्तावेजों की नकल

    इस कॉलोनी को लेकर राजस्व भूमि के दस्तावेजों में गड़बड़ी की सूचना के बाद कई लोगों ने कॉलोनी और उससे जुड़ी भूमि के बारे में तहसील, उपखंड और नगरपालिका कार्यालय में आरटीआई के तहत आवेदन किया था। लेकिन महीनो बीतने के बाद भी आवेदकों को सूचना ही नहीं दी जा रही। जिससे कहीं ना कहीं यह प्रतीत होता है कि दाल में कुछ ना कुछ काला है। वरना सूचना के अधिकार में दस्तावेजों को उपलब्ध कराने में क्या हर्ज़ है ?

                         कुल मिलाकर बालाजी सिटी की भूमि को लेकर कॉलोनी में प्लाट खरीदने की इच्छा रखने वालों को तमाम पहलुओं और कॉलोनी संबंधी दस्तावेजों को अच्छी तरह से लिख पढ़ लेना चाहिए। ताकि आपके खून पसीने की कमाई जोहड़ पायतन की भूमि पर प्लाट खरीदने वालों की तरह से खतरे में नहीं पड़ जाए।   

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    पिकअप में भरा थे डीजल से भरे ड्रम

    सूरतगढ़। सूरतगढ़-श्रीगंगानगर नेशनल हाईवे संख्या- 62 पर चक 28 पीबीएन बस स्टैंड के पास आज सुबह बजरी से भरे एक ट्रोले और पिकअप जीप में आमने-सामने की भिड़ंत हो गई । हादसे के बाद दोनों वाहन पलट गए। पुलिस के मुताबिक पिकअप और ट्रोले में दो-दो लोग सवार थे जिनमे दो जने मामूली चोटिल हो गए। इनमें से ट्रोले सवार एक जने का अस्पताल में उपचार करवाया गया, जबकि पिकअप सवार के मामूली चोटें आई है। सूचना पाकर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटना की जानकारी ली ।

    पिकअप के उड़े परखच्चे, पेड़ से टकराया ट्रॉला

    पिकअप और ट्रॉले की भिड़ंत इतनी जबरदस्त थी कि टक्कर के बाद पिकअप गाड़ी के परखच्चे उड़ गए वहीं अनियंत्रित होकर ट्रॉला सड़क किनारे लगे कीकर के पेड़ से टकरा गया। ट्रॉले के कीकर के पेड़ से टकराने से बड़ा हादसा टल गया वरना अनियंत्रित ट्रॉला पास में बनी दुकानों में घुस सकता था। हादसे के बाद ट्रोले का केबिन कीकर के पेड़ पर चढ़ गया और ट्रॉला पलट गया । वहीं ट्रोले के अनियंत्रित होकर पलटने से ट्रोले में भरी बज़री पिकअप गाड़ी पर गिर गई जिसे बाद में आसपास के लोगों ने हटाकर घायलों को बाहर निकाला।

    पिकअप में भरा था अवैध डीज़ल

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बजरी से भरा ट्रोला बीकानेर से श्रीगंगानगर की ओर जा रहा था। जबकि पिकअप जीप श्रीगंगानगर से सूरतगढ़ की ओर आ रही थी । प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पिकअप जीप में डीजल के ड्रम भरे हुए थे जिन्हें हादसे के बाद तुरंत मौके से उठवा लिया गया ।

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    लाभार्थीयों को गुलाब का फूल देकर की नौटंकी

    सूरतगढ़। मास्टर ओमप्रकाश कालवा भले ही किस्मत से चेयरमैन जैसे ऊँचे पद पर पहुंच गए हो लेकिन दूसरों को नीचा दिखाने का कोई भी मौका वे कभी भी नहीं छोड़ते। अब बुधवार को हुए मेगा पट्टा वितरण कैंप की ही बात कर ले। समारोह में जिला कलेक्टर की मौजूदगी में विधायक रामप्रताप कासनिया की चेयरमैन कालवा द्वारा लगातार अनदेखी की गई। पहले तो मंच पर चेयरमैन कालवा जानबूझकर जिला कलेक्टर और मौजूदा विधायक रामप्रताप कासनिया के बीच में बैठ गये ताकि विधायक कलेक्टर से सीधा संवाद नहीं कर पाए। हालांकि चेयरमैन चाहते तो जिला कलेक्टर के एक और विधायक कासनिया और दूसरी और खुद बैठकर विधायक को सम्मान दे सकते थे लेकिन संकीर्ण मानसिकता के चलते उन्होंने बीच की कुर्सी पर कब्ज़ा कर लिया। वैसे कोई समझे या नहीं लेकिन हक़ीक़त ये है कि बीच की कुर्सी पर खुद बैठकर और विधायक व जिला कलेक्टर को आजू बाजू में बैठाकर चेयरमैन कालवा खुद के सुप्रीमो होने का संदेश दे रहे थे ।

    पट्टे बांटने के दौरान भी लगातार की अनदेखी

    अतिथियों के भाषण के बाद जब जिला कलेक्टर द्वारा पट्टे बांटने की शुरुआत की गई तब भी चेयरमैन कालवा ने पट्टे बांटने के लिए विधायक को आमंत्रित नहीं किया। जिला कलेक्टर के साथ चेयरमैन कालवा  पट्टे बांटते रहें और विधायक रामप्रताप कासनिया एक और बैठे रहे। लगातार हो रही अनदेखी के बाद विधायक रामप्रताप कासनिया खड़े होकर जाने लगे तो चेयरमैन कालवा ने एक तरह से नौटंकी करते हुए विधायक को कहा कि आप आए अपनी मर्जी से हो और हमारी मर्जी से जाओगे। इसके बाद औपचारिकता करते हुए चेयरमैन कालवा ने पट्टा वितरण में विधायक को साथ लेते हुए फोटो खिंचवाई। हालांकि विधायक जिस पोजीशन में खड़े थे और जिस तरह से फोटो खींचवाई गई यह बताने के लिए काफी है कि विधायक उस समय खुद को किस तरह से असहज महसूस कर रहे थे। कार्यक्रम के नीचे दिए गए वीडियो को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह से कार्यक्रम में विधायक को नज़रअंदाज़ किया गया।

    कार्यक्रम के बाद जिला कलेक्टर को चेयरमैन कालवा ने कार्यालय में जलपान के लिए आमंत्रित किया उस समय भी चेयरमैन ने संकीर्णता का परिचय दिया। उन्होंने शिष्टाचार के नाते मंच सांझा कर रहे विधायक व कांग्रेस नेताओं सहित अन्य अतिथियों को जलपान के लिये आमंत्रित करना जरूरी नहीं समझा और कलेक्टर के साथ पालिका कार्यालय चल पड़े। यहां तक कि विधायक गंगाजल मील, जिनकी बदौलत मास्टर कालवा चेयरमैन की कुर्सी पर बैठे है को भी चेयरमैन ने जलपान के लिए साथ लेकर चलना मुनासिब नहीं समझा। क्योंकि जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि मास्टर कालवा नहीं चाहते थे कि कोई दूसरा कलेक्टर से बात भी कर लें। ये अलग बात है कि मंच पर पहले विधायक कासनिया ने इशारों में पट्टे बनाने में हो रहे भेदभाव की कलई खोल दी तो मंच की सीढ़ियों से उतरते समय कुछ आम नागरिकों में कालवा पर पट्टे बनाने में भेदभाव और मनमानी का आरोप लगाते हुए उनके सामने ही क्लक्टर को शिकायत कर दी। बहरहाल विधायक को शर्मिंदा करने के लिये पालिका ऑफिस में भी चेयरमैन कालवा अपनी कारगुजारीयों से नहीं चुके और ऑफिस में मौजूद 2 विशिष्ट चेयरों पर कलेक्टर के साथ खुद जमकर बैठ गए। उन्होंने विधायक के लिए पालिका कार्यालय के अन्य कमरों में मौजूद विशिष्ट कुर्सियां मंगाने की जरूरत नहीं समझी जिसके चलते विधायक को सामने पड़ी साधारण कुर्सियों पर बैठना पड़ा। बाद में जब कांग्रेस नेता हनुमान मील कार्यालय में पहुंचे तो चेयरमैन कालवा ने बड़े ही अनमने ढंग से स्टाफ को विशिष्ट कुर्सी लाने को कहा। लेकिन जब कुर्सी आई तो हनुमान मील ने बड़प्पन दिखाते हुए चेयरमैन के बगल में लगाई गई कुर्सी पर एडीएम अरविंद जाखड़ को बैठाया और स्वंय विधायक कासनिया के बराबर की कुर्सी पर बैठे।

                         पूरे प्रकरण में चेयरमैन कालवा ने संकीर्ण मानसिकता का परिचय दिया वहीं खुद को  मिल रहे विशिष्ट ट्रीटमेंट में जिला कलेक्टर भी मर्यादा को भूलते नजर आए। वे यह भी भूल गए कि राज्य सरकार के निर्देश हैं कि विधायक सहित जनप्रतिनिधियों के सम्मान का ख्याल रखना प्रशासनिक अधिकारियों का दायित्व है। निर्देश तो यहां तक है कि जब विधायक जिला कलेक्टर से  मिलें कलेक्टर को खुद उठकर विधायक को सम्मान देना चाहिए। लेकिन कलेक्टर सौरभ स्वामी भी अपनी मौजूदगी में विधायक का अपमान होता देखते रहे।

    बैठकों में विधायक को करते रहे हैं अपमानित

    ऐसा नहीं है कि पट्टा वितरण कार्यक्रम पहला मौका था जब विधायक कासनिया का मान मर्दन करने का प्रयास किया हो। विधायक को दोयम दर्जे के व्यक्ति की तरह ट्रीट करते हुए वर्तमान बोर्ड की प्रत्येक बैठक में वाइस चेयरमैन के बाद की कुर्सी पर जगह दी गई है । विधायक पालिका बोर्ड का एक तरह से पदेन अध्यक्ष होता है ऐसे में विधायक की कुर्सी सेंटर में या फिर कम से कम चेयरमैन के साथ होनी चाहिए। लेकिन चेयरमैन कालवा के अंतर्मन में बैठा जीव अपनी कुंठित इच्छाओं को पूरा करने के लिए सामाजिक मर्यादा को ताक पर रख देता है। सम्भवतः इसी वजह से बोर्ड बैठकों में लगातार विधायक कासनिया व अन्य सम्मानित पार्षदों को नीचा दिखा कर चेयरमैन कालवा खुद को बहुत बड़ा मान लेते है।

    ईओ विजय प्रताप सिंह को भी नहीं मिला सम्मान

    कार्यक्रम के दौरान ईओ विजय प्रताप सिंह को तो मंच पर स्थान तक नहीं दिया गया। वे पूरे कार्यक्रम के दौरान खड़े होकर अटेंडेंट की तरह अतिथियों को प्रमाण पत्र और अन्य सामान देते तो दिखे। लेकिन न तो चेयरमैन कालवा और ना ही किसी अन्य ने ईओ को मंच पर बैठाकर सम्मान देने की जहमत नहीं की। जबकि पालिका द्वारा 512 पट्टे देने का सबसे बड़ा श्रेय अगर किसी को है तो वह है ईओ विजय प्रताप राठौड़। लेकिन झूठी वाहवाही लूटने में लगे चेयरमैन कालवा ने एक बार भी ईओ को मंच पर स्थान देने की कोशिश नहीं की।

    चप्पल फैक्ट्री से पालिका की सेटिंग : गुलाब का फूल देकर नौटंकी

    नगरपालिका द्वारा महीनों चक्कर कटवाने के बाद बुधवार को जब पट्टा वितरण कार्यक्रम रखा गया उस दौरान पालिका के रवैये से त्रस्त एक पट्टा आवेदक ने रोचक टिप्पणी की। पट्टा आवेदक का कहना था कि नगरपालिका की चप्पल फैक्ट्री मालिकों के साथ सेटिंग है यही वजह है कि वे पट्टा बनाने व दूसरे कामों के लिए नगरपालिका आने वाले लोगों को हज़ारों चक्कर कटाते हैं ताकि उनकी चप्पल जल्दी से जल्दी घिस जाये। कई लोग ऐसे भी मिले जिनको पट्टे के लिए 1 साल से अधिक से चक्कर कटाये जा रहे हैं। पालिका 512 पट्टे बांटने के लिए खुद की पीठ थपथपा तो रही है लेकिन इस बात का कोई जवाब है कि 512 पट्टे कोई 1 दिन या महीने में तैयार तो हुए नहीं हैं। जब पट्टे लंबे समय से तैयार पड़े थे तो फिर उन्हें बांटा क्यों नहीं गया ! क्या यह मान लिया जाये की समारोह कर श्रेय लूटने के लिए चेयरमैन कालवा ने पट्टे बनने के बाद भी लोगों को चक्कर कटवाए ?

    वैसे अभी भी पट्टा लेने के लिए काटने पड़ेंगे चक्कर

    बुधवार को मेगा पट्टा वितरण कैंप में 512 लोगों को पट्टे बांटने का आयोजन जरूर किया गया। लेकिन कार्यक्रम के दौरान ही लाभार्थियों को रजिस्ट्री करवाने के लिए रजिस्टर में एंट्री दर्ज कराने के नाम पर पट्टे वापस जमा करवाने की बात कही गई। इसका सीधा सा मतलब यह है कि अभी लोगों को पट्टा लेने के लिए और भी चक्कर काटने होंगे। आने वाले कई दिनों तक और इन पट्टा आवेदकों की और परीक्षा होगी। भले ही गुलाब देकर पट्टे के लिए महीनो चक्कर काटने वाले लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने की नौटंकी की गई है। लेकिन पालिका प्रशासन ये भूल जाता है कि ये जख्म काफी गहरे हो चुके हैं जो इस नौटंकी से भरने वाले नहीं हैं।

                    बहरहाल चेयरमैन कालवा के इस रवैये को देखकर बचपन में पढ़ी एक कवि की यह पंक्तियां याद आ रही है

    बड़ा भया तो क्या भया जैसे पेड़ खजूर।

    पंछी को छाया नहीं फल लागे अति दूर।।  

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    सूरतगढ़। NH-62 पर स्थित केन्द्रीय पशु प्रजनन फार्म में थारपारकर नस्ल की गायों एवं बछियों की सार्वजनिक नीलामी ने पिछले रिकॉर्ड तोड़ते हुए नया कीर्तिमान बनाया। नीलामी में थारपारकर नस्ल की एक गाय की रिकॉर्ड 3 लाख 5 हज़ार रूपये में बिकी। निलामी में हनुमानगढ जिले के गांव 2 BLWB के ज्ञानप्रकाश ने गाय संख्या- 7674 की 3 लाख 5 हजार रूपए की रिकॉर्ड बोली लगाई। यह सीसीबीएफ के इतिहास में एक गाय के लिए अब तक की सबसे अधिक कीमत है। गत वर्ष एक गाय की अधिकतम बोली 2 लाख 82 हजार रुपए थी। गाय के लिये सर्वाधिक बोली लगाने वाले ज्ञानप्रकाश प्रगतिशील किसान और ब्रीडर भी है।

    बछिया भी नहीं गायों से पीछे

    इस नीलामी में गाय संख्या -7674 ने सर्वाधिक बोली का कीर्तिमान बनाया वहीं गायों की बछिया भी पीछे नहीं रही । नीलामी में बछिया संख्या -8498 के लिये खरीददार ने 267000 रूपये की अधिकतम बोली लगाई गई। जबकि फार्म प्रबंधन ने इसका रिसर्व प्राईस 25000 रूपये ही रखा गया था। एक अन्य बछिया जिसका क्रमांक -8547 था को भी 1,42,000 रूपये में नीलाम किया गया जबकि इसका रिसर्व प्राईस महज 15000 रूपये ही था।

    फार्म प्रबंधन को हुई 32.50 लाख की आय

    नीलामी में कुल 34 पशुओं को रखा गया जिनको लेकर नीलामी के प्रति किसानों और ब्रीडर्स में जमकर उत्साह देखने को मिला। फार्म को पशुओं की बिक्री से लगभग 32 लाख 50 हजार रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ ।

    नीलामी में पूरे भारत से आये प्रजनकों और किसानों की मौजूदगी से साफ जाहिर है कि थारपारकर के शुद्ध जर्मप्लाज्म के लिए पशुपलकों की रूचि बढ़ी है। सीसीबीएफ सूरतगढ के सयुंक्त आयुक्त डॉ. वी. के. पाटील ने इस रोमांचक भागीदारी एवं स्वदेशी नस्ल के प्रति लगाव के लिए सभी किसानों और ब्रीडर्स को धन्यवाद दिया।

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    सूरतगढ़। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर टिकट के लिए दावेदारी जता रहे भाजपा नेताओं में आज एक और नाम जुड़ गया। पूर्व पार्षद सुरेंद्र सिंह राठौड़ ने आज दीपावली स्नेह मिलन के बहाने अपनी दावेदारी पेश की। सनसिटी रिसोर्ट में आयोजित समारोह में पूर्व पार्षद राठौड़ ने मंच से भाजपा की टिकट के लिए प्रयास करने की घोषणा की। दीपावली स्नेह मिलन के बहाने राठौड़ ने सनसिटी रिसोर्ट में सैकड़ों की संख्या में समर्थकों की भीड़ इकट्ठा की। इस भीड़ में राठौड़ के समर्थकों के साथ भाजपा के कई युवा नेता भी शामिल थे। मंच से वक्ताओं ने राठौड़ और उनके परिवार के लोगों की प्रशंसा की। उन्होंने चुनाव में खड़े होने पर राठौड़ की तन मन धन से मदद करने की बात कही।

    पूर्व पार्षद सुरेंद्र सिंह युवा के तौर पर जता रहे दावेदारी

    स्नेह मिलन समारोह में उपस्थित समर्थक व कार्यकर्ता

    युवा सुरेंद्र सिंह की हालांकि पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीतिक नहीं रही है। लेकिन उन्होंने राजनीति की शुरुआत छात्र जीवन से ही कर दी थी। जयपुर में पढ़ाई के दौरान उन्होंने भवानी निकेतन कॉलेज से छात्र संघ चुनाव लड़ा। बाद में 2014 में उन्होंने वार्ड नंबर 4 से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और विजय हासिल की। 2019 में वार्ड महिला के लिए आरक्षित होने पर सुरेंद्र सिंह की मां श्रीमति मोहन कंवर ने भाजपा की टिकट पर एक बार फिर जीत हासिल की। यह जीत सुरेंद्र सिंह और उनके परिवार के वार्ड वासियों के बीच अच्छी छवि के चलते मिली। प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़े सुरेंद्र सिंह के बड़े भाई जोधपुर निवासी जितेंद्र सिंह भाजपा के दिग्गज नेता गजेंद्र सिंह चौहान के खास कार्यकर्ताओं में शामिल बताए जाते हैं। ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि टिकट की दावेदारी पेश करने के पीछे भाजपा के दिग्गज नेता का आश्वासन है।

    समारोह में भाजपा के युवा नेताओं की उपस्थिति से मिल रहे नए संकेत

    स्नेह मिलन के कार्यक्रम में भाजपा से जुड़े कई युवा नेता और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही। भाजपा के संगठन से जुड़े इन नेताओं में से कुछ ने खुलकर और कुछ ने अप्रत्यक्ष रूप से सुरेंद्र सिंह को समर्थन देने की बात कही। युवा नेताओं की उपस्थिति से यह तो संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के अधिकांश युवा नेता वर्तमान और पूर्व सिरमौर नेताओं और संगठन पदाधिकारियों से तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं। ऐसे में युवा कार्यकर्ता चाहते हैं कि पार्टी किसी नए चेहरे पर दाव लगाएं।

    कार्यक्रम के दौरान भाजपा के युवा नेता प्रेम सिंह राठौड़, विनोद सारस्वत, पवन ओझा, संजय सोढा, अजय सिसोदिया,जगदीश मेघवाल पार्सद ,राजगिरी पार्सद,सत्य नारायण छीपा , अमित कपूर एडवोकेट,किशन स्वामी, दीपू बवेजा, प्रेमसिंह राठौड़ ,दीपू चोहान, प्रहलाद सिंह राठौड़ अध्यक्ष राजपुत संस्था, जयलाल भादू, लड्डू मुद्गल,राजेश शर्मा, आत्माराम बिश्नोई, पवन स्वामी, जयवीर सिंह राठौड़,फतेह सिंह राठौड़, सुरेन्द्र स्वामी करडु , सुभाष चोहान, विकास दीप गाबा, अनिल भार्गव, गोरव बलाना, मोहन जी, अशोक गोयल, अनिल भार्गव विकास शेखावत ,मंयक वशिष्ठ, सुरेश मिश्रा, कुलदीप बिश्नोई, विरेंदर शेखावत (पूर्व सरपंच) सहित कई लोग मौजूद थे।

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    सूरतगढ़। चातुर्मास के दौरान जैन सन्त श्रावक समाज को तप के लिये प्रेरित कर रहे है वहीं शहर में चातुर्मास कर रहे गणि श्री जयकीर्ति विजय जी महाराज कठोर तप आराधना कर उदाहरण पेश कर रहे है। चातुर्मास के 115 दिनों के प्रवास में गणि वर्य अब तक 83 दिन निराहार तपस्या कर चुके है। इसी के साथ आज गणिवर्य श्री जयकीर्ति महाराज ने अठाई तपस्या पूरी की। इसी के उपलक्ष्य में गणिवर्य का पारणोत्सव श्री आत्म वल्लभ आराधना भवन में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पूज्य आचार्य श्री जयानंद सुरीश्वर जी महाराज के मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम आरंभ हुआ। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुनि दिव्यांश विजय जी महाराज ने कहा की हम रंग और राग का मेला देखने जाते हैं लेकिन आज जो मेला लगा है वह तप और त्याग का मेला है और जब त्याग आता है तो वैराग आता है और वैराग के आने से वैराग्य उत्पन्न होता है और वैराग्य से वीतराग की साधना के अवसर मिलते हैं।

    गणिवर्य श्री जयकीर्ति महाराज ने गुरु को समर्पित की तपस्या

    जय कीर्ति विजय जी महाराज साहब ने अपनी तपस्या को गुरु देव को समर्पित करते हुए कहा की गुरु आशीष और परमात्मा कृपा से ही सब कार्य संपन्न होते हैं और इसी सूत्र को लेकर इस चातुर्मास में प्रत्येक शुभ कार्य निर्विघ्न रूप से पूर्ण हुआ है। गुरु ही तप है गुरु ही शक्ति है।

    भजनों के माध्यम से की गई तप की अनुमोदना

    पारणोंत्सव के दौरान प्रस्तुति देती कन्या मंडल की बालिकाएं
    कार्यक्रम में उपस्थित जैन समुदाय के लोग

    तप अभिनंदन कार्यक्रम में श्रीमती तारा देवी बांठिया, ज्योति डागा, सुरेन्द्र चोपड़ा, मंजू चोपड़ा, टीना रांका, भूमिका सेठिया,अभय चोपड़ा आदि ने अपने भावों और भजनों के माध्यम से तप की अनुमोदना की। श्री आत्म वल्लभ महिला मंडल और श्री आत्म वल्लभ कन्या मंडल की सदस्यों ने भी भजन प्रस्तुत किए। प्रवक्ता संजय बैद ने अपने संबोधन में कहा की जय कीर्ति जी ने 115 दिन के प्रवास में 83 दिन निराहार रहकर जो कठोर तप किया है उसकी अनुमोदना करके हमें गौरव का अनुभव हो रहा है। उन्होंने दूसरों को तपस्या के लिए ख़ुद तप करके प्रेरणा दी है ऐसा उदाहरण बहुत कम देखने को मिलता है। बाहर से आए हुए गुरु भक्तों का श्री संघ के टेकचंद हेमंत कुमार डागा परिवार की ओर से बहुमान किया गया।

    आचार्य श्री की केसर युक्त अक्षत से सभी संतों और जैन समाज की ओर से बधावना की गई जिसकी बोली का लाभ अशोक कुमार, अरिहंत कुमार, ज्योति डागा ने प्राप्त किया।

    सेठिया परिवार ने लिया गणिवर्य के पारणा का लाभ

    गणिवर्य श्रीजयकीर्ति महाराज के पारने का लाभ श्रीमती इंदिरा देवी, मनोज कुमार, सुशील और माणक सेठिया परिवार ने प्राप्त किया। सभी मुनि आचार्य श्री की अगुवाई में श्री संघ को साथ लेकर गाजे बाजे के साथ सेठिया निवास पर पहुंचे जहां गोचरी बोहरा कर जय कीर्ति विजय जी का पारणा करवाया गया। उसके पश्चात श्री विजय वल्लभ जैन धर्मशाला में श्री संघ की ओर से साधार्मिक वात्सल्य रखा गया जिसमें जिसमें उपाध्यक्ष पवन गोलछा,ओम चोपड़ा सहित सभी सदस्यों ने अपनी सेवाएं प्रदान की। दोपहर में श्री मंदिर जी में पंच कल्याण पूजा भी आयोजित की गई।

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    सूरतगढ़। ज्ञान पंचमी पर विधिवत आराधना और ज्ञान की भक्ति करने से कोढ़ जैसे भीषण रोग भी नष्ट हो जाते हैं। शनिवार को श्रीआत्म वल्लभ आराधना भवन में ज्ञान पंचमी आराधना पर आयोजित कार्यक्रम में जैनाचार्य श्रीजयानन्द विजय सुरीश्वर जी महाराज ने यह बात कही। धर्म सभा को संबोधित करते हुए जैन आचार्य ने कहा कि हम ने ही अपने कर्मों को बिगाड़ा है और हम ही उन्हे सुधार सकते हैं। संत सिर्फ मार्ग दिखा सकते हैं किंतु चलना हमें स्वयं ही पड़ेगा। आचार्य श्री उन्होंने कहा कि विनय और सेवा से ही सही ज्ञान मिलता है। मतिज्ञान और श्रुतज्ञान सभी में होते हैं किंतु विनय और सेवा भाव से ही सही ज्ञान की प्राप्ति होती है। ज्ञान पंचमी – कार्तिक शुक्ला पंचमी अर्थात दीपावली के पाँचवे दिन मनाई जाती है। इस अवसर पर देव वंदन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

    श्रावक समाज ने गौशाला के लिये दिया 81100 रु. का सहयोग


    संघ के प्रवक्ता संजय बैद ने बताया की श्री संकट मोचन हनुमान गौशाला समिति सालवा खुर्द,जिला जोधपुर से पधारे हुए गौ सेवकों ने आचार्य श्रीजयानन्द विजय जी महाराज से सहयोग के लिये अनुरोध किया। जिसके बाद आचार्यश्री के आह्वान पर उपस्थित श्रावक समाज द्वारा गौशाला के लिए 81100 का सहयोग इकट्ठा किया गया।

    श्री जयकीर्ति विजय जी महाराज की अठाई, पारणा कल

    श्री जयकीर्ति विजय जी महाराज की आठ दिन की निराहार तपस्या का पारणा रविवार को होगा। जिसके लिए श्रीमती इंदिरा देवी छगन लाल सेठिया परिवार ने लाभ प्राप्त किया। इसी दिन दोपहर में साधर्मिक वात्सलय का आयोजन भी किया जाएगा और पंच कल्याणक पूजा की जाएगी।

    आचार्य श्री द्वारा घोषित 16 नवंबर की संक्रांति का लाभ विजय कुमार संजय कुमार अजय कुमार बैद परिवार ने लिया।

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    सूरतगढ़। एयरफोर्स केंद्रीय विद्यालय क्रमांक -1 में संकुल स्तरीय में 2 दिवसीय राष्ट्रीय एकता पर्व 2022 का उद्घाटन हुआ Iकार्यक्रम में सूरतगढ़ संकुल के नौ केंद्रीय विद्यालयों के 244 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया I विद्यालय के प्राचार्य भूपेश कुमार स्वामी और विशिष्ट अतिथि एयर कोमोडोर ए. राज ठाकुर वी.एम. ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया I विशिष्ट अतिथि ने ए. राज ठाकुर ने केंद्रीय विद्यालय संगठन की इस पहल की सराहना की I केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 1 वायु सेना स्थल सूरतगढ़ के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत द्वारा अतिथियों का सत्कार किया इस

    पर्व के तहत 12 प्रतीयोगिता का होगा आयोजन

    इस कार्यक्रम में बारह प्रतियोगिताएं जिनमें समूह गान, समूह नृत्य, स्वर वाद्य संगीत, नाटक:- एकल अभिनय, अवनद्ध वाद्ध संगीत, शास्त्रीय नृत्य, पारंपरिक लोकनृत्य, शास्त्रीय संगीत, पारंपरिक लोकगीत, दृश्य कला (द्विआयामी एवं त्रिआयामी), स्थानीय खिलौने व खेल को शामिल किया गया I

    प्रथम दिन समूह गान, समूह नृत्य, दृश्य कला (द्विआयामी और त्रिआयामी), नाटक:- एकल अभिनय, स्थानीय खिलौने व खेल, स्वर वाद्य संगीत व अवनद्ध वाद्ध संगीत आदि प्रतियोगिताएं संपन्न हुई।

    संकुल की ये टीमे लें रही भाग

    कार्यक्रम में केंद्रीय विद्यालय हनुमानगढ़,सूरतगढ़ एयरफोर्स केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1 व 2,केंद्रीय विद्यालय सीमा स्थल बल अनूपगढ़, केंद्रीय विद्यालय लालगढ़ जाटान, केंद्रीय विद्यालय थर्मल शक्ति स्थल सूरतगढ़,केंद्रीय विद्यालय सूरतगढ़ छावनी,केंद्रीय विद्यालय सीमा सुरक्षा बल रायसिंहनगर,केंद्रीय विद्यालय श्रीगंगानगर छावनी की टीमे भाग लें रही है I

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    चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा ने गुरु आत्म वल्लभ द्वार की घोषणा

    सूरतगढ़। पंजाब केसरी जैन आचार्य श्रीमद् विजय वल्लभ सूरी जी महाराज साहब का 153 वां जन्म दिन में पारंपरिक श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। पुराना बाजार स्थित श्रीआत्म वल्लभ आराधना भवन में जैन आचार्य श्रीजयानंद सुरीश्वर जी महाराज की पावन निश्रा में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्यश्री के मंगलाचरण से हुआ। मालेरकोटला से पधारे हरीश जैन ने गुरु वल्लभ प्रार्थना के साथ गुरु वल्लभ भजन भी प्रस्तुत किया। धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री जयानंद सुरीश्वर जी महाराज ने कहा कि आज तेरापंथ धर्म संघ के आचार्य तुलसी और मूर्तिपूजक समुदाय के आचार्य विजय वल्लभ दोनों की जयंती है। इन दोनों ने ही समाज को आगे बढ़ाया और शिक्षा के क्षेत्र में दोनों ने अथक प्रयास किए। श्रावक समाज के अनुरोध को स्वीकार करते हुए आचार्य श्री ने 16 नवंबर की सक्रांति सूरतगढ़ में करने की घोषणा की।

    समारोह में बोलते हुए मुनि दिव्यांश विजय जी महाराज ने कहा कि समाज से अज्ञानता का अंधकार दूर करने के लिए जिस गुरु ने हमें सन्मार्ग बताया वह गुरु वल्लभ ही थे। हमने गुणानुवाद तो किया किंतु उनके गुणों का अनुसरण नहीं किया।

    संस्कार वाटिका के बच्चों ने दी लघुनाटिका की प्रस्तुति

    इस अवसर पर श्रीआत्म वल्लभ जैन संस्कार वाटिका के बच्चों ने श्रीमती ज्योति डागा के नेतृत्व में विजय वल्लभ के जीवन चरित्र को इंगित करती लघु नाटिका प्रस्तुत की। लघुनाटिका की सभी लोगों सराहना की। गणी जय कीर्ति विजय जी महाराज ने चातुर्मास के बाद भी संस्कार वाटिका को नियमित जारी रखने का आह्वान किया।

    शहर में स्थापित होगा गुरु आत्म वल्लभ द्वार

    इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए नगरपालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा ने जैन समाज के अनुरोध पर गुरु आत्म वल्लभ द्वार के लिए जगह निर्धारित करने का विश्वास दिलाया। श्री संघ अध्यक्ष सुरेन्द्र चोपड़ा, उपाध्यक्ष पवन गोलछा, सचिव सुशील सेठिया ने इस घोषणा के लिए पालिका अध्यक्ष का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर मुनि चारित्र वल्लभ जी, बाल मुनि चैत्य वल्लभ जी सहित संपूर्ण जैन समाज और श्री शिव नंदी गौशाला के सदस्य उपस्थित थे। श्री संघ द्वारा लाभार्थी परिवार के श्री टेकचंद हेमंत कुमार डागा परिवार द्वारा सभी अतिथियों का बहुमान किया गया।

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    पार्षद की सदस्यता पर लटक सकती है तलवार

    सूरतगढ। सूरतगढ़ नगरपालिका और इसके पार्षदों के दिन आजकल कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं। वाइस चेयरमैन सलीम कुरैशी के बाद चेयरमैन कालवा के खास माने जाने वाले एक और पार्षद रोहिताश होटला भी अब विवादों में घिर गए हैं। कमलेश मीणा नामक व्यक्ति ने वार्ड-45 से पार्षद रोहिताश पर फर्जी दस्तावेजों से अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र बनाकर चुनाव लड़ने का आरोप लगाया है। परिवादी कमलेश मीणा के परिवाद पर न्यायालय ने 16 अक्टूबर को सिटी थाना को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। जिस पर सिटी पुलिस ने बुधवार को पार्षद रोहिताश के विरुद्ध मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    क्या है पूरा मामला

    परिवादी कमलेश मीणा के अनुसार नगरपालिका चुनावों में वार्ड नंबर 45 की सीट एसटी ( अनुसूचित जनजाति ) के लिए आरक्षित थी। पार्षद रोहताश होटला ने एससी (अनुसूचित जाति) का होते हुए फर्जी दस्तावेजों से एसटी का प्रमाण पत्र बनवाकर नामांकन दाखिल करते हुए चुनाव लड़ा। परिवादी के अनुसार वह स्वंय भी चुनाव लड़ना चाहता था। जब उसने पता किया तो सामने आया कि वास्तव में रोहिताश होटला अनुसूचित जाति से संबंध रखता था। लेकिन चुनाव लड़ने के लिए रोहिताश ने एसटी का फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करवाया। परिवादी मीणा के अनुसार आरोपी रोहिताश ने अनुसूचित जाति के सदस्य के रूप में 1994-94 में पूर्व मैट्रिक छात्रवृत्ति भी ली थी। जिसके स्कूल रिकॉर्ड की प्रति भी परिवादी ने प्रस्तुत की है।

    तहसीलदार कार्यालय में गायब है ST प्रमाण पत्र के दस्तावेज

    चुनाव के समय पार्षद रोहताश द्वारा प्रस्तुत किया गया जाति प्रमाण पत्र

    पार्षद रोहिताश द्वारा चुनाव के समय अनुसूचित जनजाति का होने का जो प्रमाण पत्र पेश किया गया है वह 31 जुलाई 2014 को जारी किया गया था। इस प्रमाण पत्र पर  सादुलशहर तहसीलदार के डिजिटल साइन अंकित है। पार्षद रोहताश ने अनुसूचित जनजाति श्रेणी में आने वाले ‘धानका’ जाति के तहत दिए गए आवेदन पर यह प्रमाण पत्र जारी किया गया है। परिवादी कमलेश मीणा ने इस मामले को लेकर सादुलशहर तहसीलदार कार्यालय में सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन कर एसटी प्रमाण पत्र के लिए जमा किए गए दस्तावेजों की प्रतिलिपि की मांग की तो तहसीलदार कार्यालय ने किसी भी तरह का दस्तावेज होने से इनकार कर दिया। जिसका सीधा सा मतलब है कि उक्त प्रमाण पत्र या तो फर्जी है या फिर बाबुओं की मिलीभगत कर बनवाया गया है।

    यहां गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित जातियों की श्रेणी में धानक जाति को अनुसूचित जाति व धानका को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया गया है।

    पार्षद की सदस्यता पर लटक सकती है तलवार

    इस मामले के तथ्यों पर गौर किया जाए तो यह मामला पार्षद रोहिताश के गले की फांस बन सकता है। क्योंकि सूचना के अधिकार के तहत तहसीलदार द्वारा दिए गए जवाब से यह तो साफ है कि पार्षद द्वारा अपने एसटी होने के संबंध में आवश्यक दस्तावेज नहीं दिए गए । दूसरा अनुसूचित जाति की छात्रवृत्ति लेने से ही यह साफ है कि पार्षद रोहिताश पहले अनुसूचित जाति का सदस्य होने का लाभ ले लेते रहे और जब चुनाव लड़ने का टाइम आया तो अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र ले लिया। ऐसे मे यदि पार्षद रोहिताश के खिलाफ पुलिस चालान पेश करती है तो पार्षद की सदस्यता जाना लगभग तय है।

    चेयरमैन कालवा की लगातार बढ़ रही मुसीबतें 

    सूरतगढ़ नगरपालिका के वर्तमान बोर्ड के चेयरमैन मास्टर ओमप्रकाश कालवा और उनके सहयोगी आजकल विरोधियों के रडार पर हैं। अपने निरंकुश कार्यशैली से चेयरमैन कालवा ने विरोधियों की एक बड़ी फौज तैयार कर ली है जिसके निशाने पर आजकल चेयरमैन कालवा और उनके सहयोगी हैं। चेयरमैन कालवा से नाराज पार्षद और दूसरे व्यक्ति लगातार सोशल मीडिया और दूसरे मंचों पर चेयरमैन कालवा की खिंचाई कर रहे हैं जिससे कांग्रेस के वर्तमान बोर्ड के लगातार किरकिरी हो रही है। आने वाले समय में चेयरमैन कालवा की ढाल बनने वाले जाने वाले कुछ और पार्षदों पर भी विवादों की बिजली गिर सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो चेयरमैन कालवा और विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे नेताओं को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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    सूरतगढ़। शहर के वार्ड नंबर 35 में बीती रात तड़के करीब 3 बजे पटाखों की चिंगारी से टीन शेड में लगी आग में लाखों का सामान जलकर नष्ट हो गया। आगजनी की इस घटना में 3 टू व्हीलर, 3 साइकिल के अलावा 3 सीलिंग फैन, एक खाली सिलेंडर, लोहे की टीन और कपडे इत्यादि नष्ट हो गए। जानकारी के मुताबिक सेवानिवृत्त बीएसएनएल कार्मिक धर्मसिंह के घर से सुबह करीब 4 बजे आग की लपटें और धुआं देख आस-पड़ोस के लोगों ने परिवार के लोगों को जगाया और आग बुझाने के प्रयास शुरू किए। हालांकि इस बीच आरसीपी कॉलोनी में स्थित इस मकान से महज कुछ ही दूरी पर दमकल कार्यालय में भी घटना की सूचना दी गई मगर दमकल आने तक शेड के नीचे रखा सामान जल चुका था और लोगों ने अपने स्तर पर ही आग पर काबू पा लिया।

    3 बाइक सहित ये घरेलू सामान जला

    कार्मिक धर्मसिंह के अनुसार आगजनी की इस घटना में 3 टू व्हीलर, 3 साइकिल के अलावा 3 सीलिंग फैन, एक खाली सिलेंडर, लोहे की टीन और कपडे इत्यादि नष्ट हो गए।

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    सूरतगढ़ (24 अक्टूबर)। अरुणाचल प्रदेश हेलीकॉप्टर हादसे में शहीद हुए राजस्थान के वीर सपूत हनुमानगढ़ जिले के रामपुरा निवासी मेजर विकास भांभू की पार्थिव देह को श्रद्धांजलि दी गई। सैन्य छावनी में सेना के अधिकारियों के साथ शिल्प एवं माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष राज्य मंत्री डूंगरराम गेदर, सांसद निहालचंद, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष पार्षद परसराम भाटिया,अतिरिक्त जिला कलेक्टर अरविंद जाखड़ ने श्रद्धांजलि सभा में वीर शहीद मेजर विकास भांभू के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित करके 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।

    चैतक चौराहे पर शहीद को श्रद्धांजलि देने उमड़े लोग

    छावनी से सेना के ट्रक वीर शहीद मेजर विकास भांभू की पार्थिव देह 7:30 बजे पैतृक गांव के लिए रवाना हुआ। छावनी गेट के बाहर विधायक रामप्रताप कासनिया, भाजपा के वरिष्ठ किसान,समाजसेवी राजाराम गोदारा, पार्षद महेंद्र गोदारा, संदीप कासनिया ने पुष्पांजलि अर्पित करके श्रद्धांजलि देकर वीर शहीद विकास भांभू अमर रहे के नारे लगाए।


    चेतक चौराहे पर सांसद निहालचंद,पूर्व विधायक गंगाजल मील, पूर्व विधायक अशोक नागपाल, विधायक राजेंद्र सिंह भादू ,भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ किसान नेता नरेंद्र घिंटाला,जिला लोकपाल अनिल धानुका, पालिकाध्यक्ष मास्टर ओमप्रकाश कालवा, संदीप कासनिया,जयप्रकाश सरावगी,किसान नेता राकेश बिश्नोई,माहेश्वरी समाज के सचिव हेमंत चांडक, अशोक भट्ट, एडवोकेट श्रीकांत सारस्वत, पार्षद बबलू सैनी, पार्षद भारत भूषण उपाध्याय, पूर्व पार्षद सुनील छाबड़ा, कांग्रेस ब्लॉक महामंत्री धर्मदास सिंधी, प्रेम सिंह राठौड़, विनोद सारस्वत, पार्षद हरीश दाधीच, पार्षद राजीव चौहान, राजपूत समाज के अजय चौहान शहीद शहीद भगत सिंह एकेडमी के बच्चों ने अमर शहीद मेजर विकास भांभू अमर रहे के नारे लगाते हुए पुष्पांजलि अर्पित करके श्रद्धांजलि दी।
    सांसद निहालचंद मेघवाल, पालिका अध्यक्ष मास्टर ओमप्रकाश कालवा, पूर्व विधायक गंगाजल मील, पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह भादू , पूर्व विधायक अशोक नागपाल ने अमर शहीद विकास बाबू की पार्थिक देह पर पुष्प चक्र अर्पित करके श्रद्धांजलि दी। मानकसर चौक पर भी ग्रामीणों ने भारी संख्या में पुष्पांजलि अर्पित करके श्रद्धांजलि दी।

    काफिले के साथ प्रशासन और राजनेता भी रहे साथ


    अमर शहीद मेजर विकास भाम्भू के पार्थिव देह के साथ सेना के अधिकारियों जवानों के अलावा अतिरिक्त जिला कलेक्टर अरविंद जाखड़, पुलिस उप अधीक्षक शिवरतन गोदारा, राज्यमंत्री डूंगरराम गेदर, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष पार्षद परसराम भाटिया, विधायक रामप्रताप कासनिया, पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह भादू , रिश्तेदार पूर्व पार्षद समाजसेवी राजाराम गोदारा, पार्षद महेंद्र गोदारा सहित रिश्तेदार और परिवार के लोग गाड़ियों में काफिले के साथ चल रहे थे।


    डेढ़ दर्जन से अधिक स्थानों पर शहीद को दी जाएगी श्रद्धांजलि

    अमर शहीद मेजर विकास भांभू के पार्थिव देह का काफिला सूरतगढ़ से हनुमानगढ के जिले के पीलीबंगा तहसील के रामपुरा, अहमदपुरा, पीलीबंगा कालीबंगा, पंडितावाली, जाड़ावाली,चोहिलांवाली, जोरावरपुरा, लखूवाली, नोरंगदेसर, मटोरियावाली ढाणी, मुंडा, मसीतां वाली हैंड होते हुए पैतृक गांव रामपुरा में राजकीय सम्मान के साथ गम गीन माहौल में हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने मेजर विकास भांभू अमर रहे के नारे लगाते हुए पुष्पांजलि अर्पित करके श्रद्धांजलि दी।


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    मिशन माटी के दीप” के तहत प्रजापति हीरोज ऑर्गेनाइजेशन का आयोजन

    सूरतगढ़। शहरों में दीपावली पर माटी के दीये जलाने के लिए प्रेरित करने के लिये श्रीयादे माता चौक पर मिट्टी के दिये जलाये। भारतीय प्रजापति हीरोज ऑर्गेनाइजेशन व कुम्हार समाज समिति के सयुंक्त तत्वाधान में “मिशन माटी के दीप” के तहत दीपवाली की पूर्व संध्या पर दीपोत्सव का आयोजन किया गया। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी “मिशन माटी के दीप ” तहत श्रीयादे माता चौक पर 1100 दीपक जलाकर दीप चौदस का पर्व मनाया गया। साथ ही लोगो को मिट्टी के दिये जलाने के प्रेरित भी किया गया है।

    हम भूलते जा रहे है अपनी कला और संस्कृति को: कलवासिया

    बीपीएचओ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष जगदीश जलंधरा व तहसील अध्यक्ष नत्थूराम कलवासिया ने बताया की आधुनिक जिंदगी में निरंतर परिवर्तन हो रहा है यही वजह है कि हम अपनी कला, संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। अपनी संस्कृति और विरासत की उपेक्षा करना एक तरह की आधुनिकता बन गई है। आधुनिकता का असर दीपावली जैसे पर्वो पर भी पड़ा है। मिट्टी के दीयों की जगह बिजली के बल्बों और मोमबत्तियों और चायना से निर्मित अन्य वस्तुओं ने ली है। इसलिए हमें मिट्टी के दिये जलाने चाहिए ताकि हमारी संस्कृति बची रहे

    ये रहे कार्यक्रम में उपस्थित

    इस अवसर पार्षद जसराम टाक,पार्षद सुरेन्द्र टाक,ओम प्रकाश गेदर,अनिल रोकणा,बालूराम जालप,सतनाम वर्मा,दिनेश सारस्वा ,राम नारायण जालप,विनोद जलंधरा,सुरेंद्र घोड़ेला,शेलेन्द्र ढूँढड़ा,पोखर राम सिंगाटिया,गुरदीप नोखवाल,जितेन्द्र भोभरिया ,हेमंत भोभरिया,राम कुमार टाक, राम सिंह सेवटा,चक्षित सारस्वा आदि समाज बंधू मौजूद थे।

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    सूरतगढ़। उत्तर पश्चिमी रेलवे प्रबंधन द्वारा सूरतगढ़ को बड़ी सौगात देते हुए रेलवे स्टेशन पर दो लिफ्ट लगाने की स्वीकृति दी है। प्लेटफार्म पर लिफ्ट लगाने की मांग पूरी होने पर रेल विकास संघर्ष समिति ने उत्तर पश्चिम रेलवे जोन जयपुर महाप्रबंधक विजय शर्मा, प्रिंसिपल चीफ कमर्शियल मैनेजर जॉन जयपुर अर्चना श्रीवास्तव एवं रेल प्रबंधक बीकानेर राजीव श्रीवास्तव का आभार प्रकट किया। समिति सदस्यों ने स्टेशन अधीक्षक राज सिंह शेखावत को आभार पत्र देकर मिठाइयां वितरित करके खुशियां मनाई।

    समिति जिलाध्यक्ष ललित शर्मा के नेतृत्व में रेलवे प्लेटफार्म पर लिफ्ट लगाने की मांग मैं से की जा रही थी। रेल प्रशासन ने रेल विकास संघर्ष समिति की और आमजन की समस्या को देखते हुए दीपावली के ठीक पहले तोहफे के रूप में सूरतगढ़ रेलवे स्टेशन पर दो लिफ्ट लगाने का स्वीकृति दी है।
    जिला अध्यक्ष ललित शर्मा ने इसे संघर्ष की जीत बताते हुए कहा कि सभी के अथक प्रयास से मिली कामयाबी बताया।
    इस अवसर पर व्यापार मंडल अध्यक्ष दर्शन भगत परनामी, राजस्व बार संघ के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट साहब राम स्वामी, भारतीय जनता पार्टी के संघर्षशील किसान नेता नरेंद्र घिंटाला, भवानी शंकर भोजक, संजय बैद, रामप्रताप खोरवाल, इंजीनियर रमेश चंद्र माथुर, अशोक मखीजा, एडवोकेट राजकुमार सेन, ओम प्रकाश चाहर, मुरलीधर पारीक, हेमंत चांडक, सुशील जैन सहित शहर के गणमान्य लोगों ने एक दूसरे को मिठाइयां खिलाकर खुशियां मनाई।

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    सूरतगढ़ । राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एंव पंचायती राज विभाग के सामाजिक लेखा परीक्षा, जबाबदेही एंव पारदर्शिता(एसएसएएटी),विभाग की तरफ से दो दिवसीय जिला लोकपाल प्रशिक्षण शिविर का आयोजन हुआ। शासन सचिवालय के उत्तर-पश्चिम भवन के समिति कक्ष में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में राजस्थान के 15 लोकपाल शामिल हुए। शिविर में श्रीगंगानगर का प्रतिनिधित्व जिला लोकपाल अनिल धानुका ने किया । शिविर के प्रथम दिन के पहले सत्र में डायरेक्टर संदीप चौहान ने सत्र की अध्यक्षता करते हुए सोशल ऑडिट, मनरेगा शिकायतों,लोकपाल के अधिकार,कर्तव्यों पर विस्तार से जानकारी देते हुए महत्वपूर्ण जानकारियां सांझा की । पहले दिन के दूसरे सत्र में मनरेगा एसई रामनिवास शर्मा ने मनरेगा 2005-06 एक्ट की विस्तारपूर्वक जानकारी दी एंव विभिन्न संसोधनों के बारे में बताया ।

    प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन पहले सत्र में एसएसएएटी के लेखाधिकारी मोहनलाल कुमावत ने जिला परिषद द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी को विस्तारपूर्वक बताया । दूसरे सत्र में वाचस्पति शर्मा ने विभिन्न भत्तों की जानकारी दी एंव बजट पास करने की प्रक्रिया की विस्तारपूर्वक जानकारी दी ।

    श्रीगंगानगर का प्रतिनिधित्व करते हुए जिला लोकपाल अनिल घानुका ने मनरेगा योजना के सफल किर्यान्वयन व विभिन्न अन्य योजनाओं के सुचारू संचालन के लिये सुझाव बैठक में दिए । पंचायती राज विभाग के सामाजिक लेखा परीक्षा,जबाबदेही पारदर्शिता विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय सफल प्रशिक्षण शिविर में बड़े स्तर पर महत्वपूर्ण जानकारियों का आदान प्रदान किया गया ।

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    चेयरमैन कालवा भी भूमिका भी सवालों के घेरे में

    सूरतगढ़ नगरपालिका में मास्टर ओमप्रकाश कालवा के चैयरमेन बनने के बाद लगातार विवादों का सिलसिला जारी है। पालिका का वर्तमान बोर्ड , पार्षदों की आपसी खींचतान, पार्षदों-कर्मचारियों के बीच विवाद और पट्टों में भ्रष्टाचार और सरकारी भूमि पर कब्जो को लेकर लगातार चर्चा में बना हुआ है। शहर में पालिका भूमि पर अवैध अतिक्रमणो के चलते हालत यह हो गई कि सत्ता पक्ष के नेता और पूर्व विधायक गंगाजल मील को आगे आकर सफाई देनी पड़ी कि उनका और उनके परिवार का शहर की एक इंच जमीन पर भी कब्ज़ा नही है। शहर में अवैध अतिक्रमनों से हो रहे राजनीतिक नुकसान का अंदाजा अब मील परिवार को हो चुका है। इसी का नतीजा है गत दिनों वार्ड नंबर -2 और 45 में चर्चित अतिक्रमनों पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई।

    अपनी ही पार्टी के पार्षदों की संभावित नाराजगी की अनदेखी कर की गई इस कार्रवाई से मील परिवार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण बर्दाश्त नही किया जायेगा। हालांकि यह कार्रवाई बहुत पहले होनी चाहिए थी,परन्तु मील परिवार ने अब जाकर संज्ञान लिया है जबकि राजनीतिक तौर पर इस देरी से उनकी छवि का काफ़ी नुकसान हो चुका है। खैर देर आये दुरुस्त आये।

     ‘खेत को खा रही है बाड़’

    वार्ड नंबर 45 में आईडीएसएमटी योजना के प्लाटों को बेचने के मामले में सिटी थाने में परिवाद दर्ज होने के साथ ही यह साफ हो गया है कि ‘बाड़ ही खेत को खा रही है’। नगरपालिका में जिन लोगों को आपने अपने वोट की ताकत से जनता के हक की बात करने के लिए भेजा था उनमे से कई अब लुटेरों के गिरोह में शामिल हो चुके हैं। इस मामले में वाइस चेयरमैन सलीम कुरेशी का नाम पीड़ित आशीष सोनी ने भले ही पुलिस रिपोर्ट में दर्ज कराया हो। लेकिन हकीकत यह है कि मामले में संबंधित वार्ड के पार्षद रोहिताश और मास्टर चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

    क्योंकि जब यह निर्माण किया जा रहा था उस समय ना तो पार्षद रोहिताश ने इसके खिलाफ आवाज उठाई और ना ही चेयरमैन मास्टर ओमप्रकाश कालवा ने। चेयरमैन कालवा के चहेते पार्षद के वार्ड में वाइस चेयरमैन खेल खेलता रहे और संबंधित पार्षद व चेयरमैन को इसकी जानकारी ना हो क्या यह संभव है? इसके अलावा जैसा की चर्चाएं हैं मास्टर ओमप्रकाश कालवा लगातार इस अवैध निर्माण को बचाने की कोशिश कर रहे थे, यह बताने के लिए काफ़ी है कि मास्टरजी ने जानबूझकर पालिका प्रशासन की आलोचना के बाद भी अतिक्रमण के मामले को लटकाये रखा । 

    आखिर आशीष को हुए नुकसान का जिम्मेदार कौन ? 

    पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह कि इस मामले में पीड़ित आशीष सोनी को हुए नुकसान का जिम्मेदार कौन है ? इसमें कोई दो राय नही है कि आशीष ने भी कब्जे के भूखंडों को खरीद कर गलती की। लेकिन जब आशीष ने इस भूखंड पर निर्माण शुरू करवाया तब अगर नगरपालिका तुरंत कार्रवाई कर निर्माण को रुकवा देती तो शायद आशीष को इतना बड़ा नुकसान नहीं होता। उसको अपनी गलती की इतनी बड़ी सजा नहीं मिलती। लेकिन तब मास्टर ओमप्रकाश कालवा चुप्पी साधे रहे और जब आशीष ने प्लॉट पर निर्माण में लाखों रुपए खर्च कर दिया तब पालिका की जेसीबी ने निर्माण को ध्वस्त कर दिया। मामला दर्ज होने के बाद भले ही पुलिस के दबाव में दोनों पक्षों में देर सवेर भले ही समझौता हो जाए लेकिन आशीष को हुए नुकसान की भरपाई होने की उम्मीद कम ही है।

    – राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष- प्रेस क्लब, सूरतगढ़ 

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    नज़र दौड़ाये आपके आस पास भी है कोई जुडास

    .लास्ट सपर

    लियोनार्डो द विंची मिलान की जेलों में घूम रहे थे। तस्वीर बनानी थी उन्हें, मिलान के ड्यूक ने यह काम दिया था। राजा का काम और ऊपर से तस्वीर भी ख़ास, तो तस्वीर पूरा करने में एक लम्बा वक़्त लगना तय था । तस्वीर का विषय जीसस क्राइस्ट का आखरी डिनर था, जिसमे वो और उनके बारह शिष्य आखरी बार साथ भोजन कर रहे हैं।

    इस आखिरी भोजन के दौरान ही क्राइस्ट बताते हैं कि अब उनका अंत करीब है। शिष्यों में शॉक फैल जाता है। पर ये शॉक और बढ़ जाता है जब शिष्यो को बताया जाता है, कि उनमें से कोई एक है, जो धोखा देगा। अब हर एक शिष्य के चेहरे पर अलग भाव है। भय, धोखा, शॉक, शोक, गुस्सा, उदासी, चिंता.. और एक एक शिष्य के चेहरे पर एक एक भाव है।दूसरी और क्राइस्ट के चेहरे पर न दुख है, न भय। वे शांत है, देवतुल्य हैं, निर्भीक हैं। उनकी आंखों में करुणा है। सभी किरदारों के भावों का यही प्रदर्शन लियोनार्डो की उस पेंटिंग को मास्टरपीस बनाता।

    द लास्ट सपर!!!

    हर चेहरे के पीछे के भावों के प्रदर्शन के लिये लियोनार्डो आम जीवन में उस भाव के व्यक्तियों से मिलते हैं। उसकी आंखें, भौहें, चेहरे के एक एक मूवमेंट को स्टडी करते हैं और उस मॉडल को अपनी पेटिंग में उतारते हैं। पेंटिंग में क्राइस्ट को बनाने के लिए उन्होंने एक 19 साल के युवक को मॉडल बनाया।

    शांत, उत्साही, ऊर्जा से भरा युवक। उसकी करुणा, उसकी जिजीविषा को लियोनार्डो दिमाग मे बिठाता है, और कैनवस पर उकेरता है। अब तक क्राइस्ट बन चुके हैं। और शिष्य भी उकेरे जा चुके। लेकिन जुडास बचा है।

    जुडास जो धोखेबाज है। एक हाथ में सिक्कों से भरी थैली है तो दूसरे से रोटी तोड़ रहा है। उसे मालूम है कि क्या होने वाला है। उसे पता है कि जो होगा, गलत होगा। परन्तु सिक्कों की थैली उसे आश्वस्त कर रही है। लालच ने उसे इस सपर के दौरान बने सारे माहौल से निस्पृह रखा है। सही भी तो है लालच से भरे इंसान को धन मिल जाये तो वो सगे को भी रौंद दे।

    बस, लियोनार्डो को इसी भाव से भरा एक मॉडल चाहिए।

    जुडास के मॉडल की तलाश में अनुमति लेकर लियोनार्डो मिलान की जेल के कैदियों से मिल रहे हैं। एक एक करके कई सारे निर्दयी,खूंखार हत्यारे, पर एक पर उनकी निगाह टिकती है। वो हत्या के मामले में बन्द है। किसी अपने का कत्ल किया है। अचानक वही क्रूरता, भावशून्यता.. लियोनार्डो को अपना जूडास मिल गया है। वो उसकी शक्ल को पढ़ते हैं, जेहन में सजाते हैं।

    और फिर उसे जाने का आदेश देते हैं। पर कैदी जानना चाहता है कि हो क्या रहा है, लियोनार्डो उसे बता देता है।

    कैदी भूमि पर बैठ जाता है। जार जार रोने लगता है। अब पूछने की बारी लियोनार्डो की थी – क्या हुआ।

    कैदी ने आंसू पोंछे, हिचकियों के बीच मुश्किल से बोल सका- आपने मुझे पहचाना नहीं। सात साल पहले जिस मॉडल को लेकर आपने क्राइस्ट की पेंटिंग रची थी…

    वो मैं ही था.. !!!

    सात साल लम्बा अरसा होता है। उम्मीदों से भरा इंसान, भावशून्य कातिल में बदल सकता है। उसके कर्म,उसकी सोच, उसका लालच, उसका धोखा.. उसकी शक्ल बदल देता है। क्राइस्ट से उसको जुडास बना देता है।

    लियोनार्डो अवाक थे।

    मैं और आप भी अवाक हैं।

    आसपास नजर दौड़ाइये, आठ साल,सात साल,दो साल पहले हमारे मित्र, परिवार, सहकर्मी, प्रेमी, दोस्त.. जो विकास, साथ समावेश, प्रगति की बातें करते दैदीप्यमान दिखते थे। अब नफरत, झूठ, गुस्से और धोखे को जस्टिफाई करते हुए कुटिलता से मुस्कुराते हैं, हमें हमसे धोखा करने वाला जुडास दिखाई देता है। एक हाथ सिक्कों की थैली पर रखे, दूजे से रोटी तोड़ते ये वही तो हैं।
    जुडास आसपास ही हैं
    साभार:-अविनाश जैन

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    राजा ने एलान किया
    दस और दस का जोड़ इक्कीस होता है

    कुछ लोग तुरंत सड़कों पर आ गए
    राजा के समर्थन में प्रदर्शन करने लगे
    राजा ने हमे सच बताया
    अब तक हमे झूठ पढ़ाया जा रहा था
    बहुत से लोग सड़कों पर नहीं थे
    लेकिन टीवी पर इन्हें देख ताली बजा रहे थे
    आपस मे बातें कर रहे थे कि देश बदल रहा है

    कुछ का कहना था कि यह विवाद का विषय है
    इस पर अभी और तर्क-वितर्क होना चाहिए
    ऐसी जल्दी भी क्या है
    आखिर सबका अपना अपना सच होता है

    कुछ का कहना था कि
    राजा की बातों पर क्यों जाना
    आखिर वह सड़क तो बनवा ही रहा है

    कुछ का कहना था कि
    राजा गलत तो बोल रहा है
    लेकिन अभी परिस्थियां परिपक्व नहीं है
    इसलिए अभी इंतजार करना है……
    तब तक दूसरे देश के राजाओं पर बात करनी है

    लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे
    जिन्होंने राजा को चुनौती देते हुए कहा कि
    दस और दस का जोड़ हमेशा बीस ही होता है
    दस और दस का जोड़ इक्कीस बोलने के पीछे राजा का निहित स्वार्थ है

    राजा ने इन्हें खत्म करने का आदेश दे दिया
    इन विद्रोहियों ने भी राजा के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया
    नदियां लाल हो गयी
    विद्रोहियों का खून और पसीना
    खेतों में, जंगलों में जज़्ब होने लगा
    लेकिन युद्ध नहीं रुका

    उस खून सनी मिट्टी से नए विद्रोही पैदा होने लगे

    कुछ लोगों ने राजा की तरफ पीठ करके चिल्लाना शुरू कर दिया
    युद्ध बन्द करो, आओ तर्क-वितर्क करो
    सभा-सेमिनार में राजा के तर्कों को काटो

    कुछ ने कहा
    तुम्हारी बात सही है, लेकिन रास्ता गलत है
    हमारे रास्ते पर आओ
    परिस्थितियों के परिपक्व होने का इंतजार करो

    जंगलों, खेतों से आवाज आयी,
    सच कभी इंतज़ार नहीं करता
    क्योकि वह सच होता है

    जब सच को जलाया गया था, तब भी परिस्थितियां परिपक्व नहीं थी
    लेकिन सच को जलाने से सच खत्म नहीं हुआ
    वह और भी मजबूती से स्थापित हो गया
    तब उस सच के लिए परिस्थितियां भी परिपक्व हो गयी
    ऐसा तब भी हुआ था, ऐसा अब भी होगा

    क्योंकि दस और दस का जोड़ बीस
    तब भी सच था
    आज भी सच है और
    भविष्य में भी सच रहेगा…..

    –मनीषआज़ाद

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    बहुत चर्चा था पहलू में दिल का ।
    जो चीरा तो कतरा-ए-खूँ भी ना निकला ।।

    गालिब का ये शेर तो आपने जरूर सुना होगा। जूपी के एक भैया इस शेर की तरह कुछ समय से यूट्यूबर्स मीडियाकर्मियों को फांसी चढ़ाने का ऐलान किए हुए है । डिजिटल को मीडिया नहीं मानने वाले भैया व्हाट्सप्प/फेसबुक (डिजिटल मीडिया) पर विष्ठा फैलाकर ऐसे खुश हुए जा रहे हैं कि मानो को बहुत बड़ा तीर मार दिया हो। वैसे गंदगी फैलाने के लिए कई बार भैया लतिया दिए गये है पर क्या है कि भैया को लताड़ खाने की आदत है। हम पहले ही बोले है कि भैया कुछ कम अक्ले हैं, इसलिए हम उनकी बातों का ज्यादा बुरा नहीं मानते।

    पर एक बात तो कहनी पड़ेगी की भैया पर पिछली बार लगाई गई लताड़ का कुछ तो असर पड़ा है वरना हम तो भैया को चिकना घड़ा ही समझे थे। भैया ने कम से कम यूटूबर्स को मीडियाकर्मी तो मान लिया है साथ ही हमने भैया को नाशुकरा कहा था तो अब भैया ने ये भी मान ही लिया की हमहीं उनकी मदद किये थे। लेकिन नाशुकरा कहने से भैया बहुते ही ज्यादा आहत हो गये हैं तो अब भैया ठान लिये है कि नेताजी की जूठन का क़र्ज़ उतार के ही रहेंगे। इसलिए भैया खूब मेहनत भी कर रहे है। पूरा शहर भले ही नेताजी की लानत मलानत कर रहा हो लेकिन भईया नेताजी से मानहानि का मुक़दमा करवाकर डिजिटल वालों को फांसी पर चढ़ा कर रहेंगे।

    यही नही भैया को हमारा अंडर मेट्रिक बताना तो और भी नागवार गुजरा है। भैया अब बतिया रहे है कि उनके पास कलम घिसने का कोई डिप्लोमा भी है। तो भैया आपने हमारी डिग्री तो लोगों को सार्वजनिक कर दी उसके लिये आपका बहुत धन्यवाद पर तनिक जरा अपना डिप्लोमा भी दिखा देते। अंडर मेट्रिक के बाद कलम घसाई को कोनो डिप्लोमा होता है लोगन को पता चल जाता। बाकि अब हमें भी समझ में आ गया कि भैया के खुद को ‘अल्जजीरा की आवाज़’ का सीईओ समझने की असली वजह यही डिप्लोमा है। भैया को हमारे मूर्ख शब्द के प्रयोग पर भी आपत्ति है पर जरा आप ही बताइए कि पॉलीटिशियन को मीडियाकर्मियों पर मुकदमा करवाने की सलाह देने वाले को क्या कहा जाएगा।

    वैसे आपको बताता चलूं कि अंडर मैट्रिक बताने के बाद भैया की हालत कुछ ठीक नहीं है इसलिए आजकल भैया किराये के घसीयारों के सहारे छाती पीट रहे है। वैसे बुराई भी नही है जब कोई बाँझ औरत बच्चा नही जन पाती है तो किराये की कोख का ही सहारा लेना पड़ता है। अब इन घसियारों के मार्फत भैया हमें IBR के नियमों का ज्ञान बाँट रहे है पर क्या है कि हमने एक कहावत सुनी है कि ‘भैंस के आगे बीन बजाने से कोई फायदा नहीं है’ तो अब हम भैया को इतना ही कहेंगे कि भईया जब धारा 43 तक पढ़ लिये तो तनिक आगे की धाराऐं भी पढ़ लेते।

    खैर भैया को क्यूंकि हमसे ही नही हर किसी से शिकायत है इसलिए शिकायत करते रहते है तो शिकायत करके खुश हो सकते है। वैसे भी भैया सरकारी ऊंट गाड़ी के नीचे चलने वाले कुत्ते की तरह गलतफहमी का शिकार हैं इसीलिये भैया आजकल हर किसी पर भौंकें जा रहे है। मालिक की वफादारी तो अच्छी बात है लेकिन समझना चाहिए कि वातावरण में प्रदूषण फैलाना ठीक नही है।

    हालांकि हमारे तमाम आख्यानों के बाद भी सर्वज्ञानी भैया के ज्ञान चक्षु शायद खुलें नही है या फिर गुलामी का नमक भैया के खून में अब भी हिलोरे मार रहा है। इसीलिये मीडिया के स्वंभू झंडाबरदार मीडिया के ही दुश्मनो के सिपहसालार बने बैठे है। भैया की ऐसी हरकतों को देखकर रामदरथ मिश्र की एक कविता की कुछ पंक्तियां याद आ रही है

    फिरते हो गरजते से हवाओं से डर के तुम।
    लगते नहीं हो कहीं से हमारे शहर के तुम।।
    सपनों से भरी आंख तुम्हारी, थी तुम्हारी।
    आकर यहां गुलाम हुए किस नजर के तुम।।
    मिलती गई मंजिले तुमको मगर ऐ दोस्त।
    एहसानमंद ना हो सके, रहगुजर के तुम।। 

    कुल मिलाकर भैया की हालत इन दिनों वीर सावरकर जैसी है,उनकी तरह ही सत्ताधारियों के वजीफे पर पलने वाले ‘वीर’ अपने ही लोगों के खिलाफ खड़े हैं उस पर तुर्रा ये कि गाना गाएंगे ‘सरफरोसी की तमन्ना अब हमारे दिल में है’। तो भैया जैसे आज वीर सावरकर को याद किया जाता है आप का इतिहास भी कुछ ऐसा ही होगा। बाकि भैया के लिये हम एक पुरानी फ़िल्म का गाना गुनगुनाना चाहेंगे। जिसके बोल कुछ यूँ है कि

    छुरी बन,कांटा बन ओ माय सन,
    सब कुछ बन मगर किसी का चमचा नहीं बन।।
    आलू बन शोरा बन …..

