दोनों पार्टियों को उठाना पड़ेगा कार्यकर्ताओं की अनदेखी का नुकसान ?
सूरतगढ़। नगरपालिका चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा लगभग सभी वार्डों मे उम्मीदवार तय कर चुकी है जिनकी घोषणा अब कभी भी सम्भव है। परन्तु संभावित उम्मीदवारों के नाम की चर्चाओं के साथ ही दोनों ही पार्टियों में विरोध के स्वर पर उठने लगे हैं। भाजपा में जहां सामान्य वार्ड में आरक्षित उम्मीदवार की बजाय अन्य श्रेणी के उम्मीदवार को टिकट देने की चर्चाओं से बवाल खड़ा हो गया है वही कांग्रेस में भी दूसरी पार्टी के नेताओं को इंपोर्ट कर समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी का मुद्दा गर्म है।
हालांकि अभी दोनों ही पार्टियों ने अधिकृत रूप से टिकटों की घोषणा नहीं की है। लेकिन वार्ड में संभावित उम्मीदवारों की चर्चा से जिस तरह की खबरें आना शुरू हो गई है, वो इस बात का इशारा है कि पार्टियों ने अपना स्टैंड नहीं बदला तो संभावित प्रत्याशियों का खुलकर विरोध होना तय हैं। फिलहाल की बात करें तो भाजपा में वार्ड नंबर-30 और कांग्रेस में वार्ड नंबर-45 में पार्टी के संभावित उम्मीदवारों के नाम की चर्चा से बवाल मचा हुआ है।
सामान्य आरक्षित वार्ड-30 में ओबीसी उम्मीदवार को टिकट का विरोध ?
शहर के वार्ड नंबर-30 की बात करें तो इस वार्ड में सामान्य वर्ग के भाजपा प्रत्याशियों और समर्थकों द्वारा ओबीसी वर्ग के प्रत्याशी को टिकट देने जबरदस्त विरोध किया जा रहा है। इस वार्ड में सामान्य वर्ग की तरफ से रेवंत व्यास और सुशील तावनिया ने टिकट के लिए आवेदन किया है। जबकि ओबीसी वर्ग के कृष्ण छिम्पा और राजकुमार सेन भी भाजपा की टिकट की लाइन में है।
बुधवार से पार्टी के ओबीसी वर्ग के कृष्ण छिम्पा को टिकट कंफर्म करने की चर्चा शुरू हुई तो सामान्य वर्ग के दोनों प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने विरोध कर दिया। दोनों प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने गुरुवार को भाजपा नेता संदीप कासनिया से मिलकर भी अपना विरोध दर्ज कराया। वार्ड के लोगों ने कहा कि जब वार्ड सामान्य वर्ग के लिए खुला है तब भाजपा को सामान्य वर्ग के स्थानीय और सक्रिय कार्यकर्ता को ही प्रत्याशी बनाना चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक वार्ड में सामान्य वर्ग के किसी भी प्रत्याशी को टिकट देने पर दोनों के समर्थकों ने एक दूसरे को सहयोग देने और 40 वर्षों से लगातार वार्ड में टिकट की दावेदारी कर रहे परिवार को टिकट मिलने पर विरोध की खुली चुनौती दी है।
वार्ड-45 में इम्पोर्ट किये उम्मीदवार को कांग्रेस की टिकट का विरोध ?
भाजपा की तरह कांग्रेस में भी टिकटो को लेकर विरोध की स्वर उठने लगे हैं। पिछले कई दिनों से यह चर्चा थी कि पार्टी वार्ड नंबर-45 से आप पार्टी से जुड़े राधेश्याम उपाध्याय को उम्मीदवार बनाने जा रही है। कांग्रेस ने गुरुवार को ज़ब राधेश्याम उपाध्याय को पार्टी की सदस्यता ग्रहण करवाई। तभी से वार्ड में कांग्रेस के टिकट की दावेदारी कर रहे प्रत्याशियों द्वारा विरोध की चर्चा भी शुरू हो गई थी। अब राधेश्याम उपाध्याय के पार्टी में शामिल होने से शुरू हुए विरोध के स्वर टिकट की घोषणा के साथ कुछ दिनों में और लाउड हो सकते है।
वार्ड-45 से पार्टी की टिकट मांग रहे जगदीश गुप्ता का परिवार को पुराना कांग्रेसी परिवार है। गुप्ता लंबे समय से कांग्रेस सेवा दल से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि अगर पार्टी पुराने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर आयातित उम्मीदवारों, जिनकी निष्ठा पार्टी के प्रति हमेशा से संदिग्ध रही है को टिकट देती है, तो वे इसका जमकर विरोध करेंगे और पार्टी को इसका फल भुगतना पड़ेगा।
जीत की संभावना के बावजूद भाजपा और हार की निश्चितता के बीच कांग्रेस के निर्णय से उठ रहे सवाल ?
वार्ड नंबर-30 की बात करें तो यह वार्ड पूरी तरह से भाजपा समर्थित है। इस वार्ड में भाजपा की जीत इसलिए भी कंफर्म मानी जा सकती है कि वार्ड में अब तक कांग्रेस कोई उम्मीदवार तय नहीं कर पाई है। कांग्रेस के किसी भी संभावित उम्मीदवार ने वार्ड में कैंपेन स्टार्ट नहीं किया है। ऐसे में भाजपा सामान्य वर्ग के किसी भी व्यक्ति को टिकट देती तब भी उसकी भी जीत तय थी। इसके बावजूद भाजपा द्वारा पार्टी के लिए समर्पित सामान्य वर्ग की अनदेखी कर पुरानी लीक पीटना हर किसी को अखर रहा है।
वैसे इस प्रकरण में टिकट वितरण कमेटी में शामिल पार्टी के सामान्य वर्ग के नेताओं का लिजलीजा रवैया भी अखरने वाला है। कमेटी में शामिल सामान्य वर्ग कोई भी नेता इतना जिगरा नहीं दिखा पाया कि सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित वार्डों में अपने वर्ग लोगों की टिकट के लिए आवाज उठा पाता। सच तो ये है कि सामान्य वर्ग की पैरवी का दम्भ भरने वाले नेताओं की रीढ़ में पानी भर चुका है। जिनसे उसूलों के लिए खड़े होने की उम्मीद करना बेमानी है !
