सूरतगढ़। शहर में मेडिकल व्यवसाईयों की संस्था केमिस्ट एसोसिएशन भी राजनीति का शिकार हो गई है। इस संस्था के एक धड़े ने पिछले दिनों नागपाल मेडिकल स्टोर के संचालक लवली सिडाना को सर्वसम्मति से अध्यक्ष निर्वाचित कर दिया। उस समय 50 से अधिक यूनियन सदस्यों द्वारा लवली नागपाल को समर्थन देने का दावा किया गया। वहीं श्रीगंगानगर जिला केमिस्ट अलायंज के गुट से जुड़े शहर के मेडिकल व्यवसाइयों के दूसरे गुट ने शनिवार को पुष्करणा धर्मशाला में चुनाव कर अनिल शर्मा को अध्यक्ष घोषित कर दिया। दूसरे गुट के इस चुनाव में संगठन के पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा के सामने मनोज सहारण चुनाव मैदान में थे। जैसा की इस चुनाव का नतीजा सभी को पहले से ही मालूम था, अनिल शर्मा चुनाव में विजयी रहे। अनिल शर्मा के 156 वोटो के मुकाबले प्रतिद्वंदी सहारन को महज 12 वोट मिले। इस प्रकार इस चुनाव में अनिल शर्मा 144 वोटो से जीत कर अध्यक्ष बन गए।
इन चुनाव के नतीजे और परिस्थितियों पर अगर गौर किया जाए तो साफ नजर आता है कि यह चुनाव अनिल शर्मा गुट द्वारा लवली गुट को कमजोर साबित करने के लिए किया गया महज़ एक शक्ति प्रदर्शन था। चुनाव के बाद अध्यक्ष द्वारा पहली बार पूरे बाजार में जुलूस निकालना भी इसी रणनीति का एक हिस्सा था। हालांकि विजय जुलूस में जीत के अनुरूप मेडिकल व्यवसायी शामिल रहे। इसके अलावा दूसरी फील्ड के लोगों ज्यादा संख्या में मौजूद होना सब कुछ प्लांड होने के संदेह को पुख्ता करता है।
वरिष्ठ सदस्य चाहते थे बदलाव ! अध्यक्ष अनिल शर्मा नहीं थे पद छोड़ने को तैयार ?
दरअसल अनिल शर्मा क्यूंकि पिछले 4 वर्षों से लगातार अध्यक्ष पद पर काबिज़ थे, इसलिये केमिस्ट एसोसिएशन के कुछ पुराने और वरिष्ठ सदस्य लवली सिडाना को सर्वसम्मती से अध्यक्ष बनाने के पक्ष में थे। इसलिये चुनाव संबंधी बैठक में लवली सिडाना ने अध्यक्ष अनिल शर्मा को पिछले चुनाव में अगली बार अध्यक्ष पद के लिए उनके नाम को समर्थन देने का वादा याद दिलाते हुए अध्यक्ष बनने की इच्छा जाहिर की। बताया जा रहा है कि मीटिंग में अध्यक्ष अनिल शर्मा ने ऐसे किसी वादे से इंकार कर दिया और हर हाल में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। जिससे सर्वसम्मति से लवली सिडाना को सर्वसम्मति से अध्यक्ष नियुक्त करने की कवायद सफल नहीं हो पाई। कहा जा रहा है कि इसके कुछ दिनों बाद भी अनिल शर्मा के मान मनोव्वल का दौर चलता रहा, लेकिन ज़ब सहमति नहीं बन पाई तो मेडिकल व्यवसाईयों के एक गुट ने जिसमें ज्यादातर शहर के मुख्य व पुराने मेडिकल व्यवसायी शामिल थे, ने बैठक कर लवली सिडाना को सर्वसम्मति से अध्यक्ष बनाने की घोषणा कर दी।
इसके बाद से गुटबाजी तेज हो गई हो और अनिल शर्मा ने मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े अन्य सदस्यों के अलग धड़े के अध्यक्ष का चुनाव करवाने की घोषणा कर दी। दरअसल दूसरे गुट से जुड़े सभी सदस्य पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा के अध्यक्ष बनने पर सहमत थे। लेकिन लवली गुट को अपनी ताकत दिखाने के लिए चुनाव करवाना जरूरी हो चुका था। इसीलिए चुनाव का स्वांग रचने के लिए डमी कैंडिडेट को मैदान में उतारकर चुनाव की घोषणा की गई। इस चुनाव में विपक्षी केंडिडेट को महज 12 बोट मिलना भी इसी सेटिंग का ही परिणाम मात्र है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में चुनाव में हारा हुआ प्रत्याशी खुद को ही माला पहना रहा है जो मिलीभगत को बताने के लिए काफ़ी है। साफ है कि यह चुनाव कुछ लोगों की कुंठा को शांत करने करने का टूल मात्र था। वैसे ज्यादा बेहतर होता कि अनिल शर्मा सर्वसम्मति से दूसरे गुट के किसी वरिष्ठ सदस्य को अध्यक्ष का दायित्व सौंपकर उदाहरण पेश करते। फिर भी अगर किसी ईगो के चलते उन्हें अध्यक्ष बनना ही था तो दूसरे गुट की बैठक कर वे सर्वसम्मति से अध्यक्ष घोषित हो जाते। दोनों ही परिस्थितियों में संस्था की गरिमा कुछ हद तक बनी रहती। परन्तु श्रेष्ठता के दम्भ ने अच्छी भली संस्था की राजनीति को सड़क पर ला दिया।
बहरहाल जिस तरह की राजनीति के चलते केमिस्ट एसोसिशन दो गुटों में बंट गई है। आने वाले दिनों में दोनों गुटों मे खींचतान और देखने को मिल सकती है। लवली गुट को जहां यह एज है कि इस गुट में शहर के अधिकांश पुराने और जाने माने मेडिकल व्यवसायी जुड़े है, वहीं दूसरे गुट के मुकाबले इनकी संख्या कम होना एक ड्रा बैक भी है। ऐसे में लवली सिडाना के लिए यह बड़ी चुनौती है कि जिन सदस्यों ने उन्हें अध्यक्ष बनाया है वह उनके विश्वास पर खरा उतर कर दिखाये। दूसरी और अनिल शर्मा गुट में सदस्यों की संख्या लवली गुट के मुकाबले तिगुनी से ज्यादा है। इसके अलावा अनिल शर्मा का लंबे समय से अध्यक्ष होना व मेडिकल प्रशासन में पैठ होना उनके लिए बड़ा प्लस पॉइंट है।