    गाना बहुत पुराना है मगर रिलेवेंट है तो लिंक भी दे रहा हूं ताकि आप और भैया भी सुन लें।   

    खैर भैया इस लायक नही है कि उनके बारे में कुछ ज्यादा बात की जाये। इसलिए बात को विराम देते हुए भाखला पाड देने के वहम पाल रहे भैया को बस इतना ही कहना चाहेंगे कि भइया दलाली के नमक में इतनी ताकत नहीं होती और हम तो आपको वैसे भी बहुते ही अच्छी तरह जानते है। तो आप ये जान लें कि…

    तलवारे चलेंगी,ना खंजर उठेंगे।
    ये बाजू मेरे आजमाये हुए है ।।

     

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    सूरतगढ़। नगरपालिका के चैयरमेन ओमप्रकाश कालवा वैसे तो काफ़ी होशियार माने जाते है परन्तु कुछ मुर्ख मित्रों की संगति के चलते इन दिनों उन पर हनक सवार है मीडियाकर्मियों को सबक सिखाने की। इसी कोशिश में उन्होंने कुछ घसियारों को झाड़ पर चढ़ा दिया है। दलाली की चरस पीकर अब ये घसियारे उसी डाल को काटने बैठ गये जिस पर ये खुद बैठे है। खैर चैयरमेन कालवा भले ही इनसे अपना उल्लू सीधा करने का ख्वाब पाल रहे हो लेकिन वे ये भूल जाते है कि इन लोगों को जमीन पर लाने में वे अपना ही नुक्सान कर लेंगे। वैसे चैयरमेन कालवा को ये भी जानना चाहिए कि हाथियों की लड़ाई में हमेशा घास ही कुचली जाती है। खैर चैयरमेन कालवा चाहे तो मुल्ला नसीरुदीन की इस कहानी से सबक लें सकते। कहानी कुछ यूँ है…..
    एक्‍ दिन मुल्‍ला नसीरूदीन जोश जोश में अपने गधे को घर की छत पर ले गये. . . . . जब नीचे उतारने लगे तो गधा नीचे उतरने को तैयार ही नहीं हुआ।
    बहुत कोशिश करने के बाद भी नाकाम होकर नसीरूदीन गधे का नीचे उतरने का इन्‍तजार करने लगे
    कुछ देर गुजरने के बाद मुल्‍ला नसीरूदीन ने महसूस किया कि गधा छत को लातों से तोडने की कोशिश कर रहा है । मुल्‍ला नसीरूदीन बहुत चिंतित हुए कि छत तो नाजुक है और इतनी मजबूत नहीं कि गधे की लातों को सहन कर सके।
    सो, मुल्‍ला नसीरूदीन दोबारा उपर भागे और पुन गधे को नीचे लाने का प्रयास किया परन्‍तु गघा तो अपनी हठ पर अडा था नीचे उतरने को तैयार नही था। तमाम समझाईश के बाद भी गधा दोबारा छत तोडने लगा।
    मुल्‍ला नसीरूदीन उसे धक्‍के देकर नीचे लाने का प्रयास कर रहे थे तो गधे ने मुल्‍ला नसीरूदीन को दुलत्‍ती जड दी जिसे वे नीचे गिर गये।
    गधा फिर छत तोडने लगा, अंतत छत टूट गई और गधे समेत छत धरती पर आन पडी।
    मुल्‍ला नसीरूदीन देर तक विषय पर मनन करते रहे और स्‍वयं से कहा कि गधे को कभी भी उंचाई पर नहीं ले जाना चाहिए। क्‍योंकि वह खुद की हानि तो करता ही है, दूसरे खुद को उपर ले जाने वाले को भी नहीं बख्‍शता।
    इस कहानी का वैसे तो आज की राजनीतिक परिवेश से कोई सम्‍ब्‍न्‍ध नहीं है पर चैयरमेन कालवा को ये कहानी बार बार पढ़नी चाहिए।

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    सुभाष चौक पर सड़क निर्माण में हो रहा जमकर भ्रष्टाचार

    सूरतगढ़। रेलवे स्टेशन के बाहर सुभाष चौक पर मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के तहत सीसी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। लंबे समय के बाद जब पिछले दिनों सड़क का निर्माण शुरू हुआ तब चेयरमैन ओम कालवा ने इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताया था । सड़क निर्माण के अगले दिन चेयरमैन कालवा ने सुबह सवेरे इस सड़क के इंस्पेक्शन की नौटंकी भी की थी। नौटंकी कहने की वजह यह है कि सड़क के निर्माण में ठेकेदार द्वारा जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है लेकिन चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा सहित जिम्मेदारों के चेहरे पर कोई शिकन नहीं है।

    ठेकेदार द्वारा इस सड़क (ड्रीम प्रोजेक्ट) के निर्माण में मापदंडों के विपरीत घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। ठेकेदार के कारनामों का सबूत शुक्रवार को ली गई यह तस्वीर है जिसमें आप साफ तौर पर देख सकते हैं कि ठेकेदार द्वारा सड़क (ड्रीम प्रोजेक्ट) निर्माण के लिए बिछाई जा रही बेस लेयर में ग्रीट,बजरी और सीमेंट के घटिया मसाले का उपयोग किया गया है। करीब 3 इंच मोटी इस परत में केवल बज़री का रंग दिखाई दे रहा है सीमेंट नजर नहीं आ रही। तस्वीर में आप बेस लेयर के मैटेरियल और ऊपर बिछाई जा रही लेयर के मसाले का फर्क भी साफ देख सकते हैं। दोनों लेयर के बजरी, ग्रीट और सीमेंट का रंग ही यह बताने के लिए काफी है कि चेयरमैन कालवा के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को भ्रष्टाचार दीमक दिन के उजाले में भी चाट रही है।

    पीडब्ल्यूडी द्वारा करवाया जा रहा है निर्माण

    करीब 33 लाख रुपए की लागत से मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत सड़क का निर्माण पीडब्ल्यूडी द्वारा करवाया जा रहा है। लेकिन नगरपालिका क्षेत्र में होने के चलते पालिका इस सड़क के निर्माण में गुणवत्ता का इंस्पेक्शन कर सकती हैं। लेकिन इंस्पेक्शन ना कर इंस्पेक्शन की नौटंकी जरूर चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा कर रहे हैं।

    आखिर किस मुँह से इंस्पेक्शन करेंगे चेयरमैन कालवा ?

    वैसे सवाल यह भी है कि चेयरमैन कालवा किस मुँह से शहर में हो रहे निर्माण कार्यों में हो रहे भ्रष्टाचार पर रोक लगाएंगे,जब खुद उनके कार्यकाल में नगरपालिका में l निर्माण कार्य के लिए वसूला जाने वाला कमीशन 17 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा खास बात यह भी है कि सड़क का निर्माण कर रहे सुपरवाइजर कम ठेकेदार पर पालिका के वर्तमान अध्यक्ष के साथ साथ पिछले अध्यक्षों का भी खासा स्नेह रहा है। यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि पिछले अध्यक्षों ने इस ठेकेदार के माध्यम से पालिका के टेंडर लेकर जमकर चांदी कूटी थी । लगे हाथ आपको यह भी बता दें कि पालिका के कर्मचारी के लिए रिश्वत लेने के चक्कर में कुछ साल पहले ये ठेकेदार जी भी नप गए थे। अब क्यूंकि रिश्वत मामले में लिप्त कर्मचारी को चेयरमैन कालवा ने उनकी इस विलक्षण योग्यता को देखते हुए कर वसूली का जिम्मा सौंप रखा है तो कर्मचारी के रंगे गये ठेकेदार जी भी फिर से सक्रिय हो गये है। निर्मल बाबा की तरह कर्मचारी के साथ साथ ठेकेदार पर भी चैयरमेन साब का खासी कृपा बरस रही है।

    शायद यहीं वजह है कि पिछले कुछ समय से शहर में करवाए जा रहे प्रमुख निर्माण कार्यों के टेंडर ठेकेदार जी को ही मिल रहे है। जो कि पालिका अध्यक्ष की सुपरवाइजर कम ठेकेदार के साथ अप्रत्यक्ष सांझेदारी की अफवाहों को बल देता है। कुल मिलाकर भ्रष्टाचार का रक्त पीकर जोम्बी बन चुके इन लोगों से फिलहाल शहर को बचाना मुश्किल है ! यह काम तब और भी मुश्किल है जब नगरपिता पर ही ज़ोंबी बनने के आरोप लग रहे हो।

    शहर के लोगों को पड़ेगा भुगतना

    इस सड़क के निर्माण में किये जा रहै भ्रष्टाचार का नतीजा शहर की जनता को भुगतना पड़ेगा। क्यूंकि जिस तरह से अमानक निर्माण सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है उससे तो यही लगता है कि चेयरमैन कालवा का यह ड्रीम प्रोजेक्ट कुछ ही समय में बिखरना शुरू हो जाएगा। वैसे चेयरमैन कालवा के सपनो की बात करें तो उनके सपने मुंगेरीलाल के सपनों की तरह साबित हुए है। शहर को कैटल फ्री बनाना हो फिर नगरपालिका को भ्रष्टाचार मुक्त करने का सपना। शहर में सत्ता के शीर्ष पर बैठकर चेयरमैन कालवा इन सपनों को भूल से गए हैं।लेकिन किसी शायर की इन बेहद खास पंक्तियों की तरह हम उन्हें इन जमीनी हकीकत से रूबरू कराते रहेंगे ?

    तुम आसमां के बंलंदी से जल्दी लौट आना।

    हमें जमीन के मसाईल पर बात करनी है।।

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    सूरतगढ़। शहर में व्यापारी-सफाईकर्मी विवाद समाप्त हो गया है। यह आंदोलन शहर के व्यापारिक संगठनों और उनके अगवा नेताओं ने मजबूती से लड़ा जिसके नतीजे में दोनों दोषी कर्मचारियों को शहर से रुखसत होना पड़ा । इस बात में भी कोई संदेह नहीं है कि इस आंदोलन को सफल बनाने में शहर के सभी पार्टियों के नेता जिनमें कांग्रेस के नेता भी शामिल है ने अपनी सकारात्मक भूमिका का निर्वाह किया। पक्ष विपक्ष को भूलकर कांग्रेस के कुछ नेताओं ने सच के साथ खड़े होना पसंद किया।

    लेकिन पूरा शहर जब सच के साथ लामबंद हो रहा था ऐसे समय में शहर के कुछ नेताओं का नकारात्मक रवैया भी सवालों के घेरे में रहा। ऐसे लोगों में नगरपालिका के चेयरमैन मास्टर ओमप्रकाश कालवा सबसे ऊपर है। घटना के बाद जब शहर का माहौल बिगड़ रहा था तब उन्हें नगरपिता होने के नाते आगे बढ़कर आंदोलन को समाप्त करने की पहल दिखाने की जरूरत थी। लेकिन उपाध्यक्ष -पार्षद विवाद की तरह ही व्यापारी-सफाईकर्मी विवाद में भी न जाने किस वजह से उन्होंने इसकी जरा सी भी कोशिश नहीं की। उल्टे वे तो इस मौके पर भी संकीर्णता का परिचय देते हुए व्यापारियों को नीचा दिखाते नज़र आये। वह भी तब जब आंदोलन की अगुवाई कांग्रेस पार्टी के ही कुछ नेता कर रहे थे।

    वैसे अगर इस पूरे मामले पर गंभीरता से गौर किया जाए तो पूरे प्रकरण के सूत्रधार कहीं ना कहीं खुद मास्टर ओमप्रकाश कालवा प्रतीत होते हैं। पहले दिन जब अतिक्रमण हटाने को लेकर विवाद हुआ था तब कांग्रेस के ही एक मनोनीत पार्षद और व्यापारी नेता से उन्होंने अगले दिन 11 सदस्य प्रतिनिधीमंडल से वार्ता करने और अभियान नहीं चलाने की बात कही। लेकिन अगले दिन पालिका का दस्ता व्यापारियों के अतिक्रमण को तोडने के लिए पहुंच गया। क्योंकि उस दिन ईओ विजय प्रताप शहर में नहीं थी तो साफ जाहिर है कि अतिक्रमण हटाने के निर्देश चेयरमैन कालवा के अलावा और किसने दिए होंगे। चेयरमैन द्वारा दी गई खुली छूट का नतीजा था कि बेलगाम सफाईकर्मी व्यापारी पिता पुत्र के साथ खुली गुंडई पर उतर आए। अतिक्रमण हटाने के दौरान लोगों का विरोध स्वाभाविक है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि विरोध कर रहे लोगों का दमन इस तरह से किया जाए।

    घटना के दिन चेयरमैन कालवा सुबह ही शहर से बाहर चले गये थे परन्तु नगरपिता होने के नाते क्या उनकी जिम्मेदारी नहीं थी कि वे शहर में लगी हुई आग को बुझाने का प्रयास करते ? वे अपने किसी प्रतिनिधि या पार्टी के प्रमुख नेताओं को मामले को सुलझाने के लिए मौके पर भेजते ? लेकिन उन्होंने मूकदर्शक बनकर आग को सुलगने दिया। वे यह भी भूल गए कि इस घटना से केवल उनकी छवि को ही नुकसान नहीं पहुंच रहा बल्कि कांग्रेस पार्टी जिनके वे नुमाइंदे हैं और मील परिवार जिनकी बदौलत उन्हें यह कुर्सी मिली है उनको कितना नुकसान पहुंच रहा है ? चेयरमैन कालवा इतने बेवकूफ तो नहीं लगते कि वह इतनी बात नहीं समझते हो ?

    बहरहाल दूसरे दिन भी जब मामला तूल पकड़ता जा रहा था चेयरमैन कालवा ने एक तरफ तो खुद मामले को सुलझाने की कोशिश नहीं की तो दूसरी तरह कांग्रेस नेता हनुमान मील के मामले को सुल्झाने के प्रयासों पर भी पानी फेर दिया। उपखंड अधिकारी कार्यालय में हुई वार्ता में व्यापारी नेताओं से अपनी तमाम शिकायतों के बावजूद हनुमान मील ने खुद आगे बढ़कर SI सुशील शर्मा और सफाईकर्मी मनिंदर को एपीओ करने का आश्वासन दे दिया था। व्यापारी भी हनुमान मील के आश्वासन पर मान गए थे और उन्होंने धरना स्थल पर जाकर हनुमान मील के प्रस्ताव को व्यापारियों के समक्ष रखने की बात की।

    लेकिन चेयरमैन कालवा के दिमाग में तो शायद कुछ और चल रहा था उन्होंने व्यापारी नेताओं को यह कह कर कि ‘जब उनके पास निर्णय लेने की पावर ही नहीं है तो यहां आए किसलिए हैं” बनी बनाई बात का गुड़ गोबर कर दिया।जिसके बाद व्यापारी नेता चेयरमैन कालवा से उलझ गये।अगर चेयरमैन कालवा संजीदगी का परिचय देते तो व्यापारी-सफाईकर्मी विवाद का निपटारा उसी समय हो जाता साथ ही कांग्रेस नेता हनुमान मील के प्रयासों और कांग्रेस नेताओं को सराहना मिलती। लेकिन जाने क्यों चेयरमैन कालवा ने इस सुनहरे मौके को बर्बाद कर दिया। इतना ही नहीं वार्ता के दौरान चेयरमैन कालवा के अहंकार को देखकर आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं कांग्रेस के ही दो नेताओ ने नम आँखों से चेयरमैन के आगे हाथ जोड़ दिए। पर क्या मजाल चेयरमैन कालवा का दिल पसीज जाये। 

    मजे की बात यह है कि ठीक ऐसा ही समझौता देर शाम को हुई वार्ता के बाद चेयरमैन कालवा और कांग्रेसी नेताओं ने स्वीकार कर लिया। लेकिन अब मैसेज ये गया कि व्यापारियों के दबाव में नगरपालिका और कांग्रेस नेताओं को झुकना पड़ा। कहीं ना कहीं सोचने वाली बात यह भी है कि क्यों चेयरमैन कालवा ने हनुमान मील के प्रयासों को सफल होने नहीं दिया ? अगर हनुमान मील धरना स्थल पर पहुंचकर व्यापारियों को दोनों कर्मचारियों को एपीओ करवाने का आश्वासन देते तो हनुमान मील के साथ ही व्यापारियों में कांग्रेस का जनाधार भी कायम रहता। लेकिन समझौते में देरी होने के चलते पूर्व विधायक गंगाजल मील और मास्टर ओमप्रकाश कालवा समझौते को लागू करवाने के बावजूद इस हालत में नहीं थे कि मौके पर पहुंचकर व्यापारियों का सामना कर पाते ?

    कुल मिलाकर पूरे प्रकरण में हुई कांग्रेस की किरकिरी को मिटाने का एक बड़ा मौका चेयरमैन कालवा की चालबाजियों के चलते हाथ से चला गया।  उसका खामियाजा कांग्रेस के बड़े नेताओं को भुगतना पड़ेगा। वैसे खुद चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा इस पूरे प्रकरण में शहर की जनता की अदालत में नंगे हो चुके हैं। नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले मास्टरजी किस तरह के अनैतिक हथकंडे अपना रहै है यह शहर की जनता पहले उपाध्यक्ष पार्षद विवाद तो अब व्यापारी सफाईकर्मी विवाद में देख चुकी है। लेकिन चेयरमैन कालवा यह भूल जाते हैं कि इन हथकंडो से आप विरोधियों को तो मिटा सकते हैं लेकिन दोस्त नहीं पैदा कर सकते।

    चेयरमैन कालवा के 3 साल के कार्यकाल के बाद अब शहर की जनता का विकास का सपना टूट चुका है। यहीं वजह है कि धरने पर बैठे उन्हीं के नजदीक समझे जाने वाले लोग उनके लिए ओमप्रकाश कालवा की जगह ‘कालवे’ जैसे हल्के शब्दों का प्रयोग कर रहे थे। बहरहाल कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष की बगावत से शुरू होकर उपाध्यक्ष-पार्षद विवाद और अब व्यापारी-सफाईकर्मी विवाद ने यह जरूर साबित किया है कि चेयरमैन कालवा अब नीम के उस पेड़ की तरह बनते जा रहे हैं जो अपनी छाया में किसी भी पौधे को पनपने नहीं देना चाहता। परन्तु व्यापारी-सफाईकर्मी विवाद में चेयरमैन की नंगई को शहर की जनता बहुत नजदीकी से देख चुकी है। ऐसे में महाराणा प्रताप चौक पर समझौते के बाद देर शाम जब व्यापारी और आमजन जीत का जश्न मना रहे थे तब लग रहा था कि मानो जनता यहीं गीत गा रही हो ..

     जा जा जा रे….

     जा जा जा रे, तुझे हम जान गए।

     कितना पानी में है पहचान गए।।

     जा जा जा रे तुझे हम जान गए।

    –राजेन्द्र पटावरी, उपाध्यक्ष प्रेस क्लब सूरतगढ़

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    सूरतगढ़। कांग्रेस नेता डूंगरराम गेदर ने आज जयपुर में शिल्प एव माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण करने के अवसर पर आपदा प्रबंधन मंत्री श्री गोविंदराम मेघवाल, जन अभाव अभियोग समिति के अध्यक्ष श्री पुखराज पाराशर, राजस्थान पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन श्री धर्मेंद्र राठौड़,केश कला बोर्ड अध्यक्ष श्री महेंद्र गहलोत, पचपदरा विधायक श्री मदन प्रजापत, सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल मौजूद रहे।इस अवसर पर गेदर ने कहा कि शिल्प एवं माटी कला दस्तकार जातियों के जीवन की महत्वपूर्ण कड़ी है। हमें पूर्ण जिम्मेदारी व सतर्कता से कार्य करते हुए मुख्यमंत्री जी की भावना के अनुरूप शिल्प एवं माटी कला संस्कृति को संरक्षित व प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि कला व कलाकारों के उत्थान के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

    जयपुर स्थित बोर्ड कार्यालय में पदभार ग्रहण करते डूंगरराम गेदर

    माटी कला बोर्ड के अधिकारियों व कर्मचारियों ने किया स्वागत

    इससे पूर्व गेदर के माटी कला बोर्ड कार्यालय पहुंचने पर चंपालाल कुमावत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मनोज पारीक, सहायक प्रशासनिक अधिकारी आशीष शर्मा ,प्रशासनिक अधिकारी, फूलचंद जाट व अन्य अधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने भावपूर्ण स्वागत किया ।इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी राजस्थान के मुख्यालय प्रभारी ललित तुनवाल, दुलाराम सहारण,अध्यक्ष, राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र आर्य ,छोटूराम बड़ीवाल, प्रदेशअध्यक्ष ,ऑल इंडिया बैकवर्ड क्लास फेडरेशन, अमरजीत सिंह मस्ताना ,पूर्व अध्यक्ष दी बार एसोसिएशन, जयपुर जुगलकिशोर सेन, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष श्री करनपुर, श्याम वर्मा, पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्रीकरनपुर, सुरेंद्र लांबा कैलाश कुमावत,प्रधान,पंचायत समिति, सांगानेर,सुनील सियाग ,पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, साहिल गेदर छात्रसंघ अध्यक्ष राजकीय महाविद्यालय,सूरतगढ़ केसराराम टाक,सरपंच, महावीर मेघवाल, सरपंच प्रतिनिधि राजेश बोरावड, पंचायत समिति सदस्य बालेसर, व्याख्याता राजाराम मंगलाव गुरदीप नोखवाल, गौरीशंकर कुमावत, प्रदेश अध्यक्ष अखिल भारतीय क्षत्रिय कुमावत महासभा,राजस्थान, कालूराम लिंबा,निदेशक,सेवा संस्थान ,राजस्थान समाजसेवी जगदीश बिश्नोई,एडवोकेट इंद्राराम प्रजापत सहित विशिष्ट जनों ने गेदर का पुष्प गुच्छ व माला पहनाकर अभिनंदन किया ।

    प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा का जताया आभार, डॉक्टर अंबेडकर की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण

    इससे पूर्व आज गेदर ने राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के निवास पर जाकर उनसे भेंट की। राजस्थान शिल्प एवं माटी कला बोर्ड की जिम्मेदारी प्रदान करने हेतु आभार व्यक्त किया। पदभार ग्रहण करने के उपरांत डूंगरराम गेदर ने महात्मा ज्योतिबा फुले संविधान संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के स्मृति स्थल पर पहुंच कर माल्यार्पण कर महापुरुषों को याद किया। पदभार ग्रहण के अवसर पर राजस्थान प्रदेश से पधारे सामाजिक कार्यकर्ताओं, समाजसेवियों, पार्टी से जुड़े हुए युवा कार्यकर्ताओं सोशल मीडिया के पदाधिकारियों का गेदर ने आभार जताया।

    पदभार ग्रहण कार्यक्रम समर्थक व पार्टी कार्यकर्ता रहे मौजूद

    इस अवसर पर समाजसेवी दुर्गसिंह चौहान, प्रवीणा जगदीश मेघवाल जिलाअध्यक्ष महिला कांग्रेस,हनुमानगढ़, डॉ. गौरीशंकर निमिवाल, उद्योगपति सीएम कुमावत रूपसिंह कुमावत,एडवोकेट इंद्राराम प्रजापत,शेरगढ़, मुकेश प्रजापति,पूर्व सचिव विधि विभाग पीसीसी, चतुर्भुज कुमावत,मनोनीत पार्षद डॉ.ललित जालवाल, कांग्रेस नेत्री रामदेवी बावरी,अनूपगढ़, राजेश चौधरी, सीकर रामकुमार जांदू डॉ. सुरेंद्र पाल स्वामी,व्याख्याता सत्यपाल चौहान सूरतगढ़, ओमप्रकाश कुमावत बिचून व्यवसायी रामदयाल कुमावत , विनोद प्रजापति, सुनीता निमिवाल,शुभम् राजोरिया, पंकज सिंगोदिया, संदीप सैनी ,राहुल सैनी,सागर निमिवाल,अजय मारवाल सीकर,मुकेश कुमार जालुड़,गणपत कुमावत,कुलदीप कुमावत,कंगना, पीयूष सहित सैकड़ों वरिष्ठ जन कार्यकर्ता उपस्थित थे।

    कल ही जारी हुई गेदर को अध्यक्ष बनाने की अधिसूचना

    गौरतलब है कि फरवरी माह में श्री गेदर को शिल्प एवं माटी कला बोर्ड में उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया था।लेकिन राज्य सरकार ने कल एक अधिसूचना जारी कर गेदर को उपाध्यक्ष की जगह बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया। जिसके बाद आज गेदर ने अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण किया

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    नंबर 3 में हुंडई शोरूम के सामने स्थित है बेशकीमती भूमि

    सूरतगढ़। शहर में पिछले कुछ दिनों से वार्ड नंबर-3 में खाली पड़ी बेशकीमती सरकारी भूमि के अचानक खातेदार पैदा होने से वहां रह रहे लोगों के सामने संकट पैदा हो गया है। सनसिटी रिसोर्ट के पीछे हुंडई कार शो रूम के सामने स्थित भूमि जो कल तक नगरपालिका की थी और जिस पर पालिका ने कुछ पट्टे भी जारी किये है अचानक किन्ही फलाने राम के पर बोलने लगी है। वार्ड न.-3 में स्थित इस बेशकीमती भूमि की अचानक 50 साल बाद खातेदारी बहाल होने को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    1972 में मंडी समिति ने की अवाप्त, 2005 में पालिका के नाम चढ़ चुका इंतकाल

    खसरा नंबर 320 का 2005 में नगरपालिका के नाम दर्ज इंतकाल

    जहां तक वार्ड न-3 मे स्थित इस जमीन की बात है राजस्व दस्तावेजों के मुताबिक खसरा नंबर 320 में स्थित यह करीब 2.3 हेक्टेयर (9 बीघा ) भूमि मल्लूराम पुत्र लाभू राम ब्राह्मण को आवंटित की गई थी। जिसका की खसरा नंबर 320/1 में 0.038 हेक्टेयर, 320/2 में 0.177 हेक्टेयर,320/3 में 0.478 हेक्टेयर और खसरा संख्या 320/4 में 1.607 हेक्टेयर रकबा था।

    सन 1972 में मंडी समिति द्वारा जब कस्बे की सैकड़ों बीघा भूमि को भविष्य में शहर के विकास के मद्देनजर अवाप्त किया गया। जिसमे खसरा नंबर-320 की मल्लूराम को आवंटित करीब 9 बीघा(2.300 हेक्टेयर) भूमि भी शामिल थी। सन 2002 में मंडी समिति के विघटन के बाद यह भूमि नगरपालिका को स्थानांतरित कर दी गई। इसी कड़ी में 4 नवंबर 2005 को इंतकाल संख्या 257 के जरिए उक्त भूमि भी राजस्व रिकॉर्ड में नगरपालिका के नाम दर्ज कर दी गई। तब से लगातार यह भूमि पर नगरपालिका के अधिकार क्षेत्र में थी। इसी के चलते पालिका द्वारा इस भूमि पर कब्जा कर रह रहे लोगों को कई पट्टे भी जारी कर दिए गये। लेकिन अब एकाएक नगरपालिका के नाम दर्ज नामांतरण को रद्द कर मल्लू राम के वारिसों के नाम खातेदारी को बहाल कर दिया गया है।

    50 साल बाद खातेदारी बहाल करने का अनूठा मामला

    वार्ड नंबर- 3 में विवाद की शुरुवात अतिरिक्त जिला कलेक्टर के एक आदेश के बाद हुई है। इस आदेश में अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने 50 साल से रिकॉर्ड में सरकारी रकबा के रूप में दर्ज़ इस जगह की खातेदारी बहाल कर दी है। एडीएम ने मूल आवंटी मल्लूराम के पुत्र ओम प्रकाश की ओर से धर्मपाल गोदारा नामक व्यक्ति द्वारा जरिए मुख्तियारआम के रूप में लगाई गई अपील पर यह निर्णय दिया गया है।

               इस अपील में अपीलार्थियों ने मंडी समिति द्वारा उक्त खातेदारी भूमि की आवाप्ति के बदले मल्लूराम व उनके वारिसों को न तो मुआवजा या बदले में तबादला नहीं देने, मंडी समिति द्वारा आवप्ति के बावजूद भी जमीन का भौतिक कब्जा नहीं लेने और अपीलार्थियों कब्जा जमीन पर होने का तर्क दिया।

    11/11/2021 को एडीएम द्वारा खातिरदारी बहाल करने का निर्णय व आधार

    49 साल बाद अपील स्वीकार करने पर खड़े हो रहे सवाल ?

    अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने जिन आधारों पर निर्णय दिया है उनमें से एक है कि उक्त रकबा की अवाप्ति के बदले मुआवजा या अन्यत्र तबादला नहीं दिया गया ? लेकिन अगर इस प्रकरण की पत्रावली पर गौर किया जाए तो अपीलार्थी ने खुद माना है कि अपीलांट के पति/पिता/दादा ने भू प्रबंधक अधिकारी एसीसी, आरसीपी के समक्ष इस रकबा के बदले मुआवजे की मांग की थी लेकिन भू प्रबंधन अधिकारी ने अवाप्ति अधिनियम के नियम 4  6 के नोटिफिकेशन का प्रकाशित नहीं होने का तर्क देते हुए आवेदन को खारिज कर दिया। इसका सीधा सा अर्थ है कि प्रार्थी भू प्रबंधन अधिकारी के निर्णय के विरुद्ध अवार्ड या तबादले के लिए अपील कर सकते थे लेकिन उन्होंने अपील नहीं की।

    वहीं आवंटियों द्वारा जब पालिका के नाम 2005 में नामांतरण दर्ज हुआ उस समय भी इसके विरूद्ध अपील नहीं की गई । जिसका सीधा सा अर्थ है कि आबंटी भूमि अवाप्ति के निर्णय को स्वीकार कर चुके थे। ऐसे में 50 साल के वकफ़े के बाद मियाद गुजरने के बाद अपील स्वीकार योग्य ही नहीं थी ?

    न्यायालय के निर्णय के हवाले से खातेदारी की बहाल

    इस प्रकरण में दूसरा बिंदु जिसे अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने खातेदारी बहाल करने का आधार माना है वह है, बागअली बनाम राजस्थान सरकार के विवाद में राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर की रिट संख्या-3865/95 में न्यायालय का निर्णय। एडीएम ने अपने निर्णय में कहा है कि उक्त रीट पर 08/05/2002 को पारित अपने निर्णय में माननीय उच्च न्यायालय के 8/05/ 2002 को पारित निर्णय से धारा 4 व 6 के तहत भूमि अवाप्ति के नोटिफिकेशन 06/07/1998 से अपास्त हो गए थे । 

    जहां तक बागअली बनाम राजस्थान (रिट संख्या-3865/95 ) में दिए गए निर्णय का सवाल है तो यह निर्णय मामले के पक्षकारों के लिए दिया गया था न कि भूमि अवाप्ति से प्रभावित सभी आवंटी काश्तकारों के लिए। क्योंकि अगर ऐसा होता तो निर्णय के अनुसार भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया निरस्त हो जाने से भूमि अवाप्ति से प्रभावित सभी अन्य काश्तकारों की खातेदारी भूमि स्वत ही बहाल हो जानी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ तभी तो अब भी इलाके के दर्जनों काश्तकार भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया के विरुद्ध अदालतों में केस लड़ रहे हैं। ऐसे में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट द्वारा भूमि अवाप्ति के सैकड़ों पेंडिंग मामलों में बरसों बाद भी उक्त निर्णय को लागू नहीं कर एक प्रकरण विशेष में उक्त निर्णय को लागू करना भी अपने आप में सवाल खड़ा करता है।

    यह भी गौरतलब है कि जब उच्च न्यायालय ने भूमि अवाप्ति के नोटिफिकेशन 4 6 की पालना नहीं होने पर समस्त भूमि अवाप्ति की कार्रवाई को निरस्त कर दिया था तो फिर मंडी समिति द्वारा किस अधिकार से 2005 में मल्लूराम के उक्त रकबे का मंडी समिति से नगरपालिका के नाम इंतकाल दर्ज करवा दिया गया।   

    कब्जा नहीं फिर भी माना कब्जा

    एडीएम ने अपने आदेश में एक अन्य रीट संख्या-3676/1993  मुस्मात बिस्मिल्लाह बनाम राजस्थान सरकार में उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला दिया है। एडीएम के अनुसार उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार निर्णय पारित होने की दिनांक (06/07/1998) के 2 वर्ष के भीतर भूमि अवाप्ति अधिकारी द्वारा भूमि अवाप्ति की कार्यवाही कर कब्जा लिया जाना आवश्यक था लेकिन मंडी समिति ने उक्त भूमि का कब्जा नहीं लिया। साथ ही एडीएम ने अपीलर्थियों के भूमि का कब्जा अपने पास होने के दावे को भी स्वीकार कर लिया। अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट का यह तर्क स्वीकार करना इस मायने में ही गलत है कि उक्त भूमि का इंतकाल पहले मंडी समिति के नाम और सन 2005 में नगरपालिका के नाम दर्ज होना यह साबित करता है कि उक्त भूमि का कब्ज़ा मंडी समिति/नगरपालिका ने ले लिया था । दूसरे सरकारी राज रकबे पर  तारबंदी या चारदीवारी कर ही फिजिकल कब्ज़ा नहीं लिया जाता। राजस्व रिकॉर्ड में इंतकाल दर्ज होना ही कब्जे या पजेशन का सबूत है। वास्तव में अपीलार्थियों का भूमि पर कब्जा नहीं था अगर वास्तव में कब्जा होता तो फिर मौके पर मौजूद दूसरे खातेदारो और मकान बनाकर रह रहे लोगों को जबरन हटाने की जरूरत नहीं पड़ती।

                       खातेदारी बहाल करने के निर्णय में महज इस बात पर कि ‘अपीलर्थियों ने उक्त रकबे पर अपना कब्जा होना अंकित किया है’ को बड़ी आसानी से स्वीकार कर लेना भी निर्णय पर सवाल खड़ा करता है। खातेदारी जारी करने के मामलों में राजस्व विभाग हमेशा ही पटवारी से मौके कब्ज़े और कम से कम 4 वर्ष की जमाबंदी की रिपोर्ट तलब करता है। लेकिन यहां पर एडीएम साहिबा ने बिना किसी रिपोर्ट के महज अपीलार्थी के कहने को कि अब तक अवाप्त  रकबे पर उनका कब्जा चला आ रहा है को शाश्वत सत्य मान लिया और खातेदारी बहाल करने का निर्णय दे दिया। अधिकारियों ने यह भी नहीं सोचा कि इस भूमि पर मकान बनाकर रह रहे 2 दर्जन से अधिक परिवारों का क्या होगा?

    मंडी समिति और नगरपालिका प्रशासन ने नहीं की ढंग से पैरवी

    इस पूरे मामले में मंडी समिति और नगरपालिका की भूमिका भी संदेह के घेरे मे है । क्यूंकि पत्रावली में मंडी समिति और नगरपालिका द्वारा दिए गए जवाब से साफ है कि दोनों पक्षों द्वारा जानबूझकर गोलमाल जवाब पेश किये गये ।

    मंडी समिति व नगरपालिका द्वारा पेश किये गये जवाब

    प्रकरण में रेस्पोंडेंट संख्या दो के रूप में मंडी समिति प्रबंधन ने तो खुद स्वीकार कर लिया के बागअली बनाम राजस्थान सरकार के वाद में भूमि अवाप्ति की समस्त कार्रवाई को निरस्त कर दिया था। जबकि खुद मंडी समिति द्वारा ही उच्च न्यायालय के इस निर्णय के बाद भी 2005 में वार्ड नंबर 3 के उक्त रकबे का मंडी समिति से नगरपालिका के नाम इंतकाल दर्ज किया गया था। कहने का तात्पर्य है कि समिति द्वारा जानबूझकर  गलत तथ्य को स्वीकार किया गया। यही नहीं मंडी समिति ने भूमि अवाप्ति संबंधी कोई रिकॉर्ड नहीं होने की बात भी अपने जवाब में कही। ऐसे में सवाल यह पैदा होता है कि आखिर भूमि अवाप्ति का रिकॉर्ड कहां गया ? अगर भूमि अवाप्ति का रिकॉर्ड गायब हुआ है तो उसके संबंध में अब तक कोई एफ आई आर क्यों नहीं दर्ज करवाई गई ? क्यों इस मामले में किसी दोषी अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही नहीं की गई ? रिकॉर्ड को फिर से बनाने की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई ? मंडी समिति के विघटन के बाद उक्त रिकॉर्ड नगरपालिका को स्थानांतरित किया गया या नहीं! यदि नहीं किया गया तो क्यों ? यह सारे ऐसे सवाल हैं जो इस पूरे मामले में मंडी समिति की भूमिका पर सवाल खड़े करते हैं 

           मंडी समिति की तरह ही रेस्पांडेंट संख्या 3 के रूप में नगरपालिका ने भी इस मामले में केवल रिकॉर्ड नहीं उपलब्ध होने की बात कहकर पल्ला झाड़ दिया। यहीं नहीं इस मामले में नगरपालिका ने अपने जवाब में अपीलार्थी के कब्जे होने के दावे का विरोध खुलकर नहीं किया। नगरपालिका की ओर से नहीं कहा गया कि उक्त भूमि पर हमने लोगों को पट्टे भी जारी कर दिए हैं। जिसका सीधा सा अर्थ है कि नगरपालिका प्रशासन भी प्रभावशाली लोगों के दबाव में काम कर रहा था। जिसकी वजह से पट्टा लेने के बावजूद वार्ड 3 के लोगों के लिए संकट पैदा हो गया।

    वार्ड-3 के 2 दर्जन से अधिक परिवारों संकट में फँसे

    वार्ड नंबर-3 में 50 साल बाद एकाएक खातेदारी बहाल होने के निर्णय से वर्षों से यहां रह रहे लोगों के सामने संकट पैदा हो गया है। इन परिवारों में से कईयों के पास नगरपालिका द्वारा जारी किया गया पट्टा भी है लेकिन अब इन लोगों को यहां से निकलने की धमकी दी जा रही है। यहीं नहीं इन परिवारों में खौफ पैदा करने के लिए इनके घरों के साथ लगती दीवारों के नजदीक पानी भर दिया गया है ताकि इनके कच्चे मकान सीलन से क्षतिग्रस्त हो जाए वहीं इन घरों के आगे की नालियों को भी मिट्टी से भर कर रोक दिया गया है जिससे की ये लोग परेशान हो। ज्यादातर दिहाड़ी मजदूरी करने वाले इन लोगों को ना तो कानून की जानकारी है और ना ही कोई गाइड करने वाला है। भूमाफियाओं से मिलने वाली धमकी से डरे यह लोग अब उपखंड कार्यालय पर धरना दे रहे हैं। लेकिन चांदी के सिक्कों की चमक से अंधे होकर लिखे गए फरमान और प्रभावशाली लोगों के आगे फिलहाल अधिकारी भी नतमस्तक है।

    राकेश बिश्नोई ने लगाए आरोप, कहा ‘एक भी परिवार उजड़ने नहीं देंगे ‘

    किसान नेता राकेश बिश्नोई ने गत दिनों शहर में पैराफेरी क्षेत्र में हुए जमीनों की बंदरबांट को लेकर पर्दे के पीछे कांग्रेस के कुछ प्रभावशाली नेताओं की भूमिका होने का आरोप सोशल मीडिया में बयान जारी कर लगाया था। इस मामले को लेकर भी राकेश बिश्नोई पीड़ित लोगों के साथ हैं। उनका कहना है कि एक भी परिवार को उजड़ने नहीं दिया जाएगा।

    आखिर कौन लोग हैं जो सरकारी भूमि की बंदरबांट में लगे हैं ?

    शहर में न केवल वार्ड नंबर 3 में ही बल्कि नए हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र से सटे खसरा संख्या 355 / 6 में नगरपालिका के नाम इंतकाल दर्ज भूमि और सदर थाने के सामने सिविल कोर्ट के लिए कभी आवंटन के लिए प्रस्तावित भूमि के भी खातेदार पैदा हो गए हैं। ऐसे में शहर के पैराफेरी क्षेत्र में जमीनों की बंदरबांट के आरोपों की आंच कांग्रेस नेताओं तक पहुंच रही हैं। आज से कुछ माह पूर्व जब शिल्प व माटी कला बोर्ड का उपाध्यक्ष मनोनीत होने पर पुरानी धान मंडी में डूंगरराम गेदर के स्वागत में सभा की गई थी। उस समय कांग्रेस के एक बड़े नेता ने कहा था कि उनके व उनके परिवार के नाम पर 1 इंच जमीन का कब्जा करने का आरोप नहीं है। इसलिए अब सत्ता में भागीदार होने के चलते कांग्रेस नेताओं की जिम्मेदारी है कि इन जमीनों की लूट के खेल को रोककर अपने पाक साफ होने का सबूत पेश करें। आखिर जनता को यह जानने का हक है कि इस खेल के पीछे आखिर कौन है ? वरना पब्लिक है सब जानती है गाना अभी भी लोगों को पसंद है।

    –राजेन्द्र पटावरी,उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब,सूरतगढ़

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    मामूली तकरार मारपीट में बदली

    दोनो पक्षों की तरफ से दर्ज़ हुए मामले

    सूरतगढ़। 24 अगस्त को नगरपालिका में भाजपा के विरोध प्रदर्शन के दौरान विधायक रामप्रताप कासनिया ने मीडिया को दिए बयान में जब कहा था कि नगरपालिका पार्षदों को लड़ाने का काम किया जा रहा हैं। तब किसने सोचा था कि विधायक की बात इतनी जल्दी सिद्ध होगी। हालांकि विधायक रामप्रताप कासनिया ने इसका आरोप सीधे सीधे नगरपालिका चैयरमेन ओमप्रकाश कालवा पर मंढा था।

    बहरहाल मंगलवार का दिन पालिका के इतिहास में काले दिवस के रूप में जरूर जुड़ गया है। जब एकल खिड़की में बैठे पार्षद राजीव चौहान और  उपाध्यक्ष सलीम कुरैशी में विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि उपाध्यक्ष सलीम कुरैशी ने अपने समर्थकों को मौके पर बुला लिया और बात मारपीट तक पहुंच गई। हालांकि मौके पर मौजूद पार्षदों ने बीच बचाव कर पार्षद राजीव चौहान को छुड़वाया। बाद में सिटी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पार्षद राजीव चौहान को लेकर सिटी थाने पहुंची। इस दौरान घटना की सूचना मिलने पर विधायक रामप्रताप कासनिया, पूर्व विधायक अशोक नागपाल, नगर मंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष शरण पाल सिंह मान, भाजपा नेता नरेंद्र घिंटाला, सुभाष गुप्ता,  महेश सेखसरिया, गौरव बलाना, प्रेम राठौड सहित बड़ी संख्या भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोग सिटी थाने पहुंचे। पार्षद राजीव चौहान के परिवाद पर सिटी पुलिस ने उपाध्यक्ष सलीम कुरैशी सहित 5 नामजद लोगों सहित करीब एक दर्जन लोगों के विरुद्ध मारपीट व झगड़े के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया।

    पार्षद राजीव चौहान का आरोप

    जिसके बाद नगरपालिका की एकल खिड़की की महिला कर्मचारीयों द्वारा भी पार्षद राजीव चौहान के विरुद्ध परेशान करने और राजकार्य में बाधा का परिवाद दिया गया जिस पर पुलिस ने सम्भवतः मामला दर्ज़ कर लिया है।

    बेमन से मौजूद थे कई भाजपा नेता

    पार्षद राजीव चौहान के साथ मारपीट के बाद कहने को तो बड़ी संख्या में भाजपा नेता सिटी पुलिस थाने पहुंचे थे। लेकिन भाजपा के जिन बड़े नेताओं से पार्षद राजीव चौहान और संघ व पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता कुछ करने की उम्मीद लगा रहें थे वें वहां पर औपचारिकता मात्र के लिए मौजूद है। उनकी बॉडी लैंग्वेज और हाव भाव ये बता रहा था कि उनका शरीर भले ही सिटी पुलिस थाने में था पर उनका मन कहीं और था। शायद वे एक पार्षद के साथ मारपीट को साधारण मारपीट की घटना से ज्यादा कुछ नहीं मान रहें थे। ऐसी घटना के लिए सीरियस होने की जरूरत उन्हें महसूस नहीं हो रही थी। इस बीच हालांकि भाजपा नेता नरेन्द्र घिंटाला ने एफआईआर करने की बजाय धरने पर बैठने की बात कही तो वहीं देरी से पहुंचे पूर्व विधायक राजेंद्र भादू ने जरूर मामले में तुरन्त कारवाई की मांग उठाई, लेकिन उन्हें बाकी नेताओं का समर्थन नहीं मिला। हालांकि पूर्व विधायक द्वारा यह मांग रखना पुलिस प्रशासन को अखर गया। जिसके बाद पूर्व विधायक को पुलिस की नाराजगी का सामना भी करना पड़ा।

    बहरहाल नेताओं के इस रवइये को लेकर कुछ युवा नेताओं में गुस्सा था। कुल मिलाकर कह सकते है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस थाने में रात होने के चलते अंधेरा जरूर था लेकिन कम रौशनी में भी कई नेताओं के चेहरों पर लगे नकाब नहीं छुप सके।

    पालिका के कांग्रेस बोर्ड की हो रही किरकिरी

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगरपालिका बोर्ड की जबरदस्त किरकिरी हो रही है। पालिका चैयरमेन ओमप्रकाश कालवा के नेतृत्व में कांग्रेस का बोर्ड भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में रहा है। अब इस घटना ने बोर्ड के इतिहास में पार्षद से मारपीट का एक और काला अध्याय जोड़ दिया है। यह सम्भवतः पहली घटना है जब किसी पार्षद के साथ बाहर से लोगों को बुलाकर मारपीट की गई है। इस मामले आमतौर पर शांत रहने वाले उपाध्यक्ष सलीम कुरेशी ने न जाने क्यों आपा खो दिया। यह एक बड़ा सवाल है ? इसका मंथन करने की उन्हें जरूरत है। पालिका की राजनीति में लम्बा वक़्त बिताने के बाद भी इस तरह की हरकत ने उनका कद कम ही किया है। वहीं इस घटना से कांग्रेस बोर्ड की जबरदस्त आलोचना हो रही है।

    क्या पार्षद का एकल खिड़की ऑफिस में बैठना गुनाह है ?

    इस मामले में विवाद एकल खिड़की में बैठने की बात पर हुआ। सबसे पहला सवाल यही है कि क्या एकल खिड़की में बैठना अपराध है ? क्यूंकि कोई आम आदमी भी एकल खिड़की ऑफिस में अपने काम के लिए जाकर बैठ सकता है। फिर एक चुना हुआ पार्षद तो पालिका के किसी भी कार्यालय मे बैठ सकता है इसमें शायद ही किसी को शक हो। दूसरी बात ये कि किसी कार्यालय में बैठी महिला या दूसरे कर्मचारियों को पार्षद के बैठने से कोई परेशानी थी या फिर पार्षद इन कर्मचारियों से किसी तरह का अभद्र व्यवहार कर रहे थे तो कर्मचारियों ने पार्षद की  लिखित में शिकायत अब तक क्यों नहीं की ? जो महिला कर्मचारी इस घटना के बाद सिटी पुलिस थाने में शिकायत देने पहुंच गई वह इस मामले को पहले किसी दूसरे मंच पर भी उठा सकती थी ? ऐसे में इन परिस्थितियों महिला द्वारा दिया गया परिवाद राजनीति से प्रेरित प्रतीत होता है।

    तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या उपाध्यक्ष को यह अधिकार है कि वह किसी चुने हुए पार्षद को पालिका कार्यालय में बैठने से रोक सके ? शायद नहीं ! और उस हालत में तो बिल्कुल भी नहीं इसी एकल खिड़की की महिला कर्मचारी जब पूर्व में खुद वाइस चेयरमैन सलीम कुरेशी के खिलाफ इसी तरह की शिकायत कर चुकी हो। ऐसे में वाइस चेयरमैन सलीम कुरेशी क्या किसी चुने हुए पार्षद को कहीं पर भी बैठने से रोकने का नैतिक अधिकार रखते है ? इस बात का मंथन उन्हें खुले दिमाग से करना चाहिए। साथ ही उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि कंही वे भी पालिका में चल रही राजनीति की पिच पर किसी की फेंकी गई गूगली का शिकार तो नहीं हो गये ?

    याद आ रही जेलर और हरिराम नाई की कहानी !

    सन 1975 में आई ब्लॉकबस्टर फ़िल्म ‘शोले’ आपको याद ही होगी । इस फिल्म में जेल के दृश्यों में दो किरदार काफी मशहूर हुए थे एक जेलर और दूसरा हरिराम नाई का। फ़िल्म में मशहूर हास्य अभिनेता असरानी जेलर के कैरेक्टर में थे। फिल्म में उनका तकिया कलाम ”हम भी अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं, हा-हा” काफी लोकप्रिय हुआ था । सूरतगढ़ नगरपालिका की हालत इन दिनों फिल्म शोले की जेल की तरह ही है। जहां कार्यालय की हर शाखा में हरिराम नाई बिठा दिया गए हैं। जो इन शाखाओं में आने वालों की हजामत तो करते ही हैं साथ ही साथ जेलर के लिए मुखबिरी का काम भी करते हैं। जेल में सजा काट रहे हर एक जय और वीरू के साथ जैल तोड़कर भागने की मंशा पाले हर एक कैदी की मुखबिरी कर रिपोर्ट जेलर को दी जा रही है। वैसे फिल्म शोले का हरिराम नाई भले ही मसखरा कैरेक्टर था लेकिन पालिका की शाखाओं में बैठे हरिराम जासूस बेहद शातिर हैं। शाखाओं में बैठे इन हरिराम नामक जासूसों की मदद से जेलर ने सभी कैदियों की कब कुंडली तैयार करवा ली है उन्हें पता ही नहीं चल सका । वैसे जैलर साहब के लिए यह कुंडली तैयार करवाना जरूरी भी है ताकि बहुमत के खेल में वक्त जरूरत काम लिया जा सके।

    इसलिए कहने को भले ही यह मामला पालिका उपाध्यक्ष सलीम कुरेशी और पार्षद राजीव चौहान के बीच मामूली कहासुनी के बाद हुआ झगड़ा कहा जाए, लेकिन हकीकत यह है कि इस घटना के तार पार्षद राजीव चौहान के पालिका की नीतियों के खिलाफ लगातार आवाज उठाने से जुड़े हुए है । चूँकि मंगलवार को चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा घटना के समय कार्यालय में मौजूद नहीं थे तो यह सूचना वाइस चेयरमैन सलीम कुरैशी को दी गई। जिसके बाद उपाध्यक्ष और पार्षद के बीच विवाद ने तूल पकड़ लिया और मारपीट की घटना हो गई।

    पिछले लंबे समय से किरकिरी बने हुए थे पार्षद राजीव चौहान

    पिछले लंबे समय से भाजपा पार्षद हरीश शर्मा में व राजीव चौहान लगातार सोशल मीडिया सहित दूसरे मंच पर नपा चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा के लिए परेशानी का सबब बने हुए थे । इसके अलावा गत दिनों नंदी शाला की बैठक में भी पार्षद राजीव चौहान ने सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में पालिका चेयरमैन के खिलाफ बयानबाजी की थी। जिसके बाद से राजीव चौहान विरोधियों के राडार पर थे। कहीं ना कहीं मंगलवार की घटना इसी विरोध की परिणति थी।

               – राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़

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    विधायक रामप्रताप कासनिया नेतृत्व में दिया 10 सूत्री ज्ञापन

    5 दिन में कार्रवाई करने का दिया अल्टीमेटम

    सूरतगढ़। शहर की प्रमुख समस्याओ को लेकर बुधवार को विधायक रामप्रताप कासनिया के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने नगरपालिका का घेराव किया। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने पालिका प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध प्रदर्शन के दौरान विधायक रामप्रताप कासनिया के अलावा पूर्व विधायक अशोक नागपाल, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष आरती शर्मा, भाजपा ने नरेंद्र घिंटाला, सुभाष गुप्ता और शरण पाल सिंह ने शहर की बिगड़ी सफाई व्यवस्था, सरकारी भूमि पर अतिक्रमणो, सीवरेज के ऊंचे नीचे चेम्बरो और आवारा गोवंश की समस्या को लेकर पालिका प्रशासन की आलोचना की। बाद में भाजपा कार्यकर्ताओं ने ईओ विजय प्रताप को 10 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा। इसी दौरान ढाब क्षेत्र से बड़ी संख्या में पहुंची महिलाओं ने ईओ विजय प्रताप को ढाब की सफाई को लेकर खूब खरी खोटी सुनाई। विरोध को देखते हुए ईओ विजय प्रताप अपने चेम्बर में आ गये।

    जिसके बाद भाजपा कार्यकर्ता नारेबाज़ी करते हुए ईओ के चेंबर में भी घुस गए। यहां पर ढाब क्षेत्र की महिलाओं ने ईओ के साथ फिर जमकर तकरार की और ढाब की सफाई की मांग की। वहीं वार्ड 39 से पार्षद हरीश दाधीच नें भी ईओ विजय प्रताप पर कांग्रेस व भाजपा पार्षदों में भेदभाव करने का आरोप लगाया। पार्षद दाधीच ने स्वयं के पैसों से खरीदी हुई स्ट्रीट लाइट नहीं लगाने का आरोप लगाया। इस पर ईओ विजय प्रताप ने जल्द ही लाइट लगाने का आश्वासन दिया। बाद में भाजपा के नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा द्वारा ईओ को ज्ञापन की मांगों को लेकर जल्द कार्रवाई करने की मांग की।

    विधायक रामप्रताप कासनिया ने पालिका पर जड़े संगीन आरोप

    विरोध प्रदर्शन के दौरान विधायक रामप्रताप कासनिया ने कहां कि नगरपालिका क्षेत्र में लंबे समय सड़को की हालत खराब है। इन सड़कों से लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। उन्होंने कहा कि शहर में बने ऊंचे सीवरेज चेम्बरो के कारण आए दिन हादसे हो रहे है। इसके साथ ही कासनिया नें आरोप लगाया कि नगरपालिका क्षेत्र में भू माफियाओं द्वारा अवैध अतिक्रमण किए जा रहे हैं। नगरपालिका द्वारा इन्हे नहीं हटाया जा रहा है, लेकिन गरीबो द्वारा अगर सर छुपाने के लिए झोपड़ी भी बनाई जाती है तो पालिका प्रशासन जेसीबी लेकर पहुंच जाता है।

    साथ ही साथ विधायक कासनिया ने कहा कि इंदिरा सर्किल से लेकर हनुमान जी के मंदिर तक नेशनल हाईवे पर करोड़ों की भूमि पर माफियाओं ने कब्जे कर लिए हैं। लेकिन पालिका प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा है। बाद में मीडिया से मुखातिब होते हुए विधायक कासनिया ने सीवरेज में डेढ़ करोड़ के घोटाले का मामला भी उठाया।

    पालिका प्रशासन पर आरोप लगाते विधायक रामप्रताप कासनिया

    घिंटाला नें उठाया पालिका बोर्ड से दीनदयाल उपाध्याय का नाम हटाने का मामला

    प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेता नरेंद्र घिंटाला नें पालिका भवन पर लगे साइन बोर्ड से दीनदयाल उपाध्याय का नाम हटाने का मामला उठाया। उन्होंने पालिका के साइन बोर्ड को हटाकर तुरंत दीनदयाल उपाध्याय का नाम लिखा नया बोर्ड लगाने की मांग की। भाजपा कार्यकर्ता एक बारगी साइन बोर्ड को तुरंत हटाने की मांग पर अड़ गए लेकिन बाद में ईओ विजय प्रताप द्वारा बोर्ड का फ्लेक्स बदलवाने के आश्वासन पर मामला शांत हो गया।

    भाजपा नगरमंडल की ओर से दिया गया 10 सूत्री ज्ञापन

    भाजपा नगरमंडल की ओर से अधिशासी अधिकारी विजय प्रताप सिंह को 10 सूत्री ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में शहर की टूटी-फूटी सड़कों की मरम्मत करने, सीवरेज के ऊपर उठे मेनहोल को दुरुस्त करने, वार्ड नंबर 2 में बने महिला हेल्थ सेंटर को शुरू करने, विभिन्न वार्डों में बने सामुदायिक भवनों की मरम्मत करवाने व शहर के वार्डों में भू माफियाओं द्वारा सरकारी भूमि पर किए जा रहे अतिक्रमणो के विरुद्ध कार्रवाई करने सहित 10 सूत्री मांगे शामिल है। भाजपा की ओर से ज्ञापन की मांगों पर कार्रवाई नहीं करने पर 5 दिन का अल्टीमेटम भी दिया गया।

    ये भाजपा नेता रहें मौजूद

    विरोध प्रदर्शन के दौरान विधायक रामप्रताप कासनिया के अलावा पूर्व विधायक अशोक नागपाल, पूर्व पालिका अध्यक्ष आरती शर्मा, भाजपा नेता नरेंद्र घिंटाला, शरण पाल सिंह, सुभाष गुप्ता,अशोक आसेरी,नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा, महामंत्री लालचंद शर्मा, किसान मोर्चा के विष्णु तरड़, प्रेम सिंह राठौड़, किशन स्वामी,पार्षद हरीश दाधीच, विक्रम चौहान सहित बड़ी संख्या में नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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    विद्युत विभाग ने नियमों को ताक में रख हॉस्पीटल फीडर से दी सप्लाई

    सूरतगढ़।‘अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता’। शहर के हुक्मरानों के मामले में यह बात पूरी तरह से सच है। विद्युत विभाग की अव्यवस्थाओं के चलते शहर की जनता भले ही हलकान होती रहे लेकिन हमारे हुक्मरानों ने अपने आराम की व्यवस्था कर ली है। विद्युत विभाग के अधिकारियों ने इन हुक्मरानों को 24 घंटे बिजली का तोहफा दिया है। खास बात यह है कि इसके लिए विद्युत विभाग के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रख दिया है। सत्ताधारीयों और प्रशासन के नुमाइंदों की सुविधा का ख्याल रखते हुए इनके घरों और कार्यालयों को विद्युत विभाग ने राजकीय चिकित्सालय के फीडर से जोड़ दिया है। जिसके चलते भले ही शहर में कितनी भी बिजली कटौती हो इन प्रभावशाली लोगों की सुविधा में खलल नहीं पड़ेगा। इन्हे तो 24 घंटे बिजली मिलती रहेगी ।

    राजकीय चिकित्सालय में बना फीडर

    ये और बात है कि राजकीय चिकित्सालय का फीडर विशेष रूप से मरीजों को 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया था। चिकित्सालय में भर्ती मरीजों को इलाज के दौरान असुविधा नहीं हो इसके लिए चिकित्सालय परिसर में ही यह फिडर स्थापित किया गया था। क्योंकि यह फिडर मरीजों की सुविधा के लिए शुरू किया गया था इस वजह से इमरजेंसी की स्थिति के अलावा फीडर से चिकित्सालय के अलावा किसी को भी विद्युत सप्लाई नहीं दी जा सकती। लेकिन यह नियम सत्ता की ताकत रखने वाले नेताओं और व्यवस्था के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर लागू नहीं होते। इसी का उदाहरण है सत्ताधारी नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को चिकित्सालय के फीडर से दी गई विद्युत आपूर्ति की सुविधा।

    विद्युत विभाग की मेहरबानी का ये उठा रहे हैं लाभ

    विद्युत विभाग के सूत्रों की माने तो करीब 2 माह पूर्व जब शहर में विद्युत व्यवस्था बिगड़ी हुई थी उस समय सत्ताधारी नेताओं और हुक्मरानों के प्रकोप से बचने के लिए विभाग के एक बड़े अफसर ने ही नियमों को ताक में रखकर यह व्यवस्था शुरू की थी ।

    विभाग के इस वीआईपी ट्रीटमेंट का फायदा जिन लोगों को मिल रहा है उन लोगों में सबसे पहला नाम सत्ता पक्ष के पूर्व विधायक का है। इसके अलावा सूत्रों के मुताबिक एडीएम व एसडीएम कार्यालय और निवास के अलावा पुलिस उपअधीक्षक कार्यालय , सिटी पुलिस थाना सहित कई अधिकारियों के कार्यालय व निवास इस सुविधा का लाभ उठाने वालों में शामिल है। नेताओं व प्रशासनिक अधिकारियों के लिए की गई इस व्यवस्था का लाभ पवन मिष्ठान भंडार से कल्याण भूमि की ओर जाने वाली रोड़ पर स्थित कई हॉस्पिटल, होटल, विद्युत विभाग के एक बड़े अधिकारी व कुछ व्यवसायी भी उठा रहें है।

    विभाग के अधिकारीयों ने नियमों को ताक में रखा

    शहर में विभाग के अधिकारी किस तरह से नियमों को ताक में रखकर काम कर रहे हैं इसका ज्वलंत उदाहरण यह मामला है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हॉस्पिटल फिटर से जोड़े जाने से पहले इस पुरे इलाके को रेलवे फिटर से विद्युत आपूर्ति की जाती थी। लेकिन बड़े साहब ने सत्ताधारियों और हुकमरानो के घरों व कार्यालयों को रेलवे फीडर से हटाकर हॉस्पिटल फिटर से जोड़ दिया। आज भी इस इलाके के बहुत बड़ी संख्या में विद्युत कनेक्शनों को रेलवे फीडर से ही विद्युत आपूर्ति दी जा रही है।

    यही नहीं विभाग ने नियमों की अनदेखी करते हुए किशनपुरा आबादी क्षेत्र को रेलवे फीडर से जोड़ दिया है जो कि गलत है। क्योंकि कि ग्रामीण क्षेत्र में आने वाले इलाकों को शहरी फीडर से नियमानुसार विद्युत आपूर्ति नहीं दी जा सकती। लेकिन ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ जैसे हालातों में विभाग पर लगाम कसने वाला कोई नेता इस शहर में नहीं बचा है। इसलिए विभाग का यह ढर्रा बदलेगा इसकी उम्मीद कम ही है।

    विभाग के एक्सईएन अजय शर्मा दे रहे गोलमोल जवाब

    विद्युत विभाग के एक्सईएन अजय शर्मा से जब हमने इस मामले में उनका पक्ष जानना चाहा तो वे गोलमोल जवाब देते नजर आए। पहले तो उन्होंने इस मामले की जानकारी होने से ही इंकार कर दिया। बाद में विभाग के सहायक अभियंता व कनिष्ठ अभियंता से मामला जुड़ा होना बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया। जब हमने एक्सईएन साहब से पूछा कि क्या चिकित्सालय के फीडर से कहीं और विद्युत सप्लाई दी जा सकती है तो एक्सईएन साहब से जवाब देते नहीं बना। साफ बात है कि चोर की दाढ़ी में तिनका है। वैसे यह बात गले उतरने वाली भी नहीं है कि हॉस्पिटल फीडर से प्रभावशाली लोगों को विद्युत आपूर्ति की जाए और एक्सईएन साहब को पता नहीं हो।
    वैसे एक्सईएन साहब की हालत दूरदर्शन पर बरसों पहले आने वाले विज्ञापन ‘यह बेचारा काम के बोझ का मारा, इसे चाहिए हमदर्द का टॉनिक सिंकारा‘ वाली सी है क्योंकि खुद एक्सईएन साहब विद्युत अवस्थाओं को लेकर होने वाले प्रदर्शनों से परेशान हैं। इसीलिये साहब ने व्यवस्थाओं का बहाना बनाकर पीएचडी जीएसएस में अपना ऑफिस ट्रांसफर कर लिया है। जनता ने इस पर एतराज करते हुए प्रशासन के आला अधिकारियों तक मामला भी पहुंचाया, जनता को होने वाली परेशानियों की दलील भी दी, लेकिन एक्सईएन साहब के 24 घंटे बिजली के एहसानों के तले दबे बड़े साहब ने एक्सईइन साहब को जंगल में मंगल मनाने की छूट दे दी। वैसे भी जनता का क्या है वह तो मरने के लिए ही है।

    मरीजों को 24 घंटा बिजली की सुविधा पर बना खतरा

    इस पूरे मामले में विद्युत विभाग और शहर के हुक्मरानों ने जिस तरह से बेशर्मी से अपने आराम की व्यवस्था की है वैसा दूसरा उदाहरण मिलना मुश्किल है। हुक्मरानों को खुश रखने की कवायद में विभाग के आला अधिकारियों ने हॉस्पिटल के मरीजों की 24 घंटे निर्बाध बिजली की सुविधा पर संकट खड़ा कर दिया है। क्योंकि प्रभावशाली लोगों को सुविधा देने के लिए इनके घरों व कार्यालयों को हॉस्पीटल फीडर से जोड़ने के कारण इस फीडर पर लोड बढ़ गया है। ऐसे में लोड के चलते ट्रांसफार्मर के ट्रिप होने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या कुछ एक लोगों की सुविधा के लिए मरीजों की सुविधा को ताक में रखना सही है ?

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    विरोधियों पर फिलहाल भारी पड़ रहें मास्टरजी के राजनैतिक दाव

    सूरतगढ़। क्रिकेट के खेल में स्पिन गेंदबाजी की एक कला है गुगली। यह ऐसी गेंद होती है जो लेग ब्रेक के एक्शन में की जाती है लेकिन वास्तव में ऑफ ब्रेक होती है। यूं भी कह सकते हैं कि यह बोल ठप्पा तो कहीं खाती है और निकलती किसी और दिशा में है। यही वजह है कि ये गेंद कब बल्लेबाज की गिल्लीयां उड़ा देती है उसे मालूम ही नहीं चलता। सूरतगढ़ नगरपालिका में करीब 3 साल के कार्यकाल में चैयरमेन ओमप्रकाश कालवा राजनीति की पीच पर गुगली कला के ‘मास्टर जी’ से मास्टर बनते दिख रहे है। राजनीति की पीच पर धुरंधर समझे जाने कई दिग्गजों को चेयरमैन कालवा ने अपनी गूगली से दिन में तारे दिखा दिए है।नगरपालिका में कांग्रेस के ही पार्षदों की बगावत से लेकर नंदीशाला के ताजा प्रकरण तक मीडिया की सुर्खियां बने ऐसे अनेक उदाहरण है जिनमे मास्टर जी ने धोबी पछाड़ का दाव चलकर राजनीतिक दुश्मनों को पटखनी दे दी। इनमें से कई मामलों में नगरपालिका की राजनीति में धुरंधर रहे कई राजनीतिक मठाधीशों को पता ही नहीं चल पाया कि मास्टर जी ने कब इनके पैरों की जमीन निकाल ली। नगरपालिका चेयरमैन के रूप में नंबरों के खेल के चलते अधिकतर चेयरमैनो का कार्यकाल पार्षदों की मान मनुहार में ही निकल जाता है। लेकिन सूबे में कांग्रेस की सरकार और पालिका बोर्ड में कांग्रेसी पार्षदों की पर्याप्त संख्या ने मास्टर जी को खुलकर खेलने का मौका दे दिया है।

    यही वजह है कि मास्टरजी एक और धुआंधार बल्लेबाजी कर रहे हैं तो दूसरी ओर अपने विरुद्ध षड्यंत्र रचने वाले पार्षदों/ राजनीतिक प्रतिद्वंदियो की ढ़िबरी भी बखूबी टाइट कर रहे हैं। अपने आप को तीसमार खां समझने वाले कई खिलाड़ियों को मास्टर जी ने घुटनों के बल पर ला दिया है । कहते भी हैं कि जैसे जैसे आदमी की परीक्षा होती है वैसे वैसे उसकी प्रतिभा का भी विकास होता है। मास्टर जी का मामला भी कुछ ऐसा ही है। अपने एक डेढ़ साल के कार्यकाल में पालिका की राजनीति को करीब से समझने के बाद से मास्टर जी ने संभावित जयचंदो और शकुनियों के ताबीज बनाने का काम शुरू किया जो आज तलक जारी है। मास्टरजी के तेवरों को देख अपनी दाल नहीं गलती देख कई आवारा परिंदों ने पिंजरे से उड़ जाने की गीदड़ धमकी भी दी लेकिन सूझवान बहेलिए की तरह मास्टर जी ने इन आवारा परिंदों के न केवल पर काट दिए बल्कि पिंजरे में वापस आने के लिए मजबूर कर दिया। वैसे उड़ने की फितरत रखने वालों का इलाज भी यही है।

    मास्टर जी के इस तरीके को लेकर आपकी और हमारी राय कुछ भी हो सकती हैं। लेकिन हाशिये पर रहने वाले कुछ ऐसे लोग भी हैं जो राजनीति में हमेशा ऊंचाइयों पर रहने वाले लोगों को गिरते हुए देख बहुत खुश हैं और इसके लिए वे मास्टर जी की मन ही मन तारीफ भी कर रहे है। वैसे भी राजनीति में अगर बने रहना है तो राजनीतिक षड्यंत्र को नाकाम करना जरूरी है, ऐसे में मास्टरजी ही क्यों, उनकी जगह कोई भी होता तो साम-दाम-दंड-अर्थ-भेद का सहारा लेकर अपने दुश्मनों को शिकस्त देने की कोशिश करता। लेकिन मास्टर जी इस मामले में दूसरों से एक कदम आगे है क्योंकि जिस तरह तमाम आलोचनाओं,दिक्कतों और खामियों के बाद भी मास्टरजी अपनी राजनीतिक पारी में नाबाद बने हुए हैं। उसने मास्टरजी को राजनीति में नौसीखिया समझने वाले राजनीतिक धुरंधरों का मोतियाबिंद जरूर झाड़ दिया है।

    दूसरे राजनीतिज्ञों से इतर मास्टरजी चापलूसों से घिरे तो दिखाई देते हैं लेकिन उनसे प्रभावित नहीं है। यही वजह है कि गाहे-बगाहे मास्टरजी इन चापलूसों को भी अपनी औकात दिखा देते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में भी मास्टर साब अपने आप को धुरंधर समझने वाले कुछ और चाणक्यों को ‘अर्थशास्त्र’ का पाठ पढ़ा दें तो कोई आश्चर्य नहीं होगा ।

    बहरहाल नंदीशाला प्रकरण में जिस तरह करीब आधा दर्ज़न पार्षदों की नाराजगी की अनदेखी कर मास्टर जी ने खुलाखेल अहमदाबादी खेला है उससे लगता है कि उन्हें अपने दुश्मनो की कमजोरी पता है। वैसे देखा जाये तो इस प्रकरण के बहाने वे अपने राजनीतिक विरोधियों को मानो किसी शायर के इस शेर की तरह सीधा सीधा ये संदेश दे रहें है कि

    ”तलवारे चलेंगी ना खंजर उठेंगे, ये बाजू मेरे आजमाये हुए है ‘‘

    -राजेंद्र पटावरी,उपाध्यक्ष-प्रैस क्लब

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    खसरों के खेल का नायाब नमूना है ‘आशियाना सिटी’

    जांच होने पर चल सकता है आपके सपनों पर बुलडोजर

    NH-62 पर शिप्रा एंक्लेव के सामने विकसित की जा रही ‘आशियाना सिटी’ कॉलोनी

    सूरतगढ़। ‘आशियाना सिटी’ नाम सुनते ही आप अपने आशियाने के ख्वाब बुनने लगते हैं। लेकिन ख्वाब हमेशा सच नहीं होते,कभी कभी ख्वाब डरावने भी होते है। सूरतगढ़ में NH-62 पर बन रही आशियाना सिटी खरीदारों के लिए ऐसा ही डरावना ख्वाब साबित हो सकती है। ऐसे में अगर आप भी आशियाना सिटी में अपने ड्रीम हाउस का सपना बुन रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है। सपनों के बिखरने का दर्द बहुत बड़ा होता है इसलिए आपके सपने बिखर जाएं उससे पहले आपको यह खबर जरूर पढ़ लेनी चाहिए।

    खसरों में हेरफेर का नमूना है ‘आशियाना सिटी’

    सूरतगढ़ में राजस्व विभाग के कर्मचारियों द्वारा खसरों में जमीनों को इधर-उधर खिसकाने की खबरें तो आपने जरूर सुनी होगी। आशियाना सिटी भी इसी खेल का ही एक उदाहरण है। यह बात हम नहीं आशियाना सिटी से जुड़े भूमि के दस्तावेज कह रहे हैं।

    आवासन मंडल से प्रस्तावित कॉलोनी का सूचना के अधिकार में मिला नक्शा
    आवासन मंडल के नक्शे में काले बॉक्स में खसरा नंबर 329/1 अंकित है।

    राजस्व विभाग के सूरतगढ़ कस्बा रोही के खसरा नंबर-329/2 में आशियाना सिटी को विकसित किया जा रहा है। लेकिन सूचना के अधिकार में मिले आवासन मंडल की प्रस्तावित कॉलोनी के दस्तावेज और नक्शा, कुछ और कहानी कहते हैं। आवासन मंडल के नक्शे व अन्य दस्तावेजों की माने तो भूमि जिस पर यह कॉलोनी बनाई जा रही है यह विवादित  है। आवासन मंडल से मिले कॉलोनी के नक्शे (फोटो प्रति नीचे दी गई है) के अनुसार राजस्व विभाग द्वारा के वर्तमान नक्शों में जिसे खसरा नंबर 329/2 बताया जा रहा है वह वास्तव में खसरा नंबर 329/1 है। जिसका सीधा सा अर्थ है कि आशियाना सिटी खसरा नंबर 329/2 की बजाय 329/1 पर बनाई जा रही है।

    राजस्व विभाग का वर्तमान नक्शा जिसमें खसरा नंबर 329/1 को खसरा नंबर 329/2 दर्शाया गया है ।

    वहीं अगर आवासन मंडल की प्रस्तावित कॉलोनी के नक्शे को गौर से देखें तो पता चलता कि आवासन मंडल द्वारा अवाप्त भूमि के नक्शे के मुताबिक खसरा नंबर 329/1 जो कि काले रंग के बॉक्स में दिखाया गया है वहीं भूमि राजस्व विभाग के नक्शे में 329/2 के रूप में दिखाई गयी है।

    क्यों कि आवासन मंडल को प्रस्तावित कॉलोनी के लिए भूमि आवंटन राजस्व विभाग द्वारा ही किया गया था और विभाग द्वारा ही यह नक्शा आवासन मंडल को दिया गया था। इसका सीधा सा अर्थ क्या यह नहीं लगाना चाहिए कि आशियाना सिटी के डेवलपर्स ने राजस्व विभाग के भ्रष्ट पटवारियों, कर्मचारियों और अधिकारियों से सांठगांठ कर राजस्व विभाग के दस्तावेजों/ नक्शों में खसरा नंबर 329/1 को खसरा नंबर 329/2 दो के रूप में दर्ज कर दिया।

    परन्तु भ्रष्ट अधिकारी और सफेदपोश माफिया ये भूल गए कि चोर कितना भी शातिर क्यों ना हो कोई न कोई गलती कर बैठता है। जिससे वह कानून की गिरफ्त में आज नहीं तो कल आ ही जाता है। आशियाना सिटी’ के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। विभाग के भ्रष्ट कर्मचारी और अधिकारी यह बात भूल गए कि उन्होंने विभाग के पास पड़े नक्शे में तो बदलाव कर दिया, लेकिन बदलाव से पहले दूसरे विभागों के पास भेजे गए नक्शे सच्चाई का बयान कर देंगे।

    कुछ सालों में ही हुई है खसरों में हैराफेरी

    राजस्व विभाग द्वारा आवासन मंडल को कॉलोनी के लिए  भूमि का आवंटन वर्ष 2010 के आसपास किया गया था। सूचना के अधिकार में आवासन मंडल से लिया प्रस्तावित कॉलोनी के खसरों का ऊपर दिया गया नक्शा वर्ष 2011 का है। जिसका सीधा सा अर्थ है कि वर्ष 2011 में खसरा नंबर 329/1 व 329/2 अपनी पूर्ववत स्थिति में थे। इसका दूसरा अर्थ यह भी लगाया जा सकता है कि वर्ष 2011 के बाद के सालों में खसरों में छेड़छाड़ की गई। 

    निष्पक्ष जांच से होगा दूध का दूध- पानी का पानी

    इस मामले की अगर निष्पक्ष जांच की जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है। राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी के आरोप में कई पटवारी, गिरदावर और बड़े अधिकारियों के साथ साथ सफेदपोश माफियाओं को जेल की हवा खानी पड़ सकती है। आवासन मंडल और राजस्व विभाग के दस्तावेज पानी की तरह साफ है और अपराध की खुली गवाही दे रहे हैं।  

    निष्पक्ष जांच में खरीदारों को भी लगेगा झटका

    अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाती है तो यह निश्चित है कि जांच की आंच ‘आशियाना सिटी’ तक भी पहुंचेगी। निष्पक्ष जांच में आशियाना सिटी का फर्जी होना साबित होता है तो ऐसे में आशियाना सिटी में आशियाने का सपना देखना खरीदारों को भारी पड़ेगा। ऐसे में खरीदारों की जीवन भर की जमा पूंजी खतरे में पड़ेगी।

    कॉलोनाईज़र का विवादों का है लम्बा इतिहास

    इस कॉलोनी से जुड़े एक -दो डेवलपर्स का सपनों को बेचने का एक कुख्यात इतिहास रहा है। जोहड़ पायतन की भूमि पर 20 साल पहले बसाई गई बसंत विहार/आनंद विहार कॉलोनियों का मामला किसी से छुपा हुआ नहीं है। इन कॉलोनीयों में जोहड़ पायतन का बोतल में बंद जिन्न अब भी बाहर निकलने के इंतजार में हैं। यही वजह है कि कॉलोनी में खून पसीने की कमाई से अपना आशियाना बना कर रहने वाले लोगों को आज भी अपने आशियाने पर बुलडोजर चलने के डरावने सपने आते हैं। खैर ये कॉलोनियां तो शुरुआत भर थी । इसके बाद सफेदपोश पूंजीपतियों नें हॉस्पिटल और होटल के लिए आवंटित भूखंड पर अवैध व्यावसायिक मॉल खड़ा कर खूब पैसा बनाया।

    काले धंधों में हुई काली कमाई से उत्साहित कॉलोनाइरों ने शहर के बेहद संकडे भगत सिंह चौक इलाके में एक कई मंजिला व्यवसायिक टावर खड़ा कर दिया। संकरी गलियों में स्थित इस कंपलेक्स को बेचकर सेठ लोग तो निकल गए, लेकिन कांपलेक्स में दुकानें खरीद कर व्यापार का सपना खरीदारों को महंगा पड़ गया। टॉवर की खाली पड़ी दुकानें सेठों के दिखाए गए सुनहरे सपनों का काला सच बयां करती हैं। मानकसर मे ड्रीम सिटी जैसे प्रोजेक्टों का हाल भी आने वाले दिनों में कुछ ऐसा ही हो जाये तो यह कहना कुछ गलत नहीं होगा। क्योंकि अधिकारियों से मिलीभगत कर इन कॉलोनियों में ख़डी इमारते भ्रष्टाचार की नींव पर ही ख़डी हैं। जांच होनें पर इन इमारतो का गिरना तय है !   

