सूरतगढ़। निकाय चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा ने अब तक टिकटों की घोषणा नहीं की है। इसके बावजूद चुनाव मैदान में कुछ ऐसे चेहरे हैं जो चुनाव जितने पर भाजपा की तरफ से चेयरमैन पद के संभावित प्रत्याशी बन सकते हैं।
ऐसे चेहरों में एक नाम है दीपा तरड़ का ! वार्ड नंबर-24 से भाजपा से टिकट की प्रबल दावेदार दीपा तरड़ शहर में चुनाव लड़ रही कुछ एक हाईली एजुकेटेड महिला प्रत्याशियों में से है। इंग्लिश लिटरेचर में एम.ए. बी.एड. तक शिक्षित दीपा तरड़ पिछले कई दिनों से लगातार जनसंपर्क में जुटी हैं। हालांकि इस वार्ड में अरोड़ा समुदाय से वेद प्रकाश भूतना भी भाजपा के टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। लेकिन दीपा तरड़ का टिकट का दावा ज्यादा मजबूत नज़र आता है।
इसकी वजह है पारिवारिक पृष्ठभूमि और वार्ड का जातीय वोट समीकरण। दीपा तरड़ क्षेत्र के एक पुराने राजनीतिक परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पति विष्णु तरड़ वर्तमान में भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष है। वहीं वे खुद 2015 से 2020 के दौरान पंचायत समिति के 17 नंबर जोन (पदमपुरा) से डायरेक्टर भी रह चुकी है। इसके अलावा उनके ससुर हेतराम तरड़ सरपंच और जिला परिषद सदस्य रह चुके है। इतना ही नहीं उनकी सास श्रीमती कृष्णा देवी तरड़ भी 1994 में नगरपालिका पार्षद चुनाव जीतकर पार्षद रह चुकी है।
इसी मज़बूत राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते जहाँ दीपा तरड़ को टिकट मिलना लगभग तय है वही भाजपा को बहुमत मिलने पर दीपा तरड़ का चुनाव जितने पर चेयरमैन बनने का दावा मज़बूत नज़र आता है। दीपा तरड़ की पारिवारिक के साथ-साथ मजबूत आर्थिक पृष्ठभूमि भी उन्हें अध्यक्ष पद का मजबूत दावेदार बनाती है। क्यूंकि अगर भाजपा को खंडित जनादेश भी मिलता है उस स्थिति में मज़बूत आर्थिक स्थिति के चलते तरड़ परिवार बड़ा खेल कर भाजपा का बोर्ड बनाकर स्वयं की दावेदारी रख सकता है।
कुल मिलाकर कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा की तरफ से लड़ पार्षद का चुनाव लड़ रही महिला प्रत्याशियों में दीपा तरड़ उन चुनिंदा प्रत्याशियों में है जो अध्यक्ष पद की मजबूत दावेदार है। यह और बात है कि उन्हें अध्यक्ष पद का पाने से वार्ड की अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा।
वार्ड के जातीय समीकरण बदल सकते है जीत का गणित !
वार्ड नंबर-24 में फिलहाल की स्थिति की बात करें तो दीपा तरड़ के मुकाबले में धर्मदास सिंधी चुनाव मैदान में है जो फिलहाल कांग्रेस से टिकट मांग रहे है। इस वार्ड में करीब 1300 मतदाता है। जातीय गणित की बात करें तो इन 1300 में से 200 से अधिक वोटर बिश्नोई समाज से है, निश्चित तौर पर इनका झुकाव दीपा तरड़ की तरफ रहने की संभावना है। इसके अलावा अरोड़ा, ब्राह्मण व सरदार कम्युनिटी के मतदाताओं की संख्या भी अच्छी खासी है।
वर्तमान में भाजपा की सरकार होने और राजनितिक परिवार से जुड़े होने का फायदा जहां दीपा तरड़ को मिलेगा। वहीं महिला होने के चलते उनके वार्ड की महिला वोटर से कनेक्ट करने में सफल होने की संभावना ज्यादा है। इसके अलावा वार्ड के पढ़े लिखे मतदाताओं के लिए उनका उच्च शिक्षित होना भी उन्हें एज़ दिला सकता है।
बहरहाल चुनाव प्रचार के दौरान दीपा तरड़ वार्ड के लोगों से बेहतर विकास का वादा कर रही है। दीपा तरड़ के मुताबिक वार्ड में यूं तो समस्याओं की कमी नहीं है लेकिन सफाई और लाइट की समस्या प्रमुख समस्याएं हैं। उनका कहना है कि अगर उन्हें वार्ड की सेवा का अवसर मिला तो वे इन दोनों समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान करने का प्रयास करेगी।