एसपी डॉ.अमृता दुहन का संवाद कार्यक्रम, बेहतर पुलिसिंग का दिलाया भरोसा ! कार्यक्रम में जिम्मेदार बने पुलिस की ढाल, आम लोगों ने सिस्टम को दिखाया आइना ?

SOCIAL_ACTIVITY

सूरतगढ़। श्रीगंगानगर जिले की नई पुलिस कप्तान डॉ.अमृता दुहन बेहतर पुलिसिंग और अपराधों पर नियंत्रण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध नजर आ रही हैं। एसपी डॉ. अमृता दुहन के कार्यभार संभालने के बाद से पूरे जिले का पुलिस प्रशासन एक्टिव मोड में आ गया है। एसपी ने जिस तरह से अपना व्हाट्सएप नंबर सार्वजनिक कर आमजन को अपने आसपास के क्षेत्र में हो रहे क्राइम की सूचना देने की अपील की है, उससे उनकी संवेदनशीलता और गंभीरता भी नज़र आती है। इसके अलावा एसपी डॉ. अमृता दुहन नवाचार करते हुए आमजन के साथ संवाद भी कर रही है। इसी कड़ी में एसपी के निर्देश पर मंगलवार को सूरतगढ़ में जनसहभागिता मीटिंग का आयोजन हुआ। जिसमे एसपी आमलोगों के बीच पहुंची और उनकी पुलिस सिस्टम से जुड़ी समस्याएं सुनी। साथ ही एसपी ने सभी लोगों से बेहतर पुलिसिंग व्यवस्था बनाने के लिए सहयोग की भी अपील की। 

जिम्मेदारों ने किया निराश, सिस्टम की हकीकत बताने की बजाय बने पुलिस के पैरोकार

मंगलवार को आयोजित पुलिस जनसहभागिता मीटिंग ने क्षेत्र के लोगों के लिए एक बड़ा अवसर था। ख़ासकर उन लोगों के लिए जो पुलिसिया सिस्टम से परेशान है। ऐसे लोगों के लिए यह मीटिंग मौका था अपनी पीड़ा पुलिस कप्तान तक पहुंचाने का। मगर अफसोस की बात है कि लिजलिज़े नेताओं और चाटुकारों की वजह से यह अवसर जाया हो गया। दरअसल जिन लोगों कि जिम्मेदारी थी कि वे पुलिस की कार्यशैली, परिवादियों को मिल रही प्रताड़ना और क्षेत्र में बढ़ रहे अपराधों को लेकर पुलिस की नाकामी का कच्चा चिट्ठा एसपी के सामने रखते, वे लोग ही पूरी मीटिंग में पुलिस की ढाल बनते नज़र आये। 

          मीटिंग में जिम्मेदारों के हालात कैसे थे इसका अंदाजा आप इस बात से लगाइए कि पुलिस कप्तान ने जिस मीटिंग का आयोजन आमजन की समस्या सुनने के लिए किया था, उस मीटिंग में एक नेता को पुलिस पर इतना प्यार आया कि वे एसपी साहिबा को आमजन की बजाय पुलिस वालों की समस्याएं ही गिनाने लग गये। यह बताने में जाने क्यों युवा नेता को लाज नहीं आई कि पुलिस बहुत अच्छा काम कर रही है और नगरपालिका और रेवेन्यू प्रशासन की वजह पुलिस का समय शांति व्यवस्था बनाए रखने में जाया हो रहा है ? ठीक इसी तरह एक और युवा नेता ने भी खुद को पुलिस का वफादार साबित करने के लिए रात को 2:30 बजे भी पुलिस गश्त करने का सपना भरी सभा में सुना दिया। ये तो महज उदाहरण है। दरअसल पूरी मीटिंग में एसपी साहिबा को अपना परिचय देने और फोटो खिंचवाने की चाहत में अनेकों नेताओं और नेतियों ने गला साफ किया और एसपी साहिबा और स्थानीय पुलिस की चरणवंदना के बहाने इस महत्वपूर्ण मीटिंग का ज्यादातर समय बर्बाद कर दिया। 

         वहीं बची खुची कसर पुलिस कप्तान को सम्मानित करने के नाम पर बुलाये गये छपास रोगियों से भरे कथित सामाजिक संगठनों ने कर दी। आमजन से संवाद के लिए बुलाई गई मीटिंग में सामाजिक संस्थाओं की पुलिस कप्तान को सम्मानित करने की होड़ा होड़ी ने केवल कार्यक्रम को अव्यवस्थित कर दिया, बल्कि वास्तविक पीड़ित लोगों को पुलिस कप्तान तक पहुंचने से भी रोक दिया। 