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    आचार संहिता के दिन भी बांट डाले सवा करोड़

    सूरतगढ। जब भी भ्रष्टाचार की बात होती है तब हमारा ध्यान नगरपालिका पर जाता है लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में पंचायत समिति भी पीछे नहीं है। नगरपालिका इन दिनों सीवरेज में भ्रष्टाचार को लेकर चर्चा में है, वहीं सूरतगढ़ पंचायत समिति 9 दिन में करीब 4.25 करोड़ का बज़ट सेंकशन करने को लेकर चर्चा में है। इस मामले में समिति के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा की गई जल्दबाज़ी से बड़े घोटाले की बू आ रही है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो तो कई ऐसे चेहरे बेनकाब हो सकते है जिन्होंने भ्रष्टाचार की बहती गंगा में हाथ धोए।

    2 साल से पड़े फंड को कुछ ही दिनों में किया जारी

    सूरतगढ़ पंचायत समिति के पास 14वें और 15 वें केंद्रीय वित्त आयोग और 5वें व छठे राज्य वित्त आयोग का करीब 7 से 8 करोड़ का फंड डेढ़ साल से पड़ा था। लेकिन प्रधान के चुनाव नहीं होने से यह फंड उपयोग में नहीं आ रहा था। क्यूंकि विकास कार्यों के लिए बज़ट आवंटन समिति की साधरण सभा की मीटिंग में प्रस्ताव लाकर ही सम्भव है। ऐसे में समिति के अधिकारियों की गिद्ध दृष्टि लंबे समय से इस फंड पर थी।

    पूर्व बीडीओ अभिमन्यु चौधरी के एपीओ होने के बाद रामप्रताप गोदारा के कार्यभार संभालतें ही इस फंड की बंदरबांट की कोशिशें शुरू हो गई थी । आखिरकार अधिकारीयों नें मिलीभगत कर राज्य सरकार द्वारा जारी एक सर्कुलर की आड़ में इस फंड को ठिकाने लगाने का प्लान बना लिया गया। इस प्लान के तहत समिति के अधिकारियों और बाबुओं नें 8 अक्टूबर 21 को 94 लाख, 27 अक्टूबर 21 को करीब 3:25 करोड़ रुपए और 10 नवंबर 21 को करीब 2 करोड़ 40 लाख रुपए के निर्माण कार्यों के प्रस्ताव बनाकर बजट स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू कर दी। क्योंकि प्रधान नहीं होने पर बजट स्वीकृति के लिए पहले जिला परिषद सीईओ से अनुमति लेनी पड़ती है। उसके बाद  प्रशासनिक, तकनीकी और  फिर वित्तीय स्वीकृति लेने के बाद ही बजट सैंक्शन किया जा सकता है। आमतौर पर इस प्रक्रिया में कम से कम 2 से 3 महीने का समय लगता है। लेकिन समिति के अधिकारीयों और बाबूओं नें ऑफिस में बैठकर की प्रशासनिक,तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी।

    शनिवार को जारी की 17 कार्यों की वित्तीय स्वीकृति

    इस मामले में समिति प्रशासन इतना उतावला था कि लगातार दो शनिवार यानि की 13 व 20 नवंबर 2021 को समिति कार्यालय को खोला। नतीजा ये रहा कि बाबुओं ने 16 नवंबर से 24 नंबर की 9 दिन की अवधि में कुल 4.25 करोड़ के 67 कार्यों की पत्रावली पूर्ण कर वित्तीय स्वीकृति जारी करते हुए प्रथम किस्त भी संबंधित पंचायतों के अकाउंट में ट्रांसफर कर दी। इसमें भी 20 नवंबर को 17 और  23 नवंबर को 16 कार्यों की वित्तीय स्वीकृति जारी की गई।

    आचार संहिता के दिन भी जारी की 19 वित्तीय स्वीकृतियाँ

    यूँ तो समिति के अधिकारियों और बाबू ने फंड की बंदरबांट के लिए दिन-रात एक किया हुआ था। लेकिन 24 नवंबर को चुनाव आयोग ने अचानक श्रीगंगानगर जिले में पंचायत चुनाव की घोषणा करते हुए आचार संहिता लगा दी। क्यूंकि आचार संहिता के दौरान विकास कार्यों की घोषणा व बजट की स्वीकृति पर रोक लग जाती है। ऐसे में अपनी योजना को फेल होते देख समिति के अधिकारियों ने आचार संहिता को धता बताते हुए इस दिन भी 19 वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी। समिति से जुड़े सूत्रों की माने तो 24 नवंबर को आचार संहिता के  लगने के दिन भी रात 12:00 बजे तक समिति का कार्यालय खुला था।

    ई-स्वराज और ई-पंचायत पोर्टल की जांच से हो सकता है खुलासा

    पंचायती राज विभाग में विभिन्न योजनाओं में मिले फंड का ट्रांसफर दो  पोर्टलों  के माध्यम से किया जाता है। केंद्रीय वित्त आयोग से मिले फंड का भुगतान ही स्वराज पोर्टल से किया जाता है। वहीं राज्य वित्त आयोग से मिले फंड का ट्रांसफर ई पंचायत पोर्टल से होता है। यदि मामले में दोनों पोर्टल में 24 नवंबर को हुए ट्रांजैक्शन की जांच की जाए तो यह खुलासा हो सकता है कि आचार संहिता लगने पर शाम करीब चार-पांच बजे के बाद किस-किस पंचायत को कितने बजे और कितना फंड ट्रांसफर किया गया ?

    आचार संहिता लगने के चलते कामयाब नहीं हुए मंसूबे

    पंचायत समिति के सूत्रों की माने तो पंचायतों को विभिन्न विकास कार्यों के लिए धनराशि उपलब्ध कराने के बदले कमीशन का खेल खेला गया। इस कमीशन की राशि करीब 5% बताई जा रही है। कमीशन के इस खेल में समिति के अधिकारी और बाबू कामयाब होने ही वाले थे लेकिन अचानक लगी आचार संहिता ने इनके अरमानों पर पानी फेर दिया। तमाम कोशिशों के बावजूद आचार संहिता लगने के बाद तक समिति के अधिकारी केवल करीब 4:25 करोड़ रुपए की ही वित्तीय स्वीकृति जारी कर पाए। यदि एक दो दिन का समय और मिल जाता तो समिति के पास पड़े सारे फंड का आवंटन हो जाता।

    सर्कुलर की आड़ में हुआ खेल

    कोरोना से पंचायती राज चुनाव की प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने के चलते सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं में आवश्यक विकास कार्य बाधित ना हो इसके लिए एक सर्कुलर जारी किया था। इस सर्कुलर के तहत चुनाव नहीं होने तक पंचायत स्तर पर ग्राम विकास अधिकारी, पंचायत समिति स्तर पर बीडीओ और जिला परिषद स्तर पर सीईओ को प्रशासक नियुक्त करते हुए कुछ वित्तीय शक्तियां भी प्रदान की गई थी। पंचायत समिति में पड़े फंड की बंदरबांट करने के लिए सूरतगढ़ पंचायत समिति के अधिकारियों ने इसी सर्कुलर को हथियार बनाया। लेकिन हकीकत यह है कि यह सर्कुलर केवल आवश्यक कार्यों के लिए जारी किया गया था, ना कि फंड की बंदरबांट के लिए।

    पूर्व बीडीओ की खिलाफत करने वाले सरपंचों पर मेहरबानी

    इस पूरे प्रकरण की खास बात यह है कि पूर्व में जो सरपंच और सरपंच प्रतिनिधि BDO अभिमन्यु चौधरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर उनकी खिलाफत कर रहे थे। उनसे जुड़ी पंचायतों पर वीडियो रामप्रताप गोदारा की खास मेहरबानी रही। नतीजा पंचायत समिति द्वारा जारी वित्तीय स्वीकृतियों में अच्छा खासा हिस्सा इन पंचायतों को मिला है।

    नवनिर्वाचित प्रधान नें खोया एक मौका

    पंचायत समिति के फंड की इस बंदरबांट से सबसे अधिक नुकसान कांग्रेस और उनके स्थानीय नेताओं को हुआ है। क्योंकि अगर बीडीओ रामप्रताप गोदारा अगर जल्दबाजी नहीं करते तो एक महीने बाद ही पंचायत समिति को नया प्रधान मिलना तय था। ऐसे में अगर नवनिर्वाचित प्रधान इस फंड का पंचायतों में वितरण करते तो विकास कार्यों का क्रेडिट नए प्रधान को मिलता और उनकी लोकप्रियता बढ़ती। लेकिन पंचायत समिति के चालाक अधिकारियों और बाबुओं ने उन्हें इस उपलब्धि से दूर कर दिया।

    प्रधान हज़ारीराम मील और हनुमान मील करवाए जांच

    नगरपालिका की तरह पंचायत समिति में जिस तरह से भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं। उससे  स्थानीय कांग्रेस नेताओं की छवि लगातार धूमिल हो रही है। ऐसे प्रधान हज़ारीराम मील और आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के संभावित दावेदार युवा हनुमान मील को इस और ध्यान देने की जरूरत है।

    मामले का खुलासा करते सूचना के अधिकार में मिले दस्तावेज

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    TV पर काम नहीं मिलने के लिए पीएम को ठहराया जिम्मेदार

    सोशल मीडिया का जताया आभार

    दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री के लिए प्रसिद्ध हास्य कलाकार श्यामश्याम रंगीला ने ट्विटर पर PM नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा है । शनिवार को कलाकार श्याम रंगीला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए एक के बाद एक तीन ट्वीट किये। अपने ट्वीट में रंगीला नें लिखा की ‘ PM श्री @narendramodi जी…मैं एक छोटा सा कलाकार हूँ, आपकी व कई लोगों की मिमिक्री करता हूं। दुखद है कि मैं ये कभी TV पर नहीं कर सकता क्यूंकि TV चैनल के सभी लोग आप से डरते हैं। आपको तो मजाक पसंद भी है तो फिर भी वे क्यों डरते हैं आपके मिमिक्री से ? क्या आपकी मिमिक्री जुर्म है?

    रंगीला नें अपने दर्द को बयां करते हुए लिखा कि “लाफ्टर चैलेंज(2017)के बाद कई बार TVशोज़ से बात हुई लेकिन अंत में सभी ने यही कहा की ‘श्याम,चैनल आपके लिए इजाज़त नहीं दे रहा’। आज भी हुआ, इसलिए 5 साल बाद इस पर लिखने पर मजबूर हुआ,आख़िर क्यूँ मिमिक्री से इतना डरते है सब ?” रंगीला ने लिखा कि ‘सोशल मीडिया ना होता तो ये रंगीला कब का ख़त्म हो गया होता’।

    रंगीला यहीं पर नहीं रुके उन्होंने एक और ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘सोशल मीडिया पर आप सबने मुझे हमेशा किसी TVशो से बढ़के ही प्यार दिया है,इसलिए आज आप सब का शुक्रगुज़ार हूँ।मुझ जैसे आने वाले कलाकार भी ध्यान रखे कि किस तरह से tv चैनल डर के मारे आपको रोक देंगे’। इसी ट्वीट में उन्होंने यह भी साफ किया कर “ये सब किसी शो में आने की लालसा या सहानुभूति के लिए नहीं लिखा,बल्कि जो सच है वो लिखा है”

    गौरतलब है कि श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर के पास रहने वाले श्याम रंगीला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हूबहू मिमिक्री के लिए खासे प्रसिद्ध है। 2017 में लाफ्टर चैलेंज में भाग लेने के बाद वे सुर्खियों में आए थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री के वीडियो भी काफी लोकप्रिय हुए थे। लेकिन इसके बावजूद टेलीविजन कार्यक्रमों में उन्हें अपनी प्रतिभा का दिखाने का मौका अब तक नहीं मिल पाया है। उनका मानना है कि इसके पीछे कहीं न कहीं कार्यक्रमों के प्रड्यूसर का प्रधानमंत्री की नाराजगी का डर है। शायद यही वजह है कि आज इसमें मिक्री आर्टिस्ट का दर्द उभर आया और उन्होंने ट्विटर पर अपनी पीड़ा का बयां कर दी।

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    शिकायतकर्ताओं नें बेशर्मी से सेफ्टी टैंक को बना दिया सौक पिट

    सूरतगढ़। सूरतगढ़ नगरपालिका पिछले कुछ दिनों से सीवरेज कंपनी मोंटीकार्लो को 1.46 करोड रुपए के भुगतान में भारी भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी है। वही भुगतान के लिए दिए गए सहमति पत्र ने शिकायतकर्ताओं के चेहरे से शराफत का नकाब खींच लिया है। इस मामले को लेकर कांग्रेस के ही ब्लॉक अध्यक्ष परसराम भाटिया व पूर्व नपा चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल मोर्चा खोले हुए हैं। दोनों नेता इसे नगरपालिका के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बता रहे हैं। इन नेताओं का कहना है कि पहली बार बिना काम करवाए हुए इतनी बड़ी राशि का भुगतान किया गया है। वह भी तब जब पिछले 3 सालों से अधिक समय से भुगतान पर रोक लगी हुई थी। दोनों नेता पिछले 15 दिनों से भुगतान संबंधी पत्रावली की नकल की मांग कर रहे हैं। लेकिन अब तक दोनों नेताओं को पालिका प्रशासन की ओर से प्रतिलिपि उपलब्ध नहीं कराई गई है। जबकि परसराम भाटिया स्वयं पार्षद है वहीं पूर्व चेयरमैन बनवारी लाल की पत्नी विमला मेघवाल भी पार्षद है। ऐसे में पालिका बोर्ड के सदस्यों को ही भुगतान संबंधित पत्रावली नहीं दिए जाने से भुगतान को लेकर उठ रहे आरोप अपने आप पुख्ता होते जा रहे हैं।

    हालांकि परसराम भाटिया को धरने के बाद पत्रावली का अवलोकन करवाया गया था लेकिन पत्रावली की नकल के लिए भाटिया भी चक्कर काट रहे हैं। दोनों नेता इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। देखना यह होगा कि पत्रावली की नकल मिलने पर दोनों नेता आगे क्या कदम उठाते हैं।

    सेप्टिक टैंक की जगह सौक पिट के भुगतान पर सहमति, शिकायतकर्ताओं की नीयत पर सवाल ?

    सीवरेज कंपनी को भुगतान के मामले ने जिस तरह से शिकायतकर्ताओं नें तीन साल बाद एकाएक सीवरेज कंपनी को रोका गया भुगतान करने के लिए सहमति दी है। उससे शिकायतकर्ताओं की नीयत पर सवाल खड़े हो रहे हैं ! शिकायत कर्ताओं के अचानक हृदय परिवर्तन से हर कोई हैरान है। इस मामले मे पूर्व वाइस चेयरमैन व ठेकेदार विनोद पटनी, कॉमरेड लक्ष्मण शर्मा और मदन ओझा,पार्षद सावित्री स्वामी, सामाजिक कार्यकर्ता विमल राजपूत ने 27 जून 2018 को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सीवरेज निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।

    अपने पत्र में शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सीवरेज निर्माण के दौरान 4763 सेप्टिक टैंक (कुई) को खाली और  समतल करने के नाम पर पालिका के प्रशासनिक अधिकारियों के अभियंताओं ने 1 करोड़ 60 लाख 98 हजार 942 रुपए का भुगतान कर दिया है। जबकि माप पुस्तिका में कहीं पर भी सेप्टिक टैंक तोड़ने की कोई जगह दर्ज नहीं है और ना ही शहर में सेप्टिक टैंक और कुई खाली हुई है। शिकायत पत्र में सीवरेज निर्माण संबंधित 2  अन्य बिंदुओं पर भी शिकायत की गई थी। इस शिकायत के बाद राज्य सरकार के द्वारा निर्देश पर रूडसीको द्वारा गठित कमेटी ने मौके का निरीक्षण किया। हालांकि कमेटी ने मौके पर सेफ्टी टैंक तोड़ना नहीं पाया लेकिन इसके बावजूद कमेटी ने सीवरेज कंपनी को बचाने के लिए गोलमोल रिपोर्ट करते हुए निकाय को ही सत्यापन करने के बाद भुगतान करने की रिपोर्ट कर दी। जिसके बाद यह भुगतान लटक गया। कंपनी के भुगतान में पिछले 3 सालों से मुख्यमंत्री को की गई यह शिकायत रोड़ा बनी हुई थी।

    लेकिन अब एकाएक 3 साल के बाद 5 शिकायतकर्ताओं में से ठेकेदार विनोद पटनी, कॉमरेड मदन ओझा व लक्ष्मण शर्मा का अचानक ह्रदय परिवर्तन हो गया है। तीनो शिकायतकर्ताओं ने गत दिनों सीवरेज कंपनी को भुगतान करने के लिए सहमति पत्र दे दिया। इस सहमति पत्र में  शिकायतकर्ताओं ने सीवरेज कंपनी को भुगतान के लिए अपनी ही शिकायत को झूठा साबित करते हुए जो तर्क दिए हैं वह हैरान करने वाले हैं।

    सहमति पत्र में तीनों शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि सीवरेज कंपनी द्वारा सेप्टिक टैंक तो तोड़कर समतल  नहीं किये लेकिन सोक पिट तोड़कर समतल किए हैं। । अब सोक पिट क्या बला है यह भी हम आपको  बता देते हैं, सेफ्टी टैंक की बदबू कम करने के लिए गली में बनाए जाने वाले गड्ढों को सोक पिट कहा जाता है। इन गड्डों में कच्ची नाली के जरिए सीवरेज का गंदा पानी छोड़ा जाता है। सहमति पत्र देने में शिकायतकर्तओं ने किस तरह से अपना जमीर सीवरेज कंपनी को गिरवी रख दिया इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि सहमति पत्र में शिकायतकर्ताओं ने लिखा है कि शहर में सेप्टिक टैंक की जगह सोक पिट बनाने का प्रचलन है और सीवरेज  कंपनी द्वारा इन्ही सोक पिट तोड़ कर समतल किया गया है। इसलिए अज्ञानतावश उन्होंने सेप्टिक टैंक नही तोड़ने और समतल करने की शिकायत कर दी। सहमति पत्र में शिकायतकर्ताओं ने लिखा है कि जिला कलेक्टर द्वारा गठित समिति द्वारा सौक पिट को तोड़ने व समतल करने के सत्यापन से सहमत हैं। इसलिए उनकी शिकायत को निरस्त कर सीवरेज कंपनी को रोका गया भुगतान किया जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।   

    शिकायतकर्ताओं के सहमति पत्र से पालिका भी सवालों के घेरे में ?

    सहमति पत्र पर गौर किया जाये तो सहमति पत्र पर शिकायतकर्ता विनोद पाटनी के हस्ताक्षर व मोहर तो सही प्रतीत होती है । लेकिन दूसरे शिकायतकर्ताओं कॉमरेड लक्ष्मण शर्मा व मदन ओझा के हस्ताक्षर को देखने से ऐसा लगता है कि दोनों के किसी अन्य पेज पर किए गए हस्ताक्षरों को स्केन कर या फिर सहमति पत्र पर रखकर फोटोकॉपी की गई है। जिसका अर्थ निकलता है कि दोनों नेताओं के सहमति पत्र पर कूट रचित हस्ताक्षर किए गए हैं। लेकिन यहीं से सवाल यह भी खड़ा होता है कि अगर दोनों नेताओं ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं तो आखिर में चुप क्यों हैं ? या फिर इन नेताओं ने भविष्य में होने वाली किसी परेशानी से बचने के लिए अप्रत्यक्ष सहमति देते हुए कूटरचित हस्ताक्षरों के इस्तेमाल की सहमति दे दी है ? पत्र सहमति पत्र पर दिनांक नहीं होना बड़े सवाल खड़े करता है। बहरहाल वजह जो भी रही हो इस पूरे प्रकरण नें शिकायतकर्ताओं को आम जनता की नजर में जरूर नंगा कर दिया है।

    पांच की जगह तीन से ही क्यों लिया गया सहमति पत्र ?

    इस पूरे प्रकरण में नगरपालिका प्रशासन की मंशा और कार्यप्रणाली पर इसलिए भी सवाल खड़े होते हैं क्योंकि मूल शिकायत 5 व्यक्तियों द्वारा की गई थी। जिनमें ठेकेदार विनोद पाटनी, कॉमरेड मदन ओझा व लक्ष्मण शर्मा के अलावा पूर्व पार्षद सावित्री स्वामी व सामाजिक कार्यकर्ता विमल राजपूत भी शामिल थे। लेकिन  नगरपालिका नें तीन शिकायतकर्ताओं का सहमति पत्र लेकर सीवरेज कंपनी को डेढ़ करोड़ का भुगतान कर दिया है। पालिका नें आखिर दो अन्य  व्यक्तियों की आपत्ति को क्यो नजरअंदाज कर दिया ? आखिर क्यों शेष दोनों शिकायतकर्ताओं  का सहमति पत्र लेने की जरूरत नहीं समझी गयी ? कुल मिलाकर इस पूरे प्रकरण में झोल ही झोल है ! जिसका खुलासा निष्पक्ष जांच से हो सकता है।

    –राजेंद्र पटावरी

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    सूरतगढ। रामनवमी शोभायात्रा समिति के कार्यालय का उद्घाटन पुरानी धान मंडी में रविवार को 12:15 बजे विधिवत रूप से किया गया । इस अवसर पर भगवान श्रीराम व नौ ग्रह के देवताओं की पूजा अर्चना मंत्रोच्चार के साथ करवाई गई । प्रेम सिंह राठौड़, अशोक आसेरी विहिप के सुरेश शर्मा,अमित कडवासरा, विनोद सारस्वत पार्षद सुनील सैनी ने पूजा अर्चना कर भगवान श्रीराम की आरती की । समिति के प्रेम सिंह राठौड़ ने बताया कि आगामी कार्यक्रम में रामनवमी शोभा यात्रा बिश्नोई मंदिर से दोपहर 3 :00 बजे 9 अप्रैल को निकाली जाएगी। उन्होंने समिति की रामनवमी की तैयारीयों को लेकर आगामी कार्यक्रमों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने कहा कि पूरे शहर में भगवा ध्वज लगाए जाएंगे और भगवान श्रीराम की भव्य झांकियां निकाली जाएगी।

    ये रहे कार्यक्रम में उपस्थित

    कार्यक्रम में बालाजी रामलीला समिति के अध्यक्ष कालू बिश्नोई विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल मारवाड़ी युवा मंच मानव सेवा समिति अध्यक्ष यार अनमुल्ले समिति व समिति के पवन छाबड़ा, श्याम अरोड़ा,प्रदीप चौहान ,हरीश दाधीच, योगेश स्वामी ,अरुण जैन ,शक्ति सिंह भाटी, सुरेश सुथार, गोविंद नायक, नरेंद्र शर्मा, विधायक रामप्रताप कासनिया, नगरपालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा, पूर्व विधायक राजेंद्र भादू ,पूर्व विधायक अशोक नागपाल,पूर्व पालिकाध्यक्ष आरती शर्मा, नरेंद्र घिंटाला, सुभाष जी गुप्ता, भाजपा डायरेक्टर पैप सिंह राठौड़, नगरअध्यक्ष सुरेश मिश्रा, शरणपाल मान, खुशाल सिंह राठौड़, देवचंद दैया, अमित कड़वासरा, जयप्रकाश सरावगी,राकेश बिश्नोई,रतनलाल चोपड़ा, लक्ष्मी नारायण मूंदड़ा, किशन स्वामी, मोहन पूनिया, महेंद्र नागर, संजय कामरा, नवनीत मुंजाल ,अशोक वशिष्ठ, पंकज सैनी, गौतम सिखवाल,जुबिन नारंग, नरेंद्र शर्मा, स्वामी विश्व हिन्दू धर्म प्रसार जिला अध्यक्ष अमित कपूर, राघव गुप्ता, संजय छाबड़ा, अमरपाल स्वामी, भारत- जाटोलिया, अभिमन्यु नायक, राजन वर्मा आदि मौजूद रहे। भगवान श्री राम की आरती की और आए हुए राम भक्तों ने अपनी अपनी सेवाएँ भी लिखवाई सभी ने एक स्वर में भगवान श्रीराम के जयघोष लगाए

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    मील परिवार ने किया विधानसभा चुनावों की तैयारियों का आगाज़

    सूरतगढ़। होली स्नेह मिलन के बहाने कांग्रेस के पूर्व विधायक गंगाजल मील ने मंगलवार को अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। पशु चिकित्सालय के पीछे खाली मैदान में हुए समारोह में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। कार्यक्रम में पहुंचने वाले लोगों की संख्या को लेकर लोगों में अलग-अलग मतभेद है। कुछ लोगों का मानना है कि कार्यक्रम में 4 से 5 हज़ार लोग पहुंचे। दूसरी ओर कांग्रेस से जुड़े नेताओं की माने तो कार्यक्रम में 8 से 10 हज़ार लोग उपस्थित रहे। हालांकि कार्यक्रम में उपस्थित लोगों की संख्या 5000 भी मान ली जाए तो यह संख्या कम नहीं है । इस दौर में जब आम आदमी जीवन की जद्दोजहद में ही व्यस्त है ऐसे समय में 5000 लोगों की उपस्थिति भी बहुत अच्छी मानी जाएगी।  

    मील परिवार ने शक्ति प्रदर्शन कर जताई दावेदारी

    कांग्रेस द्वारा आयोजित होली स्नेह मिलन कार्यक्रम को राजनीतिक हलकों में शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम में जुटी भीड़ के जरिए मील परिवार ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। विधानसभा चुनाव में लगातार दो हार के बाद कहीं ना कहीं ये लगने लगा था कि मील परिवार का राजनीतिक कैरियर खत्म होने वाला है लेकिन चुनाव के बाद इलाके में मील परिवार की सक्रियता और पहले नगरपालिका, फिर पंचायत चुनाव में मिली पार्टी की जीत ने मील परिवार के टूटती उम्मीदों को फिर से पंख दिए और मील परिवार ही कांग्रेस की टिकट के प्रमुख दावेदार के रूप स्थापित हो चुका था ।

    लेकिन बसपा से कांग्रेस में शामिल होने वाले डूंगरराम गेदर को गहलोत सरकार द्वारा शिल्प एंव माटी कला बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद हालात एक बार फिर बदल गए । उस पर सम्मान समारोह में गेदर ने भीड़ जुटाकर एक बार अपनी मजबूत दावेदारी का इशारा कर दिया। जिसके बाद से राजनीतिक हलकों में गेदर को विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट का प्रमुख दावेदार माने जाने की चर्चा शुरू हो गयी थी। गेदर की चर्चाओं के बीच मील परिवार ऊहापोह में था कि गेदर के शक्ति प्रदर्शन का जवाब किस तरह से दिया जाए ।

    होली ने यह मौका मिल परिवार को दे दिया । गेदर के शक्ति प्रदर्शन का जवाब देने के लिए मील परिवार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी । पूर्व विधायक गंगाजल मील, पंचायत समिति प्रधान हजारी राम मील और पीसीसी सदस्य हनुमान मील, नगर पालिका चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा सहित सभी खुद मैदान में उतरे और घर-घर जाकर लोगों को कार्यक्रम में पहुंचने का न्यौता दिया। कांग्रेस नेताओं की मेहनत का नतीजा रहा कि कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। जिसके चलते कहा जा सकता है कि कार्यक्रम कांग्रेस नेताओं की उम्मीद के मुताबिक सफल रहा ।

    गेदर की राह नहीं आसान

    राज्य सरकार द्वारा डूंगरराम गेदर को शिल्प एंव माटी कला बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाये जाने से भले ही इलाके में खासकर कांग्रेस की राजनीति में बदलाव होने की उम्मीद जगाई हो। लेकिन मील परिवार ने स्नेह मिलन के बहाने अपनी ताकत का प्रदर्शन करें यह साफ कर दिया है कि जो लोग उन्हें चूका हुआ मान रहे हैं वे गलतफहमी में है । शक्ति प्रदर्शन कर उन्होंने साबित कर दिया है कि मील परिवार एक बार फिर पूरी ताकत से विधानसभा सीट के लिए दावेदारी प्रस्तुत करेगा। ऐसे में मील परिवार के तेवरों को देखते हुए यह साफ जाहिर है कि गेदर के लिए भी आगामी विधानसभा चुनावों की टिकट लेने की राह आसान नहीं है।

    लगातार दो चुनावी हार के दाग को सुशासन से बदलने का वक्त

    आगामी विधानसभा चुनावों में करीब डेढ़ साल का ही वक्त बचा है। ऐसे में इलाके में सत्ता के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित मिल परिवार चाहे तो पिछली लगातार 2 हारों के दाग को सुशासन के जरिए धो सकता है। हालांकि वक्त बेहद कम है लेकिन फिर भी कोशिश की जा सकती है। इसके लिए सबसे पहले जरूरी है कि मील परिवार खासकर पूर्व विधायक गंगाजल मील अपने आसपास बैठे चापलूस किस्म के लोगों से किनारा करें। पूर्व विधायक गंगाजल मील के सरल स्वभाव को पसंद करने के बावजूद भी खुद कांग्रेस नेताओं का ही एक बड़ा तबका है जो मील परिवार से चापलूस किस्म के लोगों की वजह से खफा है। इन चापलूस और मतलबी किस्म के लोगों को दी जाने वाली इंर्पोटेंस ने एक बहुत बड़े तबके को मील परिवार से दूर कर दिया है। पूर्व विधायक गंगाजल मील या पीसीसी सदस्य हनुमान मील चाहे तो इस गंदगी को साफ कर पार्टी के वफादार लोगों को एक बार फिर अपने साथ जोड़ सकतें है।

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    सुरतगढ़ को मिला आचार्य श्री जयानंद जी महाराज के चातुर्मास का सौभाग्य

    सूरतगढ़। जैन आचार्य श्रीमद विजय जयानंद सुरीश्वर जी महाराज व गणिवर्य जय कीर्ति विजय जी महाराज सहित 5 जैन सन्तों ने मंगलवार को शहर में मंगल प्रवेश किया। इस मौके पर समाज के गणमान्य लोगों ने मुनि जनों का भव्य स्वागत किया। जैन संतो का काफिला पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होता हुआ पुराना बाजार स्थित जैन मंदिर पहुंचा। प्रवेश में सकल जैन समाज के काफी संख्या में लोग उपस्थित थे। इस दौरान यात्रा में आगे हाथ में जैन ध्वज लिए बालक बालिकाएं और उनके पीछे समाज की महिलाओं ने अपने सर पर कलश लिए हुए गुरुदेव का स्वागत किया। प्रवेश के दौरान मुनि जनों का जगह-जगह स्वागत सत्कार किया गया। गाजे बाजे के साथ जैन समाज के श्रद्धालु नाचते झूमते हुए गुरु भक्ति का आनंद लेते नज़र आये।

    श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर में पहुंचकर आचार्य श्री जयानंद जी महाराज ने मुनि मंडल व चतुर्वेदी संघ के साथ प्रभु की आराधना की।

    आचार्य श्री जयानन्द जी महाराज ने स्वीकारी चातुर्मास की विनती

    जैन उपाश्रय में धार्मिक सभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री जयानन्द विजय ने समाज की विनती को स्वीकारते हुए आगामी चतुर्मास सूरतगढ़ में करने की घोषणा की। इस घोषणा के साथ ही समस्त जैन समुदाय के लोगों के चेहरे पर खुशी की लहर छा गई। आचार्य श्री जयानंद सुरीश्वर जी महाराज ने कहा कि भक्त और गुरु का रिश्ता बहुत ही पवित्र होता है। भक्तों की इच्छा के आगे गुरु को भी नतमस्तक होना पड़ता है। क्षेत्र के लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए आचार्य श्री ने अपने लुधियाना प्रवास को निरस्त करते हुए इसी क्षेत्र में विचरण करने की घोषणा की।

    मुनिराज श्री जय कीर्ति विजय जी महाराज ने कहा कि आज सूरतगढ़ के लोगों में इतना उत्साह देखकर मन प्रफुल्लित हुआ। उन्होंने कहा कि जब कोई समाज कुछ ठान लेता है तो वह उसे पूरा कर गुजरने के लिए कुछ भी कर सकता है। उन्होंने बताया कि पानी की प्राप्ति के लिए गड्ढे को जितना गहरा खोदोगे उतना ही मीठा जल मिलेगा। मन में दृढ़ संकल्प के साथ भक्ति भाव के साथ प्रभु व गुरु की सेवा करना ही श्रावक का उत्तम धर्म होता है।

    गुरुदेव के स्वागत में हुए विभिन्न कार्यक्रम

    जैन सन्तो के आगमन के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में श्री आत्म वल्लभ जैन महिला मंडल व तरुणी महिला मंडल द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। इसके साथ श्री आत्म वल्लभ जैन नवयुवक मंडल द्वारा गुरुदेव को विनती स्वरूप गीत प्रस्तुत किया गया।मनन डागा, मंजू चोपड़ा, अंजना पटावरी, तारा बांठिया, ज्योति डागा द्वारा गुरुदेव के स्वागत में वक्तव्य भजन प्रस्तुत किए। श्री आत्म वल्लभ जैन बालक व बालिका मंडल द्वारा गीतिका नृत्य व लघु नाटिका की शानदार ढंग प्रस्तुत दी गई तो कन्या मंडल द्वारा नृत्य प्रस्तुत किया गया व भजन के माध्यम से गुरुदेव का स्वागत किया गया।

    वहीं श्री श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ के वरिष्ठ श्री पूनमचंद चोपड़ा, केसरी चंद्र डागा, विजय कुमार बैद, मदन डागा, भंवर लाल चोपड़ा की ओर से गुरुदेव को कांबली भेंट की गई। श्री मूर्तिपूजक जैन संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र चोपड़ा, पवन गोलछा, गुलशन डागा,सुशील सेठिया की ओर से सभी आगंतुक मेहमानों का स्वागत किया गया। सभा का सफल मंच संचालन प्रवीण डी जैन द्वारा किया गया।

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    मानकसर चौक पर कांग्रेस नेताओं से एनएसयूआई की दूरी बनी चर्चा का विषय

    सूरतगढ़। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा का मंगलवार को 22 एलजीडब्ल्यू बस स्टैंड पर शिल्प एवं माटी कला बोर्ड के उपाध्यक्ष डूंगरराम गेदर की अगुवाई में जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर काँग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष का साफा व मालाएं पहनाकर अभिनंदन किया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने माटी कला बोर्ड के उपाध्यक्ष डूंगरराम गेदर का भी जबरदस्त स्वागत किया। उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद पहली बार गांव में पहुंचे गेदर का बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने साफा व मालाएं पहनाकर नारेबाजी करते हुए स्वागत किया। पहुंचने पर गांव 22 एलजीडब्ल्यू में जोरदार स्वागत स्वागत किया।

    इस अवसर पर प्रदेश सचिव जियाउर रहमान आरिफ ,विशाल जांगिड़ और राजस्थान धरोहर सरंक्षण एवं संवर्धन प्रोन्नति न्यास के उपाध्यक्ष सांवरमल मेहरिया साथ थे। इसके अलावा स्थानीय लोगों में समाजसेवी ओमप्रकाश गेदर, जल उपभोक्ता समिति के अध्यक्ष आत्माराम गोदारा, अमरसिंह, जगदेव सिंह भुल्लर, भीखाराम नायक ,गणपतराम सुथार रामकुमार जागू ,रामकुमार गोदारा मुखराम सारण, जसविंदर गिल पृथ्वीराज झांझड़ा, बलराम पूनिया सहित कांग्रेसी कार्यकर्ता व सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति रहे।

    मानकसर चौराहे पर गंगाजल मील के नेतृत्व में हुआ डोटासरा का स्वागत

    इससे पहले पीसीसी चीफ डोटासरा का मानकसर चौराहे पर भी जोरदार स्वागत किया गया । पूर्व विधायक गंगाजल मील के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता डोटासरा का स्वागत करने के लिए पहुंचे। पूर्व विधायक मील ने गोविंद सिंह डोटासरा का माला पहनाकर अभिनंदन किया। कार्यकर्ताओं के उत्साह को देखकर गोविंद सिंह डोटासरा अपनी गाड़ी पर ही खड़े होगे और कार्यकर्ताओं का अभिनंदन स्वीकार किया। इस अवसर पर पीसीसी सदस्य हनुमान मील, कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष परसराम भाटिया, नगरपालिका चेयरमैन मास्टर ओमप्रकाश कालवा, पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल,पार्षदपति धर्मदास सिंधी, पार्षद भारत भूषण शर्मा, नितिन मोटियार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी मोजुद रहे।

    स्वागत कार्यक्रम में एनएसयूआई के छात्रों के अलग थलग दिखने से खड़े हुए सवाल

    मानकसर चौराहे पर कांग्रेसी नेताओं द्वारा पीसीसी चीफ के स्वागत के दौरान एनएसयूआई के छात्र दूरी बनाते दिखे। छात्र नेता सुनील सियाग के नेतृत्व में छात्र कांग्रेस नेताओं से दूरी बनाकर नारेबाजी करते दिखे। जहां पार्टी के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यकर्ता नारेबाजी कर रहे थे। वहीं कुछ ही दूरी पर एनएसयूआई के छात्र भी पूरी ताकत से नारेबाजी कर खुद को अलग दिखाने का प्रयास कर रहे थे। छात्रों ने भी प्रदेशाध्यक्ष को माला पहनाई और डोटासरा जिंदाबाद के नारे लगाए। इस पूरे घटनाक्रम के लब्बोलुबाब की बात करें तो लगता यही है कि छात्र संघटन अपने नेताओं से सम्भवत नाराज है । हालांकि इसकी वजह अभी तक सामने नहीं आई है।

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    नामांतरण के लिए धरना देने को हुए मजबूर हुए कांग्रेसी नेता

    क्या चैयरमेन ओमप्रकाश कालवा कर पाएंगे व्यवस्था सुधार ?

    सूरतगढ़। नगरपालिका में भूखंडों के नामांतरण के लिए भूमि शाखा के बाबू किस तरह से चक्कर कटवाते हैं इसकी बानगी सोमवार सुबह देखने को मिली। जब कांग्रेस नेता गुरदर्शन सिंह सोढ़ी ने दर्जनों चक्कर काटने के बाद भी नामांतरण नहीं करने पर नगरपालिका में धरना लगा दिया। अपने खाली भूखंड के नामांतरण के लिए सोढ़ी पिछले लंबे समय से पालिका के चक्कर काट रहे थे। लेकिन भूमि शाखा में बैठे बाबू जो खुद को नगरपालिका का सर्वेसर्वा समझ बैठे हैं, आखिर किसी को कैसे न्याय देते ! सो उन्होंने कांग्रेस नेता को ही चक्करघिन्नी बना दिया। भूमि शाखा के इन बाबूओं के बहानों से आजिज कांग्रेस नेता ने आखिरकार धरना लगा दिया। हालांकि धरने की सूचना मिलने पर चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा व कई पार्षद मौके पर पहुंचे और समझाइश कर सोढी को धरने से उठाया। इस दौरान कांग्रेस नेता ने पूर्व विधायक गंगाजल मील को भी मामले की जानकारी देते हुए भूमि शाखा के बाबूओं की कारगुजारी की पोल खोल दी।

    बताया जा रहा है कि बाद में पूर्व विधायक ने कांग्रेस नेता सोढ़ी, पालिकाध्यक्ष और भूमि शाखा के बाबूओं को घर पर बुलाया। जहां पर पूर्व विधायक मील ने बाबूओं की तगड़ी क्लास लगाई। पूर्व विधायक की डांट के असर से भूमि शाखा के निठल्ले बाबू हरकत में आए और कांग्रेस नेता के भूखंड नामांतरण की फाइल को पर लग गए। लेकिन सवाल ये पैदा होता है कि पूर्व विधायक ने कांग्रेस नेता की पीड़ा तो महसूस कर ली लेकिन उन्हें अब तक आम आदमी की पीड़ा क्यों नहीं महसूस हुई। जबकि पिछले कई सालों से शहर का हर आम आदमी भूमि शाखा के इन बाबुओं के शोषण का शिकार बन रहा था। सवाल ये भी है कि पूर्व विधायक ने इन बाबुओं को जो सबक दिया है वह केवल नेताओं के मामले में ही काम करेगा या फिर ये बाबू आम जनता को भी न्याय देंगे।

    पूर्व ईओ लालचंद सांखला के समय बिगड़ी व्यवस्था

    नगरपालिका की भूमि शाखा में लालचंद सांखला के ईओ के रूप में कार्यभार ग्रहण करने से पहले पालिका के पुराने व सीनियर कर्मचारी भूमि शाखा का काम देखते थे। ये सीनियर कर्मचारी ईमानदार होने के साथ- साथ शहर के हर आम और खास आदमी से परिचित भी थे । जिसके चलते भूमि शाखा में नामांतरण सहित दूसरे कामों के लिए आने वाले लोगों को संतुष्टि पूर्ण जवाब मिलता था। लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते तड़ीपार किए गए लालचंद सांखला की कांग्रेस नेताओं ने ना केवल नगरपालिका में वापसी करवाई, बल्कि ईओ का चार्ज दिलवाकर सर्वेसर्वा बना दिया। जिसके बाद पूर्व ईओ सांखला ने पालिका की सभी शाखाओं के पुराने व सीनियर कर्मचारियों को हटाकर कम महत्वपूर्ण सीटों पर लगा दिया और इनकी जगह सूबे की दूसरी नगरपालिकाओं में भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात जूनियर कर्मचारियों को लगाकर सर्वे सर्वा बना दिया। जिससे कि जनता का खून चूसने की मुहिम को आराम से पूरा किया जा सके।

    हालांकि ईओ सांखला रिटायर होकर घर जा चुके हैं लेकिन उनके लाये हुए चिंचड़ पालिका की विभिन्न शाखाओं में अभी भी चिपके हुए हैं और बेरहमी से आम आदमी का खून चूसे जा रहे हैं।

    सफाई कर्मचारियों को भी बनाया बाबू

    पूर्व ईओ लालचंद सांखला ने एक तरफ दूसरे जिलों से लाकर भ्रष्टाचारियों को भूमि शाखा सहित विभिन्न विभागों में पद स्थापित किया। वहीं उन्होंने पालिका की भूमि शाखा में अपने चहेते सफाई कर्मचारियों को अटैच कर दिया। जिन लोगों को झाड़ू पकड़ाकर शहर की सफाई करवानी थी उन लोगों को कलम पकड़ा दी। जैसा कि किसी शायर की पंक्तियां है कि ‘बरसात में अक्सर तालाब हो जाते हैं कमजर्फ, ठीक उसी तरह से इन सफाई कर्मियों पर कलम की ताकत का नशा चढ़ गया और इन्होंने अपने नशे को भूमि शाखा में आने वाले आम आदमी पर उतरना शुरू कर दिया। यही वजह है अब नगरपालिका की भूमि शाखा के चर्चे पूरे सूबे में है।

    दिनभर भूमाफियों और दलालों के होते हैं काम, आम आदमी को नही मिलता न्याय !

    नगरपालिका की भूमि शाखा में दिन भर भू-माफिया और दलाल किस्म के लोग डेरा डाले रहते हैं। इन दो नंबरी लोगों से मिलने वाले कमीशन के चक्कर में भूमि शाखा के बाबू दिन भर इन लोगों की जी हुजूरी में लगे रहते हैं। क्योंकि इन सफेदपोश लोगों को अपने काले कारनामों को कागजों में सफेद करवाना होता है इसलिए वे इन बाबुओं को मुंह मांगा कमीशन देते हैं। जब काम करने के पैसे मिल रहे हो तो फिर इन बाबुओं को फ्री में काम करने का मन क्यों करेगा। नतीजा आम आदमी अपने सही काम के लिए भटकता रहता है । भले ही उसकी चप्पल घिस जाए पर उसका काम नहीं होता।

    इसकी एक वजह ओर भी है क्योंकि सत्ता का स्वाद ले रहे जिम्मेदार लोग इन बेलगाम घोड़ों की लगाम सही ढंग से नहीं कस पा रहे है जिसकी वजह से इन बेलगाम घोड़ों ने घास की जगह अमीरों के चने खाना शुरू कर दिए है। ऐसे में ये बदमस्त घोड़े आम आदमी को लात ही तो मारेंगे।

    पूर्व विधायक राजेन्द्र भादू से सबक लेने की जरूरत

    सत्ता पक्ष के कांग्रेस नेताओं को यूं तो राजनीति का लंबा अनुभव है फिर भी जब बात नगरपालिका की करें तो पूर्व विधायक राजेंद्र भादू से कांग्रेस नेता सबक ले सकते हैं। विधायक बनते ही राजेंद्र भादू ने दूरगामी निर्णय लेते हुए नगरपालिका में जमे हुए भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात बाबूओं को भी एक के बाद एक बाहर का रास्ता दिखा दिया। जिनमे से वर्तमान कांग्रेस सत्ता द्वारा बाबू से ईओ बनाये गए लालचंद सांखला भी एक थे। भादू ने इन भृष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को नगरपालिका के आस पास 5 साल तक फटकने भी नही दिया।

    राजेंद्र भादू के इस दूरगामी निर्णय का प्रभाव यह रहा कि उनके कार्यकाल में भूमि शाखा में कम से कम भ्रष्टाचार का ऐसा नँगा नाच नही हुआ। हालांकि भ्रष्टाचार पूरी तरह से खत्म हो गया यह भी नहीं कहा जा सकता। लेकिन फिर भी इस बात के लिए राजेंद्र भादू को शहर के जनता शुक्रिया कर सकती है की उन्होंने महाभ्रष्ट कर्मचारियों को तड़ीपार करने का साहस दिखाया।

    कैसे होगा व्यवस्था में सुधार

    इस पूरे प्रकरण के बाद पूर्व विधायक गंगाजल मील और चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा ने व्यवस्था में सुधार की बात कही है। चेयरमैन कालवा ने कहा है कि भविष्य में नामांतरण के लिए फाइल जमा होने के समय रसीद देने की व्यवस्था की जाएगी। जिससे कि नामांतरण संबंधी काम समय पर पूरा नही होने पर बाबू की जिम्मेदारी तय की जा सके। लेकिन ये व्यवस्था कारगर हो पाएगी इसमें संदेह है क्योंकि जब तक इन विभागों में लगी दीमक को साफ नहीं किया जाएगा तब तक सुधार की गुंजाइश कम है।

    पूर्व विधायक गंगाजल मील, युवा हनुमान मील और चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा वास्तव में जनता के हमदर्द है तो उन्हें तत्काल इन शाखाओं में बैठे भ्रष्ट और नाकारा बाबूओं को हटाकर पालिका के सीनियर व ईमानदार कर्मचारियों को बिठाना चाहिए। वरना जनता वोट के समय चोट कर आपकी गलतियों को याद कराने से नही चुकेगी। मर्जी आपकी है क्योंकि भविष्य भी आपका है। खैर छोड़िए ऊपर हमने किसी शायर की जो पंक्तियां लिखी हैं वे अधूरी है आप बस इस पूरे शेर का मजा लीजिये। 

    बरसात में अक्सर तालाब हो जाते हैं कमजर्फ।

    मगर आपे से बाहर कभी समंदर नहीं होता।।

    -राजेन्द्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब सूरतगढ़।

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    नाम लिए बगैर स्थानीय कांग्रेस नेताओं पर साधा निशाना

    टीसी पैराफेरी जमीनों की खरीद के लगाए आरोप

    सुरतगढ़। सूरतगढ़ में शहरी क्षेत्र में टीसी कृषि भूमि की खातेदारी का मामला एक बार फिर गरमा गया है। विधानसभा में बजट सत्र में बोलते हुए शुक्रवार को विधायक रामप्रताप कासनिया ने इस मामले में सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि भूमाफिया लोग गरीब किसानों से टीसी भूमि ओने पौने दामों में खरीद कर खातेदारी करवा रहे हैं। जबकि आम किसानों को खातेदारी नहीं दी जा रही है। उन्होंने टीसी भूमि के आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि राजस्थान में आज तक जब भी कृषि भूमि का आवंटन हुआ है तो आवंटन कमेटी में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाता है। उन्होंने कहा कि लेकिन इस मामले में विधायक को छोड़िए स्थानीय कांग्रेस के भी किसी जनप्रतिनिधि को शामिल नहीं किया है। इस मामले में उन्होंने स्थानीय कांग्रेस नेताओं पर नाम लिए बगैर संगीन आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के 2-3 नुमाइंदों ने सैंकड़ों बीघा टीसी जमीन खरीदी है जिसकी खातेदारी मिलीभगत कर जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार चाहे तो वे उनके नाम भी बता सकते हैं। उन्होंने कहा कि पैराफेरी बहुत बड़ा कलंक है यह हेराफेरी हैं ‘।

     
    कासनिया के निशाने पर कौन ?

    शहर के पैराफेरी क्षेत्र में टीसी भूमि की खातेदारी के मामले में विधानसभा में विधायक कासनिया के आरोपों के बाद कई सवाल खड़े हो गए है। कासनिया ने नाम न लेते हुए सरकार के नुमाईंदों पर सैकड़ों बिघा टीसी भूमि खरीदने का खुलासा किया। हालांकि कासनिया ने नाम नहीं लिया लेकिन वर्तमान में मील परिवार ही इलाके में कांग्रेस व सरकार की नुमाइंदगी कर रहा है। ऐसे में क्या यह मान लेना चाहिए कि कासनिया का सीधा सीधा आरोप मील परिवार पर है ? अगर ऐसा है तो यह काफी गंभीर आरोप है ! क्योंकि शहर में अतिक्रमनो और भूमाफियाओं के बढ़ते प्रभुत्व को देखते हुए पहले ही मिल परिवार की राजनीतिक प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। पिछले कुछ सालों में शहर में नेशनल हाईवे सहित शहर की विभिन्न बेशकीमती संपत्तियों पर एक के बाद एक भू माफिया और मिल परिवार की चापलूसी कर रहे छुटभइयों ने कब्जा कर लिया। अपनी राजनीतिक छवि के नुकसान के बावजूद मिल परिवार ने इन मामलों में चुप्पी साधे रखी। जिससे कहीं न कहीं इन मामलों में मील परिवार की संलिप्तता का मैसेज भी जनता में गया।

    अब एक बार फिर अप्रत्यक्ष ही सही कासनिया के आरोपों ने इस मामले को गरमा दिया है। राजनीति में नेताओं की छवि बहुत मायने रखती है। हालांकि पूर्व विधायक गंगाजल मील की छवि सीधे व्यक्ति की हैं लेकिन चापलूसों से घिरे रहने के चलते पूर्व विधायक अपनी छवि को बेदाग नही रख पाए है। क्यों कि अब मील परिवार का राजनीतिक भविष्य हनुमान मील है। अपने भविष्य को देखते हुए अब इन चापलूसों ने हनुमान मील को शीशे में उतारने की कोशिश शुरू कर दी है। ऐसे में देखना होगा कि वे इन अप्रत्यक्ष आरोपों पर क्या जवाब देते हैं और इन चापलूसों से किस प्रकार निपटते है। वैसे राजनीतिक जीवन जी रहे लोग किसी शायर की इन पंक्तियां से सीख ले सकतें है।

    दामन अगर है साफ तो खास एहतियात रख।

    इससे जरा भी दाग छिपाया न जाएगा ।।

    विधायक कासनिया ने उठाई सूरतगढ़ को जिला बनाने सहित विभिन्न मांगे

    विधायक रामप्रताप कासनिया ने शुक्रवार को विधानसभा के बजट सत्र में इलाके की कई समस्याएं भी उठाई। विधायक कासनिया ने बजट को ‘हाथी का दांत’ बताते हुए निशाना साधा। विधायक कासनिया ने आवारा पशुओं की समस्या, सूरतगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को जिला या उप जिला स्तर में क्रमोन्नत करने, सूरतगढ़ राजकीय महाविद्यालय में विभिन्न विषयों का संचालन करने तथा महाविद्यालय की चार दिवारी का निर्माण करवाने, पेराफेरी क्षेत्र में लगे रहो राइडरों को हटाकर काश्तकारों को खातेदारी देने की मांग की। इंदिरा गांधी नहर परियोजना के जैसलमेर में सरकार द्वारा पक्के खाले बनाने की घोषणा को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि खालो को पक्का करने का काम जैसलमेर के बजाय इंदिरा गांधी नहर की प्रथम चरण में करवाया जाए तो इससे किसानों को और सरकार को ज्यादा फायदा मिलेगा।

    कासनिया ने अपने भाषण में सूरतगढ़ को जिला बनाए जाने व जैतसर पीएचसी को सीएचसी में क्रमोन्नत करने तथा जैतसर ग्राम पंचायत को नगरपालिका में क्रमोन्नत करने तथा किसानों को पूरी बिजली देने व संविदा कर्मियों को नियमित करने सहित अन्य मांगों को सदन पटल पर पुरजोर तरीके से रखा।

    शहर के किसी भी नेता ने नही उठाई इलाके की मांगे !

    विधानसभा के बजट सत्र में जहां विधायक रामप्रताप कासनिया ने सूरतगढ़ को जिला बनाने सहित विभिन्न मांगों को पुरजोर से रखा। वहीं दूसरी ओर गंगाजल मील व हनुमान मील सहित किसी भी अन्य पक्ष या विपक्ष के नेता ने बजट में सूरतगढ़ की कोई भी मांग नहीं उठाई। जबकि कई दिनों से सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग सोशल मीडिया पर लगातार उठ रही थी। इस मांग पर भी स्थानीय नेताओं ने एक पत्र भी मुख्यमंत्री को लिखने की जहमत नहीं उठाई। जबकि कांग्रेस के 1-2 नेता जयपुर में हुई बजट से पूर्व की बैठकों में इलाके के प्रतिनिधियों के रूप में पहुंचे थे। लेकिन सूरतगढ़ के लिए उन्होंने कोई मांग इन मीटिंग में रखी हो ऐसी कोई जानकारी मीडिया में नहीं आई।

    इलाके की मांगे पूरी हो या नहीं लेकिन अगर यह जनप्रतिनिधि इलाके की समस्याओं को मुख्यमंत्री तक पहुंचाते तो निश्चित तौर पर जनता को लाभ होता वही इन नेताओं के कद में भी इजाफा होता।

    -राजेन्द्र पटावरी, उपाध्यक्ष, प्रैस क्लब

     

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    बिना बहस चैयरमेन कालवा ने पास करवाया 151 करोड़ का बजट

    सदन में पार्षद हरीश दाधीच व राजीव चौहान ने किया विरोध

    सूरतगढ़ । नगरपालिका बोर्ड में शहर के लोगों ने भले ही भाजपा के 12 पार्षदों को चुनकर भेजा हो पर सोमवार को हुई नगरपालिका की बजट बैठक में 12 की जगह 2 ही पार्षद नज़र आये। बैठक के दौरान वार्ड नंबर 39 के पार्षद हरीश दाधीच ने अपने साथ लायी तख्तियों को दिखाकर ढाब की सफाई और भगतसिंह चौक से रेलवे स्टेशन तक टूटी सड़क का मुद्दा उठाया । अपने इन मुद्दों पर सदन का ध्यान दिलाने के लिए वे बाकायदा स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर सदन में पहुंचे थे। जिसके बाद पार्षद दाधीच और कांग्रेस सदस्यों के साथ नोंक झोंक शुरू हो गयी । इस बीच सदन में मौजूद राष्ट्रवादी पार्टी के पार्षदों को साँप सूंघ गया सिवाय वार्ड -34 के पार्षद राजीव चौहान के । पार्षद राजीव चौहान ने पार्षद दाधीच का साथ देते हुए आवाज उठाई। लेकिन नक्कारखाने खाने में तूती की तरह दोनो पार्षदों की आवाज दबकर रह गयी।

    वैसे पार्षद हरीश दाधीच और राजीव चौहान ने आवाज अगर उठाई भी तो इसकी वजह उनकी खुद की पीड़ा थी। वरना पिछली बैठक में उनकी चुप्पी भी सबको याद है। कुल मिलाकर इस बैठक में चैयरमेन ओमप्रकाश कालवा 151 करोड़ से ज्यादा का बजट बिना किसी बहस पारित करवाने में सफल हो गए जो कि एक बड़ी उपलब्धि ही कही जाएगी।

    बजट का यशोगान करते नज़र आये भाजपा पार्षद

    कहां तो उम्मीद की जा रही थी कि बजट बैठक हंगामेदार रहेगी। क्योंकि भाजपा के पार्षद शहर में सफाई व सीवरेज सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष को घेरेंगे। लेकिन बोर्ड मीटिंग में दूसरा ही नजारा देखने को मिला। बजट का विरोध करने के बजाय भाजपा पार्षद बजट का यशोगान करते नजर आए। भाजपा के महिला पार्षदों की अगुवाई कर रही एक महिला जनप्रतिनिधि जो बैठक से ठीक पहले भाजपा की महिला पार्षदों को जोर शोर से वार्डों की समस्याएं उठाने का पाठ पढ़ा रही थी, सबसे पहले गिरगिट की ही मात देती दिखाई दी। पार्टी अध्यक्ष द्वारा दिये गए पराउंट को भूलकर इस जनप्रतिनिधि ने बजट के प्रति अपना प्रेम उड़ेल दिया। वैसे इस जनप्रतिनिधि के पति  पिछले भाजपा बोर्ड में एक बड़े सुरा ठेकेदार के मार्फ़त हुई 5 पैकेट की डील के बाद आंखों में काजल लगाए रखने को रखने को लेकर चर्चा में रहे थे। चर्चा ये भी है कि काजल बेचने वालों के वादे पर खरे नही उतरने के चलते ठेकेदार को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था।

    खैर क्योंकि मौका स्वामीभक्ति सिद्ध करने का था तो भाजपा पार्षद भी पीछे क्यों रहते। एक अन्य पार्षद कम ठेकेदार ने भी गोल मोल तरीके से बजट की प्रशंसा कर पार्टी धर्म को भुलाकर भक्ति का प्रदर्शन किया। तो कल तक एक भाजपा नेता को भगीरथ की संज्ञा देने वाले और चरण वंदना के लिए कुख्यात कांग्रेस के एक मनोनीत पार्षद भी कब पीछे रहने वाले थे । सो उन्होंने भी अपने चिरपरिचित अंदाज़ में बजट का यशोगान कर बजट मीटिंग में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

    अध्यक्ष जी का पाठ नहीं रहा याद..

    नगरपालिका बोर्ड की सोमवार को हुई बैठक से पहले दिन यानि रविवार को भाजपा नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा की अध्यक्षता में पार्षदों की बैठक हुई थी। इस बैठक में अध्यक्ष ने बजट बैठक में शहर की सफाई, सीवरेज व अन्य समस्याओं को लेकर बैठक में आवाज उठाने को कहा। उन्होंने पार्टी पार्षदों को पार्टी धर्म की घुट्टी पिलाई और विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए कहा। लेकिन सोमवार को जब भी पार्षद बजट बैठक में पहुंचे तब तक अध्यक्ष जी द्वारा याद कराया गया पार्टी धर्म का पाठ अधिकांश पार्षद भूल चुके थे। वैसे अध्यक्ष जी की कोशिश सियारों को शेर की खाल पहनाने की थी जो कामयाब नही हो सकी । बहरहाल इस तरह के लोगों को देखकर ही किसी शायर को ये पंक्तियां लिखने का खयाल आया होगा।


    कोहनी पर टिके हुए लोग, टुकड़ों पर बिके हुए लोग!

    करते हैं बरगद की बातें,ये गमले में उगे हुए लोग !! 

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    कहा ‘शिल्प एंव माटी कला को सरंक्षित व प्रोत्साहित करने का करूँगा प्रयास’

    सूरतगढ़। कांग्रेस नेता और राजस्थान शिल्प एवं माटी कला बोर्ड के नव मनोनीत उपाध्यक्ष डूंगरराम गेदर ने शनिवार कल जयपुर में उद्योग भवन स्थित माटी कला बोर्ड कार्यालय में पदभार ग्रहण किया । इससे पहले गेदर के माटी कला बोर्ड कार्यालय पहुंचने पर विभाग के अतिरिक्त निदेशक एस. एस. शाह, उद्योग एवं कार्यकारी अधिकारी मनोज पारीक, सहायक प्रशासनिक अधिकारी आशीष शर्मा, प्रशासनिक अधिकारी प्रहलादराय कुमावत और अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों ने माला पहनाकर स्वागत किया ।

    इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी राजस्थान के मुख्यालय प्रभारी ललित तुनवाल, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव मुकेश वर्मा कुमावत ,ऑल इंडिया बैकवर्ड क्लास फेडरेशन के प्रदेशाध्यक्ष छोटूराम बड़ीवाल सहित प्रबुद्घ जनों ने गेदर का पुष्प गुच्छ व माला पहनाकर अभिनंदन किया ।

    गेदर ने कर्मचारियों से परिचय कर समझी बोर्ड की कार्यप्रणाली

    बोर्ड उपाध्यक्ष का कार्यभार संभालने के बाद गेदर ने अधिकारियों और कर्मचारियों से परिचय व कार्य के बारे में जानकारी ली। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिल्प एवं माटी कला बोर्ड का कार्य बहुत ही महत्वपूर्ण है जो जनमानस से जुड़ा हुआ है और दस्तकार जातियों के जीवन की महत्वपूर्ण कड़ी है। गेदर ने कहा कि हमें पूर्ण जिम्मेदारी व सतर्कता से कार्य करते हुए मुख्यमंत्री जी की भावना के अनुरूप शिल्प एवं माटी कला संस्कृति को संरक्षित व प्रोत्साहित करना है । इस अवसर पर उन्होंने विभाग से जुड़ी कार्यप्रणाली के बारे में भी जाना।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व अन्य नेताओं का जताया आभार

    इससे पूर्व आज गेदर ने राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, सार्वजनिक निर्माण विभाग मंत्री भजन लाल जाटव, नवनियुक्त जन अभाव अभियोग निराकरण समिति के अध्यक्ष पुखराज पाराशर, राजस्थान पर्यटन एवं विकास निगम के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ के निवास पर जाकर उनसे भेंट की और राजस्थान शिल्प एवं माटी कला बोर्ड की जिम्मेदारी प्रदान करने हेतु आभार व्यक्त किया।

    बाबा साहब अंबेडकर के स्मृति स्थल पर किया माल्यार्पण

    पदभार ग्रहण करने के उपरांत डूंगरराम गेदर ने महात्मा ज्योतिबा फुले संविधान संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के स्मृति स्थल पर पहुंच कर माल्यार्पण कर महापुरुषों को याद किया। पदभार ग्रहण के अवसर पर राजस्थान प्रदेश से पधारे सामाजिक कार्यकर्ताओं, समाजसेवियों, पार्टी से जुड़े हुए युवा कार्यकर्ताओं सोशल मीडिया के पदाधिकारियों का गेदर ने आभार जताया।

    गेदर के साथ ये रहे उपस्थित

    इस अवसर पर समाजसेवी कालूराम लिंबा,डॉ. गौरीशंकर निमिवाल, एडवोकेट इंद्राराम प्रजापत,शेरगढ़, पीसीसी प्रदेश सचिव जसवंत गुर्जर, पार्षद राजेश बालोदिया, प्राध्यापक चंपालाल कुमावत ,मिठ्ठन कुमावत डॉ. ललित जालवाल, अनुभव चंदेल,अजय सैनी,अनिता सैनी, कैलाश सैनी, ओमप्रकाश कुमावत गोविंद कुमावत,रामदयाल कुमावत ,श्रवण सिंघाटिया, दिनेश प्रजापति राजाखेड़ा, अजीत सिंह शेखावत , विनोद प्रजापति, शुभम् राजोरिया, पंकज सिंगोदिया, राहुल सैनी ,सावन शर्मा, अभिषेक सैनी, अंशु प्रजापत, संदीप सैनी सुरजन मीना ,विश्राम प्रजापति ,यश नोखवाल, अजय मारवाल सीकर, कुलदीप कुमावत सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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    सुरतगढ़। अच्छी भली चल रही व्यवस्था को डिस्टर्ब करने का काम कुछ नेता करते रहते हैं। सरकारी कार्यालयों में बरसों से चल रहा शिष्टाचार इन लोगो से बर्दास्त नही होता हैं। बस सनक चढ़ गई तो लग गए व्यवस्था को बिगाड़ने। हम बात कर रहे हैं रायसिंहनगर विधायक बलवीर लूथरा की। नेताजी पिछले दिनों विजयनगर के उपपंजीयक कार्यालय में चल रहे शिष्टाचार पर उखड़ गए। नेताजी से ये बर्दाश्त नही हुआ कि उनके समर्थक से सरकारी बाबुओं ने बरसों से चली आ रही परंपरा को निभाने के लिए कह दिया। बस फिर क्या था बिफर गए नेताजी । नेताजी ये भूल गए कि उनके राज में आम जनता भी तो उसी परंपरा का निर्वाह कर रही हैं। वैसे भी बाबू तो ठहरे सरकारी सो नियमों के साथ परंपराओं की भी पूरी जानकारी रखते हैं और फिर लंबे समय से परंपराओं का निर्वाह करते हुए इतने रिजिड हो चुके हैं कि वे गरीब अमीर में फर्क नहीं करते, छोटे बड़े में फर्क नहीं करते। फिर आम जनता को भी तो कोई फर्क नही पड़ता हैं,काम करवाने के लिए शगुन का लिफाफा हाथ मे लिए हमेशा तैयार रहती है। 

    खैर बलवीर लूथरा ठहरे भाजपा विधायक और वैसे भी विपक्ष का तो काम ही होता है व्यवस्था को चुनौती देने का। सो उन्होंने बाबुओं की क्लास लगा दी। फिर क्या था बेचारे बाबुओं को माफी तो मांगनी पड़ी ही साथ ही साथ शिष्टाचार में लिया गया शगुन भी लौटाना पड़ा। इस अवसर पर बाबुओं की अंतरात्मा रो रही थी। वैसे सवाल ये भी है कि आखिर विधायक बनने के 3 साल बाद नेताजी को ये ज्ञान हुआ कि उपपंजीयक कार्यालय के बाबू शिष्टाचार का पालन करवाने को लेकर बेहद शख्त है।
    खैर बलवीर लूथरा के इस कारनामें की चर्चा जिले भर में हो रही है। लेकिन अच्छी बात ये है कि सूरतगढ़ के नेताओं को बनी बनाई व्यवस्था को बिगड़ना बिल्कुल पसंद नहींं है चाहेेे वह नेता किसी भी पार्टी का हो। सरकारी कार्यालयों में शिष्टाचार का पालन करवाने वाले बाबू के साथ ऐसा व्यवहार आखिर कौन पसंद करेगा, हमारे नेता तो बिल्कुल भी नही । वैसे ईश्वर का शुक्र कहें या फिर यहां की जनता की किस्मत । पिछले 20 सालों में इस शहर को एक भी ऐसा नेता नहीं मिला है जोकि जो की इस व्यवस्था के खिलाफ हो। सब रजिस्ट्रार कार्यालय में दस्तावेजों के पंजीयन पर एक परसेंट का शगुन यहां भी बरसों से वसूला जा रहा है। लेकिन क्या मजाल कि हमारा कोई भी नेता इस पर सवाल खड़ा कर दें। 

    कुल मिलाकर सरकारी कार्यालयों में शिष्टाचार को भ्रष्टाचार मानने वाले वे लोग जो हमारे किसी नेता से बलवीर लूथरा बनने की मेरा उम्मीद पाले हुए हैं उनका इंतजार खत्म होने वाला नहीं है। यूूं भी तो इस शहर केे सभी नेता ‘अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता’ के स्लोगन को मानने वालेेे लोग हैं। इसलिए यहां इस व्यवस्था को हाल फिलहाल कोई खतरा कम से कम मुझेे तो नजर नहीं आ रहा। इसलिए मेरी माने तो सब रजिस्टार कार्यालय में जानेेे से पहले पॉकेट में एक परसेंट के हिसाब से शगुन का लिफाफा जरूर रख ले। क्यों कि आपने अपना वोट शिष्टाचार का पोषण करने वाले नेताओं को दिया है किसी अराजक बलवीर लूथरा को नहीं !

