सोने -चांदी के आभूषण और 57 चांदी के हाथियों ने खींचा श्रद्धालुओं का ध्यान










रतलाम (मध्यप्रदेश)। दीपावली को धन, वैभव और सुख-समृद्धि का पर्व माना जाता है। इस अवसर पर देशभर के मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है, लेकिन मध्यप्रदेश के रतलाम स्थित महालक्ष्मी मंदिर अपनी सजावट के लिए देश भर मे चर्चा मे है। इस बार भी दीपावली के अवसर पर मंदिर मे मां लक्ष्मी के दरबार को फूलों और रोशनी के साथ-साथ करोड़ों रुपये के नोटों, सोने-चांदी के आभूषणों और विदेशी करेंसी से सजाया गया है।
इस बार भी मंदिर में करीब दो करोड़ रुपये की करेंसी से विशेष सजावट किए जाने की जानकारी सामने आई है। भारतीय नोटों के साथ लगभग 40 देशों की विदेशी मुद्राओं को भी सजावट में शामिल किया गया। मंदिर की दीवारों, प्रवेश द्वार और अन्य हिस्सों को इस तरह सजाया जाता है कि पूरा परिसर किसी भव्य राजमहल जैसा नजर आने लगता है। नोटों से तैयार आकर्षक झालरें और सजावटी आकृतियां इस आयोजन को विशेष बनाती हैं।
श्रद्धालुओं की भागीदारी से सजता है मां का दरबार
इस मंदिर की परंपरा की सबसे खास बात यह है कि सजावट में इस्तेमाल होने वाली धनराशि और आभूषण मंदिर के श्रद्धालु उपलब्ध करवाते हैं। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार नकदी, सोने-चांदी के जेवर और अन्य कीमती वस्तुएं सजावट के लिए जमा करवाते हैं। इस आयोजन में करीब 2000 श्रद्धालुओं की भागीदारी की जानकारी दी गई है। यहां किसी एक परिवार या व्यक्ति की बजाय बड़ी संख्या में भक्त मिलकर मां लक्ष्मी के दरबार को सजाने में योगदान देते हैं। यही सामूहिक सहभागिता इस आयोजन को और भी खास बनाती है।
57 चांदी के हाथी और विशेष आभूषण बने आकर्षण
मंदिर की सजावट में चांदी के 57 हाथियों को भी विशेष स्थान दिया गया है। इसके अलावा चांदी के सिक्कों से सजी साड़ी और विभिन्न प्रकार के सोने-चांदी के आभूषण मां के श्रृंगार की शोभा बढ़ाते हैं। विदेशी करेंसी की मौजूदगी इस सजावट को और अनूठा बना देती है। मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु इस भव्य सजावट को देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं।
पांच दिन बाद भक्तों को लौटा दी जाती है उनकी अमानत
इस आयोजन का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि श्रद्धालु सजावट के लिए जो नकदी और आभूषण जमा करवाते हैं, वे स्थायी रूप से मंदिर को दान नहीं किए जाते। आयोजन पूरा होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत भक्तों को उनकी जमा कराई गई संपत्ति वापस कर दी जाती है। इसके लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से जमा सामग्री का हिसाब रखा जाता है। श्रद्धालु अपनी अमानत वापस मिलने को मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मानते हैं। कई परिवार इस परंपरा में वर्षों से भाग लेते आ रहे हैं।
आस्था और परंपरा का अनूठा संगम
रतलाम का महालक्ष्मी मंदिर यह संदेश देता है कि त्योहार केवल व्यक्तिगत खुशियों तक सीमित नहीं होते, बल्कि सामूहिक आस्था और सामाजिक सहभागिता से भी उनकी भव्यता बढ़ती है। दीपावली के अवसर पर यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ और मंदिर की अनूठी सजावट इसे देश के चर्चित धार्मिक आयोजनों में शामिल करती है।
एक तरफ करोड़ों रुपये की करेंसी से सजा मां लक्ष्मी का दरबार और दूसरी तरफ हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था। रतलाम का यह मंदिर दीपावली पर एक ऐसी परंपरा की तस्वीर पेश करता है, जहां धन का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भक्तों की श्रद्धा और सहभागिता सबसे बड़ा आकर्षण बन जाती है।
-: खबर पॉलिटिक्स | विशेष प्रस्तुति