नेताओं की जगह कुछ आम लोगों ने दिखाया एसपी को आईना

कभी क्रांतिकारियों का शहर कहे जाने वाले सूरतगढ़ में भले ही रीढ विहीन नेताओ और लोगों भरमार है। पर ऐसा भी नहीं है कि सबका जमीर मर चुका है। इसके कुछ उदाहरण एसपी की जनसहभागिता मीटिंग में भी देखने को मिले। ये लोग संख्या में जरूर कम थे लेकिन इन लोगों ने हौसला दिखाते हुए क्षेत्र की पुलिस व्यवस्था की कलई खोल कर रख दी। मीटिंग में कई बार ऐसे मौके आये ज़ब अपने आरोपों से इन लोगों ने एसपी साहिबा को ना चाहते हुए भी मातहत पुलिस ऑफीसरों के बचाव में उतरने के लिए मजबूर कर दिया। पुलिस थानों में केवल अमीर लोगों की सुनवाई होने से बड़ा आरोप और क्या होगा ?

इसी तरह से एक पूर्व पार्षद ने खुलेआम सिटी थाने के एक अधिकारी पर गाली गलौज कर बात करने का आरोप जड़ दिया। यही नहीं उस अधिकारी का नाम सार्वजनिक मंच पर बोलने का कह दिया। जिसके बाद एसपी को उसे रोकना पड़ा और उन्होंने अपने गनमैन को बुलाकर उस अधिकारी का नाम नोट करवाया। यही नहीं एसपी को थाना अधिकारियों को आमजन से अच्छा व्यवहार करने का भी निर्देश देना पड़ा।

इसी तरह से वार्ड नंबर-1 के युवा ने तो वार्ड में बिक रहे नशे को लेकर खुद एसपी साहिबा को कठघरे में ला खड़ा किया। इस युवा ने एसपी को उनके द्वारा सांझा किए गए व्हाट्सप्प नंबर पर 1 महीने में तीन बार शिकायत भेजनें के बावजूद कार्रवाई नहीं करने पर घेरा। युवा द्वारा मीटिंग में खुलेआम लगे आरोपों से संवेदनशील एसपी साहिबा भी एक बारगी असहज़ हो गयी। इस युवा ने ज़ब आगे बढ़ते हुए पुलिस की मौजूदगी में ही कह दिया कि ‘आपकी पुलिस मिली हुई है’ तो एसपी साहिबा ना चाहते हुए भी उखड़ गई और पुलिस अफसरों को टारगेट नहीं करने की बात कहते हुए युवक को पीछे होने के लिए बोल दिया। पर वास्तविकता ये थी कि युवक के आरोपों ने एसपी साहिबा को एक बारगी बैक फुट पर ला दिया। हालांकि इसके बाद उन्होंने स्थिति को संभालते हुए अपने इमोशंस पर कंट्रोल कर लोगों से संवाद जारी रखा और पूरी संज़ीदगी का परिचय देते हुए लोगों के सुझाव और उनके समस्याएं भी सुनी। 

                वैसे इस घटनाक्रम के बाद एसपी द्वारा  बोलने से रोकने पर शिकायत कर रहे युवा को भी झटका लगा क्यूंकि युवक काफ़ी उम्मीद से मीटिंग में पहुंचा था। ऊपरी तौर पर यह मामला भले ही कुछ लगे लेकिन  लगता यही है कि इस मामले में भी एसपी डॉ अमृता दुहन की मंशा गलत नहीं थी बल्कि निचले स्तर पर लापरवाही हुई। एसपी को ये गुमान नहीं था कि ये लापरवाही कुछ इस तरह से उनके सामने ऑकवर्ड सिचुएशन पैदा कर देंगी और उन्हें बचाव की मुद्रा में आना पड़ेगा।

शहर में कानून व्यवस्था को लेकर एसपी दे दिए निर्देश

मीटिंग में एसपी डॉक्टर अमृता दुहन ने नशे पर रोक लगाने, त्रिमूर्ति मंदिर क्षेत्र में पुलिस चौकी जल्द शुरू करने और चौकी शुरू नहीं होने तक हर दिन शाम को चौकी में पुरुष व महिला पुरुषकर्मियों के मौजूद रहने, मॉडिफाइड बाइक पर कड़ी कार्रवाई करने और पुलिस थानों में परिवर्दियों से बेहतर व्यवहार करने के निर्देश दिए।

            कुल मिलाकर पूरी मीटिंग के दौरान एसपी गंभीर नज़र आई और जिस संवेदनशीलता से उन्होंने समस्याओं को सुना और अधिकारियों को निर्देश दिए उससे उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले दिनों में जिले में पुलिस व्यवस्था में सुधार देखने को मिलेगा। वैसे यह भी देखना होगा कि जिला एसपी द्वारा दिए गए निर्देशों के पालना को लेकर पुलिस अधिकारी कितनी गंभीरता दिखाएंगे।

– राजेंद्र पटावरी, अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.