    -राजेन्द्र पटावरी,

    मोब.- 9928298484
             9782696700

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    फ्लाईओवर की घोषणा से कहीं खुशी कहीं गम

    सूरतगढ़। शहर के इंदिरा सर्किल पर फ्लाईओवर बनने जा रहा है। इस फ्लाईओवर बनने से शहर के लोग खुश भी हो सकते हैं और निराश भी। खुश इसलिए हो सकते हैं कि फ्लाईओवर के बनने से शहर में भारी वाहनों का प्रवेश नहीं होगा। जिससे भारी वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आएगी,खासकर इंदिरा सर्किल के आसपास के क्षेत्र में। लेकिन दोनो तरफ दीवारों के डिज़ाइन वाला यह फ्लाईओवर आपको निराश भी करता है। क्यों कि इस तरह का फ्लाईओवर शहर को दो हिस्सों में बांट देगा। हाईवे के दक्षिण दिशा में स्थित वार्डों के लोगों को बाजार, हॉस्पिटल,पुलिस थाने, तहसील और नगरपालिका जैसे सरकारी कार्यालयों में आने जाने के लिए असुविधा होगी। हालांकि धानमंडी के दक्षिणी गेट के पास व हाउसिंग बोर्ड को खेजड़ी मंदिर से जोड़ने वालेे मोड़ पर दो अंडरपास के बनेंगे, जो इन दोनों हिस्सों को जोड़ने का काम करेंगे। वैसे देखा जाए तो हाईवे पर पहले से ही बन रहे दीवारों वाले ओवरब्रिज की वजह से पहले ही शहर दो हिस्सों में बंट चुका है। इंदिरा सर्कल का कुछेक हिस्सा ही इन वार्डो को शहर से जोड़ रहा था जो अब फ्लाईओवर के बनने से कट जाएगा। हालांकि जिस उद्देश्य के लिए नेशनल हाईवे पर ओवरब्रिज का निर्माण करवाया जा रहा है वह उद्देश्य इंदिरा सर्किल पर फ्लाईओवर या ओवरब्रिज बनाए बगैर पूरा नहीं हो सकता। बहरहाल औचित्यहीन और शहर को दो हिस्सों में बांटने वाले ओवरब्रिज के लगातार चल रहे निर्माण पर चुप रहने वाले राजनीतिज्ञों को फिलहाल इंदिरा सर्किल पर ओवरब्रिज की घोषणा ने राजनीति करने का नया मुद्दा दे दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और तेज़ होने की उम्मीद है।

    हाइवे पर ओवरब्रिज से फ्लाईओवर बनने का सफर

    हाइवे पर वर्तमान में बन रहा ओवरब्रिज प्रारम्भ में इंदिरा सर्किल से बीकानेर रोड़ स्थित कमल होटल से शुरू होकर इंदिरा सर्किल होते हुए सूरतगढ़ पीजी कॉलेज तक बनना था। लोगों का आरोप है कि पुराने नक्शे के अनुसार ओवरब्रिज बनने से इंदिरा सर्किल पर स्थित कुछ प्रभावशाली लोगों के होटल व दुकानें प्रभावित होती। जिसकी वजह से इन प्रभावशाली लोगों के दबाव में पूर्व चेयरमैन काजल छाबड़ा और विधायक राजेंद्र भादू ने निर्माण कंपनी पर ओवरब्रिज को कमल होटल के स्थान पर नई धान मंडी के दक्षिणी गेट से शुरू करने के लिए दबाव बनाया। जिसके बाद निर्माण कंपनी ने ओवरब्रिज का नक्शा बदल दिया और इस नक्शे के अनुरूप परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ओवरब्रिज का शिलान्यास कर दिया।

    लेकिन जब ओवरब्रिज का निर्माण शुरू हुआ है तब नेशनल हाईवे के दक्षिण दिशा में बसे आधा दर्जन वार्डों के लोगों को शहर में आने जाने में परेशानी होना शुरू हो गयी है। दूसरे लोगों को लगा कि दोनो तरफ दीवारों वाले ओवरब्रिज बनने से वे शहर से कट जाएंगे। निर्माण कंपनी ने आवागमन के लिए एक अंडरपास के निर्माण की बात भी कही, लेकिन इन वार्ड के लोगों ने ओवरब्रिज को कमल होटल से शुरू करने और पिलर पर बनाने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया। तमाम आरोप-प्रत्यारोप के बीच में संघर्ष समिति ने केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी से भी इस मामले को लेकर मुलाकात की। इस बीच विधायक रामप्रताप कासनिया ने केंद्रीय मंत्री से वार्ता में कमल होटल से शुरू होने वाले और पिल्लरों युक्त फ्लाईओवर की स्वीकृति मिलने की घोषणा वार्ड वासियों के समक्ष की। जिसके बाद संघर्ष समिति ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया।

    हालांकि विधायक की घोषणा के बावजूद हाइवे का निर्माण कर रही कंपनी द्वारा दोनों तरफ दीवारों वाले ओवरब्रिज का निर्माण चलता रहा। लेकिन दोनों पार्टियों के लोग ये जानते हुए भी की यह ओवरब्रिज शहर को दोनों हिस्सों में बांट रहा है चुप्पी साधे ओवरब्रिज का निर्माण होते देखते रहे। बेचारी जनता भी क्या करती उसने भी दीवारों वाले ओवरब्रिज को ही अपना भाग्य मान कर स्वीकार कर लिया। अब जब एक बार फिर इंद्रा सर्किल फ्लाईओवर के घोषणा हुई हैं तब जनता की चिंताओं से दूर फ्लाईओवर की घोषणा से राजनीति का चूल्हा जल उठा है और राजनीतिज्ञ अब हाइवे की ठंडी राख पर बने रहे फ्लाईओवर पर रोटियां सेंकने के लिए तैयार हो गए हैं।

    बड़ा सवाल- क्या पिल्लरों वाले फ्लाईओवर की ड्राइंग फर्जी थी ?

    विधायक द्वारा उस समय पेश की गई फ्लाईओवर की ड्राइंग

    इस पूरे प्रकरण में एक बड़ा सवाल संघर्ष समिति द्वारा चलाए गए आंदोलन के समय विधायक द्वारा प्रस्तुत की गई फ्लाईओवर की ड्राइंग को लेकर भी है। उस समय विधायक की और से विभाग द्वारा स्वीकृत फ्लाईओवर की ड्राइंग भी संघर्ष समिति के अलावा मीडिया से शेयर की गई थी। जिसमें ये दर्शाया गया था कि सर्कल पर बनने वाला फ्लाईओवर पिल्लर वाला होगा न कि दोनों तरफ दीवार वाला। लेकिन अब जब ये तय हो गया है कि सर्कल पर बनने वाला फ्लाईओवर पिल्लर की बजाय दोनों तरफ दीवारों वाला होगा तो यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या वह ड्राइंग फर्जी थी ? क्या वजह रही कि उस ड्राईंग को रद्दी की टोकरी में फेंक कर फिर वही दीवारों वाला फ्लाईओवर पास कर दिया गया ?। ये ऐसे सवाल है जिन्हें विधायक को जनता के सामने साफ करना चाहिए।

    राजनीति की बजाय पिल्लरों वाले फ्लाईओवर का हो प्रयास

    इस बात में कोई संदेह नहीं है कि विधायक रामप्रताप कासनिया के प्रयासों और जनता के संघर्ष से इंदिरा सर्किल पर कमल होटल से शुरू होने वाले फ्लाईओवर की स्वीकृति मिली है। फ्लाईओवर बनने से निश्चित तौर पर दुर्घटनाओं में कमी आएगी । लेकिन यदि यह फ्लाईओवर पिलरों पर बनता है तो निश्चित तौर पर आमजन के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होगा। इसलिए इस मुद्दे पर दोनों पार्टियों के नेताओं को राजनीति करने की बजाय इस बात की कोशिश करनी चाहिए कि यह फ्लाईओवर पिल्लरों पर बने।

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    मारवाड़ी युवा मंच (कॉटन सिटी) की अनूठी पहल

    सूरतगढ़। मारवाड़ी युवा मंच की कॉटन सिटी शाखा की ओर से दिव्यांगों की मदद के लिए एक अनूठा प्रकल्प शुरू किया गया है। इस प्रकल्प के तहत आज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ‘दिव्यांग सहायता बॉक्स’ का उद्घाटन किया गया । क्लब के अध्यक्ष मधुसूदन सारड़ा के अनुसार कोई भी जरूरतमंद दिव्यांग ‘दिव्यांग सहायता बॉक्स’ में अपनी जरूरत के सामान की पर्ची व पहचान का दस्तावेज डाल सकता है। इस पर्ची के आधार पर क्लब की ओर से उस दिव्यांग की पात्रता की जांच कर यथासंभव उसकी सहायता का प्रयास किया जाएगा। मंच के अनुसार इस प्रकल्प से दिव्यांग की पहचान सार्वजनिक किये बिना मदद की जा सकेगी।

    कोच महावीर सैनी व पैरालम्पिक एथलीट देवेंद्र गहलोत ने किया उद्घाटन

    सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मंच द्वारा लगाए गए ‘दिव्यांग सहायता बॉक्स’ का उद्घाटन अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कोच व गुरु वशिष्ठ अवार्डी महावीर सैनी, अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट देवेंद्र गहलोत व नगर पालिका चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। इससे पहले पंडित द्वारा अतिथियों को तिलक लगाकर व मंत्रोचार कर विधिवत पूजा अर्चना की गई ।

    अतिथियों ने की मंच के कार्यों की सराहना

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक कोच महावीर सैनी ने कहा कि शाखा बहुत ही बेहतर और उपयोगी कार्य कर रही है। उन्होंने शाखा को हर संभव सहयोग करने का आश्वासन दिया। अंतर्राष्ट्रीय पैरा एथलीट देवेंद्र गहलोत ने शाखा के इस कार्य को दिव्यांगों के लिए बहुत ही उपयोगी बताया। उन्होंने कहा की दिव्यांगों को समाज में एक अलग दृष्टि से देखा जाता है पर अगर समाज सेवी संस्थाओं द्वारा इस तरह के प्रकल्प किए जाते हैं तो वे दिव्यांगों के लिए वरदान बन सकती है। उन्होंने इस कार्य के लिए शाखा का आभार जताया।
    कार्यक्रम में शिरकत करने वाले अतिथि डॉ विजय भादू व डॉ मनोज अग्रवाल ने भी शाखा के पूर्व में किए गए कार्यों की भूरी भूरी प्रशंसा की। नगरपालिका चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा ने बताया कि कोरोना काल में शाखा द्वारा बिना किसी भय के सेवाएं दी गई साथ ही शाखा का आभार प्रकट किया। इसके अलावा कार्यक्रम में पधारे हुए शिवनंदी शाला अध्यक्ष राजाराम गोदारा ,श्री गौशाला सचिव सत्यनारायण झंवर एवम सुंदरकांड समिति अध्यक्ष रामेश्वर दयाल तिवाडी ने भी संस्था द्वारा करवाए गए निर्माण कार्य जैसे शेड , गौ ऑपरेशन थिएटर, शौचालय एवम अन्नपूर्णा रसोई के लिए शाखा का आभार जताया।

    मंच ने भामाशाहों का किया सम्मान

    ‘दिव्यांग सहायता बॉक्स’ के उद्घाटन के अवसर पर शाखा द्वारा सहयोग करने वाले भामाशाहों को भी सम्मानित किया गया । इस क्रम में शाखा को आर्थिक सहयोग करने वाले दानदाता शिक्षाविद प्रवीण भाटिया जी, युवा उद्यमी नरेंद्र कड़वासरा (अर्जुनसर), राजवीर सिहाग एवं रोशन चाहर को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। शिक्षाविद श्री प्रवीण भाटिया जी ने भी अपने विचार रखें और लोगों को शाखा का उदाहरण देते हुए इसी प्रकार के कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

    वहीं शाखा द्वारा प्रकल्प का शुभारंभ करने वाले मुख्य अतिथियों को श्री महावीर जी सैनी पैरा एथलीट श्री देवेंद्र गहलोत जी को सम्मान प्रतीक से सम्मानित किया एवम उपहार स्वरूप चांदी के सिक्के भेंट किए।

    कार्यक्रम में ये भी रहे उपस्थित

    कार्यक्रम में महेश्वरी समाज के जिलाअध्यक्ष भंवर लाल चांडक, कुम्हार समाज समिति के अध्यक्ष नत्थुराम जी कलवासिया, समाजसेवी संजय वैद, पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष ललित कुमार सिडाना, पार्षद मदन लाल बेनीवाल, भंवर लाल स्वामी, देवचंद्र दैया, पार्षद परशराम भाटिया, महावीर इंटरनेशनल वीरा की सदस्या श्रीमती नीतू बैद ,श्रीमती निशा सोमानी एवम श्री सारिका रांका ने कार्यक्रम में शिरकत की।

    मंच संचालन प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ सुनील कुमार वर्मा ने किया और उन्होंने मारवाड़ी युवा मंच द्वारा देश एवं विदेश में चलाए जा रहे प्रकल्पों की जानकारी भी दी।

    शाखा अध्यक्ष मधुसूदन सारडा ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य पवन कुमार सोमानी ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।
    शाखा की तरफ से अध्यक्ष मधुसूदन सारडा के अलावाााा सचिव रजत राठी , पीयूष नागपाल, उपाध्यक्ष इंद्रमोहन बजाज, राकेश झंवर , दीपक कुमार मूंदड़ा,संतोष नोखवाल, दीपक बोथरा, माधव कोठारी, विनोद सैनी, विक्रम राठौड़ एवं अरुण जैन ने अपनी सेवाएं दी।

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    12 सूत्री ज्ञापन सौंपकर की कार्रवाई की मांग

    सुरतगढ़। शहर की विभिन्न समस्याओं को लेकर भाजपा का एक शिष्टमंडल शनिवार को जिला कलेक्टर रूक्मणी रियार से मिला। नवनिर्वाचित जिला कलेक्टर यहां सूरतगढ़ पंचायत समिति का निरीक्षण करने पहुंची थी। नगरमंडल महामंत्री लालचंद शर्मा के नेतृत्व में भाजपा शिष्टमंडल ने कलेक्टर को शहर की समस्याएं बताई और उनके निराकरण की मांग की। इस मौके पर भाजपा नगरमंडल की ओर से कलेक्टर को 12 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई।

    जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए भाजपा का शिष्टमंडल

    ज्ञापन में उठाया सीवरेज,सड़क व हेल्थकेयर सेंटर का मुददा

    ज्ञापन में शहर में टूटी हुई सड़कों को बनाने, सीवरेज के टूटे हुए मैन हॉल व सड़क से ऊपर उठे हुए सौंपते हुए मैन हॉल को सही करवाने, शहर में भूमाफियों द्वारा किये जा रहे अतिक्रमण को रोकने, करोड़ो की राशि खर्च कर बनाये गए हैल्थ केअर सेंटर को शुरू करवाने, ट्रॉमा सेंटर में आवश्यक व्यवस्थाएं करवाने, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को क्रमोन्नत करने, स्टेडियम ग्राउंड की बिगड़ी हालत सुधारने के साथ साथ शहर में कोचिंग संस्साथानों की आड़ में चल रहे नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने की मांग की गई। जिला कलेक्टर में सभी समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन दिया।

    शिष्ट मंडल में ये रहे शामिल

    भाजपा नगरमंडल महामंत्री के अलावा भाजपा नेता पार्षद हरिप्रसाद शर्मा, पार्षद, हंसराज स्वामी, पार्षदप्रतिनिधि श्री सत्यनारायण तावणियां, गोविन्द नायक , युवा मोर्चा जिला महामंत्री विनोद कुमार, किशन स्वामी, योगेश स्वामी के साथ कई अन्य भाजपा नेता व कार्यकर्ता मौजूद थे ।

    पार्षद हरीश दाधीच ने की प्राचीन ढाब के सौन्दर्यकरण की मांग

    वार्ड 39 से पार्षद हरीश दाधीच ने जिला कलेक्टर रुक्मणि रियार को प्राचीन ढाब का सौंदर्यकरण करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पार्षद ने आरोप लगाया कि नगरपालिका द्वारा प्राचीन ढाब में मलबा और कचरा डालकर भरा जा रहा है जो कि गैरकानूनी है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि यह सब ढाब भूमि पर कब्जा करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने ढाब के चारों ओर चारदीवार कर तालाब में भरे गंदे पानी की निकासी करवाने की मांग की।

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    पालिका की पिच पर लम्बी पारी का सपना देख रहे खिलाड़ियों की उड़ी नींद

    सुरतगढ़। सूरतगढ़ नगरपालिका में चेयरमैन कालवा की गूगली से इन दिनों विरोधी खेमे के विकेटों का पतझड़ लगा हुआ है। कुछ दिन पहले जब पालिका कर्मचारियों और पार्षदों का क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित किया गया था। तब चैयरमेन ओमप्रकाश कालवा किसी वजह से मैदान में नही उतरे थे। लेकिन जब राजनीति की पिच पर खेलने की बात हो तो चैयरमैन कालवा हमेशा तैयार रहते है। राजनीति में पदार्पण या कहें कि नगरपालिका की कप्तानी सम्भालने के बाद से चैयरमेन कालवा अब तक न केवल अपनी बैटिंग से बल्कि बोलिंग से भी विरोधियों को परेशान किये हुए हैं। टीम के कप्तान के रूप में बैटिंग करते हुए चैयरमेन कालवा अब तक नाबाद पारी खेल रहे हैं।…

    हालांकि कई मौकों पर विरोधियों ने उन्हें आउट करने की अलग अलग रणनीति भी बनाई। लेकिन एक सधे हुए बल्लेबाज की भांति उन्होंने विरोधी की गेंदों पर जमकर चौके छक्के लगाए। अपने आपको तेज़ गेंदबाज़ समझने वाले ऐसे ही एक खिलाड़ी की तो चैयरमेन कालवा ने वो गत बनाई कि टीम मैंनेजर का खास होने का ढिंढोरा पीटने वाले इस गेंदबाज़ को टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। वैसे इस खिलाड़ी की घटिया परफॉर्मेंस का खामियाजा कुछ दूसरे खिलाड़ियों को भी एकबारगी टीम से बाहर होकर भुगतना पड़ा। हालांकि बाद में टीम मैनेजर की जी हुजूरी कर ये खिलाड़ी़ फिर से टीम में शामिल हो गया है। लेकिन सूत्रों की माने तो इस खिलाड़ी को इस शर्त पर ही टीम में शामिल किया गया है कि आगे से बॉल केवल पकड़नी है फेंकनी नही है।…

    खैर ये तो बात हुई बैटिंग की, बात अगर बोलिंग की करी जाए तो मास्टर जी यहां भी कम नही है। मास्टर जी अपनी गुगली से पहले भी कई बड़े खिलाड़ियों को हिट विकेट करवाकर बाहर का रास्ता दिखा चुके है। मास्टर जी के ताजा स्पेल को ही देख लीजिए। उन्होंने एक बार फिर विरोधी खेमो का मोहरा बनते दिख रहे तीन खिलाड़ियों को एक के बाद एक पेवेलियन का रास्ता दिखा दिया है। चैयरमेन कालवा को स्पिन बॉलर समझकर खुद को मंझे हुए खिलाड़ी मानने वाले जो लोग पालिका की पिच पर लम्बी पारी खेलने का मंसूबा पाल रहे थे उन्हें अंदाजा नही था कि चैयरमेन कालवा की गुगली इतनी अंदर आकर उनके विकेट ले उड़ेगी। नगरपालिका को अपने इशारों पर चलाने का सपना सँजोने वाले ये लोग फिलहाल इन विकटों के गिरने से सकते में है।…

    बहरहाल पालिका के कनिष्ट अभियन्ता मोहन लाल से शुरू होते हुए ईओ शैलेन्द्र गोदारा और सहायक अभियंता सुशील सियाग के ट्रांसफर ऑर्डर के जारी होने से अब इस बात में कोई संदेह नही है कि फिलहाल चैयरमेन कालवा ही नगरपालिका टीम के कप्तान बने रहेंगे । यही नही टीम के चयन में भी उन्ही की मर्जी चलने वाली है। वैसे भी जिस तरह उन्होंने अपनी विरोधी टीमों को शिकस्त दी है उससे उबरने में विरोधियों को काफी समय लगेगा। ऐसे में फिलहाल उनकी कप्तानी को कोई खतरा दूर दूर तक नज़र नही आ रहा है। इस उठापटक से जहां चैयरमेन खेमा खुश हैं वही उनकी विरोधियों की नींद उड़ी हुई हैं।…

    वैसे एक कहावत है कि जब निज़ाम की ईंट खिसकती है तो पहली आफत रखैलों पर आती है। नगरपालिका में इन दिनों चल रही उठापटक को देखकर तो ये कहावत ठीक ही लगती है ।

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    अज्ञात आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

    घटनास्थल का मौका मुआयना करती पुलिस

    उदयपुर। उदयपुर के आदिवासी क्षेत्र में इंसानियत को शर्मशार करने वाला एक मामला सामने आया है। घटना के अनुसार 2 बदमाशों ने पुलिस चौकी से महज 250 मीटर दूर एक महिला से गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया है। इतना ही नही गैंगरेप के बाद पीड़िता बदमाशों के चंगुल से निकलकर बिना साड़ी के सड़क पर दौड़ते हुए पुलिस चौकी पर पहुंची। इसके बाद आनन-फानन में पुलिस भी पीड़िता के बताए घटनास्थल पर पहुंची और मौका मुआयना किया।

    घटना के समय पीहर जा रही थी पीड़िता

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार गुरूवार शाम को महिला अपने ससुराल से पीहर जा रही थी। कच्चे रास्ते पर पैदल जाने के दौरान एक बाइक पर 3 युवक आए। इसमें दो युवक वहीं उतर गए और 1 बाइक लेकर चला गया। इसके बाद दोनो युवकों ने महिला से बात करने की कोशिश की। जब महिला ने दोनों युवकों से बात नहीं की तो दोनों आरोपीयों में महिला पकड़ लिया और खींचते हुए पास के एक खेत में ले गए। जहां दोनों युवको ने महिला के साथ बारी बारी से रेप किया। इस दौरान महिला चीखती चिल्लाती रही, मगर आरोपियों ने उसके मुंह को हाथों से दबाए रखा। घटना के बाद महिला आरोपियों के चंगुल से निकलकर भागती हुई बिना साड़ी के ही पुलिस चौकी पहुंची।

    मौके से मिली साड़ी ओर घड़ी

    महिला की सूचना के पर पुलिस तत्काल मोके पर पहुंची लेकिन तब तक आरोपी मौके से फरार हो गए।पुलिस को घटनास्थल से महिला की साड़ी ओर एक घड़ी मिली जिसे पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया। बाद में महिला के पति और पिता भी चौकी पहुंचे। महिला की रिपोर्ट पर फिलहाल पुलिस ने दो अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध गैंगरेप का मामला दर्ज कर लिया है और पीड़िता का उदयपुर में मेडिकल करवाया है।

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    2 दिन बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, राजीनामे का बनाया जा रहा दबाव

    सूरतगढ़। सूरतगढ़ सब जेल में विचाराधीन बंदीसे मारपीट के मामले में पीड़ित कैदी संदीप के परिजनों ने सिटी थाना में परिवार देकर कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित संदीप के पिता महेंद्र सिंह की ओर से दिए गए इस परिवाद में सब जेल के एक हवलदार सहित 4 कार्मिकों बुरी तरह से मारपीट करने का आरोप लगाया है। इस बीच आज पीड़ित सन्दीप को जेल व पुलिस के कर्मचारी कड़ी सुरक्षा के बीच सीएचसी में लेकर पहुंचे। जहां पीड़ित का एक्सरे करवाया गया।

    जेल के हवलदार सहित चार लोगों पर लगाया मारपीट का आरोप

    पीड़ित बन्दी के पिता महेंद्र सिंह का आरोप

    पीड़ित कैदी के पिता महेंद्र सिंह की ओर से दिए गए परिवाद में जैल के 4 कार्मिको पर मारपीट करने का आरोप जड़ा है। परिवाद में पीड़ित के पिता ने कहा है कि प्रार्थी का पुत्र लगभग डेढ़ माह से नहीं न्यायिक अभिरक्षा में चल रहा था। संदीप के जेल में आने के बाद से जेल का हवलदार रूप राम राठी संत्री महेंद्र सिपाही सुशील मील व सुनील परेशान कर रहे थे। महेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि 18 जनवरी को चारों कार्मिकों ने संदीप को बैरक से निकालकर कंबल में लपेट दिया और उसके बाद थाप,मुक्कों, फाइबर के पाइप,डंडो और ठोकरों से पिटाई शुरू कर दी। इस मारपीट से संदीप को गंभीर चोटें आई और वह बेहोश हो गया। बाद में चारों आरोपी उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाएं और इंजेक्शन लगवाकर वापस ले गये।

    आरोपी जैल कार्मिको ने मांगी माफी

    पीड़ित संदीप के पिता महेंद्र सिंह द्वारा दिए गए परिवाद के अनुसार जब उन्होंने सुशील मील से बेवजह मारपीट की वजह पूछी तो सुशील मील माफी मांगने लगा । सुशील मील ने कहा कि हम शराब पिए हुए थे, हमसे गलती हो गई, अब आप कुछ मत करना हम माफी मांग लेंगे।

    जेलर नवनीत घोटिया ने भी स्वीकारी घटना

    इस मामले में सब जेल के जेलर नवनीत गोटिया ने भी घटना को स्वीकार किया है। उन्होंने माना कि उनकी अनुपस्थिति में ड्यूटी पर तैनात कार्मिकों ने कैदी संदीप के साथ मारपीट की। ने बताया कि जब उन्हें घटना की सूचना मिली तो वह रात को ही संदीप को हॉस्पिटल लेकर गए और प्राथमिक उपचार करवाया।

    घटना के 2 दिन बीतने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

    बंदी के साथ मारपीट की इस पूरे मामले में बड़ा सवाल ये है कि जब जेल प्रशासन खुद घटना को स्वीकार कर रहा है तो फिर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इस घटना को 2 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई है। सवाल यह भी है कि क्या सूबे की जेलों में बंद कैदियों के कोई अधिकार नहीं है ?

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    आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि


    सूरतगढ़। ‘आजादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर’ कार्यक्रम का आयोजन ब्रह्माकुमारीज केन्द्र में किया गया। प्रजापिता ब्रह्मा की 53वीं स्मृति दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम ब्रह्माकुमारीज संस्थान ओर भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘आजादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर’ कार्यक्रम की शुरुआत की।

    राष्ट्र से हमारा अस्तित्व है और हमारे अस्तित्व से राष्ट्र : मोदी

    इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे और राष्ट्र के सपने एक ही हैं। एक नया सवेरा होने वाला है। जब संकल्प से साधना जुड़ी तो कालखंड बनना तय है। उन्होंने कहा कि कितना भी अंधेरा छाए, भारत मूल स्वभाव नहीं छोड़ता। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति हमारी प्रगति है। राष्ट्र से हमारा अस्तित्व है और हमारे अस्तित्व से राष्ट्र है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के नए संकल्पों के साथ नए सपनो के साथ निरन्तर जुड़ने के लिए ब्रह्माकुमारिज संस्थान का अभिनंदन किया।

    बी के रानी ने जागरूकता कार्यक्रमों का दिया ब्यौरा

    सूरतगढ़ केंद्र की संचालिका बी के रानी ने संस्थान द्वारा समाज मे जागरूकता व बेहतर समाज के लिए चलाई जाने वाली योजनाओ को सभी के समक्ष रखा। इनमे प्रमुख रूप से शामिल हैं जैविक ऑर्गेनिक खेती, साइकल रैली, मोटर साइकल रैली, वेक्सिनेशन अभियान,महिला जागरूकता आदि। उन्होंने बताया कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान का उद्देश्य दस हजार कार्यक्रमो के माध्य्म से दस करोड़ लोगों तक जागरूकता सन्देश पहुंचाना है।
    अंत मे बी के साक्षी व कमला बहन ने आए हुए लोगो का आभार व्यक्त किया।

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    मेल्विन थॉमस का स्वागत करते विभिन्न संस्थाओं के सदस्य

    सूरतगढ़। देशभर में लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से पैदल यात्रा पर निकले मेल्विन थॉमस आज शाम सूरतगढ़ पहुंचे। मूलतः केरल के वायनाड निवासी थॉमस के सूरतगढ़ पहुंचने पर मैत्री ब्लड बैंक में जोरदार स्वागत किया गया। मैत्री ब्लड बैंक समिति के अलावा भारत विकास परिषद व महावीर इंटरनेशनल द्वारा थॉमस का हार्दिक स्वागत और अभिनंदन किया गया।

    अब तक 3000 किमी. की यात्रा पैदल कर चुके हैं थॉमस

    इस मौके पर थॉमस ने कहा कि वह अब तक करीब 3000 किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं और 800 किलोमीटर की यात्रा शेष है। वायनाड से आरंभ हुई यह पदयात्रा श्रीनगर में संपन्न होगी।भविष्य में उनकी वायनाड से मनाली तक साइकिल पर यात्रा करने की योजना है जिससे वो और अधिक लोगों तक पहुंच कर उन्हें रक्तदान के लिए प्रेरित करेंगे। इस सर्दी के मौसम में भी वे प्रतिदिन 30 किलोमीटर की पदयात्रा करते हैं।

    चैयरमेन कालवा ने की थॉमस के जज्बे की प्रशंसा

    मेल्विन थॉमस का स्वागत करते हुए पालिका चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा ने उनके इस जज्बे को प्रशंसनीय बताते हुए इस अनूठे कार्य की सराहना की। चैयरमेन कालवा ने उन्हें आगे की सफल यात्रा के लिए शुभकामनाएं दी। उन्होंने थॉमस के आवास और भोजन इत्यादि की व्यवस्था अपनी और से करने की घोषणा की।

    स्वागत कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित

    इस अवसर पर महावीर इंटरनेशनल के अध्यक्ष दिलीप मिश्रा, नथुराम कलवासिया,संजय बैद,नीरज डांग, भारत विकास परिषद के अध्यक्ष रमेश आसवानी, घनश्याम शर्मा, शिव शंकर सोमानी, बृज मोहन प्रजापति, श्रीकांत राठी, पुनीत दुआ, मैत्री ब्लड बैंक के संचालक सुनील योगी, इंजीनियर रमेश चंद्र माथुर,ब्लड बैंक के स्टाफ अश्वनी साहू, एकता पूनिया, और मोहिनी आदि उपस्थित थे। सभी ने उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए इस पदयात्रा को दूसरों के लिए प्रेरणास्पद बताया।

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    राज्य सरकार ने ब्याज सहित पैसा लौटने के जारी किए निर्देश

    सूरतगढ़। नगर पालिका में भूखंड का पैसा जमा करने वाले आवंटियों के लिए खुशखबरी है। वे लोग जिन्हें पैसे जमा होने के बाद भूखंड नही मिला उन्हें अब राहत मिलेगी। राज्य सरकार ने ऐसे मामलों में आवंटी को ब्याज सहित पैसा लौटने के जारी किए निर्देश किये हैं। नगरीय विकास एंव स्वायत शासन विभाग द्वारा दिनांक 31/12/21 को जारी इस आदेश के अनुसार ऐसे मामले में यदि आवंटी पूर्व में आवंटित भूखंड के स्थान पर मूल जमा कराई गई राशि वापस लेना चाहता है और निकाय मूल भूखंड का कब्जा देने में असमर्थ है एंव आवेदक द्वारा सम्पूर्ण राशि जमा करवाये हुए 6 माह से अधिक का समय हो चुका है तो सम्बंधित निकाय द्वारा राशि जमा होने की तिथि से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित सम्पूर्ण राशि आवेदक को लौटा दी जाएगी।

    स्थानीय निकाय देगा समान क्षेत्रफल के वैकल्पिक भूखण्ड का विकल्प

    सर्कुलर के मुताबिक जहां स्थानीय निकायों द्वारा आवंटन के बाद सम्पूर्ण राशि जमा होने के बाद भी मौके पर भूखंड न होने/ किसी अन्य व्यक्ति का कब्ज़ा होने/ भूखण्ड के सम्बंध में सक्षम न्यायालय का स्थगन होने के चलते आवंटी को कब्ज़ा नही दिया जा सका है। वहां आवंटी के आवेदन पर निकाय सर्वप्रथम यह जांच करेगा कि मौके पर भूखंड उपलब्ध है या नहीं। यदि उपलब्ध भूखड पर अन्य व्यक्ति का कब्ज़ा हैं तो ये देखेगा की कब्ज़ा क्यों नही हटाया जा सकता ! दूसरे यदि भूखण्ड पर न्यायालय का स्थगन है तो निकाय सक्षम न्यायालय में प्रभावी पैरवी कर स्थगन निरस्त करवाएगा।

    यदि एक वर्ष में यह सम्भव नही होगा तो निकाय आवेदक को समान क्षेत्रफल का वैकल्पिक भूखण्ड देगा। अन्यथा आवेदक को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित जमा राशि वापस करेगा। समान क्षेत्रफल के भूखण्ड की आरक्षित दर भिन्न होने पर अंतर की राशि का समायोजन कर दी जाएगी। परन्तु मूल राशि पर दोनो पक्षों को ब्याज नही मिलेगा।

    आवंटी द्वारा वाद दायर किये जाने की स्थिति में प्रक्रिया

    ऐसे मामलों में जहां आवंटी ने भूखंड का कब्जा लेने  के लिए न्यायालय में वाद दायर कर रखा है ऐसी स्थिति में इस सर्कुलर के अनुसार संबंधित निकाय आवेदक आवंटी से ₹100 के स्टाम्प पर यह शपथ पत्र लेगा कि आवंटी वैकल्पिक भूखंड का आवंटन होने पर संबंधित निकाय के विरुद्ध वाद वापस ले लेगा। शपथ पत्र मिल जाने पर निकाय आवेदक को वैकल्पिक भूखंड के आवंटन का निर्णय कर आवेदक को लिखित में सूचित करेगा। इस पत्र के आधार पर आवंटी अपना वाद वापस लेगा। आवंटी द्वारा वाद समाप्ति का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर निकाय द्वारा वैकल्पिक भूखंड का कब्जा दे दिया जाएगा।

    वैकल्पिक भूखंड हर तरह से होगा समतुल्य

    सर्कुलर के अनुसार निकाय जब तक संभव हो कॉर्नर भूखंड के आवंटी को कॉर्नर और नॉन कॉर्नर भूखण्ड के आवंटी को नॉन कॉर्नर भूखंड ही देगा। इसके अलावा यथासंभव समतुल्य रोड़ पर ही वैकल्पिक भूखण्ड दिया जाएगा।

    सूरतगढ़ में दर्ज़नो लोगों को मिलेगी राहत

    सूरतगढ नगरपालिका की बात करें तो ऐसे अनेक मामले हैं जिनमे पालिका ने सरेआम नीलामी या फिर लॉटरी द्वारा भूखंडों का लोगों को आवंटन कर दिया। जिसके बाद आवंटी ने प्लॉट की पूरी कीमत भी नगरपालिका में जमा करवा दी। बावजूद इसके विभिन्न कारणों के चलते आवंटनधारीयों को भूखण्ड का कब्ज़ा नही मिल पाया है। खास बात ये है कई मामले तो ऐसे भी है जिनमे भूखंड का पैसा जमा करवाने के 2 दशक बाद भी पालिका ने न तो सम्बंधित आवंटनधारी को भूखण्ड का कब्ज़ा दिया है और ना ही आवंटन के बदले वसूली की गई राशि लौटाई है। न्याय की उम्मीद लिए ऐसे लोग वर्षों से पालिका अधिकारियों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। ऐसे में इस सर्कुलर जारी होने अब उम्मीद की जानी चाहिए कि ऐसे पीड़ित लोगों को पालिका प्रशासन राहत प्रदान करेगा। 

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    अखिल भारतीय किसान सभा और जनता मोर्चा का संयुक्त प्रदर्शन


    सूरतगढ़। आईजीएनपी के प्रथम चरण के किसानों गेहूंं,सरसों, जौं व चना की फसल पकाने के लिए सिंचाई पानी देने की मांग को लेकर आज किसानों ने उपखंड कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया । अखिल भारतीय किसान सभा और जनता मोर्चा के संयुक्त नेतृत्व में किए गए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान भी शामिल हुए। इस दौरान किसानो ने नायब तहसीलदार मुकुल टाक के मार्फत मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

    दोनों जिलों के करीब 10 लाख किसान होंगे प्रभावित

    किसान नेताओं ने बताया कि सरकार व सिंचाई विभाग 12 जनवरी 2022 के सिंचाई पानी का रेगुलेशन तय नहीं करता है तो दोनों जिलों के लगभग 10 लाख किसान किसान प्रभावित होंगे। माकपा सचिव मदन ओझा ने कहा कि फसल पकाओ के लिए वक्त से पानी नहीं देना गहलोत सरकार और सिंचाई विभाग की किसान विरोधी सोच को दर्शाती है।

    12 जनवरी तक रेगुलेशन तय नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

    किसान नेताओ का कहना है कि अगर 12 जनवरी के बाद सिंचाई पानी नहीं दिया तो प्रथम चरण के किसान के साथ सूरतगढ़ क्षेत्र के किसान आगामी रणनीति पर संघर्ष की तैयारी करेगा जिसकी पूरी जिम्मेवारी राजस्थान सरकार की होगी ।आज के प्रदर्शन में जनता मोर्चा संयोजक ओम राजपुरोहित, व्यापारीर नेता राजकुमार छाबड़ा राधेश्याम उपाध्याय,देवी सिंह, अरविंद विश्नोई,गौतम सिखवाल,सखी मोहम्मद महावीर भोजक, महावीर तिवारी, विमल सिंह, मोहम्मद अकबर रमाशंकर सिंह सूर्यवंशी, जसराम बुगालिया, जवाहर छिंपा, पवन स्वामी, श्री सीमेंट मजदूर अध्यक्ष राकेश श्रमिक वेद वर्मा, युवा माकपा नेता अशोक भार्गव प्रेम स्वामी, लक्ष्मण शर्मा, राजीव कुमार सिला, श्री भगवान, बजरंग गोदारा, सहित काफी संख्या में किसान उपस्थित थे

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    अभियान के प्रथम चरण का हुआ समापन

    सूरतगढ़। प्रशासन शहरों के संग अभियान-2021 के अन्तर्गत राज्य सरकार की मंशा अनुसार जनहित के कार्यों हेतु वार्ड संख्या 42, 43, 44 व 45 ‘‘नगरपालिका सूरतगढ़’’ में शिविर का आयोजन किया गया। अधिशाषी अधिकारी शैलेन्द्र कुमार गोदारा के अनुसार शिविर में कृषि भूमि नियमन के अन्तर्गत 7 आवेदन प्राप्त हुए, 69ए के अन्तर्गत 6 आवेदन प्राप्त कर 2 पट्टे जारी किये गये, नाम हस्तान्तरण के 5 प्रकरण निस्तारित कर नामान्तरण प्रपत्र जारी किए गए, बकाया लीज व एकमुश्त लीज के 3 आवेदन प्राप्त कर लीज राशि जमा की गई। इसके अतिरिक्त 16 आवेदन जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र के प्राप्त कर मौके पर ही निस्तारित किए गए। शिविर में कुल राशि 107220/- रूपये की आय प्राप्त हुई। राज्य सरकार के निर्देशानुसार आज प्रथम चरण का समापन किया गया। आगामी शिविरों के संबंध में राज्य सरकार से दिशा-निर्देश प्राप्त होने के उपरान्त ‘शिविर कार्यक्रम’ जारी कर दिया जावेगा।

    शिविर में नगरपालिका सहित विभिन्न विभागों के नुमाइंदे रहे मौजूद

    शिविर में मा० ओमप्रकाश कालवा अध्यक्ष, श्री शैलेन्द्र कुमार गोदारा अधिशाषी अधिकारी, श्री सुशील कुमार सिहाग सहायक अभियन्ता (शिविर प्रभारी), श्री मोहनलाल कनिष्ठ अभियन्ता, श्री सुनील कुमार कनिष्ठ लेखाकार, श्री सुनील बिष्ट वरिष्ठ प्रारूपकार, श्री प्रेम प्रकाश अरोड़ा सहायक प्रशासनिक अधिकारी, श्री अश्वनी कुमार वरिष्ठ सहायक, श्री रामप्रकाश शर्मा कनिष्ठ सहायक, श्री विकास कुमार बिश्नोई एवं समस्त पालिका कर्मचारी, अन्य विभाग यथा जोधपुर वि०वि० निगम लिमिटेड, महिला एवं बाल विकास विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, चिकित्सा विभाग सूरतगढ़ के अधिकृत अधिकारी/कर्मचारी व संबंधित वार्ड पार्षद श्री सुनील सैनी, श्री मुमताज अली, श्रीमती रोशनी बानो व श्री रोहिताश कुमार उपस्थित रहे।

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    भाजपा के रामप्रताप कस्वां को 10 वोटों से दी मात

    मोहिनी देवी को 16, कस्वां को मिले 6 वोट

    उपप्रधान कांग्रेस की मोहिनी देवी

    सूरतगढ़। सूरतगढ़ पंचायत समिति के लिए शुक्रवार को हुए चुनाव में कांग्रेस की मोहिनी देवी उपप्रधान बनी। उन्होंने भाजपा के रामप्रताप कस्वां को 10 वोटों से मात देेेेकर उपप्रधान की कुर्सी पर कब्जा कर लिया। चुनाव में मोहिनी देवी को 16 वोट, रामप्रताप कस्वां को 6 वोट मिले। 23 सदस्यों वाली पंचायत समिति में निर्दलीय देवीलाल सहारण वोट डालने नही पहुंचे। जिसके चलते निर्वाचन अधिकारी द्वारा वोटिंग के लिए नियत 5 बजे तक इंतजार किया गया।

    शाम पांच बजे रिटर्निंग अधिकारी एसडीएम कपिल कुमार यादव ने कांग्रेस की मोहिनी देवी की जीत की घोषणा की। प्रधान पद के बाद उपप्रधान पद पर मिली जीत ने कांग्रेस समर्थकों में खुशी का संचार कर दिया। समर्थकों ने उपप्रधान को मालाएं पहनाकर बधाई दी और ढोल नगाड़ों पर नाचते हुए जुलूस निकाला।

    पंचायत समिति में दिन भर कांग्रेस नेताओं का लगा रहा जमावड़ा

    उपप्रधान चुनाव को लेकर पंचायत समिति में दिन भर कांग्रेस नेताओं का जमावड़ा लगा रहा। सुबह नामांकन के समय हालांकि प्रधान चुनाव जैसा माहौल नहीं था। कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन के दौरान हेतराम मील, PCC सदस्य हनुमान मील,प्रभारी पूसाराम गोदारा, चैयरमेन ओमप्रकाश कालवा, ब्लॉक अध्यक्ष परसराम भाटिया व संगठन महामंत्री धर्मदास सिंधी आदि मौजूद थे। वहीं भाजपा प्रत्याशी के नामांकन में पूर्व प्रधान चंदूराम लेघा, प्रधान प्रत्याशी पेपसिंह राठौड़ ही मौजूद थे।

    हालांकि शाम को चुनाव परिणामों की घोषणा के वक्त काँग्रेस खेमे में चुनाव प्रभारी जिया उर रहमान, पूर्व विधायक गंगाजल मील व प्रधान हजारीराम मील के साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थक पंचायत समिति पहुंचे। कुल मिलाकर प्रधान व उपप्रधान चुनाव में बहुमत नही होने के चलते जहां भाजपा बैकफुट पर दिखी वही कांग्रेस अग्रेसिव नज़र आई।


    लॉटरी से निकला कांग्रेस के उपप्रधान का नाम

    कांग्रेस में पंचायत चुनावों में प्रारंभ से ही प्रधान पद के लिए हजारीराम मील का नाम फाइनल था। लेकिन उपप्रधान का फैसला करने में कांग्रेस को लॉटरी का सहारा लेना पड़ा। प्रधान चुनाव के बाद से उपप्रधान को लेकर कांग्रेस में गुरुवार शाम से मंथन चल रहा थे। लेकिन शुक्रवार सुबह तक इस पर फैसला नहीं हो सका। जिसके बाद कांग्रेस नेताओं ने उपप्रधान लॉटरी से तय करने का निर्णय लिया गया।

    पार्टी नेताओं की उपस्थिति में सिख,बिश्नोई,मेघवाल,नायक व कुम्हार वर्ग की पर्ची बनाकर लॉटरी निकाली गयी। लॉटरी में बिश्नोई समाज की पर्ची निकली। जिसके बाद भगवानसर जोन से डायरेक्टर कांग्रेस की मोहिनी देवी गोदारा को उपप्रधान प्रत्याशी बनाया गया। इस प्रकार लॉटरी से निकला कांग्रेस के उपप्रधान का नाम और मोहिनी देवी के सर पर उपप्रधानी का ताज सज गया। वैसे कांग्रेस की दृष्टि से देखा जाए तो बिश्नोई जाति का उपप्रधान बनना भविष्य की दृष्टि से बेहतर है। क्यों कि गत चुनावों में विश्नोई समाज का एक बड़ा धड़ा कांग्रेस के विरोध में था। कहीं न कहीं कांग्रेस की हार में इस तबके के वोटों की बड़ी भूमिका रही थी। ऐसे में बिश्नोई समाज से उपप्रधान बनने से कांग्रेस से खफा बिश्नोई वोटर को फिर से साधने में मदद मिलेगी।

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    हजारीराम मील ने भाजपा के पेपसिंह राठौड़ को 9 वोट से हराया


    सेकंडों समर्थकों के साथ निकाला विजयी जुलुस

    हजारीराम मील की जीत के बाद विक्टरी का साइन बनाते कांग्रेस नेता

    सूरतगढ़ । पंचायत समिति में कांग्रेस का प्रधान पद पर आखिर 17 साल बाद कब्जा हो गया। पिछले लगातार तीन चुनाव में कांग्रेस अपना प्रधान बनाने में कामयाब नहीं हो पाई थी । जैसे ही आज रिटर्निंग अधिकारी कपिल यादव ने हजारीराम मील की जीत की घोषणा की, कांग्रेस खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने मील को फूल मालाएं पहनाकर बधाई दी और कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद के नारे लगाना शुरू कर दिये। इस मौके पर मील परिवार के गंगाजल मील और हेतराम मील के अलावा परिवार की महिला सदस्य व बच्चे भी मौजूद थे। मील परिवार के अलावा कांग्रेस नेता डूंगरराम  गदर, नगरपालिका चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा,कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष परसराम भाटिया, संगठन महामंत्री धर्मदास सिंधी, मुखराम खिलेरी, कॉलोनाइजर सुखवंत चावला सहित कई नेता व सैंकड़ो की संख्या में कार्यकर्ता इस मौके पर मौजूद थे। सभी नेताओं ने हजारीराम मील को जीत की बधाई दी।


    भाजपा के पेप सिंह राठौड़ को 9 वोट से हराया

    प्रधान पद के चुनाव में कांग्रेस के हजारीराम मील को 16 वोट मिले । वही भाजपा के पेप सिंह राठौड़ को महज 7 वोट मिले। इस प्रकार मील ने भाजपा प्रत्याशी को 9 वोट से हराकर प्रधान पद पर कब्जा कर लिया। हालांकि भाजपा के पास पंचायत समिति में 6 सीटें ही है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि एक निर्दलीय डायरेक्टर ने भाजपा के पक्ष में वोट दिया है। वही कांग्रेस को मिले 16 वोट में से 14 कॉन्ग्रेस के सिंबल पर जीते तो 2 वोट निर्दलीय के तौर पर जीतने के बाद में कांग्रेस में शामिल हुए डायरेक्टरों के रहे । यह और बात है कि कांग्रेस के पास बहुमत होने से प्रधान का चुनाव महज औपचारिकता मात्र था। राजनीतिक पंडित हजारीराम मील के प्रधान बनने की घोषणा बहुत पहले ही कर चुके थे।


    आखिरकार 17 साल बाद कांग्रेस ने प्रधान बनाया

    सूरतगढ़ पंचायत समिति में कांग्रेस के लिए पिछले 3 चुनाव किसी बुरे सपने से कम नहीं रहे। हालांकि 2015 के पिछले चुनाव में कांग्रेस सत्ता में नहीं थी । इससे पहले 2010 में  स्थानीय स्तर पर गंगाजल मील के कांग्रेस विधायक होने और राज्य में सरकार होने के बावजूद जहां कांग्रेस को सफलता नहीं मिली वहीं सरकार नहीं होने के बाद भी भाजपा अपना प्रधान बनाने में कामयाब रही। सन 2005 में कांग्रेस के विपक्ष में होने से सफलता कांग्रेस से दूर रही। कुल मिलाकर पूर्व प्रधान मामराज बुडीया के बाद आखिरकार 17 साल बाद कांग्रेस ने प्रधान बनाकर भाजपा का तिलिस्म तोड़ दिया है।


    सबको साथ लेकर करेंगे विकास : हजारीराम मील

    पंचायत समिति का प्रधान की शपथ लेने के बाद हजारी राम मील पत्रकारों से रूबरू हुए। अब तक राजनीति से दूर रहने वाले हजारीराम मील कम शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने सबको साथ लेकर विकास करवाने की बात कही। अपनी जीत के लिए उन्होंने मतदाताओं का आभार व्यक्त किया।

    हजारीराम मील के लिए प्रधान का पद है चुनौती भरा

    राजनीति में यूं तो मिल परिवार वर्षों से सक्रिय हैं। स्थानीय स्तर पर पूर्व विधायक गंगाजल मील और पिछले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे हनुमान मील सक्रिय है। वहीं राज्य स्तर पर जाट महासभा के माध्यम से जयपुर में राजाराम मील राजनीति में सक्रिय हैं। बावजूद इसके सरल स्वभाव के चलते हजारीराम मील के लिए प्रधान पद निश्चित तौर पर चुनौती भरा रहने वाला है। कांग्रेस का बहुमत होने से भले ही उन्हें सत्ता च्युत होने का डर न हो। लेकिन प्रधान के रूप में इलाके के विकास की चुनौती उनके समक्ष है तो पंचायत समिति में गुटों में बंटे सरपंचों को साथ लेकर चलना भी उनके लिए एक मुश्किल टास्क होगा। खैर उम्मीद की जानी चाहिए कि वे जल्दी ही राजनीति का ककहरा सीख कर विकास की नई रेखा खींचने में कामयाब होंगे।

    मील परिवार से जनता की उम्मीदें बढ़ी

    नगरपालिका के बाद मील परिवार की अगुवाई में कांग्रेस ने पंचायत समिति पर भी कब्जा जमा लिया है। सुबे में कांग्रेस की सरकार होने से विधायक न होते हुए भी मील परिवार सूरतगढ़ में सत्ता का केंद्र है। ऐसे मे पंचायत समिति प्रधान के पद पर उनके ही परिवार का सदस्य काबिज़ होने से जनता की उम्मीदें और बढ़ गयी है। अंग्रेजी में कहावत है ‘पावर ब्रिंग्स रिस्पांसिबिलिटी’। जिसका अर्थ है पॉवर अपने साथ जिम्मेदारियां भी लाती है। क्योंकि पावर मील परिवार के पास है तो जिम्मेदारी भी उनकी है कि वे इस मौके का लाभ उठाते हुए विकास की नई इबारत लिखे । इसके लिए पिछली गलतियों से सबक लेना भी बहुत जरूरी है।

    – राजेन्द्र पटावरी
    मोब.- 9928298484
            

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    खबर पॉलिटिक्स के चुनाव अनुमान हुए सही साबित

    हज़ारीराम मील बनेंगे गांवो की सरकार के मुखिया

    सूरतगढ़। सूरतगढ़ पंचायत समिति के चुनावों के मंगलवार को आये परिणामों ने खबर पॉलिटिक्स के अनुमानों पर मुहर लगा दी है। खबर पॉलिटिक्स के चुनावी अनुमानों में हमने कांग्रेस को बहुमत व हजारीराम मील को प्रधान बनानेे की बात कही थी। नतीजा सामने है पंचायत समिति में कांग्रेस का परचम लहराया है तो भाजपा को झटका लगा है। इतना ही नहीं चुनावों में खबर पॉलिटिक्स के सीटों की संख्या के संबंध में लगाए गए पूर्वानुमान भी एकदम सटीक रहे हैं।

    कांग्रेस 10-14 व भाजपा को 6-9 सीट मिलने का अनुमान सही साबित

    खबर पॉलिटिक्स के चुनाव अनुमानों में हमने कांग्रेस को 10 से 14 सीटें मिलने की बात कही थी। कांग्रेस ने 14 सीटें हासिल की हैं, जो की खबर पॉलिटिक्स के आंकड़े का उच्चतम स्तर हैं। इतना ही नही खबर पॉलिटिक्स ने भाजपा को इन चुनावों में 6 से 9 सीटें मिलने की बात कही थी। चुनावों में भाजपा को मिली 6 सीटें हमारे इस आंकड़े को मोहर लगा रही है, भाजपा की 6 सीटें हमारे आंकड़े का न्यूनतम स्तर है। इसके अलावा निर्दलीयों दो से तीन सीट मिलने का अनुमान भी बिल्कुल सही साबित हुआ है । चुनावों में निर्दलीयों को 3 सीटें मिली हैं। कुल मिलाकर पंचायत चुनावों में खबर पॉलिटिक्स द्वारा लगाए गए अनुमान पूरी तरह से साबित हुए हैं। ये परिणाम पंचायत समिति में कांग्रेस का परचम लहराने वाले व भाजपा को झटका देेनेे वाले साबित हुए हैं।

    कांग्रेस के अंडर करंट की बा हुई सही साबित

    खबर पॉलिटिक्स के डिटेल एनालिसिस में हमने पंचायत चुनाव में कांग्रेस के अंडर करंट की बात कही थी। चुनाव के नतीजों में कांग्रेस को मिला बहुमत इस बात को साबित करता है कि इन चुनावों में जनता में भाजपा के विरोध के चलते कांग्रेस के पक्ष में अंडर करंट प्रवाहित हो रहा था। जिसका असर चुनाव परिणामो में साफ नजर आया और पंचायत समिति में कांग्रेस का परचम लहराने सेे भाजपा को झटका लगा ।

    NH के दोनों तरफ भाजपा के भारी विरोध की बात भी सही साबित

    खबर पॉलिटिक्स में हमने बताया था कि श्रीगंगानगर की ओर जाने वाले नेशनल हाईवे के दोनों तरफ की पंचायतों में भाजपा को तगड़ा झटका लगेगा। क्योंकि इन पंचायतों में पंजाबी बहुल आबादी में रहती है जिसमे कृषि कानूनों को लेकर भाजपा का भारी विरोध है। कल घोषित हुए नतीजों में नेशनल हाईवे के दोनों तरफ की पंचायतों में भाजपा को बुरी तरह पराजय का सामना करना पड़ा है। हाईवे के दोनों तरफ एक भी पंचायत में भाजपा को विजय नहीं मिली है जो इस बात को साबित करती है कि खबर पॉलिटिक्स का दावा बिल्कुल सही था।

    टिब्बा क्षेत्र में भी कांग्रेस ने दी कड़ी टक्कर

    खबर पॉलिटिक्स के चुनाव एनेलाइसिस में हमने भाजपा को टिब्बा क्षेत्र में भी कांग्रेस से कड़ी चुनौती मिलने की बात कही थी। हमने बताया था कि भाजपा नेताओं के आपसी समन्वय और गलत टिकट वितरण के चलते टिब्बा क्षेत्र में भाजपा के मजबूत होने के बावजूद कांग्रेस कड़ी चुनौती पेश करेगी। पंचायत चुनाव के परिणामों से साफ जाहिर है कि टिब्बा क्षेत्र में भी भाजपा अपना गढ़ बचा नहीं पाई है जिसका नतीजा इन चुनावों में भाजपा को क्षेत्र की कई सीटें गंवाकर भुगतना पड़ा है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि खबर पॉलिटिक्स के चुनाव अनुमानों पर परिणामों ने मोहर लगाई है।

    कांग्रेस नेताओं पर जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने  की जिम्मेदारी

    पंचायत चुनाव में सूरतगढ़ की क्षेत्र की जनता ने कांग्रेस पर अपना पूरा प्यार लुटा दिया है। कांग्रेस को अपार समर्थन देते हुए जनता ने 14 सीटें देकर गांवों की सरकार का जिम्मा कांग्रेस को सौंप दिया है। अब प्रधान पद पर बैठने वाले व्यक्ति की यह जिम्मेदारी है कि वह जनता की उम्मीदों पर खरा उतरे। जहां तक कांग्रेस की बात है सन 2008 में इलाके की जनता ने गंगाजल मील को भारी मतों से जीता कर विधानसभा में भेजा था। ये अलग बात है कि सरल स्वभाव व तमाम तरह के विकास कार्य करवाने के बावजूद भ्रष्टाचार के बढ़ते ग्राफ, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और अवसरवादी व चापलूस किस्म के लोगों से घिरे रहने के चलते गंगाजल मील ने आमजन में अपनी लोकप्रियता खो दी। जिसका खामियाजा मील परिवार को पिछले दो चुनावों में भुगतना पड़ा है । वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में जहां खुद गंगाजल मील को वहीं वर्ष 2018 में परिवार के ही हनुमान मील को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। वर्तमान में सूबे में कांग्रेस की सरकार होने के चलते मील परिवार अभी भी इलाके में राजनीतिक रूप से मजबूत है। इसलिए अब जब नगरपालिका के बाद पंचायत समिति में भी मील परिवार यानी कांग्रेस का परचम फहरा रहा है । ऐसे में मील परिवार के लिए मौका है कि वह भाई भतीजावाद और भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी प्रशासन देकर खुद को साबित करें। वरना राजनीति की खासियत है कि इसमें जनता ज्यादा मौके नहीं देती है।

    हुए नामवर में बे निशां कैसे कैसे ।

    जमीन खा गई आसमान कैसे कैसे ।।

    भाजपा नेताओं के लिए आत्ममंथन का समय

    केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के चलते भारी विरोध ने भले ही भाजपा की लुटिया डुबोने में सबसे प्रमुख भूमिका निभाई हो। लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि इलाके में भाजपा के दिग्गज नेता अपनी जमीन खो रहे हैं। यही वजह रही है चुनावों के दौरान भाजपा नेताओं की बॉडी लैंग्वेज जीत का इशारा नहीं कर रही थी। नेताओं के झुके हुए कंधे ये बता रहे थे कि चुनाव परिणाम क्या रहने वाला है। बहरहाल दोनो पार्टियों के नेता किसी कवि की इन पंक्तियों ‘बीति ताहि बिसार दे आगे की सुध लेय’ को याद रखते हुुुए आमजन के हित में काम करेंगेे यही उम्मीद की जानी चाहिए।

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    प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर मजदूरों को बनाया शिकार

    भीनमाल। लोन दिलाने के नाम पर ठगी की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। ताजा मामला जालौर जिले के भीनमाल मेंं सामने आया है। जहां एक ईमित्र संचालक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम लोगों से लाखों की ठगी कर फरार हो गया । ईमित्र संचालक ने आवास योजना का लोन दिलाने के बहाने की श्रमिक कार्ड धारकों से 30 से 40 हज़ार रुपये वसूल लिए ओर चम्पत हो गया। खास बात है कि ई-मित्र पिछले 2 सालो से मजदूरों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लोन दिलाने के नाम पर लूट मचाता रहा लेकिन स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक तक नही लगी। वह भी तब जबकि पंचायत समिति कार्यालय व उपखंड अधिकारी के आवास से महज 100 मीटर की दूरी पर यह ईमित्र चल रहा था। ठगी के लोगों की शिकायत पर पुलिस अब जागी है और आरोपियों को पकड़ने के लिए प्रयास में लगी हुई है।

    पहले बनाये श्रमिक कार्ड फिर दिया प्रधानमंत्री आवास लोन का झांसा

    भीनमाल स्थित मातेश्वरी ई मित्र एण्ड सेवा केंद्र नामक इस ईमित्र के संचालक ने स्थानीय हाथठेला, लारी चालकों, नींबू पानी बेचने वाले, चाय की थड़ी व सब्जी बेचने वाले लोगों को अपना शिकार बनाया। ईमित्र संचालक ने पहले इन लोगों से श्रमिक कार्ड बनाने के नाम पर 300 से ₹500 की वसूल लिए। बाद में शातिर ईमित्र संचालक ने उन्हीं लोगों को वापस कॉल करके बताया कि आपका श्रमिक कार्ड बन गया है,अब श्रमिक कार्ड के आधार पर आपको आवास के लिए आपको 3 लाख़ 97 हजार रुपए मिल सकता है। इसके लिए आपको 40 हजार रुपए अधिकारियो को देने के लिए पहले जमा करवाना होंगे। सरकारी योजना का लाभ पाने की लालच में ई मित्र संचालक को किसी ने 30 हजार तो किसी ने 40 हजार रुपए थमा दिए। इसी तरह दर्ज़नो लोगों से ठगी कर लाखों रुपए लेकर अब यह ईमित्र संचालक फरार हो गया हैं। ई-मित्र पर ताला लगा हुआ है और पीड़ित लोग न्याय की मांग को लेकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।

    अलग-अलग खातों में जमा कराया पैसा.. झांसे में लेने के लिए दी आधार कार्ड की फोटो कॉपी

    इस मामले में ठगी का शिकार हुए लोगों ने बताया कि ई मित्र संचालक की ओर से उन्हें अलग-अलग बैंकों के खाता नंबर दिए गए और यूपीआई आईडी भी दी गई। जिसमे अलग-अलग खातों में 10, 20 या 30 हजार की राशि ट्रांसफर की गई है। संचालक ने पीड़ितों को अपने झांसे में लेने के लिए अपना आधार कार्ड भी दिया। जिस पर ई मित्र संचालक का नाम दिलीप लिखा हुआ है, पता श्रीराम कॉलोनी ओसिया चौराहा गांव तिंवरी जोधपुर जिला लिखा हुआ है। आधार कार्ड के नंबर 994395225653 दर्ज है ।

    भीनमाल पुलिस कर रही मामले की जांच

    भीनमाल पुलिस थाने में पीड़ितों की ओर से दी गई रिपोर्ट के अनुसार जोधपुर जिले के तिंवरी गांव के मुख्य आरोपी दिलीप माली के साथ अन्य 3 लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया है। ये तीन अन्य वो लोग है जिनके खाते में पैसे स्थानीय लोगों ने ट्रांसफर किए थे । अजय देवल, मुकेश प्रजापत व कुलदीप साखला नाम के इन आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

    पहले भी एक ई-मित्र संचालक लगा चुका लोगों को चूना

    भीनमाल में विद्युत विभाग कार्यालय में संचालित एक ईमित्र का संचालक भी लोगों का चूना लगाकर फरार हो चुका है। साल 2018 में इस ईमित्र संचालक ने तकरीबन 1500 बिजली के बिलों पर फर्जी मोहर लगाकर उपभोक्ताओं से बिल की राशि वसूल ली और फरार हो गया। पूरे मामले को लेकर जांच भी हुई लेकिन अभी तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिला है । इसको लेकर विद्युत विभाग ने भी हाथ खड़े कर दिया वहीं कंपनी की ओर से भी लोगों को अभी तक गुमराह किया जा रहा है। बड़ा सवाल हैं कि एक के बाद इसी तरीके से ई-मित्र संचालक स्थानीय लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं लेकिन स्थानीय प्रशासन कार्यवाही करने की बजाय लीपापोती करता नजर आ रहा है।

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    चुनाव में भाजपा के पिछड़ने का अनुमान

    निर्दलीयों के जीतने से रोचक होगा प्रधान का मुकाबला

    सूरतगढ़। सूरतगढ़ पंचायत समिति में लम्बे समय के बाद एक बार फिर कांग्रेस का प्रधान बनेगा ? इन चुनावों में कांग्रेस कितनी सीट हासिल करेगी, भाजपा व निर्दलीयों का प्रदर्शन कैसा रहेगा यह ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब हर कोई जानना चाहता है। मतदान के बाद लगाए जा रहे अनुमानों आधार पर हमने इन सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश की है साथ ही इस सम्भावना को आंकने का प्रयास किया कि क्या पंचायत समिति में अबकी बार कांग्रेस सरकार बनेगी ? लेकिन सबसे पहले बात कांग्रेस के प्रदर्शन की।    

    विकास के वादों से इतर भाजपा विरोध का कांग्रेस को फायदा

    कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के चलते भाजपा के विरोध का फायदा इन चुनावों में कांग्रेस को मिलता साफ दिख रहा है। खासकर श्रीगंगानगर की ओर जाने वाले नेशनल हाईवे के दोनों तरफ की पंचायतों में । इन पंचायतों में सिख समुदाय के लोग बड़ी संख्या में निवास करते हैं जो कृषि कानूनों के चलते भाजपा से नाराज हैं। इसलिए यहां बीजेपी के भारी विरोध के चलते कांग्रेस सीधे तौर पर जीतती दिखाई दे रही हैं । इसके अलावा एक दूसरा कारण जो कांग्रेस के पक्ष में दिखाई दे रहा है वह है इस समय राज्य में कांग्रेस की सत्ता होना। वर्तमान में वोटर इतना समझदार हो चुका है कि वह जानता है की जिस पार्टी की सत्ता है उसी को वोट देने से ही गांव में या उनके इलाके का विकास संभव है। हालांकि यह धारणा पूरी तरह सच नहीं है लेकिन पूरी तरह गलत भी नहीं है। वहीं टिब्बा क्षेत्र से जुड़ी पंचायतों की भी बात करें तो इन इलाकों में भाजपा नेताओं की पकड़ मजबूत है। लेकिन आपसी तारतम्य के अभाव और टिकट वितरण सही नही होने के चलते यहां भी कांग्रेस भाजपा का मुकाबला करती दिख रही है।

    कुल मिलाकर कांग्रेस नेताओं के विकास के दावों पर यकीन करने के बजाय जनता फिलहाल मोदी सरकार के किसान विरोधी कानूनों ओर नीतियों के लिए भाजपा को सबक सिखाने के मूड मे है। जिसका फायदा निश्चित तौर पर कांग्रेस को मिल रहा है।

    चुनावी नतीजों में कांग्रेस को मिल सकती है 10 से 14 सीटें

    चुनावों के बाद दोनों पार्टियों के अपनी-अपनी जीत के दावे हैं । लेकिन मतदान के दौरान अंडर करंट कांग्रेस के पक्ष में चलता दिख रहा है। अगर सीटों की संख्या की बात की जाए तो एक अनुमान के मुताबिक कांग्रेस को 10 से 14 सीटें मिलती दिखाई दे रहे हैं। वहीं अगर भाजपा की बात की जाए तो भाजपा 6 से 9 सीटों के बीच सिमटती दिख रही है । निर्दलीय वह अन्य पार्टियों के प्रत्याशियों की बात की जाए तो 2 से 3 सीटों पर इन्हें जीत मिलती दिख रही है। कुल मिलाकर कहा जाए तो पंचायत समिति में कांग्रेस का प्रधान बनेगा इस बात की संभावना अधिक है

    हज़ारीराम मील की प्रधान पद पर ताजपोशी की तैयारी ?

    चुनावी पूर्वानुमानों की माने तो पंचायत अबकी बार कांग्रेेेस सरकार की पूरी संभावना है ? ऐसे में जहां तक कांग्रेस की बात है हजारीराम मील ही प्रधान के दावेदार होंगे। हालांकि मील परिवार के ही एक अन्य सदस्य हेतराम मील भी चुनाव मैदान में है और वह खुद भी चुनावों में जीत हासिल करते दिख रहे हैं । लेकिन इस बात की उम्मीद कम है कि हजारीराम मील के जितने की स्थिति में मील परिवार हेतराम मील को प्रधान के लिए आगे करेगा। वैसे इन चुनावों पर गौर किया जाए तो चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी दूसरी सीट के मुकाबले हजारीराम मील को जिताने में सबसे ज्यादा ताकत लगाई है। खुद गंगाजल मील, हनुमान मील ओर उनकी टीम के लोगों ने जीत के लिए दिन रात एक कर दिये। ये इस बात का संकेत है कि मील परिवार हजारीराम मील को ही प्रधान का दावेदार बना चुका है। फिर भी अगर परिणामों में कोई अनिश्चितता आती है तो मील परिवार हेतराम मील का नाम प्रधान पद के लिए आगे कर सकता है।  

    पूर्व प्रधान पूनियां के लिए बहुत कठिन है डगर पनघट की !

       कांग्रेस में मील परिवार को छोड़ दे तो प्रधान पद के दूसरे सबसे बड़े दावेदार पूर्व प्रधान साहब राम पूनियां है । यह अलग बात है कि मील परिवार से राजनीतिक विरोध के चलते उन्हें टिकट के लिए आलाकमान तक अपनी बात पहुंचानी पड़ी थी। हालांकि पूनियां की टिकट के लिए मील परिवार का राजी होना भी एक सोची समझी रणनीति की हिस्सा माना जा रहा है। क्यूंकि पूनियां के रूप में मील परिवार को भाजपा के प्रधान पद के सबसे बड़े दावेदार पूर्व प्रधान चंदूराम लेघा के पौत्र राहुल लेघा को शिकस्त देने का अचूक हथियार मिल गया था। यही वजह थी कि उन्होंने पूनियां की टिकट की हां कर दी । ये अलग बात ही कि एक तरफा दिख रहे इस मुकाबले को राहुल लेघा ने रोमांचक स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है।

    पूनियां की प्रधान पद की दावेदारी की बात करें तो हाल फिलहाल उनके प्रधान बनने की बात दूर की कोड़ी है । क्योंकि एक और कांग्रेस जहां आराम से बहुमत तक पहुंचती दिख रही है । वहीं दूसरी और टिकटों के वितरण में मील परिवार की प्रभावी भूमिका रही है । ऐसे में जीते हुए प्रत्याशी मील परिवार को छोड़कर पुनियां का साथ देंगे, इस बात की संभावना ना के बराबर है। पूनियां का प्रधान बनना केवल और केवल इस बात पर निर्भर है कि कांग्रेस और भाजपा दोनो बहुमत से दूर रहे और ज्यादा निर्दलीय जीते जिसकी उम्मीद बहुत कम है।

    अब है चुनाव परिणामों का इंतजार

    बहरहाल चुनावी अनुमानों को छोड़कर हमें 21 तारीख को घोषित होने वाले परिणामों का इंतजार करना चाहिए । जिसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि पंचायत समिति में अबकी बार कांग्रेस सरकार या फिर कोई और …।

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    पुराने वीडियो वायरल कर चुनावी लाभ लेने की कोशिश में भाजपा भी नही पीछे

    विवादित वीडियो वायरल करने की टेक्टिस क्या हो पाएगी कारगर ?