दूसरी और वार्ड नंबर-45 में कांग्रेस के स्टैंड की बात करें तो पार्टी द्वारा राधेश्याम उपाध्याय को टिकट देने का संभावित निर्णय भी सवालों के घेरे में है। भाजपा डोमिनटेड इस वार्ड में कांग्रेस फिलहाल बैक फुट पर है। पार्टी अगर राधेश्याम उपाध्याय को टिकट भी देती है तो परिणाम बहुत ज्यादा बदलते नज़र नहीं आते। ऐसे में बेहतर होता कि पार्टी वार्ड के ही कांग्रेस का वर्षों तक झंडा उठाने वाले किसी आम कार्यकर्ता को टिकट देती। ऐसे व्यक्ति को टिकट देकर पार्टी कुछ हद तक उस अहसान को उतार सकती है जो उस कार्यकर्ता ने वर्षों तक पार्टी का झंडा उठाकर किया है। अभी भी कांग्रेस के जिम्मेदार नेताओं के पास वक्त है कि उन सीटों पर जहां पर जीत का गणित उनके पक्ष में नहीं है पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को मौका दें। जिससे की पार्टी भले ही हारे लेकिन कार्यकर्ताओं की उम्मीद अपने नेतृत्व के प्रति ज़िंदा रहे।
यूज एंड थ्रो के फॉर्मूले पर राजनीतिक पार्टियों !, कार्यकर्ताओं की भावनाओ से खिलवाड़ ?
सामान्य वर्ग के आरक्षित वार्ड में अन्य वर्ग के उम्मीदवारों को टिकट नहीं देगी ! चुनाव की घोषणा के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कांग्रेस व भाजपा के इस तरह के दावों पर चर्चाएं शुरू हुई तो आमतौर पर चुनाव से दूर रहने वाला सामान्य वर्ग भी टिकट की उम्मीद में सक्रिय हो गया। सामान्य वर्ग की इन्ही भावनाओं को देखते हुए आरक्षण समता आंदोलन मंच ने भी टिकट वितरण की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही दोनों पार्टियों के पर्यवेक्षकों और संबंधित मंडल अध्यक्षों को ज्ञापन सौंपकर यह मांग रखी। नेताओं ने समिति को आश्वासन भी दिए।
लेकिन जैसा कहा जाता है कि नेताओं की याददाश्त कम होती है। ज्योंही ही टिकटों की घोषणा का वक्त आया इन नेताओं ने सामान्य वर्ग के आरक्षण को दरकिनार कर कई वार्डों में दूसरे वर्ग के उम्मीदवारों को टिकट देने की तैयारी शुरू कर दी है। इन दोनों मामलों से यह तो साफ हो गया है कि राजनितिक पार्टियां यूज एंड थ्रो के फॉर्मूले पर काम करती है। जब तक कार्यकर्ताओं से काम लेना होता है तो वे उन्हें सर पर उठाए फिरती है और ज़ब कार्यकर्ता उनसे उम्मीद करता है तो वे उन्हें ठेंगा दिखा देती है।
चुनाव में जीत हासिल करना किसी भी पार्टी के लिए प्राथमिकता होती है और उसके लिए कुछ हद तक उसूलों से कंप्रोमाइज किया भी जा सकता है। लेकिन इन दोनों वार्डों की तरह जिन सीटों पर जीत हार का समीकरण टिकट से बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं होता है। वहां पार्टियों को ऐसे निर्णय लेने से पहले कार्यकर्ताओं की भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए।
दोनों पार्टियों के लिए विचार का वक्त ? समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी पड़ेगी भारी !
कुल मिलाकर वार्ड -30 में सामान्य वर्ग के अधिकारों की अनदेखी कर भाजपा दशकों से वार्ड की एकछत्र राजनीति करने वाले ओबीसी परिवार को टिकट देती है तो यह कहीं ना कहीं सामान्य वर्ग के प्रत्याशियों की आकांक्षा पर कुठाराघात है। इसके अलावा यह निर्णय भाजपा की जड़ो को सींचने वाले सामान्य वर्ग की उन भावनाओं के खिलाफ भी है। जो राजनीति में अपनी वाजिब हिस्सेदारी की उम्मीद भारतीय जनता पार्टी से कर रहा है। इस प्रकरण में पार्टी के निर्णय पर सामान्य वर्ग की प्रतिक्रिया नाराजगी के रूप में दिखना लाजिमी है। बेहतर होगा जिम्मेदार नेता अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे।
दूसरी और कांग्रेस नेताओं खासकर विधायक डूंगरराम गेदर को इस प्रकरण पर गंभीरता से विचार कर निर्णय लेना चाहिए। क्योंकि आयातित उम्मीदवारों को आमतौर पर जनता स्वीकार नहीं करती है और जब आयातित चेहरे अपनी कार्यशैली को लेकर पहले से विवादित रहे हो तो उनकी स्वीकार्यता की संभावना न के बराबर ही है।
– राजेंद्र पटावरी, पूर्व अध्यक्ष-प्रेस क्लब, सूरतगढ़।

सामान्य सीट पर सामान्य वर्ग को ही सीट दी जानी चाहिए