    सूरतगढ़। पंचायत चुनाव को लेकर अब चुनाव प्रचार अंतिम दौर में है । भाजपा व कांग्रेस सहित सभी पार्टियों के प्रत्याशी और नेता फील्ड में जनता को तमाम तरह-2 के वादों से बहलाने की कोशिश कर रहें हैं। उसी समय सोशल मीडिया पर इन दिनों बड़े नेताओं के विवादित वीडियो धड़ाधड़ शेयर किए जा रहे हैं। हालांकि इन वीडियो में ज्यादातर वीडियो पुराने हैं। लेकिन मौका चुनाव का है तो अंग्रेजी कहावत ‘नो स्टोन अनटर्न्ड’की तर्ज पर इन वीडियो के माध्यम से दोनों पार्टियों के समर्थक विपक्षी पार्टी की कार्यशैली और उसके नेताओं के आचरण पर सवाल खड़े रहे हैं।

    क्या है इन विवादित वीडियो में..

    जहां तक इन वीडियो की बात है तो इनमें से दो वीडियो भाजपा विधायक रामप्रताप कासनिया से जुड़े हुए हैं। जिनमे से एक वीडियो चुनाव प्रचार के दौरान एक व्यक्ति से वाद-विवाद का है जिसमें विधायक रामप्रताप कासनिया काफी उग्र नजर आ रहे हैं । वही एक दूसरा वीडियो संभवतः प्रशासन गांवों के संग अभियान का है इस वीडियो में भी विधायक रामप्रताप कासनिया कुछ लोगों से उलझते दिख रहे हैं। वही एक तीसरा वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है जोकि नगरपालिका क्षेत्र में एक अतिक्रमण हटाने के दौरान का है जिसमें एक युवती अतिक्रमण हटाने में लगभग रोते हुए भेदभाव का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगा रही हैं। हालांकि इन वीडियो और इनसे जुड़े घटनाक्रम से ज्यादातर जागरुक व्यक्ति परिचित है। फिर भी ये समझना जरूरी है कि विधायक रामप्रताप कासनिया को नजदीक से जानने वाले लोग ये जानते हैं कि अपनी साफगोई के चलते अपने समर्थकों से भी कड़वी बात वो कह देते हैं ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर विपक्षियों द्वारा सामान्य या फिर साजिशन किये गए सवालों से उनका टेम्पर हाई होना स्वाभविक है, जिसका नतीजा ये दोनों वीडियो हैं। वैसे विधायक जी को भी शायद यह उम्मीद नहीं रही होगी कि इन परिस्थितियों में एक तीसरी आंख घटनाक्रम को कैद कर रही है और कैद किए गए ये दृश्य चुनावी समर में उनके खिलाफ हथियार की तरह प्रयोग में लाए जाएंगे।

    भाजपा समर्थक भी वायरल कर रहे पुराने वीडियो

    दूसरी ओर नगरपालिका प्रशासन के अतिक्रमण हटाने के दौरान का एक युवती का वीडियो शेयर किए जाने का मामला भी कुछ ऐसा ही है। विधायक कासनिया के वायरल किये जा रहे  वीडियो के काउंटर में भाजपा समर्थक इस वीडियो को वायरल कर रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या नगरपालिका क्षेत्र का यह वीडियो पंचायत चुनाव के मतदाताओं पर कोई प्रभाव डालेगा ?

    क्या इन वीडियो से मतदाताओं का मन बदलेगा !

    दोनों पार्टियों के समर्थक इन वायरल वीडियो के माध्यम से पंचायत चुनावों में फायदा उठाने का ख्वाब पाले हुए हैं। परंतु हमें नहीं लगता है कि पंचायत का मतदाता इतना भोला है कि वह अब इन वीडियो को देखकर अपनी राय बनाएगा। गांवों की राजनीति में जातीय समीकरण से लेकर स्थानीय मुद्दे हावी रहते हैं इसके अलावा प्रत्याशी के मतदाताओं से व्यक्तिगत सम्बन्ध भी अहम रोल अदा करते हैं। ऐसे में चुनावी मौसम में सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे हैं यह वीडियो केवल और केवल विरोध का निकृष्ट तरीका है जोकि दोनों पार्टियों के समर्थक अपना रहे हैं। एक दूसरे के मानमर्दन से राजनीतिक फायदा उठाने की यह कोशिश राजनीति के निम्नतम स्तर पर जाने का इशारा मात्र है। 

         

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    मारवाड़ी युवा मंच और बैद परिवार द्वारा सयुक्त रूप से करवाया गया निर्माण

    सूरतगढ़। मुख्य कल्याण भूमि में अंतिम संस्कार के लिए मारवाड़ी युवा मंच व स्वर्गीय कुंदनलाल बैद की स्मृति में संयुक्त रूप से निर्मित 20 x 50 साइज के शैड का रविवार को लोकार्पण किया गया ।
    स्वर्गीय कुंदन लाल बैद की स्मृति में निर्मित शैड का लोकार्पण बैद परिवार के वरिष्ठ सदस्य व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष विजय कुमार बैद, पुत्र भंवर लाल बैद, राजेंद्र कुमार बैद, लोकेश कुमार बैद, सुशील जैन, मारवाड़ी युवा मंच के अध्यक्ष महेंद्र बैद, सचिव अंकित कुक्कड़, कोषाध्यक्ष अंजनी चौधरी, प्रोजेक्ट चेयरमैन मनीष जसूजा, कल्याण भूमि के अध्यक्ष महेश सेकसरिया, कोषाध्यक्ष संजय बैद ने विधिवत पूजा अर्चना करके किया। पुजारी पंडित संजय शर्मा ने मंत्रोच्चारण के साथ पूजा करवाई ।
    इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में व्यापार मंडल के सचिव मनोज कुमार सोमानी , किरयाना विक्रेता संघ के अध्यक्ष किशोर कुमार गाबा, पार्षद हरीश दाधीच, पूर्व पार्षद सत्यनारायण छिंपा, स्वर्णकार समाज के सुभाष सोनी, समाजसेवी तारा सिंह, अग्रवाल समाज के अमर अग्रवाल, भरत राजपुरोहित, बैद परिवार से श्रीमती ज्योति, श्रीमती सरोज, श्रीमती माधुरी , भीम जोशी सहित शहर के गणमान्य लोग व कल्याण भूमि समिति व मंच के सदस्य मौजूद रहे । मंचासीन अतिथियों ने मारवाड़ी युवा मंच के कार्यों की सराहना करते हुए भविष्य में भी इसी तरह सहयोग करने की बात कही । कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए डॉ आर आर यादव ने मारवाड़ी युवा मंच द्वारा किए गए समाजसेवी कार्यों की जानकारी दी ।

    मारवाड़ी युवा मंच के अध्यक्ष महेंद्र बैद ने अतिथियों का आभार प्रकट करते हुए भविष्य में भी कल्याण भूमि में सहयोग करने के लिए प्रोजेक्ट तैयार करने की बात कही । कल्याण भूमि के कोषाध्यक्ष संजय बैद, नवल किशोर भोजक ने दानदाता अतिथियों का आभार प्रकट किया ।

    खबर पॉलिटिक्स व्यू

    मुख्य कल्याण भूमि में लंबे समय से अंतिम संस्कार हेतु बड़े शैड की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। खासकर बरसात के मौसम में अंतिम संस्कार में बेहद परेशानी का सामना दाह संस्कार के लिए आए व्यक्तियों को करना पड़ता था। शैड नहीं होने के चलते दाह संस्कार में बरसात के चलते विलम्ब भी होता था। ऐसे में मारवाड़ी युवा मंच की प्रेरणा व सहयोग से बैद परिवार द्वारा इस शैड के निर्माण से निश्चय ही अंतिम संस्कार में होने वाली परेशानियों से निजात मिलेगी। मारवाड़ी युवा मंच की भाँति अन्य संस्थाओं व समाजसेवी भामाशाहों को इस तरह की व्यवस्थाओं के लिए आगे आना चाहिए।

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    पंचायत चुनाव में दोनों नेताओं की साख दाव पर

    सूरतगढ़। राजनीतिक जीवन जीने वाले व्यक्तियों के लिए चुनाव जीवन के सफर का वह महत्वपूर्ण पड़ाव है जो उनके भावी राजनीतिक जीवन की दिशा तय करता है । सूरतगढ़ में पंचायत समिति सदस्यों के लिए तीसरे चरण में 18 दिसंबर को मतदान होने जा रहा है। हालांकि डायरेक्टर पद ज्यादा महत्व का नहीं है सिवाय इसके कि गांवों की सरकार के मुखिया यानी कि प्रधान का चुनाव डायरेक्टर द्वारा किया जाता है। इसलिए सूरतगढ़ पंचायत समिति में गांवों की सरकार के मुखिया यानि कि प्रधान के पद पर कौन सी पार्टी कब्जा करती है राजनीतिक हलकों में फिलहाल ये बड़ा सवाल है। लेकिन पिछले चुनावों से इतर इस बार के चुनाव कुछ अलग है, अलग इसलिए है क्योंकि इस चुनाव में एक और भाजपा के दिग्गज नेता व वर्तमान विधायक रामप्रताप कासनिया तो दूसरी ओर इलाकेे में फिलहाल कांग्रेस का पर्याय कहे जाने मील परिवार का राजनीतिक भविष्य बहुत कुछ इस चुनाव के परिणामों पर निर्भर रहने वाला है। 

    इसकी वजह भी है पहले बात मील परिवार की करें तो साफ है कि पिछले दो विधानसभा चुनावों में लगातार मिली हार से राजनीतिक हलकों मेंं यह संदेश गया है जमीनी स्तर पर आम लोगों के बीच मील परिवार की पकड़़ कमजोर है। ऐसे में यह चुनाव मील परिवार के लिए खुद को साबित करने का चुनाव है। उनकी राजनीतिक साख इस चुनाव मेंं दांव पर लगी हुई। यदि यह चुनाव मील परिवार नहीं जीत पाता है तो 2023 के विधानसभा चुनाव में सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र से उनकी दावेदारी भी लगभग खत्म हो जाएगी । क्योंकि आलाकमान लगातार हार के बाद शायद ही मील परिवार को चौथी बार टिकट देने का जोखिम लेगा । वैसे भी स्थानीय कांग्रेस में मील परिवार के विरोधियों की कोई कमी नहीं है। टिकट के दावेदार पार्टी के इन नेताओं को आगामी विधानसभा चुनाव में आलाकमान के सामने खुद को विकल्प केेे रूप में रखने का रास्ता इन चुनावों में मील परिवार की हार में दिख रहा है । ऐसे में यह तय है कि टिकट के दावेदार ये नेता कभी नहीं चाहेंगेे कि मील परिवार जीत हासिल करें। इस बात को मील परिवार भी समझ रहा है । यही वजह हैै कि मील परिवार ने इस चुनाव को अग्निपथ मानतेे हुए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है । मील परिवार इन चुनाावों के लिए कितना गंभीर है इस बात का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि रविवार को जब जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद राम मेघवाल विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं की बैठक ले रहे थे, तब न तो गंगाजल मील और नहीं ही हनुमान मील उपस्थित थे । बात साफ है मील परिवार का इस समय मुख्य उद्देश्य इन चुनावों में किसी भी कीमत पर जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक जमीन बचाना है।

    अब बात भाजपा के दिग्गज नेता और विधायक रामप्रताप कासनिया की। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद रामप्रताप कासनिया बड़े राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी के रूप में उभरे थे। लेकिन उसके बाद से उनके समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओंं में उनकी छवि लगातार कमजोर हुई है । ये सही है कि राज्य में कांग्रेेेस की सरकार होने के चलते प्रशासन पर विधायक रामप्रताप कासनिया की उतनी पकड़ नहीं है जितनी कि सत्ता पक्ष के एक विधायक के होती हैं । फिर भी क्योंकि वे चुने हुए विधायक हैं तो लाजमी है समर्थकों व कार्यकर्ताओं ने विधायक जी से काफी उम्मीदेंं लगा ली। अब पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक इस बात को लेकर निराश है कि जिन उम्मीदों को लेकर उन्होंने कासनिया को जिताने के लिए दिन रात एक कर दिए थे वे अब उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। राजनीतिक हलकों और भाजपा केेे आम कार्यकर्ताओं मे विधायक रामप्रताप कासनिया का यह डायलॉग ‘ मैंं के करू मेरी सुणे कोनी,म्हारी सरकार कोनी’ बेहद चर्चित हो चुका है। हालांकि खुद विधायक रामप्रताप कासनिया इस बात को लेकर सफाई दे चुके हैंं कि उन्होंने यह बात कभी नहींं कहीं। लेकिन इस एक डायलॉग ने विधायक रामप्रताप कासनिया का बहुत राजनीतिक नुकसान कर दिया है। इसके अलावा  पालिका चुनाव में पार्टी की हार और उसके बाद भाजपा के ही 1 चुने हुए पार्षद द्वारा पालिकाध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन मेंं वोट करने से भी यह मैसेज निकल कर आया कि कासनिया की पार्टी पार्षदों  पर पकड़ नहींं है । तमाम घोटालों और सत्ता पक्ष के सरंक्षण में भूमाफिया द्वारा खुलेआम सरकारी भूमि को हड़पने के बीच विपक्ष का फर्ज निभाने की जगह कासनिया ने चुप्पी साध ली तो उन्हीं की पार्टी केे पार्षद तमाशबीन बने रहे और विपक्षी कांग्रेस के समर्थन में खड़े नजर आए। इसकी वजह क्या रही यह तो वे जाने। लेकिन इन तमाम परिस्थितियों ने भाजपा के इस राजनीतिक दिग्गज के कद को आमजन खासकर शहरी क्षेत्र की नजर मे बौना कर दिया है। ऐसे हालात में रामप्रताप कासनिया के लिए यह जरूरी है कि वह गांव की सरकार भाजपा की बनाकर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को मुंहतोड़ जवाब दे। अगर कासनिया इसमें कामयाब रहते हैं तो इस बात में कोई संदेह नहीं है कि 2023 में भी वे पार्टी टिकट के प्रबल दावेदार होंगे।

    कुल मिलाकर  इन चुनावों की हार दोनो राजनीतिक पार्टियों के इन बड़े नेताओं के लिए राजनीतिक जीवन में ताबूत की आखिरी कील साबित हो सकती है। जिस भी पार्टी को हार मिलेगी उसके सबसेेेे बड़े नेता का राजनीतिक भविष्य चौपट हो जाएगा है। वहीं जीतने वाली पार्टी के नेता को राजनीतिक ऑक्सीजन भी इस चुनाव से मिलेगी। सीधे तौर पर हमारा मानना है यह चुनाव कांग्रेस में मील परिवार और भाजपा के दिग्गज रामप्रताप कासनिया केेे राजनीतिक भविष्य तय करने जा रहा है।

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    महफिल में इस ख्याल से फिर आ गया हूं मैं

    शायद मुझे निकाल कर पछता रहे हैं आप ।।

    सूरतगढ़ । समाचारों की दुनिया में खासकर जब बात सूरतगढ़ के लोकल समाचारों की हो हमेशा से ही एक निष्पक्ष और बेबाक मीडिया प्लेटफार्म की आवश्यकता रही है। सत्ता के खौफ से भयाक्रांत होकर या फ़िर चापलूसी में डूबकर की जा रही पत्रकारिता के बीच एक ऐसे मीडिया प्लेटफार्म की आवश्यकता थी जोकि बेबाक हो और बगैर किसी दवाब या खौफ के समाचारों को आप तक पहुंचा सके। इसीलिए हमने खबर पॉलिटिक्स के नाम से वेब पोर्टल लांच किया । ये हमारी धारदार और बेबाक रिपोर्टिंग का नतीजा था कि इस पोर्टल ने शहर के राजनीतिक, बौद्धिक और जागरूक पाठक वर्ग में बहुत जल्दी अपनी पहचान बनाई। हमने खबर पॉलिटिक्स पोर्टल पर सत्ता से लोहा लेते हुए समाचारों का प्रकाशन किया। जिसके चलते निःसन्देह आप सब सुधि पाठकों ने इस पोर्टल को बेहद प्यार दिया।

    इसी का नतीजा था कि खबर पॉलिटिक्स पर ज्यों ही कोई पोस्ट पब्लिश होती थी तो एकाएक ही पोर्टल पर ट्रैफिक बूम होने लगता था। खबर पोस्ट होते ही पोर्टल पर ट्रैफिक का बूम इस बात की तस्दीक करता है कि पाठकों को इस पोर्टल पर खबरों के पोस्ट होने का इंतजार रहता था। इस पोर्टल पर हमने सदैव भ्रष्टाचार और राजनीति से जुड़ी खबरों को प्रमुखता दी। लेकिन पिछले कुछ समय से तकनीकी दिक्कतों के साथ ही कुछ अन्य कारणों से खबर पॉलिटिक्स पोर्टल पर समाचारों का प्रकाशन नहीं हो पाया। लेकिन अब एक बार फिर हम खबरों की दुनिया में तहलका मचाने के लिए आपके बीच उपस्थित हैं। एक बार फिर नए फ्लेवर और पुराने तेवर के साथ खबर पॉलिटिक्स पोर्टल आपके मोबाइल और कंप्यूटर के माध्यम से आपको शहर के साथ-साथ आसपास के इलाके की सूचनाओं ओर खबरों से अपडेट रखेगा। खबरों के पीछे की पॉलिटिक्स को एक्सपोज़ करना और भ्रष्टाचार पर वार के मकसद के साथ खबरों के माध्यम से सजग समाज की स्थापना ही हमारा एकमात्र ध्येय हैं। हम एक बार फिर हाज़िर है पत्रकारिता से समाज मे बदलाव की मुहिम के साथ। हालांकि ये एक मुश्किल काम है लेकिन सुधि पाठक और शहर का बौद्धिक वर्ग हमारा साथ देगा तो निश्चिय ही हम एक बार फिर खबरों की दुनिया के सरताज होंगे। आपके सहयोग की आशा के साथ…..

    – राजेन्द्र पटावरी

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    शिविर में रक्तदान करते मंच के पूर्व पदाधिकारी

    सूरतगढ़। कोरोना काल में शहर के एक मात्र मैत्री ब्लड बैंक में रक्त की कमी हो गई है। जिसके चलते आने वाले दिनों में जरूरतमंद रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे हालात में सामाजिक कार्यों में अग्रणी रहने वाले शहर के मारवाड़ी युवा मंच द्वारा सार्थक पहल करते हुए सात दिवसीय रक्तदान शिविर शुरू किया है।

    शिविर में रक्तदान करते मंच के पूर्व अध्यक्ष भरत ऋषि रांका


    रविवार को महावीर जयंती के अवसर पर शुरू किया गया यह रक्तदान शिविर 1 मई तक चलेगा। रक्तदान सप्ताह के दौरान मैत्री ब्लड बैंक में रोजाना सुबह 10:00 बजे से 2:00 बजे तक कोई भी इच्छुक व्यक्ति रक्तदान कर सकेगा। इस कैम्प के पहले दिन मंच के पूर्व प्रान्तीय रक्तदान संयोजक (राजस्थान) व शाखा के पूर्व अध्यक्ष भरत ऋषि रांका, शाखा सचिव अंकित कुक्कड़, शाखा रक्तदान संयोजक गोपाल कोठारी सहित 5 जनो ने रक्तदान किया। इस कार्य में अध्यक्ष महेंद्र बैद व कोषाध्यक्ष अंजनी चौधरी सहित ब्लड बैंक के सुनील योगी व विजेंद्र सिंह का सहयोग रहा। इस अवसर पर मंच की ओर से शहर के सभी रक्तदाता से शिविर में ज्यादा से ज्यादा रक्तदान की अपील की है। जिससे कि कोविड-19 की इन विषम परिस्थितियों में जरूरतमंद लोगों को मैत्री ब्लड बैंक के माध्यम से रक्त उपलब्ध कराया जा सके।

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    क्या मील परिवार की राजनीतिक जड़ों में मट्ठा डालने की तैयारी में है चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा ? सोशल मीडिया पर इन दिनो वायरल हो रही एक ऑडियो क्लिप कुछ-कुछ ऐसा ही इशारा दे रही है। इस ऑडियो क्लिप में कौन लोग है जो आपस में बातचीत कर रहे हैं ? इसके बारे में अभी तक कोई जानकारी निकलकर सामने नहीं आई है। हालांकि खबर पॉलिटिक्स भी इस ऑडियो क्लिप की सत्यता को लेकर कोई दावा नही करता है । लेकिन इस ऑडियो क्लिप के वायरल होने के बाद शहर की राजनीति से जुड़े कई दिग्गजों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल अवश्य खड़े हो गए हैं ,जिनका जवाब इस शहर की पब्लिक जानना चाहती है। यह ऑडियो क्लिप दो व्यक्तियों के बीच हुए टेलीफोनिक वार्तालाप की है । इस ऑडियो क्लिप में फोन करने वाले व्यक्ति को सामने वाला व्यक्ति किसी सुरेंद्र नामक व्यक्ति के प्लॉट के बारे में बता रहा है । यह व्यक्ति आपसी वार्तालाप में बताता है कि नगरपालिका चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा कब्जे के प्लाटों में हिस्सा मांगते है । ऑडियो क्लिप के अनुसार प्लॉट में हिस्सा मांगते समय चेयरमैन कालवा ऊपर से दबाव होने की बात करते हैं। वैसे आपको पता ही है कि खबर पॉलिटिक्स ब्लॉग के माध्यम से हमने शहर में भू-माफियाओं और राजनीतिज्ञों के गठजोड़ पर कई समाचारों का प्रकाशन किया। कई मौकों पर हमने भू माफियाओं द्वारा बेशकीमती भूमि पर किए गए कब्जों के सचित्र समाचारों का प्रकाशन भी किया था। लेकिन क्या मजाल चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा या फिर पालिका प्रशासन कोई कार्रवाई करता ! ऐसे में जब ऑडियो क्लिप के वायरल होने के बाद चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा की और से कोई बयान सामने नही आया है तो क्या ये मान लिया जाए कि यह ऑडियो क्लिप शहर में राजनीतिज्ञों की मिलीभगत से चल रहे सरकारी संपत्ति की लूट के नैक्सस का चेहरा बेनक़ाब करती है और इन बेनक़ाब हुए चेहरों में एक चेहरा हमारे मास्टरजी का भी है ? क्यों कि यदि मास्टर जी सरकारी संपत्ति की बंदरबांट में शामिल नहीं है तो क्या उन्हें अपने ऊपर इस ऑडियो क्लिप के जरिए लग रहे आरोपों पर अपना मत स्पष्ट नहीं करना चाहिए ? इसके अलावा यदि ऑडियो क्लिप को झूठ मान भी लिया जाए तो बड़ा सवाल है कि मास्टर जी ने अब तक झूठी ऑडियो क्लिप को वायरल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नही की ? क्योंकि इस ऑडियो क्लिप में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी हनुमान मील द्वारा मामला सामने आने पर चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा को पंचायत में लताड़ने का भी दावा किया गया है तो फिर ऑडियो क्लिप से उठ रहे सवालों का जवाब हनुमान मील और मील परिवार की तरफ से भी आना चाहिए ? वैसे भी हनुमान मील आने वाले विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस का चेहरा रहने वाले हैं इसमें शायद ही किसी को संदेह है ! ऐसे में हनुमान मील को भी साफ करना चाहिए कि अगर ऑडियो क्लिप सही है तो उन्होंने इस तरह की बात सामने आने के बाद चैयरमेन कालवा के खिलाफ क्या कड़ी कार्रवाई की ? क्यों कि इतने बड़े मामले में केवल लताड़कर छोड़ देना गले नही उतरता है ! दूसरी और अगर यह क्लिप मेनूप्लेटेड है जैसा कि कुछ लोगों का मानना है तो फिर मील परिवार को अवश्य मालूम होगा कि वो कौन हैं जो मील परिवार के बहाने चेयरमैन कालवा के मानमर्दन का षडयंत्र रच रहा है ? बहुत से ऐसे ही सवाल है जिनके जवाब सत्ता पक्ष को देने चाहिए ।


    वैसे सवाल शहर में विपक्ष होने का दावा करने वाले नेताओं से भी बनता है कि जब शहर की बेशकीमती सरकारी संपति को नगरपालिका प्रशासन की मिलीभगत से लूटा जा रहा है तो चुने हुए विपक्षी पार्षद क्यों चुप्पी साधे हुए हैं ? क्यों विपक्ष के पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर बड़े जनप्रतिनिधियों तक इतने संगीन आरोपों के बावजूद मुंह मे दही जमाये हुए हैं।
    खैर उम्मीद की जानी चाहिए कि ऑडियो क्लिप पर कठघरे में खड़े जिम्मेदार लोग आगे बढ़कर अपना पक्ष रखेंगे ! लोकतंत्र ने जनता ही मालिक है तो उसे सच का पता भी होना चाहिए। वरना सुपरस्टार राजेश खन्ना पर ‘रोटी’ फ़िल्म में फिल्माया गया ये गाना तो आपने सुना ही होगा !

    ये जो पब्लिक है सब जानती है ये जो पब्लिक है।
    अंदर क्या है बाहर क्या है ये सब कुछ पहचानती है……।।

    –राजेेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब।

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    सूरतगढ़ । नगरपालिका चेयरमैन मास्टर कालवा इन दिनों काफी खुश हैं। क्योंकि पिछले दिनों हुई भूखंडों की बोली के बाद पालिका का खाली खजाना एकबारगी भर गया है। वहीं राज्य सरकार ने भी पालिका को विभिन्न योजनाओं के लिए एक बड़ी राशि आवंटित की हैं। इसके अलावा मास्टर जी के खुश होने की दूसरी वजह ईओ मिलखराज चुघ का एपीओ होना भी है। वैसे ईओ चुघ की छुट्टी के पीछे कमीशन के खेल की कहानी भी सामने आ रही है।

    सूत्रों के मुताबिक मास्टरजी का ईओ चुघ के साथ काफी समय से 36 का आंकड़ा चल रहा था। जिसके चलते मास्टरजी ईओ को हटाना चाह रहे थे। लेकिन पिछले दिनों जब नगरपालिका को भूखंडों की नीलामी से करीब 4 करोड रुपए की आय हुई और राज्य सरकार ने भी करीब 3 करोड रुपए की राशि विभिन्न योजनाओं के लिए सूरतगढ़ नगरपालिका को आवंटित की तो मास्टर जी एक बार फिर सक्रिय हो गये। क्योंकि अगर सात-आठ करोड रुपए की इस राशि से ठेकेदारों को चेक काटे जाते तो कुल 17 परसेंट में से करीब 4% कमीशन ईओ चुघ को भी मिलता। यानी कि करीब 30 लाख रुपये । सो मास्टरजी ईओ को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए बड़े नेताजी को फीडबैक देना शुरू कर दिया । आखिरकार मास्टरजी नेताजी को कन्विंस करने में कामयाब हो गये। नतीजा ईओ चुघ को एपीओ करने के आदेश जारी हो गए। ईओ को रवानगी देने के बाद मास्टर जी ने सहायक अभियंता सुशील कुमार सियाग को अधिशासी अधिकारी का कार्यभार दिलवा दिया है। परन्तु नए नियमों के अनुसार आरएमएस यानी कि राजस्थान म्युनिसिपालिटी एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के कर्मचारी को ही ईओ के पद पर लगाया जा सकता है। क्योंकि अभियंता सियाग आरएमएस सेवा के अंतर्गत नहीं आते , जिसका सीधा सा अर्थ है कि वे इस सीट पर कुछ ही दिनों के मेहमान हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या मास्टरजी नहीं चाहते थे कि ईओ चुघ नगरपालिका खजाने में पड़ी करीब सात से करोड रुपए की राशि के भुगतान के चैक काटते और उन्हें कमीशन की राशि मिलती ? ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पहले तो मास्टरजी ने नगरपालिका फंड में राशि होने के बावजूद करीब 1 माह से ठेकेदारों को भुगतान करने की सहमति नहीं दी और इसी बीच ईओ चुघ को एपीओ करवा दिया। ईओ के एपीओ होने के बाद यह माना जा रहा है कि अब अगले कुछ ही दिनों में कार्यवाहक ईओ द्वारा ठेकेदारों को भुगतान के लिए चेक काटे जाएंगे। लेकिन यहां पर एक सवाल यह भी पैदा होता है कि क्या कार्यवाहक वर्तमान ईओ तक 4% का कमीशन पहुँचेगा ? हमे लगता है कि ऐसा नहीं होनेे वाला है ! क्योंकि यह पूरा खेल ही कमीशन की 4 प्रतिशत राशि की बंदरबांट के लिए रचा गया है। वैसे 30 लाख रुपये कोई छोटी रकम नही है बड़ों बड़ों का ईमान डोल सकता है। अब इस बंदरबांट में कौन – कौन शामिल होगा, आप खुद इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं। वैसे इस बात की भी चर्चा है कि कमीशन का हिस्सा ऊपर तक पहुंचेगा । यूं मास्टरजी खुद को भले ही ईमानदारी की सर्फ से धुला हुआ बताते रहें हैं लेकिन पालिका में ठेकेदारों से चेयरमैन के नाम पर वसूले जाने वाले 4% कमीशन को लेकर पिछले डेढ़ साल से मास्टर जी ने एक भी बयान नहीं दिया है । ऐसे में क्या हम ये मान लें कि ईओ की तरह करीब 30 लाख रुपये का कमीशन मास्टरजी तक भी पहुंचेगा ? वैसे इसमें ईओ के हिस्से आने वाले 30 लाख के बंटवारे से मिलने वाली रकम शामिल नहीं है । कुल मिलाकर जब मास्टरजी की पांचो उंगलियां घी में और सिर कढ़ाई में हैं तो मास्टर जी खुश क्यों ना हो ! पर जाते-जातेे मास्टर जी के लिए किसी शायर की यह पंक्तियां याद आ रही है।

    कागज का यह लिबास बदन से उतार दे।

    बादल बरस गया तो किसे मुंह दिखाएगा ।। –

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    इंदिरा सर्किल पर नीलामी में प्रस्तावित भूखंडों का प्लान

    सूरतगढ़। नगरपालिका प्रशासन द्वारा पिछले डेढ़ साल से सरकारी संपत्ति की लूट और बंदरबांट का खेल चल रहा है। लेकिन इस शहर का भाग्य कहें या फिर यहां के कुछ जागरूक लोगों की कोशिशों का फल । नगरपालिका के भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने जब-जब शहर की करोड़ों की संपत्ति को औने पौने में लुटाकर अपनी जेबे भरने का सपना देखा तब-तब ऐसे लोगों को मुंह की खानी पड़ी है। ताजा मामला इंदिरा सर्किल पर सार्वजनिक निर्माण विभाग और नेशनल हाईवे के कब्जे वाले भूखंड की नीलामी का है। भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे बाबू लालचंद सांखला को जब कार्यवाहक ईओ बनाकर सूरतगढ़ नगरपालिका में लाया गया था, तभी से इस भूखंड के बंदरबांट की प्लानिंग की जा रही थी। पहली बार जब सितम्बर 2019 में इस भूखंड के बोली निकाली गई , तब पूर्व नगरपालिका चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल की शिकायत के बाद जिला प्रशासन के आदेश पर बोली को रोक दिया गया था। उसके बाद पालिका के अधिकारियों ने बीकानेर रोड़ पर पूर्व विधायक हरचंद सिंह सिद्धू के निवास के सामने सार्वजनिक निर्माण विभाग के श्रमिक विश्रामगृह की बेशकीमती व्यवसायिक भूमि पर आवासीय प्लाट काटने की योजना तैयार कर ली। लेकिन ऐन मौके पर पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल और एडवोकेट्स पूनम शर्मा की याचिका पर न्यायालय ने नीलामी प्रक्रिया पर स्टे कर दिया। भूखण्डों की नीलामी से सरकारी माल की लूट और कमीशन खोरी का सपना देख रहे हैं भ्रष्ट अधिकारियों के लिए यह दूसरा झटका था।  लेकिन अंधेर नगरी चौपट राजा वाले इस शहर में भ्रष्टाचार की नित नई इबारत लिखने वाले वाले लोग कहाँ मानने वाले थे । सो उन्होंने एक बार फिर इंदिरा सर्किल पर स्थित भूखंड कि नीलामी प्रक्रिया पर लगी रोक को हटाने के लिए दवाब बनाना शुरू कर दिया । स्थानीय कांग्रेस नेताओं के दवाब और पालिका प्रशासन द्वारा वित्तीय हालत खराब होने की दुहाई के बाद जिला प्रशासन के इशारे पर उपखंड अधिकारी ने भूखंड पर नगरपालिका का स्वामित्व बताते हुए रिपोर्ट कर दी। जबकि सन 2005 में तात्कालिक उपखंड अधिकारी ने पालिका प्रशासन को इस भूखंड की नीलामी नहीं करने के आदेश दिए थे। वैसे भी राजनीतिक व्यक्तियों की डिज़ायर के मोहताज उपखंड अधिकारी से कोई क्या उम्मीद करता। उपखंड अधिकारी की रिपोर्ट से नगरपालिका के लिए एक बार फिर भूखंड की नीलामी का रास्ता साफ हो गया। पालिका प्रशासन ने 8 मार्च को नीलामी की घोषणा करते हुए सुचना जारी कर दी परन्तु जैसा कि किसी शायर ने कहा है

    मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है।

    वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है।। 

    ईस बार भी भ्रष्ट लोगों के सपने पूरे नहीं हो सके। क्योंकि अबकी बार सार्वजनिक निर्माण विभाग और नेशनल हाईवे की याचिका पर माननीय न्यायालय ने मामले का निस्तारण होने तक नीलामी पर स्टे कर दिया है।

    पालिका की नियत पर खड़े हो रहे सवाल

    8 मार्च 2021 को होने वाली नीलामी की सार्वजनिक सूचना

    इस पूरे प्रकरण में नगरपालिका प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि नगरपालिका ने भूखंडों की जो नीलामी निकाली उसके अनुसार भूखंड संख्या एक व्यवसायिक भूखण्ड के रूप में नीलाम किया जाना था जबकि भूखंड संख्या 2 से 6 भी नेशनल हाईवे पर स्थित है । बावजूद इसके भूखंड संख्या 2 से 6 को नीलामी में आवासीय के रूप में बेचने की योजना बनाई गयी। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि भूखंड संख्या 2 से 6 को व्यवसायिक भूखंड बनाकर क्यों नहीं बेचने की प्लानिंग की गई। क्या यह सीधे तौर पर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए व्यवसायिक भूखण्डों को आवासीय  के रूप में औने पौने दामों में बेचने का षड्यंत्र प्रतीत नहीं होता। दूसरा सवाल यह खड़ा होता है कि यदि शेष भूखंडों को नगरपालिका आवासीय मानती है तो फिर भूखंडों का साइज 50 गुना ×100 रखने की क्या आवश्यकता थी? इतनी ही जगह में 25 × 50 के करीब 4 गुना भूखंड बनाए जा सकते थे। 25 × 50 के भूखंड नीलाम किए जाते तो सामान्य व्यक्ति भी नीलामी प्रक्रिया में शामिल होते हैं और आम आदमी का खुद की छत का सपना साकार होता। लेकिन ऐसा नहीं किया गया इसका सीधा सा मतलब है कि पालिका प्रशासन इस नीलामी प्रक्रिया में आम लोगों को शामिल नहीं करना चाहता था जिसका मतलब है कि कहीं न कहीं सारी योजना ही धन्ना सेठों के लिए ही बनाई गई थी।

    वर्ष 2019 में निकाली गई नीलामी का विज्ञापन।

    पालिका की बेशकीमती भूमि पर करवाये जा रहे कब्ज़े


    वर्तमान में नगरपालिका प्रशासन जहां एक और दूसरे विभागों के स्वामित्व और कब्ज़े वाली बेशकीमती भूमियों को बेचने पर उतारू है। वहीं दूसरी ओर शहर में खुद पालिका प्रशासन अपनी खाली पड़ी भूमि पर सरेआम कब्ज़े करवा रहा हैं । खबर पॉलिटिक्स पर हमने कई बार इन कब्ज़ों के सचित्र समाचार प्रकाशित किये। लेकिन ईमानदारी का मुखौटा पहने लोगों पर कोई असर नहीं हुआ है। भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों की शह के चलते सरकारी भूमि पर माफिया किस्म के लोगों की गिद्ध दृष्टि अब भी गड़ी हुई है। ताजा मामला वार्ड नंबर- 3 में त्रिमूर्ति मंदिर रोड पर नेशनल हाईवे से थोड़ा पहले बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सटी भूमि का है । इस भूमि पर कुछ समय भूमाफियाओं ने करीब 50 गुणा 75 साइज़ के चार भूखंडों पर नींव भर कर कब्जा करने के प्रयास किए थे जिसके बाद पालिका प्रशासन ने पिछले दिनों इन भूखंडों पर सरकारी संपत्ति के बोर्ड लगा दिए थे। सूत्रों के हवाले से जो समाचार मिल रहे हैं उसके अनुसार इनमें से एक भूखण्ड पर सत्ता पक्ष के बड़े नेताओं के एक मुलाजिम ने कब्जा कर रखा था। इस मुलाजिम द्वारा पहले भी शहरी क्षेत्र के खाली पड़े कई भूखंडों को कब्जा कर बेचने के आरोप लगे हैं । सनसिटी रिसोर्ट के पीछे नेशनल हाईवे को त्रिमूर्ति मंदिर रोड से  जोड़ने वाली सड़क पर पश्चिम दिशा में स्थित 80 गुना 80 के भूखंड पर कब्ज़े के मामले में भी इसकी भूमिका बताई जा रही है। सुनने में यह भी आ रहा है कि उक्त भूखंड पर सरकारी संपत्ति का बोर्ड लगाने की कार्रवाई के बाद पालिका प्रशासन को नेताजी ने खूब खरी-खोटी सुनाई। हालात यह है कि नगरपालिका प्रशासन पर दबाव बनाया जा रहा है कि वह  खुद ही इस भूखंड से सरकारी संपत्ति का बोर्ड हटाये। इसलिए आने वाले दिनों में लगभग 50 गुना 75 के इन भूखंडों पर लगे सरकारी संपत्ति के बोर्ड को खुर्द बुर्द कर ये भूखण्ड भू माफियों के हवाले कर दी जाए तो कोई बड़ी बात नहीं होगी । वैसे पालिका प्रशासन अगर चाहे तो इन भूखंडों की नीलामी कर बड़ी आय भी कर सकता है। परंतु जब बाड़ ही खेत को खाने में लगी हैं तो खेत कैसे बचेगा ?  शहर के ऐसे हालातों को देखकर किसी शायर की ये पंक्तियाँ याद आती हे

    हुआ अपहरण धूप का पूरी जनता मौन ।

    कोहरा थानेदार हैं रपट लिखाये कौन ।।

    -राजेंद्र पटावरी,उपाध्यक्ष- प्रेस क्लब सूरतगढ़।


     

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    डेढ़ माह बाद भी अतिक्रमण को हटाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा प्रशासन

    चमन की फिक्र कर नादां मुसीबत आने वाली है । तेरी बर्बादियों के चर्चे हैं आसमानों में ।।

    अतिक्रमणो का शहर और बेख़ौफ़ भूमाफिया व लाचार प्रशासन ! वर्तमान में यही शायद सूरतगढ़ शहर की सच्चाई है। लेकिन जिस तरह से आज भूमाफिया शहर में बेख़ौफ़ है ऐसे शायद पहले कभी नही थे ? भूमाफिया लोग कितने पावरफुल है इसका अंदाज़ा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि शहर के वार्डों के बीचोंबीच दिनदहाड़े हुए अतिक्रमण हो रहे है लेकिन प्रशासन ने उनकी ओर से आंखें मूंदे रखी है। हालत इस कदर बुरे है कि मीडिया में अतिक्रमण का मामला उछलने के बावजूद प्रशासन इन अतिक्रमणों को हटाना तो दूर इन अतिक्रमणों की और झांकने की हिम्मत तक नही जुटा पा रहा है । जी हां हम बात कर रहे हैं शहर के वार्ड नम्बर-3 ओर वार्ड नम्बर-20 में बेशकीमती भूखण्डों पर हुए अतिक्रमणों की । 

          

    वार्ड नंबर 3 में किया गया अतिक्रमण।

    करीब डेढ़ माह पूर्व हमने खबर पॉलिटिक्स पर वार्ड-3 में नेशनल हाईवे को त्रिमूर्ति मंदिर से जोड़ने वाली सड़क पर खाली पड़े भूखंड पर भूमाफिया द्वारा चारदीवारी कर कब्जा किए जाने का समाचार प्रकाशित किया था। करीब 80 गुना 80 के इस कॉर्नर के प्लॉट की कीमत करीब 40 से 50 लाख की हैं । इतना बेशकीमती भूखण्ड होने के बावजूद करीब डेढ़ माह होने को है लेकिन नगरपालिका प्रशासन ने इस अतिक्रमण के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। वार्ड नंबर-3 के इस कब्जे के बारे में जो जानकारी निकल कर आ रही वह काफी हैरान करने वाली है। सूत्रों के मुताबिक इस कब्जे में जिस व्यक्ति का नाम सामने आ रहा है वह पीलीबंगा क्षेत्र के भाजपा के एक बड़े जनप्रतिनिधि का नजदीकी बताया जा रहा है। वैसे इस कब्ज़े में एक महिला जनप्रतिनिधि के पुत्र और सत्ता पक्ष के नेताओं के एक नजदीकी व्यक्ति को भी हिस्सेदार बताया जा रहा है। शायद यही वह वजह है कि इतना समय बीत जाने के बावजूद भूखंड पर अतिक्रमण बदस्तूर कायम है। यही नहीं भूमाफिया के रसूख का असर यहां तक है कि भूखंड पर बिजली का कनेक्शन भी जारी कर दिया गया है।

              

    वार्ड नंबर-20 में किया गया अतिक्रमण।

      ठीक ऐसा ही मामला वार्ड नं.-20 में एक भूखण्ड पर हुए अतिक्रमण का है। आज से करीब 4 वर्ष पूर्व में विधायक राजेन्द्र भादू के कब्जों के प्रति सख्त रवैये के चलते इस भूखण्ड पर कब्ज़ा करने के भूमाफ़ियों के प्रयास कामयाब नही हो पाए थे । लेकिन सत्ता बदलते ही यानि कि मास्टर ओमप्रकाश कालवा के चेयरमैन बनते ही भूमाफिया फिर से सक्रिय हो गये। जिसका नतीजा ये हुआ कि पिछले माह भू माफियाओं ने इस भूखंड पर चारदीवारी बनाकर कब्जा कर लिया। मास्टरजी की मजबूरी कहें या फिर कमजोरी, डेढ़ माह बाद इस भूखंड पर भू माफियाओं द्वारा बनाई गयी दीवारें सत्ता में बैठे लोगों को चिढ़ा रही है।                                 

    क्या चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा दिखाएंगे दम !

    दोनों ही मामलों में नगरपालिका चेयरमैन मास्टर ओमप्रकाश कालवा की चुप्पी ने शहर को बुरी तरह से निराश किया है। अतिक्रमण के मामलेे में उम्मीद की जा रही थी कि साफ छवि वाले मास्टर जी भूू माफियाओं के सामने कुछ आत्मबल दिखाएंगे। लेकिन किसे मालूम था कि काजल की कोठरी की सफाई में उतरे मास्टर जी पर इतनी जल्दी भ्रष्टाचार  का रंग चढ जाएगा। वैसे इन अतिक्रमण के चलते मिल परिवार पर भी अतिक्रमण की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं। अब देखना यह होगा कि युवा हनुमान मील जोकि मील परिवार की तरफ से विधानसभा चुनाव के एकमात्र दावेदार हैं और मास्टर ओमप्रकाश कालवा जो कि खुद भी राजनीति में लंबी पारी खेलने का सपना पाले हुए हैं,क्या इन भू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई कर अपनी गिरती हुई साख को बचाते हैं या फिर शहर में सरकारी भूमि की लूट यूं ही जारी रहेगी !

    -राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

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    श्री श्याम सखा मंडल व श्री श्याम महिला मंडल ने किया आयोजन

    सूरतगढ़। श्री श्याम सखा मंडल व महिला मंडल के संरक्षक श्री नीरज चौधरी की प्रथम पुण्यतिथि पर संस्था की ओर से रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। चौपड़ा धर्मशाला में आयोजित शिविर में जिला राजकीय चिकित्सालय, श्रीगंगानगर के ब्लड बैंक की मोबाइल टीम ने रक्त संग्रह किया। स्व. नीरज चौधरी की धर्मपत्नी नीलम चौधरी व संस्था अध्यक्ष सोनू बवेजा की धर्मपत्नी सुजाता बवेजा ने सर्वप्रथम रक्तदान का शुभारंभ किया।

    नीरज चौधरी की धर्मपत्नी नीलम चौधरी व संस्था अध्यक्ष सोनू बवेजा की धर्मपत्नी सुजाता बवेजा रक्तदान करते हुए।

    इससे पहले शिविर का शुभारंभ वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. केएल बंसल, ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. मनोज कुमार अग्रवाल, राजकीय चिकित्सालय के प्रभारी डॉ. विजय भादू, स्व. नीरज चौधरी की धर्मपत्नी नीलम चौधरी, संस्था अध्यक्ष सोनू बवेजा, संरक्षक मंडल के पूर्व विधायक अशोक नागपाल, राजाराम बिनावरा, भंवरलाल चांडक, सत्यनारायण तावणियां, सुशील धानुका, शिक्षाविद प्रवीण भाटिया, एयू बैंक के शाखा प्रबंधक संजय सोनी, पंकज सोनगरा, ने श्री श्याम दरबार में विधिवत पूजा अर्चना कर रक्तदान शिविर का उद्घाटन किया। पंडित मोहन लाल उपाध्याय व पंडित नरेश शर्मा ने विधिवत मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना करवाई। इसके बाद पूर्व पार्षद सुनील छाबड़ा व पूर्व पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा तथा संस्था अध्यक्ष सोनू-सुजाता बवेजा ने  युगल रूप तथा अरोड़वंश यूथ विंग के अध्यक्ष सन्नी चुघ, विविधा संस्था के अध्यक्ष योगेश स्वामी, श्री अमरनाथ लंगर सेवा समिति अध्यक्ष किशन स्वामी, श्री माहेश्वरी महिला मंडल की प्रवक्ता रेखा सारड़ा से रक्तदान किया। इसके अलावा शिविर में 32 महिलाओं व छात्राओं ने भी रक्तदान कर अपनी भागीदारी निभाई। ब्लड बैंक टीम के प्रभारी डॉ. हरर्मेंद्र सिंह के नेतृत्व में नर्सिंग कर्मी कमलजीत कौर, प्रदीप कुमार, लैब टेक्नीशियन हरमीत सिंह, सहायक कन्हैया लाल, नीलम, ममता, राजकीय चिकित्सालय सूरतगढ़़ के ब्लड स्टोरेज प्रभारी राजेंद्र सारस्वत ने 178 यूनिट रक्त संग्रह किया। इस दौरान नगरपालिका की पूर्व अध्यक्ष काजल छाबड़ा, पूर्व पार्षद सुनील छाबड़ा, जनता मोर्चा संयोजक ओम राजपुरोहित, आम आदमी पार्टी के विधानसभा अध्यक्ष राधेश्याम उपाध्याय, समाजसेवी इंजी. रमेशचंद्र  माथुर, मुरलीधर पारीक, एयू बैंक के हितेश अरोड़ा, विशाल परनामी, भरत पुरोहित, श्री श्याम सखा मंडल के पूर्व अध्यक्ष संजय डागा, श्री श्याम सेवा समिति के दीपक जनवेजा, चोपड़ा धर्मशाला के सुरेंद्र चोपड़ा, महावीर इंटरनेशनल के संजय बैद, भाटिया आश्रम के गुरूमुख सिंह, मारवाड़ी युवा मंच कॉटन सिटी अध्यक्ष पवन सोमानी, दीपक मूंदड़ा सहित गणमान्य लोगों ने शिविर का अवलोकन कर रक्तदाताओं को प्रोत्साहित किया। शिविर में समाजसेवी रजनी मोदी, डॉ. जेएस राठौड़, कंचन राजपूत, संजय खेमका, संस्था के अध्यक्ष सोनू बवेजा, सचिव अंकुर लडोईया, कोषाध्यक्ष धीरज अग्रवाल, सहसचिव अजय कालड़ा, शिविर प्रभारी अशोक भार्गव ने अतिथियों व सहयोगियों को श्री श्याम चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। शिविर में भाटिया आश्रम व एयू बैंक का विशेष सहयोग रहा।

    –राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़

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    सुरतगढ़। सूरतगढ़ में नेशनल हाईवे-62 पर बनने वाले ओवरब्रिज के विस्तार की घोषणा से स्थानीय कांग्रेस को जोर का झटका धीरे से लगा है। ओवरब्रिज के विस्तार की अनुमति जारी होने से जहां विधायक रामप्रताप कासनिया की जननेता की छवि मजबूत हुई है। वहीं स्थानीय कांग्रेस के नेता जो ओवरब्रिज के मामले को केंद्र सरकार का बता कर इस मुद्दे को भुनाने की सोच रहे थे उनकी उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है। इसके अलावा ओवरब्रिज विस्तार ने नपा चेयरमैन ओम कालवा के लिए भी एक नई मुसीबत खड़ी कर दी।

    कमल होटल के पास से शुरू होकर इंदिरा सर्किल होते हुए डिग्री कॉलेज तक बनने वाले ओवरब्रिज का नक्शा

    आप जानना चाहेंगे कि क्या ? तो वह भी हम आपको बता देते हैं। असल मे बात ये है की डेढ़ सौ करोड़ के बजट का ढोल पीटने वाली सूरतगढ़ नगरपालिका के आर्थिक हालात इन दिनों बेहद खराब है। क्योंकि नगरपालिका की आय का एक बड़ा स्रोत है- भूखंडों की नीलामी से होने वाली आय, लेकिन प्रॉपर्टी बाजार में मंदी के चलते पालिका द्वारा की गई बोलियां लगातार फेल होती जा रही हैं। हालत ये है कि पालिका के लिए अपने रोजमर्रा के खर्चे निकालना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में चेयरमैन कालवा और नगरपालिका के भ्रष्ट अधिकारीयों ने शहर के कुछ सफेदपोश कॉलोनाइजर से मिलकर एक षड्यंत्र रचा। इस षड्यंत्र के तहत शहर में पालिका की बेशकीमती व्यावसायिक भूमि पर बड़े बड़े पलॉट काटकर आवासीय के रूप में औने पौने दामो में बेचने की योजना बनाई गयी। योजना के तहत इंदिरा सर्किल के दक्षिणी दिशा में बीकानेर रोड पर कॉर्नर के खाली पड़े भूखण्ड ओर बीकानेर रोड पर ही पूर्व विधायक हरचंद सिंह सिद्धू के निवास के सामने श्रमिक विश्राम गृह की भूमि को नीलामी के लिए चुना गया। पालिका ने इन बेशकीमती भूखण्डों पर नक्शा बनाकर आवासीय प्लाट बेचने की पूरी तैयारी भी कर ली थी पर दोनों ही मामलों में ऐन मौके पर कुछ जागरूक लोगों के विरोध के चलते नीलामी प्रक्रिया पर रोक लग गयी।  इंदिरा सर्किल के दक्षिणी दिशा में कॉर्नर वाले प्लॉट पर लगी रोक को हटाने के लिए चैयरमेन ओम कालवा काफी समय से प्रयास कर रहे थे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले दिनों जिला कलेक्टर ने इस भूमि की नीलामी के लिए पालिका प्रशासन को हरी झंडी भी दे दी थी। जिसके बाद नगरपालिका प्रशासन नए सिरे से नीलामी सूचना जारी करने की योजना बना ही रहा था । लेकिन विधायक रामप्रताप कासनिया ने सांसद निहालचंद मेघवाल और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से वार्ता कर ओवरब्रिज के विस्तार को हरी झंडी दिला दी। जिससे नगरपालिका प्रशासन को बोली की योजना को एक बार फिर बड़ा झटका लग गया है। क्योंकि ओवरब्रिज का विस्तार होने से नया बनने वाला ओवरब्रिज कमल होटल के पास से शुरू होगा और इंदिरा सर्किल से होते हुए सूरतगढ़ डिग्री कॉलेज की ओर जाएगा। ओवरब्रिज बनने के चलते सर्किल के दक्षिण दिशा में स्थित इन प्लॉट को व्यवसायिक के रूप में कौन खरीदना चाहेगा ? इन प्लाटों के सामने ओवरब्रिज केेेे ब्लॉक या पिल्लर होने के चलते कोई भी व्यक्ति बड़ी बोली लगाने से हिचकिचायेगा। कुल मिलाकर कह सकते हैं कि ओवरब्रिज के विस्तार की घोषणा ने एक ओर चेयरमैन ओम कालवा के सभी अरमानों पर पानी फेर दिया है वहीं इस मामले में अपनी मौजूदगी में कांग्रेस के एक बड़े नेता की भी किरकिरी करवाना चेयरमैन कालवा के लिए एक बड़ा सदमा हैं। नेेताजी की नाराजगी का खामियाजा भी चेयरमैन साहब को आने वाले दिनों में भुगतना पड़ सकता है।      

    डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुटे हैं कालवा

    ओवरब्रिज के विस्तार की घोषणा के बावजूद एक बार फिर ओवरब्रिज को ब्लॉक के बजाय पिल्लर पर बनाने की मांग को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। जिसके बाद कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल का प्रयास शुरू कर दिया। पिल्लर के बहाने ओम कालवा और उनके ग्रुप के लोगों ने अब मोर्चा संभाल लिया है। लेकिन इस बार हनुमान मील की जगह पूर्व विधायक गंगाजल मील को आगे लाया गया है। ओवरब्रिज को पिल्लर पर बनाने की मांग के बहाने नए नए तर्क भी गढ़े जा रहे हैं । जिनमे से एक है कि कमल होटल से शुरू हुआ ओवरब्रिज इंदिरा सर्किल पर 90 डिग्री के कोण में मुड़ेगा, जिससे ओवरब्रिज पर बहुत ज्यादा दुर्घटनाएं होगी। लेकिन ऐसे तर्क देने वाले यह भूल जाते हैं कि हाईवे अथॉरिटी के बड़े-बड़े इंजीनियर ने इन सारी संभावनाओं पर विचार के बाद ही ओवर ब्रिज का नक्शा अप्रूव किया होगा। वैसे भी जिस नक्शे के अनुसार ओवरब्रिज बनाया जाएगा, उसको देखने से साफ पता चलता है कि ओवर ब्रिज का घुमाव 45 डिग्री से भी कम है। ओवरब्रिज को पिलर पर बनाने की मांग के बहाने एक और बात भी उठाई जा रही है कि अगर ओवरब्रिज को पिल्लर पर नहीं बनाया जाता है तो यह ओवरब्रिज ही नहीं बनाया जाए। बल्कि इंदिरा सर्किल से डिग्री कॉलेज तक फोरलेन सड़क बना दी जाए। पर क्या इससे हाईवे पर होने वाले एक्सीडेंट कम होंगे ? कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि ओवरब्रिज के पिल्लर के बहाने कांग्रेस के नेता और खासकर चैयरमेन कालवा डैमेज कंट्रोल की कोशिश में है। यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि चेयरमैन कालवा अपने ध्येय मैं कितना कामयाब हो पाते हैं ? वैसे चेयरमैन कालवा धरना स्थल पर लोगों को यह कहते सुने गये की इस मामले में पार्टी छोड़कर दिल साफ कर लो । 70 के दशक में सुपर स्टार राजेश खन्ना की एक बेहद लोकप्रिय फिल्म आई थी ‘रोटी’ । इस फिल्म का एक गाना काफी लोकप्रिय हुआ था। सुना होगा आपने ‘ ये जो पब्लिक है सब जानती हैं…..’। नही सुना तो जरूर सुनियेगा !

    _ राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष- प्रेस क्लब,सुरतगढ़।

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    सूरतगढ़। भाजपा विधायक रामप्रताप कासनिया और कांग्रेसी नेता हनुमान मिल के बीच हुआ ताजा वाद-विवाद सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। मुद्दे की बात यह है कि क्या कांग्रेसी नेताओं द्वारा केवल इसीलिए विवाद खड़ा करने की कोशिश की गई कयोंकि ऑवरब्रिज आंदोलन की अगुवाई भाजपा से जुड़े कुछ कार्यकर्ता कर रहे थे ?

    धरना स्थल पर कांग्रेसी नेता हनुमान मील और विधायक रामप्रताप कासनिया के बीच वाद-विवाद का वायरल वीडियो।

    शायद ये सच नही है क्योंकि तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है। चूंकि ओवरब्रिज के मूल नक्शे में बदलाव भाजपा के नेताओं द्वारा ही करवाया गया था और जिस एजेंसी के अधीन कार्य किया जा रहा है वह भी केंद्र के अधीन ही आती है, लिहाजा यह धरना तो भाजपा और उन्ही के नेताओं की कारगुजारियों के खिलाफ ही है । यानी विरोध की राजनीति में कांग्रेस इस मामले में फ्रंट फुट पर होनी चाहिए थी । लेकिन फिर क्या वजह रही कि धरना स्थल पर ‘पॉलीटिकल माइलेज’ लेने की बजाय कांग्रेसी नेता हनुमान मील अपना आपा खो बैठे ? आखिर ऐसा कौन था जिसने कांग्रेस नेता को इस तरह का वक्तव्य देने के लिए उकसाया ? इस वाद विवाद से दोनों नेताओं की छवि को नुकसान पहुंचा है तो फिर कौन है जिसने इस पूरे घटनाक्रम से फायदा उठाया ?

    सियासी तस्वीर को थोड़ा और साफ करते हैं । धरनास्थल पर हुए पूरे घटनाक्रम को अगर गौर से देखा जाए तो इन सारे सवालों का जवाब आसानी से मिल सकता हैं । जब भाजपा विधायक रामप्रताप कासनिया अपनी बात रख रहे थे, ठीक उसी समय नपा चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा हनुमान मील के साथ धरना स्थल पर पहुंचे थे। रामप्रताप कासनिया के बाद आयोजकों ने हनुमान मील को अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित किया था लेकिन मील ने अपनी बात रखने से इंंकार कर दिया। जिसका सीधा सा मतलब था कि विधायक कासनिया के वक्तव्य में ऐसा कुछ नहीं था जिससे कि कांग्रेसी नेता उनके खिलाफ बयान देते। हनुमान मील के इंकार के बाद आयोजकों ने चेयरमैन कालवा को बोलने के लिए आमंत्रित किया। मास्टर से चेयरमैन बने ओम कालवा बड़े चतुर सुजान हैं, सो उन्होंने शातिराना तरीके से बात रखते हुए नेशनल हाईवे पर बनाए जा रहे नाले के बहाने से विधायक रामप्रताप कासनिया को घेरना शुरू कर दिया। बोर्ड बैठक में विधायक को उचित सम्मान न देने वाले मास्टर जी इस दौरान बहुत ही चतुराई से माननीय विधायक, माननीय विधायक की रट लगाते रहे। साथ ही साथ खुद को वार्ड के लोगों का हमदर्द और सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञ बताते हुए विधायक से वाद विवाद भी करते रहे। वैसे आपको बता दें कि चेयरमैन बनने केेेे बाद सेेे मास्टर जी को माइक को पकड़े रखने का चस्का लग गया है। मौका कोई भी हो मास्टरजी माइक को छोड़ते नहीं है। खैर मास्टर जी ने करीब बीस पच्चीस मिनट तक विधायक कासनिया को घेेरने के बाद मंच छोड़ा।

    इसके बाद आयोजकों ने एक बार फिर हनुमान मील को बोलने के लिए आमंत्रित किया। परन्तु इस बार मंच पर पहुंचते ही हनुमान मील ने विधायक कासनिया पर आरोपों की झड़ी लगा दी और पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया । जाहिर है कि मंच पर चेयरमैन कालवा और विधायक केे वाद विवाद ने ही कांग्रेस नेता हनुमान मील को उकसाया वरना इससे पहले वे खुद ही मंच पर वक्तव्य देने से मना कर चुके थे।

    वास्तविकता यही है कि चेयरमैन कालवा ने अपने विधायक विरोधी वक्तव्य से आग में घी डालते हुए कांग्रेस नेता को उकसाया जिसकी परिणति ने पूरे विवाद को जन्म दिया। वैसे इस विवाद के बाद का घटनाक्रम भी चेयरमैन कालवा को कठघरे में खड़ा करता है। वाद- विवाद के बाद कांग्रेसी नेता मंच के पास ही एक कुर्सी पर अलग-थलग बैठे रहै। वहीं चेयरमैन कालवा ने एक बार फिर मंच संभाल लिया और माननीय विधायक की रट के साथ खुद की छवि पर पॉलिश करना शुरू कर दिया। वे यह भूल गए कि उनकी मौजूदगी में कांग्रेसी नेता की छवि को कितना नुकसान पहुंचा है ? करीब पौने घंटे तक हनुमान मील भीड़ मे उपेक्षित से बैठे रहे और मास्टर जी ने बड़ी सफाई से अपने आप को विवाद से अलग कर लिया। जबकि सही मायनेे में वाद विवाद की शुरूवात खुद उन्होंने की थी और सारा दोष कांग्रेस नेता के मत्थे मंंढ दिया गया।

    खैर उम्मीद की जानी चाहिए कि युवा कांग्रेस नेता इस पूरे घटनाक्रम से सबक लेंगे और चाटुकारों – चापलूसों और षड्यंत्रकारी लोगों से दूरी बनाएंगे। बचपन में संस्कृत का एक श्लोक पढ़ा था । 

    अहो दुर्जनसंसर्गात् मानहानि: पदे पदे । पावको लोहसंगेन मुद्गरैरभिताड्यते ॥

    अर्थात दुर्जन की संगति में रहने से पग पग पर मान की हानि होती है ठीक उसी तरह जैसे लौहे का संग करने की वजह से आग क़ भी हथौड़े से पीटा जाता है। हालांकि यह श्लोक दूसरे संदर्भ में है, फिर भी सबक लिया जा सकता है।

    –राजेंद्र पटावरी,उपाध्यक्ष – प्रेस क्लब,सूरतगढ़

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    राजनीति की भेंट चढ़ता ओवरब्रिज मामला !

    शहर के लोगों के लिए समस्या बन सकता है और ब्रिज का नया नक्शा ?

    सूरतगढ़। सूरतगढ़ में नेशनल हाईवे-62 पर पूर्व योजना के अनुसार ओवरब्रिज बनाने की मांग को लेकर लगाया गया धरना शुरू होने के साथ ही राजनीति की भेंट चढ़ गया। धरना स्थल पर कांग्रेस नेता और पिछले चुनाव में कांग्रेस के विधानसभा प्रत्याशी हनुमान मील के विधायक रामप्रताप कासनिया से सियासी मतभेद खुलकर सामने आ गए। हनुमान मील ने विधायक रामप्रताप कासनिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें आश्चर्य हो रहा है कि एक तरफ तो उनकी पार्टी से जुड़े लोगों ने ब्रिज का स्थान परिवर्तन कर इस समस्या को जन्म दिया तो दूसरी और खुद ही विधायक इस मामले में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। हनुमान मील के आरोपों का जवाब देते हुए विधायक कासनिया ने शहर में बने ओवरब्रिज को लेकर मील परिवार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक गंगाजल मील के कार्यकाल में शहर को लाइनपार क्षेत्र से जोड़ने वाले ओवर ब्रिज का नक्शा बदल दिया गया जिसका खामियाजा शहर की जनता भुगत रही है। इस पर हनुमान मील ने एक बार फिर मंच संभालते हुए कहा कि 30 साल से शहर की जनता इस ओवरब्रिज की मांग कर रही थी और यह लोग सिर्फ राजनीति कर रहे हैं। इस दौरान चेयरमैन ओम कालवा और धरना संयोजक अधिवक्ता ममता शर्मा के बीच भी नोकझोंक हो

    कांग्रेसी नेता हनुमान मील और विधायक रामप्रताप कासनिया के बीच वाद विवाद का वायरल वीडियो

    क्या है पूरा मामला ?

    सूरतगढ़ में नेशनल हाईवे-62 पर नई धान मंडी के दक्षिणी द्वार से सूरतगढ़ पीजी कॉलेज तक एक ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। इस ओवरब्रिज को लेकर हाईवे के दक्षिण दिशा में स्थित वार्ड नंबर 4 से लेकर 10 तक के लोगों में आक्रोश है। जिसकी वजह है ओवर ब्रिज का वर्तमान मॉडल। पूर्व में ओवरब्रिज इंदिरा सर्किल से बीकानेर की ओर जाने वाली सड़क पर स्थित कमल होटल से शुरू होकर इंदिरा सर्किल होते हुए सूरतगढ़ पीजी कॉलेज तक बनना था। पूर्व विधायक राजेंद्र भादू और नगरपालिका के चेयरमैन काजल छाबड़ा के समय में निर्माण कंपनी ने ओवर ब्रिज का नक्शा बदल दिया। लोगों का आरोप है कि पुराने नक्शे के अनुसार ओवरब्रिज बनने से इंदिरा सर्किल पर स्थित कुछ प्रभावशाली लोगों के होटल व दुकानें प्रभावित होती। जिसकी वजह से इन प्रभावशाली लोगों के दबाव में पूर्व चेयरमैन काजल छाबड़ा और विधायक राजेंद्र भादू ने निर्माण कंपनी पर ओवरब्रिज को कमल होटल के स्थान पर नई धान मंडी के दक्षिणी गेट से शुरू करने के लिए दबाव बनाया। जिसके बाद निर्माण कंपनी ने ओवरब्रिज का नक्शा बदल दिया और उसके बाद परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ओवरब्रिज का शिलान्यास कर दिया। लेकिन अब जब ओवरब्रिज का निर्माण शुरू हुआ है तब नेशनल हाईवे के दक्षिण दिशा में बसे आधा दर्जन वार्डों के लोगों की परेशानियों का दौर शुरू हो गया हैं। ओवर ब्रिज के निर्माण कार्य के चलते इन वार्ड के लोगों को शहर में आने जाने में परेशानी हो रही है। दूसरी समस्या यह है कि ओवरब्रिज जिस तरह से पिल्लर की बजाय कंक्रीट के ब्लॉक एक दूसरे के ऊपर रखकर बनाया जा रहा है उससे आने वाले दिनों में इन वार्डों के लोगों को धानमंडी या हाउसिंग बोर्ड की ओर जाने के लिए काफी लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा। निर्माण कंपनी की ओर से हालांकि आवागमन के लिए एक अंडरपास के निर्माण की बात कही जा रही है लेकिन सच्चाई यह है कि अंडरपास के निर्माण से लोगों की समस्या कम होने वाली नहीं है। एक तरह से कह सकते हैं कि ओवर ब्रिज के इस पैटर्न से लगभग आधा दर्जन वार्ड शहर से पूरी तरह से कट जाऐंगे। इसी को देखते हुए अधिवक्ता पूनम शर्मा ने इन वर्गों के लोगों से बात कर शुक्रवार को धरने की शुरुआत किया। लेकिन धरनाा स्थल पर हुई राजनीति ने उनके प्रयासों पर पानी फेर दिया।

    राजनीति के लिए शहर हित से समझौता

    शहर में ओवरब्रिज की राजनीति नयी नहीं है। इससे पहले भी लाइनपार क्षेत्र को शहर से जोड़ने के लिए बनाया गया ओवरब्रिज भी राजनीति का शिकार हो चुका है। लोगों का आरोप है कि कांग्रेस के पूर्व कार्यकाल में भी कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव में ओवरब्रिज का नक्शा बदल दिया गया। जिसका खामियाजा भी शहर की जनता भुगत रही है। करोड़ों की लागत से बना यह ओवरब्रिज शहर की आम जनता के लिए लगभग नाकारा है। शहर के लोगों को लाइनपार क्षेत्र में जाने के लिए अंडरपास से गुजरना पड़ता है अगर यही ओवर ब्रिज मुख्य बाजार से शुरू होकर बड़ोपल रोड पर उतरता तो शायद ज्यादा उपयोगी होता। लेकिन राजनीति के जरिए सत्ता में बैठे लोगों को आम जनता की तकलीफों से कोई वास्ता नहीं है और ना ही  शहर के राजनीतिज्ञों ने अपने पूर्ववर्तीयों की गलतियों से सबक लिया। इसी का नतीजा है नेेशनल हाईवे-62 पर बन रहा ओवर ब्रिज। पिछली बार की तरह इस बार भी ओवरब्रिज का नक्शा बदल दिया गया है। जिस नक्शे के अनुसार ओवरब्रिज बनाया जा रहा है उससे लगता नहीं है कि आम जनता को इस ओवरब्रिज से फायदा होनेेे वाला है हां यह जरूर कहा जा सकता हैं कि ओवरब्रिज का यह स्वरूप दोनोंं और के वार्डों की समस्याए जरूर बढ़ा देगा। इसलिए जरूरत इस बात की है कि दोनों दलों के नेेता राजनीति को छोड़कर ओवर ब्रिज के इस मामले को सुलझाएं।

    –राजेंद्र पटावरी, उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़

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    लॉकडाउन में नगरपालिका में लगा था भ्रष्टाचार का महाकुंभ

    चेयरमैन कालवा के आशीर्वाद से ईओ सांखला ने बांटे पुण्य पटटे

    सूरतगढ़ । सनातन धर्म परंपरा में कुंभ मेले का एक अलग ही महत्व है। प्रत्येक व्यक्ति की यह इच्छा होती है कि वह जीवन में कम से कम एक बार कुंभ मेले में जाए और त्रिवेणी में डुबकी लगाये। कुंभ के बारे में कहा जाता है कि यह 12 सालों के बाद आता है। इसलिए हर कोई धार्मिक व्यक्ति इसका इंतजार करता है। यह तो हुई पुन्य कर्मों की बात ! लेकिन आपको मालूम न हो सूरतगढ़ नगरपालिका द्वारा भी भ्रष्टाचार के महाकुंभ का आयोजन समय-समय पर किया जाता है। कुंभ के मेले के विपरीत भ्रष्टाचार के इस महाकुंभ में शहर के भू माफिया- कब्जाधारी डुबकी लगाने को बेताब रहते हैं। लेकिन भ्रष्टाचार के इस महाकुंभ की जानकारी आम लोगों को नहीं होती है इसलिए इसका पुण्य प्रताप आमतौर पर केवल भूमाफिया और कब्जा धारियों व कुछ सफेदपोश लोगों को ही मिलता है। कोविड-19 के दौरान लॉकडाउन की शुरुआत में जब पूरा शहर महामारी से बचने की जुगत में लगा हुआ था और नगरपालिका पर लोगों को महामारी से बचाने और लोक डाउन की पालना की जिम्मेदारी थी। ठीक उसी समय मास्टर ओम कालवा के सानिध्य में ईओ लालचंद सांखला द्वारा भ्रष्टाचार के महाकुंभ का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में शहर के भूमाफिया-कब्जाधारियों और सफेदपोश लोगों ने भ्रष्टाचार की त्रिवेणी में डुबकी लगाने का आनंद उठाया। हालांकि इस महाकुंभ का आयोजन बेहद चुपके से किया गया था। परंतु धीरे धीरे अब उन लोगों की सूची सामने आने लगी है जो भ्रष्टाचार की त्रिवेणी में डुबकी लगाकर पुण्य पट्टा हासिल करने में कामयाब हुए। सूची सूचना के अधिकार अधिनियम की मदद से पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल ने हासिल की हैं। हालांकि पूर्व नगरपालिका चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल के आवेदन पर पालिका प्रशासन ने आधी अधूरी जानकारी ही दी है। आवेदन के जवाब में पालिका द्वारा बांटे गये करीब पुण्य 25 पट्टों के बारे में ही जानकारी दी गई है। जबकि इस दौरान 100 से भी अधिक पट्टे जारी करने की बात कही जा रही है। तत्कालीन अधिशासी अधिकारी लालचंद सांखला के हस्ताक्षर से जारी इन पुण्य पट्टों में भारी भ्रष्टाचार किए जाने के आरोप लग रहे हैं। लोकडाउन के दौरान जारी किए गए इन अवैध पटटों को निरस्त करने और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग को लेकर स्थानीय अधिकारियों से लेकर स्वायत शासन विभाग के उच्चाधिकारियों तक शिकायत की गई है। उम्मीद है कि जल्द ही दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी। फिलहाल सूचना के अधिकार से पट्टों के बारे में जो जानकारी निकल कर सामने आई है वो काफी हैरान करने वाली है।

    जोहड़ पायतन क्षेत्र भूमि में भी जारी किये पटटे

    कस्बे के वार्ड नंबर 38,39 और 42 के निवासी पिछले कई सालों से अपने घरों के पट्टे बनाने के लिए नगरपालिका के चक्कर लगा रहे हैं। जब भी यह लोग नगरपालिका पहुंचते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि उनका भूखण्ड जोहड़ पायतन क्षेत्र में आता है और जोहड़ पायतन क्षेत्र में पट्टे बनाने पर रोक लगी हुई है। लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों ने लॉकडाउन के दौरान जोहड़ पायतन क्षेत्र को भी नहीं बख्शा। सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेजों में सामने आया है कि ईओ सांखला ने कई पट्टे इन वार्डों में भी जारी कर दिए हैं। ईओ सांखला ने कच्ची बस्ती नियमन के तहत पट्टा संख्या -32 जो ओमप्रकाश s/o श्री पूर्ण प्रकाश,जाति-मोची,वार्ड नंबर-34 व पट्टा संख्या-48 जो कि गिरधारी लाल शर्मा s/o श्री दुलीचंद शर्मा ,वार्ड नंबर-39 के नाम से जारी किए वो जोहड़ पायतन क्षेत्र में आते हैं।

    इसी प्रकार स्टेट ग्रांट के तहत जारी पट्टा संख्या-4 जोकि सुनीता पत्नी जेठाराम,जाति-मोची, वार्ड नंबर- 38 और पट्टा संख्या- 5 कृष्णा रानी पत्नी जयराम ,जाति मोची, वार्ड नंबर-38 के नाम से जारी किया गया है। परन्तु ये भूखण्ड भी जोहड़ पायतन क्षेत्र में आते हैं। तो क्या इसका मतलब यह नहीं मान लिया जाए कि पालिका प्रशासन के भ्रष्ट अधिकारीयों के लिए जोहड़ पायतन केवल एक बहाना है ? जब कोई पैसे वाला या प्रभावशाली व्यक्ति जोहड़ पायतन क्षेत्र में पट्टा बनाने आता है तो भ्रष्ट अधिकारी मोटा माल खाकर पट्टा जारी कर देते हैं।

    खाली पड़ी सरकारी भूमि पर भी जारी किया पटटा

    सूरतगढ़ नगरपालिका मे  भ्रष्टाचार और भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले का जीता जागता उदाहरण है लाकडाउन के दौरान जारी किया गया पट्टा संख्या – 46 । नगरपालिका द्वारा 55×60 वर्ग फिट का यह पट्टा गोपी राम पुत्र श्री रामेश्वर लाल गोदारा, निवासी वार्ड नंबर-10 के नाम से जारी किया है। कच्ची बस्ती नियमन के तहत जारी ईस पट्टे को गौर करें तो पता चलता है कि यह पट्टा खाली पड़ी सरकारी भूमि पर ही बना दिया गया हैं। आम आदमी को भले ही कच्ची बस्ती क्षेत्र में पट्टा बनाने के लिए अपनी रिहाईश के दस्तावेजों के साथ साथ बिजली,पानी का राशन कार्ड और आस-पड़ोस के लोगों के शपथ पत्र और जाने क्या-क्या औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती है। पर इस मामले में बिना किसी दस्तावेज और बिना किसी रिहाइश के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पट्टा जारी कर दिया गया है। इस पट्टे को गौर से देखने पर पता चलता है कि नगरपालिका अधिकारियों ने मिलीभगत कर पट्टे में नियमित किए गए भूखंड की स्थिति के विवरण में 3 दिशाओं में ‘अन्य भूमि’ और एक दिशा में सड़क अंकित कर दी है। ऐसा इसलिए किया गया है कि पट्टाधारी व्यक्ति  इस वार्ड के किसी भी खाली भूखंड को अपना बताकर कब्जा कर सके। मजे की बात यह है कि पट्टाधारी व्यक्ति द्वारा कुछ माह पूर्व नेशनल हाईवे पर पड़ी बेशकीमती खाली भूमि जिसे कि पुलिस चौकी के लिए आरक्षित किया गया था पर पट्टे की आड़ कब्जा करने का प्रयास किया। जिसके बाद शिकायत होने पर पुलिस ने पट्टेधारी को जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया। इस पट्टे को लेकर शहर मेंं यह भी चर्चा है कि पट्टा धारी केवल चेहरा मात्र है हकीकत में यह पट्टा भाजपा के पूर्व नेता जो विधायक राजेंद्र भादू के कार्यकाल में हाशिये पर डाल दिये गये थे का है। परंतु वर्तमान में ये कांग्रेस में शामिल होने के चलते राजनीति में बड़ा प्रभाव रखते हैं । इसी कारण पट्टाधारी को छुड़ाने के लिए पूर्व विधायक को सामने आना पड़ा। पर इस बीच पट्टा धारी को 2 दिन जेल की हवा जरूर खानी पड़ गई। खैर अब देखना यह है कि पट्टा धारी पट्टे की आड़ में वार्ड -10 के किस खाली भूखंड पर कब्जा जमाता है।


    लॉकडाउन में भ्रष्टाचार की बहती गंगा में पट्टा पाने वाले खुशकिस्मत लोगों की सूची

    सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के आधार पर हम सूरतगढ़ के आम लोगों के लिए उन लोगों की सूची और पटटे/ डीड की फोटो प्रति जारी कर रहे हैं जो लॉकडाउन में नगरपालिका में आयोजित भ्रष्टाचार के महाकुंभ में डुबकी लगाकर पुण्य पट्टा हासिल करने में  कामयाब रहे। यह अलग बात है कि उन्हें इसके लिए बड़ी दान दक्षिणा देनी बढ़ी दान दक्षिणा देनी पड़ी।

    स्टेट ग्रांट एक्ट मेंं बनाए गए पट्टे

    कच्ची बस्ती नियमों के तहत बनाए गए पट्टे

    कृषि भूमि का रूपांतरण कर बनाए गए पट्टे

    साख खोने के डर से चेयरमैन कालवा नहीं दे रहे पट्टो की पूरी जानकारी

    ईओ लालचंद सांखला द्वारा अपने रिटायरमेंट से ठीक पहले बनाए गए फर्जी पट्टों को लेकर जब आरोप लगे थे तब मास्टर ओमप्रकाश कालवा ने अपने को पाक साफ बताया था। उनके द्वारा पटटो पर उनके हस्ताक्षर नहीं होने का तर्क भी दिया गया था। लेकिन सवाल यह पैदा होता है कि जब चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा इस मामले में पूरी तरह से बात साफ है तो पूर्व चेयरमैन द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई पट्टों की पूरी जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है? जिसका मतलब साफ है चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा की भूमिका इस पूरे प्रकरण में संदिग्ध है। इसीलिए साख खोने के डर से मास्टर जी सूचना के अधिकार को ठेंगा दिखाए हुए हैं।

    – राजेंद्र पटावरी,उपाध्यक्ष-प्रेस क्लब,सूरतगढ़

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    बैठक में भाजपा सहित वरिष्ठ पार्षद बने रहे मूकदर्शक

    नगरपालिका बोर्ड की बैठक में वाइस चेयरमैन के बाद बैठे विधायक कासनिया ।

    सूरतगढ़। आम तौर पर नगरीय निकायों की बैठक में संबंधित विधानसभा क्षेत्र का विधायक विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में भाग लेता है क्योंकि विधायक विधानसभा क्षेत्र की जनता का सबसे बड़ा जनप्रतिनिधि होता है। इसलिए बोर्ड की बैठक में विधायक की उपस्थिति से संबंधित विशेष प्रोटोकॉल होता है। सामान्य परंपरा भी रही है कि विधायक को सभापति/चेयरमैन के ठीक बराबर की कुर्सी पर बैठाया जाता है लेकिन सोमवार को चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा की अध्यक्षता में हुई बैठक में बेशर्मी से प्रोटोकॉल को धता बताते हुए इस परंपरा का मखौल उड़ाया गया। बैठक में विधायक रामप्रताप कासनिया को वॉइसचेयरमैन के बाद कुर्सी दी गई। ऐसा नहीं है कि वॉइस चेयरमैन का पद की गरिमा नहीं है परंतु विधायक का पद वॉइस चेयरमैन से बहुत बड़ा होता है। मास्टर कालवा अगर इस बात का ध्यान रखते तो वे विधायक कासनिया की बांयी तथा वाइस चेयरमैन की दायीं तरफ बैठने की व्यवस्था कर दोनो को सम्मान दे सकते थे परंतु ऐसा किया नहीं गया। पूरी मीटिंग के दौरान विधायक कासनिया की उपेक्षा करते हुए उन्हें एक तरह से अपमानित सा किया गया। आश्चर्य की बात यह है कि न तो बोर्ड की बैठक में उपस्थित भाजपा पार्षदों ने इस पर आपत्ति जताई और ना ही किसी निर्दलीय या कांग्रेसी पार्षद ने विधायक पद की गरिमा बचाने की कोशिश की जबकि मीटिंग में सभी राजनितिक पार्टियों के कई वरिष्ठ नेता सदन मे उपस्थित थे।

    नगरपालिका की बोर्ड की बैठक में वर्तमान विधायक के साथ हुए इस तरह के व्यवहार से कई सवाल खड़े होते हैं। मास्टर ओमप्रकाश कालवा अपने 1 वर्ष के कार्यकाल में बोर्ड की कई बैठकों की अध्यक्षता कर चुके हैं साथ ही शिक्षक पृष्ठभूमि से भी हैं, ऐसे मे नहीं लगता है कि उन्हें बोर्ड बैठक में विधायक के प्रति प्रोटोकॉल और सामान्य परंपराओं का ज्ञान नहीं रहा होगा। तो क्या यह मान नहीं लिया जाये कि चेयरमैन ओम कालवा ने जानबूझकर अपमानित करने के लिए वाइस चेयरमैन के बाद विधायक के बैठने की व्यवस्था की।आखिर चेयरमैन ने ऐसा क्यों किया ? तो इसका जवाब भी आप जान लेें। दरअसल मास्टर जी को नजदीक से जाननेे वाले लोगोंं का मानना है कि चेयरमैन बनने के बाद से मास्टर जी पर्सनैलिटी डिसऑर्डर का शिकार है, जिसकी वजह है मास्टर जी का अहंकार ! यही वजह है कि मास्टरजी अब अपने प्रतिद्वंद्वियों को नीचा दिखाने का कोई भी अवसर नहीं चूकते हैं। इसका उदाहरण नगरपालिका बोर्ड की इसी बैठक में भी देखा गया। जब उन्होंने कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष को ही असामाजिक तत्व बता डाला। हालांकि इस बात को लेकर खूब हंगामा भी हुआ था। वैसे आपको हम ये भी बता दें, चेयरमैन बननेेे के बाद से मास्टर जी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएंं भी खूूूब हिलोरे मार रही है और वे सूरतगढ़़ का भावी विधायक बनने का सपना देखने लगे हैं । इसके लिए मास्टर जी पार्षदों के एक गुट के साथ मिलकर उन्हें चेयरमैन बनाने वाले मील परिवार की राजनीतिक जड़ों में मट्ठा डालने में लगे हुए हैं । वॉइस चेयरमैन और नगरपालिका की महिला कर्मचारी के बीच हुए विवाद को तिल का ताड़़ बना कर वाइस चेयरमैन को नीचा दिखाना ऐसेे ही एक षड्यंत्र का नतीजा था।

    खैैैर इस बात पर हम फिर कभी विस्तार से चर्चा करेंगे। बहरहाल मास्टर जी को यह मालूम होना चाहिए कि अहंकारी व्यक्ति राजनीति में लंबा सफर तय नहीं करता और ना ही बाड़ में मूतने से बैर नहीं निकलता है। फिर भी हम ये उम्मीद करते हैं कि मास्टर जी संकीर्ण सोच को त्याग कर भविष्य् में जनप्रतिनिधियों को उचित सम्मान देंगे। वैसे राजनीति में लंबी पारी खेलने का सपना देखने वाले मास्टर कालवा के लिए किसी शायर की ये पंक्तियां याद आती है–

    बरसात में अक्सर तालाब हो जाते हैं कमज़र्फ।
    मगर आपे से बाहर कभी समंदर नहीं होता ।।

    • –राजेंद्र पटावरी (9928298484)
    • उपाध्यक्ष,प्रेस क्लब सूरतगढ़

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    ”ईमानदार” चैयरमेन के वार्ड में भी बेेेख़ौफ़ हुए भूमाफिया

    सूरतगढ़। शहर में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की समस्या यूं तो नई नहीं है परन्तु सत्ता के वर्तमान निज़ाम में भूमाफिया जिस तरह से अब बेखौफ है वैसे शायद पहले कभी नही थे। शहर के सभी 45 वार्डों में बेखौफ भूमाफिया अजगर की भांति सरकारी भूमि को निगलने के लिए तैयार बैठे हैं। जिस रफ्तार से शहर में सरकारी भूमि पर कब्जा करने का अभियान जारी है उससे तो नही लगता है कि वर्तमान बोर्ड का कार्यकाल पूरा होने तक शहर में एक इंच भी सरकारी भूमि बच पाएगी। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि शहर के लगभग सभी वार्डों में आपके चुने हुए पार्षदों में कुछ एक को छोड़कर अधिकांश पार्षद प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से या तो इन भूमाफियों का सहयोग कर रहे हैं या फिर शिखंडियो की तरह बेबस लाचार होकर सरकारी भूमि की लूट का तमाशा देख रहे हैं। इस शहर की बदनसीबी ये भी है कि आपके चुने हुए पार्षदों ने जिस व्यक्ति को शिक्षक समझकर शहर की बागडोर सौंपी थी उनके खुद के ही वार्ड में करोड़ो रूपये की सरकारी भूमि पर भूमाफिया दिन रात अतिक्रमण करने में जुटे हैं । लेकिन सत्ता के मोतियाबिंद से ग्रसित मास्टर ओम प्रकाश कालवा को ये अतिक्रमण दिखायी नही दे रहें हैं। केवल दिसम्बर माह की ही बात करें तो शहर के वार्ड न.-03, 20 ओर 26 में ही करीब एक करोड़ रुपये की खाली पड़ी सरकारी भूमि पर भूमाफियों ने चारदिवारी कर कब्ज़ा कर लिया है। जिसका ब्यौरा आपकी जानकारी के लिए प्रस्तुत है।

    वार्ड-20 में विवादित भूखण्ड पर दिनदहाड़े हुआ कब्ज़ा

    वार्ड नंबर 20 में खाली प्लॉट पर सरकारी संपत्ति के बोर्ड को उखाड़कर किया गया अतिक्रमण।

    वार्ड नं.-3 में करीब 40 लाख के भूखण्ड पर कब्ज़ा

    नेशनल हाईवे को त्रिमूर्ति मंदिर से जोड़ने वाली सडक पर सनसिटी गार्डन के पीछे खाली भूखंड पर किया गया अतिक्रमण

    हालांकि बताया जा रहा है कि इस अतिक्रमण की शिकायत मिलने पर अधिशाषी अधिकारी मिलखराज चुघ मौके पर पहुंचे थे ,लेकिन बाद में ईओ साब को उनकी औकात याद दिला दी गयी। जिसके बाद उन्होंने इस अतिक्रमण की और झाँका तक नही। फिलहाल भूखण्ड पर बनी अवैध दीवारें ग़रीबों के झोंपड़ों पर बेरहमी से पीला पंजा चलाने वाले नगरपालिका प्रशासन को चिढ़ा रही है। 

    चैयरमेन के वार्ड में भी विवादित भूमि पर हो रहे निर्माण 

    निर्माणाधीन प्लॉट के ठीक पास खाली पड़ी भूमि पर लगा सरकारी सम्पति का बोर्ड

    सवालों से भाग रहे मास्टर कालवा और ईओ चुघ

    मिलखराज करोड़ों रुपये की सरकारी भूमि पर दिनदहाड़े हुए अतिक्रमणों के बारे में जब हमने ईमानदार होने का तमगा लेकर फिरने वाले चैयरमेन कालवा ओर ईओ मिलखराज चुघ से फ़ोन कर उनकी सफाई लेनी चाही तो दोनों ही जिम्मेदार व्यक्तियों ने फ़ोन तक नही उठाया। कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि ईमानदार होने का स्वांग रचने वाले ईओ कालवा की कहीं न कहीं इन अतिक्रमणों को मौन स्वीकृति है । ऐसे में बाबू से कार्यवाहक ईओ बने मिलखराज चुघ की तो बिसात ही क्या है ? क्योंकि कल उर्दू के महाकवि ग़ालिब का जन्मदिन था तो ऐसे में शहर में मास्टर कालवा की सरपरस्ती में सरकारी भूमि की लूट पर उन्ही का एक शेर याद आता है। 

    – राजेन्द्र पटावरी (मोब.-9928298484)

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    विपक्षी नेताओं व चुने हुए पार्षदों ने साधी चुप्पी

    सूरतगढ़। सूरतगढ़ नगरपालिका द्वारा 21 सितम्बर से बीकानेर रोड पर पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धू के घर के सामने आवासीय भूखंडों की नीलामी होगी। शायद आपको मालूम न हो कि इस नीलामी के साथ एक चीज और भी नीलाम होगी। पहली नीलामी में व्यावसायिक भूखंडों को आवासीय भूखण्ड के रूप में बेचा जाएगा। जिन्हें खरीदने के लिए शहर के कुछ  धन्ना सेठ इस नीलामी में मौजूद रहेंगे। वहीं दूसरी नीलामी की खास बात यह होगी की इस नीलामी में खरीदार तो कोई नहीं होगा,परंतु तमाशबीन पूरा शहर होगा। क्योंकि इस नीलामी में शहर की नगरपालिका में आपके द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों की इज़्ज़त नीलाम होगी। आपको यह अफसोस भी होगा कि जिन जनप्रतिनिधियों को आपने आपके हक की आवाज उठाने के लिए वोट की ताकत से शूरवीर बनाकर भेजा था। उनकी हालत शिखंडीयों जैसी हो गयी है और अब ये जनप्रतिनिधी धर्म की बजाय अधर्म के साथ खड़े हैं। व्यावसायिक भूखंडों को आवासीय भूखंड के रूप में बेचने के इस प्रकरण को देखते हुए महाभारत का द्रौपदी के चीरहरण का प्रसंग याद आता है । महाभारत के प्रसंग में जिस तरह धूतक्रीडा में द्रौपदी को दांव पर लगा दिया गया था ठीक उसी प्रकार नीलामी के नाम पर की जा रही है इस कलयुगी धूतक्रीडा में सरकारी संपत्ति द्रौपदी की भूमिका में है। महाभारत में द्रोपदी की रक्षा का दायित्व जिस युधिष्ठिर यानी धर्मराज पर था उसी धर्मराज ने ही द्रौपदी को धूतक्रीड़ा में दाव पर लगा दिया था। ठीक उसी प्रकार से इस मामले में कलयुगी युधिष्ठिर यानि नगरपालिका चेयरमैन, जिन पर शहर की सरकारी संपत्ति की रक्षा की जिम्मेदारी थी ने द्रौपदी (सरकारी सम्पति) को दाव पर लगा दिया है। महाभारत के प्रसंग में द्रौपदी की इज्जत तार-तार करने की कोशिश हुई थी तो इस मामले में आपके चुने हुए जनप्रतिनिधियों की इज़्ज़त तार तार होने जा रही है । महाभारत की तरह जब नगरपालिका में बैठे दुशासन द्रौपदी के चीर खींचने की भांति ज्यूँ ज्यूँ भूखण्डों की बोली लगाएंगे। वैसे- वैसे आपके चुने हुए जनप्रतिनिधि नँगे होते जाएंगे। चीरहरण के समय तो लज्जावश द्रौपदी ने भले ही खूब विलाप किया हो पर आप अगर लज्जा आने की उम्मीद अपने चुने हुए जनप्रतिनिधियों से पाले बैठे हैं तो आप किसी गलतफहमी में हैं जो नीलामी के समय दूर हो जाएगी। दूसरी और महाभारत में भले ही भीष्म पितामह ,गुरु द्रोण हो या विदुर कोई भी हो द्रौपदी का चीरहरण होते देख कम से दुखी तो थे ,पर इस मामले में प्रशासन में बैठे अधिकारी और शहर में विपक्षी पार्टियों के नेता शर्म का चोला उठाकर कर द्रौपदी को नँगा करने यानि कि सरकारी संपत्ति को ओने पौने दामों में बेचने के इस तमाशे को देख रहे हैं। न्याय की बात करने वाले मुंह मे दही जमाये इस तमाशे को देखने को बेताब हैं ।महाभारत की तरह इस दौर में भी सत्ता केे शीर्ष पर धृतराष्ट्र् जैसे राजा भी मौजूद हैं। महाभारत में धृतराष्ट्र को पुत्र मोह था लेकिन मौजूदा समय के धृतराष्ट्र क्यों आंख मूंदे हुए हैं यह समझ से बाहर है ? सरकारी संपत्ति की नीलामी के इस प्रकरण की तुलना महाभारत के चीरहरण के प्रकरण से करें तो सबसे बड़े अफसोस की बात यह है कि महाभारत में तो वासुदेव थे जिन्होंने द्रोपदी की लाज बचा ली थी। लेकिन लगता नही है कि मौजूदा समय में कोई वासुदेव द्रौपदी (सरकारी संपत्ति ) को बचाने में कामयाब होगा। ठीक ऐसे ही हालातों के लिए शायद ये पंक्तियां लिखी गई है–

    छोड़ो मेहंदी खड़ग संभालो
    खुद ही अपना चीर बचा लो
    द्यूत बिछाए बैठे शकुनि,
    … मस्तक सब बिक जाएंगे
    सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आएंगे |
    कब तक आस लगाओगी तुम, बिक़े हुए अखबारों से,
    कैसी रक्षा मांग रही हो दुशासन दरबारों से
    स्वयं जो लज्जा हीन पड़े हैं
    वे क्या लाज बचाएंगे
    सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो अब गोविंद ना आएंगे

    कल तक केवल अंधा राजा, अब गूंगा-बहरा भी है
    होंठ सिल दिए हैं जनता के, कानों पर पहरा भी है
    तुम ही कहो ये अश्रु तुम्हारे,
    किसको क्या समझाएंगे?
    सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आएंगे….

    -राजेंद्र पटावरी (9928298484)

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    बाज़ार भाव से ज्यादा में खरीद लगाया लाखों का चूना

    4600 राशन किट खरीद मामले में उठ रहे सवाल ?

    लॉकडाउन के दौरान नगरपालिका द्वारा द्वारा गरीबों को बांटी गई राशन किट

    सूरतगढ़ । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही लॉकडाउन के अंतिम चरण में आपदा में अवसर तलाश करने का आह्वान किया हो । परन्तु सूरतगढ़ नगरपालिका ने तो लॉकडाउन के प्रथम चरण में गरीबों को बांटे जाने वाले राशन किट के टेंडर में ही अवसर खोज लिया था ? आप यकीन न करें पर ये सच है! राशन किट के टेंडर से जुड़े दस्तावेजों से जो जानकारी निकलती है उससे तो यही लगता है कि गरीबों के राशन को भ्रष्टाचार की दीमक चट कर गयी। इस मामले में नगरपालिका प्रशासन पर चहेती फर्म को टेंडर देने, बाजार भावों से अधिक कीमत पर टेंडर करने, ठेकेदार फर्म द्वारा घटिया क्वालिटी का सामान देने और राशन कीट के वितरण में भी गड़बड़ी जैसे कई गम्भीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले में प्रशासन पूरी पारदर्शिता से टेंडर करने की बात जरूर कर रहा हैं। लेकिन मामले से जुड़े दस्तावेज प्रशासन के दावों की कलई खोल रहे हैं। राशन किट की आपूर्ति ओर वितरण में गड़बड़ी के सवालों का जवाब नगरपालिका के पास नहीं है।

    चहेती फर्म को दिया टेंडर !

    राशन किट खरीद के मामले में नगरपालिका पर पहला आरोप चहेती फर्म को टेंडर देने का है। टेंडर के दस्तावेजों के अनुसार 25 लाख रुपए में राशन किट की खरीद के लिए निकाली गई निविदा में दो ही फर्मों ने टेंडर डाले । आटा,दाल,तेल,चाय, चीनी सहित नौ आइटम की एक किट के लिए प्रताप किरयाना स्टोर ने 646 रुपये प्रति किट की दर से टेंडर भरा। जबकि दूसरी फर्म कमल किरयाना स्टोर द्वारा प्रति किट 655 रुपए की दर से टेंडर भरा गया। कम दरों के चलते प्रताप किरयाना स्टोर को टेंडर कर दिया गया । बाद में नगरपालिका ने राशन किट से चाय व चीनी को हटा दिया गया । शेष बची 7 वस्तुओं को शामिल करते हुए नगरपालिका ने नेगोशिएशन के बाद 536 रु में किट खरीदना तय किया। लेकिन 25 लाख रुपए मूल्य के टेंडर के लिए केवल दो आवेदन आना ही सवाल खड़े करता है !

    ऑनलाइन टेंडर में दोनों फर्मों की राशन किट की दरें।

    शहर में किराना व्यवसाय से जुड़ी कम से कम 10 अन्य ऐसी बड़ी फर्में है जो इन राशन किटों की आपूर्ति कर सकती थी। लेकिन इनमें से एक भी फर्म द्वारा टेंडर नहीं भरा गया। क्या इसका मतलब नहीं निकालता कि पालिका ने निविदा का प्रचार प्रसार ही नहीं किया। जिससे कि दूसरी फर्मे टेंडर में भाग ले सके। इसके अलावा हैरान करने वाली बात यह भी है कि कमल किरयाना स्टोर नामक जिस दूसरी फर्म ने टेंडर भरा , उस फर्म द्वारा राशन किट में शामिल आटा, दाल, तेल,चीनी, चाय, मिर्च,हल्दी ,नमक और साबुन में से किसी का भी व्यापार नहीं किया जा रहा है। साफ है कि कमल किरयाना स्टोर नामक फर्म का टेंडर महज औपचारिकता के लिए भरवाया गया था।

    बाजार भाव से अधिक पर खरीदी 4600 राशन किट !

    नगरपालिका पर दूसरा बड़ा और गंभीर आरोप बाजार भाव से अधिक मूल्य पर खरीद का है। यह सामान्य नियम है कि जब ज्यादा क्वांटिटी में कोई चीज खरीदी जाती है तो उसका मूल्य सामान्य भावों से कुछ कम ही रहता है। लेकिन राशन किट मामले में इसका उल्टा हुआ है। नीचे दी गयी तालिका से इस पूरे घोटाले को आप समझ सकते हैं । नगरपालिका ने जिन 7 आयटम की राशन किट को ₹536 प्रति किट के हिसाब से खरीदा। अगर किट के सभी आयटम का उनकी मात्रा और अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में बाजार भाव से कुल टोटल किया जाए तो यह राशि 430 – 440 रुपये ही बैठती है । जिसका मतलब है कि प्रति किट 90 से 100 रुपये का भुगतान ज्यादा किया गया। अगर पालिका द्वारा खरीदी गई करीब 4600 किट के अनुसार हिसाब लगाएं तो जनता के टैक्स के 4 लाख से ज्यादा रुपए ठेकेदार फर्म को लुटा दिये गये। वह भी तब, जबकि हमने सभी वस्तुओं के रिटेल रेट को ही शामिल किया है। अगर थोक मूल्य लगाया जाए तो यह राशि और ज्यादा होती । ठेकेदार फर्म पर लुटाए गये इस पैसे से करीब 800 परिवारों को ओर राशन किट बाँटी जा सकती थी । लेकिन तात्कालिक अधिशासी अधिकारी लालचंद सांखला और मास्टर ओम कालवा की अगुवाई में गरीबों का निवाला कब छीन गया पता ही नही चला । अब इस बात का अंदाजा आप खुद लगाइये की इस लूट का हिस्सा किस-किस तक पहुंचा होगा ।

    किट के आयटम खुदरा दर मूल्य

    • 1. आटा 10 kg 240 रु. /10 kg 240 रु.
    • 2. चना दाल 1 kg 62-65 रु./kg 65 रु.
    • 3. रिफाइएंड तेल 1/2 ली. 100 रु./लीटर 50 रु.
    • 4. मिर्च पावडर 200 grm 200 रु./kg 40 रु.
    • 5. हल्दी पाउडर 100 grm 150 रु./kg 15 रु.
    • 6. नमक 1 kg 15 रु./kg 15 रु.
    • 7. साबुन निरोल 250 grm 60 रु./kg 15 रु.
    • 440 रु.
    लोकडाउन के दौरान एक पार्षद द्वारा खरीदे गए आटे की दरों को दर्शाता बिल

    राशन की क्वालिटी भी सवालों के घेरे में !

    राशन किट मामले में एक और नगरपालिका भावों को लेकर ठेकेदार फर्म पर मेहरबान दिखी तो दूसरी और अधिकारियों ने राशन किट की वस्तुओं की क्वॉलिटी को लेकर भी आंखें मूंद ली। किट में दी गई सभी वस्तुएं की क़्वालिटी तय मानकों से बेहद खराब थी। खास तौर पर किट में दिया गया आटा, तेल,मशाले और साबुन । यही नही आटे की जो थैलियां बाँटी गयी वे भी वितरण से काफी समय पूर्व तैयार की गई थी और थैलियों पर बेस्ट यूज 5 डे फ्रॉम डेट ऑफ पैकेजिंग लिखा हुआ था । बाद में ठेकेदार फर्म द्वारा पेन से आटा थैली पर पुरानी डेट की जगह 27/3/20 अंकित कर दी यानि कि एक्सपायरी डेट का आटा किटों में सप्लाई कर दिया गया । यदि किट की क्वालिटी को सही ढंग से चेक की जाती तो किट की कोई भी वस्तु तय स्टेंडर्ड के अनुरूप पास नही हो सकती थी । पर भ्रष्टाचार की भांग से मस्त पालिका अधिकारियों ने आंखे मूंद ली। वैसे भी राशन किट गरीबों में बांटी जानी थी तो क्वालिटी की फिक्र कौन करता ?

    किट की संख्या को लेकर उठ रहे सवाल !

    नगरपालिका के अनुसार लॉकडाउन के दौरान दो चरणों में करीब 4600 से ज्यादा राशन किट का वितरण किया गया। कच्ची बस्ती के वार्डों में 150 तो अन्य वार्डों में 50 से 100 किट का वितरण की बात प्रशासन कर रहा है। परन्तु नगरपालिका के कई वर्तमान पार्षदों ने भी उस दौरान राशन किट का सही वितरण नहीं होने का आरोप लगाया था । इसके अलावा पार्षदों पर वास्तविक जरूरतमंद को किट देने की बजाय अपने नजदीकी लोगों को ही किट देने के आरोप भी लगे थे। यही नही कई माननीय जनप्रतिनिधी किटों को बेचने की कोशिश करते भी दिखे । इसके अलावा नगरपालिका द्वारा बाँटी गयी किट की संख्या को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि किट लेने वालों के फ़र्ज़ी नामो की सूची बनाकर रिकॉर्ड तैयार कर लिया गया है । लेकिन अगर नगरपालिका लाभर्थियों की सूची जारी करे तो अधिकारियों के साथ-साथ कई जनप्रतिनिधियों के चहरों से भी नकाब उठ सकता है !

    राशन किट खरीद कमेटी की भूमिका सवालों के घेरे में !

    राशन किट के टेंडर से पहले नगरपालिका स्तर पर एक कमेटी का गठन किया गया था । इस कमेटी में वाईस चैयरमेन सलीम कुरेशी, परसराम भाटिया, जगदीश मेघवाल, हरीश शर्मा, रोहिताश ओर महेंद्र गोदारा सहित 9 पार्षद शामिल थे । कमेटी सदस्यों की माने तो किट की जल्दी आपूर्ति के लिए ही ज्यादा मूल्य के बावजूद प्रताप किरयाना स्टोर को टेंडर किया गया । लेकिन यह तर्क इसलिए बेमानी है कि उक्त फर्म किट के किसी भी सामान का उत्पादन नही करती है इसलिए उसे भी बाजार से खरीदकर ही सामान की आपूर्ति करानी थी। ऐसे में अगर किसी ओर फर्म को टेंडर होता तो वह भी आपूर्ति कर सकती थी। टेंडर कमेटी में इतने अनुभवी पार्षदों के होते हुए राशन किटों की खरीद बाजार मूल्य से अधिक पर होना इन पार्षदों की योग्यता पर सवाल खड़े करता है । इससे भी बड़ा सवाल ये है कि जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी में तमाशबीन बने इन अनुभवी पार्षदों का ये हाल है तो आप अंदाजा लगाइये नगरपालिका में चल रहा जनता के धन की लूट का खेल कैसे रुकेगा ?

    अन्ततः….

    राशन किट की खरीद में गड़बड़ी ने ये साफ कर दिया है कि 10 माह पहले जनता ने नगरपालिका में बोर्ड भले ही बदल दिया है पर व्यवस्था में जरा भी बदलाव नही आया है। कोरोना काल मे जब लोग अपने पैसों से गरीबों की मदद के लिए आगे आ रहे थे उसी दौर में नगरपालिका के भृष्ट सिस्टम ने गरीबों को बांटी जाने वाली राशन किट में ही खेल कर दिया गया तो आप खुद ही अंदाज़ा लगा सकते हैं कि नगरपालिका के अफसर और बाबू किस स्तर पर भ्रष्टाचार की सीमाएं लाँघ चुके हैं । काजल की कोठरी को साफ करने की उम्मीद हमने जिन मास्टर जी से लगाई थी उनका हाल भी आप जान ले । उनसे जब इस मामले में जब पूछा गया तो मास्टर जी मीटिंग का बहाना बनाते नज़र आये। ऐसे में क्या ये मान लेना चाहिए काजल की कोठरी में उतरे मास्टरजी भी कलंक का टीका लगा चुके हैं । लॉकडाउन के दौर में सरकारी दीमकों के गरीबों के निवाले पर पड़े ऐसे डाके को देखकर ही शायद किसी कवि ने ये पंक्तियां लिखी होगी….
    में बचाता रहा दीमकों से घर अपना ।
    चन्द कीड़े कुर्सियों के सारा देश खा गए ।।
    – राजेन्द्र पटावरी

    राशन किट आपूर्ति के लिए नगरपालिका द्वारा निकाली गई निविदा।

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    ‘कोविड-19 के बाद सामाजिक परिदृश्य में बदलाव’ विषय पर आयोजन

    सूरतगढ़। माता जीतोजी कन्या महाविद्यालय सूरतगढ़ व वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय उच्चतर शिक्षा विभाग भारत सरकार के सहयोग से “कोविड-19 सामाजिक परिदृश्य में बदलाव ” विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन हुआ।
    वेब संगोष्ठी के समापन सत्र में महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर की इतिहास विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर मेघना शर्मा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर अनुजा, भगवंत यूनिवर्सिटी अजमेर के कुलसचिव डॉक्टर दिनेश मंडोत व प्रख्यात पत्रकार व चिंतक प्रमोद भार्गव ने विषय के विविध पक्षों पर प्रकाश डालते हुए जहां एक और कोविड-19 के नकारात्मक पक्षों को रेखांकित किया वहीं इस वैश्विक महामारी के दौरान समाज में हुए कुछ सकारात्मक बदलाव पर भी प्रसन्नता व्यक्त की।


    तीन दिवसीय राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का उद्घाटन जगदानंद संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर के पूर्व कुलपति प्रोफेसर विनोद शास्त्री ने किया। उद्घाटन सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय से संबंध दयाल सिंह कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ विजय कुमार वर्मा ने संगोष्ठी के मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कहा कि विश्व महामारियो की जद में पहले भी आता रहा है, लेकिन कोविड-19 ने पूरी मानव जाति को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के हर छोटे-बड़े देश का हर छोटा-बड़ा नागरिक किसी न किसी रूप में इस महामारी से प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि इस महामारी के दौरान मध्यम वर्ग के दो ऐसे रूप निकल कर आए जिसमें एक अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा था तो दूसरा संवेदनहीनता की निम्न स्तर तक जाने वाला मध्यमवर्ग था। उद्घाटन सत्र में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से संबद्ध बसंता गर्ल्स कॉलेज राजघाट वाराणसी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ प्रीति सिंह ने ऑनलाइन शिक्षा की समस्या, चुनौतियां और संभावना विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। दयाल सिंह कॉलेज नई दिल्ली के इतिहास विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अशोक कुमार सिंह ने महामारी के ऐतिहासिक संदर्भ पर अपनी बात रखी।

    संगोष्ठी के दूसरे दिन केंद्रीय विश्वविद्यालय गांधीनगर गुजरात के डॉक्टर प्रियरंजन कुमार, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय कोलकाता पश्चिम बंगाल के डॉक्टर ललित कुमार, रणजीत सिंह मेमोरियल पीजी कॉलेज उत्तर प्रदेश के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अमित कुमार सिंह, जय प्रकाश यूनिवर्सिटी बिहार के डॉ कृष्ण कुमार कृष्णा ने भी कोरोना संकट के सामाजिक प्रभाव को लेकर अपनी बात रखी। कार्यक्रम में वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर अवनीश कुमार सिंह ने आयोग की कार्यप्रणाली को विस्तार पूर्वक समझाया जबकि आयोग के सहायक निदेशक डॉ बी.के. सिंह व राजनीति विज्ञान शब्दावली के सहायक डॉक्टर शहजाद अहमद अंसारी ने आयोग की विविध योजनाओं और कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्राचार्य डॉ मोहिनी दहिया ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया, जबकि इतिहास विभाग की डॉक्टर नीलम शर्मा ने प्रतिभागियों, कीनोट स्पीकर व आयोग का आभार व्यक्त किया ।

    इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल संयोजन एन.के. सोमानी असिस्टेंट प्रोफेसर पोलिटिकल साईंस ने किया। संगोष्ठी में देश भर से 600 से अधिक एसोसिएट प्रोफेसर,असिस्टेंट प्रोफेसर, रिसर्च स्कॉलर व स्टूडेंट ने भाग लिया। गोष्टी दिनांक 7, 8 वह 9 अगस्त को दोपहर 12:00 से 2:00 बजे तक गूगल मीट व यूट्यूब चैनल पर संचालित की गई।

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    विदाई समारोह मामले में 4 माह बाद भी प्रशासन की चुप्पी

    सूरतगढ़। सूरतगढ़ एडीएम अशोक मीना आजकल खूब चर्चा में है । एडीएम साहब की ये खासियत है कि सोशल डिस्टेंसिग और धारा 144 के पालन का बहुत ध्यान रखते हैं। साहब को बर्दाश्त नही है कि उनके ऑफिस में कोई सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करे। इसका उदाहरण दो दिन पूर्व उस समय देखने को मिला जब सूरतगढ़ संघर्ष समिति से जुड़े लोग क्रमिक अनशन शुरू करने की जानकारी का ज्ञापन देने एडीएम साहेब के पास पहुंचे। समिति के गरीब सदस्यों को देखते ही एडीएम साहब को ध्यान आया कि सोशल डिस्टेंसिंग का वायोलेशन हो रहा है। सो उन्होंने बुला डाली पुलिस और समिति के दो लोगों को गिरफ्तार करवा दिया। पहले तो कहा गया कि दोनों वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे । फिर बाद में पता चला कि शांति भंग के आरोप में दोनों को गिरफ्तार किया गया। इसी तरह कुछ दिन पहले जब विधायक रामप्रताप कासनिया कच्ची बस्ती के कुछ लोगो के साथ साहब के कार्यालय पहुंचे तो नेताजी के साथ आई भीड़ से सोशल डिस्टेंसिंग भंग होने की आशंका भर से ही साहेब का पारा हाई हो गया और गर्म हो गए नेताजी जी पर। हालांकि गुस्से में एडीएम साहेब ये भी भूल गए कि वे एक वर्तमान विधायक से बात कर रहे हैं । उन्हें ये भी याद नही रहा की जिस सरकार का सूबे में राज है उसी के मुखिया ने कुछ महीने पूर्व एक आदेश दिया है कि अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों से सभ्यता से पेश आना होगा । खैर अच्छी बात है कि एडीएम साहब सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हैं और इसका वाईलेशन करने वालों को सज़ा भी देते हैं । पर कई बार लगता है एडीएम साहब का सोशल डिस्टेंसिंग का फॉर्मूला सिर्फ अपने ऑफिस तक ही सीमित है। शहर में दूसरी जगहों पर इसका मजाक उड़े तो उन्हें कोई फर्क नही पड़ता और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाने वाला अगर प्रभावशाली व्यक्ति हो तो साहब की कलम की स्याही सुख जाती है। नगरपालिका सभागार में ईओ लालचंद सांखला के सेवानिवृत्त के मौके पर सोशल डिस्टेंसिंग का किस तरह मख़ौल उड़ाया गया ,ये सब ने देखा था और इस मौके के फोटो व वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब प्रसारित हुए थे । होना तो ये था कि शहर में सोशल डिस्टेंसिंग की पालना कराने के सबसे जिम्मेदार अधिकारी होने के नाते वे स्वंय घटना का संज्ञान लेते । परन्तु हालात ये है कि इस मामले में शिकायत के बाद भी चार महीने हो गए हैं लेकिन साहब दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की जगह जांच को ही दबाये बैठे हैं । क्योंकि यह मामला सीधे सीधे शहर के प्रथम पुरुष यानी नगरपालिका चैयरमेन से जुड़ा हुआ है तो लॉकडाउन के दौरान और धारा 144 लागू होने के बावजूद नगरपालिका सभागार में जिम्मेदार लोगों द्वारा बड़ी संख्या में लोगो को इक्कठ्ठा करना, एडीएम साहब को सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन नही लगता है । यही नही ब्लॉक कांग्रेस के विधुत विभाग कार्यालय में प्रदर्शन और भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री के पत्र वितरण के कार्यक्रम सहित और भी कई मौके ऐसे थे जब शहर में सोशल डिस्टेंसिंग का मजाक बनता रहा पर साहेब की आंखे नही खुली । भारत में क्योंकि कानून का राज है? ऐसे में प्रशासन सोशल डिस्टेंसिंग के उल्लंघन के मामलों में कानून की अलग-अलग व्याख्या नही कर सकता है ? परन्तु एडीएम साहब हर मामले में सोशल डिस्टेंस के नियमो की अलग अलग व्याख्या करते दिख रहे हैं । ऐसे में क्या ये मान लिया जाए कि साहेब का जोर कमजोर लोगों पर ही चलता है ? या फिर ये मान लिया जाए कि साहब के सोशल डिस्टेंसिंग के नियम आम गरीब जनता के लिए है ? पैसे वालो और ताक़तवर राजनेताओं के लिए नही !

    – राजेन्द्र पटावरी

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    आंदोलन के सहारे राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा पूरी होने की उम्मीद

    पूर्व प्रधान साहबराम पूनियां की सक्रियता ने बढ़ाई सियासी गर्मी

    राजनीति का यूं तो कोई मौसम नहीं होता। वैसे माना जाता है कि चुनाव से पहले राजनीति अपने चरम पर होती है।  लेकिन सूरतगढ़ की बात करें तो कोरोना महामारी के बीच भी राजनीति अपने परवान पर है। पंचायत समिति के पूर्व प्रधान साहबराम पूनियां ने इसकी शुरुआत पिछले दिनों शहर में रेलवे से जुड़े मामलों में ज्ञापन देकर की । इसके बाद से वे किसानों के मुआवजे सहित कई मामलों में प्रशासन को घेरते नज़र आये। वही उन्होंने उपखण्ड कार्यालय पर पूर्व विधायक के खिलाफ चल रहे सूरतगढ़ बचाओ संघर्ष समिति के धरने पर बैठकर आंदोलन को भी समर्थन दिया। पूर्व प्रधान की शहर की राजनीति में एकाएक सक्रियता ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की अफवाहों को जन्म दे दिया है। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि पूनियां एक दबंग कद्दावर नेता तो है ही , साथ ही साथ विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में उनका बड़ा प्रभाव है। पिछले चुनावों में कांग्रेस और भाजपा के कई नेताओं को सत्ता से दूर रखने में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई है। यही वजह है कि पूनियां के सक्रिय होने के बाद दोनों पार्टियों के कई अन्य नेता भी सक्रिय हो गए हैं। उदाहरण के तौर पर विधानसभा चुनाव के बाद लगातार निष्क्रिय रहे राजेन्द्र भादू ने फसल बीमा के क्लेम को लेकर किसानों के साथ उपखण्ड कार्यालय पर पड़ाव डाल दिया। कई दिन चले धरने की कामयाबी से उत्साहित भादू ने इसके बाद कँवरसेन लिफ्ट नहर पर किसानों को पानी की मांग को लेकर धरना देकर मामले को सुर्खियों में ला दिया। पूर्व प्रधान और पूर्व विधायक की इस  सक्रियता से वोट बैंक के संभावित नुकसान ने आखिरकार वर्तमान विधायक को भी मैदान में आने के लिए मजबूर कर दिया। विधायक कासनिया जो अब तक नगरपालिका में हो रहे भ्रष्टाचार के मामलों चुप्पी साधे हुए थे, शुक्रवार को कच्ची बस्ती के लोगों को साथ लेकर एडीएम कार्यालय पर पहुंच गये। कासनिया ने अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए कच्ची बस्तियोंं के मकानों पर क्रॉस का निशान लगानेे का विरोध किया । इस दौरान वर्तमान विधायक और एडीएम अशोक मीणा के  बीच तीखी नोकझोंक भी हुई । जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है। साहबराम पुनिया,राजेंद्र भादू और वर्तमान विधायक रामप्रताप कासनिया के अलावा दूसरी पंक्ति के कुछ और नेता भी इन दिनों अपनी राजनीति चमकाने के लिए पूरा दमखम लगाये हुए है।

    कुल मिलाकर इस वक़्त जब नगरपालिका में लगातार उठ रहे भ्रष्टाचार के मामलों, अतिक्रमण के गंभीर आरोपों और प्रशासनिक कार्यालयों में बद से बदतर होते हालात के चलते शहर की जनता निराश है। ऐसे में इस मौके का फायदा उठाने के लिए विधायक बनने का सपना देख रहे सभी नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए जुटे गए हैं । ये और बात है कि विधायक पद के अधिकांश दावेदारों ने विधायक पद पर रहते हुए अपने समर्थकों ओर जनता दोनों निराश ही किया हैं। ऐसे में साहबराम पूनियां या कोई दूसरा नेता विकल्प बन पाते हैं या नही , इसका फैसला तो भविष्य के गर्भ में छुपा है। परंतु इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि फिलहाल इन नेताओं ने सूरतगढ़ की राजनीति के ठहरे हुए पानी में हलचल जरूर पैदा कर दी है ।

    -राजेन्द्र पटावरी

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    सीवरेज ,कोरोना में बने पट्टों ओर राशन किट में घोटाले का लगाया आरोप

    सूरतगढ़। शहर की राजनीति में इन दिनों प्रेस कॉन्फ्रेंस का दौर चल रहा है। पिछले दिनों विधायक रामप्रताप कासनिया के बाद नगरपालिका चेयरमैनओमप्रकाश कालवा भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये पहली बार मीडिया के सामने आए । जिसमे चैयरमेन कालवा ने एक 30 सूत्री योजना पत्र भी जारी किया । इसी कड़ी में बुधवार को पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल भी मीडिया से रूबरू हुए । प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व चेयरमैन मेघवाल ने योजना पत्र पर सवाल खड़े करते हुए चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा पर भ्रष्टाचार के कई संगीन आरोप जड़ डाले। पूर्व चेयरमैन ने योजना पत्र में किए गए दावों का बिंदुवार जवाब भी दिया है। इस दौरान मेघवाल ने मीडिया के तीखे सवालों के जवाब भी दिए।

     
    सीवरेज कंपनी को भुगतान के बदले 25 लाख की रिश्वत लेने का आरोप

    पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल ने चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा पर आरोप लगाते हुए कहा कि चेयरमैन बनने के बाद ओम कालवा ने 28-11-2019 को सीवरेज कंपनी का भुगतान रोकने और उसके खिलाफ मामला दर्ज करवाने की बात कही थी। लेकिन 10 रोज बाद ही नगरपालिका ने सीवरेज कंपनी का करीब 2 करोड रुपए का भुगतान 25 लाख रुपए की रिश्वत लेकर कर दिया । पूर्व चैयरमेन ने तो यहां तक आरोप लगाया कि इसी दौरान चेयरमैन कालवा ने रामसरा जाखडान में नामी- बेनामी 40 लाख रुपये की करीब 10 बीघा जमीन खरीदी है। ऐसे समय में जब सीवरेज की समस्या के चलते पूरा शहर पिछले चार-पांच सालों से त्रस्त है और सत्ता बदलाव के बावजूद सीवरेज कंपनी के रवैये में बदलाव नही आना ऐसे आरोपों के बारे में सोचने को मजबूर करता है ।

    15 से 20 लाख रुपये लेकर बनाये गए कोरोना पट्टे- पूर्व चैयरमेन

    पूर्व चेयरमैन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में नगरपालिका के चर्चित पट्टा घोटाले को लेकर भी नगरपालिका पर बड़ा आरोप जड़ा । उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान 15 से 20 लाख रुपये लेकर पट्टे बनाये गए । यही नहीं उन्होंने वर्तमान चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा की भूमिका को लेकर कहा कि जब मामला उजागर हुआ तो चेयरमैन कालवा ने पट्टों पर साइन करना बंद कर दीये । जिसके बाद तात्कालिक अधिशासी अधिकारी लालचंद सांखला ने 2 जगहों पर साईन और मोहर लगाकर पट्टे जारी कर दिए गए। पूर्व चेयरमैन के मुताबिक स्टेट ग्रांट और खांचा भूमि के पट्टों के अलावा कच्ची बस्तियों में पट्टे बनाने के लिए बोर्ड की बैठक में सहमति में लिया जाना जरूरी है। इसलिए लॉकडाउन में बनाए गए सभी पट्टेेे अवैध है।

    लैंड बैंक के नाम पर जनता से किया जा रहा धोखा !

    पूर्व चेयरमैन ने कहा है कि जनता को लैंड बैंक बनाने का सपना दिखाया है। जबकि हकीकत यह है कि नगरपालिका का लैंड बैंक पहले से ही बना हुआ है। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल में ही पैराफेरी क्षेत्र की करीब 37 हैक्टर भूमि को  राजस्व विभाग से नगर पालिका को हस्तांतरित करवा ली गई थी। उनके अनुसार नए हाउसिंग बोर्ड के उत्तर दिशा और वाटर वर्क्स के पश्चिम दिशा में रिलायंस पेट्रोल पंप, जीएसएस , आईटीआई , और सैनी रेस्टोरेंट के पास की इस 37 हेक्टेयर भूमि में ही नगर नियोजन विभाग से राजीव आवास योजना को स्वीकृत करवाकर भूखंडों का जरिये नीलामी आवंटन भी किया जा चुका है।   

    पूर्व चैयरमेन के मुताबिक करीब 134 हेक्टेयर भूमि जोकि खेजड़ी मंदिर से शुरू होकर उपकारागृह के पीछे कैनाल के साथ-साथ स्थित है और खेजड़ी मंदिर से बाबा रामदेव मंदिर के मध्य स्थित है को 17/10/2011 को राजस्व विभाग को राशि जमा करवाकर नगरपालिका को हस्तांतरित करवाया जा चुका है।    

    यही नही वे कहते हैं कि पैराफेरी क्षेत्र की करीब 466 हेक्टेयर भूमि 7/9/2006 को राजस्व विभाग द्वारा नगरपालिका को हस्तांतरित किया जा चुका है। पूर्व चैयरमेन के अनुसार पैराफेरी क्षेत्र की इस भूमि के भौतिक सत्यापन के लिए उन्होंने अपने कार्यकाल में 2012-13 में जिला कलेक्टर महोदय को पत्र भी लिखा था।  पूर्व चेयरमैन ने दावा किया कि कालवा ने लैंड बैंक बनाकर रियायती दर पर गरीब व कमजोर लोगों को जो भूखंड देने का वादा किया है वह भी पूर्णतया झूठा है। क्योंकि रियायती दर पर भूखंड देने में नगरपालिका सक्षम ही नहीं है। ऐसा निर्णय सरकार द्वारा प्रस्तावित योजनाओं में ही और सरकार के स्तर पर ही लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि चेयरमैन कालवा द्वारा अपने काले कारनामों से ध्यान हटाने के लिए लैंड बैंक का लॉलीपॉप जनता को दिया जा रहा है। जो कि किसी छलावे से कम नहीं है।

    अपने कार्यकाल में बनाये गए 62 पट्टों पर दी सफाई

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व चैयरमेन से पूर्व विधायक और चैयरमेन कालवा द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में 62 फ़र्ज़ी पट्टे बनाने और बाद में उन्हें रदद् करवाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह मामला 2010 का है । वे तब नए नए चैयरमेन बने थे ।उस समय तात्कालिक ईओ मदन सिंह बुडानिया ने नियमो का हवाला देकर ये पट्टे बनाए थे। ईओ के विश्वास पर ही उन्होंने पट्टों पर साइन किए थे। बाद में जब नये ईओ भंवरलाल सोनी ने उन्हें जानकारी दी कि ये पट्टे नियमो के विरुद्ध है तो उन्होंने खुद ही इन्हें रदद् करने की मांग करते हुए सीएम को पत्र लिखा था ।

    अन्तत…

    राजनीति में ईमेज़ का बड़ा महत्त्व है। इसलिए जो समझदार नेता होते हैं वे अपनी इमेज के प्रति बहुत गंभीर होते हैं । जो इसकी और ध्यान नही देते हैं उन्हें इनकी कीमत भी चुकानी पड़ती है । उदाहरण के तौर पर आप सूरतगढ़ के बड़े नेताओं को भी देख सकते हैं । भ्रष्टाचार के आरोपों में और अपने कामों से जनता की नजरों से गिरने वाले नेताओं को जनता ने दूसरा मौका नही दिया है। इसलिए राजनीति में लम्बी पारी का सपना देख रहे चैयरमेन कालवा को इन आरोपों का जवाब देना चाहिए । वरना खामोशी को मौन स्वीकृति ही माना जाता है । बहरहाल अब तक मास्टरजी वाली छवि वाले चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा पर छोटे से कार्यकाल में लग रहे संगीन आरोपों के बीच एक बहुत ही रोमांटिक गीत की ये पंक्तियाँ याद आ रही है ।

    सरकती जाए है सर से नकाब ! आहिस्ता आहिस्ता……….

    पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया प्रेस नोट।
    चैयरमेन कालवा के 30 सूत्री योजना पत्र का बिंदुवार जवाब -पेज 1
    चैयरमेन कालवा के 30 सूत्री योजना पत्र का बिंदुवार जवाब -पेज 2
    चैयरमेन कालवा के 30 सूत्री योजना पत्र का बिंदुवार जवाब -पेज 3

    -राजेन्द्र जैन

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    स्कूल की खुशी तनेजा बनी जिला टॉपर

    खुशी 98.6 प्रतिशत अंक पाकर बनी टॉपर

    जिला टॉपर आने पर खुशी तनेजा का मुंह मीठा करते डायरेक्टर अनिल चुघ ओर खुशी के परिजन

    सूरतगढ़ । सीबीएसई के दसवीं बोर्ड के बुधवार को घोषित नतीजों के बाद कस्बे के ब्लॉसम एकेडमी स्कूल ने एक बार फिर अपने बेहतर प्रदर्शन से शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठता सिद्ध कर दी है। गत वर्षो की तरह इस बार भी स्कूल का परीक्षा परिणाम दूसरे स्कूलों के मुकाबले बेहतर रहा है। ब्लॉसम एकेडमी के निदेशक सूचित कोठारी के अनुसार स्कूल की खुशी तनेजा ने 98.6 प्रतिशत अंकों के साथ जिला मेरिट में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं 97% अंकों के साथ अबीर सामंता ने स्कूल में दूसरा स्थान हासिल किया है। इनके अलावा स्कूल के 36 विद्यार्थियों ने 90% से भी अधिक अंक हासिल करने में सफलता पाई है। स्कूल के 8 विद्यार्थियों ने गणित विषय में 100% अंक हासिल कर अनोखा कीर्तिमान बनाया है। विद्यार्थियों की इस सफलता से विद्यालय में खुशी की लहर है। स्कूल के विद्यार्थी इस सफलता के लिए स्कूल प्रबंधन व टीचर्स को इसका श्रेय देते हैं ।

    सुनियोजित तैयारी और मेहनत से मिली सफलता – अनिल चुघ

    ब्लॉसम एकेडमी के निदेशक अनिल चुघ के अनुसार बोर्ड परीक्षा में बेहतर परिणाम टीम वर्क का नतीजा है । उन्होंने बताया कि स्कूल में प्रत्येक स्टूडेंट पर कड़ी मेहनत की जाती है। साथ ही स्कूल में रटाने की वजाय सिखाने पर जोर दिया जाता है। बोर्ड परीक्षा की तैयारी को लेकर उन्होंने बताया कि बोर्ड परीक्षा के लिए स्कूल द्वारा विशेष कक्षाओं का आयोजन किया जाता है वही रिवीजन और टेस्ट पर विशेष जोर दिया जाता है। जिससे कि छात्र परीक्षा के लिए मानसिक रूप से तैयार हो जाते हैं और बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

    स्टाफ की मेहनत का नतीजा है परीक्षा परिणाम- प्रधानाचार्य

    संस्था की प्रधानाचार्य नीलू चुघ ने CBSE बोर्ड में बेहतर नतीजों के लिए विद्यार्थियों के साथ साथ स्टाफ को भी बधाई दी । उन्होंने कहा कि विद्यालय के स्टाफ ने  विद्यार्थियों के साथ मिलकर दिन रात मेहनत की जिसके परिणाम स्वरूप स्कूल के विद्यार्थियों ने यह सफलता अर्जित की। उन्होंने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए बेहतर भविष्य के लिए शुभकामना दी ।

    – राजेन्द्र जैन

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    25 प्रतिशत फीस माफ करने का लिया फैसला

    अभिभावकों से भी की सहयोग की अपील

    सूरतगढ़ । कोरोना और लॉकडाउन के चलते आर्थिक तंगी से परेशान अभिभावकों को  स्कूल फीस में राहत के लिए शहर के कुछ स्कूल आगे आये है। शहर के अंग्रेजी माध्यम के CBSE बोर्ड से संबंधित चार स्कूलों ने वर्तमान सत्र 2020-21 की फीस में 25% की छूट देने की घोषणा की है। फीस में रियायत की घोषणा करने वाले स्कूलों में ब्लॉसम एकेडमी, हर्ष कान्वेंट स्कूल, सूरतगढ़ पब्लिक स्कूल (SPS) और दिल्ली पब्लिक स्कूल(DPS) शामिल है। अब इन स्कूलों के विद्यार्थियों को 12 माह की बजाय 9 माह की फीस ही देनी होगी ।

    प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद चारों स्कूलों के प्रबंधन कमेटी सदस्य




    प्रेस कॉन्फ्रेंस कर की तीन माह की फीस माफी की घोषणा

    रविवार को दिल्ली पब्लिक स्कूल के मानकसर स्थित कैंपस में इन स्कूलों के प्रबंधन की ओर से सांझा प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली पब्लिक स्कूल के प्रबंधक मुकेश पारीक व वेद प्रकाश पारीक, सूरतगढ़ पब्लिक स्कूल के प्रबंधक प्रवीण अरोड़ा व जयकिशन अरोड़ा, ब्लॉसम एकेडमी के प्रबंधक अनिल चुघ व सूचित कोठारी और हर्ष कान्वेंट स्कूल के प्रबंधक अनिल धानुका व राकेश धानुका मौजूद रहे। एसपीएस स्कूल के प्रबंधक प्रवीण अरोड़ा ने चारों स्कूलों की ओर से दिए गए सांझा वक्तव्य में वर्तमान सत्र में 25 प्रतिशत फीस माफी की घोषणा की। ब्लॉसम एकेडमी के प्रबंधक अनिल चुघ ने बताया कि इस छूट के बावजूद भी अगर कुछ पेरेंट्स को फीस को लेकर किसी तरह की परेशानी होती है तो इसके लिए भी सभी चारों स्कूलों में एक-एक कमेटी का गठन किया जाएगा। यह कमेटी आर्थिक रूप से अत्यधिक कमजोर स्थिति वाले अभिभावकों को 25% फीस माफी के अतिरिक्त छूट देने या भुगतान का समय बढ़ाने पर विचार करेगी। अतिरिक्त छूट के लिए अभिभावकों को कमेटी को आवेदन करना होगा । हर्ष कान्वेंट स्कूल के प्रबंधक अनिल धानुका ने बताया कि अभिभावकों को राहत देते हुए सभी चार स्कूलों ने इस वर्ष स्कूल फीस में किसी भी तरह की बढ़ोतरी नहीं करने का भी फैसला लिया है। डीपीएस स्कूल के प्रबंधक मुकेश पारीक ने बताया कि सभी चारों स्कूलों में लॉकडाउन अवधि के दौरान ट्रांसपोर्टेशन चार्जेस को भी स्थगित करने का फैसला किया है। विद्यालय खुलने पर ही पूर्व निर्धारित ट्रांसपोर्टेशन फीस पर फैसला लिया जाएगा।

    स्कूल प्रबंधन का फैसला पेरेंट्स के लिए राहत भरा

    शहर के सीबीएसई से जुड़े चारों प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों का यह निर्णय आर्थिक मंदी से दो-चार हो रहे अभिभावकों के लिए राहत भरा है। हालांकि राज्य सरकार के मंत्री गोविंद सिंह राठौड़ डोटासरा ने क्लास नहीं तो फीस नहीं वाला बयान देकर फीस को लेकर अभिभावकों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। परंतु वास्तविकता यह है कि  देश के अधिकतर हाईकोर्ट ने स्कूल फीस को लेकर स्कूल मैनेजमेंट के पक्ष में फैसला दिया है। इसलिए अभिभावकों पर स्कूल फीस का भार पड़ना तय है। ऐसे में शहर के चार प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों का वार्षिक फीस में 25% की माफी का निर्णय निश्चित तौर पर अभिभावकों के लिए लॉकडाउन के जख्मों पर राहत का मलहम साबित होगा ।

    शहर के अन्य स्कूलों को भी आगे आना चाहिए !

    शहर के इन चार निजी शिक्षण संस्थानों के अलावा भी बड़ी संख्या में निजी शिक्षण संस्थान है। इन निजी शिक्षण संस्थानो में सेक्रेड हार्ट स्कूल जैसे बड़े शिक्षण संस्थान भी हैं।  जो अभिभावकों से मोटी फीस वसूल करते हैं।  शहर के इन चार प्रमुख शिक्षण संस्थानों के वार्षिक स्कूल फीस में रियायत के फैसले के बाद शेष स्कूलों को भी इस मुहिम का हिस्सा बनना चाहिए। जिससे कोरोना काल के इस मुश्किल वक्त में अभिभावकों के कंधे पर अपने नौनिहालों की शिक्षा का बोझ कुछ कम हो सके। पिछले सालों में शिक्षा के व्यापार से आसमान छूती बिल्डिंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने वाले स्कूल प्रबंधको के लिये यह वक़्त सामाजिक सरोकार निभाने का भी है।

    अभिभावकों से की सहयोग की अपील

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी चारों स्कूलों के प्रबंधकों ने प्रेस के माध्यम से पेरेंट्स से सहयोग की अपील की है। प्रबंधकों की ओर से कहा गया कि सभी स्कूलों द्वारा पिछले 4 माह से सीबीएसई के निर्देशों का पालन कर ऑनलाइन कक्षा का आयोजन करवाया जा रहा है। इसके लिए प्रबंधन द्वारा शिक्षकों को ऑनलाइन शिक्षण की ट्रेनिंग करवाने के साथ-साथ आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है । इसके अलावा स्कूल के शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों के वेतन और रखरखाव के अलावा अन्य व्यय का भार भी स्कूलों पर पड़ रहा है । इसलिए उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि स्कूल फीस का सुविधानुसार आंशिक या पूर्ण भुगतान कर इस मुश्किल घड़ी में स्कूल मैनेजमेंट का सहयोग करें।

    –राजेन्द्र जैन

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    लॉकडाउन में बने 10 और कोरोना पट्टों का खुलासा , शिकायतकर्ता भागीरथ मेघवाल ने एडीएम को सूची देकर की जांच की मांग

    ( लॉकडाउन के दौरान नगरपालिका में पट्टों के खेल पर तथ्यात्मक रिपोर्ट)

    कभी-कभी ऐतिहासिक उक्तियां भी देश,काल और समय के साथ बदल जाती हैं । ऐसा कहा जाता है कि ‘जब रोम जल रहा था तो नीरो बांसुरी बजा रहा था’। हमारे शहर के संदर्भ में एक नई लोकोक्ति यह बन रही है कि ‘ कोरोना संकट की घड़ी में डरे हुए लोग जब उलजुलूल ज्ञान पेल रहे थे तब सूरतगढ़ नगरपालिका के ईओ और चेयरमैन ‘पट्टा-पट्टा’ खेल रहे थे’।

    जी हाँ ! ये बिल्कुल सच है । जब कोविड-19 के चलते देश में संपूर्ण लोकडाउन चल रहा था तब सूरतगढ़ नगरपालिका, चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा ओर अधिशासी अधिकारी लालचंद सांखला के नेतृत्व में भ्रष्टाचार का नया इतिहास लिख रही थी । जब केंद्र सरकार और राज्य सरकारें आम आदमी के स्वास्थ्य की चिंता कर रही थी तब इस बदकिस्मत शहर की सरकार के हाकिम भ्रष्टाचार की काली कमाई से अपना घर भरने में जुटे थे ।

    जनता के स्वास्थ्य की चिंता से इतर सरकारी धन की ज्यादा से ज्यादा लूट में लगे इन गुरूओं, जिन्हें गुरुघण्टाल कहना ज्यादा मुनासिब होगा, द्वारा लिखे गए भ्रष्टाचार के काले अध्याय अब सामने आने लगे हैं। शहर के धन्ना सेठों, भू माफियाओं और प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर नगरपालिका में हुए भ्रष्टाचार के नंगे नाच के सभी किरदार अनलॉक पार्ट -2 में नंगे हो रहे हैं।

    सूरतगढ़ के वार्ड नंबर-10 निवासी भागीरथ मेघवाल ने करीब 1 माह पूर्व लॉकडाउन में बनाए गए 11 फर्जी पट्टों की सूची पेश करते हुए अतिरिक्त जिला कलेक्टर अशोक मीणा को मामले की जांच कर कार्रवाई का ज्ञापन सौंपा था। इस मामले में एडीएम अशोक मीणा सत्ता के बोझ तले दबकर अपनी रीढ़ की ताकत भले ही नहीं दिखा पाए हों, परन्तु परिवादी भागीरथ ने इसी कड़ी में कोराना काल में बनाए गए 10 और फर्जी पट्टों का खुलासा कर नगर पालिका में हुए भ्रष्टाचार की पोल खोल कर रख दी है। मेघवाल ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर को एक बार फिर ज्ञापन देकर इन फर्जी पट्टों की जांच करवाने की मांग की है।

    लॉकडाउन में फर्जी पट्टा लेने वाले लाभार्थी

    परिवादी भागीरथ मेघवाल ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में जिन पट्टों को लॉकडाउन के दौरान भ्रष्ट तरीकों से बनाने का आरोप लगाया है, वह इस प्रकार है :

    1. पट्टा संख्या – 4 ,श्रीमती सुनीता पत्नी श्री जेठाराम जाति-मोची, वार्ड संख्या – 38,सूरतगढ़।
    2. पट्टा संख्या – 7, राजीव कुमार पुत्र श्री सुनील कुमार जाति- ब्राह्मण, वार्ड नंबर – 22,सूरतगढ़।
    3. पट्टा संख्या -29, श्रीमती कौशल्या देवी पत्नी श्री कृष्ण लाल बिश्नोई, वार्ड नंबर -1,सूरतगढ़ साइज -1000 वर्ग गज,(खाता संख्या-337 में दर्ज़ है )
    4. पट्टा संख्या – 34, गुरजंट सिंह पुत्र श्री जसपाल सिंह, वार्ड नम्बर- 3, सूरतगढ़ ।
    5. पटा संख्या – 35, श्रीमती गीता देवी पत्नी श्री मोहनलाल, वार्ड नंबर – 9 सूरतगढ़।
    6. पट्टा संख्या – 36, अमृतपाल सिंह पुत्र श्री बग्गा सिंह , जाति -तरखान,साइज-25×50, वार्ड नंबर – 3,सूरतगढ़।
    7. पट्टा संख्या -38, श्रीमती अनीता पत्नी श्री दयानंद,जाति- स्वामी, वार्ड नंबर – 3,सूरतगढ़।
    8. व्यावसायिक खांचा भूमि का आवंटन- महेंद्र गोदारा (पार्षद) पुत्र राजाराम गोदारा व भानू गोदारा पुत्र राजाराम गोदारा को सयुंक्त रूप से वार्ड नंबर 27,सूरतगढ़ में व्यावसायिक भूखंड संख्या – 38 से सटी खाँचा भूमि , साइज-6×44 वर्ग फुट ।
    9. खांचा भूमि का आवंटन-महेंद्र गोदारा (पार्षद) पुत्र राजाराम गोदारा व भानू गोदारा पुत्र राजाराम गोदारा को सयुंक्त रूप से वार्ड नंबर-23, सूरतगढ़ में, साइज- 6×66 वर्ग फुट । ( इस पर प्रकरण में दोनों भाइयों ने खुद को वार्ड-23 का निवासी बताया है )
    10. व्यावसायिक खांचा भूमि का आवंटन- महेंद्र गोदारा व भानू गोदारा को संयुक्त रूप से वार्ड नंबर -17 पुराना व नया- 6 में नए बस स्टैंड के पास व्यावसायिक भूखंड संख्या-43 के साथ सटी भूमि, साइज -3.5×30 वर्ग फुट ।

    चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा पर आरोप

    परिवादी भागीरथ ने चेयरमैन ओम कालवा पर पट्टे जारी करने में मूक सहमति होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि पालिका द्वारा बनाए गए पट्टों और पट्टे बनाने की फाइलों में भले ही चेयरमैन कालवा ने हस्ताक्षर न किए हो। लेकिन उन्हें पट्टे बनाए जानेे की जानकारी थी। इसके बावजूद उन्होंने इस गोरखधंधेे को रोकने की कोशिश नहीं की। इसका मतलब है कि इस सारे खेल उनका मूक समर्थन था।

    पार्षद महेंद्र गोदारा पर आरोप

    परिवादी भागीरथ ने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि महेंद्र गोदारा पार्षद है और उनकी माता श्रीमती परमेश्वरी देवी गोदारा भी वर्तमान में पार्षद है ऐसे में दोनों भाई ( महेंद्र व भानू गोदारा) नगरपालिका से हितबद्ध होने के कारण भूमि आवंटन का फायदा नहीं ले सकते हैं। गौरतलब है कि यदि किसी प्रकरण में हितबद्ध व्यक्ति है तो उसके लिए पालिका नियमानुसार अलग प्रक्रिया है । ऐसा मामला बोर्ड की बैठक में रखा जाना चाहिए तथा हितबद्ध व्यक्ति उस बैठक की कार्यवाही में भाग नहीं ले सकता ।

    कोरोना लॉकडाउन में बने अवैध पट्टों में ये भी है शामिल

    1. पट्टा संख्या -03, अजय कुमार / श्री गिरधारी लाल जाति जाट, वार्ड नंबर -21, सूरतगढ़।

    2. पट्टा संख्या -28, कृष्ण लाल / श्री धूंकलराम जाति बिश्नोई, वार्ड नंबर -27, सूरतगढ़।

    3. पट्टा संख्या -32, राकेश कुमार/ श्री जयदेव जाति गुप्ता, वार्ड नंबर -20 सूरतगढ़।

    4. पट्टा संख्या-41, पवन कुमार/ श्री सुखदेव सिंह जाति माली, वार्ड नंबर -10, सूरतगढ़।

    5. पट्टा संख्या -42,मंगतू राम/ श्री बृजलाल जाति स्वामी , वार्ड नंबर- 26, सूरतगढ़।

    6. पट्टा संख्या-43 बृजलाल/ श्री रामू दास जाति स्वामी, वार्ड नंबर -5,सूरतगढ़।

    7. पट्टा संख्या- 45, राधाकृष्ण/ श्री खियांराम जाति ब्राह्मण, वार्ड नंबर-10 सूरतगढ़।

    8. पट्टा संख्या-46, गोपी राम/ श्री रामेश्वर लाल गोदारा जाति जाट, वार्ड नंबर-10,सूरतगढ़।

    9. पट्टा संख्या -48, गिरधारी लाल /श्री दूलचंद जाति शर्मा, वार्ड नंबर -39,सूरतगढ़।

    10. पट्टा संख्या -32, ओमप्रकाश /श्री पूर्ण प्रकाश मोची, वार्ड नंबर-34 सूरतगढ़।

    तबादलानामा- संदीप डांग S/0 श्री केवल कृष्ण डांग व  सुखवंत चावला S/0 श्री हरप्रीत चावला, वार्ड नंबर 31 सूरतगढ़ को आनंद विहार कॉलोनी के एक भूखंड के बदले 15×25 साइज का इंदिरा सर्किल पर  व्यावसायिक भूखंड ( भूखंड संख्या- 31)

    सब रजिस्ट्रार भी है दोषी !

    भागीरथ मेघवाल का आरोप है कि सब रजिस्ट्रार ने बिना दस्तावेजों की जांच किए और पट्टों पर चेयरमैन के साइन नहीं होने के बावजूद सब लॉकडाउन के दौरान बने पट्टों को पंजीकृत भी कर दिया, इसलिए भ्रष्टाचार के इस खेल में वह भी दोषी है ।

    कार्रवाई नहीं होने पर धरने की चेतावनी

    परिवादी भागीरथ ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर लॉकडाउन में बने इन पट्टों को जांच कर रद्द करने और पट्टा बनाने के दोषी अधिकारियों और लाभार्थियों के विरुद्ध मामला दर्ज करने की मांग की है। ज्ञापन में मेघवाल ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में जांच नहीं की गई तो वे एडीएम कार्यालय पर धरना देने पर मजबूर होंगे।

    विपक्ष सहित राजनीतिक सूरमाओं के मुँह में जमा दही

    इस पूरे प्रकरण में कांग्रेस और सत्ता पक्ष के नेता तथा भ्रष्ट अधिकारी सवालों के घेरे में है। इसके बावजूद विपक्ष के तमाम नेताओं को जैसे सांप सूंघ गया है, उनकी बोलती ही बंद है। लॉकडाउन में बने कोरोना पट्टों के मामले का खुलासा हुए एक माह होने को है। लेकिन क्या मजाल, जो बीजेपी या विपक्ष का कोई नेता निष्पक्ष जांंच की बात ही मुंह से निकाल दे। कभी पूर्व अधिशासी अधिकारी के विरुद्ध विधानसभा में आवाज बुलंद करने वाले रामप्रताप कासनिया की चुप्पी भी इस मामले में रहस्मय बनी हुई है। वर्तमान विधायक की चुप्पी के बीच दो अन्य पूर्व विधायक अशोक नागपाल और राजेंद्र भादू सत्तापक्ष के खिलाफ आवाज उठाएंगे, ऐसी उम्मीद कम ही है । वेेसे भी नेताजी की राजनीति कोरोना वारियर्स को फूल मालाएं पहनाने से ही चल रही है तो कौन पड़ोसियों से बैर मोल ले !

    चैयरमेन कालवा ओर प्रशासन के लिए साख बचाने का आखिरी मौका

    इस पूरे मामले में एक और चैयरमेन कालवा पर भ्रष्टाचार के तो वहीं प्रशासन खासकर एडीएम अशोक मीना पर कारवाई नही करने के सीधे आरोप लग रहे हैं । जाहिर है कि चैयरमेन और प्रशासन की किरकिरी हो रही है । ऐसे में पालिकाध्यक्ष को विवादित पट्टों के मामलों पर अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए और यदि उनकी कोई लिप्तता नहीं है तो स्वंय इस प्रकरण की समयबद्ध जांच करवानी चाहिए । वही एडीएम अशोक मीना को शीघ्र जांच कर दोषी अधिशासी अधिकारी और कर्मचारियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमे दर्ज करवाने चाहिए । वैसे जिले के नए कलेक्टर महावीर वर्मा भी प्रशासन से कम होती उम्मीदों के बीच इस मामले में दखल देकर निष्पक्ष जांच के आदेश देकर भी नई पहल कर सकते हैं । – राजेंद्र जैन

    शिकायतकर्ता भागीरथ मेघवाल द्वारा एडीएम को दिया गया ज्ञापन।

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    चैयरमेन कालवा ने पूर्व विधायक गंगाजल मील के साथ सयुंक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में किये कई खुलासे

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में कालवा ने पेश किया 30 सूत्री योजना पत्र

    होटल गोल्डन इन में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते पूर्व विधायक गंगाजल मील और चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा

    सूरतगढ़। नगरपालिका द्वारा शहर में लैंड बैंक बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। इसके लिए राजस्व विभाग के सहयोग से खाली पड़ी जमीनों के भौतिक सत्यापन की कार्रवाई की जा रही है। लैंड बैंक बनने से गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को रियायती दर पर भूखंड दिए जा सकेंगे। नगरपालिका चुनाव के बाद पहली बार मीडियाकर्मियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा ने ये बात कही। होटल गोल्डन इन में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेयरमैन कालवा के साथ कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक गंगाजल मील भी मौजूद थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा ने शहर के विकास के लिए 30 सूत्री योजना पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने योजना पत्र के बिंदुओं पर शहर के विकास के लिए मीडिया कर्मियों व आमजन से भी सुझाव मांगे । चेयरमैन कालवा द्वारा प्रस्तुत योजना पत्र में लैंड बैंक के अलावा राजीव गांधी आवासीय योजना को विकसित कर नये हाउसिंग बोर्ड से जोड़ने, सैनी धर्मशाला के पास से 100 फुट चौड़ी रोड बना कर आदर्श कॉलोनी को हनुमानगढ़ फोरलेन मार्ग से जोड़ने, थोक सब्जी मंडी को बीकानेर रोड पर भूमि चिन्हित कर स्थानांतरित करने, नगरपालिका के नए भवन का शीघ्र निर्माण शुरू करवाने , शहर के हेरिटेज लुक को बनाए रखने के लिए पैराफेरी क्षेत्र के टिब्बों की सुरक्षा हेतु प्रचार प्रसार करने, हनुमान खेजड़ी मंदिर स्थल के सौंदर्यकरण, फायर ब्रिगेड रोड कार्यालय रोड़ से चेतक चौराहे तक ओवरब्रिज बनाने जैसी घोषणाएं शामिल है। चेयरमैन कालवा द्वारा प्रस्तुत योजना पत्र में एक प्रमुख घोषणा मुख्य बाजार में वाणिज्यक भूखंडों की लीज समाप्त कर पूर्ण स्वामित्व दिए जाने की भी है। चेयरमैन कालवा के अनुसार लीज समाप्त होने से व्यापारियों को जहाँ एक ओर भूखंड का स्थाई स्वामित्व प्राप्त होगा, वहीं दूसरी और नगरपालिका की आय भी बढ़ेगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा व पूर्व विधायक गंगाजल मील के अलावा वाइस चेयरमैन सलीम मोहम्मद क़ुरैशी, पार्षद रोहिताश, महेंद्र गोदारा, शंकर नायक और कांग्रेसी नेता व पार्षद पति धर्मदास सिंधी सहित कई कांग्रेसी नेता व कार्यकर्ता मौजूद थे । प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पूर्व विधायक गंगाजल मील और चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा ने नगरपालिका में भ्रष्टाचार सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रेस के सवालों के जवाब भी दिए ।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते पूर्व विधायक गंगाजल मील और चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा

    लॉकडाउन पट्टा प्रकरण में चल रही जांच, नियम विरुद्ध बने पट्टे होंगे रदद् : कालवा


    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दैनिक सीमांत रक्षक के संपादक सत्यपाल मेघवाल द्वारा पूर्व अधिशासी अधिकारी लालचंद सांखला द्वारा भ्रष्टाचार कर लॉकडाउन के दौरान अवैध रूप से बनाए गए फर्जी पट्टों का मामला उठाया गया। इस पर चेयरमैन ओम कालवा ने कहा कि इस प्रकरण में एसडीएम द्वारा जांच करवाई जा रही है। जांच में जो भी पट्टे फर्जी पाए गए उन्हें निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

    काजल छाबड़ा के कार्यकाल में रची गयी IDSMT योजना के भूखण्डों पर कब्जे की साज़िश: कालवा

    माणकसर लिंक रोड पर स्थित आईडीएसएमटी योजना के खाली पड़े भूखण्डों पर कब्ज़े करवाने के आरोपों से घिरे चेयरमैन कालवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस मामले में वे पूरी तरह से पाकसाफ है । उन्होंने इस मामले में पूर्व चेयरमैन काजल छाबड़ा का नाम लिए बगैर कहा कि आईडीएसएमटी योजना के भूखण्डों पर कब्जा करवाने की कार्रवाई 2018 में ही शुरू कर दी गई थी। उन्होंने इस मामले की फाइल दिखाते हुए कहा कि भाजपा बोर्ड में योजना के भूखंडों पर कब्जा दिखाकर नियमन के लिए आवेदन करवाया गया । जब यह मामला सुर्खियों में आया तो नगरपालिका के अधिकारियों ने मिलीभगत कर आरोपी को नोटिस जारी कर दिया। इसी नोटिस के आधार पर आरोपी ने कोर्ट से स्टे ले लिया। चेयरमैन कालवा ने कहा कि न्यायालय के स्टे को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। स्टे हटने के बाद भूखंडों से कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

    सीवरेज में भ्रष्टाचार पर चेयरमैन ने दी सफाई, कहा – सीवरेज कंपनी का 5 करोड़ का भुगतान होल्ड पर

     प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीवरेज निर्माण कंपनी को किए गए भुगतान के सवाल पर चेयरमैन ओम कालवा सफाई देते नजर आए। उन्होंने कहा कि उनके चेयरमैन बनने के बाद सीवरेज निर्माण कंपनी को एक करोड़ 98 लाख का भुगतान किया गया है। जबकि कंपनी के 5 करोड रुपए का भुगतान रोक लिया गया है। उन्होंने कहा कि नगरपालिका कर्मचारी सीवरेज की व्यवस्था को सुचारू करने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं। लेकिन चेयरमैन ओम कालवा पूरे शहर में सीवरेज सिस्टम को कब तक शुरू किया जा सकेगा। इसको लेकर कोई समय सीमा बता पाने में नाकाम रहे ।

    पूर्व पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल ने बनाए फर्जी पट्टे : गंगाजल मील

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व विधायक गंगाजल मील  कांग्रेस के ही पूर्व पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल पर सीधा आरोप लगाते नज़र आये । उन्होंने पूर्व पालिकाध्यक्ष द्वारा वर्तमान बोर्ड पर लगाए जा रहे आरोपों के सवाल पर कहा कि पूर्व पालिकाध्यक्ष किस मुंह से आरोप लगा रहे हैं ? उन्होंने तो खुद भी अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में 62 फर्जी पट्टे बना दिए। पूर्व विधायक के मुताबिक बनवारीलाल मेघवाल ने लोकायुक्त में प्रकरण लंबित होने के बावजूद नेशनल हाईवे पर दर्जनों पट्टे जारी कर दिए। चेयरमैन कालवा ने पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल पर निशाना साधते हुए कहा कि जब वे (बनवारी लाल मेघवाल) इस मामले में फंसने लगे तो उन्होंने खुद को बचाने के लिए राज्य सरकार को धोखे में रखकर पट्टों पर साइन करवाने की बात कह कर पट्टों को खारिज करने की मांग कर डाली। इस मुद्दे पर उन्होंने पूर्व चेयरमैन द्वारा बनाए गए पट्टों की लिस्ट होने की बात भी कही। लेकिन जब मीडिया कर्मियों द्वारा पटटों की सूची मांगी गई तो चेयरमैन कालवा मीडिया को सूची देने में टालमटोल करते नजर आए।

    अतिक्रमण के मुद्दे पर पूर्व विधायक के निशाने पर आई मीडिया, विपक्षी नेताओं पर जड़े अतिक्रमण के आरोप

    शहर में भू माफियाओं द्वारा किए जा रहे अवैध अतिक्रमण के मुद्दे पर पूर्व विधायक गंगाजल मील ने मीडिया पर ही ठीकरा फोड़ दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया के लोग भाजपा नेताओं द्वारा किये  गए अवैध कब्जों को लेकर सवाल नहीं करते हैं। उन्होंने भाजपा के वर्तमान विधायक पर तबादला लेने के बावजूद करोड़ों रुपए की कीमत की भूमि पर कब्जा करने का आरोप लगाया। इसके अलावा उन्होंने भाजपा से जुड़े एक किसान नेता पर भी करोड़ों रुपए की भूमि पर कब्जा करने के बावजूद मीडिया में मामला नहीं उठाने पर पत्रकारों पर सवाल खड़ा किया । इस दौरान एक पत्रकार द्वारा पूर्व विधायक को सत्ता में होने की बात कहते हुए ऐसे लोगों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू करने को कहा गया तो पूर्व विधायक असहज हो गए ।

    प्रेस कॉलोनी के सवाल पर चेयरमैन कालवा से नही बन पड़ा जवाब 

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चेयरमैन कालवा ने 30 सूत्री योजना पत्र पढ़कर सुनाया। जिसके बाद वरिष्ठ पत्रकार मनोज स्वामी ने चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा से योजना पत्र में पत्रकार कॉलोनी को शामिल नहीं करने पर रोष जताया। पत्रकार के सवाल पर चैयरमेन कालवा बगले झांकते दिखे। बाद में उन्होंने किसी तरह से बात को घुमाते हुए लैंड बैंक बनने के बाद पत्रकारों के लिए कॉलोनी बनाने की बात कही। परंतु वास्तविकता यह है कि जमीन तो बहाना हैं वरना सूरतगढ़ शहर में नगरपालिका के पास जमीन की कोई कमी नहीं है । ऐसे में राजस्थानी भाषा आंदोलन से जुड़े साथी पत्रकार के पत्रकार कॉलोनी के सवाल पर चेयरमैन कालवा के जवाब को सुनकर राजस्थानी की ही एक कहावत याद आती है।

    गुड़ कोनी गुलगुला करती, ल्याती तेल उधारौ।

    परिंडा में पाणी कोनी, बलीतो कोनी न्यारौ।

    कड़ायो तो मांग र ल्याती, आटा को दुख न्यारौ ।।

    (अर्थ – किसी की सहायता करने की इच्छा ना हो तो बहाने हजार है)

    प्रेस कॉन्फ्रेंस या डैमेज कंट्रोल की कवायद ?

    पालिका चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा द्वारा एकाएक बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी कई सवाल खड़े होते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भले ही शहर के विकास के सपने का ब्लूप्रिंट पेश किया गया है । पर क्योंकि चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा पिछले कुछ समय से सीवरेज सिस्टम की अव्यवस्था व भ्रष्टाचार, लोकडाउन के दौरान बनाए गए पट्टों मे संलिप्तता सहित कई मामलों को लेकर आरोपों से घिरे हुए थे और इन आरोपों की वजह से चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा की छवि तो धूमिल हो रही थी,वहीं कांग्रेस के वर्तमान बोर्ड पर भी सवाल खड़े हो रहे थे। दूसरी ओर भाजपा विधायक रामप्रताप कासनिया ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिजली, पानी और सीवरेज जैसे मुद्दों पर नगरपालिका प्रशासन और कांग्रेस को घेरा था । ऐसे में प्रेस कॉन्फ्रेंस का वास्तविक उद्देश्य विकास के सपनो के जरिये डैमेज कंट्रोल करना ही नज़र आता है ।

    -राजेन्द्र जैन

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    चैयरमेन ओम कालवा का सहायक अभियंता को गरियाने का वीडियो वायरल

    सूरतगढ़। सूरतगढ़ में अघोषित विद्युत कटौती के बीच शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। विद्युत विभाग के सहायक अभियंता कार्यालय में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के कई नेताओं ओर कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया । इस मौके पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अगुवाई कर रहे नगरपालिका चेयरमैन ओम कालवा ने विद्युत विभाग के सहायक अभियंता को खूब खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने सहायक अभियंता को लापरवाही बरतने और कामो को लटकाने का आरोप लगाया। चेयरमैन ओम कालवा के सहायक अभियंता की क्लास लेने का वीडियो मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों और अन्य लोगों ने अपने कैमरे में कैद कर लिया। यह वीडियो दिनभर सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा। जिसके चलते चेयरमैन ओम कालवा और सहायक अभियंता की हॉट टॉक चर्चा का विषय बनी हुई है। कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष परसराम भाटिया के अलावा, वाइस चेयरमैन सलीम कुरेशी, पार्षद पति धर्मदास सिंधी,पार्षद महेन्द्र गोदारा,शंकर नायक ओर रोहिताश सहित कई कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।इसके अलावा विरोध प्रदर्शन में अंतिम समय में पूर्व विधायक गंगाजल मील भी पहुंचे और उन्होंने विद्युत विभाग के अधिकारियों को शहर में विद्युत व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

    ब्लॉक कांग्रेस कमेटी का विरोध प्रदर्शन खड़े कर रहा कई सवाल ?

    आमतौर पर जन समस्याओं को लेकर विपक्षी पार्टियां ही विरोध प्रदर्शन करती हैं। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि विरोध प्रदर्शन सरकार के विरुद्ध होते है। ऐसे में जब कांग्रेस की सरकार सूबे की सत्ता में है तो फिर ब्लॉक् कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन को क्या कहा जाए ? क्या यह मान लिया जाए कि सूरतगढ़ में कांग्रेस पार्टी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है ? क्या इस प्रदर्शन का जनता में यह मैसेज नही जा रहा कि सरकारी विभागों में बैठे अधिकारी सत्ताधारी पार्टी और उनके नेताओं को कुछ नही समझते है ? शायद इसीलिए ब्लॉक कांग्रेस नेताओं को प्रदर्शन में पूर्व विधायक गंगाजल मील को बुलाना पड़ा। पूर्व विधायक को प्रदर्शन में बुलाकर ब्लॉक् कांग्रेस नेताओं ने अपनी P तो बना ली पर क्या उन्होंने पूर्व विधायक को अपनी ही सरकार के विरुद्ध कठघरे में नही खड़ा कर दिया है ? ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष परसराम भाटिया काफी सुलझे हुए व्यक्ति माने जाते हैं। फिर ऐसी क्या वजह रही कि उन्होंने अपनी ही सरकार के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया ? क्या ब्लॉक कांग्रेस के नेताओं को इस बात का ज्ञान नहीं है कि पूर्व विधायक अभी भी सूरतगढ़ में सत्ता के शीर्ष पर विराजमान है ? वे जब चाहे इन नाकारा अधिकारियों को सत्ता के चाबुक से लाइन पर ला सकते हैं। ऐसे में जो अधिकारी लापरवाही से कार्य कर रहे हैं उन्हें पूर्व विधायक के माध्यम से बुलाकर आवश्यक आदेश दिलाये जा सकते थे। पूर्व विधायक को इसके लिए अधिकारियों के पास ले जाने की कतई आवश्यकता नहीं थी। लेकिन ब्लॉक कांग्रेस नेताओं ने अति उत्साह या कहें कि बेेेवकूफ़ी केे चलते प्रदर्शन में पूर्व विधायक को आमंत्रित कर लिया। वैसे राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि पूर्व विधायक सहित कांग्रेस के बड़े नेताओं को कुछ चापलूस किस्म के व्यक्ति घेरे रहते हैं। जो अपने नंबर बनाने के चक्कर में इसी तरह की ऊलजुलूल योजना बनाकर कांग्रेस के बड़े नेताओं को बेवजह शर्मिंदा होने का अवसर देते रहते हैं। बहरहाल पूर्व विधायक सहित कांग्रेस के बड़े नेताओं को इस घटना से सबक लेकर चापलूसों से सावधान रहने की जरूरत है।

    अन्ततः….

    कांग्रेस पार्टी के इस विरोध प्रदर्शन के राजनीतिक मायने भले ही कुछ भी हो । यह अच्छी बात है कि कांग्रेस के नेताओं को जनता की याद आई। कांग्रेस के नेता यदि जनता के लिए वास्तव में फिक्रमंद है तो उन्हें सरकारी विभागों में बैठे अडियल टट्टुओं को विरोध प्रदर्शन की बजाय सत्ता के चाबुक से हाँकना होगा। जिससे कि वे जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें। रही बात विरोध प्रदर्शनों की तो यह काम विपक्ष के लिए छोड़ देना चाहिए। -राजेन्द्र जैन

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    लॉकडाउन में बने फर्जी पट्टों का जिन आया बाहर, सेठों-भूमाफियों और चहेतों को बांटी रेवड़ियां

    रिटायरमेंट से पहले ईओ सांखला व कर्मचारियों पर फर्जीवाड़े का आरोप

    जो डलहौजी ना कर सका वो ये काम कर देंगे।

    कमीशन दे दो हुक्मरानों को वतन नीलाम कर देंगे।।

     
    सूरतगढ़ । ज्यादा समय नही हुआ जब सूरतगढ़ नगरपालिका के बारे में हमने इस शेर का जिक्र किया था। अब जबकि लॉकडाउन के दौरान पूर्व ईओ लालचंद सांखला के कार्यकाल के अंतिम दिनो में बनाए गए कोरोना पट्टों का सच सामने आना शुरू हो चुका है तो क्या ये शेर सच साबित नही हो जाता है ? ताज़ा आरोपों के अनुसार कोविद-19 के प्रकोप के चलते जब पूरा देश लॉकडाउन कर कोरोना से लड़ रहा था । तब सूरतगढ़ नगरपालिका के ईओ लालचंद सांखला और अन्य कर्मचारी बेशर्मी से पैसों के लिए सरकारी भूमि की बन्दरबांट में लगे थे । इन लोगों ने कोरोना की आड़ में सैंकड़ों की संख्या में अवैध पट्टे जारी कर लाखों-करोड़ों रुपये डकार लिए। मगर सच की एक खासियत है कि उसे सौ पर्दों में भी रखो तो वह बाहर आ जाता है। हालांकि नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल ने 30 मार्च 2020 को ही भ्रष्टाचार के आरोपी ईओ सांखला द्वारा रिटायरमेंट से पहले लॉकडाउन की आड़ में अवैध पट्टे बनाए जाने का खुलासा कर दिया था।  उन्होंने इस मामले में जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर जांच की भी मांग की थी। लेकिन उस समय चेयरमैन ओम कालवा ने उनकेे आरोपों को राजनीति बताते हुए खारिज कर दिया था। लेकिन अब कस्बे के ही वार्ड नंबर 10 के निवासी भागीरथ मेघवाल ने सबूतों के साथ इस मामले का पटाक्षेप कर दिया है। भागीरथ मेघवाल ने 3 जून 2020 को चेयरमैन ओम कालवा को शिकायत देकर दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की। क्योंकि इस मामले मेंं खुद चेयरमैन ओम कालवा की भूमिका पर सवालिया निशान है तो कार्रवाई कौन करता ? इसलिए अब भागीरथ मेघवाल ने एडीएम को पत्र देकर ईओ लालचंद सांखला के सम्पूर्ण कार्यकाल के साथ साथ 21 मार्च 2020 से लेकर 31 मार्च 2020 के बीच लॉकडाउन के दौरान बनाये गये पट्टों की जांच कर नगरपालिका अध्यक्ष ओम कालवा और पट्टेधारियों सहित सभी दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध पुलिस केस दर्ज कराने की मांग की है।

    इन लोगों के बनाए गए हैं अवैध पट्टे- मेघवाल

    शिकायतकर्ता भागीरथ मेघवाल ने अपनी शिकायत में क्रम संख्या सहित करीब 10 पट्टों का जिक्र किया है। शिकायतकर्ता के अनुसार यह सभी पट्टे लोकडाउन के दौरान ईओ लालचंद सांखला ने रिटायरमेंट से पूर्व बनाये। इसके अलावा अपनी शिकायत में शिकायतकर्ता ने आनंद बिहार के एक भूखंड के तबादले में इंदिरा सर्किल पर एक बेशकीमती व्यावसायिक भूखंड देने का भी आरोप लगाया है। शिकायत में लॉकडाउन में अवैध रूप से बनाए गए जिन पट्टों का जिक्र किया गया है वे इस प्रकार है। 

    1. पट्टा संख्या -03, अजय कुमार / श्री गिरधारी लाल जाति जाट, वार्ड नंबर -21, सूरतगढ़।

    2. पट्टा संख्या -28, कृष्ण लाल / श्री धूंकलराम जाति बिश्नोई, वार्ड नंबर -27, सूरतगढ़।

    3. पट्टा संख्या -32, राकेश कुमार/ श्री जयदेव जाति गुप्ता, वार्ड नंबर -20 सूरतगढ़।

    4. पट्टा संख्या-41, पवन कुमार/ सुखदेव सिंह जाति माली, वार्ड नंबर -10, सूरतगढ़।

    5. पट्टा संख्या -42,मंगतू राम/ बृजलाल जाति स्वामी , वार्ड नंबर- 26, सूरतगढ़।

    6. पट्टा संख्या 43 बृजलाल/ श्री रामू दास जाति स्वामी, वार्ड नंबर -5,सूरतगढ़।

    7. पट्टा संख्या- 45, राधाकृष्ण/ श्री खियांराम जाति ब्राह्मण, वार्ड नंबर-10 सूरतगढ़।

    8. पट्टा संख्या-46, गोपी राम/ श्री रामेश्वर लाल गोदारा जाति जाट, वार्ड नंबर-10,सूरतगढ़।

    9. पट्टा संख्या -48, गिरधारी लाल /श्री दूलचंद जाति शर्मा, वार्ड नंबर -39,सूरतगढ़।

    10. पट्टा संख्या -32, ओमप्रकाश /श्री पूर्ण प्रकाश मोची, वार्ड नंबर-34 सूरतगढ़।


    तबादलानामा- संदीप डांग S/0 केवल कृष्ण डांग व  सुखवंत चावला S/0 हरप्रीत चावला, वार्ड नंबर 31 सूरतगढ़ को आनंद विहार कॉलोनी के एक भूखंड के बदले 15×25 साइज का इंदिरा सर्किल पर  व्यावसायिक भूखंड ( भूखंड संख्या- 31)

    भ्रष्टाचार के खेल में कौन कौन है शामिल ?

    शिकायतकर्ता के अनुसार कोरोना काल में सूरतगढ़ नगरपालिका में सरकारी भूमि की बंदरबांट कर करोड़ों के भ्रष्टाचार के इस मामले में ईओ लालचंद के साथ भ्रष्ट कर्मचारियों की एक पूरी टीम भी शामिल है। शिकायतकर्ता के अनुसार इस टीम में शामिल लोग इस प्रकार है।

    1. लालचंद सांखला ( तत्कालीन अधिशासी अधिकारी)

    2. सुमित माथुर (कार्यवाहक सहायक अभियंता)

    3. सुशील सिहाग (कनिष्ठ अभियंता)

    4. मोनू उर्फ रामप्रकाश (बाबू भूमि शाखा)

    5. गगन वाल्मीकि (सफाई कर्मचारी) व भूमि शाखा के ही कुछ अन्य कर्मचारी

    चेयरमैन कालवा भी नही है नही है पाक साफ

    ‘मुफ्त की शराब काजी को हलाल ‘ कहावत तो आपने सुनी होगी ? इस पूरे मामले ने नगरपालिका चैयरमेन ओम कालवा भी कुछ कुछ काजी की भूमिका में नज़र आ रहे हैं। वरना नगरपालिका में जनता के ट्रस्टी के रूप में क्या उनका कर्तव्य नही था कि वे सरकारी सम्पति की लूट को रोकते न कि लुटेरों में शामिल होते। इस प्रकरण में अब तक सामने आए कुछ पट्टों में अध्यक्ष की जगह पर ओम कालवा के साइन नही होने के बहाने चैयरमेन कालवा खुद को पाक साफ बताने की कोशिश कर रहे हैं । परंतु पूर्व चेयरमैन बनवारी लाल मेघवाल की माने तो चेयरमैन कालवा प्रारम्भ से अवैध रूप से पट्टे बनाने के इस खेल में शामिल थे। लेकिन जब 30 मार्च 2020 को उन्होंने इस मामले का खुलासा कर जिला कलेक्टर को शिकायत की तो चेयरमैन कालवा डर गए। इस वजह से उन्होंने कुछ पट्टे जो 30 मार्च या उसके बाद जारी हुए उन पर साइन नहीं किए। लेकिन ईओ सांखला रिटायरमेंट से पहले सरकारी धन की लूट के इस आखिरी मौके को गंवाना नहीं चाहते थे। इसलिए उन्होंने पट्टों पर अधिशासी अधिकारी के अलावा अध्यक्ष की जगह पर भी अपने साइन कर पट्टे जारी कर दिये। बहरहाल कोरोना पट्टों के इस प्रकरण ने चैयरमेन ओम कालवा सहित कई चेहरों से शर्म के पानी उतार दिया है। अफसोस की बात ये है कि शिक्षा के माध्यम से नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले साफ सुथरे दिखने वाले ये चेहरे इतनी जल्दी भ्रष्टाचार के नुमाइंदगी करते नजर आएंगे यह किसी ने सोचा भी नहीं था। पर सच तो सच है !

    कोरोना पट्टों का खेल पड़ेगा भारी, जाना पड़ सकता है जेल ?

    नगरपालिका में कोरोना पट्टों का खेल चेयरमैन ओम कालवा, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी लालचंद सांखला सहित अन्य कर्मचारी को भारी पड़ सकता है । क्योंकि इस मामले में जिस तरह के तथ्य सामने आ रहे हैं उससे ये साफ जाहिर होता है कि इस मामले में बहुत बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है। सूत्रों की माने तो लोकडाउन के दौरान ही  करीब 100 से अधिक फर्जी पट्टे जारी किए गए। ऐसे में अगर प्रशासन द्वारा इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो यह तय माना जा रहा है कि कोरोना पट्टों का भ्रष्टाचार संबंधित जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को महंगा पड़ने वाला है । वैसे भी सूरतगढ़ नगरपालिका का इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि भ्रष्टाचार करने वाले लोगों को अपने कर्मों की कीमत चुकानी पड़ी है । 

    चलते चलते युवा कवि आमिर अज़ीज़ की कविता कुछ पंक्तियां याद आ रही है ।

    सब याद रखा जाएगा

    सब कुछ याद रखा जाएगा

    जब कभी भी जिक्र आएगा जहां में दौर-ए-बुजदिली का तुम्हारा काम याद रखा जाएगा

    जब कभी भी जिक्र आएगा जहां में दौर-ए-जिंदगी का हमारा नाम याद रखा जाएगा

    कि कुछ लोग थे जिनके इरादे टूटे नहीं थे लोहे की हथौड़ियों से

    कि कुछ लोग थे जिनके जमीर बिके नहीं थे इजारदारों की कौड़ियों से

    सब कुछ याद रखा जाएगा

    सब याद रखा जाएगा

    ताकि तुम्हारे नाम पर ताउम्र लानतें भेजी जा सके

    ताकि तुम्हारे मुजस्समों पर कालिखें पोती जा सके

    तुम्हारे नाम तुम्हारे मुजस्समों को आबाद रखा जाएगा

    सब याद रखा जाएगा

    सब कुछ याद रखा जाएगा

    भागीरथ मेघवाल द्वारा एडीएम को दी गयी शिकायत पेज-1
    भागीरथ मेघवाल द्वारा एडीएम को दी गयी शिकायत पेज-2
    पूर्व चेयरमैन बनवारी लाल मेघवाल द्वारा एडीएम को दी गयी शिकायत पेज-1

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    साहब के नायाब तरीके की शहर में हो रही चर्चा

    शहर में इन दिनों एक वॉशिंग मशीन की चर्चा बड़े जोरों पर है। इस मशीन के बारे में कहा जा रहा है कि यह मशीन कपड़े तो साफ करती ही है शहर के सीवरेज को भी साफ करेगी। वॉशिंग मशीन से गटर की सफाई का यह नायाब आइडिया शहर के एक बड़े साहब का है । साहेब के इस क्रांतिकारी विचार से उम्मीद जगी है कि शहर में बेहतर सीवरेज व्यवस्था देखने को मिलेगी। 

                        मामला कुछ यूं है कि शहर में सीवरेज निर्माण में हुई अनियमितता से जनता तो परेशान थी ही, बड़े साहब का भी उस समय पेट भी दर्द होने लगा जब जनाब को ये मालूम हुआ कि गटर निर्माण में सरकारी धन की जमकर बन्दरबांट हुई है और बहते गटर में अफसरों, बाबूओं समेत छुटभैय्ये नेताओं ने भी अपने हाथ धो लिए हैं तो उनका पारा बढ़ना स्वाभाविक था । चूंकि बड़े साहब पक्के समाजवादी ठहरे, लिहाजा पूंजी और संसाधनों का असमान बंटवारा उन्हें कतई पसंद नहीं है। इसलिए बड़े साहब ने समाजवादी तरीके से ही गटर की समस्या को दूर करने का निश्चय किया। बस फिर क्या था , गटर कम्पनी और विभागीय अधिकारियों की बैठक बुलाई गई। बैठक की सूचना मिलने पर समय से पूर्व सेवानिवृत्त हुए समाजवादी आंदोलन के अगुवा ‘मास्टरजी’ भी बैठक में पहुंच गए।अब ‘मास्टरजी’ ताजा ताजा जनसेवक बने हैं सो प्रशासन से मीटिंग का कोई मौका नहीं चूकते। फिर यह मामला तो ठहरा उस गटर कम्पनी का, जिससे मास्टरजी को काफी सहानुभूति रही है। शहर में यह भी चर्चा है कि कम्पनी के समाजवादी रवैये से खुश होकर ‘मास्टर जी’ ने कम्पनी का गटर विभाग से बड़ा चेक भी पास करवा दिया था । अब यह मत पूछिए कि इस चेक पर कितना हिस्सा मास्टर जी को मिला और कितना उनके हाकीम को ?

                          खैर बड़े साहब की मीटिंग में गटर कम्पनी के पैरोकार बने ‘मास्टरजी’ पहुंच तो गए थे पर उन्हें क्या मालूम था कि साहब बहुत गुस्से में है। बड़े साहब ने गटर कंपनी ओर गटर विभाग के अधिकारियों को जमकर लताड़ पिलाई। इशारों ही.इशारों में मास्टरजी को भी अपने समाजवादी तेवर दिखाए। साहब के तेवर देख गटर कंपनी के साथ ही मास्टरजी भी परेशान हो गए। उन्हें समझ नही आ रहा था कि आखिर साहब इतना नाराज़ क्यों हैं ? जब खोज खबर निकाली गई तो पता लगा कि साहब अपनी मैडम को लेकर परेशान चल रहे हैं। मास्टरजी के शुभचिंतकों ने जब बड़े साहब को टटोला तो दर्द छलक उठा-‘आप लोग तो ध्यान नहीं देते हैं ‘   “मैडम बहुत परेशान हैं, घर में वॉशिंग मशीन नहीं है, हाथ से कपड़े धोने पड़ते है, अब मैडम के हाथों का दर्द कैसे बर्दाश्त हो !’

                          बड़े साहब की व्यथा जानते ही ‘मास्टरजी’ की आंखें चमक उठी। उन्होंने फट से गटर कम्पनी के कारिंदों को बड़े साहब की चिंता के समाधान का फ़रमान सुना दिया। यह हिदायत भी दे डाली कि मशीन ऑटोमेटिक होनी चाहिए । ताकि मेडम को जरा भी तकलीफ न हो। वैसे गटर कंपनी के अधिकारियों की एक खासियत रही है कि वो अपनी सेवा से बड़े बड़ों का दिल जीत लेते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। लॉकडाउन में दुकान खुलवाकर कम्पनी ने साहब के घर फुल्ली ऑटोमेटिक मशीन पहुंचा दी। मशीन पहुंचते ही मैडम के हाथ और दिल का दर्द पूरी तरह से गायब । साहब को और क्या चाहिए। मशीन आने के बाद साहब गटर कम्पनी के समाजवादी रवैये से खुश हैं । गटर व्यवस्था की परेशानियों को लेकर अब साहब खुद आगे बढ़कर बताते है कि हमारे यहां तो सीवरेज बढ़िया चल रहा है। मैडम वाशिंग मशीन से कपड़े धोने के बाद निकले पानी को गटर में छोड़ देती है। साबुन का पानी गटर में गिरने से अब गटर भी साफ होने लगा है। बड़े साहब के इस बयान से ‘मास्टरजी’ और गटर प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारीयों ने राहत की सांस ली है। वैसे शहर के लोगों को उम्मीद नही थी कि बड़े साहब गटर समस्या का इतना बेहतर समाधान निकाल पाएंगे। अब साहब ने गटर कम्पनी की फ़ाइल से ध्यान हटाकर शहर के भूमाफियों द्वारा किये जा रहे कब्जों पर केंद्रीत किया है। बड़े साहब की कोशिश है कि कब्जों के मामले में भी समाजवाद लागू किया जाए। आखिर ‘सबका साथ सबका विकास’ ही केंद्रीय नीति है।

                         कुल मिलाकर गटर समस्या के ऐसे प्रभावी समाधान से एक नागरिक के रूप में हम भी खुश हैं तो सोचा कि क्यों न संगीत का आनंद लिया जाए। संयोग देखिए शहर में स्थित आकाशवाणी भी हमारी खुशियों में शामिल हो गुनगुना रहा है

    ‘राम तेरी गंगा मैली हो गयी पापियों के पाप धोते-धोते…..’

    – राजेंद्र जैन

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    खबर पॉलिटिक्स का यह ऑनलाइन सर्वे यह जानने का प्रयास है कि सूरतगढ़ में लॉकडाउन में गरीबों को भोजन /राशन वितरण के कार्य मे कोनसी संस्था ने सबसे अच्छा काम किया । कृपया सर्वे में शामिल होकर बेहतर संस्था के चयन में सहयोग करें । पूर्व में सर्वे का रिजल्ट 4 मई के घोषित किया जाना था परंतु अब सर्वे का परिणाम 20 मई को घोषित होगा ।

    सर्वे के नियम–  1.  सर्वे में हर व्यक्ति प्रत्येक 24 घण्टे में वोट दे सकता है।

     2. ऑनलाइन सर्वे 19 मई को रात्रि 12 बजे तक चलेगा ।

    3. इस सर्वे के रिजल्ट की घोषणा 20 मई को की  जाएगी। 

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    पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल ने सीएम को की शिकायत, जांच की मांग

    चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए नए टेंडर न कर पुराने टेंडर किये रिन्यू

    कोरोना महामारी के चलते राज्य सरकार द्वारा 22 मार्च से लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई थी। इस दौरान सभी सरकारी अधिकारियों और कार्यालयों को महामारी का संक्रमण रोकने और आवश्यक आपातकालीन व्यवस्थाऐं करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। परंतु सूरतगढ़ नगरपालिका प्रशासन ऐसे समय में भी भ्रष्टाचार को अंजाम देने में जुटा था। सूरतगढ़ नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल के ताजा आरोपों से यही साबित होता है।   पूर्व चेयरमैन ने वर्तमान चेयरमैन ओम कालवा ओर सेवानिवृत्त ईओ लालचंद सांखला पर मिलीभगत कर स्टोर शाखा के टेंडरों को लॉकडाउन में नए सिरे से करने की बजाय रिन्यू करने का आरोप लगाया है। पूर्व चेयरमैन के अनुसार ओम कालवा और लालचंद सांखला ने अपने चहेते ठेकेदारों से मिलीभगत कर स्टोर शाखा के गत वर्ष  (2019-20) हुए टेंडरों की अवधि आगामी वर्ष (2020-21) के लिए बढ़ा दी।  जबकि आगामी वर्ष के लिए टेंडरों की प्रक्रिया नगरपालिका द्वारा शुरू की जा चुकी थी । पूर्व चेयरमैन ने कहा है कि लॉकडाउन के दौरान ही नगरपालिका द्वारा जिस प्रकार राशन किटों की आपूर्ति हेतु ऑनलाइन टेंडर निकाला गया था वैसे ही नगरपालिका प्रशासन स्टोर शाखा के लिए भी ऑनलाइन टेंडर आमंत्रित कर सकता था। लेकिन चेयरमैन ओम कालवा और ईओ लालचंद सांखला के खासमखास एक प्रभावशाली पार्षद कम ठेकेदार के प्रभाव में नियमों को ताक में रखकर पुराने टेंडरों को ही रिन्यू कर दिया। पूर्व चेयरमैन का कहना है कि कोराना महामारी को देखते हुए चेयरमैन व ईओ ज्यादा से ज्यादा स्टोर शाखा के टेंडरों की अवधि लॉक डाउन की अवधि तक या फिर अस्थायी रूप से 1-2 माह के लिए बढ़ा सकते थे। परन्तु चेयरमैन कालवा व ईओ लालचंद ने ऐसा नही कर नियमविरुद्ध पूर्व टेंडरों को रिन्यू कर दिया। जिससे साफ है कि इस मामले में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल हुआ है।

    पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल द्वारा की गई शिकायत

    क्या है पूरा मामला

    सूरतगढ़ नगरपालिका द्वारा स्टोर शाखा में वर्ष 2020 -21 विभिन्न कार्यों के लिए  26 फरवरी 2020 को निविदा निकाली गई। इस निविदा के तहत 5 मार्च 2020 को टेंडर भरे जाकर 6 मार्च को टेंडर खुलने थे। 5 मार्च को नगरपालिका प्रशासन द्वारा टेंडर फॉर्म का विक्रय किया गया। इस दौरान इच्छुक ठेकेदारों ने बड़ी संख्या में टेंडर फार्म खरीद लिए। लेकिन उसी दिन शाम को  तात्कालिक ईओ लालचंद सांखला ने बिना कोई कारण बताए अंतिम समय पर इस निविदा प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद ईओ लालचंद सांखला 31 मार्च 2020 को सेवानिवृत्त हो गए । नगरपालिका कार्यालय से अब जो जानकारी निकल कर सामने आई है उसके अनुसार ईओ लालचंद सांखला ने रिटायरमेंट से एक-दो दिन पूर्व ही स्टोर शाखा की निविदा के टेंडर को नए सिरे की से करने के बजाए, गत वर्ष (2019-20 में ) टेंडर लेने वाले ठेकेदारों से मिलीभगत कर टेंडरों की अवधि को 1 वर्ष के लिए बढ़ा दी । साफ है कि तात्कालिक अधिशासी अधिकारी जिनको नए सिरे से टेंडर करने चाहिए थे ने भ्रष्टाचार और पद का दुरुपयोग करते हुए पुराने टेंडरों को रिन्यू करने का आदेश जारी कर दिया।

    मास्टरजी की भूमिका पर खड़े हो रहे सवाल

    नगरपालिका प्रशासन द्वारा स्टोर शाखा के टेंडरों को नए सिरे से न कर रिन्यू करने के मामले में मास्टरजी यानि ओम कालवा की भूमिका भी सवालों के घेरे में हैं। क्योंकि ऐसा संभव नहीं है उनकी जानकारी के बिना स्टोर शाखा के टेंडरों को रिन्यू किया गया हो ? भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई की दुहाई देने वाले मास्टर जी क्या जवाब देंगे कि नियमों से खिलवाड़ कर टेंडर रिन्यू करने के इस मामले में उनकी क्या भूमिका है ? मास्टर जी यानि ओम कालवा के चेयरमैन बनने के बाद नगरपालिका में भ्रष्टाचार के एक के बाद एक मामलों का जिस तरह खुलासा हो रहा है और नियमों की धज्जियां उड़ा कर जिस तरह से कार्य किए जा रहे हैं उनको देखते हुए लगता है कि मास्टरजी काफी जल्दी में है । बहरहाल सूरतगढ़ नगरपालिका प्रतिदिन नियमों की धज्जियां उड़ा कर भ्रष्टाचार की नई इबारत लिखी जा रही है। शायद ऐसे ही हालातों के लिए ये पंक्तियां लिखी गयी है ।

    जो डलहौज़ी न कर सका वो ये काम कर देंगे।

    कमीशन दो हुक्मरानों को वतन नीलाम कर देंगे।।

    लॉकडाउन में टेंडर रिन्यू करने वाली जिले की एकमात्र नगरपालिका है सूरतगढ़

    सूरतगढ़ नगरपालिका के बारे में कहा जाता है कि यहां पर सिक्कों की खनक से कोई भी काम करवाया जा सकता है। इस मामले ने एक बार फिर इस बात पर मुहर लगा दी है। लॉकडाउन के दौरान टेंडरों की चालू प्रक्रिया को धता बताकर पुराने टेंडरों की अवधि को 1 साल के लिए बढ़ा देने का यह मामला इसलिए भी अनूठा है। क्योंकि पूरे गंगानगर जिले में एकमात्र सूरतगढ़ नगरपालिका ही ऐसी नगरपालिका है जहां पर यह कारनामा किया गया है। वरना श्रीगंगानगर नगर परिषद सहित जिले की सभी नगरपालिकाओं द्वारा लोक डाउन के चलते रुके हुऐ टेंडरों को अब ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा किया जा रहा है। श्रीगंगानगर नगरपरिषद द्वारा स्टोर शाखा के विभिन्न कामों के लिए अब टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई है जिसका समाचार पत्रों में प्रकाशित विज्ञापन आप नीचे देख सकते हैं। लेकिन नियमों की पालना शायद सूरतगढ़ नगरपालिका के अधिकारियों को पसंद नहीं है।

    श्रीगंगानगर जिला परिषद द्वारा लॉकडाउन में ढील के बाद निकाला गया स्टोर के कार्यों का टेंडर

    टेंडर रिन्यू करने का आदेश रद्द कर दोषियों पर हो कार्रवाई :पूर्व चेयरमैन

    पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल ने इस मामले में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है वहीं राजस्थान संपर्क पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में बनवारीलाल मेघवाल ने मांग की है कि स्टोर शाखा के टेंडरों की अवधि बढ़ाने के आदेश को रद्द किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

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    बसपा छोडकर कांग्रेस में आये डूंगरराम गेदर की लोकप्रियता अभी भी है कायम

    खबर पॉलिटिक्स के सबसे बड़े नेता के सर्वे का परिणाम घोषित

    खबर पॉलिटिक्स द्वारा सूरतगढ़ के सबसे बड़े राजनेता  (लॉकडाउन के दौरान) के चयन के लिए करवाए गए ऑनलाइन सर्वे के लिए वोटिंग रविवार रात्रि 12 बजे बंद कर दी गई। यह सर्वे 27 अप्रैल से शुरू होकर 3 मई तक चला। इस दौरान सर्वे को लोगों ने खूब पसंद किया। लोगों ने सर्वे में बहुत उत्साह से वोटिंग की । सर्वे में कुल मिलाकर 23592 लोगों ने अपने पसंद के प्रत्याशी को वोट दिया। जिसका मतलब है कि रोजाना 3000 से भी अधिक लोगों ने खबर पॉलिटिक्स के ऑनलाइन पोर्टल पर आकर वोट किया। इतनी बड़ी संख्या में वोट होना ही सर्वे की कामयाबी को दिखाता है।

    सर्वे का परिणाम:- 

    खबर पॉलिटिक्स द्वारा करवाए गए सूरतगढ़ के सबसे बड़े (लॉकडाउन के दौरान) राजनेता के चयन के ऑनलाइन सर्वे के परिणामों की बात करें तो यह  काफी चौंकाने वाले हैं। सर्वश्रेष्ठ राजनेता के दौड़ में सर्वे की शुरुआत में तीनो प्रत्याशियों में काफी प्रतिद्वंद्विता देखने को मिली। तीनों ही नेताओं के समर्थकों ने सर्वे के प्रारंभ में एक दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए जमकर वोटिंग की। जिसके चलते शुरुआत में मामला दिलचस्प होता दिखा। लेकिन बाद में मुकाबला त्रिकोणीय से सीधी टक्करमें बदल गया।

    विधायक रामप्रताप कासनिया सर्वे में  तीसरे स्थान पर खिसके

    खबर पॉलिटिक्स की ऑनलाइन सर्वे के परिणामो में सबसे बड़ा झटका भाजपा के वर्तमान विधायक और दिग्गज नेता रामप्रताप कासनिया को लगा है। ऑनलाइन सर्वे में कासनिया तीनों नेताओं में तीसरे स्थान पर रहे हैं । इससे भी बुरी बात यह है कि सर्वे में कासनिया को महज 598 वोट ही मिले हैं। अगर सर्वे में पड़े कुल वोटों में से कासनिया को मिले वोटों का प्रतिशत निकाले तो यह करीब ढाई प्रतिशत ही बैठता है। जो कासनिया के कद को देखते हुए अच्छा नहीं कहा जा सकता।

    सर्वे के अंतिम दिन 3 मई 2020 को रात्रि बारह बजे का परिणाम

    लोकप्रियता के बावजूद हनुमान मील रहे शीर्ष से दूर

    खबर पॉलिटिक्स के सूरतगढ़ के सबसे बड़े राजनेता के ऑनलाइन सर्वे के परिणाम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे हनुमान मील के लिए भी मनमाफिक नही रहे हैं। विधानसभा चुनाव के परिणाम की तरह ही हनुमान मील को ऑनलाइन सर्वे में भी दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ रहा है। ऑनलाइन सर्वे के पहले तीन-चार दिनों में हनुमान मिल के समर्थकों ने जबरदस्त वोटिंग की। जिसके चलते हनुमान मील लोकप्रियता की  दौड़ में अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ते दिखे। लेकिन सर्वे के अंतिम दिनों में वे मोमेंटम को कायम नहीं रख पाए। हनुमान मील को सर्वे में कुल मिलाकर 7232 वोट मिले। अगर वोटों के प्रतिशत की बात करें तो हनुमान मील को करीब 31% वोट हासिल हुए। 

    सर्वे में डूंगरराम गेदर बने सूरतगढ़ के सबसे बड़े राजनेता

    खबर पॉलिटिक्स के सूरतगढ़ के लोकप्रिय राजनेता के ऑनलाइन सर्वे में डूंगरराम गेदर सिकंदर साबित हुए हैं। ऑनलाइन सर्वे में उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को बहुत बुरी तरह शिकस्त दी है। ऑनलाइन वोटिंग में डूंगरराम गेदर को सबसे अधिक 15031 वोट मिले हैं, जो कि कुल वोट का लगभग 63% है। बसपा से चुनाव लड़ने और बाद में कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद से लगातार यह लग रहा था कि डूंगरराम गेदर हाशिए पर है। कांग्रेस की सरकार होने और कांग्रेस ज्वाइन करने के बावजूद स्थानीय प्रशासन में मील परिवार का दखल देखने को मिल रहा था। ऐसे में स्थानीय राजनीतिक परिदृश्य में डूंगर राम के सितारे अस्त होने के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन ऑनलाइन सर्वे के परिणाम इस बात का इशारा करते हैं कि डूंगरराम की राजनीति अभी खत्म नहीं है और प्रतिद्वंद्वियों उनसे सतर्क रहने की जरूरत है l

    सर्वे में सभी प्रत्याशियों को मिले वोट

    1. डूंगर राम गेदर (15031 वोट )

    2. हनुमान मील (7232 वोट )

    3.रामप्रताप कासनिया (598 वोट )

    4. नोटा (731 वोट )

    सर्वे के परिणाम सिर्फ संकेत परंतु अंतिम नहीं 

    खबर पॉलिटिक्स के ऑनलाइन सर्वे के परिणाम निश्चित रूप से चौंकाने वाले हैं। यह परिणाम अंतिम नहीं है लेकिन विधायकी का सपना देखने वाले राजनेताओं को राह दिखाने वाले जरूर हैं। सर्वे में भाजपा के दिग्गज नेता रामप्रताप कासनिया को कम वोट मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उनके समर्थकों की संख्या  बिल्कुल कम हो गई है । परंतु अगर मान लिया जाए की कासनिया के समर्थक कम नही हुए हैं तो सर्वे से दो परिस्थतियाँ निकल कर सामने आती है पहली स्थिति ये है कि कासनिया के समर्थकों में सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले कार्यकर्ताओं की कमी है । अगर ऐसा है तो यह किसी भी राजनेता के लिए बेहतर स्थिति नहीं है। क्योंकि वर्तमान में फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय फॉलोवर ही किसी भी राजनेता की जीत के लिए जमीन तैयार करते हैं।  दूसरी स्थिति यह है कि कासनिया के समर्थकों की संख्या भले ही खूब रही हो पर वर्तमान में कासनिया के समर्थकों में अपने नेता के प्रति उत्साह तो कम हुआ ही है। वजह भले ही कुछ भी रही हो ।

    हनुमान मील को अभी करनी होगी मेहनत

    दूसरी और कांग्रेसी नेता हनुमान मील की बात करें तो सर्वे के परिणामों से साफ जाहिर है कि हनुमान मिल के पास सोशल मीडिया पर सक्रिय समर्थकों की एक बड़ी संख्या तो है। लेकिन जीत के लिए इससे भी ज्यादा की जरूरत है । इसका मतलब है कि हनुमान मील को खुद को लोकप्रिय बनाने के लिए अभी और प्रयास करने होंगे ।


    डूंगरराम गेदर के लिए सबक

     
    जैसा कि हमने कहा कि सर्वे के परिणाम अंतिम नहीं है। ऐसे में डूंगरराम गेदर के समर्थक सर्वे के नतीजों से खुश तो हो सकते हैं। लेकिन चुनाव में सोशल मीडिया के अलावा धरातल पर मजबूत होना जरूरी है। परन्तु सर्वे में डूंगरराम गेदर के पक्ष में किए गए अधिकांश कमेंट पर गौर करें तो यह संकेत मिलता है कि एक डूंगरराम गेदर के समर्थकों में एक समुदाय विशेष के लोगों की संख्या अधिक है जो कि अपने नेता के लिए बेहद मुखर है । अपने समाज या समुदाय का लोकप्रिय नेता होना बुरी बात नहीं है, लेकिन जब आपको चुनाव जीतना हो तो सर्वमान्य नेता बनना होगा ओर इसके लिए जाति की सीमाओं से परे सभी वर्गों में अपने समर्थकों की संख्या बढ़ानी होगी। 

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    प्रभावशाली लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने से डर रहा प्रशासन

    एसडीएम मनोज मीणा कर रहे मामले की जांच

    ईओ सांखला के विदाई समारोह में सेंकडों लोगों की मोजूदगी में धारा 144 का मखोल उड़ाते चेयरमैन कालवा

    सूरतगढ़ में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए धारा -144 की पालना को लेकर प्रशासन और पुलिस का दोहरा रवैया सामने आ गया है। धारा 144 का उल्लंघन यदि कोई आम आदमी करता है तो आनन फानन में ही मामला दर्ज कर लिया जाता है। लेकिन दूसरी ओर धारा 144 का मख़ौल किसी प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा उड़ाया जाता है तो फिर पुलिस और प्रशासन को सांप सूंघ जाता है। सूरतगढ़ में लॉकडाउन के दौरान धारा 144 के उल्लंघन के दो मामलों में पुलिस और प्रशासन की अलग अलग कार्रवाई से इस बात को आसानी से समझा जा सकता है।

      सबसे पहले बात करते हैं गोपालसर गांव में एक व्याख्याता बीरबलराम रैगर के ग्रामीणों के साथ चर्चा करने के वीडियो के वायरल होने की। इस मामले में शिकायत के बाद वीडियो वायरल होने पर एसडीएम मनोज मीना ने नायब तहसीलदार को मामले की जांच कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था । नायब तहसीलदार ने केवल 2 दिन में ही मामले की जांचकर रिपोर्ट पेश कर दी । बाद में इसी रिपोर्ट के आधार पर राजियासर थाना पुलिस ने 25 अप्रैल को व्याख्याता के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया ।


    गोपालसर में व्याख्याता द्वारा धारा 144 तोड़ने के वायरल हुए फोटो

    अब बात करते है दुसरे मामले की । यह मामला है सूरतगढ़ नगरपालिका में 31 मार्च को चेयरमैन ओम कालवा की मौजूदगी में ईओ लालचंद सांखला के विदाई समारोह का । इस विदाई समारोह मैं सैकड़ों लोगों को इकट्ठा कर लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाई गई, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। सूरतगढ़ में जहां एसडीएम और पुलिस उपअधीक्षक जैसे पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी रहते हैं उन्ही की नाक के नीचे विदाई समारोह में सैकड़ों लोग इकट्ठा होकर धारा 144 की धज्जियां उड़ाते रहे, लेकिन अधिकारियों की आँखे नही खुली। इसके बाद किसी जागरूक व्यक्ति ने इस मामले की शिकायत एडीएम अशोक मीणा से की तो एडीएम ने शिकायत जांच के लिए एसडीएम मनोज मीणा को भेज दी। लेकिन करीब तीन सप्ताह से ज्यादा का समय गुजरने के बाद भी एसडीएम साहब की जांच पूरी नही हुई है । वैसे एसडीएम साहब को महाराणा प्रताप चौक पर प्रेस के लोगो के रुकने मात्र से लॉकडाउन का उलंघन का खतरा लगता है और साहब इसके लिए ट्रैफिक इंचार्ज को धमकाने से नही चूकते है । ऐसे में नगरपालिका सभागृह में सैंकड़ों लोगों की मौजूदगी में हुए विदाई समारोह से धारा 144 ओर लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाने की वायरल फोटो और वीडियो पर अब तक एसडीएम साहब चुप्पी से कई सवाल खड़े होते है ?

    प्रशासन की भूमिका पर खड़े हो रहे गंभीर सवाल ?

    दोनों मामलों में प्रशासन की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पहला सवाल यह है कि व्याख्याता का मामला जहाँ सामान्य मानवीय भूल का प्रतीत होता है ।क्यूकि लॉकडाउन में मानवीय स्वभाव के चलते कोई भी व्यक्ति आमतौर पर अपने घर के बाहर बैठ जाता है और आस पास के लोगों से बात कर लेता है । इसका मतलब यह नही है कि वह जान बुझकर कानून तोड़ रहा है । फिर भी प्रशासन व्याख्याता के विरुद्ध यह मामला दर्ज़ करवाने में देर नही करता है । जबकि विदाई समारोह के मामले में ईओ लालचंद सांखला और चेयरमैन ओम कालवा जोकि खुद लोकसेवक है और जिन पर लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करवाने की जिम्मेदारी थी , ने ही सत्ता के नशे में जानबूझकर सेंकडों लोगों को इकट्ठा कर धारा 144 व सोशल डिस्टेंसिंग के साथ साथ आपदा प्रबन्धन अधिनियम की धज्जियां उड़ाई । कार्यक्रम में चेयरमैन कालवा सहित अधिकांश लोगों ने मास्क भी नही पहन रखा था । ऐसे में सेंकडों लोगों की जान को संकट में डालने के दोषी इन लोकसेवकों के विरुद्द प्रशासन अब तक चुप क्यों है ? दूसरा सवाल है कि प्रशासन ने अपनी जांच में व्याख्याता के घर में बनी आटा चक्की के बाहरी दरवाजे के पास जहां पर वह वायरल वीडियो में बैठा दिखाई दे रहा है को सार्वजनिक स्थान माना है। जिस पर सवाल उठ सकता है। परंतु दूसरे मामले में नगरपालिका सभागार जहां पर ईओ सांखला का विदाई समारोह आयोजित हुआ, निर्विवाद रूप से सार्वजनिक स्थल है। फिर प्रशासन धारा 144 के उल्लंघन करने की रिपोर्ट क्यों नही कर रहा है ? तीसरा सवाल यह है कि व्याख्याता मामले में प्रशासन ,सात – आठ लोगों के इकट्ठे होने को आसानी से धारा 144 का उल्लंघन मान लेता है। जबकि उनमें से कुछ लोगों के सब्जी की दुकान पर खरीदारी के लिए भी आए होने की संभावना है। वहीं दूसरी और नगरपालिका सभागार में आयोजित कार्यक्रम, जहाँ सैकड़ों लोग निर्विवादित तौर पर विदाई समारोह में शामिल हुए को, धारा 144 का उल्लंघन स्वीकार करने में प्रशासन को पसीना क्यों आ रहा है ?

    राजनीतिक रंजिश का औजार बना धारा -144 का उलन्घन  

    गोपालसर में व्याख्याता बीरबलराम रैगर पर धारा 144 तोड़ने का मामला प्रथम दृष्टया राजनीति से प्रेरित लगता है। क्योंकि व्याख्याता का परिवार बीजेपी की विचारधारा से प्रभावित बताया जाता है। व्याख्याता बीरबल राम की पत्नी ने सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ा था । इस चुनाव में बीरबल राम की पत्नी कुछ वोटों से हार गई थी। ऐसे में इस बात की चर्चा भी है कि सत्ता पक्ष के दवाब में प्रशासन ने व्याख्याता मामले में तुरंत कार्रवाई कर दी । जबकि विदाई समारोह का मामला क्यूंकि चेयरमैन ओम कालवा से सीधा जुड़ा है जो की सत्तापक्ष की पार्टी कांग्रेस के है । सम्भवत यही वजह है कि प्रशासन लॉक डाउन के खुलेआम उलंघन के इस मामले की जांच दबाये बैठा है । इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण है कि जिन फोटोस और वीडियो के आधार पर यह मामला दर्ज किया गया है। उनको देखने से प्रतीत होता है कि मौके पर करीब आधा दर्जन से अधिक व्यक्ति  मौजूद है। हालांकि 5 या 5 से अधिक व्यक्ति के इकट्ठा होने पर धारा 144 लागू होती है। लेकिन यह बात सभी जानते कि अगर इस पैमानेे को इसी सख्ती से अगर सूरतगढ़ में ही लागू किया जाए तो धारा 144 के उल्लंघन के मामलों का अंबार लग जाएगा। वैसे सूरतगढ़ में नेशनल हाईवे के पास रोजाना एक बड़े अधिकारी धारा 144 का मखौल उड़ाते देखे जा सकते हैं । लेकिन एसडीएम साहब वहां का रुख नही करते । शायद एसडीएम साहब को भी हिंदी की ये उक्ति याद होगी कि  ‘ समरथ को नहीं दोष गोसांई’ ।

    विधायक कासनिया और भाजपा नेताओं की चुप्पी से  खड़े हो रहे सवाल

    नगरपालिका के ईओ लालचंद सांखला के विदाई समारोह में लॉकडाउन के उल्लंघन के मामले में भाजपा नेता और खासकर विधायक रामप्रताप कासनिया की चुप्पी भी सवालोंं के घेरे में है। सभी को याद होगा कभी कासनिया ने विधानसभा मेंं ईओ लालचंद सांखला के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। लेकिन उसके बाद से लालचंद सांख्ला पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे पर विधायक कासनिया ने कभी आवाज नहीं उठाई।कुछ लोगों को लगता है कि शायद लालचंद सांखला विधायक कासानिया को साधने में सफल हो गए थे और इसी वजह से सांखला के लॉकडाउन तोड़ने के मामले में अब तक कासनिया ओर उनकी भाजपा ने कार्रवाई की मांग करने की जहमत नही उठाई है। बहरहाल गला फाड कर नगरपालिका के भ्रष्टाचार का रोना रोने वाले नेताओं की भ्रष्टाचार और जनता के मुद्दों पर चुप्पी निराश करती है । कासनिया जी को देखकर किसी शायर की यह पंक्तियां याद आती हैं।

    ” ये और बात है के उससे वफ़ा हो ना सकी…
    पर जो उसने किये थे…वो वादे कमाल थे…”

    राजनितिक दवाब में एसडीएम मनोज मीना

    बहरहाल अब तक एसडीएम साहब, जिन पर जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में धारा 144 की पालना करवाने का दायित्व था ,उनकी कलम की स्याही प्रभावशाली लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट करने में सूखती नजर आ रही हैं । फिर भी तमाम तरह की नाउम्मीदी के बावजूद उम्मीद की जानी चाहिए कि एसडीएम साहब ईओ के विदाई समारोह के मामले में  लोकडाउन के उल्लंघन की रिपोर्ट पेश कर अपनी प्रशासनिक ईमानदारी का सबूत देंगे ?

     

     

     

     

     

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    ब्राह्मण महासभा ने भी एसडीएम मनोज मीणा के विरुद्ध किया निंदा प्रस्ताव पारित


    सूरतगढ़। फेसबुक कमेंट  प्रकरण में मोनू दाधीच की गिरफ्तारी के मामले में प्रशासन के रवैए को लेकर ब्राह्मण समाज ने रोष जताया है।  ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष गोपीराम शर्मा की अध्यक्षता में शनिवार को समाज की बैठक बुलाई गई।  बैठक में सभा की ओर से एसडीएम मनोज मीणा के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित किया। इस बैठक में मोनू दाधीच फेसबुक कमेंट प्रकरण पर चर्चा की गई। बैठक में समाज के सदस्यों ने इस प्रकरण में मोनू दाधीच की गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया। सदस्यों ने कहा कि मोनू दाधीच ने कोई गैरकानूनी काम नहीं किया है और ना ही वह आदतन अपराधी है। सभा के सदस्यों ने कहा कि उपखंड अधिकारी ने समुदाय विशेष को प्रताड़ित करने के लिए इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस मामले में समाज के सदस्यों ने नियमों के बावजूद हैसियत प्रमाण पत्र के स्थान पर ₹40000 की नगद राशि जमा कराने की अपील स्वीकार नहीं करने के प्रशासन के रवैया को मनमानी पूर्ण बताया। बैठक में सभा के सदस्यों ने इस कार्रवाई को समाज को प्रताड़ित करने वाली बताते हुए सर्वसम्मति से एसडीएम मनोज मीणा के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया।


    खबर पॉलिटिक्स पर समाचार छपने के बाद मोनू दाधीच की हुई जमानत

    खबर पॉलिटिक्स पर मोनू दाधीच फेसबुक कमेंट प्रकरण के संबंध में विस्तृत समाचार प्रकाशन के बाद शनिवार देर शाम मजिस्ट्रेट द्वारा मोनू दाधीच की जमानत स्वीकार कर ली गई। खबर पॉलिटिक्स द्वारा शांति भंग के साधारण मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाये गए थे।

    क्या था मामला

    मोनू दाधीच नामक युवक द्वारा गत दिनों एक जाति विशेष के प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध फेसबुक पोस्ट पर टिप्पणी की गई थी।  जिसके बाद इन अधिकारियों की शिकायत पर सिटी पुलिस ने 22 अप्रैल को मोनू दाधीच को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। अगले दिन पुलिस ने मोनू दाधीच को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया। मजिस्ट्रेट ने सामान्य जमानत के स्थान पर  तस्दीकसुदा जमानत पेश करने का आदेश देते हुए मोनू को न्यायिक हिरासत में भेज दिया थ। इसके बाद से मोनू के परिजन हैसियत प्रमाण पत्र बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इस बीच प्रशासन ने लॉकडाउन बीच हैसियत प्रमाण पत्र जारी करने में असमर्थता जताई थी ।


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    प्रशासनिक अधिकारियों से सवाल करना पड़ सकता है भारी

    शहर के नए हाकिमो को सवाल खड़े करना नही है पसन्द 

    मोनू दाधीच

    सूरतगढ़।सूरतगढ़ में मोनू दाधीच नामक युवक द्वारा फेसबुक पर जाति विशेष के प्रशासनिक अधिकारियों पर टिप्पणी के मामले ने सूरतगढ़ प्रशासन की हिटलरशाही और आम आदमी की लाचारी दोनों को एक साथ उजागर कर दिया है । इस मामले में जाति विशेष के अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने आनन-फानन में ही बुधवार को युवक को शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। गुरुवार को जब पुलिस ने युवक को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया तो मजिस्ट्रेट( नायाब तहसीलदार) ने सामान्य जमानत की बजाय तसदीकसुदा जमानत की मांग करते हुए युवक को न्यायिक अभिरक्षा में भेज  दिया । सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार युवक के परिजनो ने शुक्रवार को तस्दीकसुदा जमानत के लिए आवेदन किया गया तो तहसील के एक सक्षम अधिकारी ने लोकडाउन के दौरान हैसियत प्रमाण पत्र नहीं जारी करने के जिला मुख्यालय से आदेश होने का हवाला देकर प्रमाण पत्र जारी करने से मना कर दिया। हालांकि देर सवेर जमानत योग्य दस्तावेजों की व्यवस्था होने पर युवक की जमानत भी हो जाएगी । परन्तु यह घटना कई बड़े सवाल खड़े करती है। पहला सवाल ये है कि जब देश भर की राज्य सरकारें कोरोना महामारी के चलते जेल में गंभीर आरोपों में बंद कैदियों को जमानत देकर छोड़ रही है। वही सूरतगढ़ में केवल प्रशासनिक अधिकारियों की ईगो के चलते शांतिभंग के मामूली आरोप में तस्दीकसुदा जमानत(हैसियत प्रमाण पत्र) की मांग कर युवक को जेल भेज दिया जाना अखरता है । जहां तक मेरी सामान्य जानकारी है कि तस्दीकसुदा जमानत की मांग विशेष  (आदतन अपराधी या भाग जाने की संभावना जैसे ) मामलों में ही की जाती है। लेकिन मनोज दाधीच नामक जिस युवक की बात हो रही हैं। वह प्राइवेट शिक्षण का कार्य करता है और किसी भी तरह की आपराधिक पृष्ठभूमि से नहीं आता है। दूसरा सवाल ये है कि जब मामला बड़े प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़ा हुआ है, ऐसे में इन अधिकारीयों के मातहत मजिस्ट्रेट द्वारा जमानत की सामान्य प्रक्रिया के स्थान पर विशेष प्रक्रिया अपनाना ही प्रश्न खड़े करता हैै।

         तीसरा सवाल ये है कि संभव है मोनू दाधीच ने ऐसे शब्दों का प्रयोग किया हो जो इन अधिकारियों को आपत्तिजनक लगे हो। पर क्या मोनू दाधीच ने वाहनों को अनुमति पत्र जारी करने में इन प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर जो सवाल उठाए वो गलत है ? क्योंकि यह किसी से छुपा हुआ नही है खासकर एसडीएम मनोज मीना द्वारा मेडिकल इमरजेंसी के मामलों में भी वाहनों की अनुमति देने में संवेदनशीलता नही दिखाई जा रही है। ऐसे ही एक मामले में कुछ दिन पूर्व ही हाईलाइन समाचार पत्र से जुड़ा एक युवक अपनी 2 वर्षीय पुत्री को इलाज के लिए जयपुर ले जाने के लिए वाहन अनुमति के लिए  एसडीएम कार्यालय पहुंचा था। परन्तु एसडीएम साहब युवक की लगातार गुहार के बावजूद करीब 2 घण्टे तक कार्यालय में नहीं पहुंचे । आखिरकार प्रेस क्लब के अध्यक्ष हरिमोहन सारस्वत ने हस्तक्षेप कर जिला कलेक्टर से बात की तब जाकर एसडीएम कार्यालय में पहुंचे और अनुमति जारी की । आम आदमी को अनुमति के लिए किस तरह से परेशान होना पड़ रहा है । इसका अंदाजा आप इस घटना से लगा सकते हैं । इसके अलावा जिला प्रशासन के तमाम आदेशों के बावजूद अधिकारी महोदय फोन भी उठाते नहीं है । ऐसे एक नहीं कई किस्से है जो साहब की कार्यशैली को दर्शाते हैं।

    बहरहाल इस मामले ने ऊंचे पदों पर बैठे अहंकारी प्रशासनिक अधिकारियों की तुच्छता को भी उजागर कर दिया है । क्योंकि इस मामले में आरोपी का पिता इन्हीं अधिकारियों के कार्यालय में कार्यरत मामूली चपरासी है। ये अधिकारी अपने मातहत कर्मचारी के पुत्र की गलती को माफ कर अपने बड़े होने का उदाहरण भी पेश कर सकते थे। वही दूसरी ओर इस मामले में राजस्व विभाग के कर्मचारियों और उनकी यूनियन की कलई खुल गयी है जो अपने ही विभाग के अधिकारीयों की ईगो के ताप से अपने ही सहकर्मी के परिजनो को बचा नही सके कुल मिलाकर जिओ के दौर में मोनू दाधीच प्रकरण से शहर के फेसबुक पर सक्रिय युवाओं को अब यह समझ लेना चाहिए कि शहर के नए हाकिमों को व्यवस्था पर सवाल खड़े करना पसंद नही है ? आम आदमी की व्यवस्था से कम होती उम्मीदों के इस दौर में किसी कवि की ये पंक्तियां याद आती है 

              कातिल ही जैसे मुन्सिफों में हो शुमार ।
             इंसाफ कैसे मिलता अदालत ही बिक गयी ।।

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    ईओ लालचंद सांखला के विदाई समारोह में लॉकडाउन का तमाशा बनाते गुरुजी ओम कालवा ।

    सूरतगढ़ नगरपालिका के चेयरमैन ओमप्रकाश कालवा एक बार फिर से चर्चा में है । अफसोस की बात यह है कि शिक्षक पृष्ठभूमि से होने के बावजूद चेयरमैन कालवा इस बार कानून की धज्जियां उड़ाने को लेकर चर्चा में है । मामला नगरपालिका अध्यक्ष की मौजूदगी में ईओ लालचंद सांखला का विदाई समारोह आयोजित करने से जुड़ा है। इस मामले को लेकर हुई अज्ञात शिकायत के बाद नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल ने भी चेयरमैन ओम कालवा के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चेयरमैन ओम कालवा को सस्पेंड कर अपराधिक मुकदमा दर्ज करवाने की मांग की है । अपने पत्र में पूर्व चेयरमैन ने आरोप लगाया है कि लॉकडाउन के दौरान 31मार्च 2020 को नगरपालिका मे पूर्व ईओ लालचंद सांखला की सेवानिवृत्ति पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया । पूर्व चेयरमैन के अनुसार जब पूरा देश को कोरोना संक्रमण से जूझ रहा हैं ओर सरकार ने पूरे प्रदेश में धारा 144 लागू करने के साथ-साथ किसी भी तरह के समारोह पर रोक लगा रखी है इसके बावजूद चेयरमैन ओम कालवा ने समारोह आयोजित कर लोकडाउन की धज्जियां उड़ाई। ज्ञापन में  पूर्व चेयरमैन ने लिखा है कि समारोह में करीब 150 से 200 की संख्या में नगरपालिका के कर्मचारी, पार्षद, ठेकेदार ओर कुछ पत्रकार मौजूद थे। उनके अनुसार पूरे समारोह के दौरान एक-दो व्यक्तियों को छोड़कर अधिकांश व्यक्ति बिना मास्क लगाए उपस्थित थे । चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल ने अपने ज्ञापन में समारोह आयोजित किए जाने की वजह को लेकर भी चेयरमैन ओम कालवा पर सनसनीखेज आरोप लगाया है। पूर्व चेयरमैन के मुताबिक लॉकडाउन की आड़ में चेयरमैन ओम कालवा व ईओ लालचंद सांखला ने भू माफियाओं से मिलकर अपनी सेवानिवृती से ठीक कुछ दिन पहले शहर में खाली पड़े बेशकीमती प्लाटों के फर्जी दस्तावेजों से पट्टे बनाकर 4 से 5 करोड़ रुपये वसूल लिए थे ओर इसी वजह से चेयरमैन द्वारा लॉकडाउन के बावजूद ईओ लालचंद सांखला के लिए भव्य विदाई समारोह आयोजन किया गया।


    क्या सत्ता के नशे में मास्टरजी भूले नियम ?


    नगरपालिका में आयोजित विदाई समारोह में डेढ़ सौ से 200 व्यक्तियों को इकट्ठा कर धारा 144 ऑफ लॉकडाउन को ठेंगा दिखाया ही गया। इससे भी बड़ी बात यह है कि खुद चेयरमैन जिन पर मास्क लगाने का संदेश देकर संक्रमण को रोकने की जिम्मेदारी है वे खुद भी बिना मास्क के कार्यक्रम में मौजूद रहे। वही उन्होंने समारोह मे ईओ को माला पहनाकर ओर गले लगकर सोशल डिस्टेंसिंग की भी जमकर मख़ौल उड़ाया। सवाल यह उठता है कि क्या मास्टर जी को सोशल डिस्टेंसिंग के जानकारी नियमो की जानकारी नहीं थी ?


    पूर्व चेयरमैन के गंभीर आरोपों की होनी चाहिए जांच

    इस मामले में पूर्व चेयरमैन बनवारी लाल मेघवाल द्वारा लगाये गए गये गम्भीर आरोपों की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि लालचंद सांखला के पूरे कार्य पूरे कार्यकाल के दौरान नगरपालिका में जमकर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन सेवानिवृत्ति से ठीक पहले लोकडाउन का फायदा उठा कर भू माफियाओं के साथ मिलकर पट्टे बनाने का आरोप बेहद गंभीर है। सरकार को इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करवानी चाहिए। क्योंकि जब पूरी राज्य सरकार युद्ध स्तर पर कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए रात दिन जुटी हुई है। उसी दौरान अधिकारियों द्वारा लॉकडाउन का फायदा उठा कर करोड़ों का भ्रष्टाचार करना जनता के साथ-साथ सरकार से भी बहुत बड़ा धोखा है।

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    आटा लेने के लिए घर से बाहर निकला था युवक,होमगार्ड जवानों ने युवक का तोड़ा हाथ


    सूरतगढ़ । लॉकडाउन के नाम पर आम लोगों के साथ पुलिसिया बर्बरता की तस्वीरें देशभर से सामने आई हैं। ऐसा ही एक मामला श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ में भी सामने आया है। जहां पर 2 होमगार्ड के जवानों को आटा बांट रहे वाहन के इंतजार में एक युवक का सड़क पर खड़ा रहना इतना नागवार गुजरा कि दोनों जवानों ने युवक को  पीट-पीटकर उसका हाथ तोड़ दिया। दोनों जवानों ने युवक को मार- मार कर बुरी तरह से घायल कर दिया। इरशाद नाम का यह युवक कस्बे के वार्ड नंबर 30 का रहने वाला है।  यह युवक मूंगफली की रैहड़ी लगाकर अपने परिवार का गुजारा करता है। युवक के अनुसार मंगलवार शाम को उसे सूचना मिली थी कि एक धार्मिक संस्था के वाहन द्वारा राधास्वामी सत्संग भवन के पास आटे का वितरण किया जा रहा है। गरीब इरशाद भी आटा लेने के लिए सड़क पर पहुंच गया । तभी बाइक पर सवार होकर दो होमगार्ड के जवान जिनमें से एक का नाम दीपेंद्र बताया जा रहा है मौके पर पहुंच गए। खाकी वर्दी में होमगार्ड जवानों को देखकर इरशाद अपनी गली की ओर भागा लिया ? होमगार्ड के जवानों को युवक का भागना इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने पीछा कर युवक को दबोच लिया और बाइक पर बैठाकर फार्म की ओर जाने वाली सड़क पर एक सुनसान जगह पर ले गए। जहां पर होमगार्ड जवानों ने अपने डंडो हाथों और लातों से युवक के साथ जमकर मारपीट की। युवक के रोते हुए छोड़ देने की गुहार भी लगाई। लेकिन वर्दी के नशे और लोकडाउन के नाम पर आम लोगों के साथ कुछ भी करने के लाइसेंस की खुमारी में दोनों जवानों ने इरशाद का पीट-पीटकर हाथ तोड़ दिया। जब दोनों जवानों का पीट-पीटकर मन भर गया तो बाद में उनमें से एक जवान ने इरशाद को अपनी बाइक पर बिठा कर उसके घर छोड़ दिया। फिलहाल युवक राजकीय चिकित्सालय में उपचार करवा रहा है। अस्पताल में इलाज करवा रहे इरशाद का टूटा हाथ और शरीर पर चोटों के निशान होमगार्ड जवानों की बर्बरता की गवाही दे रहे हैं।  लेकिन इस पूरी घटना से सवाल यह उठता है कि जब युवक अपने घर की ओर भाग कर जा रहा था तो पुलिस के जवानों को उसका पीछा कर पकड़ने की क्या जरूरत है ? जब दोनों जवानों ने युवक को पकड़ लिया ही था तो उसी समय उसे समझाकर या एक आध डंडा मारकर नही भेजा जा सकता था ? क्या लॉकडाउन को सख्ती से निपटने के सरकारी आदेश का यह मतलब है कि आप लोगों के हाथ पैर भी तोड़ देंगे ? 

    बहरहाल मामला चूंकि पुलिस से ही जुड़े होमगार्ड के जवानों का है तो स्थानीय पुलिस मामला दर्ज कर कार्रवाई करेंगी इस बात की गुंजाइश कम ही नज़र आती है। लेकिन ऐसी घटनाओं की पुनरावृति न हो  इसके लिए जिले के पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारियों को दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई कर पुलिस की छवि खराब कर रहे इन जवानों को भी सबक सिखाना चाहिए।

       लॉकडाउन के नाम पर आम और गरीब लोगों के साथ पुलिस और होमगार्ड जवानों की इस तरह की कार्रवाई कहां तक जायज है? कमेंट बॉक्स में अपने विचार रखें ।

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    नगरपालिका के मनमाने नियम,पत्रकार भी बेबस

    क्या हनुमान मील और चेयरमैन कालवा कसेंगे लगाम ?

    सूरतगढ़ । सूरतगढ़ नगरपालिका में कर्मचारियों द्वारा आपत्ति सूचना के नाम पर प्रतिमाह लाखों रुपए की खुलेआम लूट की जा रही है। पूर्व विधायक राजेंद्र भादू के कार्यकाल में शुरू हुआ यह खेल युवा कांग्रेसी हनुमान मील के दौर में भी जारी है। खेल कुछ इस तरह से है कि जब भी कोई आम व्यक्ति नगरपालिका में नामांतरण, खांचा भूमि के आवंटन , मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कराने जैसे किसी भी कार्य के लिए आवेदन करता है तो प्रक्रिया के तहत पालिका प्रशासन द्वारा आपत्ति सूचना का प्रकाशन स्थानीय अखबारों में करवाया जाता है | नियम यह है कि आपति आवेदक को दी जाती है जिसे आवेदक अपनी पसंद या सुविधा के समाचार पत्र में प्रकाशित करवाता है | लेकिन सूरतगढ़ में अंधेर नगरी चौपट राजा की तर्ज पर सत्ताधारियों ने अधिकारियों और अधिकारियों ने कर्मचारियों को लूट की खुली छूट दे दी है | इसका नतीजा यह है कि अब आपत्ती सूचना संबंधित शाखा के कर्मचारी खुद ही समाचार पत्रों को देते हैं। आपत्ति सूचना के लिए कर्मचारी आवेदक से सोलह सौ रुपये वसूलते हैं और बाद में अखबार वालों को 300 से 500 रुपये में यह आपत्ति छापने के लिए दे देते हैं । इस तरह से प्रत्येक आपत्ति में 1000 -1100 रुपए नगरपालिका के संबंधित शाखा के कर्मचारी डकार जाते हैं |अगर कोई जागरूक व्यक्ति आपत्ती सूचना को खुद ही प्रकाशित करने के लिए कहता है तो पहले तो ये कर्मचारी उसे देते ही नहीं है और अगर वह किसी तरह से आपत्ती लेकर खुद ही प्रकाशन करवा भी देता है तो कर्मचारी उसके काम को लटका देते हैं या फिर उसे चक्कर पर चक्कर कटवाते हैं । इसी वजह से आम लोग असुविधा से बचने के लिए सुविधा शुल्क देने में ही अपनी भलाई समझते हैं।

    पुराने नियमों में बदलाव से राजकोष को भी हो रहा घाटा

    आपको यह भी बता दे की ऐसा नहीं है कि हमेशा से ही ऐसा होता था । पूर्व में आपत्ति सूचना आवेदक को दे दी जाती थी जिसे वह अपनी सहूलियत के अनुसार किसी भी समाचार पत्र में प्रकाशित करवा देता था।  परंतु पूर्व अधिशासी अधिकारी प्रियंका बुडानिया के समय नगरपालिका की आय बढ़ाने के नाम पर आपत्ति सूचना के प्रकाशन का कार्य नगरपालिका ने खुद अपने जिम्मे ले लिया और आपत्ति सूचना के प्रकाशन की फीस 2500 रुपये कर दी गई थी। उस दौरान नगरपालिका के कर्मचारी विभिन्न समाचार पत्रों को उनके विज्ञापन के सरकारी रेट के मुताबिक आपत्ति सूचना के प्रकाशन के लिए भुगतान करते थे। ऐसा नहीं है कि उस दौर में भी यह कर्मचारी सुखा चंदन  घिसते थे ? बस होता यह था कि कर्मचारियों ने अखबार के पत्रकारों और मालिको से सेटिंग कर अपना कमीशन तय कर लिया था। जो कमीशन ज्यादा देता था, ये कर्मचारी उसी को आपत्ती सूचना भेज दिया करते थे। लेकिन फिर भी उस समय आपति सूचना के नाम पर आम आदमी से वसूले गए धन का कुछ ना कुछ हिस्सा सरकारी खजाने में तो पहुंचता था। परंतु बाद में अधिकारियों ने अपने मातहत कर्मचारियों को लूट की छूट देने के लिए पिछले सिस्टम को बंद कर दिया और संबंधित शाखाओं के कर्मचारियों को ही आपत्ती सूचना के प्रकाशन का सर्वे सर्वा बना दिया। इस नयी व्यवस्था के चलते आम आदमी का शोषण होने के साथ ही सरकारी खजाने को होने वाली आय का नुकसान हो रहा है । 

    पत्रकारों का हो रहा शोषण, दवाब में ख़बरें छपने से बचते हे पत्रकार

    आपत्ति सूचना के इस खेल ने नगरपालिका के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कई बाबुओं को अफसर सी पावर दे दी है । जिसके कारण पत्रकार दिनभर इन बाबुओं की डयोढ़ी पर हाज़री भरते नज़र आते हैं। संबंधित शाखाओं के बाबू अपने संबंधों और  कमीशन को ध्यान में रखकर अपनी मर्जी के अखबारों को आपति सूचना देते हैं। इस अवैध वसूली के पूरे अध्याय का एक पक्ष यह भी है कि आपत्ती सूचना प्रकाशन के इस तरीके की वजह से पत्रकारों पर भी एक दवाब रहता है । जिसकी वजह से वे नगरपालिका के काले कारनामो को छापने से बचते हैं । क्या आपको नहीं लगता कि पत्रकार जो किसी के भी साथ होने वाले अन्याय व शोषण के खिलाफ आवाज उठाते हैं,उनके खुद के नगरपालिका में होने वाले शोषण की आवाज उठाने वाला कोई नहीं है ?ना तो स्वंयभू पत्रकार, ना उनके संगठन और न ही जनता के नुमाइंदे !

    गूंगे-बहरे पार्षदों की जुबान को मारा लकवा

    आपने ओर हमने जिन जनप्रतिनिधियों को हमारी आवाज़ उठाने के लिए नगरपालिका में भेजा है वे  शायद गूंगे और बहरे हो चुके हैं। जनता से बड़े-बड़े दावे कर जीतने वाले पार्षदों की जुबान को नगरपालिका में पहुंचते ही लकवा मार गया है। जनता से जुड़े मुद्दों पर भी अब उनकी जुबान नहीं खुलती है। अफसोस ये है कि शहर के 45 पार्षदों में सेे कोई  इतना भी ईमानदार और समझदार नहीं है जो कम से कम आम आदमी से हो रही लूट को बंद करने के लिए आवाज़ उठाएं ? पहली बार जीत कर आए युवा पार्षदों को तो छोड़ ही दीजिए 2 से ज्यादा बार जीत चुके अनुभवी पार्षद भी मुंह में दही जमाये बैठे हैं।

    युवा हनुमान मील और चेयरमैन कालवा रोक पाएंगे यह गोरखधंधा ?

    राजनीति में अपने भविष्य को तलाश रहे युवा काँग्रेसी नेता हनुमान मील नगरपालिका में चल रही इस लूट को खत्म करने के लिए आगे आना चाहिए। ऐसा करके वे विधानसभा के उन 58 हज़ार लोगों के भरोसे को सही साबित कर सकते है जिन्होंने उन पर अपना विश्वास जताया था। वैसे भी राजनीति में कामयाबी जनता का विश्वास जीतने से ही मिलती हैं। वही दूसरी ओर ओम कालवा अच्छे शिक्षक साबित हुए या नही ! इस बारे में तो पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। परन्तु नगरपालिका चेयरमैन के रूप में अब तक फिसड्डी ही साबित हुए हैं। इसमें शायद ही किसी को शक होगा। वैसे नगरपालिका में आम जनता के साथ हो रही इस लूट को खत्म कर गुरुजी अपनी खत्म होती गरिमा को बचा सकते हैं।

    अंत में……

    शहर के आम आदमी से हो रही इस लूट के विरुद्ध आवाज उठाने की हिम्मत अगर अब भी आप के चुने हुए पार्षद, चेयरमैन या फिर सत्ता का सुख भोग रहे नेता नहीं करते हैं तो शहर की जनता को यह समझ लेना चाहिए कि नगरपालिका में बंट रही भ्रष्टाचार की भांग का नशा इन पर चढ़ चुका है। ऐसे में जनता को नगरपालिका में  चुनकर भेजे गए वीरों के शिखण्डी बनने के तमाशे को देखकर ही अगले पांच साल इंतज़ार तक करना होगा ।

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    क्या प्रशिक्षु आईएएस मोहम्मद जुनैद और चेयरमैन कालवा को मिलेगी कामयाबी ?

    सूरतगढ़ शहर की सबसे बड़ी समस्या यानी यातायात व्यवस्था में सुधार को लेकर नगरपालिका प्रशासन हरकत में आया है। गुरुवार को मुख्य बाजार में दुकानदारों द्वारा थड़ों पर सामान रखकर किए गए  अतिक्रमण को हटाने के लिए अभियान चलाया गया था। इसी कड़ी में शुक्रवार को नगरपालिका सभागार में प्रशासन ने व्यापारियों के साथ बैठक की। प्रशिक्षु आईएएस  मोहम्मद जुनैद की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में नगरपालिका चेयरमैन ओम कालवा, अधिशासी अधिकारी लालचंद सांखला के अलावा सूरतगढ़ सिटी थाना के प्रभारी रामकुमार भी मौजूद रहे। बैठक में व्यापारियों ने नगरपालिका द्वारा  की गई कार्रवाई के प्रति रोष जताया। व्यापारियों ने नगरपालिका प्रशासन पर बिना किसी पूर्व सूचना के कार्यवाही करने का आरोप लगाया। बैठक में प्रशिक्षु आईएएस मोहम्मद जुनैद ने व्यापारियों को विश्वास दिलाया कि नगरपालिका प्रशासन व्यापारियों के साथ सहयोग करेगा। इस मौके पर नगरपालिका प्रशासन की ओर से शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारू करने के लिए दस सूत्री प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इस प्रस्ताव के अनुसार प्रशासन ने व्यापारियों को 3 दिन के भीतर फुटपाथों और नालियों पर किए गए अतिक्रमण को हटाने, दुकानों के आगे प्रशासन द्वारा दिए गए निशान की परिधि में वाहनों को खड़ा करने, मुख्य बाजार में वाहनों को निश्चित पार्किंग स्थल ( फार्म मुख्यालय से सटी बाउंड्री ) पर ही खड़ा करने की बात कही गई। इसके अलावा प्रशासन ने मिलिट्री वाहनों का शहर में प्रवेश रोकने के लिए मिलिट्री वाहनों की पीडब्ल्यूडी कार्यालय के साथ-साथ तहसील की ओर जा रही सड़क पर पार्किंग व्यवस्था करने के साथ-साथ मुख्य बस स्टैंड में प्रवेश और निकासी दक्षिण गेट से करने व प्राइवेट बस स्टैंड में बसों का प्रवेश व निकासी पश्चिम दिशा के गेट से करने का निर्णय भी लिया गया। वही रोडवेज बसों के साथ-साथ लोक परिवहन बसों को भी बस स्टैंड परिसर में ही खड़ा रहने की व्यवस्था शुरू करने की बात कही गई। बैठक में व्यापारियों ओर मीडियाकर्मियों की ओर से पुरानी धानमंडी में अतिक्रमण हटाने , मुख्य बाजार में ऑटो चालकों का स्थान नियत करने  व नियम विरुद्ध ऑटो खड़ा कर अव्यवस्था फैलाने वाले चालकों के विरुद्ध कार्रवाई करने, फुटपाथ पर अतिक्रमण करने वाले व्यापारियों पर अर्थदंड लगाने, जैसे कई प्रस्ताव भी दिए गए । जिन पर प्रशासन ने जल्दी अमल करने की बात कही।                           

     बहरहाल यातायात व्यवस्था को लेकर नगरपालिका प्रशासन की इस पहल का स्वागत है। हालांकि पहले भी प्रशासन द्वारा कई बार यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए ऐसे ही मापदंड तय किए जाते रहे है परंतु हर बार कंटीन्यूअस निगरानी के अभाव में यातायात व्यवस्था का बेड़ा गर्क होता भी हम देखते रहे है। अब देखना यह है कि प्रशिक्षु आईएएस मोहम्मद जुनैद शहर की यातायात व्यवस्था में कितना सुधार कर पाते हैं ? वैसे नये नवेले चेयरमैन ओम कालवा के लिए भी  लिए यातायात व्यवस्था को सुधारना बड़ी चुनौती है। ये और बात है की शहर की जनता को यातायात व्यवस्था के मामलेे में अब तक जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से निराशा ही मिली है  फिर भी ….

    वो मुतमइन है कि पत्थर पिघल नहीं सकता

    में बेकरार हूं आवाज में असर के लिए ।।

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    सूरतगढ़।सूरतगढ़ भाजपा के नगरमंडल अध्यक्ष के पद पर विधायक रामप्रताप कासनिया के नजदीकी सुरेश मिश्रा के मनोनीत होने से शायद ही किसी को आश्चर्य हुआ है। भाजपा विधायक रामप्रताप कासनिया के लिए भी इस पद पर उम्मीदवारी जता रहे कई दिग्गज दावेदारों के बीच सुरेश मिश्रा का चुनाव आसान नहीं रहा होगा। लेकिन कासनिया के बारे में यह कहा जाता है कि वे अपने समर्थकों को हमेशा याद रखते हैं। भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष पद पर सुरेश मिश्रा की नियुक्ति ने इस बात पर फिर मोहर लगा दी है। कासनिया के इस कदम से भले ही पार्टी के कुछ नेता निराश हुए हैं लेकिन कासनिया का कद उनके समर्थकों के बीच बढ़ा ही है।इससे पहले नगरपालिका चुनाव के दौरान भी कासनिया ने अपने समर्थकों के पक्ष में लीक से हटकर कुछ फैसले लेकर सबको हैरान किया था। अपने एक समर्थक को चुनाव लड़ाने के लिए उन्होंने वार्ड चुनाव में 5 बार जीत चुके एक दिग्गज नेता की टिकट भी काट दी थी। वह भी तब जबकि खुद कासनिया ये जानते थे कि जिस समर्थक को वे टिकट दे रहे हैं उसकी बुरी तरह हार होने वाली है । हुआ भी ऐसा ही। इस निर्णय को लेकर भाजपा में कासनिया का खूब विरोध हुआ। लेकिन कासनिया जानते है कि बुरे समय मे साथ देने वालों को भुलाया नही जाता बल्कि वक़्त आने पर तवज्जो दी जाती है। शायद यही वजह है जिसके कारण कासनिया लगातार कई बार पीलीबंगा विधानसभा से चुनाव जीतते रहे। सूरतगढ़ की राजनीति की बात करें तो यहां के राजनेताओं में कासनिया इस मायने में दूसरे राजनेताओं से अलग है कि वह समर्थकों और चापलूसों में फर्क करना जानते हैं। जबकि सत्ता के शीर्ष पर रहने वाले अधिकांश नेता चापलूसों को ही समर्थक समझने की भूल कर लेते  हैं। अगर सीखना चाहे तो व्यक्ति किसी से भी सीख सकता है, राजनीति करने वाले लोग रामप्रताप कासनिया से सीख सकते हैं।

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    कर्मचारी यूनियन इंटक ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर की जांच की मांग

    पूर्ण क्षमता से चलाएं बिना सीओडी करने का आरोप।

    सूरतगढ़। सूरतगढ़ सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट (सातवीं और आठवीं इकाई ) के निर्माण में देरी के लिए आलोचना झेल रही भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड यानी भेल ने अब जल्द ही सातवीं क्रिटिकल इकाई की COD यानि व्यवसायिक उत्पादन तिथि तय करने जा रही है। लेकिन प्लांट प्रबंधन द्वारा व्यवसायिक उत्पादन तिथि की घोषणा से पूर्व ही इसका विरोध शुरू हो गया है। राजस्थान विद्युत उत्पादन कर्मचारी यूनियन इंटक के अध्यक्ष श्याम सुंदर शर्मा ने इकाई के पूर्ण क्षमता से काम नहीं करने के बावजूद आनन-फानन में सीओडी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर सातवीं इकाई की जांच करवाने की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया है कि सातवीं इकाई से करीब 1 वर्ष पूर्व विद्युत उत्पादन शुरू किया गया था। लेकिन परीक्षण के दौरान अभी तक तकनीकी खामियों के चलते इकाई को पूर्ण क्षमता यानी 660 मेगा वाट पर चलाया नहीं जा सका है। इसके अलावा परिचालन के दौरान वायलर ट्यूबों में लीकेज के चलते  बार-बार इकाई को बंद करना पड़ा है। शर्मा ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि इकाई से संबंधित सीएचपी का वैगन टिप्लर ओर रेलवे यार्ड का काम भी अभी पूरा नही हो सका है । इसके बावजूद सातवीं इकाई के सीओडी की तैयारी की जा रही है। ज्ञापन में सातवीं इकाई को पूरे एक माह तक फुल क्षमता से साथ चलाने के उपरांत सीओडी करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने इकाई की गहन जांच विशेषज्ञों की टीम से कराए जाने की मांग की है।

        गौरतलब है कि सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट से वर्ष 2016 में ही व्यावसायिक उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन इकाई के निर्माण में 4 साल की  देरी होने के बावजूद भी अभी तक इकाई का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में निर्माण में देरी को लेकर आलोचना झेल रही सरकारी निर्माण कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड यानी भेल इकाई से व्यवसायिक उत्पादन जल्द से जल्द शुरू करवाना चाहती हैं। लेकिन निर्माण में खामियों के चलते इकाई के ट्रायल के दौरान आ रही दिक्कतों की वजह से इकाई से व्यवसायिक उत्पादन शुरू नहीं हो पा रहा है। गौरतलब है कि सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट की छठी इकाई से भी निर्माण के दौरान हुए भ्रष्टाचार और तकनीकी खामियों के चलते कई वर्षों तक व्यवसायिक उत्पादन शुरू नहीं हो पाया था। बाद में इकाई को बिना किसी विधिवत कार्यक्रम के ही शुरू कर दिया गया था ।

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    कलर प्रमाण पत्र जारी करने के नाम पर वसूले जा रहे 200 रुपये 

    सूरतगढ़ । नगरपालिका में कर्मचारियों का भ्रष्टाचार किसी से छिपा हुआ नहीं है। लेकिन अब इस लूट के खेल में नगरपालिका के सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ संविदा कर्मचारी भी शामिल हो गए हैं। सूरतगढ़ नगरपालिका द्वारा विवाह प्रमाण पत्र जारी करने की फीस के रूप में 1000 रुपए तो पहले ही वसूले जा रहे थे। लेकिन अब यह सामने आया है कि विवाह प्रमाण पत्र जारी करने के बाद प्रमाण पत्र का रंगीन प्रिंट ग्लेज्ड सीट पर निकालने के नाम पर 200 रुपये की अतिरिक्त अवैध वसूली की जा रही है। विवाह प्रमाण पत्र जारी करने वाली शाखा में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाली एक महिला कर्मचारी द्वारा इस तरह की वसूली का मामला तब सामने आया जब पिछले दिनों एक मीडियाकर्मी ने अपने भतीजे के विवाह का प्रमाण पत्र जारी करने का आवेदन किया। प्रमाण पत्र जारी करने के दौरान महिला संविदा कर्मचारी ने रंगीन प्रिंट जारी करने के नाम पर मीडियाकर्मी से भी 200 रुपये वसूल कर लिए। उसके बाद यह मामला नगरपालिका अध्यक्ष ,अधिशासी अधिकारी और शहर में सरकार के नुमाइंदे पूर्व विधायक गंगाजल मील तक भी पहुँचा । लेकिन संविदा कर्मचारी पर आज तक कोई कार्रवाई तक नहीं की गई। यही नहीं बेशर्मी की हद यह है कि अवैध वसूली की राशि तक वापस नही लौटाई गयी । इस घटना से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सूरतगढ़ नगरपालिका में भ्रष्टाचार का अजगर किस तरह से आम आदमी को निगलने के लिए तैयार है? किस तरह से रेगुलर कर्मचारी तो छोड़िए संविदा पर काम करने वाले कर्मचारी भी बेखौफ होकर आम आदमी का खून तक निचोड़ लेने को तैयार बैठे हैं ? क्या 20 से 30 रुपये के काम के लिए किसी को भी 200 रुपये तक वसूलने की छूट दी जा सकती है ? इससे भी बड़ा सवाल यह है कि ऐसे भ्रष्ट संविदा कर्मचारी को किसका वरदहस्त प्राप्त है ? जो नगरपालिका चेयरमैन और अधिशासी अधिकारी मामला सामने आने के बाद भी करवाई तक नहीं कर पा रहे हैं ? कुल मिलाकर अफसोस की बात ये है कि पिछले बोर्डों की तरह नगरपालिका का नवनिर्वाचित बोर्ड भी भ्रष्टाचार को शिष्टाचार मान लेने की राह पर चल पड़ा है।

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    सूरतगढ़ । भारत-पाकिस्तान युद्ध पर आधारित फिल्म *‘‘भुज द प्राइड ऑफ इंडिया’’* की शूटिंग के सिलसिले में बालीवुड अभिनेता संजय दत सहित अन्य कलाकार नाल एयर पोर्ट पर पहुंचे। फिल्म की शूटिंग सूरतगढ़ टिब्बा क्षेत्र और बीकानेर के रेतीले धोरेां के बीच सैन्य क्षेत्रों में होगी। प्रोडक्शन टीम से जुड़े एक सदस्य ने बताया कि फिल्म भुज द प्राइड ऑफ इंडिया की शूटिंग 17 से शुरु हो गई है, जोकि 29 फरवरी तक चलेगी। इस फिल्म का निर्देशन अभिषेक दुधइया ने किया है और अभिनेता अजय देवगन वायु सेना के स्क्वॉर्डन लीडर के किरदार में इसमें नजर आएंगे। पहली बार अजय देवगन वायु सेना के अधिकारी का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में अजय देवगन के किरदार का नाम विजय कर्णिक होगा। फिल्म इसी साल अगस्त में 14 तारीख को रिलीज होने वाली है। फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान के लौंगेवाला के युद्ध पर आधारित है। कार्णिक 1971 के युद्ध में भुज के एयरबेस के इंचार्ज थे और पाकिस्तानी की बमबारी के बावजूद उन्होंने एयरबेस को ऑपरेशनल रखा था। युद्व के दृश्यों का फिल्मांकन करने के लिए बीकानेर – श्रीगंगानगर जिलों से लगती महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एक अस्थाई इंदिरा गांधी कैनाल बनाई गई है, जिस पर भारत-पाक का युद्ध के कई दृश्य फिल्माए जाएंगे।फिल्म में बाहुबली फेम राना दग्गुबटी, सोनाक्षी सिन्हा, नोरा फतेही व पंजाबी सिंगर ऐमी विर्क भी नजर आएंगे। वहीं फिल्म के अंतिम दृश्यों की शूटिंग भुज, गुजरात में होगी।

    नाल पहुचंने पर किया संजय दत्त का स्वागत

    फिल्म अभिनेता संजय दत्त के नाल सिविल एयरपोर्ट पर चार्टर प्लने से पहुंचें और यहां पर सिविल एयरपोर्ट के निदेशक राधेश्याम मीणा, टर्मिनल मैनेजर विवेक यादव, इंजीनियर नरेंद्र चोधरी ने उनकी अगवानी की।

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    सूरतगढ़ । खबर के शीर्षक से आप सब हैरान हो रहे होंगे।  लेकिन यह सच है 145 करोड़ के वार्षिक बजट का दम्भ भरने वाली सूरतगढ़ नगरपालिका आमदनी के लिए जूझ रही है। यही वजह है कि नगरपालिका आमदनी बढ़ाने के लिए जो तरीके अपना रही हैं उनका सीधा-सीधा खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। उदाहरण के लिए आमदनी बढ़ाने के नाम पर नगरपालिका प्रशासन द्वारा पिछले लंबे समय से विवाह प्रमाण पत्र सहित विभिन्न  प्रमाण पत्रों के लिए 1000 रुपये शुल्क के रूप में वसूले जा रहे हैं। नगरपालिका की गत दिनों हुई बैठक मे कुछ पार्षदों ने यह फीस कम करने की मांग भी की थी। इस पर फीस बढ़ाने के समर्थन में कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी लालचंद सांखला ने जो तर्क दिये वे बेहद खोखले हैं। सांखला ने इसे नगरपालिका की आय बढ़ाने के लिए उठाया गया कदम बताया। परंतु क्या आपको नहीं लगता है कि 145 करोड रुपए के भारी-भरकम बजट वाली नगरपालिका के लिए प्रमाण पत्रों को जारी करने के एवज में ली जाने वाली फीस ऊंट के मुंह मे जीरे से ज्यादा कुछ नहीं है ? जबकि प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर रहे अधिकांश लोगों के लिए आर्थिक मंदी के इस दौर में 1000 रुपए बहुत बड़ी रकम है। इसके अलावा अधिशासी अधिकारी सांखला ने पदमपुर, गजसिंहपुर और करणपुर नगरपालिकाओं में इतना ही शुल्क वसूले जाने का उदाहरण दिया। अधिशासी अधिकारी शायद ये भूल गए की इन नगरपालिकाओं की तुलना सूरतगढ़ नगर पालिका की आय से नहीं की जा सकती है। इसके अलावा सब जानते हैं कि लालचंद सांखला सूरतगढ़़ आने से पूर्व इन तीनों नगरपालिकाओं में कार्यवाहक ईओ का पद संभाल रहे थे। ऐसे में क्या यह सवाल नहीं उठता हैै कि ईओ सांखला ने जो मनमाने कानून इन नगरपालिकाओं में लागू किए। वही मनमाने कानून वे अब सूरतगढ़ नगरपालिका में लागू कर रहे है ? कुल मिलाकर मामला उठने के बाद केवल बीपीएल परिवारों के लिए शुल्क में 50 प्रतिशत शुल्क की छूट देने की बात करते हुए इतने महत्वपूर्ण मुद्दे को दबा दिया गया। परन्तुु नगरपालिका मे शहर की जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले शहर के सभी 45 वार्डों के पार्षदों एवं नगरपालिका के चेयरमैन से हम यह पूछना चाहते हैं कि डिजिटलाइजेशन के इस दौर में जब जनता को विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र E-mitra व कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से लगभग फ्री में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उसी दौर में नगरपालिका द्वारा प्रमाण पत्रों के लिए ₹1000 वसूला जाना क्या किसी भी तरह से सही है ? उस दौर में जबकि लोग आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं ! लोगों की आय लगातार कम हो रही है ,उस समय में शुल्क के नाम पर 1000 वसूलना क्या राजतंत्र में जबरन वसूलेेे जाने वाले लगान जैसा नहीं है ? इसके अलावा जब सूरतगढ़ के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में यह प्रमाण पत्र लगभग बिना किसी शुल्क के जारी किए जा रहे हैं । ऐसे में नगरपालिका के कथित विकास की कीमत आम लोगों पर बहुत भारी पड़ रही है। बीपीएल कार्ड को गरीबी का पैमाना समझने वाले जनप्रतिनिधियों (पार्षदों) से कहना चाहूंगा कि वे अपने वार्डों का दौरा कर देख ले कितने गरीबों के बीपीएल कार्ड बने हुए हैं ? अगर उन्हें बिना कार्ड वालेे गरीबों से किसी तरह की सहानुभूति है तो सूरतगढ़ नगरपालिका द्वारा मचाई जा रही इस लूट को बंद करने के लिए आगे आए।

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    महिला प्रदर्शनकारियों के प्राइवेट पार्ट्स पर चोटें 

    जामिया कोर्डिनेशन कमेटी ने बुलाया था प्रोटेस्ट

    नई दिल्ली। विरोध प्रदर्शनों के दौरान लाठीचार्ज होना कोई नई बात नहीं है। सत्ता किसी की भी रही हो विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए पुलिस शक्ति का इस्तेमाल करती हैं और कई बार पुलिस बर्बरता से भी पेश आती हैं। परंतु पुलिस टारगेट करके खासकर महिला प्रदर्शनकारियों के प्राइवेट पार्ट्स पर चोट पहुंचाए तो आप इसे क्या कहेंगे ? लेकिन केंद्रीय सत्ता के बदले निजाम में दिल्ली पुलिस का यह वीभत्स चेहरा भी अब सामने आया है। दिल्ली मे मंगलवार को सीएए के विरोध में निकाले गये प्रोटेस्ट मार्च में पुलिस ने जामिया विश्वविद्यालय की महिला प्रदर्शनकारियों की ब्रेस्ट ओर प्राइवेट पार्ट्स को टारगेट करते हुए लाठियां मारी। पुलिस की इस क्रूरता पूर्ण कार्रवाई में 10 महिला छात्रों को गहरी चोट आई। चोट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महिलाओं को पहले जामिया हेल्थ सेंटर में भर्ती कराया। फिर चोट की गंभीरता को देखते हुए इन छात्राओं को अल – शिफा हॉस्पिटल में रेफर किया गया है। पुलिस की क्रूरता की वैसे तो अनगिनत मिसाले हैं। लेकिन महिलाओं के प्राइवेट पार्ट्स को टारगेट कर चोट पहुंचाने का यह संभवत विश्व का पहला मामला है। इस तरह के हमले के पीछे दो तरह की वजह हो सकती है पहली यह कि सत्ता का हिंदूवादी चेहरा मुसलमानों के प्रदर्शन को खासकर महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। जिसकी वजह से पुलिस को खासतौर से इस तरह के निर्देश जारी किए गए हो या फिर दूसरी वजह यह भी हो सकती है कि सत्ता द्वारा फैलाए गए हिंदू मुस्लिम का जहर अब इन पुलिस वालों की रगों में भी दौड़ने लगा है जो बुर्का पहनकर प्रदर्शन कर रही महिला प्रदर्शनकारियों को देखकर बदले की भावना से भर जाता है। जिसके बाद ये पुलिसकर्मी महिला प्रदर्शनकारियों को सबक सिखाने के नाम पर इस तरह के कुकृत्य से भी गुरेज नहीं करते।

              बहरहाल केंद्रीय सत्ता और पुलिस की दरिंदगी की इंतहा ज्यों-ज्यों हदों को पार कर रही हैं।  जामिया ,जेएनयू जैसे देश भर के विश्वविद्यालयों और शाहीन बागों में इकट्ठा हुए लोगों की बुलन्द आवाजों में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नज्म  ‘हम देखेंगे – हम देखेंगे, लाजिम है कि हम देखेंगे’ की गूंज तेज होती जा रही है।

                                                – राजेंद्र पटावरी।

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    145 करोड़ के बजट पर 15 मिनट भी चर्चा नहीं कर पाए पार्षद

    सूरतगढ़। शहर के विकास के लिए 145 करोड का बजट। लेकिन इस बजट पर 45 मिनट तो क्या 45 सेकंड भी बहस नहीं। ये है सूरतगढ़ नगरपालिका के नवनिर्वाचित बोर्ड की पहली बजट बैठक का हाल। भेड़ों की एक खासियत होती है कि एक भेड जिस ओर चल पड़े बाकी भेड़ें भी उसी ओर चल पड़ती हैं। चाहे वह भेड उन्हें खड्डे में लेकर गिर पड़े। नगरपालिका की वार्षिक बजट बैठक में नवनिर्वाचित पार्षदों का रवैया कुछ-कुछ भेडों ही जैसा था । चेयरमैन ओम कलवा के बजट प्रस्ताव पढ़ने पर ईओ लालचंद सांखला ने ज्यों ही बजट प्रस्ताव पर सदन की सहमति मांगी। सत्ता पक्ष के निर्दलीय पार्षद जिन्होंने शायद पहले से ही तय किया हुआ था कि बजट पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। बजट प्रस्ताव को पारित करने के लिए मेज थपथपा दी। बस फिर क्या था ? भेडों की तरह पार्षद भी लगे मेज थपथपाने।  एक महिला पार्षद ने आपत्ति उठाने की कोशिश की तो सत्ता पक्ष के वही निर्दलीय पार्षद उनके गले पड़ गए। वजह भी थी आखिर उनकी योजना में खलल जो पड़ रहा था। परंतु अफसोस की बात है कि महिला पार्षद के पक्ष में यूं तो सभी जागरूक पार्षदों को चाहे वह किसी भी पार्टी के हो आवाज उठानी चाहिए थी। लेकिन सत्ता पक्ष तो छोड़िए एक पार्षद के अलावा भाजपा सहित विपक्ष के किसी भी पार्षद ने विरोध का नैतिक साहस नहीं दिखाया । खैर बात करते हैं बजट बैठक की । इस बैठक में पार्षद हंसराज स्वामी ने वार्ड में तारबंदी की आड में अतिक्रमण का खेल चलने, पार्षद राजीव चौहान ने पानी की लाइन बिछाने , सबसे युवा पार्षद प्रियंका कल्याणा ने वार्ड की समस्या मीटिंग में उठाई। वही पार्षद विमला मेघवाल ने आईडीएसएमटी योजना में खाली पड़े भूखंडों पर कब्जे का मामला उठाया तो ईओ लालचंद सांखला ने योजना पर हाईकोर्ट के स्टे का सफेद झूठ बोलकर पल्ला झाड़ लिया। सफेद झूठ इसलिए क्योंकि हाई कोर्ट के स्टे की कोई बात है तो वह आवंटन में गड़बड़ी की शिकायत के बाद रद्द किए गए भूखंडोंं के मामले में है। जो भूखंड लॉटरी में निकाले ही नहीं गए उन पर कोई भी विवाद है ही नहीं तो हाईकोर्ट का स्टे होने का प्रश्न ही नहीं उठता। इससे साफ है कि नगरपालिका प्रशासन की शह पर ही योजना के खाली पड़े भूखंडों पर कब्जा कर अवैध निर्माण करवाया जा रहा है । अब जबकि मामला सुर्खियों में है तो सवालो के घेरे में आए ईओ और चेयरमैन ने मामला उठाने वाली महिला पार्षद को अपने फर्जी तर्क से गुमराह कर दिया। अफसोस की बात यह है कि मामले को उठाने वाली पार्षद तो नई है। उन्हें तो शायद मामले में नियमों की पूर्णत जानकारी ना हो इसलिए वेे तो संतुष्ट हो गई। परंतु मीटिंग में मौजूद और नगरपालिका के भ्रष्टाचार को लेकर पिछले लंबे समय से मुखर रहने वाले भाजपा विधायक रामप्रताप कासनिया का ईओ के तर्क से संतुष्ट हो जाना बेहद निराश करने वाला था। क्या राजनीति में धुरंधर माने जाने वाले विधायक कासनिया को इतनी भी सामान्य समझ नहीं है ? या फिर विपक्ष में होने चलते वह भी नगरपालिका के भ्रष्टाचार को शिष्टाचार के रूप में स्वीकार कर चुके है ? वैसे नगरपालिका की बैठकों में  पार्षदोंं के चुप रहने की एक और वजह भी है। वो ये है कि नगरपालिका की बोर्ड मीटिंग के एजेंडे की कॉपी आमतौर पर पार्षदों को मीटिंग से दो-चार दिन पहले देने की बजाय मीटिंग के समय ही दी जाती हैं।  ऐसे में पार्षद बजट व अन्य प्रस्तावों को समझ नही पाते हैं। जिसकी वजह से वह मीटिंग में चुपचाप बैठे रहते हैं।बहरहाल इस बैठक में एक पार्षद ने बोर्ड बैठक से पूर्व प्रस्ताव की कॉपी दिए जाने की मांग की है। लेकिन देखना यह है कि आगामी बजट बैठक से पूर्व पार्षदों को एजेंडे की कॉपी देने की परंपरा गुरुजी शुरू करेंगे या फिर अंधेर नगरी की परंपरा जारी रहेगी ।

                                           

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    शहर में चर्चा का विषय बने अवैध खोखे पर चला नगरपालिका का पीला पंजा 

    सूरतगढ़ । शहर की बीकानेर रोड पर एचडीएफसी बैंक के सामने खोखा रखकर  किया गया अतिक्रमण  पिछले कुछ समय से शहर में चर्चा का विषय बना हुआ था । जिसे  गुरुवार सुबह  आखिरकार  नगरपालिका अमले ने हटा दिया । मौके पर पहुंचे नगरपालिका कर्मचारियों ने खोखे को ज़ब्त कर खोखा लगाने के लिए किए गए निर्माण को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। शहर के मुख्य सड़क बीकानेर रोड पर अचानक उग आए इस अवैध कब्जे के चलते नगरपालिका के  नवनिर्वाचित चेयरमैन ओम कालवा और अधिशासी अधिकारी लालचंद सांखला पर सवाल उठ रहे थे ।क्योंकि लगातार समाचार पत्रों में मामला उठाए जाने के बाद भी पालिका प्रशासन  इस अवैध अतिक्रमण को नहीं हटा रहा था । पालिका प्रशासन के इस रवैये से शहर में यह चर्चा भी गरम थी  कि यह कब्जा करवाने के पीछे सत्ता पक्ष के प्रभावशाली नेता का हाथ था । वरना ऐसी कोई वजह भी नहीं थी पूर्व विधायक का  मॉल सीज करके अपनी पीठ ठोकने वाले अधिशासी अधिकारी और  अभी तक  साफ-सुथरी छवि वाले  गुरुजी इस कब्जे को लेकर चुप्पी साधे हुए थे । खैर एक पुरानी कहावत है ‘ देर आए दुरुस्त आए’ । वजह चाहे जो कुछ भी रही हो इस कब्ज़े के हटने से शहर के मुख्य बाजारों में सरेआम कब्जा करने की कोशिश में लगे बेखोफ भू माफिया में कुछ खौफ जरूर बैठेगा । वैसे सूरतगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद से भू माफिया  फिर से सक्रिय हो गए हैं । ऐसे में नवनिर्वाचित चेयरमैन से उम्मीद की जा रही है कि वे अवैध कब्जों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएं ।

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    कमीशन के लालच में शहरवासियों की परेशानी भूले अधिकारी ?
    सूरतगढ़ में सीवरेज निर्माण में हुई अव्यवस्था और गड़बड़ियां  शायद बिल्कुल दूर हो गई हैं ? अगर फिर भी  शहर के किसी  वार्ड में सीवरेज के चलते कोई सड़क धँस  जाती है या फिर सीवरेज   लाइनों में लीकेज के चलते   जलदाय विभाग के पाइपों से सीवर का  मल युक्त दुर्गंध  वाला पानी सप्लाई होता है तो शहरवासियों को  अब  इसकी आदत डाल लेनी चाहिए । क्योंकि इस बात से कोई  सरोकार उनके द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों , नगरपालिका  चेयरमैन या फिर सत्ता के सहारे शहर के बिना चुने गए माननीयों  द्वारा नगरपालिका में बिठाये गये अधिकारीयों व कर्मचारियों को  नहीं  है । नगरपालिका में चल रहे कमीशन के नोटों की बरसात में अब हर कोई भीगना चाहता है । सीवरेज निर्माण कंपनी की तान पर नगर पालिका के अधिकारी और कर्मचारी तो पहले ही नाच रहे थे। शहर के लोगों को लग रहा था कि वार्डों के विकास के दावे के साथ नए नए चुने गए जनप्रतिनिधि जल्दी से इस नाच में शामिल नहीं होंगे। शहर की उम्मीदों की एक और बड़ी वजह एक शिक्षाविद् का नगर पालिका चेयरमैन बनाया जाना भी था । बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले गुरुजी निश्चय ही नैतिकता की लाइन पर चलेंगे, इसमें किसी को कोई शक की गुंजाइश नहीं थी । फिर चेयरमैन बने गुरुजी ने सीवरेज की खामी के चलते दूषित पानी पी रहे वार्डों का दौरा कर मीडिया में खूब उम्मीद जगाई थी । चेयरमैन ओम कालवा ने दैनिक भास्कर को दिए बयान में सीवरेज निर्माण कंपनी पर एफआईआर दर्ज कराने और कंपनी का भुगतान रोकनेकी भी बात कही थी। चेयरमैन ओम कालवा का यह बयान 28 दिसंबर को प्रकाशित दैनिक भास्कर में छपा था ।
    लेकिन नगरपालिका से जुड़े सूत्रों की माने तो सीवरेज निर्माण कंपनी को जनवरी माह में ही करीब डेढ़ करोड रुपए के भुगतान का चेक काट दिया गया है । अब यह चेक चेयरमैन साहब की सहमति के बगैर कटा है या चेक कटते समय गुरुजी को नैतिकता का पाठ याद नही रहा, इसके बारे में तो हम कुछ नहीं कह सकते । बचपन से सुनते आए हैं कि ‘ पैसा भगवान तो नहीं पर भगवान से कम भी नहीं है ‘। सीवरेज निर्माण कंपनी का चेक काटे जाने की सूचना मिलने पर लगता है कि बचपन से जो सुना था वह सही है ? गुरुजी चाहे तो इस बात को झूठ भी साबित कर सकते हैं !                                                                                                                                                                                                                                                           -राजेन्द्र पटावरी


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    सीएए को नागरिकता देने का कानून मानने और सरकार द्वारा एनआरसी को लागू नहीं की करने की बात को सच मान भी लिया जाये तब भी भी शाहीन बाग इस वक्त देश की सबसे बड़ी जरूरत है । शाहीन बाग को केवल मुसलमानों का आंदोलन कह कर खारिज करना हमारी बहुत बड़ी भूल साबित हो सकती हैं । जिसके लिए आने वाली नस्लें शायद हमें माफ न करें। शाहीन बाग ने देश को इस बिना दिमाग और संवेदनाओं वाली सरकार को यह बता देने का अवसर दिया है कि आप इस देश के लोकतंत्र से खिलवाड़ नहीं कर सकते ? आप हिंदू -मुस्लिम का खेल खेलकर इस देश को बांट नहीं सकते ? आप देश के मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया सहित किसी भी तरीके के भ्रामक  प्रचार से इस देश को गुमराह नहीं कर सकते ? आप पूरे सिस्टम को अपने कब्जे में लेने के बाद भी इस देश की जनता को हरा नहीं सकते ? क्यों कि शाहीन बाग उस समय सरकार से नज़रें मिला रहा है जब सरकार जनता के मूल सवालों से आंखे चुरा रही है। इस वक़्त जब देश के बहुसंख्यक लोग सरकार से रोजी- रोटी और रोजगार के सवाल पर विमर्श चाह रहे हैं तो यह सरकार हमें हिंदू मुस्लिम में बांट देना चाहती हैं । ऐसे में सरकार को इस विमर्श पर लाने का एक मात्र रास्ता शाहीन बाग से होकर निकलता है। इसका मतलब है कि मूल मुद्दों से भटकी सरकार को सही रास्ते पर लाने के लिए हमे शाहीन बाग पर बैठे देश के बहुसंख्यक वर्ग के साथ चलना होगा । आप सोच रहे होंगे की सड़क पर आंदोलन करने वाले कुछ  हजार लोग बहुसंख्यक कैसे हो गए ?  तो आप भी ये जान लें कि क्रांति करने के लिए बस इतने ही लोगों की जरूरत होती है । इतिहास में जितनी भी क्रांतियां हुई है उनमें ऐसे ही कुछ हजार लोग सड़कों पर बाहर निकल कर आए हैं और सत्ताधारियों के दमन चक्र को तोड़ते हुए उसके अभिमान को मिट्टी में मिलाया है। क्रांति का कोई भी दौर हो ,इन कुछ हजार लोगों को छोड़कर बाकी बचे लोगों में तमाम बातों को समझते हुए भी सत्ता से लड़ने का मादा नहीं होता या कहे कि प्रत्येक व्यक्ति भगत सिंह को पड़ोसी के घर ही पैदा होते देखना चाहता है। ऐसे लोग इतिहास में कीड़े मकोड़ों की तरह जीते हैं और इस दुनिया से रुखसत कर जाते हैं । अगर आपने कभी इतिहास को पढ़ा है और वर्तमान हालात को समझ रहे हैं तो आपको शाहीन बाग का संघर्ष 1957 की क्रांति जैसा ही लगेगा । संविधान और मानवता विरोधी सीएए को मानने से इंकार करना कुछ कुछ 1957 की क्रांति में मंगल पांडे की तरह चर्बी से बने कारतूस चलाने से मना करना ही है । 1957 को हम चूके तो हमें 1947 तक इंतजार करना पड़ा था । ठीक उसी तरह अगर हम यह मौका खो देंगे तो हमे मुुसिबतों का लंबा सफर तय करना पड़ सकता है । क्योंकि कपड़ों की पहचान से बांटने वाली यह सरकार फिर शायद हमें एक होने का मौका ही ना दें । यह सफर  कितना दुश्वार रहेगा उसका अंदाजा शायद आप नहीं लगा पा रहे । इसलिए लगता है कि शाहीन बाग इस वक्त देश की सबसे बड़ी जरूरत है । शाहीन बाग ने देश को एक ऐसा मुद्दा दे दिया है जब पूरा देश सीएए और एनआरसी को संविधान की आत्मा पर हमला मान रहा है । यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे भारत का कोई भी जिम्मेदार नागरिक सही नहीं ठहरा रहा है । हालांकि यह सरकार पहले भी रिजर्व बैंक, सीबीआई, मीडिया और सविधान की रक्षा करने वाली सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्थाओं पर हमला कर उन्हें ध्वस्त करती रही ओर हम निहित स्वार्थों ओर डर के चलते बुझे मन से इन संस्थाओं की बर्बादी का तमाशा देखते रहे । यही वजह है कि देश में ऐसी कोई भी संवैधानिक संस्था अब बची नहीं है जिससे इस देश का नागरिक कोई उम्मीद कर पाए । लेकिन सीएए के रूप में सरकार ने संविधान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला कर दिया है । अगर इस हमले को हम विफल नहीं कर पाए तो यक़ीन मानिए कि आप ओर हम विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का नागरिक होने का भरम खो देंगे । संविधान को बचाने के लिए हमें 1957 की तरह इस अहंकारी सत्ता को उसकी औकात बतानी पड़ेगी और इसका एकमात्र रास्ता शाहीन बाग से जाता है । मुझे विश्वास है कि अगर हम शाहीन बाग को अपना समर्थन देंगे तो यह सत्ता चाहे कितनी भी मगरूर हो जनता के सामने नतमस्तक होगी। आप शाहीन बाग में जा नहीं सकते तो आप सोशल मीडिया के किसी भी मंच से शाहीन बाग के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद कर करें। एक बात और  मुसलमानों को अपना दुश्मन मानने वाले लोग यह भी याद रखें कि 1957 में भी क्रांति का झंडा मुसलमान बादशाह बहादुर शाह जफर नेेे उठाया था। 1957 में भले ही अंग्रेजो के खिलाफ एक रानी लक्ष्मीबाई लड़ी थी लेकिन शाहीन बाग की हर औरत अब रानी लक्ष्मी  बाई बन चुकी हैं । इंकलाब जिंदाबाद ।                                                                                                                                                                        – राजेन्द्र पटावरी


                                                                                             


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    एनआरसी को लागु नहीं करेगी सरकार ?

    शाहीन बाग़ पर  चल रहे आंदोलन के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा  कि देश में एनआरसी लागु नहीं किया जायेगा । फिर भी पिछले 50 दिनों से शाहीन बाग़ पर आंदोलन जारी है । मेरा मानना है कि CAA  हर हाल में वापस होना चाहिए । क्यूंकि अकेला एनआरसी  इतना खतरनाक नहीं है पर वर्तमान  CAA के साथ ये सत्ता को ऐसा हथियार दे सकता जिसका इस्तेमाल भविष्य में वह मुसलमानों के विरुद्ध संघ के एजेंडे को लागु करने में कर सकती है । इसीलिए किसी भी सविंधान पसंद नागरिक का शाहीन बाग़ को समर्थन देना बहुत जरूरी है।लेकिन यह बात भी सही है कि सरकार फ़िलहाल एनआरसी को लागु नहीं करने जा रही है । इस बात के पीछे जो सबसे बड़ा कारण  लगता है, वो है आसाम में एनआरसी लागू होने के बाद बनी परिस्थितियां। आसाम में एनआरसी लागू करने के बाद भाजपा के लिए एक तरफ कुआँ और दूसरी तरफ खाई की सिचुएशन बन गई है । क्योंकि CAA लागू करने के बाद भी आसाम में स्थानीय लोगों के विरोध के चलते एनआरसी से बाहर हुए हिंदुओं को मुख्यधारा में शामिल करना सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती है । आसाम के साथ-साथ नॉर्थ ईस्ट के कई राज्यों ने भी सीएए को घुसपैठियों को बैक डोर एंट्री देने का प्रयास मानते हुए आंदोलन छेड़ रखा है। मुख्यधारा का मीडिया इन प्रदर्शनों की कवरेज से बच रहा है । लेकिन यह तय है कि आसाम के लोग किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नही हैै । दूसरी ओर सरकार भी अब समझ चुकी है कि देशभर में एनआरसी लागू होने पर भी आसाम जैसे की परिणाम आ सकते हैं । आसाम में तो केवल 19 लाख लोग ही एनआरसी से बाहर हुए है । यदि भारत में एनआरसी को लागू किया जाता है तो कम से कम 2 करोड रू लोग अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाएंगे और इनमें मुसलमानों की अनुमानित संख्या करीब 50 लाख होगी। ऐसे में सवाल उठेगा कि सरकार इन 50 लाख लोगों का क्या करेगी । यह संख्या इतनी बड़ी है कि सरकार अगर चाहे भी तो इन लोगों को न तो  डिपोर्ट कर सकती हैं और ना ही डिटेंशन कैंपों में इतनी बड़ी आबादी को रखा जा सकता है। डिटेंशन सेंटर की लागत और क्षमता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि आसाम के ही गोपाल पाड़ा में 45 करोड़ की लागत से बने  डिटेंशन सेंटर की क्षमता  महज 3000 लोगों को रखने की है । साफ है कि 50 लाख लोगों को रखने लायक डिटेंशन सेंटर बना पाना सरकार के बूते से बाहर की बात है । तो फिर वही सवाल उठता है कि सरकार इन लोगों का क्या करेगी । हमें लगता है कि सरकार  ज्यादा से ज्यादा वोट बैंक की राजनीति आर एसएस के हिंदू राष्ट्र के एजेंडे के तहत इन लोगों से वोट करने और अन्य सामान्य नागरिक के सिविल अधिकार वापस ले लेगी। लेकिन ऐसा करने पर भी देश के हालात इतने बुरे हो सकते हैं कि सरकार के लिए संभालना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा  इस समय देश के आर्थिक हालात भी ऐसे नहीं हैं कि एनआरसी को पूरे देश मेंं लागू करने के लिए आवश्यक व अनुमानित 54 हजार करोड रुपए खर्च करना भी सरकार के बूते से बाहर है। क्योंकि इस वक्त देश रिकॉर्ड आर्थिक मंदी से गुजर रहा है । उन हालातों में जब सरकार अपने रोजमर्रा के खर्चों के लिए सरकारी संस्थानों को बेचने पर मजबूर हो रही है। इस बात की  सम्भावना कम ही है कि पिछले 5 सालों से हद दर्जे के बेवकूफी भरे कारनामे करने के बाद भी मोदी सरकार आसाम एनआरसी से सबक नहीं लेगी और पूरे देश में एनआरसी लागू करने का आत्मघाती कदम उठाएगी ।

                                                                                                                      -राजेन्द्र पटावरी 

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    शाहीन बाग पर चल रहे धरने को लेकर पिछले लंबे समय से सवाल उठाए जा रहे हैं । सरकार का मानना है कि सीएए नागरिकता देने का कानून है और एनआरसी को देश में लागू ही नहीं किया जा रहा है। इन दोनों बातों से इत्तेफाक रखते हुए भी में समझता हूं कि शाहीन बाग इस समय देश की सबसे बड़ी जरूरत है। ऐसा क्यों है इसका जिक्र हम आगे करेंगे ।पहले हम बात करते हैं कि सीएए नागरिकता देने का कानून कैसे है ? और एनआरसी को क्यों नहीं लागू करने जा रही है मोदी सरकार ?  सीएए यानी नागरिकता संशोधन एक्ट लाने की पृष्ठभूमि में हमें आसाम में  एनआरसी के परिणामों को देखना होगा । आसाम में एनआरसी के चलते करीब 19 लाख लोग नागरिकता रजिस्टर से बाहर हो चुके है। इनमें भी 13 लाख से अधिक हिंदू हैं। यह सरकार के उस अनुमान के ठीक उल्टा है जिसमें सरकार को लग रहा था कि एनआरसी आसाम से लाखों की संख्या में ( 50 लाख) अवैध बांग्लादेशी मुस्लिम माइग्रेंट को बाहर करने का बेहतरीन अवसर है। परंतु सरकार के परिणामों का सही अनुमान किए बगैर हड़बड़ी में लागू की गई एनआरसी ने सरकार के सामने ही धर्मसंकट खड़ा कर दिया । क्योंकि हिंदुओं की बड़ी आबादी नागरिकता रजिस्टर से बाहर होने से भाजपा का हिंदू वोट नाराज हो गया है। ऐसे में सरकार के लिए नेशनल रजिस्टर से बाहर हुए हिंदुओं को वापस मुख्यधारा में लाना बड़ा चैलेंज बन गया । क्योंकि पूर्व के नागरिकता कानून के कड़े नियमों ने आसाम के बड़ी संख्या में हिंदू समुदाय के लोगों को  एनआरसी से बाहर कर दिया । इसलिए यह जरूरी था कि नागरिकता के नियमों को सरल किया जाए । यही वह कारण है जिसके लिए सीएए यानी नागरिकता संशोधन कानून लाया गया । लेकिन सरकार ने संशोधन बिल में जानबूझकर पाकिस्तान ,अफगानिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं सहित 6 धर्मों के साथ उत्पीड़न का हवाला देकर मुस्लिमों को नागरिकता नहीं देने का पेच डाल दिया। कुछ लोग सोच रहे हैं कि इस कानून को सरकार पाकिस्तान,अफगानिस्तान और बांग्लादेश के मुसलमानो को छोड़कर हिंदू व अन्य  धर्म के लोगों को नागरिकता देने के लिए लाई है तो वे गलतफहमी में है । क्योंकि कांग्रेस सहित पिछली दूसरी सरकारों की तरह ही भाजपा ने भी पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने में कोई रुचि नहीं दिखाई है। जबकि ऐसे हिंदू पाक शरणार्थियों की संख्या हजारों में है जो पहले के नागरिकता नियमों के तहत भी नागरिकता पाने के हकदार हैं और उन्होंने नागरिकता के लिए आवेदन भी किया हुआ है । इस बात की सत्यता को समझने के लिए यह आंकड़ा ही बहुत है कि पिछले 6 सालों में सरकार ने पाकिस्तान के केवल 2830 ,अफगानिस्तान के 912 और बांग्लादेश से आए 172 अवैध प्रवासियों को ही नागरिकता प्रदान की है और इनमें मुसलमान भी हैं । इसके अलावा इलीगल माइग्रेंट्स को नागरिकता नही देने का एक पहलू यह भी है कि वे पहले से जनसंख्या वृद्धि से त्रस्त देश के सीमित संसाधनों में भागीदार बन जाएंगे । यही वजह है कि सरकारे अवैध प्रवासियों को नागरिकता देने में बचती रही है। कुल मिलाकर CAA के जरिये सरकार ने आसाम में एनआरसी से बाहर हुए उन लोगों को जिनका दर्जा अवैध प्रवासियों का हो चुका था , को एक तरह से  राहत  देने का प्रयास किया है । क्योंकि सीएए का संशोधन 31 दिसंबर  2014 को भारत में रह रहे बाहरी लोगों को इलीगल माइग्रेंट्स नहीं मानता है । जिसका सीधा सा मतलब है कि आसाम में एनआरसी से बाहर हुए  लोग अब  अवैध अप्रवासी नहीं है । इसके अलावा CAA में  नागरिकता के लिए  भारत में रहने की अवधि 11 साल से घटाकर 6 साल करने से असम एनआरसी से बाहर हुए लगभग सभी लोग नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे । इसलिए मुझे लगता है  की  सीएए नागरिकता देने का कानून तो है , पर यह पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश की प्रताड़ित हिंदू कम्युनिटी को  नागरिकता देने की बजाय आसाम में एनआरसी से बाहर हुए विशेषकर हिंदुओं को नागरिकता देने के लिए है। यह अलग बात है कि CAA लागू करने के साथ ही 955 लोगों की शहादत और 45 सालों की लंबी लड़ाई के बाद  एनआरसी लागू कराने वाले आसाम के लोग अब एनआरसी से बाहर हुए  लोगों को सीएए के बहाने वापस नागरिकता देने के खिलाफ हो गए हैं । वही दूसरी ओर CAA के जरिये मुस्लिमों को नागरिकता देने से वंचित करने के भाजपा के मन्सूूबे के खिलाफ  देश की पढ़ी लिखी जनता ओर अमन पसंद व संविधान में विश्वास रखने वाले बुद्धिजीवियों और एक्टिविस्टों का एक बड़ा वर्ग मुसलमानों के साथ खड़ा हो गया है । 

    • राजेन्द्र पटावरी 

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    चेयरमैन ओम कालवा व ईओ लालचंद सांखला पर आरोप 

    क्या कोई नगरपालिका अपने ही द्वारा प्लान की गई आवासीय योजना के भूखंडों पर भूमाफियाओं को कब्जा करवा सकती है ?अब तक हमे लगता था शायद नहीं ! क्योंकि अब तक हमने खाली पड़ी सरकारी भूमि पर ही अतिक्रमण की बात सुन रखी थी। लेकिन पूरे सूबे में अपने भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात रही सूरतगढ़ नगरपालिका द्वारा ऐसा ही एक कारनामा करने का मामला सामने आया है । मामला सूरतगढ़ नगरपालिका द्वारा वर्ष 2003 में लाई गई आईडीएसएमटी आवासीय योजना से जुड़ा है | नगरपालिका के ही पूर्व चेयरमैन रहे बनवारीलाल मेघवाल ने इस योजना के नीलामी नहीं होने की वजह से रिक्त रहे भूखंड संख्या 11,15 और 16 पर मिलीभगत कर अवैध कब्जा करवाने का आरोप लगाया है । पूर्व चेयरमैन ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में सीधे-सीधे नगरपालिका के वर्तमान चेयरमैन ओम कालवा और अधिशासी अधिकारी लालचंद सांखला पर रिश्वत ( मोटी रकम ) लेकर कब्जा करवाने का आरोप जड़ा है। हालांकि आईडीएसएमटी योजना की बात करें तो यह योजना अपनी शुरुआत से ही भ्रष्टाचारियों की भूख शांत करती रही है । योजना के प्रारंभ में ही यानि साल 2003 में योजना के 42 भूखंडों को नगरपालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कब्जे होना बताकर नियमन की आड़ में बेच दिया | उसके बाद  वर्ष 2004 में चेयरमैन इकबाल मोहम्मद कुरेशी के कार्यकाल में 28 भूखंडो का लॉटरी द्वारा आवंटन किया गया। इस मामले में आरोप लगाने वाले और तत्कालिक चेयरमैन बनवारीलाल मेघवाल के कार्यकाल में वर्ष 2010 में एक बार फिर इस योजना के 69 भूखंडों का लॉटरी द्वारा आवंटन किया गया। इस बार पूरी लॉटरी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई । जिसके चलते स्वायत शासन विभाग ने आखिरकार भूखंडों का आवंटन के निरस्त कर दिया। यह और बात है कि आवंटन निरस्त होने के बावजूद भी अधिकांश आवंटियों ने भूखंडों पर कब्जा कर मकान व व्यावसायिक इमारतें खड़ी कर ली है। 

                          अब एक बार फिर आईडीएसएमटी योजना चर्चा में हैं ।वर्तमान कांग्रेस सरकार में सूरतगढ़ नगरपालिका भ्रष्टाचार के नित रिकॉर्ड बना रही है। परन्तु अपने ही द्वारा प्लान की गई कॉलोनी के खाली भूखंडों पर कब्जा करवा देना क्या भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा नहीं है ? क्या नगरपालिका के अधिकारियों  की भूख इतनी बढ़ गई है कि वह कोई भी हद पार कर सकते हैं ? इसके अलावा क्या यह सवाल भी मौजूं नहीं है कि अगर कोई अधिकारी या महकमा इस हद तक भ्रष्टाचार करने की हिम्मत दिखा रहा है तो वह ऐसा राजनीतिक संरक्षण के चलते तो नहीं कर रहा है ? ये ऐसे सवाल है जिनका जवाब देने की जिम्मेदारी नगरपालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी की तो है ही , इसके साथ ही उन लोगों की भी है जो सूबे की सरकार का सूरतगढ़ में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं । इस पूरे प्रकरण में पालिका के नवनिर्वाचित अध्यक्ष ओम कालवा का नाम भी सामने आ रहा है। क्योंकि ओम कालवा की छवि अभी तक बेदाग रही है और  शहर के जनता को उनसे बड़ी आशाएं हैं । इसलिए शहर की जनता की ओर से नवनिर्वाचित अध्यक्ष से हमारा इतना ही कहना है…

                                             दामन अगर है साफ तो खास एहतियात रख ।

    इससे जरा भी दाग छुपाया न जाएगा ।।

                                                                                                    -राजेन्द्र पटावरी  

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